Raebareli Murder Case. कालिका सिंह और योगिता के बीच गलतफहमियों और अहंकार की लड़ाई थी. दोनों थोड़ाथोड़ा झुकते तो बात खत्म हो जाती, लेकिन जब करवाचौथ के दिन योगिता ने गुस्सा दिखाने के लिए पति के सामने ही परपुरुष की आरती उतार कर पैर छुए तो कालिका ने उस का पिंडदान कर के सिर मुड़ा लिया. बस बात बढ़ गई और…

23 नवंबर, 2013 की दोपहर के बाद का वक्त था. उत्तर प्रदेश के जिला रायबरेली के पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में काफी भीड़ जमा थी. आश्चर्य की बात यह थी कि इन लोगों को रायबरेली के पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय ने खुद बुलाया था. वहां मौजूद लोगों में वकील और पत्रकार भी बड़ी तादाद में थे. दरअसल राजेश पांडेय आज बहुचर्चित कालिका सिंह हत्याकांड से परदा हटाने वाले थे.

रायबरेली के मोहल्ला रानानगर में रहने वाले कालिका सिंह की 21 अक्तूबर, 2013 को हत्या हो गई थी. हत्या के साथ उस के घर में लूटपाट भी हुई थी. लुटेरों ने उस की पत्नी योगिता सिंह को भी घायल कर दिया था. जिस की वजह से उसे अस्पताल ले जाना पड़ा था. कालिका सिंह रायबरेली के ही महाराजगंज में अपना एक स्कूल चलाता था. साथ ही वह रायबरेली में प्रौपर्टी डीलिंग का काम भी करता था. पुलिस पिछले एक महीने से इस घटना की जांच कर रही थी. यह मामला पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था.

रायबरेली के स्थानीय अखबार कालिका सिंह हत्याकांड को ले कर अलगअलग नजरिए से खबरें छाप रहे थे. एकदो अखबार ऐसे भी थे जो कालिका सिंह की हत्या के लिए उस की पत्नी को जिम्मेदार ठहरा रहे थे. जबकि कुछ का कहना था कि कालिका सिंह की हत्या प्रौपर्टी विवाद की वजह से हुई है. एक वकील के बेटे का नाम भी इस मामले में उछल रहा था. जिस की वजह से वकीलों का संगठन पुलिस पर दबाव बना रहा था कि उस परिवार के लोगों को न फंसाया जाए. इसी के मद्देनजर एसपी राजेश पांडेय ने इस मामले की जांच में जिले के काबिल पुलिस वालों को लगा रखा था.

पुलिस ने कालिका सिंह की पत्नी और वकील के पुत्र के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगा कर एक महीने तक निगाह रखी. तब जा कर वह किसी नतीजे पर पहुंची. चूंकि सुबूत मिल चुके थे, इसलिए पुलिस आश्वस्त थी. इसी के मद्देनजर राजेश पांडेय ने योजना बना कर संबंधित पक्षों को पुलिस औफिस में बुलाया था. उन सब को अलगअलग हौल में बैठाया गया. ऐसा इसलिए किया गया, ताकि अंदर बैठे आरोपियों से जो बात हो, टीवी कैमरों के जरिए उसे बाहर बैठे लोग स्क्रीन पर देखसुन सकें.

इस के लिए पहले ही कैमरों और टीवी स्क्रीन की व्यवस्था कर ली गई थी. ऐसा करना इसलिए जरूरी था, जिस से किसी पक्ष को यह न लगे कि उन के साथ विश्वासघात हुआ है. तय समय पर पुलिस ने आरोपियों को अंदर बैठा कर पूछताछ शुरू की. इस पूछताछ में कालिका सिंह हत्याकांड की परतें एकएक कर खुलती गईं. बाहर बैठे लोग सारी बातें देखसुन रहे थे. इस पूरी कवायत में कालिका सिंह हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस तरह थी.

24 अक्तूबर, 2013 की रात को 1 बजे रायबरेली कोतवाली के फोन की घंटी बजी तो नाइट ड्यूटी पर मौजूद एसएसआई मोहम्मद सुरखाब खान ने फोन उठाया. दूसरी ओर से रोती हुई एक औरत की आवाज आई, ‘‘साहब जल्दी आइए, हमारे घर लूटपाट हो गई है. लुटेरों ने मेरे पति को मार डाला है. मैं भी बुरी तरह घायल हूं.’’ उस महिला से उस का पता पूछ कर एसएसआई मोहम्मद सुरखाब खान कुछ सिपाहियों को साथ ले कर उस के घर पहुंच गए.

वहां पहुंच कर पता चला मरने वाला प्रौपर्टी डीलर कालिका सिंह था और पुलिस को फोन उस की पत्नी योगिता सिंह ने किया था. घर का सारा सामान बिखरा पड़ा था. इस घटना की सूचना पा कर इंसपेक्टर कोतवाली संतोष कुमार द्विवेदी, सीओ सिटी पंकज पांडेय और एसपी राजेश पांडेय भी मौकाएवारदात पर पहुंच गए थे. घायल योगिता सिंह की हालत ज्यादा गंभीर नहीं थी, फिर भी पुलिस ने उपचार के लिए उसे अस्पताल भिजवा दिया.

पुलिस ने कोतवाली रायबरेली में अज्ञात लोगों के विरुद्ध लूटपाट और हत्या का मुकदमा दर्ज कर के मामले की जांच शुरू कर दी. इस के लिए डौग स्क्वायड और क्राइम टीम के फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों को भी बुलाया गया. प्रारंभिक काररवाई के बाद कालिका सिंह की लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया गया. शुरुआती जांच में पुलिस को कुछ संदेह तो हुआ, लेकिन इस मामले की एकमात्र गवाह योगिता सिंह के अस्पताल में होने की वजह से वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. क्योंकि उस से पूछताछ के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जा सकता था.

पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय ने इस मामले की जांच के लिए शहर कोतवाल संतोष कुमार द्विवेदी, सर्विलांस प्रभारी संतोष शुक्ला, सबइंसपेक्टर संजय सिंह, अनिल सिंह, महिला थानाप्रभारी कंचन सिंह, सिपाही अरुण कुमार और मनोज सिंह की एक टीम बनाई. इस टीम का इंचार्ज बनाया गया सीओ संजय पांडेय को. जबकि पुलिस अधीक्षक राजेश पांडे इस मामले में मिली जानकारी को ध्यान में रख कर खुद रणनीति बनाने में लग गए. कालिका सिंह के बच्चों से बात करने पर पुलिस को पता चला कि घटना की रात गौरव शर्मा उन के घर आया था. गौरव कालिका सिंह के स्कूल में पढ़ाता था. बच्चों की इस बात की पुष्टि मोहल्ले वालों ने भी की थी.

गौरव शर्मा इस घटना के बाद गुजरात चला गया था. पुलिस की सर्विलांस टीम ने योगिता और गौरव के फोन नंबरों की जांच शुरू की तो कुछ बेहद चौंकाने वाली बातें पता चलीं. इसी को आधार बना कर जब जांच आगे बढ़ाई गई तो पुलिस को पता चला कि योगिता ने 1 जनवरी, 2013 से 24 अक्तूबर, 2013 के बीच 15 मोबाइल सेट इस्तेमाल किए थे. इन मोबाइलों में अलगअलग समय पर 32 सिम कार्ड लगाए गए थे. खास बात यह थी कि ये सभी सिम कार्ड फर्जी पतों पर लिए गए थे.

15 अगस्त, 2013 की ही बात है. कालिका सिंह के स्कूल ‘सूबेदार मेजर रामफल सिंह विद्यालय’ महाराजगंज, रायबरेली में स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा था. झंडारोहण का कार्यक्रम खत्म हो चुका था. तभी स्कूल की प्रिंसिपल योगिता सिंह ने अपने पति और स्कूल के प्रबंधक कालिका सिंह से कहा, ‘‘कक्षा 3 को पढ़ाने वाली टीचर ठीक से काम नहीं कर रही है. स्कूल के किसी कार्यक्रम में भी हिस्सा नहीं लेती. कुछ समझाने पर समझती भी नहीं है. अब तो उस ने मेरी बात भी सुनना बंद कर दिया है.’’

‘‘ठीक है, मैं उस से बात कर के उसे समझा दूंगा.’’ कालिका सिंह ने पत्नी की बात को नजरअंदाज करते हुए कहा तो योगिता सिंह थोड़ा गुस्से में बोली, ‘‘मैं जब भी किसी टीचर के गलत व्यवहार की बात करती हूं, तुम नजरअंदाज कर जाते हो. कुछ टीचरों को तुम ने सिर पर चढ़ा रखा है.’’

‘‘देखो, बात का बतंगड़ मत बनाओ.’’ कालिका सिंह ने कहा तो योगिता चिढ़ कर तीखे शब्दों में बोली, ‘‘नहीं, मैं बात का बतंगड़ नहीं बना रही हूं, बल्कि तुम मेरा अपमान कर रहे हो. प्रिंसिपल बनाया है तो मुझे अपने ढंग से काम करने दो. मैं इस तरह तुम्हारी चहेती टीचरों से अपमानित नहीं हो सकती. मैं इस तरह से काम नहीं कर पाऊंगी.’’

‘‘तो ठीक है, तुम कल से स्कूल आना बंद कर दो. मैं किसी और को स्कूल की जिम्मेदारी सौंप देता हूं.’’ कालिका सिंह ने गुस्से में कहा.

‘‘तुम चाहते ही हो कि मैं किसी तरह यहां से हट जाऊं, ताकि तुम्हारी रासलीला शुरू हो जाए.’’ कह कर योगिता गुस्से में पैर पटकती स्कूल से चली गई.

इस घटना के बाद योगिता और कालिका के रिश्तों में दरार पड़ गई. बातचीत होती भी तो नाम मात्र की.

रायबरेली के रानानगर निवासी कालिका सिंह ने अपने पिता का नाम रोशन करने के लिए उन के नाम पर महाराजगंज में स्कूल खोल रखा था. कालिका चूंकि खूब पैसा कमाना चाहता था, इसलिए उस ने स्कूल चलाने के साथसाथ प्रौपर्टी डीलिंग का काम भी शुरू कर दिया था. उस का ज्यादातर समय इसी काम में बीतता था.

कालिका ने अपनी पत्नी योगिता को स्कूल की प्रिंसिपल बना रखा था. योगिता और कालिका की शादी 10 साल पहले हुई थी. योगिता सुल्तानपुर जिले के गौरीगंज कस्बे की रहने वाली थी. उस ने एमए तक पढ़ाई की हुई थी. योगिता और कालिका के 2 बेटे थे, 8 साल का यश और 6 साल का जय. कालिका सिंह में एक बुराई यह थी कि वह शराब का आदी हो गया था. इसी वजह से वह पत्नी और बच्चों की तरफ ध्यान नहीं दे पाता था.

पति की इसी आदत की वजह से योगिता को लगता था कि उस का पति दूसरी महिलाओं के चक्कर में पड़ गया है. उसे अपने स्कूल की कुछ महिला टीचरों पर शक होने लगा था. इसी बात को ले कर दोनों के बीच मनमुटाव और ज्यादा बढ़ने लगा. कालिका सिंह के स्कूल में एक टीचर था गौरव शर्मा. वह रायबरेली का रहने वाला था. योगिता 25 साल के गौरव को पसंद करने लगी थी. कहा जाता है कि पति के रंगढंग देख कर उस के मन में गौरव के प्रति प्रेम पनपने लगा था.

प्रिंसिपल होने के नाते योगिता की बात मानना गौरव की मजबूरी थी. योगिता जबतब मोबाइल पर गौरव से बातचीत करने लगी थी. रात में वह परेशान होती तो फोन पर गौरव से बात कर लेती. कुछ दिनों बाद कालिका सिंह को इस बात का पता चल गया तो वह योगिता पर शक करने लगा. कभीकभी अपना यह शक वह योगिता पर जाहिर भी कर देता था. साथ ही कहता भी था कि मैं सब पता लगा लूंगा. इस से डर कर योगिता मोबाइल और सिम बदलबदल कर गौरव से बात करने लगी.

पतिपत्नी के मन में एकदूसरे के प्रति शक का कीड़ा तेजी से घर करता जा रहा था. दूरियां भले ही काफी बढ़ गई थीं, इस के बावजूद 22 अक्टूबर, 2013 को योगिता ने पति की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत रखा. लेकिन कालिका सिंह उस दिन समय पर घर नहीं पहुंचा तो योगिता नाराज हो गई. उस ने फोन कर के गौरव शर्मा को अपने घर बुला लिया. इसी बीच कालिका सिंह घर पहुंच गया. उस के पहुंचते ही योगिता व्यंग्य भरे लहजे में बोली, ‘‘किस के साथ करवाचौथ मना कर आ रहे हो? तुम्हारे लिए तो कई व्रत रखती होंगी. इसीलिए तुम ने मेरे व्रत की कोई अहमियत नहीं समझी.’’

‘‘तुम ने आते ही बेकार की बात शुरू कर दी. मैं कुछ काम में फंस गया था. आने में देर हो गई.’’ कालिका ने समझाने के लिए कहा तो योगिता तुनक कर बोली, ‘‘मैं तुम्हारे सब बहाने अच्छी तरह जानती हूं. अब मैं भी तुम्हें तुम्हारे ही अंदाज में जवाब दूंगी. फिर तुम्हें अहसास होगा कि औरत का दर्द क्या होता है.’’

कालिका शराब के नशे में था. उसे गुस्सा आने लगा. उस ने ताव से पूछा, ‘‘क्या करोगी तुम, जरा मैं भी तो जानूं?’’

योगिता भी गुस्से में थी. बिना सोचेसमझे उस ने कालिका को चिढ़ाने के लिए वहां मौजूद गौरव शर्मा के पास जा कर पहले आरती की थाली से उस की आरती उतारी, फिर उस के पैर छू लिए. यह देख कर कालिका सिंह सन्न रह गया. वह गुस्से में बोला, ‘‘योगिता, तुम ने अपना फैसला सुनाया नहीं, बल्कि कर के दिखा भी दिया. अब मेरा फैसला भी सुन लो. आज से तुम मेरी पत्नी नहीं रही. मेरे लिए तुम मर चुकी हो. मैं आज से तुम्हारा छुआ खाना तक नहीं खाऊंगा.’’

अपनी बात कह कर कालिका सिंह अपने कमरे में चला गया और दरवाजा बंद कर के सो गया. योगिता ने सोचा कि कालिका ने यह बात नशे में कही है, सुबह तक सब भूल जाएगा.

लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सुबह भी कालिका का रात वाला गुस्सा बना रहा. वह बिना खाना खाए ही घर से निकल गया. उस के बाद योगिता ने भी खाना नहीं बनाया. उस के दोनों बेटों ने बे्रड खा कर दिन गुजारा. 23 अक्टूबर की सुबह भी पतिपत्नी के बीच की लड़ाई शांत नहीं हुई. गुस्से में कालिका सिंह रायबरेली से दूर डलमऊ घाट पर गया. यहां लोग अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए आते हैं. उस ने क्रियाकर्म कराने वाले पंडे को बुला कर कहा, ‘‘पंडित जी, मेरी पत्नी मर गई है, मैं उस का पिंडदान करना चाहता हूं.’’

पंडे ने पूछा, ‘‘पिंडदान का सामान आप लाए हैं या मुझे मंगाना पड़ेगा.’’

‘‘मैं कोई सामान नहीं लाया हूं. आप ही मंगा लें और विधिवत पिंडदान करें. मैं सारा खर्चा दूंगा.’’ कालिका ने कहा.

पंडे ने आधे घंटे में सारे सामान का इंतजाम कर दिया. इस के बाद कालिका सिंह ने अपनी पत्नी योगिता का विधिवत पिंडदान किया और सिर के बाल भी मुंडवा लिए. शाम को वह घर लौटा तो उसे देख कर योगिता सन्न रह गई. उस ने खाने के लिए पूछा तो कालिका सिंह ने पिंडदान वाली बात बता कर दोटूक कह दिया कि वह उस के लिए मर चुकी है. इस से योगिता को अपनी गलती का अहसास हुआ. उसे चिंता इस बात की थी कि यह बात जब मोहल्ले वालों और नातेरिश्तेदारों को पता चलेगी तो लोग उस के बारे में क्या सोचेंगे.

रात में कालिका के सो जाने के बाद योगिता ने गौरव को फोन कर के पिंडदान वाली पूरी बात बताई. साथ ही यह भी कहा, ‘‘अब मैं क्या करूं, कुछ समझ में नहीं आ रहा है. कल जब यह बात सब को पता चलेगी तो मेरी बड़ी बदनामी होगी.’’

गौरव ने योगिता को समझाने की कोशिश की. दरअसल उसे लगने लगा था कि अब अगर योगिता ने कुछ किया तो मामला गड़बड़ हो सकता है. इसलिए वह इस मामले से दूर रहना चाहता था. योगिता भी इस बात को समझ रही थी.

गौरव को अनमनी बातें करते देख वह धमकी देते हुए बोली, ‘‘गौरव, अगर तुम ने मेरी मदद नहीं की तो मैं फांसी लगा कर आत्महत्या कर लूंगी और सुसाइड में तुम्हारा नाम लिख जाऊंगी.’’

योगिता की इस धमकी से गौरव परेशान हो गया. वह बोला, ‘‘तुम ऐसा कुछ मत करो. तुम जो कहोगी, मैं करने को तैयार हूं.’’

योगिता किसी भी कीमत पर अपने परिचितों और रिश्तेदारों को यह पता नहीं चलने देना चाहती थी कि उस के रहते कालिका ने उस का पिंडदान कर दिया है. इस के लिए उस ने मन ही मन योजना बना ली कि उसे क्या करना है.

24 अक्टूबर की रात के 9 बज चुके थे. योगिता ने उस दिन पति को खुश करने का फैसला कर लिया था. इस के लिए उस ने विशेष रूप से आकर्षक ड्रेस पहनी थी. कालिका सिंह जब घर पहुंचा तो वह शराब के नशे में था. योगिता ने दरवाजा खोलते हुए कहा, ‘‘आज से हम सब कुछ भूल कर एक नए जीवन की शुरुआत करेंगे. मैं ने पिछली सारी बातें भुला दी हैं, तुम भी सब भूल जाओ.’’

कालिका सिंह उस वक्त काफी नशे में था. कुछ योगिता ने उकसाया और कुछ उस का खुद का मन बहकने लगा. उसी मन:स्थिति में उस ने योगिता से पूछा, ‘‘बच्चे सो गए क्या?’’

‘‘हां, बच्चों को मैं ने खिलापिला कर सुला दिया है.’’ योगिता ने कातिलाना अंदाज में कहा. फिर वह कालिका को बेडरूम में ले गई और मिलन के लिए उकसाने लगी. कालिका सिंह जवान तो था ही, बहकने लगा. तब योगिता बोली, ‘‘मैं ने तुम्हारे लिए एक खास दवा का इंतजाम किया है. उसे खा लो, जोश बढ़ेगा तो लगेगा हम कुछ खास कर रहे हैं. आज मैं तुम्हारे प्यार में सबकुछ भूल जाना चाहती हूं.’’

शारीरिक सुख के चक्कर में आदमी सब कुछ भूल जाता है. उस वक्त वह सिर्फ एक ही बात सोचता है कि अपनी पार्टनर के साथ ज्यादा से ज्यादा आनंद उठाए. कालिका सिंह के साथ भी यही हुआ. योगिता ने उसे फुसला कर जरूरत से ज्यादा सैक्सवर्धक दवा खिला दी. शराब के नशे में कालिका ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया. दोनों ने कपड़े भी उतार दिए. लेकिन मिलन की स्थिति आने से पहले ही कालिका सिंह बेहोश हो गया.

उस के बेहोश होते ही योगिता ने कपड़े पहन कर गौरव को फोन किया. वह तुरंत आ गया. सब कुछ पहले से ही तय था. इसलिए दोनों ने बिना देर किए बेहोश पड़े कालिका का गला टीवी केबिल के तार से कस दिया. जब कालिका मर गया तो योगिता ने उस के सिर पर वार कर के सिर फोड़ दिया. दोनों ने इस घटना को लूट साबित करने के लिए घर के सामान की तोड़फोड़ शुरू कर दी. उन्होंने सारा सामान इधरउधर बिखेर दिया.

योगिता ने गौरव से कह कर खुद को भी चोट पहुंचवाई, ताकि किसी को शक न हो. इस के बाद गौरव अपने घर लौट गया. गौरव के जाने के बाद योगिता ने पुलिस को फोन किया. पुलिस ने आ कर घायल योगिता को अस्पताल में भर्ती कराया. कालिका का शव देख कर पुलिस को लगा कि सिर फटने से ज्यादा खून बह गया होगा, जिस से वह मर गया है. लेकिन जब कालिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना पता चली तो पुलिस ने अपनी जांच की दिशा बदल दी.

एक तो पुलिस को घर में लूट का कोई सुबूत नहीं मिला, दूसरे मोहल्ले वालों ने रात में गौरव के आने का जिक्र किया था, जिस से शक की सुई योगिता और गौरव की ओर घूम गई. अंतत: एक माह की लंबी छानबीन के बाद रायबरेली पुलिस ने कालिका हत्याकांड का खुलासा कर दिया.

जिस समय योगिता और गौरव शर्मा रायबरेली के एसपी औफिस में पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय के सामने अपना गुनाह कुबूल कर रहे थे, बाहर बैठे उन के परिवार के लोग टीवी स्क्रीन पर उन की बातें देखसुन रहे थे. कालिका के घर वालों को पहले से ही इस बात का अंदेशा था. लेकिन सच सामने आने के बाद उन की आंखों के आंसू रोके नहीं रुक रहे थे.

खुलासा होने तक योगिता के घर वाले इस मामले को प्रौपर्टी डीलिंग की दुश्मनी मान रहे थे. लेकिन अपनी बेटी का कारनामा सुन कर उन का सिर शरम से झुक गया. गौरव के पिता और उन के साथी वकील जो अब तक गौरव को निर्दोष मान रहे थे, वह भी अफसोस जताने लगे.

कुछ देर बाद पुलिस गौरव और योगिता को ले कर बाहर आई तो योगिता का सिर झुका हुआ था. पत्रकारों ने उस से पूछा कि अब वह क्या कहना चाहती है तो उस ने कहा, ‘‘मुझे जेल भेज दो और गौरव को छोड़ दो. मेरा क्या, मैं तो शादीशुदा हूं, मेरे दो बच्चे है, जिंदगी का पूरा सुख भी भोग लिया है, जबकि गौरव की जिंदगी की अभी शुरुआत है. उसे माफ कर दीजिए.’’

भले ही गौरव ने योगिता के दबाव में ऐसा किया था, पर उस का अपराध क्षमा योग्य नहीं था. पुलिस ने दोनों को सीजेएम दिनेश कुमार मिश्रा की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. अब गौरव और योगिता का भविष्य अदालत तय करेगी. योगिता के दोनों बेटे अपने चाचा के घर चले गए. इन मासूमों को अब अपनी मां और पिता, दोनों के बिना जीने की आदत डालनी होगी. Raebareli Murder Case

—कथा पुलिस सूत्रों, जनचर्चा और अभियुक्तों के बयानों पर आधारित है.

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