True Crime Story:अपनी प्रेमिका लावण्या को पाने के लिए हरदीप ने दोस्त के साथ मिल कर तेजाब कांड को अंजाम दिया. इस कांड के बाद उसे प्रेमिका तो नहीं मिली, लेकिन अदालत से ऐसी सजा जरूर मिल गई कि ताउम्र वह प्रेमिका से नहीं मिल सकेगा.

राकेश रेखी पंजाब पुलिस के रिटायर्ड एसपी देशराज के बेटे थे. मोहाली की फेज-1 मार्केट में रुद्राक्ष ग्रुप इमीग्रेशन नाम से उन की एक कंपनी थी. उन के दफ्तर में कई युवकयुवतियां काम करते थे. धार्मिक विचारों के राकेश जब भी माता चिंतपूर्णी देवी मंदिर जाते, अपने औफिस के कुछ कर्मचारियों को भी साथ ले जाते थे. पहली सितंबर, 2011 को भी एक कार्यक्रम बना कर अपनी फोर्ड आईकान कार नंबर सीएच03जे 2042 से माता चिंतपूर्णी देवी मंदिर के लिए निकले. इस बार भी वह अपने साथ औफिस से 4 जनों को ले गए थे. कार वह खुद चला रहे थे.

स्टाफ की 25 वर्षीया स्वातिका उन के बगल वाली सीट पर बैठी थी, जबकि 24 वर्षीया शिवालिका कार की पिछली सीट पर थी. स्टाफ के 2 लोग शेर खान और नवनीत इन के पीछे दूसरी गाड़ी में आ रहे थे. राकेश को अपनी गाड़ी में पैट्रोल भरवाना था, इसलिए वह राष्ट्रीय राजमार्ग-21 पर मोहाली और खरड़ के बीच स्थित एक पैट्रोल पंप पर चले गए. उस समय शाम के करीब 5 बजे थे, वह अकसर उसी पैट्रोल पंप पर कार में पैट्रोल भरवाने जाते थे. पैट्रोल टैंक फुल करवाने के बाद पेमेंट करने के लिए उन्होंने खिड़की का शीशा नीचे किया कि तभी उन के ऊपर जैसे कहर बरपा गया.

विपरीत दिशा से 2 बाइक सवार उन की कार के पास पहुंचे. आगे वाले ने हैलमेट लगा रखा था, जबकि दूसरा बिना हैलमेट के था. उस के हाथ में 5 लीटर की कैन थी, जिस का ऊपरी हिस्सा कटा हुआ था. जो शख्स कैन पकड़े था, वह राकेश के एकदम पास आ गया. राकेश को यह सब अजीब सा लगा. वह उस से कुछ बोलने को हुए, तभी उस युवक ने कैन में भरा तरल पदार्थ कार के अंदर बैठी युवतियों पर फेंक दिया. तरल पदार्थ फेंक कर वह युवक उसी बाइक से फरार हो गया. इस के बाद तो कार के भीतर चीखपुकार मच गई.

राकेश भी कराह उठे. कार का दरवाजा खोल कर वह बाहर आ गिरे थे. वह दर्द से तड़प रहे थे. कार के अंदर बैठी दोनों युवतियां भी चीखतीचिल्लाती हुई कार से बाहर निकल आई थीं. जरा सी देर में बात साफ हो गई कि बाइक सवारों द्वारा उन पर जो तरल पदार्थ डाला गया था, वह तेजाब था. उन का मुख्य निशाना वह लड़की थी, जो राकेश के बगल वाली सीट पर बैठी थी. वही तेजाब से सब से ज्यादा झुलसी थी. इस घटना के बाद पैट्रोल पंप पर भी अफरातफरी मच गई. कार में से बह कर तेजाब फर्श पर फैलने लगा था, जिस पर पैट्रोल पंप कर्मियों ने फोम डाल दी, ताकि अफरातफरी में वहां कोई फिसल कर न गिरे. पैट्रोल पंप कर्मियों ने इस घटना की सूचना पुलिस को दी और तीनों घायलों को पीजीआई अस्पताल ले गए.

सूचना मिलते ही थाना बलौंगी के थानाप्रभारी भूपेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. बाद में खरड़ के डीएसपी सुखदेव सिंह विर्क और मोहाली के एसएसपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर भी मौकाएवारदात पर पहुंच गए. पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद राकेश के कर्मचारी शेर खान और पैट्रोल पंप कर्मियों से घटना के बारे में पूछताछ की. घायलों से मिलने के लिए पुलिस अधिकारी पीजीआई अस्पताल भी गए और शेर खान की तरफ से अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कर ली. एसपी ने इस सनसनीखेज मामले को सुलझाने के लिए डीएसपी सुखदेव सिंह विर्क के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई.

पुलिस ने पैट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच शुरू की. इस में बाइक और उस पर सवार 2 लोग दिखाई तो दे रहे थे, मगर न तो बाइक का नंबर साफ पढ़ने में आ रहा था और न ही उस पर बैठे लड़के किसी की पहचान में आ रहे थे. घटना की सूचना पा कर राकेश की कंपनी के कई कर्मचारी अस्पताल और थाने पहुंचे. पुलिस ने उन्हें सीसीटीवी फुटेज दिखाई तो उन्होंने बताया कि तेजाब फेंकने वाला युवक उन के औफिस में काम करने वाली स्वातिका का बौयफ्रैंड हो सकता है. इस वारदात में स्वातिका भी झुलस चुकी थी, इसलिए पुलिस ने भी यही अनुमान लगाया कि शायद उस लड़के ने प्यार में नाकाम होने पर स्वातिका को निशाना बनाया होगा.

पुलिस ने जांच की तो पता चला कि स्वातिका का वह कथित बौयफ्रैंड पहले गुड़गांव में काम करता था, बाद में वह डेरा बस्ती की किसी फैक्ट्री में नौकरी करने लगा था. लेकिन इन दिनों उस के चंडीगढ़ में काम करने की जानकारी मिली. बिना नामपते के उस के पास पहुंचना आसान नहीं था. पुलिस ने स्वातिका की सहेलियों से इस बारे में पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि स्वातिका की उस लड़के से बोलचाल थी, वह उसे प्रपोज भी करने लगा था लेकिन स्वातिका उसे खास पसंद नहीं करती थी. फिर वह अकसर उसे परेशान करने लगा था. स्वातिका ने जब उस के प्रति अपना रुख सख्त किया तो वह उसे देख लेने की धमकियां भी देने लगा था.

पुलिस ने उन सभी सहेलियों से कहा कि वह उस के कथित बौयफ्रैंड का नामपता जुटाने में पुलिस का सहयोग करें. संदर्भवश बता दें कि 80 के दशक में सर्वथा पहली बार यह तेजाबकांड सुर्खियों में तब आया था, जब मध्यप्रदेश के जिला जबलपुर में एक सिरफिरे ने अपनी प्रेमिका के चेहरे पर तेजाब उड़ेला था. उसे अपनी प्रेमिका पर शक था कि उस के संबंध किसी और से हैं. हालांकि उस समय निजी न्यूज चैनल नहीं थे, इस के बावजूद भी इस घटना से पूरे देश में सनसनी फैल गई थी. इस के बाद तो देश भर में इस तरह की घटनाएं जैसे आम हो गईं. मजबूरन सरकार को तेजाब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाना पड़ा.

खैर, इस ताजा केस में तेजाब के हमले से 3 लोग घायल हो गए. स्वातिका 80 प्रतिशत, शिवालिका 10 प्रतिशत और राकेश रेखी 40 प्रतिशत झुलस चुके थे. तीनों पीजीआई के इमरजेंसी वार्ड में भरती थे. पुलिस अभी तक उन के बयान नहीं ले पाई थी. फिलहाल अनुमान यही लगाया जा रहा था कि यह एकतरफा प्यार का मामला है. साफ नजर आ रहा था कि स्वातिका के उन्मादी प्रेमी का निशाना वही थी, बाकी दोनों तो उस के साथ बैठे होने की वजह से लपेटे में आ गए थे. स्वातिका के कथित प्रेमी का पता लगाने को पुलिस ने अपने मुखबिर भी सक्रिय कर दिए थे. मुखबिरों से ही पता लग गया कि जिस शख्स ने तेजाब फेंका था, उस का नाम भावेश है और वह चंडीगढ़ के सेक्टर-49 का रहने वाला है.

एसएसपी के आदेश पर सीआईए इंसपेक्टर गुरचरन सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम भावेश की तलाश में उस के घर पहुंच गई. लेकिन वह घर पर नहीं मिला. अगले दिन एक गुप्त सूचना के आधार पर सीआईए टीम ने भावेश को चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया. रातभर उस से व्यापक पूछताछ की गई. इस पूछताछ में पता चला कि वह भारतीय जीवन बीमा निगम में एजेंट था. डेढ़ साल पहले स्वातिका भी एलआईसी की उसी शाखा में एजेंट थी. एक ही जगह काम करने की वजह से दोनों की आपस में मुलाकात होती रहती थी.

उसी दौरान भावेश ने स्वातिका से प्यार का इजहार कर दिया. स्वातिका ने साफ कह दिया कि वह प्यारव्यार के चक्कर में न पड़ कर, अपने संबंध केवल दोस्ती तक ही सीमित रखना चाहती है. लेकिन भावेश तो जैसे उस के पीछे हाथ धो कर पड़ गया. तब स्वातिका ने परेशान हो कर एलआईसी का काम ही करना बंद कर दिया. इस के बाद वह राकेश रेखी के यहां नौकरी करने लगी. भावेश को जब पता चला तो वह उस का वहां भी पीछा करने लगा. अपनी एकतरफा प्यार की कहानी तो भावेश ने तमाम शिद्दत से सुना दी. लेकिन पुलिस द्वारा अपने सभी तरीकों से पूछताछ कर लेने पर भी वह यही दोहराता रहा कि स्वातिका पर तेजाब फेंकने में उस का कोई हाथ नहीं है.

उस ने भावुक हो कर कहा था, ‘‘सर, स्वातिका को मैं अपनी जान से ज्यादा चाहता हूं. उसे नुकसान पहुंचाने की तो मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकता. मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि उस के साथ ऐसी दुश्मनी निभाने की हिमाकत किस ने की.’’

गहन पूछताछ कर के इंसपेक्टर गुरचरन सिंह को वह बेकुसूर लगा तो उन्होंने हिदायत दे कर उसे घर भेज दिया. पुलिस ने जिस एंगल से जांच करनी शुरू की थी, वहां से कोई सफलता नहीं मिल पाई. पुलिस ने स्वातिका के घर वालों से भी बात की, लेकिन वहां से भी कोई खास जानकारी नहीं मिली. उसी दौरान पुलिस को मुखबिर से एक खास जानकारी मिली. उस सूचना पर पुलिस ने काम किया तो 16 सितंबर, 2011 को 2 ऐसे आदमी पुलिस के हत्थे चढ़ गए, जिन्होंने पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में स्वीकार कर लिया कि उन्होंने ही इस तेजाब कांड को अंजाम दिया था.

उन्होंने बताया कि उन का निशाना कोई और न हो कर राकेश रेखी था. दोनों लड़कियां तो राकेश के साथ कार में बैठी होने की वजह से लपेटे में आ गई थी, जिस का उन्हें भारी अफसोस हुआ. उन दोनों से की गई पूछताछ से जो खुलासा हुआ वह इस तरह से था कि गांव देसूमाजरा के रहने वाले हरदीप सिंह उर्फ दीपा और जगवंत सिंह उर्फ बिट्टू आपस में गहरे दोस्त थे. बिट्टू अपना निजी कारोबार करता था और दीपा मोहाली के कस्बे कुराली में अपना नशामुक्ति केंद्र चलाता था. एक बार एक औरत अपने शराबी पति के साथ उस की शराब छुड़ाने की दरकार को ले कर दीपा के नशामुक्ति केंद्र आई. वह औरत इतनी खूबसूरत थी कि पहली ही नजर में हरदीप उर्फ दीपा का उस पर दिल आ गया. खूबसूरती के अनुरूप उस का नाम भी निहायत खूबसूरत था— लावण्या.

हरदीप अभी कुंवारा था और लावण्या शादीशुदा थी. उस से बात करने के बाद हरदीप अपने दिल पर काबू नहीं रख सका. लावण्या तो जैसे सीधे उस के दिल में उतर कर उस के तनमन को सराबोर कर गई थी.  उस के पति को हरदीप ने अपने नशामुक्ति केंद्र में भरती कर लिया. इस के बाद वह लावण्या से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश करने लगा. उसे विश्वास में लेने के लिए उस ने उसे यह गारंटी दे दी थी कि आने वाले चंद महीनों में वह उस के पति में इतना सुधार कर देगा कि वह कभी शराब को हाथ नहीं लगाएगा. हरदीप की बात सुन कर लावण्या बहुत खुश हुई. बाद में वह 4-5 दिन पर पति के हालचाल जानने के लिए उस के नशामुक्ति केंद्र आने लगी. बीच में भी वह फोन कर के हरदीप से पति की जानकारी लेती रहती थी.

इस तरह लावण्या और हरदीप एकदूसरे के करीब आते गए. नशेड़ी पति के बजाय उस का झुकाव हरदीप की तरफ बढ़ता गया. लावण्या राकेश लेखी की कंपनी में काम करती थी. लावण्या का पति पुराना नशेड़ी था. इसलिए उस का नशा इतनी जल्दी नहीं छूट सकता था. इसलिए हरदीप को भरोसा था कि इस बीच वह लावण्या को अपने प्रेमजाल में फांस कर उस के पति से तलाक दिलवा कर उसे अपनी बना लेगा. इस तरह दोनों का मिलनाजुलना जारी रहा. लावण्या ने एक दफा हरदीप को मुलाकात का समय दे दिया. हरदीप निश्चित जगह पर उस का इंतजार करने लगा. काफी देर इंतजार के बाद भी वह उस से मिलने नहीं आई. हरदीप ने जब उसे फोन किया तो उस का फोन भी स्विच्ड औफ मिला. इस से हरदीप को गुस्सा आ गया.

अगले दिन लावण्या ने ही हरदीप को फोन कर के मुलाकात न हो पाने की मजबूरी बताई. उस ने कहा कि उस का बौस राकेश रेखी मां चिंतपूर्णी देवी मंदिर जाता है तो कंपनी के कुछ कर्मियों को अपने साथ ले जाता है. इस के लिए कोई इनकार नहीं करता. इस दफा उस ने एकदम अंतिम समय पर उसे साथ चलने को कहा. वह उसे मना नहीं कर पाई और अपना मोबाइल स्विच्ड औफ कर उस के साथ चली गई. अभी तक तो हरदीप को अपनी प्रेमिका लावण्या पर नाराजगी थी. पर जब उसे पता चला कि इस में गलती लावण्या की नहीं, बल्कि उस के बौस राकेश रेखी की है तो उस का खून खौल उठा. राकेश जब भी कहीं बाहर जाते तो लावण्या को अपने साथ जरूर ले जाते थे.

इस से हरदीप राकेश को अपना जानी दुश्मन समझने लगा. मन ही मन उन्हें सबक सिखाने की ठान ली. इस बारे में अपने खास दोस्त जगवंत सिंह बिट्टू से बात की तो वह उस का साथ देने को तैयार हो गया. दोनों ने राकेश को सबक सिखाने के लिए एक फूलपू्रफ योजना बना ली. हरदीप ने मोहाली की एक दुकान से तेजाब खरीदा. फिर उसे ऊपर से कटी हुई कैन में डाल लिया, ताकि वह आसानी से डाला जा सके. फिर योजना को अंजाम देने का मौका ढूंढने लगा. उसे पता चला कि पहली सितंबर को राकेश ने चिंतपूर्णी देवी जाने का प्रोग्राम बनाया है और इस बार वह लावण्या के बजाय अन्य लोगों को ले जा रहे हैं.

हरदीप औफिस से राकेश के निकलने का इंतजार करने लगा. वह मौका उसे पैट्रोल पंप पर उस समय मिल गया, जब राकेश ने पैट्रोल के पैसे देने के लिए खिड़की खोली. लेकिन जैसे ही उस ने राकेश को निशाना बना कर तेजाब फेंका, राकेश ने अपना चेहरा पीछे हटा लिया, जिस से निशाना अगली सीट पर बैठी स्वातिका बन गई. राकेश के बजाय दोनों युवतियों के जख्मी होने का हरदीप को बहुत अफसोस हुआ. दोनों अभियुक्तों से पूछताछ पूरी कर पुलिस ने उन्हें अदालत पर पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

उधर अस्पताल में भरती देहरादून की रहने वाली स्वातिका की हालत बिगड़ती जा रही थी. इन्फैक्शन बढ़ जाने के कारण 19 सितंबर को उस की अस्पताल में ही मौत हो गई. उस की मौत हो जाने के बाद पुलिस ने इस केस में धारा 302 भी बढ़ा दी. तेजाब की वजह से राकेश रेखी की एक आंख की रोशनी चली गई और उन के जिस्म पर इतनी सर्जरी हुई कि इस की गिनती उन्हें भी नहीं मालूम. बिना सहारे के वह कहीं आजा भी नहीं सकते. 90 दिनों के भीतर पुलिस ने दोनों अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर इलाका मैजिस्ट्रेट के सामने पेश कर दिया, जहां से सैशन कमिट हो कर यह केस मोहाली के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश परमिंदरपाल सिंह की अदालत में चला.

विद्वान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को तमाम तवज्जो दे कर सुना और सभी साक्ष्यों को विधिपूर्वक जांचापरखा. अभियोजन पक्ष की ओर से 48 गवाहों ने अपने बयान अदालत में दर्ज करवाए. 27 मई, 2015 को इस केस का फैसला सुना दिए जाने की उम्मीद थी. दोनों अभियुक्तों को सुबह ही अदालत में बैठा दिया गया था. उस दिन इस चर्चित केस की सुनवाई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई. अदालत के भीतरबाहर दोनों पक्षों की हिफाजत के लिए बाऊंसरों की भरमार थी. पुलिस द्वारा भी अदालत में आनेजाने वाले लोगों पर कड़ी नजर रखी जा रही थी. किसी को भी बिना पर्याप्त चैकिंग व पूछताछ के भीतर नहीं जाने दिया जा रहा था. राकेश रेखी अभी तक भी पूरी तरह ठीक नहीं हुए थे. वह अपने वकीलों के साथ अदालत में हाजिर थे.

सक्षम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश परमिंदरपाल सिंह ने उस दिन दोनों अभियुक्तों को धारा 302 एवं 307 का दोषी करार देते हुए 29 मई को सजा सुनाए जाने की बात कही. तब तक के लिए दोषियों को वापस जेल भिजवाने के आदेश दिए. 3 पुलिसकर्मी दोनों अभियुक्तों को ले कर कोर्ट रूम से बाहर निकले. वहां मीडिया के कुछ लोग खड़े थे, जिन्हें देखते ही दोनों अभियुक्तों ने पुलिस वालों से अपने हाथ छुड़वा कर मीडियाकर्मियों पर ही हमला बोल दिया. इस हमले में फोटो जर्नलिस्ट अमित वालिया की इन्होंने काफी पिटाई कर दी. बाद में इस पत्रकार ने इस संबंध में न केवल पुलिस को शिकायत दी, बल्कि अदालत को भी घटना के बारे में लिख कर दिया.

बहरहाल, 29 मई, 2015 को विद्वान एवं सक्षम जज परमिंदरपाल सिंह ने हरदीप सिंह उर्फ दीपा व जगवंत सिंह उर्फ बिट्टू को उक्त केस में ताउम्र कैद की सजा के अलावा 5-5 लाख रुपयों का जुरमाना भी किया. इस राशि में 4.60 लाख रुपए मृतका के परिजनों व 4.60 लाख राकेश रेखी को अदा करने के साथ 80 हजार रुपए सरकारी खजाने में जमा कराने के आदेश दिए. 29 मई, 2015 को दोनों अभियुक्तों को सजा सुनाई जानी थी. उस दिन मोहाली अदालत का परिदृश्य बाकी दिनों से एकदम अलग था. चारों तरफ पुलिस ही पुलिस नजर आ रही थी. दोनों अभियुक्तों के परिजन व अनेक दोस्त भी वहां पहुंचे थे. राकेश की हालत दयनीय थी, इस के बावजूद भी 50 बाउंसरों के घेरे में वहां आए हुए थे. वह अदालत के फैसले से बहुत खुश हुए.

उन का कहना था कि जिस लड़ाई को वह पिछले 4 सालों से जारी रखे हुए थे, उस का परिणाम संतोषजनक निकला. जिन लोगों ने एक युवती की जान लेने के साथ उन्हें जिंदा लाश बना कर रख दिया, उसे देखते हुए ऐसी सख्त सजा उन्हें मिलनी ही चाहिए थी. True Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.

लावण्या नाम परिवर्तित है.

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