Rajasthan News : लव जिहाद मामला, जिसने सभी को कर डाला हैरान

Rajasthan News : सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि यदि विपरीत धर्म के बालिग युवकयुवती स्वेच्छा से शादी करते हैं तो इसे लव जिहाद का नाम न दिया जाए. लेकिन पिछले दिनों बीकानेर में जो हुआ, वह आरोपोंप्रत्यारोपों का लव जिहाद ज्यादा नजर आता है, क्योंकि शादी करने वाली लड़की मनीषा जो कह रही है वह…

राजस्थान का बीकानेर वैसे तो भुजिया पापड़ के लिए मशहूर है. लेकिन पिछले दिनों बीकानेर का कथित लव जिहाद का मामला सुर्खियों में है. हाल ही में युवती मनीषा डूडी के पिता और दादा ने हिंदू समाज से न्याय के लिए गुहार लगाई. उन का आरोप था कि उन की बच्ची मनीषा डूडी का अपहरण किया गया और इस के बाद मुसलिम लड़के मुख्तयार खान पुत्र मुन्ने खान ने उस के साथ शादी कर ली. मामला बीकानेर जिले की कोलायत तहसील के बज्जू क्षेत्र का है. वहीं के रहने वाले मनीषा डूडी के दादा हरीराम और पिता सत्यनारायण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिस में उन्होंने समाज के लोगों से बेटी मनीषा को छुड़वाने की अपील की थी.

साथ ही यह भी धमकी दी कि अगर उन की बेटी नहीं आएगी तो वह आत्महत्या कर लेंगे. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने इस मामले की जांच की और उसे लव जिहाद का मामला नहीं माना. सोशल मीडिया पर वीडियो वार छिड़ गई. प्रेम विवाह करने वाली युवती मनीषा डूडी जहां अपनी मरजी से किसी के दबाव में नहीं आ कर मुख्तयार खान से शादी करने की बात कह रही थी, वहीं बीकानेर पुलिस मनीषा के प्रेम विवाह करने की बात का समर्थन कर रही थी. तथाकथित लव जिहाद के मामले ने तूल पकड़ा तो 17 जनवरी, 2021 रविवार को केसरिया हिंदू वाहिनी संगठन सहित सर्वसमाज के संगठनों ने लव जिहाद के मामले का विरोध किया. बीकानेर कलेक्ट्रेट पर हजारों लोगों ने प्रदर्शन कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की.

तथाकथित लव जिहाद का मामला सोशल मीडिया में आने और इसे बढ़ावा देने पर सामाजिक कार्यकर्ता अंबेडकर कालोनी निवासी अकबर अली ने दर्ज कराया. सत्यनारायण डूडी और उस के पिता हरीराम डूडी निवासी मुक्ता प्रसाद कालोनी, बीकानेर के खिलाफ 17 जनवरी, 2021 को नया शहर थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी. अकबर अली की शिकायत पर पुलिस ने समाज में आपसी शत्रुता बढ़ाने, 4 वर्गों में वैमनस्यता पैदा करने और अशांति का माहौल बनाने का मामला दर्ज करा लिया. अब जानते हैं कि यह मुख्तयार कौन है, जिस पर मनीषा के साथ जबरन शादी करने के आरोप लग रहे हैं.

22 वर्षीय मुख्तयार खान पुत्र मुन्ने खान, निवासी गांव बीठनोक, तहसील कोलायत, जिला बीकानेर का था. वहीं 18 वर्षीय युवती मनीषा डूडी गांव आरडी-860 बांगड़सर, जिला बीकानेर के रहने वाले सत्यनारायण डूडी की बेटी थी. मुख्तयार खान और मनीषा ने प्रेम विवाह किया था. इस अंतरधार्मिक शादी को ले कर बीकानेर में खूब बवाल मचा कट्टरपंथी इसे लव जिहाद बनाने पर तुले थे. थाने में दिए गए सर्टिफिकेट के अनुसार दोनों ने बीकानेर के एफसीआई गोदाम के पास स्थित बंगला नगर में 10 दिसंबर, 2020 को शादी की. जांच में पुलिस को पता चला कि मुख्तयार खान और मनीषा के परिवार के घनिष्ठ संबंध थे.

दोनों के पिता मुन्ने खान और सत्यनारायण बिजनैस पार्टनर थे. इस वजह से मुख्तयार का मनीषा के घर आनाजाना था. इसी दौरान दोनों करीब आए और फिर शादी का निर्णय लिया. मनीषा ने अपील की कि उस के प्रेम के नाम पर राजनीति न की जाए. उस ने कहा कि उस से पहले क्या किसी हिंदू लड़की ने मुसलिम युवक से शादी नहीं की. ऐसी बहुत शादियां हुई हैं तो हमारा विरोध क्यों?

एसपी बीकानेर प्रीति चंद्रा ने कहा, ‘यह मामला लव जिहाद का नहीं है. युवकयुवती ने अपनी शादी के कागजात भी दिखाए. इस में कहीं भी लव जिहाद नहीं है. हम मामले पर नजर रखे हुए हैं. मनीषा के पास हमारा कौन्टैक्ट नंबर है, अगर वह हम से सुरक्षा की मांग करेगी तो हम आगे की काररवाई करेंगे.’

लड़की और लड़का प्रेम विवाह बता रहे थे. पुलिस भी यही कह रही थी. जबकि लड़की के परिजन इसे लव जिहाद बता रहे थे. इस घटना ने बीकानेर में सर्दी के मौसम में भी गरमी पैदा कर दी. सोशल मीडिया पर लोग अपनाअपना राग अलाप रहे थे. जाट जाति के हरीराम डूडी का परिवार काफी समय पहले बांगड़सर से बीकानेर शहर में आ बसा था. बीकानेर में आ कर सत्यनारायण ने कामधंधे की तलाश शुरू की. उन्हीं दिनों सत्यनारायण की जानपहचान प्रौपर्टी का धंधा करने वाले मुन्ने खान से हो गई. वह गांव बीठनोक, जिला बीकानेर का रहने वाला था. मुन्ने खान जाति से मांगणहार था. वह बीकानेर में रहता था. उन दिनों सत्यनारायण का परिवार बीकानेर की मुक्ताप्रसाद कालोनी में रह रहा था.

मुन्ने खान से दोस्ती गाढ़ी हुई तो मुन्ने खान के साथ सत्यनारायण ने पार्टनरशिप में धंधा शुरू किया. वैसे मांगणहार जाति के लोगों का पेशा गायनवादन है. मांगणहार जाति के लोग अपने यजमानों के घर पर बच्चे के जन्म, शादी एवं तीजत्यौहार पर जा कर गानाबजाना करते हैं.  यजमानों द्वारा दिए गए रुपएपैसों, अनाज, कपड़े वगैरह से इन के परिवारों का पालनपोषण होता है. मगर मुन्ने खान ने अपने पुश्तैनी काम की जगह गांव बीठनोक से बीकानेर आ कर प्रौपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया और उस का काम चल निकला. प्रौपर्टी डीलिंग में अच्छी आमदनी थी. सत्यनारायण को भी उस ने अपना पार्टनर बना लिया. दोनों ने पार्टनरशिप में एक होटल भी खोला और साथ में काम करने लगे.

सत्यनारायण जहां सीधासादा था, उस के उलट मुन्ने खान दबंग प्रवृति का व्यक्ति था. सत्यनारायण को यह पता नहीं था. खैर, दोनों साथ काम करते थे और दोस्ती भी पक्की थी तो मुन्ने खान का सत्यनारायण के घर आनाजाना शुरू हो गया. थोड़े ही दिनों में मुन्ने खान ने सत्यनारायण की पत्नी को अपनी धर्मबहन बना लिया. मुन्ने का बेटा मुख्तयार खां अकसर सत्यनारायण के घर आता और ज्यादा से ज्यादा समय मनीषा के इर्दगिर्द मंडराता रहता था.  मुख्तयार ने 17 साल की उम्र से ही मनीषा पर डोरे डालने शुरू कर दिए थे. मनीषा उस समय नाबालिग थी. मुख्तयार ने उस का ब्रेनवाश कर के अपने रंग में रंग लिया. उम्र बढ़ने के साथ ही दोनों प्यार के रंग में रंगते चले गए.

दोनों की प्रेम कहानी का मनीषा के घर वालों को पता तक नहीं था. सत्यनारायण और उस के परिजन समझते थे कि धर्म के रिश्ते की वजह से मनीषा व मुख्तयार भाईबहन हैं. बाद में किसी वजह से मुन्ने के और सत्यनारायण के बीच थोड़ी खटास आई तो होटल की पार्टनरशिप का धंधा अलग कर लिया. सत्यनारायण ने मुन्ने खान से पार्टनरशिप तोड़ी और अपना धंधा अलग कर लिया. मुन्ने खान को गुस्सा तो बहुत आया, मगर वह कुछ कर नहीं सका. सत्यनारायण ने सुमेरराम पूनिया, जो बीकानेर में ही खाद, बीज का काम करते थे, के साथ धंधा शुरू कर दिया. सुमेर पूनिया जाति से जाट थे और दबंग प्रवृत्ति के थे. वह शादीशुदा और 4 बेटियों के पिता भी थे.

मुन्ने जानता था कि सुमेर पूनिया से वह पार नहीं पा सकता, मगर उस ने अपनी योजनानुसार एक दिन सत्यनारायण पर अज्ञात बदमाशों से हमला करवा दिया. इस हमले में सत्यनारायण के हाथपैर तोड़ दिए गए. वह अस्पताल में कई महीने इलाज कराने के बाद ठीक हुए. मुन्ने खान ने सत्यनारायण की देखभाल भी की ताकि उस पर कोई शक न करे. हुआ भी यही. मुन्ने खान पर किसी ने शक नहीं किया. सत्यनारायण के पिता हरीराम डूडी की बांगड़सर गांव में खेतीबाड़ी थी और बीकानेर में सत्यनारायण का खाद बीज का कारोबार था. पूनिया सत्यनारायण के कंधे से कंधा मिला कर चलते थे. पूनिया का उन के घर आनाजाना था.

मुन्ने सुमेर पूनिया से इस कारण रंजिश रखता था क्योंकि वह सत्यनारायण के साथ काम करते थे. इन दोनों को पता नहीं था कि मुन्ने खान उन्हें बरबाद करने का तानाबाना बुन रहा है. मनीषा डूडी अब तक मुख्तयार के प्रेमजाल में फंस चुकी थी. मनीषा 18 साल की बालिग हो चुकी थी. उसे पता था कि उस के परिजन उस की शादी मुख्तयार से कभी नहीं करेंगे. ऐसे में मुख्तयार और मनीषा ने बालिग होने पर 10 दिसंबर, 2020 को कोर्ट में विवाह कर लिया. मनीषा के परिजनों को इस की भनक तक नहीं लगी थी. नववर्ष 2021 का आगमन हो चुका था. मनीषा की मां बीमार हुईं तो उन्हें अस्पताल में भरती कराया गया.

अस्पताल में सत्यनारायण, हरीराम, सुमेर पूनिया, मनीषा और सारे परिजन थे. सत्यनारायण के लिए खाना बना कर लाने के लिए दोपहर में मनीषा और सुमेर पूनिया घर गए. मनीषा ने खाना बना कर सुमेर पूनिया को टिफिन दिया. टिफिन ले कर सुमेर पूनिया अस्पताल चले आए. उन्हें आए एकाध घंटा ही हुआ था कि नयाशहर थाने की पुलिस आई और सुमेर पूनिया को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने गिरफ्तारी का कारण बताया कि थोड़ी देर पहले मनीषा ने दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई है. यह बात 4 जनवरी, 2021 की है. यह सुन कर डूडी परिवार सकते में आ गया. मनीषा के पिता, दादा और अन्य परिजन नयाशहर थाने पहुंचे और मनीषा से बात की.

मनीषा को समझाया कि उस ने गलत रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई. तब मनीषा ने कहा कि ऐसे ही रिपोर्ट दर्ज करा दी है. चूंकि रिपोर्ट दर्ज हो चुकी थी, इसलिए पुलिस ने सुमेर पूनिया को नहीं छोड़ा. अगले दिन मनीषा के कोर्ट में बयान कराए गए. बयान दे कर मनीषा कोर्ट से बाहर आई तो करीब 100-150 लोगों की भीड़ ने एक राय हो कर मनीषा का एक गाड़ी में अपहरण कर लिया. हरीराम ने पोती को छुड़ाने की कोशिश की तो आरोपियों ने गाड़ी उन पर चढ़ाने की कोशिश की. इस में हरीराम के पैर में चोट लगी. होहल्ला करने पर पुलिस ने भी अपहरण कर के ले जा रही गाड़ी का पीछा किया और पुलिस सब को पकड़ कर थाने ले आई.

वहां पर मुख्तयार खान और मनीषा डूडी ने विवाह के कागज दिखा कर कहा कि वे बालिग हैं और उन्होंने 10 दिसंबर, 2020 को कोर्ट में शादी कर ली है. तब पुलिस ने मुख्तयार खान और मनीषा को जाने दिया. तब मनीषा के घर वाले माथा पीट कर रह गए. मुन्ने खान ने एक योजना के तहत सुमेर पूनिया को बलात्कार के मुकदमे में फंसा दिया था ताकि सत्यनारायण को वह सपोर्ट न कर सके. थाने में विवाह के कागजात दिखा कर बेटेबहू को घर ले आया. हरीराम डूडी और सत्यनारायण की इज्जत पर आन पड़ी थी. उन की समझ में अब सारी कहानी आ गई थी. मगर बहुत देर हो चुकी थी. बेटी ने उन्हें धोखे में रख कर मुख्तयार खान के साथ साजिश की शिकार हो कर उस की बहू बन गई थी.

इन्होंने एसपी प्रीति चंद्रा, नयाशहर थानाप्रभारी गोविंददान चारण और अन्य से मिल कर बेटी मनीषा को वापस दिलाने की गुहार की मगर मनीषा बालिग थी और उस ने मुख्तयार खान के साथ कोर्ट में शादी कर ली थी. इसलिए पुलिस ने इन की मदद नहीं की. तब बापबेटे ने सोशल मीडिया पर वीडियो में सर्वसमाज से बेटी मनीषा के लव जिहाद का शिकार बनाने और अब बेटी वापस दिलाने की गुहार लगाई. तब सर्वसमाज ने 17 जनवरी को बीकानेर में प्रदर्शन कर पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने की मांग की. इस के बाद 18 जनवरी, 2021 को नयाशहर थाने में मनीषा की मां ने अपने साथ दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज करा दिया.

पुलिस को दी गई रिपोर्ट में उस ने बताया कि 2015 में वह अपने परिवार के साथ मुक्ताप्रसाद कालोनी में रहती थी. वहीं पर उस के पति का बिजनैस पार्टनर मुन्ने खान आता था. मुन्ने खान जब भी घर आता तो कोल्डड्रिंक ले कर आता. जुलाई 2015 में उस के पति व बच्चे घर पर नहीं थे. तब मुन्ने घर आया. उस ने कोल्डड्रिंक पिलाई, जिस से वह बेहोश हो गई. तब मुन्ने खान ने उस के साथ दुष्कर्म किया और वीडियो बना लिया. बाद में वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर बारबार दुष्कर्म किया. जब पीडि़ता ने किराए का मकान बदल लिया तब भी आरोपी उस के पास आता रहा. पीडि़ता ने आरोप लगाया कि आरोपी अपने दोस्तों को साथ ले कर आने लगा और उन्होंने भी उस के साथ दुष्कर्म किया.

मुन्ने खान का साथी गडि़याला के मोटासर निवासी शेरू खान और एक अन्य ने उस के साथ दुष्कर्म किया.  वीडियो वायरल करने और परिजनों को जान से मारने की धमकी दे कर आरोपी मुन्ने खां उस के साथ लगातार दुष्कर्म करता रहा. पीडि़ता ने आरोप लगाया कि मुन्ने खान ने बेटे मुख्तयार को उस की बेटी के पीछे लगाया और प्रेम में फंसा लिया. पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म का मामला थाना नयाशहर में दर्ज कर लिया. मामला संदिग्ध था, इसलिए इस की जांच सीओ सिटी सुभाष शर्मा को सौंप दी गई. इसी मामले को ले कर सर्वसमाज ने बीकानेर में कलेक्ट्रैट पर प्रदर्शन किया था. उसी समय मनीषा ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर और डाला. इस वीडियो में मनीषा ने जो कुछ कहा, उसे सुन कर लोग आश्चर्यचकित रह गए.

मनीषा ने एक वीडियो वायरल कर कहा कि मैं ने 4 जनवरी, 2021 को जिस सुमेर पूनिया पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया, उस सुमेर पूनिया के साथ मेरी मां के अवैध संबंध हैं. सुमेर पूनिया दूर के रिश्तेदार हैं और पिता के कामधंधे में पार्टनर. सुमेर पूनिया अकसर हमारे घर आते थे और मुझ से गलत हरकतें करते थे. मनीषा ने आगे कहा कि उस की और मुख्तयार की शादी का मेरे घर वालों को पता था. वे हमारी शादी से खुश थे. मगर बाद में वे किसी के कहने में आ कर लव जिहाद का राग अलापने लगे. अगर मनीषा के ये आरोप सही हैं तो सुमेर पूनिया को उस के परिजन क्यों बचा रहे हैं? क्या उन पर किसी का दबाव है? या फिर मनीषा ने झूठे आरोप लगाए.

सवाल यह भी है कि मनीषा ने सुमेरराम पूनिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई तो उस के परिजनों ने बेटी की बातों के बजाए उस व्यक्ति की पैरवी क्यों की, जिस पर उन की बच्ची छेड़छाड़, दुष्कर्म का आरोप लगा रही थी. वहीं मनीषा ने यह भी कहा कि अगर घर वाले बाहरी लोगों को घर के अंदर आने की छूट नहीं देते तो आज डूडी परिवार की इज्जतआबरू मिट्टी में नहीं मिलती. अब तो पुलिस जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी होगा. तभी पता चलेगा कि कौन सच्चा है और कौन झूठा.

—कथा पुलिस सूत्रों, मीडिया रिपोर्ट्स और लेखक की जांच पर आधारित है

 

सैंटियागो मार्टिन दिहाड़ी मजदूर से कैसे बना लौटरी किंग

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टेट बैंक औफ इंडिया ने 12 मार्च, 2024 को चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बौंड से जुड़ी जो जानकारी उपलब्ध कराई थी, 14 मार्च, 2024 को चुनाव आयोग ने उस जानकारी को अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया था. इस जानकारी से पता चला कि इलेक्टोरल बौंड के जरिए सब से ज्यादा चंदा फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने दिया था.

चुनाव आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने अक्तूबर, 2020 से ले कर जनवरी, 2024 के बीच 1,368 करोड़ रुपए के इलेक्टोरल बौंड खरीदे थे यानी चुनावी फंड दिया था. कंपनी ने सब से अधिक इलेक्टोरल बौंड अक्तूबर, 2021 में 195 करोड़ रुपए के खरीदे थे. जनवरी, 2022 में इस कंपनी ने 210 करोड़ रुपए के चुनावी बौंड खरीदे.

अब यहां यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि यह फ्यूचर गेमिंग कंपनी कितनी बड़ी है, कौन सा बिजनैस करती है और किस की है, जिस ने चुनावी चंदे के रूप में इतनी मोटी रकम दी है? आइए, सब से पहले तो यह जानते हैं कि यह फ्यूचर गेमिंग कंपनी करती क्या है?

फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज कंपनी की स्थापना साल 1991 में भारत के लौटरी किंग कहे जाने वाले सैंटियागो मार्टिन ने की थी. कंपनी की स्थापना तो तमिलनाडु में हुई थी, लेकिन राज्य में लौटरी पर बैन होने के कारण मार्टिन ने अपना अधिकतर व्यवसाय केरल और कर्नाटक में ट्रांसफर कर लिया था. कंपनी भले ही तमिलनाडु के कोयंबटूर में थी, लेकिन इस के खातों की किताबों में जो पता दर्ज था, वह कोलकाता का था. मजे की बात तो यह थी कि यह कंपनी स्टौक एक्सचेंज में लिस्टेड भी नहीं थी.

कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को पहले मार्टिन लौटरी एजेंसीज के नाम से जाना जाता था. नाम से ही पता चलता है कि यह कंपनी लौटरी का बिजनैस करती थी.

यह कंपनी 2 अरब डालर से अधिक के कारोबार के साथ भारत के लौटरी उद्योग में पहले नंबर पर थी. इस ने प्रतिदिन एक करोड़ से अधिक की लौटरी बेची और राज्य सरकारों को टैक्स के रूप में मोटी रकम चुकाई.

म्यांमार का मजदूर ऐसे बना अरबपति

फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (फ्यूचर गेमिंग) ने भारत के उन राज्यों में जहांजहां लौटरी खेली जाती थी और जहांजहां लौटरी बेची जा सकती थी, डीलरों और एजेंटों का एक विशाल नेटवर्क बनाया.

यही नहीं, कंपनी लगातार बाजार में यह भी पता करती रहती थी कि उस की लौटरी के इस बिजनैस को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है. उस के इस काम में डीलर और एजेंट लगातार मदद भी करते रहते थे.

यही वजह है कि आज कंपनी लौटरी के बिजनैस में नंबर एक पर है और चुनावी बौंड के रूप में सब से अधिक चंदा देने की वजह से चर्चा में भी है. अब हम यह जानते हैं कि इस कंपनी का मालिक कौन है?

इस कंपनी का मालिक है 1961 में पैदा हुआ 63 साल का सैंटियागो मार्टिन, जो कभी म्यांमार के यांगून में एक मजदूर के रूप में काम करता था. मजदूरी से जो पैसे मिलते थे, उसी से वह अपना परिवार पालता था. मार्टिन का शुरुआती जीवन बड़ी मुश्किलों और कठिनाइयों में बीता.

समय का चक्र बदला और दिनोंदिन उस की प्रतिष्ठा बढ़ती चली गई. उस ने लौटरी के जरिए आम लोगों को सपने दिखाए और किस्मत के खेल में बिजनैस को ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया. सैंटियागो मार्टिन आल इंडिया फेडरेशन औफ लौटरी ट्रेड एंड एलाइड इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष भी है.

भारत में लौटरी बिजनैस के उत्थान और विश्वसनीयता को बढ़ावा देने के लिए उस ने बहुत काम किया. उस के नेतृत्व में उस का एंटरप्राइजेज फ्यूचर गेमिंग सौल्यूशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का सदस्य बन गया. मार्टिन की वजह से लौटरी एसोसिएशन, औनलाइन गेमिंग, कैसीनो और स्पोट्र्स सट्टेबाजी को बढ़ावा मिला.

1980 के दशक में जब लौटरी के टिकटों का क्रेज बढ़ा तो मार्टिन साल 1988 में म्यांमार से भारत लौटा और टाटाबाद में चाय की एक दुकान पर काम करते हुए कोयंबटूर में रहने लगा. उन दिनों लौटरी का खूब क्रेज था, इसलिए उस ने चाय की दुकान की नौकरी छोड़ कर लौटरी का स्टाल लगाने का फैसला किया. क्योंकि इस में उसे दोहरा फायदा नजर आ रहा था. एक तो उसे बिकने वाले टिकटों से अच्छाखासा कमीशन मिलता, दूसरे न बिकने वाले टिकटों का इनाम उस की जेब में आ जाता.

उन दिनों उस की उम्र 27 साल थी. कोयंबटूर में उस ने लौटरी की 5 दुकानें खोलीं. 1988 में उस की लीमा रोज से शादी हुई. अगले साल यानी 1988 में उस ने मार्टिन लौटरी एजेंसीज लिमिटेड के नाम से कोयंबटूर में एक लौटरी कंपनी खोली, जो 2 अंकों पर इनाम देती थी. इस के लिए वह खुद अपने टिकट छपवाता था.

कई ब्रांडों और ज्यादा प्राइज के साथ उस ने अपना यह व्यवसाय शुरू किया था. देखते ही देखते उस की यह 2 अंकों पर इनाम देने वाली लौटरी घरघर में जानीपहचानी जाने लगी. जैसेजैसे कारोबार बढ़ा, मार्टिन ने चेन्नै में डेक्कन एजेंसीज, मदुरै में केएएस और त्रिची में अपने भाई रामदास के साथ मिल कर लौटरी व्यवसाय से जुड़े क्षेत्रीय खिलाडिय़ों को टक्कर देने लगा.

2 सालों में ही उस ने खुद को तमिलनाडु में लीडर के रूप में स्थापित कर लिया. साउथ में मार्टिन कर्नाटक लौटरी के तहत चलती थी तो उत्तर पूर्व में इसे मार्टिन सिक्किम लौटरी के नाम से जाना जाता था.

लोगों में लौटरी का क्रेज था ही, इसलिए मार्टिन की इस लौटरी ने पूरे इलाके में धूम मचा दी. मार्टिन की लौटरी की यह कंपनी अच्छी तरह चल निकली तो उस ने अपना यह व्यवसाय बढ़ाने का विचार किया. फिर वह कोयंबटूर के अलावा कर्नाटक और केरल में भी अपना लौटरी का यह धंधा करने लगा.

बाद में उस ने सिक्किम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र में भी अनुमति ले कर लौटरी का धंधा शुरू कर दिया. आम लोगों के सपनों और आशाओं पर टिके साम्राज्य ने उसे अपार धन का मालिक और प्रभावशाली व्यक्ति बना दिया.

मार्टिन ने लौटरी के बिजनैस में 27 साल की उम्र में कदम रखा था. जल्दी ही उस ने पूरे देश में लौटरी के खरीदारों और विक्रेताओं का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया था. यही वजह थी कि कई बार उसे देश में सब से अधिक टैक्सपेयर का खिताब मिला.

मार्टिन ने शुरू की राजनीतिक घुसपैठ

केरल ऐसा राज्य है, जहां लौटरी वहां के रहने वालों के दिमाग में तो सरकार के राजस्व में छाई रहती थी. साल 2008 में केरल में मार्टिन का राजनीतिक घोटाले का पाला पड़ा. एक जानेमाने अखबार के अनुसार, उस साल मार्टिन ने सीपीआई (एम) के मलयालम मुखपत्र ‘देशाभिमानी’ को 2 करोड़ रुपए दिए थे. लेकिन उस समय सीपीआई (एम) की केरल इकाई 2 समूहों में बंट कर आंतरिक लड़ाई में उलझी पड़ी थी.

एक समूह का नेतृत्व जहां पिनराई विजयन कर रहे थे, वहीं दूसरे समूह का नेतृत्व वी.एस. अच्युतानंद कर रहे थे. जबकि उन दिनों स्थिति यह थी कि मार्टिन पर पहले से ही सिक्किम सरकार ने 45 सौ करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगा रखा था.

उन दिनों विजयन के हाथों में ही मुखपत्र ‘देशाभिमानी’ और पार्टी की कमान थी. जबकि अच्युतानंद पार्टी के खिलाफ मुखर हो कर सीधे हमले कर रहे थे. इस का नतीजा यह निकला कि विजयन गुट को उन के इस हमले की वजह से पीछे हटना पड़ा और मार्टिन के 2 करोड़ रुपए लौटाने पड़े.

इतना ही नहीं, प्रकाशन के महाप्रबंधक के रूप में पद संभालने वाले मालाबार के नेता ई.पी. जयराजन को उन के पद से हटा दिया गया.

इस घटना के बाद ‘लौटरी मार्टिन’ राज्य में राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई. जब साउथ इंडिया में बिजनैस की बात आती है तो कुछ नाम ऐसे हैं, जो विवादों और चर्चाओं में बने रहते हैं.

द्रविड़ मुनेत्र कडग़म यानी डीएमके के साथ करीबी संबंध होने की वजह से भी मार्टिन के इस व्यवसाय में उतारचढ़ाव दिखाई दिए. साल 2011 में तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि, जो डीएमके के मुखिया भी थे, उसी साल मार्टिन ने 20 करोड़ रुपए खर्च कर के ‘इलैगनन’ नाम की एक तमिल फिल्म बनाई. इस फिल्म का स्क्रीनप्ले खुद करुणानिधि ने लिखा था. लेकिन जब राज्य की सरकार बदली और अन्नाद्रमुक की सरकार आई तो मार्टिन के इस व्यवसाय को जैसे नजर लग गई.

उस के शानदार ग्रोथ में पहली बार अड़चन साल 2003 में तब आई, जब राज्य की मुख्यमंत्री बनने के बाद जयललिता ने उन रिपोर्टों के आधार पर लौटरी के व्यवसाय पर प्रतिबंध लगा दिया कि लौटरी गरीब परिवारों पर कहर बरपा रही है.

जयललिता के इस फैसले ने मार्टिन को कर्नाटक, केरल, पूर्वोत्तर और भूटान की ओर  अपने लौटरी के व्यवसाय को ले जाने के लिए मजबूर किया. साल 2000 तक मार्टिन उद्योग और राजनीतिक हलकों में एक बड़ी शख्सियत बन चुका था. फिर तो वह नेताओं को मोटीमोटी रकम देने के साथ महंगेमहंगे गिफ्ट भी देने लगा था.

कहा जाता है कि डीएमके के एम. करुणानिधि से उस की काफी नजदीकी थी. यह भी कहा जाता है कि जयललिता ने इसी वजह से लौटरी पर प्रतिबंध लगाया था.

लौटरी किंग मार्टिन की परेशानी साल 2011 में तब और बढ़ गई, जब एआईडीएमके की राज्य में सरकार बनी. अपने शासन के शुरुआती दिनों में ही माफिया नेताओं को सबक सिखाने के लिए जयललिता ने ‘गुंडा ऐक्ट’ लागू किया. इस के बाद सैंटियागो मार्टिन सहित राज्य के डीएमके के सैकड़ों नेताओं और समर्थकों को जमीन हड़पने के आरोप में ‘गुंडा ऐक्ट’ के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था. जमीन हड़पने, अवैध लौटरी बिक्री और 14 मामलों में धोखाधड़ी करने के आरोप में मार्टिन को भी गिरफ्तार किया गया था.

लेकिन बाद में मद्रास हाईकोर्ट ने मार्टिन की हिरासत रद्द कर जमानत पर रिहा कर दिया था. फिर भी उसे 8 महीने तक जेल में रहना पड़ा था.

leema-rose-santiago-wife

                                                        मार्टिन की पत्नी लीमा रोज

इस के बाद यह कहानी बदल गई थी. आगे की कहानी में प्रवेश होता है लीमा रोज का, जो मार्टिन की पत्नी थी. गिरफ्तारी के बाद जब मार्टिन 8 महीने से अधिक तक जेल में रहा तो इस बीच सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) लौटरी से जुड़े कई घोटालों को ले कर उस के खिलाफ आरोप पत्र तैयार करने में लगी थी. पति के जेल जाने के बाद लीमा रोज व्यवसाय संभालने लगी थी. मई, 2012 में लीमा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उस के पति मार्टिन को लौटरी के फरजी मामलों में जानबूझ कर फंसाया गया था. लीमा ने इस मामले में 2 लौटरी एजेंटों को अभियुक्त बनाया था.

इन में एक एम. करुणानिधि के परिवार का करीबी था. उस ने कोयंबटूर के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर टी.पी. सुंदरमूर्ति को एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिस में उस ने लिखा था कि उस के परिवार वालों को अज्ञात लोगों द्वारा जान से मारने की धमकी दी जा रही है.

इस के बाद उस ने पत्रकारों से कहा था कि मार्टिन और उस के घर वालों को फरजी मामलों में फंसाया गया था. क्योंकि अदालत ने जब ‘गुंडा ऐक्ट’ अधिनियम के तहत उस की हिरासत रद्द कर दी थी तो अगले ही दिन पुलिस ने नए मामले दर्ज कर लिए थे. अलगअलग पूछताछ के लिए उसे बारबार थाने बुलाया जाता था. सोने नहीं दिया जाता था, जिस से उस की सेहत खराब हो रही थी.

एक के बाद खोलता गया कंपनियां

मार्टिन की बेटी डेजी मार्टिन ने तो यहां तक आरोप लगाया था कि कुछ लोग उसे एक कार में बैठा कर चेन्नै ले गए थे, जहां उस से कहा गया था कि अगर मार्टिन एक बड़ी रकम दे दे तो उस के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे. लेकिन जब उस ने पैसे देने से इनकार कर दिया तो उसे धमकी दी गई थी कि उस के पिता के खिलाफ और मामले दर्ज किए जाएंगे और उसे कभी जेल से बाहर नहीं आने दिया जाएगा. उस की जेल में हत्या कर दी जाएगी.

लीमा रोज तो मुख्यमंत्री जयललिता के सामने उन नामों का खुलासा करने को भी तैयार थी, जो उस से पैसे ऐंठना चाहते थे. लेकिन जयललिता ने उसे मिलने का मौका ही नहीं दिया.

santiago-martin-with-wife

                मार्टिन और उसकी पत्नी लीमा रोज

यहां जैसा ज्यादातर घोटालेबाज या माफिया करते हैं, उसी तरह लीमा ने भी एक राजनीतिक पार्टी इंडियन जननायक काची (आईजेके) जौइन कर ली थी. पार्टी ने उसे राज्य का उपमहासचिव बनाया था. इस के बाद उस का बेटा चाल्र्स जोस बीजेपी में शामिल हो गया था. यही नहीं, मार्टिन के भाई टायसन मार्टिन ने अपनी खुद की पार्टी ‘तमिलर विडियाल काची’ बना ली थी. उस का दामाद अवध अर्जुन वीसीके में मिल गया था.

साल 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के लिए कोयंबटूर गए थे तो लीमा रोज भी उन के साथ मंच पर दिखाई दी थी. लेकिन मार्टिन खुद राजनीति से दूरी बनाए रखे हुए था. उस का ध्यान केवल रियल एस्टेट, शिक्षा और मीडिया के नएनए उद्यमों पर था. लेकिन जैसी सफलता उसे लौटरी के व्यवसाय में मिली थी, वैसी सफलता किसी अन्य व्यवसाय में नहीं मिली.

आगे चल कर मार्टिन का व्यवसाय केवल लौटरी तक ही सीमित नहीं रहा. कोयंबटूर के नजदीक मार्टिन ने एक होम्योपैथिक मैडिकल कालेज और अस्पताल खुलवाया. इस के अलावा मार्टिन ने एस.एस. म्यूजिक (एक टेलीफोन म्यूजिक चैनल), एम एंड सी प्रौपर्टी डेवलपमेंट, मार्टिन नंथावनम अपार्टमेंट और लीना रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड जैसे व्यवसाय भी शुरू कर दिए थे.

मार्टिन साल 2002-2003 में भारत में सब से अधिक इंडीविजुअल टैक्सपेयर था. उस ने और उस की कंपनियों के समूह ने सामूहिक रूप से जुलाई, 2017 से सितंबर, 2023 तक जीएसटी के रूप में 23,199 करोड़ (प्रतिवर्ष 5 हजार करोड़) टैक्स अदा किया था.

लेकिन जैसेजैसे मार्टिन का व्यवसाय बढ़ता गया, उसी तरह उस का विवादों से नाता भी बढ़ता गया. आखिर वह भी धोखाधड़ी और वित्तीय हेराफेरी के आरोपों से बच नहीं सका. साल 2001 में आयकर विभाग के अनुसार उस ने लौटरी प्रणाली में हेरफेर किया था कि इनाम ज्यादातर न बिके टिकटों को ही मिले.

इस का एक उदाहरण उस के बेटे चाल्र्स जोस का आजाद हिंद में बंपर लौटरी में 50 लाख का इनाम जीतना था. जांच करने वालों को सिक्किम और भूटान लौटरी में मार्टिन द्वारा कथित हेरफेर के सबूत भी मिले थे. उन्होंने इस की रिपोर्ट सीबीआई में की थी.

साल 2007 में पता चला कि मार्टिन का लौटरी का व्यवसाय पुलिस के संरक्षण में चल रहा था. 2010 में सिक्किम और भूटान पेपर लौटरी पर संदेह होने पर उस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी. साल 2011 में सिक्किम सरकार की ओर से अन्य राज्यों में लौटरी बेच कर सिक्किम सरकार को 45 हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया था. इस के बाद उस के खिलाफ 30 मामले दर्ज किए गए थे.

मार्टिन आया ईडी के शिकंजे में

साल 2011 में अवैध लौटरी कारोबार पर ऐक्शन के तहत मार्टिन को तमिलनाडु और कर्नाटक पुलिस की तलाशी का सामना करना पड़ा था. साल 2013 में केरल पुलिस ने अवैध रूप से लौटरी चलाने के आरोप में उस के घर, औफिस आदि में छापा मारा था.

साल 2015 में कर चोरी और वित्तीय अनिमियतिताओं के आरोप में तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों में मार्टिन के ठिकानों पर छापे मारे गए थे. साल 2016 में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने मनी लौंड्रिंग के आरोप में मार्टिन के ठिकानों पर छापे मारे गए थे.

साल 2018 में अवैध रूप से लौटरी चलाने के आरोप में सीबीआई ने मार्टिन के आवासों और औफिसों की तलाशी ली थी. पिछले साल यानी साल 2023 में ईडी ने सिक्किम सरकार के 9 सौ करोड़ से अधिक के कथित नुकसान से जुड़े मामले में मनी लौंड्रिंग के तहत काररवाई करते हुए मार्टिन के 457 करोड़ रुपए जब्त किए थे.

ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, मार्टिन ने लौटरी के अवैध संचालन से करीब 7,500 करोड़ रुपए का सरकार का नुकसान किया था. ईडी का कहना था कि मार्टिन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, झारखंड और जम्मू में रोजाना 10 करोड़ रुपए से अधिक के लौटरी के टिकट अवैध रूप से बेचने में शामिल था.

लौटरी की अवैध बिक्री से होने वाले फायदे को वह रियल एस्टेट में निवेश करता था. यही वजह थी कि जयललिता की सरकार आने पर जमीन कब्जाने के आरोप में मार्टिन को पुलिस ने हिरासत में लिया था.

लीमा रोज और उस के बेटे चाल्र्स जोस के अलगअलग राजनीतिक पार्टियों में शामिल होने के कदम को लोग अच्छी तरह से समझ रहे हैं. लोग जान चुके हैं कि मार्टिन का परिवार राजनीति करने के लिए राजनीति में नहीं आया है, वह तो खुद को बचाने और अपने धंधे को आगे बढ़ाने के लिए राजनीति में आया है. इसीलिए उस ने इतनी मोटी रकम भी चुनावी चंदे के रूप में दी है.

लोगों का मानना है कि जितना उस ने इलेक्टोरल बौंड के जरिए चंदा दिया है, उस का कई गुना वह जनता को लौटरी खिला कर कमाएगा. क्योंकि हर किसी का सपना करोड़पति बनने का होता है. जबकि ऐसे खेलों में जीत के बाद हार निश्चित है.

अधिवक्ता पत्नी की जिंदगी की वैल्यू पौने 6 करोड़

अधिवक्ता पत्नी की जिंदगी की वैल्यू पौने 6 करोड़ – भाग 3

जिद बन गई मौत का सबब

नितिन काफी दिनों से रेनू से जिद कर रहा था कि वे इस कोठी को बेच कर ब्रिटेन चलते हैं, जहां वे कोई बिजनैस या जौब कर लेंगे. लेकिन नितिन की इस जिद का रेनू ने कभी समर्थन नहीं किया. रेनू को क्या पता था कि नितिन की यही जिद उस की मौत का सबब बन जाएगी.

नितिन नाथ की जिद थी कि रेनू उस के साथ सेक्टर 30 वाला घर बेच कर ब्रिटेन में बस जाएं, लेकिन रेनू की बारबार की न के कारण दोनों के बीच झगड़े होने लगे. कभीकभी तो नितिन रेनू पर हाथ भी छोड़ देता था. रेनू ने अपने भाई और बेटे को यह बात बता दी थी. इसलिए बेटे ने तो अपने पिता से बात तक करनी बंद कर दी. अजय सिन्हा भी नितिन को इस बात पर लानत देने लगे.

इसी दौरान जब 3 महीने पहले रेनू इलाज के लिए बेटे के पास अमेरिका गई तो नितिन ने अपनी कोठी को बेचने के प्रयास शुरू कर दिए. एक महीना पहले जब रेनू कैंसर के इलाज से ठीक हो कर घर आईं तो उस से पहले नितिन ने मनमोहन भंडारी नाम के एक ब्रोकर से अपनी कोठी का 5 करोड़ 70 लाख में सौदा कर लिया और बतौर एडवांस 55 लाख रुपए का बयाना भी ले लिया था.

पत्नी कोठी बेचने का कर रही थी विरोध

घर आने के 15 दिन बाद नितिन ने रेनू को बताया कि उस ने कोठी का सौदा कर दिया है. बस इस बात पर दोनों के बीच आए दिन लड़ाई होनी शुरू हो गई. पहले तो केवल कहासुनी होती थी बाद में हाथापाई भी होने लगी और उस के बाद इस झगड़े की बात उन के बेटे व रेनू के घर वालों को पता चल गई.

रेनू ने साफ कह दिया था कि वह किसी भी हाल में अपना घर नहीं बेचने देगी, क्योंकि उस घर में उन के मेहनत की कमाई भी लगी थी और इस घर में उन की जिंदगी भर की यादें जुड़ी थीं.

कत्ल से 2 दिन पहले रेनू और उन के पति नितिन के बीच प्रौपर्टी को ले कर ही विवाद हुआ था. रेनू ने यह बात भी अपने बेटे व भाई को बताई थी. रविवार को सुबह से ही दोनों के बीच कोठी बेचने के विवाद पर बहस चल रही थी. दरअसल, ब्रोकर ने कह दिया था कि वह जल्द ही मकान खाली कर रजिस्ट्री उन के नाम कर दे या एडवांस वापस कर दे.

नितिन नाथ ब्रिटेन में सैटल होने की तैयारी में इतना पैसा पानी की तरह बहा चुका था कि अब वह मकान बेचने के फैसले से पीछे नहीं हट सकता था. यही कारण था कि आए दिन रेनू से उस की बहस होने लगी.

रविवार की सुबह 10 से 11 बजे के बीच में इसी बात को ले कर रेनू व नितिन की बहस इतनी बढ़ी कि गुस्से में आ कर उस ने रेनू का सिर दीवार पर दे मारा. जब वह चीखने लगीं तो नितिन नाथ ने तकिए से रेनू का मुंह दबाना शुरू कर दिया, जिस से वह निस्तेज हो गईं. उस ने मुंह पर कपड़ा बांध कर उसे खींच कर बैडरूम के ही बाथरूम में डाल दिया. अपने गुस्से में रेनू से हाथापाई करते वक्त नितिन ये भूल गया था कि ब्रोकर को किसी ग्राहक के साथ उस का घर देखने के लिए एक घंटे बाद आना है.

थोड़ी देर में ब्रोकर घर देखने आने वाला था तो नितिन नाथ ने बैडरूम में बने बाथरूम में रेनू की लाश को छिपाया और बाहर से उस पर ताला लगा दिया. जब ब्रोकर व खरीदार कोठी देखने आए तो उस ने पूरी कोठी दिखाई भी थी, सिवाय उस बाथरूम के जहां उस की बीवी की लाश थी.

नितिन ने खरीदार को बताया था कि उस की बीवी को कैंसर है, इसलिए बाथरूम की तरफ न ही जाएं तो ठीक है, क्योंकि इस से इंफेक्शन का खतरा हो सकता है. मकान देखने के बाद ब्रोकर व खरीदार गए. इस के बाद नितिन ने बाथरूम खोल कर देखा तो रेनू की नाक व कान से खून निकल रहा था. पत्नी के मर्डर के बाद उस ने ठंडे दिमाग से सोचा कि क्या करना है और क्या नहीं, क्या चीजें उसे फंसा सकती हैं.

ब्रिटेन भाग जाना चाहता था नितिन

इस के बाद नितिन ने घर में बिखरा सारा खून साफ कर दिया. और तो और रेनू का लैपटाप, उस की गाड़ी की चाबी ये सारी चीजें भी उस ने ठिकाने लगा दी थीं. उस ने घर के सीसीटीवी कैमरे को भी छिपा कर रख दिया, ताकि अगर कोई घर में आए तो यह लगे कि रेनू शायद कहीं बाहर गई हैं.

नितिन के पास ब्रिटिश पासपोर्ट पहले से ही था, जिस से वह आसानी से भारत से बाहर भाग सकता था. उस ने फैसला कर लिया था कि वह अगले दिन या रात में रेनू की लाश को ठिकाने लगा देगा. इस के बाद उस ने बचने के लिए खुद को स्टोर रूम में बंद कर लिया.

उसे पता था कि रेनू से मिलने के लिए उस के परिवार का कोई सदस्य या परिचित घर आ सकता है. इसलिए उस ने सुबह से ही अपने घर के मुख्य गेट पर बाहर से ताला लगा दिया था. ब्रोकर को भी उस ने कोठी के अंदर बुलाने के लिए छोटे दरवाजा को खोला था.

शव मिलने के बाद पुलिस को लगा कि नितिन देश छोड़ कर भाग गया होगा, क्योंकि वह ब्रिटेन भागना ही चाहता था. लेकिन जब नितिन व रेनू दोनों के मोबाइल की लोकेशन घर के अंदर मिली और रेनू की लाश मिलने के बावजूद सीसीटीवी में नितिन के घर से बाहर निकलने की कोई फुटेज नहीं मिली तो पुलिस को लग गया कि हो न हो कोठी के भीतर ही कातिल का राज छिपा है. फिर कत्ल के 15 घंटे बाद स्टोररूम में छिपे रेनू के कातिल पति नितिन नाथ को गिरफ्तार कर लिया गया.

नितिन नाथ ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि स्टोर रूम में छिपे रहने के दौरान उस के फोन पर जिस की भी काल आई, उस ने सब को बताया था कि वह दिल्ली में लोधी रोड पर है, जब घर आएगा तो मुलाकात करेगा. उस का कहना था कि अगर वह पकड़ा नहीं जाता तो वह बाहर भाग जाता और फिर बाद में कभी कोर्ट में अपने वकील के माध्यम से हाजिर होता.

नितिन नाथ स्टोररूम में छिपे रहने के दौरान सिर्फ कौफी पी कर अपना पेट भरता रहा. उस ने अपने व रेनू के फोन को साइलेंट मोड पर डाल कर वाइब्रेशन पर कर दिया ताकि घर में कोई आ भी जाए तो उस के स्टोररूम में छिपे होने की जानकारी किसी को न मिले.

विस्तार पूछताछ के बाद जांच अधिकारी इंसपेक्टर डी.पी. शुक्ला ने नितिन नाथ को अपनी पत्नी रेनू की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. उसे अगले दिन हत्या व सबूत नष्ट करने के आरोप में अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

(कथा पुलिस की जांच, आरोपी के बयान व पीडि़तों के कथन पर आधारित)

अधिवक्ता पत्नी की जिंदगी की वैल्यू पौने 6 करोड़ – भाग 2

पुलिस को नहीं मिला हत्यारे का सुराग

रेनू के सिर और कान से थोड़ा खून जरूर बह रहा था. जिस्म के दूसरे हिस्सों में भी चोट के कई निशान दिखाई पड़ रहे थे. इस से साफ था कि रेनू सिंह ने हत्या से पहले कातिल के साथ संघर्ष किया था.

हैरानी की बात यह थी कि घर का सारा सामान अपनी जगह था, यानी वहां कोई लूटपाट या डकैती जैसी वारदात के कोई संकेत दिखाई नहीं पड़ रहे थे. लेकिन ताज्जुब की बात यह थी कि रेनू का पति नितिन फरार था. रेनू के भाई अजय सिन्हा बारबार कह रहे थे कि उन की बहन की हत्या पति नितिन नाथ ने ही की है. पुलिस को तलाश में रेनू सिन्हा का मोबाइल नहीं मिला था, लेकिन यह तभी पता चल सकता था कि रेनू की हत्या पति ने की है या किसी अन्य ने.

बहरहाल, पुलिस ने फोरैंसिक टीम को बुला कर मौके से साक्ष्य एकत्र करने की काररवाई पूरी की और रेनू सिन्हा के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया. दिलचस्प बात यह रही कि उस समय पुलिस को पूरी कोठी की तलाशी लेने का खयाल तक नहीं आया, लेकिन नितिन का कुछ पता नहीं चला.

सेक्टर 20 थाने आ कर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एसएचओ धर्मप्रकाश शुक्ला ने भादंसं की धारा 302 में अज्ञात हत्यारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. जांच की जिम्मेदारी भी उन्होंने अपने पास ही रखी. इस के बाद नितिन नाथ का पता लगाने और रेनू सिंह के मोबाइल की जानकारी लेने के लिए पहले दोनों के फोन की काल डिटेल्स व उन के फोन की लोकेशन निकलवाई.

लोकेशन निकलवाई गई तो पुलिस का माथा ठनका, क्योंकि रेनू सिन्हा और नितिन नाथ दोनों के मोबाइल फोन की लोकेशन उसी डी-40 कोठी के आसपास की नजर आ रही थी, जहां वे रहते थे. इस का मतलब साफ था कि रेनू और उन के पति के फोन कोठी के भीतर ही हैं.

आखिरकार रात 12 बजे पुलिस दोबारा और सही मायने में हरकत में आई. तब पुलिस ने रेनू सिन्हा की कोठी और उस के आसपास के मकानों की सीसीटीवी फुटेज चैक करने का काम शुरू किया. इसी दौरान पुलिस ने ये गौर किया कि रेनू का पति नितिन पिछले 24 घंटों से ज्यादा वक्त में कभी बाहर ही नहीं निकला है. हां, दिन में करीब 2 बजे एकदो लोग घर में जरूर आए थे, लेकिन उन्हें किसी ने कोठी के मेन गेट पर लगा छोटा दरवाजा खोल कर अंदर बुला लिया था.

करीब आधे घंटे बाद आगंतुक चले गए और दरवाजा फिर किसी ने अंदर से बंद कर लिया था. उस के बाद घर के भीतर किसी के आने या किसी के बाहर निकलने की कोई फुटेज नहीं थी. पुलिस ने एक बार फिर से रेनू के घर वालों को मौके पर बुलाया. सीसीटीवी कैमरे में नितिन के घर से बाहर न जाने की पुष्टि होने की बात साफ होने के बाद पुलिस ने फिर से कोठी के निचले और दूसरी मंजिल की तलाशी लेने का काम शुरू किया.

कहानी में असली ट्विस्ट तब आया, जब रेनू का पति नितिन पुलिस को उसी कोठी में छिपा हुआ मिला. असल में नितिन अपने ही मकान के पहले माले में बने स्टोररूम में छिपा हुआ था.

पुलिस ने जब रेनू की लाश बरामद की थी, तब उस ने ऊपर की मंजिल पर केवल कमरों में ही सरसरी तौर पर तलाशी ली थी. जबकि स्टोर रूम छोड़ दिया था. लेकिन रात को दूसरे चरण में पूरे घर का चप्पाचप्पा छानने की कवायद में पुलिस को घर में स्टोररूम में नितिन नाथ छिपा हुआ मिल गया.

स्टोररूम में बंद मिला हत्यारा पति

इस के लिए भी पुलिस ने एक तरकीब निकाली थी. पुलिस टीम ने 4 अलगअलग मोबाइल फोन से लगातार रेनू और नितिन के मोबाइल पर काल करने का काम शुरू किया और जबकि कुछ टीम घर के अलगअलग हिस्सों में सर्च का काम कर रही थी.

पुलिस को तो सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि नितिन घर में छिपा मिलेगा. पुलिस तो रेनू व नितिन के मोबाइल को तलाशने के लिए घर में सर्च कर रही थी, क्योंकि दोनों फोन की लोकेशन लगातार घर में ही आ रही थी. पुलिस जब तलाश करते हुए पहली मंजिल के स्टोररूम तक पहुंची तो इंसपेक्टर डी.पी. शुक्ला की टीम को कुछ घनघनाने की आवाज आई. लगा मानो किसी का मोबाइल वाइब्रेट कर रहा है. जहां से आवाजें आ रही थीं, वह एक स्टोररूम था.

स्टोररूम में 2 दरवाजे थे, एक दरवाजा अंदर से बंद था, जबकि उस के दूसरे गेट पर बाहर से ताला लगा था. पुलिस ने स्टोररूम के दरवाजे का ताला तोड़ा तो अंदर नितिन नाथ छिपा बैठा था. पुलिस ने जब स्टोररूम का दरवाजा खोला तो अंदर नितिन मोबाइल फोन, चार्जर, कौफी मग सब कुछ ले कर इत्मीनान से बैठा हुआ था. तब तक रात के 3 बज चुके थे. यानी जो शख्स पिछले कई घंटों से लाश मिलने वाली जगह से महज 2 मीटर के फासले पर छिपा था, पुलिस को उस तक पहुंचने में कत्ल का खुलासा होने के बाद भी 8 घंटे का वक्त लग गया.

पुलिस को अब लगा कि अगर उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की जांच, कोठी की सही तरीके से तलाशी की होती तो ये कामयाबी दोपहर में ही मिल जाती. बहरहाल, नितिन नाथ को जब पकड़ा गया तो उस के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं था. उस ने कुबूल कर लिया कि अपनी पत्नी रेनू की हत्या उस ने ही गला दबा कर की है. उस ने एकएक सच से परदा उठा दिया.

रेनू सिन्हा को जीवन में सब कुछ मिला. वह सुप्रीम कोर्ट की अच्छी वकील थीं, बेटा गिरीश अमेरिका में जौब करता है, शादी भी एक समृद्ध परिवार में हुई. लेकिन, एक चीज थी जो बीते 33 साल से सही नहीं थी. वो था रेनू का वैवाहिक जीवन.

रेनू और नितिन 33 साल पहले एकदूसरे के हुए थे, लेकिन उन का रिश्ता खुशहाल नहीं था. नितिन नाथ सिन्हा पैसे का लालची और ऐशभरी जिंदगी जीने का ख्वाहिशमंद जिद्दी इंसान था, लेकिन रेनू सीधीसादी और रिश्ते की कद्र करने वाली महिला थीं. उन का एकमात्र बेटा 15 साल पहले अमेरिका चला गया और वहीं बस गया. रेनू के भाई भी हर महीने उस से मिलने आते थे.

मूलरूप से बिहार के पटना के रहने वाले नितिन नाथ सिन्हा का जन्म वैसे तो ब्रिटेन में हुआ था. उन के पिता ब्रिटेन में एक प्रमुख नेत्र सर्जन थे, जिन्होंने 15 साल तक लंदन में प्रैक्टिस की थी, लेकिन उस के बाद वह भारत आ गए. यहां आ कर नितिन ने उच्चशिक्षा हासिल की और बाद में 1986 बैच का भारतीय सूचना सेवा विभाग का अधिकारी चुना गया.

उस ने 25 साल पहले यानी 1998 में ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली थी. इस के बाद उस ने अमेरिका की एक कंपनी में नौकरी की. यही नहीं, वह इंडियन मैडिकल एसोसिएशन में भी पदाधिकारी रह चुका है. पत्नी रेनू सिन्हा को कैंसर था, जिन का इलाज अमेरिका में चल रहा था. कुछ दिन पहले ही वह कैंसर से जीत कर घर लौटी थीं.

इधर कुछ समय से नितिन नाथ अब किसी भी तरह की नौकरी नहीं होने के कारण आर्थिक रूप से परेशान रहने लगा था. वह अपने फिजूल खर्चों के लिए रेनू या उस के भाई पर आश्रित रहता था.

अधिवक्ता पत्नी की जिंदगी की वैल्यू पौने 6 करोड़ – भाग 1

कोठी का ताला तोडऩे के बाद जब पुलिस अंदर घुसी तो ड्राइंगरूम के दरवाजे को खोलने के बाद पुलिस ने घर के एकएक कमरे को चैक करना शुरू किया. रेनू सिन्हा की कोठी दोमंजिला थी. इसी बीच पुलिस दल में शामिल लोगों ने जब बाथरूम का दरवाजा खोला तो एक तरह से उन की चीख निकलतेनिकलते बची. क्योंकि वहां रेनू की लाश पड़ी थी.

रेनू के सिर और कान से थोड़ा खून जरूर बह रहा था. जिस्म के दूसरे हिस्सों में भी चोट के कई निशान दिखाई पड़ रहे थे. इस से साफ था कि रेनू सिन्हा ने हत्या से पहले कातिल के साथ संघर्ष किया था. हैरानी की बात यह थी कि घर का सारा सामान अपनी जगह था, यानी वहां कोई लूटपाट या डकैती जैसी वारदात के कोई संकेत दिखाई नहीं पड़ रहे थे. लेकिन ताज्जुब की बात यह थी कि रेनू का पति नितिन फरार था.

यह वारदात 10 सितंबर, 2023 को देश की राजधानी दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर जिला नोएडा के सेक्टर 30 में स्थित कोठी नंबर डी 40 में हुई थी, उस के कारण पूरे पुलिस विभाग की नींद उड़ गई थी. वारदात ही ऐसी थी कि उस इलाके में रहने वाले लोगों के दिलोदिमाग में भी दहशत भर गई थी.

यह ऐसा सुरक्षित व पौश इलाका है, जहां कड़ी सुरक्षा के कारण अपराधी वहां आने से पहले सौ बार सोचे. यहां स्थित जिस आलीशान कोठी में ये वारदात हुई थी, उस में दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाली 61 साल की सीनियर महिला एडवोकेट रेनू सिन्हा अपने पति नितिन नाथ सिन्हा के साथ रह रही थीं. पति ने कुछ साल पहले ही इंडियन इनफार्मेशन सर्विसेस यानी आईआईएस से वीआरएस लिया था.

दरअसल, रेनू सिन्हा पिछले शनिवार शाम से ही किसी का फोन नहीं उठा रही थीं. कोठी में 2 लोग रहते थे, रेनू सिन्हा और उन के पति नितिन नाथ सिन्हा. रेनू दिल्ली हाईकोर्ट में अभी रेगुलर प्रैक्टिस कर रही थीं, जबकि उन के पति नितिन नाथ सर्विस से वीआरएस लेने के बाद ज्यादातर वक्त घर पर ही बिताते थे. कभी वह गोल्फ कोर्स क्लब या दोस्तों से मुलाकात के लिए चले जाते थे.

हैरत की बात यह थी कि जो लोग रेनू सिन्हा से बात करना चाहते थे, जब उन का फोन नंबर नहीं मिला तो उन्होंने नितिन नाथ सिन्हा के फोन पर संपर्क करना चाहा, तब उन का फोन भी पिक नहीं हुआ. रेनू सिन्हा का फोन नहीं मिलने के कारण सब से ज्यादा चितिंत रेनू के भाई अजय सिन्हा थे.

पेशे से पत्रकार अजय सिन्हा वैसे तो मूलरूप से बिहार के पटना के रहने वाले हैं, लेकिन काफी लंबे समय से अपनी पेशेवर जिंदगी के कारण वह भी नोएडा में ही रह रहे थे. कुछ भी हो जाए, रेनू सिन्हा हर रोज अपने भाई व परिवार के लोगों से बात जरूर करती थीं, लेकिन शनिवार के बाद जब रविवार को भी उन्होंने न तो खुद किसी को फोन किया और न ही उन्होंने किसी का फोन पिक किया तो अजय सिन्हा की भी चिंता बढ़ गई.

चिंता उस समय और भी ज्यादा बढ़ गई जब रेनू की एक हमउम्र दोस्त प्रमिला सिंह रविवार सुबह करीब एक बजे उन के घर पहुंचीं तो कोठी का मेन गेट बंद था. उन्होंने रेनू व उन के पति को कई बार फोन किया, उन के फोन की घंटी तो बजती रही, लेकिन फोन पिक नहीं किया गया.

प्रमिला ने यह बात फोन कर के रेनू के भाई को बताई. तब अजय को आशंका हुई कि उन की बहन के साथ कुछ अनहोनी जरूर हो गई है. क्योंकि वह जानते थे कि अपने पति नितिन नाथ के साथ रेनू के सबंध अच्छे नहीं हैं. यह बात उन का पूरा परिवार जानता था.

किसी अनहोनी की आशंका में अजय सिन्हा ने कोतवाली सेक्टर 20 नोएडा के एसएचओ धर्मप्रकाश शुक्ला को फोन कर के बताया कि उन की बहन रेनू सिन्हा जो अपने पति के साथ सेक्टर 30 के डी 40 में रहती हैं, वह किसी का फोन नहीं उठा रही हैं. वह पुलिस को भेज कर पता कराने की कोशिश करें कि उन के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हो गई है. दरअसल, रेनू सिन्हा का घर सेक्टर 20 थाना क्षेत्र में ही था.

बाथरूम में मिली रेनू सिन्हा की लाश

एक बात तो तय थी कि रेनू और नितिन नाथ के फोन औन थे, उन दोनों के फोन की घंटी भी बज रही थी, लेकिन फोन अन आंसर्ड जा रहा था. यानी काल नहीं उठ रही थी. यही वजह थी कि रेनू के भाई अजय सिन्हा ने सेक्टर 20 थाने के एसएचओ को फोन कर के बहन की गुमशुदगी की खबर दी.

एसएचओ धर्मप्रकाश शुक्ला ने स्थानीय चौकी के इंचार्ज को पुलिस टीम के साथ सेक्टर 30 में डी ब्लौक की कोठी नंबर 40 पर पहुंचने के लिए कहा तो वह पुलिस टीम के साथ तत्काल ही वहां पहुंच गए. उन्होंने देखा कोठी के गेट पर तो ताला लटका था.

जब यह बात एसएचओ को पता चली तो उन्होंने अजय सिन्हा को बता दिया कि कोठी पर ताला लटका है और आगे की काररवाई के लिए उन्हें थाने आना होगा. करीब ढाई बजे अजय सिन्हा अपने 1-2 परिचितों को ले कर सेक्टर 20 थाने पहुंच गए.

उन्होंने इंसपेक्टर शुक्ला को सारी बात बताई. साथ ही बताया, “अगर मेरी बहन लापता हैं तो इस का साफ मतलब है कि जीजा नितिन नाथ ने ही उन्हें या तो कोई नुकसान पहुंचा दिया है या उन्हें गायब कर दिया है.”

“ऐसा भी तो हो सकता है कि वे दोनों अपनी मरजी से कहीं चले गए हों और किसी कारणवश उन के फोन उन के पास नहीं हो.” इंसपेक्टर शुक्ला ने कहा.

“नहीं इंसपेक्टर साहब, ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि मेरी बहन कैंसर पेशेंट हैं और करीब एक महीना पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज हो कर घर आई हैं,” अमेरिका के अजय सिन्हा ने कहा.

“लेकिन आप ने अभी अपने जीजा पर शक जताया, इस की कोई खास वजह?” इंसपेक्टर शुक्ला ने अजय से पूछा.

इस के बाद अजय ने जो कुछ बताया, इंसपेक्टर शुक्ला के लिए यह समझने को काफी था कि नितिन नाथ पर किया गया शक बेवजह नहीं है.

अगले 2 घंटे बाद इंसपेक्टर धर्मप्रकाश शुक्ला अजय सिन्हा और पुलिस की टीम को ले कर एडवोकेट रेनू सिन्हा की कोठी पर पहुंच गए. पुलिस ने सब से पहले ताला तोडऩे वाले को बुलवा कर कोठी के मुख्य गेट पर लगे ताले को तुड़वाया तो देखा छोटे गेट की कुंडी अंदर से बंद थी.

अजय सिन्हा के किसी पत्रकार दोस्त ने पुलिस कमिश्नर (नोएडा) लक्ष्मी सिंह को भी फोन कर दिया था, जिस के कुछ देर बाद सेंट्रल नोएडा के डीसीपी हरीश चंद्र, एडिशनल डीसीपी शक्तिमोहन अवस्थी, इलाके के एसीपी सुमित शुक्ला भी मौके पर ही पहुंच गए. उच्चाधिकारियों के मौके पर पहुंचते ही सेक्टर 20 थाने की पुलिस और ज्यादा अलर्ट हो गई. इस पूरी कवायद में शाम के 7 बज चुके थे.

कोठी का ताला तोडऩे के बाद जब पुलिस अंदर घुसी तो ड्राइंगरूम के दरवाजे को खोलने के बाद पुलिस ने घर के एकएक कमरे को चैक करना शुरू किया. रेनू सिंह की कोठी दोमंजिला थी. भूतल पर ही रेनू और नितिन नाथ सिन्हा का बैडरूम था. शायद उन के कमरे से उन के लापता होने का कोई सुराग मिल जाए, यह सोच कर तमाम आला अफसर जब उन के कमरे में गए तो उन्हें वहां ऐसा कुछ संदेहजनक नहीं लगा.

इसी बीच पुलिस दल में शामिल लोगों ने जब बाथरूम का दरवाजा खोला तो एक तरह से उन की चीख निकलतेनिकलते बची. क्योंकि वहां रेनू की लाश पड़ी थी. अधिकारियों के कहने पर एक पुलिसकर्मी ने रेनू की नब्ज टटोली, लेकिन उन का शरीर पूरी तरह निर्जीव था. लाश पूरी तरह ठंडी पड़ चुकी थी, जिस का मतलब साफ था कि उन की मौत को कई घंटे बीत चुके हैं.

अजय सिन्हा और उन के घर वाले रेनू सिंह की लाश मिलने के बाद फूटफूट कर रोने लगे. आसपास के कमरों में भी छानबीन की गई. आशंका थी कि कहीं किसी ने रेनू के पति नितिन नाथ की भी तो हत्या नहीं कर दी हो, लेकिन भूतल पर कहीं कुछ नहीं मिला.