Matrimonial Scam. लोगों ने ठगी के नायाब तरीके ढूंढ लिए हैं. वह इतने शातिर तरीके  से शिकार को जाल में फंसाते हैं कि फंसने वाले को इस का अहसास बहुत देर से होता है. 48 वर्षीय अनुज संतोष तिवारी उर्फ अनुज कुमार त्रिवेदी मैट्रिमोनियल साइट से धनाढ्य विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को अपने जाल में फांस कर उन से शादी करता था. इस के बाद वह उन से लाखों रुपए और ज्वैलरी ले कर फरार हो जाता था. इस तरह वह 25 से अधिक शादियां कर चुका था. उस के बेटे प्रखर ने भी सीतापुर के विधायक की बेटी को अपने पे्रमजाल में फांस कर शादी कर ली. देश का सब से बड़ा मैट्रिमोनियल ठग आखिर कैसे आया पुलिस गिरफ्त में?

दोपहर का वक्त था. उत्तर प्रदेश के जनपद सीतापुर के अपर जिलाधिकारी (एडीएम) आयुष चौधरी अपने कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे. मेज पर फाइलों का ढेर था. कर्मचारी अपनेअपने काम में व्यस्त थे, तभी कार्यालय के बाहर अचानक हलचल हुई. बैठक खत्म हो चुकी थी. एक कर्मचारी ने आ कर बताया, ”सर, 4 महिलाएं आप से मिलना चाहती हैं. मामला काफी गंभीर बता रही हैं.’’

आयुष चौधरी ने उन्हें अंदर बुलाने को कहा. दरवाजा खुला और वे महिलाएं एकएक कर के कमरे में दाखिल हुईं. उन के चेहरे पर चिंता, गुस्सा और बेबसी साफ दिखाई दे रही थी. आयुष ने सामने रखी कुरसियों की ओर इशारा करते हुए कहा, ”आप लोग बैठिए और बताइए, समस्या क्या है?’’

चारों में से सब से आगे बैठी महिला ने कांपती आवाज में कहा, ”साहब, हम चारों अलगअलग जगहों से आई हैं, लेकिन हमारी कहानी एक ही आदमी से जुड़ी हुई है.’’

कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया. दूसरी महिला ने अपनी बात आगे बढ़ाई, ”सीतापुर के पास एक कस्बे में रहने वाले एक व्यक्ति ने हम से अलगअलग समय पर शादी की. उस ने प्यार और भरोसे की बातें कर के हमें अपने जाल में फंसाया. फिर हमारे घरमकान बिकवा दिए और जेवरात भी ले लिए.’’

तीसरी महिला ने कहा, ”हमें लगा था कि वह हमारा पति है और हमारे साथ जिंदगी बिताएगा, लेकिन शादी के बाद उस का व्यवहार बदल गया. फिर एक दिन वह गायब हो गया.’’

चौथी महिला की आंखों में आंसू थे. उस ने कहा, ”साहब, हम काफी समय से उस की तलाश में थे, बड़ी मुश्किल से हमें उस के घर का पता मिला है. अचानक उस के घर पर हम चारों लगभग एक साथ ही पहुंच गए. तब हमें पता चला कि हम चारों का पति यही एक व्यक्ति है. जिस से स्पष्ट हुआ कि उस ने हमें शादी का झांसा दे कर ठगा है. हमें उम्मीद थी कि वहां से कम से कम उस का पता मिल जाएगा, लेकिन उस की बहन ने हमें घर के अंदर तक नहीं जाने दिया. उस ने यह भी नहीं बताया कि वह कहां है.’’

आयुष चौधरी ने चारों की बातें ध्यान से सुनीं.

एक जैसी थी कहानी

उस कमरे के भीतर 4 अलगअलग शहरों से आई महिलाओं की एक जैसी कहानी ने माहौल बदल दिया. चारों के पास शादी की अपनीअपनी यादें थीं, अपनेअपने सपने थे और अपनेअपने टूटे हुए भरोसे की कहानी थी.

अब सवाल केवल उस कथित ठग व्यक्ति को खोजने का नहीं था. सवाल यह भी था कि 4 अलगअलग महिलाओं को एक ही तरीके से प्रेम, शादी और भविष्य के सपने दिखा कर उन के साथ कथित धोखा देने वाले ने और कितनी महिलाओं को इस तरह ठगा है?

एडीएम आयुष चौधरी ने कर्मचारियों से कहा कि सभी महिलाओं की शिकायत अलगअलग दर्ज की जाए और उन के पास मौजूद दस्तावेज, शादी के प्रमाण, संपत्ति की बिक्री से संबंधित कागजात तथा जेवरात से संबंधित उपलब्ध साक्ष्य लिए जाएं.

उन्होंने शांत स्वर में कहा, ”आप लोग घबराइए नहीं. शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी. जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर काररवाई होगी.’’

चारों महिलाएं एकदूसरे का चेहरा देखने लगीं. उन्हें पहली बार लगा कि शायद उन की आवाज किसी जिम्मेदार अधिकारी तक पहुंची है. दरअसल महिलाएं डीएम डा. राजा गणपति आर. से मिल कर अपनी आपबीती सुनाना चाहती थीं, लेकिन उन से मुलाकात नहीं हो सकी.

इस के बाद एडीएम आयुष चौधरी ने महिलाओं की शिकायतें सुनीं और उचित कारवाई का भरोसा दिया. चारों महिलाएं  औफिस से बाहर निकलीं.

उन्हें स्थानीय न्यूज चैनलों व समाचार पत्रों के पत्रकारों और यूट्यूबरों ने घेर लिया. कैमरों की लाइटें जल उठीं और माइक उन की ओर बढ़ गए.

उन में से एक महिला प्रतिभा ने अपनी साड़ी का पल्लू संभालते हुए गहरी सांस ली और बात करनी शुरू की.

”हमारी मुलाकात 2016 में एक नामी वैवाहिक वेबसाइट के जरिए हुई थी,’’ प्रतिभा ने भारी आवाज में कहा, ”दैनिक अखबार में भी इस का वैवाहिक विज्ञापन छपा था. सब कुछ बहुत ही औपचारिक और पारदर्शी लग रहा था. परिवार वालों की रजामंदी से 2017 में एक मंदिर में हमारी शादी हो गई. वह खुद को रियल एस्टेट का एक बड़ा कारोबारी बताता था.’’

प्रतिभा कुछ पलों के लिए रुकी, जैसे उस पुराने धोखे को याद कर रही हो.

”शादी के कुछ समय बाद उस ने रोनाधोना शुरू कर दिया. कहने लगा कि उस का बिजनैस बहुत मंदा चल रहा है और उसे भारी नुकसान हो गया है. तुम्हारे पास इतनी सारी रकम है मुझे 11 लाख रुपए दे दो. काम शुरू होते ही सारी रकम आप की वापस कर दी जाएगी. उस पर भरोसा कर के मैं ने अपनी जमापूंजी में से उसे 11 लाख रुपए दे दिए.

”फिर अचानक 2-3 दिन बाद ही वह गायब हो गया. उस का फोन भी बंद आने लगा. अब उस को कहां तलाश करती. जिस मकान में बहू बना कर मुझे ले कर गया था, वह उस ने पहले ही बेच दिया था और फिर मेरे घर आ कर घरजमाई बन कर रहने लगा था. मैं ने उस का कोई  और घरबार ठिकाना देखा ही नहीं था. कुछ समय बाद जब मुंबई क्राइम ब्रांच के लोग हमारे घर आए और उस की तसवीर दिखा कर पूछताछ करने लगे, तब मेरे पैरों तले से जमीन खिसक गई. क्राइम ब्रांच की पुलिस ने मुझ से ऐसे सवाल किए, जिस की जानकारी उस की पत्नी होते हुए भी मुझे नहीं थी.’’

”क्या आप को पहले से कोई शक था?’’ एक पत्रकार ने माइक आगे करते हुए पूछा.

”नहीं, बिलकुल नहीं!’’ प्रतिभा ने जवाब दिया, ”क्राइम ब्रांच से ही हमें पता चला कि ठगी करना ही उस का असली पेशा है. उस ने सिर्फ मेरे साथ नहीं, बल्कि 5-6 और महिलाओं से इसी तरह फरजी शादी कर के लाखों रुपए ऐंठे थे. जब वह पकड़ा गया, तब जा कर उस की असली पहचान सामने आई.’’

बाप नंबरी बेटा 10 नंबरी

पत्रकारों में फुसफुसाहट बढ़ गई. प्रतिभा ने आगे बताया, ”उस ने मुझे अपना नाम अजय सिंह बताया था और कहता था कि वह महाराष्ट्र का रहने वाला है. उस ने यह भी बताया था कि उस का एक बेटा है, जिस का नाम अविरल है.

”बेटा भी अपने पिता के इस पूरे जाल में बराबर का हिस्सेदार था. वह हमारे घर आताजाता था, हमारी शादी में शरीक हुआ और घर के तमाम मांगलिक कार्यक्रमों में शामिल होता रहा. लेकिन जब पुलिस ने परदाफाश किया, तब पता चला कि बाप का असली नाम अनुज त्रिवेदी और बेटे का नाम प्रखर त्रिवेदी है. दोनों सीतापुर के चंद्रावल गांव के रहने वाले हैं.’’

एक महिला ने बताया कि मेरे साथ भी उस ने शादी की. मेरे 26 लाख रुपए ले कर भाग गया. उस ने बताया कि मैं मुंबई का रहने वाला हूं और रियल एस्टेट का काम करता हूं. मेरी बीवी की गले के कैंसर से 2014 में मृत्यु हो गई है. मेरे परिवार में कोई नहीं है. बस एक छोटा भाई है, जिस का नाम अभय गुप्ता है. महिला और अशोक द्विवेदी का वैवाहिक जीवन सामान्य से थोड़ा बेहतर ही गुजर रहा था. मैं अपने पहले पति की यादों को भी भूलने लगी थी. मुझे विधवा होने का भी कोई अहसास नहीं हो रहा था.

मेरी पहली शादी प्रयागराज में हुई थी. पति बहुत हैंडसम और सरल स्वभाव के थे. बहुत अच्छा बिजनैस था. मुझे भरपूर प्यार और सारी सुविधाएं उपलब्ध थीं. एक दिन फैक्ट्री से घर लौटते समय उन की कार एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई, जिस में उन की मौत हो गई. शादी के कुछ महीनों बाद ही मेरा सुहाग उजड़ गया. मेरे मातापिता एक अच्छे कारोबारी हैं. अच्छा कारोबार है. उन्होंने मुझे कभी किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होने दी. मेरे अकाउंट में भी भरपूर पैसे डालते रहते थे. मेरे पास काफी मात्रा में आभूषण थे, लेकिन मेरी उदासी और परेशानी को मेरे फेमिली वाले अच्छी तरह से समझ रहे थे.

वे अखबार और सोशल मीडिया में मेरे लिए रिश्ता तलाश कर रहे थे. उन की नजर एक ऐसे विज्ञापन पर पड़ी, जिस में लिखा था कि विधवा और तलाकशुदा भी मंजूर है. इस व्यक्ति से कौंटेक्ट हुआ, उस ने अपना नाम अशोक द्विवेदी बताया. घर वालों ने रिश्ते की बात आगे बढ़ाई, धीरेधीरे अशोक द्विवेदी से मेरी मुलाकात होने लगी. प्यार भरी बातें भी होती थीं. कह रहे थे, ”मैं ने जिंदगी में बहुत कुछ देखा है, लेकिन तुम्हारे मिलने के बाद मुझे लगता है कि अब मेरी जिंदगी पूरी हो गई है.’’

मुझे उन की बातों पर विश्वास हो गया. मैं ने भी घर वालों को उन से शादी करने की स्वीकृति दे दी. सादा समारोह में विवाह संपन्न हुआ और जीवन की रेलगाड़ी अपनी पटरी पर सामान्य रूप से चलने लगी. कभी मुंबई की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर घूमना, कभी पुणे की शामों में घंटों बातें करना और कभी किसी शांत जगह बैठ कर भविष्य के सपने बुनना.

वह कहता, ”उम्र सिर्फ एक संख्या है, असली जिंदगी तो अब शुरू हुई है.’’

इन शब्दों ने मेरे भीतर जैसे जवानी का तूफान खड़ा कर दिया. मुझे लगने लगा कि शायद जिंदगी ने उसे दोबारा प्यार करने का मौका दिया है.

लेकिन उसे क्या पता था कि जिस व्यक्ति की बातों ने उस के भीतर जवानी का तूफान पैदा किया है, वही तूफान एक दिन उस के सपनों को भी उड़ा ले जाएगा.

प्रेम की मीठी बातें, शहरों की सैर और भविष्य के सुनहरे सपने, सब कुछ इतना खूबसूरत था कि उस के पीछे छिपे सच पर शक ही नहीं हुआ. और जब सच सामने आया, तब उसे समझ आया कि कभीकभी सब से खूबसूरत सपने ही सब से दर्दनाक धोखे की शुरुआत बन जाते हैं.

वह मुसकरा कर कहता, ”अगर बेटा हुआ तो उस का नाम तुम रखना और बेटी हुई तो नाम मैं रखूंगा.’’

मैं इन छोटीछोटी बातों को अपने आने वाले जीवन की सच्ची तसवीर समझने लगी.

फंसी थीं कई महिलाएं

जांच करने पर पता चला कि उस की  जिंदगी में केवल वही एक महिला नहीं थी. कथित तौर पर प्रयागराज की एक महिला से भी वह इसी तरह प्रेम और शादी का रिश्ता बना चुका था. जिस व्यक्ति को वह अपना जीवनसाथी समझ रही थी, वह कथित तौर पर अलगअलग शहरों की महिलाओं के सामने अलगअलग कहानियां सुनाता रहा था.

कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. बाद में जानकारी मिली कि महाराष्ट्र और प्रयागराज के अलावा 2 अन्य महिलाएं भी उस के संपर्क में आई थीं. चारों की कहानी अलग थी, लेकिन कथित तौर पर तरीका एक जैसा था. पहले पहचान, फिर प्रेम, शादी का भरोसा और आखिर में आर्थिक या भावनात्मक धोखे. एक दिन वह अचानक गायब हो गया. उस समय तक वह लाखों रुपए उस के हवाले कर चुकी थी.

फोन बंद हो गया. घर का दरवाजा बंद मिला और मेरे पास रह गए तो केवल शादी की कुछ तसवीरें, अधूरे सपने और अनगिनत सवाल. वह महाराष्ट्र से हजारों किलोमीटर दूर सीतापुर इसलिए आई थी कि उसे अपना घर मिलेगा.

लेकिन उसे मिला एक ऐसा रिश्ता, जिस में प्रेम की शुरुआत तो थी, मगर अंत में भरोसे का टूटना था. काश! मीठी बातों के पीछे छिपे सच को पहचान पाती. काश! शादी से पहले उस के अतीत की पूरी कहानी जान पाती.

कभीकभी प्यार की सब से बड़ी ताकत उस के वादे नहीं, बल्कि वह विश्वास होता है, जो इंसान उन वादों पर कर बैठता है.

सीतापुर की शांत हवाओं में उस दिन अचानक ही हलचल बढ़ गई थी. अलगअलग राज्यों से आई 4 महिलाओं ने जब पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपने आंसू बहाए तो एक ऐसा सच बाहर आया, जिस ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया.

शादी का झांसा दे कर जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई ठगने वाला कोई साधारण जालसाज नहीं था. एक महिला ने एक करोड़ 82 लाख 88 हजार, दूसरी ने 82 लाख नकद 39 तोला सोना और हीरे के आभूषण. तीसरी ने 25 लाख 90 हजार नकद और 400 ग्राम सोने के आभूषण. चौथी ने 54 लाख और 950 ग्राम सोने के आभूषण ठगे जाने का आरोप लगाया.

अब इस मामले में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है. पीडि़ताओं ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई है, जिस का पंजीकरण नंबर 20260024292 है.

जब पत्रकारों ने इस खबर को प्रमुखता से कवर किया और मामला सार्वजनिक हुआ तो स्थानीय विधायकजी के बंगले पर हड़कंप मच गया. यह खबर उड़तेउड़ते सीतापुर के सेवता से बीजेपी विधायक ज्ञान तिवारी के परिवार तक पहुंच गई. ठगी का यह आरोपी अनुज त्रिवेदी विधायक ज्ञान तिवारी का समधी है.

देखते ही देखते उन के आवास के बाहर समर्थकों, विरोधियों और उत्सुक लोगों का जमावड़ा लगने लगा. गलियों और चौपालों पर फुसफुसाहटें तैरने लगीं. क्या इतने बड़े फरजीवाड़े से विधायकजी पूरी तरह अनजान थे? या फिर सत्ता की छाया में यह खेल खेला जा रहा था?

उठते सवालों और हमसाज होने की आशंकाओं से घिरते देख विधायकजी ने विरोधियों का मुंह बंद करने के लिए तुरंत सोशल मीडिया का सहारा लिया.

उन्होंने भारी मन से अपनी बेटी के साथ फेसबुक लाइव के जरिए अनुज त्रिवेदी और उस के बेटे से जुड़े आरोपों पर खुल कर बात की. उन्होंने कहा, ”इस इंसान ने न सिर्फ उन निर्दोष महिलाओं का भरोसा तोड़ा है, बल्कि हमारे परिवार की प्रतिष्ठा और रिश्ते को भी तारतार कर दिया है. राजनीति और रिश्ते अपनी जगह हैं, लेकिन कानून सब से ऊपर है. ऐसे शातिर ठग के खिलाफ कठोरतम काररवाई होनी चाहिए.’’

अपनी बेटी की तरफ देखते हुए उन्होंने रुंधे गले से आगे कहा, ”अगर इस पूरी साजिश में मेरा दामाद भी शामिल पाया जाता है तो कानून उसे भी न बख्शे. उसे भी सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए.’’

भावुक विधायक ने कहा था कि वह आज विधायक के तौर पर नहीं, बल्कि एक पिता के रूप में अपनी बेटी के लिए बोल रहे हैं. विधायक ने कहा कि उन की बेटी के साथ अन्याय हुआ है और यदि वह चाहेगी तो वह भी अनुज के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे. उन्होंने आरोपी को ‘दुष्ट व्यक्ति’ बताते हुए फांसी की मांग की.

इस दौरान विधायक भावुक हो गए और उन्हें देख कर उन की बेटी भी रोने लगी. उस समय विधायकजी के साथ उन की बेटी भी बैठी थी, जिस की आंखों से बहते आंसू उस की गहरी मानसिक पीड़ा को बयां कर रहे थे. विधायकजी की आवाज में भी दर्द और बेबसी साफ छलक रही थी. उन्होंने कहा कि उन की बेटी की शादी अनुज त्रिवेदी के बेटे प्रखर त्रिवेदी से हुई थी. बाद में अनुज पर कई महिलाओं से शादी और ठगी के आरोपों की जानकारी सामने आई.

ज्ञात रहे कि 14 फरवरी, 2024 को प्रखर की पांचवीं शादी सीतापुर के सेवता से भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी की एमबीबीएस डौक्टर बेटी से हुई. दोनों का एक बेटा भी बताया जाता है.

समधीदामाद की कथित असलियत सामने आने के बाद ज्ञान तिवारी और उन की बेटी ने दोनों से रिश्ते तोडऩे का दावा किया. फेसबुक पर जारी उन के बयान को यूट्यूबरों, पत्रकारों ने भी प्राथमिकता देते हुए प्रचारित किया.

सीतापुर के मिसरिख तहसील के चंद्रावल के रहने वाले अनुज त्रिवेदी की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही गईं. अनुज त्रिवेदी इन दिनों देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है.

ग्रामीणों के अनुसार 27 साल पहले अनुज त्रिवेदी सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लखनऊ गया था. इस के बाद प्रखर सिक्योरिटी के नाम से उस ने कंपनी खोल ली. प्रौपर्टी डीलिंग भी करने लगा. इस के बाद बस से मुंबई आनेजाने लगा.

ग्रामीणों ने बताया कि आरोपी अनुज कुछ ही समय में करोड़पति हो गया. उस ने लखनऊ में छठा मील में कोठी, मकान और मिसरिख के चंद्रावल में एक स्कूल खोला. आरोपी के बेटे की शादी में कई बड़े नेता, मंत्री भी पहुंचे थे.

धीरेधीरे उस की आर्थिक स्थिति तेजी से बदलती चली गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि कुछ ही वर्षों में उस ने करोड़ों रुपए की संपत्ति खड़ी कर ली. बताया जा रहा है कि आरोपी ने लखनऊ, सीतापुर समेत कई स्थानों पर मकान बनवाए. मिसरिख और आसपास के क्षेत्रों में 60 बीघा कृषि योग्य भूमि खरीदने की भी चर्चा है.

लग्जरी गाडिय़ों और आलीशान जीवनशैली के जरिए वह खुद को एक प्रभावशाली और संपन्न व्यक्ति के रूप में पेश करता था. इसी चमकधमक और झूठी पहचान के सहारे वह अपने शिकारों का विश्वास जीतने में सफल होता था.

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में दर्ज एक शिकायत से कथित ठग का परदाफाश हुआ है. उस की कहानी किसी क्राइम थिलर फिल्म से कम नहीं है. बौलीवुड की एक फिल्म आई थी ‘लेडीज वर्सेस रिकी बहल’, जिस की कहानी एक ऐसे शातिर ठग रौकी/रिकी बहल की है, जो अलगअलग शहरों में अलगअलग नाम और पहचान बना कर महिलाओं तथा उन के परिवारों से पैसे ठगता है. फिल्म में रणवीर सिंह ने रिकी बहल की भूमिका निभाई है.

इस फिल्म की स्टोरी से भी खतरनाक कहानी इस ठग की है. इस ने शादियां भी कीं, कई साल तक महिलाओं के साथ रहा भी. उस के बाद ठगी कर के फरार हो गया. उस का बेटा भी इसी तरह की ठगी करता. दोनों की मिलीभगत से उन का यह धंधा खूब फलफूल रहा था. आरोप है कि प्रखर ने विधायक की बेटी को जिम में अपना निशाना बनाया. वह उसी जिम में जाने लगा, जहां उन की बेटी जाती थीं.

जिम की भारीभरकम डंबल्स की आवाज और तेज संगीत के बीच विधायक की बेटी अपनी रोज की वर्कआउट रूटीन में मग्न थीं. तभी एक दिन ट्रेडमिल के पास खड़े हो कर पसीना बहाते प्रखर पर उन की पहली नजर पड़ी. प्रखर का जिम आने का अंदाज सब से अलग था. बाहर खड़ी चमचमाती महंगी कार से ले कर उस के सलीके से तैयार होने का ढंग आसानी से किसी का भी ध्यान खींच लेता.

शुरुआत में तो दोनों के बीच सिर्फ औपचारिक नजरें मिलीं और हलकी सी मुसकान का आदानप्रदान हुआ. फिर धीरेधीरे वर्कआउट के दौरान प्रखर ने बात शुरू करने के मौके तलाशने शुरू कर दिए. कभी ‘लाइट वेट प्लेट्स’ बढ़ाने में मदद करने के बहाने तो कभी सही पोस्चर बताने के नाम पर प्रखर उस के करीब आने लगा.

”क्या मैं यहां अगला सेट लगा सकता हूं?’’ इसी छोटे से सवाल से दोनों के बीच बातों का सिलसिला शुरू हुआ.

सप्ताह बीततेबीतते ट्रेडमिल की एक्सरसाइज के साथसाथ उन के विचारों का तालमेल भी बैठने लगा. वर्कआउट के बाद प्रखर अकसर उस को प्रोटीन शेक औफर करता और दोनों जिम के लाउंज में बैठ कर लंबी बातें करने लगे.

प्रखर का नपातुला व्यवहार, उस का आकर्षक व्यक्तित्त्व और बातों ही बातों में अपनी सफल जिंदगी व मुंबई के रियल एस्टेट कारोबार का जिक्र करना विधायक की बेटी को बहुत भाने लगा. गांव में भी अनुज नाम के इस व्यक्ति ने अपने परिवार की ऐसी ही प्रतिष्ठित पहचान बना रखी थी.

यह भी बताया जाता है कि उस ने प्रखर के नाम से एक स्कूल शुरू किया था और सीतापुर रोड पर छठे मील के पास कृष्ण विहार में लगभग 6 हजार वर्गफीट का मकान बनवा रखा था.

जिम में शुरू हुई लव स्टोरी

इन तमाम बातों ने परिवार का भरोसा मजबूत किया. किसी को अंदाजा नहीं था कि जिम में शुरू हुई यह दोस्ती आगे चल कर परिवारों के लिए एक बड़े विवाद और गंभीर आरोपों की कहानी का हिस्सा बन जाएगी.

जिम के उस सामान्य से माहौल में प्रखर ने अपनी बातों और हरकतों से ऐसा सम्मोहन बुना कि उसे शिखर में एक सच्चा और बेपनाह प्यार नजर आने लगा.

धीरेधीरे यह जानपहचान एक गहरे लगाव में बदल गई और उसी जिम के शांत कोने में एक दिन प्रखर ने बेहद संजीदगी से उस के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया.

बेटी ने इस की जानकारी अपने पिता को दी. परिवार की जानकारी जुटाने पर विधायक को बताया गया कि परिवार अच्छा है और मुंबई में रियल एस्टेट का कारोबार करता है. विधायक ने बताया कि शादी से पहले उन्होंने कई लोगों से जानकारी ली थी और पूर्व सांसद जनार्दन मिश्रा से भी सलाह ली थी. उन की बेटी की शादी वर्ष 2024 में प्रखर से हुई थी.

’25 शादियां, करोड़ों रुपए की ठगी और हर बार दूल्हा वही.’ सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लग सकती है. लेकिन यह हकीकत है उत्तर प्रदेश के सीतापुर के रहने वाले एक शख्स की, जिस ने शादी को अपना धंधा बना डाला.

अपने बेटे को साथ रख कर यह शातिर ठग एक ढोंगी आशिक का नाटक रचता था. वह अपनी हर शिकार बनी पत्नी से आसमान से तारे तोड़ लाने के वादे करता और नवयुवकों से भी ज्यादा प्रेम जताने का अभिनय करता था. उस की इस लच्छेदार बातों और भावुक अदाकारी के पीछे सिर्फ एक ही मकसद छिपा था, महिलाओं का विश्वास जीत कर उन की जीवन भर की कमाई को लूटना.

यह ठग कभी अजय अग्रवाल, कभी संतोष सिंह, कभी जयप्रकाश और कभी किसी दूसरे नाम से महिलाओं की जिंदगी में दाखिल हुआ. भरोसा जीता और फिर उन की जमापूंजी ले कर फरार हो गया. 25 शादियों का खुलासा तो पुलिस ने किया है. महाराष्ट्र में 4 एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई.

सीनियर इंसपेक्टर (क्राइम ब्रांच) सुशील कुमार शिंदे को जांच टीम का मुखिया बनाया गया. मीरा भायंदर, वसई विरार के डीसीपी संदीप डोइफोडे ने बताया कि आरोपी का पता उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में चला. पुलिस ने 24 मई, 2026 को उसे गिरफ्तार किया, यहां वह नकली पहचान के साथ रह रहा था.

पता नहीं और कितनी युवतियों की जिंदगियों के साथ इस जालसाज ने खिलवाड़ किया होगा, जो आंकड़ों में दर्ज नहीं है. महाराष्ट्र के डोंबिवली विष्णुनगर पुलिस ने शादी का झांसा दे कर महिलाओं से करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान 48 वर्षीय अनुज संतोष तिवारी उर्फ अनुज कुमार त्रिवेदी के रूप में हुई है.

पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से मैट्रिमोनियल वेबसाइटों और वैवाहिक विज्ञापनों के जरिए महिलाओं को अपने जाल में फंसा रहा था. फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.

दरअसल, महाराष्ट्र पुलिस के खुलासे ने पूरे देश को चौंका दिया है. आरोप है कि इस कथित फरजी दूल्हे ने 25 से ज्यादा महिलाओं को शादी के जाल में फंसा कर करोड़ों रुपए की ठगी कर ली. इसी तरह वह अपने बेटे की भी कई शादियां कर चुका है.

अब जब आरोपी गिरफ्तार हुआ तो उस की संपत्ति, फरजी दस्तावेजों और राजनीतिक संपर्कों को ले कर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

सीतापुर से ले कर मुंबई और नोएडा तक फैली इस हैरान कर देने वाली ठगी की पूरी कहानी का खुलासा महाराष्ट्र पुलिस द्वारा ग्रेटर नोएडा में संयुक्त काररवाई के दौरान आरोपी अनुज त्रिवेदी को गिरफ्तार करने के बाद हुआ. गिरफ्तारी के समय वह कथित रूप से चंद्रप्रकाश त्रिवेदी नाम की पहचान का इस्तेमाल कर रहा था.

साल 2022 मुंबई के मीराभायंदर वसई विरार क्षेत्र के न्याय नगर पुलिस स्टेशन में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला कांपते हाथों और नम आंखों के साथ पहुंची. उन्होंने पुलिस को बताया कि कुछ साल पहले उन्होंने अपनी 45 वर्षीय बेटी के लिए एक अच्छा रिश्ता तलाशने के उद्देश्य से मैट्रिमोनियल विज्ञापन दिया था.

शुभांगी मांगलिक थीं, जिस के कारण उन की शादी नहीं हो पा रही थी. उन की 75 वर्षीय मां सरिता ने वर्ष 2018 में अखबार में शादी का विज्ञापन दिया था. आरोप है कि इसी विज्ञापन के जरिए अनुज ने ‘अजय अग्रवाल’ नाम से शुभांगी से संपर्क किया और खुद को कोलकाता का बिल्डर बताया.  उस की बातचीत बेहद सलीकेदार थी. वह खुद को जिम्मेदार पढ़ालिखा और आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति बताता था.

धीरेधीरे फोन पर बातचीत शुरू हुई. फिर मुलाकातें हुई और कुछ ही महीनों में उस ने पूरे परिवार का भरोसा जीत लिया. परिवार को लगा कि उन की बेटी की जिंदगी अब सुरक्षित हाथों में होगी.

मार्च 2019 में उस ने शुभांगी से शादी कर ली और कोविड के दौरान उन के 3 बीएचके फ्लैट में रहने लगा. शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ बिलकुल सामान्य दिखाई देता था.

आरोपी परिवार के साथ घुलमिल गया. वह घर के बड़ेबुजुर्गों का सम्मान करता. भविष्य की योजनाओं पर बातें करता और हर दिन यह भरोसा दिलाता कि वह इस परिवार को खुशहाल जिंदगी देगा.

यही उस का सब से खतरनाक हथियार था. पहले विश्वास से जीतना फिर उसी विश्वास का फायदा उठाना. कुछ समय बाद उस ने एक नया सपना दिखाना शुरू किया. उस ने कहा मीरा रोड वाला फ्लैट बेच दीजिए. हम उस से भी बेहतर जगह नया घर खरीदेंगे. दोमंजिला मकान बनाएंगे, जहां पूरा परिवार आराम से रहेगा.

बात इतनी विश्वास के साथ कही गई कि परिवार को उस में कोई धोखा नजर नहीं आया. धीरेधीरे परिवार ने उस की बात मान ली. फ्लैट बेच दिया गया. समय बीतता गया और अलगअलग जरूरतों तथा भविष्य सुनहरे सपनों के नाम पर ठग डिमांड बढ़ती गई. परिवार उसे पैसे देता गया.

पुलिस के अनुसार आखिरकार परिवार ने उस पर भरोसा कर के करीब 82 लाख रुपए उसे सौंप दिए. लेकिन आरोपी का असली मकसद अभी पूरा नहीं हुआ था. कुछ दिनों बाद उस ने अपनी पत्नी से कहा कि दिल्ली में एक रिश्तेदार की शादी है. वह चाहता था कि दोनों वहां चलें. पत्नी ने बिना किसी शक के हामी भर दी. दोनों दिल्ली पहुंचे.

दिल्ली कुछ दिन साथ रहे. फिर एक दिन आरोपी उसे रेलवे स्टेशन ले कर गया. उस ने कहा कि उसे एक जरूरी काम से थोड़ी देर के लिए जाना है और पत्नी को मुंबई जाने वाली ट्रेन में बैठा दिया. महिला कुछ समझ पाती उस से पहले आरोपी उस के पास मौजूद करीब 33 तोला सोना अपने साथ ले जा चुका था.

ट्रेन चल पड़ी और उधर आरोपी भीड़ में कहीं गायब हो गया. महिला ने कई बार उस के मोबाइल पर कौल किया, लेकिन फोन बंद था. घंटों इंतजार किया. घर पहुंच कर कई दिनों तक संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन हर कोशिश बेकार रही.

तब परिवार को अहसास हुआ कि जिस व्यक्ति को उन्होंने अपना दामाद समझा था, वह दरअसल एक शातिर ठग था. जब पूरे मामले का हिसाब लगाया गया तो सामने आया कि इस परिवार को करीब 97 लाख और कीमती गहनों का नुकसान हो चुका था.

यहीं से शुरू हुई मुंबई पुलिस की वह जांच जो आगे चल कर देश के सब से बड़े मैट्रिमोनियल फ्रौड में से एक का परदाफाश करने वाली थी.

जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी ने इसी तरह 25 से अधिक महिलाओं को अपना शिकार बनाया. इस में तलाकशुदा, दिव्यांग, मानसिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से असहाय महिलाएं भी शामिल बताई जा रही हैं.

पुलिस को शक है कि यह कोई सामान्य धोखाधड़ी नहीं बल्कि वर्षों से चल रहा एक सुनियोजित नेटवर्क हो सकता है. गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से कई फरजी आधार कार्ड, मोबाइल फोन और बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए. जांच एजेंसियां अब उस के आर्थिक लेनदेन, बैंक खातों और संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं.

जांच में पुलिस आरोपी के बेटे तक भी पहुंची है, जिसे इस मामले में सह आरोपी बनाया गया है. अधिकारियों का आरोप है कि उस ने धोखाधड़ी की वारदात को अंजाम देने में अपने पिता की मदद की थी.

पुलिस को यह भी पता चला कि अनुज त्रिवेदी अमरावती में दर्ज धोखाधड़ी के एक और मामले में वांछित था, जहां उस ने एक महिला को 25 लाख रुपए का चूना लगाने के लिए अपनी पहचान छिपाई थी.

जांचकर्ताओं का मानना है जैसेजैसे मामला आगे बढ़ेगा, यह मैट्रिमोनियल धोखाधड़ी के सब से बड़े मामलों में एक बन सकता है. कथित ठग अभी महाराष्ट्र की जेल में बंद है. Matrimonial Scam

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