UP Peon Fraud Case : उत्तर प्रदेश में पीलीभीत शिक्षा विभाग, डीआईओएस का चपरासी इल्हाम उर्र रहमान शम्सी पर 5.28 करोड़ रुपए गबन करने का आरोप लगा है. यह सब उस ने सिस्टम की खामियों का नाजायज फायदा उठा कर किया.
उस ने फरजी टीचर बना कर वित्तीय लाभ पहुंचाने के लिए पैसे ट्रांसफर करवा दिए. इस के लिए अपनी 3 पत्नियों में से एक को फरजी शिक्षक बना दिया था. जब इस की जांच हुई, तब उस की पत्नियों के खाते में 50 लाख से अधिक की फिक्स डिपौजिट पाई गई.
बात फरवरी, 2026 की है. बैंक औफ बड़ौदा के मैनेजर एक खाते में मोटी रकम के ट्रांजैक्शन को देख कर चौंक गए. इस की जानकारी उन्होंने जिला अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को देते हुए बताया कि डीआईओएस औफिस में लोगों को मोटे ट्रांजैक्शन हो रहे हैं. इस में सब से बड़ा ट्रांजैक्शन इल्हाम की पत्नी के खाते में हुआ है, जो संदिग्ध लग रहा है.
इस सूचना पर जिला अधिकारी ने फौरन डीआईओएस राजीव कुमार को तलब किया. आननफानन में डीआईओएस ने फरवरी में ही इल्हाम और उस की पत्नी के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दे कर उस पर एफआईआर दर्ज करवा दिया. केस दर्ज कर अधिकारी ने फौरन डीआईओएस राजीव कुमार को तलब किया. फरजीवाड़े की कहानी सामने आने लगी.
जांच के बाद आगे की काररवाई के लिए चपरासी को हिरासत में ले लिया गया. वह करोड़ों के गबन का मुख्य आरोपी बन चुका है. इल्हाम अपनी पत्नी अर्शी खातून को फरजी तरीके से टीचर दिखा कर उस के खाते में वेतन भिजवा रहा था.
पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट को देखते ही इल्हाम की पत्नी को हिरासत लिया था, जिस के बाद उसे जेल भेज दिया गया. जिस कर्मचारी को फाइलें उठाने और छोटेमोटे कामों के लिए रखा गया था, उसी ने पूरे सिस्टम की कमियों का फायदा उठा कर करोड़ों रुपए का खेल कर डाला. यानी सरकारी दफ्तर में काम करने वाला चपरासी करोड़पति निकला. उस पर 53 खातों के जरिए करोड़ों रुपए का गबन करने का आरोप लगाया गया है.
पीलीभीत मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर बीसलपुर के जनता टेक्निकल इंटर कालेज में इल्हाम चपरासी के पद पर तैनात था. उस ने साल 2014 में जिला विद्यालय निरीक्षक पीलीभीत मुख्यालय में पोस्टिंग करवा ली थी. वह शातिरदिमाग था. दोस्ती बनाने में माहिर था. अधिकारियों को अपने कामकाज से प्रभावित कर उन का करीबी बन जाता था. धीरेधीरे वह जिले भर के अधिकारियों के काफी निकट आ गया था. वह सभी मीटिंग में शामिल होने लगा था.
पीलीभीत डीआईओएस कार्यालय से जुड़े इस चपरासी की आय और संपत्ति का आंकड़ा जैसेजैसे सामने आने लगा, वैसेवैसे घोटाला और गंभीर हो गया. शम्सी ने अधिकारियों की मिलीभगत से फरजी तरीके से वेतन मद से करोड़ों रुपए निकाल लिए. इस चौंकाने वाले मामले के बाद पूरा शिक्षा विभाग और प्रशासनिक तंत्र हैरान है, किंतु इस से सरकारी सिस्टम में छिपी बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार का भी उजागर हो गया.
शुरुआती जांच में यह भी पता चल गया है कि यह मामला सिर्फ गबन का नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से सरकारी धन के दुरुपयोग का है. अब पुलिस की सख्त निगरानी में जांच आगे बढ़ रही है और हर दिन नए खुलासे हो रहे है.
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि चपरासी ने अपनी निजी जिंदगी के जरिए भी रकम को अलगअलग खातों में फैलाने की कोशिश की. उस की 2 पत्नियों के खातों में क्रमश: 33.30 लाख और 25 लाख रुपए की एफडी कराई गई, जबकि एक रिश्तेदार महिला के खाते में भी रकम जमा कराई गई.






