Illegal Relationship: प्रेम कुमार और रीता देवरभाभी थे. पति के परदेस चले जाने पर रीता ने देवर से नाजायज संबंध ही नहीं बनाए, कोर्ट में शादी भी कर ली. लेकिन जब इस की जानकारी घर वालों को हुई तो रीता तो रिश्ता तोड़ने को तैयार हो गई लेकिन प्रेमकुमार नहीं तैयार हुआ. अंत में उसे जान से हाथ धोना पड़ा.
3 मार्च, 2016 को जिला बस्ती के थाना रुधौली के थानाप्रभारी अखिलेश सिंह अपने औफिस में बैठे किसी फाइल को देख रहे थे, तभी उन के मोबाइल फोन की घंटी बजी. उन्होंने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘सर, मैं दिघार गांव से बोल रहा हूं. यहां भानपुर रोड पर एक युवक की लाश पड़ी है.’’
थानाप्रभारी ने फोन करने वाले से कहा, ‘‘आप लोग लाश को हाथ मत लगाना. उस से दूर ही रहना. हम थोड़ी देर में वहां पहुंच रहे हैं.’’
इस के बाद अखिलेश सिंह पुलिस टीम के साथ भानपुर रोड की ओर चल पड़े. वहां पहुंच कर उन्होंने देखा, गांव वालों ने लाश के आसपास भीड़ लगा रखी थी. उन्होंने भीड़ को हटा कर लाश का मुआयना करना शुरू किया. लाश किसी 24-25 साल के युवक की थी. उस के सिर के पिछले हिस्से से खून निकला था. लग रहा था, उस के सिर के पिछले हिस्से पर किसी भारी चीज से वार किया गया था. इस के अलावा उस की नाक से भी खून निकला था.
अखिलेश सिंह ने इस की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दे दी. इस के बाद उन्होंने घटनास्थल और लाश का बारीकी से मुआयना किया. लाश की तलाशी ली गई तो उस की जेब में एक आधार कार्ड, 2 मतदाता पहचान पत्र, भारतीय स्टेट बैंक का एक एटीएम कार्ड, कई फोन कंपनियों के 7 सिमकार्ड और 17 फोटोग्राफ के अलावा एक मोबाइल व ईयरफोन मिला. मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर मृतक युवक की पहचान बस्तीनेपाल मार्ग पर पड़ने वाले गांव सुरवार कलां के रहने वाले सियाराम चौधरी के बेटे के रूप में हुई. थानाप्रभारी ने इस की सूचना मृतक के घर भिजवा दी.
सूचना पाते ही उस के पिता सियाराम कुछ अन्य लोगों के साथ घटनास्थल पर आ पहुंचे. सियाराम ने लाश की शिनाख्त अपने बेटे प्रेमकुमार के रूप में की. उन्होंने बताया कि वह पिछले 2 दिनों से घर से गायब था. उसे सभी जगह खोज कर वह थक गए थे. चूंकि उस समय मामला गमगीन था, इसलिए थानाप्रभारी ने मृतक के घर वालों से ज्यादा पूछताछ नहीं की. घटनास्थल की जरूरी काररवाई निपटा कर उन्होंने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.
अगले दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि प्रेमकुमार के सिर के पिछले हिस्से पर किसी भारी चीज से वार किया गया था. जिस से उस के सिर में अंदरूनी चोट आई थी और भारी मात्रा में खून बहा था. उसी की वजह से उस की मौत हो गई थी. एसपी कृपाशंकर सिंह ने थानाप्रभारी अखिलेश सिंह को इस केस का विवेचक नियुक्त कर घटना का जल्द से जल्द खुलासा करने को कहा.
अखिलेश सिंह ने सब से पहले मृतक के पिता सियाराम से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि उन का बेटा बहुत ही सीधासादा था. उस की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. थानाप्रभारी को मुखबिर से पहले ही पता चल चुका था कि मृतक का अपनी भाभी से चक्कर चल रहा था. इस बारे में पुलिस ने सियाराम से पूछा तो उस ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया. इस के बाद पुलिस ने मृतक के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकवाई. काल डिटेल्स में पुलिस को एक नंबर संदिग्ध लगा. उस नंबर की जांच की गई तो वह मृतक प्रेमकुमार की भाभी रीता के भाई अजय का था. घटना वाले दिन तक अजय के फोन की लोकेशन बस्ती में ही थी, लेकिन उस के बाद उस का फोन बंद हो गया था.
अजय को पकड़ने के लिए पुलिस ने अपना जाल बिछाना शुरू किया. उस के ठिकानों पर उस की तलाश की गई, लेकिन वह कहीं नहीं मिला. शक के आधार पर पुलिस ने मृतक की भाभी रीता को हिरासत में ले लिया. उस से पूछताछ शुरू हुई. पुलिसिया पूछताछ में वह टूट गई और उस ने बता दिया कि प्रेमकुमार की हत्या उसी ने अपने भाई अजय चौधरी और पति से करवाई थी. इस के बाद एएसपी रोहित मिश्र व क्राइम ब्रांच के प्रभारी सर्वेश राय की अगुवाई वाली टीम ने जाल बिछा कर 12 मार्च, 2016 को अजय और प्रेमचंद को गिरफ्तार कर लिया. इन से पूछताछ में प्रेमकुमार की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—
उत्तर प्रदेश के जिला बस्ती के थाना रुधौली के गांव सुरवार कलां के रहने वाले सियाराम चौधरी ने 2 शादियां की थीं. पहली पत्नी से उन्हें एक बेटा प्रेमचंद था. पहली पत्नी की मौत के बाद उस ने दूसरी शादी की तो उस से बेटा प्रेमकुमार पैदा हुआ. सियाराम ने दोनों बच्चों के लालनपालन में जाहिर नहीं होने दिया कि वे दोनों सौतेले भाई हैं.
उन्होंने बड़े बेटे प्रेमचंद की शादी 10 साल पहले रुधौली थानाक्षेत्र के ही गांव नगहरा के रहने वाले रामकेवल चौधरी की बेटी रीता के साथ की थी. उस समय प्रेमकुमार किशोरावस्था में था. वह अपनी सुंदर भाभी के आगेपीछे लगा रहता था. कभीकभार वह उस से मजाक भी कर लेता था. देवर होने के नाते रीता उस की बातों का बुरा नहीं मानती थी. पति के साथ रहते हुए कब एक साल बीत गया, रीता को पता ही नहीं चला. इस दौरान रीता ने एक बेटे को जन्म दिया. बेटा होने के बाद परिवार में खुशियां तो बढ़ीं, साथ ही प्रेमचंद्र पर जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं.
प्रेमचंद अपने लिए रोजगार तलाशने लगा. बस्ती में कोई रोजगार नहीं मिला तो उस ने सोचा कि वह पत्नी को खुश रखने के लिए दिल्ली जा कर पैसे कमाएगा. जब यह बात उस ने पत्नी को बताई तो वह निराश हो गई. उस ने पति से कहा कि वह थोड़े में गुजारा कर लेगी, इसलिए वह दिल्ली जाने के बजाय यहीं कोई काम कर ले तो अच्छा रहेगा. कम से कम वह घर में तो रहेंगे. लेकिन प्रेमचंद्र ने उसे समझाते हुए कहा कि सुखी रहने के लिए प्यार के अलावा पास में पैसा भी होना जरूरी है. प्रेमचंद्र पत्नी को समझाबुझा कर आखिर दिल्ली कमाने चला गया. प्रेमचंद्र के जाने के बाद रीता की रातें करवट बदलबदल कर बीत रही थीं.
प्रेमचंद्र महीने, 2 महीने में दिल्ली से घर आता रहता था. रीता एक बेटे और एक बेटी की और मां बनी. 3 बच्चों की मां बनने के बाद भी रीता की खूबसूरती में कोई कमी नहीं आई थी. प्रेमकुमार अब तक जवान हो चुका था. वह ललचाई नजरों से भाभी रीता को देखने लगा था. रीता उस के मनोभावों को भांप तो रही थी, पर अपनी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त कर रही थी. इस से प्रेमकुमार की हिम्मत बढ़ती गई और वह उस से अश्लील मजाक करने लगा. धीरेधीरे रीता भी देवर की लय में बहने लगी.
पति सुख से लंबे समय से वंचित रीता आखिर अपनी भावनाओं को संभाल नहीं सकी और बातों के जरिए देवर को हरी झंडी दे दी. फिर क्या था, दोनों अपनी मर्यादाएं लांघ गए. उन्होंने रिश्तों की मर्यादा को तारतार कर वह सब कर डाला, जिसे हमारा समाज अनुमति नहीं देता. उन का संबंध नाजायज रिश्ते में बदल गया. दिल्ली में रह रहे प्रेमचंद्र को कानोंकान खबर नहीं थी कि उस की गैरमौजूदगी में पत्नी और सौतेला भाई क्या कर रहा है.
एक दिन रीता ने प्रेमकुमार के सामने शादी का प्रस्ताव रखा तो वह भाभी की इस बात पर चौंका. उस ने कहा कि यह रिश्ता यहीं तक रहने दो. इस पर रीता ने कहा, ‘‘अगर तुम शादी नहीं करोगे तो मैं अपने भाई से तुम्हारी शिकायत कर दूंगी कि तुम ने मेरे साथ जबरदस्ती की है.’’
रीता की इस धमकी से प्रेमकुमार डर गया और मजबूरी में एक दिन चुपके से गोंडा जा कर भाभी से कोर्ट में शादी कर ली. इस तरह के संबंध कोई कितना भी छिपाने की कोशिश क्यों न करे, जगजाहिर हो ही जाते हैं. आखिरकार एक दिन अजय चौधरी को बहन रीता के उस के देवर से संबंधों की भनक लग ही गई. अजय ने रीता को समझाया. आखिर भाई की बात रीता की समझ में आ गई. इस के बाद उस ने प्रेमकुमार से दूरी बना ली. उस ने देवर से कह दिया कि अब वह शादी कर के अपना घर बसा ले. रीता की इस बात से प्रेमकुमार को गुस्सा आ गया. उस ने कहा, ‘‘अब तुम मुझ से दूर नहीं रह सकती. तुम्हें मेरे साथ ही रहना होगा. अब तुम भाभी नहीं, मेरी पत्नी हो. मेरे पास शादी का प्रमाण पत्र है.
प्रेमकुमार की इन बातों से रीता असमंजस में फंस गई. अब उसे अपने किए पर पछतावा होने लगा. बात दिल्ली में रह रहे रीता के पति प्रेमचंद्र तक पहुंची तो वह भी घर जा पहुंचा. पत्नी और भाई प्रेमकुमार पर उसे गुस्सा आ रहा था, क्योंकि दोनों ने ही उस के साथ विश्वासघात किया था. लेकिन बदनामी की वजह से वह मामले को घर में बैठ कर ही सुलझाना चाहता था. बात करने के लिए उस ने अपने साले अजय को बुलवा लिया. प्रेमचंद्र और अजय ने रीता और प्रेमकुमार को समझाया. रीता तो कुछ नहीं बोली, लेकिन प्रेमकुमार रीता को छोड़ने को तैयार नहीं था. बिना किसी नतीजे के बातचीत खत्म हो गई.
रीता को लगा कि प्रेमकुमार आसानी से उस का पीछा छोड़ने वाला नहीं है. अगर उस ने होहल्ला किया तो उस की बड़ी बदनामी होगी. इसलिए उस के मन में एक खतरनाक योजना ने जन्म लेना शुरू कर दिया. एक दिन उस ने अपने भाई अजय चौधरी को अपनी योजना के बारे में बताया. एक बार तो अजय ने उस की योजना पर काम करने से मना कर दिया. लेकिन रीता ने अपने रिश्तों का वास्ता दे कर भाई को उस के लिए तैयार कर लिया. इस के बाद उस ने पति को भी प्रेमकुमार को रास्ते से हटाने के लिए तैयार कर लिया.
5 मार्च, 2016 को रीता की ननद का गौना था. इस में उस का भाई कुछ दिन पहले ही आ गया. 2 दिन पहले अजय प्रेमकुमार को एक ढाबे पर ले गया, जहां दोनों ने खाना खाया और जम कर शराब पी. प्रेमकुमार नशे में धुत हो गया तो अजय उसे धंसा गांव जाने वाले सुनसान रास्ते पर ले गया. वहां भी उस ने प्रेमकुमार को एक बोतल शराब पिलाई. प्रेमकुमार नशे में लड़खड़ाने लगा तो अजय ने साथ लाए डंडे से प्रेमकुमार के सिर पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए, जिस से कुछ ही देर में उस की मौत हो गई. उसे मार कर वह वहां से फरार हो गया.
पूछताछ के बाद पुलिस ने भादंवि की धारा 302/201/120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर के अजय और प्रेमचंद को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस अधीक्षक कृपाशंकर ने इस घटना का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 5 हजार रुपए का नकद पुरस्कार प्रदान किया. Illegal Relationship
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






