Hindi Crime Triller. शक का दायरा श्यामली और शायंतनी के इर्दगिर्द सिमट जाने के बाद डा. सुप्रिया की हत्या की तसवीर करीबकरीब साफ हो गई थी. अब इंसपेक्टर गौरी को केवल यह पता लगाना था कि सुप्रिया की हत्या क्यों और कैसे की गई? साथ ही यह भी कि इस काम में श्यामली और शायंतनी दोनों शामिल थीं या यह किसी एक का काम था.
रोहित के अनुसार उस के पास 2 मोबाइल थे. घटना वाले दिन वह देर शाम अपने हौस्टल से चुपचाप निकल कर नर्सिंगहोम आया था. अंधेरे में वह इसलिए आया था ताकि भूल से भी भैया या उन के किसी करीबी की नजर उस पर न पड़ जाए. श्यामली को बाहर
बुला कर उस ने उसे अपना सैमसंग का मोबाइल दे दिया और सुबह को शिवाजी पार्क में मिलने की बात कह कर वापस लौट गया.
सुबह वह शिवाजी पार्क में आया भी, लेकिन श्यामली वहां नहीं पहुंची. इस से उसे चिंता हुई कि कहीं श्यामली फोटो खींचते वक्त पकड़ी तो नहीं गई. उसे चूंकि अपने मोबाइल की चिंता थी इसलिए छिपछिपा कर वह नर्सिंगहोम की ओर गया. लेकिन बाहर पुलिस जिप्सी खड़ी देख वहां से हट गया. वहीं पर उसे एक आदमी से पता चला कि ज्योति नर्सिंगहोम में डा. सुप्रिया का मर्डर हो गया है. इस के बाद वह बुरी तरह डर गया और अपने हौस्टल लौट गया. डर की वजह से उस ने श्यामली को फोन भी नहीं किया था. रोहित के अनुसार नर्सिंगहोम में उस का मोबाइल जरूर मौजूद था लेकिन उस रात उस ने नर्सिंगहोम में कदम भी नहीं रखा था.
रोहित की सारी बातें सुनने के बाद इंसपेक्टर गौरी ने उस से पूछा, ‘‘अगर तुम सच बोल रहे हो तो हौस्टल छोड़ कर क्यों भागे? कल दोपहर से तुम हौस्टल में नहीं थे.’’
‘‘दरअसल फोन कर के भाईसाहब ने मुझ से कहा था कि मैं हौस्टल छोड़ कर एकदो दिन कहीं छिप कर रहूं. इस से मैं समझ गया कि पुलिस ने नर्सिंगहोम से मेरा मोबाइल बरामद किया होगा. आज जब उन्होंने मुझे आने को कहा तो मैं आ गया और वह मुझे यहां ले आए.’’
इंसपेक्टर गौरी को लगा कि रोहित शायद झूठ नहीं बोल रहा है. लेकिन उस की बातों को पूरी तरह सच भी नहीं माना जा सकता था. इसलिए उन्होंने उसे एक अलग कमरे में बैठाने का आदेश दिया. इस के बाद उन्होंने श्यामली को बुलाया. श्यामली उतनी सीधी भले ही न रही हो, पर शायंतनी की तरह तेजतर्रार नहीं थी. इंसपेक्टर गौरी ने उसे समझा कर कहा, ‘‘देखो श्यामली, मुझे झूठ से सख्त नफरत है. इसलिए तुम्हारे लिए बेहतर यही होगा कि सब कुछ सचसच बता दो.’’
श्यामली ने सच बोलने का वादा किया तो इंसपेक्टर गौरी ने सब से पहले वे बातें पूछी जो रोहित ने बताई थीं. उस ने यह बात मान ली कि रोहित सच बोल रहा है. वाकई वह नर्सिंगहोम में नहीं आया था. इस का मतलब डा. सुप्रिया के कत्ल में रोहित का कोई हाथ नहीं था.
इंसपेक्टर गौरी ने श्यामली से पूछा, ‘‘हम ने पूरे नर्सिंगहोम की तलाशी ली थी, लेकिन रोहित का मोबाइल नहीं मिला. कहां है उस का मोबाइल? उसी मोबाइल से हमें डा. सुप्रिया के कत्ल की सूचना दी गई थी. उस के बाद वह बंद हो गया था.’’
यह सुन कर पलभर के लिए श्यामली के चेहरे पर आश्चर्य के भाव उभरे. फिर वह नजरें झुका कर बोली, ‘‘मुझे खुद नहीं मालूम कि मोबाइल कहां गया. उस सुबह जब पुलिस नर्सिंगहोम आई थी तब किसी के हाथ लग गया होगा और उस ने कहीं छिपा दिया होगा.’’
रोहित का मोबाइल जब श्यामली के पास था तो वह गायब कैसे हुआ, यह एक महत्त्वपूर्ण सवाल था. इंसपेक्टर गौरी ने उस से जब इस बारे में पूछा तो उस ने जो कहानी बताई, वह काफी रोमांचक थी.
श्यामली के अनुसार 2 साल पहले ज्योति नर्सिंगहोम में नौकरी मिल जाने के 2-3 महीने बाद ही उसे पता चल गया था कि डा. कपिल और डा. सुप्रिया के बीच आंतरिक संबंध हैं. दोनों बाहर होटलों वगैरह में जाते हैं और फर्स्ट फ्लोर स्थित डा. कपिल के पर्सनल रूप में भी एंजौय करते हैं. जब कभी दोनों को फर्स्ट फ्लोर वाले रूम में मिलना होता है तो कर्मचारियों को उस फ्लोर पर जाने के लिए मना कर दिया जाता है. वह चूंकि वहां की नई कर्मचारी थी, इसलिए शुरूशुरू में उस ने इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था.
श्यामली के अनुसार बाद में उसे अपनी एक साथी नर्स से पता चला कि डा. कपिल और डा. सुप्रिया ने विधिवत शादी भले ही नहीं की थी लेकिन दोनों खुद को पतिपत्नी मानते थे. 3 साल पहले जब उन्होंने इस रिश्ते को स्वीकार किया था, तब दोनों ने नर्सिंगहोम के फर्स्ट फ्लोर स्थित डा. कपिल वाले पर्सनल रूम में सुहागरात मनाई थी. कपिल की पत्नी चंद्रिका उस रात अपने मायके गई हुई थी. तब से दोनों हर साल इस रात को उसी कमरे में मैरिज एनिवर्सरी की तरह एंजौय करते थे. ज्यादा तामझाम इसलिए नहीं किया जाता था क्यों कि ऐसा करने से यह खबर चंद्रिका तक पहुंच सकती थी.
श्यामली ने आगे बताया कि यह बात भी उसे बाद में पता चली कि जिस रात पालीवाल साहब के बेटे आनंद की मौत हुई, वह रात भी डा. कपिल और सुप्रिया की वही खास रात थी. आनंद का इलाज डा. सुप्रिया ही कर रही थी. उस रात सुप्रिया की रात की ड्यूटी थी. रात को करीब साढ़े 11 बजे आनंद अचानक पेट के दर्द से तड़पने लगा तो पालीवाल साहब और उन की पत्नी शारदा ने ड्यूटी पर मौजूद नर्स से डा. सुप्रिया को बुलाने को कहा. नर्स ने 2-3 बार सुप्रिया के मोबाइल पर फोन भी किया, लेकिन वह आधे घंटे तक हर बार यह कह कर टालती रही कि 10 मिनट संभालो, मैं आती हूं. जब आनंद की हालत सुधरने के बजाए और ज्यादा बिगड़ गई तो मजबूरी में नर्स ने फिर फोन किया. इस पर सुप्रिया ने एक इंजेक्शन का नाम बता कर आनंद को देने को कहा और अपना मोबाइल स्विच्ड औफ कर दिया.
पता नहीं इंजेक्शन का रिएक्शन हुआ या कुछ और, करीब साढ़े 12 बजे आनंद ने तड़पतेतड़पते दम तोड़ दिया. श्यामली के अनुसार, प्रकाश पालीवाल ने उस की पढ़ाई में बहुत बड़ी भूमिका अदा की थी इसलिए यह सच्चाई जान कर उसे बहुत दुख हुआ. ज्योति नर्सिंगहोम में हुई आनंद की मौत से तो वह वाकिफ थी, लेकिन उस की मौत की वजह उसे नर्सिंगहोम में नौकरी करते हुए ही पता चली थी.
हकीकत जान कर उसे डा. सुप्रिया से नफरत हो गई थी. वह वहां से नौकरी छोड़ देना चाहती थी लेकिन घर के आर्थिक हालात की वजह से वह ऐसा नहीं कर सकी. श्यामली के अनुसार, पालीवाल साहब को जब पता चला कि वह ज्योति नर्सिंगहोम में नौकरी कर रही है तो उन्हें दुख हुआ. उन्होंने कहा तो कुछ नहीं था पर उस से बातचीत बंद कर दी थी. अलबत्ता वह और शायंतनी एकदूसरे से बात भी करती थीं, मिलती भी थीं और दुनियाजहान की बातें भी शेयर करती थीं. वह शायंतनी को नर्सिंगहोम की भी सारी बातें बताती थी.
श्यामली के इस बयान से इस पूरे मामले पर जमी धुंध काफी हद तक छंट गई थी. लेकिन असल रहस्य अभी भी बाकी था. इसलिए इंसपेक्टर गौरी ने उस से कहा, ‘‘अब जरा मोबाइल वाली बात पर आ जाओ, क्योंकि सुप्रिया की हत्या का राज उसी में छिपा है.’’
श्यामली पलभर चुप बैठी रही, फिर गहरी सांस ले कर बोली, ‘‘मैं जानती हूं कि मैं अपराधी हूं और मुझे जेल भी जाना पड़ेगा. लेकिन सच्चाई को ज्यादा देर तक छिपाया नहीं जा सकता. आप भले ही यकीन करें या न करें, पर मैं आप से झूठ नहीं बोलूंगी.’’
इंसपेक्टर गौरी के प्रोत्साहित करने पर श्यामली ने आगे जो कुछ बताया, उस का लब्बोलुआब यह था कि श्यामली ने यह बात तो रोहित को नहीं बताई कि डा. कपिल और डा. सुप्रिया की वह खास रात है और रात को उन्हें हर हाल में मिलना ही है. अलबत्ता उस ने उन के निजी पलों की वीडियो फिल्म बनाने के लिए उस का सैमसंग मोबाइल जरूर मांग लिया. रोहित रात में मोबाइल देने के लिए आने वाला था इसलिए उस ने मौका देख कर शाम को ही डा. कपिल के निजी कमरे की एसी वाली खिड़की के पास थोड़ी सी ऐसी जगह बना दी जो सामान्य तौर पर किसी को न दिखे लेकिन वहां से अंदर का दृश्य देखा जा सके.
रात को 11 बजे फर्स्ट फ्लोर पर सब का आनाजाना बंद हो गया. लगभग साढ़े 11 बजे डा. कपिल अपने पर्सनल रूम में गए. उस के 10-15 मिनट बाद डा. सुप्रिया भी वहां पहुंच गईं. अब श्यामली को सब से छिपछिपा कर ऊपर जाना था. उस समय ऊपर जाना संभव नहीं था क्योंकि नर्सिंगहोम के सभी कर्मचारी नीचे थे. वह निश्चिंत इसलिए थी क्योंकि उसे मालूम था कि डा. कपिल और डा. सुप्रिया कम से कम डेढ़-दो घंटे उसी कमरे में रहेंगे. श्यामली को ऊपर जाने का मौका मिला लगभग साढ़े 12 बजे. तब तक नर्सिंगहोम में सन्नाटा छा गया था और 1-2 कर्मचारी बेंचों पर बैठ कर ऊंघने लगे थे.
श्यामली छिपतेछिपाते जब फर्स्ट फ्लोर पर अपने निर्धारित पौइंट पर पहुंची तब डा. कपिल और सुप्रिया का बीयर का आखिरी दौर चल रहा था. दोनों हंसीठिठोली करते हुए बीयर पी रहे थे. श्यामली ने मोबाइल निकाल कर अपना काम शुरू कर दिया. वहां एक तो जगह कम थी ऊपर से अंधेरा. फिर एसी भी चल रहा था. श्यामली को अंदर की तसवीर लेने में काफी परेशानी हो रही थी. फिर भी उस ने अपना काम जारी रखा. थोड़ी देर बाद डा. सुप्रिया और डा. कपिल बिस्तर पर पहुंच गए. अभी उन की प्रेमलीला शुरू ही हुई थी कि श्यामली के हाथ का मोबाइल घर्रघर्र करने लगा. फोन वाईब्रेशन मोड में था और उस पर काल आ रही थी. अचानक हुई मोबाइल की घरघराहट से श्यामली बुरी तरह घबरा गई. मोबाइल छूट कर उस के हाथ से गिर गया. मोबाइल गिरने से अच्छीभली आवाज हुई थी. इस से वह और भी डर गई.
वहां अंधेरा था, मोबाइल कहां गिरा श्यामली देख नहीं पाई. हालांकि तब तक घर्रघर्र की आवाज बंद हो गई थी. फिर भी उसे डर था कि आवाज कहीं अंदर न पहुंच गई हो. उस ने अंदर झांक कर देखा तो उस का शक सही निकला. आवाज अंदर चली गई थी क्योंकि डा. कपिल सुप्रिया को छोड़ कर खड़े हो गए थे. वह शायद बाहर आ कर देखेंगे, यह सोच कर श्यामली मोबाइल का मोह छोड़ कर दबेपांव नीचे जाने वाली सीढि़यों की ओर दौड़ी. तभी कमरे का दरवाजा खोल कर डा. कपिल बाहर निकले और इधरउधर देखने लगे. इस से श्यामली और भी डर गई और छिपतेछिपाते नीचे चली गई. इस के बाद उस की ऊपर जाने की हिम्मत नहीं हुई.
श्यामली के अनुसार उसे रोहित के मोबाइल की चिंता थी. इसलिए एक घंटा बाद वह यह सोच कर फिर दबेपांव ऊपर गई कि डा. कपिल अगर अपना खेल खेल कर चले गए होंगे और डा. सुप्रिया सो गई होंगी तो वह अंधेरे में गिरा मोबाइल खोज लेगी. इस के लिए वह टौर्च साथ ले कर गई थी. दबेपांव उस ने ऊपर जा कर देखा तो डा. कपिल वाकई जा चुके थे.
मोबाइल खोजने से पहले उस ने कमरे में झांका तो उस की आंखें फटी की फटी रह गईं. डा. सुप्रिया की बांह में सिरिंज घुसी हुई थी और वह अस्तव्यस्त हालत में पड़ी थीं. श्यामली समझ गई कि उस का कत्ल किया गया है. इस से वह और भी डर गई. इस के बावजूद उस ने टौर्च की मदद से मोबाइल खोजने की कोशिश की पर वह नहीं मिला. निराश हो कर वह नीचे लौट आई.
इंसपेक्टर गौरी ने श्यामली की बातें बड़े गौर से सुनी थीं. उन्हें उस की कुछ बातें सच भी लग रही थीं, लेकिन उस के चेहरे की भावभंगिमा से झूठ भी झांकता नजर आ रहा था. इसलिए उन्होंने श्यामली के चेहरे पर नजरें जमाते हुए कहा, ‘‘तुम ने बताया कि जब तुम डा. कपिल के कमरे के अंदर के फोटो खींच रही थीं तो रोहित वाले मोबाइल पर काल आई थी और घबराहट में तुम्हारे हाथ से मोबाइल गिर गया था. जानती हो, वह काल किस की थी?’’
‘‘नहीं, मुझे नहीं पता. फोन मिल जाता तो हो सकता है, पता भी चल जाता.’’
‘‘वह काल शायंतनी की थी, वह भी नर्सिंगहोम से की हुई.’’ इंसपेक्टर गौरी ने तेवर बदलते हुए कहा, ‘‘मेरे सामने भोली बनने की कोशिश मत करो, मैं अच्छी तरह जानती हूं कि या तो डा. सुप्रिया का कत्ल तुम दोनों ने किया है या फिर तुम लोगों ने कत्ल करने में प्रकाश पालीवाल की मदद की है.’’
शायंतनी का नाम आने से श्यामली और भी ज्यादा घबरा गई थी. उस से बोलते नहीं बन रहा था. मामले की तह तक पहुंचने के लिए उस का मुंह खुलवाना जरूरी था. इसलिए इंसपेक्टर गौरी ने सख्त रुख अपनाते हुए पूछा, ‘‘बोलो, शायंतनी उस रात नर्सिंगहोम में थी या नहीं?’’
मजबूरी में श्यामली ने यह तो स्वीकार कर लिया कि उस रात शायंतनी भी नर्सिंगहोम में ही थी. लेकिन वह इस बात से अनभिज्ञता जाहिर कर रही थी कि रोहित वाले मोबाइल पर शायंतनी ने मिस काल कब, क्यों और कैसे दी थी. वह डा. सुप्रिया के कत्ल में अपना हाथ होने की बात से भी इनकार कर रही थी. उसे सुर में न आते देख इंसपेक्टर गौरी ने कहा, ‘‘ऐसा करते हैं, शायंतनी को भी यहीं बुला लेते हैं. दोनों से आमनेसामने बात होगी तो सच्चाई खुदबखुद सामने आ जाएगी.’’
यह सुन कर श्यामली थोड़ा परेशान से स्वर में बोली, ‘‘मैडम, इस की कोई जरूरत नहीं है. मैं आप को सच बता देती हूं. डा. सुप्रिया का मर्डर शायंतनी ने किया है. मैं ने उसे बचाने की कोशिश जरूर की, लेकिन न तो मैं मर्डर में शामिल थी और न उस की योजना में.’’
‘‘चलो मान लेते हैं.’’ इंसपेक्टर गौरी ने सहजता से कहा और नजरें श्यामली के चेहरे पर जमाते हुए बोलीं, ‘‘अब सब कुछ सचसच बता दो, तुम्हारे लिए यही अच्छा रहेगा. क्योंकि मैं ने अगर तुम्हें इंटेरोगेशन रूम में भेज दिया तो मेरी कांस्टेबल पता नहीं तुम्हारे साथ कैसे पेश आएं.’’
अब श्यामली के पास सच बोलने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था. उस ने जो कुछ बताया, वह वाकई चौंकाने वाला था.
श्यामली और शायंतनी फोन पर तो बातें करती ही थीं अकसर मिलती भी रहती थीं. दोनों एकदूसरे को सब कुछ बताती थीं. श्यामली नर्सिंगहोम की बातें शायंतनी को बताती थी तो शायंतनी उसे पालीवाल साहब के घर की बातें. श्यामली ने ही शायंतनी को डा. कपिल और डा. सुप्रिया के संबंधों से ले कर उन की स्पैशल नाइट वाली बात भी बताई थी. साथ ही यह भी कि डा. कपिल का भाई रोहित उसे पैसा दे कर उन दोनों की जासूसी करवाता है.
जिस दिन प्रकाश पालीवाल को नर्सिंगहोम में भरती करवाया गया था, उस दिन नर्सिंगहोम से लौट कर शायंतनी पहले श्यामली के घर जा कर उस से मिली थी, फिर घर गई थी. तभी उस ने श्यामली को बताया कि साहब की तबीयत में काफी सुधार है और वह 3-4 घंटे में होश में आ जाएंगे. उसे चूंकि मेमसाब की देखभाल करनी है इसलिए देवेंदर रंधावा को वहां छोड़ कर लौट आई है. उसी वक्त उस ने श्यामली से कहा कि जब साहब होश में आ जाएं तो वह कहसुन कर उन्हें फर्स्ट फ्लोर के किसी कमरे में शिफ्ट करा दे क्योंकि नीचे लोगों के आनेजाने और शोरशराबे से वह डिस्टर्ब होंगे. उसे तो पता है, साहब कितने शांतिप्रिय इंसान हैं.
श्यामली का उस रात डा. कपिल और सुप्रिया की वीडियोग्राफी का प्र्रोग्राम था. यह बात वह दिन में ही शायंतनी को बता भी चुकी थी. उस ने शायंतनी को याद दिलाया तो वह बोली, ‘‘साहब के वहां रहने से तुम्हारे रोहित वाले काम पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. उन्हें नींद की गोली दे देना चैन से सोते रहेंगे. वैसे भी वह रोज नींद की गोली ले कर सोते हैं.’’
वह डा. कपिल और डा. सुप्रिया की स्पैशल रात थी. श्यामली जानती थी कि दोनों उस रात डा. कपिल वाले रूम में मिलेंगे. श्यामली को चूंकि रोहित का काम करना था इसलिए उस ने पूरी योजना पहले ही बना रखी थी. इस के लिए उस ने रोहित से उस का मोबाइल भी मंगाया था. वह नहीं चाहती थी कि फर्स्ट फ्लोर पर कोई रहे.
लेकिन एक तो करीबी दोस्त की बात थी. दूसरे उस के हितैषी रहे पालीवाल साहब का मामला था इसलिए श्यामली को शायंतनी की बात माननी पड़ी.
श्यामली की ड्यूटी उस दिन शाम 6 बजे से थी. इसलिए उस ने फोन कर के पालीवाल साहब को फर्स्ट फ्लोर पर कमरा दिलाने का काम दूसरी नर्स विशाखा को सौंप दिया. शाम को 6 बजे श्यामली जब ज्योति नर्सिंगहोम पहुंची तो प्रकाश पालीवाल को कमरा नंबर-13 में शिफ्ट किया जा चुका था. वह पालीवाल साहब से भी मिली. उन्होंने बहुत अच्छे से तो उस से बात नहीं की पर उसे इग्नोर भी नहीं किया.
शाम को साढ़े 7 बजे शायंतनी पालीवाल से मिलने के लिए पहुंची तो उन से मिलने के बाद करीब 8 बजे उस ने श्यामली से कहा, ‘‘मुझे तुझ से अकेले में बात करनी है. बहुत गंभीर मामला है. बाहर चलें या यहीं पर कहीं बात करें.’’
इस के कुछ ही देर पहले रोहित श्यामली को नर्सिंगहोम से बाहर बुला कर अपना मोबाइल दे गया था. लेकिन वह अभी उसे कहीं संभाल कर नहीं रख पाई थी. जब श्यामली शायंतनी से बात कर रही थी तभी रिसैप्शनिस्ट ने बताया कि उसे डा. सुप्रिया बुला रही हैं. इस पर श्यामली ने रोहित का मोबाइल शायंतनी को देते हुए कहा, ‘‘इसे ले कर साहब के कमरे में चल, मैं आती हूं. फिर देखते हैं, कहां बात करनी है.’’
मोबाइल ले कर शायंतनी कमरा नंबर-13 में चली गई. श्यामली को आने में 15 मिनट लगे. उस ने शायंतनी को बाहर बुलाया और फर्स्ट फ्लोर पर खाली पड़े कमरा नंबर 14 में ले गई. दोनों में बातचीत हुई तो शायंतनी श्यामली का हाथ पकड़ कर अपने सिर पर रखते हुए बोली, ‘‘अचानक एक परेशानी आ गई है जिस से तू ही बचा सकती है. तुझे मेरी दोस्ती की कसम, इनकार मत करना.’’
‘‘बता, क्या बात है?’’ श्यामली ने घबरा कर पूछा तो शायंतनी ने बताया, ‘‘याद है, आज आनंद भैया का बर्थडे है. आज से 3 साल पहले इसी नर्सिंगहोम में उन की मौत हुई थी, डा. सुप्रिया की वजह से.’’
‘‘हां…तो?’’
‘‘साहब उसे भूले नहीं हैं. वह डा. सुप्रिया से बदला लेना चाहते हैं. खीर में नींद की गोलियां डाल कर खाने और उन के यहां आने का यही मकसद है. मुझे यह बात तब पता चली जब उन्होंने मुझ से घर से एक बैग लाने को कहा. यह तो अच्छा हुआ कि मैं ने बैग खोल कर देख लिया. उस बैग में एक नकाब, रबर के ग्लव्स, एक पिस्तौल और एक सिरिंज है. हमें किसी भी तरह साहब को रोकना होगा. क्योंकि डा. सुप्रिया को मार कर वह जेल चले गए तो मेमसाब का क्या होगा. उन की हालत तो तुझे पता है न?’’
शायंतनी की बात सुन कर श्यामली चकरा गई. उसे अपनी योजना पर तो पानी फिरता नजर आ ही रहा था, साथ ही एक और बड़ी मुसीबत गले पड़ रही थी जिस का समाधान जरूरी था. श्यामली कुछ सोचती या कहती, इस से पहले ही शायंतनी ने उसे समाधान सुझा दिया, ‘‘तू किसी भी तरह अपनी डाक्टर से कह कर उन्हें नींद की 2 गोलियां दिलवा दे. वह चैन की नींद सो जाएंगे तो यह मुसीबत टल जाएगी. दूसरे तुझे मेरे यहां रहने का कोई इंतजाम करना पड़ेगा. क्योंकि मेमसाब ने मुझे साहब के पास रहने को कहा है और साहब मुझे यहां रहने को मना कर रहे हैं.’’
इस मुद्दे पर सोचविचार के बाद शायंतनी और श्यामली के बीच तय हुआ कि जब तक पालीवाल साहब सो नहीं जाते, तब तक शायंतनी कमरा नंबर 14 में छिपी रहेगी. नींद की गोलियां खाने के बाद जब वह सो जाएंगे तो वह उन्हीं के कमरे में जा कर छिप जाएगी ताकि उन पर निगाह रख सके. सब कुछ तय हो जाने के बाद श्यामली ने डा. सुप्रिया से पूछ कर प्रकाश पालीवाल को दवाई के नाम पर नींद की 2 गोलियां दे दीं. सुप्रिया से इसलिए पूछा गया ताकि यह रिकार्ड में आ सके. 10-साढ़े 10 बजे जब प्रकाश पालीवाल सो गए तब श्यामली ने शायंतनी से कहा कि वह कमरा नंबर 13 में चली जाए और कमरा अंदर से बंद कर ले. रात में कोई विजिट पर नहीं आएगा. सुबह को वह उसे अलसुबह नर्सिंगहोम से निकाल देगी ताकि वह पालीवाल साहब का बैग ले कर वहां से जा सके.
‘‘तुम ने इतना सब तो बता दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि डा. सुप्रिया का मर्डर कैसे हुआ?’’ इंसपेक्टर गौरी ने पूछा तो श्यामली दुखी हो कर बोली, ‘‘यह तो शायंतनी ही बता सकती है. क्योंकि मर्डर मेरे सामने नहीं हुआ.’’
‘‘उस ने तुम्हें बताई थी मर्डर की बात?’’
‘‘उस ने नहीं बताई बल्कि डा. सुप्रिया की लाश देखने के बाद मैं ने ही उस से पूछा था. उस ने बिना किसी नानुकुर के मान भी लिया था कि डा. सुप्रिया का मर्डर उसी ने किया है.’’
‘‘यह जानने के बाद तुम ने क्या किया?’’
‘‘मैं क्या करती, अब मेरे पास एक ही रास्ता बचा था कि उसे किसी भी तरह सुरक्षित वहां से निकाल दूं. क्योंकि उस के वहां रहने से वह तो पकड़ी ही जाती, मैं भी फंस जाती. जो कुछ होना था, हो चुका था. अब हमें अपने आप को बचाना था. दोनों ने इस मुद्दे पर बातचीत की तो तय हुआ कि किसी तरह ऐसी स्थितियां बना दी जाएं कि किसी का शक हमारी ओर न जाए. शायंतनी ने डा. सुप्रिया को डाक्टर सेफ की जो सिरिंज लगाई थी वह उसे बाहर से ले कर आई थी. उस का रैपर उस ने कमरा नंबर 13 के डस्टबिन में डाल दिया था. परेशानी यह थी कि नर्सिंगहोम में डा. सेफ की नहीं बल्कि डिस्पोवेन की सिरिंज इस्तेमाल हो रही थीं. मैं ने इस मुद्दे पर सोचा तो मुझे याद आया कि ऊपरी मंजिल स्थित स्टोररूम में डाक्टर सेफ की 20 एमएल की सिरिंज का एक पैकेट रखा है, लेकिन ऊपर ताला लगा था.
‘‘मैं ने अपना आइडिया शायंतनी को बताया तो वह बोली, ‘तू सीढि़यों के पास खड़ी हो कर निगरानी रख, मैं देखती हूं क्या हो सकता है.’ इस के बाद वह सीढि़यां चढ़ कर ऊपर गई और अपनी हेयर पिन से ताला खोल दिया. उस ने आ कर मुझे बताया तो मैं ऊपर जा कर डाक्टर सेफ की 4 सिरिंज ले आई. मैं ने उन के रैपर रूम नंबर 15 के डस्टबिन और फर्स्ट फ्लोर पर रखे डस्टबिन में डाल दिए. इस बीच शायंतनी ने हेयर पिन से ऊपर का ताला बंद कर दिया था. बिना रैपर की सिरिंज मैं ने इस हिदायत के साथ शायंतनी द्वारा लाए बैग में डाल दीं कि उन्हें कहीं दूर जा कर फेंक दे. इस के बाद मैं ने शायंतनी को अलसुबह साढ़े 5 बजे चुपचाप नर्सिंगहोम से निकाल दिया था. उस वक्त रिसैप्शन पर मौजूद कुछ लोग ऊंघ रहे थे और कुछ सो रहे थे. किसी की निगाह शायंतनी पर न पड़े, इस के लिए मैं ने थोड़ी देर के लिए मेन स्विच बंद कर के अंधेरा कर दिया था.’’
श्यामली की बातों में कितनी सच्चाई थी, यह शायंतनी से पूछताछ के बाद ही पता चल सकता था. इंसपेक्टर गौरी ने शायंतनी को बुलाया. उस के तेवरों में कोई कमी नहीं आई थी. श्यामली को वहां बैठे देख वह तुनकते हुए बोली, ‘‘इस ने सब कुछ बता दिया होगा, अब मुझ से क्या पूछेंगी मैडम?’’
‘‘फिलहाल तो सिर्फ 2 बातें पूछनी हैं.’’ इंसपेक्टर गौरी उस की ओर देखते हुए बोलीं, ‘‘एक तो यह कि पालीवाल साहब ने जो जहरीली खीर खाई थी, वह उन्होंने खुद खाई थी या तुम ने जानबूझ कर उन्हें खिलाई थी? और दूसरी यह कि तुम ने डा. सुप्रिया का मर्डर कैसे किया?’’
‘‘साहब को खीर मैं ने खिलाई थी ताकि उन्हें नर्सिंगहोम में भरती कराया जा सके, लेकिन वह इतनी जहरीली नहीं थी कि उन की जान को खतरा होता.’’ शायंतनी ने बिना डरे बेझिझक जवाब दिया, ‘‘और रही बात डा. सुप्रिया के मर्डर की तो यह काम मैं ने खुद किया. श्यामली सिर्फ मेरा मोहरा भर थी.’’
‘‘इसे मोहरा कैसे बनाया, यह भी बता दो.’’
‘‘श्यामली डा. सुप्रिया और डा. कपिल की वीडियो फिल्म बनाएगी, यह मुझे पता था. इसलिए जब इस ने मुझे रोहित का मोबाइल रखने को दिया तभी कमरे में जा कर मैं ने उस से अपने नंबर पर मिस्ड काल मार कर वह नंबर ले लिया था. श्यामली को न तो मेरे प्लान का पता था और न यह कि मैं इस का प्लान चौपट कर दूंगी. जब यह अपने काम में लगी थी तब इसे लगा होगा कि मैं कमरे के बाहर नहीं निकलूंगी. जबकि ऐसा नहीं था, मेरी निगाहें इसी पर लगी हुई थीं.
‘‘जब श्यामली डा. कपिल के कमरे के एसी के पास खड़ी अंदर के फोटो ले रही थी, तभी मैं ने जानबूझ कर रोहित वाले नंबर पर मिस्ड काल दी ताकि यह घबरा कर वहां से हट जाए. लेकिन अचानक आई काल से यह घबरा गई और इस के हाथ से मोबाइल छूट कर अंधेरे में गिर गया. यह शायद मोबाइल ढूंढ़ भी लेती, लेकिन तभी डा. कपिल ने दरवाजा खोल कर बाहर झांका. इस से घबरा कर श्यामली नीचे चली गई.
‘‘करीब आधा घंटा बाद जब डा. कपिल अपने कमरे से निकल कर ऊपर अपने रेजीडेंस में चले गए तो मैं उस कमरे में जा पहुंची. उस वक्त मेरे चेहरे पर नकाब था, हाथों में ग्लव्स, एक हाथ में नकली पिस्तौल और जेब में सिरिंज. यह तैयारी मैं ने पहले ही कर ली थी. पिस्तौल के डर से मुझे डा. सुप्रिया को कब्जे में करने में ज्यादा देर नहीं लगी. पिस्तौल की नोक पर ही मैं ने उस की बांह में खाली सिरिंज से हवा इंजेक्ट कर दी. इस के बाद मैं उसे तब तक पीटती रही जब तक उस पर बेहोशी नहीं छाने लगी. वह रोई, छटपटाई पर मुझे उस पर कोई रहम नहीं आया. उस के शरीर पर खरोंचों के निशान भी मैं ने ही बनाए और उस के कपडे़ भी मैं ने ही फाड़े ताकि सारा इलजाम डा. कपिल पर आए.
‘‘अपना काम कर के मैं ने चेहरे से नकाब उतार कर टेबल पर रखा तो मेरी निगाह वहां रखी चाबी पर पड़ गई. मैं ने चाबी उठा ली और कमरे का ताला बंद कर के सब से पहले रोहित का वह मोबाइल ढूंढा जो श्यामली से अंधेरे में गिर गया था. इस के बाद मैं अपने कमरे में आ गई और सारा सामान मैं ने अपने बैग में रख लिया. रोहित का मोबाइल भी. तभी मुझे खयाल आया कि जल्दबाजी में मैं नकाब डा. कपिल के कमरे में छोड़ आई थी. यह मेरी भूल थी लेकिन दोबारा वहां जाना मुझे ठीक नहीं लगा.
‘‘करीब 1 घंटे बाद जब श्यामली ने आ कर मुझे बताया कि डा. कपिल ने डा. सुप्रिया का मर्डर कर दिया है, तो मैं ने उसे बता दिया कि मर्डर डा. कपिल ने नहीं मैं ने किया है. सुबह 5 बजे श्यामली जब मुझे बाहर भेजने के लिए नीचे की स्थिति देखने गई हुई थी तो मैं ने रोहित के मोबाइल से आप को फोन किया. आप का नंबर मेरे पास पहले ही था क्योंकि मेरा इरादा इस मामले में डा. कपिल को फंसाने का था.’’
‘‘तुम ने ये जो इतना लंबा खेल खेला, उस की वजह क्या थी?’’
‘‘मेरे भैया की मौत, जिस के लिए डा. सुप्रिया जिम्मेदार थी. अगर उस रात वह नर्स के बुलाने पर आ गई होती तो मेरे भाई की जान नहीं जाती.’’
‘‘तुम्हारा भाई मतलब आनंद पालीवाल?’’
‘‘जी, आनंद पालीवाल. जानती हैं, वह एकलौता बेटा था साहबमेमसाब का. बड़ी मुरादों से मिला हुआ. जब साहब 35-36 के थे तब पैदा हुआ था. रिश्ते केवल खून के ही नहीं होते मैडम, मेरे लिए वह जान से भी बढ़ कर था. बहुत प्यार करता था मुझे. वह ही नहीं, साहब और मेमसाब भी.’’ शायंतनी भावुकता में बहने लगी, ‘‘आनंद की मौत के बाद अगर आप ने 2 दिन भी उन लोगों के साथ गुजारे होते तो आप भी ऐसा ही कुछ करने का सोचतीं जैसा मैं ने किया. मुझे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है अलावा इस के कि मेरी वजह से श्यामली इस मामले में फंस गई, लेकिन हकीकत में इस का कहीं कोई दोष नहीं है.’’
‘‘आनंद की मौत के 3 साल बाद बदले की बात कुछ समझ में नहीं आई, अचानक ऐसा क्या कारण बना?’’ इंसपेक्टर गौरी ने पूछा तो शायंतनी ने बताया, ‘‘साहब हमेशा डा. सुप्रिया से बदला लेने की बात करते थे. आंटी जब भी ज्यादा बीमार या परेशान होती थीं तो वह एक ही बात कहते थे, ‘शारदा, तुम्हारी इस हालत के लिए डा. सुप्रिया जिम्मेदार है. अगर मेरे वश में होता तो अपने बेटे की मौत का बदला जरूर लेता. तुम्हें अगर कुछ हो गया तो भी मैं सुप्रिया को नहीं छोड़ूंगा और अगर तुम ठीक हो गईं तो भी मैं उस से हिसाब जरूर चुकाऊंगा. अब मेरी जिंदगी का उद्देश्य डा. सुप्रिया को मौत के घाट उतारना और डा. कपिल को बरबाद करना ही रह गया है.’ साहब की यह बात और उन के चेहरे पर हमेशा के लिए बसेरा बना चुकी उन की बेबसी मेरे मन और आत्मा में पैठ चुकी थी.’’
‘‘3 साल में तो बड़ेबड़े घाव भर जाते हैं, तुम्हारा यह घाव नासूर कैसे बन गया?’’ इंसपेक्टर गौरी ने पूछा तो शायंतनी बोली, ‘‘साहब और मेमसाब की हालत देख कर मैं मन ही मन रोती जरूर थी लेकिन अपने दिल के घावों पर आंसुओं का मरहम लगा लेती थी. उन के आंसू तो मैं देख लेती थी पर मेरे आंसू मेरी आंखों में ही जब्त होते रहते थे. मुझे खुद भी पता नहीं था कि मेरे जब्त होते आंसू अंदर ही अंदर आग बन रहे हैं.
‘‘नर्सिंग का कोर्स करते समय तो दुखदर्द में जैसेतैसे एक साल गुजर गया लेकिन जब कोर्स पूरा होने के बाद मैं उन के साथ रहने लगी तो उस दर्द को मैं ने शिद्दत से महसूस किया, महसूस क्या किया बल्कि जिया भी और पिया भी.
‘‘मेरे अंदर सुलग रही चिंगारी ने तब शोला बनना शुरू किया जब श्यामली ने डा. कपिल और डा. सुप्रिया के संबंधों की बात बता कर आनंद की मौत की असल वजह बताई. मेरे भाई की जान एक औरत की अय्याशी की भेंट चढ़ी थी यह जान कर मेरे अंदर बदले की भावना और भी जोर मारने लगी. बाद में जब श्यामली से मुझे पता चला कि जिस रात मेरे भाई की मौत हुई थी वह कपिल और डा. सुप्रिया की अवैध शादी की सुहागरात थी और उस रात को वे हर साल एनिवर्सरी के रूप में मनाते हैं, तो मैं ने पक्का फैसला कर लिया कि बदला भी उसी रात को चुकाऊंगी.’’
ऐसा लग रहा था जैसे शायंतनी को अपने किए पर कोई भी पछतावा नहीं था. वह बिना कुछ पूछे खुद ही सब कुछ बता रही थी, वह भी पूरे फख्र से. उस ने आगे बताया, ‘‘इस के लिए मैं ने अपने हाथों से सिल कर नकाब तैयार किया. बाजार से सिरिंज और नर्सिंग में काम आने वाले ग्लव्स खरीदे. साथ ही एक नकली पिस्तौल भी लिया. घर में नींद की गोलियां मेमसाब के लिए आती ही थीं इसलिए मुझे उन की कोई दिक्कत नहीं थी. मेरे भाई की मौत एक गलत इंजेक्शन से हुई थी जो डा. सुप्रिया के कहने पर दिया गया था. इसलिए मैं ने उसे इंजेक्शन से ही मारने का फैसला किया था. हवा के इंजेक्शन से. इस के बाद मैं ने साहब को कैसे ज्योति नर्सिंगहोम पहुंचाया, यह आप को पता ही है. हां, एक बात जरूर कहूंगी कि रोहित के लिए श्यामली की जासूसी और रोहित के मोबाइल ने मेरा बहुत साथ दिया.’’
‘‘डा. सुप्रिया के मर्डर के बाद तुम ने डा. कपिल का पर्सनल रूम लौक कर दिया था. उस की चाबी भी तुम्हारे पास थी. वह चाबी रिसैप्शन काउंटर की कैश वाली दराज में कैसे पहुंची?’’ इंसपेक्टर गौरी के पूछने पर शायंतनी ने फख्र से बताया, ‘‘यह मेरे हाथ की सफाई थी. दोपहर को जब मैं साहब को डिस्चार्ज कराने नर्सिंगहोम आई तब मैं ने बिल पे करते वक्त यह काम किया. मुझ से कैश ले कर मधु जब नोट कैश वाली दराज में रख रही थी तो मैं ने उस का ध्यान बंटाने के लिए साइड में खड़े वार्डबौय की ओर इशारा किया. जैसे ही उस ने उधर देखा, मैं ने चाबी खुली दराज में डाल दी. यह सब मैं ने यह सोच कर किया था कि किसी भी तरह डा. कपिल इस मामले में फंस जाएं.’’
‘‘खैर, नकाब तो हमें मिल गया है अब यह भी बता दो कि रोहित का मोबाइल, ग्लव्स और नकली पिस्तौल कहां हैं?’’ इंसपेक्टर गौरी के पूछने पर शायंतनी ने व्यंग्य में रूखा सा जवाब दिया, ‘‘मुझे इतना भोला मत समझिए मैडम, मैं ने अपने खिलाफ हर सुबूत मिटा दिया है. आप को जो भी सुबूत मिले हैं या आगे मिलें, उन्हीं के आधार पर केस बनाइए. मुझ से आप को कुछ नहीं मिलेगा.’’
प्रकाश पालीवाल को शायंतनी की गिरफ्तारी का पता चला तो अंदर आ गए. शायंतनी को देख उन की आंखों में आंसू भर आए. वह रोते हुए इंसपेक्टर गौरी से बोले, ‘‘मैडम, मैं आप के पैर पकड़ता हूं. आप मेरी बच्ची को छोड़ दीजिए. यह मुझे बचाने के लिए झूठ बोल रही है. डा. सुप्रिया का कत्ल मैं ने किया है.’’
उन दोनों का एकदूसरे के प्रति लगाव देख इंसपेक्टर गौरी भी भावुक हो गईं, लेकिन इस गंभीर अपराध में किसी को न तो ढील दी जा सकती थी और न सहानुभूति का प्रश्न था. इसलिए वह बोलीं, ‘‘मुझे आप से हमदर्दी है मिस्टर पालीवाल, लेकिन यह कानूनी मामला है. एक इंसान की हत्या हुई है और इस मामले में आप की भी एक भूमिका है. अफसोस, हमें आप को भी गिरफ्तार करना पड़ेगा.’’
पालीवाल की गिरफ्तारी की बात सुन कर शायंतनी चौंकी. उस ने घबरा कर पूछा, ‘‘इन्हें क्यों, इन्होंने ऐसा क्या किया है?’’
‘‘इन का अपराध यह है कि इन्हें सब कुछ पता था. रोहित के मोबाइल की बात भी. इन्हें घर ले जाने के बाद तुम ने इन्हें सब कुछ बता दिया था.’’ इंसपेक्टर गौरी ने खुलासा करते हुए कहा, ‘‘मिस्टर पालीवाल ने न केवल अपराध की बातें छिपाए रखीं बल्कि तुम्हारा अपराध अपने सिर लेने की कोशिश भी की. इतना ही नहीं, जब बात नहीं बनी तो ये डा. कपिल के पास भी गए. इन्होंने कपिल को रोहित के मोबाइल की बात बता कर डराया कि डा. सुप्रिया का मर्डर रोहित ने किया है. उस का मोबाइल घटना वाली रात नर्सिंगहोम में था और उसी से पुलिस को हत्या की सूचना दी गई थी. इन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि डा. कपिल हत्या का अपराध या तो खुद स्वीकार करें या अपने भाई को इस के लिए तैयार करें.’’
पालीवाल सिर झुकाए चुप खडे़ थे. इंसपेक्टर गौरी ने आगे कहा, ‘‘इन की बात सुन कर डा. कपिल डर गए. उन्होंने रोहित का नंबर मिलाया तो वह बंद था. इस से उन्हें इन की बात पर यकीन होने लगा. घबरा कर इन्होंने रोहित के दूसरे नंबर पर फोन कर के उस के मोबाइल के बारे में पूछा तो डर की वजह से वह कोई जवाब नहीं दे पाया. इस से डा. कपिल को लगा कि पालीवाल की बात सच है. इस के बाद वह अपने भाई को बचाने के लिए मेरे पास आए और डा. सुप्रिया की हत्या का इल्जाम अपने सिर ले कर खुद को गिरफ्तार करने की मांग की. लेकिन मैं ने उन्हें वापस लौटा दिया. इस पर उन्होंने यहां से जाने के बाद अपने भाई को हौस्टल छोड़ कर अंडरग्राउंड हो जाने को कह दिया था. क्यों पालीवाल साहब, मैं सच कह रही हूं न?’’
पालीवाल साहब कुछ नहीं बोले. वह शायंतनी के पास गए और उस का हाथ पकड़ कर रोते हुए बोले, ‘‘ये तूने क्या किया मेरी बच्ची, आनंद की मौत का दुख तो धीरेधीरे कम हो रहा था लेकिन तेरे बिना हम कैसे जिएंगे.’’
शायंतनी की आंखें भी नम हो गई थीं. वह आंसू पोंछ कर प्रकाश पालीवाल के कंधे पर हाथ रखते हुए बोली, ‘‘हौसला रखिए बाबूजी, मैं जल्दी ही बाहर आ जाऊंगी. फिर जिंदगी भर आप की सेवा करूंगी. मैं ने जो किया आप के लिए नहीं, अपने भाई के लिए किया है. उसे याद कर के रातरात भर रोती थी मैं. लेकिन अब नहीं रोऊंगी.’’






