Jharkhand Student Missing Case. झारखंड पुलिस के लिए यह कितनी शर्मनाक बात है कि 18 वर्षीय छात्रा की तलाश 8 माह तक नहीं कर पाई. जब हाईकोर्ट ने इस में दखल दिया, तब उस का कंकाल बरामद हुआफिर जो ऐक्शन लिया गया, उस में एसएचओ सहित 10 एसआई, 5 एएसआई, 2 हवलदार और 11 सिपाहियों पर ऐसी गाज गिरी कि

झारखंड के औद्योगिक शहर बोकारो के खुंटाडीह गांव की रहने वाली 18 वर्षीय पुष्पा महतो 21 जुलाई, 2025 को 10 किलोमीटर दूर चास स्थित अपने कालेज के लिए साइकिल से निकली थी.तब उस की मम्मी रेखा देवी अपने घर के पास के खेतों में काम करने गई हुई थी. जब वह शाम को घर वापस लौटी, तब पता चला कि पुष्पा घर वापस नहीं आई थी. उस के बाद वह बेटी की तलाश में कई घंटे गांव के गलीमोहल्ले में भटकती रही.

कुछ पता नहीं चलने पर रेखा देवी पिंड्राजोरा थाने पहुंची. उस ने एसएचओ अभिषेक रंजन को बेटी के गायब होने की जानकारी देते हुए उस की गुमशुदगी दर्ज कराने की मांग की. एसएचओ ने जवान बेटी की गुमशुदगी लिखने के बजाए रेखा देवी को आश्वासन दे कर वापस घर भेज दिया.

वह अगले रोज फिर थाने गई, लेकिन पुलिस ने उन्हें ‘लौट आएगी, कहीं चली गई होगी!’ कह कर भेज दिया. वह लगातार थाने जा कर बेटी का पता लगाने की तलाश के लिए फरियाद करती रही पर थाने में पुष्पा की सनहा (जनरल डायरी एंट्री) तक नहीं लिखी गई.

तब रेखा देवी ने एक दिन बोला, साहब, सनहा (प्रारंभिक सूचना) तो लिख लीजिए!  फी मिन्नतों के बाद एसएचओ अभिषेक रंजन ने 24 जुलाई को सनहा लिखा, लेकिन पुष्पा की खोजबीन करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई.

रेखा देवी अपनी बेटी की तलाशी के लिए रोज थाने जाती रही. हर बार कोई न कोई बहाना बना कर पुलिस उसे लौटा देती थी. रेखा ने पड़ोस में रहने वाले युवक दिनेश कुमार महतो पर शक जाहिर कर जांच करने की गुहार एसएचओ से लगाई, किंतु एसएचओ के कानों पर इस की जूं तक नहीं रेंगी. रेखा को किसी ने बताया कि जब तक पुष्पा के गुमशुदगी की एफआईआर नहीं लिखी जाएगी, तब तक पुलिस उस की तलाश नहीं करेगी.

काफी मिन्नतें करने पर भी एसएचओ अभिषेक रंजन ने जब बेटी की गुमशुदगी दर्ज नहीं की तो रेखा इस के लिए एसपी हरविंदर सिंह से मिली. वहां भी उस ने पड़ोसी युवक दिनेश पर शक जताते हुए शिकायत की. दिनेश एक दबंग युवक था. उस के राजनीतिज्ञों से भी अच्छे संबंध थे, इसलिए थाना पुलिस उस के खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं ले रही थी, इस बात को एसपी साहब समझ गए. लिहाजा उन के सख्त आदेश के बाद एसएचओ को पुष्पा की रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी.

झारखंड

पुष्पा के लापता होने के 13वें दिन यानी 4 अगस्त, 2025 को पिंड्राजोड़ा थाने में मानव तसकरी से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) के तहत एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन वो भी अज्ञात के खिलाफ. रेखा की काफी फरियादों के बाद एसपी हरविंदर सिंह ने इस केस के खुलासे के लिए थाना स्तर की एक एसआईटी गठित की. इस के बावजूद पुष्पा की तलाश नहीं हो पाई. जबकि रेखा देवी अपनी हर फरियाद में पड़ोसी दिनेश को ही इस का दोषी बताती रही.

पुष्पा रोजाना 10 किलोमीटर दूर साइकिल से चास स्थित अपने कालेज जाती थी. इस पर रेखा का कहना था, मेरी बेटी का रिश्ता तय हो गया था, जिसे सुन कर दिनेश कई बार मेरी बेटी को परेशान कर चुका था. उस ने पुलिस को बताया, 21 जुलाई को बेटी के नहीं मिलने पर अंत में मैं दिनेश के घर गई थी, लेकिन वह घर पर नहीं मिला था. घर पर उस के न मिलने पर मैं डर गई कि दिनेश की वजह से मेरी बेटी के साथ कोई अनहोनी न हो जाए. इस के बाद पति के कहने पर मैं सीधे थाने पहुंची.

रेखा देवी और उस का पति अनंत महतो थाने में चक्कर लगातेलगाते परेशान हो गए थे. मुखिया से ले कर विधायक तक और बोकारो जिले के हर जन प्रतिनिधि से बेटी की सकुशल वापसी की फरियाद की, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी. यह भागादौड़ी करतेकरते 6 महीने गुजर गए. इस के बाद बोकारो जिला परिषद उपाध्यक्ष बबीता देवी से उस की मुलाकात हुई. बबीता देवी ने रेखा की हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया.

बबीता देवी पहले पुष्पा के परिजनों को साथ ले कर एसपी से मिलीं. उन्हें इस केस को ले कर उन का रवैया संतोषजनक नहीं लगा. तब बबीता देवी की मदद से रेखा देवी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उस ने जवान बेटी के गायब होने के मामले में पुलिस द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने की शिकायत के साथ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की.

कोर्ट में जब इस केस की सुनवाई शुरू हुई, तब पाया कि पुलिस मामले की लीपापोती करने में लगी हुई है. यह भी पता चला कि स्थानीय पुलिस ने आरोपी को बचाने की कोशिश की है. कोर्ट को आरोपी से मिले होने और उस के बचाने के कई सबूत मिले. इस पर हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड डीजीपी तदाशा मिश्रा और बोकारो एसपी हरविंदर सिंह को कड़ी फटकार लगाई. साथ ही जल्द रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया.

पीडि़त पक्ष की तरफ से वकील विंसेंट मार्की ने अपने तर्क रखे. इस मामले की महत्त्वपूर्ण सुनवाई 27 फरवरी, 9 मार्च और 23 मार्च, 2026 को हुई. हाईकोर्ट ने पुष्पा के मामले में एसपी हरविंदर सिंह पर सख्ती दिखाई. पीडि़त पक्ष के वकील विंसेंट मार्की ने पुलिस पर आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के इस सख्त रवैये के बाद परिवार को डराने की मंशा से 3 अप्रैल, 2026 को पुलिस ने अनंत महतो के बुजुर्ग चाचा सम्पद महतो को थाने ले जा कर उन के साथ मारपीट की.

विंसेंट मार्की ने कोर्ट में कहा, सम्पद महतो के साथ थाने में हुई इस मारपीट की जानकारी 7 अप्रैल को हम ने हाईकोर्ट के समक्ष लिखित तौर पर रखी. इस पर हाईकोर्ट ने बोकारो एसपी के साथ डीजीपी झारखंड को भी तलब किया.  हाईकोर्ट ने 7 मार्च को दिए अपने लिखित आदेश में एसपी को चेतावनी दी. हाईकोर्ट ने कहा, यह स्पष्ट किया जाता है कि याचिकाकर्ता या उस के परिवार के सदस्यों के साथ कोई भी अप्रिय घटना घटित होने पर, बोकारो के एसपी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे.

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद डीजीपी तदाशा मिश्रा ने सीआईडी की डीआईजी संध्या रानी मेहता को जांच सौंपी. दूसरी तरफ एसपी हरविंदर सिंह ने डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में एक नई एसआईटी टीम का गठन किया. 9 अप्रैल को गठित एसआईटी ने 10 अप्रैल, 2026 को जांच शुरू कर दी.

हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान एसपी हरविंदर सिंह से पूछा  कि एफआईआर दर्ज होने में 13 दिन क्यों लग गए? इस सवाल पर निलंबित एसएचओ अभिषेक रंजन ने तर्क देते हुए कहा कि परिजन सिर्फ यह चाहते थे कि उन की बेटी मिल जाए. वह कोर्ट में बोले, बेटी का रिश्ता हो जाने के कारण परिजन शुरू में नहीं चाहते थे कि प्राथमिकी दर्ज हो.

इस पर कोर्ट में पुष्पा के पापा अनंत महतो ने कहा, बेटी का रिश्ता तय हो गया था, लेकिन वह ऐसा कभी नहीं चाहते थे कि लापता बेटी की तलाशी के लिए एफआईआर दर्ज नहीं हो. एसएचओ खुद ही प्राथमिकी दर्ज नहीं करना चाहते थे. कोर्ट में अनंत सिंह ने यह भी कहा, एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन पुलिस काररवाई करने से कोसों दूर रही.

इस आरोप पर एसएचओ अभिषेक रंजन ने कोर्ट में कहा, परिजनों के शक के आधार पर हम ने अभियुक्त दिनेश कुमार महतो से कई बार पूछताछ की. उस की सीडीआर रिपोर्ट निकाली, लेकिन अभियुक्त और मृतक पुष्पा के बीच बातचीत का रिकौर्ड नहीं मिला, ऐसे में उसे छोडऩा पड़ा.

कोर्ट की इस फटकार और आदेश के बाद 11 अप्रैल, 2026 को पुलिस ने मुख्य आरोपी दिनेश महतो को गिरफ्तार किया. अगले रोज 12 अप्रैल, 2026 को आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने चास कालेज के पास झाडिय़ों से पुष्पा का कंकाल, उस के कपड़े, बाल और हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद किए. जांच में यह साबित हुआ कि पिंड्राजोरा पुलिस ने जानबूझ कर मामले को दबाया था. इस के बाद एसपी ने पिंड्राजोरा थाने के एसएचओ के साथ सभी 28 पुलिसकर्मियों 10 एसआई, 5 एएसआई, 2 हवलदार और 11 सिपाहियों को निलंबित कर दिया. इस में थानाप्रभारी से ले कर सिपाही तक शामिल थे.

जांच में पता चला कि पुष्पा के मर्डर का आरोपी दिनेश कुमार महतो कई लड़कियों के संपर्क में था. वह पुष्पा के अलावा और भी कई लड़कियों से बातें करता था. इस का सबूत उस के पास से पुलिस द्वारा बरामद किए गए 23 सिमकार्डों और 4 मोबाइल फोंस से मिला.

हत्यारोपी दिनेश वीपीएन नंबर वाले इंटरनेट कालिंग का भी इस्तेमाल किया करता था. यह इंटरनेट कालिंग ही वह कड़ी थी, जिस ने पुलिस को दिनेश की गिरेबान तक पहुंचा दिया. फिर तो पुलिस की जांच में पुष्पा हत्याकांड को ले कर चौंकाने वाले खुलासे हुए.

जांच के दौरान यह शर्मनाक तथ्य भी उजागर हुआ है कि पिंड्राजोरा थाने के एसएचओ और पुष्पा गुमशुदगी केस के आईओ यानी जांच अधिकारी, इस केस के मुख्य आरोपी दिनेश के साथ पार्टी किया करते थे. यहां तक कि पुलिस पदाधिकारियों द्वारा दिनेश कुमार महतो से पैसे लेने की बात भी सामने आई.

बताया गया कि एसएचओ और जांच अधिकारी ने हत्यारोपी को यह भरोसा दिला दिया था कि वह इस केस में आसानी से बच कर निकल जाएगा. किंतु नई एसआईटी गठित होने के बाद वह बच नहीं पाया. एसआईटी ने 4 दिन में ही केस को सुलझा दिया. जबकि पिंड्राजोरा पुलिस ने पुष्पा की गुमशुदगी केस की जांच को जितना टाला जा सकता था, उतना टालने की कोशिश की.

जिस केस को सुलझाने में एसएचओ और जांच अधिकारी अनिकेत कुमार को 8 महीने लग गए, उसे सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में बनाई गई स्पैशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने महज 4 दिनों में सुलझा लिया.

यह सफलता टैक्निकल सर्विलांस के जरिके मिली. हाईकोर्ट की सख्ती के बाद एसआईटी ने जब छानबीन शुरू की तब पता चला कि 21 जुलाई, 2025 को मृतका पुष्पा और हत्यारोपी दिनेश कुमार महतो के मोबाइल की लोकेशन पहले गांव, फिर कालेज और इस के बाद बाजार में एक ही जगह पर थी, जिस का मतलब यह हुआ कि वे दोनों साथ थे. बाजार में ही दोनों की आखिरी मोबाइल लोकेशन मिली थी और फिर फोन बंद हो गया था.

इस के बाद पुलिस ने 21 अप्रैल से पहले और बाद दिनेश महतो की गतिविधियों को बारीकी से छानबीन की. पता चला कि पुष्पा की गुमशुदगी के बाद दिनेश लगातार वीपीएन नंबर वाले इंटरनेट कालिंग का इस्तेमाल किया करता था. वह जानता था कि इस में लोकेशन ट्रेस नहीं की जा सकती है. यही पुलिस के लिए शक का कारण बना. पुलिस को शक हुआ और जब दिनेश से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उस ने सारा राज उगल दिया. पुलिस को दिनेश ने बताया कि उस का बीते 3 सालों से पुष्पा से प्रेम संबंध बना हुआ था. अकसर फोन पर बातचीत करता था. इसी बीच घरवालों ने पुष्पा की शादी तय कर दी थी, इस के बाद पुष्पा उस पर शादी का दबाव बना रही थी. इसी बात से नाराज हो कर उस ने पुष्पा की हत्या की साजिश रची थी और इस साजिश को अमलीजामा भी पहना दिया था.

दिनेश ने सुनियोजित साजिश के तहत 24 जुलाई, 2025 को पुष्पा को चास कालेज के पास मिलने के बहाने बुलाया और फिर कालेज के पीछे के सुनसान जंगल में ले जा कर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर उस की हत्या कर दी. इस के बाद शव को जंगल में छिपा दिया था.

जांच में सामने आया कि पहली एसआईटी टीम और थाना स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई थी. पहले एसएचओ सहित कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और बाद में पूरे थाना स्टाफ व एसआईटी टीम पर काररवाई की गई. अब सभी के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है. पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चाकू भी बरामद कर लिया है. कंकाल की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया जारी है, जिस से पता चल सके कि बरामद कंकाल पुष्पा का ही है.

इस काररवाई पर पुष्पा महतो के पेरेंट्स ने राहत की सांस ली है, लेकिन वह चाहते हैं कि मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए, ताकि अभियुक्त के अलावा निलंबित पुलिसकर्मियों के कारनामों की निष्पक्ष जांच हो. वरना कुछ दिनों के बाद सभी पुलिसकर्मियों का निलंबन खत्म हो जाएगा. वे दोबारा किसी पीडि़त को मिलने वाले न्याय के रास्ते में रोड़ा बनेंगे.

वह आगे कहते हैं, हमारी बेटी तो वापस आ नहीं सकती, लेकिन अभियुक्त को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. अनंत महतो के परिवार में उन की पत्नी रेखा देवी के अलावा और एक 16 साल का बेटा है, जिस की पढ़ाई इस केस की वजह से छूट गई है. अनंत महतो अपने बेटे के भविष्य को ले कर चिंतित हैं, जिन्हें वह राजस्थान की उस कंपनी में भेज चुके हैं, जहां वह खुद मजदूरी करते थे.

क्षेत्रीय लोग पुलिसकर्मियों के निलंबन से संतुष्ट नहीं हैं. वह उन के खिलाफ भी सख्त कानूनी काररवाई कर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं.  Jharkhand Student Missing Case

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...