Crime Story : नर्स के चक्कर में फिजियोथेरैपिस्ट ने किया पत्नी और दो बेटियों की हत्या

32 वर्षीय फिजियोथेरैपिस्ट बोदो प्रवीण ने पत्नी कुमारी और 2 बेटियों की हत्या कर इसे एक्सीडेंट का रूप देने की भरसक कोशिश की थी, लेकिन कार की तकनीकी जांच में सारा मामला साफ हो गया. आखिर प्रवीण ने पत्नी और 2 बेटियों का मर्डर क्यों किया? पढ़ें, फैमिली क्राइम की यह खास कहानी.

पत्नी कुमारी और दोनों बेटियों को ले कर लांग ड्राइव पर निकला प्रवीण कुछ दूर पर ही पहुंचा था कि पत्नी कुमारी ने खुद को कुछ असहज महसूस करते हुए प्रवीण से कहा, ”मुझे काफी अनइजीनेस लग रहा है और पेट दर्द हो रहा है.’’

तब प्रवीण के तेलंगाना के बल्लापली गांव के पास कार रोक कर वहां के एक मैडिकल स्टोर से दवा खरीदी. प्रवीण एक फिजियोथेरैपिस्ट था, इसलिए उस ने कुमारी को कार की पीछे की सीट पर बैठा कर इंजेक्शन लगा दिया. दोनों बेटियों को अपने पास आगे की सीट पर बैठा कर वह फिर गांव के लिए चल पड़ा. उस की कार मंचुकोडा गांव के पास पहुंची तो उस का भयानक एक्सीडेंट हो गया. प्रवीण की कार अधिक स्पीड में सड़क किनारे के एक पेड़ से टकरा गई थी. किसी चीज के बहुत तेज टकराने की आवाज सुन कर आसपास के लोग वहां दौड़े आए. कार का आगे का हिस्सा पिचक गया था, इसलिए लोगों ने मदद की तो प्रवीण बाहर आया. उस का हाथ छिल गया था.

गांव वालों में से किसी ने इस दुर्घटना की जानकारी देने के लिए पुलिस को फोन कर दिया. आगे की सीट पर बैठी 4 साल की बेटी कृषिका और ढाई साल की तनिष्का अब जीवित नहीं हैं, इस बात की जानकारी गांव वालों को पहली नजर में ही हो गई थी. पीछे की सीट से 26 साल की कुमारी को लोग उठा कर बाहर लाए तो लोगों को लगा कि इस की भी मौत हो चुकी है. फिर भी गांव वाले किसी दूसरे की कार से सभी को नजदीक के अस्पताल ले गए. 2 युवक प्रवीण को आटो में बैठा कर नजदीक के एक डाक्टर के यहां ले गए और हाथ पर पट्टी बंधवाई. अस्पताल में डाक्टर ने कुमारी की जांच कर के उसे मृत घोषित कर दिया था.

प्रवीण ने अपने घर वालों तथा ससुराल वालों को फोन कर के घटना के बारे बताया तो वे लोग भी वहां दौड़े आए. सूचना पा कर थाना रघुनाथपाल के इंसपेक्टर कोंडल राव भी अपनी पुलिस टीम के साथ वहां आ गए थे. पूछताछ में प्रवीण ने बताया, ”सर, मेरी कार की स्पीड थोड़ी ज्यादा थी और सामने अचानक एक बछड़ा आ गया तो उसे बचाने के लिए कार की स्टीयरिंग थोड़ी घुमाई तो वह सामने पेड़ से जा कर टकरा गई.’’

प्रवीण मासूम बेटियों और पत्नी की लाश को देखदेख कर रो रहा था. पुलिस ने एक्सीडेंट का मुकदमा दर्ज कर के तीनों लाशों का पंचनामा किया और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. कुमारी के मम्मीपापा की हालत खराब थी. जवान बेटी और 2 मासूम नातिनों की मौत से वे टूट गए थे. इंसपेक्टर कोंडल राव दुर्घटनास्थल और दुर्घटनाग्रस्त कार का निरीक्षण कर रहे थे, तभी पतिपत्नी ने उन के पास जा कर हाथ जोड़ कर कहा, ”साहब, यह एक्सीडेंट नहीं है. हमारे दामाद प्रवीण ने इन तीनों की हत्या की है. इसलिए साहब जांच बहुत संभाल कर कीजिएगा. इस नराधम को छोडि़एगा मत.’’

एक्सीडेंट में 3 जिंदगियां खत्म हो गई थीं. मामला शंकास्पद लग रहा था, इसलिए थोड़ी दूर जा कर इंसपेक्टर ने क्राइम ब्रांच के एसीपी रमण मूर्ति को घटना की जानकारी दी. तब रमण मूर्ति ने कहा, ”कार जैसी है, उसे वैसी ही रहने देना. मैं कल सुबह अपनी टीम के साथ वहां आता हूं.’’

पोस्टमार्टम के बाद कुमारी, कृषिका और तनिष्का की लाश को कुमारी के पापा ने अपने कब्जे में लिया और उन का अंतिम संस्कार अपने गांव में करने के लिए कहा. उन लोगों के जाने के बाद प्रवीण भी अपने मम्मीपापा को साथ ले कर वहां गया और अंतिम संस्कार में हाजिर रहा. उस समय भी कुमारी के मम्मीपापा प्रवीण को शक की नजरों से देख रहे थे. एक साथ 3-3 मौतों से पूरा गांव दुखी था. अगले दिन सुबह एसीपी रमण मूर्ति अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे तो इंसपेक्टर कोंडल राव ने फोन कर के प्रवीण को वहां बुला लिया था.

रमण मूर्ति ने प्रवीण से प्राथमिक पूछताछ करने के बाद उस के गांव और हैदराबाद के अस्पताल, घर का पता, कौंटेक्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर आदि सारी जानकारी ले ली थी. प्रवीण ने उन से विनती करते हुए कहा, ”सर, मैं डाक्टर हूं और किसी तरह छुट्टी ले कर यहां आया था. उसी में यह एक्सीडेंट हो गया. अगर इस एक्सीडेंट के मामले में मेरी जरूरत न हो तो आप मुझे हैदराबाद जाने की आज्ञा दीजिए. आज रात या कल सुबह मेरा हैदराबाद पहुंचना जरूरी है.’’

प्रवीण की बात सुन कर एसीपी ने पहले प्रवीण को फिर इंसपेक्टर कोंडल राव की ओर देखा. दोनों अधिकारियों में आंखों ही आंखों में इशारा हुआ. उस के बाद एसीपी रमण मूर्ति ने कहा, ”ठीक है, आप जाइए. जरूरत पड़ेगी तो आप को बुला लिया जाएगा.’’ अधिकारियों का आभार व्यक्त कर के प्रवीण हैदराबाद चला गया.

ऐसे फंसा डा. प्रवीण पुलिस के शिकंजे में

एक्सीडेंट 25 मई, 2024 को हुआ था. प्रवीण दूसरे दिन रात को हैदराबाद चला गया था. इस के बाद पुलिस ने कभी उसे फोन नहीं किया. ठीक 48 दिन बाद 14 जुलाई, 2024 की दोपहर को थाना रघुनाथपाल की पुलिस हैदराबाद पहुंची और अत्तापुर इलाके से प्रवीण को हिरासत में ले कर थाना रघुनाथपाल लौट आई. 17 जुलाई, 2024 को प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित कर के एसीपी रमण मूर्ति ने पूरे केस का खुलासा कर दिया. पुलिस अधिकारियों को भी कार की हालत, तीनों लाशों की दशा और प्रवीण को आई मामूली चोट देख कर पहली ही नजर में शक हो गया था कि यह मामला एक्सीडेंट का नहीं, बल्कि यह बहुत सोचसमझ कर की गई 3-3 हत्याओं का है.

पुलिस जानती थी कि प्रवीण को अपनी चालाकी पर पूरा विश्वास है, इसलिए वह कहीं भागने की कोशिश नहीं करेगा. सीधीसादी पत्नी और मासूम बेटियों की हत्या कर के वह दूसरे ही दिन हैदराबाद जा कर प्रेमिका सोनी फ्रांसिस के साथ हंसीखुशी से रहने लगा था. पुलिस की नजर में यह बात भी थी. लेकिन उसे सजा दिलाने के लिए पुलिस को पक्के सबूत की जरूरत थी.

मजबूत सबूत हाथ लगते ही पुलिस ने आरोपी नंबर एक प्रवीण को तो पकड़ लिया, लेकिन आरोपी नंबर 2 उस की प्रेमिका सोनी भाग गई थी. प्रवीण से की गई पूछताछ के बाद इस तिहरे मर्डर केस की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार निकली—

तेलंगाना के जिला खम्मम के अंतर्गत आने वाले बावाजी थंडा के (तेलुगु में थंडा यानी बिखरे घरों वाला एकदम छोटा गांव) रहने वाले बोदो प्रवीण ने 12वीं में खूब मेहनत कर के पढ़ाई की. वह पढ़ाई में ठीकठाक था, इसलिए उस की इच्छा डाक्टर बनने की थी. उस ने मेहनत तो खूब की, पर थोड़ा पीछे रह गया, जिस से मैडिकल के बजाय उस का दाखिला हैदराबाद के कालेज में फिजियोथेरैपिस्ट विभाग में हुआ. पढ़ाई पूरी कर के उस ने डिग्री प्राप्त कर ली. उस की इच्छा अपना फिजियोथेरैपी सेंटर खोलने की थी, लेकिन इस के लिए अनुभव के अलावा पैसे की भी जरूरत थी. ये दोनों चीजें नौकरी कर के ही मिल सकती थीं. इस के लिए उस ने हैदराबाद के अत्तापुर के एक प्राइवेट जर्मनटेन अस्पताल में नौकरी कर ली.

हर मध्यमवर्गीय परिवार में मांबाप की मानसिकता होती है कि बेटा कमाने लगे तो फटाफट उस का विवाह कर दिया जाए. प्रवीण की नौकरी लगते ही उस के मम्मीपापा ने उस के लिए लड़की की तलाश शुरू कर दी. लड़का डाक्टर था, इसलिए खम्मम जिले के ही एक गांव के अच्छे परिवार की खूबसूरत लड़की उन्हें मिल गई. उस संस्कारी लड़की का नाम कुमारी था. कुमारी और प्रवीण ने एकदूसरे को पसंद कर लिया तो साल 2019 में दोनों का धूमधाम से विवाह हो गया. विवाह के बाद कुमारी पति के साथ हैदराबाद आ गई और अपना घरसंसार शुरू कर दिया. दोनों की जिंदगी राजीखुशी से गुजर रही थी. साल 2020 में कुमारी ने एक बेटी को जन्म दिया. गुडिय़ा जैसी उस बिटिया का नाम रखा कृषिका. अब तक प्रवीण का वेतन भी बढ़ गया था. साल 2022 में उस की दुनिया में दूसरी बेटी का आगमन हुआ, जिस का नाम तनिष्का रखा.

कुमारी दोनों बेटियों की देखभाल में व्यस्त रहने लगी थी. उसी बीच प्रवीण के अस्पताल में एक खूबसूरत नर्स आई. केरल से आई उस 22 साल की नर्स का नाम सोनी फ्रांसिस था. प्रवीण के ही विभाग में उसे नर्स की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसलिए धीरेधीरे दोनों के बीच प्रेमसंबंध बन गए. शुरुआत में उन की हंसीमजाक के बीच दोस्ती हुई. यह दोस्ती कब प्यार में बदल गई, दोनों को ही पता नहीं चला. केरल से हैदराबाद अकेली आई सोनी को एक मजबूत सहारे की जरूरत थी, जिस के लिए उस ने प्रवीण को पसंद कर लिया. हैदराबाद में अत्तापुर में वह एक बैडरूम के फ्लैट में किराए पर रहती थी. कुमारी को तो घर में दोनों बेटियों की देखभाल से ही फुरसत नहीं मिलती थी. दूसरी ओर प्रवीण उस केरल की नर्स के प्रेम में पड़ चुका था. दोनों के संबंध इस हद तक आगे निकल चुके थे कि नाइट शिफ्ट का बहाना कर के प्रवीण पूरी रात प्रेमिका सोनी के साथ उस के फ्लैट में रहता था.

पति का पैर गड्ढे में चला गया है, इस बात की जानकारी आगेपीछे हर पत्नी को हो ही जाती है. सोनी के साथ के प्रवीण के प्यार की भी जानकारी कुमारी को हो गई. कुमारी प्रवीण के सामने गिड़गिड़ाई कि बेटियों के भविष्य के बारे में सोच कर वह यह सब बंद कर दे. उसे यह सब शोभा नहीं देता. कुमारी पति के सामने हाथ जोड़ती रही, गिड़गिड़ाती रही, झगड़ती रही, पर सोनी के प्यार में गले तक डूबे प्रवीण ने पत्नी और बेटियों की जरा भी परवाह नहीं की. अब सोनी का सान्निध्य ही उसे स्वर्ग लगता था. रोधो कर लाचार कुमारी ने अंत में अपने मम्मीपापा और सासससुर से प्रवीण की शिकायत की. कुमारी और प्रवीण के मम्मीपापा ने मिल कर बात की, पर कोई समाधान नहीं हो सका. कुमारी के मांबाप की शिकायत पर बिरादरी की पंचायत बैठी और उस में भी इस बात की चर्चा हुई.

तब प्रवीण के पापा ने कहा, ”अगर प्रवीण नहीं सुधरता तो मैं हैदराबाद की नौकरी छुड़वा कर उसे हमेशा के लिए गांव बुलवा लूंगा. यहां हमारे घर में रोटी की कमी नहीं है. तेल लेने गई उस की डाक्टरी की नौकरी.’’

यह सारी जानकारी होने के बाद भी पागल प्रेमी की तरह प्रवीण को किसी की परवाह नहीं थी. अंत में प्रवीण के मम्मीपापा ने उसे गांव आने के लिए कह दिया. 17 मई, 2024 को प्रवीण कुमारी और दोनों बेटियों को ले कर बावाजी थंडा आ गया. खूब गुस्सा हो कर पापा ने उसे धमकाया तो अपनी गलती स्वीकार करते हुए प्रवीण ने कहा, ”अब मैं उस अस्पताल को छोड़ कर किसी दूसरे अस्पताल में नौकरी कर लूंगा. अभी तो मैं 15 दिन की छुट्टी ले कर आया हूं. आप सभी के साथ ही रहूंगा.’’

इस तरह पिता को समझा कर प्रवीण ने मामला शांत कर दिया. कुमारी और दोनों बेटियों को ले कर प्रवीण बावाजी थंडा के आसपास घूमने जाता रहा. गांव आने के बाद प्रवीण के बदले व्यवहार से कुमारी की उम्मीद जागी थी कि अब सौतन सोनी से छुटकारा मिल जाएगा. उधर सोनी को पता था कि प्रवीण शादीशुदा है, फिर भी वह उस पर शादी के लिए दबाव डाल रही थी. वह प्रवीण से कह रही थी कि वह अपनी पत्नी से अलग हो जाए. प्रवीण ने उसे वास्तविकता समझाई कि पत्नी से अलग होना यानी उसे छोडऩा इतना आसान नहीं है. इस में सालों लग जाएंगे. फिर इस में तीनों को भरणपोषण के लिए हर महीने पैसे देने होंगे, जिस के बाद वह खाली हो जाएगा.

गले की फांस क्यों बनी प्रेमिका

सोनी के बगैर प्रवीण को जीना असंभव लग रहा था. दूसरी ओर सोनी शादी के लिए इस तरह जिद पकड़े थी कि प्रवीण परेशान था. इसी के साथ सोनी ने यह भी कह दिया था कि वह उस की बेटियों की जिम्मेदारी कभी नहीं लेगी. सोनी से संबंध तोडऩे के लिए घर में उस की पत्नी कुमारी प्रवीण से झगड़ा करती थी. उस ने घर वालों से भी प्रवीण की शिकायत कर दी थी. जब सोनी का दबाव ज्यादा बढ़ा तो प्रवीण ने कहा, ”तुम से ब्याह करने के लिए उन तीनों को खत्म करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है.’’ तब सोनी ने खुश हो कर कहा, ”फिर देर किस बात की. फटाफट यह काम कर डालो.’’

कार में लंबी यात्रा के दौरान कुमारी हमेशा अनइजीनेस की शिकायत करती थी. उसी के आधार पर प्रवीण ने उसे खत्म करने की योजना बना डाली. गूगल पर सर्च कर के प्रवीण ने पता किया कि एक हाथी को भी मार सके ऐसे एनेस्थेसिया की डोज कितनी है? यह जानने के बाद इंजेक्शन खरीद कर उस ने कार में रख लिया. सभी को गांव ले जाने के बाद वहां से खम्मम जाने का प्लान बनाया.

योजना के अनुसार, 25 मई, 2024 की सुबह प्रवीण ने कुमारी से कहा, ”आज एक काम से मुझे खम्मम जाना है. अगर लांग ड्राइव पर चलने की इच्छा हो तो तुम भी चल सकती हो?’’

दोनों बेटियों को साथ ले कर कुमारी प्रवीण के साथ जाने के लिए तैयार हो गई. खम्मम पहुंच कर प्रवीण ने अपना काम निपटाया. उस के बाद घर आने के लिए वह कार ले कर निकल पड़ा. वहां लौटते समय रास्ते में कुमारी ने तबीयत खराब होने की बात कही तो तुरंत कार रोक कर दवा की दुकान पर जाने का नाटक कर के प्रवीण ने कुमारी को पीछे की सीट पर बैठा कर कार में रखा एनेस्थेसिया का इंजेक्शन उस के बाएं हाथ पर लगा दिया. एनेस्थेसिया की ओवरडोज से 5 मिनट में ही कुमारी की सांसें रुक गईं. उस के बाद बारीबारी से दोनों मासूम बेटियों की नाक और मुंह दबा कर उन्हें खत्म कर दिया. इस के बाद इसे एक्सीडेंट का रूप देने के लिए कार सड़क के किनारे के पेड़ से टकरा दी.

पुलिस की टेक्निकल टीम ने प्रवीण के मोबाइल से उस की गूगल की सर्च की हिस्ट्री खोज निकाली थी. कार की तलाशी के दौरान उस में से इंजेक्शन की सीरींज मिली थी, जिसे फोरैंसिक लैब भेज दिया गया था, जहां से उस कातिल जहर की रिपोर्ट आ गई थी. ओटोप्सी रिपोर्ट ने भी एनेस्थेसिया के ओवरडोज से कुमारी की मौत और दोनों बच्चियों की मौत सांस रुकने से हुई थी.

पुलिस ने तमाम सबूत इकट्ठा कर के एक्सीडेंट के 48 दिन बाद प्रवीण को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने बोदो प्रवीण को तो अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया, जबकि प्रेमिका सोनी फ्रांसिस की तलाश कर रही थी. इस तरह अवैध संबंधों की आग में एक सुखी परिवार स्वाहा हो गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

जिन्न के चक्कर में बेटियों का कत्ल

दोनों बेटियों फरहीन (19 वर्ष) और यासमीन (11 वर्ष) को अली हसन तंत्रमंत्र के जरिए ठीक करने की कोशिश कर रहा था. उन के ऊपर मुरगे का खून छिड़क कर, उन के मुंह में मुरगे का कच्चा मांस ठूंस देता था. क्या ऐसा करने से उस की बेटियां ठीक हो गईं या फिर… पढि़ए, अंधविश्वास से सराबोर चौंकाने वाली कहानी.

पुलिस के जाने के बाद देर रात को फिर से अली हसन के घर से उसी तरह की चीखनेचिल्लाजिन्न के चक्कर में बेटियों का कत्लने की आवाजें आईं तो मोहल्ले वालों को कुछ अजीब सा महसूस हुआ. क्योंकि अगर अली हसन की बेटी बीमार थी तो वह रात में ही क्यों चीखतीचिल्लाती थी. यह बात सभी को हैरत में डाले हुए थी. 

मोहल्ले के लोगों ने इस बात की जानकारी अली हसन की बड़ी शादीशुदा बेटी शाहीन को फोन पर दी. इस बात को सुनते ही शाहीन तुरंत ही अपनी ससुराल से घर पहुंची. घर पहुंचते ही उस ने कई बार अपने घर का दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला. 

शाहीन को घर आया देख कर कई पड़ोसी भी इकट्ठे हो गए थे. काफी देर बाद अली हसन ने अपने घर का दरवाजा खोला. अचानक बेटी को घर आया देख न तो अली हसन ने उस से कुछ राजीखुशी ही पूछी और न ही आने का कारण.

बेटी को बाहर खड़े देख उस ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया और शाहीन को एक तरफ ले जा कर बताया, ”बेटी, घर में कोई हवा का साया आया हुआ है, इसलिए इस वक्त तेरा घर में जाना ठीक नहीं.’’ 

लेकिन इस के बाद भी शाहीन ने घर में जाने की जिद की तो वह उसे हाथ पकड़ कर घर से दूर छोड़ आया और कहा कि बेटी तू यहां से फौरन अपनी ससुराल वापस चली जा. यहां पर मैं सब कुछ सही कर दूंगा. मैं कई दिनों से उस जिन्न का इलाज कर रहा हूं. 

शाहीन पहले से ही जानती थी कि उस के अब्बू जिन्नात पर पहले से ही विश्वास करते हैं. अली हसन इस से पहले से ही मजारों पर जाता रहता था. अली हसन ने उसे अपने घर में नहीं घुसने दिया और न ही परिवार के किसी सदस्य से उसे मिलने दिया था तो शाहीन परेशान हो कर अपनी ससुराल वापस लौट गई. 

इस के कई दिन बाद यानी 25 नवंबर, 2023 को सुबह के समय अली हसन के घर का दरवाजा खुला. अली हसन की पत्नी हुस्नजहां घर से बाहर आई. देखते ही देखते उस ने जोरजोर से रोनाधोना शुरू कर दिया था. उसे रोते देख पड़ोसी अपने घरों से निकल आए और उस से रोने की वजह पूछी तो उस ने बताया कि उस की दोनों बीमार बेटियां खत्म हो गईं. इतना सुनते ही पड़ोसियों ने घर के अंदर जा कर देखा तो उस की दोनों ही बेटियां मृत पड़ी हुई थीं. उस वक्त घर पर केवल उस की पत्नी ही थी. 

देखते ही देखते यह जानकारी पूरे मोहल्ले में फैल गई थी. जानकारी के मिलते ही उस के रिश्तेदार भी उस के घर पर जमा हो गए थे. रिश्तेदारों ने हुस्नजहां से अली हसन के बारे में पूछा तो पता चला कि अली हसन अपने 2 बेटों के साथ घर से गायब हो गया है. 

एक ही घर में 2 बेटियों की संदिग्ध अवस्था में हुई मौत की बात सामने आते ही पड़ोसियों ने इस की सूचना स्थानीय पुलिस चौकी बौसफौड़ान को दे दी. सूचना पाते ही चौकी इंचार्ज सुनील सुतेड़ी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस ने अली हसन के घर छानबीन की तो अलगअलग कमरों में उस की 2 बेटियां फरदीन (19 वर्ष) और यासमीन (11 वर्ष) मृत पाई गईं. दोनों के चेहरे पर चोट के निशान मौजूद थे. 

चौकी प्रभारी सुनील सुतेड़ी ने इस की सूचना पुलिस उच्चाधिकारियों को दी. एक ही घर में 2 बहनों की संदिग्ध मौत की सूचना पाते ही ऊधमसिंह नगर के एसपी (क्राइम) मनीषा जोशी, एएसपी अभय सिंह, सीओ वंदना वर्मा व कोतवाल (काशीपुर) मनोज रतूड़ी घटनास्थल पर पहुंच गए. 

अली हसन के घर पहुंचते ही पुलिस ने उस की पत्नी हुस्नजहां से जानकारी जुटाई तो उस ने बताया कि उस की दोनों ही बेटियों पर किसी जिन्न का का साया था. उस जिन्न ने ही उस की बेटियों की जान ले ली. पुलिस ने उस के पति और बेटों के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि वे उस की बेटियों के कफन का कपड़ा आदि लेने गए हुए हैं. 

एसपी ने फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट टीम व डौग स्क्वायड को भी मौके पर बुलाने के आदेश दिए. दोनों टीमों ने मौके पर पहुंच कर सबूत जुटाए. पुलिस को अली हसन के घर के नजदीक ही कुछ तंत्रमंत्र में यूज होने वाले सामान के साथ ही मुरगे के पंख व पंजे और कुछ फटे हुए नोट भी मिले थे. जिस से साफ जाहिर हो रहा था कि एक तंत्रमंत्र क्रिया के बाद ही दोनों बहनों को मौत के घाट उतारा गया होगा.

 

पुलिस अभी जांचपड़ताल में जुटी थी कि उसी वक्त अली हसन बाइक से अपने घर पहुंचा. उस के घर पहुंचते ही लोगों ने उस से उस घटना के बारे में जानकारी ली तो उस ने बताया कि उस की बेटियों को उस ने (जिन्न) मार डाला. उस के घर पहुंचते ही पुलिस ने उस से और उस के परिवार वालों से कड़ी पूछताछ की तो उस ने फिर वही कहानी पुलिस के सामने रख दी.

उस ने पुलिस को बताया कि उस की दोनों बेटियों पर जिन्नात का साया था. कई दिनों से उस जिन्न ने उस की बेटियों का जीना हराम कर रखा था. अली हसन ने पुलिस को बताया कि कई दिनों से वह उस जिन्न को भगाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. अंत में वह जिन्न बेटियों को अपने साथ ले जाने में कामयाब हो गया. 

बेटियों के शरीर पर कैसे पड़े फफोले

उस की बहकीबहकी बातें सुनते ही पुलिस समझ गई कि अली हसन किसी तांत्रिक के चक्कर में पड़ा हुआ था, जिस के कहने पर ही उस ने अपनी बेटियों की हत्या कर डाली. पुलिस ने उन दोनों बहनों के शवों को नजदीक से देखा तो दोनों बहनों के शरीर पर कई जगह आग से दागने के निशान थे. जिस से लग रहा था कि जिन्न से मुक्ति दिलाने के लिए हैवान बने बाप ने बेटियों का बदन न सिर्फ जगहजगह दागा, बल्कि उन को कई दिनों तक भूखाप्यासा रख कर कई तरह की यातनाएं दी थीं. 

एक बेटी के शव से तेज दुर्गंध आ रही थी, जिस से लग रहा था कि उस की हत्या कई दिनों पहले की गई थी. इस हत्याकांड से पुलिस जान चुकी थी कि आरोपी अली हसन की मानसिक स्थिति कुछ ठीक नहीं थी, जिस के कारण ही उस ने अपनी दोनों बेटियों को यातनाएं दे कर मार डाला.

सारे तथ्य जुटाने के बाद पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. पोस्टमार्टम में दोनों ही शवों पर जगहजगह डंडे की पिटाई के निशान पाए गए थे, साथ ही आग से दागने के निशान भी थे. कई दिनों तक दोनों बहनों को खाना न मिलने के कारण कुपोषण का शिकार भी हो गई थीं. 

इस मामले में किसी की तरफ से भी थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी. तब चौकी प्रभारी एसआई सुनील सुतेड़ी ने अली हसन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया. पुलिस ने पोस्टमार्टम हो जाने के बाद दोनों बहनों के शव लक्ष्मीपुर पट्टी निवासी उन के चाचा मेहंदी हसन उर्फ मिंटू के सुपुर्द कर दिए.

उसी दिन पीडि़त परिवार की मानसिक स्थिति खराब होने के कारण पुलिस ने अली हसन, उस की पत्नी हुस्नजहां, बेटी शाहीन, बेटे अरमान, फरमान व रिजवान को हल्द्वानी एसटीएच भेज दिया गया था, जहां पर उन के प्राथमिक इलाज के बाद मानसिक रोग विभाग में भरती कराया गया था. जहां पर मनोचिकित्सक डा. आजमी नाज ने बताया कि सभी लोग डिल्यूजनल डिसऔडर के शिकार हैं.

इस दोनों बहनों की हत्या का आरोपी कोई तांत्रिक नहीं, बल्कि उन का बाप अली हसन ही था. आखिर अली हसन क्यों हो गया इतना दरिंदा, इस के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली निकली.

उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर का एक कस्बा है रेहड़. अली हसन इसी कस्बे का मूल निवासी था. अब से लगभग 25 साल पहले वह अपने भाई मेहंदी हसन उर्फ मिंटू के साथ रोजगार की तलाश में काशीपुर आया था. काशीपुर आते ही उस के परिवार ने मोहल्ला बांसफोड़ान में एक किराए का मकान लिया. अली हसन ने राजमिस्त्री का काम सीख लिया था. उसी काम से उस ने काफी पैसे कमाए. 

कुछ साल बाद उस ने काशीपुर की खालिक कालोनी में 800 वर्गफीट का एक प्लौट खरीद कर मकान बना लिया. उस के भाई मिंटू ने उस के पास ही दूसरी कालोनी शुगरा बस्ती में प्लौट खरीद कर मकान बना लिया था.

अली हसन का 9 सदस्यों का बड़ा परिवार था. जब तक उस के बच्चे छोटे थे, उस के घर की आजीविका ठीकठाक चलती रही. लेकिन जैसे ही उस के बच्चे बड़े होते गए, उस के खर्च भी बढ़ गए थे. फिर भी उस ने जैसेतैसे कर अपनी बड़ी शाहीन का निकाह कर दिया. शादी होने जाने के बाद शाहीन अपनी ससुराल चली गई थी. उस के बाद भी उस के पास 6 बच्चे अभी शादी के लिए बाकी थे. 

देश में कोरोना महामारी के चलते उस के काम पर भी काफी असर पड़ा था. जिस के चलते काम न मिलने के कारण उसकी रोजी रोटी पर भी संकट आ पड़ा था. घर में खाने के लाले पड़े तो वह परेशान रहने लगा. 

इस तरह अली हसन पड़ गया तंत्रमंत्र के चक्कर में

अली हसन पहले से ही शकी किस्म का इंसान था. उस का काम कुछ कम हुआ तो उसे लगा कि किसी ने उस के परिवार पर कोई टोनाटोटका करा दिया है, जिस के कारण उस का काम पूरी तरह से बंद हो गया है. इस बात का शक होते ही वह काशीपुर शहर के मोहल्ला कटोराताल स्थित भुल्लन शाह की मजार पर जाने लगा. 

उसे उम्मीदें थीं कि मजार पर जाने से उस की सारी परेशानी खत्म हो जाएगी. मजार पर हर तरह के लोग आतेजाते थे. मजारों पर वह अकसर बीमारों की पेशी पड़ते देखता था. जिस के बाद उस का भी जिन्नात में काफी विश्वास जम गया था. 

उस के बाद ही उसे लगने लगा कि उस के घर पर भी किसी जिन्न का वास हो गया है. जिस के डर की वजह से उसने अपने 2 बेटों के स्कूल से नाम कटवा दिए और उन्हें घर पर ही बैठा लिया था. उसके साथ ही उस ने अपने पड़ोसियों से भी मिलनाजुलना छोड़ दिया था. न तो उस के परिवार वाले ही किसी से मिलते थे और न ही वह किसी को अपने घर आने देता था. 

इस घटना से कुछ समय पहले ही उस की एक बेटी को बुखार आा गया. उस के बाद  दूसरी बेटी भी बुखार से पीडि़त हो गई. दोनों बेटियों के बुखार से पीडि़त होने के बाद भी उस के परिवार ने उन का कोई डाक्टरी इलाज नहीं कराया, जिस के कारण उन का स्वास्थ बिगड़ता चला गया. जिसे ले कर वह परेशान हो उठा. 

वह कई बार बेटियों को ले कर भुल्लन शाह की मजार पर भी गया. लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. उस के बाद उसे पूरा विश्वास हो गया कि दोनों बेटियों पर जिन्नों का साया है, जिन को भगाना अति आवश्यक है. 

जिन्नों को भगाने और आर्र्थिक स्थिति से उबरने के लिए उस ने घर में ही तंत्रमंत्र करना शुरू किया. उस ने सब से पहले तो बेटियों को खाना देना बंद कर दिया था. जब भी तंत्रमंत्र करता तो अपने दोनों छोटे बेटों को दूसरे कमरे के अंदर कर देता था. उस के बाद वह दोनों बेटियों को अपने सामने बैठा कर कभी तो उन के सीने पर चढ़ बैठता और कभी मुरगी के अंडे उन के माथे पर मारता. उस दौरान अगर बेटियां चीखतीचिल्लातीं तो वह खुश होता. 

अली हसन को लगता था कि उन के अंदर बैठा जिन्न ही दर्द से चीख रहा है. बेटियों के चींखने से वह और भी हैवानियत पर उतर आता था. उस के बाद वह दोनों बेटियों के गले दबा कर उन की चीखपुकार बंद करने की कोशिश करता. 

इस तरह से अली हसन कई दिनों तक बेटियों को जिन्न भगाने के नाम पर यातनाएं देता रहा. उस की हर दिन की यातनाएं झेल कर छोटी बेटी यासमीन बेहोश हो गई. उस के बेहोश होते ही अली हसन ने सोचा कि उस के ऊपर आया जिन उसे छोड़ कर जा चुका है. अब उस की बेटी जल्दी ही ठीक हो जाएगी. 

लेकिन वह निढाल हो गई और उस के प्राणपखेरू उड़ गए. अली हसन ने कई बार अपने घर में ही मुरगा काटा और उस का खून अपनी बेटियों को भी पिलाया. अली हसन ने अपने पूरे घर में दहशत का माहौल बना दिया था. जिस के बाद न तो उस की पत्नी हुस्नजहां ने उस के सामने अपना मुंह खोला था और न ही उस के अन्य बच्चों ने. 

काश! उस समय पुलिस माजरा समझ जाती तो…

यासमीन के  इस तरह से शांत होते ही कई बार उस की मां हुस्नजहां ने उसे जगाने की कोशिश की, लेकिन अली हसन बारबार उसे उस से दूर भगा देता था. जिस के डर की वजह से हुस्नजहां सहम कर रह जाती थी. दिन में वह अपने घर के अंदर से ताला लगा लेता था, ताकि उस के परिवार का कोई भी सदस्य उस की मरजी के बिना घर से बाहर न निकल पाए. 

कई दिनों तक अली हसन के घर का दरवाजा न खुला तो पड़ोसी भी परेशान हो उठे थे. घर के अंदर से तरहतरह के रोनेचीखने की आवाजें आती थीं, लेकिन कोई भी घर से बाहर निकल कर नहीं आता था.

अली हसन के घर से लगभग एक सप्ताह तक चीखनेचिल्लाने की आवाजें आती रहीं. पड़़ोसियों ने इस सब का कारण जानने की कोशिश भी की, लेकिन अली हसन ने सब से कहा कि उस की बेटी की तबियत खराब चल रही है. रात में उस के पेट में दर्द उठता है, जिस के कारण वह चीखती है. कई बार पड़ोसियों ने उस का दरवाजा खुलवाने की कोशिश भी की, लेकिन अली हसन के परिवार वालों ने दरवाजा नहीं खोला. 

इस के बाद भी पड़ोसियों को उस की बात पर विश्वास नहीं हुआ तो उस की सूचना स्थानीय पुलिस चौकी में दी गई. सूचना पा कर पुलिस अली हसन के घर पहुंची भी. पुलिस ने अली हसन के घर के अंदर जा कर देखा तो एक कमरे में उस का बेटा अपनी बहन को अपनी गोद में लिटाए हुए बैठा था. 

पुलिस वालों के पूछने पर उस के घर वालों ने बताया कि उस की ज्यादा ही तबियत खराब है. उस पर ऊपरी हवा का साया है. उस का इलाज चल रहा है. पुलिस वाले अली हसन के परिवार वालों की बातों पर विश्वास कर के उस के घर से वापस चले गए थे. 

उसी रात फिर से उस के घर में वही चीखनेचिल्लाने की आवाजें आनी शुरू हुईं. अली हसन की एक बेटी तो पहले ही निढाल पड़ी हुई थी. उसे उम्मीद थी कि उस के ऊपर आया जिन्न तो भाग चुका है. अब बड़ी बेटी फरहीन की बारी थी. 

फरहीन का जिन्न उतारने के लिए अली हसन ने फिर से तंत्रमंत्र का सामान रखा. उसे अपने सामने बिठाया और फिर वही क्रिया करनी शुरू कर दी. अली हसन ने उस के सामने ही एक मुरगा काटा और उस का खून फरहीन के ऊपर छिड़का. मुरगे का कच्चा मांस उस के मुंह में डाला. जिस का उस ने विरोध किया तो अली हसन ने उस के शरीर को आग से दागा, जिस से उस की एड़ी तक कई जगह फफोले पड़ गए थे. 

उस के सिर पर बारबार अंडे फोड़े. उस के साथ ही उस की डंडों से पिटाई भी की. जिस के कारण उस की हालत भी बिगड़ती गई. लेकिन अली हसन की हैवानियत अभी भी खत्म नहीं हुई थी. उस के बाद भी वह अपनी बेटी के सीने पर बैठ गया. 

उस ने उस के सीने पर कई बार उठा बैठ की. साथ ही उस का गला भी दबाया. जिस के बाद फरहीन भी बेहाश हो गई. यातनाओं को झेलते हुए रात में ही उस की भी मौत हो गई थी. दोनों बेटियों के साथ दरिंदगी का खेल खेलते हुए उन्हें मौत की नींद सुला दिया था. 

दोनों बेटियों की मौत के बाद अली हसन के घर में सन्नाटा पसर गया. उस के बीवीबच्चे इस कदर सदमे में आ गए थे कि वह अली हसन के पास तक जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे. उन्हें डर इस बात का था कि इस बार पता नहीं किस पर जुल्म ढहने की बारी है. अली हसन का डर उस की बीवीबच्चों पर इस कदर हावी हो गया था कि उन की हिम्मत घर का दरवाजा खोलने की नहीं बची थी. 

हालांकि शाहीन उस वक्त अपने अब्बू के कहने पर अपनी ससुराल वापस चली गई थी. लेकिन उस की सांसें उसी दिन से अपने मायके की सलामती में अटकी हुई थीं. उसे मायके में किसी अनहोनी का डर सता रहा था. उस ने कई बार अपने अब्बूअम्मी के मोबाइल पर संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन लगातार ही उन के मोबाइल बंद आ रहे थे. 

जब उस से नहीं रुका गया तो 25 नबंवर, 2023 को वह सुबह ही मायके पहुंच गई. उस दिन उस ने जैसे ही दरवाजा खटखटाया, उस की अम्मी हुस्नजहां ने दरवाजा खोला. उस ने घर के अंदर जा कर देखा तो अंदर का मंजर देख उस की चीख निकल गई. घर में अलगअलग कमरों में दोनों बहनों की लाशें पड़ी हुई थीं.

उस दिन अपनी दोनों बेटियों को मौत की नींद सुलाने के बाद अली हसन अपने दोनों बेटों फरमान व व रिजवान को साथ ले कर मोहल्ला कटोराताल स्थित बाबा भुल्लन शाह की मजार पर पहुंचा. वह उन दोनों को वहीं पर छोड़ कर गायब हो गया था. उस के बाद जैसे ही उस की बेटियों की मौत की खबर उजागर हुई तो उस के दोनों बेटे और वह स्वयं भी लगभग 11 बजे घर पहुंचे. 

अली हसन के अस्पताल से डिसचार्ज हो जाने के बाद पुलिस ने उसे दोनों बेटियों की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित