UP News: मांगा सिंदूर मिली मौत

UP News: रचना की मांग में सिंदूर भले ही पति शिवराज के नाम का होता था, लेकिन वह प्रेमी संजय पटेल को ही पति मानती थी. वह प्रेमी के लिए तनमन से पूरी तरह समर्पित थी. पति शिवराज की मौत के बाद रचना ने संजय पर शादी का दबाव डाला तो ऐसी घटना घटी, जिस की किसी ने कल्पना तक नहीं की थी…

संजय के लिए रचना से विवाह रचाना नामुमकिन था. वह गांव का पूर्वप्रधान था. गांव में उस की प्रतिष्ठा थी. रचना से विवाह कर वह अपनी मानमर्यादा को मिट्टी में नहीं मिलाना चाहता था, अत: उस ने रचना से पीछा छुड़ाने की सोची. मन में यह विचार आते ही संजय को रिश्ते के भतीजे संदीप पटेल व उस के दोस्त प्रदीप अहिरवार की सुध आई. दोनों अपराधी प्रवृत्ति के थे. एक शाम संजय ने भतीजे संदीप और उस के दोस्त प्रदीप अहिरवार से मुलाकात कर रचना से छुटकारा दिलाने में मदद की गुहार की.

रुपयों के लालच में वे दोनों राजी हो गए. इस के बाद संजय ने संदीप व प्रदीप की मदद से रचना की हत्या करने व उस की लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. संजय ने रचना की मौत का सौदा एक लाख रुपए में किया और प्रदीप को 15 हजार रुपए पेशगी दे दी. शेष रकम काम होने के बाद देने का वादा किया. 13 अगस्त, 2025 की दोपहर झांसी जनपद के थाना टोड़ी फतेहपुर के किशोरपुरा गांव निवासी विनोद पटेल पशुओं का चारा काटने अपने महेबा रोड स्थित खेत पर पहुंचा. वहां खेत किनारे बने कुएं से तेज बदबू आ रही थी. उस ने कुएं में झांक कर देखा तो कुएं के पानी में 2 बोरियां तैर रही थीं.

विनोद ने अपने खेत के कुएं में पड़ी 2 बोरियों से तेज बदबू आने की सूचना थाना टोड़ी फतेहपुर पुलिस को दे दी. सूचना पाते ही एसएचओ अतुल कुमार राजपूत पुलिस बल के साथ किशोरपुरा गांव के बाहर स्थित विनोद के कुएं पर जा पहुंचे. उस समय वहां ग्रामीणों की भीड़ जुटी थी. एसएचओ अतुल कुमार राजपूत ने पुलिसकर्मियों व ग्रामीणों की मदद से दोनों बोरियों को कुएं से बाहर निकलवाया. बोरियां खोली गईं तो सभी ने दांतों तले अंगुली दबा ली. प्लास्टिक की एक बोरी में महिला की लाश का गरदन से ले कर कमर तक का हिस्सा था, जबकि दूसरी बोरी में कमर से ले कर जांघ तक का हिस्सा था.

इस के बाद कुएं को खाली कराया गया तो उस में एक बोरी और मिली, जिस में कटा हुआ एक हाथ था. कलाई में लाल रंग का धागा बंधा हुआ था. महिला का सिर और पैर अब भी नहीं मिले थे. बिना सिर के लाश की शिनाख्त होनी मुश्किल थी. बोरियों में शव के टुकड़ों के साथ ईंटपत्थर भी भरे गए थे, ताकि बोरियां पानी में उतरा न सकें. इंसपेक्टर अतुल कुमार ने टुकड़ों में विभाजित महिला की लाश मिलने की सूचना पुलिस के आला अधिकारियों को दी तो कुछ देर बाद ही एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति, एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार तथा सीओ (सिटी) अनिल कुमार राय घटनास्थल आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने मृतका के अन्य अंगों की खोज में पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन सफलता नहीं मिली तो बरामद अंगों को पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल झांसी भेज दिया. 72 घंटे बाद भी शव की शिनाख्त न होने पर उन का पोस्टमार्टम करा कर पुलिस ने अज्ञात में दाह संस्कार कर दिया गया. एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति ने महिला के इस ब्लाइंड मर्डर को बड़ी गंभीरता से लिया और उस की शिनाख्त व हत्याकांड के खुलासे के लिए एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार व सीओ अनिल कुमार की देखरेख में 18 टीमें गठित कीं.

टीम में टोड़ी फतेहपुर थाने के एसएचओ अतुल राजपूत, स्वाट प्रभारी जितेंद्र तक्खर, सर्विलांस टीम से दुर्गेश कुमार, रजनीश तथा तेजतर्रार दरोगा रजत सिंह, शैलेंद्र, हर्षित आदि को शामिल किया गया. टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने आंगनबाड़ी गु्रप, ग्राम पंचायत गु्रप, आशा वर्कर तथा राशन कोटेदारों का भी सहयोग लिया. 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले. इतनी मशक्कत के बाद भी शव की पहचान नहीं हो पाई. अब तक यह मामला डीआईजी (झांसी रेंज) केशव चौधरी के संज्ञान में भी आ गया था. अत: उन्होंने इस ब्लाइंड मर्डर केस को जल्द से जल्द खोलने व हत्यारों को पकडऩे का आदेश एसपी व एसएसपी को दिया. इस आदेश के बाद पुलिस और भी सक्रिय हो गई.

इधर एसपी (ग्रामीण) की टीम भी जांच में जुटी थी. शव के टुकड़े जिन बोरियों में पाए गए थे, वे खाद की बोरियां थीं. उन पर कृभको लिखा था, लेकिन कोड नंबर साफ नजर नहीं आ रहा था. टीम यह जानना चाहती थी कि बोरी किस सहकारी समिति से खरीदी गईं और यह किस गांव के किसान ने खरीदी थीं. जांच के लिए टीम ने खाद की कई सहकारी समितियों से संपर्क किया, लेकिन कोड नंबर स्पष्ट न होने से कोई खास जानकारी हासिल न हो सकी. टीम ने बोरी से बरामद ईंट की मिट्टी का भी परीक्षण कराया तो जांच में टोड़ी फतेहपुर की मिट्टी पाई गई. जांच से यह बात स्पष्ट हो गई कि महिला टोड़ी फतेहपुर क्षेत्र के ही किसी गांव की हो सकती है.

इसी बीच मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के थाना चंदेरा के मैलवारा गांव निवासी दीपक यादव को किसी महिला के कटे अंग मिलने की खबर लगी. उस की बहन रचना भी 8 दिनों से गायब थी. 19 अगस्त, 2025 की सुबह 10 बजे दीपक यादव गांव के सरपंच मोनू यादव के साथ थाना टोड़ी फतेहपुर पहुंचा. उस ने इंसपेक्टर अतुल राजपूत को बताया कि उस की बहन रचना यादव इसी थाना क्षेत्र के महेबा गांव निवासी शिवराज यादव को ब्याही थी. शिवराज की मौत हो चुकी है.

इन दिनों रचना महेबा गांव के ही पूर्वप्रधान संजय पटेल के साथ लिवइन रिलेशन में रह रही थी. 8 अगस्त को उस ने रचना से बात करने की कोशिश की थी. वह किसी अस्पताल में भरती थी. बात करने के दौरान पूर्वप्रधान संजय पटेल ने रचना के हाथ से मोबाइल फोन छीन लिया और मुझे धमकाया कि फोन मत किया करो. 2 रोज बाद फोन किया तो संजय बोला कि मैं ने तेरी बहन को मार डाला है. यह सुन कर उसे लगा कि वह गुस्से व नशे में बात कर रहा है. लेकिन अब लग रहा है कि संजय पटेल ने उसे सचमुच मार डाला है. आप सच्चाई का पता लगाइए. दीपक यादव की बात सुन कर एसएचओ अतुल राजपूत ने रचना का फोन नंबर सर्विलांस पर लगाया. इस से पता चला कि रचना और पूर्वप्रधान संजय के बीच बातचीत होती रहती थी.

इस के बाद पुलिस टीम महेबा गांव पहुंची. वहां ग्रामीणों से पता चला कि रचना और पूर्व ग्राम प्रधान संजय के बीच अफेयर है. अब रचना लापता है. पुलिस टीम ने 20 अगस्त की रात नाटकीय ढंग से संजय पटेल व उस के भतीजे संदीप को टोड़ी फतेहपुर क्षेत्र के लखेरी बांध के पास से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ करने पर उन्होंने रचना की हत्या करने का अपराध स्वीकार कर लिया. संजय की निशानदेही पर पुलिस टीम ने हत्या में प्रयुक्त कार व मृतका रचना का मोबाइल फोन भी संजय के घर से बरामद कर लिया. संजय पटेल व संदीप को थाने लाया गया. थाने में जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि उस ने अपने भतीजे संदीप व उस के दोस्त प्रदीप के साथ मिल कर रचना की हत्या की थी. फिर उस ने शव के 7 टुकड़े कर 4 बोरियों में भरे थे. 3 बोरियां कुएं में फेंक दी थी तथा चौथी बोरी लखेरी नदी में डाल दी थी.

संजय व संदीप की निशानदेही पर पुलिस ने लखेरी नदी में नाव से सर्च औपरेशन चलाया और रचना का सिर, पैर व एक हाथ भी बरामद कर लिया. ये अंग भी बोरी में भरे गए थे. बरामद अंगों को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए झांसी के जिला अस्पताल भेज दिया. अभी तक पुलिस टीम ने 2 आरोपियों को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन तीसरा आरोपी प्रदीप अहिरवार फरार था. 21 अगस्त, 2025 की रात 10 बजे पुलिस टीम ने एक मुठभेड़ के बाद प्रदीप अहिरवार को भी गिरफ्तार कर लिया. मुठभेड़ के दौरान उस के पैर में गोली लगी थी. कातिलों के पकड़े जाने के बाद डीआईजी केशव कुमार चौधरी, एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति तथा एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार ने झांसी पुलिस सभागार में एक संयुक्त प्रैस कौन्फ्रैंस कर रचना यादव हत्याकांड का खुलासा किया.

कातिलों को पकडऩे वाली पुलिस टीम पर आला कमान अधिकारियों ने इनामों की खूब बौछार की. डीआईजी केशव चौधरी ने टीम को 50 हजार रुपए नकद इनाम देने की घोषणा की. एसएसपी ने 20 हजार रुपए नकद पुलिस टीम को दिया. वहीं एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार ने भी 20 हजार रुपए नकद पुलिस टीम को पुरस्कार के रूप में दिए. चूकि कातिलों ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और आलाकत्ल भी बरामद करा दिया था, अत: एसएचओ अतुल राजपूत ने मृतका रचना के भाई दीपक यादव की तरफ से बीएनएस की धारा 103(1) तथा 201(3)(5) के तहत संजय पटेल, संदीप पटेल तथा प्रदीप अहिरवार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

रचना कौन थी? वह संजय पटेल के संपर्क में कैसे आई? संजय ने उस की हत्या क्यों और कैसे कराई? यह सब जानने के लिए रचना के अतीत की ओर झांकना होगा. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के चंदेरा थाना अंतर्गत एक गांव है मैलवारा. इसी गांव में फूलसिंह यादव सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी लौंगश्री के अलावा एक बेटा दीपक तथा बेटी रचना थी. फूलसिंह प्राइवेट नौकरी करता था. फूलसिंह की बेटी रचना खूबसूरत थी. 16 बसंत पार करने के बाद जब उस ने जवानी की डगर पर पैर रखा तो उस की खूबसूरती में और भी निखार आ गया. जो भी उसे देखता, मंत्रमुग्ध हो जाता. रचना खूबसूरत तो थी, लेकिन पढ़ाई में उस का मन नहीं था. जैसेतैसे कर के उस ने दसवीं की परीक्षा पास की फिर घर के काम में मम्मी का हाथ बंटाने लगी.

फूल सिंह ने रचना की शादी टीकमगढ़ शहर के मोहल्ला सलियाना में रहने वाले जयकरन यादव से कर दी. वह तहसील में काम करता था. उस के 2 अन्य भाई थे, जो पन्ना शहर में नौकरी करते थे. शादी के बाद ससुराल में रचना के हंसीखुशी से 5 साल बीत गए. इस बीच वह 2 बेटियों की मां बन गई. बेटियों के जन्म के बाद जब खर्च बढ़ा तो घर में आर्थिक परेशानी रहने लगी. घर खर्च को ले कर रचना व जयकरन के बीच झगड़ा होने लगा. धीरेधीरे पतिपत्नी के बीच इतना मनमुटाव बढ़ गया कि रचना अपनी दोनों मासूम बेटियों को पति के हवाले कर मायके में आ कर रहने लगी.

मायके में कुछ समय तो उस का ठीक से बीता, उस के बाद घरपरिवार के लोगों के ताने मिलने लगे. भाई दीपक को भी रचना का ससुराल छोड़ कर मायके में रहना नागवार लगता था. गांव में उस की बदनामी होने लगी थी. घरपरिवार के तानों से परेशान रचना ने जैसेतैसे 2 साल मायके में बिताए. उस के बाद एक रिश्तेदार के माध्यम से रचना ने शिवराज यादव से विवाह कर लिया. शिवराज यादव झांसी जनपद के थाना टोड़ी फतेहपुर के गांव महेबा का रहने वाला था. वह किसान था. उस के पास 10 बीघा उपजाऊ भूमि थी. वह अपने बड़े भाई रघुराज के साथ रहता था.

शादी रचाने के बाद रचना अपने दूसरे पति शिवराज के साथ महेबा गांव में रहने लगी. रचना स्वच्छंद स्वभाव की थी. उसे घूंघट में रहना पसंद न था, अत: वह न जेठ से परदा करती थी और न ही बड़ीबुजुर्ग महिलाओं से. उस की अपनी जेठानी से भी नहीं पटती थी. घरेलू कामकाज को ले कर दोनों में अकसर तूतूमैंमैं होती रहती थी. रचना को संयुक्त परिवार में रहना पसंद न था, अत: वह पति पर अलग रहने का दबाव बनाने लगी. घर और जमीन के बंटवारे को ले कर रचना और शिवराज के बीच मनमुटाव शुरू हो गया. दोनों के बीच झगड़ा व मारपीट होने लगी. बंटवारे को ले कर रचना की कहासुनी जेठजेठानी से भी होने लगी.

अत: उस ने जेठ रघुराज पर इलजाम लगाना शुरू कर दिया कि वह उस पर बुरी नजर रखता है. 25 मई, 2023 की शाम रेप हत्या के इलजाम को ले कर रचना का जेठजेठानी व पति से झगड़ा हुआ. तीनों ने मिल कर रचना की जम कर पिटाई की. इस पिटाई ने आग में घी डालने जैसा काम किया. सुबह होते ही रचना थाना टोड़ी फतेहपुर में जेठ व पति के खिलाफ रेप व हत्या की कोशिश करने की रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने रचना के जेठ रघुराज व पति शिवराज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. इस घटना के बाद रचना का ससुराल में रहना संभव न था, अत: वह एक बार फिर मायके आ गई. उस ने अपने भाई दीपक के सामने आंसू बहाए तो उस ने बहन को घर में शरण दे दी.

रचना के रेप व हत्या के प्रयास का मामला झांसी के गरौठा कोर्ट में शुरू हो चुका था. केस की पैरवी हेतु रचना को कोर्ट आना पड़ता था. गरौठा कोर्ट आतेजाते ही एक रोज रचना की मुलाकात संजय पटेल से हुई. दोनों एकदूसरे को पहले से ही जानते थे. जिस महेबा गांव में रचना की ससुराल थी, संजय पटेल भी उसी गांव का रहने वाला था. वह गांव का प्रधान भी रह चुका था. रचना और संजय की दोस्ती हो गई. दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई. संजय अब रचना के केस की पैरवी करने लगा और उस की आर्थिक मदद भी करने लगा.

संजय नहीं चाहता था कि उस की प्रेमिका रचना उस से दूर मायके में रहे, अत: उस ने झांसी के गुरदासपुर में एक मकान किराए पर लिया और रचना को इस मकान में शिफ्ट कर दिया. संजय ने मकान में सारी सुविधाएं भी मुहैया करा दीं. इस के बाद रचना और संजय इस किराए के मकान में लिवइन रिलेशन में रहने लगे. रचना जो भी डिमांड करती, संजय उस डिमांड को पूरी करता. उस ने गहनोंकपड़ों से रचना को लाद दिया था. लाखों रुपए नकद भी दे चुका था. संजय पटेल शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप था. बड़ा बेटा 20 वर्ष की उम्र पार कर चुका था, लेकिन रचना से नाजायज रिश्ता जोडऩे के बाद उसे अपनी पत्नी ममता फीकी लगने लगी थी.

ममता को जब पता चला कि पति संजय व गांव के शिवराज की पत्नी रचना के बीच नाजायज रिश्ता है तो उसे अपना व बच्चों का भविष्य अंधकारमय लगने लगा. उस ने दोनों के नाजायज संबंधों का जम कर विरोध किया. घर में कलह मचाई, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई. संजय और रचना के संबंध आम हो गए थे. शिवराज यादव को जब पत्नी रचना के नाजायज संबंधों की जानकारी हुई तो उस ने माथा पीट लिया. वह पहले भी उस के परिवार को बदनाम कर चुकी थी, लेकिन अब तो उस ने हद ही कर दी थी. पत्नी के कृत्य से वह इतना टूट गया कि बीमार पड़ गया. जून, 2025 की 10 तारीख को उस की बीमारी के चलते मौत हो गई.

पति की मौत के बाद रचना विधवा हो गई, लेकिन रचना को विधवा कहलाना तथा विधवा का जीवन बिताना मंजूर नहीं था. एक शाम संजय पटेल अपनी प्रेमिका रचना से मिलने आया तो वह उदास बैठी थी. संजय ने उदासी का कारण पूछा तो वह बोली, ”संजय, तुम्हें तो पता ही है कि मैं विधवा हो गई हूं. लोग मुझे विधवा की नजर से देखें, यह मुझे पसंद नहीं है.’’

”तो तुम चाहती क्या हो?’’ संजय ने रचना से पूछा.

रचना बोली, ”संजय, तुम मेरी मांग में सिंदूर भर कर मुझे अपनी पत्नी बना लो. शेष जीवन मैं तुम्हारी पत्नी बन कर तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूं.’’

रचना की बात सुन कर संजय को लगा कि जैसे उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई हो. वह असमंजस की स्थिति में बोला, ”रचना, मैं कपड़ा, गहना, रुपयापैसा जैसी तुम्हारी हर डिमांड को पूरा कर रहा हूं. फिर यह सिंदूर जैसी अटपटी डिमांड क्यों?’’

रचना तुनक कर बोली, ”तुम्हें मेरी डिमांड अटपटी लग रही है. औरत का सब से कीमती गहना उस का सिंदूर होता है. वही मैं तुम से मांग रही हूं. सिंदूर के आगे बाकी सारी सुविधाएं फीकी हैं.’’

”रचना, मैं शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप हूं. तुम्हारी मांग में सिंदूर भर कर मैं अपनी पत्नी से विश्वासघात नहीं कर सकता.’’ संजय ने समझाया.

”जब मेरे साथ रात बिताते हो, मेरे शरीर को रौंदते हो, तब तुम पत्नी के साथ विश्वासघात नहीं करते. सिंदूर की मांग की तो मुझे विश्वासघात का पाठ पढ़ा रहे हो. मैं तुम्हारी कोई बात नहीं सुनूंगी. तुम्हें मेरी मांग में सिंदूर भर कर पत्नी का दरजा देना ही होगा.’’

इस के बाद तो आए दिन सिंदूर की बात को ले कर रचना और संजय में तकरार होने लगी. संजय जब भी रचना से मिलने जाता, वह मांग में सिंदूर भरने और पत्नी का दरजा देने का दबाव बनाती. रचना अब उसे ब्लैकमेल करने पर उतर आई थी. रचना ने शादी की जिद पकड़ी तो संजय घबरा उठा. उस ने रचना को बहुत समझाया, लेकिन जब वह नहीं मानी तो उस ने रचना को खत्म करने का निश्चय किया. इस के लिए उस ने भतीजे संदीप व उस के दोस्त प्रदीप अहिरवार को चुना. दोनों अपराधी प्रवृत्ति के थे.

संदीप झांसी के बिजौली कस्बे में रहता था और एक फैक्ट्री में काम करता था. साल 2022 में उस ने एक महिला की हत्या की थी. हत्या के मामले में वह जेल गया था, जेल में ही संदीप की दोस्ती प्रदीप से हुई थी. प्रदीप अहिरवार मूलरूप से झांसी के थाना गरौंठा के गांव पसौरा का रहने वाला था, लेकिन मऊरानीपुर में किराए पर रहता था. वह आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहता था. संजय पटेल ने संदीप व प्रदीप अहिरवार से संपर्क कर रचना की मौत का सौदा किया. फिर हत्या करने व लाश को ठिकाने लगाने तथा किसी भी सूरत में पकड़े न जाने का प्लान बनाया.

संजय व उस के साथी रचना की हत्या करते, उस के पहले ही रचना 6 अगस्त, 2025 को बीमार पड़ गई. संजय ने उसे झांसी के प्राइवेट अस्पताल रामराजा में भरती कराया. रचना को ब्लीडिंग हो रही थी. 2 दिन में रचना ठीक हो गई. 8 अगस्त को संजय उसे डिस्चार्ज करा कर घर लाने पहुंचा तो वह बोली, ”यहीं से कोर्ट चलो. शादी करने के बाद ही घर में जाएंगे.’’ संजय ने उसे समझाया, लेकिन वह मान नहीं रही थी. संजय ने तब रचना को ठिकाने लगाने की ठान ली. उस ने संदीप से बात की और उसे अस्पताल बुला लिया. संदीप ने तब दोस्त प्रदीप से बात की और उसे तैयार रहने को कहा. उस ने तेजधार वाली कुल्हाड़ी का इंतजाम करने की भी बात प्रदीप से कही.

सब कुछ तय होने के बाद संजय ने रचना को 9 अगस्त, 2025 की शाम 5 बजे अस्पताल से डिस्चार्ज कराया. हालांकि वह डिस्चार्ज होने से मना कर रही थी, लेकिन जब संजय ने दूसरे रोज 10 अगस्त को शादी करने का वचन दिया तो वह मान गई. संजय की कार अस्पताल के बाहर ही खड़ी थी. वह कार की पीछे की सीट पर बैठ गई. उस के बगल में संजय भी बैठ गया. संदीप कार ले कर हाइवे पर आया तो संजय बोला, ”रचना, तुम इतने दिन अस्पताल में रही, तुम्हारा मन खराब हो गया होगा. थोड़ा घूम कर आते हैं.’’

लगभग एक घंटा सफर के बाद संजय मऊरानीपुर हाइवे पहुंचा. यहां प्रदीप अहिरवार उस का पहले से इंतजार कर रहा था. उस ने प्लास्टिक बोरी में लिपटी कुल्हाड़ी कार की डिक्की में रखी. फिर आगे की सीट पर संदीप के बगल में आ कर बैठ गया. इस के बाद यह लोग घूमते रहे. एक जगह रुक कर संजय ने शराब खरीदी और तीनों ने मिल कर कार के अंदर ही शराब पी. घूमते हुए सभी लहचूरा बांध पर कार ले कर पहुंचे. अब तक अंधेरा हो गया था. वहां सन्नाटा छाया था. प्रदीप कार में बैठी रचना से बोला, ”भाभी, तुम कितनी भी जिद कर लो, लेकिन संजय भैया तुम से शादी नहीं करेंगे.’’

इतना सुनते ही रचना भड़क गई और प्रदीप से बोली, ”तुम कौन होते हो यह सब कहने वाले?’’

रचना ने संजय से पूछा तो उस ने भी कह दिया कि प्रदीप ठीक बोल रहा है. वह उस से शादी नहीं कर सकता. तब रचना गुस्से से बोली, ”मैं क्या सिर्फ मजे लेने के लिए हूं. शहर वापस चलो. तुम सब को देख लूंगी. सब के दिमाग ठिकाने लग जाएंगे.’’

रचना की धमकी सुनते ही संदीप व प्रदीप ने उसे दबोच लिया और संजय ने कार में ही गला घोंट कर रचना को मार डाला. शव में पत्थर बांध कर लहचूरा डैम में फेंकने गए तो वहां पुलिस की गाड़ी खड़ी थी. कार में लाश थी, इसलिए तीनों वहां से भाग निकले. फिर वह लाश फेंकने खजूरी नदी पहुंचे, लेकिन वहां गार्ड था, इसलिए शव को नहीं फेंक सके. आधी रात को संजय साथियों के साथ किशोरपुरा गांव पहुंचा. गांव के बाहर सड़क किनारे उस ने कार रोकी. यहां खेत के पास कुआं था. तीनों ने मिल कर रचना के शव को कार से निकाला और कुएं में फेंकने को ले आए. लेकिन यहां से संजय का गांव महेबा मात्र 5 किलोमीटर दूर था, जिस से शव की पहचान हो सकती थी. अत: उन्होंने समूचा शव कुएं में नहीं फेंका.

शातिर अपराधी प्रदीप कार से कुल्हाड़ी ले आया, फिर रचना के शव के 7 टुकड़े किए. शव के अंगों को 4 बोरियों में भरा गया. बोरियां पानी में न उतराएं, इस के लिए बोरियों में ईंटपत्थर भी भर दिए. फिर बोरियों का मुंह बांध कर 3 बोरियां कुएं में फेंक दीं और चौथी बोरी जिस में सिर व पैर थे, कार में रख कर वहां से 7 किलोमीटर दूर रेवन गांव के पास लखेरी नदी के पुल पर आए. इस के बाद पुल के नीचे नदी में बोरी फेंक दी. शव को ठिकाने लगाने के बाद संजय ने कार से प्रदीप को मऊरानीपुर तथा संदीप को विजौली पहुंचाया, फिर खुद कार ले कर अपने गांव महेबा आ गया.

संजय को विश्वास था कि उस का अपराध उजागर नहीं होगा, लेकिन यह उस की भूल थी. भीषण बरसात के कारण कुएं का जलस्तर बढ़ा तो बोरियां उतराने लगीं. 13 अगस्त, 2025 की दोपहर किशोरपुरा गांव का विनोद पटेल चारा काटने खेत पर गया तो कुएं में बोरियां उतराती दिखीं और उन से दुर्गंध भी आ रही थी. उस ने सूचना पुलिस को दी. पूछताछ करने के बाद 23 अगस्त, 2025 को पुलिस ने आरोपी संजय पटेल, संदीप पटेल तथा प्रदीप अहिरवार को झांसी कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. UP New

 

Crime News in Hindi : 18 टुकड़ो में मिली लाश का रहस्य

Crime News in Hindi : टुकड़ों में बरामद लाश की पहचान करना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर होती है. ऐसा ही एक मामला राजधानी दिल्ली में आया. हत्यारे ने लाश के 1-2, नहीं बल्कि 18 टुकड़े कर दिए थे. जानिए हत्यारे की क्रूरता की कहानी…

उत्तरपश्चिमी दिल्ली में मोहन गार्डन थाने के प्रभारी राजेश मौर्या को 72 साल की वृद्धा के लापता होने की शिकायत मिली थी. शिकायतकर्ता मोहन गार्डन में ही रामा गार्डन के रहने वाले ग्रोवर दंपति थे. वे किराए के मकान में रहते थे. लापता कविता ग्रोवर मनीष ग्रोवर की मां और मेघा की सास थीं. थानाप्रभारी ने मामले को आए दिन की सामान्य घटना मानते हुए समझाया कि उन की मां यहीं कहीं आसपास गई होंगी, आ जाएंगी. साथ ही सुझाव भी दिए कि वह अपने रिश्तेदारी या जानपहचान में पता कर लें. शायद वहीं मिल जाएं! फिर भी उन्होंने मनीष की तसल्ली के लिए पूछ लिया कि उन से या घर में किसी दूसरे सदस्य के साथ मां की हालफिलहाल में कोई कहासुनी तो नहीं हुई?

मनीष ने ऐसी किसी भी बात से इनकार कर दिया. लेकिन मौर्या की निगाह जब खामोश बैठी मेघा पर गई तो उन्हें थोड़ा अजीब लगा. उन्होंने मेघा की ओर सवालिया नजरों से देखा. मेघा झट से बोल पड़ी, ‘‘सर, जब से मैं ब्याह कर आई हूं, तब से कभी भी मैं ने सास से ऊंची आवाज में बात नहीं की. सासूमां भी मुझे बेटी की तरह मानती थीं. वह बिना बताए ऐसे कहीं नहीं जाती थीं.’’

‘‘आप लोगों को ऐसा क्यों लग रहा है कि कविता ग्रोवर गायब हो गई हैं? मुझे थोड़ा और विस्तार से बताइए.’’ मौर्या ने कहा.

‘‘सर, हम लोग एक मौत की खबर पा कर 30 जून को सिरसा चले गए थे. वहां से जब 3 जुलाई को लौटे तब घर में ताला लगा मिला. हम ने पति के पास की दूसरी चाबी से ताला खोला. पहले तो हम ने सोचा सासूमां इधरउधर कहीं पड़ोस में गई होंगी. थोड़ी देर में आ जाएंगी. लेकिन…’’

मेघा बोल ही रही थी कि बीच में मनीष बोलने लगे, ‘‘एक पड़ोसी ने बताया कि घर में 2 दिनों से ताला लगा हुआ था. उस के बाद से ही हमें चिंता हो गई. हम ने उन की आसपास तलाश भी की.’’

‘‘ठीक है, आप लोग गुमशुदगी की सूचना दर्ज करवा दीजिए.’’ राजेश मौर्य ने कहा. मनीष ने सूचना लिखवाने के बाद साथ लाई मां की एक फोटो भी दी और वापस अपने घर आ गया. पुलिस ने काररवाई शुरू करते हुए गुमशुदा कविता ग्रोवर की तसवीर सभी थानों में भिजवा दी. वृद्धा की तलाश तेजी से जारी थी. 4 दिन गुजर गए थे, फिर भी कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था. मौर्या परेशान थे. पांचवें दिन 8 जुलाई को उन्हें मेघा का फोन आया. उन्हें लगा मेघा उन से फिर से अपनी सासूमां की तलाश नहीं हो पाने की शिकायत करेंगी. लेकिन मेघा ने उन्हें फ्लैट में ही कविता ग्रोवर के बारे में कुछ सुराग मिलने की जानकारी दी.

यह सुन कर थानाप्रभारी भागेभागे मनीष के घर आ गए. अपने साथ एसआई अनिल कुमार और हैडकांस्टेबल रतनलाल को भी ले गए थे. मनीष बिल्डिंग में थर्ड फ्लोर पर रहता था. वे मेघा के साथ कविता के रहने के कमरे में गए. वहां एक पलंग, एक अलमारी और बैठने के लिए 2 आरामदायक कुरसियां थीं.

‘‘कमरे के सामान को हम ने जरा भी छेड़ा नहीं है. आज जब मैं ने कमरे के बिस्तर को ध्यान से देखा. तब मुझे बिस्तर की चादर काफी सिमटी दिखी. उसे देख कर मैं कह सकती हूं कि सासूमां रात भर करवटें बदलती रही होंगी.’’ मेघा बोली. इस पर इंसपेक्टर ने ध्यान से बिस्तर का निरीक्षण किया. उन्होंने भी अनुमान लगाया कि सामान्य तरह से सोने पर बिस्तर की सिलवटें बहुत अधिक नहीं बनती हैं. तभी उन्होंने सवाल किया, ‘‘मेघाजी, आप सास का एक बैग गायब होने की बात बता रही थीं.’’

‘‘जी हां सर, सासूमां का एक बैग गायब है, जिस में उन की ज्वैलरी और बैंक के कागजात थे. और हां, मेरी सासूमां का मोबाइल भी नहीं मिल रहा है.’’ मेघा बोली. इस पर इंसपेक्टर मौर्या ने गंभीरता दिखाते हुए कमरे का कोनाकोना छान मारा. इस सिलसिले में बाथरूम की दीवारें संदिग्ध लगीं. कारण दीवारों को रगड़रगड़ कर धोने के निशान साफ दिख रहे थे. ध्यान से देखने पर एकदो छोटे काले निशान अभी भी दिख रहे थे. उस की जांच के लिए फोरैंसिक टीम बुलाई गई. जांच के लिए तमाम तरह के नमूने एकत्रित किए गए. घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे से 30 जून और एक जुलाई की रात के फुटेज निकलवाए गए. सीसीटीवी फुटेज में 2 बड़े बैग के साथ घर से रात को निकलते हुए 2 लोग दिखे.

उन की तसवीर प्रिंट करवा कर मेघा से पहचान करवाई गई. मेघा ने देखते ही कहा कि ये दोनों उन के पड़ोसी अनिल आर्या और कामिनी आर्या हैं. उन की गैरमौजूदगी में सासूमां का खयाल रखते रहे हैं. पुलिस ने बताया कि ये दोनों 30 जून की रात को 11 बजे आप के घर आए थे और सुबह साढ़े 6 बजे आप के घर से निकले थे. तब उन के पास 2 बड़े बैग थे. अब मेघा समझ चुकी थी कि जरूर कुछ गड़बड़ है. उन्होंने बताया कि उन की सास के पास इतना बड़ा बैग नहीं था. फिर खुद ही सवाल किया, ‘‘बैग में क्या हो सकता है, घर का सारा सामान तो यूं ही पड़ा है.’’

तहकीकात से मालूम हुआ कि आर्या दंपति गुरुद्वारा रोड पर किराए के मकान में रहते थे. पहली जुलाई के बाद से वे नहीं दिखे. फोरैंसिक जांच की रिपोर्ट के अनुसार, बाथरूम की दीवार पर वे काले निशान खून के धब्बे थे. इस का मतलब स्पष्ट था कि कविता ग्रोवर की किसी ने हत्या कर दी. आगे की जांच के लिए जांच टीम बनाई गई और हत्यारे की तलाश की जाने लगी. इस मामले में शक की सुई पूरी तरह से अनिल आर्या और उस की पत्नी कामिनी आर्या की तरफ घूम चुकी थी. सवाल यह था कि दोनों बैग ले कर कहां लापता हो गए? काफी पूछताछ के बाद मालूम हुआ कि दोनों उत्तराखंड में रानीखेत के मूल निवासी हैं. उन की तलाश के लिए पुलिस टीम रानीखेत पहुंची, लेकिन वे हाथ नहीं आए. केवल इतना पता चल सका कि 3 जुलाई को टैक्सी स्टैंड पर दिखे थे.

इसी बीच दोनों के बारे में दिल्ली के एक आटो वाले से कुछ जानकारी मिली. उस ने बताया कि दोनों उस के परमानेंट ग्राहक थे. हमेशा उस के आटो से ही कहीं भी आतेजाते थे. आटो ड्राइवर ने बताया कि 30 जून की आधी रात को मुझे फोन कर अगले रोज सुबह आने के लिए कहा था. मैं उन के पास ठीक सवा 6 बजे पहुंच गया था. अनिल आर्या और उन की पत्नी 2 बैग घसीटते हुए ले कर आए थे. उन्होंने कहा था कि दोस्त के यहां पार्टी है, उन के लिए चिकन का बैग पहुंचाना है. और वे आटो पर सवार हो गए. थोड़ी दूर पर ही वे नजफगढ़ के पास उतर गए. उस के बाद वे कहां गए, मालूम नहीं. पूछने पर सिर्फ इतना बताया कि उन का दोस्त यहीं गाड़ी ले कर आएगा.

पुलिस ने आटो वाले से अनिल आर्या का मोबाइल नंबर ले लिया. मोबाइल से बात नहीं बनी, लेकिन आटो और दूसरे दरजनों टैक्सी वालों से पूछताछ के बाद आर्या दंपति को उत्तर प्रदेश के बरेली से 12 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें दिल्ली लाया गया. उन से गहन पूछताछ की गई. जल्द ही दोनों ने कविता ग्रोवर की हत्या की बात स्वीकार ली. उन्होंने जो बताया, वह किसी हैवानियत से जरा भी कम नहीं था. मानवता को शर्मसार करने वाली घटना को बड़ी क्रूरता से अंजाम दिया गया. उन्होंने स्वीकार कर लिया कि 30 जून की रात को क्याक्या हुआ था. उन्होंने कविता ग्रोवर की हत्या करने का कारण भी बताया.

इवेंट मैनेजमेंट का काम करने वाले अनिल आर्या के अनुसार उस के लालच और स्वार्थ से भरे इस हत्याकांड की नींव 2 साल पहले ही पड़ गई थी. उन्होंने कविता ग्रोवर से जानपहचान बढ़ा कर उन से डेढ़ लाख रुपए उधार लिए थे, जिस की मांग वह लगातार करती थीं. अनिल ने बताया कि 30 जून, 2021 को मनीष और मेघा सिरसा चले गए थे. उसी रात वह पत्नी के साथ पूरी तैयारी के साथ कविता के पास जा पहुंचा था. कविता ग्रोवर उन्हें अपना हितैषी समझती थीं, इसलिए देर रात को आने पर कोई सवालजवाब नहीं किया. उन के बीच देर रात तक इधरउधर की बातें होती रहीं. इसी बीच कविता अपनी उधारी मांग बैठीं. बात बढ़ गई. कविता ने नाराजगी दिखाते हुए कह दिया कि पैसे वापस नहीं लौटाए तो वह इस बारे में अपने बहूबेटे को बता देगी.

फिर क्या था. तब तक अनिल को भी काफी गुस्सा आ गया था. उस ने तुरंत कविता के मुंह पर जबरदस्त मुक्का जड़ दिया. वह बिछावन पर वहीं गिर पड़ीं. अनिल ने उन के सीने पर सवार हो कर साथ लाई नायलौन की रस्सी से गला घोंट डाला. कविता की मौत हो जाने के बाद अनिल लाश को बाथरूम में ले गया और साथ लाए बड़े चाकू से लाश टुकड़े कर डाले. सारे टुकड़े उस ने 2 बड़ेबड़े बैगों में भरे. इस काम में उन दोनों को करीब 4 घंटे का समय लगा. उस की पत्नी ने इस में पूरा साथ दिया और उस ने बाथरूम की दीवारें साफ कीं. फिर टुकड़े ठिकाने लगाने के लिए अपने जानपहचान के आटो वाले को फोन कर बुला लिया.

आटो से वह दोनों नजफगढ़ तक आए. आटो के जाने के बाद वहीं नाले में बैग फेंक दिए. उस के बाद वह उसी रोज कविता के घर से लाए जेवरों को मुथुट फाइनैंस में गिरवी रख आए. उस से मिले 70 हजार रुपए ले कर उन्होंने अपने कुछ जेवर छुड़वाए और रानीखेत चले गए. पकड़े जाने के डर से वह वहां 2 घंटे ही रुके. यहां तक कि अपने घर भी नहीं गए. रास्ते में ही अपने मोबाइल का सिम और हत्या में इस्तेमाल चाकू आदि सामान को फेंक दिया. फिर बरेली जा कर एक कमरा किराए पर लिया और रहने लगे. पुलिस ने उस के बताए अनुसार न केवल थैले से लाश के टुकड़े बरामद कर लिए, बल्कि हत्या में इस्तेमाल सामान भी हासिल कर लिया. लाश के कुल 18 टुकड़े किए गए थे, जो सड़गल चुके थे. पुलिस ने मुथुट फाइनैंस से गिरवी रखे जेवर भी हासिल कर लिए. उन की शिनाख्त मेघा ग्रोवर ने कर दी.

इस तरह अनिल और कामिनी द्वारा हत्या का जुर्म स्वीकार करने के बाद अपहरण के केस को हत्या कर लाश ठिकाने लगाने की धारा 302, 201 आईपीसी में तरमीम कर दिया गया. फिर दोनों को अदालत में पेश कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया. Crime News in Hindi

 

Crime News : प्रिंसिपल की डर्टी फिल्म

Crime News : पूर्व प्रिंसिपल श्यामलाल राठौर के 2 बेटियां थीं. वंश चलाने के लिए वह बेटा चाहते थे, लेकिन पत्नी की मौत हो चुकी थी. इस के लिए उन्होंने गीता नाम की महिला से संबंध बना लिए, लेकिन शातिर गीता ने अपने पति हिमांशु चौधरी के साथ मिल कर प्रिंसिपल साहब की ऐसी डर्टी फिल्म बनाई कि…

हिमांशु चौधरी देहरादून के एक प्रतिष्ठित मैडिकल कालेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था. पढ़ाई के दौरान ही उसे विवाहिता गीता से प्यार हो गया. फिर बाद में पिछले साल 2024 के मई महीने में उस ने उस के साथ मंदिर में लव मैरिज कर ली थी. उस की एक प्यारी सी बेटी भी थी. गीता पहले पति से 3 साल पहले ही संबंध तोड़ चुकी थी. वह बेटी और हिमांशु के साथ देहरादून के किशननगर क्षेत्र के सिरमौर मार्ग पर रहने लगी थी. जल्द ही हिमांशु को यह भी जानकारी मिल गई कि गीता के किसी और से भी अवैध संबंध हैं. इस का उस ने विरोध जताने के बजाय अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना ली.

दरअसल, हिमांशु मैडिकल की अपनी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पा रहा था. वह कई बार पेपरों में फेल भी हो चुका था. दूसरी तरफ उस ने गीता से शादी रचा कर अपना खर्च और बढ़ा लिया था. उसे अब भी पढ़ाई के लिए फीस देनी थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रहा था. इसी बीच उस ने पाया कि गीता से मिलने के लिए एक बुजुर्ग श्यामलाल अकसर आते हैं. जल्द ही उसे यह भी मालूम हो गया कि गीता और उस बुजुर्ग के संबंध काफी पुराने और गहरे हैं. उन के बीच लंबे समय से नाजायज रिश्ता बना हुआ है. संभवत: गीता के पूर्व पति से संबंध खत्म होने के यही कारण रहे होंगे.

गीता के बुजुर्ग के साथ अवैध संबंध को नजरंदाज करते हुए हिमांशु चौधरी के दिमाग में एक योजना कौंध गई. उस ने श्यामलाल राठौर को ब्लैकमेल कर उन से पैसे ऐंठने का प्लान बना डाला. इस बारे में उस ने गीता से बात की. वह भी इस के लिए सहमत हो गई. योजना के अनुसार, गीता ने 2 फरवरी, 2025 को श्यामलाल को फोन किया, ”हैलो डार्लिंग, तुम कहां हो? कई दिनों से मिले नहीं.’’

”अरे वाह! क्या बात है? मैं भी तुम्हें ही याद कर रहा था. सोच रहा था कि इस वैलेंटाइन डे पर तुम्हारी पसंद का कोई गिफ्ट दूं.’’ श्यामलाल की आवाज सुन कर गीता भी खुश हो गई.

वह चहकती हुई सैक्सी अंदाज में बोली, ”तो फिर आज ही मिलो न! अपनी पसंद भी बता दूंगी और तुम्हारी चाहत भी पूरी कर दूंगी.’’

”चलो, आता हूं, लेकिन वादे से मुकर मत जाना.’’ श्यामलाल बोले.

”अरे, आओ तो सही डार्लिंग. आज की पूरी रात तुम्हारे नाम है. पति को हौस्टल भेज दिया है. तुम से मालिश करवाने की इच्छा हो रही है.’’ गीता रामांटिक अंदाज में बोली

”ठीक है, कहो तो कुछ खानेपीने के लिए ले कर आऊं.’’ श्यामलाल की आवाज में रूमानीपन आ गया था.

”जो तुम्हारा दिल करे. तुम्हें तो मेरी पसंद का ब्रांड मालूम है. बाकी नानवेज यहीं पका लूंगी.’’ गीता बोली.

इस तरह से 2 प्रेमी युगल के बीच कुछ देर तक रोमांटिक बातें होती रहीं. जबकि दोनों की उम्र में काफी अंतर था. गीता एक खिली हुई गुलाब थी, जबकि श्यामलाल उम्र की ढलान पर दिमाग में यौवन का जोश भरे हुए थी. उन्होंने पाया कि काफी समय बाद गीता ने फोन पर ऐसी सैक्सी बातें की थीं. इसीलिए उन के दिमाग में मधुर घंटियां बज उठी थीं. देह में सिहरन पैदा हो गई थी. दैहिक मिलन का खुला निमंत्रण जो मिल चुका था. गीता ने अपने 12 साल पुराने आशिक श्यामलाल राठौर को सिरमौर मार्ग स्थित अपने घर बुलाया. वह एक रिटायर प्रिंसिपल थे. इलाके में लोग उन्हें गुरुजी कह कर बुलाते थे.

वहां पहले से ही हिमांशु चौधरी मौजूद था. उन की योजना थी कि गीता और श्यामलाल की अश्लील वीडियो हिमांशु रिकौर्ड कर लेगा. फिर उस वीडियो द्वारा उन्हें ब्लैकमेल कर मोटी रकम ऐंठ लेंगे. गीता और श्यामलाल जैसे ही एक साथ आए. हमबिस्तर होते ही किसी तरह श्यामलाल को अहसास हो गया कि कोई कमरे में छिपा हुआ है. खुद के पकड़े जाने की आशंका को भांप कर वह चिल्लाने लगे. तभी गीता और कमरे में छिपे हिमांशु चौधरी ने श्यामलाल का मुंह दबा दिया. दोनों ने हाथपांव पकड़ कर श्यामलाल को किसी तरह काबू में किया. गीता और हिमांशु भीतर से घबरा गए कि कहीं श्यामलाल उन दोनों के बारे में लोगों को बता न दें, इसलिए उन्होंने गला दबा कर उन की हत्या कर दी. इस के बाद शव को वहीं बैड के नीचे डाल कर छिपा दिया.

हिमांशु चौधरी एमबीबीएस की चतुर्थ वर्ष की पढ़ाई कर रहा था. उस ने गीता से कहा था कि वह काफी समय तक सर्जरी विभाग में रहा है. ऐसे में उसे पता है कि यदि 24 घंटे बाद शव को काटा जाए तो खून नहीं निकलेगा. लिहाजा दोनों ने इंतजार किया और शव को अगले दिन काटने की योजना बनाई. इस तरह से 3 फरवरी, 2025 की रात को हिमांशु ने रसोईघर के चाकू से ही शव को जोड़ के हिस्सों से काट डाला. पहले शव के कंधों से हाथ काटे गए. इस के बाद दोनों पैर अलग किए गए. बाद में सिर को काट कर प्लास्टिक के बोरे में बांध दिया. आगे की योजना के तहत गीता हिमांशु को शव ठिकाने लगाने के लिए कह चुकी थी.

दूसरी तरफ श्यामलाल की बेटी निधि राठौर 5 दिनों से परेशान हो रही थी. उसे रात को नींद नहीं आ रही थी. अपने पापा के अचानक लापता होने से निधि बेहद चिंता में थी. वह 7 फरवरी, 2025 को देर तक सोई हुई थी. सुबह के 9 बज चुके थे. बिस्तर से उठी थी. उस वक्त उस के सिर में दर्द हो रहा था. वह उस समय चाय बना कर पीने के मूड में थी, लेकिन मूड खराब था. उस के मन में बारबार एक ही विचार आ रहा था कि अब क्या करे? पापा को कहां ढूंढे?

देहरादून के पटेल नगर की रहने वाली निधि राठौर के पापा पूर्व प्रिंसिपल श्यामलाल उर्फ गुरुजी को लापता हुए 5 दिन गुजर चुके थे. उन्हें ढूंढने के लिए निधि समेत उन के कई रिश्तेदार लगे हुए थे. मगर उन के बारे में किसी को भी कुछ पता नहीं चल पाया था कि वे आखिर गए तो कहां गए?

अंत में निधि राठौर ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिल कर उन की गुमशुदगी देहरादून की पटेल नगर कोतवाली में दर्ज करा दी. कोतवाली पटेल नगर के एसएचओ प्रदीप सिंह राणा ने तत्काल बुजुर्ग श्यामलाल की गुमशुदगी दर्ज कर उन की तलाश करने के निर्देश जारी कर दिए थे. बेटी निधि ने रिपोर्ट में लिखवाया कि उस के पापा श्यामलाल 2 फरवरी को किसी काम की बात बोल कर घर से अपनी स्पलेंडर बाइक से निकले थे. पुलिस ने मामले में जांच शुरू की. जांच की शुरुआत उन के फोन की अंतिम लोकेशन से शुरू की. यह लोकेशन सिरमौर मार्ग की निकली. उन के फोन में गीता नाम की महिला से कई बार बातचीत की जानकारी मिली, जो सिरमौर में रहती थी.

श्यामलाल की गुमशुदगी की जांच का काम कोतवाली के एसएसआई योगेश दत्त के जिम्मे थी, जिन्होंने इस गुमशुदगी के बारे में सीओ अंकित कंडारी और एसपी (सिटी) प्रमोद कुमार से जांच का आदेश हासिल कर लिया था. फिर लापता श्यामलाल राठौर के बारे में जानकारी करने के लिए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक किए गए थे. सीसीटीवी फुटेज में श्यामलाल अपनी स्पलेंडर बाइक यूके07डी टी1685 से कृष्णा नगर चौक होते हुए सिरमौर रोड पर स्थित किशन नगर में स्थित एक मकान में जाते दिखाई दिए थे. पुलिस ने जब उस मकान के बारे में छानबीन की, तब पता चला कि वह मकान गीता नामक महिला का है. जांच टीम को सीसीटीवी फुटेज में श्यामलाल को गीता के घर से लौटने की एक भी तसवीर नहीं मिली.

पुलिस ने श्यामलाल के बारे में और अधिक जानकारी जुटाई. पता चला कि उन के 2 बेटियां हैं. उन्हें लोगों ने गीता से हमेशा मिलतेजुलते देखा है. वह गीता के घर मिलने के लिए जाते रहते थे. गीता का मायका जिला सहारनपुर के कस्बा देवबंद में है. पुलिस ने जब गीता और हिमांशु के मोबाइल नबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो उन के द्वारा 2 मोबाइल नंबरों पर बहुत देर तक बातें करना रिकौर्ड हुआ था. वे मोबाइल नंबर जांच में गीता के भाई अजय और हिमांशु के बहनोई धनराज निवासी कैलाश कालोनी, देवबंद के थे.

पुलिस टीम ने इन दोनों से पूछताछ करने का फैसला लिया. एसएसपी अजय सिंह ने इस जांच के लिए कोतवाल प्रदीप सिंह राणा, एसएसआई योगेश दत्त, प्रभारी विनोद गोसाईं, थानेदार विनोद राणा व कांस्टेबल आशीष शर्मा, विपिन व महिला कांस्टेबल मोनिका को भी इस टीम में शामिल कर लिया. इस के बाद पुलिस की टीम अजय और धनराज की तलाश के सिलसिले में देवबंद के लिए निकल गई. देवबंद पहुंच कर पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर अजय और धनराज को गिरफ्तार कर लिया.

दोनों को पटेलनगर कोतवाली ला कर सख्ती से पूछताछ की गई. अजय कुमार ने पुलिस को बताया कि 2 फरवरी को उस के पास उस की बहन गीता ने फोन कर बताया कि उन्होंने किसी की हत्या कर दी है. अब उस की लाश ठिकाने लगाने में मदद चाहिए. यह सुनने के बाद उस ने अपने जीता धनराज चावला को बुलाया. फिर दोनों गीता के घर पहुंच गए. वहां लाश के टुकड़े बोरे में बंद थे. उन्होंने वह बोरा उठाया और उसे 4 फरवरी को मिनी ट्रक से देवबंद लाया गया. देवबंद के गांव साखन की नहर में रात के अंधेरे में शव को फेंक दिया गया था.

इस के बाद देवबंद की साखन नहर से श्यामलाल के शव की तलाशी अभियान शुरू किया गया, लेकिन गोताखोरों को वहां शव के टुकड़े नहीं मिले. तब पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. सहारनपुर पुलिस को 20 फरवरी, 2025 को किसी इंसान की लाश के टुकड़े मिले. यह जानकारी मीडिया के द्वारा देहरादून पुलिस को मिली तो कोतवाल श्यामलाल के फेमिली वालों को ले कर सहारनपुर पहुंचे तो निधि ने उन की पहचान अपने पापा श्यामलाल के रूप में की. बरामद लाश के टुकड़ों का पंचनामा भर कर पुलिस ने उन्हें पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया.

हिमांशु और गीता तब तक पुलिस की पकड़ में नहीं आए थे. पुलिस के साइबर विभाग ने उन के मोबाइलों के लोकेशन के आधार पर बताया कि वे मुंबई में हैं. पुलिस जब मुंबई पहुंची, तब तक वे वहां से भी फरार हो चुके थे. इस के बाद पुलिस को इन दोनों की लोकेशन जयपुर की मिलने लगी. पुलिस जब वहां पहुंची, तब उन की लोकेशन प्रयागराज के महाकुंभ की मिलने लगी. वहां 4 दिनों तक दोनों की लोकेशन मिली, लेकिन उस भीड़ में उन्हें ढूंढा नहीं जा सका.

इस चूहेबिल्ली के खेल में गीता और हिमांशु पलिस की पकड़ में नहीं आ पा रहे थे. उन पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया गया. उन की लोकेशन 24 फरवरी को अमृतसर, पंजाब की मिली. इस लोकेशन के मुताबिक उन्होंने ट्रेन से यात्राएं की थीं. बाद में उन की लोकेशन गोल्डन टेंपल के पास आ कर ठहर गई थी. आखिरकार 26 फरवरी, 2025 की रात में पुलिस टीम को सफलता मिल गई. गीता और हिमांशु चौधरी को अमृतसर से गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों को देहरादून लाया गया. उन के सारे कारनामों की जानकारी पहले गिरफ्तार किए गए अजय कुमार और धनराज से मालूम हो चुकी थी. फिर तो गीता ने भी पुलिस के सामने सारे राज खोल दिए. उस के बाद जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

पत्नी की मौत के बाद 2 बेटियों के पिता श्यामलाल को सब से बड़ी चिंता यह थी कि उन के बाद वंश आगे नहीं बढ़ पाएगा. इसी कारण वह गीता के साथ अपने संबंधों से एक बेटा पैदा करना चाहते थे. पुलिस के मुताबिक श्यामलाल ने इस काम के लिए गीता को 20 लाख रुपए तक देने का वादा किया था. इस औफर के बाद ही गीता और हिमांशु ने अनुमान लगाया कि श्यामलाल के पास काफी रुपया है. गीता भी एकमुश्त रकम ऐंठ कर श्यामलाल से पीछा छुड़ाने की फिराक में थी. ऐसे में गीता और हिमांशु ने श्यामलाल की अश्लील वीडियो बना कर ब्लैकमेल करने और रुपए ऐंठने का प्लान बनाया था. गीता ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उस के श्यामलाल के साथ पिछले 12 सालों से अनैतिक संबंध थे.

श्यामलाल उसे हर माह 50 हजार से एक लाख रुपए खर्चा दे रहे थे. बुजुर्ग श्यामलाल की एक संस्था थी. वहीं दोनों की मुलाकात हुई थी. श्यामलाल की पत्नी का लगभग 20 साल पहले निधन हो गया था. उन की 2 बेटियों में से एक की शादी हो चुकी है, जबकि दूसरी अविवाहित थी. ऐसे में श्यामलाल अपने वंश को ले कर चिंतित रहते थे. 7 महीने पहले गीता की मुलाकात हिमांशु चौधरी से हुई, जो एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था. वे दोनों करीब आ गए और शादी कर ली. इस के बाद श्यामलाल से गीता का मिलनाजुलना कम हो गया, जिस से श्यामलाल परेशान हो गए. जबकि वह अकसर गीता पर मिलने का दबाव डाल रहे थे.

उन्होंने बेटा देने के बदले गीता को 20 लाख रुपए देने की पेशकश कर दी थी. यही एक वजह श्यामलाल की मौत का कारण भी बन गई. किंतु जब हत्या के बाद श्यामलाल के मोबाइल फोन से खाते की डिटेल खंगाली तो उन के बैंक खाते खाली मिले. इस हत्याकांड में पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई कि जरूरत पूरी करने की चाहत में ही श्यामलाल, गीता और हिमांशु एकदूसरे के करीब आए थे. श्यामलाल को बेटा पैदा करने की चाहत थी तो गीता श्यामलाल से रुपए ऐंठना चाहती थी. वहीं हिमांशु भी गीता के जरिए अपनी आर्थिक तंगी दूर करना चाहता था.

गीता पहले ब्यूटीपार्लर चलाती थी, लेकिन एक बेटी की मां बनने के बाद उस ने काम बंद कर दिया था. रुपए की जरूरत वह श्यामलाल से पूरी करती रही. वैसे गीता जानती थी कि रुपए की जरूरत तो श्यामलाल ही पूरी कर सकते थे. इस मामले की जांच के समय गीता 5 महीने की गर्भवती पाई गई. उस के गर्भ में पल रही संतान हिमांशु की है या श्यामलाल की, इस संबंध में पुलिस ने मैडिकल जांच कराने की तैयारी कर ली थी. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गीता अब तक श्यामलाल से करीब 10 लाख रुपए से अधिक धनराशि ले चुकी थी. मृतक के नाम पर दून में करोड़ों की जमीन भी है.

श्यामलाल की हत्या के बाद जब रुपए भी नहीं मिले तो गीता और हिमांशु को अपने अपराध का बोध हुआ. इसी अपराध का पश्चाताप करने के लिए दोनों प्रयागराज गए थे. उन्होंने महाकुंभ में संगम में डुबकी लगाई. 4 दिनों तक साधुसंतों की शरण में रहे. वहीं खाना खाया और रातें गुजारीं. इस बीच दोनों दिल्ली पहुंचे और वहां से कुरुक्षेत्र होते हुए अमृतसर चले गए. उन के पास से तब तक बहुत सारे पैसे खर्च हो गए थे. रुपए न होने के चलते 200 रुपए में किराए का कमरा ले कर रहने लगे. कथा लिखे जाने तक एसएसआई योगेश दत्त द्वारा मामले की जांच जारी थी. योगेश दत्त द्वारा गीता व हिमांशु के खिलाफ सबूत एकत्र कर के अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई.

 

 

आफरीन के प्यार में मनोहर के 8 टुकड़े

6 जून, 2023 की सुबह लगभग साढ़े 7 बजे मनोहर लाल हर रोज की तरह अपने साथ 2 खच्चर ले कर रोजीरोटी की तलाश में घर से निकला था. घर से निकलते समय उस ने बताया था कि वह अपना काम खत्म करने के बाद अपने एक परिचित से मिलने जाएगा, जिस के कारण घर आने में थोड़ा लेट भी हो सकता है.

15 दिन बाद उस की शादी की डेट फिक्स थी. उसी कारण उस के घर की कुछ मरम्मत का काम चल रहा था. शादी के कारण ही उस ने अपने परिचित से कुछ पैसों की व्यवस्था करने को कहा था. जिस के कारण वहां पर उस का जाना बहुत ही जरूरी था.

मनोहर लाल अपना काम खत्म कर अकसर 4-5 बजे तक घर पहुंच जाता था, लेकिन उस दिन वह शाम के 6 बजे तक भी घर नहीं पहुंचा तो उस के परिवार वाले चिंतित हो उठे. फिर भी उन्होंने सोचा कि कुछ देर आ जाएगा. लेकिन वह देर रात तक घर नहीं पहुंचा तो उसे ले कर घर वाले परेशान हो उठे. उन्होंने यह बात अपने पड़ोसियों के अलावा अपने कुछ रिश्तेदारों को भी बता दी थी.

उसी समय उन्होंने रिश्तेदारों के साथ मनोहर लाल की खोजबीन शुरू की. हालांकि मनोहर लाल अपने घर वालों से किसी परिचित के यहां जाने वाली बात कह कर गया था, लेेकिन वह किस के पास गया था, यह नहीं जानते थे. यही कारण रहा कि रात भर घर वाले अपने रिश्तेदारों के साथ उसे इधरउधर ढूंढते रहे, लेकिन मनोहर लाल का कहीं भी पता नहीं चला.

उस के बाद घर वालों ने 7 जून, 2023 को अपने रिश्तेदारों के साथ हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के अंतर्गत किहार थाने में जा कर उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी. थाने में गुमशुदगी की सूचना दर्ज होते ही पुलिस प्रशासन ने उसे हर जगह खोजने की भरसक कोशिश की, किंतु उस का कहीं भी अतापता नहीं चल सका.

9 जून को सलूनी इलाके में एक नाले से वहां से गुजर रहे लोगों को बदबू आती महसूस हुई. तब स्थानीय लोगों ने इस की सूचना पुलिस के गश्ती दल को दी. इस सूचना पर गश्ती दल पुलिस नाले पर पहुंची. तब पुलिस ने वहां से 3 बोरियां निकालीं. तीनों बोरियों को खोल कर देखा तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें खुली रह गईं. उन बोरियों में किसी पुरुष के शव को 8 टुकड़ों में काट कर भरा गया था. फिर तीनों ही बोरियों को नदी में डाल कर पत्थरों से दबा दिया गया था.

पुलिस ने उस शव की शिनाख्त कराने की कोशिश की तो उस की पहचान मनोहर लाल के रूप में हुई. वीभत्स तरीके से की गई हत्या की यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. इस तरह से मनोहर लाल की हत्या की बात सामने आते ही पूरे हिमाचल प्रदेश में सनसनी सी मच गई.

मनोहर लाल की दर्दनाक और निर्मम हत्या ने आसपास के लोगों को झकझोर कर रख दिया दिया था. सभी लोग इस बात को सोच कर परेशान थे कि आखिर मनोहर लाल के साथ क्या हुआ और किस ने, क्यों उस के साथ जघन्य अपराध किया.

प्रेम प्रसंग का मामला आया सामने

उसी जांचपड़ताल के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि मनोहर लाल की एक मुसलिम लडक़ी से दोस्ती थी. जबकि इस बात की जानकारी उस के घर वालों को नहीं थी. यह बात सामने आते ही पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया और उस की तुरंत ही जांचपड़ताल भी शुरू कर दी.

पुलिस को लग रहा था कि मनोहर लाल की हत्या की मुख्य वजह उस की दोस्ती ही रही होगी. इसी शक के आधार पर पुलिस ने उस मुसलिम युवती के घर वालों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया.

चूंकि मामला दूसरे धर्म से जुड़ा था, इसलिए गैर मुसलिम लोग आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग करने लगे. विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने इस घटना के विरोध में जिला मुख्यालय से रोष मार्च निकाला और आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की.

क्षेत्र में इस मामले के तूल पकड़ते ही 13 जून, 2023 चंबा जिला मुख्यालय में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा संयुक्त प्रैस कौन्फ्रैंस का आयोजन किया गया, जिस में चंबा एसपी अभिषेक यादव ने पत्रकारों को बताया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआईटी तेजी के साथ जांचपड़ताल कर रही है. उन्होंने बताया कि इस मामले में शब्बीर नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. साथ ही 2 नाबालिग लड़कियों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है, जिन से लगातार पूछताछ जारी है.

उसी पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि मनोहर लाल के एक मुसलिम युवती के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिस की जानकारी होने के बाद युवती के घर वालों ने मनोहर लाल को अपने घर बुला कर उस के साथ मारपीट भी की थी. पता चला कि मारपीट में युवती के चाचा-चाची मुसाफिर हुसैन और फरीदा बेगम भी शामिल थी. पुलिस ने पूछताछ के लिए दोनों को हिरासत में ले लिया है.

प्रैस वार्ता करते हुए डिप्टी कमिश्नर अपूर्व देवगन ने मीडिया को बताया कि इस जघन्य अपराध के खुलासे के लिए प्रशासन पूरी तरह से लगा हुआ है. इस मामले को ले कर समाज के हर वर्ग को एक साथ मिल कर खड़े होने की जरूरत है. कोई भी राजनैतिक नुमाइंदा या समाजसेवी ऐसी धार्मिक सूचनाएं न फैलाए, जिस से आपस में मनमुटाव की स्थिति पैदा हो. स्थिति पूरी तरह से जिला प्रशासन के नियंत्रण में है.

घटना के विरोध में लोग हुए बेकाबू

प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद भी क्षेत्र की स्थिति बिगड़ती गई. 15 जून, 2023 को कुछ स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे और उन्होंने आरोपियों के घरों में आग लगा दी. यही नहीं आक्रोशित भीड़ ने किहार थाने पहुंच कर सभी आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की. आक्रोशित भीड़ ने थाने के भीतर घुसने की भी कोशिश की, जिसे बमुश्किल पुलिस बल द्वारा रोका गया.

इस सब की सूचना पाते ही चंबा एसपी अभिषेक यादव और डिप्टी कमिश्नर अपूर्व देवगन भी थाने पहुंच गए. इस दौरान दोनों ही अधिकारियों ने इस मामले में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त काररवाई करने का आश्वासन दिया. अपूर्व देवगन ने इस तरह के बेकाबू हुए उग्र स्वरूप को देखते हुए सलूणी में धारा 144 लागू करने की अधिसूचना जारी करा दी.

क्षेत्र में धारा 144 लगने के बावजूद भी स्थानीय लोगों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था. उसी दौरान 17 जून, 2023 को बीजेपी ने एक प्रैस कौन्फ्रैंस कर आरोपियों पर इलजाम लगाते हुए बताया कि आरोपी परिवार ने 100 बीघा सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है. उन के बैंक अकाउंट में 2 करोड़ रुपए जमा हैं. इस के अलावा आरोपी परिवार बैंक से 2 हजार रुपए के नोट के 95 लाख रुपए की मोटी रकम अब तक बदलवा चुका है.

आरोपी परिवार के सरफराज मोहम्मद का आपराधिक रिकार्ड भी रहा है. इस के अतिरिक्त जयराम ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि इस परिवार के तार 1998 में साटुंडी में सामूहिक हमले से भी जुड़े हुए थे. इस घटना में 35 बेकुसूर लोगों की जान चली गई थी.

लोगों का कहना था कि मनोहर लाल ने आखिर 6 जून की सुबह आफरीन के घर में ऐसा क्या देखा, जिसके कारण उसकी निर्मम हत्या कर दी गई? लोग उस परिवार को आतंकी माफिया मानते थे. शक इस बात का भी हो रहा है कि परिवार के अतिरित उस दिन उस घर में कोई अन्य संदिग्ध भी मौजूद थे? या फिर मनोहर लाल को कातिल परिवार के आतंकियों से संबंधों का पता चल गया थाï. तभी तो उसे निर्मम तरीके से मार दिया.

लोग कातिल परिवार के घर को आतंकी होने की बात को कैसे झुठला सकते थे, क्योंकि इन के मुखिया की आतंकी हमले में भी पूर्व में संदिग्ध भूमिका रही थी? इस के अलावा कातिल परिवार के पास इतनी अधिक मात्रा में अकूत संपत्ति होना भी कहीं न कहीं एक प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. जिस की विस्तृत जांच एनआईए से कराए जाने की लोग मांग करने लगे.

लोगों का कहना है कि आरोपी परिवार ने अपने काले कारोबार, आतंकियों से संबंधों और मनोहर हत्याकांड से जुड़े सभी साक्ष्यों को समाप्त करने की मंशा से अपने घरों में सुनियोजित षडयंत्र के तहत खुद आग लगवाई, आक्रोशित भीड़ के वहां पर पहुॅचने से पहले ही वहां पर आग लग चुकी थी. इस बात की भी विस्तृत जांच कराने की मांग की गई.

साल 1998 में चंबा के शतकंडी कांड जिस में इस्लामिक आतंकवादियों ने गोली मार कर 35 हिंदुओं की निर्मम हत्या की थी और एक मुसलिम को छोड़ दिया था. यह भी जांच एजेंसियों के घेरे में था. आरोप है कि यह परिवार शुरू से ही राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल रहा है. अब लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस के ऊपर किस का वदहस्त है?

लोगों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने इस मामले में आरोपी परिवार के 11 लोगों को हिरासत में ले लिया था. थाने ले जा कर उन से कड़ी पूछताछ की गई. पुलिस पूछताछ के दौरान मनोहर लाल मर्डर केस का जो खुलासा हुआ, उस की कहानी इस प्रकार निकली—

हिमाचल प्रदेश की सुरम्य चंबा घाटी में बसा सलूणी का भंडाल गांव लुभावने पहाड़ी दृश्यों, नदी किनारे बने घरों, स्टेट छत वाली घास के शेड, सुंदर रास्तों और आकर्षक जंगलों के साथ अपने आप में एक छोटा स्वर्ग माना जाता है. इस गांव में लगभग 100 घर हैं, जिन में हिंदू, मुसलिम के अलावा बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय है.

शब्बीर के घर मनोहर का था आनाजाना

ग्राम पंचायत भोदल के गांव थरोली में रहता था रामू अधवार का परिवार. रामू अधवार शुरू से ही खच्चरों के सहारे अपनी रोजीरोटी चलाते आ रहे थे. उन के पास खेती की थोड़ीबहुत जमीन भी थी. मनोहर लाल 3 बहनों में सब से बड़ा और इकलौता भाई था.

मनोहर लाल कुछ समझदार हुआ तो उस ने अपने पापा की जिम्मेदारी संभालते हुए खेती करने के अलावा खच्चरों पर सामान ढोने का काम शुरू कर दिया, जिस के सहारे उस के परिवार की रोजीरोटी ठीक से चलने लगी थी.

मनोहर लाल इस वक्त 22 साल का हो चुका था. उस की शादी की उम्र हुई तो उस के घर वालों ने उस के लिए एक लडक़ी की तलाश शुरू कर दी. उसी दौरान उन्हीं के एक रिश्तेदार के माध्यम से एक लडक़ी से उस की शादी की बात भी पक्की हो गई थी.

शादी की बात पक्की होते ही उस के घर वालों ने शादी की तैयारियां शुरू कर दी थीं. उसी तैयारी के चलते सब से पहले उन्होंने अपने घर की मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया था. उसी मरम्मत के लिए वह 6 जून, 2023 को अपने एक परिचित से कुछ पैसे लाने की बात कह कर घर से निकला था.

पुलिस पूछताछ के दौरान जो जानकारी सामने आई, उस में पता चला कि मनोहर लाल का शब्बीर के घर आनाजाना था. शब्बीर अहमद की 2 नाबालिग बहने थीं. उन्हीं में से एक का नाम आफरीन था. उसी आनेजाने के दौरान मोहन लाल की आफरीन से दोस्ती हो गई.

दोस्ती होने के बाद दोनों ही मोबाइल पर बात करने लगे थे, जिस की जानकारी धीरेधीरेआफरीन के घर वालों को भी हो गई थी. इस जानकारी के मिलते ही आफरीन के घर वालों ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उस के बावजूद भी दोनों ही मोबाइल पर बात करने से बाज नहीं आए.

आफरीन के घर वालों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने कई बार मनोहर लाल को अपने घर आने से मना किया था, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया. उस की उन्हीं हरकतों से आजिज आ कर उन्होंने आफरीन से ही फोन करा कर उसे अपने घर बुलाया.

2 दिनों तक लाश के पास खड़े रहे खच्चर

6 जून, 2023 को मनोहर लाल अपने घर वालों से झूठ बोल कर अपने साथ दोनों खच्चरों को ले कर घर से निकला था. मनोहर लाल ने आफरीन के घर जाने से पहले ही अपने दोनों खच्चरों को सलूनी नाले के पास छोड़ दिया. फिर वह आफरीन के घर चला गया. उस के बाद उन्होंने उसे फिर से समझाने की कोशिश की. लेकिन वह उन की एक भी बात मानने को तैयार न था.

उसी से तंग आ कर उन्होंने उसे घर में ही डंडों से बुरी तरह से मारापीटा. जब मनोहर लाल बेहोश हो गया तो उन्होंने उस की हत्या कर दी. उस के बाद उस की लाश को ठिकाने लगाने के लिए लकड़ी काटने वाली आरी से उसे 8 टुकड़ों में काट डाला. फिर उस के सभी टुकड़ों को 3 बोरियों में भर कर नाले में पानी के नीचे पत्थरों से दबा दिया.

तभी मनोहर लाल के गायब होने की खबरें फैलीं. उस के गायब होते ही उसे उस के घर वालों के साथसाथ पुलिस ने भी सभी जगह ढूंढा, लेकिन उस का कहीं भी अतापता नहीं चला. उसी दौरान सलूनी इलाके में एक नाले के पास से अचानक आई बदबू से लोग परेशान हो उठे थे. उसी नाले के पास कई दिनों से 2 खच्चर लगातार खड़े हुए थे.

स्थानीय लोगों को उन खच्चरों का लगातार खड़े रहना अजीब सा लगा. वहां पर रह रहे कुछ लोग जानते भी थे कि ये खच्चर मनोहर लाल के हैं. लेकिन फिर भी किसी ने उस के बारे में गहराई से नहीं सोचा. धीरेधीरे जब मनोहर लाल के गायब होने की खबर क्षेत्र में फैली तो लोगों ने अनुमान लगाया कि इस तरह से खच्चरों के खड़े होने का मतलब मनोहर लाल के साथ कुछ अनहोनी होने की संभावना को दर्शाता है.

यही सोच कर लोगों ने वहां से गुजर रहे नाले में देखा तो वहां पर एक व्यक्ति के पैर का जूता और उस के पास ही बोरे दबे नजर आए. तब उस की सूचना पुलिस को दी गई. फिर उसी नाले से मनोहर लाल के शव के 8 टुकड़े बरामद हुए.

इस केस में जहां एक तरफ आरोपी के घर वालों ने मनोहर लाल पर एक साथ 2 युवतियों के साथ प्रेम प्रसंग का आरोप लगाया था. वहीं इंटरनेट पर मृतक मनोहर लाल के बारे में कई आधारहीन खबरें प्रसारित होने से पीडि़त परिवार के लोग बेहद दुखी और परेशान थे.

घर वालों ने प्रेम प्रसंग की बात को नकारा

इस मामले में मीडिया से बातचीत करते हुए मनोहर लाल के पिता रामू अधवार, मां जानकी, बहनें त्रिशला, सृष्ठा, सीमा और चचेरे भाई मानसिंह, उत्तम सिंह व अन्य ने बताया कि मनोहर लाल के बारे में जो प्रेम संबंधों की अफवाहें उड़ाई जा रही हैं, वे सब बेबुनियाद हैं. इस मामले को प्रेम संबंध से जोड़ कर केस को भटकाने का प्रयास किया जा रहा है.

परिजनों ने बताया कि मनोहर लाल एक शांत स्वभाव वाला सीधासादा युवक था. जो कि सभी लोगों से मुसकराते हुए प्रेम से बात करता था. वह हमेशा ही अपने काम से काम रखता था. अगर उस का किसी युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा होता तो वह शादी की बात चलने से पहले ही अपने परिवार वालों को जरूर बता देता.

मनोहर लाल के बुजुर्ग मातापिता का कहना था कि उन के इकलौते बेटे के आरोपियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. मृतक मनोहर लाल की बुजुर्ग मां जानकी का रोरो कर बुरा हाल था. मां ने रोते हुए बताया कि 15 दिन बाद ही उन के बेटे की शादी थी. शादी की पूरे घर में धूमधाम से तैयारियां चल रही थी. जैसेतैसे कर घर की मरम्मत का काम चल रहा था. लेकिन उस के बेटे के खत्म होते ही उस की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं. बुजुर्ग मां का बेटे के लिए बहू लाने का सपना भी उस की अर्थी के साथ ही टूट गया.

पुलिस इस मामले में 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी. पुलिस इस मामले से जुड़े सभी आरोपियों की पृष्ठभूमि भी खंगाल रही थी. आरोपियों के व्यवसाय से ले कर कहांकहां इन लोगों को आनाजाना था. किन लोगों से ये लोग मिलते थे. इस सब की जानकारी जुटाई जा रही थी.

आरोपियों की जम्मूकश्मीर के डोडा जिले में भी रिश्तेदारी है. वहां से भी लोग इन के घर आतेजाते रहते थे. इस बात को भी गंभीरता से लेते हुए हिमाचल प्रदेश की पुलिस डोडा पुलिस के साथ संपर्क साधने में लगी हुई थी.

प्रदेश सरकार ने एसआईटी से 15 दिन के भीतर पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी थी. पुलिस प्रशासन ने शांति व्यवस्था को देखते हुए चंबा में 160 दिनों के लिए धारा 144 लगाई थी. वहीं नेताओं व अन्य लोगों को पीडि़त परिवार के सदस्यों से मिलने पर भी पाबंदी लगा दी थी. साथ ही कुछ संदिग्धों पर भी पुलिस अपनी नजर रखे हुए थी.

बहरहाल, पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

(कथा पुलिस सूत्रों व जनचर्चा पर आधारित है )

प्रेमिका के 100 टुकड़े कर कुकर में उबाला

मुंबई में ठाणे जिले के मीरा रोड (पूर्व) पर गीता नगर है. यहां फेज 7 में आकाशदीप सोसाइटी के चेयरमैन प्रताप जायसवाल और सेक्रेटरी सुरेश चह्वण 7 जून, 2023 की सुबह एक शिकायत ले कर नयानगर थाने गए थे. उन्होंने एसएचओ को बताया कि सोसाइटी के 704 नंबर फ्लैट से अजीब तरह की सड़ांध आ रही है. उन्होंने बताया कि दुर्गंध तो कई दिनों से आ रही थी, लेकिन पिछले 2 दिनों से और तीखी हो गई है. उस की वजह से सोसाइटी के लोग काफी परेशान हो गए हैं. वहां से हो कर गुजरना तक मुश्किल हो गया है.

ऐसे मामलों में ज्यादातर लाश के होनेे की ही बात सामने आती है, इसलिए एसएचओ ने इस सूचना को गंभीरता से लिया और तुरंत ही कुछ पुलिसकर्मियों को साथ ले कर आकाशदीप सोसायटी की तरफ निकल गए. पुलिस की जांच टीम बिल्डिंग की 7वीं मंजिल पर स्थित उस फ्लैट पर पहुंची तो उस का मेन गेट बंद था. एक पुलिसकर्मी ने दरवाजे की कालबेल बजाई. कुछ सेकेंड बीत गए, लेकिन भीतर से किसी के दरवाजा खोलने की आहट तक नहीं सुनाई दी.

पुलिसकर्मी ने दोबारा 2-3 बार कालबेल बजाई और दरवाजे को जोर से थपथपाया. कुछ सेकेंड बाद आवाज आई, “अभी आता हूं. वेट! वन मिनट!”

फ्लैट में दनदनाते घुसी पुलिस

दरवाजे की कुंडी खुली, दरवाजे के पीछे से सुटके गाल पर अधपकी दाढ़ी वाला एक अधेड़ व्यक्ति दिखा. उस ने दरवाजा उतना ही खोला, जितने से वह अपनी गरदन बाहर निकाल सकता था. शांति से बोला, “क्या बात है? कौन है?”

“पूरा किवाड़ खोलो, तुम्हारे घर में क्या पड़ा है, जो बिल्डिंग में इतनी तेज बदबू फैल रही है. आसपास के लोग परेशान हो रहे हैं.” एक पुलिसकर्मी बोला.

“कुछ भी तो नहीं. वह मैं ने घर की सफाई की है, उसी कचरे की बदबू है…” दरवाजे के भीतर से झांकता हुआ व्यक्ति एकदम धीमी आवाज में बोला.

इस बीच बाहर खड़ी पुलिस टीम और कुछ स्थानीय लोग दरवाजे को धकेल कर भीतर घर में घुस गए. अंदर जाते ही सभी बदबू से बेहद परेशान हो गए. उन्होंने रुमाल से अपनी नाकमुंह बंद करने पड़े. वे घर के हाल से होते हुए जब दूसरे कमरे की ओर बढ़े तब उन के होश उड़ गए. वहां पुलिस को 3 बाल्टियों में लाश के कई टुकड़े मिले. पास में ही खून से लथपथ पेड़ काटने वाली आरी भी मिली. छानबीन से जल्द ही मालूम हो गया कि शव के टुकड़े वहां रहने वाली सरस्वती वैद्य नाम की माहिला के हैं, जो 32 वर्ष की थी. वह उस फ्लैट में 56 वर्षीय मनोज साने के साथ रहती थी, जिस ने दरवाजा खोला था.

मनोज आसानी से पुलिस की गिरफ्त में आ गया था. हालांकि वह दरवाजा खुलते ही भागने की कोशिश में भी था, जिसे पुलिस और सोसाइटी के लोगों ने नाकाम कर दिया. वह भाग न सका. वहीं पकड़ लिया गया. उस की हालत उस वक्त एकदम से विक्षिप्तों जैसी हो गई थी. चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं. ऐसा लग रहा था कि मानो उस का कोई बड़ा गुनाह सब की नजरों में आ गया हो. फिर भी वह एक ही रट लगाए हुए था, “मैं ने उसे नहीं मारा… खुद जहर खा लिया था उस ने.”

इस पर एक पुलिसकर्मी ने डपट दिया, “चुप रह, बकवास करता है. चल अभी कमरे में दिखा हमें.”

प्रेशर कुकर में मिले लाश के टुकड़े

और फिर मनोज को धकियाती हुई पुलिस फ्लैट के अंदर फैल गई. वहां उन्हें सरस्वती के शव के और कई टुकड़े मिले. किचन में काफी बरतन और एक बाल्टी में लाश के कई टुकड़े मिले. जिन में से कुछ को प्रेशर कुकर में पकाया गया था तो कुछ को भूना गया था. पकेअधपके मांस को देख कर सभी लोग हैरान हो गए. लाश के टुकड़ों को जांच के लिए मुंबई के जे.जे. अस्पताल में भेज दिया गया. यह मामला सामने आते ही दिल्ली में हुए श्रद्धा वालकर मामले की यादें ताजा हो गईं.

संभ्रांत इलाके के फ्लैट से टुकड़ों में मिली लाश की खबर तुरंत चारों ओर फैल गई. सोशल मीडिया से ले कर टीवी चैनलों पर और कुछ समय बाद ही यह खबर लोगों के मोबाइल में पहुंच गई थी. जबकि इसे अगले रोज प्रिंट मीडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया. उस बारे में तरहतरह की बातें छपने से इलाके में सनसनी फैल गई. सोसाइटी के लोग इस घटना के बारे में सुन कर दंग रह गए. यह बेहद लोमहर्षक घटना थी.

एसएचओ ने इस घटना की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दे कर सोसाइटी के लोगों से भी गहन पूछताछ की. उन से मिली जानकारी से पता चला कि सरस्वती और मनोज इलाके में पिछले कई सालों से किराए पर रह रहे थे. उन के आपसी रिश्ते को ले कर भी लोगों के बीच संदेह था, क्योंकि उन की उम्र का भी बड़ा अंतर था. किसी ने प्रेमी युगल बताया तो किसी ने आपसी रिश्तेदार.

सरस्वती वैद्य की मौत के बारे में पूछने पर मनोज ने दावे के साथ बताया कि वह 3 जून, 2023 को ही मर गई थी. उस ने जहर पी कर आत्महत्या कर ली थी. सरस्वती को उस ने नहीं मारा. जब वह 3 जून की सुबह सो कर उठा, तब पाया कि सरस्वती के मुंह से झाग निकल रहे हैं. उस की नब्ज टटोली, जो नहीं चल रही थी. सांसें भी बंद हो चुकी थीं. सरस्वती की इस हालत को देख कर वह डर गया कि लोग कहीं उसे ही उस की मौत का जिम्मेदार न ठहरा दें. इसी डर की वजह से उस ने लाश को ठिकाने लगाने का फैसला कर लिया.

आत्महत्या का नहीं मिला सबूत

पुलिस को मनोज की बातें काफी अटपटी लगीं. पुलिस ने महसूस किया कि मनोज ने सरस्वती की लाश के टुकड़ों को ठिकाने लगाने के बाद आत्महत्या की योजना बनाई थी. बचने के लिए उस ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की.

पुलिस को सरस्वती की आत्महत्या के भी कोई ठोस सबूत नहीं मिले. किसी तरह का लिखा नोट या फिर मोबाइल में टेक्स्ट मैसेज, फोटो या वीडियो भी नहीं था. लाश की जो हालत थी, उस से जहर खा कर जान देने जैसी बात की पुष्टि आसान नहीं थी.

पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि मनोज एचआईवी संक्रमित है. और उस के दावे के मुताबिक सरस्वती उस की प्रेमिका जरूर थी, लेकिन उस ने कभी भी शारीरिक संबंध नहीं बनाए थे. जबकि पुलिस को उन के संबंधों और सरस्वती की लाश को ठिकाने लगाने संबंधी कई बातें सुनने को मिलीं. सोसाइटी के कुछ लोगों ने बताया कि मनोज आवारा कुत्तों को मांस खिलाता हुआ देखा गया था, जो सरस्वती के शरीर के हो सकते हैं. ऐसा करते हुए उसे पहले कभी नहीं देखा गया था.

इस मामले की छानबीन के क्रम में पुलिस को सरस्वती की 4 बहनों के बारे में भी जानकारी मिली, जबकि लोगों को उस के बारे में पता था कि वह अनाथालय में पलीबढ़ी है. उस के मातापिता या परिवार के बारे में किसी का कुछ नहीं पता.

बहनों को थाने बुलवा कर उन से पूछताछ की गई. उन के बयान के आधार पर मनोज साने के खिलाफ हत्या, सबूत मिटाने और लाश को ठिकाने लगाने के जुर्म में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई. इस हत्याकांड में मीरा रोड की नया नगर थाने की पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 और 201 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था.

पूछताछ में पता चला कि सरस्वती वैद्य और मनोज के रिश्ते की कहानी एक राशन की दुकान से शुरू हुई थी. यहीं दोनों की पहली मुलाकात साल 2014 में हुई थी. इस बारे में मनोज साने ने बताया कि बोरीवली की एक राशन की दुकान पर सरस्वती मिली थी. उन की पहली जानपहचान बेहद दिलचस्प थी. तब दोनों दुकानदार से एक ही बात पर लड़ पड़े थे.

राशन की दुकान पर हुई थी मुलाकात

दरअसल, दुकानदार चावल का वजन कम तौल रहा था, जो मनोज को मिलना था. सरस्वती वहीं खड़ी दुकानदार की हरकत देख रही थी. जब सरस्वती ने इस का विरोध किया, तब शांत स्वभाव का मनोज भी उस का साथ देने लगा और उन्होंने इस की शिकायत मापतौल विभाग में करने की चेतावनी दी. हालांकि बाद में पता चला कि मनोज कभी उसी राशन की दुकान पर काम करता था.

मनोज की बातों से सरस्वती को एहसास हुआ कि वह एक गंभीर और सुलझा हुआ इंसान है. दिखने में जरूर समय का मारा हुआ निराश और हताश दिखता है, लेकिन उसे मानसम्मान की जरूरत है. इस के बाद उन दोनों की कई मुलाकातें हुईं. धीरेधीरे सरस्वती उस की ओर खिंचती चली गई. मनोज ने भी महसूस किया कि सरस्वती के उस की जिंदगी में आने से कुछ अच्छा महसूस कर रहा है.

सरस्वती वैद्य ने मनोज को अपना परिचय एक अनाथ लडक़ी के रूप में दिया. उस का कहना था कि उस के आगेपीछे कोई नहीं है. उसे रिश्ते की एक ऐसी डोर चाहिए, जो उस की भावनाओं को समझ सके, प्यार दे सके. इस तरह से सरस्वती और मनोज के बीच प्रगाढ़ रिश्ते की शुरुआत हुई. रिश्ता परवान चढ़ा और फिर दोनों 2 साल के अंदर ही साथसाथ रहने लगे. मनोज आकाशदीप सोसाइटी में पहले से रह रहा था.

इस हत्याकांड की गहन छानबीन की जानकारी डीसीपी जयंत बजलवे ने देते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए मनोज को अदालत में पेश करने के बाद उसे 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

साइको किलर था मनोज

पुलिस ने पाया कि मनोज एक साइको किलर की तरह पेश आया था. उस ने हैवानियत की सारी सीमाओं को तोड़ दिया था. मनोज साने ने अपनी लिवइन पार्टनर की न सिर्फ बेरहमी से हत्या की थी, बल्कि उस के शरीर के कई टुकड़े भी कर दिए थे. बाद में उस ने इन टुकड़ों को धीरेधीरे ठिकाने लगाना शुरू किया था.

यह भी पता चला कि शरीर के टुकड़ों को ठिकाने लगाने के लिए वह उन्हें पहले कुकर में उबालता था और उस के बाद उन्हें ठिकाने लगाता था. कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि उबालने के बाद वह टुकड़ों को पीस कर टायलेट में फ्लश कर देता था, ताकि इस हत्या के बारे में किसी को पता न चले. वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि वह कुत्तों को यह टुकड़े खिलाता था. पड़ोसियों ने टायलेट की पाइपलाइन जाम होने की शिकायत की थी.

मनोज साने को ले कर उस के एक पड़ोसी ने पुलिस को एक अजीब बात बताई. उन्होंने कहा कि मनोज और उस की लिवइन पार्टनर उन से एकदम कटेकटे रहते थे. वह किसी से भी ज्यादा मतलब नहीं रखते थे. एक फ्लोर पर 4 फ्लैट हैं. बाकी लोगों के घर के लोगों का अकसर एकदूसरे के यहां आनाजाना होता था, लेकिन उस का दरवाजा हमेशा बंद रहता था. वे लोग सिर्फ आनेजाने के लिए ही दरवाजा खोलते थे.

पुलिस की जांच में कई सनसनीखेज खुलासे हुए. जिस में एक उस की आदत भी थी. मनोज ने ही पुलिस को बताया कि उस ने वेब सीरीज देख कर सरस्वती की हत्या करने का प्लान बनाया था. साथ ही श्रद्धा वालकर मामले की भी पूरी स्टडी की थी. इस के अलावा उस ने बौडी कंपोज करने का तरीका गूगल पर सर्च किया था.

दूसरी सनसनीखेज जानकारी दोनों के अनाथ होने को ले कर भी थी. मनोज साने लोगों से कहता था कि वह और सरस्वती दोनों अनाथ हैं. इस की सच्चाई का भेद तब खुल गया, जब पुलिस छानबीन के दरम्यान दोनों के रिश्तेदार सामने आ गए.

सरस्वती की 4 और बहनें हैं. मातापिता के तलाक के बाद उन का पालनपोषण एक अनाथालय में हुआ था. वहीं, आरोपी मनोज के रिश्तेदार बोरीवली में रहते हैं और बोरीवली (पश्चिम) के पौश इलाके भाईनाका की साने रेजीडेंसी में उस का एक फ्लैट है. यह फ्लैट मनोज ने 30 हजार रुपए मासिक किराए पर दे रखा है.

लाश के किए 100 टुकड़े

यहां तक कि मनोज और सरस्वती शुरुआती दिनों में 2 साल तक इसी फ्लैट में रहे थे. पुलिस के अनुसार मनोज एक कोल्ड माइंडेड इंसान है और उस ने बहुत सोचसमझ कर हत्या को अंजाम दिया है. उस ने बताया कि लाश के टुकड़े करने से पहले उस का फोटो भी खींचता था. उस ने लाश के करीब 100 टुकड़े किए थे. मोबाइल और फोटो पुलिस ने कब्जे में ले लिया है. आगे की जांच में इन से मदद मिलेगी.

जांच में सरस्वती की मृत देह पर मारपीट के कई निशान पाए गए. मोबाइल में खींची गई तसवीरें और सरस्वती की मृत देह पर मारपीट के निशान मनोज की दरिंदगी की मंशा को जाहिर कर रहे थे. इस के अलावा गूगल की सर्च हिस्ट्री कई अहम राज खोल सकती है.

मनोज के बारे में पुलिस को एक अहम राज उस के एचआइवी पीडि़त होने का भी मालूम हुआ. इस का दावा उस ने खुद किया. उस ने बताया कि इस की जानकारी उसे 2008 से ही थी. उस का कहना है कि वह इलाज करवा रहा था और सरस्वती से उस ने कभी शारीरिक संबंध नहीं बनाए. पुलिस उस के सभी दावों की जांच कर रही है.

वह विगत 29 मई से ही काम पर नहीं जा रहा था. उस ने कई लोगों को अपने और सरस्वती के बीच मामाभांजी का रिश्ता बताया था. जबकि दोनों की शादी के बाद सरस्वती की बहनें उस के घर खाना खाने आई थींं. पूछताछ में मनोज ने बताया कि दोनों के बीच आर्थिक तंगी को ले कर झगड़ा होता था. 3 जून की रात भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था. इस अनुसार संभव है कि मनोज ने उस की पहले हत्या कर दी हो और फिर बाद में शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई हो.