Varanasi Fake ID Crime. जयमंगल बिंद को नईनई प्रेमिकाएं बनाने का शौक था. इसी शौक के चलते उस ने अपने बदन पर 27 प्रेमिकाओं के नाम गोदवा रखे थे. अपनी प्रेमिकाओं को खुश रखने के लिए वह चोरी किया करता था.
रात के दस बजने वाले थे. वाराणसी जनपद के सिगरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली नगर निगम चौकी के प्रभारी सबइंसपेक्टर बसंत कुमार एसआई चंद्रकेश शर्मा और 2 सिपाहियों गामा यादव व बाबूलाल के साथ शिवपुरवा तिराहे के पास मौजूद थे. उसी समय एक मुखबिर ने आ कर बताया कि इलाके में पिछले कुछ महीनों से मोबाइल और लैपटाप वगैरह की जो चोरियां हुई हैं, उन का चोर चोरी का सामान बेचने के लिए खरीदार से संपर्क करने के लिए आने वाला है.
चौकीप्रभारी सबइंसपेक्टर बसंत कुमार के लिए सूचना काफी महत्त्वपूर्ण थी. मुखबिर से कुछ जरूरी जानकारी लेने के बाद उन्होंने उस चोर को पकड़ने के लिए व्यूह रचना तैयार कर अपने साथी पुलिस वालों को सतर्क कर दिया.
मुखबिर को उन्होंने छुप कर खड़ा होने को कह दिया था. थोड़ी देर बाद मुखबिर ने सनबीम स्कूल की ओर से पैदल आ रहे 2 युवकों की ओर इशारा कर दिया. उन दोनों की पहचान कराने के बाद मुखबिर वहां से चला गया.
सबइंसपेक्टर बसंत कुमार और उन के साथी चौकन्ने हो गए. दोनों युवकों में से एक के पास एक काले रंग का बड़ा सा बैग था जिसे वह पीठ की तरफ टांगे हुए था. दोनों युवक जैसे ही रेलवे कालोनी जल विहार मोड़ के पास पहुंचे सबइंसपेक्टर बसंत कुमार ने उन दोनों को रुकने का आदेश दिया. लेकिन पुलिस को देख कर वे दोनों तेजी से विपरीत दिशा की ओर भागने लगे. लेकिन पहले से तैयार पुलिस टीम ने दौड़ कर दोनों को पकड़ लिया.
पुलिस के शिकंजे में फंसते ही दोनों युवक गिड़गिड़ाए, ‘‘सर, आप हम लोगों को क्यों पकड़ रहे हैं, हम ने क्या किया है?’’
‘‘अपराध नहीं किया, तो फिर भागने की जरूरत क्यों पड़ गई?’’
‘‘साहब, हम डर गए थे कि कहीं आप हमें किसी झूठे मुकदमे में न फंसा दें.’’
‘‘तुम्हें क्या लगता है कि पुलिस वाले यूं ही राह चलते लोगों को फंसा देते हैं. खैर, अपना बैग चेक कराओ.’’ कह कर बसंत कुमार ने सिपाही गामा यादव को आदेश दिया, ‘‘इन का बैग चेक करो.’’
‘‘साहब, बैग में कपड़ेलत्तों के अलावा कुछ नहीं है.’’ एक युवक ने कहा तो बसंत कुमार ने उसे डांटा, ‘‘अगर आपत्तिजनक कुछ नहीं है, तो घबरा क्यों रहे हो?’’
सबइंसपेक्टर चंद्रकेश शर्मा ने युवक की पीठ पर टंगा काले रंग का बैग जबरदस्ती ले कर खोला तो उस में कुछ लैपटाप और नए मोबाइल सेट के डिब्बे दिखे. बैग में मोबाइल सेट और लैपटाप देखते ही बसंत कुमार समझ गए कि शिकार जाल में फंस चुका है.
बसंत कुमार ने बैग वाले युवक का नाम पूछा तो उस ने अपना नाम जयमंगल बिंद निवासी शिवपुरवा बताया. उस के साथी का नाम गुडलक गुप्ता था. वह सिगरा थाना क्षेत्र की महमूरगंज रोड स्थित संपूर्णनगर कालोनी में रहता था. विस्तृत पूछताछ के लिए दोनों युवकों को हिरासत में ले कर चौकी प्रभारी बसंत कुमार अपनी टीम के साथ सिगरा थाने आ गए.
सिगरा थाने में जयमंगल बिंद से विस्तृत पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि उस के बैग में सारा सामान चोरी का है. पुलिस को उस के बैग से 3 लैपटाप, 10 मोबाइल सेट, रितेश नाम से एक वोटर आईडी के अलावा 1560 रुपए और 1 किलो 100 ग्राम चरस मिली. जबकि गुडलक गुप्ता की तलाशी में उस की पैंट की जेब से प्लास्टिक की थैली में रखी 240 ग्राम चरस मिली.
जयमंगल बिंद और गुडलक गुप्ता से पूछताछ चल ही रही थी तभी गश्त पर गए थानाप्रभारी शिवानंद मिश्र थाने लौट आए. उन्हें जब पता चला कि पिछले दिनों इलाके में हुई चोरी की घटनाओं में शामिल 2 चोर पकड़े गए हैं, तो वह भी पूछताछ में शामिल हो गए. जयमंगल बिंद से बरामद रितेश नाम से जारी वोटर आईडी को देखने पर पता चला कि उस पर फोटो जयमंगल का लगा था. इस का मतलब उस ने फरजी नाम से आईडी बनवा रखी थी.
थानाप्रभारी शिवानंद मिश्र ने इस बारे में जयमंगल से जब अपने तरीके से पूछताछ की तो उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने रितेश नाम से फर्जी वोटर आईडी बनवाई थी, ताकि होटल वगैरह में ठहरने के लिए उस आईडी का इस्तेमाल कर के अपना असली पहचान छिपा सके.
पूछताछ के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि वह शिवपुरवा (सिगरा क्षेत्र) स्थित अपने पैतृक घर में न रह कर पिछले तीन सालों से अपनी प्रेमिका पत्नी के साथ पड़ोसी जनपद भदोही के गोपीगंज थाना क्षेत्र स्थित खमरिया में किराए का मकान ले कर रह रहा था. जयमंगल ने गुडलक गुप्ता को अपना दोस्त बताया. जयमंगल पहले ही स्वीकार कर चुका था कि उस के बैग से बरामद सामान अलगअलग जगहों से चोरी किया गया था. चरस के बारे में उस का कहना था कि नशे के लिए चरस का इस्तेमाल वह खुद करता है.
पूछताछ चल ही रही थी तभी थानाप्रभारी शिवानंद मिश्र की नजर जयमंगल के हाथों पर पड़ी. उस के हाथों पर 2-3 लड़कियों के नाम गुदे हुए थे. एक साथ 2-3 लड़कियों के नाम हाथों पर गुदे देख शिवानंद मिश्र ने इस बारे में जयमंगल से पूछा. उस ने जो कुछ बताया उसे सुन कर न सिर्फ थानाप्रभारी बल्कि वहां मौजूद सभी पुलिस वाले आश्चर्यचकित रह गए.
जयमंगल बिंद ने बताया कि उस के हाथ पर ही नहीं, बल्कि शरीर के विभिन्न हिस्सों पर उस ने पच्चीसों लड़कियों के नाम गोदवाए हुए हैं. जयमंगल की टीशर्ट को पेट के ऊपर तक उठा कर देखा गया तो उस के सीने और पीठ पर दर्जनों लड़कियों के नाम गुदे मिले. दोनों हाथ, छाती और पीठ पर जिन लड़कियों के नाम गुदे थे, वे सब जयमंगल की प्रेमिकाएं थीं.
पूछताछ में पता चला कि जयमंगल बिंद को नईनई लड़कियों से देस्ती करने का शौक था. वह उन से दोस्ती ही नहीं करता था बल्कि उन से जिस्मानी संबंध भी बनाता था. आर्थिक रूप से कमजोर घर की लड़कियों से जानपहचान बढ़ा कर उन से दोस्ती करना उस का शगल था. इस के लिए वह उन्हें उन की पसंद और जरूरत के मुताबिक तोहफे देता था. इतना ही नहीं जिन लड़कियों से वह दोस्ती करता था गाहेबगाहे उन के परिवार की भी आर्थिक मदद कर के परिवार वालों की नजरों में शरीफजादा बन जाता था. इसी वजह से परिवार वाले जयमंगल के साथ अपनी लड़की के घूमनेफिरने पर ज्यादा बंदिशें नहीं लगाते थे.
लड़कियों को इंप्रेस करने के लिए शुरूशुरू में जयमंगल उन का नाम अपने बदन पर गुदवा लेता था. लेकिन जब समय के साथ प्रेमिकाओं की संख्या बढ़ने लगी तो बदन में लड़कियों का नाम गुदवाना उस का शौक बन गया. पुलिस के समक्ष जयमंगल ने खुलासा किया कि अब तक वह 27 प्रेमिकाओं के नाम अपने बदन पर गुदवा चुका है.
जिन लड़कियों को किसी कारणवश वह छोड़ देता था या फिर लड़की ही उस से किनारा कर लेती थी, उस लड़की का नाम वह अपने बदन से मिटा देता था.
नाम मिटाने के लिए वह उसे ब्लेड से खुरचने के साथसाथ कई बार वह गुदे हुए नाम को जला देता था. जयमंगल के हाथों में 3-4 जगहों पर जले के निशान भी दिखाई दिए, जिस के बारे में उस ने पुलिस को बताया कि जली हुई जगह पर उस की जिन प्रेमिकाओं के नाम गुदे थे, अब उन से उस का कोई रिश्ता नहीं रहा. इसलिए उस ने उन के नाम भी अपने बदन से मिटा दिए.
पुलिस की माने तो जयमंगल अब तक 30 से अधिक लड़कियों को अपनी प्रेमिका बना चुका था. जिन में से 2 दर्जन से अधिक प्रेमिकाओं के नाम उस ने अपने बदन पर भी गुदवाए थे. अपनी प्रेमिकाओं में से ही एक गुडि़या से उस ने 3 साल पहले एक मंदिर में शादी कर ली थी. फिलहाल वह उसी के साथ रह रहा था.
पूछताछ के दौरान चौंकाने वाली एक बात यह भी पता चली कि जयमंगल एक रईस खानदान का लड़का था. किशोरावस्था में उस के कदम बहक गए और ज्यादा से ज्यादा लड़कियों से दोस्ती करने की आदत ने उसे चोरी करने पर मजबूर कर दिया.
पुलिस की मानें तो बनारस के शिवपुरवा नगर निगम इलाके में जयमंगल का बहुत बड़ा पुश्तैनी मकान है, इस मकान के अलावा भी शहर के कई इलाकों में उस परिवार के कई मकान हैं जिन्हें उन लोगों ने किराए पर उठा रखा है. लेकिन जयमंगल की गलत हरकतों की वजह से परिवार वाले पिछले 5-6 सालों से उसे पैसा नहीं देते थे.
जयमंगल खुद भी परिवार वालों से किसी तरह की आर्थिक मदद लेने के बजाय चोरी कर के अपनी जरूरतें और शौक पूरा करने का आदी हो चुका था.
जयमंगल ने पुलिस को यह भी बताया कि वह चोरी की ज्यादातर घटनाओं को खुद ही अंजाम दिया करता था. हां, कभीकभार वह किसी जरूरतमंद दोस्त को चोरी में जरूर शामिल कर लेता था ताकि उस की मदद हो सके. चोरी के लिए कई बार वह होटलों में भी ठहरता था. फरजी आईडी उस ने इसीलिए बनवा रखी थी.
पुलिस ने जयमंगल बिंद के पास से जो 10 मोबाइल सेट बरामद किए थे उन में से दो मोबाइलों की चोरी की रिपोर्ट सिगरा थाने में पहले से ही दर्ज थी. थाने में दर्ज मोबाइल चोरी की रिपोर्ट के अनुसार चोरी का माल उस के पास से बरामद हो गया था.
पुलिस ने जयमंगल के विरुद्ध भादंवि की धारा 419, 420, 468, 467, 471, 41, 411, 414 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया. इस के अलावा उस के पास से बरामद 1 किलो 100 ग्राम चरस के लिए एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18/20 के अंतर्गत अलग से मुकदमा दर्ज किया गया. जयमंगल के साथी गुडलक गुप्ता के पास से भी 240 ग्राम चरस बरामद हुई थी इसलिए उस के खिलाफ भी एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18/20 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया.
जयमंगल और गुडलक गुप्ता की गिरफ्तारी 17 जुलाई, 2014 को हुई थी. अगले दिन 18 जुलाई को दोनों को बनारस के नगर पुलिस अधीक्षक सुधाकर यादव ने एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर दोनों आरोपियों को मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किया.
जयमंगल ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उस ने जो भी चोरियां की थीं वह अपनी माशूकाओं को गिफ्ट देने और उन्हें खुश करने के लिए की थी. इस के पहले भी वह 3-4 बार जेल जा चुका था और जब भी बाहर आता था अपने पुराने धंधे में लग जाता था. पुलिस ने दोनों को वाराणसी के जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. Varanasi Fake ID Crime
— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.
— 2014 में प्रकाशित






