Crime Story in Hindi : बैंकाक का सैक्स स्कैंडल

Crime Story in Hindi : 34 साल की विलावान सिका गोल्फ एम्सावत उर्फ मिस गोल्फ ऐसी सुंदरी थी, जो अच्छेअच्छे संन्यासियों तक को अपने रूपजाल में फांस लेती थी. अपनी मोहिनी अदा के चलते उस ने बैंकाक के प्रसिद्ध बौद्ध मंदिरों के मठाधीशों से न सिर्फ अवैध संबंध बनाए, बल्कि उन के अश्लील फोटो व वीडियो के जरिए उन से 91 करोड़ से अधिक रुपए भी वसूले. आखिर मिस गोल्फ कैसे फांसती थी बौद्ध संन्यासियों को अपने जाल में?

थाईलैंड के बैंकाक में स्थित वाट त्रि थोत्सथेप वोराविहान बौद्ध मंदिर के मठाधीश चाओखुन अर्ज एक आकर्षक कदकाठी का व्यक्ति है. उस की दैहिक बनावट, बौडी लैंग्वेज और बातचीत करने के लहजे को देख कर कोई भी उस की उम्र 58 वर्ष होने का अनुमान नहीं लगा पाता था. यह कहें कि वह किसी फिल्मी नायक की तरह जवान दिखता था. उस की सोच पर भी उम्र का कोई असर नहीं हुआ था. कहने को वह बौद्ध धर्म का एक संत था, लेकिन आधुनिक सोच से भरा हुआ था. उस की बातें नए जमाने के गैजेट और इंटरनेट और सोशल मीडिया फ्रेंडली युवाओं की तरह होती थीं.

चाओखुन अर्ज का असली नाम फ्राथेप वाचिरापामोक था, लेकिन वह मठ के लोगों के बीच अर्ज के नाम से लोकप्रिय था. त्रि थोत्सथेप वोराविहान थाईलैंड के सब से महत्त्वपूर्ण बौद्ध मंदिरों में से एक है. इस का ऐतिहासिक महत्त्व है. इस का निर्माण 19वीं सदी में वहां के तत्कालीन राजतंत्र के शासक द्वारा किया गया था. इस की भव्यता में शाही झलक दिखती है. यहां सभी तरह की आधुनिक और उत्तम रहनसहन की सुविधाएं उपलब्ध हैं. चाओखुन जब से मठाधीश के पद पर नियुक्त हुआ था, तब से उसे मंदिर प्रशासन की तरफ से शाही सुविधाएं और संसाधन मिल गए थे.

साथ ही उस के पास अपने निजी कामकाज के लिए पर्याप्त समय भी होता था. जब भी वह फुरसत में होता, अपना लैपटाप खोल कर देशदुनिया से जुड़ जाता था, उस ने फेसबुक पर अपनी आईडी भी बना रखी थी. उस के हजारों में वर्चुअल फ्रेंड थे. उन के साथ वह अध्यात्म, सेहत, सलाह और समाज सरोकार की बातें करता रहता था. इस दौरान उस की नजर रील्स, गेम्स, औफर आदि पर बनी रहती थी.

वह इस में कम से कम 2 से 3 घंटे तक गुजारता था. फेसबुक में नएनए दोस्त तलाशने से ले कर उस के बारे में जांचपड़ताल करने आदि पर ध्यान देता था. वैसे तो वह फ्रेंड रिक्वेस्ट को बहुत सोचसमझ कर ही स्वीकारता था. हालांकि उन में अधिकतर उस के परिचित या फिर अनुयायी थे. उन के साथ फेसबुक, वाट्सऐप और मैसेंजर के माध्यम से संपर्क बनाता था. वह किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत या पारिवारिक समस्या या परेशानी से निकालने का भी काम करता था.

बात 16 मई, 2024 की थी. रात का वक्त था. पूरे बौद्ध मठ का परिसर नींद के आगोश में था. नि:शब्द शांति थी. इसी एकांत में चाओखुन अर्ज की अंगुलियां लैपटाप के कीबोर्ड पर चल रही थीं. सामने स्क्रीन पर फेसबुक से निकली रोशनी में उस के चेहरे पर चमक बनी हुई थी. माउस पैड में अंगुली सरकाते हुए अचानक उस की नजर एक रिक्वेस्ट पर ठहर गई. बेहद खूबसूरत तसवीर थी. दोस्ती करना चाहती थी. चाओखुन ने तुरंत उस की प्रोफाइल खोली. उस का अबाउट पढऩा शुरू किया.

नाम विलावान सिका गोल्फ एम्सावत उर्फ मिस गोल्फ लिखा था. उम्र 34 वर्ष थी. प्रोफाइल में उस ने स्वयं को नोनयाबुरी में एक आलीशान विला की मालकिन और महिला उद्यमी बताया था. उस ने खुद को बौद्ध धर्म का अनुयायी बताया था. वह चाओखुन अर्ज की पहले से ही फालोअर भी थी. मिस गोल्फ की प्रोफाइल में कई तसवीरें भी थीं. कई तसवीरों में अल्ट्रा मौडर्न ड्रेस पहने थी.

उस की तसवीरों ने संन्यासी चाओखुन की कामुकता को उकसा दिया था. एक बार मन भटका तो मिस गोल्फ की सुंदरता और सैक्स अपील का कीड़ा उस संत के मस्तिष्क को कुरेदने लगा था. फिर उस की अंगुली ने कब रिक्वेस्ट बटन को दबा दिया, पता ही नहीं चला. अगले पल संन्यासी का मन कुछ और जिज्ञासाओं से भर गया था. मैसेजिंग शुरू कर दिया. ‘हाय!’ के बाद दनादन 2-3 सवाल कर डाले…

”कहां से हैं?’’

”क्या करती हैं?’’

”आप की सुंदरता का राज क्या है?’’

इन के जवाब में उस ने लिखा, ”मैं महसूस करती हूं कि आप के दिल के करीब हूं… आप से फ्रेंडशिप कर भाग्यशाली बनना चाहती हूं. देखिए, आप से दोस्ती के बगैर मेरी आध्यात्मिक पिपासा शांत नहीं हो पाएगी. मन को शांति के लिए जरूरी है, संत समागम किया जाए!’’

मिस गोल्फ का भावुक मैसेज चाओखुन अर्ज के दिल की गहराइयों तक चला गया था. वह खुद को चाह कर भी नहीं रोक पाया और धड़कते दिल से अपनी इस नई दोस्त पर लिख डाला, ‘मिस गोल्फ! जितनी सुंदर आप हो, उस से अधिक खूबसूरत आप के शब्द! मन आनंदित हो गया!’

दोनों के दिलों में भावनाओं का उफान आ चुका था. दनादन मैसेजिंग का दौर शुरू हो गया. काफी समय तक यह सब चलता रहा. वह चाओखुन के लिए बहुत ही खुशनुमा था. फिर वह सो गया. अच्छी नींद आई. अगले रोज दिनचर्या में लगा हुआ था…

उस के भीतर एक नई सी स्मृति का संचार हो गया था. हर काम को वह बड़ी समझदारी और मुसकराते हुए कर रहा था, लेकिन उस की आंखें बारबार हाल में टंगी दीवार घड़ी पर भी बराबर लगी हुई थीं. आज समय उसे काफी बड़ा और लंबा सा लग रहा था. जैसेतैसे चाओखुन ने रात के 9 बजे तक का समय किसी तरह पास किया. रात के भोजन करने के बाद उस ने अपने सभी अनुचरों को छुट्टी दे दी. अब वह हमेशा की तरह अपने एकांत के निजी समय में था, किंतु उस रात उस में गजब का उतावलापन था. लैपटाप औन करते ही तुरंत फेसबुक के अपने पेज पर था. कई मैसेज उस के जवाब के इंतजार में थे.

मैसेज को पढऩे के बाद चाओखुन अर्ज के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. वह मैसेज मिस गोल्फ के थे. अपने प्रतिष्ठित पद की गरिमा और मैसेज भेजने वाली की उम्र के अंतर को ले कर वह सतर्कता बरतना चाहता था. तभी ‘गुड नाइट!’ के साथ ‘हाय हैंडसम!’ का मैसेज आया.

चाओखुन ने भी जवाब में ‘हैलो!…हाउ आर यू?’ लिख दिया.

”आप की फ्रेंडशिप पा कर बहुत खुशी हुई है. मैं आप को दिल से शुक्रिया अदा करती हूं. मेरे लिए यह प्यार की तरह मिला उपहार है. मैं कितनी खुश हूं, इस का बयान नहीं कर सकती. इस के लिए आप का तहेदिल से धन्यवाद करती हूं मिस्टर चाओखुन! आप बहुत हैंडसम दिखते हैं… कितनी उम्र होगी आप की?’’ मिस गोल्फ ने लिखा.

”जी, 2 साल बाद 60 का हो जाऊंगा.’’ चाओखुन ने लिखा.

”अच्छा! लेकिन लगते तो 40 प्लस के हैं.’’ मिस गोल्फ ने हैरानी जताई.

”तुम भी तो 20 प्लस की दिखती हो, लेकिन प्रोफाइल के अनुसार 33 साल की हो. ईश्वर ने गजब की सुंदरता दी है. भाग्यशाली हो!’’

”मुझे आज तक आप जैसा हैंडसम इंसान ही नहीं मिला, आप को पा कर धन्य हो गई हूं… मिलना चाहूंगी.’’ इसी के साथ गोल्फ ने प्यार का धड़कता हुआ इमोजी भेज दिया.

”किंतु मिस गोल्फ, आप को दोस्ती और प्यार करने के लिए बहुत से नौजवान मिल सकते थे, फिर मैं ही क्यों?’’ चाओखुन ने गोल्फ के इशारे को समझते हुए लिखा.

”मैं उम्र से नहीं, बल्कि वैसा पुरुष चाहती हूं, जिस में पुरुषार्थ हो. गंभीरता हो. विचार हो. आजादी पसंद हो. व्यवहारिक हो. आस्थावान हो… अब भला आप से बेहतर मेरे लिए और कोई नहीं हो सकता. प्यार तो आंतरिक भावना की अनुभूति है… मुझे तो ऐसा लगता है, जैसे वह सभी गुण आप में हैं और मेरी चाहत आप को पा कर पूरी हो गई.’’ मिस गोल्फ ने लिखा.

”तुम बातें बहुत लुभावनी करती हो. मन मोह लिया.’’

”क्यों न हम लोग कहीं मिलें?’’

”जरूर, जल्द समय बताऊंगा.’’

इस के बाद चाओखुन और मिस गोल्फ का प्यार तेजी से परवान चढऩे लगा था. पहले वे वर्चुअल थे, जल्द ही दोनों वास्तविकता की धरातल पर आ चुके थे. उन का आपस में मिलनाजुलना भी शुरू हो गया… और चाओखुन अर्ज ने अपने संत की गरिमा, मानमर्यादा और संकल्प के बावजदू गोल्फ के साथ अवैध संबंध तक बना लिया. कहते हैं न कि सुखचैन की बंसी ज्यादा समय तक नहीं बजती. अगर यह बंसी अय्याशी से भरी हो, तब तो कभी भी इस पर ग्रहण लग सकता है. ऐसा ही कुछ बौद्ध संत चाओखुन अर्ज के साथ हुआ.

चाओखुन अर्ज और गोल्फ की मौजमस्ती एक साल तक खूब परवान चढ़ी. उन के बीच काफी लेनदेन हुआ. इस का अड्डा मिस गोल्फ का आलीशान घर था, जहां अय्याशी के सारे संसाधन थे. चाओखुन ने इसे अपने शौक में शामिल कर लिया था, जबकि गोल्फ के लिए यह आमदनी का जरिया था. गोल्फ अपने कामधंधे को सात तालों में छिपा कर रखती थी. इस बारे में उस ने कभी भी चाओखुन को कुछ नहीं बताया. फिर भी न जाने कैसे गोल्फ के कुछ कारनामों की जानकारी बैंकाक की पुलिस को हो गई.

पुलिस को मिलीं 56 हजार पोर्न वीडियो

अचानक जुलाई 2025 के पहले सप्ताह में मिस गोल्फ के महलनुमा घर पर छापेमारी हुई. उसे जानने वाले लोग हैरान रह गए कि आखिर गोल्फ ने क्या किया, जो उस के घर पर पुलिस की पूरी फौज आ गई. थाईलैंड सरकार की नजर में उस ने क्या गैरकानूनी काम किया? खैर, इस का खुलासा 15 जुलाई, 2025 को हो गया. चौतरफा सनसनीखेज खबर फैल गई. जिस ने भी उस बारे में सुना, उस ने दांतों तले अंगुली दबा ली. और फिर यह मामला पूरी दुनिया में फैल गया.

दरअसल, थाइलैंड पुलिस ने एक बड़े सैक्स ब्लैकमेल रैकेट का खुलासा किया था. इस बारे में सबूत जुटाए थे. उस में लिप्त लोगों में बौद्ध भिक्षुकों की सूची भी थी, जबकि इस का मुख्य आरोपी मिस गोल्फ थी. उस के घर से 56,000 पोर्न यानी अश्लील वीडियो और 80,000 न्यूड तसवीरें बरामद की गई थीं. उस में उन बौद्ध भिक्षुओं के अश्लील अय्याशी के वीडियो थे, जिन्होंने बौद्ध धर्म में त्याग, पवित्रता और संन्यास की सौगंध खाई थी. उन्हीं भिक्षुओं में चाओखुन अर्ज का नाम भी था. उस के गोल्फ के साथ अंतरंग संबंधों के कई वीडियो थे.

इस मामले में पकड़ी गई 35 साल की विलावान सिका गोल्फ एम्सावत उर्फ मिस गोल्फ पर कई बौद्ध भिक्षुकों को यौन संबंध बनाने के लिए उकसाने और फिर उन्हें ब्लैकमेल करने का आरोप लगा. रौयल थाई पुलिस सेंट्रल इनवैस्टिगेशन ब्यूरो के अनुसार उस के घर की तलाशी के दौरान बौद्ध भिक्षुकों को ब्लैकमेल के लिए इस्तेमाल की गई हजारों अश्लील तसवीरें और हजारों अश्लील वीडियो जब्त कर लिए. साथ ही इस में संलिप्त थाईलैंड के 9 बौद्ध भिक्षुकों के नाम सामने आने के बाद उन्हें उन के मठों से निष्काषित कर दिया गया.

पुलिस को बैंकाक के उत्तर में नौथबुरी प्रांत में रहने वाली मिस गोल्फ के पास से कई चोरी के सामान भी मिले. उस के बैंक खातों से यह भी पता चला कि कई बौद्ध भिक्षुकों एवं एक बौद्ध मंदिर के बैंक खाते से एक वरिष्ठ भिक्षुक चाओखुन अर्ज ने उस के खाते में 11.9 मिलियन अमेरिकी डौलर यानी 102.33 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवाए थे. इन में से ज्यादातर रकम बौद्ध भिक्षुकों द्वारा मिस गोल्फ के खाते में ट्रांसफर की गई थी. जांच में इस बात का भी पता चला कि इन में से अधिकांश रकम मिस गोल्फ द्वारा औनलाइन खेली जाने वाली जुए वाली वेबसाइट पर खर्च की गई थी.

कौन है मिस गोल्फ

इस गंभीर और संवेदनशील मामले के सामने आने के बाद थाईलैंड के मठ प्रशासन पर कई सवालिया निशान खड़े हो गए. देश भर में थेरवाद संप्रदाय के बौद्ध भिक्षुकों की संख्या काफी अधिक है, जिन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है. महिलाओं को केवल छूने मात्र से इन के ब्रह्मचर्य पर सवाल उठने लगते हैं. सैक्स स्कैंडल और ब्लैकमेलिंग में फंसी विलावान सिका गोल्फ एम्सावत उर्फ सिका गोल्फ उर्फ मिस गोल्फ फिचित प्रांत के साकलेक जिले की मूल निवासी है. मीडिया में उस का नाम ‘सिका गोल्फ’ प्रचारित है. ‘सिका’ बौद्ध भिक्षुओं द्वारा महिलाओं के लिए एक आदर की उपाधि है.

गोल्फ एक गरीब परिवार में पलीपढ़ी युवती है. पापा उस की मम्मी जेनी को उस के जन्म के कुछ सालों बाद ही छोड़ कर चले गए थे. गरीबी से जूझते हुए उस की मम्मी ने किसी तरह से पालापोसा. इस कारण उस की ज्यादा पढ़ाई नहीं हो पाई. बड़ी होने पर उस में स्वच्छंदता आ गई. अपने मन की मालिक बन गई. युवावस्था आतेआते वह बेहद खूबसूरत दिखने लगी. उस की सुंदरता पर हर कोई मोहित हो जाता था. वह इस का नाजायज फायदा उठाने लगी.

पढ़ाई से कोई वास्ता नहीं था, लेकिन अच्छे रहनसहन, फैशन और पहनावे की ललक थी. इस की पूर्ति के लिए उस ने अमीर लड़कों को फंसाना शुरू किया. उन से दोस्ती की, बौयफ्रेंड बनाया. उन के साथ घूमनेफिरने और मटरगश्ती करने लगी. यह सब करते हुए उस का कौमार्य कब भंग हुआ, उसे यह सब याद नहीं. इस बात की उसे कोई चिंता नहीं थी. जब वह हर क्लास में बारबार फेल हो जाती थी, तब उस की मम्मी जेनी उसे बारबार अच्छेबुरे की नसीहतें देती थी, लेकिन गोल्फ पर उस का कोई असर नहीं होता था.

गरीबी और अभाव में घुटन महसूस कर चुकी गोल्फ कभीकभी तो अपनी मम्मी से भी झगड़ पड़ती थी. ताने देती थी कि तुम ने मेरे उस धोखेबाज पापा से शादी कर मुझे क्यों पैदा किया, जब तुम मुझे अच्छे कपड़े, अच्छा खाना, अच्छा रहना नहीं दिलवा सकती थी. मुझे इस दुनिया में क्यों आने दिया. वैसे गोल्फ ने एक स्टोर में जब नौकरी की शुरुआत की थी, तभी उस की मम्मी की तबीयत अचानक एक दिन ज्यादा खराब हो गई. अच्छी देखरेख नहीं होने के कारण उस की मम्मी जेनी की मृत्यु हो गई.

मम्मी की मौत के बाद गोल्फ पूरी तरह से आजाद हो गई थी. उस ने अपना घर और अपनी मम्मी के सारे गहने बेच दिए. नई नौकरी और सुनहरे भविष्य को बनाने के लिए पुश्तैनी शहर छोड़ कर बैंकाक आ गई. एक बड़े जनरल स्टोर में रिसैप्शनिस्ट की नौकरी कर ली. एक छोटा सा घर किराए पर ले लिया. यहां रहते हुए उस के सपनों ने एक नई सुनहरी उड़ान भरनी शुरू कर दी थी. उसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम पर चैटिंग का शौक चढ़ गया था. उसे नएनए पुरुष दोस्त बनाना और फिर उन के साथ अश्लील चैटिंग करना बहुत पसंद था.

वर्ष 2018 के शुरू में उस की फेसबुक द्वारा एक बौद्ध भिक्षु सोमचाई (परिवर्तित नाम) के साथ दोस्ती हो गई. उस के बाद उन दोनों ने आपस में अपने मोबाइल नंबर शेयर किए. प्यार भी ऐसा रंग लाने लगा कि दोनों मिलने लगे. एक मुलाकात में ही दोनों में प्यार का रंग ऐसा चढ़ा कि सोमचाई ने गोल्फ के लिए एक खूबसूरत फ्लैट किराए पर दिलवा दिया. सोमचाई उस के बाद गोल्फ से मिलने अकसर उस फ्लैट पर आने लगा. दोनों लिवइन  में रहने लगे. गोल्फ कुछ दिनों बाद गर्भवती हो गई और उस ने एक बेटे को जन्म दिया. 2019 में बेटा होने के बाद सोमचाई ने गोल्फ से दूरी बढ़ानी शुरू कर दी तो उस ने उसे मीडिया के सामने बदनाम करने की धमकी दे डाली.

इस धमकी का बौद्ध भिक्षुक सोमचाई पर असर हुआ. उस ने बचने के लिए गोल्फ को एकमुश्त 86,206 डौलर (लगभग 74,99,922 रुपए) और प्रतिवर्ष 2,294 डौलर (लगभग 1,99,578 रुपए) बेटे की परवरिश करने के लिए देने को तैयार हो गया. इस के बाद दोनों का मिलनाजुलना लगभग समाप्त होता चला गया था. उन के बीच केवल पैसों का ही लेनदेन होता था.

उस के बाद गोल्फ के दिमाग में तो मानो नया आइडिया आ गया. स्वच्छंदता के मानो पंख लग गए. उस ने अपना टारगेट अब बौद्ध मठाधीशों और बौद्ध भिक्षुओं को बनाना शुरू कर दिया. वह हमेशा 50 वर्ष से अधिक उम्र के बौद्ध मठाधीशों को अपना शिकार बनाने लगी. पहले वह उन बौद्ध भिक्षुओं से फेसबुक के माध्यम से दोस्ती करती थी, फिर अपनी कामोत्तेजक जवानी की तसवीरें भेज कर उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती थी. उस के बाद जैसे ही उसे शिकार फंसता नजर आता तो उन के साथ रसीली और कामवासना उकसाने वाली बातें करनी शुरू कर देती थी.

जब उसे लगता कि शिकार फंस चुका है, तब वह उसे अपनी रसीली बातों में फंसा कर किसी अनजान होटल या अपने फ्लैट पर अवैध संबंध बनाने के लिए बुला लेती थी.  उस ने अपने फ्लैट के बैडरूम और बाथरूम में हिडन कैमरे लगा रखे थे. यहां तक कि जब वह किसी होटल में बौद्ध भिक्षुओं को आमंत्रित करती तो वह उन के आने से पहले ही बैडरूम और बाथरूम में हिडन कैमरे लगा देती थी. इस तरह उन की अश्लील वीडियो बना कर रख लेती थी. करीब 5-6 महीने के बाद वह अपने प्रैगनेंट होने का झांसा दे कर उन्हें अश्लील तसवीरें और वीडियो दिखाती थी. उस के बाद ब्लैकमेल शुरू कर देती थी.

गोल्फ का खेल ऐसा हुआ खत्म

उस के इस खेल के अंत की शुरुआत 14 जून, 2025 को तब हो गई, जब विलावान सिका यानी गोल्फ ने बैंकाक की रौयल थाई पुलिस में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई. अपनी शिकायत में विलावान ने लिखा कि वाट त्रि थोत्सथेप वोराविहान के बौद्ध मठाधीश फ्राथेप वाचिरापामोक उर्फ चाओखुन अर्ज उस के पति हैं और उन से उन का एक बेटा भी है. विलावान सिका ने दावा किया कि पहले कुछ समय तक चाओखुन अर्ज उस के और बच्चे के भरणपोषण के लिए पैसे नियमित रूप से देते रहे, मगर अब पैसे देने से मुकर रहे हैं. पिछले काफी समय से चाओखुन अर्ज ने उसे बिलकुल भी पैसा नहीं दिया है.

सिका ने यह भी दावा किया कि गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद से अब तक चाओखुन अर्ज के ऊपर उस के 7.2 मिलियन बाट (भारतीय करेंसी में लगभग एक करोड़ 70 लाख 7 हजार 200 रुपए) बकाया हैं. कृपया चाओखुन अर्ज से मेरे बकाया रुपए दिलवाने की कृपा की जाए.

धर्मगुरु ने करोड़ों रुपए लुटा दिए मिस गोल्फ पर

यह खबर जैसे ही बैंकाक राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख पोल जनरल कितरत फनफेट तक पहुंची तो उन्होंने इस की विस्तृत जांच के लिए तुरंत केंद्रीय जांच ब्यूरो के डिप्टी कमिश्नर पोल मेजर जनरल जारुनाकियात पंकव के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन कर दिया. वाट त्रि थोत्सथेप वोराविहान मंदिर, बैंकाक, थाईलैंड का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे आमतौर पर ‘वाट फो’ के नाम से जाना जाता है. इस प्रसिद्ध मंदिर का इतिहास 16वीं शताब्दी से जुड़ा है, जब इसे एक मठ के रूप में स्थापित किया गया था.

थाईलैंड के राजा राम प्रथम ने 18वीं शताब्दी में इस का जीर्णोद्धार कराया और राजा राम तृतीय के शासन काल में इसे वर्तमान स्वरूप दिया गया, जिस में लेटे हुए बुद्ध की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई. 18 जून, 2025 को राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख के आदेश के बाद बैंकाक की रौयल थाई पुलिस के केंद्रीय जांच ब्यूरो के डिप्टी कमिश्नर पोल मेजर जनरल जारुनकियात पंकव के  नेतृत्व में वाट त्रि थोत्सयेप मंदिर वोराविहान के मठाधीश चाओखुन अर्ज की तलाशी के लिए छापा मारा.

पुलिस ने जब मंदिर के अन्य भिक्षुओं से बातचीत की तो पता चला कि मठाधीश चाओखुन वहां से सीमा पार लाओस भाग चुका है. उस के बाद पुलिस टीम ने जब मठ के खाते की विस्तृत जांचपड़ताल शुरू की तो जांच में यह पाया गया कि मठाधीश फ्राथेप वाचिरा पामोक उर्फ चाओखुन अर्ज ने मंदिर के खातों से 9.05 मिलियन डालर (भारतीय करेंसी में लगभग 75 करोड़ 43 लाख 91 हजार 723 रुपए) की धनराशि अपने निजी खाते में ट्रांसफर की थी.

लेकिन असली जानकारी तभी सामने आ सकती थी, जब चाओखुन अर्ज से पूछताछ होती, इसलिए रौयल थाई पुलिस अब चाओखुन अर्ज की तलाश में जगहजगह छापे मारने लगी. चाओखुन भी जानता था कि वह अधिक समय तक पुलिस की नजरों से छिपा नहीं रह सकता है, इसलिए अंतत: चाओखुन अर्ज ने 27 जून, 2025 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.

पुलिस द्वारा विस्तृत पूछताछ में चाओखुन अर्ज ने बताया कि करीब 2 साल पहले विलावान सिका उर्फ मिस गोल्फ ने उस से फेसबुक के माध्यम से संपर्क किया था और दोस्ती बढ़ाई. बाद में हमारे बीच यौन संबंध स्थापित हो गए, उस के बाद हमारा एक बेटा भी हो गया. फिर विलावान मुझ से पैसे की मांग करने लगी. पहले मैं उसे काफी पैसे देता रहा. लेकिन जब मुझे इस बात की जानकारी हुई कि विलावान के अन्य बौद्ध भिक्षुओं के साथ भी संबंध हैं तो मैं ने धीरेधीरे उस से दूरियां बढ़ानी शुरू कर दी.

उस के बाद विलावान मुझ से फोन कर के मुझ से पैसे मांगने लगी, जब मैं ने और पैसे देने से इंकार कर दिया तो उस ने मेरे साथ एक सौदा किया कि अगर उसे एकमुश्त 7.2 मिलियन बाट (लगभग 17 करोड़ भारतीय रुपए) दे दूं तो वह मेरे साथ खींचे गए अश्लील वीडियो और अश्लील फोटो मुझे दे देगी. यह रकम काफी ज्यादा थी और इसलिए मैं ने इतनी धनराशि देने से साफसाफ मना कर दिया, क्योंकि मैं उसे पहले ही काफी रकम दे चुका था. उस के बाद विलावान ने मुझे धमकी दी कि यदि इसे यह रकम यहीं दी तो वह मेरी पुलिस से लिखित शिकायत दर्ज करा देगी.

मैं उस से नहीं डरा. उसे पैसा देने से इनकार कर दिया. मुझे उम्मीद थी कि वह पैसे ऐंठने के लिए पुलिस की धमकी दे रही थी, लेकिन जब उस ने सही में पुलिस से मेरे खिलाफ रिपोर्ट लिखवा दी, तब बदनामी के डर से सीमा पार लाओस भागना पड़ा. इस के बाद चाओखुन को 27 जून, 2025 को वाट त्रि थोत्सथेप वोराविहान के मठाधीश पद से हटा दिया गया था.

ब्लैकमेलर मिस गोल्फ हुई गिरफ्तार

अब रौयल थाई पुलिस की विशेष जांच टीम गोपनीय ढंग से विलावान सिका के पीछे लग गई और उस की हर गतिविधि पर अपनी पैनी नजर रखे हुई थी. इस के लिए विशेष जांच टीम ने अपने गुप्त मुखबिरों को अलगअलग जानकारियां एकत्रित करने के लिए लगा रखा था. विलावान सिका के घर के आसपास भी मुखबिर उस पर कड़ी नजर रखे हुए थे. इसी क्रम में जांच प्रमुख पोल मेजर जनरल जारुनकियात पंकव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने विलावान सिका के घर पर छापा मारा तो पुलिस टीम की आंखें खुली की खुली रह गईं.

पुलिस जांच में पाया गया कि विलावान सिका को कुछ सालों में बौद्ध भिक्षुओं की ओर से उस के खाते में 385 मिलियन बाट (भारतीय रुपयों में लगभग 91 करोड़ 57 लाख 75 हजार 635 रुपए) मिले थे. पुलिस द्वारा मीडिया को साझा किए एक वीडियो में एक बौद्ध भिक्षु को सोफे पर विलावान सिका के साथ लेटा हुआ दिखाया गया. विलावान बौद्ध भिक्षु पर उस के सिर में थप्पड़ मारती दिखी.  पुलिस ने वीडियो क्लिप और कई तसवीरों में यौन क्रियाओं वाली वीडियो भी जब्त कर लीं. पुलिस पूछताछ में एक बौद्ध भिक्षु ने स्वीकार किया कि उस ने विलावान को एक कार भी गिफ्ट की थी.

बैंकाक के वाट माई याई पेन के एक बौद्ध भिक्षु ने पुलिस को बताया कि विलावान सिका गोल्फ ने धार्मिक वस्तुओं की मदद मांगने के बहाने उन से संपर्क किया था. यह भी स्वीकार किया कि वह विलावान के घर पूरी रात रुका था. उस ने दावा किया कि विलावान सिका ने उस के साथ अंतरंग संबंध बनाने की पहल खुद की और उस के बाद विलावान ने उस से एक लाख थाई बाट (भारतीय रुपयों में लगभग 2 लाख 26 हजार 643 रुपए) उधार भी लिए थे.

वाट चुजित थम्मारम के पूर्व मठाधीश फ्रा थेप्पाचारापोर्न, जिसे मठाधीश पद से हटा दिया गया है, जिसे अब सोम्पोंग के नाम से जाना जाता है. उस के भी अश्लील वीडियो विलावान के साथ मिले थे. सोम्पोंग ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि उस ने 12 मिलियन थाई बाट (भारतीय रुपयों में लगभग 32 करोड़ 40 लाख रुपए) से अधिक की राशि विलावान के खातों में हस्तांतरित की थी. पुलिस ने अब तक 12 भिक्षुओं द्वारा विलावान सिका के अवैध संबंधों की पुष्टि की है, जिन में से 9 बौद्ध भिक्षुओं को उन के मठाधीश पद से हटा दिया गया है, जबकि अन्य की जांच अभी जारी है. पुलिस ने बौद्ध भिक्षुओं पर 2 आरोप लगाए हैं.

आपराधिक संहिता की धारा 147 के तहत एक राज्य अधिकारी द्वारा गबन तथा धारा 157 के तहत एक राज्य अधिकारी द्वारा कार्यालय में कदाचार के आरोप थे. दूसरी ओर विलावान सिका पर भ्रष्टाचार निरोधक प्रभाग द्वारा 4 आरोप लगाए गए हैं. आपराधिक संहिता की धारा 147 के तहत संपत्ति के गबन में एक राज्य अधिकारी का समर्थन करना, धारा 157 के तहत कर्तव्य के कदाचार में एक राज्य अधिकारी का समर्थन करना, धन शोधन की साजिश और चोरी की संपत्ति प्राप्त करना है.

इस पूरे प्रकरण में थाईलैंड के राजा वजीरालोंगकोर्न ने दिनांक 22 जुलाई, 2025 को एक शाही आदेश जारी कर दिया. जिस में दरजनों वरिष्ठ भिक्षुओं को मठाधीश संबंधी उपाधियां प्रदान करने की पूर्व घोषणाओं को रद्द कर दिया गया है. राजा ने कहा कि बौद्ध धर्म में आस्था तो बनी रहेगी, लेकिन भिक्षुओं पर भरोसा कम हो सकता है. भिक्षु शायद अपनी वासनाओं में खो गए हैं. Crime Story in Hindi

कथा लिखने तक बैंकाक पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही थी.

 

 

22 साल से लापता बेटा जब संन्यासी बन कर लौटा

किसी चमत्कार के इंतजार में सालों से दिन गुजार रहे रतिपाल और घर वालों को 22 साल बाद साधु वेश में अपना खोया बेटा पिंकू मिला तो सब की आंखें छलक उठीं थीं. बेटा मिलने की खुशी में रतिपाल ने दिल्ली से अपनी पत्नी माया देवी को भी बुला लिया. खोए बेटे पिंकू को साधु वेश में देखते ही मां भावुक हो गई. उस के आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे.

दरअसल, संन्यासी की पारंपरिक पोशाक में आए एक युवक ने सारंगी बजा कर भिक्षा देने की गुहार लगा कर जैसे ही एक रुदन गीत गाना शुरू किया तो उसे सुन कर बड़ी संख्या में गांववाले एकत्र हो गए. जोगी ने अपने आप को गांव के ही रहने वाले रतिपाल सिंह का गायब हुआ बेटा बताया. रुदन गीत सुन कर गांव की महिलाओं और पुरुषों के साथ ही रतिपाल के घर वालों की आंखों से आंसू झरने लगे.

दरअसल, 22 साल से लापता अरुण उर्फ पिंकू के लौटने की खुशी में पूरा गांव रो पड़ा. घर वालों के आंसू तो थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे. यह दृश्य उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के थाना जायज के गांव खरौली का था. तारीख थी 28 जनवरी, 2024.

Jogi or Sathi ke Ane Par Ekatra Ganv Wale

बताते चलें कि साधु के वेश में अपने एक साथी के साथ आया वह युवक गांव के ही रतिपाल सिंह का बेटा अरुण उर्फ पिंकू था, जो 22 साल से अधिक समय तक लापता रहने के बाद अब संन्यासी के वेश में उन के सामने था. जब पिंकू लापता हुआ, उस समय वह 11 साल का था. अब पिंकू जोगी बन कर अपने गांव में मां से भिक्षा लेने पहुंचा था. इतने लंबे समय बाद अपने खोए बेटे को संन्यासी के रूप में सामने देख पिता व अन्य परिजन भावुक हो गए.

मां माया देवी, पिता रतिपाल के अलावा पिंकू की बुआओं उर्मिला व नीलम ने भी साधु वेश में आए पिंकू से गृहस्थ जीवन में लौटने की मिन्नतें कीं. लेकिन युवक की जुबान पर एक ही रट थी, ‘आप से भिक्षा लिए बिना मेरी दीक्षा पूरी नहीं होगी. गुरु का आदेश है कि मां के हाथ से भिक्षा पाने के बाद ही योग सफल होगा.’ उस ने कहा, ‘मां, यदि आप भिक्षा नहीं दोगी तो मैं दरवाजे की मिट्टी को ही भिक्षा के रूप में स्वीकार कर चला जाऊंगा.’

अब बेटा नहीं संन्यासी हूं मैं

साधु ने कहा, ”माई, मैं अब आप का बेटा पिंकू नहीं, बल्कि संन्यासी हूं. मैं भिक्षा ले कर वापस झारखंड स्थित पारसनाथ मठ में दीक्षा पूरी करने के लिए चला जाऊंगा.’’

साधु की बातें सुन कर रतिपाल और उन की पत्नी का कलेजा बैठ गया. उन्होंने उसे मनाने के साथ ही कहीं भी जाने से मना किया.

साधु खरौली गांव में 22 जनवरी, 2024 से ही आनेजाने लगा था. वह साथी के साथ आधे गांव में चक्कर लगा कर सारंगी व ढपली पर भजन गाता था. इस के बाद शाम होते ही वापस चला जाता.

रतिपाल मूलरूप से गांव खरौली के रहने वाले हैं. गांव में उन का छोटा भाई जसकरन सिंह, भतीजे व अन्य लोग रहते हैं. गांव में उन की खेती की जमीन भी है. 11वीं पास करने के बाद उन की शादी हो गई थी. साल 1986 में वह दिल्ली आ गए. यहां उन के एक बेटा हुआ, जिस का नाम उन्होंने अरुण रखा. घर में सभी प्यार से उसे पिंकू के नाम से पुकारते थे.

Arun Pankoo Birthday Par Kek Khata Huaa

                                      पिंकू के बचपन की तस्वीर

जब पिंकू 5-6 साल का था, उस की मां भानुमति बीमार हो गई. 3 साल तक उन का दिल्ली में इलाज चलता रहा, लेकिन उन की मृत्यु हो गई. रतिपाल ने बच्चे की परवरिश व अपनी आगे की जिंदगी के लिए वर्ष 1998 में माया देवी से दूसरी शादी कर ली. सब कुछ ठीक चल रहा था.

डांटने से गुस्से में घर से चला गया था पिंकू

कंचे खेलने पर मां की डांट से गुस्से में आ कर साल 2002 में 11 साल की उम्र में पिंकू अपने घर से कहीं चला गया. उस समय वह दिल्ली के शहादतपुर स्थित स्कूल में 5वीं कक्षा में पढ़ता था. घर वालों ने पिंकू को काफी तलाश किया, लेकिन उस का कोई सुराग नहीं मिलने पर पिता रतिपाल ने दिल्ली के थाना खजूरी खास में उस की गुमशुदगी दर्ज कराई.

समय गुजरता गया लेकिन लापता बेटा नहीं मिला. रतिपाल हफ्ते दस दिन में थाने जा कर पुलिस से अपने खोए बेटे के बारे में जानकारी लेते, लेकिन उन्हें हर बार एक ही जबाव मिलता कि तलाशने पर भी आप का बच्चा नहीं मिल रहा है.

रतिपाल ने अपने स्तर से भी बच्चे को तलाश किया, लेकिन उस का कोई सुराग नहीं मिला. अपने इकलौते बेटे के इस तरह घर से चले जाने पर मातापिता ने कलेजे पर पत्थर रख कर सब्र कर लिया.

27 जनवरी, 2024 को खरौली में रह रहे भतीजे दीपक ने दिल्ली रतिपाल के पास फोन किया, ”चाचा, साधु भेष में एक युवक 22 जनवरी से गांव में आया हुआ है, जो अपने को आप का खोया हुआ बेटा अरुण उर्फ पिंकू बता रहा है. जब उस से पिंकू की कोई पहचान बताने को कहा तो उस ने कहा कि पिता जब खुद देख कर बताएंगे, तभी पहचान सभी गांव वालों को दिखाऊंगा. चाचा, आप गांव आ कर देख लो. साधु कल आने की बात कह कर रायबरेली से लगभग 30 किलोमीटर दूर बछगांव स्टेशन जाने की बात कह कर चला गया है.’’

बेटे से मिलने की चाहत और मन में ढेरों सवाल लिए रतिपाल अपनी बहन नीलम के साथ दिल्ली से गांव खरौली 28 जनवरी को ही पहुंच गए. दूसरे दिन वह साधु अपने एक साथी के साथ सुबह 11 बजे गांव आया. आधे गांव का चक्कर लगाता और सारंगी पर भजन गाते हुए साधु रतिपाल के घर पर पहुंचा.

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पिंकू निकला नफीस

साधु ने देखते ही पापा व बुआओं को पहचान लिया. साधु ने उन्हें बताया कि वह वास्तव में उन का बेटा पिंकू है. वह संन्यासी हो गया है, भिक्षा मांगने आया हुआ है. रतिपाल ने उस के पेट पर बचपन की चोट के निशान को देखने के बाद अपने खोए बेटे अरुण उर्फ पिंकू के रूप में उस की पहचान की.

बेटे की खातिर रतिपाल सब कुछ न्यौछावर करने को हो गया तैयार

बचपन में खोए बेटे को 22 साल बाद दरवाजे पर देख पिता व परिजनों की उम्मीद लौट आई थी. आंखों से आंसुओं की धारा फूट पड़ी. स्नेह ऐसा जागा कि भींच कर उसे सीने से लगा लिया. बेटे को घर लाने के लिए पिता सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार था.

खोए बेटे के मिलने पर रतिपाल ने घर पर साधु व उस के साथी के साथ भोजन भी किया. अब साधु रतिपाल को पापा तथा रतिपाल उसे पिंकू कह कर पुकारने लगे थे. रतिपाल ने खोए बेटे के मिलने की खुशखबरी अपनी रिश्तेदारी में भी दे दी थी. इस पर कई रिश्तेदार गांव आ गए थे.

एक सप्ताह तक वह जोगी अपने साथी के साथ रोजाना गांव आता और शाम होते ही वापस चला जाता. इस दौरान उस की रतिपाल और परिजनों से बातें भी होतीं. भोजन भी पापा के साथ करता. अपने पापामम्मी व अन्य घर वालों के प्यार को देख कर पिंकू का झुकाव भी उन की ओर होने लगा.

वहीं रतिपाल की बूढ़ी आंखों ने अपने खोए बेटे को 22 साल बाद देखा तो प्यार फफक पड़ा. खोए बेटे को किसी भी तरह वापस पाने के लिए परिवार तड़प उठा. सभी के प्रयास विफल होने पर रतिपाल ने जोगी से किसी भी तरह घर लौटने की गुजारिश की.

इस पर उस ने कहा, ”पापा, आप मेरे गुरु महाराज से बात कर मुझे आश्रम से छुड़ा लो.’’

”पापा, आश्रम से गुरुजी ने मुझे दीक्षा के दौरान लंगोटी, कमंडल व अंगवस्त्र दिए हैं. मठ की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. मठ का सामान वापस करना होगा.’’

तब रतिपाल ने कहा, ”बेटा, तुम गुरुजी से बात कर प्रक्रिया के बारे में बताना. मैं तुम्हें घर लाने के लिए प्रक्रिया पूरी कर दूंगा.’’

अनाज व नकदी दे कर किया विदा

दिल पर पत्थर रख कर घर वालों व गांव वालों ने भिक्षा के रूप में उसे 13 क्ंिवटल अनाज और रतिपाल ने जोगी बने बेटे पिंकू को संपर्क में बने रहने के लिए एक नया मोबाइल फोन व नकदी दे कर पहली फरवरी को विदा किया. रतिपाल की बाराबंकी में रहने वाली बहन निर्मला ने पिंकू द्वारा बताए खाते में 11 हजार रुपए की रकम ट्रांसफर कर दी.

पिंकू ने कहा कि वह यहां से सभी सामान ले कर अयोध्या जाएगा, जहांं साधुओं को भंडारा कराएगा. सामान पहुंचाने के लिए रतिपाल ने एक वाहन का इंतजाम कर दिया. पहली फरवरी, 2024 को जोगी अपने साथी के साथ सामान ले कर चला गया. रतिराम, पत्नी माया देवी परिजनों के साथ ही गांव वालों ने भारी मन से जोगी को विदा किया.

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घर से भिक्षा ले कर जाने के बाद संन्यासी बेटे पिंकू का मन पसीज गया. दूसरे दिन उस ने फोन कर पिता से घर लौटने की इच्छा जताई. बेटे के गृहस्थ जीवन में लौटने की बात सुन कर रतिराम की खुशी का पारावार नहीं रहा. उस ने बताया कि गुरु महाराज का कहना है कि गृहस्थ आश्रम में लौटने के लिए दीक्षा के रूप में 10.80 लाख रुपए चुकाने पड़ेंगे.

रतिपाल ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई. इतना ही नहीं, पिंकू ने पिता की मठ के गुरु महाराज से फोन पर बात भी कराई. लेकिन इतनी बड़ी रकम देने की उन की हैसियत नहीं थी. तब 4.80 लाख देने की बात कही गई.

गुरुओं की दीक्षा चुकाने की शर्त पर पिता ने आखिरकार बेटे को पाने के लिए 3 लाख 60 हजार रुपए में हां कर दी.

मठ का खाता न बताने पर हुआ शक

बेटे को वापस पाने के लिए मजबूर पिता ने 14 बिस्वा जमीन का सौदा गांव के ही अनिल कुमार वर्मा से 11 लाख 20 हजार रुपए में तय कर लिया. 3-4 दिन रतिपाल को पैसों का इंतजाम करने में लग गए.

इस के बाद साधु पिंकू की ओर से बताए गए आईसीआईसीआई बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करने भाई जसकरन व भतीजे धर्मेश के साथ पहुंचे. रतिपाल ने बताया, बैंक मैनेजर ने उन से कहा कि एक दिन में 25 हजार से ज्यादा रुपए ट्रांसफर नहीं हो सकते. पिंकू ने यूपीआई से भुगतान करने को कहा.

रतिपाल ने पिंकू से कहा कि अपने मठ के ट्रस्ट का बैंक खाते का नंबर दे दो, उस पर भुगतान कर देंगे. इस के बाद वहां आ कर तुम्हें अपने साथ घर ले आएंगे तो साधु ने मना कर दिया. यहीं से रतिपाल को कुछ शक होने लगा. तब प्रशासन से उन्होंने मदद मांगी.

रतिपाल सिंह समझ गए कि बेटे पिंकू के रूप में आया जोगी कोई ठग है. उस ने उन की भावनाओं का सौदा किया है. रतिपाल ने 10 फरवरी, 2024 को थाना जायस में 2 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 419 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कराई.

एसएचओ देवेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद इस केस की जांच बहादुरपुर चौकी प्रभारी राजकुमार सिंह को सौंपी. आरोपी का मोबाइल बंद आने पर उसे सर्विलांस पर लगा दिया गया.

इस के बाद रतिपाल को जब शंका हुई तो उन्होंने अपने स्तर से जांचपड़ताल करनी शुरू कर दी. उन के हाथ उसी साधु बने युवक के कई फोटो और वीडियो लग गए हैं. रतिपाल ने बताया कि उन्होंने झारखंड के एसपी से फोन पर बात की. पूरा प्रकरण बताया. एसपी को जोगी का मोबाइल नंबर भी दिया.

उन्होंने अपने स्तर से जांच कराई फिर फोन कर बताया कि यह नंबर झारखंड में नहीं, बल्कि गोंडा में चल रहा है. इस के साथ ही झारखंड में पारसनाथ नाम का कोई मठ है ही नहीं. उन्होंने कहा कि उसे पकड़ा जाए और यदि वह गलत है तो सजा मिले.

जोगी की सच्चाई पता करने के लिए रतिपाल ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. जिस गुरु का नाम बताया, वह भी गलत निकला. दीक्षा में मिले 13 क्विंटल अनाज व अन्य सामान को पिकअप में ले कर साधु अयोध्या जाने की कह कर गया था. पिकअप चालक  के साथ रतिपाल अयोध्या पहुंचे तो वहां कोई नहीं मिला. पिकअप चालक ने बताया कि अरुण अयोध्या न जा कर उसे गोंडा ले गया था, वहीं सारा सामान उतरवाया था.

गोंडा की जिस आईसीआईसीआई बैंक के खाते का नंबर साधु ने रतिपाल को दिया था वह खाता आशीष कुमार गुप्ता, आशीष जनरल स्टोर मुंबई का निकला. बाराबंकी में रहने वाली रतिपाल की बहन निर्मला ने उसी खाते में 11 हजार रुपए की धनराशि ट्रांसफर की थी.

रतिपाल ने बताया कि उन्होंने पुलिस को बैंक स्टेटमेंट सौंप दिया है. उन्होंने बताया कि उन्हें मीडिया के माध्यम से पता चला है कि साधु के भेष में आया युवक जो अपने को उन का खोया बेटा पिंकू बताता था, उस युवक का नाम नफीस है.

ठगी के लिए साधु का वेश धारण किया

सीओ (तिलोई) अजय सिंह ने बताया कि मामला ठगी से जुड़ा हुआ है. पूरे मामले पर मुकदमा पंजीकृत कर मामले की छानबीन की जा रही है. जल्द से जल्द इस पूरे मामले में कड़ी से कड़ी काररवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि 10 फरवरी को जायस थाना क्षेत्र के खरौली गांव निवासी रतिपाल सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

गोंडा के एसपी विनीत जायसवाल ने बताया, ”टिकरिया गांव में रहने वाले कई लोगों द्वारा जोगी बन कर जालसाजी करने की शिकायत मिली है. 2 आरोपियों द्वारा अमेठी जिले में भी साधु वेश बना किसी को झांसा देने का मामला प्रकाश में आया है. पुलिस को तलाश के निर्देश दिए गए हैं.’’

रिपोर्ट दर्ज होने और उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद जायस थाने की पुलिस सक्रिय हो गई. रतिपाल ने बताया कि 16 फरवरी, 2024 को एक प्राइवेट वाहन से जायस पुलिस के साथ गोंडा कोतवाली देहात की सालपुर पुलिस चौकी पहुंचे. वहां के चौकी इंचार्ज पवन कुमार सिंह से मिले, उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही. इस चौकी से कुछ दूरी पर ही टिकरिया गांव है.

उन्होंने कहा कि गोंडा की सालपुर चौकी पर उन्हें 5 घंटे तक बैठाया गया. कहा कि आप यहीं बैठो, पुलिस दबिश देने जा रही है. नफीस के घर पहुंची पुलिस टीम सब से पहले नफीस के परिवार से मिली. उस समय घर पर बुजुर्ग महिलाएं ही थीं. उन्होंने बताया कि 25 वर्षीय नफीस करीब एक महीने से घर से बाहर है.

पुलिस को आया देख कर आरोपी गन्ने के खेत में भाग गया था. पुलिस ने उसे पकडऩे का प्रयास किया, लेकिन वह हाथ नहीं आया. पुलिस ने बताया, पिंकू बन कर घर पहुंचा ठग टिकरिया निवासी सिजाम का बेटा नफीस है, जो ठगी के मामले में पहले भी जेल जा चुका है.

जबकि उस का भाई राशिद 29 जुलाई, 2021 को जोगी बन कर मिर्जापुर के गांव सहसपुरा परसोधा निवासी बुधिराम विश्वकर्मा के यहां उन का 14 साल पहले लापता हुआ बेटा रवि उर्फ अन्नू बन कर पहुंचा था. मां से भिक्षा मांगी ताकि उस का जोग सफल हो जाए. परिजनों ने बेटा मान कर उसे घर में रख लिया. कुछ दिन बाद वह लाखों रुपए ले कर फरार हो गया था. बाद में पकड़ा गया और जेल गया.

पुलिस की दस्तक के चलते नफीस, उस के दोनों भाई दिलावर और राशिद समेत अधिकांश तथाकथित साधु अंडरग्राउंड हो गए. उस का एक रिश्तेदार असलम भी ऐसे मामले में वांछित चल रहा है. नफीस का मोबाइल बंद है.

पड़ताल में सामने आया कि नफीस के ससुर का भाई असलम उर्फ लंबू घोड़ा भी वाराणसी में जेल जा चुुका है. तब पुलिस ने शिकायत के आधार पर एक परिवार को इसी तरह जोगी का झांसा दे कर ठगने के बाद उसे दबोच लिया था.

पेट के टांकों को देख कर की पहचान

रतिपाल ने बताया कि 22 साल पहले उस का 11 वर्षीय बेटा अरुण उर्फ पिंकू घर से कहीं चला गया था. एक बार वह सीढ़ी से गिर गया था, जिस से उस के पेट में अंदरूनी चोट आई थी. इस बात का 6 माह तक पता नहीं चला. पिंकू की आंत सड़ गई थी, जिस के चलते उस का औपरेशन दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित होली चाइल्ड अस्पताल में हुआ था. उस के 14 टांके आए थे.

साधु के भेष में आए व्यक्ति ने उन्हें टांकों के निशान दिखाए थे. लेकिन वे असली थे या बनाए हुए थे, ये नहीं पता. रतिपाल सिंह पहले अपनी बहन नीलम के साथ खरौली गांव पहुंचे थे. खबर दिए जाने पर बहन उर्मिला भी आ गई थी. उन्होंने अपनी पत्नी माया देवी को घर पर ही बच्चों की देखभाल के लिए छोड़ दिया था. खोए पिंकू की पहचान हो जाने के बाद उन्होंने पत्नी को भी गांव बुला लिया था.

रतिपाल की दूसरी शादी के बाद 4 बच्चे हुए. 2 बेटी व 2 बेटे हैं. बड़ी बेटी 24 वर्ष की है. दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है. एक बेटा 12वीं तथा सब से छोटा 9वीं में पढ़़ रहा है. वे घर पर ही बर्थडे में बच्चों के लगाए जाने वाली कैप बनाने का कार्य पत्नी के सहयोग से कर गुजरबसर करते हैं.

पूरा परिवार जिस युवक को अपना खोया बेटा पिंकू मान कर प्यार लुटा रहा था. असल में वह जालसाज गोंडा जिले के टिकरिया गांव  का नफीस निकला. टिकरिया के 20-25 लोगों का गैंग कई राज्यों में सक्रिय है. वह खोए बच्चों के बारे में जानकारी करने के बाद परिजनों की भावनाओं से खिलवाड़ कर ठगी करने का काम करते हैं.

साइबर सेल प्रभारी बृजेश सिंह का कहना है कि किसी गांव में बच्चों के खोने या लापता होने पर परिजन खुद उस का प्रचार प्रसार करते हैं. इस प्रचार से उन्हें आस होती है कि शायद कोई व्यक्ति उन की खोई संतान को वापस मिला देगा. पैंफ्लेट व अखबारों से भी पहचान के लिए चोट के निशानों का उल्लेख किया जाता है. ठगों का यह गैंग स्थानीय स्तर पर जानकारी एकत्र कर इसी का फायदा उठा कर ठगी करता है.

मातापिता की भावनाओं से खेल कर संपत्ति व धन हड़पने का नफीस का षडयंत्र विफल हो गया. 22 साल पहले लापता बेटा पिंकू बन कर गांव जायसी पहुंचा साधु वेशधारी पुलिस जांच में गोंडा के गांव टिकरिया निवासी नफीस और उस का साथी पट्टर  निकला. गांव वालों ने वायरल वीडियो में भी दोनों की तस्दीक की. पुलिस की सक्रियता से ठगी की मंशा का खुलासा हुआ तो ठग और उस का साथी दोनों फरार हो गए.

गोंडा में पड़ताल करने पर पता चला कि टिकरिया गांव के कुछ परिवार इस तरह की ठगी करते हैं. उन का एक गैंग ठगी का काम करता है. ठगी जेल तक जा चुकी है. उन्हीं में से एक नफीस का भी परिवार है.

नफीस मुकेश (मुसलिम) का दामाद है. उस की पत्नी का नाम पूनम है. उस का एक बेटा अयान है. ठग साधु कहता था कि उस ने झारखंड के पारसनाथ मठ में दीक्षा ली है. मठ के गुरु का आदेश था कि अयोध्या में दर्शन के बाद गांव जा कर अपनी मां से भिक्षा मांगना, तभी दीक्षा पूरी होगी. सच यह है कि झारखंड में पारसनाथ नाम का कोई मठ है ही नहीं. बेटा बन कर अब तक नफीस कई लोगों को चूना लगा चुका है.

रतिपाल का कहना है कि दोनों ठगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी है. दोनों ठग अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. जिस बैंक खाते में 11 हजार रुपए बहन निर्मला ने जमा कराए थे, उस खाते वाले को पकड़ा जाए, जिस से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और इन ठगों का गैंग पकडऩे में मदद मिलेगी.

पुलिस फरार चल रहे दोनों साधु वेशधारी ठगों की सरगरमी से तलाश में जुटी है. पुलिस का कहना है कि समय रहते इन ठगों का भेद खुल जाने से रतिपाल व उन का परिवार बहुत बड़ी ठगी व मुसीबत से बच गए.

पिता रतिपाल को पुत्र वियोग और मिलन के बाद उसे दोबारा पाने की चाह है, लेकिन किसी षडयंत्र की आशंका भी है. उन का कहना है कि खोया हुआ बेटा इस समय 33 वर्ष का होता.

—कथा पुलिस व परिजनों से की गई बातचीत पर आधारित