Social Crime Story: सरस्वती को पता चला कि राजपाल का उस की भौजाई से याराना चल रहा है तो उस ने गांव के ही महेश से संबंध बना लिए. इस के बाद ऐसा क्या हुआ कि उसे पति का खून करना पड़ा. शादी के बाद उस की जिंदगी काफी खुशहाल थी. पति और सासससुर का उसे भरपूर प्यार मिलता था. नत्थू सिंह और जाविकी के 2 बेटे थे. बड़ा शिशुपाल और छोटा राजपाल. शादी के कुछ सालों बाद शिशुपाल और उस की पत्नी गुड्डो अपने बच्चों के साथ बगल वाले मकान में अलग रहने लगे थे. छोटे बेटे राजपाल की शादी के बाद जाविकी ने साफ कह दिया था कि बहूबेटा उन के साथ ही रहेंगे.
उत्तर प्रदेश के एटा जिले के गांव फरीदपुर के रहने वाले नत्थू सिंह के छोटे बेटे राजपाल का विवाह बदायूं जिले के गांव कलुआं ढेर निवासी प्रेमपाल की छोटी बेटी सरस्वती के साथ हुआ था. ससुराल में सरस्वती को पति का नहीं, सासससुर का भी खूब प्यार मिला. कालांतर में सरस्वती 3 बेटों, प्रदीप, पवन और मनीष की मां बनी. बेटों के जन्म के बाद ससुराल में सरस्वती का सम्मान और बढ़ गया. राजपाल एटा में नगरिया मोड़ पर स्थित दूध की डेयरी में काम करता था. उसे वहां से जो वेतन मिलता था, उस से परिवार का गुजारा आसानी से हो जाता था. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था कि इसी बीच एक दिन सरस्वती की भाभी रामस्नेही उस के यहां आई.
रामस्नेही उस के यहां रही तो 2-3 दिन ही, पर उतने ही दिनों में उस ने सरस्वती के गृहस्थ जीवन में आग लगा दी थी. उस की अपने ननदोई राजपाल से नजदीकियां बढ़ गई थीं, जिस की वजह से राजपाल का पत्नी सरस्वती से मन उचट गया था. उस की दिलचस्पी रामस्नेही में बढ़ गई थी. जल्दी ही सरस्वती को पति का प्यार दिखावा लगने लगा था. इस बारे में जब उस ने पति से पूछा तो वह पत्नी को समझाने के बजाय उस पर खीझ जाता था. पति का यह व्यवहार सरस्वती को जरा भी अच्छा नहीं लगता था. वह मन मसोस कर रह जाती थी.
गांव में राजपाल का एक दोस्त था महेश. उस का उस के यहां काफी आनाजाना था. महेश शादीशुदा था. उसे राजपाल और उस की पत्नी के बीच बढ़ रही दूरियों की जानकारी थी. इसी बात का वह फायदा उठाना चाहता था.
एक दिन महेश राजपाल की गैर मौजूदगी में उस के घर आया. सरस्वती ने उसे देख कर कहा, ‘‘वह तो ड्यूटी पर गए हैं.’’
‘‘जानता हूं भाभी, वह नहीं हैं तो क्या मैं आप से बातें नहीं कर सकता?’’
‘‘हां…हां, क्यों नहीं, आइए.’’ कहते हुए सरस्वती ने उसे घर में आने का इशारा किया.
महेश घर के अंदर आ कर चारपाई पर बैठ गया. उस ने सरस्वती का हालचाल पूछा तो उस ने कहा कि वह बिलकुल ठीक है. महेश ने मौके का फायदा उठाते हुए सरस्वती का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘भाभी, मैं जानता हूं आप कह जरूर रही हैं कि सब ठीक है, लेकिन कुछ भी ठीक नहीं हैं. आप अपने दिल पर हाथ रख कर कहिए कि राजपाल आप का दिल नहीं दुखा रहा है. सब कुछ सहते हुए भी आप के होंठों पर मुसकान है. भाभी, आप अपने मुंह से भले ही न कहें, लेकिन मैं आप का दुख समझता हूं.’’
महेश अपनी मीठीमीठी बातों से सरस्वती को पटाने की कोशिश करने लगा. सरस्वती काफी अवसाद में थी. ऐसी हालत में महेश उसे अपना सा दिखाई देने लगा. तभी महेश चारपाई से उठ कर चलते हुए बोला, ‘‘मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है भाभी कि राजपाल इतनी खूबसूरत बीवी की उपेक्षा क्यों कर रहा है?’’
इतना कह कर वह घर से निकल गया. महेश के जाने के बाद सरस्वती उस की बातों पर विचार करने लगी. उसे महेश की बातें बिलकुल ठीक लग रही थीं. उस का ध्यान महेश पर जम गया. अब उस का मन महेश के लिए बेचैन हो उठा. लेकिन इधर वह दिखाई नहीं दे रहा था. एक दिन दोपहर के समय महेश उस के यहां अचानक आ गया. उसे देखते ही वह खुश हो गई. मौका देख कर उस दिन महेश ने कह दिया कि वह उसे प्यार करता है.
सरस्वती कमजोर औरत थी, जरा सा सहारा मिलते ही वह महेश की बांहों में आ गिरी. वह यह भी भूल गई कि वह 3 बच्चों की मां है. उसे पता नहीं था कि पतन का रास्ता बड़ा ही फिसलन भरा होता है. एक बार जो इस पर कदम रख देता है, वह संभल नहीं पाता. सरस्वती के साथ भी यही हुआ. महेश के साथ नजदीकी बनने के बाद वह खुद को उस से अलग नहीं कर पाई. महेश ने जो चाहा था, वह उसे मिल चुका था, इसलिए उस का सरस्वती के यहां वक्तबेवक्त आनाजाना शुरू हो गया था. दोनों ने मिलनेजुलने में सावधानी तो खूब बरती, लेकिन मोहल्ले वालों की नजरों से नहीं बच सके. दोनों के बारे में लोग तरहतरह की बातें करने लगे.
बात राजपाल के कानों तक पहुंची तो उस ने पत्नी से पूछताछ की. पति की तरफ से सरस्वती का मन पहले से ही खट्टा था, इसलिए अपने बारे में कुछ कहने के बजाय उस ने पति को अपनी भाभी रामस्नेही के संबंधों को ले कर खरीखोटी सुना दी. मजबूरन राजपाल को अपना मुंह बंद करना पड़ा. राजपाल के बड़े भाई शिशुपाल का घर बिलकुल बगल में था. शिशुपाल की पत्नी गुड्डो ने जब उसे महेश और सरस्वती के संबंधों के बारे में बताया तो उस ने एक दिन राजपाल को अपने घर बुला कर कहा कि यह सब ठीक नहीं है. महेश का इस तरह सरस्वती से मेलजोल रखने का मतलब क्या है?
भाई की बात सुन कर राजपाल को लगा कि अब उस की मोहल्ले मे खासी बदनामी हो रही है. इस के बाद उस ने गुस्से में सरस्वती की पिटाई कर दी. पिटने के बाद भी सरस्वती कहती रही कि उस के महेश के साथ गलत संबंध नहीं है. लोग वैसे ही उसे बदनाम कर रहे हैं. लेकिन राजपाल को उस की बातों पर यकीन नहीं हुआ. वह अब पत्नी पर निगाह रखने लगा. महेश से संबंध बनने के बाद सरस्वती अपने सासससुर से अलग पति के साथ दूसरे मकान में रहने लगी थी. प्रेमी से मिलने के लिए उस ने एक दूसरा रास्ता निकाल लिया. वह रात के खाने में पति को नींद की गोलियां मिला कर खिला देती थी, जिस से जल्द ही वह गहरी नींद सो जाता था. इस के बाद प्रेमी महेश के साथ वह मौजमस्ती करती थी.
लेकिन एक दिन सरस्वती ने राजपाल को नींद की गोलियां खाने में खिलाईं तो उस के कुछ देर बाद उसे किसी वजह से उलटियां हो गईं, जिस से उस का खाया हुआ ज्यादातर खाना बाहर निकल गया. उलटियां कर के वह बिस्तर पर लेट गया. सरस्वती ने सोचा कि वह सो गया होगा, इसलिए रोज की तरह उस ने महेश को फोन कर दिया. बिना किसी डर के दोनों अपनी हसरतें पूरी करने लगे. उसी दौरान अचानक राजपाल की आंखें खुल गईं. उस के जागते ही महेश वहां से भाग गया. लेकिन राजपाल को पत्नी की हकीकत पता चल गई. उस दिन उस ने उस की खूब पिटाई की.
राजपाल को अब अपनी गृहस्थी बिखरती नजर आ रही थी. उस ने इस बारे में अपने भाई शिशुपाल से बात की. दोनों ने सलाह कर के इस मामले में पंचायत बुलाने का फैसला किया. पंचायत बुलाई गई. पंचायत में महेश के पिता इंदुपाल को भी बुलाया गया. पंचों ने इंदुपाल से साफ कह दिया कि वह महेश को समझा ले, वरना उस के परिवार का हुक्कापानी बंद कर दिया जाएगा.
घर वालों के दबाव में महेश ने सरस्वती से दूरी तो बना ली, लेकिन उस का दिल उस के लिए बेचैन रहता था. उधर सरस्वती की हालत भी बिन पानी मछली जैसी हो रही थी. इस बात ने सरस्वती के मन में पति के प्रति नफरत पैदा कर दी. पतिपत्नी के बीच दूरियां बढ़ती जा रही थीं. उसी बीच एक दिन राजपाल के पास रामस्नेही का फोन आया. उस ने कहा कि उस के पति नौबत सिंह की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई है.
राजपाल ने नौबत सिंह की बीमारी की बात सरस्वती को बताई और उसे ले कर कलुआं पहुंच गया. उस ने नौबत सिंह को अस्पताल में भरती करा दिया. लेकिन वह बच नहीं पाया. उस की मौत हो गई. नौबत सिंह की मौत के बाद रामस्नेही एकदम अकेली हो गई. नौबत सिंह रेलवे में नौकरी करता था. अब रामस्नेही राजपाल के सहयोग से मृतक आश्रित के तहत नौकरी पाने की कोशिश करने लगी.
सरस्वती तो कुछ दिनों बाद अपने घर आ गई, पर सलहज की नौकरी के सिलसिले में राजपाल का उस के यहां आनाजाना लगा रहा. सरस्वती मन ही मन बेचैन थी. वह महेश से मिलना चाहती थी, पर उसे एक बुरी खबर मिली कि महेश ट्रैक्टर के नीचे आ गया है, जिस से उस का पैर कट गया है. इस का सरस्वती को बड़ा दुख हुआ. इधर साले नौबत सिंह की मौत के बाद राजपाल सलहज की आर्थिक मदद भी करने लगा था. जब इस बात की जानकारी सरस्वती को हुई तो उस ने ऐसा करने से मना किया.
राजपाल ने उसे यह समझाने की कोशिश की कि रामस्नेही को जब नौकरी मिल जाएगी तो उस के सामने फिर कोई समस्या नहीं रहेगी. शक का एक कीड़ा सरस्वती के दिमाग में और बैठ गया. इसी बीच एक दिन रामस्नेही और उस के बच्चों को राजपाल अपने घर लिवा लाया. वह उस के यहां लगभग 15 दिनों तक रही. उस दौरान राजपाल रामस्नेही से खूब हंसीमजाक करता था. इस बात से सरस्वती को लगा कि उस का पति उस के हाथ से निकल गया है. रामस्नेही तो अपने घर चली गई, पर सरस्वती और राजपाल के रिश्तों में जो कड़वाहट पैदा हुई, वह खत्म नहीं हो सकी. आए दिन उन के बीच झगड़ा होने लगा. सरस्वती का गुस्सा बढ़ता जा रहा था. उसे अपना और अपने बच्चों का भविष्य खतरे में दिखाई देने लगा था.
उस के मन में डर पैदा हो रहा था कि यदि पति ने उसे छोड़ दिया तो वह बच्चों को ले कर कहां जाएगी. राजपाल की अपनी सलहज रामस्नेही से नजदीकी लगातार बढ़ती जा रही थी. अब वह कईकई दिनों तक घर नहीं आता था. वह रामस्नेही के पास चला जाता. सरस्वती जब कभी पूछती तो कह देता कि डेयरी पर ज्यादा काम होने की वजह से वह वहीं रुक गया था. सरस्वती जानती थी कि वह झूठ बोलता है. गुस्से में एक दिन सरस्वती ने अपनी भाभी रामस्नेही को खूब खरीखोटी सुनाई, तब रामस्नेही ने उसे अपने दिल की बात बताते हुए कहा कि वह राजपाल से दूर नहीं रह सकती और वे दोनों साथ रह सकती हैं. सरस्वती आगबबूला होते हुए बोली, ‘‘भाभी, तुम जो कर रही हो, ठीक नहीं है. देखना एक दिन तुम्हें इस का अंजाम भुगतना पड़ेगा.’’
इधर रामस्नेही के भाई को जब बहन की हरकतों की जानकारी हुई तो उस ने भी रामस्नेही को समझाया और कहा कि वह जो कर रही है, उस से समाज में उस की अच्छीखासी बदनामी हो रही है. यह सब ठीक नहीं है. रामस्नेही ने भाई से भी कह दिया कि मरते वक्त उस के पति ने उस का और बच्चों का भार राजपाल पर डाल दिया था. इसलिए अब वह उन के साथ ही रहेगी. बहन के इस जवाब से भाई नाराज हो गया, लेकिन रामस्नेही ने इस की कोई परवाह नहीं की.
अब रामस्नेही और राजपाल ने साथसाथ रहने का फैसला कर लिया. उन्हें समाज की कोई परवाह नहीं थी. रामस्नेही को मर्द की जरूरत थी, वह जरूरत उस के ननदोई राजपाल से पूरी हो रही थी. लोग उस के बारे में क्या कह रहे हैं, इस की उसे कोई परवाह नहीं थी. सरस्वती को इस बात का डर था कि कहीं किसी दिन राजपाल रामस्नेही को ले कर घर न आ जाए. यदि उस ने ऐसा किया तो उसे बाहर का रास्ता दिखा देगा. एक दिन वह अपनी जेठानी गुड्डो के पास जा कर अपनी व्यथा बता कर कहने लगी कि वह राजपाल को समझाए. वह भाभी को अपनी सौत के रूप में स्वीकार नहीं करेगी.
देवरानी की समस्या बड़ी जटिल थी. इसलिए उस ने अपने हिसाब से राजपाल को समझाया, लेकिन राजपाल पर तो इश्क का भूत सवार था. उस ने भाभी की सलाह को एक कान से सुना, दूसरे से निकाल दिया. राजपाल पिछले 15 दिनों से घर नहीं आया था. अचानक 16 अगस्त, 2015 की शाम को आ गया. सरस्वती पहले से ही गुस्से से भरी हुई थी. वह समझ गई कि सौतन के घर से ही आया होगा. वह तुनक कर बोली, ‘‘तुम आ गए?’’
‘‘हां, बहुत काम होता है डेयरी में. आज जा कर फुरसत मिली है.’’ राजपाल ने जवाब दिया.
‘‘मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि आजकल तुम कौन सा काम कर रहे हो.’’
‘‘तुम्हें तो जलीकटी सुनाने की आदत हो गई है. अच्छा अब जोरों की भूख लगी है, खाना ले आओ.’’ कह कर राजपाल चारपाई पर बैठ गया. सरस्वती ने एक नजर बच्चों पर डाली. वे डरेसहमे एक तरफ बैठे थे. राजपाल ने एक बार भी उन्हें नहीं देखा. उस का दिल जल गया, उस ने खाने की थाली राजपाल की ओर बढ़ाई और उसी क्षण तय कर लिया कि अब वह और नहीं सहेगी.
राजपाल खापी कर निश्चिंत हो कर चारपाई पर लेट गया. उस की यह निश्चिंतता सरस्वती को अखर गई. बच्चों को खाना खिलाने के बाद उस ने रसोई की सफाई की. इस के बाद वह बच्चों को ले कर ऊपर छत पर चली गई. देर रात को वह उठी और धीरे से नीचे आ गई. राजपाल नीचे चारपाई पर सो रहा था. वह अलमारी के पास गई और धड़कते दिल से दरवाजा खोल कर तमंचा व कारतूस निकाल लाई. तमंचे में कारतूस भरा और राजपाल की चारपाई के पास पहुंच गई. इस से पहले कि उस का इरादा बदल जाता, उस ने तमंचा राजपाल की कनपटी से सटा कर फायर कर दिया. यह 16/17 अगस्त की रात की बात थी.
राजपाल को चीखने का भी मौका नहीं मिला. कुछ ही देर में उस की मौत हो गई. सरस्वती ने कुछ देर बाद मुख्य दरवाजा खोला. बाहर अभी भी सन्नाटा पसरा था. वह तेजी से खेत की ओर बढ़ी, अपने खेत में पहुंच कर उस ने गड्ढा खोदा और उसी में तमंचा दबा दिया. वापस लौट कर उस ने मृत पति पर घृणा भरी नजर डाली और ऊपर जा कर लेट गई. वह सोचने लगी कि अब आगे क्या करना है? सुबह 6 बजे के करीब उठ कर वह अपनी जेठानी के यहां गई और उस से कहा कि राजपाल खून की उलटी कर रहा है. जेठजेठानी घबरा कर उस के यहां आए तो देखा कि राजपाल चारपाई पर लहूलुहान पड़ा था. शिशुपाल ने घूर कर सरस्वती से पूछा, ‘‘किस ने मारी इसे गोली?’’
‘‘मैं क्या जानूं, मैं तो ऊपर सो रही थी.’’ सरस्वती बोली.
शिशुपाल ने उस समय ज्यादा कुछ कहना उचित नहीं समझा. उस ने पड़ोसियों को इकट्ठा किया और पुलिस को फोन कर दिया. थाना मारघा के थानाप्रभारी घनश्याम सिंह सूचना मिलते ही मयफोर्स के वहां आ गए. उन्होंने राजपाल के शव को देखा, गोली उस की कनपटी पर लगी थी. थानाप्रभारी ने लोगों से पूछताछ की तो लोगों ने बताया कि राजपाल की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. तभी उन की निगाह सरस्वती की ओर गई, जो चारपाई की पाटी पर सिर रख कर रो रही थी. उन्होंने हैरानी से उसे देखा, फिर पूछा, ‘‘रात में तुम कहां थीं? क्या तुम्हें फायरिंग की भी आवाज नहीं सुनाई दी?’’
‘‘साहब, मैं तो सो रही थी. मैं ने कोई आवाज नहीं सुनी. सुबह उठी तो खून देख कर डर गई और अपनी जेठानी को जा कर बताया.’’ उस ने रोते हुए कहा.
सरस्वती की बौडी लैंग्वेज देख कर थानाप्रभारी को उस पर शक हो गया. खैर, उन्होंने घटनास्थल की काररवाई निपटाने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और हत्या कर मामला दर्ज कर के केस की जांच शुरू कर दी. जांच में उन्हें पता चला कि राजपाल और उस की सलहज रामस्नेही के बीच नाजायज संबंध थे. उन्हें लगा, कहीं यह हत्या इन्हीं संबंधों की वजह से तो नहीं हुई. उन्होंने रामस्नेही से पूछताछ की. उस ने कहा कि यह सब सरस्वती ने किया होगा. इस के बाद थानाप्रभारी ने सरस्वती को थाने बुला कर पूछताछ की. थोड़ी सख्ती के बाद सरस्वती ने सचाई उगल दी. उस ने हत्या का जुर्म स्वीकारते हुए सारी कहानी पुलिस को बता दी.
सरस्वती द्वारा पति की हत्या का गुनाह कबूल कर लेने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली. अब सरस्वती जेल में है. उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा पुलिस ने बरामद कर लिया है. Social Crime Story
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






