Crime Story in Hindi. पैसों के लालच में ज्यादातर लोगों का ईमान डोल जाता है. बिजनैसमैन तरुण बजाज पूजा और मोनी नाम की जिन महिलाओं को अपने बेडरूम में एकांत में बुलाता था, पैसों के लालच में उन दोनों ने ऐसा कदम उठाया कि तरुण बजाज को जान से हाथ धोना पड़ा.
दिल्ली सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में नौकरी करने वाली रितु बजाज 25 जून, 2014 को शाम 6-सवा 6 बजे अपने औफिस से घर पहुंचीं तो उन्हें फ्लैट का बाहरी गेट बंद मिला. घर पर उन के पति तरुण बजाज के अलावा नौकर राहुल रहता था. दरवाजा खुलवाने के लिए उन्होंने कालबैल का बटन दबाया तो फ्लैट के अंदर लगी घंटी बजी. लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला. जबकि रोजाना घंटी बजाने के कुछ देर बाद ही नौकर या पति दरवाजा खोल देते थे.
वह दोबारा घंटी बजा कर दरवाजा खुलने का इंतजार करने लगीं. कुछ देर बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो वह सोचने लगीं कि शायद दोनों ही सो गए हैं. उन के दरवाजे में जो लौक लगा हुआ था वह आटोमैटिक था यानी दरवाजा बंद होने पर वह स्वत: ही लौक हो जाता था और कमरे के अंदर व बाहर दोनों तरफ से चाबी द्वारा खोला जा सकता था. उस की एक चाबी रितु बजाज के पास भी रहती थी.
2 बार घंटी बजाने के बाद भी जब किसी ने दरवाजा नहीं खोला तो रितु बजाज ने पर्स से चाबी निकाली और दरवाजा खोल कर कमरे में दाखिल हुईं. घर में घुसते ही बाएं हाथ की ओर उन का बेडरूम था. घर में नौकर दिखाई नहीं दिया तो बेडरूम की ओर नजर दौड़ाई. उन्हें बेड से लटके हुए पति के पैर दिखाई दिए. वह सोचने लगीं कि कितने बेसुध हो कर सो रहे हैं कि घंटी की आवाज तक नहीं सुनाई दी. इसी बात की शिकायत करने के लिए वह बेडरूम में पहुंचीं तो उन्हें फर्श और दीवारों पर खून के छींटे दिखे.
खून के छींटे और पति के ऊपर बेडशीट पड़ी देख कर उन्हें अजीब लगा. उन्होंने पति के ऊपर से जैसे ही बेडशीट हटाई, उन की चीख निकल गई. पति नग्न अवस्था में थे. उन के पूरे शरीर पर गहरे घाव थे और आतें भी बाहर निकली हुई थीं. पूरा शरीर खून से लथपथ था.
उसी समय उन का घरेलू नौकर राहुल भी आ गया. अपने मालिक की हालत देख कर वह रोने लगा. उसी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर डा. अनुराग पांडे रहते थे. रितु ने राहुल को डा. अनुराग पांडे को बुलाने के लिए भेज दिया. इस बीच रितु बजाज ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर के पति की हत्या की सूचना दे दी.
डा. अनुराग पांडे खून से लथपथ तरुण बजाज को देख कर दंग रह गए. उन्होंने तरुण बजाज को चैक कर के बता दिया कि इन की मौत हो चुकी है. डाक्टर के मुंह से यह सुनते ही रितु दहाड़ें मार कर रोने लगीं. उन की रोने की आवाज सुन कर आसपास रहने वाले लोग वहां पहुंच गए.
डा. अनुराग पांडे ने भी 100 नंबर पर फोन कर के तरुण बजाज की हत्या होने की खबर दे दी. यह घटना मध्य दिल्ली में न्यू राजेंद्रनगर के एफ ब्लौक के फ्लैट नंबर 433 में घटी थी. वहां से थाना राजेंद्रनगर तकरीबन 5-6 सौ मीटर की दूरी पर था, इसलिए खबर मिलने के थोड़ी देर बाद ही थाना राजेंद्रनगर के अतिरिक्त थानाप्रभारी विक्रम सिंह राठी एसआई गौतम मलिक और कांस्टेबल रामजी लाल को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए.
जिस इलाके में यह घटना घटी थी, वह पौश इलाका था. फ्लैट नंबर 433 पार्क के सामने था. तरुण बजाज की हत्या की बात सुन कर फ्लैट के पास सड़क पर सैकड़ों लोग जमा हो गए. पुलिस जब फ्लैट में पहुंची तो लगभग 50 वर्षीय तरुण बजाज की रक्तरंजित लाश देख कर सन्न रह गई.
उस के नग्न शरीर पर गहरे घाव खुद बयां कर रहे थे कि हत्यारों का मकसद उस की हत्या करना था. गरदन और ठोड़ी कटी हुई थी. छाती, कमर, पैर और पेट पर गहरे घाव थे. पेट का घाव तो इतना बड़ा था कि उस से आंतें भी बाहर निकली हुई थीं. उस के पुरुषांग पर भी वार किया गया था.
मृतक की कुछ दिनों पहले ही बाइपास सर्जरी हुई थी, हत्यारों ने सर्जरी की जगह को भी धारदार हथियार से फाड़ दिया था. कमरे का सामान बिखरा हुआ था, अलमारी भी खुली हुई थी. मृतक की पत्नी रितु बजाज का रोरो कर बुरा हाल था. उस समय उन से इस बात की जानकारी नहीं ली जा सकती थी कि घर का क्याक्या सामान गायब है.
इंसपेक्टर विक्रम सिंह राठी ने पूरे हालात से थानाप्रभारी मनीष जोशी को अवगत कराया. पीसीआर को काल करने पर वैसे तो जिले के समस्त पुलिस अधिकारियों को इस घटना की जानकारी मिल चुकी थी, इस के बावजूद थानाप्रभारी ने एसीपी और डीसीपी कार्यालय में फोन कर के घटना की जानकारी दे कर एसआई बालमुकुंद व एएसआई राजन सिंह के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.
मध्य जिला के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार और करोलबाग के एसीपी एस.के. गिरि भी मौकाएवारदात पर पहुंच गए. समस्त पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया. पुलिस को घरेलू नौकर राहुल ने बताया कि वह दोपहर साढ़े 3 बजे आया था तो दरवाजा बंद था. कई दफा घंटी बजाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो उस ने तरुण बजाज के मोबाइल पर फोन किया. फोन पर घंटी बज रही थी, लेकिन फोन नहीं उठाया तो वह पार्क में जा कर बैठ गया. पार्क में बैठेबैठे भी उस ने तरुण बजाज को कई बार फोन किया, हर बार घंटी बजती रही पर काल रिसीव नहीं हुई.
मामला हाईप्रोफाइल था, इसलिए थानापुलिस ने मौके पर क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम, सीएफएसएल टीम और अन्य एक्सपर्ट्स को बुला लिया, ताकि वहां से जरूरी सुबूत इकट्ठे किए जा सकें. ड्राइंगरूम में जो टेबल रखी थी, उस पर 3 गिलास रखे थे, जिन में थोड़ा जूस भी था. फ्लैट का निरीक्षण करने पर ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला, जिस से लगे कि हत्यारों ने फ्लैट में जबरदस्ती एंट्री की हो.
टेबल पर रखे गिलासों से यही लगा कि हत्यारे 2 या अधिक रहे होंगे और उन से मृतक के संबंध ठीकठाक रहे होंगे, तभी तो उन्हें बेडरूम में बैठा कर जूस पिलाया गया था.
बहरहाल, हत्यारे कौन थे और उन्होंने बजाज की हत्या क्यों की, यह जांच का विषय था. इस से पहले जांच टीमों ने मौके से खून के सैंपल फिंगरप्रिंट आदि बरामद किए.
इस के बाद पुलिस ने लाश का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. साथ ही मृतक की पत्नी रितु बजाज की तरफ से अज्ञात हत्यारों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया.
हत्या के इस मामले को सुलझाने के लिए मध्य जिला के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार ने करोलबाग के एसीपी एस.के. गिरि के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई, जिस में थाना राजेंद्रनगर के थानाप्रभारी मनीष जोशी, अतिरिक्त थानाप्रभारी विक्रम सिंह राठी, एसआई गौतम मलिक, पवन तोमर, रामनिवास, सतेंद्र, बलवंत, एएसआई राजन सिंह, हेडकांस्टेबल प्रकाश, कांस्टेबल संदीप, जोगिंद्र, संजीव, स्वायम, गुलशन, विनोद, नीरज, बलजीत, नितिन आदि को शामिल किया.
चूंकि घटना एक पौश कालोनी में घटी थी, इसलिए पुलिस अधिकारी चाहते थे कि जल्द से जल्द इस का खुलासा हो. इसीलिए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार ने इस केस की जांच में थाना प्रसादनगर के थानाप्रभारी युद्धविंदर सिंह, चांदनीमहल के थानाप्रभारी अनिल कुमार, हौजकाजी के थानाप्रभारी जरनैल सिंह को भी लगा दिया था. पुलिस टीमें अलगअलग कोणों से केस की जांच में जुट गईं.
पुलिस ने रितु बजाज से बात की तो पता चला कि तरुण बजाज का राजेंद्रनगर इलाके में इमेज केबल नेटवर्क के नाम से कारोबार था. दिल्ली में केबल कारोबार की प्रतिद्वंदिता में अकसर झगड़े होते रहते हैं. कहीं तरुण बजाज भी इसी रंजिश का शिकार तो नहीं हो गए. यही जानने के लिए पुलिस ने इलाके के और भी केबल कारोबारियों से पूछताछ की. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
पुलिस ने तरुण के मोबाइल फोन की जब जांच की तो उस में काफी आपत्तिजनक सामग्री मिली. मोबाइल फोन में मिली सामग्री और तरुण की बर्बर तरीके से की गई हत्या से पुलिस को लगा कि हत्या की वजह कहीं कोई महिला तो नहीं है.
इस बिंदु पर पुलिस ने जांच शुरू की. पुलिस ने ऐसी 60 से अधिक महिलाओं से पूछताछ की, जिन्हें पुलिस ने पहले कभी जिस्मफरोशी के धंधे में गिरफ्तार किया था. उन्होंने पुलिस को बताया कि अब वे धंधा नहीं करतीं.
पुलिस उन्हें दूसरे मकसद से थाने लाई थी. उन से जब पूछताछ की तो कुछ महिलाओं के बारे में जानकारी मिली जो तरुण बजाज के पास जाती थीं. जिनजिन महिलाओं के नाम सामने आते गए, पुलिस उन से पूछताछ करती रही. जिन महिलाओं से पुलिस ने पूछताछ की पुलिस को वे बेकुसूर दिखीं. फिर भी पुलिस ने उन्हें शक के दायरे में रख कर हिदायत दी कि जब तक जांच पूरी न हो, वे दिल्ली से बाहर न जाएं.
दिल्ली के कर्मपुरा इलाके की रहने वाली एक महिला का नाम सामने आया तो पुलिस उस महिला के घर पहुंची. लेकिन वह परिवार सहित घर से फरार मिली. पुलिस को उस के फरार होने पर शक हो गया. उस के घर पर निगरानी के लिए 2 कांस्टेबलों को लगा दिया गया.
पुलिस ने फिर से मृतक के मोबाइल फोन और लैपटाप को खंगाला. उस के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवा कर उस का अध्ययन किया तो पता चला कि घटना वाले दिन दोपहर करीब साढ़े 12 बजे एक काल आई थी. जिस नंबर से उस के मोबाइल पर काल आई थी, उस का पुलिस ने पता लगा लिया. उसे थाने बुला लिया.
उस युवक से पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह तरुण बजाज नाम के किसी शख्स को नहीं जानता. उस ने कहा, ‘‘25 जून को दोपहर के समय जो आप फोन करने की बात कर रहे हैं, वह मैं ने नहीं, बल्कि एक महिला ने किया था.’’
‘‘महिला ने, कौन सी महिला ने फोन किया था?’’ एसीपी एस.के. गिरि ने पूछा.
‘‘सर, मैं राजेंद्राप्लेस मैट्रो स्टेशन से नीचे उतरा ही था कि नीचे सउ़क पर खड़े एक बैटरी रिक्शा में 2 महिलाएं बैठी दिखीं. उन में से एक ने मुझ से कहा कि उस का फोन घर पर रह गया है. किसी को काल करने के लिए उस ने मुझ से फोन मांगा. मैं ने उसे अपना फोन दे दिया तो उसी ने किसी को मेरे मोबाइल से फोन किया था.’’ उस युवक ने बताया.
‘‘क्या तुम उन महिलाओं को पहचानते हो?’’ एसीपी एस.के. गिरि ने पूछा.
‘‘नहीं सर, मैं ने उन्हें पहली बार देखा था. मगर सामने आ गईं तो जरूर पहचान लूंगा.’’ उस ने बताया.
पहले भी जांच में कर्मपुरा की एक महिला का नाम सामने आया था और जांच की दूसरी कड़ी में भी फोन करने वाली 2 महिलाएं सामने आईं. इस से पुलिस को लगा कि बजाज के मर्डर में महिलाओं के शामिल होने की संभावना हो सकती है. यानी घटना के पीछे लव और सैक्स की तसवीर साफ नजर आ रही थी. इन दोनों जांचों में पुलिस को सफलता मिलने की उम्मीद नजर आ रही थी, लेकिन जांच ऐसी जगह आ कर ठहर गई कि फिलहाल वहां से आगे बढ़ती नहीं दिख रही थी.
न्यू राजेंद्रनगर में जिस ब्लौक में दिल दहला देने वाली इस घटना को अंजाम दिया गया, वहां पर कुछ लोगों ने फ्लैट के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं. तरुण बजाज के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकौर्डिंग से पता चला कि 25 जून, 2014 की दोपहर को 2 लड़के एक बाइक से तरुण बजाज के फ्लैट तक गए थे. जो युवक बाइक के पीछे बैठा था, उस ने एक बैग भी थाम रखा था.
बाद में वही लड़के दोपहर करीब 2 बजे फ्लैट की साइड से वापस जाते हुए दिखे, लेकिन वापस जाते समय उन की पहनी हुई कमीजें बदली हुई थीं. यानी वे कपड़े चेंज कर के आए थे.
वारदात में 2 महिलाओं के अलावा 2 युवकों के शामिल होने का शक पुलिस को हो गया, लेकिन ये सब कौन थे, पता लगाना आसान नहीं था.
उधर मृतक के घर वाले और रिश्तेदार हत्यारों का पता लगाने के लिए पुलिस पर दबाव डाल रहे थे. एसीपी एस.के. गिरि को टीम में जुटे पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली और क्षमता पर विश्वास था, इसलिए उन्होंने पीडि़त पक्ष को भरोसा दिया कि 2 दिनों के अंदर केस को खोल दिया जाएगा. एसीपी के आश्वासन के बाद घर वाले भी पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहे थे.
एसीपी ने जांच में जुटे सभी पुलिसकर्मियों को अलगअलग जिम्मेदारियां सौंप रखी थीं. सभी टीमें जांच में रातदिन एक किए हुए थीं. जांच जिस पड़ाव पर आ कर ठहर गई थी, वहां से आगे बढ़ती दिखाई नहीं दे रही थी. तब पुलिस ने तरुण बजाज के फोन की काल डिटेल्स का अध्ययन किया. हालफिलहाल में जिन लोगों से तरुण बजाज की बातें हुई थीं, पुलिस ने उन सभी से पूछताछ करनी शुरू कर दी.
जिन लोगों से पुलिस पूछताछ कर रही थी, उन्हें सीसीटीवी से बरामद उन 2 लड़कों की फुटेज भी दिखा रही थी, जो 25 जून की दोपहर को बाइक से बजाज के फ्लैट की ओर आए थे.
फुटेज साफ नहीं थी, इसलिए उस में चेहरे साफ नहीं दिखाई दे रहे थे. पूछताछ के इसी क्रम में एक शख्स ने सीसीटीवी की वह फुटेज पहचान ली. बाइक पर पीछे बैठे युवक को उस ने पहचानते हुए कहा, ‘‘यह तो साहिल है.’’
‘‘क्या तुम इसे जानते हो?’’ एसीपी एस.के. गिरि ने पूछा.
‘‘जी सर, मैं इसे अच्छी तरह जानता हूं. यह साहिल ही है जो कर्मपुरा में रहता है. मैं ने तो इस का घर भी देखा है.’’ उस युवक ने कहा तो उन्हें केस खुलने की उम्मीद दिखाई दी.
एक पुलिस टीम को तुरंत उस युवक के साथ साहिल के घर कर्मपुरा भेजा गया. वहां पता चला कि साहिल अपनी पत्नी पूजा के साथ आज ही 26 जून को हरिद्वार चला गया है.
बजाज की हत्या के बाद साहिल के घर पुलिस एक बार पहले भी गई थी. लेकिन उस समय उस की पत्नी पूजा की तलाश में गई थी. अब साहिल का नाम सामने आने पर पुलिस को विश्वास हो गया कि पति और पत्नी दोनों ही इस मामले में शामिल रहे होंगे, तभी तो दोनों फरार हैं. वहां से पुलिस को साहिल का मोबाइल नंबर मिल गया.
साहिल के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगवा कर थानाप्रभारी मनीष जोशी, एसआई गौतम मलिक, एएसआई राजन सिंह दोनों की तलाश में हरिद्वार रवाना हो गए.
यह 26-27 जून, 2014 की रात की बात थी. वे सुबह तड़के हरिद्वार के नजदीक पहुंचे थे कि सर्विलांस टीम ने दिल्ली से खबर दी कि साहिल के फोन की लोकेशन से लग रहा है कि वह हरिद्वार से देहरादून की ओर जा रहा है. दिल्ली पुलिस की टीम ने भी हरिद्वार से देहरादून का रुख कर लिया.
सुबह तक पुलिस टीम देहरादून पहुंच गई. वह सर्विलांस टीम के संपर्क में थी. वहां से पुलिस को जानकारी मिली कि साहिल के फोन की लोकेशन देहरादून के पंडित मोहल्ले में जा कर स्थिर हो गई है. दिल्ली पुलिस टीम वहां के लोगों से पूछते हुए पंडित मोहल्ले में पहुंची. वहां की लोकल पुलिस के सहयोग से दिल्ली पुलिस ने उस मोहल्ले में घरघर सर्चिंग शुरू कर दी.
जिस युवक ने सीसीटीवी फुटेज में साहिल को पहचाना था, वह पुलिस के साथ था. तलाशी लेते हुए पुलिस एक घर में पहुंची तो वहां 2 युवक 1 महिला के साथ बैठ कर शराब पीते मिले. पुलिस को देखते ही युवक भागे, लेकिन दौड़ कर पुलिस ने उन्हें दबोच लिया.
उन से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपने नाम साहिल और मोहित बताए. पुलिस के साथ जो युवक था, उस ने भी साहिल को पहचान लिया. उस के साथ जो महिला शराब पी रही थी, वह उस की पत्नी पूजा थी.
साहिल के पास एक बैग था, जिस में डेढ़ लाख रुपए नकद, कुछ ज्वैलरी और एक चाकू मिला. पूछताछ में उन्होंने स्वीकार कर लिया कि तरुण बजाज की हत्या उन्होंने की थी.
तरुण बजाज के हत्यारों को गिरफ्तार करने की बात थानाप्रभारी मनीष जोशी ने देहरादून से ही एसीपी एस.के. गिरि को बता दी थी. पुलिस तीनों अभियुक्तों को दिल्ली ले आई. वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में तीनों से तरुण बजाज की हत्या की बाबत पूछताछ की गई तो हत्या के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह लव और सैक्स से सराबोर निकली.
दिल्ली के मध्य जिला के न्यू राजेंद्रनगर के एफ ब्लौक में रहने वाला तरुण बजाज केबल आपरेटर था. राजेंद्रनगर क्षेत्र में उस का इमेज केबल नेटवर्क था. उस की शादी रितु बजाज से हुई थी. तरुण बजाज एक संपन्न आदमी था. उस की आमदनी अच्छी थी, लेकिन एक कमी उसे और उस की पत्नी को हमेशा सालती रही कि रितु मां नहीं बन सकी.
तरुण ने पत्नी का काफी इलाज कराया. इस के बावजूद भी बच्चे की किलकारी उन के आंगन में नहीं गूंजी. रितु की नौकरी दिल्ली सरकार के खाद्य आपूर्ति विभाग में लीगल मैनेजर के पद पर लग गई थी.
बजाज दंपति के पास वैसे तो हर तरह की सुखसुविधा थी, लेकिन संतान न होने का दुख उन्हें जबतब विचलित करता रहता था. कहते हैं कि दौलत बढ़ने पर कुछ लोग गलत शौक पाल लेते हैं. तरुण बजाज को भी एक शौक लग गया था. वह था महिलाओं से दोस्ती कर उन से नजदीकी संबंध बनाना. पत्नी के ड्यूटी पर जाने के बाद वह फोन कर के अपनी महिला मित्र को बुला लेता और अपने फ्लैट में ही मौजमस्ती करता.
तरुण बजाज की ऐसी ही एक महिला पूजा से नजदीकी थी. तरुण की उस से करीब डेढ़ साल पहले मुलाकात हुई थी. पूजा कर्मपुरा के रहने वाले सूरज उर्फ साहिल की पत्नी थी. साहिल आवारा किस्म का था. पूजा की तरुण बजाज जैसे कई लोगों से नजदीकी थी, इसलिए उसी के खर्चे से घर का खर्च चलता था.
पूजा जब गर्भवती हो गई तो उस ने तरुण बजाज के पास जाना कम कर दिया. तब पूजा ने तरुण की मुलाकात मुन्नी उर्फ मोनी से कराई. मोनी सुल्तानपुरी में रहती थी. पत्नी की गैरमौजूदगी में तरुण मोनी को भी फ्लैट पर बुला लेता था.
बाद में पूजा ने एक बेटे को जन्म दिया. पूजा ने अपने पुरुष मित्रों के पास जाना बंद कर दिया था. इस से घर खर्च चलाने में परेशानी होने लगी. पैसे के लिए उस का पति साहिल भी परेशान रहने लगा. पतिपत्नी बैठ कर जल्द पैसा कमाने के उपाय खोजते रहते.
पूजा तरुण बजाज की हैसियत जानती थी. तभी उस के दिमाग में एक आइडिया आया कि यदि तरुण बजाज के यहां हाथ साफ कर दिया जाए तो वहां से मोटा माल बटोरा जा सकता है.
पूजा ने इस आइडिया के बारे में पति को बताया तो साहिल को पत्नी का यह आइडिया अच्छा लगा. इस योजना में उस ने कर्मपुरा में रहने वाले अपने दोस्त मोहित शर्मा उर्फ सन्नी को शामिल कर लिया.
चूंकि अब मोनी बजाज के यहां जाती थी, इसलिए काम को आसानी से अंजाम देने के लिए मोनी को भी बजाज के घर लूट करने की योजना में शामिल कर लिया. पूजा ने उन्हें भरोसा दिया कि लूट की रकम में से उन्हें अच्छे पैसे दे दिए जाएंगे.
फिर 21 से 23 जून तक साहिल और मोहित शर्मा ने तरुण बजाज के घर की कुरियर बौय बन कर रेकी की. 25 जून, 2014 को पूजा और साहिल ने फोन कर के मोहित शर्मा और मोनी को दोपहर साढ़े 11 बजे अपने घर बुला लिया. इस से पहले उन्होंने दिल्ली की मादीपुर मार्केट से 3 चाकू खरीद लिए थे. कर्मपुरा से पूजा और मोनी बैटरी रिक्शा से राजेंद्रा प्लेस मैट्रो स्टेशन के नजदीक पहुंचीं.
साहिल और मोहित मोटरसाइकिल से उन के पीछेपीछे आ रहे थे. पूजा और मोनी मैट्रो स्टेशन के पास बैटरी रिक्शा में बैठी रहीं. तरुण बजाज से बात करने के लिए मोनी किसी अनजान आदमी के फोन से बात करना चाहती थी, ताकि वह पुलिस की पकड़ में न आ सकें.
उसी समय उन्होंने मैट्रो स्टेशन की सीढि़यों से उतर चुके एक युवक को अपने पास बुलाया. उस युवक के हाथ में मोबाइल फोन था. मोनी ने उस युवक से फोन मांग कर तरुण बजाज को फोन किया. तब तरुण ने उसे फ्लैट पर आने को कह दिया.
उस युवक का फोन लौटाने के बाद राजेंद्राप्लेस मैट्रो स्टेशन से मोनी और पूजा तरुण बजाज के घर पहुंचीं. दोनों को देख कर 50 वर्षीय तरुण बजाज खुश हो गया. उस ने दोनों को जूस पिलाया. इस के बाद वह उन के साथ मौजमस्ती करने लगा.
उसी दौरान पूजा ने अपने फोन से साहिल को मैसेज भेज दिया. वह मैसेज उस ने पहले से ही लिख रखा था. बेडरूम फ्लैट के मेनगेट से थोड़ा हट कर था, इसलिए मौका पा कर पूजा ने बेडरूम से आ कर दरवाजा खोल दिया.
उधर मैसेज मिलते ही साहिल और मोहित शर्मा बाइक से उस के फ्लैट के नजदीक पहुंच गए. फ्लैट फर्स्ट फ्लोर पर था. जब वे वहां पहुंचे तो दरवाजा पहले से खुला होने की वजह से वे फ्लैट में दाखिल हो गए.
अनजान लोगों को फ्लैट में देख कर तरुण बजाज चौंका. वह कपड़े पहनने के लिए उठने लगा तो उन्होंने चाकू दिखा कर उसे डरा दिया. इस से पहले कि वह कुछ कहता उन लोगों ने उस पर चाकुओं से वार करने शुरू कर दिए. कुछ ही देर में तरुण का शरीर चाकुओं से गोद डाला. वह जिंदा न रह जाए, इसलिए उस की सांस की नली काट दी.
उस का पुरुषांग पर भी चाकू से वार किया और पेट चीर दिया. कुछ देर तड़पने के बाद तरुण बजाज ने दम तोड़ दिया. चूंकि खून से साहिल, मोहित की कमीज सन चुकी थी और मोनी की चुन्नी और सूट पर खून लग चुका था, इसलिए उन्होंने खून सने कपड़े एक पौलीथिन में बांध कर अपने साथ लाए बैग में रख लिए. मोनी की चुन्नी भी उसी में रख ली. मोहित और साहिल ने तरुण की कमीजें अलमारी से निकाल कर पहन लीं.
तरुण को मौत के आगोश में भेजने के बाद उन्होंने अलमारी की तलाशी ली, जिस में रखे 3 लाख रुपए और ज्वैलरी निकाल कर बैग में रख ली. उन्होंने हत्या को लूट का रूप देने के लिए घर का सामान इधरउधर बिखेर दिया. बजाज की हत्या करते समय साहिल के हाथ में भी चाकू लग गया था.
अपना काम करने के बाद साहिल और मोहित मोटरसाइकिल से कर्मपुरा लौट गए. मोनी के कपड़ों पर खून के छींटे आ गए थे. वह किसी को दिखाई न दें, इसलिए पूजा ने उसे अपनी काले रंग की चुन्नी दे दी. जिसे ओढ़ कर वह पूजा के साथ कर्मपुरा पहुंच गई.
साहिल शातिर था. उसे उम्मीद थी कि पुलिस किसी न किसी सुबूत के जरिए उस के पास तक पहुंच सकती है, इसलिए उस ने मोहित और मोनी को फिलहाल 30-30 हजार रुपए दे दिए. बाकी पैसे उस ने ज्वैलरी बेचने के बाद देने को कहा. फिर वह पत्नी पूजा को ले कर हरिद्वार निकल गया. मोहित भी उस के साथ चला गया. खून सने कपड़े उन्होंने गंगा नदी में फेंक दिए.
देहरादून में साहिल का एक रिश्तेदार रहता था. वह उसी रिश्तेदार के घर पहुंच कर सुबहसुबह पत्नी और दोस्त के साथ शराब पी रहा था. उसे पता नहीं था कि दिल्ली पुलिस उस का पीछा करती हुई आ रही है. शराब पीते हुए पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
3 अभियुक्त पुलिस गिरफ्त में आ चुके थे. उन की निशानदेही पर पुलिस ने 28 जून को मुन्नी उर्फ मोनी को सुल्तानपुरी में उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. 28 जून, 2014 को चारों अभियुक्तों को तीसहजारी न्यायालय में महानगर दंडाधिकारी डा. जगमिंदर की कोर्ट में पेश किया, जहां से सूरज उर्फ साहिल, मोहित शर्मा उर्फ सन्नी और मुन्नी उर्फ मोनी को 4 दिनों के पुलिस रिमांड पर दे कर पूजा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
रिमांड अवधि के दौरान पुलिस ने तीनों अभियुक्तों से कई महत्त्वपूर्ण सुबूत एकत्र किए. घटना से संबंधित कई जगहों की तसदीक भी उन से कराई. विस्तार से पूछताछ के बाद 2 जुलाई को उन्हें पुन: न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया. मामले की तफ्तीश अतिरिक्त थानाप्रभारी विक्रम सिंह राठी कर रहे हैं. Crime Story in Hindi
— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.
— 2014 में प्रकाशित






