Social Media Earnings. सोशल मीडिया केवल टाइमपास या मनोरंजन का जरिया नहीं रह गया है. यह कई लोगों के लिए पहचान और कमाई का बड़ा माध्यम बन चुका है. खास बात यह है कि भारत की कई महिलाओं ने इस डिजिटल दुनिया में अपनी अलग जगह बनाई है. आप भी जानें कि अपने हुनर, मेहनत और क्रिएटिविटी के दम पर ये महिलाएं लाखोंकरोड़ों लोगों तक पहुंच कर किस तरह लाखों रुपए की कमाई कर रही हैं?

डिजिटल मनोरंजन की दुनिया में हर दिन नए चेहरे सामने आते हैं, लेकिन बहुत कम लोग अपनी प्रतिभा और सच्चे अंदाज से दर्शकों के दिलों में स्थाई जगह बना पाते हैं. सदाब पटेल आज ऐसा ही एक नाम बन चुका है, जो इंस्टाग्राम पर एक वायरल क्रिएटर के रूप में तेजी से पहचान बना रहा है. सोशल मीडिया पर उसे प्यार से ‘फनी रिएक्शन बौय’ कहा जाता है.

सादाब पटेल का सफर आसान नहीं रहा. कम उम्र से ही जीवन की जिम्मेदारियों ने उसे मजबूत बनाया. पारिवारिक हालातों के कारण उसे जल्दी काम करना पड़ा, लेकिन उस के भीतर कुछ बड़ा करने की चाह हमेशा जीवित रही. शुरुआत में सोशल मीडिया उस के लिए केवल मनोरंजन का साधन था, न कि करिअर का विकल्प.

उस की डिजिटल यात्रा टिकटौक के दौर में शुरू हुई, जब उस के भाई वीडियो बनाया करता था. सादाब ने खुद कंटेंट क्रिएटर बनने के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन जब भी वह वीडियो में नजर आता, उस की एक्सप्रेशंस और सहज अभिनय लोगों को तुरंत पसंद आ जाता. कई वीडियो वायरल हुए, लेकिन उस समय उस ने इस संकेत को गंभीरता से नहीं लिया.

इंस्टाग्राम रील्स के बढ़ते क्रेज के साथ सादाब के सपनों ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी. उस ने दोस्तों के साथ यूट्यूब पर कौमेडी वीडियो बना कर लगभग एक साल तक मेहनत की. हालांकि, वहां उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली. समय के साथ दोस्त अपनी नौकरी और जिम्मेदारियों में व्यस्त हो गए और सादाब पटेल एक बार फिर अकेला रह गया, लेकिन उस का जुनून कम नहीं हुआ.

आखिरकार सादाब ने इंस्टाग्राम पर कौमेडी रील्स बनानी शुरू की. शुरुआती दौर में वीडियो को सीमित प्रतिक्रिया मिली, लेकिन फिर एक दिन उस की केवल फनी एक्सप्रेशंस और रिएक्शन वाली एक वीडियो ने 10 लाख व्यूज का आंकड़ा पार कर लिया. यही वह पल था, जिस ने उस की जिंदगी की दिशा ही बदल दी.

दर्शकों ने उसे फनी रिएक्शन बौय नाम दिया, जिसे सादाब ने गर्व के साथ अपनाया. बिना भारी डायलौग्स और बनावटी अभिनय के, उस की सादगी और चेहरे के भाव ही उस की सब से बड़ी ताकत बन गए. धीरेधीरे उस की लोकप्रियता बढ़ती गई और वह एक मजबूत इंस्टाग्राम वायरल क्रिएटर के रूप में उभर कर सामने आया.

आज सादाब पटेल सिर्फ एक सोशल मीडिया क्रिएटर नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं. लाखों रुपए कमाने वाले सादाब पटेल की कहानी यह साबित करती है कि अगर प्रतिभा सच्ची हो और मेहनत लगातार की जाए तो सफलता खुद रास्ता बना लेती है.

सादाब पटेल का यह वायरल सफर अभी शुरुआत है और आने वाले समय में ‘फनी रिएक्शन बौय’ से और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है.

फैशन, कुकिंग, कौमेडी, गेमिंग और लाइफस्टाइल जैसे कई अलगअलग क्षेत्रों में îनेक महिला क्रिएटर्स लगातार नए रिकौर्ड बना रही हैं. आइए जानते हैं, उन भारतीय महिला डिजिटल क्रिएटर्स के बारे में जिन्होंने सोशल मीडिया को ही अपने करिअर का मजबूत आधार बना लिया और आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं.

जन्नत जुबैर सोशल मीडिया की दुनिया का एक बड़ा नाम बन चुकी है. जन्नत जुबैर उन एक्ट्रेसेस में से एक है, जिस ने बेहद ही छोटी उम्र में काम करना शुरू कर दिया था. लेकिन, एक्ट्रेस ने अपनी पढ़ाई भी नहीं छोड़ी थी.

जन्नत अब 24 साल की हो चुकी है और करोड़ों रुपए की मालकिन बन गई है, लेकिन जन्नत ने जब करिअर की शुरुआत की थी, तब उस की उम्र महज 7 साल थी. आज भी उसे उस के शो ‘फुलवा’ के लिए याद किया जाता है.

2018 तक टीवी पर काम करने के बाद एक्ट्रेस ने इस से दूरी बना ली. इस के बाद उस ने डिजिटल क्रिशन की तरफ रुख किया. उस ने अपने भाई के संग मिल कर वीडियोज बनाना शुरू किया. देखते ही देखते जन्नत जुबैर और उस के भाई कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में छा गए.

जन्नत के इंस्टाग्राम पर 51.9 मिलियन फालोवर्स हैं, जो उसे काफी पसंद करते हैं. जन्नत कंटेंट क्रिएशन, ब्रांड एंडोर्समेंट और रिएलिटी शोज के जरिए करोड़ों रुपए की कमाई करती है. जन्नत की नेटवर्थ 250 करोड़ रुपए है.

कुकिंग कंटेंट की दुनिया में निशा मधुलिका एक बेहद प्रसिद्ध नाम है. उस के यूट्यूब चैनल पर करोड़ों लोग जुड़े हुए हैं और उस के वीडियो लाखोंकरोड़ों बार देखे जाते हैं. वह सरल और पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन सिखाने के लिए जानी जाती है.

खास बात यह है कि उस ने जीवन के 50 वर्ष पार करने के बाद यूट्यूब की शुरुआत की थी, लेकिन आज वह इस क्षेत्र की सब से सफल क्रिएटर्स में गिनी जाती है. उस की आय का बड़ा हिस्सा यूट्यूब विज्ञापनों, ब्रांड सहयोग और किचन प्रोडक्ट्स के प्रमोशन से आता है.

अनुष्का सेन भी डिजिटल दुनिया की जानीमानी हस्तियों में शामिल है. उस ने टीवी शो के जरिए पहचान बनाई और बाद में सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हो गई. इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर उस के लाखों फालोअर्स हैं. उस का कंटेंट मुख्य रूप से फैशन, ट्रेंडिंग वीडियो और लाइफस्टाइल से जुड़ा होता है. कई बड़े ब्रांड्स के साथ काम करने की वजह से वह अच्छी कमाई करती है.

प्राजक्ता कोली जिसे ‘मोस्टलीसेन’ के नाम से भी जाना जाता है, कौमेडी कंटेंट के लिए काफी मशहूर है. उस के वीडियो रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े मजेदार अनुभवों पर आधारित होते हैं, जिन्हें युवा काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया पर लोकप्रियता मिलने के बाद उस ने फिल्मों और वेब सीरीज में भी काम करना शुरू किया. इस के अलावा वह कई सामाजिक अभियानों से भी जुड़ी रही है.

कुशा कपिला ने सोशल मीडिया पर अपने कौमिक किरदारों और लाइफस्टाइल कंटेंट के जरिए पहचान बनाई. उस की वीडियो स्टाइल और किरदार लोगों को काफी पसंद आते हैं.

आज वह सिर्फ कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक सफल बिजनेस वुमन भी है. उस का शेपवियर ब्रांड काफी तेजी से आगे बढ़ा है. इस के साथ ही वह फिल्मों और वेब सीरीज में भी नजर आ चुकी है.

देश में इस वक्त लाखों कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन की जिंदगी सोशल मीडिया से बदल गई है. इन में से कई लोगों को 10 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह की नौकरी पाना भी मुश्किल होता था. आज वीडियो बना कर वे हर महीने 4 लाख से 4.5 लाख रुपए कमा रहे हैं.

पूरे भारत में कंटेंट क्रिएटर्स की इंडस्ट्री लगभग 3 लाख करोड़ रुपए है. उस में हजारों ऐसे हैं, जो शून्य से शिखर तक पहुंच गए हैं.

ऐसे ही कंटेंट क्रिएटर में शिवानी का सफर वाकई कमाल का है. एक समय वह खेतिहर मजदूर के रूप में काम करती थी. 2018 में अपनी बहन के बच्चों के लिए चप्पल खरीदने बाजार जाते समय उस ने एक वीडियो बनाया और गलती से ‘हेलो फ्रेंडा’ कह दिया. यह वीडियो टिकटौक पर तेजी से वायरल हो गया और 2020 तक शिवानी के 50 लाख फालोअर्स हो गए थे.

टिकटौक पर प्रतिबंध लगने के बाद, उस ने इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक का रुख किया. उस की पहली कमाई 20 हजार रुपए थी. वह मुख्यरूप से दैनिक जीवन और ग्रामीण दिनचर्या से संबंधित वीडियो बनाती है.

जब शिवानी से लोग पूछते हैं कि क्या उसे करोड़पति कहा जा सकता है तो शिवानी झिझकते हुए मुसकराते हुए जवाब देती हैं, ”हां… अब आप ऐसा कह सकते हैं.’’

कानपुर के कपिल कानपुरिया, जिस का असली नाम कपिल शुक्ला है, एक समय अभिनेता बनने की उम्मीद से मुंबई गया था. वहां असफल होने के बाद वह वापस अपने शहर लौट आया और 2017 में गुरुग्राम में एक एकाउंटेंट की नौकरी कर ली.

जब 2020 में लौकडाउन शुरू हुआ तो कपिल ने उधार लिए गए पैसे वापस पाने और कंपनी के मानव संसाधन विभाग में शिकायत करने जैसे आम विषयों पर वीडियो बनानी शुरू कीं. उस का कंटेंट लोगों को जल्दी ही पसंद आ गया.

बाद में उस ने अपनी मम्मी पुष्पा और पत्नी कीर्ति को भी अपने वीडियो में शामिल किया. पारिवारिक कंटेंट ने उसे बेहद लोकप्रिय बना दिया और आज कई कंपनियां ब्रांड प्रमोशन के लिए उस से संपर्क करती हैं. आईपीएल के दौरान कपिल कई ब्रांडों का प्रचार करते नजर आए. उस की मासिक आय अब लाखों में पहुंच गई है.

यूपी के मेरठ में इंचौली कस्बे के रहने वाले शादाब ने सऊदी अरब में ड्राइवर के रूप में काम किया था. सऊदी से वापस अपने शहर लौटने के बाद उस ने 15 मई, 2025 को एक स्थानीय दुकान पर एक वीडियो बनाया और पूछा, ”सर, 10 रुपए वाला बिसकुट कितने का है?’’

यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया और इंस्टाग्राम पर इसे 89 मिलियन बार देखा गया.

बाद में रैपर बादशाह और क्रिकेटर रिंकू सिंह समेत कई मशहूर हस्तियों ने उस के थीम को अपनाया. आज दिल्ली, मेरठ और गाजियाबाद की कंपनियां प्रमोशन के लिए नियमित रूप से शादाब से संपर्क करती हैं और उसे लाखों रुपए देती हैं. हाल ही में उस ने मेरठ में एक ज्वैलरी शोरूम भी खोला है.

हालांकि उस के नाम के साथ कुछ विवाद भी जुड़े रहे हैं, फिर भी उस की लोकप्रियता में कमी नहीं आई है.

इटावा के जैकी यादव के एक्स पर 4 लाख फालोअर्स हैं. ब्रांड प्रमोशन से होने वाली आय के अलावा, वह सिर्फ एक्स से ही हर महीने लगभग 2 लाख रुपए कमाता है.

जैकी का कहना है कि वह 2021 तक यूपीएससी सीएसई की तैयारी कर रहा था. 2022 में उस ने अपने अकाउंट के माध्यम से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर लिखना शुरू किया. 2024 के लोकसभा चुनावों तक, उसे प्रतिदिन एक करोड़ से अधिक लोग पढ़ रहे थे.’’

लोग अब उसे ट्रेंड सेटर के रूप में देखते हैं. फिलहाल उस के पास 3 लोगों की एक टीम है, जो रिसर्च में उस की मदद करती है. उस नाम एक्स से संबंधित टौप-20 रैंकिंग लिस्ट में शामिल था. सोशल मीडिया से हुई कमाई से उस ने एक थार और एक ब्रेजा कार खरीदी.

किन प्लेटफौर्म से कैसे कमाया जा सकता हैं पैसा?

यूट्यूब चैनल

चैनल से कमाई के लिए 1,000 सब्सक्राइबर और 4,000 वाच आवर्स की आवश्यकता होती है.

यूट्यूब चैनल से कमाई करने के लिए 4 शर्तें पूरी होनी चाहिए.

एक बार चैनल का मोनेटाइजेशन हो जाने के बाद, उस चैनल पर पोस्ट की गई सभी सामग्री से डौलर में भुगतान प्राप्त होना शुरू हो जाता है.

अगर आप 8 मिनट का वीडियो अपलोड करते हैं और उसे 1,000 व्यूज मिलते हैं तो आप की कमाई लगभग 2 डौलर हो सकती है.

अगर आप एक मिनट का एक छोटा वीडियो अपलोड करते हैं और उसे 5,000 व्यूज मिलते हैं तो आप की कमाई लगभग 1 डौलर हो सकती है.

यूट्यूब पर कमाई कैसे बढ़ती और घटती है

आप के दर्शक कहां से हैं? अगर दर्शक अमेरिका जैसे देशों से हैं तो कमाई ज्यादा होगी. आप का विषय क्या है?  वित्त, तकनीक और शिक्षा से जुड़े वीडियो आमतौर पर कौमेडी कंटेंट से ज्यादा कमाई करते हैं.

आप का वीडियो कितना लंबा है? लंबे वीडियो में कई विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं, जिस से आय बढ़ती है. वीडियो पर दर्शकों की प्रतिक्रिया कैसी है? देखने का समय, लाइक और कमेंट, ये सभी मायने रखते हैं.

फेसबुक से कैसे करें कमाई

यूट्यूब के बाद, फेसबुक सब से बड़े कमाई करने वाले प्लेटफौर्म में से एक है. यहां क्रिएटर्स फोटो पोस्ट कर के भी पैसे कमा सकते हैं. कमाई शुरू करने के लिए, क्रिएटर्स को प्रोफेशनल डैशबोर्ड को चालू करना होगा और उन के पास 5,000 से अधिक फालोअर्स होने चाहिए. फोटो, वीडियो और रील के लिए कमाई अलगअलग होती है.

यदि आप 100 शब्दों के कैप्शन के साथ एक फोटो पोस्ट करते हैं और उसे 2 लाख लोग देखते हैं तो आप लगभग एक डौलर या उस से थोड़ा अधिक कमा सकते हैं.

अगर आप खुद बनाया हुआ 5 मिनट का वीडियो पोस्ट करते हैं और उसे एक लाख लोग देखते हैं तो आप की कमाई 2 डौलर तक हो सकती है.

अगर आप एक मिनट की रील पोस्ट करते हैं और उसे एक लाख व्यूज मिलते हैं तो आप की कमाई एक डौलर तक हो सकती है.

फेसबुक महीने में एक बार भुगतान करता है, लेकिन केवल तभी जब उस महीने की कमाई 100 डौलर से अधिक हो. यदि कमाई इस से कम होती है तो भुगतान रोक दिया जाता है.

यूट्यूब हर महीने की 21 तारीख को भुगतान जारी करता है.

एक्स (पूर्व में ट्विटर)

10 लाख व्यूज के लिए आप को 2000 से 3000 रुपए मिल सकते हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफौर्म एक्स, जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था, को एलन मस्क ने 27 अक्तूबर, 2022 को 44 बिलियन डौलर में खरीदा था. जुलाई 2023 से एक्स ने क्रिएटर्स के लिए भुगतान शुरू किया.

इस के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए, रचनाकारों को एक्स प्रीमियम की आवश्यकता होती है, जिस की कीमत 472 रुपए प्रति माह है और यह एक ब्लू टिक प्रदान करता है.  भुगतान प्राप्त करने के लिए पात्र होने हेतु, खाते को कई शर्तें पूरी करनी होती हैं मसलन, 3 महीनों में 50 लाख इंप्रेशन और 500 फालोअर. एक बार पात्रता हासिल करने के बाद, क्रिएटर्स प्रति 10 लाख व्यूज पर 25 से 30 डौलर कमा सकते हैं. हालांकि, एक्स  भुगतान काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि कितने सत्यापित उपयोगकर्ता आप की पोस्ट के साथ जुड़ते हैं. एक्स हर 14 दिन में भुगतान करता है.

यदि इस अवधि के दौरान आप के खाते में 5 मिलियन इंप्रेशन, 5 लाख सहभागिता, 10 फीसदी  सहभागिता दर और 5,000 कमेंट रिकौर्ड होते हैं तो कमाई 150 डौलर तक पहुंच सकती है.

कंटेंट क्रिएटर की बड़ी इकोनामी, लेकिन असली मुनाफा सोशल मीडिया प्लेटफार्म ही कमा रहे

कंटेंट क्रिएटर शब्द से लोग अब अनजान नहीं है और इसे कमाने के एक जरिए के तौर पर काफी लोग पहचानते हैं. खासकर जेन जी अकसर फालोअर्स, लाइक्स और वायरल कंटेंट के बारे में बात करते हुए मिल जाते हैं.

भारत में लगभग 20-25 लाख लोग मोबाइल स्क्रीन पर फेम और मनी पाने के लिए दिनरात काम कर रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि असल में कितने लोग सच में कमा रहे हैं और कंटेंट क्रिएटर इकौनमी की सच्चाई क्या है?

बीते कुछ सालों में लोगों ने कंटेंट क्रिएशन को कमाई के जरिए के तौर पर देखना शुरू किया है. हालांकि, काफी समय तक रिश्तेदार इन कंटेंट क्रिएटर्स को ‘बेरोजगार’ कहते थे, लेकिन आज स्थिति बदल गई है.

बात सिंपल है, जिन क्रिएटर्स का एक से डेढ़ मिनट का कंटेंट आप अपनी मोबाइल स्क्रीन पर देखते हैं, वे असल में देश के लिए एक बड़ी सेल्स फोर्स बन रहे हैं.

रिपोट्र्स के मुताबिक, भारत में 20 से 25 लाख एक्टिव डिजिटल क्रिएटर्स हैं जिन के 1,000 से ज्यादा फालोअर्स हैं और जो अलगअलग प्लेटफौर्म पर रेगुलर कंटेंट पोस्ट करते हैं. और यह कहने की जरूरत नहीं है कि सस्ते डेटा की वजह से जेन जी के बीच इस फारमूले को कैश करने की होड़ दिनबदिन बढ़ती जा रही है.

बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 8 से 10 प्रतिशत क्रिएटर्स ही अपने कंटेंट से पैसे कमा पा रहे हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो 20 से 25 लाख एक्टिव क्रिएटर्स में से केवल 2 से 2.5 लाख ही कमा रहे हैं. बाकी 90-92 प्रतिशत क्रिएटर्स या तो बहुत कम कमाते हैं या सोशल मीडिया उन की कमाई का मुख्य जरिया नहीं है.

टौप क्रिएटर्स बड़े ब्रांड्स के साथ पार्टनरशिप करते हैं, क्योंकि उन के पास बड़ी औडियंस होती है, इसलिए वे अपने वीडियो के जरिए एक्सक्लूसिव कंटेंट बेचते हैं. इस के अलावा वे ब्रांड स्पौंसरशिप, प्लेटफौर्म ऐड्स, एफिलिएट मार्केटिंग, सब्सक्रिप्शन और प्रीमियम कंटेंट से भी कमाते हैं.

यह भी उलेखनीय है कि 2025 में यूट्यूब  ने भारत से 34,742 करोड़ रुपए कमाए, जबकि मेटा ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और वाट्सऐप के माध्यम से लगभग 29,392 करोड़ रुपए कमाए.

यह सच है कि भारत में कई कंटेंट क्रिएटर्स करोड़पति बन गए हैं, लेकिन जिन सोशल मीडिया प्लेटफौम्र्स ने उन्हें करोड़पति बनाया है, वे इस गेम के असली विनर हैं.

ऐसे में कहा जा सकता है कि कंटेंट क्रिएशन एक बड़ा मार्केट है, लेकिन सक्सेस मिलना भी उतना ही मुश्किल भी है. साथ में अनसक्सेसफुल होने का साइकोलौजिकल प्रेशर भी.

क्रिएटर बाजार में जैसेजैसे भीड़ बढ़ रही है, वैसेवैसे छोटे क्रिएटर्स के लिए सर्वाइवल का संकट गहराता जा रहा है. सोशल मीडिया की भाषा में क्रिएटर्स को उन के फालोअर्स के आधार पर 4 अलगअलग श्रेणियों में बांटा जाता है.

नैनो क्रिएटर: 1,000 से 10,000 फालोअर्स वाले, माइक्रो क्रिएटर: 10,000 से 1 लाख फालोअर्स वाले, मैक्रो क्रिएटर: 1 लाख से 5 लाख फालोअर्स वाले, मेगा क्रिएटर: 5 लाख से अधिक फालोअर्स वाले.

इंस्टाग्राम पर नैनो इंफ्लुएंसर्स की फीस में भारी गिरावट आई है. बाजार में क्रिएटर्स की ज्यादा संख्या और कंपनियों के बीच बढ़ते ‘बार्टर कल्चर’ (पैसे के बदले सिर्फ प्रोडक्ट देने का चलन) के कारण इन नैनो क्रिएटर्स का बेस रेट 500 से घट कर महज 300 तक आ गया है. अब आप खुद सोचिए, दिनरात मेहनत कर के, स्क्रिप्ट लिख कर और वीडियो एडिट कर के अगर किसी को सिर्फ 300 मिल रहे हैं तो वह इस क्रिएटर इकौनमी के दम पर अपना भविष्य कैसे संवार सकता है?

सेलिब्रिटीज पर भारी पड़ रहे छोटे क्रिएटर्स

अब ब्रांड्स और बड़ी कंपनियों की सोच में एक बड़ा यूटर्न देखने को मिल रहा है. मार्केटर्स अब करोड़ों रुपए चार्ज करने वाले बड़े फिल्मी सितारों या मेगा सेलिब्रिटीज के पीछे भागने के बजाय माइक्रो और मैक्रो क्रिएटर्स के साथ लंबे समय की साझेदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं.

पटना में 50 हजार वफादार और ऐक्टिव फालोअर्स वाला कोई स्थानीय क्रिएटर, मुंबई के 50 लाख फालोअर्स वाले किसी ऐसे सेलिब्रिटी इंफ्लुएंसर से भी ज्यादा मूल्यवान और असरदार साबित हो सकता है. इस की वजह यह है कि छोटे शहरों के क्रिएटर्स का अपने दर्शकों के साथ एक सीधा, अनफिल्टर्ड और सच्चा जुड़ाव होता है, जो ब्रांड्स को असली सेल्स दिलाने में मदद करता है.

टियर-2 और टियर-3 शहरों का जलवा

क्रिएटर इकोनमी सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों तक ही सीमित नहीं है. टियर-2, टियर-3 और यहां तक कि टियर-4 शहरों के रीजनल इंफ्लुएंसर्स अब इस पूरी इंडस्ट्री के असली ग्रोथ इंजन बन कर उभरे हैं.

कोफ्लुएंस की रिपोर्ट के अनुसार, ”रीजनल भारत अब इस इंडस्ट्री का कोई छोटा सा फुटनोट नहीं रहा, बल्कि यही अब मुख्य केंद्र बन चुका है.’’

इस के पीछे की मुख्य वजहें छोटे शहरों के क्रिएटर्स का बेहतर एंगेजमेंट रेट, कम कैंपेन लागत और स्थानीय भाषा में बात करने की वजह से दर्शकों का उन पर अटूट भरोसा होना है.

अंगरेजी हुई आउट, स्थानीय भाषा का जलवा

अब वह जमाना चला गया, जब सोशल मीडिया पर केवल अंग्रेजी में बात करने वाले क्रिएटर्स का ही बोलबाला था. अब इंफ्लुएंसर मार्केटिंग की भाषा पूरी तरह से बदल चुकी है. 62 प्रतिशत से अधिक क्रिएटर्स ने बताया कि उन्हें अब ब्रांड्स की ओर से स्थानीय भाषाओं में कंटेंट बनाने के लिए ज्यादा ब्रीफ मिलने लगे हैं.

मार्केटर्स अब केवल अंग्रेजी बोलने वाले दर्शकों तक सीमित नहीं रहना चाहते. आज 68.2 प्रतिशत क्रिएटर्स मुख्य रूप से हिंदी में कंटेंट बनाते हैं, जबकि 23.9 प्रतिशत क्रिएटर्स क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट तैयार करते हैं. यह हाइपरलोकल स्टोरीटेलिंग के बढ़ते महत्त्व को दर्शाता है.

छोटे शहरों में संघर्ष ज्यादा

भले ही छोटे शहरों के क्रिएटर्स ब्रांड्स की पहली पसंद बन रहे हों, लेकिन महानगरों से बाहर काम कर रहे इन युवाओं को आज भी कई बुनियादी और गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

बिहार के उभरते हुए क्रिएटर अमित परिमल ने इस जमीनी हकीकत और अपने संघर्ष को साझा करते हुए कहा कि पिछले 4 वर्षों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी काफी बेहतर हुई है, लेकिन अब भी यह मेट्रो शहरों के स्तर के बराबर नहीं पहुंच पाई है.

रील्स और शौर्ट्स जैसे छोटे वीडियो अपलोड करने के लिए तो हमारे यहां इंटरनेट की स्पीड ठीकठाक मिल जाती है, लेकिन जब बात लाइव स्ट्रीमिंग करने की हो या फिर हाईक्वालिटी 4के कंटेंट शूट करके उसे प्रोसेस करने की हो तो हमारी तकनीकी सीमाएं बहुत जल्दी सामने आ जाती हैं और काम रुक जाता है. पेमेंट सिस्टम भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. अमित परिमल ने कहा, ”ब्रांड्स वायर ट्रांसफर या जीएसटी इनवौइस को प्राथमिकता देते हैं, जो प्रोफेशनलाइजेशन के लिए अच्छा है. लेकिन भुगतान चक्र 60 से 90 दिन तक खिंच जाता है, जो उस समय मुश्किल बन जाता है, जब आप को उपकरणों में दोबारा निवेश करना हो या छोटी टीम को भुगतान करना हो.’’

इंस्टाग्राम और यूट्यूब का राज

भारत में टिकटौक के बैन होने के बाद कई घरेलू शौर्ट वीडियो ऐप्स बाजार में आए और दावा किया गया कि ये भारतीय क्रिएटर्स का भविष्य बदलेंगे. लेकिन Kofluence के प्लेटफौर्म पर सक्रिय 20 लाख से अधिक क्रिएटर्स के बीच किए गए इस सर्वे ने उन दावों की हवा निकाल दी है.

रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 77.6 प्रतिशत क्रिएटर्स आज किसी भी भारतीय शौर्ट फौर्म प्लेटफौर्म पर सक्रिय ही नहीं हैं. दर्शकों का पूरा ध्यान खींचने की यह महाजंग आज भी पूरी तरह से इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे ग्लोबल दिग्गजों के हाथ में ही टिकी हुई है.

कितनी चमकदार है सोशल मीडिया क्रिएटर की जादुई दुनिया

लाइक, कमेंट, शेयर…यानी सोशल मीडिया की जादुई दुनिया जो आप को एंटरटेन करने के साथ ही एजुकेट और अवेयर भी कर रही है. इसी दुनिया ने अब एक इंडस्ट्री का रूप ले लिया है, जिसे कंटेंट क्रिएशन इंडस्ट्री के नाम से पहचाना जा रहा है.

कोई भी व्यक्ति, चाहे वह जिस उम्र का हो, जब वह खाली बैठा होता है तो रील्स, शौर्ट वीडियो देख कर अपना समय व्यतीत करता है, खासकर जेनजी इस क्रेज से कंटेंट क्रिएशन देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन कर उभरा है.

क्या है कंटेंट क्रिएटर इकोनॉमी

सब से पहले जानते हैं कि कंटेंट क्रिएशन क्या है? क्रिएटर कौन हैं? और ये इकोनौमी में कैसे सहयोग कर रहे हैं.

दरअसल, सोशल मीडिया पर दिखने वाली रील्स, शौर्ट वीडियो जो बनाते हैं वे कंटेंट क्रिएटर कहलाते हैं. इन के जरिए डिजिटल दुनिया के लिए क्रिएट किए गए कंटेंट से हुई कमाई को कंटेंट क्रिएटर इकोनौमी से जोड़ा जाता है. क्रिएटर इकोनौमी के केंद्र में सोशल मीडिया चैनल्स आते हैं, जो यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर को आपस में जोड़ कर इकोनौमी को डेवलप करते हैं. देश में लगभग 659 मिलियन (65 करोड़ 90 लाख) भारतीय वर्तमान में स्मार्ट मोबाइल फोन यूज कर रहे हैं. यानी देश की कुल जनसंख्या का 47.1 फीसद. भारत अब दुनिया का दूसरा सब से बड़ा स्मार्टफोन बाजार है, जिसे केवल चीन ने ही पीछे छोड़ा है.

एक दिन में लोग कितने घंटे स्मार्टफोन यूज कर रहे

ग्लोबली औसतन 4.37 घंटे प्रतिदिन लोग स्मार्टफोन का यूज कर रहे हैं. इंडोनेशिया में स्मार्टफोन यूज का आंकड़ा सब से ज्यादा है. यहां पर औसतन प्रतिदिन 6.05 घंटे स्मार्टफोन का यूज एक व्यक्ति करता है. भारत की बात करें तो यहां पर एक व्यक्ति प्रतिदिन 4.77 घंटे स्मार्टफोन पर बिताता है.

कंटेंट क्रिएटर्स की कमाई कितनी

बीसीजी की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश क्रिएटर्स प्रतिमाह 18,000 रुपए से कम या सालाना 2 लाख रुपए से कुछ अधिक कमाते हैं. छोटे क्रिएटर्स सालाना लगभग 3.8 लाख रुपए कमा रहे हैं. इस के विपरीत, 10 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स, ब्रांड डील वाले क्रिएटर्स प्रति माह 50 हजार रुपए से अधिक कमा रहे हैं. लेकिन इन की संख्या कम है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि लाखों क्रिएटर्स यूजर्स जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन में से कुछ ही इसे स्थाई आय में परिवर्तित कर पा रहे हैं.

कंटेंट क्रिएटर्स की कैसे होती है कमाई

कंटेंट क्रिएटर्स की विज्ञापन और कौरपोरेट जगत के लिए स्पैशल कंटेंट तैयार करने से कमाई होती है. बीसीजी रिपोर्ट कहती है कि क्रिएटर्स को इन के अलावा आय के अन्य स्रोतों में विविधता लानी चाहिए और प्रशंसकों के साथ गहन जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. लोकप्रिय वीडियो प्लेटफौर्म अब क्रिएटर्स के लिए सदस्यता कार्यक्रम करते हैं, जिस से वे अपने यूजर्स के लिए विशेष सामग्री बना सकते हैं.

छोटे शहरों में भी युवाओं का सीरियस करिअर औप्शन बना कंटेंट क्रिएशन 

भारत का युवा यानी कि 18-24 साल के जेनजी इंटरनेट पर अपनी खुद की पहचान बना रहे हैं. ऐसा दावा है यूट्यूब की इंडिया स्मिथ जीजर रिपोर्ट का. इस रिपोर्ट के मुताबिक 83 फीसदी बच्चे खुद को कंटेंट क्रिएटर मानते हैं. इसे सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं, बल्कि एक पीढ़ी की सोच में आए बदलाव के तौर पर देखा जा सकता है. दरअसल, युवा अब कंटेंट क्रिएशन को अपना करिअर बना रहे हैं. इस में सब से खास बात यह है कि ऐसा छोटे शहरों में ज्यादा हो रहा है. अब दिल्ली और मुंबई ही नहीं बल्कि इंदौर, जयपुर, पटना जैसे शहरों से भी बड़ी संख्या में कंटेंट क्रिएटर्स निकल रहे हैं.

टियर 2 और टियर 3 शहरों के उभरते सितारे

यूट्यूब की रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर क्रिएटर्स अब टियर 2 और टियर 3 शहरों से आते हैं. इस से पहले तक ऐसा माना जाता था कि डिजिटल कंटेंट बनाने में मेट्रो सिटी सब से आगे हैं, लेकिन स्मार्टफोन और इंटरनेट ने इन दीवारों को अब तोड़ा है.

अब छोटे शहरों के क्रिएटर्स अपनी लोकल भाषा में कंटेंट बना कर उसे दुनियाभर में पहुंचा रहे हैं. लोकल भाषा, संस्कृति और कहानियों के इर्दगिर्द बनने वाला कंटेंट दुनियाभर में पसंद भी किया जा रहा है. ऐसा कहा जा सकता है कि इंटरनेट और खासकर सोशल मीडिया ने सभी के लिए मौके खोल दिए हैं.

कंटेंट क्रिएशन बन रहा करिअर

कंटेंट क्रिएशन अब सिर्फ कोई शौक या हौबी नहीं रह गया है. जेनजी के लिए कंटेंट क्रिएशन एक सीरियस करिअर औप्शन है. रिपोर्ट के अनुसार 75 फीसदी युवा इसे एक सीरियस करिअर के तौर पर देखते हैं. इन के लिए यूट्यूब, इंस्टाग्राम और शौट्स सिर्फ मनोरंजन का नहीं, बल्कि करिअर के नए औप्शन हैं. इन्हें युवा बिजनैस टूल्स की तरह देखते हैं, जहां स्पौंसरशिप मिलती है और पैसे कमाए जाते हैं.

इस के अलावा युवा इसे पैशन को करिअर में बदलने का एक अच्छा रास्ता भी मानते हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार 55 फीसदी  क्रिएटर्स ने इस बात को माना है कि डिजिटल प्लेटफौर्म उन्हें फाइनेंशियली आत्मनिर्भर बनाते हैं.

इस रिपोर्ट में कंटेंट क्रिएटर्स ने यूट्यूब को प्लेटफौर्म के तौर पर अपनी पहली पसंद बताया है. 90 फीसदी से ज्यादा जेनजी कंटेंट क्रिएटर्स यूट्यूब पर हैं. इस के चलते रीजनल भाषा में बने कंटेंट की डिमांड यूट्यूब पर बढऩे लगी है.

ऐसा इसलिए क्योंकि अब छोटे शहरों के क्रिएटर्स रीजनल भाषा और बोली में अपनी परंपराओं और रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में कंटेंट बना रहे हैं. वीडियो के शौर्ट फौरमेट का दबदबा भी इस तरह के कंटेंट में दिखने लगा है. इस से साफ होने लगा है कि हिंदी के साथसाथ रीजनल भाषाओं की भी बड़ी औडिएंस दुनिया भर में मौजूद है. Social Media Earnings

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