Love Crime in Hindi. शादी के लगभग ढाई महीने बाद जब 21 वर्षीय मधु को पता चला कि उस का पति अंकित रजनी नाम की महिला के साथ लिवइन रिलेशन में रह रहा है तो उस के पैरों तले से जैसे जमीन ही खिसक गई. उस ने जब पति को समझाया तो मधु के साथ अंकित और उस की प्रेमिका ने ऐसा खौफनाक खेल खेला कि...

राजस्थान के अलवर जिले में एक छोटा सा गांव है उमरैण. इस गांव में ज्यादातर लोग प्रजापति समाज यानी कुम्हार जाति के हैं. जहां रहता है अशोक प्रजापति का परिवार. अशोक प्रजापति के परिवार में उन की पत्नी पिंकी देवी, बेटा दीपक व बहू सीनू के अलावा एक बेटी थी मधु, जिस की वह शादी कर चुके थे. उमरैण गांव में ही अशोक प्रजापति के भाई भीम सिंह, राम सिंह और सीताराम भी अपने परिवार के साथ रहते हैं.

उमरैण गांव के लोगों की पहचान उन के गांव के लोगों के नाम से होती है. इस गांव के अधिकांश लोग अपने नाम के आगे अपनी जाति नहीं, बल्कि अपने गांव उमरैण का जिक्र करते हुए खुद को उमरैणिया कहलाना पसंद करते हैं.

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अशोक प्रजापति की एक बहन है पूजा उर्फ सुंदर देवी, जिस का विवाह 23 साल पहले राजू प्रजापति से हुआ था, लेकिन इसे विडंबना कहें या जीवन की कड़वी सच्चाई कि सुंदर देवी जब एक फूल सी बच्ची की मां बनी तो उस के 15 दिन बाद ही उस के पति राजू की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई.

शादी के अल्पकाल में ही पति की मृत्यु हो जाने के कारण अशोक व उन के भाई अपनी बहन सुंदर देवी को अपने घर उमरैण ले आए.

सुंदर देवी की छोटी सी बच्ची जिस का नाम मधु था, अशोक और उन के परिवार के बीच रह कर पलनेबढऩे लगी. इसे कुदरत का संयोग ही कहेंगे कि अशोक की कोई बेटी नहीं थी. इसलिए उन्होंने मधु को अपनी बेटी की तरह ही पाला था. हालांकि कुछ सालों बाद अशोक व उन के भाइयों ने अपनी बहन सुंदर देवी का दूसरा विवाह रेवाड़ी जिले के हांसाका निवासी अमित कुमार के साथ कर दिया.

अशोक कुमार ने अपनी बहन सुंदर देवी का दूसरा घर जरूर बसा दिया, लेकिन अपनी भांजी मधु को उन्होंने अपने पास ही रख लिया था और उसे बेटी की तरह पालने लगे.

बेटियां तो वैसे भी घर की रौनक होती हैं, इसलिए खेलतेकूदते कब मधु जवानी की दहलीज पार कर जवान हो गई, पता ही नहीं चला.

बेटी जवान हो गई तो परिवार को उस के लिए जीवनसाथी की चिंता होनी शुरू हो गई. आमतौर पर निम्न और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों में बच्चों की शादियां परिवार और रिश्तेदारों के सुझाए गए परिवारों में ही की जाती हैं.

अशोक प्रजापति ने भी अपने कई रिश्तेदारों को बेटी मधु के लिए कोई उचित वर सुझाने के लिए कहा था. संयोग से एक रिश्तेदार ने गुरुगांव के मानेसर में रहने वाले सुरेंद्र सिंह भगत के परिवार के बारे में जानकारी मिली.

सुरेंद्र सिंह पेशे से तांत्रिक का काम करते थे, इसलिए लोग उन्हें भगतजी कह कर बुलाते हैं.

सुरेंद्र सिंह भगत के परिवार में 2 बेटे व एक बेटी है. सब से बड़े बेटे का नाम अंकित प्रजापति है. उस के बाद बीच की बेटी एकता और सब से छोटा बेटा रोहित है.

25 साल का अंकित मानेसर बस अड्डे के पास हुक्के और तंबाकू की दुकान करता था. छोटा भाई रोहित अंकित के काम में हाथ बंटाता था.

अंकित बहुत ज्यादा पढ़ालिखा तो नहीं था, लेकिन इंटर पास करने के बाद उस ने जो अपना हुक्के का काम शुरू किया था, वह ठीकठाक चल रहा था, जिस से अच्छी कमाई भी हो जाती थी. यही कारण रहा कि अशोक कुमार ने अपने भाइयों के साथ सलाहमशविरा कर के अंकित को देख कर और उस के परिवार के साथ मिल कर मधु के साथ उस का रिश्ता तय कर दिया.

जिस समय मधु का अंकित के साथ रिश्ता तय हुआ था, उस समय उस की उम्र 20 साल भी पूरी नहीं हुई थी. इसलिए परिवार ने तय किया कि दोनों की शादी एकडेढ़ साल बाद होगी, तब तक मधु भी परिपक्व हो चुकी होगी. इस बीच उस ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई भी पूरी कर ली थी.

वक्त तेजी के साथ गुजरता चला गया. कब डेढ़ साल गुजर गया पता ही नहीं चला. इस दौरान दोनों परिवारों का तीजत्यौहार पर एकदूसरे के यहां आनेजाने का सिलसिला भी जारी रहा. कभी किसी को एकदूसरे से शिकायत भी नहीं हुई. उस के बाद वह घड़ी नजदीक आ गई, जिस के सपने हर लड़की देखती है.

19 फरवरी, 2026 को अशोक प्रजापति ने सामाजिक रीतिरिवाज और शानोशौकत से मधु की शादी अंकित के साथ कर दी. हालांकि अंकित के परिवार ने दहेज की कोई खास मांग नहीं की थी, इस के बावजूद अशोक कुमार ने अपनी हैसियत और रुतबे के हिसाब से अपनी बेटी को दानदहेज दिया और खुशीखुशी अपने घर से विदा किया.

लेकिन इस शादी में 2 ऐसी बातें हुईं, जिस के लिए अशोक अब सोचते हैं तो लगता है कि उन्होंने इस बात को गंभीरता से क्यों नहीं लिया.

एक तो यह कि अंकित जिस दिन मधु के साथ 19 मई को सात फेरे ले रहा था, उसी वक्त उस की दादी की उस के घर मानेसर में रहस्यमय ढंग से मौत हो गई. जबकि वह 2 दिन पहले जब अशोक का परिवार अंकित के घर गया था तो वह पूरी तरह स्वस्थ थीं. इसीलिए सारा परिवार मधु के साथ अंकित के फेरे होने के बाद आननफानन में विदा करा कर अपने घर लौट गया.

दूसरी बात यह हुई कि मधु भले ही रिश्ते में अशोक की भांजी थी, लेकिन उन्होंने व उन की पत्नी ने उसे बेटी की तरह प्यारदुलार दे कर पाला था. परिवार की इकलौती बेटी होने के बावजूद अंकित व उस के परिवार ने न तो शादी का वीडियो एलबम बनवाया न ही कोई फोटोग्राफी कराई. यह अलग बात थी कि उन्होंने अपनी तरफ से वीडियोग्राफी और फोटोग्राफर की व्यवस्था कर रखी थी, इसलिए इस कमी को उन्होंने उस वक्त यह समझ कर इग्नोर कर दिया कि हो सकता है भूलवश वे यह काम नहीं कर पाए होंगे.

इस के अलावा बेटी खुश थी, इसलिए दूसरी खामियों को दरकिनार कर दिया.

मधु की शादी के बाद वक्त तेजी से गुजरने लगा. इस दौरान वह पगफेरे और एकदो रस्म निभाने के लिए अपने मायके यानी पितारूपी मामा के घर उमरैण भी आई. उस की मम्मी सुंदर देवी भी अपने दूसरे पति के साथ मायके आ कर बेटी की शादी में शामिल हुई थी और इस बात से बेहद खुश थी कि चलो पहले पति की इकलौती निशानी के हाथ पीले हो कर वह अपने घरबार की हो गई. परिवार को इस बात की खुशी थी कि चलो बेटी अब अपने घरबार की हो गई है. वह अपने जीवन में अब खुश रहेगी.

लेकिन उन्हें इस बात की जरा भी भनक नहीं थी कि मधु का यह विवाह ही उन के जीवन का सब से बड़ा दुख बन जाएगा.

लेकिन उमरैणियां परिवार को इस बात की भनक ही नहीं थी कि उन की यह खुशियां कुछ ही दिनों की हैं. शादी को 3 महीने ही पूरे हुए थे कि 21 मई, 2026 को अशोक प्रजापति को जो खबर मिली, उस ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया.

हुआ यूं कि 21 मई को अशोक प्रजापति और उन के बेटे ने मधु को कई बार फोन किए, ताकि उस की खैरियत के बारे में पूछ सकें, लेकिन कई बार प्रयास करने पर भी मधु का फोन नहीं लगा. वह लगातार स्विच्ड औफ आ रहा था.

उसी शाम उन्हें अंकित के परिवार के दूसरे सदस्यों से पता चला कि अंकित के फादर की तबियत खराब हो गई है, जिस कारण उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भरती कराया गया है.

अशोक प्रजापति ने सोचा कि शायद परिवार में ससुर की बीमारी के कारण मधु का फोन बंद आ रहा होगा. उन्होंने तय किया कि वे अगली सुबह ही पहले गुरुग्राम के मानेसर में जा कर अंकित के परिवार और अपनी बेटी मधु से मिलेंगे और बाद में अंकित के फादर सुरेंद्र भगत को देखने दिल्ली जाएंगे.

वे यह सब सोच ही रहे थे कि अगली सुबह उन्हें जो जानकारी मिली, उस ने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया. अगली सुबह उन की बहन सुंदर देवी का फोन उन के पास आया और उन्होंने बताया कि 21 मई की शाम को मधु का पति अंकित और उस की बहन व चाचा बिंदर तथा दिल्ली वाले फूफा उन के घर आए थे और उन्होंने बताया कि मधु घर के सारे गहने और नकदी ले कर कहीं भाग गई है. उन्होंने सब जगह तलाश लिया, मगर वो कहीं नहीं मिल रही.

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उन्होंने आरोप लगाया कि उन की बेटी के कारण बिरादरी में उन की बहुत बेइज्जती हो गई है, उन्होंने मधु की इस करतूत के कारण सभी से संबंध तोडऩे का फैसला ले लिया है. उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने मानेसर थाने में मधु के भागने की रिपोर्ट लिखा दी है. सुंदर देवी ने बताया कि अंकित का परिवार उन्हें खूब लानतमलानत दे कर गया है.

अशोक प्रजापति को अंकित के परिवार की यह बात नागवार गुजरी कि इतनी बड़ी बात हो गई और उन्होंने इस बारे में उन्हें बताना तक उचित नहीं समझा, जबकि पूरा परिवार इस बात को जानता है कि मधु अपने मामा के घर पर ही पलीबढ़ी है और वहीं से उस की शादी हुई है. आखिर उन्होंने उन्हें जानकारी न दे कर उन की बहन को क्यों यह सारी बात बताई.

बहरहाल, कयास लगाने से कोई फायदा नहीं था, इसलिए वे 22 मई, 2026 को दोपहर में ही अपने भाइयों, बेटे दीपक व भतीजे को ले कर मानेसर में अंकित के घर पहुंच गए.

अंकित तो उस समय उन्हें घर पर नहीं मिला. जबकि ससुर सुरेंद्र भगत दिल्ली के अस्पताल में भरती बताए गए. सास शीला उन की तीमारदारी के लिए दिल्ली में थी.

अंकित के फेमिली वालों यानी उस की बहन और उस के चाचाताऊ ने अशोक प्रजापति को वही बताया, जो परिवार के लोगों ने उन की बहन सुंदर देवी को जा कर बताया था. साथ ही उन्होंने अशोक की बहुत बेइज्जती भी की.

अशोक प्रजापित को समझ नहीं आ रहा था कि वे अंकित के परिवार की बातों पर कैसे विश्वास करें. क्योंकि न तो उन्होंने मधु को ऐसे संस्कार दिए थे, न ही वो ऐसी लड़की थी कि अपने परिवार की बदनामी का कारण बने. लिहाजा उन्होंने उसी शाम मानेसर थाने जा कर एसएचओ सुधीर चौधरी से मुलाकात की.

उन्होंने एसएचओ को बताया कि उन की बेटी पिछले 24 घंटे से गायब है, लेकिन उन्हें उस की ससुराल वालों की इस बात पर कोई विश्वास नहीं कि वो घर से गहने व रुपए ले कर भागी है. लेकिन थाने आ कर उन्हें सब से हैरानी वाली बात यह पता चली कि परिवार वालों ने मधु की गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट या शिकायत मानेसर थाने में दर्ज नहीं कराई थी.

अशोक को यह समझ नहीं आया कि अगर अंकित के परिवार की कही गई सारी बातें एकदम सही हैं तो उन्हें यह बात पुलिस को बतानी चाहिए थी या फिर उन से यह नहीं कहना चाहिए था कि उन्होंने रिपोर्ट दर्ज करा दी है.

सब कुछ बहुत उलझाउलझा सा था. बावजूद इस के थाना मानेसर के एसएचओ सुधीर चौधरी ने उसी दिन अशोक की शिकायत पर मधु की गुमशुदगी दर्ज करा दी. उन्होंने गुमशुदगी की जांच का काम एएसआई मुकेश कुमार को सौंप दिया.

अशोक कुमार को वापस अपने घर अलवर जाने का मन नहीं कर रहा था. लिहाजा उन्होंने अपने परिजनों के साथ अंकित के घर के आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ करने का मन बना लिया.

कुछ पड़ोसियों से अशोक प्रजापति को एक ऐसी काम की खबर पता चली, जिस से उन की सोचनेसमझने की दिशा ही बदल गई. उन्हें बताया गया कि मधु घर से भाग कर नहीं गई, बल्कि उस का पति अंकित उसे सुबह करीब 11 बजे अपनी स्कूटी पर साथ बैठा कर कहीं ले गया था और उन्होंने यह अपनी आंखों से देखा था.

मधु के पिता अशोक समझ गए कि अंकित के परिवार ने यह झूठा आरोप लगाया है कि 21 मई को दामाद अंकित और उस के परिजनों ने उन के घर आ कर झूठी कहानी बताई थी कि मधु ज्वैलरी ले कर फरार हो गई है.

मधु की ससुराल वालों की बातों पर शक होने पर अशोक प्रजापति 22 मई को ही मानेसर थाने पहुंचे और गुमशुदगी और वो जानकारी दी, जो उन्हें अंकित के पड़ोसियों से मिली थी.

यह जानकारी बेहद काम की थी. इस सुराग के बाद पुलिस का भी मधु के ससुराल वालों पर शक गहरा गया.

एसएचओ सुधीर चौधरी ने उसी रात को मानेसर के एसीपी वीरेंद्र सैनी, डीसीपी मानेसर प्रबीना पी. को मधु की रहस्यमय गुमशुदगी से ले कर अपने पति के साथ स्कूटर पर जाने तक की सारी बात बता दी.

डीसीपी प्रबीना ने आदेश दिया कि सब से पहले अंकित प्रजापति को पकड़ो, वह सारी सच्चाई अपने आप बता देगा. लेकिन जब पुलिस उसी रात अंकित के घर पहुंची तो पता चला कि अंकित 22 मई को दोपहर से ही लापता है.

पुलिस उसी रात मानेसर बस स्टैंड के पास अंकित की हुक्के की दुकान पर पहुंची तो वहां भी आसपड़ोस के लोगों से पूछताछ में पता चला कि अंकित ने 21 तारीख से ही अपनी दुकान नहीं खोली थी.

पुलिस 22 मई की रात को अंकित की तलाश में इधर से उधर भटकती रही, लेकिन वह कहीं नहीं मिला. 23 की सुबह एसीपी वीरेंद्र सैनी ने एसएचओ सुधीर चौधरी और उन के अधीनस्थ स्टाफ को बुला कर मधु की गुमशुदगी का पूरा मामला बताया और अंकित प्रजापति के पूरे बैकग्राउंड की जांच करने को कहा.

संयोग से उस समय वहां मानेसर बस अड्डा चौकी पर तैनात एक सिपाही पवन कुमार भी मौजूद था. पवन ने बताया, ”सर, मैं इस अंकित को जानता हू. इस ने पिछले 2 साल से मानेसर बस स्टैंड के पास ही अपनी दुकान से 100 मीटर की दूरी पर एक कमरा किराए पर ले रखा है, जहां वो रजनी नाम की एक महिला के साथ रहता है. वो शायद इस की पत्नी है या फिर दोनों लिवइन रिलेशनशिप में रहते हैं.’’

पवन की जानकारी ने तो इस पूरे मामले का रुख ही बदल कर रख दिया था. एसएचओ सुधीर चौधरी क्राइम ब्रांच की टीम को साथ ले कर रविवार की उसी दोपहर को सिपाही पवन द्वारा बताए गए पते पर पहुंची तो कमरा बाहर से बंद था.

आसपड़ोस के लोगों से जब उस मकान में रहने वालों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की तो पता चला कि उन्होंने 21 मई की दोपहर को इस मकान में रहने वाली रजनी और उस के साथ रहने वाले अंकित को हड़बड़ी में रजनी के 3 साल के बेटे के साथ स्कूटी पर जाते हुए देखा था. लोगों ने बताया कि दोनों बहुत घबराए हुए दिख रहे थे.

यह जानकारी बहुत काम की थी. ऐसा लगता था कि अंकित रजनी के साथ ही भाग गया है, इसीलिए वह कहीं मिल नहीं रहा था. लेकिन बंद मकान में पुलिस जांच कैसे करे, यह सोचा ही जा रहा था कि एसएचओ सुधीर चौधरी को लगा घर के अंदर से एक अजीब सी बदबू आती महसूस हो रही थी. ऐसा लग रहा था मानो कि वहां रखा मांस सड़ गया हो.

इस के बाद तो घर के अंदर जाना जरूरी हो गया था. इसीलिए उन्होंने पुलिसकर्मियों को कमरे का दरवाजा तोडऩे का आदेश दिया. जैसे ही पुलिस ने दरवाजा तोड़ा, अंदर का नजारा देख कर अधिकारियों के होश उड़ गए. पूरे कमरे में तेज बदबू फैली हुई थी. पुलिस जब अंदर बने बाथरूम की तरफ बढ़ी तो वहां मधु का सड़ चुका शव बरामद हुआ था.

चूंकि पुलिस के साथ मधु के परिवार के लोग भी मौजूद थे. उन के तो मानो पैरों तले से जमीन ही खिसक गई थी. वे फूटफूट कर रोने लगे. घटनास्थल पर मधु के शव को देखने से ही लग रहा था कि उस की हत्या करीब 24 घंटे से पहले की गई होगी.

इंसपेक्टर सुधीर चौधरी की सूचना के बाद एसीपी वीरेंद्र सैनी भी मौके पर पहुंच गए थे. पुलिस ने फोरैंसिक और क्राइम ब्रांच की टीम को मौके पर बुला लिया. उन्होंने तत्काल वहां पहुंच कर पूरे कमरे से हरसंभावित स्थान से फिंगरप्रिंट उठाए और घटनास्थल की फोटो ली. इस रोंगटे खड़े कर देने वाले घटनाक्रम के बाद अशोक प्रजापति ने अपने परिवार के सभी लोगों को फोन कर के मधु की हत्या होने और उस का शव मिलने की जानकारी दे दी.

इधर पुलिस ने शव को कब्जे में लेने के बाद उस का पंचनामा तैयार किया और परिजनों की सहमति ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

वारदात की जानकारी मिलने के अगले कुछ घंटे बाद मधु की सगी मां सुंदर देवी और उन के पति व दूसरे मामा व रिश्तेदार भी घटनास्थल पर पहुंच गए. 24 मई को मधु के शव का पोस्टर्माटम होने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया, जिस का अलवर ले जा कर अंतिम संस्कार कर दिया गया. लेकिन उस से पहले एसएचओ सुधीर चौधरी ने अशोक प्रजापति द्वारा दर्ज की गई गुमशुदगी की शिकायत हत्या की धारा में तरमीम कर दी. इस की जांच उन्होंने अपने हाथों में ले ली.

पुलिस ने जांच आगे बढ़ाने के साथ उस में अन्य धाराएं भी जोड़ दीं. तत्काल सिर्फ यही पता चल सका कि मधु की हत्या गोली मार कर की गई है, क्योंकि पोस्टमार्टम करते समय उस के सिर और छाती में से 2 फायर बुलेट बरामद की गई थीं.

मानेसर थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मधु के ब्लड सैंपल और विसरा को मौत के दूसरे कारण जानने के लिए  फोरैंसिक साइंस लैबोरेट्री भेज दिया. जिस से मौत के सही समय और सटीक कारणों का खुलासा हो सकेगा. फिलहाल पुलिस की कई टीमें फरार अंकित और उस की प्रेमिका की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी करने लगीं.

पुलिस की जांच में पता चला कि अंकित करीब 4 सालों से 45 साल की महिला रजनी के साथ लिवइन रिलेशन में रह रहा था. रजनी के पति की कई साल पहले मौत हो चुकी थी. वह मूलरूप से हिसार की रहने वाली थी और उसी शहर में उस की शादी हुई थी.

पहले पति से रजनी को 4 बेटियां हुईं, लेकिन उन में से 2 की शादी हो चुकी है. 2 अभी कुंवारी हैं. 4 साल पहले जब अंकित की उम्र महज 21 साल थी, तब अंकित की मुलाकात रजनी से हुई. वह बेहद खूबसूरत थी. पहली ही मुलाकात में अंकित रजनी के मोहपाश में ऐसा फंसा कि फिर उस से बाहर नहीं निकल सका.

पहले अंकित और रजनी की दोस्ती हुई. उस के बाद दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगे. बाद में अंकित ने रजनी को पहले भौंडसी में रखा, लेकिन 2 साल पहले वह अपनी दुकान के पास उसे किराए के कमरे में ले कर रजनी के साथ रहने लगा, लेकिन उस से पहले ही रजनी अंकित के प्यार की निशानी के रूप में एक बच्चे को जन्म दे चुकी थी.

अंकित से शादी के 3 महीने बाद ही मौत की शिकार बनी मधु के मर्डर की मिस्ट्री में पुलिस द्वारा सभी कडिय़ों को जोडऩे पर पता चला कि यह मामला ‘पतिपत्नी और वो’ के खतरनाक लव ट्रायंगल का नतीजा है.

संभवत: अंकित की पत्नी मधु को 21 तारीख की सुबह ही इस बात की भनक लगी थी कि उस के पति अंकित के किसी दूसरी महिला के साथ भी संबध हैं. इसीलिए उस ने उसी रात अपने पितारूपी मामा अशोक को रोतेरोते बताया था कि अंकित ने उस की जिंदगी खराब कर दी है. उस ने आशंका जताई थी कि अंकित या उस के परिवार के लोग उसे मार डालेंगे.

मधु ने अशोक से यह भी कहा था कि ऐसा लगता है कि अंकित और उस के परिवार ने एक सोचीसमझी साजिश के तहत उस के साथ शादी को अंजाम दिया है.

मृतका मधु ने अपने मामा सीताराम को 21 मई, 2026 की सुबह 10 बजे लास्ट कौल की थी, जिस में उस ने कहा था, ”मुझे यहां से ले जाओ, ये लोग मुझे मार डालेंगे.’’

इस के ठीक बाद उस का फोन बंद हो गया और फिर पहले उस के लापता यानी भाग जाने की और उस के बाद उस की मौत की जानकारी सामने आ गई.

मानेसर पुलिस के साथ क्राइम इनवेस्टिगेशन एजेंसी (सीआईए) की टीम भी अंकित और रजनी की तलाश में जुट गई. पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन सर्विलांस पर लगा दिए थे, लेकिन वे लगातार बंद आ रहे थे. जिस कारण उन की लोकेशन ट्रेस होने में दिक्कत आ रही थी. ऐसा लगता था कि अंकित और उस की गर्लफ्रेंड को जमीन निगल गई या आसमान खा गया.

उधर, सोशल मीडिया पर ‘जस्टिस फौर मधु’ नाम से कैंपेन भी शुरू हो गया था. इस में मधु के लिए ‘आवाज उठाओ, इंसाफ दिलाओ’, ‘एक बेटी की आवाज, हम सब की जिम्मेदारी’, ‘मधु के साथ हुआ अन्याय, हम नहीं करेंगे सहन’ जैसे शब्द ट्रेंड करने लगे.

मधु मर्डर केस में लोगों की तरफ से कई तरह की मांगें भी उठने लगीं. पहली निष्पक्ष और हाई लेवल जांच की मांग, दूसरी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, तीसरी पीडि़त परिवार को सुरक्षा और चौथी में इंसाफ चाहिए, आश्वासन नहीं.

पुलिस को जांच में जल्द ही यह पता चल गया कि अंकित की बहन एकता, उस की बुआ और मम्मी शीला भी यदाकदा रजनी से मिलने उस के पास जाया करती थीं.

पुलिस को शक है कि अंकित ने अपनी गर्लफ्रेंड रजनी के सामने ही पत्नी मधु को गोली मारी. इस के बाद दोनों वहां से चले गए. सीसीटीवी फुटेज से भी पुलिस को महत्त्वपूर्ण सबूत हाथ लगे.

अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही दहेज और अन्य कारणों से मधु को लगातार प्रताडि़त किया जा रहा था. इस की वजह रजनी के साथ अंकित के संबंध थे.

मानेसर पुलिस ने मधु के पति अंकित, उस की प्रेमिका रजनी और परिवार के अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी. लेकिन जब तक अंकित और रजनी गिरफ्तार नहीं हो जाते, तब तक वह किसी अन्य को गिरफ्तार नहीं कर सकती थी.

पुलिस को यह भी शक है कि अंकित और उस के परिवार ने अपनी घिनौनी साजिश के तहत एक झूठी कहानी रची. उस ने मधु के फेमिली वालों और पुलिस को विश्वास दिलाने की कोशिश की कि मधु घर में रखे तमाम कीमती जेवर और नगदी समेट कर कहीं भाग गई है, लेकिन उन की यह साजिश उजागर हो गई.

कथा लिखने तक आरोपी अंकित और उस की प्रेमिका को पुलिस सरगर्मी से तलाश रही थी, पुलिस को उन का कोई सुराग नहीं मिल सका था.

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