रुचिता जिस दिव्य को बेटे की तरह मानती थी, उसी के मन में मां जैसी रुचिता के प्रति आसक्ति पैदा हुई तो उसे हासिल करने के लिए उस ने उस के साथ जबरदस्ती करनी चाही. रुचिता ने विरोध किया तो वह जिस्म के लिए ऐसा जुर्म कर बैठा जिस के लिए उसे न जाने कब तक जेल में रहना होगा.




