Bhopal Crime News: दरोगा मोहन सक्सेना ने अंकित से पीछा छुड़ाने का दांव तो बहुत बढि़या चला था, लेकिन थाना बैरसिया पुलिस ने भी ऐसा दांव खेला कि उन का दांव फेल हो गया और वह साथियों के साथ पुलिस की पकड़ में आ ही गए…
17 जनवरी की बात है. जिला मुख्यालय भोपाल से कोई 40 किलोमीटर दूर बसे बैरसिया से हो कर विदिशा जाने वाले मार्ग पर पड़ने वाले गांव भोजापुरा के जंगल में कुछ लोगों ने एक युवक की सिर कुचली निर्वस्त्र पड़ी लाश देखी. उन्हीं में से किसी ने इस मामले की जानकारी थाना बैरसिया के थानाप्रभारी एच.सी. लाडिया को दे दी. मामला चूंकि हत्या का लग रहा था, इसलिए घटनास्थल के लिए रवाना होने से पहले थानाप्रभारी ने इस घटना की सूचना एसडीओपी बीना सिंह और एसपी भोपाल अरविंद सक्सेना को भी दे दी.
एच.सी. लाडिया पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे तो देखा कि मृतक 24-25 साल का था. उस के सिर पर चोट के निशान थे. कोई उसे पहचान न सके, इस के लिए भारी पत्थर से उस का सिर कुचल दिया गया था. खून सना पत्थर लाश के पास ही पड़ा था.
मृतक के कपड़े और अन्य सभी चीजें गायब थीं. इस से थानाप्रभारी ने यही अनुमान लगाया कि हत्यारे ने ऐसा इसलिए किया होगा, जिस से पुलिस को कोई सुराग न मिल सके. मृतक की पहचान भी नहीं हो सकी. पुलिस ने आसपास खोजबीन की तो कुछ ही दूरी पर एक बिना नंबर की नई कार आई-20 लावारिस खड़ी मिल गई. काफी पूछताछ के बाद भी जब आसपास कार का मालिक नहीं मिला तो मौके पर पहुंची एसडीओपी बीना सिंह ने कार का संबंध जंगल में मिली लाश से जुड़ा मान कर कार की तलाशी ली.
कार में मिले दस्तावेजों से पता चला कि वह कार शाजापुर निवासी निर्मला गौर की थी. पुलिस ने जब निर्मला से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि कार उन की ही है. उन का ड्राइवर अंकित यह कह कर कार ले गया था कि उसे अपने दोस्तों के साथ उज्जैन जाना है. निर्मला ने अंकित का जो हुलिया बताया था वह जंगल में मिली लाश से काफी मिल रहा था. निर्मला से अंकित का पता मिल गया था. पुलिस ने शाजापुर की इंदिरा कालोनी में रहने वाले उस के घर वालों को बुला कर लाश दिखाई तो उन्होंने उस की पहचान अंकित के रूप में कर दी.
लाश की पहचान हो जाने से पुलिस का सिरदर्द थोड़ा कम हो गया क्योंकि जांच की राह आसान हो गई थी. लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने और घटनास्थल की प्राथमिक काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की. जांच अधिकारी बनाया गया सबइंसपेक्टर भारत सिंह को. इस मामले के तार शाजापुर से जुड़े हो सकते थे, इसलिए एसडीओपी बीना सिंह के निर्देश पर टीआई एच.सी. लाडिया ने भारत सिंह के नेतृत्व में एक टीम शाजापुर भेजी. इस टीम में आरक्षक बृजमोहन व्यास और राजेश सोलंकी को विशेष रूप से शामिल किया गया.
स्थानीय पुलिस की मदद से भारत सिंह को अंकित के बारे में जो जानकारी मिली, उस में सब से खास बात यह थी कि निर्मला के यहां नौकरी करने से पहले अंकित पुलिस लाइन में तैनात एएसआई मोहन सक्सेना के घर पर ड्राइवर की नौकरी करता था. मोहन सक्सेना ने कुछ समय पहले ही उसे नौकरी से निकाल दिया था. वजह यह थी कि अंकित और मोहन सक्सेना के बेटे नितिन की पत्नी अनीता (बदला हुआ नाम) के साथ उस के न केवल अवैध रिश्ते बन गए थे, बल्कि दोनों के इश्क की चर्चा शाजापुर की गलियों में आम हो गई थी. मोहन सक्सेना ने एकदो बार अंकित को सार्वजनिक रूप से पुलिसिया रौब भी दिखाया था.
मोहन सक्सेना के यहां से निकाले जाने के बाद अंकित निर्मला के यहां नौकरी करने लगा था. लाश मिलने से एक दिन पहले वह दोस्तों के साथ उज्जैन जाने की बात कह कर निर्मला की कार ले कर निकला था. अब सवाल यह था कि अंकित भोजापुर कैसे पहुंच गया? भारत सिंह ने जब इस बारे में खोजबीन की तो पता चला कि 16 जनवरी की शाम को अंकित के साथ कार में तांत्रिक संजय व्यास को बैठे देखा गया था. उम्र का आधा शतक पूरा करने के करीब पहुंच चुका संजय शाजापुर का ही रहने वाला था.
कुछ साल पहले तक संजय सहकारी कोऔपरेटिव बैंक में चपरासी की नौकरी करता था. लेकिन वह किले स्थित बड़ वाले जिंद बाबा की भक्ति में ऐसा डूबा कि उस ने नौकरी तक छोड़ दी. वह हरे रंग के कपड़े पहनने के साथ गले में मूंगामोती और बड़ेबड़े हकीक पत्थरों की माला पहन कर तांत्रिक बन गया. संजय खुद को तांत्रिक और जिंद बाबा का शार्गिद बताता था. धीरेधीरे उस के पास लोगों की भीड़ लगने लगी थी.
हर बृहस्पतिवार को वह किले में बड़ वाले जिंद बाबा की मजार पर बैठता था. उस दिन बड़ी संख्या में स्त्रीपुरुष उस के पास अपनी समस्याएं ले कर आते थे. भोजापुर के जंगल में जहां अंकित की नग्न लाश मिली थी, वहां कुछ पूजा सामग्री भी पड़ी मिली थी. उस वक्त पुलिस ने इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था, लेकिन तांत्रिक का नाम सामने आते ही भारत सिंह समझ गए कि अंकित का हत्यारा कौन हो सकता है? पुलिस ने तांत्रिक संजय व्यास को थाने बुला कर उस से पूछताछ शुरू की तो वह खुद को निर्दोष बताता रहा.
उस का कहना था कि घटना वाले दिन वह शाजापुर में ही था, लेकिन जब पुलिस ने उसे बताया कि उस दिन उस के मोबाइल की लोकेशन भोजापुर बैरसिया में थी तो उस से कुछ जवाब देते नहीं बना. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. उस से मिली जानकारी के आधार पर थाना बैरसिया पुलिस शाजापुर जा कर पुलिस लाइन में तैनात एएसआई मोहन सक्सेना और उस के बेटे नितिन को भी गिरफ्तार कर के ले आई. तीनों से पूछताछ में अंकित के कत्ल की कहानी सामने आ गई. शाजापुर पुलिस लाइन में तैनात एएसआई मोहन सक्सेना रिटायरमेंट के करीब थे. उन के बाकी बच्चे तो अपनेअपने काम में लग गए थे, लेकिन बेटा नितिन मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण बेरोजगार था.
रोजगार से लगाने के लिए मोहन सक्सेना ने उसे एक इंडिका कार दिलवा दी थी, जिसे वह टैक्सी के रूप में चलवाने लगा था. इस के लिए इंदिरा कालोनी के रहने वाले 24 वर्षीय अंकित को उन्होंने ड्राइवर के तौर पर रखा हुआ था. नितिन की शादी पास के गांव की रहने वाली अनीता से हुई थी. अपनी मानसिक दशा की वजह से नितिन को पत्नी से कोई भावनात्मक लगाव नहीं था. उस के लिए पत्नी केवल रात बिताने का साधन मात्र थी. पति के व्यवहार से दुखी अनीता पतिपत्नी के संबंधों में उस का साथ तो देती रही, लेकिन उसे कभी भी वह दिल से प्यार नहीं कर सकी.
नितिन के प्रति अनीता के मन में भरी नफरत उस के हावभाव से ही झलकती थी, जिसे अंकित समझ चुका था. अंकित अनीता की खूबसूरती और चंचलता का दीवाना तो था ही, उसे लगा कि अगर वह थोड़ी सी हिम्मत करे तो अनीता से उस की दोस्ती हो सकती है. हकीकत यह थी कि अनीता पहले से ही मन ही मन अंकित को पसंद करती थी. यह अलग बात थी कि घर की बहू होने के नाते उस में इतनी हिम्मत नहीं थी कि अपनी ओर से पहल कर सके. उधर अंकित के मन में जब यह खयाल आया तो उस ने अनीता की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए. उस के बढ़ते कदमों का मतलब समझ कर अनीता ने भी उसे सकारात्मक संकेत देने शुरू कर दिए.
अनीता की ओर से इशारा मिलने पर अंकित ने तेजी से कदम बढ़ाए. संयोग से उसी बीच अनीता के ससुर मोहन सक्सेना को लकवा मार गया. फलस्वरूप वह ज्यादातर घर में ही रहने लगे. इस से अनीता और अंकित को बातचीत का मौका कम ही मिल पाता था. चूंकि मोहन सक्सेना चलनेफिरने से लाचार हो गए थे, इसलिए उन्हें हर जगह कार से लाना ले जाना पड़ता था. इसी चक्कर में अंकित का घर में आनाजाना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था. लकवा मारने पर मोहन सक्सेना डाक्टर की दवाइयों के साथसाथ तांत्रिक संजय व्यास से भी झाड़फूंक करवा रहे थे.
इसे दवाओं का असर कहें या संजय व्यास की झाड़फूंक, मोहन सक्सेना को लाभ हुआ और वह खुद चलनेफिरने लगे. दूसरी ओर घर आनेजाने में अंकित लगातार अनीता के करीब होता गया. लगभग साल भर पहले एक दिन मौका पा कर उस ने अनीता से अपने मन की बात कह दी. अनीता ने भी आगे बढ़ कर उसे गले लगा लिया. जल्द ही न केवल दोनों का चोरीछिपे मिलनाजुलना शुरू हो गया, उन के बीच अनैतिक संबंध भी बन गए.
सच यह है कि भरेपूरे परिवार में इस तरह के संबंध ज्यादा दिनों तक छिपे नहीं रहते. अंकित और अनीता के साथ भी यही हुआ. एक दिन मोहन सक्सेना ने अंकित को अपनी बहू अनीता के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. अंकित की यह हरकत उन के मुंह पर तमाचे जैसी थी, वह तिलमिला उठे. उन्होंने न केवल दोनों की खूब खबर ली, बल्कि अंकित को नौकरी से निकाल कर उसे अनीता से दूर रहने की हिदायत भी दी.
मोहन सक्सेना को उम्मीद थी कि उन के पुलिस में होने की वजह से अंकित अब कभी उन की बहू की तरफ नजर उठा कर देखने की हिम्मत नहीं करेगा. लेकिन उन की धमकी से न अंकित डरा और न अनीता. ससुर द्वारा पकडे़ जाने के बाद भी न अनीता अपनी हरकतों से बाज आई थी न अंकित. मोहन सक्सेना को जब कभी अंकित अपने घर के आसपास चक्कर लगाते दिख जाता तो उन का खून खौल उठता.
इसी बीच उन्हें पता चला कि अंकित के पास अनीता के कुछ अश्लील फोटो हैं, जिन्हें वह अपने कई दोस्तों को दिखा चुका है. इस से सक्सेना परिवार की बदनामी हो रही थी. परेशान हो कर मोहन सक्सेना ने अंकित का पत्ता साफ करने का फैसला कर लिया. लकवा ठीक होने के बाद मोहन सक्सेना को तांत्रिक संजय व्यास की शक्तियों पर पूरा विश्वास हो गया था. इसलिए वह जबतब उस के दर्शन करने जाया करते थे. इस से पहले अंकित उन्हें इलाज के लिए कार में बैठा कर संजय के पास ले जाया करता था.
इसी आनेजाने की वजह से संजय व्यास से अंकित का भी अच्छा परिचय हो गया था. मोहन सक्सेना की तरह वह भी मानने लगा था कि संजय व्यास के तंत्रमंत्र में काफी ताकत है. अनीता से अंकित का मिलनाजुलना तो जारी था, लेकिन ससुर द्वारा पकड़े जाने के बाद से वह काफी डर गई थी. अंकित अब अनीता को भगा ले जाना चाहता था. उस का कहना था कि दोनों कहीं दूर जा कर शादी कर लेंगे. लेकिन अनीता इतना बड़ा कदम उठाने को तैयार नहीं थी.
अंकित ने सुन रखा था कि तंत्रमंत्र की ताकत से किसी भी लड़की को वश में किया जा सकता है. इसलिए जब अनीता उस के साथ भागने को राजी नहीं हुई तो वह तांत्रिक संजय व्यास की शरण में पहुंच गया. वह संजय से कोई ऐसी तांत्रिक पूजा करवाना चाहता था, जिस से अनीता उस के वश में हो कर भागने को राजी हो जाए. संजय का तो काम ही ऐसे कामों से पैसा कमाना था, सो वह इस के लिए राजी हो गया. फलस्वरूप अंकित का संजय के पास आनाजाना बढ़ गया. मोहन सक्सेना भी संजय के भक्त थे. उन्होंने अंकित को कई बार संजय के पास जाते देखा तो एक दिन उस से पूछ लिया कि वह उन के पास क्यों आता है?
पहले तो संजय ने बात बना कर उन्हें टालना चाहा, लेकिन जब मोहन सक्सेना उस के पीछे पड़ गए तो उस ने उन्हें बता दिया कि अंकित उन की बहू अनीता पर वशीकरण करवाना चाहता है, ताकि उसे अपने साथ भगा ले जाए. अंकित की मंशा जान कर मोहन सक्सेना आगबबूला हो उठे. इस के बाद उन्होंने सोचना शुरू किया तो उन के दिमाग में एक ऐसी योजना आई, जिस से आसानी से अंकित का पत्ता साफ किया जा सकता था.
सक्सेना ने विदिशा आतेजाते भोजापुरा का जंगल देखा था. वह जंगल शाजापुर से इतनी दूर था कि अगर शाजापुर के आदमी की लाश वहां मिल भी जाती है तो उस की पहचान करना संभव नहीं था. सोचविचार कर उन्होंने तांत्रिक संजय व्यास को लालच दिया कि अगर वह पूजा के बहाने अंकित को भोजापुर के जंगल तक ले जाता है तो वह उसे 15 हजार रुपया देंगे. पैसों के लालच में आ कर तांत्रिक संजय व्यास राजी हो गया. योजना के अनुसार, 16 जनवरी की रात संजय व्यास अंकित को ले कर भोजापुरा के जंगल में पहुंच गया. अंकित बहाना बना कर निर्मला गौर की कार ले कर आया था. संजय के कहने पर उस ने कार जंगल के बाहर खड़ी कर दी.
इस के बाद जंगल के अंदर जा कर संजय व्यास ने पूजा के नाम पर अंकित को निर्वस्त्र हो कर आंखें बंद कर के बैठने को कहा. पूजा शुरू हो गई. इसी बीच पीछे से आ कर मोहन सक्सेना और उन के बेटे नितिन ने सिर में लोहे की रौड मार कर अंकित की हत्या कर दी. लाश का चेहरा पहचान में न आए, इस के लिए तीनों ने एक भारी पत्थर से उस का चेहरा कुचल दिया. मोहन सक्सेना ने सोचा था कि न तो लाश की पहचान होगी और न वे लोग कभी पकड़े जाएंगे.
लेकिन बैरसिया पुलिस ने 4 दिनों में ही वर्दी वाले कातिल, उस के बेटे और तांत्रिक को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. अपराधियों के खिलाफ 17 जनवरी को भादंवि की धारा 302ए, 201, 120बी और 34 आईपीसी के अंर्तगत मुकदमा दर्ज कर के जेल भेज दिया गया. Bhopal Crime News
लेखक – अरुण कुमार हरदैनिया
— पुलिस सूत्रो






