Chandigarh Diamond Robbery. 22 करोड़ के कर्ज से उबरने के लिए रजनीश और विनोद ने अपनी गहनों की दुकान का 10 करोड़ का बीमा करवाया. इस के बाद उन्होंने 14 करोड़ की डकैती की लूट का ड्रामा कर बीमा कंपनी में क्लेम भी कर दिया. ये क्लेम ले पाते, उस के पहले ही उन की पोल खुल गई और…
पिता की करोड़ों की दौलत को अपने ऐशोआराम व अन्य क्षेत्रों में बिना सोचेसमझे खर्च करने पर एक डायमंड शोरूम के मालिक रजनीश वर्मा और विनोद वर्मा पर 22 करोड़ का कर्ज हो गया था. इस कर्ज से उबरने के लिए उन्होंने अपने ही शोरूम में लूट की ऐसी झूठी साजिश रची कि पता चलने पर लोग दंग रह गए.
शिवदयाल वर्मा चंडीगढ़ के जानेमाने ज्वैलर्स थे. शहर के सैक्टर-17 स्थित प्रमुख शौपिंग सैंटर में शिवा ज्वैलर्स के नाम से उन की दुकान थी, जो खूब अच्छी चलती थी. उन के परिवार में एक बेटी और 2 बेटे थे, रजनीश वर्मा और विनोद वर्मा. उन्होंने तीनों की शादियां कर दी थीं.
बेटी अपनी ससुराल में खुश थी तो दोनों बेटे पिता के साथ ही संयुक्त परिवार में हरियाणा के शहर पंचकूला के सेक्टर-8 में रहते थे. इन्होंने अपनी विशाल कोठी बनवा रखी थी. सन 2015 में शिवदयाल वर्मा की मौत हो गई. इस के बाद रजनीश व विनोद वर्मा ने पिता की जमीजमाई ज्वैलरी की दुकान बंद कर के इसी सेक्टर के एससीओ नंबर 186-187 में ‘फौरएवर डायमंड्स’ नाम से आभूषणों का आधुनिक शोरूम खोल लिया.
इस शोरूम में उन्होंने केवल हीरे के आभूषण रखे. शोरूम की भव्यता देख कर ग्राहकों की चहलपहल बढ़ने लगी. पैसा आया तो दोनों भाई खुले हाथों से खर्च करने लगे. शोरूम में उन्होंने जरूरत से ज्यादा नौकर रख लिए. दोनों भाई शानोशौकत से रहते थे.
उन के पास आधा दरजन महंगी गाडि़यां थीं. घर पर भी कई नौकर रख रखे थे. क्लबों वगैरह में इन के अलावा इन के घर की महिलाएं भी शिरकत किया करती थीं. वर्मा भाइयों के बारे में एक बात यह भी फैली हुई थी कि वे फिल्मों के निर्माण में भी पैसा लगाते हैं.
विनोद वर्मा दिखने में किसी अभिनेता से कम नहीं लगते थे. खैर वर्मा परिवार का सबकुछ बढि़या चलता दिखाई दे रहा था. मगर 1 मई, 2016 को इन के यहां अचानक जैसे कहर बरपा देने वाली घटना घट गई. उन के शोरूम में हथियार बंद बदमाश करीब 14 करोड़ रुपए की डायमंड ज्वैलरी और कई लाख रुपए नकद लूट ले गए.
खबर मिलते ही सैंट्रल थानाप्रभारी उदयपाल, नीलम चौकीप्रभारी भूपिंद्र सिंह टीम के साथ वहां पहुंच गए. थानाप्रभारी उदयपाल की सूचना पर कार्यवाहक एसएसपी मनीष चौधरी, डीएसपी (सैंट्रल) सतीश कुमार, डीएसपी (क्राइम) पवन कुमार, डीएसपी (औपरेशन) सतवीर भी घटनास्थल पर पहुंच गए.
कुछ ही देर में यह खबर पूरे चंडीगढ़ शहर में फैल गई. मीडिया से जुड़े लोग भी वहां पहुंच गए. पुलिस ने शोरूम का बारीकी से निरीक्षण किया तो वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के तार कटे मिले. पुलिस को लगा कि लुटेरों ने यह इस वजह से किया होगा, ताकि कैमरों में उन की तसवीरें न आएं. सीएफएसएल की टीम भी मौके पर बुला ली गई.
वारदात किस तरह हुई, इस बारे में पुलिस ने रजनीश वर्मा और उस के भाई विनोद वर्मा से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि एक दिन उन के शोरूम में एक लड़का डायमंड रिंग देखने आया था. उस ने एक रिंग देखी, जिस की कीमत करीब 3 लाख रुपए थी. इस दौरान वह काफी समय शोरूम में इधरउधर चहलकदमी करता रहा.
बाद में उस ने यह कहा कि वह अपने भाई को साथ ले कर अगले दिन रिंग लेने आएगा. रिंग के साथसाथ उस ने कुछ अन्य गहने खरीदने की भी बात कही थी. वह शोरूम के गेट तक ही पहुंचा था कि वापस लौट कर बोला, ‘‘लेकिन कल तो इतवार है, आप की दुकान बंद रहेगी. ऐसे में कल के बजाय परसों आऊं क्या?’’
‘‘नहीं, आप कल ही आ जाना. सफाई आदि के लिए दोपहर 2 बजे तक दुकान खुली रहेगी.’’ विनोद वर्मा ने कहा.
रजनीश ने बताया कि इतवार के दिन मार्केट बंद रहती है लेकिन दुकान की साफसफाई करवाने के लिए दोनों भाई एक वर्कर के साथ अपने शोरूम पर पहुंच गए. ओवरटाइम देने की बात कह कर उन्होंने अपने मैनेजर को भी बुला लिया था.
दोपहर करीब 12 बजे वह लड़का एक लड़की तथा एक अन्य लड़के के साथ आया. जो रिंग उस ने पसंद की थी, वह उस ने अपने साथ आए लोगों को दिखाई. इस के बाद अंगुली में डाल कर तुरंत उतारते हुए टाइट होने की बात कही.
विनोद वर्मा ने रिंग ले कर सही करवाने के लिए अजय के हाथों सेक्टर- 35 स्थित वर्कशाप में भेज दी. महिला मैनेजर भी उस वक्त वहीं मौजूद थी. इस के बाद साथ आए लड़के ने हीरे की बहुत बढि़या लेडीज रिंग दिखाने को कहा. वह रिंग निकालने के लिए सेफरूम की तरफ बढ़े, तभी पीछे से आ कर एक लड़के ने उन की कनपटी पर पिस्तौल सटा कर दबी जुबान में धमकाने वाले अंदाज में कहा, ‘‘तुम्हारे भाई को मेरे साथी ने दबोच लिया है. उस के पास भी पिस्टल है. अब चुपचाप मेरे साथ चल कर दुकान के सारे हीरेजवाहरात हमारे हवाले कर दो.’’
इसी के साथ महिला मैनेजर को भी हड़का दिया, ‘‘तू भी ध्यान से सुन ले मैडम, जरा भी होशियारी दिखाने की कोशिश की तो इन दोनों के अलावा तुझे भी दूसरी दुनिया में पहुंचा देंगे.’’
महिला मैनेजर सहम कर एक तरफ बैठ गई तो उन के साथ आई लड़की ने उसे भी काबू कर लिया. विनोद वर्मा उस लड़के के साथ भीतर की तरफ चल पड़े. लड़की महिला मैनेजर को भी धकेल लाई. इस तरह कुछ ही देर में लुटेरे शोरूम से डायमंड ज्वैलरी के अलावा नकदी ले कर रफूचक्कर हो गए.
जाते समय वे सीसीटीवी कैमरों से भी छेड़खानी कर गए. लूटपाट के बाद वे सभी को केबिन में लौक कर गए थे, जहां का कांच तोड़ कर सभी बाहर निकले थे.
रजनीश ने पुलिस को बताया था कि लुटेरे करीब 14 करोड़ की डायमंड ज्वैलरी के अलावा दुकान में रखे 10 लाख रुपए नकद ले गए थे. सीएफएसएल टीम ने विभिन्न जगहों से 5 तरह के फिंगरप्रिंट उठाए. पुलिस ने करोड़ों की लूट के इस मामले पर त्वरित काररवाई शुरू कर दी.
इस की वजह यह थी कि पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र के कई ज्वैलर्स लुटेरों का निशाना बन चुके थे. सन 2011 में उत्तर प्रदेश से आए लुटेरों ने मनीमाजरा में तनिष्क ज्वैलर्स के शोरूम में 10 करोड़ के गहने लूटे थे. हालांकि पुलिस ने इस केस का खुलासा कर गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार कर लूटे गए गहने बरामद कर लिए थे.
लेकिन जांच में पुलिस की खामियां इस कदर सामने आईं कि अदालत में सुनवाई के बाद सभी आरोपी बरी हो गए थे. इस के बाद ट्राईसिटी (चंडीगढ़-पंचकूला-मोहाली) में ज्वैलर्स को लूटने की अनेक वारदातें हुईं. लेकिन इन में से केवल एक ही मामला पुलिस सुलझा सकी थी.
इन में एक मामला तो बहुत चर्चित हुआ था. चंडीगढ़ के सेक्टर-22 स्थित करण ज्वैलर्स के यहां दिनदहाड़े एक लुटेरे ने भीतर घुस कर सेल्समैन के सिर में गोली मार कर 8 लाख कीमत की चेनें लूट ली थीं.
वारदात को अंजाम देने के बाद लुटेरा मार्केट में सरेआम पिस्तौल लहराता हुआ पैदल ही फरार हो गया था. मजे वाली बात यह थी कि उस ने अपना चेहरा भी छिपाने की कोशिश नहीं की थी. दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में उस की पूरी करतूत रेकौर्ड हो जाने के बावजूद पुलिस आज तक इस मामले को हल नहीं कर पाई.
लुटेरे का सुराग देने वाले को 50 हजार रुपए का इनाम देने की भी पुलिस ने घोषणा कर रखी है. फोरएवर डायमंड शोरूम में हुई यह लूट अब तक की सब से बड़ी लूट थी. इसलिए चंडीगढ़ की तमाम पुलिस फोर्स इस मामले की जांच में लग गई. वर्मा बंधुओं और मैनेजर से बात करने के बाद यही पता चला कि तीनों लुटेरों की उम्र 25 से 30 साल के बीच थी.
रजनीश वर्मा की तहरीर पर सैंट्रल थाना में अज्ञात लुटेरों के खिलाफ भादंवि की धारा 392/34 एवं शस्त्र अधिनियम की धाराओं 25/59 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया. उन के हुलिए के आधार पर स्कैच तैयार करवाए गए.
पुलिस इस मामले में पूरा जोर लगाए हुए थी. सीआईए की टीम को मार्केट में लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों से वांछित फुटेज हासिल करने में सफलता मिल गई. औपरेशन सैल की टीम ने दुकान पर होने वाली हीरेजवाहरात की खरीदोफरोख्त से संबंधित तमाम कागजात चैक कर के कुछेक बिलों के संदेहास्पद होने की बात जाहिर की.
इस के बावजूद एसएसपी के आदेश पर 5 मई, 2016 को डीएसपी (सैंट्रल) सतीश कुमार व सैंट्रल थाना के थानाप्रभारी उदयपाल की निगरानी में केस की विवेचना का काम सैंट्रल थाना के वरिष्ठ एएसआई शिवचरण को सौंप दिया गया.
शिवचरण ने शुरुआत से मामले की तफ्तीश शुरू की. संबंधित फुटेज देख कर सब से पहले उन के मन में यही बात आई कि अपराधी क्या पहले ही घात लगाए बैठे थे. उन फुटेज के अनुसार, शोरूम का शटर नौकर ने दोपहर 12 बज कर 7 मिनट पर खोला था. इस के ठीक एक मिनट बाद 12 बज कर 8 मिनट पर सामने सड़क पर मौजूद पार्किंग में खड़ी कारों के पीछे से आ कर लुटेरे शोरूम में दाखिल होते दिखाई दिए.
उन में सब से पहले काले रंग का बैग पकड़े एक युवक आता दिखाई दे रहा था. उस के पीछे एक युवती व अन्य युवक दाखिल होते दिखाई दिए. महज 18 मिनट में वारदात को अंजाम देने के बाद वे 12 बज कर 26 मिनट पर शोरूम से बाहर निकलते दिखाई दिए. इस के बाद वे शोरूम की साइड से होते हुए पिछली तरफ को जाते हुए सीसीटीवी की आंखों से ओझल हो गए थे.
पुलिस ने सभी मोबाइल कंपनियों से यह जानकारी हासिल कर ली की उस दिन दोपहर 12 बजे से एक बजे तक उस क्षेत्र में कितने मोबाइल नंबर ऐक्टिव रहे. यह संख्या हजारों में थी. पुलिस जांच में उन में कुछ संदिग्ध नंबर दिखे. उन संदिग्ध नंबरों की गंभीरता से जांच की गई तो उन से केस के खुलासे में कोई मदद नहीं मिली.
और तो और पुलिस यह भी पता नहीं लगा पाई कि लुटेरे गाड़ी में वहां से निकले थे या पैदल. इस तरह की कुछ वारदातें दिल्ली में भी हुई थीं. इसलिए वहां से क्राइम ब्रांच व साइबर सैल के अधिकारियों को चंडीगढ़ पुलिस ने तफ्तीश में मदद के लिए बुला लिया.
कुछ सयम पहले पटियाला में मुथूट फाइनैंस कंपनी से 3 करोड़ के गहने लूटे गए थे, जिस में 2 युवतियां व 4 युवक शामिल थे. इस गिरोह पर भी शक किया गया. ये सभी जेल में बंद थे. कोर्ट से विशेष अनुमति ले कर उन से भी पूछताछ की गई. पर किसी तरह की कोई लीड पुलिस के हाथ न लगी.
एकदम शुरुआत से की गई अपनी व्यापक छानबीन के बाद शिवचरण ने 13 पौइंट के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर के एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल के समक्ष पेश कर सिफारिश की कि इस केस में धाराएं 392/34 एवं 25/54/59 हटा कर भादंवि की धाराओं 420/467/468/471/271/120बी का समावेश करते हुए फौरएवर डायमंड शोरूम के मालिक रजनीश वर्मा, विनोद वर्मा व कुछ अन्य लोगों को नामजद कर इस केस का दोषी मानते हुए गिरफ्तार किया जाए.
एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल के समक्ष उन्होंने जो 13 पौइंट बना कर रखे थे, उन का सारांश कुछ इस तरह से था.
इस केस में कहीं कोई डकैती नहीं हुई थी. डकैती का ड्रामा रचते हुए रजनीश वर्मा व विनोद वर्मा ने इस एवज में एक बीमा कंपनी से एक बहुत मोटी रकम का क्लेम हासिल करने के लिए फिल्मी अंदाज में षड्यंत्र रचा था. इस में एक है हितेष अरोड़ा, निवासी सैक्टर 36बी चंडीगढ़. यह सेक्टर 37 स्थित सिद्धार्थ ज्वैलर्स के मालिक हैं.
2 मई, 2015 को विनोद वर्मा व रजनीश वर्मा ने करीब ढाई करोड़ रुपए के हीरों के जेवरातों की खरीद का जाली बिल ले लिया था. इसी तरह विनोद वर्मा ने सेक्टर 17 चंडीगढ़ स्थित मैसर्स फेयरडील्स एंटरप्राइजेज से 5 करोड़ रुपयों का फर्जी बिल लिया था. यह फर्म ज्वैलरी व बिजली का सामान बेचने का काम करती है. इस के मालिक का नाम है शेखर कक्कड़.
विनोद वर्मा इस फर्म में पार्टनर था. जाली बिल तैयार करने के बाद उस ने इस पर शेखर कक्कड़ के दस्तखत भी खुद ही कर लिए थे. शिवचरण के अनुसार उन्हें यह मामला डकैती का नहीं लग रहा था. इसलिए उन्होंने अपने मुखबिरों का जाल बिछाते हुए इसी ऐंगल पर काम किया था.
उन्होंने हितेश अरोड़ा व शेखर कक्कड़ को विश्वास में ले कर उन से सच्चाई निकलवाने के बाद फौरएवर डायमंड शोरूम के मैनेजर अजय कुमार, काउंटर इंचार्ज चारू व सरिता के साथ कुछ अन्य कर्मियों को थाने ले जा कर पूछताछ की थी. इस के बाद सीआरपीसी की धारा 161 के तहत उन के बयान चंडीगढ़ के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी हृदयजीत सिंह के सम्मुख भी करवा दिए थे.
शोरूम के चपरासी मोहन के भी अदालत में बयान करवाए गए. इन सब के बताए अनुसार, शोरूम में जेवरात कुल डेढ़ करोड़ कीमत के थे, जबकि वर्मा भाइयों ने हिसाबकिताब में 14 करोड़ रुपयों से अधिक का स्टौक दिखाया था.
हालांकि वर्मा भाइयों ने यह काम बड़े शातिर तरीके से किया था, लेकिन उन की योजना की भनक एकएक कर के उन के कई कर्मचारियों को लग गई थी. एक बार उन्होंने अपने कर्मियों को हड़काया भी था कि अगर वे लोग अपनी नौकरी बरकरार रखना चाहते हैं तो इस मामले में भूल कर भी बाहर के किसी आदमी को कुछ नहीं बताएंगे.
अभी काफी कुछ साफ होना था. एसएसपी के आदेश पर केस में पुरानी धाराएं हटा कर नई धाराएं लगा कर विनोद वर्मा व रजनीश वर्मा को अभियुक्त के रूप में नामजद करवा कर उन्हें गिरफ्तार करने के आदेश कर दिए गए. जैसे ही यह खबर रजनीश वर्मा को लगी, उस ने जहर खा लिया.
तबीयत बिगड़ी तो घर वाले उसे पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल ले गए. वहां के डाक्टरों ने पुलिस को खबर दे दी. अपने खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मामला बनते देख रजनीश वर्मा ने यह कहना शुरू कर दिया कि उन्होंने गलती से अपने डौग की दवा खा ली थी.
किसी तरह यह मामला रफादफा हो गया, लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए वह अस्पताल में ही भरती रहे, साथ ही यह भी कहते रहे कि वह पुलिस को हर तरह का सहयोग करने को तैयार है. इस के 2 दिनों बाद विनोद वर्मा भी तबीयत खराब होने की बात कह कर पंचकूला के एक निजी अस्पताल में दाखिल हो गया. मीडिया के जरिए दोनों भाई अपने निर्दोष होने की गुहार भी लगाते रहे.
8 मई, 2016 को रजनीश वर्मा बिना किसी से कुछ कहे अस्पताल से चला गया. पता चला कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वह फरार हो गया था. अगले दिन विनोद वर्मा ने अपनी बीमारी का हवाला देते हुए कोर्ट में अपनी अग्रिम जमानत की अरजी दाखिल कर दी.
उसी दिन उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, रजनीश का कोई सुराग नहीं लग पाया. 10 मई को अदालत ने विनोद की अग्रिम जमानत की अरजी पर पुलिस को समन किया तो पुलिस ने तत्काल उसे हिरासत में ले लिया.
शुरुआती पूछताछ में विनोद वर्मा ने अपना अपराध कबूल करते हुए पुलिस के साथ अपने घर जा कर अपनी पत्नी के पास से डेढ़ करोड़ रुपए की ज्वैलरी बरामद करवा दी.
अगले दिन कस्टडी रिमांड हासिल करने के लिए विनोद वर्मा को जब सीजेएम आकाशदीप महाजन की अदालत पर पेश करने को ले जाया गया तो पेशी के दौरान उस ने कोर्ट में कहा, ‘‘जो कुछ हुआ, बहुत गलत हुआ. मैं पुलिस को पूरा सहयोग करूंगा. इस से सोसाइटी में मेरी बहुत बेइज्जती हुई है. मुझे सुधरने का एक मौका दिया जाए. पुलिस कस्टडी में मुझ पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल न किया जाए. मैं हार्डकोर क्रिमिनल नहीं बनना चाहता.’’
फिलहाल अदालत ने विनोद को 7 दिनों के पुलिस रिमांड पर देते हुए उस का रोजाना मैडिकल करवाने के आदेश भी पुलिस को दिए. रिमांड अवधि में पुलिस ने विनोद वर्मा से मनोवैज्ञानिक आधारों पर व्यापक पूछताछ की. इस पूछताछ में उस ने जो कुछ बताया, उस से 14 करोड़ के डायमंड ज्वैलरी की कथित लूट के पीछे का सच कुछ इस तरह सामने आया—
जब तक शिवदयाल वर्मा जिंदा रहे, अपने परिवार और कारोबार को उन्होंने व्यवस्थित तरीके से संभाल रखा था. उन के देहांत के बाद यह परिवार सपनों की दुनिया में विचरने लगा. इन लोगों ने रईसी ठाटबाट से रहते हुए पैसे को पानी की तरह बहाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
इन्हें फिल्मों में पैसा लगा कर उस में छोटामोटा रोल करने का भी चस्का था. कारोबार की तरफ इन का ज्यादा ध्यान नहीं था. लिहाजा बिजनैस घाटे में जाने लगा. इन लोगों ने बैंक से 5 करोड़ की लिमिट ले रखी थी, जो पूरी हो चुकी थी. बैंक वाले लोन की रकम पर मोटा ब्याज लगा कर पैसा वापस करने का दबाव बनाने लगे.
मार्केट से भी इन्होंने काफी लोगों से पैसा ले रखा था. देखतेदेखते ये 22 करोड़ के कर्ज के नीचे आ गए. दुकान मालिक से इन का कोर्ट केस चल रहा था, जिस में ये हार गए थे. अदालत ने दुकान 2 महीने के भीतर खाली करने के आदेश दे दिए थे.
जाहिर था कि अब इन्हें यह शोरूम छोड़ कर कहीं और ठिकाना बनाना था. कोई बड़ी मुसीबत आने वाली है, यह साफ दिखाई दे रहा था. इस मुसीबत से छुटकारा पाने का इन्हें कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था.
एक दिन शराब पीते समय दोनों भाइयों ने टीवी पर एक ऐसी फिल्म देखी, जिस में डायमंड लूटने का दृश्य था. बस यहीं से उन के दिमाग में खुराफात शुरू हो गई. योजना बना कर उन्होंने कारोबार का 10 करोड का बीमा करवा लिया. नासिक में गहनों का कारोबार करने वाले इन के एक दोस्त ने इन्हें 3 नकली लुटेरे मुहैया करवा दिए.
29 अप्रैल शुक्रवार को ही रजनीश शोरूम के सारे गहने व डायमंड्स उठा कर ले गया. इस में से 65 लाख की ज्वैलरी उस ने अपने दोस्त शेखर कक्कड़ के पास रख दी थी. डेढ़ करोड़ रुपयों के जेवरात अपने घर में रख लिए थे. शनिवार को विनोद ने सोना काटने वाले कटर से सीसीटीवी के डीवीआर की तारें काटीं और इसे अपने साथ ले गया.
विनोद वर्मा और रजनीश वर्मा ने काफी चतुराई से वारदात को अंजाम दिया. पहले उस ने दुकान के वर्करों को सैट किया. उस के बाद पूरे नाटक की स्क्रिप्ट तैयार कर के इसे अपनी तरफ से बड़ी खूबसूरती से अंजाम देने का प्रयास किया.
इन के यहां किसी ने कोई रैकी नहीं की थी, न ही कथित लूट में किसी गन का इस्तेमाल हुआ था. 2 लड़कों और 1 लड़की को नकली लुटेरे बना कर विनोद खुद ही अपनी कार में ले कर आया था. अपने शोरूम से कुछ ही दूरी पर ब्रिज मार्केट के पास उस ने इन्हें उतार दिया था. वहां से वे पैदल चल कर शोरूम में आए और लूटपाट का ड्रामा कर के पैदल ही चले गए.
इस के बाद विनोद ने खुद इन्हें कार में बिठा कर बसअड्डे के चौक पर छोड़ा और खुद थाने जा कर अपने यहां डकैती का शोर मचा दिया. इस बीच रजनीश ने भी 100 नंबर पर पुलिस कंट्रोल रूम को इस बारे में सूचित कर दिया था.
चंडीगढ़ पुलिस में नए आईजी के रूप में आए तेजिंदर सिंह लूथरा ने केस को गंभीरता से लेते हुए इसे हल करने में अपना पूरा जोर लगा दिया था. आखिर डायमंड फौरएवर के कर्मचारियों के माध्यम से सारी सच्चाई सामने आ गई. संदेह के आधार पर पूछताछ करने की खातिर पुलिस ने वर्मा भाइयों को लिखित रूप से थाने तलब किया.
लेकिन थाना आने के बजाय दोनों भाई अस्पतालों में दाखिल हो गए, जहां से बड़ा भाई फरार हो गया और छोटा पुलिस हिरासत में आ गया. विनोद वर्मा ने यह आरोप तो माना कि उस ने 3 नकली लुटेरे शोरूम में बुलाए थे, पर वह उन के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानता था. उस का कहना था कि उन लोगों की व्यवस्था उस के नासिक वाले परिचित ने की थी. अब वह भी गायब है.
खैर, गुप्त सूचना के आधर पर 12 मई को सेक्टर-40 के एक घर से वैभव कुमार, अंकुर जौली और शिवानी को पकड़ लिया गया. साधारण पढ़ेलिखे ये तीनों छोटीमोटी नौकरियां करते हुए अदाकारी से भी जुड़े थे. इन्होंने कुछ नाटकों वगैरह में किरदार निभाएं थे. इन के एक परिचित ने इन्हें बताया कि एक फिल्म बन रही है, जिस में वह इन्हें डकैतों का रोल दिलवा सकता है.
तीनों मान गए. 1 मई, 2016 को इन्हें रिहर्सल की बात कह कर दुकान पर लाया गया. बाद में मीडिया के जरिए जब और ही मामला सामने आया तो ये घबरा कर अंडरग्राउंड हो गए.
पुलिस ने इन्हें अदालत पर पेश कर के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. रजनीश वर्मा अभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा था. आखिर मुखबिरी के आधार पर घटना के ठीक 1 महीने बाद पहली जून, 2016 को उसे भी चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित मुख्य बसअड्डे से काबू कर लिया गया.
पूछताछ में उस ने भी पुलिस को वही सब बताया, जो विनोद पहले ही बता चुका था. अलग से इस ने यही बताया कि सबूत मिटाने के लिए इस ने सीसीटीवी की डीवीआर ले जा कर घग्गर नदी में फेंक दी थी. कांड करते ही इन्होंने 14 करोड़ के नुकसान की बात कह कर इंश्योरेंस कंपनी में 10 करोड़ के क्लेम की अर्जी भी लगा दी थी, साथ ही बैंक को भी सूचित कर दिया था.
कथा तैयार करने तक वैभव, अंकुर व शिवानी की जमानत हो चुकी थी. मगर लाख प्रयास करने के बाद भी रजनीश वर्मा और विनोद वर्मा को जमानत नहीं मिल पाई थी. दोनों भाई न्यायिक हिरासत के तहत बुड़ैल जेल में बंद थे. 32 गवाहों की सूची के साथ पुलिस ने 5 जून को आरोपियों के खिलाफ चालान तैयार कर अदालत में पेश कर दिया था.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






