Gorakhpur Crime News: क्राइम रजिस्टर से जब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पता चला कि एक महीने में 15 से अधिक लूट की वारदातें हुई हैं तो उन्होंने लुटेरों को पकड़ने के लिए एक अभियान चलाया, जिस का नाम दिया गया ‘औपरेशन क्लीनस्वीप’.

2 जनवरी, 2016 की दोपहर डेढ़ बजे के करीब एसकेएस माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कलेक्शन एजेंट संजीव कुमार पांडेय सकरी बीरभान, नर्रे, सीकर, बेला, सोनइचा आदि गांवों से कलेक्शन कर के लौट रहे थे. जैसे ही वह अपनी कार से सोनइचा के प्राथमिक विद्यालय के पास पहुंचे थे, तभी एक पल्सर मोटरसाइकिल उन की कार को ओवरटेक कर के उस के आगे खड़ी हो गई. मोटरसाइकिल पर पीछे बैठा करीब 24 साल का युवक उतर कर उन के पास आ कर कमर में खोंसा तमंचा निकाल कर डांटते हुए बोला, ‘‘रुपयों वाला बैग मुझे दे दो, वरना गोली मार दूंगा.’’

संजीव पांडेय कुछ समझ पाते उस के साथ वाला दूसरा युवक भी मोटरसाइकिल खड़ी कर के उस के पास आ गया. आते ही उस ने संजीव के कंधे से बैग उतार लिया और मोटरसाइकिल पर सवार हो कर साथी के साथ चला गया. उस बैग में 2.20 लाख रुपए और उन का मोबाइल फोन था. लुटेरों के जाने के बाद संजीव ने शोर मचाया तो उधर से गुजर रहे कुछ लोग उन के पास आ गए.

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संजीव ने उन्हें अपने साथ हुई लूट के बारे में बताया तो उन्हीं में से किसी ने लूट की इस घटना की खबर फोन द्वारा पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. लूट की सूचना मिलते ही गोरखपुर जिले के गगहा थाने की पुलिस थोड़ी ही देर में घटनास्थल पर पहुंच गई. पुलिस कंट्रोल रूम से खबर एसएसपी अनंत देव को भी मिल चुकी थी, इसलिए वह भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

दिनदहाड़े हुई इस लूट की वारदात से अनंत देव काफी हैरान थे. उन्होंने थानाप्रभारी गिरिगेश तिवारी को लुटेरों को जल्द पकड़ने के निर्देश दिए. औफिस पहुंच कर उन्होंने क्राइम रजिस्टर पर नजर डाली तो चौंके, क्योंकि जनवरी, 2016 में कलेक्शन एजेंटों से इस तरह की 15 लूट की घटनाएं हुई थीं. किसीकिसी दिन तो 2-2 लूट की घटनाएं हुई थीं. उन्हें यह भी पता चला कि लुटेरे ढाबों पर खड़े ट्रक ड्राइवरों को भी अपना शिकार बनाते हैं.

लुटेरों के इस गैंग का पता लगा कर उन्हें गिरफ्तार करने के लिए अनंत देव ने थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की एक टीम बनाई, जिस में थानाप्रभारी गिरिगेश तिवारी, एसआई हरिकेश आर्या, गौर सिंह, प्रह्लाद पांडेय, कांस्टेबल पन्नालाल के अलावा क्राइमब्रांच के सबइंसपेक्टर राजेश मिश्र, अनिल उपाध्याय, कांस्टेबल सुभाष सिंह, शशिकांत राय, राशिद अख्तर, राकेश यादव आदि को शामिल किया गया. एसएसपी ने लुटेरों के खिलाफ चलाई गई इस काररवाई का नाम औपरेशन क्लीनस्वीप रखा.

सीओ (क्राइमब्रांच) अभय मिश्र के निर्देशन में पुलिस टीम अभियान में जुट गई. इस औपरेशन के तहत पुलिस टीम 9 जनवरी, 2016 को कराहकोलघाट पुल के पास चैकिंग कर रही थी, तभी पल्सर मोटरसाइकिल पर 2 युवक संदिग्ध दिखे. उन की तलाशी ली गईर् तो उन के पास से 2 तमंचे, कारतूस और संदिग्ध सामान बरामद हुआ. थाने ला कर जब उन से सख्ती से पूछताछ की गई तो उन उन्होंने जो बताया, उसे सुन कर पुलिस  दंग रह गई. पता चला कि उन का मात्र 3 लोगों का गैंग था. तीनों ही लूट को अंजाम दे रहे थे. वे गोरखपुर से ले कर कानपुर तक ट्रक चालकों को अपना निशाना बनाते थे.

गिरफ्तार लुटेरों ने अपने नाम कुशल मिश्र निवासी सोनइचा, विवेकानंद उर्फ गोलू उर्फ राजा निवासी गांव चंद्रबक, गाजीपुर बताए. कलेक्शन एजेंट संजीव पांडेय के साथ इन्होंने ही लूटपाट की थी. गोरखपुर, देवरिया से ले कर कानपुर तक इन्होंने अब तक करीब 150 वारदातों को अंजाम दिया था. विवेकानंद ने बताया कि ट्रक ड्राइवरों के तो काफी केस दर्ज ही नहीं हुए, क्योंकि सफर में होने के नाते उन्होंने केस दर्ज ही नहीं कराए थे.

कलेक्शन एजेंट इन के आसान शिकार होते थे, क्योंकि इन्हें मालूम था कि हर गुरुवार, शुक्रवार को एजेंट कर्ज बांटने और वसूली के लिए गांव जाते हैं. आने और जाने, दोनों समय उन के पास पैसा होता है. बड़ी रकम लूटने के बजाय ये छोटी रकम लूटते थे, जिस से पुलिस अधिक सक्रिय न हो. ट्रक ड्राइवरों को लूटने के लिए ये कानपुर तक जाते थे और जहां सुबह हो जाती थी, वहीं किसी होटल में कमरा ले कर रुक जाते थे. इस के बाद रात 12 बजे के आसपास निकलते थे और वारदात करते हुए गोरखपुर, गगहा आ जाते थे.

गगहा में इन्होंने एक मुरगी फार्म को अपना ठिकाना बना रखा था. वह फार्म गैंग के सरगना अनाम ने किराए पर ले रखा था. अनाम की तलाश में पुलिस ने कई जगह छापे मारे, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लग सका. पुलिस ने अभियुक्त कुशल मिश्र और विवेकानंद की निशानदेही पर लूट के रुपयों में से बचे 4370 रुपए बरामद कर लिए थे, बाकी पैसे वे खर्च कर चुके थे. अनंत देव ने जिले के अन्य थानाप्रभारियों को भी औपरेशन क्लीनस्वीप चलाने के आदेश दिए थे. इसी आदेश के तहत बेलीपार पुलिस को पता चला कि गोरखपुर जेल में बंद सुभाष यादव नाम का अपराधी जेल के अंदर से ही अपना गैंग चला रहा है.

उस के गैंग में 28 बदमाश हैं, जिन में 10 गोरखपुर जेल में बंद हैं. सुभाष यादव ने जेल में बंद अपने गुर्गों के खर्च और वकीलों की फीस का इंतजाम करने की जिम्मेदारी बाहर रह रहे अपने गैंग के बदमाशों को दे रखी थी. पुलिस को जब इस बात की जानकारी हुई तो पुलिस ने जेल में बंद सुभाष यादव पर नकेल कसनी शुरू की.

12 जनवरी, 2016 को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर बाघागाढ़ा जरलही मार्ग से 2 बदमाशों को गिरफ्तार किया, जिन के पास से 2 तमंचे, 2 जीवित कारतूस और 7 हजार रुपए बरामद किए गए. लुटेरों में से एक का नाम अंकित उर्फ अश्विनी यादव निवासी शहनदेवा, बेलाघाट और दूसरे का नाम सुनील यादव निवासी रामपुर गोसाई, बेलाघाट था. पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे दोनों अब तक लूट की 15 वारदातों को अंजाम दे चुके थे. अभी कुछ दिनों पहले ही पुलिस अभिरक्षा से भागे सूरज पांडे ने अंकित के साथ मिल कर लूट की एक घटना को अंजाम दिया था.

सूरज पांडेय को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, पर अंकित पुलिस के हाथ नहीं लगा था. गिरफ्तार अभियुक्तों ने बताया कि लूटी गई रकम का बड़ा हिस्सा जेल में बंद उन के साथी बदमाशों के खर्च के लिए निकाल दिया जाता था. बाकी जो बचता था, उसे वे आपस में बांट लेते थे. सुभाष गैंग के बदमाश गोरखपुर, आजमगढ़, अंबेडकरनगर और संतकबीरनगर जिले में लूटपाट व अन्य अपराध करते थे. खासकर बैंक से पैसा निकाल कर ले जाने वाले या व्यापारी इन के निशाने पर होते थे.

बेलाघाट थानाक्षेत्र के मीपुर निवासी सुभाष यादव एक समय में दियारा का आतंक कहे जाने वाले अमरजीत यादव का दाहिना हाथ था. 2 साल पहले अमरजीत के गिरफ्तार हो जाने के बाद बदमाशों को नए सिरे से संगठित कर उन का सरगना बन गया और अपना गैंग चलाने लगा था. बाद में पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया तो वह जेल से ही अपना गैंग चलाने लगा. लुटेरों के इस गैंग का परदाफाश करने वाली पुलिस टीम को एसएसपी अनंत देव ने नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है. Gorakhpur Crime News

लेखक – एस.आर. सुल्तानपुरी         

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

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