Delhi Nurse Murder Case. नर्स निर्मला का मुकदमा लड़तेलड़ते एडवोकेट विश्वबंधु की उस से नजदीकी हो गई, लेकिन उसे यह पता नहीं था कि निर्मला ने उस के साथ हमेशा के लिए रहने के ख्वाब पाल रखे हैं. निर्मला ने अपने ख्वाबों को हकीकत में बदलने की जिद की तो…  

निर्मला देवी दिल्ली में स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में नर्स थी. वह मूल रूप से हरियाणा के सोनीपत जिले के बरौना गांव की रहने वाली थी. पिता की मौत हो चुकी थी. घर पर मां और भाईबहन थे. उन से मिलने वह हर शनिवार दिल्ली से अपने गांव चली जाती थी. लेकिन 20 सितंबर, 2014 को वह गांव नहीं पहुंची तो छोटे भाई आनंद कुमार ने निर्मला को फोन किया. आनंद कुमार खरखौदा में स्थित एक बैंक में औफिसर हैं. आनंद कुमार ने उस का फोन नंबर मिलाया लेकिन घंटी बजने के बाद भी निर्मला ने फोन नहीं उठाया.

आनंद कुमार ने सोचा कि वह शायद किसी काम में व्यस्त होगी इसलिए उस ने थोड़ी देर बाद बहन को फिर फोन किया. इस बार भी निर्मला के फोन की घंटी बज रही थी लेकिन वह फोन नहीं उठा रही थी. आनंद कुमार ने ऐसा कई बार किया. कई बार फोन करने के बाद भी निर्मला ने फोन नहीं उठाया तो आनंद ने यह बात अपनी मां को बताई. बेटी फोन क्यों नहीं उठा रही, यह सोच कर मां भी परेशान हो उठीं. शाम तक निर्मला के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो घर के सभी लोग चिंतित हो गए.

निर्मला लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल परिसर में बने जिस फ्लैट में रहती थी, वह आनंद कुमार ने देखा ही था, इसलिए बहन को देखने के लिए वह अपने दूसरे बहनोई को ले कर रात साढ़े 9 बजे के करीब उस के फ्लैट नंबर 108 पर पहुंच गए. यह फ्लैट तीसरी मंजिल पर स्थित था. फ्लैट के बाहर जो लोहे का दरवाजा लगा हुआ था उस की कुंडी बाहर से बंद थी.

आनंद कुमार ने कुंडी खोली तो दूसरे जाली वाले दरवाजे की कुंडी भी बाहर से बंद मिली. इस तरह कुंडी लगा कर वह कहां चली गई वह बुदबुदाने लगे. जालीदार दरवाजे की कुंडी खोल कर वह फ्लैट में दाखिल हुए. कमरे का बल्ब जल रहा था और कूलर भी चल रहा था लेकिन वहां निर्मला दिखाई नहीं दी. उन्हें कमरे का सामान बिखरा हुआ जरूर दिखाई दिया. यह देख कर आनंद कुमार की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. वह कमरे के बाद बालकनी में पहुंचे.

निर्मला वहां भी नहीं दिखी तो किचिन में देखने के बाद वह आवाज लगाते हुए बाथरूम की तरफ बढ़े. बाथरूम में घुप्प अंधेरा था. उन्होंने अपने मोबाइल फोन की रोशनी बाथरूम में डाली तो उन की चीख निकल गई. निर्मला औंधे मुंह वहां पड़ी थी.

उस का सिर पानी से भरी बाल्टी में डूबा हुआ था. इस के अलावा उस के सिर पर पानी से भरी एक टब रखी हुई थी और वह अर्द्धनग्नावस्था में थी. आनंद कुमार ने बहन को कई आवाजें दीं और उस के शरीर को हिलायाडुलाया. जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो वह समझ गए कि किसी ने बहन की हत्या कर दी है. यह देख कर आनंद कुमार और उस के बहनोई सकते में आ गए कि निर्मला के साथ यह सब किस ने किया है?

आनंद ने सामने के फ्लैट नंबर 107 में रहने वाले पवन को आवाज दे कर बुलाया और घटना के बारे में बताया. इस के बाद उन्होंने दिल्ली पुलिस के कंट्रोल रूम को खबर कर दी कि किसी ने उन की बहन को मार दिया है. घर पर मां भी निर्मला का इंतजार कर रही थीं. आनंद कुमार ने अपनी मां को भी फोन कर के बता दिया कि निर्मला को किसी ने मार दिया है. बेटी की हत्या की बात सुन कर मां भी दहाड़े मार कर रोने लगीं.

लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल मध्य जिला के आई.पी. एस्टेट थानाक्षेत्र में आता है. अस्पताल परिसर में एक पुलिस चौकी भी है. पुलिस कंट्रोल रूम से यह खबर अस्पताल की पुलिस चौकी और आईपी एस्टेट थाने को दे दी गई. सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज विवेक सिंह एएसआई तसबीर सिंह और हेड कांस्टेबल अजीत सिंह को ले कर फ्लैट नंबर 108 पहुंच गए. तब तक फ्लैटके बाहर आसपास के लोग भी इकट्ठे हो गए थे.

चौकी इंचार्ज विवेक सिंह ने देखा कि निर्मला देवी का सिर पानी से भरी बाल्टी में डूबा हुआ था. वह कुरती और पैंटी पहने हुए थी. उस की कुरती के साथ की सलवार बेड पर रखी हुई थी. घर में रखा सामान भी कमरे में इधरउधर पड़ा था.

उन्होंने पूरे हालात से थानाप्रभारी यशपाल सिंह को अवगत करा दिया. तो वह लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल की तरफ रवाना हो गए. नर्स निर्मला की हत्या की सूचना उन्होंने एसीपी सुकांत बल्लभ और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार को भी दे दी.

थोड़ी ही देर में थानाप्रभारी के अलावा जिले के अन्य पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए. मौके पर क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को भी बुला लिया. टीम ने मौके से कई महत्त्वपूर्ण सुबूत इकट्ठे किए. मौके का मुआयना करने के बाद पुलिस अधिकारियों को इस बात का तो पक्का विश्वास हो गया कि हत्यारा मृतक का परिचित ही रहा होगा क्योंकि दरवाजे की जांच करने के बाद यही लगा कि हत्यारे की क्वार्टर में फें्रडली एंट्री हुई थी.

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि क्या दिल्ली में अकेले रहने के दौरान निर्मला का किसी के साथ प्यार का कोई चक्कर तो नहीं चल रहा था? अगर ऐसा है तो क्या मर्डर में उसी प्रेमी का हाथ तो नहीं? क्योंकि बाथरूम में जिस तरह अर्द्धनग्नावस्था में उस की लाश मिली थी उस से यही संकेत मिल रहा था.

कमरे में जो सामान इधरउधर पड़ा हुआ था उस से साफ संकेत मिल रहे थे कि हत्या करने के बाद हत्यारे ने कोई चीज ढूंढ़ी हो. मृतका के भाई आनंद कुमार से पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ कर जानना चाहा कि उस की किसी से दुश्मनी वगैरह तो नहीं थी.

आनंद कुमार ने बताया कि निर्मला की वैसे तो किसी से दुश्मनी नहीं थी, मगर उस के पति से दहेज प्रताड़ना व प्रापर्टी हड़पने और तलाक का केस चल रहा था. वह यहां पर अकेली रहती थी. आनंद कुमार से प्रारंभिक पूछताछ करने के बाद पुलिस ने निर्मला देवी की लाश का पंचनामा तैयार कर के पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. इस घटना के बाद अन्य फ्लैट में रह रही नर्सों में भी भय व्याप्त हो गया.

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार ने हत्या के इस मामले को सुलझाने के लिए एसीपी सुकांत बल्लभ के निर्देशन में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में थानाप्रभारी यशपाल सिंह, अतिरिक्त थानाप्रभारी अशोक कुमार, एसआई विवेक सिंह, एएसआई तसबीर सिंह, विजेंद्र, हेडकांस्टेबल अजीत सिंह, कांस्टेबल अमित कुमार, किरन पाल आदि को शामिल किया गया.

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने हौजकाजी के थानाप्रभारी जरनैल सिंह और मध्य जिला के स्पेशल स्टाफ की टीम को भी इस मामले की जांच में लगा दिया.

जांच शुरू करते ही पुलिस टीम ने सब से पहले निर्मला के मायके वालों से ही पूछताछ की तो पता चला कि वह सन 2004 से अपने पति मेहरूलाल से अलग रह रही थी. उन दोनों का 14 साल का बेटा था, जो पिता मेहरूलाल के साथ ही रहता था.

उन के बयानों से यह बात निकल कर आई कि निर्मला के जीवन में कुछ न कुछ उथलपुथल थी. 18 सितंबर को निर्मला ने अपनी छोटी बहन नन्हीं देवी को फोन कर के बताया था कि उस की तबीयत ठीक नहीं है. वह जी.बी. पंत अस्पताल में इलाज कराने जा रही है. जिस विभाग में निर्मला की ड्यूटी थी, वहां से पता चला कि वह 18 और 19 सितंबर को अपनी ड्यूटी पर भी नहीं आई थी.

निर्मला के साथ काम करने वाली अन्य नर्सों ने बताया कि निर्मला का व्यवहार सामान्य रहता था. पड़ोसियों ने बताया कि वह किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखती थी और घर का दरवाजा भी अकसर बंद रखती थी.

निर्मला की लाश पर कुरती के अलावा केवल पैंटी थी. ऐसी हालात में महिला पति या प्रेमी के साथ ही रह सकती है. हो सकता है, दोनों में किसी बात को ले कर तकरार हुई हो. बाद में वह बाथरूम में नहाने गई होगी तभी उस के साथी ने उस की हत्या कर दी. पुलिस प्रेम प्रसंग और प्रापर्टी हड़पने के मामले को ध्यान में रखते हुए भी जांच कर रही थी.

निर्मला ने कुछ पैसे इकट्ठे कर के बाहरी दिल्ली के नरेला क्षेत्र में एक आवासीय प्लाट खरीदा था, जिस की कीमत अब काफी बढ़ चुकी है. इसलिए यह भी अनुमान लगाया जा रहा था कि किसी ने प्रापर्टी हड़पने के लिए उसे मार दिया हो.

निर्मला का पति मेहरूलाल सोनीपत के गन्नौर थाने के अंतर्गत पुगथला गांव में रहता था. यह काम उस के पति ने तो नहीं कर दिया, यह जानने के लिए पुलिस ने मेहरूलाल को थाने बुला कर पूछताछ की.

मेहरूलाल ने पुलिस को बताया कि सन 2004 से उस का निर्मला से कोई वास्ता नहीं है. वह कहां रहती है, क्या करती है इस से उसे कोई मतलब नहीं. उस की हत्या के बारे में भी उसे कोई जानकारी नहीं है.

निर्मला के पड़ोसियों से पुलिस ने पूछा. तो पता चला कि निर्मला के यहां एक आदमी आता था. वह आदमी कौन है यह तो पता नहीं लेकिन वह वकीलों की तरह काला कोट पहन कर आता था.

निर्मला अस्पताल में बने फ्लैट नंबर 108 में 7-8 महीने पहले ही आई थी. यहां आने से पहले वह अस्पताल के बराबर में मुस्कान हौस्टल में किराए पर रहती थी. हौस्टल में रहने वाले लोगों से बात की तो उन्होंने भी बताया कि निर्मला से मिलने एक वकील आता था. वह वकील कौन था, कहां रहता था, पुलिस को पता नहीं चला.

इस बारे में पुलिस ने एक बार फिर मृतका के भाई आनंद कुमार से बात की. बहन से मिलने कौन वकील जाता था इस की जानकारी आनंद कुमार को भी नहीं थी.

सघन तफ्तीश करते हुए 2 दिन बीत चुके थे, लेकिन पुलिस के हाथ ऐसा कोई क्लू नहीं मिल रहा था जिस से हत्यारे तक पहुंचा जा सके. पुलिस ने निर्मला के मोबाइल फोन की कालडिटेल्स निकलवाई.

काल डिटेल्स की जांच में पुलिस को एक फोन नंबर ऐसा मिला जिस पर निर्मला की काफीकाफी देर तक बातें होती थीं. जाहिर है वह शख्स निर्मला का कोई नजदीकी ही रहा होगा तभी तो वह उस से ज्यादा बातें करती थी. पुलिस ने उस फोन नंबर की छानबीन की तो पता चला कि वह हरियाणा के सोनीपत जिले के राठघना रोड निवासी विश्वबंधु का था.

पुलिस ने विश्वबंधु के बारे में गोपनीय रूप से जांच की तो पता चला कि वह एक वकील है जो हरियाणा की सोनीपत कोर्ट और दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट में प्रैक्टिस करता है. यह जानकारी मिलते ही जांच टीम चौंक गई कि निर्मला से उस के फ्लैट पर मिलने के लिए एक वकील जाता था. कहीं वो वकील विश्वबंधु ही तो नहीं है.

चूंकि विश्वबंधु एक वकील था इसलिए पुलिस बिना कोई ठोस सुबूत के उसे गिरफ्तार करने से कतरा रही थी. पुलिस नहीं चाहती थी कि वकील के गिरफ्तार करने पर कोई हंगामा खड़ा हो.

विश्वबंधु के बारे में सोनीपत और दिल्ली में जानकारी हासिल करने के बाद पुलिस ने 25 सितंबर, 2014 को उसे हिरासत में ले लिया. थाने ला कर उस से नर्स निर्मला देवी की हत्या की बाबत बात की तो उस ने बताया कि उस की हत्या से उस का कोई लेनादेना नहीं है.

थानाप्रभारी यशपाल सिंह ने उसे निर्मला के फोन की काल डिटेल्स दिखाते हुए पूछा, ‘‘तुम्हारी निर्मला से वक्त बेवक्त क्या बातें होती थीं?’’

‘‘निर्मला मेरी क्लाइंट थी. उस ने अपने पति के खिलाफ कोर्ट में जो केस डाल रखे थे, उन्हें मैं ही देख रहा था. उन के केसों के बारे में ही उस से बातें होती थीं.’’ एडवोकेट विश्वबंधु ने कहा.

‘‘जितनी देर तक तुम्हारी निर्मला से बातें होती थीं, मुझे नहीं लगता कि वह बातें केस के बारे में होती होंगी. मान भी लें कि तुम उस से केस के सिलसिले में बातें करते थे तो निर्मला के अलावा तुम्हारे और भी क्लाइंट हैं, क्या तुम उन से भी इतनी देर बातें करते हो?’’

‘‘यह जरूरी नहीं है कि सभी क्लाइंटों की समस्या एक जैसी हो. केस को ले कर निर्मला कभीकभी ज्यादा परेशान हो जाती थी तो वह मुझे फोन कर के अपनी परेशानी बता देती थी. इंसपेक्टर साहब इस से ज्यादा मुझे निर्मला से कोई मतलब नहीं था. आप मुझे इस मामले में बेजवह घसीट रहे हैं.’’ विश्वबंधु बोला.

‘‘वकील साहब, तुम भले ही झूठ बोलो लेकिन ऐसी कोई तो खास वजह है जिस से तुम निर्मला के घर आते थे, वहां रुकते थे.’’

‘‘ये आप क्या कह रहे हैं?’’

‘‘हमें तुम्हारे बारे में काफी जानकारी मिल चुकी है. इसलिए तुम हम से सच्चाई छिपाने की कोशिश मत करो. 17 सितंबर को तुम्हारी निर्मला से फोन पर आखिरी बार बात हुई थी. उस दिन के बाद  निर्मला की फोन पर किसी से बात नहीं हुई. अब बेहतर यही होगा कि वकील साहब तुम हकीकत खुद ही बता दो.’’

इतना सुनने के बाद विश्वबंधु खामोश हो गया. इंसपेक्टर यशपाल सिंह से इजाजत ले कर वह सिगरेट पीने लगा. कुछ ही देर में उस ने कई सिगरेट पी डालीं. उस समय वह काफी तनाव में दिख रहा था. थानाप्रभारी उस की बौडी लैंग्वेज देख कर सारा माजरा समझ रहे थे. उन्होंने भी उस से कुछ नहीं कहा. कुछ देर बाद विश्वबंधु को पुलिस के सामने मजबूरन स्वीकार करना पड़ा कि निर्मला देवी की हत्या उस ने ही की थी.

एडवोकेट विश्वबंधु से पूछताछ के बाद नर्स निर्मला देवी की हत्या की जो कहानी सामने आई वह इस प्रकार निकली.

निर्मला देवी हरियाणा के सोनीपत जिले के थाना खरखौदा के गांव बरौना के रहने वाले चंदर सिंह की बेटी थी. बताया जाता है कि अपनी 7 बहनों में वह मंझली थी. 7 बहनों के बीच एक ही भाई था आनंद कुमार.

चंदर सिंह एक संपन्न किसान थे. वह गांव में रहते जरूर थे लेकिन उन की सोच अन्य गांव वालों से अलग थी. उसी सोच की बदौलत उन्होंने अपने सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई.

निर्मला ने स्टाफ नर्स की पढ़ाई की. इस के बाद 1994 में दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में उस की नौकरी लग गई. बाद में उस के भाई आनंद कुमार की भी एक बैंक में अधिकारी के पद पर नौकरी लग गई.

लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में नौकरी लगने के बाद निर्मला अस्पताल के बराबर में ही स्थित मुस्कान हौस्टल में रहने लगी.

जैसेजैसे बच्चे सयाने होते गए, चंदर सिंह ने उन की शादी कर दी. 15 मार्च 1999 को उन्होंने निर्मला की शादी भी सोनीपत जिले के ही गन्नौर थाने के अंतर्गत स्थित गांव पुगथला के रहने वाले मेहरूलाल के साथ कर दी. शादी के कुछ दिनों बाद से ही निर्मला के पति से मतभेद शुरू हो गए. जिस की आंच उन के रिश्ते पर आनी शुरू हो गई. इस बीच निर्मला ने एक बेटे को जन्म दिया.

पति के साथ घरगृहस्थी चलने के उस ने मन में जो सपने संजोए थे, वह पारिवारिक तनाव की वजह से धूमिल होते दिख रहे थे. पति उस पर हाथ भी उठाने लगा था. निर्मला की बहन नन्हीं देवी का आरोप है कि मेहरूलाल निर्मला को दहेज के लिए प्रताडि़त करता था. 24 अगस्त, 2002 को भी इस ने निर्मला को इतनी बेरहमी से पीटा था कि उसे दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में भरती होना पड़ा था.

उस वक्त निर्मला गर्भवती थी. इस के बावजूद भी पिटाई करते समय पति का दिल नहीं पसीजा था. उस की हालत को देखते हुए डाक्टर ने उसे गर्भ गिराने और डेढ़ महीना पूरी तरह आराम करने की सलाह दी थी. अस्पताल में इलाज कराने के बाद निर्मला मायके चली गई. बाद में अपनी ड्यूटी पर जाने लगी.

ठीक होने के बाद निर्मला पति के साथ नहीं रहना चाहती थी लेकिन घरगृहस्थी न बिगड़े यही सोच कर घरवालों ने निर्मला को समझाबुझा कर पति के साथ भेज दिया लेकिन मेहरूलाल के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया.

नन्ही के अनुसार निर्मला के ससुराल वाले पैसों के लिए उसे फिर तंग करने लगे. 5 दिसंबर, 2003 को मेहरूलाल ने निर्मला को 2 लाख रुपए के लिए फिर पीटा. मजबूरी में उसे पति को 2 लाख रुपए देने पड़े थे.

मेहरूलाल जानता ही था कि निर्मला मोटी तनख्वाह पाती है. उस के मन में लालच भरा था. उस ने 50 हजार रुपए के लिए उस की 23 मार्च, 2004 को फिर पिटाई की. निर्मला को लगा कि पति सुधरने वाला नहीं है इसलिए इस के बाद उस ने पति से दूरी बना ली. वह फिर ससुराल नहीं गई.

बेटे को उस ने अपने साथ लाने की कोशिश की लेकिन पति ने बेटा उसे नहीं दिया. हालांकि इस बात को ले कर गांव में कई बार पंचायतें भी हुईं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

निर्मला ने सन 2005 में पति और अन्य ससुरालजनों के खिलाफ दिल्ली के नरेला थाने में भादंवि की धारा 406, 498ए के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस केस में मेहरूरलाल सहित 3 लोगों को जेल जाना पड़ा था. लेकिन एक महीने बाद ही वे जमानत पर बाहर आ गए.

अपना केस लड़ने के लिए निर्मला को एक वकील की जरूरत महसूस हुई तो एक जानकार ने सोनीपत के ही रहने वाले एडवोकेट विश्वबंधु से उस की मुलाकात कराई. विश्वबंधु सोनीपत और दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट में प्रैक्टिस करता था. विश्वबंधु के मार्फत ही निर्मला ने दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में       पति से तलाक लेने और बेटे को पति से उस की कस्टडी में दिलाने की एक अरजी दी.

केस न्यायालय में चलता रहा. कोर्ट ने और्डर दिया कि मेहरूलाल हर महीने के दूसरे इतवार को बेटे को उस की मां निर्मला से मिलवाएगा. कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए मेहरूलाल बेटे को निर्मला से मिलवाता रहा. जब भी तारीख पड़ती निर्मला वकील विश्वबंधु के साथ कोर्ट जाती थी.

पति से दूर रह कर निर्मला एकाकी जीवन बिता रही थी. कोर्ट में तारीख पर आतेजाते उस का झुकाव वकील विश्वबंधु की तरफ हो गया. फिर उन की आपस में दोस्ती हो गई. वह निर्मला के कमरे पर भी आने लगा. दोनों साथसाथ घूमतेफिरते थे. इसी बीच दोनों एकदूसरे के इतने नजदीक पहुंच गए कि उन के बीच अवैध संबंध कायम हो गए.

विश्वबंधु से हुई नजदीकी से निर्मला को एक सहारा मिल गया था. वह अपनी बाकी जिंदगी उसी के साथ गुजारने के सपने देखने लगी. वकील साहब का भी जब मन होता उस के कमरे पर मिलने के लिए पहुंच जाते थे. पिछले 7 सालों से उन के बीच इसी तरह के संबंध चलते रहे. बताया जाता है कि विश्वबंधु ने उस के साथ शादी करने का आश्वासन दिया था. निर्मला इसी भरोसे पर उसे अपना सब कुछ सौंपती रही.

विश्वबंधु के साथ शादी करने के हसीन सपने निर्मला ने अपने मन में सजा रखे थे. लेकिन पिछले साल नवंबर में निर्मला को जब पता लगा कि विश्वबंधु ने किसी और लड़की से शादी कर ली है, तो उसे बहुत बुरा लगा. उस ने विश्वबंधु से अपनी नाराजगी जाहिर की तब उस ने निर्मला को किसी तरह समझाबुझा दिया था.

निर्मला उस से शादी करने की जिद पर अड़ी थी, पर विश्वबंधु शादीशुदा था इसलिए वह उस से शादी नहीं करना चाहता था. उन दोनों के बीच इसी बात को ले कर तनाव बढ़ गया.

विश्वबंधु के सामने एक ही रास्ता था कि वह निर्मला से दूरी बना ले. यही सोच कर उस ने उस के पास आनाजाना भी कम कर दिया. तब निर्मला ने उसे धमकी दी थी कि यदि वह पहले की तरह ही उस के पास नहीं आएगा और शादी नहीं करेगा तो वह उस के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करा देगी. विश्वबंधु मुकदमेबाजी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहता था इसलिए मजबूरी में उस के पास आनेजाने लगा.

जब भी वह उस के पास आता निर्मला शादी का दबाव बनाती. इस तनाव से विश्वबंधु बहुत परेशान हो गया. समस्या से निजात पाने के लिए उस ने एक खौफनाक योजना बना ली. योजना के अनुसार उस ने 17 सितंबर, 2014 को निर्मला को फोन किया कि वह रात को उस के कमरे पर आएगा.

निर्धारित समय पर विश्वबंधु लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल परिसर में स्थित निर्मला के फ्लैट नंबर 108 पर पहुंच गया. वे कई दिनों बाद मिले थे इसलिए उन्होंने पहले मौजमस्ती की. इस के बाद निर्मला कुरती और पेंटी पहने ही नहाने के लिए बाथरूम में गई. विश्वबंधु को मौके का इंतजार था. निर्मला के बाथरूम में घुसते ही उस ने उस का सिर दीवार पर दे मारा.

प्रेमी की इस हरकत पर निर्मला भी चौंक गई लेकिन वह उस समय अपना बचाव भी नहीं कर सकी. दीवार में सिर लगते ही उस की आंखों के सामने अंधेरा छा गया, वह नीचे गिर गई. तभी विश्वबंधु ने उस का सिर पानी से भरी बाल्टी में डुबो दिया. उस ने सिर को तब तक दबाए रखा, जब तक उस की मौत न हो गई. इस के बाद उस ने पानी से भरी टब उस के सिर पर रख दी और कमरे का सामान इधरउधर बिखेर दिया ताकि मामला लूट का लगे.

निर्मला को ठिकाने लगाने के बाद विश्वजीत ने राहत की सांस ली. कमरे की लाइट और कूलर चालू हालत में छोड़ कर वह जालीदार और लोहे के दरवाजों की कुंडी लगा कर अपने घर चला गया.

एडवोकेट विश्वबंधु से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे निर्मला देवी (45) की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर तीस हजारी कोर्ट में महानगर दंडाधिकारी डा. जगमिंदर के समक्ष पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया. कथा लिखने तक विश्वबंधु की जमानत नहीं हो सकी थी. मामले की विवेचना इंसपेक्टर अशोक कुमार कर रहे हैं.    Delhi Nurse Murder Case

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. पात्र का नाटकीय रूपांतरण किया गया है.

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

— 2014 में प्रकाशित

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