Heart Touching Story in Hindi. आदिल जन्नत से प्यार करता था तो जन्नत आदिल से. वह जन्नत से दिल की बात इसलिए नहीं कह सका, क्योंकि उस का चेहरा तेजाब से जला हुआ था. जन्नत भी आदिल से दिल की बात इसलिए नहीं कह पाई थी, क्योंकि वह उस की नौकरानी थी.  

आदिल दुनिया के हर सुखदुख से अलग पूरे दिन अपने फार्महाऊस की दुनिया में डूबा रहता था. फार्महाऊस में ही उस ने छोटा सा, लेकिन बहुत ही सुंदर घर बना रखा था, जिस के अगलबगल फूलों का बहुत सुंदर बगीचा था. जिस में सीजन के हिसाब से हमेशा फूल खिले रहते थे. फार्महाऊस के बाहर के लोग आदिल को एक ऐसी मूर्ति के रूप में जानते थे, जो हमेशा लबादे से ढकी रहती थी. किसी ने उस का चेहरा नहीं देखा था कि वह कैसा है.

आदिल के अलावा उस फार्महाऊस में उस के 3 नौकर रहते थे, जिन में एक अधेड़ था, जिसे सब चाचा कहते थे. उस के अलावा 2 लड़के मीना और फत्तो थे.

आदिल को भी सभी घरेलू काम आते थे. उसे खेतीकिसानी ही नहीं, जानवरों के बारे में भी अच्छीखासी जानकारी थी. इसलिए उस ने अपने फार्महाऊस में तमाम जानवर भी पाल रखे थे.

आदिल के बाहर के सारे काम उस के नौकर करते थे. चाचा की पत्नी मर चुकी थी. एक बेटा था, जो विदेश में रहता था. उस की शादी हो चुकी थी और पत्नी उस के साथ ही रहती थी. कभीकभार फोन कर के वह अब्बा का हालचाल ले लेता था.

दूसरा नौकर मीना साधारण शक्लसूरत का बहुत ही सीधासादा लड़का था. उस के लिए परेशानी यह थी कि आदिल से उसे जो कुछ भी मिलता था, वह उस की सौतेली मां छीन लेती थी. चाचा ने उस की शादी कराने की बहुत कोशिश की थी, लेकिन लड़कियों ने उस के मुंह पर ही मना कर दिया था.

तीसरे नौकर फत्तो की पत्नी उस से परेशान रहती थी. ऐसा क्यों था, न कभी फत्तो ने किसी से कुछ बताया था, न पत्नी ने. कुछ दिनों बाद फत्तो की पत्नी ने जबरदस्ती उस से तलाक ले कर मनपसंद लड़के से शादी कर ली थी. इस के बाद फत्तो का औरतों से इस कदर विश्वास उठ गया था कि वह मीना को भी समझाने लगा था कि वह बिलकुल शादी न करे.

आदिल कभी दिन में फार्महाऊस से बाहर नहीं निकलता था. अगर उस का कभी घूमने का मन होता तो वह रात में कार से निकलता था. उस के तीनों नौकरों के अलावा कोई अन्य आदमी उस के फार्महाऊस में नहीं घुस सकता था. इसलिए वह गांव वालों के लिए अंजान था तो गांव वाले उस के लिए अंजान थे. लेकिन यह सभी को पता था कि यह फार्महाऊस आदिल का है और वह कभीकभार रात को कार से निकलता है.

उस रात सभी चैन से सो रहे थे कि अचानक आधी रात के बाद आदिल के फार्महाउस की डोरबेल बजी. घंटी बजते ही आदिल उठ कर बैठ गया. दोबारा घंटी बजी तो उस ने नौकरों की घंटी बजाई. नौकरों के आतेआते तीसरी बार घंटी बज गई.

चाचा आदिल की ओर भागा तो मीना और फत्तो गेट की ओर. गेट पर एक औरत खड़ी रो रही थी. दोनों गेट पर पहुंचे तो औरत ने रोते हुए कहा, ‘‘मेरा एक ही बेटा है, उस की तबीयत बहुत खराब है. गांव के डाक्टर का कहना है कि अगर उसे शहर के अस्पताल नहीं ले जाया गया तो सुबह तक वह मर जाएगा. अपने साहब से कहो कि वह अपनी गाड़ी से उसे शहर के अस्पताल पहुंचा दें. उन का यह उपकार मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगी.’’

आदिल बरामदे में खड़ा उस औरत की बातें सुन रहा था. चाचा भी उस के पीछे खड़ा था. उस ने उस औरत को पहचान लिया था. चूंकि मीना और फत्तो दूसरे गांव के थे, इसलिए वे उसे रोक रहे थे. लेकिन वह औरत हटने का नाम नहीं ले रही थी. वह जोरजोर से रोते हुए कह रही थी कि अपने साहब से कहो कि मेरे बेटे को बचा लें.

चाचा गेट की ओर बढ़ा, तभी पीछे से आदिल ने कहा, ‘‘गैराज की चाबी लाओ. उस के बेटे को अस्पताल पहुंचाना होगा.’’

सुबह चाचा ने आदिल को बताया, ‘‘साहब, उस औरत का नाम सुगरा है. उस का वही एक ही बेटा है, जबकि बेटियां 4 हैं. पता नहीं गरीबों को ही ज्यादा बेटियां क्यों पैदा होती हैं? लड़के के पास कोई कामधंधा नहीं है. इसलिए सुगरा का गुजरबसर बड़ी मुश्किल से होता है. पता नहीं, वह बेटे का इलाज कैसे करा रही है.’’

‘‘पता किया था, उस के बेटे की तबीयत अब कैसी है?’’ आदिल ने पूछा.

‘‘जी डाक्टर कह रहा था कि चिंता की कोई बात नहीं है. जल्दी ही ठीक हो जाएगा. साहब बीमारी भले ही चिंता वाली न हो, लेकिन जिस के यहां खाने को न हो, वह इलाज कहां से कराएगी.’’ चाचा ने कहा.

आदिल ने नाश्ता कर के हाथ धोते हुए कहा, ‘‘फत्तो के हाथों खाने का कुछ सामान और रुपए भिजवा दो.’’

इतना कह कर आदिल ने चाचा को कुछ रुपए दिए और अपने कमरे में चला गया.

इस के बाद भी आदिल सुगरा के बेटे का हालचाल लेता रहा. जब उसे पता चला कि वह ठीक हो कर घर आ गया है तो उसे सुकून सा महसूस हुआ.

अस्पताल से आने के बाद सुगरा आदिल से मिलना चाहती थी. इस के लिए वह उस के फार्महाऊस पर पहुंची. लेकिन चाचा ने उसे अंदर नहीं आने दिया. बाहर से ही लौटा दिया. जब कई दिनों तक उसे इसी तरह वापस किया जाता रहा तो एक दिन सुगरा खीझ कर बोली, ‘‘तुम अपने साहब से मुझे मिलने क्यों नहीं देते? मैं उस फरिश्ते से मिलना चाहती हूं, जिस ने मेरे बेटे की जान ही नहीं बचाई, बल्कि दुख की इस घड़ी में मेरी मदद भी की है.’’

‘‘कह दिया न साहब किसी से नहीं मिलते. उन्होंने किसी को भी अंदर आने से मना किया है.’’ चाचा थोड़ा गुस्से से बोला.

‘‘मैं आज उस फरिश्ते से मिल कर ही जाऊंगी.’’ सुगरा जिद पर अड़ गई. उस दिन उस के साथ उस की बेटी जन्नत भी आई थी.

‘‘सुगरा, मेरा समय मत बरबाद कर. साहब ने पगडंडियों की घास काटने को कहा है, मुझे उसे काटना है.’’

‘‘साहबजी का काम मैं खुद करूंगी. लाओ, हंसिया दो, मैं काटती हूं घास. उधर तो साहब आएंगे, वहीं मिल लूंगी साहब से.’’

‘‘हां, क्यों नहीं, उधर ही हंसिया रखा है.’’ चाचा के मुंह से निकल गया.

यह बात चाचा ने सुगरा से जान छुड़ाने के लिए कही थी. लेकिन सुगरा चाचा को धकिया कर अंदर आ गई. चाचा उसे अंदर जाते देखता रहा.

चाचा से बात करते हुए सुगरा को बेटी जन्नत का खयाल ही नहीं रहा. चाचा भी सुगरा से उलझा था, इसलिए उस ने भी उस की ओर ध्यान नहीं दिया. उसी बीच मौका पा कर वह फार्महाऊस के अंदर घुस गई थी.

पगडंडी के किनारे लगे सुंदर फूलों को देखती हुई वह हैरानी से आगे बढ़ती गई. वह फार्महाउस में बने घर के सामने पहुंची तो उसे खयाल आया कि वह कहां आ गई? वहां उसे कोई दिखाई नहीं दिया तो वह घबरा गई.

इधरउधर देखते हुए वह पलटी तो सामने एक आदमी खड़ा दिखाई दिया. जन्नत उसे देख कर सहम सी गई तो वह आदमी भी उसे देख कर घबरा गया. उस ने कंधे पर रखी चादर को जल्दी से इस तरह सिर पर डाल लिया कि उस का चेहरा छिप गया. जन्नत को पता था कि यहां चाचा, फत्तो और मीना के अलावा आदिल साहब रहते हैं. वह समझ गई कि यही आदिल साहब हैं. इसलिए उस ने आगे बढ़ कर कहा, ‘‘आप ही आदिल साहब हैं ना?’’

आदिल ने जान छुड़ाने के लिए एकदम से कहा, ‘‘हां, मैं ही आदिल हूं. बताओ क्या काम है?’’

‘‘साहबजी, काम कुछ नहीं है, हम आप का शुक्रिया अदा करना चाहते थे. लेकिन आप के आदमी हमें अंदर आने ही नहीं दे रहे थे. आप ने हमारे भाई को बचा कर हम पर जो एहसान किया है, हम उसे इस जनम तो भुला नहीं सकते. और हां, आप ने हमें जो पैसे दिए हैं, उन्हें लौटाने के लिए हमारे पास पैसे नहीं हैं. इसलिए हम उस के बदले आप का काम कर के उसे अदा करना चाहते हैं. आप का इतना बड़ा घर है, फार्महाऊस है. आप हम लोगों से कोई भी काम करा सकते हैं.’’ जन्नत ने कहा.

आदिल जन्नत को वहां से जल्दी से जल्दी भगाना चाहता था, इसलिए उस ने कहा, ‘‘इस सब की कोई जरूरत नहीं है. जब तुम्हारा भाई कोई कामधंधा करने लगेगा तो मेरे पैसे वापस कर देना. हमारे यहां तुम लोगों के लिए कोई काम नहीं है.’’

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है साहबजी कि आप के यहां कोई काम न हो. हम लोग बहुत गरीब हैं. आप कोई भी काम दीजिए, हम कर देंगे. इसी बहाने हमारी मदद भी हो जाएगी और आप का कर्ज भी अदा हो जाएगा.’’ जन्नत ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए कहा.

आदिल ने जन्नत को गौर से देखा. वह काफी खूबसूरत थी. जवानी की दहलीज पर भी खड़ी थी. लेकिन उस की गरीबी ने इन दोनों ही चीजों पर कब्जा कर रखा था. उस की गरीबी पर उसे दया आ गई. उस ने कहा, ‘‘घर के काम कर लेती हो?’’

‘‘जी साहबजी, साफसफाई से ले कर खाना तक बना लेती हूं. लेकिन साहबजी खाना तो मैं वही बना सकती हूं, जो मेरे यहां बनते हैं. आप तो बड़े लोग हैं, आप लोगों के खाने भी अलग होते होंगे. पता नहीं, उन्हें बना भी पाऊंगी या नहीं?’’

‘‘मीना, तुम्हें सब सिखा देगा.’’ आदिल ने कहा.

इस के बाद सुगरा फार्महाऊस में काम करने लगी तो जन्नत घर में. जन्नत घर के काम करने के साथसाथ आदिल का भी खूब खयाल रखती थी. आदिल उस के सामने हमेशा अपने चेहरे को ढके रहता था.

एक दिन जन्नत आई तो उस का चेहरा उतरा हुआ था. देख कर ही लग रहा था कि वह कुछ देर पहले रोई थी. आदिल ने पूछा, ‘‘तुम रो कर आ रही हो?’’

‘‘वह मेरी बहन कल्लो है ना, उस से मेरी लड़ाई हो गई. उस ने घड़ा खुद तोड़ा और नाम मेरा लगा दिया. यही नहीं, यह देखो, मेरी चादर भी फाड़ दी.’’ अपनी चादर आदिल के सामने फैलाते हुए जन्नत ने कहा.

‘‘कोई बात नहीं, मैं तुम्हारे लिए नई चादर मंगवा दूंगा.’’ आदिल ने कहा.

‘‘साहबजी, आप मेरे लिए नई चादर मंगवाएंगे?’’ जन्नत खुश होते हुए बोली, ‘‘साहबजी, आप बहुत अच्छे हैं. चलूं, जल्दीजल्दी काम कर लूं, उस के बाद…’’

काम करते हुए बारबार जन्नत आदिल को ही देख रही थी. आदिल से नजर मिल जाती तो वह मुसकरा देती. जवाब में आदिल भी यह सोच कर मुसकरा देता कि नई चादर ने आज सचमुच इसे पागल कर दिया है.

काम खत्म कर के जन्नत आदिल के पास आ कर खड़ी हो गई. वह जानता था कि यह कोई ऊटपटांग बात करेगी, इसलिए उस ने उस पर ध्यान नहीं दिया. जब आदिल कुछ नहीं बोला तो जन्नत सिर झुकाए, पैर के अंगूठे से लाइन खींचती हुई बोली, ‘‘साहबजी, वह क्या है कि…’’

‘‘बोलो, क्या बात है, तुम्हें कुछ चाहिए क्या?’’ आदिल ने उस पर ध्यान दिए बगैर पूछा.

‘‘साहबजी, वह… अब मैं क्या करूं?’’ जन्नत मुंह में अंगुली डाल कर बोली.

आदिल ने उस की इस बात का कोई जवाब नहीं दिया तो जन्नत ने अपना मुंह उस के करीब ला कर कहा, ‘‘साहबजी, आप ने कहा था ना कि जो बात मैं किसी से न कर सकूं, आप से कर लूं. क्योंकि हम दोनों दोस्त हैं.’’

‘‘हां, कहा तो था. बोलो, क्या कहना है?’’ आदिल ने हैरानी से पूछा.

जन्नत कुछ देर तक उसे हैरानी से देखती रही. उस के बाद सकुचाते हुए बोली, ‘‘साहबजी, जो बात कहनी है, उसे तो बहनों से भी नहीं कह सकती. उन से पूछ भी नहीं सकती.’’

आदिल ने उस की ओर गौर से देखा तो उस ने सकुचाते हुए कहा, ‘‘साहबजी, आप शादी क्यों नहीं करते, कोई पसंद नहीं आती क्या?’’

जन्नत की इस बात पर आदिल सालों बाद खिलखिला कर हंसा. हंस लेने के बाद उस ने कहा, ‘‘भई, यह बात तो सचमुच बहनों से नहीं पूछी जा सकती.’’

जन्नत ने खुशी से सिर हिलाया तो आदिल ने आगे कहा, ‘‘पता नहीं जन्नत, कोई मुझे पसंद नहीं आती या मैं किसी को पसंद नहीं आता.’’

‘‘साहबजी, आप तो बहुत अच्छे हैं. आप को तो कोई भी पसंद कर सकती है. लगता है, आप को ही कोई पसंद नहीं आ रही.’’

‘‘सच कह रही हो. अभी तक मुझे कोई लड़की पसंद नहीं आई. पसंद आए भी कैसे, मैं ने कोई लड़की देखी ही नहीं. लेकिन अब एक लड़की अच्छी लगने लगी है. मेरे बारे में तो पूछ लिया, अब तुम बताओ, तुम्हें कोई पसंद है या नहीं?’’

‘‘साहबजी, अभी कुछ बरतन धोने हैं.’’ कह कर जन्नत अंदर भाग गई.

आदिल गुमसुम बैठा सोचने लगा. क्या वह उस के काबिल है, जो उस के बारे में सोच रहा है? यह एक तरह से लालच नहीं होगी? उस ने उस पर जो एहसान किए हैं, उस के बदले वह उस की जिंदगी बरबाद नहीं कर रहा? यह स्वार्थ होगा, इसलिए ऐसा ठीक नहीं है. एक तरह से यह उस के साथ अन्याय होगा. उस के साथ तो अन्याय हुआ है, अब दूसरे के साथ वही अन्याय करने जा रहा है.

आदिल इसी सोच में डूबा था कि कानों में आवाज पड़ी, ‘‘साहबजी.’’

उस ने पलट कर देखा, जन्नत बगल में खड़ी थी. आदिल उसे देख कर मुसकराया तो उस ने पूछा, ‘‘साहबजी, आप की वह कैसी है?’’

आदिल की नजरें उस के चेहरे पर जम गईं, ‘‘बहुत भोली है, ढेर सारी उल्टीसीधी बातें करती है.’’

जन्नत को लगा, साहबजी मजाक कर रहे हैं. वह इन्हीं की तरह पढ़ीलिखी और समझदार होगी. उसे सोच में डूबी देख कर आदिल ने पूछा, ‘‘अब तुम बताओ, तुम्हारा वह कैसा है?’’

आदिल की ओर देखते हुए जन्नत बोली, ‘‘बहुत समझदार है, ऊंचालंबा, हौलेहौले मुसकराता है,’’ इस के बाद पहाड़ की ओर इशारा कर के बोली, ‘‘वह पहाड़ है न साहबजी, उस के जैसा बड़ा, शांत और गुमसुम रहने वाला है.’’

दोनों ने एकदूसरे की ओर देखा, इस के बाद अपनेअपने काम में लग गए.

जन्नत रात में सपनों की जो दुनिया सजाती, सुबह आदिल को सुना देती. और वह जो सोचता, उसे बता देता. लेकिन अधिक दिनों तक यह सब आदिल से सहन नहीं हुआ. उसे यह बुरा लगने लगा कि वह अपनी खामोशी उस पर क्यों आजमा रहा है.

प्रेम का संबंध तो दिल से होता है और दिल बहुत अनोखी चीज है. उसे मनाने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है. उसे उस के दिल तक पहुंचने के लिए. अब उसे बता देना चाहिए कि वही उस का प्रेम है. लेकिन इस के लिए उसे उस के दिल में उतरना होगा. जिस के लिए अभी उसे बहुत कुछ करना होगा. यही सोचतेसोचते वह फोन के पास पहुंचा और अमेरिका का नंबर मिला दिया.

आदिल अमेरिका चला गया. जाने से पहले उस ने जन्नत से उस के उस प्रेमी के बारे में बहुत पूछा था, जिस के वह किस्से सुनाया करती थी. लेकिन अपने प्रेमी के बारे में बताने के बजाय जन्नत उसी से पूछने लगती थी कि वह किसे चाहता है. तब आदिल कहता, ‘‘आ कर बताऊंगा.’’

‘‘साहबजी, मैं भी तभी बताऊंगी.’’ जवाब में जन्नत कहती.

आदिल के जाने के बाद जन्नत परेशान रहने लगी. वह पागलों की तरह इधरउधर फिरती रहती. जब उस से रहा नहीं गया तो एक दिन चाचा को अकेला बैठा देख कर उस ने पूछा, ‘‘चाचा, साहबजी तुम्हें तो बता कर गए होंगे कि इस तरह एकदम से वह अमेरिका क्यों चले गए.’’

‘‘पता नहीं जन्नत, मुझे भी नहीं बताया. हो सकता है भाई के पास शादी के लिए गए हों.’’

जन्नत ने आंखें फाड़ कर चाचा की ओर देखा. इस के बाद उठी और पागलों की तरह फार्महाऊस के गेट की ओर भागी. चाचा उसे आवाजें देता रहा, मगर उसे तो जैसे होश ही नहीं था.

घर आ कर वह चारपाई पर गिर पड़ी और पूरा दिन रोती रही. रात को सिर दर्द का बहाना बना कर कुछ खायापिया भी नहीं. दिल टूटने का इतना शोर था कि उस शोर में उसे और कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था. रात में घुटन सी होने लगी तो वह सेहन में पड़ी चारपाई पर आ कर लेट गई. उस का दिल रो रहा था, आंखें बरस रही थीं. सामने अंधेरे में ऊंचा पहाड़ खड़ा था.

उस के दिल ने कहा, ‘अब क्यों रो रही है, किस ने कहा था कि पहाड़ की चोटी जैसे ऊंचे कद वाले आंदमी को अपना समझ ले. तू यह क्यों भूल गई कि उस की नौकरानी है. खैर, जब साहबजी किसी और से शादी कर सकते हैं, किसी और को पसंद कर सकते हैं तो तू भी तो किसी और से शादी कर सकती है?’

तभी उसे मीना का खयाल आया. खयाल भी आया तो उसी घर का. वह उछल पड़ी, ‘हां, मैं मीना से शादी करूंगी. लेकिन वह कितना बुरा लगता है, कैसे रहूंगी उस के साथ? साहबजी, आप मुझे मौत की ओर ले जा रहे हैं?’

दिल ने आगे कहा, ‘छोड़ जन्नत, किस साहबजी की बात करती है. घर की मालकिन नहीं, नौकरानी ही सही.’

इस के बाद वह अंदर आ कर सो गई. सुबह उस ने अपना फैसला सुनाया तो मां और बहनें हैरान रह गईं. एक ने कहा, ‘‘जन्नत हम इतने भी गएगुजरे नहीं कि मीना जैसे आदमी से मिन्नतें करें कि वह जन्नत को कुबूल कर ले.’’

जन्नत मुसकरा कर रह गई. उस ने यह भी नहीं बताया कि किस हालात में उस ने मीना से शादी का मन बनाया है. उस का सोचना था कि वह साहबजी के घर पलाबढ़ा है, इसलिए उस में साहबजी के घर की खुशबू आती होगी.

बेबे और भाई ने भी उसे समझाया. लेकिन जन्नत अपनी जिद पर अड़ी रही तो बेबे ने आदिल के घर जा कर चाचा से बात की. चाचा यह सोच कर खुश हो गया कि दोनों का घर बस रहा है.

रिश्ता तय हो गया. जन्नत को पता चला कि 2 हफ्ते बाद आदिल लौट कर आ रहा है तो उस ने कहा कि वह उसी दिन शादी करेगी, जिस दिन साहबजी आ रहे हैं. और हां, उन्हें इस शादी के बारे में बिलकुल न बताया जाए.

चाचा ने सोचा कि ठीक है. साहब सुन कर हैरान भी होगा और खुश भी. फत्तो और चाचा अपनी समझ के मुताबिक शादी की तैयारियां करने लगे.

जन्नत की बहनें पूछपूछ कर थक गईं कि वह उसी दिन शादी क्यों कर रही है, जिस दिन साहबजी आ रहे हैं? लेकिन उस ने कुछ नहीं बताया. मन ही मन बड़बड़ाई, ‘वह सोच रहे होंगे कि गोरी मेम लाएंगे तो जन्नत उसे देखेगी. मेरी शादी हो रही होगी तो देखना नहीं पड़ेगा. अगर वह शादी कर सकते हैं तो मैं भी शादी कर सकती हूं. मैं उसी दिन शादी करूंगी, जिस दिन वह आ रहे हैं.’

यह बड़बड़ाते हुए उस की आंखों से आंसू झरझर बह रहे थे.

शादी वाले दिन चाचा के लिए दोहरी परेशानी थी. एक तरफ बारात जानी थी तो दूसरी तरफ आदिल को लेने एयरपोर्ट भी जाना था. चाचा ने एयरपोर्ट जाते समय कहा था कि निकाह उस के आने के बाद ही होगा. लेकिन जन्नत नहीं मानी. चाचा के जाते ही उस ने मां से कहा, ‘‘अब देर किस बात की, बारात आ गई है तो निकाह करवा दो.’’

‘‘चाचा ने कहा है कि उस के आने के बाद निकाह किया जाए.’’ सुगरा ने कहा.

‘‘मैं किसी का इंतजार नहीं कर सकती. मेरा निकाह अभी करवाओ…’’

जन्नत की जिद के आगे सुगरा को झुकना पड़ा. निकाह हो गया. आदिल और चाचा पहुंचे तो फत्तो ने कहा, ‘‘चाचा, जन्नत ने इंतजार नहीं किया. उस ने जिद कर के निकाह कर लिया.’’

सुगरा ने आदिल को देखा तो भाग कर उस के पास पहुंची. लेकिन यह क्या, आज उस के चेहरे पर चादर नहीं थी. वह उसे हैरानी से देखती रह गई. वह कुछ कहती, जन्नत की बहन ने उस के पास आ कर कहा, ‘‘अम्मी, विदाई से पहले जन्नत साहबजी से मिलना चाहती है.’’

गरीब नमक बख्शवाना चाहती होगी, यह सोच कर सुगरा आदिल को उस कमरे में ले आई, जहां जन्नत दुलहन बनी बैठी थी.

आदिल को देख कर जन्नत खड़ी हो गई. कुछ देर तक उसे देखती रही. उस के बाद बोली, ‘‘साहबजी, मैं ने आप के उस चेहरे को देखा था. मुझे पता चल गया था कि जब आप अपने मामा के कालेज में पढ़ते थे, तब रसायन विज्ञान की प्रयोगशाला में चक्कर आने से गिर गए थे. वहां रखी तेजाब की बोतल आप के चेहरे पर गिर गई थी, जिस से गरदन तक आप का चेहरा खराब हो गया था.

‘‘उस की वजह से लोग आप का मजाक उड़ाते थे और आप से नफरत करते थे. लेकिन उस हालत में भी आप जन्नत को जरा भी बुरे नहीं लगते थे. जन्नत को आप से प्यार हो गया था. मुझे आप के उस चेहरे से नहीं, आप की भलमनसाहत, गुणों और नेकनीयती से प्यार हुआ था. लेकिन आप भी अन्य लोगों की ही तरह निकले. चेहरा ठीक कराने अमेरिका चले गए. शायद आप भी उन्हीं झूठे लोगों से रिश्ता जोड़ना चाहते हैं, जो आप से नफरत करते थे.’’ इतना कह कर जन्नत रोते हुए वहां से भाग कर दूसरे कमरे में चली गई.

आदिल गुमसुम खड़ा था. उस के चेहरे पर दुख का साया साफ झलक रहा था. शायद वह कहना चाहता था, ‘‘जन्नत, तुम ने अपनी तो कह दी, मेरी भी सुन लेती.’’

लेकिन जन्नत तो वहां से चली गई थी. विदाई का समय था. शायद अब मीना उसे उस से भी ज्यादा प्यारा हो गया था. विदाई के समय उस हुजूम में आदिल एक बार फिर तनहा रह गया था, बिलकुल तनहा. शायद इसी तरह तनहाई में उसे रहना था.  Heart Touching Story in Hindi

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