Goa Honeymoon Murder . परदेश में कोई अपने शहर का मिल जाए तो सगा सा लगने लगता है. हनीमून पर गोवा गए अनुज और सोनम जब महेंद्र सागर और कामिनी से मिले तो उन्हें भी ऐसा ही लगा. लेकिन वे दोनों उन के सगे नहीं दुश्मन निकले, जान के दुश्मन.
नईनवेली मनपसंद दुलहन साथ हो तो दुनिया की हर शय, हर नजारा, हर जगह खूबसूरत लगने लगती है. मौका हनीमून का हो और जगह गोवा का समुद्र तट तो फिर तो कहने ही क्या. …बलखाती समुद्र की लहरें. शीतल मंद बयार में झूमते नारियल के पेड़. छतरीदार पेड़ों से छन कर आए चुलबुले बालकों की तरह धरती पर लोटते धूप के टुकड़े. कहीं रंगीन रेस्तराओं के बाहर बड़ेबड़े छातों के नीचे गोल मेज के इर्दगिर्द सिमटे देशीविदेशी पर्यटक तो कहीं समुद्र किनारे खुले आसमान के नीचे रेत पर मस्ती में लेटी अर्धनग्न विदेशी सुंदरियां.
कहीं सजीधजी नावों और स्टीमरों पर समुद्र की सैर करते सैलानी तो कहीं समुद्र तटों पर हंसीठिठोली के साथ नहाते युवकयुवतियां. मस्ती ही मस्ती. ऊपर से मौसम अगर वसंत का हो तो फिर कहना ही क्या. सुबह की बेला में उगते सूरज का मनोहारी दृश्य हो या शाम के सूर्यास्त का समां, रंगरंगीले गोवा का हर दृश्य देख तनमन में मस्ती की लहर दौड़ जाती है. लगता है जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो.
अनुज और सोनम जब हनीमून मनाने गोवा पहुंचे तो उन्हें भी ऐसा ही लगा जैसे स्वर्ग में आ गए हों. कहां दिल्ली की शोरशराबे और प्रदूषण से आजिज मशीनी जिंदगी और कहां गोवा का सौंदर्य और शांति. आधे से अधिक दिन तो मुंबई से गोवा पहुंचने में ही निकल गया था. शाम को अंजुना बीच पर थोड़ा घूमने और समुद्र की चंचल लहरों के साथ थोड़ी मस्ती करने के अलावा उस दिन वे गोवा की रंगीन फिजाओं का ज्यादा आनंद नहीं ले सके.
लेकिन अगले दिन उन्होंने मनमाफिक मस्ती में गुजारा. गोवा में वह सब तो था ही जो मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में होता है— एक से एक बढि़या रेस्तरां, क्रीड़ागृह, बड़ेबड़े होटल, बार, डिस्कोथेक और सजीधजी दुकानें. लेकिन दिल को मोहने वाले प्राकृतिक नजारों के अलावा वहां बहुत कुछ ऐसा भी था, जो दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों में नहीं होता.
मसलन केरल की नावों जैसे फ्लोटिंग पैलेस (तैरते महल), बलखातीं लहरें, दूर तक फैली रेत, हवा में झूमते झुकेझुके नारियल के पेड़ और बसंती बयार के साथ खेलती खिलीखिली चमकीली धूप. उस दिन उन दोनों ने खूब सैरसपाटा किया. लहरों से खेले, बीच पर नहाए, रेत में लेटे और बीच पर खुले रेस्तरां में खाना खाया.
अनुज और सोनम की शादी एक महीना पहले हुई थी. अनुज दिल्ली का रहने वाला था जबकि सोनम सिरसा, हरियाणा के एक संपन्न परिवार की बेटी. अनुज और सोनम की शादी दोनों परिवारों की सहमति से खूब धूमधाम से हुई थी.
अनुज के पिता चंद्रप्रकाश का दिल्ली में अपना व्यवसाय था. उन के 2 बेटों अनुज और नमित में अनुज बड़ा था. उस ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रैजुएशन किया था. पढ़ाई पूरी कर के वह पिता के काम में हाथ बंटाने लगा था. अनुज और सोनम को हनीमून के लिए गोवा जाना है, यह शादी के बाद ही तय हो गया था. रिजर्वेशन सहित उन के जाने की पूरी तैयारी कर दी गई थी.
अनुज के रिश्ते के एक चाचा विजयकरण मुंबई में रहते थे. अनुज और सोनम को मुंबई स्थित उन के घर जा कर रुकना था और वहां से गोवा जाना था. गोवा में उन के ठहरने और घूमने के लिए कार का इंतजाम करने की जिम्मेदारी विजयकरण ने ले रखी थी.
अनुज और सोनम दिल्ली से राजधानी एक्सप्रेस पकड़ कर मुंबई पहुंचे और अंधेरी स्थित विजयकरण के घर ठहरे. वहां इस नवदंपति का खूब स्वागत हुआ.
विजयकरण ने अनुज और सोनम के मुंबई घूमने के लिए कार और ड्राइवर का इंतजाम कर दिया था. 3 दिन तक पतिपत्नी मुंबई की खासखास जगहों पर घूमे.
3 दिन मुंबई में रुकने के बाद अनुज और सोनम को गोवा जाना था. गोवा में विजयकरण के एक दोस्त विनोद अत्री सरकारी नौकरी में बड़े पद पर तैनात थे. विजयकरण ने उन्हें फोन कर के दोनों के लिए सेंट पैड्रो क्षेत्र में स्थित होटल में कमरा बुक करा दिया था. साथ ही उन्होंने अपने दोस्त विनोद को कह भी दिया था कि वे बच्चों के घूमने के लिए कार और ड्राइवर का इंतजाम कर दें. अनुज को उन्होंने विनोद अत्री का फोन नंबर दे कर समझा दिया था कि गोवा पहुंच कर वह अपने वहां पहुंचने की सूचना उन्हें दे दे. वे कार और ड्राइवर भेज देंगे.
अनुज और सोनम बस द्वारा गोवा के लिए रवाना हो गए. उस समय उन के पास 50 हजार रुपए नकद और लगभग 2 लाख रुपए के जेवरात थे. गोवा के सेंट पैड्रो इलाके के एक होटल में अनुज और सोनम के लिए कमरा बुक था. बस से उतर कर वे सीधे होटल पहुंच गए और जाते ही विनोद अत्री को फोन कर दिया.
विनोद ने दोनों के घूमने के लिए ड्राइवर सहित कार भेज दी. उस दिन शाम को अनुज और सोनम अंजुना बीच घूमने गए. सफर की थकान थी, इसलिए उस दिन वे एकडेढ़ घंटे से ज्यादा नहीं घूम सके. ड्राइवर ने उन्हें होटल में छोड़ दिया और सुबह को आने की कह कर चला गया.
घर वालों के निर्देशानुसार अनुज और सोनम रोज शाम को अपनेअपने घर फोन करते थे. उस दिन भी उन्होंने दिल्ली और सिरसा फोन किए. साथ ही मुंबई फोन कर के विजयकरण को भी बता दिया कि वे लोग गोवा पहुंच गए हैं.
अगले दिन ड्राइवर कार ले कर होटल आ गया. उस दिन अनुज और सोनम ने गोवा की खूबसूरत वादियों और अंजुना व बामा बीच पर रेत की सतह पर चादर सी बिछाती समेटती लहरों का आनंद लिया. उन का वह पूरा दिन मौजमस्ती में गुजरा. लग रहा था जैसे कंकरीट के जंगल से निकल कर जन्नतएबहिश्त के किनारे आ बैठे हों.
मखमली रेत पर बैठ कर वे दोनों सिर से सिर जोड़े घंटों समुद्र की बलखाती लहरों को निहारते रहे. समुद्र तट पर गुनगुनी धूप में लेटे उन विदेशी पर्यटकों को देखते रहे जो भारतीय मिट्टी में अपनी संस्कृति की गंध घोलने का प्रयास कर रहे थे. हनीमून का वह दिन उन के लिए यादगार बन गया.
अगले दिन सुबह को विनोद अत्री का ड्राइवर पिछले दिनों की तरह कार ले कर होटल पहुंच गया. अनुज और सोनम लगभग साढ़े 10 बजे होटल से निकले. इधरउधर घूमते हुए वे दोनों अंजुना बीच पहुंचे. कार अस्थाई पार्किंग में लगवाने के बाद दोनों बीच पर चले गए. ड्राइवर कार में बैठा उन के लौटने का इंतजार करता रहा.
लगभग 3 बजे अनुज ने आ कर ड्राइवर ने कहा, ‘‘हमें दिल्ली के कुछ दोस्त मिल गए हैं. उन के पास गाड़ी भी है. हम लोग उन के साथ घूमेंगे, तुम जाओ.’’
‘‘कल कितने बजे आना है साहब?’’ ड्राइवर ने पूछा तो अनुज बोला, ‘‘अब आने की जरूरत नहीं है. कल सुबह हम मुंबई लौट जाएंगे.’’
ड्राइवर कार ले कर चला गया और उस ने यह बात विनोद अत्री को बता दी. अनुज ने कार ड्राइवर समेत वापस भेजी थी. अत: वे निश्चिंत हो गए.
अनुज और सोनम की होटल में 3 दिन की बुकिंग थी. तीसरे दिन उन्हें लौट कर मुंबई पहुंच जाना था. जब वे उस दिन देर रात तक वापस नहीं लौटे तो विजयकरण को चिंता हुई. उन्होंने अगले दिन अपने दोस्त विनोद अत्री को फोन किया. उन्होंने बताया कि अनुज ने अंजुना बीच से यह कह कर ड्राइवर को कार सहित वापस भेज दिया था कि उन्हें दिल्ली के कुछ दोस्त मिल गए हैं और वे उन्हीं के साथ घूमेंगे. उन के पास कार भी है.
अनुज और सोनम न तो वापस लौटे थे और न उन्होंने फोन किया था. विजयकरण को चिंता हुई. चिंता इसलिए स्वाभाविक थी क्योंकि अनुज फोन करने में कतई लापरवाह नहीं था. विजयकरण ने अपने दोस्त विनोद अत्री से कहा कि वे होटल में पता लगा कर बताएं.
विनोद अत्री ने होटल से पता किया तो वहां के कर्मचारियों ने बताया कि अनुज और सोनम सुबह साढ़े 10 बजे के आसपास होटल से साथसाथ निकले थे. शाम को देर रात तक वे वापस नहीं लौटे. रात को लगभग पौने 12 बजे मैडम एक मारुति कार में होटल आईं. तब साहब उन के साथ नहीं थे. अलबत्ता स्मार्ट सा एक व्यक्ति और खूबसूरत सी एक महिला उन के साथ आए थे. मैडम ने बताया कि उन्हें दिल्ली के कुछ दोस्त मिल गए हैं. वे लोग होटल छोड़ कर जा रहे हैं और दोस्तों के साथ ही रहेंगे. मैडम ने होटल का बिल चुकाया और अपना सामान ले कर उन्हीं के साथ चली गईं.
विनोद अत्री ने यह बात विजयकरण को बताई तो उन की चिंता और भी बढ़ गई. उन की समझ में नहीं आया कि जब सोनम होटल से सामान लेने आई तो अनुज उस के साथ क्यों नहीं था. दिल्ली के दोस्तों या परिचितों के मिलने की बात मान भी ली जाती तो होटल छोड़ने के लिए अनुज को उस के साथ आना चाहिए था.
2 दिन से अनुज का फोन न करना भी चिंता पैदा कर रहा था. दोनों के मोबाइल भी स्विच्ड औफ थे. अनुज और सोनम को 2 दिन बाद दिल्ली लौटना था. वापसी के लिए राजधानी एक्सप्रेस में उन का रिजर्वेशन था. क्या पता वे दोनों शाम तक लौट आएं, यह सोच कर विजयकरण ने उन का इंतजार किया. लेकिन जब उस दिन शाम तक न वे आए और न उन का फोन आया तो परेशान हो कर उन्होंने अनुज के पिता चंद्रप्रकाश को फोन कर के सारी बात बताई.
बेटे और पुत्रवधू के यूं गायब होने की बात सुन कर चंद्रप्रकाश आश्चर्यचकित रह गए. वह इस बात से पहले ही परेशान थे कि अनुज और सोनम ने 3 दिनों से फोन क्यों नहीं किया. उन के फोन भी बंद थे.
नवविवाहित जवान बेटे और बहू का मामला था. उन के पास पैसे और लाखों के जेवर थे. चंद्रप्रकाश अपने कुछ रिश्तेदारों को साथ ले कर अगले दिन सुबह की फ्लाइट से मुंबई जा पहुंचे. वहां से वे विजयकरण के साथ गोवा गए.
गोवा में उन्होंने विनोद अत्री को भी साथ ले लिया. ये सब लोग सब से पहले उस होटल में पहुंचे, जहां अनुज और सोनम ठहरे थे. वहां पर उन्होंने होटल कर्मचारियों से उन दोनों के बारे में पूछताछ की तो कर्मचारियों ने वही बातें बताईं जो वे विनोद अत्री को पहले ही बता चुके थे.
उन के अनुसार, उस दिन सुबह को अनुज और सोनम गए तो साथसाथ थे लेकिन रात को जब पौने 12 बजे सोनम आई तो उस के साथ अनुज की जगह एक महिला और पुरुष थे, जो सफेद रंग की आल्टो कार से आए थे. होटल कर्मचारियों ने सोनम के साथ आने वालों का हुलिया भी बताया. उस हुलिए के किसी आदमी या औरत को चंद्रप्रकाश नहीं जानते थे.
मामला गंभीर लग रहा था. चंद्रप्रकाश और उन के दोस्त उत्तरी गोवा स्थित अंजुना थाने पहुंचे और थानाप्रभारी को पूरी बात बता कर अनुज व सोनम की हत्या करने की नीयत से अपहरण की आशंका व्यक्त करते हुए रिपोर्ट लिखा दी.
अंजुना थाने की पुलिस ने 1 दिन पहले अंजुना बीच की ओर जाने वाले रोड के किनारे एक अज्ञात युवती का शव बरामद किया था. युवती स्विमिंग सूट पहने थी. पुलिस को लगा था कि उस युवती की मृत्यु संभवत: नहाते वक्त डूबने से हुई होगी. इत्तफाक से युवती की लाश का पोस्टमार्टम उसी दिन हुआ था. लाश का अभी संस्कार नहीं किया गया था. पुलिस ने चंद्रप्रकाश और उन के साथियों को अस्पताल ले जा कर लाश दिखाई तो वे पहचान गए. वह लाश सोनम की ही थी.
अंजुना थाने की पुलिस ने अनुज का हुलिया बयान कर के उस की गुमशुदगी का संदेश गोवा के सभी थानों को भेज दिया था. उसी दिन दोपहर बाद सूचना मिली कि वाडा तोड़ और कोलबा बीच की सड़क के किनारे एक युवक का शव मिला था, जिस का हुलिया भेजे गए हुलिए से मिलता था.
अंजुना बीच और कोलबा बीच जहां युवक की लाश मिली, में 65 किलोमीटर की दूरी थी. इस युवक के शरीर पर भी स्विमिंग सूट था. युवक की लाश का पोस्टमार्टम भी उसी दिन हुआ था और लाश सुरक्षित थी. पुलिस के अनुमान के हिसाब से युवक की मृत्यु नहाते समय डूबने से हुई थी. चंद्रप्रकाश और उन के साथ गए लोगों को युवक की लाश दिखाई गई तो वे देखते ही बिलख पड़े. वह उन का बेटा अनुज ही था.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी अनुज की मृत्यु का कारण डूबना बताया गया था और पुलिस भी यही मान कर चल रही थी. लेकिन चंद्रप्रकाश इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं थे. उन का कहना था कि अनुज तैरना जानता था. उस के डूबने का प्रश्न ही नहीं था. यह बात सभी की समझ के बाहर थी कि अनुज और सोनम की लाशें एकदूसरे से 65 किलोमीटर दूर कैसे मिलीं. वे लोग सोनम की मौत को भी डूबने का मामला मानने को तैयार नहीं थे.
चंद्रप्रकाश और उन के साथियों ने अनुज और सोनम के मामले में हुई काररवाई पर रोष व्यक्त करते हुए पुलिस से उन का पोस्टमार्टम दोबारा कराने की अपील की. इस सिलसिले में वे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी मिले. संदिग्ध हालात में हुई नवदंपति की हत्या की स्थितियों को देखते हुए पुलिस अधिकारी दोबारा पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार हो गए.
3 डाक्टरों के पैनल से जब अनुज और सोनम की लाशों का पोस्टमार्टम कराया गया तो पता चला कि उन की मौत शरीर में कोई तीक्ष्ण जहर जाने के बाद पानी में डूबने से हुई थी. यह तथ्य प्रकाश में आते ही गोवा पुलिस ने अनुज और सोनम की मौत के मामले को अपहरण, लूट, हत्या और धोखाधड़ी के तहत दर्ज कर के तेजी से जांच शुरू कर दी.
प्राथमिक जांच में पता चला कि अनुज और सोनम को 3 दिन पहले दोपहर बाद और रात को एक ऐसे खूबसूरत जोड़े के साथ देखा गया था जिन के पास सफेद रंग की आल्टो कार थी. इस मामले की जांच कर रहे सहायक पुलिस आयुक्त विनायक ने होटल के कर्मचारियों, अंजुना बीच के एक रेस्तरां के मालिक और कुछ पर्यटकों से पूछताछ की.
उन्हें पता चला कि अनुज और सोनम ने 3 दिन पहले दोपहर को एक युवा जोड़े के साथ अंजुना बीच के एक रेस्तरां में खाना खाया था. रेस्तरां के कर्मचारियों के अनुसार खाना खाते समय अनुज और सोनम के साथ जो जोड़ा था, वह देखने में पतिपत्नी लगते थे और धाराप्रवाह अंगरेजी में बात कर रहे थे. आचारव्यवहार से वे किसी संपन्न घराने के लगते थे. अनुज और सोनम को दोपहर को भी उसी जोड़े के साथ देखा गया था और रात को भी. इस से पुलिस को शक हुआ कि उन के साथ जो भी हुआ, उस का जिम्मेदार वही जोड़ा रहा होगा.
सहायक पुलिस आयुक्त विनायक ने होटल के कर्मचारियों, अंजुना बीच के रेस्तरां मालिक और कुछ पर्यटकों से पूछताछ के बाद अनुज और सोनम के साथ देखे गए युवा जोड़े का पूरा हुलिया एकत्र कर के कंप्यूटर स्केच तैयार करवाया. जिन लोगों ने उस जोड़े को अनुज और सोनम के साथ देखा था, उन के अनुसार कंप्यूटर स्केच और उस जोड़े की शक्ल काफी मिलतीजुलती थी.
इस पर जांच अधिकारी विनायक ने उस जोड़े के चित्रों वाला स्केच गोवा पर्यटन से जुड़े तमाम लोगों को दिखाया. इस छानबीन में विनायक को जानकारी मिली कि उस हुलिए के एक जोड़े को अकसर महंगे होटलों, नाइट क्लबों, डिस्कोथेक, शराबखानों और समुद्र तटों पर कितनी ही बार देखा गया था. कभी वह जोड़ा देशी पर्यटकों के साथ होता था तो कभी विदेशी पर्यटकों के साथ.
केस भी दर्ज हो गया था और जांच भी शुरू हो चुकी थी. रोतेबिलखते चंद्रप्रकाश बेटे और पुत्रवधू के शवों को ले कर अपने साथियों के साथ दिल्ली लौट आए. यह मामला चंद्रप्रकाश के परिवार और सोनम के मायके वालों के लिए दिल दहला देने वाला था. उन लोगों ने एक माह पूर्व जिस युवा जोड़े को बड़े अरमानों के साथ शादी के बंधन में बांधा था, उसी की लाशें उन के सामने पड़ी थीं.
बहरहाल, सोनम और अनुज का एक साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया. अनुज और सोनम की क्रिया आदि से निपटने के बाद चंद्रप्रकाश पुन: गोवा पहुंचे. इस बीच गोवा पुलिस ने अपनी छानबीन से यह पता लगा लिया था कि अंतिम दिन अनुज और सोनम के साथ जिस जोड़े को देखा गया था, उन के नाम महेंद्र सागर और कामिनी सागर थे.
प्राप्त जानकारी के अनुसार पतिपत्नी का ये स्मार्ट और खूबसूरत जोड़ा संपन्न परिवार के सदस्यों की तरह रहता था और धाराप्रवाह अंगरेजी में बात करता था. अपनी वाकपटुता से महेंद्र और कामिनी किसी भी पर्यटक को अपने जाल में फंसाने में सक्षम थे. गोवा के विभिन्न थानों में उन दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी के दर्जनों मामले दर्ज थे. पुलिस रिकौर्ड में सागर दंपति का चित्र उपलब्ध था.
अनुज व सोनम की हत्या और लूटपाट के बाद सागर दंपति ने गोवा छोड़ दिया होगा, यह सोचते हुए गोवा पुलिस ने विवरण सहित उन के चित्र देश भर के पुलिस मुख्यालयों में भिजवा दिए.
गोवा पुलिस को पक्का विश्वास हो गया था कि नकद रकम और लाखों रुपए के जेवरात लूटने के लिए अनुज और सोनम की हत्या महेंद्र और कामिनी ने ही की थी. ये पतिपत्नी चूंकि बड़ेबड़े होटलों, नाइटक्लबों और डिस्कोथेक में अकसर जाते रहते थे इसलिए गोवा पुलिस ने ऐसे स्थानों पर भी इन दोनों के बारे में जानकारियां एकत्र कीं.
इस छानबीन में पता चला कि यह दंपति गोवा में जिस मकान में रहता था, उसी में छोटी सी एक लौज भी चलाता था. सागर दंपति के घर और लौज में पुलिस को कोई विशेष सामान नहीं मिला. पुलिस ने उन के मकान और लौज सील कर दिए. महेंद्र और कामिनी के जहांजहां मिलने की संभावनाएं थीं, गोवा पुलिस ने वहांवहां छापे मारे. लेकिन वे पुलिस के हाथ नहीं लगे.
जब महेंद्र और कामिनी को पकड़ने में किसी तरह की सफलता नहीं मिली तो गोवा पुलिस थकहार कर बैठ गई. इस बीच कई महीने गुजर चुके थे. पुलिस ने भले ही हार मान ली थी, लेकिन अनुज के पिता चंद्रप्रकाश ने हार नहीं मानी. उन्हें महेंद्र और कामिनी के बारे में जहां भी जरा सी जानकारी मिलती, वे वहीं पहुंच जाते.
उन की कोशिशें रंग लाईं और किसी से उन्हें महेंद्र सागर के पिता का नामपता मिल गया. वह हरियाणा के रहने वाले थे. लेकिन महेंद्र चूंकि अपने हिस्से की सारी जमीनजायदाद बेच चुका था इसलिए गांव से उस का कोई संबंध नहीं था. उस की पत्नी कामिनी के बारे में चंद्रप्रकाश को पता चला कि उच्च शिक्षा प्राप्त कामिनी दिल्ली की ही रहने वाली है.
घटना के 11 महीने बाद चंद्रप्रकाश को जानकारी मिली कि महेंद्र सागर का एक काफी करीबी रह चुका विनीत नाम का एक युवक जोधपुर में कहीं रहता है. चंद्रप्रकाश के पास हालांकि विनीत के बारे में आधीअधूरी जानकारी थी फिर भी वह जोधपुर गए और हफ्तों की भागदौड़ के बाद उसे ढूंढ निकाला.
चंद्रप्रकाश के साथ उन के 2-3 घर वाले भी थे. खुद को कई लोगों से घिरा देख विनीत घबरा गया. उस ने स्वीकार कर लिया कि वह महेंद्र सागर का सहयोगी रह चुका है और उस ने ठगी के कई मामलों में उस की मदद की थी. लेकिन विनीत को अनुज और सोनम की हत्या के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.
अलबत्ता विनीत को यह जरूर पता थी कि गोवा पुलिस महेंद्र और कामिनी की तलाश में है. वह चूंकि कई मामलों में महेंद्र का साथ दे चुका था अत: उसे खुद के फंसने का भी डर था. वह चंद्रप्रकाश और उन के साथियों को इस शर्त पर महेंद्र और कामिनी का पता बताने को तैयार हो गया कि वे लोग उस के बारे में न तो पुलिस को बताएंगे और न उसे कुछ कहेंगे.
चंद्रप्रकाश का निशाना सागर दंपति थे न कि विनीत. अत: चंद्रप्रकाश ने उस की यह शर्त स्वीकार कर ली. विनीत ने उन्हें बताया कि महेंद्र और कामिनी मेरठ में किराए के एक मकान में रह रहे हैं. उस ने उन का पता भी बता दिया.
यह जानकारी मिलने के बाद चंद्रप्रकाश अपने कुछ दोस्तों और रिश्तेदारों को साथ ले कर मेरठ पहुंचे. उन के साथ 1-2 लोग महेंद्र और कामिनी को पहचानने वाले भी थे. मेरठ पहुंच कर ये लोग एसपी सिटी से मिले. चंद्रप्रकाश ने एसपी सिटी को पूरी बात बता कर महेंद्र और कामिनी का पता दे दिया.
एसपी सिटी ने तुरंत काररवाई करते हुए पुलिस की एक छापामार पार्टी महेंद्र सागर के घर भेज दी. फलस्वरूप महेंद्र और कामिनी पुलिस के हत्थे चढ़ गए. उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. महेंद्र के घर की तलाशी लेने पर पुलिस को गोवा में कत्ल की गई सोनम का पर्स, 2 सलवारसूट और गोवा से छपने वाले अखबार टाइम्स वीकेंडर के एक अंक की 2 प्रतियां भी मिलीं.
अखबार की इन प्रतियों में पतिपत्नी दोनों के फोटो और इन्हें पकड़वाने वाले को 20 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा छपी थी. बरामद सामान सहित पुलिस दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर के एसएसपी औफिस ले गई. जहां उन से विस्तार से पूछताछ की गई.
महेंद्र और कामिनी दोनों ही बहुत तेज थे और धाराप्रवाह अंगरेजी में बात कर रहे थे. शुरू में दोनों ने पुलिस को भ्रमित करने का भरपूर प्रयास किया. लेकिन पुलिस के
पास चूंकि उन के खिलाफ पर्याप्त सुबूत थे, इसलिए उन्हें सच्चाई पर आना ही पड़ा.
भारत के सब से अच्छे 5 स्कूलों में से एक में शिक्षा प्राप्त और कई साल अमेरिका में कंप्यूटर इंजीनियर रह चुके महेंद्र सागर और दिल्ली के एक सुप्रसिद्ध कालेज से शिक्षा प्राप्त कामिनी के उत्थान और पतन की कहानी पाश्चात्य सभ्यता के रंग में रंग कर अपने संस्कारों से अलगथलग ऐशओआराम की जिंदगी जीने की चाह में भटके एक ऐसे दंपति की कहानी थी, जिस का उद्देश्य ऐशोआराम और वैभवता से परिपूर्ण जिंदगी जीने के अलावा कुछ नहीं था. इस के लिए उन्हें कुछ भी करने में कोई आपत्ति नहीं थी. चाहे बात ईमान बेचने की हो, इंसानियत को ठेंगे पर रखने की हो या पैसे के लिए शरीर बेचने की.
अतिसंपन्न परिवार के महत्त्वाकांक्षी युवक महेंद्र सागर ने नैनीताल के एक प्रसिद्ध कानवेंट स्कूल में शिक्षा प्राप्त करने के बाद दिल्ली आ कर उच्चशिक्षा प्राप्त की थी. दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उस की मुलाकात प्रभावशाली व्यक्तित्व की अत्यंत खूबसूरत युवती कामिनी से हुई. पहली ही मुलाकात में उस ने कामिनी के लिए अपने दिलोदिमाग के सारे दरवाजे खोल दिए थे.
महेंद्र के व्यक्तित्व में भी कुछ ऐसा था जो पहली नजर में ही कामिनी की आंखों में उतर गया था. उस दिन के बाद महेंद्र और कामिनी आए दिन मिलने लगे. जल्दी ही वे दोनों एकदूसरे के प्यार में आकंठ डूब गए. प्रेम डगर पर साथसाथ चलते हुए ही उन्होंने जीवन भर एकदूसरे का साथ निभाने का फैसला किया.
कामिनी से शादी करने के बाद महेंद्र उस के साथ अमेरिका चला गया. वहां उस के करीबी रिश्तेदार रहते थे. अमेरिका जा कर महेंद्र ने कंप्यूटर इंजीनियरिंग का डिप्लोमा किया. लेकिन किन्हीं कारणों से वह कंप्यूटर इंजीनियर की डिग्री प्राप्त नहीं कर सका. उस के और कामिनी के 8 साल अमेरिका में ही गुजरे.
8 साल अमेरिका में रहने के बाद महेंद्र और कामिनी के मन और जीवन में पश्चिमी सभ्यता रचबस गई थी. उन के पास पैसे की कोई कमी नहीं थी. उन्होंने अमेरिका प्रवास के दौरान अपनी जिंदगी खूब शानोशौकत और ऐशोआराम से गुजारी थी. वहीं रहते वे 2 बच्चों के मांबाप बने.
महेंद्र और कामिनी को तो अमेरिका पसंद था लेकिन अमेरिका को वे दोनों पसंद नहीं आए. कारण क्या रहे, यह तो वही जाने, लेकिन दोनों को अमेरिका छोड़ कर स्वदेश लौटना पड़ा.
महेंद्र और कामिनी दिल्ली लौट तो आए, लेकिन यहां आ कर भी अपनी शाही आदतों को न बदल सके. उन्होंने वही ठाठ और ऐशोआराम बनाए रखने का प्रयास किया जो अमेरिका में थे. लेकिन आय के साधन न होने की वजह से खर्चे कैसे पूरे होते? फलस्वरूप हेराफेरी ही एक विकल्प बचा. फलस्वरूप महेंद्र और कामिनी ने हाईसोसाइटी की जिंदगी जीने की चाह में पतन की पगडंडी पर पांव रख दिया. महेंद्र ने हालांकि एक कंपनी में कंप्यूटर इंजीनियर की नौकरी जौइन कर ली थी लेकिन उस नौकरी से जितना पैसा मिलता था, उस से उन का 10 दिन का खर्च भी पूरा नहीं होता था.
लोगों को जाल में फंसाने के लिए महेंद्र के पास दिमाग था, वाकपटुता थी, विदेशी शैली में बोली जाने वाली धाराप्रवाह अंगरेजी थी. बचीखुची कमी कामिनी की खूबसूरती, चित्ताकर्षक व्यक्तित्व और बेलौस अदाएं पूरा कर सकती थीं. महेंद्र और कामिनी रहनसहन और अदाओं के हिसाब से हाईक्लास के लोग थे. अत: उन्होंने अपने लिए हाईक्लास में ही जगह बनानी शुरू की.
हाई सोसाइटी के बीच हाई स्टेटस मेंटेन कर के लोगों को आसानी से बेवकूफ बनाया जा सकता है, यह बात दोनों अच्छी तरह जानते थे. जब महेंद्र और कामिनी का उच्चस्तरीय सर्किल बन गया तो उन्होंने लोगों को विभिन्न तरीकों से ठगना शुरू कर दिया.
सागर दंपति अमेरिका में रहे थे. सोच में वे दिल्ली वालों से सैकड़ों कदम आगे थे. शारीरिक संबंध उन के लिए महज एंटरटेन की चीज थी. इसलिए महेंद्र और कामिनी दिल्ली में 2-3 सैक्स क्लबों के सदस्य बन गए थे ताकि अमीरजादों को अपनी खूबसूरती और अदाओं के जाल में फांस कर मनमाफिक उल्लू बनाया जा सके.
दरअसल, कोठियों, फार्महाउसों और दक्षिण दिल्ली के 1-2 गुमनाम होटलों में कई ऐसे क्लब चलते थे, जहां बिना जोड़े के कोई प्रवेश नहीं कर सकता था. इन क्लबों में पर्चियों या कार की चाबियों से लौटरी निकाल कर मौजमस्ती के लिए पत्नियां बदली जाती थीं.
जाहिर है ऐसे क्लबों में अत्याधुनिक या रिश्तों की जगह सैक्स को महत्त्वपूर्ण समझने वाले पतिपत्नी ही जाते थे. इन क्लबों में कितने ऐसे अविवाहित युवक भी मौजमस्ती के लिए जाते थे जो अपनी किसी गर्लफ्रैंड या कालगर्ल्स को साथ ले जाते थे. उस के बदले उन्हें किसी न किसी की पत्नी भोगने को मिल जाती थी. महेंद्र और कामिनी सेक्स क्लबों में ऐसे ही अमीरजादों को ढूंढते थे.
जब अमीर लोगों में पैठ बन गई तो महेंद्र सागर ने दिल्ली में अपना जाल फैलाने के बाद ठगी के कुछ और रास्ते निकालने शुरू किए. अपनी नई योजना के तहत उस ने और कामिनी ने दिल्ली और गुड़गांव के कई लोगों और कंपनियों से लाखों ठगे. यहां तक इन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय बैंकों को भी मोटा चूना लगाया. इसी पैसे से इन्होंने लग्जरी कार भी खरीदी और ठाठबाट भी बनाए.
जब दिल्ली और गुड़गांव के लेनदार महेंद्र को ज्यादा तंग करने लगे तो वह पत्नी और बच्चों के साथ चुपचाप गोवा चला गया.
गोवा पहुंच कर भी महेंद्र और कामिनी ने वही सब किया, जो वे दिल्ली में करते रहे थे. वहां उन्होंने अपनी ठगी का शिकार पर्यटकों को बनाना शुरू किया. पैसे वाले लोगों को फंसाने के लिए महेंद्र और कामिनी वहां भी सैक्स क्लबों के मेंबर बन गए.
दरअसल कामिनी इतनी सुंदर और विशिष्ट व्यक्तित्व की स्वामिनी थी कि एक बार बाहों में आने के बाद कोई भी उस से मिलन का मोह नहीं छोड़ सकता था. लेकिन जो एक बार उस के जाल में फंस जाता था, वह बिना सब कुछ लुटाए नहीं बच सकता था.
महेंद्र ने कितने ही लोगों को पत्नी की आड़ ले कर लूटा था. कभीकभी पैसा न होने की स्थिति में वह अपनी खूबसूरत पत्नी को पैसे के लिए किसी अमीर के पास भेजने से भी नहीं हिचकता था.
महेंद्र ने गोवा में किराए का मकान ले लिया था और उस में लौज चलाने लगा था. लौज क्या यह उस का और कामिनी का ठगी का अड्डा था, जहां वह अंजुना बीच, बामा बीच और बैगेटर बीच आदि से पैसे वाले पर्यटकों को फंसा कर लाते थे और इस ढंग से उस की जेब खाली कराते थे कि वह किसी से कह तक न सके.
जब अनुज और सोनम अंजुना बीच पर घूम रहे थे तो महेंद्र और कामिनी की नजर उन पर पड़ी. नवविवाहित जोड़ा था. ऊपर से सोनम भारीभरकम सोने के गहने पहने थी. महेंद्र और कामिनी ने आंखों ही आंखों में एकदूसरे को इशारा कर के बताया कि शिकार सामने है.
अनुज और सोनम पैर फैलाए आराम से रेत पर बैठे उछलउछल कर पर्यटकों का अभिनंदन करती लहरों को देख रहे थे. तभी वहां से गुजरते महेंद्र और कामिनी पल भर के लिए रुके. रूपसी कामिनी ने अनुज को बड़ी अजीब सी नजरों से इस तरह देखा, जैसे पहचानने का प्रयास कर रही हो. अनुज और सोनम को बड़ा अजीब लगा. वह कुछ कहतेपूछते इस से पहले ही कामिनी ने अनुज की ओर बढ़ते हुए मुसकरा कर पूछा, ‘‘आप को कहीं देखा है, लेकिन याद नहीं आ रहा. कहां से आए हैं आप?’’
कामिनी की बातों में शालीनता भी थी और अपनापन भी. अनुज ने सीधे स्वभाव कह दिया, ‘‘दिल्ली से.’’
दिल्ली का नाम सुन कर कामिनी के चेहरे पर खुशी के भाव झलकने लगे. वह अनुज और सोनम के पास रेत पर बैठते हुए बोली, ‘‘हम भी दिल्ली से ही हैं. परदेस में कोई अपना मिल जाए तो कितना अच्छा लगता है. आप लोग हनीमून मनाने आए हो न?’’
सोनम ने बिना कुछ कहे शरमाते हुए हां में गरदन हिलाई तो कामिनी ने अपनापन दर्शाते हुए कहा, ‘‘चलो, अच्छा हुआ आप लोग मिल गए. आप लोग तो पहली बार गोवा आए हो न?’’
‘‘हां, कल शाम को ही यहां पहुंचे हैं. गोवा वाकई बहुत खूबसूरत जगह है.’’ अनुज ने कहा तो कामिनी ने थोड़ी दूरी पर खड़े महेंद्र को आवाज दी, ‘‘ऐ…इधर आओ न. देखो, ये लोग दिल्ली से आए हैं.’’
फिर वह अनुज और सोनम की ओर देखते हुए बोली, ‘‘गोवा वाकई बहुत खूबसूरत जगह है. प्रेमियों का स्वर्ग कहा जाता है इसे. लेकिन पहली बार आने वाले लोग यहां के खूबसूरत नजारों का पूरा आनंद नहीं उठा पाते. मालूम नहीं होता न, कौन जगह कहां है. खैर, हम दिखाएंगे आप लोगों को गोवा की असली सुंदरता.’’
महेंद्र पास आ गया तो कामिनी ने उस से अनुज और सोनम का परिचय कराया. वह भी उन लोगों के पास बैठ गया.
कहीं दूरदराज की जगह पर अपने शहर, कस्बे या गांव का कोई व्यक्ति मिल जाए तो वाकई बहुत अच्छा लगता है. अनुज और सोनम को भी महेंद्र व कामिनी का मिलना अच्छा लगा. बातचीत शक्लोसूरत और व्यवहार से महेंद्र और कामिनी उच्चशिक्षा प्राप्त तथा किसी संपन्न परिवार के लग रहे थे.
बातों का दौर चला तो उन दोनों ने अनुज और सोनम से जरा सी देर में दोस्ती गांठ ली. कामिनी तो स्वयं को दिल्ली की बता कर अनुज को अपना भाई तक कह चुकी थी. महेंद्र को जब पता चला कि सोनम सिरसा से है तो उस ने खुद को हरियाणा का रहने वाला बताते हुए उसे बहन कहना शुरू कर दिया.
महेंद्र और कामिनी दिल्ली और हरियाणा के बारे में सब कुछ जानते थे. उन की बातों से अनुज और सोनम को पूरा विश्वास हो गया कि हरियाणा और दिल्ली से उन का गहरा संबंध है. जब उन दोनों ने अनुज और सोनम को यह बता कर कि वे लोग 8 साल अमेरिका में रह कर आए हैं, वहां की बातें सुनाईं तो वे और भी ज्यादा प्रभावित हुए. अमेरिका से उच्च शिक्षा की डिग्री ले कर आया कोई कंप्यूटर इंजीनियर इतना सरल हृदय और मिलनसार हो सकता है, ये बात वे सोच भी नहीं सकते थे.
उस दिन शाम तक का समय उन्होंने महेंद्र और कामिनी के साथ अंजुना बीच और गोवा की खूबसूरत वादियों में बिताया. सब ने एक अच्छे होटल में खाना भी साथसाथ खाया. शाम को जब दोनों जोड़े अलग हुए तो कामिनी शरमा कर मुसकराते हुए बोली, ‘‘आप लोगों के साथ मजा आ गया. इतने अच्छे दोस्त बड़े नसीब से मिलते हैं. रात को हम आप को डिस्टर्ब नहीं करना चाहते. लेकिन कल यहीं मिलना. गोवा की कुछ खास चीजें दिखाएंगे.’’
अगले दिन अनुज और सोनम महेंद्र सागर और कामिनी से फिर अंजुना तट पर मिले. चारों ने समुद्र की लहरों और बीच की रेत में घंटों मस्ती की. फिर किनारे के एक रेस्तरां में जा कर साथसाथ खाना खाया. उस समय अनुज और सोनम कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि इतने प्यार से पेश आने वाले और बातोंबातों में अपनों जैसी घनिष्ठता दिखाने वाले महेंद्र और कामिनी उन के लिए मौत का जाल बुन चुके हैं. वह खाना उन की जिंदगी का अंतिम आहार है और उन का हनीमून टूर चंद घंटों बाद मौत के सफर में बदलने जा रहा है.
खाना खाने के बाद वे चारों फिर बीच पर आ गए. अनुज और सोनम को गोवा के रहने वालों, वहां के रीतिरिवाजों और विदेशी सैलानियों की बातें बतातेबताते लगभग 3 बज गए. बातें चल ही रही थीं कि अचानक महेंद्र सागर कुछ सोचते हुए अनुज से बोला, ‘‘ये अपने ड्राइवर को किस बात की सजा दे रहे हो आप?’’
‘‘मतलब?’’ अनुज ने चौंकते हुए पूछा तो महेंद्र बोला, ‘‘मतलब यह कि आप लोग हनीमून पर आए हो, औफिस की ड्यूटी करने नहीं. ऊपर से हमारे जैसे निठल्ले दोस्त मिल गए. सुबह से दोपहर हो गई. दोपहर से शाम हो जाएगी और फिर रात. वक्त का पता तक नहीं चलेगा. ड्राइवर गाड़ी में बैठा कोसता रहेगा, आप लोगों को भी और हमें भी.’’
महेंद्र की बात सुन कामिनी खिलखिला कर हंस पड़ी. सोनम ने शरमा कर मुंह फेर लिया. अनुज के होठों पर भी भावभीनी मुसकराहट उभर आई. वह कुछ जवाब देता, इस से पहले ही महेंद्र उस की ओर देख कर बोला, ‘‘जाओ, गाड़ी वापस भेज दो. घूमने के लिए हमारे पास अपनी आल्टो है. हम आप को होटल में छोड़ कर आएंगे.’’
अनुज को महेंद्र की बात सही लगी. वह पार्किंग में गया और ड्राइवर को गाड़ी ले जाने को कह कर वापस लौट आया.
शाम को सूरज ढलने के बाद ज्योंज्यों रात का अंधेरा गोवा की धरती पर उतरने लगता है, त्योंत्यों वहां की रंगीनी और मौजमस्ती शबाब में आनी शुरू हो जाती है. होटल रेस्तरां, पबों, डिस्कोथेक और शराबखानों से ले कर समुद्र तटों तक को रंगीन रोशनियां अपनी बांहों में समेट लेती हैं. लगता है, जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो.
महेंद्र और कामिनी के साथ अनुज और सोनम का वह दिन खूब मस्ती में गुजरा था. दिन भर घूमते रहने की वजह से हल्कीहल्की थकान थी फिर भी उन का मन उन दोनों को छोड़ कर जाने का नहीं कर रहा था. रात को 8 बजे जब वे चारों अंजुना तट पर बैठे बातें कर रहे थे तो महेंद्र ने अनुज को उठाते हुए उस ओर इशारा कर के कहा जिधर समुद्र की लहरें शोर करते हुए किनारे से अठखेलियां कर रही थीं, ‘‘इन दोनों को छोड़ो, ये दोनों अपनी मस्ती में हैं. चलो, हम उधर बैठते हैं.’’
अनुज ने मुड़ कर मुसकराते हुए एक नजर सोनम पर डाली और महेंद्र के साथ उस ओर बढ़ गया, जिधर महेंद्र ने इशारा किया था. उसे क्या मालूम था कि वह अपनी सोनम को अंतिम बार देख रहा है.
अनुज को शोर मचाती लहरों के पास ले जा कर महेंद्र उस से बोला, ‘‘देखो ये लहरें कितनी मस्ती में झूम रही हैं. इन लहरों की शोखियों से अपने लिए थोड़ी सी मस्ती चुराने ही तो लोग गोवा आते हैं. हमारे देश की सब से मदमस्त जगह है गोवा. इस गोवा के भी 2 रूप हैं. एक वो जो तुम 2 दिन से देख रहे हो और एक वो जो अब मैं तुम्हें दिखाऊंगा.’’
‘‘क्या दिखाओगे?’’ अनुज ने मासूमियत से मुसकराते हुए पूछा तो महेंद्र शरारत भरी नजरों से उस की ओर देख कर बोला, ‘‘डिस्को. दिल्ली में भी गए हो डिस्को में?’’
‘‘नहीं.’’
‘‘जाते भी तो कोई फायदा नहीं था. दिल्ली के डिस्कोथेक मैं ने देखे हैं. वहां वह मस्ती और रंगीनी नहीं है जो होनी चाहिए.’’ महेंद्र जुबान से लक्ष्य पर बाण साधते हुए बोला, ‘‘गोवा के डिस्कोथेक की बात ही अलग है. रंगीन रोशनियों में नहाए देशीविदेशी जोड़ों को मदमस्त म्यूजिक की ताल पर थिरकते देखोगे तो लगेगा जैसे इंद्र के अखाड़े में आ गए हो. 15-16 साल से ले कर 25 तक हर उम्र की लड़कियां साथ देने के लिए मिल जाती हैं. देशी चाहो तो देशी और विदेशी चाहो तो विदेशी. बस बात इतनी सी है कि वहां बीवियों को साथ ले कर नहीं जा सकते.’’
‘‘नहीं, मैं सोनम को छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा. वैसे भी ऐसी जगहों में मेरी कोई रुचि नहीं है.’’ अनुज ने इनकार किया तो महेंद्र प्यार से उस का हाथ थामते हुए बोला, ‘‘क्या बच्चों वाली बातें करते हो यार. ऐसे मौके रोजरोज थोड़े ही आते हैं. …मुझे देखो, मैं गोवा में रहते हुए भी नहीं जा पाता. तुम्हारे बहाने मुझे भी मौका मिल जाएगा. थोड़ी देर की तो बात है. ये लोग यहीं बैठी रहेंगी. वैसे भी जब 2 औरतें आपस में बात करती हैं तो उन्हें पता नहीं रहता कि एक घंटा गुजरा या चार?’’
‘‘नहीं सोनम बुरा मान जाएगी.’’ अनुज ने कहा तो महेंद्र उस के कान के पास मुंह ले जा कर बोला, जैसे कोई गोपनीय बात कर रहा हो, ‘‘बुरा तो कामिनी भी मान जाएगी.
लेकिन हम उन्हें पता ही नहीं चलने देंगे.’’
अनुज सोनम को छोड़ कर जाना नहीं चाहता था. लेकिन महेंद्र सागर ने उसे अपनी बातों के जाल में ऐसा उलझाया कि वह चाह कर भी इनकार नहीं कर सका. वह मान गया तो महेंद्र बोला, ‘‘तुम यहीं ठहरो, मैं उन लोगों से बहाना बना कर आता हूं.’’
‘‘बहाने की क्या जरूरत है, मैं सोनम से कह देता हूं थोड़ी देर में लौट आएंगे.’’ अनुज ने कहा तो महेंद्र बोला, ‘‘और अगर साथ चलने की जिद पकड़ ली तो सारा मजा किरकिरा नहीं हो जाएगा? …नहीं मेरे दोस्त, तुम यहीं ठहरो, मैं उन दोनों को पट्टी पढ़ा कर आता हूं.’’
अनुज आगे कुछ बोलता इस से पहले ही महेंद्र कामिनी और सोनम की ओर बढ़ गया. वे दोनों बातों में मशगूल थीं. महेंद्र ने उन से कहा, ‘‘हम लोग एक घंटे में लौट कर आते हैं, तब तक तुम लोग यहां का नजारा देखो.’’
उसी वक्त उस ने कामिनी को विशेष इशारा करते हुए कहा, ‘‘कामिनी, ध्यान रखना सोनम जरा भी बोर न होने पाए.’’
इस के बाद महेंद्र अनुज को वहां से एक बीयर बार में ले गया और उस के मना करतेकरते भी जिद कर के उसे बीयर पिला दी. अनुज ने पहले कभी बीयर नहीं पी थी. एक बीयर में ही उसे नशा हो गया. बीयर पिलाने के बाद महेंद्र अनुज को एक डिस्कोथेक में ले गया. वहां उन दोनों ने एकडेढ़ घंटा गुजारा. जब नशा हलका होने लगा तो अनुज को सोनम की याद आई. उस ने महेंद्र से वापस चलने को कहा तो वह बोला, ‘‘तुम 5 मिनट ठहरो, मैं आता हूं.’’
अनुज वहीं खड़ा रहा और महेंद्र बाहर चला गया. थोड़ी देर बाद जब वह वापस लौटा तो उस के हाथों में बीयर की 2 बोतलें थीं. वह एक बोतल अनुज को देते हुए बोला, ‘‘नशा उतरने लगा है. एकएक बीयर और पीते हैं. उस के बाद थोड़ी देर यहां रुक कर वापस चलेंगे.’’
अनुज पर थोड़ाबहुत नशा हावी था. उसी की झोंक में महेंद्र के कहने से वह बीयर पी गया. उसे क्या पता था कि उस बीयर में उस की मौत का सामान है. बीयर पीने के बाद जैसे ही अनुज को नशा चढ़ना शुरू हुआ, महेंद्र उसे डिस्कोथेक के बाहर ले आया और कार में बिठा दिया. वहां से वह अनुज को अंजुना तट की जगह कोलबा बीच पर ले गया.
कोलबा बीच 9 बजे के बाद सुनसान हो जाता है. अनुज नशे में भी था और जहर भी अपना असर दिखाने लगा था. महेंद्र उस से बोला, ‘‘कैसे मर्द हो यार, जरा सी बीयर पी कर झूमने लगे. इतने नशे में सोनम और कामिनी के सामने जाना ठीक नहीं है. यह कोलबा बीच है. यहां रोशनी में समुद्र की लहरों में नहाने का मजा ही कुछ और है. चलो, थोड़ी देर नहाते हैं. नहाने से नशा उतर जाएगा. इस के बाद वापस चलेंगे.’’
अनुज नशे में तो था ही. उसे महेंद्र की बात सही लगी. उस के कहने पर उस ने उस का दिया हुआ स्विमिंग सूट पहन लिया और उस के साथ झूमती हुई समुद्र की लहरों में उतर गया. महेंद्र सागर अपनी योजना के अनुरूप स्विमिंग सूट पहले ही साथ लाया था.
महेंद्र अपनी योजना के अनुसार अनुज को कोलबा बीच पर समुद्र की उछलती लहरों में ले गया और उस के नशे का लाभ उठा कर उसे डुबो कर मार डाला. इस तरह अनुज को ठिकाने लगा कर महेंद्र जब अंजुना बीच पर कामिनी और सोनम के पास लौटा तो रात के सवा 11 बज चुके थे. सोनम काफी परेशान थी. कामिनी ने नाटकीय अंदाज में महेंद्र को डांटते हुए पूछा, ‘‘कहां गए थे तुम लोग? और अनुज कहां है?…सोनम कब से परेशान हो रही है.’’
‘‘परेशान मत हो.’’ महेंद्र मुसकराते हुए बोला, ‘‘सुनोगी तो तुम भी खुश हो जाओगी और सोनम भी. मैं इन लोगों के ठहरने का इंतजाम कर के आ रहा हूं. अब ये हमारे साथ रहेंगे, 2 दिन. कल का जाना कैंसल. इन्हें मुंबई से शिरडी और महाबलेश्वर जाना था. वहां का प्रोग्राम गोवा में एडजस्ट हो गया. अनुज ने मुंबई और दिल्ली फोन कर के बता दिया है.’’
‘‘वाव…’’ कामिनी खुश होते हुए बोली, ‘‘अनुज कहां है?’’
‘‘अनुज मेरे साथ था. वह हमारा इंतजार कर रहा है. हम लोग जरा डिस्कोथेक में रुक गए थे. मैं ने कहा भी, पर वह बोला थोड़ी देर और ठहरो. देर हो रही थी, सो मैं उसे छोड़ कर इधर आ गया. वह थोड़ी देर में यहीं आ जाएगा. चलो, तब तक होटल से इन लोगों का सामान ले आते हैं. अनुज ने कहा है, होटल का बिल चुका कर बता देना कि हम जा रहे हैं.’’
सोनम को अजीब भी लगा और गोवा में 2 दिन रुकने की बात सुन कर कुछकुछ अच्छा भी. लेकिन यह अनुज का फैसला था और वह वहां था नहीं, इसलिए वह कह भी क्या सकती थी.
कामिनी और महेंद्र सोनम को साथ ले कर होटल पहुंचे और होटल का बिल चुकाने के बाद अनुज और सोनम का सारा सामान आल्टो में रख कर लौट आए. सोनम ने होटल कर्मचारियों को बता दिया कि उन्हें दिल्ली के कुछ दोस्त मिल गए हैं, अब वे उन्हीं के साथ रहेंगे.
महेंद्र और कामिनी सोनम को साथ ले कर काफी देर इधरउधर घुमाते रहे. इसी बीच कामिनी ने एक जगह कार से उतर कर आइसक्रीम खरीदी और सोनम वाली आइसक्रीम में जहर मिला दिया. आइसक्रीम खाने के बाद सोनम पर जहर का असर होने लगा.
सोनम को आइसक्रीम खिलाने के बाद कामिनी और महेंद्र अंजुना तट पर एक जगह एकांत में पहुंचे. तब तक सोनम पर जहर पूरी तरह असर कर चुका था. सुनसान जगह कार रोक कर कामिनी ने सोनम के कपड़े उतारे और उसे स्विमिंग सूट पहना दिया. इस के बाद उन्होंने अर्द्धबेहोशी की हालत में उसे उठा कर समुद्र में फेंक दिया.
इस तरह अनुज और सोनम को ठिकाने लगाने के बाद महेंद्र और कामिनी उन का सामान ले कर अपने घर चले गए. बाद में समुद्र की लहरों में लुढ़कती हुई सोनम और अनुज की लाशें किनारे आ लगी थीं. अगले दिन दोनों लाशें अलगअलग थानों की पुलिस को मिल गई थीं.
उधर महेंद्र और कामिनी ने सोनम और अनुज के सामान से मिले रुपए और अन्य सामान अपने पास रख लिया और उन के लाखों के गहने बेच दिए.
बाद में जब गोवा पुलिस को पता चला कि मृतक अनुज और सोनम के साथ अंतिम दिन महेंद्र सागर और कामिनी को देखा गया था तो उस ने उन की तलाश शुरू की. इस पर महेंद्र और कामिनी गोवा छोड़ कर दिल्ली आ गए. काफी समय वे लोग दिल्ली में रहे और फिर मेरठ चले गए थे.
महेंद्र और कामिनी से विस्तार से पूछताछ करने के बाद मेरठ पुलिस ने उन की गिरफ्तारी की सूचना गोवा पुलिस को दे दी. गोवा पुलिस मेरठ आ कर उन दोनों को ट्रांजिट वारंट पर गोवा ले गई.—कथा एक सत्य घटना पर आधारित. Goa Honeymoon Murder
— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.
— 2014 में प्रकाशित






