Love Story: प्यार के लिए दबंगई कहां तक जायज

Love Story: उत्तर प्रदेश के महानगर मुरादाबाद के लाइनपार इलाके के रहने वाले महावीर सिंह सैनी के परिवार में उस की पत्नी शारदा के अलावा एक बेटा अंकित और 3 बेटियां थीं. 2 बेटियों की शादी हो चुकी थी. तीसरे नंबर की बेटी पूनम 9वीं कक्षा में पढ़ रही थी. महावीर राजमिस्त्री था. रोजाना की तरह 10 दिसंबर, 2016 को भी वह अपने काम पर चला गया था. बेटा अंकित ट्यूशन पढ़ने गया था. घर पर शारदा और उस की बेटी पूनम ही थी. सुबह करीब 10 बजे जब शारदा नहाने के लिए बाथरूम में गई तब पूनम घर के काम निपटा रही थी. शारदा को बाथरूम में घुसे 5-10 मिनट ही हुए थे कि उस ने चीखनेचिल्लाने की आवाजें सुनीं. चीख उस की बेटी पूनम की थी.

चीख सुन कर शारदा घबरा गई. उस ने बड़ी फुरती से कपड़े पहने और बाथरूम से बाहर निकली तो देखा पूनम आग की लपटों से घिरी थी. उस के शरीर पर आग लगी थी. शोर मचाते हुए वह पूनम के कपड़ों की आग बुझाने में लग गई. उस की आवाज सुन कर पड़ोसी भी वहां आ गए. किसी तरह उन्होंने बुझाई. तब तक पूनम काफी झुलस चुकी थी और बेहोश थी. आननफानन में लोग उसे राजकीय जिला चिकित्सालय ले गए. बेटी के शरीर के कपड़ों में लगी आग बुझाने की कोशिश में शारदा के हाथ भी झुलस गए थे.

अस्पताल से इस मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई. कुछ ही देर में थाना मझोला के थानाप्रभारी नवरत्न गौतम पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंच गए. खबर मिलने पर पूनम के पिता महावीर भी अस्पताल आ गए. डाक्टरों के इलाज के बाद पूनम होश में आ गई थी. पूनम के बयान लेने जरूरी थे. इसलिए पुलिस ने इलाके के मजिस्ट्रैट को सूचना दे कर अस्पताल बुलवा लिया.

पुलिस और मजिस्ट्रैट की मौजूदगी में पूनम ने बताया कि शिवदत्त ने उस के ऊपर केरोसिन डाल कर आग लगाई थी. उस के साथ उस के पिता महीलाल भी थे. शिवदत्त पूनम के घर के पास चामुंडा वाली गली में रहता था. पता चला कि वह पूनम से एकतरफा प्यार करता था.

थानाप्रभारी नवरत्न गौतम ने यह जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दे दी. मामला मुरादाबाद शहर का ही था इसलिए तत्कालीन एसएसपी दिनेशचंद्र दूबे और एएसपी डा. यशवीर सिंह जिला अस्पताल पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने पूनम का इलाज कर रहे डाक्टरों से बात की.

तब तक पूनम की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ने लगी थी. डाक्टरों ने उसे किसी दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी. पूनम के घर वालों ने उसे दिल्ली ले जाने को कहा तो जिला अस्पताल से पूनम को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के लिए रैफर कर दिया गया.

महावीर की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली. चूंकि पूनम ने शिवदत्त और उस के पिता पर आरोप लगाया था, इसलिए पुलिस ने शिवदत्त के घर दबिश दी पर उस के घर कोई नहीं मिला. पुलिस संभावित जगहों पर उन्हें तलाश करने लगी, पर दोनों बापबेटों में से कोई भी पुलिस के हत्थे नहीं लगा.

उधर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भरती पूरम की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था. उस की हालत बिगड़ती जा रही थी. बर्न विभाग के डाक्टरों की टीम पूनम को बचाने में लगी हुई थी पर उन्हें सफलता नहीं मिल सकी. आखिर 10 दिसंबर की रात को ही पूनम ने दम तोड़ दिया.

अगले दिन जवान बेटी की हृदयविदारक मौत की खबर जब उस के मोहल्ले वालों को मिली तो पूरे मोहल्ले में जैसे मातम छा गया. आरोपी को अभी तक गिरफ्तार न किए जाने से लोग आक्रोशित थे. कहीं लोगों का गुस्सा भड़क न जाए इसलिए उस इलाके में भारी तादाद में पुलिस तैनात कर दी गई.

रविवार होने की वजह से पूनम की लाश का पोस्टमार्टम सोमवार 12 दिसंबर को हुआ. दोपहर बाद उस की लाश दिल्ली से मुरादाबाद लाई गई. पुलिस मोहल्ले के गणमान्य लोगों से बात कर के माहौल को सामान्य बनाए रही. अंतिम संस्कार के समय भी भारी मात्रा में पुलिस थी.

उधर पुलिस की कई टीमें आरोपियों को तलाशने में जुटी हुई थीं. जांच टीमों पर एसएसपी का भारी दबाव था. आखिर पुलिस की मेहनत रंग लाई. 12 दिसंबर को पुलिस ने शिवदत्त को गिरफ्तार कर लिया. उस के गिरफ्तार होने के बाद लोगों का गुस्सा शांत हुआ.

थाने ला कर एसएसपी और एएसपी के सामने थानाप्रभारी नवरत्न गौतम ने अभियुक्त से पूछताछ की तो पहले तो वह पुलिस को बेवकूफ बनाने की कोशिश करता रहा पर उस का यह झूठ ज्यादा देर तक पुलिस के सामने नहीं टिक सका. उस ने पूनम को जलाने का अपराध स्वीकार कर उस की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

जिला मुरादाबाद के लाइनपार इलाके में मंडी समिति गेट के सामने की बस्ती में रहने वाला महावीर सिंह अपने राजगीर के काम से परिवार का पालनपोषण कर रहा था. इसी की कमाई से वह 2 बेटियों की शादी कर चुका था. पूनम 9वीं की पढ़ाई के साथ महिलाओं के कपड़े सिलती थी. घर के पास ही उस ने बुटीक खोल रखा था.

उस के घर के पास ही महीलाल का मकान था. महीलाल का बेटा शिवदत्त बदमाश प्रवृत्ति का था. उस की दोस्ती मंडी समिति के पास स्थित बिजलीघर में तैनात कर्मचारियों के साथ थी. उन्हीं की वजह से उसे ट्रांसफार्मर रखने के लिए बनाए जाने वाले चबूतरों का ठेका मिल जाता था.

चूंकि शिवदत्त का पड़ोसी महावीर राजमिस्त्री था, इसलिए उसी के द्वारा वह चबूतरे बनवा देता था. इस से कुछ पैसे शिवदत्त को बच जाते थे. काम की वजह से शिवदत्त का महावीर के घर आनाजाना शुरू हो गया था. महावीर की छोटी बेटी पूनम पर शिवदत्त की नजर पहले से ही थी. जब भी वह घर से निकलती तो वह उसे ताड़ता रहता था. पर पूनम ने उसे लिफ्ट नहीं दी. जब शिवदत्त का पूनम के घर आनाजाना शुरू हो गया तो उस ने पूनम के नजदीक पहुंचने की कोशिश की.

जब वह पूनम को ज्यादा ही परेशान करने लगा तो एक दिन पूनम ने इस की शिकायत अपनी मां से कर दी. इस के बाद शारदा ने यह बात पति को बताई तो महावीर ने शिवदत्त के पिता महीलाल से शिकायत करने के साथ शिवदत्त से बातचीत बंद कर दी. इस के अलावा उस ने अपने घर आने को भी उसे साफ मना कर दिया.

शिवदत्त दबंग था. महावीर द्वारा उस के पिता से शिकायत करने की बात उसे बहुत बुरी लगी. वह पूरी तरह से दादागिरी पर उतर आया और अब पूनम को खुले रूप से धमकी देने लगा कि वह उस से शादी करे नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. महावीर ने फिर से महीलाल से शिकायत की. इस बार महीलाल ने अपने बेटे शिवदत्त का ही पक्ष लिया.

महावीर कोई लड़ाईझगड़ा नहीं करना चाहता था. बात बढ़ाने के बजाय वह चुप हो कर बैठ गया. महावीर के रिश्तेदारों और मोहल्ले के कुछ लोगों ने उस से थाने में शिकायत करने का सुझाव दिया पर बेटी की बदनामी को देखते हुए वह थाने नहीं गया. महावीर के चुप होने के बाद शिवदत्त का हौसला और बढ़ गया. वह पूनम को और ज्यादा तंग करने लगा. इतना ही नहीं, वह कई बार पूनम के घर तमंचा ले कर भी पहुंचा.

हर बार वह उस से शादी करने की धमकी देता. घटना से एक दिन पहले भी वह पूनम के घर गया. तमंचा निकाल कर उस ने धमकी दी कि वह शादी के लिए अभी भी मान जाए वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहे. 10 दिसंबर को शिवदत्त फिर से पूनम के घर जा धमका. उस दिन वह अपने साथ एक केन में केरोसिन भी ले गया था. पूनम उस समय घर में झाड़ू लगा रही थी, तभी उस ने उस पर केरोसिन उड़ेल कर आग लगा दी और वहां से भाग गया.

शिवदत्त से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस मामले की जांच कर रही है. तत्कालीन एसएसपी दिनेशचंद्र दूबे का कहना था कि इस मामले में शिवदत्त के अलावा और कोई दोषी पाया गया तो उस के खिलाफ भी कानूनी काररवाई की जाएगी. Love Story

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Family Dispute : फौजी की सनक का कहर

Family Dispute : सुबहसुबह साढ़े 7 बजे के करीब गुड़गांव के राजेंद्र पार्क इलाके में जब सायरन बजाती पुलिस की गाडि़यां आईं, तब अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते हुए लोग चौंक पड़े. कोई बाथरूम में फ्रैश हो रहा था, तो कोई अपनी बालकनी में ब्रश कर रहा था या अपने फूलों के गमले की देखरेख में लगा हुआ था. कई घरों के किचन से कूकर की सीटियां बजने लगी थीं. कोई अपने पालतू कुत्ते के साथ सैर पर था, जबकि कुछ लोग वहीं छोटे से पार्क में जौगिंग और एक्सरसाइज कर रहे थे. हर दिन की तरह ही 24 अगस्त को साफ आसमान और सूरज की चमकदार किरणों वाले दिन की शुरुआत हो चुकी थी.

सायरन की आवाज सुन कर अचानक सभी लोगों का ध्यान उस ओर चला गया. उस वक्त गली में भी कुछ लोगों का आनाजाना शुरू हो चुका था. गाडि़यां उन के बीच से गुजरती हुई एक घर के आगे रुकीं. गाडि़यों से पुलिसकर्मियों को उतरते देख आसपास के लोग धीमी आवाज में बातें करने लगे थे. कुछ लोग अपनीअपनी छतों पर या बालकनी में भी आ गए थे. पुलिसकर्मी जब एक घर के आगे खड़े हो कर अपने हाथों में रबर के ग्लव्स पहनना शुरू किया, तब वहां मौजूद लोगों के मन में जानने की उत्सुकता बढ़ गई. जिस घर के आगे सभी पुलिसकर्मी इकट्ठे हुए थे,  वहां रिटायर्ड फौजी राव राय सिंह रहते थे.

उस वक्त सभी के मन में उन को ले कर कई सवाल थे, ‘राव साहब के घर पर क्या हुआ?  राव साहब ठीक तो हैं न? …. आखिर राव साहब के घर पर पुलिस क्या करने आई है?’ इन सवालों की फुसफुसाहट से पूरी गली में अलग किस्म का शोर भी होने लगा था. उसी शोरगुल के बीच गुरुग्राम थाने के थानाप्रभारी इंसपेक्टर सुरेंदर गाड़ी से उतरे. उन्होंने भी अपने हाथों में रबर का ग्लव्स पहन लिया और 10-12 पुलिसकर्मियों का नेतृत्व करते हुए सब से पहले मकान में प्रवेश किया. पुलिस की टीम मकान में जा कर 2 हिस्सों में बंट गई. एक ऊपर की मंजिलों पर चली गई, जबकि दूसरी इंसपेक्टर सुरेंदर के साथ ग्राउंड फ्लोर पर बनी रही. वहां कई कमरे थे, पुलिस ने सभी का एकएक कर दरवाजा खटखटाया.

अधिकतर कमरों के दरवाजे बाहर से ही बंद या भिड़े हुए थे. कहीं किसी कमरे में कुछ नहीं मिला. बस एक में बुजुर्ग महिला कुरसी पर बैठी दिखी. पास ही एक लड़की पलंग पर सोई हुई थी. पुलिस ने उस बुजुर्ग महिला को बाहर निकलने का इशारा किया. वह सो रही लड़की को जगा कर कुछ मिनट बाद कमरे से बाहर आई. लड़की उस की पोती थी और उस ने खुद को रावराय सिंह की पत्नी विमलेश यादव बताया. ग्राउंड फ्लोर के साथसाथ पहली मंजिल पर भी सूचना के मुताबिक गहन छानबीन जारी थी. कुछ सेकेंड बाद टीम के एक सदस्य ने आवाज लगा कर थानाप्रभारी को पुकारा. वे तुरंत भागते हुए सीढि़यों से पहली मंजिल पर जा पहुंचे. उस कमरे में घुसे जहां से उन्हें आवाज लगाई गई थी.

कमरे में घुसते ही थानाप्रभारी कमरे का दृश्य देख कर अवाक रह गए. कमरे के फर्श पर एक महिला का शव पड़ा था. पूरे कमरे के फर्श पर खून फैल चुका था. शव पर गहरे जख्म का निशान था, उस में से खून रिस रहा था. थानाप्रभारी अभी वहां का मुआयना कर ही रहे थे कि उन्हें दूसरी मंजिल से एक अन्य पुलिसकर्मी ने चीखने जैसी आवाज लगाई. थानाप्रभारी तुरंत भागेभागे दूसरी मंजिल के उसी कमरे में जा पहुंचे, जहां से उन्हें आवाज दी गई थी. कमरे में पहुंचते ही थानाप्रभारी हक्केबक्के रह गए. कमरे के फर्श पर एकदो नहीं, बल्कि 4 लाशें पड़ी हुई थीं. वहां का दृश्य देख कर पुलिसकर्मियों के माथे से पसीना छूटने लगा था. उन 4 लाशों में 2 छोटीछोटी बच्चियां थीं.

सभी लाशों के बारे में प्राथमिक जानकारी जुटाई गई. उस के मुताबिक पहली मंजिल के कमरे से बरामद लाश सुनीता यादव की थी. वह राव राय सिंह की बहू थी. इसी तरह दूसरी मंजिल के कमरे से मिली लाशों में एक लाश वहां रहने वाले किराएदार कृष्णकांत तिवारी (40), दूसरी तिवारी की पत्नी अनामिका तिवारी (32) और बाकी दोनों लाशें उन की बेटियों सुरभि तिवारी (9) और विधि तिवारी (6) की थी. सभी के शरीर पर एक जैसे गहरे जख्म के निशान थे. मकान में मौजूद पुलिस की टीम ने लाशों को निकालने का काम शुरू किया. इसी क्रम में पता चला कि 6 साल की विधि की सांसें चल रही हैं. पुलिस टीम तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल ले गई. राव राय सिंह के घर के बाहर लाशों को देख कर लोग हैरान थे. वे समझ नहीं पर रहे थे कि आखिर इतनी लाशें कैसे और क्यों? साथ ही सभी की आंखें राव राय सिंह को भी तलाश रही थीं. वे नजर नहीं आ रहे  थे.

इलाके के लोगों को पता था कि पहली मंजिल पर सुनीता यादव और दूसरी मंजिल में किराएदार कृष्णकांत तिवारी अपने परिवार के साथ रहते थे. सभी लाशों को देख कर यह तो स्पष्ट हो गया था कि उन की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. उन की हत्या कैसे और किस ने की होगी, इन सवालों के साथसाथ एक सवाल और था कि आखिर राव राय सिंह कहां हैं? इस जघन्य हत्याकांड की नींव में एक मकान मालिक और उस के किराएदार के बीच आपसी रिश्ते के मिठास और खटास के साथ उस में भर चुकी कड़वाहट की कहानी शामिल है, जो वीभत्स हत्या का मुख्य कारण बन गई. बिहार में सीवान के रहने वाले कृष्णकांत तिवारी ने करीब ढाई साल पहले राव राय सिंह के मकान में दूसरी मंजिल पर किराए का कमरा लिया था.

वह गुरुग्राम की एक कंपनी में काम करते थे. उस से पहले वह पास में ही लक्ष्मण विहार में किराए के कमरे में रहते थे. उन्होंने बिहार से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और दिल्ली आने पर शुरुआत से ही गुड़गांव में अपने परिवार के साथ रहते थे. कृष्णकांत जब राव राय सिंह के मकान में आए, तब वहां बहुत जल्द मकान मालिक के सभी सदस्यों के प्रिय बन गए. इस कारण उन्हें काफी अपनापन सा महसूस होता था. उन के बच्चे छोटे थे और पत्नी अनामिका की राय सिंह की बहू सुनीता यादव के साथ अच्छी  पटती थी. कृष्णकांत को वहां रहते हुए कभी भी किसी बात की चिंता नहीं करनी पड़ती थी. राय सिंह के परिवार के साथ वह काफी घुलमिल गए थे.

राय सिंह के एकलौते बेटे आनंद यादव की पत्नी सुनीता यादव अलग मिजाज की औरत थी. वह अपनी ही दुनिया में मस्त रहती थी. मुंहफट इतनी कि किसी को भी मुंह पर तड़ाक से जवाब देने में जरा भी नहीं हिचकती थी. बातबात पर अड़ जाना, घूमनाफिरना, शौपिंग करना और जहांतहां मटरगश्ती करना उस का स्वाभाव बन चुका था. अपनी मरजी से अकसर मायके चली जाती थी. उस की इन्हीं आदतों से न केवल पति, बल्कि ससुर राय सिंह और सास तक परेशान रहते थे. सभी उस की हरकतों से अच्छी तरह वाकिफ थे. कोई गलत कदम नहीं उठा ले, यही सोच कर वे उस पर ज्यादा अंकुश नहीं लगा पाते थे. आनंद यादव गुड़गांव की जिला अदालत में वकील था.

सुनीता और अनामिका हमउम्र होने के चलते आपस में अपनी बातें शेयर करती थीं. उन के बीच हंसीमजाक चलता रहता था. वह अनामिका के कमरे में बेधड़क आयाजाया करती थी. इसी क्रम में वह कृष्णकांत से भी बातचीत करने में काफी खुली हुई थी. दोनों के बच्चे गली में या मकान की छत पर साथसाथ खेलते थे. राय सिंह की पहचान इलाके में सब से शांत व्यवहार रखने वाले लोगों में थी. वह राजेंद्र पार्क के अपने मकान में नौकरी करने के समय से ही रहे थे. उन की इलाके में अच्छी जानपहचान और धाक थी. लोग उन्हें सम्मानित नजरिए से देखते थे. उन्होंने ही गली में जगहजगह पर पेड़पौधे लगवाए थे. रिटायर्ड फौजी होने के कारण वह अपने रुटीन के बेहद पक्के थे. सुबह साढ़े 4 बजे उठ जाते थे और रात की बची रोटियां ले कर सैर पर निकल पड़ते थे. बाहर घूमती गायों को रोटियां खिला देते थे.

समयसमय पर पार्क में पेड़पौधों की छंटाईकटाई का काम भी कर दिया करते थे. थोड़ीबहुत कसरत कर घर आ कर समय से नाश्ता कर लेते थे. फिर दिन भर दूसरे कामकाज में व्यस्त हो जाते थे. वैसे उन्होंने प्रौपर्टी का काम कर रखा था. उस के लिए अपने घर के नीचे ही औफिस बना लिया था. हालांकि वे संस्कार, संस्कृति, धर्म अध्यात्म इत्यादि में गहरा विश्वास रखते थे. इन विषयों पर लोगों से विचारविमर्श भी किया करते थे. जिस दिन राय सिंह के घर से 5 लाशें बरामद हुई थीं, उन में एक लाश उन की बहू की भी थी. एक ही घर से एक साथ इतनी लाशें इलाके में पहली बार निकली थीं, जिसे देख कर लोग हैरत में पड़ गए थे.

उन्हें इस बात को ले कर भी हैरानी हो रही थी कि जब एकएक कर लाशें उन के घर से निकल रही थीं, उस वक्त राय सिंह नहीं थे. वह अचानक कहां चले गए थे, जबकि उन्हें बीते दिन की शाम को लोगों ने देखा था. यहां तक कि कुछ लोगों ने उन्हें सुबह पार्क में भी मौर्निंग वाक करते देखा था. दूसरी तरफ गुरुग्राम थाने की पुलिस 24 अगस्त की सुबह अलसाई हुई बैठी थी. थानाप्रभारी इस बात से निश्चिंत थे कि बीती रात शांति से गुजरी. इलाके में किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. उन्होंने एक कांस्टेबल को चाय लाने के लिए कहा और खुद फ्रैश होने चले गए. कुछ समय बाद बाथरूम से आने पर उन्होंने थाने में हलचल पाई. मालूम हुआ कि कोई आदमी अपने हाथ में रक्तरंजित गंडासा ले कर आया है और बुदबुदा रहा है, ‘मैं ने सब को मार दिया, सब खत्म कर दिया. अच्छा किया, न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी.’

उसे 3 कांस्टेबल घेरे हुए थे. पूछ रहे थे कि उस ने क्या किया है, किसे मारा है, गंडासा कहां से लाया है, उस पर खून कैसे लगा है? इन सवालों के जवाब देने के बजाय एक ही रट लगाए हुए था, ‘मैं ने सब को मार दिया..’

थानाप्रभारी ने सभी कांस्टेबलों को हटा कर और उसे अपने सामने की कुरसी पर बिठाया. तब तक उन की चाय आ चुकी थी. उन्होंने अपनी चाय उसे पीने के लिए दे दी, लेकिन उस ने चाय लेने से इनकार कर दी. हाथ में कस कर पकड़ा हुआ गंडासा थानाप्रभारी के सामने टेबल पर रख दिया. उस पर काफी मात्रा में खून लगा हुआ था. थाना प्रभारी ने पूछा, ‘‘कौन हो तुम? यह गंडासा तुम्हें कहां से मिला?’’

‘‘साहबजी, मैं पूर्व फौजी राव राय सिंह हूं. मैं इसी थानाक्षेत्र के राजेंद्र पार्क में रहता हूं. वहां मेरा अपना मकान है.’’ व्यक्ति बोला.

‘‘और यह गंडासा… इस पर खून कैसा?’’ थानाप्रभारी ने जिज्ञासा जताई.

‘‘यह मेरा ही गंडासा है. मैं ने इस से 5 को मार डाला है.’’ वह बोला. उस के चेहरे पर निश्चिंतता के भाव थे.

‘‘मार डाला? तुम ने मारा 5 को? किसे मारा? क्यों मारा? पूरी बात बताओ.’’ थानाप्रभारी चौंकते हुए बोले.

‘‘साहबजी, बताता हूं, सब कुछ बताता हूं. मैं ने अपने घर में ही सब को मारा है. सभी की लाशें वहीं पड़ी हैं. जाइए, पहले उस का दाह संस्कार करवाइए. मुझे जो सजा देनी है, बाद में दे दीजिएगा.’’ यह कहतेकहते उस ने अपना सिर झुका लिया. संभवत: उस की आंखें नम हो गई थीं. वह भावुक हो गया था. सिर झुकाए बोला, ‘‘उन को मारता नहीं तो और क्या करता साहब? वे थे ही इसी लायक. मरने वालों में एक मेरी बहू भी है. मैं ने उसे बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन नहीं मानी तब ऐसा कर दिया.’’

राय सिंह की बातें ध्यान से सुनने के बाद थानाप्रभारी ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया. फिर अपने उच्चाधिकारियों को इस सनसनीखेज हत्याकांड की सूचना दे दी और टीम के साथ राजेंद्र पार्क की ओर निकल पड़े. गुरुग्राम थाने की पुलिस दलबल के साथ साढ़े 7 बजे राजेंद्र पार्क स्थित राय सिंह के मकान में ऐसे दाखिल हुई, जैसे उन्हें पहले से सब कुछ मालूम हो. जैसेजैसे राय सिंह ने बताया था, उसी के मुताबिक लाशों की बरामदगी हुई. संयोग से छोटी बच्ची की सांस चल रही थी, जिसे अस्पताल में भरती करवा दिया गया. पुलिस लाशों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम हाउस भिजवाने के बाद आगे की काररवाई के लिए कागजी काम निपटाने में जुट गई थी.

थानाप्रभारी जघन्य हत्याकांड में लिप्त हत्यारे की तलाश को ले कर चिंता में थे. उन्होंने राजेंद्र पार्क मोहल्ले में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मंगवाने के आदेश दे दिए थे. उन के मन में एक सवाल उमड़घुमड़ रहा था कि राय सिंह कोई प्रोफेशनल हत्यारा नहीं था, तो फिर उस ने बेरहमी से इतने लोगों को मौत के घाट कैसे उतारा होगा? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए राय सिंह से दोबारा पूछताछ की जाने लगी. उस ने दावे के साथ हत्याकांड के बारे में पूरी बातें बताई. उस के बाद जो कहानी सामने आई, उस के पीछे अवैध रिश्ते का होना सामने आया. राय सिंह ने बताया कि सुनीता उन की एकलौती बहू थी, लेकिन वह अकसर अपने मायके चली जाती थी. मायके में लंबे समय तक गुजारती थी.

बात जनवरी, 2021 की है. एक दिन जब सुनीता लंबे समय के बाद अपने मायके से ससुराल लौटी तो दिनभर घर का काम करने के बाद वह शाम को अपनी सहेली अनामिका से मिलने चली गई. वह दूसरी मंजिल पर रहती थी, जबकि सुनीता पहली मंजिल पर और राय सिंह अपनी पत्नी के साथ ग्राउंड फ्लोर पर रहते थे. सुनीता जिस समय अनामिका से मिलने उस के कमरे में गई थी, उस समय राय सिंह पानी की टंकी की सफाई करने के लिए अपनी छत पर गए हुए थे. अनामिका को कमरे में न पा कर सुनीता वापस लौटने लगी, तभी अंदर किचन से कृष्णकांत की आवाज आई, ‘‘आ गईं आप? कैसे हैं आप के मायके वाले?’’

‘‘अच्छा तो आप किचन में हैं. खाना पका रहे हो क्या? अनामिका कहां गई है?’’

‘‘जी, वह दिल्ली में अपने रिश्तेदार के घर पर गई है. एकदो दिनों में आ जाएगी. बच्चे भी जाने की जिद कर रहे थे. बच्चे भी उसी के साथ हैं.’’ कृष्णकांत बोलतेबोलते कमरे में आ गए.

‘‘तभी कहूं कि घर में इतना सन्नाटा क्यों है? मैं तो आज ही आई हूं. आप कैसे हैं?’’ सुनीता बोली.

‘‘अरे आप खड़ी क्यों हैं, बैठिए. गजब का संयोग है, चाय बनाते समय पानी अधिक पड़ गया और आप अचानक…’’ कृष्णकांत बोलने लगे. उन की अधूरी बात को सुनीता ने पूरा किया.

‘‘…मैं अचानक आ गई हूं तब तो आप की चाय पी कर ही जाऊंगी.’’ कहती हुई वह हंसने लगी. उस समय सीढि़यों से उतरते हुए राय सिंह ने सुनीता की हंसी की आवाज सुन ली.

उन्हें पता था कि कृष्णकांत की बीवीबच्चे दिल्ली गए हुए हैं. उन्हें तुरंत झटका लगा कि सुनीता जरूर कृष्णकांत के साथ हंसीठिठोली कर रही है. कुछ समय के लिए वह वहीं रुक गए. वहां से कृष्णकांत का कमरा दिखता था. दरवाजे पर परदा लगा हुआ था, लेकिन उस के किनारे से अंदर की थोड़ी झलक दिख रही थी. उन्होंने ध्यान से देखने की कोशिश की. कमरे में पलंग पर पैर लटकाए सुनीता बैठी दिखी. उस समय कमरे में और कोई नहीं था. जल्द ही कृष्णकांत हाथ में 2 कप चाय लिए हुए आ गए. एक कप उस ने सुनीता को पकड़ाई फिर उस के सामने किसी स्टूल पर बैठ गए.

परदे के किनारे से केवल सुनीता ही नजर आ रही थी. उस का खिला हुआ चेहरा साफ नजर आ रहा था. हाथ में चाय पकड़े हुए थी. पता नहीं क्या बात हुई सुनीता चाय का प्याला लिए हुए किचन में चली गई. पीछेपीछे कृष्णकांत भी चले गए. राय सिंह बाहर से समझ गए थे कि दोनों भीतर के दूसरे कमरे में चले गए होंगे. वे मन ही मन अपनी बहू की इस हरकत को देखते हुए खून का घूंट पी कर रह गए. उसी समय नीचे राय सिंह की पत्नी चिल्लाई, ‘‘पानी का मोटर चला दूं क्या?’’

इस आवाज से राय सिंह का ध्यान टूटा. वे कुछ सीढि़यां ऊपर चढ़ कर बोले, ‘‘हां, चला दो.’’

उधर कमरे में सुनीता किचन में चली गई थी, ‘‘क्या कृष्णकांतजी, आप एकदम फीकी चाय पीते हो. चाय मीठी हो तो बातें भी मीठी होती हैं.’’

पीछे से कृष्णकांत ने किचन में आ कर सुनीता को चीनी का डब्बा पकड़ाया. उसी समय नल से पानी तेजी से गिरने लगा. कृष्णकांत नल बंद करने के लिए आगे बढ़े, लेकिन पानी की धार  काफी तेज हो गई. उस का फव्वारा फैलने लगा. सुनीता भी वहां पहुंच कर बेसिन में से बरतन हटाती हुई बोली, ‘‘अरे बरतन उल्टी रखोगे तब ऐसा ही होगा.’’

ऐसा करते हुए दोनों के बदन टकरा गए और नल से निकलते फव्वारे से सुनीता का दुपट्टा समेत शरीर का ऊपरी भाग गीला हो गया. वह भाग कर बाहर के कमरे में आ गई. दुपट्टे को हटा कर उसी से चेहरा व बदन पोंछने लगी. तब तक कृष्णकांत उस के चाय की कप ले कर आ गए. उन्होंने सुनीता के उभरे बदन को देखा. उन्हें देखते हुए सुनीता ने कृष्णकांत को देखा. वह शरमा गई. झट से गीला दुपट्टा गले में डाला और कमरे से निकल गई. उसी समय राय सिंह दोबारा सीढि़यों से उतर रहे थे. उन्होंने सुनीता को कृष्णकांत के कमरे से निकलते हुए देखा. वह बदहवासी की हालत में भागती हुई निकली थी. राय सिंह से टकरातेटकराते बची और दनदनाती हुई पहली मंजिल के अपने कमरे में चली गई.

राय सिंह को उस के अनैतिक रिश्ते की गंध समझते देर नहीं लगी. उन का शक विश्वास में बदल गया कि सुनीता के कृष्णकांत के साथ मधुर संबंध हैं. उन्हें गुस्सा तो बहुत आया लेकिन शांत बने रहे. यह घटना तो घट गई थी, लेकिन राव राय सिंह के मन में उठने वाले सवाल उन्हें रात को सोने नहीं दे रहे थे. वह लगातार चिंतित रहने लगे. उन्हें यह भी चिंता सताने लगी कि कहीं सुनीता उन के बेटे को धोखा न दे दे. सुनीता और कृष्णकांत के बीच कोई अनैतिक रिश्ता तो नहीं? इस घटना के बाद वे अपनी बहू और कृष्णकांत को शक की नजरों से देखने लगे. हालांकि उन्होंने इस का जिक्र किसी से नहीं किया था. अपनी पत्नी तक को नहीं बताया था. जबकि राय सिंह मन ही मन यह सब सोच कर कुढ़ते रहते थे.

वे सुनीता के मिजाज को अच्छी तरह जानते थे, इसलिए उस पर दबाव नहीं बना पा रहे थे. उन्हें पता था कि उस के खिलाफ कुछ भी बोलने का मतलब बेइज्जत होना है. उसी बीच फरवरी, 2021 में सुनीता फिर अपने मायके चली गई. एक महीने बाद कोरोना की दूसरी लहर ऐसी आई कि लौकडाउन और कर्फ्यू के चलते लोगों का कहीं आनाजाना मुहाल हो गया. मई, 2021 में कृष्णकांत के गांव से उन के पिता के बीमार होने का फोन आया. उन्हें सपरिवार आननफानन अपने गांव जाना पड़ा. गांव से वह वापस गुरुग्राम आ तो गए लेकिन उन की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी थी. एक तरफ उन की नौकरी छूट गई थी, दूसरी तरफ मकान का किराया 7 महीने का बाकी हो गया था. किराए को ले कर राय सिंह से कृष्णकांत की कई बार बहस भी हो चुकी थी.

गांव में अपने पिता की देखभाल करने के 3 महीने बाद अगस्त में रक्षाबंधन के ठीक 5 दिन पहले लौटे थे. राय सिंह ने तब किराया न देने पर उन्हें खूब खरीखोटी सुनाई थी. वह पहले से ही अपनी बहू को ले कर परेशान थे. उन्होंने सोचा किराए के बहाने कमरा खाली करवा लेने पर कृष्णकांत से उस की बहू का संबंध खत्म हो जाएगा. कृष्णकांत ने कुछ समय की मोहलत मांगी. उसी बीच 19 अगस्त को सुनीता भी मायके से गुड़गांव लौट आई. राय सिंह के किराया मांगने पर उस ने कृष्णकांत और परिवार की तरफदारी की. उस ने कहा वह खराब हालत में कहां जाएंगे. सुनीता की बातों से राय सिंह दुखी हो गए. उस ने कृष्णकांत के सामने ही यह बात कही थी, जिस से उन्होंने बेइज्जती महसूस की थी. उस वक्त तो राय सिंह खून का घूंट पी कर रह गए, लेकिन मन ही मन में एक संकल्प भी ले लिया.

सुनीता द्वारा कृष्णकांत का पक्ष लिए जाने का कारण वह समझ रहे थे. उन के रिश्तों को ले कर पहले से ही शक का कीड़ा मन में कुलबुला रहा था. सुनीता की तरफदारी से कीड़ा रेंगने लगा था. राव सिंह सुनीता के संदिग्ध चरित्र और कृष्णकांत द्वारा किराया नहीं देने को ले कर काफी तनाव में आ गए थे. एक दिन रात को अचानक उन की नींद खुल गई और पेड़पौधों की कटाईछंटाई करने वाले गंडासे की धार तेज करने लगे. उन की पत्नी ने रात को ऐसा करते देख कर पूछा तब उन्होंने बहाना बनाते हुए कहा कि उन्हें कई पेड़ों की छंटाई करनी है. गंडासा की धार तेज करने का सिलसिला 19 अगस्त से 23 अगस्त तक चला.

23 तारीख की शाम को 7 बजे राव सिंह का बेटा आनंद यादव अपने कुछ दोस्तों के साथ खाटू श्याम मंदिर में दर्शन करने के लिए चला गया था. राय सिंह ने उसी रात अपनी योजना को अंजाम देने का मन बना लिया. रात के 12 बजे के बाद राय सिंह पहले की तरह उठे और गंडासा निकाल कर छत की सीढि़यां चढ़ने लगे. उन की पत्नी विमलेश की नींद खुल गई, लेकिन उन्होंने समझा वे गंडासे की धार तेज करने गए होंगे. किंतु मोबाइल की रोशनी से घड़ी देखी तो ढाई बजे का समय देख कर चौंक गई. उस के मन में कुछ आशंका हुई और दबेपांव छत पर जाने लगी. सीढि़यों पर अंधेरा था, जिस से वापस लौट कर अपने कमरे में आ कर लेट गई. उधर राय सिंह ने पहली मंजिल पर पहुंच कर अपनी बहू का कमरा खटखटाया.

2-3 बार दरवाजा खटखटाने के बाद अंदर से सुनीता ने गहरी नींद में दरवाजा खोला. इस से पहले कि सुनीता को कुछ पता चलता, राय सिंह ने उस के सिर पर गंडासे से जोरदार वार कर दिया. सुनीता वहीं चीख कर गिर पड़ी. उस के गिरते ही राय सिंह ने दनादन शरीर पर कई वार कर दिए. उस के सिर से ले कर शरीर के कई हिस्से से खून बहने लगा. नीचे राय सिंह की पत्नी विमलेश सुनीता की चीख सुन कर भागीभागी पहली मंजिल पर जा पहुंची. वहां पति के हाथ में खून से सने गंडासे को देख कर डर गई और उल्टे पांव अपने कमरे में आ कर लेट गई.

सुनीता को मौत के घाट उतारने के बाद वह सीधे दूसरी मंजिल पर जा पहुंचे. संयोग से कृष्णकांत ने अंदर से कुंडी बंद नहीं की थी. अंधेरे में हलकी फैली हुई रोशनी में राव सिंह ने कृष्णकांत और उस के पूरे परिवार को नीचे जमीन पर ही लेटे पाया. समय बरबाद नहीं करते हुए सब से पहले कृष्णकांत के सिर पर गंडासे से दे मारा. उस का पहला हमला ही इतना जोरदार था कि कृष्णकांत पहले ही वार से अपनी गहरी नींद से जाग ही नहीं पाए. वह बेसुध हो गए. राव सिंह ने कृष्णकांत पर अपना आपा खोते हुए करीब 7 वार लगातार किए. कृष्णकांत की मौके पर ही मौत हो गई. तब तक थोड़ी दूरी पर सोई अनामिका नींद से जाग गई थी. जख्मी पति को देख कर उस ओर जैसे ही आने की कोशिश की, राय सिंह ने उस के सिर पर भी गंडासे का एक जोरदार वार कर दिया.

तब तक बच्चे जाग गए थे. वे अपने मांबाप को बेसुध हालत में देख कर कहने लगे, ‘‘अंकल माफ कर दीजिए. इन्हें मत मारिए. इन्हें छोड़ दीजिए.’’ तब तक राय सिंह अपना आपा खो चुके थे. अनामिका पर एक के बाद एक कई वार करने के बाद बच्चों पर भी गंडासे से हमला बोल दिया और फिर अपने कमरे में आ कर बाथरूम में घुस गए. पूरे हत्याकांड के बाद राव सिंह बाथरूम में घुस कर नहाया. अपने कमरे में वह पंखे के नीचे बैठा. नए कपड़े पहने और करीब साढ़े 4 बजे उठ कर अपने डेली रूटीन में व्यस्त हो गया. मूकदर्शक बनी जड़वत पत्नी विमलेश को ठहर कर देखा और पार्क की ओर सैर पर निकल पड़ा.

उसी दिन सुबह करीब साढ़े 6 बजे जब वह पार्क से अपने घर लौटा और दोबारा लाशों को जा कर देख आया. फिर हाथ में गंडासा लहराते हुए थाने चला गया. इस बात की पुष्टि बाद में इलाके के 3 सीसीटीवी कैमरों में कैद रिकौर्डिंग से हुई.  उस के कपड़े और उस औजार पर खून के छींटों की जांच के बाद उस के द्वारा हत्या किए जाने की भी पुष्टि हो गई. इस हत्याकांड की सुनीता के भाई अशोक यादव ने भी राजेंद्र पार्क पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई. उन्होंने रिपोर्ट में राव राय सिंह के परिवार पर सुनीता से पैसों की मांग का आरोप लगाया. इस कारण वह अकसर सासससुर से झगड़ कर मायके आ जाती थी.

कथा लिखे जाने तक केस को सुलझाने के लिए गुड़गांव की राजेंद्र पार्क पुलिस ने हर पहलू को ध्यान में रखते हुए परिवार के सभी सदस्यों के बयान ले लिए हैं.  आरोपी राव राय सिंह को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है.  इस पूरे हत्याकांड में एकमात्र बची हुई पीडि़त 6 साल की विधि की हालत में लिखे जाने तक सुधार हो रहा था. उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भरती करवाया गया था. Family Dispute

 

सिरफिरे का प्यार : बना गले की फांस

सिरफिरे का प्यार : बना गले की फांस – भाग 3

तेजाब डालने के बाद दोनों शास्त्रीनगर के डी ब्लौक पहुंचे. यहां उमंग ने बाइक अपने घर पर खड़ी की और राहुल औटो से गोविंदपुरम पहुंचा. यहां से उस ने अपनी कार उठाई और मुरादनगर, मोदीनगर होते हुए वह हरिद्वार की तरफ निकल गया. राहुल ने सबूत नष्ट करने के लिए घटना के वक्त पहने हुए कपड़े भी रास्ते में जला दिए और डिब्बा फेंक दिया. अगले दिन वह आ गया. उस दिन वह उमंग के साथ जब बाइक पर कहीं जा रहा था, तभी पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त तेजाब का खाली डिब्बा, वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक, दोनों के मोबाइल फोन और घटना के समय पहने गए कपड़े अधजली हालत में बरामद कर लिए. पुलिस ने मदद के लिए आगे आई और नेहा को अस्पताल पहुंचाने में मदद करने वाली संजयनगर की महिला कांता देवी को प्रशस्ति पत्र दे कर सम्मानित किया. वहीं पुलिस को काल करने वाले युवक अमित शर्मा की भी सराहना की. पुलिस ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

नेहा ने भावनाओं में बह कर इस तरह किसी से रिश्ता न बनाया होता, तो शायद ऐसी नौबत कभी नहीं आती. वहीं राहुल ने भी नेहा के पीछे न पड़ कर विवेक का परिचय दिया होता तो उस का भविष्य भी चौपट होने से बच जाता. उस ने जो दुख नेहा को दिया, उस की भरपाई मुश्किल है.    ?

हलाला का विरोध करने वाली शबनम पर एसिड अटैक

पुलिस के ढीले रवैए का ही नतीजा है कि एसिड अटैक की घटनाएं आए दिन बढ़ती जा रही हैं. 21 अगस्त को गाजियाबाद में एसिड अटैक की घटना के बाद सीमावर्ती जिले बुलंदशहर में भी एक महिला को शिकार बनाया गया. वह महिला कोई और नहीं बल्कि बहुविवाह और हलाला को ले कर चर्चा में आई शबनम रानी थी.

13 सितंबर, 2018 को शबनम रानी अपने बच्चे के साथ बुलंदशहर के एसपी से मिलने जा रही थी. इसी दौरान बुलंदशहर के कालाआम चौक के नजदीक बाइक सवार 2 युवक आए. उन में से एक ने उस के ऊपर तेजाब फेंक दिया. इस के बाद दोनों वहां से फरार हो गए.

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी. कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंच गई. पुलिस को जब पता चला कि पीडि़ता शबनम रानी है तो इस की सूचना जिला प्रशासन और अपने आला अधिकारियों को दे दी. पुलिस शबनम को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले गई. सूचना मिलते ही डीएम, एसपी सहित बड़े अधिकारी मौके पर पहुंच गए. बाद में वह पीडि़ता से मिलने अस्पताल पहुंचे. शबनम ने अपने देवर पर एसिड फेंकने का आरोप लगाया.

दरअसल, सन 2010 में शबनम की शादी शरीयत के अनुसार हुई थी. बाद में वह 3 बच्चों की मां भी बनी. सब कुछ ठीक चल रहा था कि उसी दौरान शबनम के पति ने किसी महिला से दूसरी शादी कर ली. इस के बाद शबनम पर परेशानियां बढ़ने लगीं. पति बातबेबात पर उसे मानसिक रूप से प्रताडि़त करने लगा. आरोप यह है कि शबनम के पति ने उसे 3 तलाक दे दिया.

इस में शबनम का तो कोई कुसूर ही नहीं था, वह तो पति की ज्यादतियों में पिस रही थी. उस ने अपनी परेशानी अपने रिश्तेदारों को बताई. रिश्तेदारों ने शबनम के पति से बात की तो उस ने कहा कि वह शबनम को 3 तलाक दे चुका है. यदि इसे उस के साथ रहना है तो शबनम को अपने देवर से हलाला करवाना होगा. शबनम इस के लिए तैयार नहीं हुई, बल्कि उस ने मुसलिम समाज में चल रही बहुविवाह और हलाला के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला लिया.

बता दें कि निकाह हलाला के अंतर्गत अगर 3 तलाक दी गई महिला अपने पति के पास वापस जाना चाहती है तो उसे एक अन्य मर्द से शादी करनी होगी, फिर उस मर्द को तलाक देना होगा. इस के बाद ही वह अपने पति से शादी कर सकती है. शबनम इस परंपरा के खिलाफ थी.

शबनम अपने देवर के साथ हलाला के लिए तैयार नहीं हुई. लिहाजा बहुविवाह और हलाला को असंवैधानिक करार दिए जाने के लिए शबनम रानी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दी. याचिका दाखिल करने के बाद शबनम को धमकियां मिलनी शुरू हो गईं. ससुराल वालों ने तो शबनम को परेशान करने के लिए उस के घर के पानी की सप्लाई तक काट दी थी. उस के साथ बदसलूकी की जाने लगी थी. पति और देवर तो हाथ धो कर उस के पीछे पड़ गए थे.

बहरहाल, शबनम ने तेजाब हमले का आरोप अपने देवर पर लगाया है. अस्पताल में उस की हालत गंभीर बनी हुई है. इस संबंध में शबनम की तरफ से प्रोटेक्शन की मांग को ले कर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने बुलंदशहर के सीएमओ को निर्देश दिया है कि वह शबनम रानी का इलाज सुनिश्चित कराएं.

साथ ही जिला प्रशासन को भी निर्देश दिए हैं कि शबनम रानी को सुरक्षा मुहैया कराई जाए. कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के एडीशनल एडवोकेट जनरल ऐश्वर्य भाटी भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि शबनम रानी को सुरक्षा प्रदान कर दी गई है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई मुआवजे की स्कीम है और इस के लिए कोई अरजी दाखिल की गई है तो उस का निपटारा 2 हफ्ते के भीतर कर दिया जाए.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सिरफिरे का प्यार : बना गले की फांस – भाग 2

राहुल नेहा के प्यार में पागल था. यह देख नेहा ने राहुल को सच बताने की कोशिश की. लेकिन वह नाराज न हो जाए, इसे ले कर वह उलझन में थी. राहुल उस के साथ प्यार भरी बातें कर के भविष्य के ख्वाब बुनता तो वह उस की हां में हां मिलाती रहती थी.

सच्चाई सुन कर चौंक पड़ा राहुल

प्यारभरे लम्हों में एक दिन राहुल ने नेहा से अपने दिल की बात कही, ‘‘नेहा, मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं.’’

‘‘कितना?’’ नेहा ने उस की आंखों में आंखें डाल कर पूछा तो वह बोला, ‘‘बहुत ज्यादा. तुम अपने घर पर बात करो, मैं हमेशा के लिए तुम्हें अपनी बना लूंगा. आखिर कब तक हम यूं ही मिलते रहेंगे.’’

‘‘मैं जानती हूं राहुल लेकिन…’’

‘‘लेकिन क्या?’’ राहुल ने पूछा.

‘‘मैं तुम्हें एक सच भी बताना चाहती हूं.’’

‘‘ऐसा भी तुम्हारा कौन सा सच है जो मुझे पता नहीं है.’’

‘‘राहुल, प्लीज तुम नाराज नहीं होना.’’

‘‘ऐसी क्या बात है नेहा?’’ कहते हुए राहुल गंभीर हो गया.

‘‘मैं शादीशुदा और एक बच्चे की मां हूं.’’

‘‘क…क…क्या?’’ राहुल को झटका लगा. यह सुन कर वह जमीन पर आ गिरा. कुछ पलों के लिए वह विवेकशून्य हो गया. उसे ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी. नेहा ने इस खामोशी को तोड़ा, ‘‘हां, यही सच है राहुल, मैं भी तुम से प्यार करती हूं इसलिए सच बता कर तुम्हें नाराज नहीं करना चाहती थी.’’

सच जान कर राहुल को झटका तो बहुत बड़ा लगा, लेकिन वह नेहा को खोना भी नहीं चाहता था. उस ने बात को वहीं खत्म कर देना बेहतर समझा.

समय अपनी गति से चलता रहा. 3 जून को राहुल का जन्मदिन था. नेहा ने उसे एक होटल में पार्टी दी. राहुल पहले ही होटल पहुंच गया और बाहर खड़े हो कर नेहा के आने का इंतजार करने लगा.

उसे यह देख कर झटका लगा कि नेहा को वहां छोड़ने के लिए एक फौर्च्युनर कार आई थी. कार सवार से वह हंसहंस कर बातें कर रही थी. राहुल ने जन्मदिन तो मनाया लेकिन उस का माथा ठनक गया. पूछने पर नेहा ने बताया कि वह औटो से होटल आई थी.

शक ने बढ़ा दीं दूरियां

राहुल को शक हुआ कि नेहा के संबंध किसी अन्य के साथ भी हैं. इस बात को अभी एक महीना ही बीता था कि राहुल ने एक बार फिर उसे फौर्च्युनर गाड़ी से उतरते देखा. इस के बाद राहुल के दिमाग में यह शक पूरी तरह घर कर गया कि नेहा न केवल उसे, बल्कि अपने पति को भी धोखा दे रही है. उस के शक का इलाज नेहा ही कर सकती थी, लेकिन राहुल के ज्यादा सवालजवाब करने से वह नाराज हो गई. दोनों के बीच इस बात को ले कर खूब झगड़ा हुआ.

फलस्वरूप दोनों के बीच की दूरियां बढ़ गईं और नेहा ने फोन पर भी राहुल को इग्नोर करना शुरू कर दिया. राहुल के सिर पर नेहा के प्यार का जुनून सवार था. राहुल ने उस से शिकायत की, ‘‘क्या बात है, आजकल तुम मुझ से दूरियां बना रही हो?’’

‘‘इस में चौंकने जैसी कोई बात नहीं है राहुल. वजह तो तुम भी जानते हो. शक से रिश्ते नहीं चला करते.’’

‘‘तुम्हारे पास शक का इलाज है, इलाज कर दो.’’

‘‘हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं होता.’’ नेहा ने कहा तो इस मुद्दे पर दोनों के बीच एक बार फिर बहस हो गई. नेहा नाराज हो कर अपने घर चली गई.

नेहा को लगने लगा था कि राहुल उस पर जरूरत से ज्यादा ही हक जताने लगा है. इसलिए उस ने राहुल से दूर रहने में ही भलाई समझी. उस ने राहुल से साफ कह दिया कि वह उस के साथ रिश्ता नहीं रखना चाहती. नेहा के बदले हुए रुख से राहुल को अपने सपने टूटते नजर आए. उस ने राहुल की बारबार की कोशिशों के बाद भी उस से मिलना बिलकुल ही छोड़ दिया. राहुल सिर्फ अपने शक का इलाज करना चाहता था, उसे छोड़ना नहीं.

राहुल को जब लगा कि नेहा उस से पीछा छुड़ा रही है तो वह परेशान हो उठा. उस की कुछ समझ नहीं आया. वह पारदर्शी रिश्ता रखना चाहता था. उस ने नेहा को मनाने की बहुत कोशिश की. जब बात नहीं बनी तो उस ने यह बात अपने साथी पुष्कर त्यागी व आयुषि त्यागी को बताई. राहुल ने उन्हें पूरी बात बताते हुए कहा, ‘‘मैं बहुत उलझन में हूं. तुम दोनों को मेरे साथ नेहा के घर चलना होगा.’’

‘‘उस से क्या फायदा? जब वह रिश्ता नहीं रखना चाहती तो तुम्हें भी उस से दूर हो जाना चाहिए.’’

‘‘मैं उसे मनाने की कोशिश करूंगा. नहीं मानी तो उस के पति के सामने पोल खोल दूंगा. फिर शायद पति उसे छोड़ दे और वह मेरी हो जाए.’’ उन दोनों को उस की बात अजीब लगी, लेकिन चूंकि दोनों राहुल के दोस्त थे, इसलिए उन्होंने उस के साथ जाने का वादा कर लिया. 30 जुलाई को वे राहुल के साथ नेहा के घर पहुंच गए.

नेहा के घर वालों को बता दी सच्चाई

राहुल को अचानक अपने घर आया देख नेहा के होश उड़ गए, लेकिन वह उसे भगा भी नहीं सकती थी. उस की मुलाकात नेहा के पति व सास से भी हुई. राहुल ने उन के सामने नेहा से संबंध स्वीकार किए तो सब को झटका लगा. पीछा छुड़ाने के लिए नेहा को कहना पड़ा कि राहुल से उस की दोस्ती रही है लेकिन अब वह जबरन उस के पीछे पड़ा है.

नेहा ने राहुल को चेतावनी भरे लहजे में कहा, ‘‘मेरा घर उजाड़ने की कोशिश मत करो राहुल, तुम सुधर जाओ वरना मैं तुम्हारे खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दूंगा. आइंदा मेरे रास्ते में आने की कोशिश भी मत करना वरना मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’

बात न बनती देख राहुल ने भी धमकी भरा लहजा अपनाया, ‘‘अभी तो मैं चला जाता हूं, लेकिन ध्यान रखना नेहा मैं भी इतनी आसानी से पीछा छोड़ने वाला नहीं हूं.’’

राहुल वहां से निकल गया. नेहा के लिए राहुल से रिश्ता रखना अब गले की फांस बन चुका था. वह अपने निर्णय पर पछता रही थी. वह उस से पीछा छुड़ाना चाहती थी, लेकिन राहुल किसी भी सूरत में उस से दूर होने के लिए तैयार नहीं था. वह उसे जबरन अपना बनाना चाहता था.

दोस्त के साथ रची तेजाब डालने की साजिश

नेहा ने सोचा था कि वक्त के साथ राहुल उसे भूल जाएगा और पीछा छोड़ देगा, लेकिन यह सिर्फ उस की सोच थी. दूसरी तरफ जब राहुल को इस बात का भरोसा हो गया कि नेहा अब उस की होने वाली नहीं है तो उस ने उसे सबक सिखाने की ठान ली. कई दिनों की दिमागी उथलपुथल के बाद उस ने यह खतरनाक निर्णय ले लिया कि वह तेजाब डाल कर नेहा के चेहरे को हमेशा के लिए बिगाड़ देगा.

राहुल का एक दोस्त था उमंग प्रताप. बीएससी पास उमंग गाजियाबाद के शास्त्रीनगर में रहता था और वह एसएससी परीक्षा की तैयारी कर रहा था. उमंग की एक बार बुरे वक्त में राहुल ने मदद की थी. राहुल ने उसे 5 हजार रुपए उधार दिए थे. राहुल जानता था कि उमंग पर उस का अहसान है, इसलिए वह उस का साथ जरूर देगा.

हुआ भी बिलकुल ऐसा ही. उस ने अपने दोस्त उमंग को पूरी बात बता कर अपना साथ देने के लिए तैयार कर लिया. उमंग ने राहुल को समझाने की कोशिश भी की मगर वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था. जल्द ही उस ने उमंग की मदद से एक डिब्बे में तेजाब का इंतजाम कर लिया. यह 11 अगस्त की बात थी.

राहुल ने अगले कुछ दिन नेहा को फोन किए ताकि बात बन जाए लेकिन उस ने उसे जरा भी भाव नहीं दिया तो वह भन्ना गया. वह जानता था कि हर शाम नेहा अपने बच्चे को ट्यूशन छोड़ने जाती है. उस ने नेहा पर 20 अगस्त को तेजाब डालने की योजना बना ली.

वह उमंग के साथ बाइक पर सवार हो कर निकल गया. पहले उस ने शराब पी और फिर पी ब्लौक चौराहे पर जा कर खड़ा हो गया. उमंग प्रताप बाइक चला रहा था, जबकि वह तेजाब का डिब्बा लिए पीछे बैठा था. बाइक का नंबर छिपाने के लिए उन्होंने उस पर सफेद कागज चिपका दिया था. जैसे ही नेहा वहां आई तो राहुल ने उसे रोका और तेजाब डाल दिया.

                                                                                                                                            क्रमशः

सिरफिरे का प्यार : बना गले की फांस – भाग 1

सड़क पर पड़ी वह खूबसूरत महिला दर्द से बुरी तरह छटपटाते हुए बिलखबिलख कर चीख रही थी. उस के शरीर से गंधनुमा धुआं सा निकल रहा था. तड़पते हुए वह खुद को अस्पताल ले जाने की गुहार लगा रही थी. उस की सफेद रंग की स्कूटी वहीं बराबर में खड़ी थी. उस के चेहरे पर असीम दर्द था. मौके पर लोगों की भीड़ तो एकत्र थी लेकिन बदले जमाने की फितरत के हिसाब से कोई भी उस की मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था.

लोग तमाशबीन बने खड़े थे. तभी एक महिला भीड़ को चीरते हुए आगे आई और लोगों को देख कर बोली, ‘‘अरे, एसिड अटैक हुआ है इस बेचारी पर. शर्म आनी चाहिए तुम सब को, एक औरत तड़प रही है और तुम सब तमाशा देख रहे हो. तुम्हारी बहनबेटी होती तब भी ऐसे ही तमाशा देखते क्या?’’

‘‘हम तो यहां अभी पहुंचे हैं, पुलिस को फोन भी कर दिया है. शायद आने वाली ही होगी.’’ भीड़ में से एक व्यक्ति ने कहा तो महिला बोली, ‘‘किसी की मदद के लिए पुलिस का इंतजार करना जरूरी है क्या? मैं अस्पताल ले जाती हूं इसे.’’ कहते हुए महिला आगे बढ़ी तो अन्य लोग भी साथ देने को तैयार हो गए. इत्तफाक से तभी पुलिस वहां आ पहुंची.

दरअसल, महिला पर एसिड अटैक की यह सनसनीखेज वारदात देश की राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद शहर के थाना कविनगर क्षेत्र स्थित संजयनगर के सैक्टर-23 के पी ब्लौक चौराहे पर हुई थी. प्रत्यक्षदर्शियों ने जो कुछ पुलिस को बताया, उस के मुताबिक करीब साढ़े 5 बजे वह महिला स्कूटी से जा रही थी. तभी बाइक पर सवार 2 लोग आए. उन्होंने उसे रोका और पलक झपकते ही साथ लाए डिब्बे से तेजाब उस के ऊपर उड़ेल दिया. जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक हमलावर वहां से भाग निकले.

यह घटना 21 अगस्त, 2018 की थी. इस घटना की सूचना मिलने पर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया, जिस के बाद थानाप्रभारी प्रदीप कुमार त्रिपाठी व सीओ आतिश कुमार सिंह घटनास्थल पर पहुंच गए. आननफानन में महिला को अस्पताल ले जाया गया. डाक्टरों ने तुरंत उस का उपचार शुरू कर दिया. महिला का चेहरा, हाथ, पैर, पेट व कमर का हिस्सा झुलस गया था. उस की हालत गंभीर थी, लिहाजा उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के लिए रैफर कर दिया गया. पुलिस अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे.

महिला बहुत ज्यादा बात करने की स्थिति में तो नहीं थी, फिर भी औपचारिक पूछताछ में उस ने हमले में शामिल एक युवक का नाम पुलिस को बता दिया. उस के मुताबिक उस ने साथियों के साथ मिल कर उस पर तेजाब से हमला किया था. जब वह अपने बेटे को स्कूटी से ट्यूशन की क्लास में छोड़ कर वापस घर जा रही थी, तभी उस युवक ने अपने साथियों के साथ उस पर एसिड फेंका.

पीडि़ता के पति की तहरीर के आधार पर पुलिस ने राहुल नामक युवक को नामजद करते हुए उस के और उस के साथियों के खिलाफ भादंवि की धारा 326ए व 120बी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया. एसएसपी वैभव कृष्ण ने अपने अधीनस्थों को इस मामले में तत्काल काररवाई के निर्देश दिए.

सरेआम हुई इस वारदात की गूंज प्रदेश की सत्ता के शिखर लखनऊ तक भी पहुंची. मामला गंभीर था, लिहाजा मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार भी अस्पताल पहुंचे और पीडि़ता का हाल जाना. एडीजी ने एसएसपी को निर्देश दिए कि आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो. उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए.

पुलिस मामले की तहकीकात में जुट गई. पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल यही था कि महिला पर तेजाबी हमला क्यों किया गया? पीडि़ता चूंकि युवक को जानती थी तो यह बात साफ थी कि हमलावर का मकसद उस का चेहरा बिगाड़ना था. मामला प्रेम प्रसंग का लग रहा था.

इस बात को बल तब मिला जब महिला के पति ने भी पुलिस को बताया कि राहुल उस की पत्नी के साथ जबरन रिश्ता रखना चाहता था. वह उस पर साथ रहने का दबाव बनाता था. साथ ही उस ने धमकी भी दी थी कि अगर वह उस के साथ नहीं रहेगी तो वह उसे किसी के साथ रहने लायक नहीं छोड़ेगा.

पुलिस ने टीम बना कर मुख्य आरोपी की तलाश शुरू कर दी. घटनास्थल वाले रास्ते के सीसीटीवी फुटेज भी देखे गए, जिस में 2 युवक बाइक से जाते हुए दिख रहे थे लेकिन बाइक का नंबर या उन के चेहरे नहीं दिख रहे थे. बाइक सवारों में से एक ने हेलमेट लगाया था, जबकि दूसरे ने चेहरे पर गमछा बांधा हुआ था.

पुलिस ने महिला के मोबाइल से राहुल का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया, जिस से नामपता मिलने के साथ ही उस की लोकेशन भी मिलनी शुरू हो गई. पुलिस ने उस की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछा दिया. अगले दिन पुलिस ने राहुल को गाजियाबाद स्थित हापुड़ चुंगी से गिरफ्तार कर लिया. उस के साथ एक अन्य युवक भी था. पूछताछ में उस ने अपना नाम उमंग प्रताप बताया. वह भी राहुल के साथ घटना में शामिल था. पुलिस दोनों को थाने ले आई. पुलिस ने विस्तार से पूछताछ की तो दोस्ती, प्यार व नफरत में डूबी चौंकाने वाली कहानी सामने आई.

फेसबुक पर हुई दोस्ती

नेहा (परिवर्तित नाम) संजयनगर की रहने वाली थी. वह पेशे से डायटीशिन थी, जबकि उस के पति का कोचिंग सेंटर था. नेहा खूबसूरत भी थी और आधुनिक भी. वह सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक का इस्तेमाल करती थी. करीब 8 महीने पहले एक दिन उस के पास राहुल गर्ग नाम के एक युवक की फ्रैंड रिक्वेस्ट आई. राहुल गाजियाबाद के ही राजनगर का रहने वाला था. बीए पास राहुल के पिता की हार्डवेयर की दुकान थी. वह भी व्यवसाय में पिता का हाथ बंटाता था.

राहुल अच्छी कदकाठी का आकर्षक नौजवान था. नेहा ने उस की रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली. इस के बाद दोनों के बीच चैटिंग का सिलसिला चल निकला. जल्द ही दोनों के बीच दोस्ती हो गई और उन्होंने एकदूसरे का नंबर ले लिया. बातों का दायरा बढ़ा तो बातों के साथसाथ मुलाकातें भी शुरू हो गईं.

चंद दिनों की मुलाकातों में दोनों के बीच प्यार हो गया. नेहा शादीशुदा थी, लेकिन उस ने यह बात राहुल से छिपा ली थी. वक्त के साथ दोनों का प्यार परवान चढ़ा, तो राहुल उस के साथ अपनी दुनिया बसाने का ख्वाब देखने लगा. राहुल उसे दिल से चाहता है, नेहा यह बात बखूबी जानती थी. यही वजह थी कि वह उस की एक आवाज पर दौड़ी चली आती थी.

सामाजिक लिहाज से शादीशुदा हो कर भी किसी युवक के साथ इस तरह का रिश्ता रखना यूं तो गलत था, लेकिन आधुनिकता की चकाचौंध में बह कर नेहा भी दिल के हाथों मजबूर हो गई थी. पतन की डगर कभी अच्छी नहीं होती. शुरुआत में भले ही किसी को अंदाजा न हो, लेकिन एक दिन ऐसे रिश्तों की कीमत चुकानी पड़ती है.

                                                                                                                                           क्रमशः