Extramarital Affair Murder. शादीशुदा नूरजहां ने अविवाहित प्रेमी राशिद से निकाह करने के लिए एक फूलप्रूफ योजना बनाई. इस से पहले कि उन की मंशा पूरी हो पाती, दोनों को जेल की हवा खानी पड़ गई.

25 जुलाई, 2016 को सुबह के करीब 9 बजे थे. पल्हरी गांव के एक व्यक्ति ने बांदा पुलिस को फोन से सूचना दी कि बबेरू रोड पर फूटा कुआं के करीब एक निर्माणाधीन मकान के पास झाडि़यों में एक आदमी की खून से लथपथ लाश पड़ी है. लाश के पास ही हाथ से खींचने वाला ठेला भी खड़ा है. लाश की सूचना पाते ही थानाप्रभारी के.पी. सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए. तब तक वहां गांव के अनेक लोग जमा हो चुके थे. लोगों ने मृतक की पहचान अंसार के रूप में की.

थानाप्रभारी के.पी. सिंह ने मौके की वीडियोग्राफी करवाई. इस के बाद लाश का बारीकी से निरीक्षण किया. किसी ने उस का गला काट कर उस की हत्या कर दी थी. लोगों ने बताया कि वह बांदा शहर के आजादनगर में रहता था. पुलिस ने हत्या की खबर उस के घर पहुंचवा दी.

कुछ देर बाद रोतीबिलखती उस की पत्नी नूरजहां घटनास्थल पर पहुंच गई. उस ने लाश की पुष्टि अपने पति अंसार के रूप में की. मौके की जरूरी काररवाई पूरी करने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया और अंसार की पत्नी नूरजहां की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली.

नूरजहां ने बताया कि उस का पति सीधा व सरल स्वभाव का था. उस का कभी किसी से झगड़ा तक नहीं हुआ था. किसी से रंजिश भी नहीं थी. फिर भी पता नहीं किस ने उन की जान ले ली?

थानाप्रभारी ने नूरजहां से अंसार के खास दोस्तों सहित उस के घर आनेजाने वालों के बारे में पूछताछ की और उन के नामपते व मोबाइल नंबरों की जानकारी हासिल की. जिस मकान में अंसार रहता था, उस के मकान मालिक, किराएदारों सहित पड़ोसियों से भी अलगअलग पूछताछ की.

पुलिस को पता चला कि अंसार करीब 2 सालों से उस मकान में रह रहा था. वह हाथ से खींचने वाले ठेले से सामान इधर से उधर पहुंचाता था. वह बेहद सीधा और मेहनतकश इंसान था. पड़ोसियों से भी वह बहुत कम बातें करता था. सुबह 10 बजे खापी कर घर से ठेला ले कर चला जाता था तो रात को करीब 10 बजे घर आता था.

पुलिस को अहम जानकारी यह मिली कि बांदा के ही मोहल्ला हाथीखाना अलीगंज का रहने वाला राशिद अकसर अंसार के घर आताजाता था. वह अंसार की गैरमौजूदगी में भी उस के यहां आयाजाया करता था. राशिद को ले कर अंसार का अपनी पत्नी से विवाद होता रहता था. करीब एक महीने से नूरजहां और अंसार के बीच विवाद ज्यादा बढ़ गया था.

तमाम जानकारियां हासिल करने के बाद पुलिस को शक हुआ कि अंसार की हत्या में राशिद और नूरजहां का हाथ हो सकता है. सच्चाई जानने के लिए पुलिस ने नूरजहां और राशिद के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से पुलिस को जानकारी मिली कि राशिद व नूरजहां की आपस में घंटों बातें होती रहती थीं.

इस के अलावा घटना वाली रात राशिद के मोबाइल फोन की लोकेशन घटनास्थल के आसपास थी. थानाप्रभारी को जो शक था, उस के आधार पर की जा रही जांच सही दिशा में जा रही थी. लिहाजा उन्होंने राशिद के घर दबिश दी, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. घर वालों ने पुलिस को बताया कि 25 जुलाई को अपने रिश्तेदारों के यहां झांसी गया है.

उस के घर वाले कहां तक सच बोल रहे हैं, यह जानने के लिए पुलिस ने राशिद के दोनों मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया. पर उस के दोनों फोन स्विच्ड औफ थे.

इस से राशिद की लोकेशन नहीं मिल रही थी. थानाप्रभारी के.पी. सिंह ने राशिद का पता लगाने के लिए मुखबिरों को लगा दिया.

28 जुलाई, 2016 को एक मुखबिर ने सूचना दी कि राशिद एक व्यक्ति के साथ बांदा रेलवे स्टेशन पर है. वह कहीं जाने की तैयारी में है. सूचना पा कर थानाप्रभारी के.पी. सिंह, अलीगंज चौकीप्रभारी दुर्ग विजय सिंह, एसआई रामबाबू यादव, राकेश सरोज के साथ मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने राशिद और उस के साथ मौजूद व्यक्ति को हिरासत में ले लिया. उस के साथ जो शख्स मौजूद था, वह उस का फूफा सईद था. थाने ला कर दोनों से अलगअलग पूछताछ शुरू की गई.

काफी देर तक राशिद व सईद पुलिस को गुमराह करते रहे. लेकिन पुलिस ने दोनों के सामने मोबाइल की काल डिटेल्स और अन्य साक्ष्य रखते हुए सख्ती की तो राशिद टूट गया और उस ने अंसार की हत्या करने की बात स्वीकारते हुए उस की हत्या करने की जो कहानी बताई, इस प्रकार निकली—

नूरजहां उत्तर प्रदेश के बांदा शहर के आजाद नगर के रहने वाले अंसार की बीवी थी. उस की 3 बेटियां थीं. लेकिन 3 बच्चों के जन्म के बाद भी उस की खूबसूरती पर कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था.

राशिद खां बांदा शहर के मोहल्ला हाथीखाना अलीगंज में परिवार सहित रहता था. घर के बाहर ही उस की कबाड़ की दुकान है, जिस से उसे अच्छी कमाई होती थी.

करीब 4 साल पहले की बात है. राशिद की दुकान के पास ही बांके के मकान में अंसार ने कमरा किराए पर लिया था. जिस दिन अंसार उस कमरे में अपना सामान शिफ्ट कर रहा था, उसी दिन राशिद ने नूरजहां को देखा तो उस की निगाहें नूरजहां के खूबसूरत चेहरे पर टिक गई थीं. नूरजहां ने भी जब राशिद को पलट कर देखा तो वह भी मुसकरा पड़ी. फिर हंसते हुए पलट कर मकान के अंदर चली गई.

इस मुसकराहट ने राशिद के दिल में हलचल मचा दी. उस की स्थिति यह हो गई थी कि खातेपीते, सोतेजागते नूरजहां का खूबसूरत चेहरा ही उस की आंखों के सामने नाचता रहता था. राशिद जब भी अपनी दुकान पर आ कर बैठता, बांके के मकान की ओर ताकता रहता था.

नूरजहां जब कभी परचून की दुकान पर जाती, उस की निगाहें राशिद से जरूर मिल जाती थीं. फिर वह मुसकरा देती थी. इस से राशिद को लगने लगा कि नूरजहां भी उसे चाहती है. इस तरह नूरजहां की कातिल अदाएं राशिद के अंदर प्यार की तड़प और बेकरारी को बढ़ाती जा रही थीं.

एक दिन जब नूरजहां राशिद की दुकान के पास से निकली, तो राशिद ने हिम्मत कर के उसे आंख मार दी. नूरजहां ने कुछ नहीं कहा, बल्कि मुसकराते हुए घर चली गई.

उस की मुसकान ने राशिद के दिल में यह विश्वास कर दिया कि वह भी उसे चाहती है. फिर क्या था, राशिद की हिम्मत बढ़ गई और धीरेधीरे उस के कदम नूरजहां की ओर बढ़ने लगे.

वह उस से मिलने के लिए उस के कमरे पर जाने लगा. नूरजहां ने उसे बताया कि उस का पति अंसार हाथ से खींचने वाले ठेले पर माल ढुलाई का काम करता है. वह मुफलिसी में अभावग्रस्त जिंदगी गुजार रही है. यह बात उस के घर की हालत और बातचीत से राशिद अच्छी तरह समझ गया था. राशिद जान गया कि नूरजहां की जिंदगी में बाहर से भले ही उजाला है, लेकिन अंदर से वह वीरान है. इसी वजह से नूरजहां के प्यार में पागल राशिद अपनी ज्यादातर कमाई नूरजहां के ऐशोआराम पर खर्च करने लगा.

करीब 3 साल पहले की बात है. कड़ाके की ठंड पड़ रही थी. ठंड से बचने के लिए सभी लोग अपनेअपने कमरों में दुबके थे. संयोग से उस दिन कमरे में राशिद और नूरजहां अकेले थे. उस का पति अपने काम पर गया हुआ था. दोनों बेफिक्र हो कर बातें कर रहे थे. बातें करतेकरते अचानक खामोशी छा गई. आंखोंआंखों में दोनों ओर से वासना उमड़ने लगी. दोनों ही खुद को रोक न पाए और उन्होंने अपनी हसरतें पूरी कर लीं.

अविवाहित राशिद ने पहली बार शारीरिक सुख पाया था, इसलिए वह नूरजहां का दीवाना हो गया. इस के बाद इन का यह खेल चलता रहा. नूरजहां के चक्कर में राशिद अपने कामधंधे की अनदेखी करने लगा. अंसार के घर से चले जाने के बाद वह नूरजहां के कमरे पर ही पड़ा रहता था.

जिस तरह बेखौफ हो कर राशिद व नूरजहां एकदूसरे से प्यारमोहब्बत करते थे, उस से दोनों के प्रेमप्रसंग के चर्चे मोहल्ले में होने लगे.

जब इन चर्चाओं की खबर अंसार के कानों तक पहुंची तो वह आगबबूला हो गया. उस ने नूरजहां को डांटा. उस ने उसे चेतावनी भी दी कि राशिद से न ही मिले तो बेहतर रहेगा. लेकिन राशिद के प्यार में पागल हो चुकी नूरजहां नहीं मानी. राशिद भी दबंगई दिखा कर अंसार के घर आताजाता रहा.

अंसार वास्तव में तन, मन और धन से बेहद कमजोर था. इसलिए जब उसे राशिद घर में मिलता तो चाहते हुए भी उस का विरोध नहीं कर पाता था, पर उस के जाते ही पत्नी से झगड़ता था. जब अंसार से सहा न गया तो उस ने बांके का वह कमरा खाली कर दिया और बांदा शहर के मोहल्ला आजादनगर में किराए का कमरा ले कर रहने लगा.

पर नूरजहां ने राशिद को अपना नया पता भी बता दिया तो राशिद नूरजहां से मिलने आजाद नगर स्थित कमरे पर जाने लगा.

अंसार को पता चल गया कि राशिद अब भी नूरजहां से मिलने आता है तो वह नूरजहां पर राशिद से दूर रहने का दबाव बनाने लगा. धीरेधीरे इस बात को ले कर अंसार व नूरजहां के बीच तनाव बढ़ने लगा.

राशिद के प्यार में पागल हो चुकी नूरजहां अंसार के नियंत्रण से एक तरह से बेकाबू हो चुकी थी, जिस से अंसार उसे अकसर धमकी देता था कि अगर उस ने राशिद से मिलना नहीं छोड़ा तो अब की बार इतनी दूर कमरा लेगा, जहां राशिद चाह कर भी नहीं पहुंच पाएगा.

नूरजहां ने अपने प्रेमी राशिद से यह बात बताई तो राशिद को लगा कि अगर अंसार ने ऐसा कर दिया तो नूरजहां उस के हाथ से निकल जाएगी.

लिहाजा उस ने तय कर लिया कि वह ऐसा हरगिज नहीं होने देगा. उस ने नूरजहां से निकाह करने का मन बना लिया. वह नूरजहां से बोला, ‘‘नूरजहां, मैं तुम्हें अपने से दूर नहीं जाने दूंगा और एक पल की दूरी नहीं सह सकता. मैं चाहता हूं कि तुम बच्चों को छोड़ कर मेरे साथ खुल कर रहो, जो भी होगा, हम देख लेंगे. अगर धोखे से अंसार तुम्हें ले कर कहीं दूर चला गया तो मैं अकेला जी नहीं पाऊंगा.’’

अपने शौहर अंसार से मार खाखा कर और ताने सुनसुन कर पूरी तरह ऊब चुकी नूरजहां बोली, ‘‘जब तक अंसार जिंदा रहेगा, तब तक मैं ऐसा कोई कदम नहीं उठा पाऊंगी. क्योंकि हमारे मायके वाले अंसार के जीतेजी ऐसा किसी कीमत पर नहीं करने देंगे.’’

जब राशिद और नूरजहां को एकदूसरे से बिछुड़ने के हालात दिखे तो उन्होंने एक खौफनाक योजना तैयार कर ली. दोनों ने अंसार की हत्या करने का पक्का इरादा बना लिया.

हत्या करने के लिए अंसार को एकांत जगह पर ले जाने के लिए राशिद ने अपने फूफा रईस से सहयोग मांगा. एक तरह से कहा जाए तो दोनों में जो रिश्ता था, केवल नाम था. उन दोनों में हद से ज्यादा गहरी दोस्ती थी. इस कारण सईद ने अंसार की हत्या करने में सहयोग करने के लिए हां कर दी.

योजना के मुताबिक सईद 23 जुलाई, 2016 को रात 8 बजे के लगभग जामा मस्जिद के पास अंसार से मिला. सईद ने अंसार से कहा कि पल्हरी स्थित एक फ्लैट से कबाड़ उठाना है. अंसार को सईद मुंहमांगा भाड़ा देने को तैयार हो गया. अंसार ठेला ले कर सईद के साथ चल पड़ा.

गांव पल्हरी के फूटा कुआं के पास सुनसान में एक निर्माणाधीन मकान के पास जैसे ही अंसार ठेला ले कर पहुंचा, वहीं पर झाडि़यों में बैठा राशिद बाहर निकल कर उस्तरा ले कर अंसार के पास खड़ा हो गया. उसे देखते ही अंसार ने भागने की कोशिश की, लेकिन सईद ने अंसार को दबोच लिया. उसी बीच राशिद ने अंसार को दबोच कर उस्तरा से गला काट दिया. खून का फौव्वारा फूट निकला और कुछ ही देर में वह मर गया.

मरने के बाद दोनों ने लाश घसीट कर झाडि़यों में डाल दी और खून से सने कपड़े उतार कर झाडि़यों के पास एक नाले के करीब फेंक दिए. उस के बाद सईद के साथ वह आजादनगर स्थित प्रेमिका के घर पहुंचा. रात को दोनों वहीं रुके. फिर वहीं से रईस झांसी जाने की बात कह कर चला गया. लेकिन राशिद प्रेमिका के पास ही रुका रहा. सुबह होते ही वह भी वहां से चला गया.

पुलिस ने सईद और राशिद की निशानदेही पर नाले के पास से खून सने कपड़े और हत्या में प्रयुक्त उस्तरा भी बरामद कर लिया. उस के बाद पुलिस ने नूरजहां को भी हिरासत में ले लिया.

पूछताछ के बाद पुलिस ने राशिद, सईद और नूरजहां को गिरफ्तार कर 29 जुलाई, 2016 को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें बांदा जिला जेल भेज दिया गया. मामले की तफ्तीश थानाप्रभारी के.पी. यादव कर रहे हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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