इशरत परवीन शांता की हमउम्र थी और उन की दोस्ती शादी के पहले से थी, जो शांता की शादी के बाद भी बनी रही. वह शांता को घरेलू नाम गुड्डी कह कर बुलाती थी. दोनों सहेलियों में जबरदस्त प्रेम था. दोनों हर रोज एकदूसरे से मिले या बात किए बगैर रह नहीं पाती थीं.
शादी के पहले से थे समलैंगिक संबंध
शांता की शादी पंकज शर्मा के साथ 2012 में हुई थी. वहीं, इशरत परवीन का निकाह 2018 में हुआ था. शादी के कुछ समय बाद ही इशरत परवीन ने अपने पति का घर छोड़ दिया था और अपने मायके में रह रही थी.
इधर शांता की भी अपने पति के साथ हमेशा अनबन होती रहती थी. दोनों जब भी साथ होतीं, तब अपने अपने पति की शिकायतों का पुलिंदा खोल लेती थीं. उस के बाद अपने मन की भड़ास निकालते हुए हमबिस्तर हो जाती थीं.
उन के बीच समलैंगिक संबंध बेहद गहरे बन चुके थे. उन के बीच अप्राकृतिक सैक्स संबंधों की भूख इस कदर थी कि वे इस की तलब पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहती थीं.
पंकज शर्मा द्वारा शांता और इशरत के बीच समलैंगिकता का खुलासा होते ही पुलिस द्वारा दोनों से अलगअलग स्नेहांशु की हत्या के बारे में सख्ती के साथ पूछताछ की गई.

पहले तो वे मुकरती रहीं, लेकिन बाद में शांता ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही अपने बेटे की हत्या की है. इसी तरह से अलग से हुई इशरत से पूछताछ में उस ने भी हत्या में सीधे तौर पर शामिल होने की बात स्वीकार कर ली.
शांता ने बताया कि वह अपनी गर्लफ्रेंड से मिले बगैर नहीं रह सकती थी, जिस में उस का बेटा ही बाधक बन चुका था. यानी कि अपने लेस्बियन प्रेमी से मिलने की तीव्र इच्छा में एक मां ने ही बेटे को मौत की नींद सुला दिया था. उन्होंने घटना को किस तरह से अंजाम दिया, इस बारे में विस्तार से जो कुछ बताया वह इस प्रकार है.
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शांता ने पुलिस को बताया कि शादी से पहले ही उस के इशरत के साथ समलैंगिक रिश्ते थे. दोनों एकदूसरे के साथ संबंध बनाती थीं. दोनों की शादी हो जाने के बाद भी उन के बीच यह रिश्ता बना रहा. इशरत ने तो इस संबंध के लिए अपने पति और ससुराल तक को त्याग दिया था. जबकि शांता किसी तरह पति के साथ मतभेद के बावजूद ससुराल में टिकी हुई थी. इसी बीच वह एक बेटे की मां बन गई थी, जो 10 साल का हो चुका था.
दोनों पतिपत्नी काम करते थे, इस कारण उन के पास आर्थिक तंगी नहीं थी. बच्चा भी प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई कर रहा था.
एक रोज स्नेहांशु ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में तब देख लिया था, जब वह स्कूल से घर आया था. उस वक्त तो उस ने कुछ नहीं बोला, लेकिन जब इशरत ने वहां से जाते वक्त अपने बैग से चौकलेट निकाल कर उसे दी, तब उसे फेंकते हुए स्नेहांशु बोला, ”मौसी तुम गंदी हो, मुझे तुम से बात नहीं करनी है. जाओ, यहां से.’’
यह सुन कर मां बोली, ”नहीं बेटा, मौसी को ऐसे नहीं बोलते हैं.’’
”बोलूंगा, मौसी गंदी है. तुम भी गंदी हो. सब को बोलूंगा… पापा को भी बोलूंगा.’’ स्नेहांशु चीखता हुआ बोला और घर से बाहर जाने लगा. शांता ने उसे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया. ‘प्यारा बेटा, दुलारा बेटा’ कह कर पुचकारने लगी.
उस रोज किसी तरह से शांता और इशरत ने उस के पसंद की मिठाई खिलाने, चौकलेट देने और साइकिल दिलवाने के आश्वासन पर वह थोड़ी देर में नरम पड़ गया. किंतु उस के चेहरे से साफ पता चल रहा था कि उसे अपनी मां और मौसी से नफरत हो चुकी है.
उसी दिन से शांता और इशरत की रातों की नींद उड़ गई थी. दोनों को डर सता रहा था कि उन के बैडरूम की बात कहीं इस बच्चे के द्वारा सभी को मालूम न हो जाए. स्नेहांशु उस की सच्चाई को लोगों से बता न दे, जिस से उन की समाज में बनीबनाई छवि खराब हो जाएगी. उन्हें इस से अधिक चिंता यह सताने लगी थी कि वे अपने सैक्स की भूख कैसे मिटा पाएंगी?
करीब हफ्ते भर से उन्हें रिश्ता बनाने का मौका नहीं मिला था. यह बेचैनी उन के दिमाग की नसों को बुरी तरह से झिंझोड़ चुकी थी. वे बौखलाहट से भर गई थीं. उन की स्थिति मनोरोगी जैसी हो गई थी.
18 फरवरी, 2024 को घर में कोई नहीं था. कई दिनों बाद इशरत आई थी. दोनों अपने कमरे में थीं. स्नेहांशु इशरत को देखते ही साइकिल ले कर निकल पड़ा था. थोड़ी देर में घर आया. सीधा अपनी मां के कमरे में जा घुसा. वहां दोनों को उस ने नग्न हालत में देखा तो वह चीख पड़ा, ”तुम लोग गंदे हो.’’
उन्होंने तुरंत अपनेअपने कपड़े पहने. तब तक स्नेहांशु कमरे से निकल चुका था. कुछ मिनट में ही दोनों कमरे से बाहर निकलीं. प्लान के मुताबिक उन्होंने मिल कर सब से पहले एक मूर्ति से उदास बैठे स्नेहांशु के सिर पर कई वार कर दिए.
जब बुरी तरह से चोट खा कर वह बेहोश हो गया और जमीन पर गिर पड़ा तो उन्होंने उस के हाथों की नसें काट दीं. इस पर भी उन्हें जीवित बचने का अंदेशा हुआ, तब उस के शरीर पर रसोई के चाकू से अनगिनत प्रहार कर दिए. इस हत्या से पहले दोनों ने घर के टीवी की आवाज तेज कर दी, ताकि बच्चे की चीख बाहर न पहुंचे.
स्नेहांशु फर्श पर बेसुध पड़ा था. उस के बाद दोनों वहां से फरार हो गईं. इशरत ने अपना मोबाइल फोन कर लिया था. फरार होने के बीच चंद मिनट के लिए इशरत ने अपना मोबाइल फोन औन कर शांता से बात की थी. एफएसएल और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस पूरी तरह से निश्चिंत हो गई कि इस घटना को इन दोनों महिलाओं ने ही अंजाम दिया था.
पुलिस ने शांता शर्मा और उस की सहेली इशरत परवीन को गिरफ्तार कर लिया. जांच अधिकारी के मुताबिक दोनों महिलाओं के समलैंगिक संबंधों की जानकारी शांता के पति को भी थी, लेकिन वह लोकलाज के मारे यह पूरी बात हमेशा छिपाता रहा. कथा लिखे जाने तक दोनों को न्यायिक हिरासत में ले कर आगे की काररवाई की जा रही थी.
पूछताछ में पंकज शर्मा के मकान से 5 मकान दूर रहने वाले नीतीश आनंद ने बताया कि जब उन के घर से बच्चे के चीखने चिल्लाने की आवाजें आईं तो वह दौड़ेदौड़े घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने देखा कि बच्चे के सिर पर गहरी चोट लगी थी. उस के पूरे शरीर पर चाकू से गोदे जाने के निशान थे. खून से लथपथ वह तड़प रहा था. इस से पहले कि वह दूसरे की मदद से उसे ले कर अस्पताल जा पाते, उस ने दम तोड़ दिया. इसी बीच उस के मम्मीपापा को सूचित किया जा चुका था.
सीसीटीवी फुटेज से मिले सुराग
फिर सवाल था कि आखिर कौन हो सकता है, किस ने अपनी खुन्नस और अपनी दुश्मनी मासूम बच्चे से निकाली? इन्हीं सवालों के सहारे पुलिस मौके से सुराग और सबूतों को बटोरने में जुट गई. पुलिस ने बच्चे के बारे में जानकारी इकट्ठा की. उस की मां से कुछ बुनियादी सवालों को ले कर भी पूछताछ की. जैसे वो कहां जाता था, किन बच्चों के साथ खेलता था, किसकिस से मिलता था. हालांकि मामूली सवालों के जवाब से पुलिस को तसल्ली नहीं हुई.
घटनास्थल का पुलिस कमिश्नर अमित पी. जबलगी ने भी दौरा किया और उस के बाद फोरैंसिक टीम ने नमूने इकट्ठे कर जांच के लिए भेज दिए. पूछताछ में पंकज शर्मा ने रोते हुए बताया कि उन के परिवार के साथ इलाके में किसी से भी कोई रंजिश नहीं है.
किंतु कुछ दिन पहले स्कूल में उन के बेटे और एक सीनियर छात्र के बीच किसी बात को ले कर झगड़ा हो गया था. दोनों एक साथ ही स्कूल जाया करते थे. फिर भी उन्हें यह विश्वास नहीं हो पा रहा है कि मामूली झगड़े के लिए कोई कैसे इस तरह से निर्मम तरीके से बच्चे की हत्या कर सकता है?
पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल था कि आखिर बच्चे को ले कर किसी की किसी के साथ क्या दुश्मनी हो सकती है? इस दिशा में तहकीकात शुरू की गई. पूछताछ के लिए सब से पहले उस के मम्मीपापा से कई सवाल किए गए.
इस के अलावा जांचकर्ताओं को पता चला कि शांता अकसर अपने बेटे को पीटती थी. इस का कारण पूछने पर उस ने बताया कि वह पढ़ नहीं पाता था, तब उसे पीटती थी. उस के बयानों की पुष्टि के लिए कुछ पड़ोसियों और स्नेहांशु के हमउम्र दोस्तों से भी पूछताछ की गई.
तमाम पूछताछ और छानबीन करने पर भी पुलिस को जब कोई सुराग नहीं मिला, तब पुलिस की टीम घटना के अगले दिन मौका ए वारदात पर फिर जा पहुंची. वहां सुराग खंगालने लगी. तमाम साइंटिफिक सुरागों, मोबाइल टावर से मिली लोकेशन और फोरैंसिक एक्सपर्ट के जरिए मिले सबूतों के साथसाथ कुछ सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए.
घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज निकाले गए. सीसीटीवी में पुलिस ने देखा कि 2 महिलाएं स्नेहांशु के घर से बाहर निकल रही हैं. इन में से एक स्नेहांशु की मम्मी थी तो दूसरी की पहचान उस की सहेली इशरत परवीन के रूप में हुई. पुलिस ने मृतक के घर वालों के मोबाइल फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई.
पुलिस ने इशरत के बारे में जल्द ही कई जानकारियां जुटा ली थीं. शांता शर्मा से उस का फोन नंबर ले लिया था और उस के फोन की काल डिटेल्स भी निकलवा ली थी. काल डिटेल्स के अनुसार शांता के नंबर से उस की हर रोज काफी समय तक बात होती रहती थी. किंतु घटना के दिन उस की शांता से काफी कम समय के लिए बात हुई थी.
एक और चौंकाने वाली बात थी कि उस रोज उस का मोबाइल करीब 6 घंटे तक बंद रहा. इशरत परवीन के मोबाइल की लोकेशन दोपहर 2 बजे कोलकाता के वाटगंज में दिखी थी. फिर उस का मोबाइल स्विच्ड औफ हो गया था. दोबारा तकरीबन 5-6 घंटे बाद शाम को 8 बजे उस के मोबाइल की टावर लोकेशन कोलकाता के वाटगंज की थी.
मां आई शक के दायरे में
असल में चंद मिनट के लिए ही उस का मोबाइल फोन चालू हुआ था, फिर उसी के नंबर से शांता के मोबाइल नंबर पर बात हुई थी. पुलिस के लिए यही बात चौंकाने वाली थी. यहीं से पुलिस को शक हुआ और दोनों ही उस बच्चे की हत्या के संदेह के दायरे में आ गईं. देर किए बगैर पुलिस हत्या के आरोप में बच्चे की मां शांता शर्मा को पूछताछ के लिए थाने ले आई.
पुलिस ने बच्चे की हत्या और घटना के समय उस के वहां नहीं होने के बारे में कई सवाल किए गए. इस क्रम में यह भी पूछा गया कि उस ने अपने बच्चे को क्यों मारा? कई बार वह अपने ही जवाब में उलझी हुई तो भयभीत भी नजर आई. उस के मनोभाव और जवाब बदलते देख कर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. सीधे लौकअप में डाल दिया.
उस के गिरफ्त में आने के बाद सनसनी फैल गई. इस की खबरें लोकल चैनल और सोशल मीडिया पर तेजी से चलने लगीं. पूछताछ के दरम्यान उस के विचलित होने की हरकतों से पुलिस का शक और गहरा हो गया था.

शांता और उस की सहेली इशरत
दूसरी तरफ शांता गिरफ्त में आते ही तब कमजोर पड़ गई थी, जब उस के पति के साथ कुछ बातचीत हुई. पति ने उस के कान में क्या कुछ कहा, जो वह एकदम से ढीली पड़ गई. उस ने वह बात पुलिस से भी कही.
दरअसल, पंकज शर्मा ने अपनी पत्नी के गलत आचरण के बारे में बताते हुए कहा था, ”जैसी करनी वैसी भरनी है साहब जी…आदत से लाचार थी. मेरे मना करने पर भी नहीं मानती थी.’’
”क्या उस का किसी के साथ कोई चक्कर था? कोई बौयफ्रेंड था?’’ पुलिस ने पूछा तो इस पर पंकज शर्मा छूटते ही तीखे लहजे में बोले, ”बौयफ्रेंड नहीं सर, उस की गर्लफ्रेंड थी.’’
”तुम्हारा कहना है कि उस का किसी लड़की के साथ ही चक्कर था. मतलब कि वह लेस्बियन है?’’ जांच अधिकारी चौंकते हुए बोला. फिर थोड़ा ठहर कर पूछा, ”लेकिन इस का बच्चे की हत्या से क्या संबंध हो सकता है?’’
”वह मैं नहीं जानता, लेकिन इतना पता है कि वह अपनी सहेली इशरत के साथ घंटों बंद कमरे में अकेले समय गुजारती थी,’’ पंकज बोला.
”यह तुम क्या कह रहे हो अपनी पत्नी के बारे में!’’
”मैं बिलकुल सही कह रहा हूं सर, मैं ने अपनी पत्नी शांता और उस की सहेली इशरत को कई बार समलैंगिक संबंध बनाते हुए पकड़ा है. इस पर उन्हें डांटा भी था. शांता को समझाया भी था कि शादी से पहले तक जो था, सो था अब बच्चा बड़ा हो रहा है. उसे मालूम होगा, तब उस पर बुरा असर पड़ेगा. लेकिन वह नहीं मानती थी.’’ पंकज शर्मा बोले.
”तुम ने उस की सहेली से भी इस संबंध को खत्म करने के बारे में कुछ नहीं कहा?’’ जांच अधिकारी ने सवाल किया.
”मैं ने उसे भी समझाने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में बीवी ने चुप रहने को कहा था और हिदायत देती हुई मुझे इशरत की तरफ से धमकी दी कि अगर मैं ने इस बारे में उस से दोबारा बात की तो वह मुझे रेप के मामले में फंसा देगी. फिर मैं डर गया और अपने मुंह पर ताला जड़ लिया.’’ यह कहते हुए पंकज शर्मा ने एक लंबी सांस ली. उन्होंने महसूस किया कि जैसे उन के दिलोदिमाग पर से कोई बोझ उतर गया हो.
पुलिस टीम के सामने एक और नई बात आ गई थी. साथ ही उस के शक की सूई शांता की सहेली इशरत की ओर भी घूम गई थी. उस वक्त रात अधिक हो चुकी थी और वह कोलकाता वाटगंज में रहती थी, जो दूसरे थाना क्षेत्र में था. उसे हिरासत में लेने के लिए उत्तरपाड़ा थाना पुलिस पहले श्रीरामपुर महिला थाने पहुंची और वहां की पुलिस टीम के साथ इशरत परवीन को उस के घर से उठा लाई.
पुलिस की शुरुआती जांच में हैवानियत का पता चला. 10 वर्षीय स्नेहांशु के सिर को भारी चीज से कुचला गया था. उस के हाथों की नसें काट दी गई थीं. सब्जी काटने वाली छुरी से उस के शरीर पर अनगिनत जख्म किए गए थे. घटनास्थल पर ही एक टेढ़ी छुरी पड़ी थी. घर में रखे गए सारे सामान सुरक्षित थे. इसे देख कर कोई भी आसानी से समझ सकता था कि घटना लूट को अंजाम देने के लिए नहीं की गई थी.
पुलिस की फोरैंसिक टीम ने लाश और घटनास्थल की जांच के बाद पाया कि हत्यारा बच्चे के साथ बड़ी बेरहमी से पेश आया होगा.
जिस तरह से बच्चे की हत्या की गई थी, उस से यह भी जाहिर हो रहा था कि हो न हो जिस ने भी मारा, उसे इस बच्चे से बेहद नफरत रही होगी. इतना ही नहीं, जख्मों से यह भी साफ पता चला कि कातिल किसी भी सूरत में बच्चे को जीवित बचने नहीं देना चाहता था.
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से करीब 17 किलोमीटर दूर हुगली जिला काफी चहलपहल वाले क्षेत्रों में से एक है. यहां के ऐतिहासिक, धार्मिक और कारोबारी महत्त्व वाले घनी आबादी के शहर कोन्नगर के आदर्शनगर मोहल्ले में 18 फरवरी, 2024 की शाम के वक्त अचानक चिल्लपों मच गई थी. कई लोग स्नेहांशु के घर की ओर दौड़ पड़े थे, जबकि कुछ लोग अपनेअपने घरों के दरवाजे पर आ कर कानाफूसी करने लगे थे.
”अरी ओ सोनू की मां, सुना है स्नेहांशु को किसी ने मार दिया? अभी तो एक घंटा पहले इधर साइकल चला रहा था. क्या हुआ उसे? जा… जा कर पता करो तो क्या बात है?’’ एक वृद्धा पड़ोसी महिला से बोली.
”हां चाची, मैं ने भी थोड़ी देर पहले उस के घर से चीखने चिल्लाने की आवाजें सुनी थीं. उस के घर से टीवी की बहुत तेज आवाज आ रही थी, पता नहीं चल पाया कि कोई चीख रहा है या कोई मारपीट वाली फिल्म चल रही है.’’ 10 साल के स्नेहांशु के स्कूल में पढऩे वाले सोनू की मां बोली.
”अरे, मैं तो चली जाती शांता के घर… मेरे घुटने में दर्द है न! ज्यादा चल नहीं सकती मैं. आज सुबह से शांता भी नहीं दिखाई दी. लगता है, उस की सहेली आई हुई है.’’ वृद्धा बोली.
”हां चाची, शांता बहन की सहेली को तो मैं ने दोपहर में ही उस के घर जाते देखा था, लेकिन स्नेहांशु को क्या हुआ. सोनू को भेजती हूं पता करने.’’
”अरे नहीं वह बच्चा है, तू ही चली जा.’’ वृद्धा बोली.
”जी चाची,’’ कहती हुई सोनू की मां स्नेहांशु के घर की ओर जाने लगी.
उसी वक्त उस ओर तेजी से पुलिस की एक गाड़ी भी गुजरी. वृद्धा हैरानी से देखती हुई बुदबुदाई, ”लगता है, मैं ने सही सुना…पता नहीं क्या हो गया इस मोहल्ले में!’’
स्नेहांशु के बारे में बात कर रही औरतों के घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर दाईं ओर गली में मुड़ते ही पंकज शर्मा पूरे परिवार के साथ रहते थे. परिवार में पत्नी शांता शर्मा के अलावा उन का 10 साल का बेटा स्नेहांशु था. हां, साथ में प्यारा सा पालतू कुत्ता और पड़ोस में उन के भाई का परिवार भी रहता था.
शांता अपने ससुर ओमप्रकाश शर्मा, सास प्रेमलता शर्मा, देवर प्रभात शर्मा और जय के साथ रहती थी. पति पंकज और बेटा स्नेहांशु भी साथ थे. एक अन्य देवर प्रवीर अपने परिवार के साथ सिलीगुड़ी में रहता था.
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चाकू से गोद कर किस ने की बच्चे की हत्या
पंकज शर्मा के घर में कोहराम मचा हुआ था. वहां उत्तरपारा थाने से आई पुलिस मौजूद थी. शाम होने के चलते गली में लोगों का आवागमन अधिक था. पड़ोसियों के अलावा आतेजाते लोगों की अच्छीखासी भीड़ लग चुकी थी.
घर में हत्या की वारदात हुई थी. हत्या एक बच्चे की थी. मरने वाला चौथी कक्षा में पढऩे वाला 10 साल का स्नेहांशु था. गोलमटोल चेहरे वाला वह बहुत ही प्यारा बच्चा था. घर में उसी बच्चे की रक्तरंजित लाश पड़ी हुई थी. लाश की हालत ऐसी कि वह देखी नहीं जा रही थी. मौजूद लोग उस की मासूमियत और स्वभाव की चर्चा कर रहे थे.
कहें तो लोगों को भरोसा ही नहीं हो पा रहा था कि कुछ समय पहले गली में साइकल चलाने वाला स्नेहांशु अब इस दुनिया में नहीं रहा. सभी के दिमाग में कई सवाल कौंध रहे थे कि आखिर उसे किस ने मारा होगा? क्यों मारा होगा? एक बच्चे से किसी की भला क्या दुश्मनी हो सकती है? क्या वह घर में अकेला था?…लेकिन उन का कुत्ता तो बहुत वफादार था!
पास बैठी मां शांता का रोरोकर बुरा हाल था. इस घटना के बारे में पहली जानकारी स्नेहांशु की हमउम्र चचेरी बहन को तब हुई थी, जब वह किसी काम से उस के घर आई थी.
उस से पुलिस ने शुरुआती पूछताछ की. उस ने बताया कि मृत भाई की हालत देख कर वह काफी डर गई थी. उस वक्त घर में और कोई नहीं था. वह भाग कर सीधे अपने घर आ गई थी. उस ने अपने मम्मीपापा को उस बारे में बताया. उन्होंने ही पहले पुलिस को, फिर पंकज शर्मा को फोन कर दिया था.

स्नेहांशु शर्मा
स्नेहांशु शर्मा एक जानेमाने अंगरेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ता था. उस के मम्मीपापा दोनों कामकाजी थे. पंकज शर्मा कोलकाता की एक निजी कंपनी में काम करते थे, जबकि मां शांता शर्मा एक कौस्मेटिक की दुकान में काम करती थी.
इत्तफाक ही था कि वारदात के वक्त दोनों घर से बाहर थे, जबकि घर के दूसरे सदस्य भी बस कुछ देर के लिए बाहर गए थे. इसी बीच कातिल ने घर में घुस कर स्नेहांशु की जान ले ली.
साथ ही पुलिस कुछ ऐसी बातों पर गौर किया, जिन से बच्चे की हत्या का सुराग मिल सकता था. पुलिस ने पाया कि घर का पालतू कुत्ता वारदात के वक्त खामोश था. वहां मौजूद मोहल्ले के अन्य लोगों का कहना था कि वह किसी भी अजनबी को देखते ही भौकने लगता था.
इसी बात को ले कर पुलिस के लिए हैरानी की बात यह थी कि घर में स्नेहांशु का कत्ल हो गया और कुत्ते को एक बार भी किसी ने भौकते नहीं सुना. उस की मां ने बताया कि वह कुछ समय के लिए बाजार गई थी. पुलिस के गले यह बात नहीं उतरी थी कि बच्चे को छोड़ कर वह अकेली बाजार गई थी, जबकि सामान्य तौर पर ऐसा नहीं होता है.