Karnataka Crime: बेंगलुरु के डौक्टर दंपति के पास पैसा, रुतबा, प्यार और रोमांस सभी कुछ था. 31 वर्षीय डा. महेंद्र रेड्डी ने 29 वर्षीय डा. कृतिका की खूबसूरती और उस की रईसी देख कर उस से शादी की थी, लेकिन औरतों के रसिया डा. महेंद्र का मन जल्दी ही कृतिका से ऊब गया था. शादी के केवल 11 महीने बाद उस ने कृतिका को एक ऐसी खामोशी भरी मौत दे डाली, जिस से पूरा बेंगलुरु शहर सन्न रह गया. आखिर महेंद्र रेड्डी क्यों बना डौक्टर डैथ…

डा. महेंद्र रेड्डी ने अब अपनी पत्नी डा. कृतिका रेड्डी के मर्डर का प्लान अब फाइनल कर दिया था. बस अब वह केवल मौके के इंतजार में ही था, इस के लिए वह दिनरात अब क्राइम सीरीज और थ्रिलर मूवी देखदेख कर अपने मर्डर प्लान को अंतिम रूप देने में बुरी तरह से जुटा हुआ था. 21 अप्रैल, 2025 का दिन था, डा. महेंद्र अपने घर में पत्नी के साथ नाश्ता करने की तैयारी कर रहा था, तभी उस की पत्नी कृतिका ने कहा, ”महेंद्र, आज मेरे पेट में बड़े जोरों का दर्द हो रहा है, मैं तुम्हारे साथ हौस्पिटल नहीं आ पाऊंगी, तुम अकेले ही चले जाओ. मेरी लीव ऐप्लिकेशन डाल देना.’’ कृतिका ने अपना पेट पकड़ते हुए कहा.

यह खबर सुनते ही डा. महेंद्र मन ही मन काफी खुश हो गया था. आज पत्नी को ठिकाने लगाने की उस की मुराद अपने आप ही पूरी हो रही थी, लेकिन वह बहुत शातिर दिमाग का था. अपनी खुशी को उस ने अपने चेहरे पर बिलकुल भी हावी नहीं होने दिया था.

उस के बाद वह गंभीर स्वर में बोला, ”देखो कृतिका, मैं अब तुम्हारे पेट दर्द को रूट काज से ठीक करना चाहता हूं. यदि तुम ने मेरा सहयोग किया तो मैं तुम्हारे इस पेट दर्द के पुराने मर्ज से तुम्हें सदासदा के लिए छुटकारा दिला दूंगा.’’

”देखो महेंद्र, जो कुछ भी करना है, जल्दी से करो. तुम्हें तो पता ही है कि जब पिछले साल मेरे पेट दर्द हुआ था, तब भी तुम ने मुझे दवाइयां दी थीं जिस से मेरा दर्द ठीक हो गया था.’’ कृतिका ने दर्द से कराहते हुए कहा.

”कृतिका, अब मैं तुम्हारा ये इलाज परमानेंट खत्म कर देना चाहता हूं, तुम बस थोड़ा धैर्य रखो और मुझ पर विश्वास तो रखो.’’ महेंद्र ने कहा.

”तुम भी कैसी बात कह रहे हो महेंद्र, आखिर तुम मेरे पति हो, तुम पुर विश्वास नहीं करूंगी तो क्या किसी और पर विश्वास करूंगी. मैं भी यही चाहती हूं कि इस पेट दर्द से मुझे हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाए.’’ कृतिका ने कराहते हुए कहा.

इस के बाद डा. महेंद्र ने कृतिका के हाथ में कैनुला लगा दिया था. कैनुला एक पतली नली होती है, जिसे इंसान के शरीर में दवा, तरल पदार्थ या औक्सीजन पहुंचाने या निकालने के लिए डाला जाता है. दंपति डौक्टर थे तो ये सभी चीजें बेसिक थीं तो हर समय उन के घर में यह मौजूद रहती थी.

”कृतिका, अब पूरे 3 दिन तक तुम्हारे इस हाथ पर एंटीबायटिक की ड्रिप लगेगी, जिस से तुम्हें इस पेट दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा.’’ यह कहते हुए डा. महेंद्र ने पत्नी कृतिका को एक इंजेक्शन लगा दिया.

उस के बाद डा. महेंद्र कृतिका को गाड़ी में बिठा कर उसे उस के पेरेंट्स के घर पर छोड़ कर विक्टोरिया हौस्पिटल चला गया, जहां पर वह वर्तमान में नौकरी कर रहा था. रात को हौस्पिटल से आते समय डा. महेंद्र अपनी ससुराल गया और वहां से कृतिका को गाड़ी में बिठा कर अपने फ्लैट में आ गया. खाना खा कर वे दोनों सो गए.

मौत की आखिरी डोज

22 अप्रैल, 2024 की सुबह भी महेंद्र ने कृतिका को कैनुला से एक इंजेक्शन की डोज दी, लेकिन आज उस ने थोड़ा डोज बढ़ा कर दी थी. उस के बाद महेंद्र अपनी ड्यूटी पर चला गया, जबकि कृतिका घर पर ही आराम करती रही. अगले दिन 23 अप्रैल की रात को कृतिका ने महेंद्र को बताया कि उसे पेट दर्द से बिलकुल भी राहत नहीं मिल रही है, बल्कि पेट दर्द और भी बढ़ता जा रहा है. दर्द के मारे उस की आंखों से आंसू भी आने लगे थे. रात को सोते समय महेंद्र ने कृतिका से कहा कि अब तुम्हें तीसरा डोज लेना बहुत जरूरी हो गया है. इस के बाद तुम्हें यह पेट दर्द कभी नहीं रहेगा.

यह कहते हुए महेंद्र ने कैनुला के माध्यम से इंजेक्शन में भर कर तीसरा और अंतिम डोज भी लगा दिया और उस तीसरे डोज में महेंद्र ने दवाई की मात्रा पूरी दोगुनी कर दी थी. महेंद्र ने अपनी योजना को अब अपना अंतिम रूप दे दिया था, इसलिए अब वह मन ही मन बहुत खुश हो रहा था.

अपनी पूर्व नियोजित योजना के अनुसार अगले दिन यानी 24 अप्रैल, 2025 की सुबह 7 बजे डा. महेंद्र रेड्डी ने कृतिका की मम्मी सौजन्या को फोन किया, ”मम्मीजी, कृतिका को अचानक न जाने क्या हो गया है, मैं ने उसे सुबह उठाने की कोशिश की तो वह कोई जवाब ही नहीं दे रही है. हिलडुल भी नहीं रही है. मेरा तो दिल बहुत घबरा रहा है. आप लोग जल्दी यहां पर आ जाइए.’’

थोड़ी ही देर के बाद कृतिका के पेरेंट्स और बड़ी बहन डा. निकिता रेड्डी और उन के पति मोहन रेड्डी डा. महेंद्र रेड्डी के घर पर बदहवासी की हालत में पहुंच गए और सभी कृतिका को ले कर अस्पताल पहुंचे मगर अस्पताल पहुंचने पर डौक्टरों ने कृतिका को मृत घोषित कर दिया.

यह मौत कृतिका के पेरेंट्स के लिए दुखभरी थी, लेकिन दूसरी तरफ कृतिका की बड़ी बहन निकिता जो खुद एक डौक्टर थी और रेडियोलौजिस्ट भी थी. यानी कि वह एक ऐसी चिकित्सक थी, जो बीमारियों और चोटों का निदान करने के लिए एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग तकनीकों का उपयोग करने में माहिर होते हैं.

डा. निकिता तो इस बात पर विश्वास ही नहीं हो पा रहा था कि उस की छोटी बहन डा. कृतिका की मृत्यु केवल पेट दर्द के कारण भला कैसे हो सकती है. इसलिए डा. निकिता ने अपने पापा मुनि रेड्डी से अपनी छोटी बहन कृतिका की मौत का सच जानने के लिए मराठाहल्ली थाने में मैडिकल लीगल केस दर्ज करने के लिए प्रेरित किया.

दूसरी तरफ महेंद्र अपने ससुर मुनि रेड्डी को रोरो कर कह रहा था कि अब तो कृतिका की मौत हो चुकी है. इसलिए उस का पोस्टमार्टम न करवा कर दाह संस्कार कर देना चाहिए. क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उस के प्राणों से भी प्यारी पत्नी की चीरफाड़ की जाए. एक बार तो मुनि रेड्डी अपने दामाद की बातों में आ कर पोस्टमार्टम कराने के लिए मना भी करने लगे थे, लेकिन उन की बड़ी बेटी को न जाने क्यों ऐसा संदेह हो रहा था कि उस की छोटी बहन की मौत के पीछे जरूर कोई न कोई राज अवश्य छिपा हुआ है.

जब मुनि रेड्डी के ऊपर बेटी का प्रेशर पड़ा तो उन्होंने दिनांक 24 अप्रैल, 2025 को मराठाहल्ली पुलिस स्टेशन में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर दिया. पुलिस में केस दर्ज होते ही कृतिका का पोस्टमार्टम कराने का आदेश दे दिया गया. इधर मृतका की बड़ी बहन डा. निकिता भी पोस्टमार्टम कक्ष के बाहर खड़ी थी. निकिता गौर कर रही थी कि डा. महेंद्र बारबार पोस्टमार्टम कक्ष के अंदर जा रहा था, उस का कहना था कि वह खुद भी एक सर्जन है और मृतका का पति भी है, इसलिए पोस्टमार्टम रूम में उस का रहना जरूरी है.

निकिता ने इस की शिकायत ड्यूटी पर खड़े पुलिस अधिकारी को कर दी, जिस के बाद पुलिस अधिकारी ने डा. महेंद्र को वहां से चले जाने को कह दिया. क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छेड़छाड़ का अंदेशा बन सकता था. इस के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट जब सामने आई तो कोई कारण स्पष्ट नजर न आने के कारण डा. कृतिका रेड्डी की मौत को स्वाभाविक मौत माना गया और उस के बाद पुलिस ने मृतका की लाश परिजनों को सौंप दी और मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

इस रिपोर्ट को देख कर निकिता बिलकुल भी संतुष्ट नहीं थी, इसलिए डा. निकिता ने शुरुआती स्पष्टीकरण को मानने से इंकार करते हुए कृतिका के शरीर के भीतर विसरा और अन्य नमूनों की फोरैंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) में जांच कराने का अनुरोध पत्र दे दिया.

इधर डा. महेंद्र रेड्डी मन ही मन अपने मर्डर प्लान की सफलता पर खुशी मना रहा था. उस ने इस मर्डर को इस तरह से प्लान किया था कि उस का अपनी पत्नी के शरीर में प्रोपोफोल इंजेक्ट करने का मर्डर प्लान पूरी तरह से कामयाब हो गया था. इस के बाद वह अपनी इस जीत की खुशी को अपनी महिला मित्रों के साथ सेलिब्रेट करने लग गया था.

6 महीने बाद खुला राज

किसी भी मरीज अथवा मृतक की विसरा रिपोर्ट एक फोरैंसिक रिपोर्ट होती है, जिस के अनुसार मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाने या विश्लेषण करने के लिए शरीर के आंतरिक अंगों और शरीर के भीतर के तरल पदार्थों का विश्लेषण किया जाता है. खासकर जब मृत व्यक्ति को जहर देने या अन्य परिस्थितियों में संदिग्ध मौत का शक हो. इस का उपयोग तब किया जाता है, जब शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता है.

आमतौर पर विसरा रिपोर्ट आने में एक महीना लग जाता है, यदि मामला बहुत जटिल हो तो इस रिपोर्ट को आने में 5-6 महीने का समय भी लग जाता है. विसरा रिपोर्ट की देरी कई कारकों या बातों पर निर्भर करती है, जैसे प्रयोगशाला में काम का अधिक बोझ, जांच की जटिलता अथवा विशेष परीक्षण का आवश्यकता आदि. धीरेधीरे विसरा रिपोर्ट आने में 6 महीने बीत गए थे. डा. महेंद्र रेड्डी अपनी पत्नी की मौत के गम से उबर चुका था और अपनी प्लानिंग पर उसे अब पूरा विश्वास भी हो चुका था कि उस का यह कृत्य अब कभी भी दुनिया के सामने उजागर नहीं हो सकता है.

लेकिन एक बात यह भी सत्य है कि कातिल चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक न एक ऐसा सुराग अवश्य छोड़ देता है. जिस के कारण वह गुनहगार साबित हो जाता है. डा. महेंद्र रेड्डी के साथ भी ऐसा ही हुआ. 6 महीने के बाद जो विसरा रिपोर्ट निकल कर सामने आई, उस ने सब के होश उड़ा कर रख दिए. फोरैंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) को डा. कृतिका रेड्डी के अंगों में प्रोपोफोल के अंश मिले, जो एक शक्तिशाली एनेस्थेटिक है, जिस का इस्तेमाल आमतौर पर केवल अस्पताल में की जाने वाली सर्जरी में ही किया जाता है.

इस रिपोर्ट के आधार पर मृतका कृतिका के पापा मुनि रेड्डी ने दिनांक 13 अक्तूबर, 2025 को बेंगलुरु के थाना मराठाहल्ली में शिकायत दर्ज कराई, जिस में उन्होंने यह आरोप लगाया कि उन के दामाद डा. महेंद्र रेड्डी ने उन की बेटी के शरीर में एनेस्थेटिक का जानबूझ कर इस्तेमाल कर उस की हत्या कर दी है. अपनी शिकायत में मुनि रेड्डी ने यह बताया कि उन्होंने अपनी छोटी बेटी कृतिका की शादी 26 मई, 2024 को डा. महेंद्र रेड्डी के साथ की थी. कृतिका एमबीबीएस, एमडी डौक्टर थी. शादी के बाद पतिपत्नी बेंगलुरु के गुंजूर में रहने लगे.

मुनि रेड्डी ने बताया कि शादी के बाद से ही उन का दामाद बेटी की उपेक्षा करने लगा था. वह उन की बेटी पर अपना खुद का अस्पताल बनाने के लिए अपने मायके से पैसे लाने का दबाव बनाता रहता था. उस के बाद मुनि रेड्डी ने अस्पताल के बजाय मराठाहल्ली इलाके में एक क्लिनिक खुलवा दिया था, जिस से महेंद्र रेड्डी नाराज रहने लगा था. वारदात के बारे में मुनि ने पुलिस को बताया कि 21 अप्रैल, 2025 को महेंद्र ने कृतिका को गैस की शिकायत होने पर इंजेक्शन दिया था.

अगले दिन महेंद्र यह कह कर उसे मायके छोड़ आया था कि उसे आराम की जरूरत है. शाम को वह फिर इंजेक्शन देने आया और बाद में उस ने घर पर ले जा कर फिर कृतिका को हैवी डोज का एनेस्थेटिक इंजेक्शन जानबूझ कर दिया, ताकि उस की मौत हो जाए.

अगले दिन सुबह कृतिका अपने घर पर बेसुध अवस्था में मिली. मुनि रेड्डी ने यह आरोप भी लगाया कि डौक्टर होने के बावजूद भी महेंद्र ने कृतिका को सीपीआर नहीं दिया. जब हम उसे अस्पताल ले गए तो अस्पताल में कृतिका को मृत घोषित कर दिया गया. उन्होंने पुलिस से आरोपी महेंद्र के खिलाफ सख्त काररवाई की मांग करते हुए उसे तुरंत गिरफ्तार करने का निवेदन किया.

डौक्टर डेथ हुआ अरेस्ट

पुलिस ने तहकीकात शुरू की तो मृतका कृतिका रेड्डी के घर पर चौंकाने वाले सुराग मिले. डा. महेंद्र रेड्डी के घर से कैनुला सेट, इंजेक्शन ट्यूब और अन्य प्रतिबंधित मैडिकल उपकरण बरामद किए गए. 14 अक्तूबर को पुलिस ने आरोपी डा. महेंद्र रेड्डी को गिरफ्तार कर लिया. जब पुलिस ने सबूत पेश करते हुए डा. महेंद्र रेड्डी से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया.

एक रहस्यमयी मौत मानी जा रही बेंगलुरु की डर्मेटोलौजिस्ट डा. कृतिका रेड्डी का मर्डर स्वयं उस के पति ने किया था, जो स्वयं भी एक डौक्टर है. बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल में कार्यरत जनरल सर्जन महेंद्र रेड्ïडी ने कथित तौर पर अपनी डौक्टर पत्नी कृतिका को एनेस्थीसिया की घातक खुराक दे कर और इसे एक प्राकृतिक मौत के रूप में बता कर एक गहरी साजिश के तहत उस की हत्या की थी. बेंगलुरु पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुआ कहा कि डा. महेंद्र रेड्डी की गिरफ्तारी फोरैंसिक पुष्टि के बाद की गई.

इस हत्याकांड में चौकाने वाले तथ्य सामने आए. डा. महेंद्र रेड्डी ने अपनी पत्नी की हत्या की योजना अपनी चिकित्सा विशेषज्ञता और पत्नी की स्वास्थ्य संबंधी कमजोरियों का इस्तेमाल करते हुए बहुत सोचसमझ कर शातिराना ढंग से बनाई थी. महेंद्र यह जान कर परेशान हो गया था कि उस की पत्नी गैस्ट्रिक और मेटाबोलिक जैसी बीमारियों से पीडि़त थी. यह जानकारी कथित तौर पर उस के परिवार द्वारा छिपाई गई थी.

इस के अलावा डा. महेंद्र के अन्य महिलाओं से शादी से पूर्व भी संबंध थे. उसे अपनी पत्नी से यौनसुख भी नहीं मिल पा रहा था, इसलिए उस ने अपनी पत्नी को ही रास्ते से हटाने का निश्चय कर लिया था. 21 अप्रैल को कृतिका ने महेंद्र से गैस्ट्राइटिस की शिकायत की तो डा. महेंद्र ने अब अपना प्लान बनाना शुरू कर दिया. उस ने उस का घर पर ही अपने आप इलाज करना शुरू कर दिया और 2 दिनों तक कई आईवी इंजेक्शन लगाए और उस के शरीर में आईवी लाइन के जरिए एनेस्थेटिक इंजेक्शन देने लगा.

अपनी मौत के एक दिन पहले कृतिका अपने घर पर ही थी तो उस ने वाट्सऐप पर मैसेज कर के पति महेंद्र से पूछा भी था कि उस के पेट दर्द में कुछ राहत नहीं मिल रही है. इसलिए आईवी ट्रिप हटा कर उसे हौस्पिटल में एडमिट हो जाना चाहिए. तब डा. महेंद्र ने कृतिका को आईवी ड्रिप हटाने के लिए जानबूझ कर मना कर दिया और घर पर आ कर उसे विश्वास दिलाया कि जो इलाज वह कृतिका को दे रहा है, उस से उस का पेट दर्द हमेशा के लिए ठीक हो जाएगा.

उस के बाद उस ने आईवी लाइन के जरिए उसे अधिक मात्रा में एनेस्थीसिया की डोज दे दी, जिस से उस की हृदय गति रुक जाने के कारण मौत हो गई. मैडिकल एक्सपर्ट के अनुसार प्रोपोफोल एक इंट्रावेनस एनेस्थेटिक होता है, जिस का उपयोग सर्जरी या बेहोश करने के दौरान मरीज के साथ एक निश्चित मात्रा में किया जाता है. आमतौर पर इस की खुराक एक से 2.5 मिलीग्राम होती है, जबकि बेहोशी बनाए रखने के लिए 50-200 माइकोग्राम प्रति किलोग्राम होती है. ओवरडोज देने से बीपी और हार्ट रेट में एकदम गिरावट आ जाती है, जिस से मृत्यु तक हो जाती है.

पुलिस के अनुसार डा. महेंद्र रेड्डी ने अस्पताल में अपनी पेशेवर पहुंच का दुरुपयोग कर औपरेशन थिएटर और आईसीयू की दवाओं तक पहुंच बनाई और फिर उसी का इस्तेमाल कर अपनी पत्नी की शातिर ढंग से हत्या कर डाली थी.

पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि डा. महेंद्र का परिवार पहले से ही आपराधिक मामलों में शामिल रहा है. डा.  महेंद्र के जुड़वा भाई डा. नागेंद्र रेड्ïडी जीएस पर वर्ष 2018 में एचएएल थाना, बेंगलुरु में कई धोखाधड़ी और आपराधिक मामले दर्ज हैं. जबकि डा. महेंद्र रेड्डी और उस के दूसरे भाई राघव रेड्डी जीएस को वर्ष 2023 में उसी शिकायतकर्ता के परिवार को धमकाने के मामले में सहआरोपी बनाया गया था.

मृतका कृतिका रेड्डी के फेमिली वालों का आरोप है कि इन सभी तथ्यों को शादी के वक्त छिपाया गया था. डा. कृतिका रेड्डी की हत्या के मामले में मराठाहल्ली पुलिस ने डा. महेंद्र रेड्ïडी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 के तहत हत्या के रूप में दर्ज कर लिया.

औरतों का था रसिया

डा. महेंद्र रेड्डी महिलाओं से मित्रता, प्रेम संबंध और यौन संबंध बनाने का इतना शौकीन था कि पत्नी की मौत के केवल कुछ हफ्तों बाद ही महेंद्र ने कम से कम 5 महिलाओं को, जिन में एक मैडिकल प्रोफेशनल भी शामिल थी. एक डिजिटल पेमेंट ऐप के जरिए यह मैसेज तक भेजा, ”मैं ने तो तुम्हें पाने के लिए, तुम्हें अब अपना बनाने के लिए अपनी पत्नी तक को मार डाला है.’’

यह मैसेज डा. महेंद्र रेड्डी द्वारा उन महिलाओं को भेजा गया, जिन्होंने पहले उसे ठुकरा दिया था. डा. महेंद्र के लैपटाप और मोबाइल के डाटा की जांच में पुलिस को यह पता चला है कि उस ने फोनपे ऐप के जरिए एक मैडिकल प्रोफेशनल को यह मैसेज भेजा था. इस महिला ने उसे कई मैसेजिंग प्लेटफार्म पर ब्लौक कर दिया था. डीसीपी (वाइटफील्ड) के. परशुराम ने इस बात की पुष्टि की है.

के. परशुराम के अनुसार उक्त महिला का बयान दर्ज कर लिया गया है, लेकिन जांच पूरी हो जाने तक और जांच जारी होने के कारण इस मामले में बेंगलुरु पुलिस ने अन्य जानकारी देने से इंकार कर दिया है. उक्त महिला ने पुलिस को बताया कि उस ने डा. महेंद्र को उस की कृतिका के साथ हुई शादी से पहले ही उसे ब्लौक कर दिया था. यहां तक कि डा. कृतिका रेड्डी से उस की शादी होने की जानकारी जानने के बाद भी यह महिला उस से दूर रही थी.

बेंगलुरु पुलिस के अनुसार जब तक डा. महेंद्र रेड्डी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार नहीं किया गया था, तब तक यह महिला यही सोचती रही थी कि उस का ये पागल प्रेमी क्या उस से फिर से दोस्ती बढ़ाने या उस से बात करने के इरादे से एक नया झूठ तो नहीं बोल रहा है. बेंगलुरु पुलिस ने इस बारे में स्पष्ट रूप से कहा कि इस महिला का इस जघन्य अपराध में बिलकुल भी हाथ नहीं है.

बेंगलुरु पुलिस की जानकारी में यह बात भी सामने आई है कि हत्यारा डा. महेंद्र रेड्डी 2023 तक मुंबई की एक अन्य महिला के संपर्क में भी था, यहां तक कि डा. महेंद्र ने मुंबई की इस महिला मित्र के साथ एक नया खेल खेला. इस नए खेल में महेंद्र के पापा श्रीनिवास रेड्डी ने इस मुंबई की महिला को अपना परिचय दे कर बताया कि उन के बेटे डा. महेंद्र रेड्डी की एक दुर्घटना में मौत हो गई है. उस के बाद डा. महेंद्र रेड्डी एकाएक अपनी मृत्यु से निकल कर बाहर आ गया और उस ने सितंबर 2025 को अपनी मुंबई वाली महिला को फोन कर इस बात की पुष्टि की कि वह मरा नहीं है, बल्कि अभी भी जीवित है.

उस ने अपनी मुंबई की महिला मित्र को विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि उसे ज्योतिष ने ऐसा करने के लिए कहा था. डा. महेंद्र रेड्डी ने अपनी इस महिला मित्र को बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार उस की पहली पत्नी की मृत्यु निश्चित होने वाली थी, इसलिए उस ने तुम्हें अपनी पत्नी नहीं बनाया और अपने पिता से फोन कर के तुम्हें अपनी मृत्यु की जानकारी दी. यदि वह तुम से शादी कर लेता तो तुम्हारी मृत्यु निश्चित थी. डा. महेंद्र ने अपनी मुंबई वाली प्रेमिका को बताया कि इसीलिए उस ने डा. कृतिका रेड्डी से शादी की थी, क्योंकि उसे पता था कि उस की पहली पत्नी की मौत निश्चित है.

अब डा. महेंद्र ने उसे अपना प्रपोजल भेजा कि अब जब कृतिका की मौत हो चुकी है तो वह अब उस से शादी करना चाहता है और उसे हमेशा के लिए सुरक्षित रखना चाहता है. लेकिन इस महिला मित्र ने भी उस का प्रस्ताव ठुकरा दिया था.

यह सब कुछ डा. महेंद्र रेड्डी ने अपनी पत्नी डा. कृतिका रेड्ïडी के मर्डर करने के बाद किया था. इस से यह जाहिर होता है कि डा. महेंद्र रेड्डी महिलाओं के प्रति कितना क्रूर और हिंसक था. ये सभी हरकतें उस की क्रूरता और आगे आने वाले धोखों को दर्शाती है, जिस से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि डा. महेंद्र रेड्ïडी ने उस से झूठ बोल कर कृतिका के साथ शादी की थी. अब जब उस ने अपनी पत्नी का मर्डर कर दिया था तो उस ने अपनी पुरानी प्रेमिका को बहलाने और फुसलाने की कोशिश की थी.

बेंगलुरु पुलिस अब इस मामले में गहराई से जांच कर रही है और इस मामले में अन्य महिलाओं से भी विस्तृत पूछताछ कर सकती है.

ऐसे शुरू हुई लव स्टोरी

डा. महेंद्र रेड्डी बेंगलुरु के गुंजूर का रहने वाला था. 31 वर्षीय डा. महेंद्र रेड्डी के पिता का नाम श्रीनिवास रेड्डी और मां का नाम प्रमिला रेड्डी है. डा. महेंद्र के परिवार में 3 भाईबहन डा. नागेंद्र रेड्डी महेंद्र का जुड़वां भाई है, जबकि सब से छोटा भाई राघव रेड्डी है, जो दवाई की एक दुकान चलाता है. डा. महेंद्र रेड्ïडी का पूरा नाम डा. महेंद्र रेड्डी जीएस था.

डा. महेंद्र ने जनरल मैडिसन में एमबीबीएस और गैस्ट्रो सर्जरी में एमएस की डिग्री हासिल की है. उस के पापा एक जमींदार हैं, जिन्होंने गुंजूर और मराठाहल्ली में कई संपत्तियां किराए पर दे रखी हैं. डा. महेंद्र रेड्डी जीएस बेंगलुरु के विक्टोरिया हौस्पिटल में फेलोशिप के रूप में काम कर रहा था. यह फरवरी 2024 की बात है, जब एक दिन उस की नजर अपने हौस्पिटल में काम कर रही एक खूबसूरत डौक्टर कृतिका रेड्डी पर पड़ी तो वह एक ही नजर में उस का दीवाना बन गया था.

उस दिन के बाद से वह कृतिका से बात करने के बहाने दूंढता रहता था. जिस दिन वह कृतिका से बात नहीं कर पाता तो उस दिन उसे पूरा दिन फीका सा लगने लगता था. डा. महेंद्र का काम उस दिन आसान हो गया, जब डा. कृतिका रेड्डी की मम्मी सौजन्या अपेंडिस के दर्द के कारण विक्टोरिया हौस्पिटल में एडमिट हुईं. इसे अब संयोग कहें या डा. महेंद्र रेड्डी का भाग्य, सौजन्या रेड्डी के औपरेशन का काम डा. महेंद्र को दिया गया. बस अब तो डा. महेंद्र हर पल सौजन्या रेड्डी की तीमारदारी में लग गया.

वह उन से खूब बातें करता, उन्हें तरहतरह की कहानियां और जोक्स वगैरह सुना कर हंसाने का और कंफर्टेबल रखने का प्रयास करता रहता था. जल्दी ही डा. महेंद्र ने सौजन्या रेड्डी के अपेंडिक्स का सफतापूर्वक औपरेशन भी कर दिया और डा. कृतिका की मम्मी सौजन्या रेड्डी 2 दिन के अंदर ही ठीक हो कर सकुशल अपने घर भी वापस चली गई. और इस तरह उन्हें जीवनदान देने में डा. महेंद्र की भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण रही. अब कृतिका की मम्मी घर से भी कुछ न कुछ बना कर डा. महेंद्र को भेज दिया करती थी. दोनों अब एकदूसरे के करीब आते जा रहे थे. अब धीरेधीरे कृतिका भी महेंद्र को पसंद करने लगी थी.

29 वर्षीय डा. कृतिका रेड्डी बेंगलुरु के मुनेकोल्लाल की रहने वाली थी. उस के पापा का नाम मुनि रेड्डी था, जो एक सेवानिवृत्त इलेक्ट्रिक इंजीनियर हैं. डा. कृतिका के दादादादी से ले कर उन का परिवार काफी रईस व संभ्रांत रहा था. कृतिका के परिवार में मम्मीपापा के अलावा एक बड़ी बहन भी है, जिन का नाम डा. निकिता रेड्डी है, जोकि एक रेडियोलौजिस्ट हैं. डा. निकिता विवाहित हैं और उन के पति का नाम मोहन है.

डा. कृतिका ने वैदेही मैडिकल कालेज से एमबीबीएस और फिर रायचूर के नवोदय मैडिकल कालेज से त्वचा विज्ञान में एमडी की डिगरी हासिल की थी. इस के बाद उन्होंने बेंगलुरु के कल्याण नगर स्थित रूट्स इंस्टीट्यूट से त्वचा विज्ञान में फेलोशिप हासिल की. डा. महेंद्र और डा. कृतिका के बीच अब दोस्ती बढऩे लगी थी. एक दिन जब डा. महेंद्र ने कृतिका के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा तो कृतिका चाह कर भी इंकार न कर सकी. उस के बाद दोनों परिवारों की सहमति से 26 मई, 2024 को विवाह की तिथि भी निश्चित कर दी गई.

शादी से पहले कश्मीर की हसीन वादियों में वेडिंग से पहले का प्री वेडिंग शूट भी किया गया. 2 दिलों की एक नई शुरुआत में डा. महेंद्र और डा. कृतिका का जोड़ा कैमरे के सामने मुसकरा रहा था. नियत तिथि 26 मई, 2024 को कृतिका के पापा मुनि रेड्डी ने एक आलीशान बैंक्वेट हाल में एक भव्य समारोह आयोजित किया, जिस में डा. महेंद्र रेड्डी जीएस और डा. कृतिका रेड्डी एम विवाह के पवित्र बंधन सूत्र में बंध गए.

इस विवाह समारोह में कृतिका के पापा मुनि रेड्डी ने करीब 2 करोड़ रुपए खर्च किए थे. उस के बाद कृतिका के पापा ने अपनी बेटी और दामाद को पूरे 3 करोड़ रुपए की एक आलीशान कोठी उपहारस्वरूप दी थी. पूरे समाज और दुनिया को यह जोड़ी आदर्श कपल के रूप में नजर आती थी. एक ऐसा आदर्श दंपति जो दूसरे लोगों को अच्छा इलाज और जीवन की एक नई उम्मीद देता था, लेकिन यह किसे पता था कि इसी रिश्ते में जहर पनपने की शुरुआत हो चुकी थी.

दामाद ने ही जब बेटी की हत्या कर दी तो पिता मुनि रेड्डी ने व्यथित हो कर बेटीदामाद को दिया गया 3 करोड़ रुपए का घर इस्कान मंदिर ट्रस्ट को दान कर दिया. मुनि रेड्डी का कहना है कि वे उस घर में अब बिलकुल भी नहीं रह सकते, जहां उन्हें अपनी बेटी की यादें सताती हैं. वे अब यह चाहते हैं कि वह जगह अब आध्यात्मिक और ध्यान संबंधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो, जिस से वहां पर सकारात्मक ऊर्जा का उद्गम हो.

हत्या के रहे 3 कारण

मैडिकल जगत में सनसनी मचाने वाले डा. कृतिका मर्डर केस में गिरफ्तार आरोपी पति डा. महेंद्र रेड्ïडी ने बेंगलुरु पुलिस के सामने चौंका देने वाले सच उगले हैं. आरोपी डौक्टर पति महेंद्र रेड्ïडी ने पुलिस के सामने यह स्वीकार किया है कि इस हत्या के प्रमुख 3 कारण थे, जिन में पहला संपत्ति, दूसरा उस के खुद के अवैध संबंध और तीसरा मुख्य कारण उस की पत्नी कृतिका की स्वास्थ्य समस्याएं, जिसे उस के फेमिली वालों द्वारा छिपाया गया था. उस ने पुलिस के सामने यह स्वीकार किया कि हत्या का उस ने प्रीप्लान किया था.

उस ने बताया कि संपत्ति विवाद हत्या मुख्य कारण था. उस ने कहा कि अगर मैं इस अवस्था में अपनी पत्नी कृतिका को तलाक दे देता तो मुझे संपत्ति में हिस्सा बिलकुल भी नहीं मिलता, इसीलिए मैं ने उसे तलाक नहीं दिया, क्योंकि तलाक देने से समाज में मुझे अपनी इज्जत खो जाने का डर भी था. डा. महेंद्र ने बताया कि कृतिका की बीमारियों के कारण वह बहुत अधिक परेशान हो गया था. दिन भर अस्पताल में इतने सारे मरीजों को देखने के बाद शाम को घर पर उस की देखभाल करना भी उस के लिए एक मुसीबत बन गया था.

इस क्रूरतम हत्या ने अब देश भर के मैडिकल कम्युनिटी में एक नई हलचल मचा कर रख दी है. हमारे समाज में डौक्टर का पेशा हमेशा से सेवा, समर्पण भरोसे का प्रतीक माना जाता रहा है. मरीज अपनी जिंदगी डौक्टर के हाथों में सौंप देता है. लेकिन भरोसे का वही प्रतीक डौक्टर जब जहर का ही इंजेक्शन दे देता है तो फिर समाज अपने उस विश्वास को वापस भला कैसे पा सकता है? खूनी डा. महेंद्र रेड्डी का यह दुष्कृत्य हम सभी को यह सोचने में मजबूर करता है कि सिर्फ डौक्टर बन जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि व्यक्ति का इंसान होना भी जरूरी होता है. तकनीकी ज्ञान यदि नैतिकता से अलग हो जाए तो वह सब से अधिक खतरनाक हथियार बन जाता है.

डा. कृतिका रेड्ïडी की खूनी कहानी हम सब को यह भी सीख देती है कि किसी भी रिश्ते में चाहे वह पतिपत्नी का हो, रिश्तेदार का हो या फिर डौक्टर मरीज का हो, केवल भरोसे की बुनियाद ही सब से अधिक सहज व मजबूत होती है. अगर जब भरोसे की दीवार हिल जाए, ढह जाए तो पूरा रिश्ता और भरोसा टूट जाता है. Karnataka Crime

 

 

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