Rajasthan Blackmail Murder. लच्छू देवी ने ठाकुर सुरेंद्र सिंह राजपूत को अपना तन तो सौंप दिया, लेकिन उस के संबंधों की वीडियो किसी तरह गांव के ही गणपत सिंह के हाथ लग गई. वीडियो के बूते वह उसे ब्लैकमेल करने पर उतर आया. काश! लच्छू देवी ठाकुर के हाथों अपने तन को खिलौना न बनने देती तो

ठाकुर गजेंद्र सिंह ने लच्छू देवी का उतरा हुआ चेहरा देखा तो पूछा कि क्या टेंशन है. तब वह बोली, ”कुंवर सा, आज गणपत सिंह ने बताया कि उस के पास मेरा एक आपत्तिजनक वीडियो क्लिप है. वह उस के बूते मुझे ब्लैकमेल कर रहा है. वह धमकी दे रहा है कि मेरा कहना नहीं मानेगी तो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा. अगर वीडियो वायरल हो गया तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी.’’

यह सुन कर गजेंद्र को करंट जैसा झटका लगा. उस ने पूछा, ”आपत्तिजनक वीडियो किस के साथ है तुम्हारा?’’

तब लच्छू देवी ने कहा, ”आप के पिताजी ठाकुर सुरेंद्र सिंह के साथ. अगर वीडियो वायरल हुआ तो आप लोग भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगे. ठाकुर साहब की इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी. गणपत सिंह को कैसे मनाया जाए, आप ही कोई उपाय बताएं.’’

गजेंद्र सिंह ने यह सुना तो उस के पैरों तले जैसे जमीन सरक गई. गजेंद्र जानता था कि अगर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई तो घर की मानमर्यादा, इज्जत सब चली जाएगी. कुछ सोच कर गजेंद्र सिंह बोला, ”गणपत सिंह को बातचीत के लिए गांव से दूर बुलाओ. उस से बात करता हूं. अगर वह मानता है तो ठीक, वरना उस का इलाज ही करना पड़ेगा.’’

”आप कहेंगे तो मैं उसे बुला लूंगी.’’ लच्छू देवी बोली.

इस के बाद गजेंद्र सिंह ने अपने खेतों पर काश्तकार का काम करने वाले मित्र वागाराम भील से इस मुद्ïदे पर चर्चा की. गजेंद्र ने उस से कहा, ”वागाराम, मेरे पिताजी और लच्छू देवी की एक आपत्तिजनक वीडियो गणपत सिंह के पास है. वह उसे वीडियो के बल पर ब्लैकमेल कर रहा है. उसे समझाते हैं, मानेगा तो ठीक वरना उसे दुनिया से अलविदा करना है. इस काम में क्या तुम मेरा साथ दोगे?’’

यह सुन कर वागाराम बोला, ”आप के लिए तो ठाकुर साहब यह जान भी कुरबान है. बुलाओ उसे, अगर वह वीडियो डिलीट करता है तो ठीक, वरना उस का काम तमाम कर देंगे.’’ वागाराम ने सहमति जता दी तो गजेंद्र सिंह ने अपने पिता सुरेंद्र सिंह की प्रेमिका लच्छू देवी से कहा, ”लच्छू, तू गणपत सिंह को बातचीत के बहाने कोलाया नाडा जाने वाली ग्रेवल रोड पर ले आना. वहां पर मैं और वागाराम पहले से मौजूद रहेंगे. हम पहले उसे वीडियो डिलीट करने को कहेंगे. वह मान जाएगा तो ठीक, नहीं माना तो मोबाइल छीन कर वीडियो डिलीट कर देंगे. अगर फिर भी नहीं माना तो उसे मौत की नींद सुला देंगे. बड़ा आया ब्लैकमेल करने वाला. हमारी इज्जत नीलाम करेगा साला…’’

राजस्थान के जिला जालौर के उपखंड भीनमाल के थाना रामसीन के अंतर्गत एक गांव मांडोली पड़ता है. इसी गांव में रण सिंह राजपूत अपनी पत्नी हवा कंवर एवं 3 बेटों कल्याण सिंह, अभय सिंह और गणपत सिंह के साथ रह रहे थे. रण सिंह के सब से छोटे बेटे गणपत सिंह ने गांव मांडोली में किराने की एक दुकान खोल रखी थी. इसी दुकान के सामने लच्छू देवी अपने पति सवाराम चौधरी के साथ रहती थी.

मांडोली गांव में ही ठाकुर सुरेंद्र सिंह राजपूत रहता था. खेतीबाड़ी से उसे करोड़ों रुपए की सालाना आय होती थी. वैसे वह सरकारी टीचर था. ठाकुर साहब ने मांडोली गांव के वागाराम भील को खेती बंटाई पर दे रखी थी. लच्छू देवी भी ठाकुर सुरेंद्र सिंह के यहां काम करती थी.

अधेड़ उम्र पार कर चुके सुरेंद्र सिंह की नजर लच्छू देवी पर पड़ी तो वह उस पर अपना दिल हार बैठा. अपने बच्चों की उम्र की लच्छू देवी को उस ने पैसों के बल पर हमबिस्तर बना लिया. वह मौका मिलते ही लच्छू के तन से खेलने लगता.

ठाकुर हवस में अंधा था. वह यह भूल गया था कि उस के अवैध संबंधों का परिवार या गांव वालों को पता चल गया तो इज्जत पल भर में मिट्टी में मिल जाएगी, मगर अवैध संबंध रखने वाले ठाकुर को भरोसा था कि उस की पोल कभी नहीं खुलेगी. मगर ऐसा हो न सका.

ठाकुर सुरेंद्र सिंह और लच्छू देवी की प्रेम लीला की भनक गांव में हो गई थी. उन की प्रेम लीला का आपत्तिजनक वीडियो किसी तरह गणपत सिंह के हाथ लगा तो वह भी उस से पैसे ऐंठने का लोभ न छोड़ सका. वीडियो में ठाकुर सुरेंद्र सिंह एवं उस की प्रेमिका लच्छू देवी रासलीला कर रहे थे. इस वीडियो के दम पर गणपत सिंह पैसे ऐंठना चाह रहा था.

लच्छू देवी ने जब वीडियो के बारे में सुना तो उस के होश उड़ गए. उस ने प्रेमी ठाकुर के बेटे गजेंद्र सिंह से इस वीडियो की चर्चा की तो उस ने अपने पिता की इज्जत बचाने के लिए कुछ भी करने का फैसला ले लिया.

प्लान के अनुसार 27 अगस्त, 2024 की शाम लगभग साढ़े 7 बजे लच्छू देवी चौधरी अपने मांडोली स्थित घर के सामने गणपत सिंह की दुकान पर पहुंची और उस ने गणपत सिंह से कहा, ”तुम आज रात 8 बजे  कोलाया नाडा रोड पर आ जाना, वहीं पर वीडियो के बारे में बात करनी है और हां अकेले ही आना. मैं खुश तुम्हें कर दूंगी.’’

यह सुन कर गणपत सिंह ने कहा, ”मैं आ कर मिलता हूं. तुम पहुंचो.’’

लच्छू देवी चौधरी मुसकराते हुए वहां से चली गई. गणपत सिंह थोड़ी देर बाद अपनी किराने की दुकान बंद कर के अपनी बाइक से लच्छू चौधरी द्वारा बताई जगह पर पहुंचा. वहां पर बरसात का पानी जमा था. उस रोड पर आवागमन न के बराबर था. गणपत वहां पहुंचा तभी वहां पर झाडिय़ों में छिप कर बैठे गजेंद्र और वागाराम आ गए.

उन्हें देख कर गणपत सिंह चौंक गया. तभी गजेंद्र ने गणपत सिंह से कहा, ”गणपत, तू जिस आपत्तिजनक वीडियो के दम पर लच्छो को ब्लैकमेल कर रहा है, उसे अभी डिलीट कर.’’

यह सुन कर गणपत बोला, ”यदि मैं ऐसा नहीं करूंगा तो तू क्या कर लेगा मेरा.’’

”अरे मान जा, इसी में तेरी भलाई है, वरना जान से हाथ धो बैठेगा.’’ गजेंद्र ने धमकाते हुए कहा.

गणपत सिंह भी बिना डर के बोला, ”अब मैं वीडियो वायरल कर के उन लोगों को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ूंगा.’’

इतना सुनते ही गजेंद्र के तनबदन में आग लग गई. वह समझ गया कि गणपत ऐसे नहीं मानेगा. अपने पिता की इज्जत व मानमर्यादा बचाने के लिए गजेंद्र सिंह ने अपने साथी वागाराम भील के साथ मिल कर गणपत सिंह मांडोली को दबोच लिया. दोनों ने गणपत सिंह पर हथियारों से हमला कर दिया.

सिर पर गंभीर चोटें लगने से गणपत सिंह नीचे गिर पड़ा. जब गजेंद्र ने दरांती (कूट) का वार गणपत के सिर पर किया तो उस के सिर के साथ कान भी कट कर गिर गया. गणपत को दरांती से काटने के बाद उस ने उस की तलाशी ली, ताकि मोबाइल में से आपत्तिजनक वीडियो डिलीट कर दे. मगर गणपत के पास मोबाइल नहीं था. ऐसे में गजेंद्र ने उसे मौत की नींद सुला दिया.

कोलाया नाडी के पास एक ढाणी में शादी समारोह था. शादी में जा रहे लोग कहीं उन्हें देख न लें. इस डर से गजेंद्र सिंह ने गणपत की हत्या कर उस के शव को कीचड़ में फेंक दिया और उस की बाइक कीचड़ के पास गिरा दी. इस के बाद गजेंद्र ने कत्ल करने वाला हथियार दरांती (कूट) वागाराम भील को दे कर कहा, ”इसे खेत वाली ढाणी में छिपा देना. मैं सुबह पत्नी के साथ जोधपुर चला जाऊंगा. तुम दोनों इस घटना की चर्चा किसी से मत करना. अगर घटना की चर्चा की तो हम फंस जाएंगे. हमारे पास मोबाइल भी नहीं है, ऐसे में कोई सबूत नहीं है. पुलिस चाह कर भी हम को पकड़ नहीं सकती. हमने कोई सबूत नहीं छोड़ा है. गणपत का ब्लांइड मर्डर कभी नहीं खुलेगा. मैं भी चलता हूं.’’

कह कर गजेंद्र सिंह घटनास्थल से एक किलोमीटर दूर अपने घर मांडोली चला गया.

वागाराम भील दरांती ले कर खेत में बनी ढाणी पहुंचा और ढाणी में दरांती छिपा दी. गणपत की हत्या के बाद लच्छू देवी चौधरी की चिंता खत्म हो गई थी.

27 अगस्त, 2024 की रात 10 बजे तक गणपत सिंह दुकान से घर नहीं पहुंचा तो उस की मां हवाकंवर एवं पत्नी भारती कंवर को चिंता हुई. गणपत को दुकान पर जा कर देखा, दुकान बंद थी. दुकान पर बाइक भी नहीं थी. गणपत बाइक पर कहीं गया था, मगर कहां गया? यह किसी को पता नहीं था. मोबाइल घर पर बेटे के पास था. गणपत सिंह के अचानक गायब होने से उस का पूरा परिवार चिंतित था. उसे गांव में तलाश किया गया, मगर पता न लगा. फेमिली वालों ने रामसीन थाने में गणपत सिंह की गुमशुदगी की जानकारी दी. पुलिस ने सोचा कि वह कहीं काम से चला गया होगा, आ जाएगा.

मगर 28 अगस्त, 2024 का सूरज उदय हो गया, गणपत घर नहीं लौटा. फेमिली वाले गणपत सिंह की तलाश में लगे थे.

28 अगस्त, 2024 की सुबह 8 बजे मांडोली गांव से एक किलोमीटर दूर सिकवाड़ा मार्ग पर कोलाया नाडा के पास ग्रेवल रोड पर गणपत सिंह का शव कीचड़ में औंधे मुंह पड़ा मिला. उस की बाइक भी पास में गिरी पड़ी मिली. परिजनों ने गणपत का शव देखा तो वह बिलख कर रोने लगे.

घटना की खबर पुलिस थाना रामसीन को दी गई. सुबहसवेरे हत्या की खबर पा कर इंसपेक्टर कमल किशोर पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. तब तक गणपत सिंह का शव मिलने की खबर मांडोली गांव में आग की तरह फैल गई थी. तमाम लोग घटनास्थल पर जमा हो गए थे.

गणपत सिंह की मौत की खबर उस के घर पहुंची तो घर में कोहराम मच गया था. बूढ़ी मां हवा कंवर गश खा कर गिर पड़ी. मृतक की पत्नी भारती कंवर रोरो कर बेहाल थी. गांव की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधा रही थीं. पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. निरीक्षण करने पर मामला संदिग्ध लगा. इंसपेक्टर कमल किशोर ने घटना की जानकारी आला अधिकारियों को दी.

तब सूचना पा कर जालौर के एसपी ज्ञानचंद यादव, एएसपी रामेश्वर लाल,  डीएसपी (भीनमाल) अनराज सिंह मय एफएसएल, एमओबी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और शव व घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. एफएसएल टीम ने साक्ष्य एकत्र किए.

मृतक के सिर पर गहरी चोट के निशान थे. कान भी कटा था. एसपी ज्ञानचंद यादव ने पुलिस अधिकारियों को उचित काररवाई कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए. इस के बाद मृतक को पोस्टमार्टम के लिए भीनमाल अस्पताल भेज दिया.

मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करा कर शव परिजनों को सौंप दिया. 28 अगस्त, 2024 को कल्याण (48 साल) की लिखित तहरीर पर बीएनएस की धारा 103 (1), 3(5) के तहत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

मामले की जांच इंसपेक्टर कमल किशोर ने खुद संभाली. इंसपेक्टर कमल किशोर ने सब से पहले घटनास्थल कोलाया नाडा में घटना वाली रात एक्टिव मोबाइल फोन नंबरों की डिटेल्स निकलवाई. घटना की रात घटनास्थल के आसपास के क्षेत्र में 300 से ज्यादा नंबर एक्टिव मिले. ऐसे में पुलिस के लिए भूसे में सूई ढूंढने जैसा था. फिर भी पुलिस ने उन नंबरों की गहनता से जांच की.

मृतक के परिजनों ने पुलिस को कुछ संदिग्ध लोगों के नाम बताए थे. पुलिस ने उन से भी पूछताछ की, कोई सफलता नहीं मिली. पुलिस को ऐसा कोई टैक्निकल एविडेंस भी नहीं मिला, जिस के आधार पर हत्यारों के बारे में कोई जानकारी मिल सके.

गणपत के हत्यारोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से मृतक के परिजन एवं आम राजपूत वर्ग में भारी रोष था. परिजनों ने गणपत सिंह की हत्या में गजेंद्र सिंह का नाम भी संदिग्धों  में बताया था.

पुलिस ने गजेंद्र सिंह को थाने बुला कर पूछताछ की. उस ने एसएचओ को बताया, ”सर, 27 अगस्त, 2024 को मैं अपने घर पर ही था. मेरे मोबाइल की लोकेशन देख लो. मैं 27-28 की रात पत्नी के साथ जोधपुर गया था. मेरे ससुर की तबीयत ठीक नहीं थी. ससुरजी की खबर लेने व गाड़ी की सर्विस कराने जोधपुर गया था. जोधपुर से जब घर फोन किया तो पता चला था कि गणपत सिंह की गांव के बाहर लाश मिली है. मुझे यह जान कर बड़ा दुख हुआ था. तब मैं ने गांव के कई लोगों को कौल कर के गुस्सा भी जाहिर किया था. मेरा तो गणपत भाई लगता था. मैं उसे भला क्यों मारता. मेरी उस से कोई दुश्मनी भी नहीं थी. मृतक के परिजन पता नहीं क्यों मुझ पर शक कर रहे हैं. मेरा गणपत हत्याकांड से कोई लेनादेना नहीं है.’’

पुलिस ने गजेंद्र सिंह के मोबाइल की लोकेशन निकलवाई. उस की लोकेशन घटना वाली रात मांडोली स्थित उस के घर की आ रही थी. रात में फोन बंद था. फिर 28 अगस्त की सुबह उस का फोन भाद्राजून से आगे खुला था. 28 अगस्त को लोकेशन जोधपुर की आ रही थी. पुलिस ने गजेंद्र सिंह को पूछताछ के बाद छोड़ दिया था.

मृतक के परिजनों ने जिन संदिग्धों के नाम बताए थे. उन से पूछताछ कर पुलिस ने छोड़ दिया तो मृतक के परिजन भड़क गए. उन का सोचना था कि संदिग्ध लोगों से पुलिस ने पैसे खाए हैं. उन का आरोप था कि संदिग्ध लोगों को पुलिस थाने बुला कर उन को कुरसी पर बिठा कर मेहमाननवाजी कर के बिना पूछताछ छोड़ देती है.

गणपत सिंह हत्याकांड को 2 महीने से ज्यादा गुजर गए थे. मगर पुलिस के हाथ खाली थे. पुलिस का रटा सा जवाब था, ”गणपत सिंह हत्याकांड में कोई सबूत नहीं मिला. बिना सबूत शक के आधार पर किसी बेगुनाह की गिरफ्तारी नहीं कर सकते. पुलिस जांच कर रही है. सबूत मिलने पर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी. इस में समय कितना लगेगा, कह नहीं सकते.’’

गणपत सिंह हत्याकांड का खुलासा नहीं होने पर परिजनों व सर्वसमाज में भारी रोष था. आक्रोशित लोगों ने 9 सितंबर, 2024 को रामसीन थाना परिसर में प्रदर्शन किया, जहां पुलिस ने 10 दिन में मामले के खुलासे का भरोसा दिया था.

जब आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आए तो 15 अक्तूबर, 2024 को जालौर जिला मुख्यालय पर विशाल धरना हुआ. बाद में 28 अक्तूबर, 2024 को मंत्री जोगेश्वर गर्ग के आश्वासन पर धरना स्थगित किया गया. मंत्री गर्ग ने लापरवाह पुलिसकर्मियों को हटाने व जांच अधिकारी बदलने का वादा किया था.

मुख्यमंत्री के नाम मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग को ज्ञापन सौंपा. वहीं एसपी ज्ञानचंद यादव ने जल्द खुलासा करने का आश्वासन दिया. इस तरह गणपत सिंह हत्याकांड को एक साल बीत गया. एक साल बाद भी पुलिस हत्यारों का कोई सुराग नहीं लगा पाई थी.

पुलिस परिजनों को लगातार आश्वासन दे रही थी, लेकिन ठोस काररवाई के अभाव में न्याय की उम्मीद लुप्त होती दिख रही थी. ऐसे में एसएचओ कमल किशोर से जांच सांचौर डीएसपी (आईपीएस) शरण गोपी नाथ कांबले को सौंपी गई.

डीएसपी कांबले ने 150 लोगों से पूछताछ कर पहले 13 फिर 3 संदिग्ध चिह्निïत किए. इस बीच 3 जांच अधिकारी बदल गए थे. मृतक के परिजनों को विश्वास था कि डीएसपी कांबले गणपत सिंह हत्याकांड का खुलासा कर के आरोपियों को पकड़ लेंगे. कांबले ने जब 150 में से 3 संदिग्ध चिह्निïत किए तो उम्मीद जागी कि अब घटना का खुलासा हो जाएगा.

डीएसपी कांबले द्वारा चिह्निïत 3 संदिग्धों के नारको टेस्ट के लिए कोर्ट में अपील की गई. आरोपी गजेंद्र सिंह ने सशर्त नारको कराने को कहा, जिस में उस ने मानसिक व शारीरिक नुकसान के 2 करोड रुपए की गारंटी मांगी थी. हालांकि अन्य 2 संदिग्ध नारको टेस्ट के लिए तैयार थे. किसी संदिग्ध का नारको टेस्ट नहीं हो सका. गजेंद्र सिंह ने 2 करोड रुपए की शर्त रखी तो नारको टेस्ट नहीं हो सका.

उस समय तक गजेंद्र सिंह संदिग्ध था. जांच अटक गई थी. इसी दौरान डीएसपी कांबले का ट्रांसफर हो गया.

डीएसपी कांबले का ट्रांसफर होने के बाद गणपत सिंह मामले की फाइल धूल फांकने लगी. पुलिस का सुस्त रवैया देख कर गणपत सिंह का परिवार रोष में था.

गणपत सिंह हत्याकांड के 12 दिन बीत जाने पर जब खुलासा नहीं हुआ था तो 9 सितंबर, 2024 को रामसीन थाने में एक दिन का धरना दिया गया. इस के बाद 15 अक्तूबर, 2024 को जालौर में धरनाप्रदर्शन किया, जो क्रमिक रूप से 15 दिनों तक चला और पुलिस अधिकारियों के जल्द खुलासे के आश्वासन पर समाप्त कर दिया.

हत्या के इस मामले को एक साल हो गया था, मगर खुलासा नहीं हुआ तो 16 नवंबर, 2025 को गणपत सिंह की 80 वर्षीय मां  हवा कंवर, पत्नी भारती कंवर भूख हड़ताल पर बैठ गईं. 9 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठीं तो विधायक रविंद्र सिंह भाटी धरनास्थल पर पहुंचे और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों से गणपत सिंह हत्याकांड मामले के जल्द खुलासे की मांग की.

मृतक की पत्नी भारती कंवर ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर गणपत सिंह हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग की. विधानसभा में भी गणपत सिंह की हत्या का खुलासा नहीं होने का मामला उठाया गया.

विधायक रविंद्र सिंह ने मृतक की मां हवा कंवर एवं अन्य परिजनों से मिल कर न्याय दिलाने में सहयोग करने का आश्वासन दिया.

इस के बाद 25 नवंबर, 2025 को स्थानीय सांसद लुंबा राम चौधरी ने धरनास्थल पर पहुंच कर उन से बात की. तब पुलिस प्रशासन ने एक माह में हत्या का खुलासा करने का पुन: आश्वासन दिया. इस के बाद उन्होंने धरना खत्म किया.

इस दौरान जालौर के एसपी ज्ञानचंद यादव का तबादला हो चुका था. जालौर के नए एसपी शैलेंद्र सिंह इंदोलिया ने जिले की बागडोर संभाल ली थी. नवंबर, 2025 में हुई भूख हड़ताल के बाद मामले की जांच एडिशनल एसपी भूपेंद्र सिंह को सौंपी गई.

जोधपुर रेंज के आईजी ने गणपत सिंह हत्याकांड मामले की फाइल मंगवाई और एक एसआईटी गठित कर मामले का जल्द खुलासा करने का निर्देश दिया. रामसीन थाने के तत्कालीन एसएचओ कमल किशोर का भी तबादला हो चुका था. उन की जगह अरविंद कुमार ने चार्ज संभाल लिया था. गणपत सिंह हत्याकांड को 18 महीने हो चुके थे, फिर भी आरोपी पकड़े नहीं जा सके थे.

मृतक के परिजनों एवं समाज के बढ़ते दबाव एवं नित्य नए धरनाप्रदर्शन एवं भूख हड़ताल को देखते हुए आईजी के निर्देशानुसार एसपी शैलेंद्र सिंह इंदोलिया ने एएसपी भूपेंद्र सिंह आईपीएस के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया.

इस टीम में थाना कोतवाली जालौर के एसएचओ रामेश्वर भाटी, एसएचओ (रामसीन) अरविंद कुमार, एएसआई अमर सिंह, लादाराम, जय सिंह, सुरेंद्र सिंह, भूपाराम, कांस्टेबल रमेश चंद्र, ओमप्रकाश, जयंती लाल, गणपत सिंह, धीरज सिंह, भैराराम, नरपत सिंह, कुलदीप सिंह, थान सिंह, महिला कांस्टेबल भंवरी, सोनिया, सुशीला आदि को शामिल किया गया.

गठित टीम ने घटना के प्रत्येक पहलू की बारीकी से जांच की. मगर फरवरी 2026 बीतने को आया था और आरोपी पकड़े नहीं गए. तब मृतक के फेमिली वालों ने कफन के साथ फिर से 27 फरवरी, 2026 को जिला कलेक्ट्रेट जालौर के समक्ष भूख हड़ताल पर बैठ गए.  इस भूख हड़ताल में 80 वर्षीय बुजुर्ग हवा कंवर के अलावा गणपत सिंह की पत्नी, बच्चे, भाई कल्याण सिंह, अभय सिंह और भाभी भी बैठे थे. भूख हड़ताल लगातार जारी थी.

14 मार्च, 2026 को विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी धरनास्थल पहुंचे. उन्होंने बुजुर्ग हवा कंवर की पीड़ा को सुना. मृतक के अन्य परिजनों से भी मुलाकात की.

विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार को चेतावनी दी कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो वह जालौर के इतिहास का सब से बड़ा चक्का जाम करेंगे. मृतक का पूरा परिवार 27 फरवरी से भूख हड़ताल पर था. जब 14 मार्च को विधायक भाटी धरनास्थल पर पहुंचे, तब विधायक भाटी से मुलाकात के बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने क्रमिक अनशन शुरू किया था.

Rajasthan Blackmail Murder

परिजन इस बार कमर कस कर भूख हड़ताल पर बैठे थे कि उन्हें मरना मंजूर है, मगर बगैर हत्या के खुलासे वे यहां से नहीं उठेंगे. मृतक की 80 वर्षीय मां का अनशन देख कर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया. प्रशासन समझ गया कि आरोपी गिरफ्तार नहीं किए तो बुजुर्ग हवा कंवर की अनशन के चलते जान जा सकती है.

जालौर जिला कलेक्टर एवं एसपी शैलेंद्र सिंह इंदोलिया ने डौक्टरों की टीम को बुजुर्ग के स्वास्थ्य पर नजर रखने को कहा. विधायक भाटी के चक्का जाम की चेतावनी देते ही पुलिस प्रशासन समझ गया कि अब बहानेबाजी नहीं चलेगी. अगर रविंद्र सिंह भाटी चक्का जाम पर उतरे तो फिर हालात संभलेंगे नहीं. बस, फिर क्या था. पुलिस ने जांच तेज कर दी.

मृतक की मां हवा कंवर ने गणपत सिंह हत्याकांड में गजेंद्र सिंह, निवासी मांडोली पर आरोप लगाया था. पूरा मांडोली गांव गजेंद्र सिंह को गणपत सिंह की हत्या में घटना के दिन से आरोपी बता रहा था, मगर पुलिस सबूत नहीं होने को कह कर टाल रही थी, लेकिन विधायक के चक्का जाम की चेतावनी के बाद पुलिस टीम ने 16 मार्च, 2026 को आरोपियों वागाराम भील, लच्छू देवी चौधरी और गजेंद्र सिंह को डिटेन कर कड़ी पूछताछ की.

आरोपियों ने गणपत सिंह मांडोली की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया. तब पुलिस ने तीनों आरोपियों गजेंद्र सिंह, वागाराम एवं लच्छू देवी चौधरी को गिरफ्तार कर लिया.

आरोपियों की गिरफ्तारी होने की जानकारी एसपी शैलेंद्र सिंह इंदोलिया ने मृतक के परिजनों को दी. तब 18 दिन से भूख हड़ताल पर बैठी हवा कंवर एवं क्रमिक अनशन कर रहे अन्य परिजनों ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी.

आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने वीडियो कौल कर वृद्ध हवा कंवर एवं गणपत सिंह की पत्नी भारती कंवर से बात की. दोनों ने विधायक भाटी का आभार जताया. 16 मार्च को धरना प्रदर्शन खत्म हो गया.

18 माह तक बेटे को न्याय दिलाने का जज्बा रख कर धरनाप्रदर्शन व अनशन करने वाली 80 वर्षीय मां की ममता की जीत हुई. हर तरफ मां हवा कंवर के जज्बे की तारीफ हो रही है.

मंगलवार 17 मार्च, 2026 को गिरफ्तार आरोपियों गजेंद्र सिंह, वागाराम एवं लच्छू देवी को एडीजे कोर्ट भीनमाल में पेश कर 4 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया और थाना रामसीन ला कर पूछताछ की. पुलिस पूछताछ में इस ब्लाइंड मर्डर की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

राजस्थान के जिला जालौर के उपखंड भीनमाल के थाना रामसीन से करीब 40 किलोमीटर दूर एक गांव मांडोली आता है. इस गांव में राजपूत, देवासी, चौधरी, मेघवाल, भील के अलावा अन्य जाति के लोग भी रहते हैं. मांडोली गांव विधायक रतन देवासी का गांव है. इसी गांव में पेशे से सरकारी टीचर सुरेंद्र सिंह रहता है.

सुरेंद्र सिंह राजपूत मांडोली गांव का संपन्न किसान है. उसे रावला कह कर गांव के लोग सम्मान देते थे. देश स्वतंत्र हुआ तो राजा रजवाड़े एवं जागीरें जाती रहीं, मगर  जिन के पास जागीरें थी, आज भी उन्हें जागीरदार या ठाकुर साहब कहा जाता है. सुरेंद्र सिंह ने अपनी कुछ जमीन बंटाई पर दे रखी थी. पिछले 4 सालों से मांडोली निवासी वागाराम उस की खेतीबाड़ी संभाले हुए था. वह खेती के अलावा घर के और भी काम कर देता है.

मांडोली गांव के सवाराम चौधरी की पत्नी लच्छू देवी भी रावले में ठाकुर सुरेंद्र सिंह के यहां काम करती थी. अधेड़ उम्र के ठाकुर सुरेंद्र सिंह का लच्छू देवी पर दिल आ गया तो उस ने उस पर डोरे डालने शुरू किए. लच्छू नासमझ तो थी नहीं. वह ठाकुर साहब की मेहरबानी का मतलब समझ गई. शादीशुदा और बालबच्चेदार होते हुए उस ने ठाकुर सुरेंद्र सिंह के सामने समर्पण कर दिया. एक बार मर्यादा टूटी तो अकसर मौका मिलते ही यह खेल खेला जाने लगा. गांव में दबी जुबान में लोग सुरेंद्र सिंह और लच्छू देवी के प्रेम प्रसंग की बातें करने लगे.

मांडोली के गणपत सिंह राजपूत को भी ठाकुर और लच्छू देवी के प्रेम संबंधों की भनक लग गई थी. लच्छू देवी के मकान के सामने गणपत सिंह की किराने की दुकान थी. गणपत सिंह का विवाह भारती कंवर के साथ हुआ था. वक्त के साथ गणपत सिंह एक बेटा एवं एक बेटी का बाप बन गया.

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. इसी दौरान गणपत सिंह के हाथ ठाकुर सुरेंद्र सिंह और लच्छू देवी का एक आपत्तिजनक वीडियो हाथ लग गया. गणपत सिंह ने इस वीडियो की बात लच्छू देवी को बताते हुए कहा, ”तुम्हारा और ठाकुर सुरेंद्र सिंह का एक आपत्तिजनक वीडियो है मेरे पास. मैं चाहूं तो इसे वायरल कर सकता हूं. मगर…’’

उस की बात सुन कर लच्छू देवी के माथे पर पसीने की बूंदें उभर आईं. लच्छू देवी के ठाकुर से अवैध संबंध थे. लच्छू देवी समझ गई कि अगर वीडियो वायरल हुआ तो वह किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगी. इस के बाद से लच्छू देवी के दिन का चैन और रातों की नींद उड़ गई थी. उस ने वीडियो की बात अपने प्रेमी ठाकुर सुरेंद्र सिंह के बेटे गजेंद्र सिंह को बताई. फिर उस ने वागाराम के साथ मिल कर घटना को अंजाम दिया.

वागाराम आदतन शराब पीता था तो मुख्य आरोपी गजेंद्र सिंह और उस के पिता सुरेंद्र को डर था कि वह कहीं किसी के सामने नशे में हत्या की पोल न खोल दे. ऐसे में गजेंद्र ने वागाराम की शराब छुड़ाने की योजना बनाई, लेकिन वह वागाराम के साथ शराब पीने वाले अन्य 5 लोगों सहित कुल 8 जनों को शराब छुड़ाने ले गए.

गजेंद्र ने 5 जनों को अपने घर से व अन्य लोगों को गांव के बाहर से अपनी बोलेरो गाड़ी में बिठाया और आहोर के अगवरी गांव स्थित एक भोपा के पास ले गया. वहां इन सभी को 3 घंटे रखा. जैसेजैसे नंबर आया, उन्हें दवा दिलाई. दवा की एवज में प्रति व्यक्ति 2,500 रुपए लिए गए. सभी लोगों के पैसे गजेंद्र ने दिए. वहां बताया गया था कि दवा लेने के बाद 3 दिनों तक शराब पीने की इच्छा नहीं होती है.

उन सभी ने दवा ले ली. जब भी वे लोग दवा लेने के बाद शराब पीते तो उन्हें उल्टी हो जाती थी. इस तरह गजेंद्र ने वागाराम की शराब छुड़वा दी और निश्चिंत हो गया कि अब वह कभी पकड़ा नहीं जाएगा.

पुलिस जांच में सामने आया कि वागाराम पिछले 4 सालों से सुरेंद्र के खेतों पर काम कर रहा था. इन 4 सालों में वह सुरेंद्र के परिवार का विश्वासपात्र बन चुका था. इसी कारण गजेंद्र ने उसे वारदात में भी साथ रखा था. घटना के अगले दिन शव मिलने की सूचना जैसे ही मांडोली गांव में फैली तो वागाराम भी घटना से अनजान बन कर ग्रामीणों के साथ हो लिया.

ग्रामीणों के अनुसार मौके पर पुलिस जांच के बाद शव उठाने में वागाराम ने ही मदद की थी. जैसे ही शव को अस्पताल ले जाया गया, वहां गाड़ी में से शव को वागाराम ने मोर्चरी में भी रखवाया था. बाद में अंतिम संस्कार तक वह साथ रहा था. इस दौरान वह लोगों के बीच रह कर चल रही चर्चा की जानकारी जुटाता रहा था.

आरोपी लच्छू देवी से एसएचओ अरविंद कुमार ने पूछताछ की तो उस ने सारा राज खोल दिया. इस के बाद वागाराम को डिटेन कर पूछताछ की तो उस ने मुख्य आरोपी गजेंद्र सिंह के साथ मिल कर गणपत सिंह मांडोली की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया. तब आरोपी गजेंद्र सिंह को भी पकड़ लिया.

तीनों आरोपियों के पकड़े जाने के बाद 18 दिन से भूख हड़ताल पर बैठी मृतक की मां हवा कंवर ने कहा कि उन्हें न्याय मिल गया. एक मां की जिद के आगे 18 माह बाद उस के बेटे के हत्यारोपी आखिर पकड़े गए.

आरोपियों ने रिमांड के दौरान पूरी कहानी बता दी. आरोपी वागाराम की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथियार दरांती (कूट) उस के खेत में बनी ढाणी से बरामद कर लिया गया. 3 जांच अधिकारियों ने मामले की जांच की और आखिर गणपत सिंह मांडोली ब्लाइंड मर्डर का खुलासा कर दिया.

पुलिस ने पूछताछ पूरी होने पर आरोपी लच्छू देवी को रिमांड अवधि खत्म होने से एक दिन पूर्व 19 मार्च, 2026 को और अन्य आरोपियों गजेंद्र सिंह एवं वागाराम भील को रिमांड अवधि खत्म होने पर 20 मार्च, 2026 को एडीजे कोर्ट भीनमाल में पेश किया. जहां से सभी को जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक तीनों आरोपियों में से किसी की जमानत नहीं हुई थी.

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