Punjab Crime: रोहित गाता अच्छा था, इसलिए वह फिल्मों में गायक और म्यूजिक डाइरैक्टर बनने के सपने देखने लगा. जब उस का वह सपना पूरा नहीं हुआ तो उस ने साथियों के साथ मिल कर जो अपराध किया, उस की वजह से आज वह जेल में है
पंजाब के जिला बठिंडा के कस्बा रामामंडी के उस सुनसान इलाके में दूरदूर तक सिर्फ खेत ही नजर आ रहे थे. सुबह का उजास फैलना शुरू हो गया था. सूरज बस कुछ ही देर में निकलने वाला था. 4 लड़के खेतों के बीच से गुजर रहे थे तो वहां बनी ट्यूबवेल की कोठरी से उन्हें किसी के रोनेचीखने की मद्धिम सी आवाज आती सुनाई दी. उन्हें लगा, कोठरी में किसी की पिटाई हो रही है और वह मदद के लिए पुकार रहा है.
चारों लड़के दिलेर किस्म के थे और सामाजिक कार्यों में भी थोड़ी रुचि रखते थे, जिस से हर किसी के सुखदुख में खड़े रहते थे. अपने इलाके में इस तरह किसी की पिटाई होने की बात पर उन की भुजाएं फड़क उठीं. उन के इलाके में किसी की पिटाई, वह भी उन की जानकारी के बिना, यह सोच कर उन्हें गुस्सा आ गया. यह उन लड़कों को असहनीय लगा, इसलिए मामला क्या है, यह जानने के लिए उन का मन बेचैन हो उठा.
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चारों लड़के ट्यूबवेल की ओर चल पड़े. कोठरी के नजदीक पहुंचने पर उन्हें पिटने वाले के साथसाथ पीटने वालों की भी आवाजें सुनाई देने लगी थीं. पीटने वाले पिटाई के साथसाथ गंदीगंदी गालियां देते हुए जान से मारने की धमकियां दे रहे थे. कोठरी का दरवाजा भीतर से बंद था. दरवाजा खुलवाने को उन्होंने शोर मचाते हुए जोरजोर से उसे थपथपाना शुरू किया तो एकबारगी भीतर खामोशी छा गई. इस के बाद अंदर से ‘बचाओ… बचाओ…’ की आवाजें आने लगीं. इसी के साथ उस ने यह भी कहा वे पिछली खिड़की से भाग रहे हैं, उन्हें पकड़ो.
चारों लड़के भाग कर कोठरी के पीछे पहुंचे तो देखा 2 लोग तेजी से भागे जा रहे थे. चारों ने उन का पीछा किया, लेकिन वे इतनी दूर निकल गए थे कि चारों लड़के चाह कर भी उन्हें पकड़ नहीं सके. इस की एक वजह यह भी थी कि वहां से थोड़ी दूरी पर पक्की सड़क थी, जहां एक कार खड़ी थी. वे उसी कार में सवार हो कर भाग गए थे. चारों लड़के लौट आए और खिड़की के रास्ते कोठरी में पहुंचे तो वहां एक लड़का रस्सियों से बंधा पड़ा था. उस के शरीर पर मारपीट के निशान साफ नजर आ रहे थे. चाकुओं के भी घाव थे, जिन से खून रिस रहा था. उस की हालत देख कर यही लगा कि अगर वे लड़के वहां न पहुंचते तो शायद वे उस लड़के को मार डालते.
उस लड़के ने बताया कि उस का नाम रजतपाल सिंह है. वह गांव पाटली, दाबाडिंग रोड, सिरसा के रहने वाले बलदेव सिंह का बेटा है. वह पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ के सेक्टर 21-डी के मकान नंबर 3316 में पेइंगगेस्ट के रूप में रह रहा था. उस की उम्र 18 साल है और वह मोहाली के एक प्राइवेट स्कूल में बारहवीं में पढ़ता है.
रजतपाल उस समय पूरी तरह से बदहवासी की हालत में था. उन्होंने उसे पानी पिलाया. इस के बाद उस ने हाथ जोड़ कर उन लड़कों से कहा, ‘‘आप के इस एहसान का बदला न मैं कभी चुका पाऊंगा और न ही मेरा परिवार. लेकिन अभी मुझे अपने पिता की चिंता हो रही है, क्योंकि उन लोगों ने उन्हें फोन कर के मुझे छोड़ने के लिए 2 करोड की फिरौती मांगी थी. पिताजी ने भी जल्दी रुपयों की व्यवस्था करने को कहा था, जबकि मुझे पता है कि घर का सब कुछ बेच देने पर भी वह 2 करोड़ रुपए इकट्ठा नहीं कर सकते.’’
‘‘इस का मतलब उन लोगों ने फिरौती के लिए तुम्हारा अपहरण कर के यहां बंधक बना कर रखा था, कौन थे वे लोग?’’ लड़कों ने पूछा.
‘‘वे फिल्म बनाने वाले थे. अपनी फिल्म में रोल दिलाने का झांसा दे कर उन्होंने मेरा अपहरण कर लिया था. मुझ से मेरे पिताजी का फोन नंबर ले कर उन से 2 करोड़ की फिरौती मांगी थी. उन्हें डराने के लिए मेरी पिटाई की वीडियो बना कर भेजी थी.’’
‘‘कोई बात नहीं, अब घबराने की जरूरत नहीं है. हम सभी तुम्हारे पिताजी को फोन कर के तुम्हारे बारे में बताए देते हैं.’’
‘‘मेरा फोन तो वे अपने साथ ले गए हैं. आप अपने मोबाइल से पिताजी को फोन कर दीजिए.’’
‘‘ठीक है, नंबर बताओ.’’ एक लड़के ने अपना मोबाइल निकालते हुए कहा.
रजतपाल ने पिता का नंबर बता दिया. उन लड़कों ने अपने मोबाइल से फोन कर के जब बलदेव सिंह को रजतपाल के छूट जाने की बात बताई तो करीब 3 घंटे में वह अपने बड़े बेटे शमशेर सिंह के साथ वहां पहुंच गए. इस बीच वे लड़के रजतपाल को अपने घर ले कर चले गए थे. उन्होंने डाक्टर को बुला कर उस की मरहमपट्टी करवाने के साथ उसे दवा वगैरह दिलवा दी थी. रजतपाल ने जब पिता से अपने साथ हुए हादसे के बारे में बताया तो चारों लड़कों ने उस से पुलिस में मामला दर्ज करवाने को कहा. लेकिन उस समय रजतपाल इस कदर घबराया हुआ था कि वह पुलिस में शिकायत करने के लिए राजी नहीं हुआ.
पिता और भाई रजतपाल की मानसिक स्थिति समझ रहे थे, इसलिए वे उस की बात पर सहमति प्रकट करते हुए बोले, ‘‘हमारा बेटा हमें जिंदा मिल गया, हमारे लिए यही बहुत है. फिर हमें पैसा भी तो नहीं देना पड़ा.’’
इस के बाद कहनेसुनने को कुछ नहीं रह गया था. चारों लड़कों का शुक्रिया अदा कर के बलदेव सिंह रजतपाल को अपने साथ गांव ले कर चले गए. रजतपाल अपने घर वालों के बीच पहुंचा तो उस के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ. रजतपाल स्वस्थ हो गया और उस का आत्मविश्वास लौट आया तो वह चंडीगढ़ जाने की जिद करने लगा. 6 फरवरी को उस का बड़ा भाई शमशेर उसे ले कर चंडीगढ़ पहुंचा. सैक्टर-21 के जिस मकान में रजतपाल पेइंगगेस्ट के रूप में रहता था, उसी मकान में उस के साथ मानसा का नवजोत सिंह और फिरोजपुर का मनप्रीत भी रहता था. लेकिन उन्हें रजतपाल के साथ जो हुआ था, उस की जानकारी नहीं थी.
लेकिन जब उन्हें उस के अपहरण का पता चला तो वे सकते में आ गए. उन्हें गुस्सा भी बहुत आया. इस की वजह यह थी कि रजतपाल के अपहर्ताओं में शामिल रोहित शर्मा नवजोत सिंह का परिचित था. अपनी आने वाली फिल्म में रजतपाल को रोल दिलाने की बात उसी ने उस से कही थी. वह इन सब से मिलने अकसर उन के यहां आता रहता था. नवजोत को जब पता चला कि रजतपाल ने अपने अपहरण की शिकायत पुलिस में नहीं की है तो उस ने कहा, ‘‘रोहित शर्मा ने यह अपराध तुम्हारे साथ नहीं, बल्कि मेरे साथ किया है. ऐसे में उस के किए की सजा उसे मिलनी ही चाहिए. तुम जरा भी मत डरो, मैं तुम्हारे साथ थाने चलूंगा.’’
इस के बाद भी रजतपाल पुलिस के पास जाने से मना किया तो नवजोत ने नाराज हो कर कहा, ‘‘रजतपाल, तुम्हारी यह बुजदिली न केवल एक अपराधी को और बड़ा अपराधी बनने को प्रेरित करेगी, बल्कि बेखौफ हो कर वे लोग जल्दी ही किसी और का अपहरण कर लेंगे. वह अपहरण तुम्हारा भी हो सकता है.’’
आखिर रजत की समझ में बात आ गई. वह अपने बड़े भाई और दोनों दोस्तों के साथ थाना सेक्टर-19 जा पहुंचा. थानाप्रभारी इंसपेक्टर मनिंदर सिंह को जब उस ने पूरी बात बताई तो उन्होंने यह बात एएसपी (ईस्ट) गुरु इकबाल सिंह सिद्धू व एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल को बता कर दिशानिर्देश मांगे.
अधिकारियों के निर्देश पर मनिंदर सिंह ने इस मामले की जांच एसआई राकेश कुमार को सौंप दी. यह फरवरी, 2016 की बात है. उन्होंने रजतपाल से तहरीर ले कर भादंवि की धाराओं 363 एवं 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज करा कर रजतपाल का विस्तार से बयान लिया. रजतपाल ने अपने बयान में बताया था कि वह चंडीगढ़ में 2 लड़कों के साथ पेइंगगेस्ट के रूप में रहता था. दोनों लड़के अमीर घरों से थे, इसलिए उन पर अपना प्रभाव जमाने के लिए उस ने भी अपने बारे में शेखी बघारते हुए बताया था कि हरियाणा में उस के पास खेती के अलावा काफी पुश्तैनी संपति है. मतलब उस का संबंध भी अमीर घराने से है.
जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था. वह मध्यमवर्गीय परिवार से था. उसे अभिनय का शौक था, इसी वजह से वह शहर में पढ़ाई करने के बहाने चंडीगढ़ आ गया था. ऐसे में ही एक दिन नवजोत का एक जानकार उस से मिलने आ गया. वह म्यूजिक डाइरैक्टर था और अपनी आगामी पंजाबी फिल्म के किसी काम से चंडीगढ़ आया था. उस का नाम था रोहित शर्मा. जब उसे पता चला कि उस के दोस्त नवजोत के रूममेट रजतपाल को अभिनय का शौक है तो उस ने रजतपाल को अपनी आगामी फिल्म में रोल देने का वादा कर लिया.
इस के बाद उन की अकसर मुलाकातें होने लगीं. पहली फरवरी की रात रोहित को उन के यहां आया तो उस के 2 दोस्त गुरविंदर सिंह और गननदीप सिंह भी उस के साथ थे. वे शराब की 2 बोतलें भी ले कर आए थे. रजतपाल के अलावा सभी ने शराब पी और रेस्टोरेंट से मंगवा कर खाना खाया. उस रात रोहित अपने दोनों दोस्तों के साथ उन्हीं के कमरे पर सोया. वे सुबह उठ कर चले गए. तब तक रजतपाल सो ही रहा था. थोड़ी देर में आ कर गगनदीप ने उसे जगा कर कहा, ‘‘सैक्टर-21 में अरोमा होटल के सामने रोहित भाई साहब अपनी गाड़ी में बैठे तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने तुम्हें अपनी फिल्म में काम दिलवाने के बारे में प्रोड्यूसर से बात कर ली है. वह तुम्हें उस से मिलवाने ले जाना चाहते हैं.’’
रजतपाल जल्दीजल्दी तैयार हुआ और जा कर रोहित की गाड़ी में बैठ गया. वे उसे खरड़ ले गए, इस के बाद उन्होंने गाड़ी पटियाला की ओर घुमा दी. वे आपस में कुछ इशारेबाजी कर रहे थे, जिस से रजतपाल को उन पर शक हुआ. उस ने उन से गाड़ी से उतारने को कहा तो एक सुनसान जगह पर गाड़ी रोक कर वे उस की पिटाई करने लगे. इस के बाद उस के हाथपैर रस्सियों से बांध कर उस के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया. जब रोहित और उस के साथी रजतपाल की पिटाई कर रहे थे तो उन्होंने मोबाइल से इस की वीडियो बना ली थी, जिसे उन्होंने उस के पिता बलदेव सिंह को भेज कर उस की रिहाई के बदले 2 करोड़ की फिरौती मांगी.
इस के बाद वे उसे रामामंडी ले गए, जहां रात को एक ट्यूबवेल के कमरे में रख कर उस की पिटाई करते रहे. 3 फरवरी की सुबह गांव के कुछ लड़के वहां आ पहुंचे, जिन्हें देख कर वे वहां से भाग गए. इस तरह उन लड़कों की वजह से रजतपाल बच गया. मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने रोहित शर्मा और उस के साथियों की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी. परिणामस्वरूप 7 फरवरी की सुबह मोहाली से रोहित शर्मा साथियों के साथ पकड़ा गया. उसी दिन उन्हें अदालत में पेश कर के पूछताछ के लिए 4 दिनों के कस्टडी रिमांड पर ले लिया गया. रिमांड के दौरान पूछताछ में उन्होंने जो कुछ बताया, उस से रजतपाल के अपहरण की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस तरह से थी.
रोहित शर्मा अमृतसर के कोटखालसा की इंदिरा कालोनी के मकान नंबर 7, अवतार एवैन्यू के रहने वाले बलवीर शर्मा का बेटा था. बचपन से ही उसे गानेबजाने का शौक था. वह गाता भी अच्छा था. इसलिए शुरू ही से उस की तमन्ना थी कि वह एक नामी गायक व संगीतकार बन कर अपनी खुद की म्यूजिक कंपनी खोले. इसी चक्कर में वह ज्यादा पढ़लिख नहीं सका. वह गाता भले अच्छा था, लेकिन उस का गानाबजाना सिर्फ दोस्तों की महफिल तक सीमित था. जबकि वह सपने देखता था फिल्मों में गाने के. इस के लिए भागदौड़ कर के उस ने कई फिल्म वालों से संपर्क बना लिए.
उन से उस की फोन पर बातचीत भी होती रहती थी. इसी बीच उस ने अपने बारे में यह अफवाह उड़ा दी कि वह फिल्मी संगीतकार बन गया है और आने वाली कई फिल्मों में असिस्टैंट म्यूजिक डाइरैक्टर के रूप में काम कर रहा है. इस से दोस्तों और जानपहचान वालों के बीच उस की इज्जत बढ़ गई. जबकि सच्चाई यह थी कि आमदनी का उस के पास कोई साधन नहीं था. एक तरह से वह बेरोजगार था. कमाई के लिए वह ड्रग सप्लाई का काम करने लगा. संयोग से कभी वह पकड़ा नहीं गया. उस समय उस के पास स्कूटर था.
उसे लगा कि अगर उस के पास कार होती तो काम करने में आसानी होती. उस ने एक कार चुरा ली. कुछ दिनों तक उसे अपने घर पर रख कर बाद में चोर बाजार में बेच दी. इस के बाद उस ने उस से बढि़या कार चुरा ली. इस के बाद वह यही काम करने लगा. अंतत: एक दिन पकड़ा गया तो कार चोरी के उस पर 13 मुकदमे दर्ज हुए. किसी तरह इन मुकदमों में उसे जमानत मिल गई तो वह भूमिगत हो गया. पूरा एक साल उस ने इसी तरह निकाल दिया. इस के बाद उस ने शादी कर ली. शादी के बाद उस ने अपने बारे में पत्नी को सब कुछ बता दिया. पत्नी सहृदयी औरत निकली.
पति को उस की परेशानियों से निजात दिलाने और उस के संगीतकार बनने के सपने को पूरा करने के लिए उस ने पुश्तैनी संपत्ति में से अपने हिस्से की जमीन 40 लाख रुपए में बेच कर सारा पैसा ला कर उस के हाथों पर रख दिया. रोहित ने पत्नी से मिले पैसों से अमृतसर के पौश इलाके में एसएस म्यूजिक नाम की कंपनी खोल ली. लेकिन उस की यह कंपनी चल नहीं सकी. जिस दिन यह कंपनी बंद हुई, रोहित बुरी तरह कर्ज में डूबा हुआ था. अपने कई रिश्तेदारों और परिचितों से उस ने पैसा उधार ले लिया था. कंपनी बंद होते ही वे अपना पैसा मांगने लगे.
रोहित का एक पुराना परिचित था नवजोत सिंह, जो काफी अमीर घर से था. मानसा में उस के घर वालों की अच्छीखासी संपत्ति थी. उस से मदद मांगने के लिए उस ने फेसबुक पर उस की तलाश शुरू की. उस ने उसे फ्रैंडशिप रिक्वैस्ट भेजी, जो उस ने स्वीकार कर ली. चैटिंग से उसे पता चला कि नवजोत चंडीगढ़ में पेइंगगेस्ट के रूप में रह कर पढ़ाई कर रहा है. दोनों ने एकदूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए. एक दिन रोहित नवजोत से मिलने चंडीगढ़ पहुंचा तो वहां उस का परिचय नवजोत के साथ रहने वाले 2 लड़कों से हुआ. उन में रजतपाल को फिल्मों में अभिनय करने का शौक था. वह बहुत ज्यादा अमीर घर का नहीं था, लेकिन प्रभाव जमाने के लिए उस ने अपने घरपरिवार के बारे में बहुत बढ़चढ़ कर बता रखा था,
जिस से रोहित को लगा कि यह बहुत अमीर घर का है. अगर वह इस का अपहरण कर लेता है तो इस के घर वालों से करोड़ों की फिरौती वसूल की जा सकती है. उस ने रजतपाल के अपहरण को अंजाम देने के बारे में सोचा और अपने 2 साथियों, जिन में एक था गुरविंदर सिंह उर्फ मिट्ठू पुत्र निर्मल सिंह निवासी गांव हरचंदपुरा, थाना घग्गा, जिला पटियाला. वह गरीब परिवार से था. वह पटियाला के कस्बा बादशाहपुर में फास्टफूड की रेहड़ी लगाता था. उस का एक परिचित था गगनदीप. वह भी गरीब घर से था. छिटपुट काम कर के अपना गुजरबसर करता था. दोनों की ही रोहित शर्मा से अच्छी जानपहचान थी.
रोहित ने दोनों से बात कर के रजतपाल के अपहरण की योजना बना डाली. उन्होंने उस का अपहरण भी कर लिया, लेकिन जाने कहां से 4 लड़के आ गए, जिस से उन्हें रजतपाल को छोड़ कर भागना पड़ा. वहां से भागने के बाद गुरविंदर से उन की मुलाकात हो गई. रोहित और गगनदीप ने रजतपाल को इतना डरा दिया था कि उन्हें पूरा विश्वास था कि वह पुलिस में शिकायत कराने नहीं जाएगा. क्योंकि उस ने फिरौती की रकम भी नहीं दी थी. 2-3 दिन बीत जाने के बाद रोहित को पूरा भरोसा हो गया कि उन के खिलाफ रजतपाल ने शिकायत नहीं की है. यही सोच कर वे बिना डरे मोहाली आ गए, जहां चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया.
रोहित शर्मा की निशानदेही पर पुलिस ने उस की होंडा मोबिलियो पीबी 02 सीके 9880 कार के अलावा चाकू और खून सने कपड़े बरामद कर लिए थे. इस के बाद अदालत में पेश कर के तीनों को जेल भेज दिया गया था. Punjab Crime
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






