Delhi Child Kidnapping. अमित गुप्ता ने एक ही बार में मोटी रकम हासिल करने के लिए अपने दोस्त रहमान की मदद से अपने चचेरे भाई मुकेश गुप्ता के बेटे का अपहरण कर तो लिया, लेकिन उसे क्या पता था कि यह काम उन दोनों को कितना महंगा पड़ने वाला है.
ट्यूशन से घर लौटने के बाद 5 साल के वासु ने अपना बैग मेज पर रखा और फटाफट बाहर की तरफ दौड़ लगा दी. मां भावना ने उसे कई आवाजें दीं लेकिन वह यह कहते हुए घर से निकल गया कि खेलने जा रहा है. वासु अकसर रोजाना ही ट्यूशन से लौटने के बाद खेलने चला जाता था और खेल कर थोड़ी देर बाद घर लौटता था. इसलिए भावना उस की ओर से ध्यान हटा कर घर के काम में लग गईं. यह 24 अप्रैल, 2014 शाम साढ़े 5 बजे की बात है.
वासु खेल कर आधापौन घंटे में घर लौट आता था. लेकिन उस दिन जब वह साढ़े 6 बजे तक भी नहीं लौटा तो भावना गुप्ता को उसे बुलाने के लिए घर से निकलना पड़ा. गली में जो बच्चे खेल रहे थे उन में वासु नहीं था. उन्होंने बच्चों से वासु के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वासु काफी देर पहले दूसरे बच्चों के साथ यहीं पर बैडमिंटन खेल रहा था.
जिन बच्चों के साथ वासु बैडमिंटन खेल रहा था, वह भी उसी गली में रहते थे. भावना उन बच्चों के घर गईं तो बच्चों ने बताया कि काफी देर पहले जब वह खेल बंद कर के घर चले आए थे तो वासु वहीं पर रह गया था.
भावना ने गली में खेल रहे दूसरे बच्चों और गली में रहने वाले लोगों से अपने बेटे के बारे में पूछा, लेकिन उन्हें वासु का कोई पता नहीं लगा. मायूस हो कर घर लौटी भावना ने वासु के लापता होने की बात अपने ससुर रामचंद्र गुप्ता को बताई.
रामचंद्र गुप्ता भी पोते को ढूंढ़ने के लिए घर से निकल गए. भावना खुद भी दूसरी गलियों में बेटे को खोजने लगीं, लेकिन उस का कोई पता नहीं लगा. ससुरबहू दोनों ही बहुत परेशान थे. तभी अचानक भावना को ध्यान आया कि वासु ने जाते समय कहा था कि खेल कर वह मोनू चाचू के पास गिफ्ट लेने जाएगा.
अमित गुप्ता उर्फ मोनू भावना का चचेरा देवर था. उस का घर भावना के घर से एक घर छोड़ कर था. वासु की बात याद आते ही भावना मोनू के पास पहुंचीं. उस ने उन्हें बताया कि वासु उस के पास आया जरूर था, लेकिन थोड़ी देर रुक कर चला गया था.
जब 8 बज गए और रात गहराने लगी तो वासु के दादा रामचंद्र गुप्ता ने पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर फोन कर के बता दिया कि ब्रह्मपुरी की गली नंबर 14 से 5 साल का एक बच्चा गायब हो गया है. ब्रह्मपुरी उत्तरपूर्वी जिले के थाना न्यू उस्मानपुर के क्षेत्र में आता है. पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा बच्चे के गायब होने की सूचना थाना न्यू उस्मानपुर को दे दी गई.
खबर मिलने पर सबइंसपेक्टर विनीत कुमार कांस्टेबल लच्छी राम को साथ ले कर बताए गए पते पर पहुंच गए. रामचंद्र गुप्ता और भावना गुप्ता घर पर थे. मोनू भी उन के साथ था. उन्होंने वासु के गायब होने की जानकारी उन्हें दे दी. एसआई विनीत कुमार रामचंद्र गुप्ता का बयान दर्ज कर के थाने लौट आए.
थानाप्रभारी महावीर सिंह के छुट्टी पर होने की वजह से थाने का प्रभार इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने संभाल रखा था. एसआई विनीत कुमार ने 5 वर्षीय मधुरम उर्फ वासु के गुम होने की जानकारी उन्हें दी तो उन्होंने अज्ञात लोगों के खिलाफ अपरहण की रिपोर्ट दर्ज करा कर विनीत कुमार को जांच करने के निर्देश दिए.
एसआई विनीत कुमार बच्चे की खोजबीन में निकल गए. तब तक सूचना पा कर भावना के पति मुकेश गुप्ता भी घर लौट आए थे. विनीत कुमार ने भावना से कहा कि वह एक बार ठीक से देख लें कि वह घर में ही तो नहीं सो गया है. भावना ने घर के सभी कमरे छान मारे, पर वासु नहीं मिला. वासु कहीं अपने चाचू मोनू के यहां न सो गया हो, यह सोच कर भावना मोनू के घर गईं तो मोनू दरवाजे पर ही मिल गया.
भावना ने जब उस से वासु को घर में देखने की बात कही तो वह बोला, ‘‘भाभी, वैसे तो वासु यहां से चला गया था. फिर भी तुम कहती हो तो मैं एक बार और देख लेता हूं.’’ मोनू घर में चला गया, जबकि भावना दरवाजे पर ही खड़ी रहीं. कुछ देर बाद मोनू ने बाहर आ कर बताया कि वासु यहां नहीं है.
इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने दिल्ली, नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और आनंद विहार रेलवे स्टेशनों के अलावा दिल्ली के सभी प्रमुख बस अड्डों पर वासु के फोटो के साथ अलगअलग पुलिस टीमें रवाना कर दीं.
उधर सब इंसपेक्टर विनीत कुमार थाना क्षेत्र के नालों और सड़क किनारे की झाडि़यों, पार्कों आदि में इस आशंका से वासु की खोजबीन कर रहे थे कि कहीं किसी ने उस की हत्या न कर दी हो.
उसी इलाके में मोनी बाबा का एक मंदिर था. मंदिर के पास वाले मैदान में बच्चे खेलते हैं. पुलिस वासु को देखने वहां भी गई. रात 2 बजे तक पुलिस टीम इसी तरह सर्चिंग करती रही.
न्यू उस्मान क्षेत्र में एक बड़ी मसजिद है, जहां से अकसर खोते हुए बच्चों के बारे में हुलिए समेत घोषणा की जाती है. चूंकि उस समय ज्यादा रात हो चुकी थी इसलिए पुलिस ने सुबह की नमाज के समय मसजिद से वासु के गुम होने की सूचना जारी कराने का फैसला किया.
उधर इकलौते बेटे के लापता होने से गुप्ता परिवार की आंखों की नींद उड़ी हुई थी. घर के सभी लोगों को इस बात की चिंता सता रही थी कि उन की आंखों का चिराग पता नहीं कहां और किस हाल में होगा? वे लोग पूरी रात ऐसे ही बैठे रहे. उन के दिमाग में तरहतरह के खयाल आ रहे थे.
अंधेरा छंटते ही वे लोग फिर 2-2, 3-3 के ग्रुप में वासु की खोजबीन में निकल पड़े. उधर पुलिस ने वासु के गुम होने की सूचना उस के हुलिए के साथ दिल्ली के समस्त थानों को दे दी थी.
25 अप्रैल को सुबह करीब 6 बजे पुलिस कंट्रोल रूम से गोकुलपुरी थाने को सूचना मिली कि भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास सड़क किनारे 5-6 साल का एक बच्चा बेहोशी जैसी हालत में पड़ा है.
सूचना मिलते ही गोकुलपुरी थाने से एएसआई रामकिशोर वहां पहुंचे. उन्होंने बच्चे को हिलाडुला कर देखा तो पता चला कि वह मर चुका है. इस का मतलब किसी ने उस की हत्या कर के लाश वहां डाल दी थी. बच्चे के शरीर पर कोई घाव वगैरह दिखाई नहीं दे रहा था, इसलिए उन्होंने अंदाजा लगाया कि बच्चे की हत्या शायद गला दबा कर की गई होगी.
फिर भी एएसआई राम किशोर बच्चे को फटाफट गुरु तेग बहादुर अस्पताल ले गए. वहां डाक्टरों ने बच्चे को देखने के बाद मृत घोषित कर दिया. रामकिशोर ने बच्चे की लाश मोर्चरी में रखवा दी. गत दिवस न्यू उस्मानपुर थाना पुलिस ने 5 वर्षीय वासु के गायब होने की जो सूचना प्रसारित कराई थी उस में उस का हुलिया भी बताया गया था.
थाना गोकुलपुरी की पुलिस ने बच्चे की जो लाश बरामद की थी, उस का हुलिया, कपड़े आदि वासु से मिल रहे थे. इसलिए एएसआई रामकिशोर ने बच्चे की लाश मिलने की खबर थाना न्यू उस्मानपुर को दे दी. खबर मिलते ही इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह और एसआई विनीत कुमार वासु के पिता मुकेश गुप्ता को साथ ले कर गुरु तेग बहादुर अस्पताल पहुंच गए.
मुकेश गुप्ता ने मोर्चरी में अपने बेटे की लाश देखी तो उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई. अपने मासूम बेटे की लाश देख कर वह फफकफफक कर रोने लगे. रोतेरोते ही उन्होंने बेटे की हत्या की खबर अपने घरवालों को दी. यह खबर सुनते ही उन के घर में रोनापीटना शुरू हो गया.
बच्चे की लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इस के साथ ही अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज अपहरण के मामले में हत्या की धारा भी जोड़ दी गई. पोस्टमार्टम के बाद वासु की लाश उस के घर वालों को सौंप दी गई. उसी शाम निगमबोध घाट पर उस का अंतिम संस्कार कर दिया गया.
पुलिस इस मामले को काफी संवेदनशील मान कर चल रही थी. वासु चूंकि एक व्यवसायी का बेटा था, इसलिए पुलिस को डर था कि कहीं व्यापारी इस के विरोध में आंदोलन शुरू न कर दें. इसी के मद्देनजर पुलिस अधिकारी मुकेश गुप्ता के सीधे संपर्क में थे और उन्हें भरोसा दे रहे थे कि जल्दी ही हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेंद्र सिंह सागर की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम बनाई गई. जिस में इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह, सबइंसपेक्टर विनीत कुमार, पंकज तोमर, हेड कांस्टेबल प्रमोद शर्मा, कांस्टेबल सोनू राठी, अनिल कुमार, सचिन खोखर, पवन कुमार, राहुल और मुकेश कुमार को शामिल किया गया.
वासु के गायब होने के बाद उस के घर वालों के पास फिरौती के लिए कोई काल नहीं आई थी, इस से स्पष्ट था कि उस का अपहरण फिरौती के लिए नहीं किया गया था. इस से पुलिस को लग रहा था कि वासु की हत्या किसी दुश्मनी की वजह से की गई होगी.
वासु के पिता मुकेश गुप्ता का हाउस क्लीनिंग में इस्तेमाल होने वाले सामान बेचने का होलसेल का बिजनैस था. पुलिस ने सोचा कि हो न हो, उन की किसी दुश्मनी का खमियाजा उन के बेटे ने भुगता हो. इसलिए इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने मुकेश गुप्ता से पूछा कि उन की किसी से कोई रंजिश वगैरह तो नहीं है.
‘‘सर, हम लोग बिजनेसमैन हैं. रंजिश की बात तो दूर, अगर कोई हम से नाराज हो कर चार बातें कह भी जाए तो हम सुन कर चुप रह जाते हैं. मुकेश गुप्ता ने याद कर के बताया कि 6-7 साल पहले उन की दुकान में बड़ी चोरी हुई थी. इस मामले में पुलिस ने दुकान में काम करने वाले ललित कुमार, मनीष और अकबर अली को गिरफ्तार किया था. उस का आज भी कोर्ट में मुकदमा चल रहा है.
मुकेश गुप्ता ने तो ललित कुमार, मनीष और अकबर अली पर संदेह व्यक्त किया ही, इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह को भी उन लड़कों पर शक हुआ. ललित ब्रह्मपुरी में रहता था, मनीष गोकुलपुरी में और अकबर अली सोनिया विहार में. बिना देरी किए पुलिस की टीमें उन के घरों पर पहुंच गईं और तीनों को पूछताछ के लिए थाने ले आईं. पुलिस ने अपने तरीके से तीनों से पूछताछ की. पूछताछ में वे तीनों बेकुसूर लगे तो उन्हें छोड़ दिया गया.
यानी जांच जहां से शुरू हुई, वहीं आ कर रुक गई. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त वी.वी. चौधरी जांच टीम के सीधे संपर्क में थे. उन के दिशानिर्देश के बाद टीम ने वासु के पिता मुकेश गुप्ता और मां भावना गुप्ता से फिर बात की.
चूंकि पुलिस को जांच आगे बढ़ाने के लिए कहीं से कोई क्लू नहीं मिल रहा था इसलिए उसे शक हो रहा था कि हो न हो, हत्यारा गुप्ता परिवार का कोई करीबी ही हो. क्योंकि ऐसे लोग अपना काम आसानी से कर जाते हैं और उन पर किसी को शक भी नहीं हो पाता.
वासु के गुम होने के बाद परिवार के लोगों और संबंधियों की क्याक्या गतिविधियां रहीं, उन के बारे में इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने भावना और अन्य लोगों से विस्तार से बात की. हालांकि इस बात पर मुकेश गुप्ता और उन के पिता ने ऐतराज भी किया कि भला उन का पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार ऐसा क्यों करेगा? ऐसा काम तो कोई बाहर का आदमी ही कर सकता है. लेकिन जब जितेंद्र सिंह ने उन्हें समझाया तो वे पिछली बातें याद करने के लिए अपने दिमाग पर जोर डालने लगे.
कुछ देर बाद मुकेश गुप्ता ने बताया कि जब वे लोग बच्चे को तलाश कर रहे थे तो घर वाले 2-2, 3-3 के ग्रुप में थे लेकिन मोनू सब से अलग अकेला घूम रहा था. इतना ही नहीं, 24-25 तारीख की सुबह 3 से 6 बजे के बीच वह दिखाई भी नहीं दिया था.
पति की बात खत्म होते ही भावना गुप्ता ने बताया कि घटना वाली शाम जब वह वासु को देखने मोनू के घर गई थी तो उस ने उन्हें घर के दरवाजे पर ही रोक दिया था और खुद घर में देखने चला गया था.
मुकेश गुप्ता के मकान से तीसरे नंबर का मकान मोनू का था. पुलिस मोनू के घर पहुंची. उस से पूछताछ की गई तो उस ने कहा, ‘‘वासु मेरा भतीजा था. मैं उसे बहुत प्यार करता था. भला मैं उस के साथ ऐसा कैसे कर सकता हूं. उसे ढूंढ़ने के लिए मैं ने रातदिन एक कर दिया और आप उसे मारने की बातकर रहे हैं.’’
‘‘24-25 की सुबह 3 से 6 बजे के बीच तुम कहां गए थे?’’ इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने पूछा.
‘‘सर, मैं वासु को ही ढूंढ़ रहा था.’’
‘‘तुम्हारे दोस्त कौनकौन हैं?’’ जितेंद्र सिंह ने अगला सवाल किया.
‘‘सर, मेरा कोई दोस्त नहीं है. मैं किसी के साथ नहीं उठताबैठता.’’
बातचीत के दौरान जितेंद्र सिंह की नजर उस के घर में खड़ी सैंट्रो कार पर पड़ी तो उन्होंने पूछा, ‘‘ये कार किस की है?’’
‘‘ये मेरे दोस्त रहमान की है, जो जाफराबाद में रहता है.’’
‘‘अभी तो तुम कह रहे थे कि तुम्हारा कोई दोस्त नहीं है. फिर यह रहमान कहां से निकल आया?’’ इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने पूछा.
‘‘सर, रहमान मेरा बिजनैस पार्टनर है.’’ मोनू ने बताया.
पुलिस ने उस समय उस से और कुछ नहीं कहा. मोनू से पता ले कर वह रहमान के घर पहुंच गई. इसी बीच हेड कंस्टेबल प्रदीप शर्मा ने इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह को जानकारी दी कि 24-25 तारीख की सुबह 5 बजे मोनू अपने दोस्त की सैंट्रो कार से कहीं गया था. इस से पहले यही जानकारी मुकेश गुप्ता ने भी उन्हें दी थी. जानकारी एक जैसी होने से मोनू शक के दायरे में आ गया. संदेह होते ही उन्होंने कांस्टेबल सचिन खोखर को मोनू की निगरानी पर लगा दिया ताकि वह फरार न हो सके.
पुलिस टीम रहमान के घर पहुंची तो वह घर पर ही मिल गया. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. रहमान की पत्नी ने पुलिस से पति को हिरासत में लेने की वजह पूछी तो पुलिस की जगह रहमान ही बोला, ‘‘मोनू ही फंसा रहा होगा.’’
उस के मुंह से यह सुनते ही इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह यह सोच कर चौंके कि उसे कैसे पता चला कि पुलिस मोनू से मिल कर आ रही है. इस का मतलब था कि उन लोगों ने कोई न कोई गुनाह किया था. बहरहाल, पुलिस उसे थाने ले आई.
थाने में पुलिस ने उस से पूछा, ‘‘तुम ने यह बात किस आधार पर कही कि मोनू तुम्हें फंसा रहा है?’’
‘‘सर, मेरा और मोनू का फोन की पुरानी बैटरियां खरीदने का बड़ा काम है. कभीकभी हमारे पास नंबर 2 का माल भी आता है. इसलिए मैं ने सोचा कि पुलिस का कोई लफड़ा पड़ गया होगा और मोनू ने मेरा नाम ले दिया होगा.’’ रहमान ने सफाई दी.
पुलिस ने रहमान से और भी पूछताछ की, लेकिन कोई सुबूत न मिलने पर उसे हिदायत दे कर छोड़ दिया गया. इस के बाद पुलिस ने रहमान और मोनू के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई. उन की काल डिटेल्स में पुलिस को कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां मिलीं.
घटना वाली रात दोनों के बीच 20-22 मर्तबा बात हुई थी. इतना ही नहीं, 25 अप्रैल को सुबह मोनू के फोन की लोकेशन गोकुलपुरी क्षेत्र की पाई गई. उसी इलाके में वासु की लाश मिली थी.
पुलिस के सामने अब करीबकरीब पूरी तसवीर साफ हो गई थी. इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह ने अमित गुप्ता उर्फ मोनू और रहमान को थाने बुला लिया. पुलिस ने दोनों से अलगअलग पूछताछ की. पुलिस ने घटना वाली रात में 20-22 मर्तबा बात करने की वजह पूछी तो मोनू बोला, ‘‘सर, हम बिजनैस पार्टनर हैं, काम के संबंध में बात हुई थी.’’
‘‘ऐसा कौन सा जरूरी काम था जो तुम लोग रात भर फोन पर बात करते रहे. इस से पहले तो तुम ने किसी रात में कोई बात नहीं की. केवल 24-25 अप्रैल की रात ऐसी क्या खास बात थी?’’ इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने पूछा.
मोनू इस बात का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. यही सवाल जब रहमान से किया गया तो वह टूट गया. उस ने स्वीकार कर लिया कि वासु की हत्या उस ने ही की थी. उस ने मासूम वासु की हत्या की जो कहानी बताई वह इस प्रकार थी.
उत्तर पूर्वी दिल्ली के थाना न्यू उस्मानपुर के तहत आने वाली एक कालोनी है ब्रह्मपुरी. मुकेश गुप्ता अपनी पत्नी भावना और 3 बच्चों के साथ इसी कालोनी में रहते थे. उन के बच्चों में 12 और 9 साल की 2 बेटियां थीं और 5 साल का एक बेटा मधुरम उर्फ वासु. मुकेश गुप्ता का होलसेल का हाउस क्लीनिंग के सामान का बड़ा बिजनैस था.
गुप्ता का 5 वर्षीय बेटा वासु यमुना विहार इलाके के एक पब्लिक स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ रहा था.
मुकेश गुप्ता के घर के नजदीक ही अमित गुप्ता उर्फ मोनू रहता था. मोनू के पिता रमेश गुप्ता की यमुना विहार रोड के नूरएइलाही चौक स्थित आदर्श मार्केट में शटर बनाने की दुकान थी.
मोनू और रहमान अच्छे दोस्त थे. रहमान के पिता शमशुल इसलाम की नूरएइलाही चौक स्थित आदर्श मार्केट में ज्वैलरी शौप थी. चूंकि मोनू के पिता की भी वहां दुकान थी इसलिए मोनू और रहमान की आपस में दोस्ती हो गई थी.
दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि मोनू और रहमान ने पार्टनरशिप में मोबाइल फोन की पुरानी बैटरियां खरीदने और मोबाइल की एसेसरीज बेचने का काम शुरू कर दिया. यह काम मोनू के घर पर ही ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था.
मोनू के किसी आदमी पर 12 लाख रुपए फंसे थे. काफी कोशिश करने के बाद भी वह व्यक्ति उस के पैसे नहीं लौटा रहा था, जिस की वजह से मोनू अकसर परेशान रहता था. पिछले कुछ दिनों से उस का धंधा भी ठीक से नहीं चल पा रहा था. इसी वजह से वह कुछ लोगों का कर्जदार हो गया था. वह दिनरात इसी उधेड़बुन में लगा रहता था कि अपना कर्ज कैसे चुकाए?
इसी दौरान उस के दिमाग में वासु का ध्यान आया. वह जानता था कि वासु उस के तहेरे भाई मुकेश गुप्ता का इकलौता बेटा है. उस ने सोचा कि अगर वह वासु को किडनैप कर ले तो उस के पिता से आसानी से 30-35 लाख रुपए की फिरौती मिल सकती है. इस बारे में उस ने अपने दोस्त रहमान से मशविरा किया. रहमान को उस का प्रस्ताव पसंद आया तो दोनों ने मिल कर वासु के अपहरण की योजना बना ली.
योजना बनाने के बाद मोनू ने वासु से मेलजोल बढ़ाना शुरू कर दिया. वह उसे खानेपीने की चीजें देने लगा. बच्चे तो प्यार के भूखे होते हैं. जब मोनू को चाचू से खानेपीने की चीजें मिलने लगीं तो वह उस के पास ज्यादा जाने लगा. उस मासूम को क्या पता था कि वह चाचू के जाल में फंसता जा रहा है. मोनू ने वासु को यह लालच भी दे रखा था कि वह गेम खेलने के लिए उसे टैब ला कर दे देगा. इसी चक्कर में वासु उस से खूब घुलमिल गया.
24 अप्रैल, 2014 को मोनू के पिता और भाई दुकान पर थे. मां रोहिणी में रहने वाले अपने भाई के यहां गई थी. घर में मोनू अकेला था. साढे़ 5 बजे के करीब वासु गली में आया और अपने दोस्तों के साथ खेलने लगा. मोनू अपने दरवाजे पर खड़ा यह सब देख रहा था. कुछ देर बाद जब दूसरे बच्चे खेल कर वहां से चले गए तो वासु अकेला रह गया.
मौका देख कर मोनू ने वासु को अपने घर में बुला लिया. मोनू ने रहमान को पहले ही बुला रखा था. मोनू ने वासु को कमरे में ले जा कर कोल्डड्रिंक पीने को दी जिस में नशे की गोलियां मिली हुई थीं. कोल्ड ड्रिंक पीने के कुछ देर बाद ही वासु की आंखों में नींद भर आई और वह सो गया.
उधर जब वासु काफी देर बाद भी घर नहीं पहुंचा तो भावना उसे ढूंढ़ने गली में आईं. उसे ढूंढतीढूंढती वह मोनू के घर पहुंची तो उस ने उन्हें बता दिया वह उस के पास आया तो था, लेकिन कुछ देर बाद चला गया था. वह भावना के साथ ही वासु को खोजने का नाटक करने लगा. बाद में जब पुलिस वहां आई, तो वह पुलिस के साथ भी लगा रहा. इस बीच वह रहमान से भी फोन पर बात करता रहा. रहमान उस के घर में ही छिपा था.
जब मोनू ने देखा कि पुलिस ज्यादा एक्टिव हो गई है तो वह अपने घर आया और वासु को ग्राउंड फ्लोर से उठा कर दूसरी मंजिल पर स्थित स्टोर में ले गया. स्टोर में रहमान उस के पास ही रहा. करीब 8 बजे मोनू के घर के अन्य सदस्य घर लौट आए. जब उन्हें पता लगा कि वासु गायब है तो वे भी मुकेश गुप्ता के साथ उसे ढूंढ़ने लगे. उन्हें क्या पता था कि जिस बच्चे को वे तलाश रहे हैं वह उन के घर में ही कैद है.
जब वासु के ऊपर से नींद की गोलियों का असर कम हुआ तो उस की आंख खुल गईं और वह रोने लगा. इस से रहमान डर गया कि कहीं उस के रोने की आवाज बाहर न चली जाए, इसलिए उस ने हाथ से वासु का मुंह दबा दिया. नाक और मुंह बंद होने से कुछ ही पलों में वासु की मौत हो गई. उसे मरा देख रहमान के होश उड़ गए. उस ने तुरंत मोनू को फोन कर के कहा कि वासु की तबियत ज्यादा खराब हो गई है.
उस समय मोनू मुकेश गुप्ता के यहां था. रहमान से बात कर के वह अपने घर पहुंच गया. जब उस ने देखा कि वासु मर गया है तो वह फिरौती वसूलने की बात भूल गया. वह बुरी तरह घबरा गया था. दोनों ने रात में ही वासु की लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. किसी को उस पर शक न हो इसलिए वह फिर से मुकेश के यहां चला गया और वासु को ढूंढने का ढोंग करता रहा.
योजना के मुताबिक, रहमान जब मोनू के घर आया था तो उस ने अपनी सैंट्रो कार मोनू के यहां ही खड़ी कर दी थी. सुबह साढ़े चारपांच बजे के बीच रहमान बच्चे की लाश को सैंट्रो कार की पिछली सीट पर ले कर बैठ गया. कार मोनू चला रहा था. कार ले कर दोनों वजीराबाद रोड पर निकल गए और लाश भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास सड़क के किनारे डाल दी. रहमान को रास्ते में ही उतार कर मोनू कार अपने घर ले गया.
मोनू जब कार से घर लौट रहा था तो नाले के पास उसे मुकेश का नौकर हरि मिला. वह भी नाले में वासु को ढूंढ रहा था. हरि ने जब उस से पूछा तो उस ने बताया कि उस की बाइक का पेट्रोल खत्म हो गया था, इसलिए वह कार से वासु को ढूंढ़ रहा है.
मोनू घर आया तो उस ने देखा कि वासु के सैडल उस के घर में ही रह गए हैं. उस ने सैंडल एक थैली में रखे और स्कूटी से उन्हें यमुना के लोहे वाले पुल से खादर में फेंक आया. लाश और सैंडल ठिकाने लगाने के बाद वह बेखौफ हो गया था कि पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकेगी. लेकिन उस के और रहमान के बीच फोन पर हुई बातचीत से दोनों पुलिस के चंगुल में फंस ही गए.
मोनू की निशानदेही पर पुलिस ने यमुना खादर में फेंके गए वासु के सैंडल भी बरामद कर लिए. जिस सैंट्रो कार से वासु की लाश फेंकी गई थी वह कार भी पुलिस ने बरामद कर ली.
पहले तो मुकेश गुप्ता और उस के घर वालों को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मोनू ऐसा काम कर सकता है. लेकिन पुलिस के सामने जब उस ने वासु की हत्या की कहानी उगली तो उन्हें उस से नफरत होने लगी.
पुलिस ने अमित गुप्ता उर्फ मोनू और रहमान को वासु के अपहरण और हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर कड़कड़डूमा न्यायालय में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शरद गुप्ता के समक्ष पेश कर के एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में पुलिस ने उस मैडिकल स्टोर के मालिक के बयान दर्ज किए जहां से मोनू ने नींद की गोलियां खरीदी थीं.
अगले दिन 29 अप्रैल, 2014 को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया गया. कथा लिखने तक दोनों जेल में बंद थे.
पुलिस आयुक्त बी.एस. बस्सी ने इस केस को बहुत कम समय में खोल कर अभियुक्तों को गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों की तारीफ की और उन्हें अपने औफिस में बुला कर पुरस्कृत भी किया. मामले की तफ्तीश इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह कर रहे हैं. Delhi Child Kidnapping
— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.
— 2014 में प्रकाशित






