Haridwar Double Murder Case. पथरेश्वर महादेव मंदिर के महंत अखिल गिरी और उत्तम गिरी के बीच समलैंगिक संबंध बन चुके थे. एक दिन इसी मंदिर में रहने वाले महंत सेवा गिरी और पारस गिरी ने इन दोनों महंतों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. इस के बाद इन महंतों के बीच ऐसा खूनी खेल खेला गया कि

भीषण गरमी के बाद अचानक ठंडी हवा चलने लगी थी. इस के बाद क्षेत्र में रिमझिम वर्षा शुरू हो गई थी और मौसम बड़ा सुहाना हो गया था. तभी गांव की पगडंडी पर दरजनों ग्रामीण गुस्से में थाने की ओर बढ़ रहे थे. वे लोग आपस में जोरजोर से बातें करते जा रहे थे. ऐसा लग रहा था कि जैसे उन के अंदर कोई ज्वालामुखी समा गई हो.

ग्रामीणों के चेहरे पर भय व गुस्से के भाव आजा रहे थे. उस समय शाम के लगभग 5 बज रहे थे. थोड़ी देर में सभी ग्रामीण थाने के गेट पर पहुंच गए थे.

ग्रामीणों ने संतरी को बताया कि वे पास के गांव से ही आए हैं. गत रात से गांव के मंदिर के 2 साधु लापता हो गए हैं. उन के लापता होने से गांव में हड़कंप मच गया है, क्योंकि ये दोनों साधु ही गांव के मंदिर में सुबहशाम पूजाअर्चना व आरती किया करते थे. मगर आज शाम 4 बजे दोनों साधुओं के शव मंदिर परिसर में लोगों को 2 स्थानों पर दबाए हुए मिल गए हैं.

मंदिर के लापता 2 साधुओं के शव मिलने की जानकारी ग्रामीणों से सुन कर संतरी हैरान हो गया था और उस ने तत्काल ही यह सूचना स्टाफ की मीटिंग ले रहे एसएचओ रविंद्र कुमार को दी.

यह सूचना मिलते ही एसएचओ रविंद्र कुमार तुरंत ही बाहर आए और वहां खड़े ग्रामीणों से साधुओं को गड्ढों में दबाए जाने की जानकारी ली.

इस के बाद रविंद्र कुमार ने देर करना उचित न समझा और वे आवश्यक फोर्स ले कर मौके की ओर चल पड़े.

इसी बीच उन्होंने यह सूचना क्षेत्र के सीओ देवेंद्र नेगी, एसपी (देहात) शेखर चंद सुयाल व एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर को मोबाइल फोन द्वारा दे दी.

मंदिर के लापता साधुओं के शव मंदिर परिसर में दबे होने की सनसनीखेज सूचना पा कर ये तीनों अधिकारी भी चौंक पड़े थे और वे भी घटनास्थल की ओर चल पड़े थे.

उक्त मामला उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के थाना पथरी स्थित गांव शिवगढ़ के पथरेश्वर महादेव मंदिर का  था. यह मामला 20 जुलाई, 2026 का था. मंदिर परिसर में पुलिस के पहुंचते ही वहां खड़ी भीड़ तितरबितर होने लगी थी.

इस के बाद एसएचओ रविंद्र कुमार व सीओ देवेंद्र नेगी ने साधुओं के शवों का निरीक्षण करना शुरू कर दिया था. शवों पर धारदार हथियारों के निशान थे. सूचना पा कर एफएसएल टीम भी मौके पर आ गई थी. घटनास्थल थाने से मात्र 6 किलोमीटर दूर था, अत: पुलिस फोर्स मात्र 20 मिनट में मौके पर पहुंच गई थी.

पुलिस को जानकारी मिली थी कि मंदिर का मुख्य पुजारी अखिल गिरी मौके से फरार है तथा वहां पर गड्ढों में दबाए गए शव सेवा गिरी व पारस गिरी के हैं.

20 जुलाई, 2026 की सुबह गांव के श्रद्धालु हमेशा की तरह पूजाअर्चना के लिए मंदिर पहुंचे थे तो उन्हें वहां नित्य की भांति सेवा गिरी व पारस गिरी कहीं नजर नहीं आए थे. उस वक्त ग्रामीणों ने इस ओर खास ध्यान भी नहीं दिया था.

लेकिन बाद में मंदिर परिसर में लापता साधुओं के शव मिलने के कारण यह मामला बड़ा सनसनीखेज हो गया था. इस के अलावा मंदिर के पुराने पुजारी महंत अखिल गिरी का गायब होना इस हत्याकांड में संदेह पैदा कर रहा था, क्योंकि महंत अखिल गिरी काफी वर्षों से मंदिर का कार्यभार संभाल रहे थे. इस के अलावा कभीकभार बाहर से आए कुछ साधुसंत भी वहां ठहरा करते थे.

इस के बाद सीओ देवेंद्र नेगी व एसएचओ रविंद्र कुमार ने मंदिर के आसपास के श्रद्धालुओं से उस मंदिर के बारे में जानकारी प्राप्त करनी शुरू कर दी.

दूसरी ओर फोरैंसिक टीम ने वहां के आसपास के क्षेत्र के फिंगरप्रिंट लेने शुरू कर दिए थे. इस घटना की सूचना पा कर सीआईयू टीम, एसपी (देहात) शेखर चंद्र सुयाल व एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर भी मौके पर आ गए थे.

इस के बाद इन अधिकारियों ने भी मौके पर आने के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया था और पुलिस व ग्रामीणों से इस घटना से संबंधित जानकारी प्राप्त की. निरीक्षण करने के बाद थानेदार महेंद्र पुंडीर ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए हरिमिलाप राजकीय अस्पताल हरिद्वार भेज दिए.

इस दोहरे हत्याकांड का मुकदमा पुलिस ने श्रद्धालु पंकज निवासी गांव ऐथल की ओर से दर्ज कर लिया.

पुलिस अधिकारियों के सामने इन साधुओं के हत्यारों का पता लगाना बड़ी चुनौती थी. मंदिर का महंत अखिल गिरी के भी गायब होने से यह हत्याकांड रहस्यमय बन गया था.

इस हत्याकांड के खुलासे के लिए एसपी (देहात) शेखर चंद सुयाल व सीओ देवेंद्र नेगी ने महंत अखिल गिरी उर्फ अंकुर गिरी को पकडऩे की योजना बनाई. इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए 3 पुलिस टीमों का गठन किया गया, जिस में सीआईयू इंसपेक्टर रविंद्र शाह, एसटीएफ इंसपेक्टर पवन स्वरूप व सीआईयू टीम (रुड़की) को भी शामिल किया गया था. सेवा गिरी व पारस गिरी की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटना व चाकू से गोदना बताया गया था.

इस के बाद ये टीमें महंत अखिल गिरी की तलाश में उस के संभावित ठिकानों पर दबिशें डालने लगीं. पुलिस की यह मेहनत रंग लाई. 2 दिन बाद ही पुलिस ने महंत अखिल गिरी को गिरफ्तार कर लिया. उसे ले कर पुलिस थाने आ गई. उस से सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या के बारे में पूछताछ की तो वह काफी देर तक पुलिस को गच्चा देने की कोशिश करता रहा.

तब सीओ श्री नेगी ने अखिल गिरी को धमकाते हुए कहा, ”याद रखो महंत, हमें पथरेश्वर मंदिर की सारी जानकारी है. मंदिर में कौन कब आता था? कौन रात को ठहरता था और वहां रात को क्याक्या होता था? इस बारे में सब कुछ पता चल चुका है हमें. यदि तुम हमें सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या की सच्चाई खुद ही बता दोगे तो ठीक है, अन्यथा पुलिस को सच कुबूलवाना भी आता है.’’

नेगी की यह धमकी सुन कर महंत थरथर कांपने लगा. थोड़ी देर चुप रहने के बाद महंत अखिल गिरी ने साधुओं सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या की योजना बनाने की बात कुबूल कर ली. इस के बाद महंत अखिल गिरी ने सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या की जो कहानी पुलिस को बताई, वह इस प्रकार है—

अखिल गिरी मूलरूप से थाना पथरी अंतर्गत गांव शिवगढ़ का ही रहने वाला है. लगभग 15 साल पहले उस ने संन्यास की दीक्षा ले ली थी. लगभग 11 साल पहले वह गांव के ही पथरेश्वर मंदिर में आ कर बतौर महंत रहने लगा था.

इस के बाद वह मंदिर में पूजाअर्चना करने लगा. फिर गांव के श्रद्धालुओं का मंदिर में आनाजाना बढ़ गया. सभी ग्रामीण उस की इज्जत करने लगे थे.

लगभग 5 साल पहले 2 साधु सेवा गिरी व पारस गिरी अखिल गिरी के पास आए थे. उन दोनों साधुओं ने मंदिर में रहने की इच्छा जताई तो अखिल गिरी ने उन्हें मंदिर में रहने की अनुमति दे दी.

दोनों साधु सेवा गिरी और पारस गिरी मूलरूप से जिला मुजफ्फरनगर के कस्बा शुक्रताल के निवासी थे. इस के बाद तीनों साधु मंदिर में रहने लगे और तीनों बारीबारी से मंदिर में सुबहशाम पूजापाठ करने लगे.

इसी प्रकार 2 साल बीत गए. डेढ़ साल पहले एक अन्य साधु मंदिर में आया और वहां रहने की इच्छा जताई थी. उस का नाम उत्तम गिरी था और वह मूलरूप से राजस्थान का रहने वाला था. अखिल गिरी ने उत्तम गिरी को भी अपने मंदिर में रख लिया था.

एक साल पुरानी बात है. एक दिन रात को ठंड के मौसम में उत्तम गिरी अखिल गिरी के पास सोया हुआ था. चिपट कर सोने से अखिल गिरी की काम वासना जाग गई थी और उस ने उत्तम गिरी के साथ समलैंगिंक संबंध बना लिए थे. उस के बाद से ही ये दोनों साधु जब मन होता, तब समलैंगिक संबंध बना लेते थे. यह सिलसिला चलता रहा.

करीब 2 महीने पहले उन के समलैंगिंक संबंधों की जानकारी सेवा गिरी व पारस गिरी को भी हो गई थी. एक दिन दोनों ने अखिल गिरी के सामने आ कर मंदिर की गद्ïदी पारस गिरी को सौंपने प्रस्ताव रखा.

उस समय अखिल गिरी ने यह कह दिया था कि इस प्रस्ताव का उत्तर बाद में दूंगा यानी वह बहाना बना कर इसे टाल गया था. इस के बाद दोनों साधु अकसर अखिल गिरी पर पथरेश्वर मंदिर की गद्ïदी सौंपने का दबाव बनाने लगे थे.

गद्ïदी सौंपने का दबाव बनाने के कारण अखिल गिरी तनाव में रहने लगा था और उस ने चुपचाप ही सेवा गिरी व पारस गिरी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई.

योजना की जानकारी उस ने अपने साथियों आशु निवासी गांव इसमाइलपुर थाना लकसर व राम मिलन निवासी गोरसांड़ा जिला उत्तरकाशी व हाल निवासी करनाल हरियाणा को दी. इस के बाद उन्होंने साधु पारस गिरी व सेवा गिरी की हत्या करने के लिए मौके की तलाश में रहने लगे थे.

वह 18 जुलाई, 2026 का दिन था. उसी दिन शाम को अखिल गिरी आशु की बाइक पर बैठ कर पास के ही गांव सुलतानपुर कुन्हारी के पंचेश्वर मंदिर में पहुंचा. एक घंटे के बाद वे लोग वापस पथरेश्वर महादेव मंदिर में आ गए थे.

फिर योजना के अनुसार अखिल गिरी ने सेवा गिरी को पगड़ी पहना कर उसे पथरेश्वर मंदिर का कार्यभार सौंप दिया. इसी खुशी में देर रात एक शराब पार्टी का आयोजन अखिल गिरी और उस के साथियों द्वारा किया गया.

सभी ने पहले खूब शराब पी. जब सेवा गिरी व पारस गिरी नशे में धुत हो गए तो पहले उन चारों ने उन का गला घोंट दिया. इस के बाद उन चारों ने उन पर पाठल व चाकुओं से हमला कर दिया. उन दोनों के मरने पर चारों ने उन्हें मंदिर परिसर के पास ही 2 गड्ढे खोद कर उन्हें वहां दबा दिया. फिर  चारों पथरी के काठापीर के जंगल में जा कर छिप गए.

इस के बाद पुलिस ने अखिल गिरी के ये बयान दर्ज कर लिए. उसी दिन ही शाम को पुलिस ने काठापीर दरगाह के जंगल से आरोपियों राम मिलन व आशु को गिरफ्तार कर लिया. राम मिलन व आशु ने पुलिस के समक्ष सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या करनी कुबूल कर ली थी और पुलिस को दिए गए बयानों में अखिल गिरी के बयानों का ही समर्थन किया था.

तीनों आरोपियों के पकड़े जाने के बाद अगले दिन एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने इस हत्याकांड का खुलासा हरिद्वार में प्रैसवार्ता के दौरान कर दिया.  प्रैसवार्ता के बाद पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया. पुलिस ने सेवा गिरी व पारस गिरी की हत्या में प्रयुक्त चाकू भी आरोपियों की निशानदेही पर बरामद कर लिया.

कथा लिखे जाने तक हत्यारोपियों अखिल गिरी, राम मिलन व आशु जेल में बंद थे. पुलिस द्वारा इस दोहरे हत्याकांड के चौथे आरोपी उत्तम गिरी की तलाश की जा रही थी.

इस मामले की विवेचना एसएचओ रविंद्र कुमार द्वारा की जा रही थी. रविंद्र कुमार इस हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य एकत्र कर के उन के खिलाफ चार्जशीट अदालत में भेजे जाने की तैयारी कर रहे थे.

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