Custodial Death Case. नागपुर का नागेंद्र भाटिया और नाबालिग अर्पिता साहू एकदूसरे को इतना प्यार करते थे कि वे एक रोज घर से भाग गए, लेकिन पुलिस ने दोनों को ढूंढ निकाला. अर्पिता को उस के पेरेंट्स के हवाले कर नागेंद्र के खिलाफ किडनैप व पोक्सो एक्ट में मामला दर्ज कर लिया गया, लेकिन रिमांड के दौरान हवालात में हुई नागेंद्र की रहस्यमय मौत ने इस मामले को ऐसे उलझा दिया कि

प्रयागराज से 20 किलोमीटर दूर छोटा सा गांव मदारीपुर है, जहां के लोग खेतीकिसानी करते हैं. इसी मदारीपुर गांव में रामजी भाटिया का अपना छोटा सा मकान है. एक एकड़ जमीन पर खेतीकिसानी कर के वह अपने घरपरिवार का भरणपोषण कर रहे थे.

उन के परिवार में पत्नी के अलावा 3 बेटे व एक बेटी थी. 19 वर्षीय नागेंद्र भाटिया दूसरे नंबर का बेटा था, जो बीएससी की पढ़ाई करते हुए डीजे बजाने का काम करता था. एक जन्मदिन पार्टी में नागेंद्र भाटिया की मुलाकात नाबालिग अर्पिता साहू से हुई थी. नागेंद्र की खूबसूरती देख कर अर्पिता साहू नागेंद्र को आंखों की आंखों में अपना दिल दे बैठी थी. बचपन के प्यार का अंजाम क्या होगा, इस की परवाह नहीं की. यानी दोनों का प्यार परवान चढ़ता गया.

अर्पिता साहू मूलरूप से नागपुर के जरीपटका की रहने वाली थी. प्रयागराज के मदारीपुर गांव में अर्पिता साहू की बुआ रहती है, इसलिए गांव में उस का आनाजाना होता रहता था. अर्पिता और नागेंद्र भाटिया प्यार के अंजाम से अनजान मोहब्बत की डगर पर आगे बढ़ते रहे. 5-6 महीने बाद ही उन का प्यार इतना गहरा हो गया कि दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया. अर्पिता साहू के फेमिली वालों को जब यह जानकारी मिली तो उन्होंने अर्पिता साहू पर पूर्णत: पाबंदी लगा दी.

इस पाबंदी के बावजूद एक दिन मौका मिलते ही अर्पिता बिना सोचेसमझे ट्रेन में बैठ कर रीवा जा पहुंची. रीवा पहुंचने के बाद अर्पिता साहू ने नागेंद्र भाटिया को फोन कर के धमकी दी, मैं अपना घरबार छोड़ कर रीवा आ गई हूं. तुम मुझे लेने आ जाओ, नहीं तो मैं अपनी जान दे दूंगी.

फोन पर नागेंद्र भाटिया अर्पिता साहू को समझाता रहा, लेकिन अर्पिता अपनी बात पर अड़ी रही. आखिर नागेंद्र भाटिया अपने फेमिली वालों को बिना बताए रीवा पहुंच गया. अपने रिश्तेदारों के यहां रह रही अर्पिता साहू को अपने साथ ले कर मदारीपुर गांव आ गया. अपने बेटे के साथ नाबालिग अर्पिता साहू को देख कर नागेंद्र भाटिया के पेरेंट्स घबरा गए.

नागेंद्र भाटिया के पेरेंट्स अर्पिता साहू को समझाबुझा कर वापस उस के घर भेजना चाहते थे, लेकिन उन की बात का कोई भी असर अर्पिता साहू पर नहीं हुआ. वह अपनी बात पर अड़ी रही कि अब मैं नागेंद्र से ही शादी करूंगी. उधर लापता अर्पिता साहू के फेमिली वालों ने जरीपटका थाने में नाबालिग अर्पिता साहू को बहलाफुसला कर किडनैप का केस दर्ज करवा दिया. उन्होंने अपहरण का शक नागेंद्र भाटिया पर जताया था.

मामला नाबालिग के अपहरण का था, इसलिए पुलिस भी तुरंत हरकत में आ गई. एक पुलिस टीम मदारीपुर गांव के लिए रवाना हो गई. जिस समय पुलिस टीम नागेंद्र भाटिया के घर पहुंची तो घर में नागेंद्र और अर्पिता साहू मिल गए. उस वक्त घर में दोनों के अलावा कोई नहीं था. नागेंद्र के पेरेंट्स खेतों पर गए थे. छोटे भाईबहन स्कूल गए थे और बड़ा भाई भी अपने कामधंधे से बाहर गया हुआ था.

जरीपटका पुलिस टीम को देख कर नागेंद्र भाटिया और अर्पिता दोनों घबरा गए. पुलिस दोनों को गिरफ्तार कर जरीपटका थाने लौट आई. पुलिस ने अर्पिता साहू को उस के परिवार को सौंप दिया, क्योंकि वह नाबालिग थी और नागेंद्र भाटिया पर नाबालिग का अपहरण, बलात्कार (पोक्सो) का केस दर्ज कर लिया. दूसरे दिन उसे नागपुर न्यायालय में मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया. मजिस्ट्रैट ने नागेंद्र भाटिया को 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर भेज दिया. 21 जनवरी, 2026 को पुलिस ने नागेंद्र भाटिया से सख्ती से पूछताछ की. उस दौरान उसे यह भी धमकाया गया कि दोबारा रिमांड पर ले कर और सख्ती की जाएगी. इस से डरेसहमे नागेंद्र भाटिया ने फांसी लगाने का निर्णय लिया.

जब नागेंद्र भाटिया के फेमिली वालों को पता चला कि नागेंद्र जरीपटका थाने में है, तब रुपयों की तंगी के चलते अपना ट्रैक्टर गिरवी रख कर थाने पहुंचे तो उन्हें अपने बेटे नागेंद्र भाटिया से मिलने नहीं दिया गया. रिमांड के चलते नागेंद्र भाटिया रात भर सोया नहीं था. तड़के तक उसे बेचैनी की हालत में घूमते देखा गया. इस बीच उस ने ओढऩे के लिए दी गई चादर को फाड़ कर फांसी का फंदा बनाया. फांसी बनाने के बाद लौकअप के दरवाजे तक उस का हाथ नहीं जा रहा था तो उस ने रखे हुए पानी के डिब्बे पर चढ़ कर फांसी लगा ली. ऐसा जरीपटका पुलिस वालों का कहना है.

नागेंद्र भाटिया के फादर रामजी भाटिया को जब लौकअप में नागेंद्र को दिखाया गया तो उन्हें ऐसा लगा कि नागेंद्र भाटिया फांसी नहीं लगा सकता, क्योंकि उस के दोनों पैर जमीन पर टिके हुए थे, अगर वह फांसी लगाता तो उस की जुबान बाहर निकलती, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था. पुलिस ने पत्रकारों को भी मिलने नहीं दिया.

Custodial Death Caseइस

मामले ने तूल पकड़ा तो डीसीपी डा. संदीप पखाले ने एसआई नितिन आतराम, हवलदार अमोल खड़से, राहुल चौहान और प्रमोद दुधकवड़े को निलंबित कर दिया. इस जानकारी से उन्होंने पुलिस कमिश्नर रविंद्र सिंघल को भी अवगत करा दिया. नागेंद्र भाटिया की मौत के पूरे प्रकरण की जांच नागपुर की सीबीआई कर रही है.

प्यार में बहुत ही कम लोग सफल हो पाते हैं, फिर ऊंचनीच का भेदभाव, जातपात का भेदभाव, अमीरीगरीबी की खाई में अकसर प्यार करने वालों को मौत को गले लगाना पड़ता है. जैसे नागेंद्र भाटिया को अपनी जान दे कर मौत को गले लगाना पड़ा.

नागेंद्र भाटिया दूसरी बिरादरी का था. अर्पिता साहू के फेमिली वालों ने यह भी सोचा होगा कि अपनी बिरादरी की नाक कट जाएगी, इसलिए नाबालिग अपहरण व बलात्कार का केस बना कर नागेंद्र भाटिया को आरोपी बना दिया.

नागेंद्र भाटिया के पापा रामजी भाटिया, मम्मी पुष्पा भाटिया व पूरे परिवार वालों का कहना है कि हमें इंसाफ मिलना चाहिए.

—कथा में अर्पिता साहू परिवर्तित नाम है.

लेखक – रौबिनसन जौनसन पीटर

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...