UP Love Crime Story. डा. दिनेश सिंह अपने ही क्लिनिक में काम करने वाली शादीशुदा नर्स संगीता सिंह के प्यार में ऐसा दीवाना हुआ कि पत्नी और बच्चों की चिंता छोड़ संगीता के साथ लिवइन रिलेशन में रह कर खूब पैसे खर्च करने लगा. बाद में दिनेश सिंह की क्लिनिक ठप हो गई तो संगीता ने भी उस से दूरियां बना लीं. इन्हीं दूरियों ने एक गुनाह को जन्म दिया.
दो पहर साढ़े 11 बजे के आसपास का समय रहा होगा. उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद की शहर कोतवाली में उस समय वरिष्ठ उपनिरीक्षक के.एम. मिश्र ड्यूटी पर मौजूद थे. थानाप्रभारी सुरेश सिंह किसी काम से पुलिस अधीक्षक से मिलने उन के औफिस गए हुए थे. उसी समय कंधे पर बंदूक लटकाए मोटरसाइकिल से एक आदमी थाने पहुंचा. अधेड़ उम्र का वह आदमी बांह वाली बनियान और पैंट पहने हुए था.
पहरे पर मौजूद सिपाही उसे रोक कर कोई पूछताछ करता इस से पहले ही वह मोटर साइकिल खड़ी कर के सीधे के.एम. मिश्र के पास पहुंच गया. उस वक्त उस अधेड़ व्यक्ति का चेहरा आक्रोश से दहक रहा था और उस की सांसें जोरजोर से चल रही थीं.
ऐसा लग रहा था जैसे वह तेज गति से बहुत दूर से पैदल आ रहा है या फिर उस ने कुछ ऐसा किया है, जिस से उस का रक्तचाप बढ़ गया है. वरिष्ठ उपनिरीक्षक मिश्र उस से कुछ पूछते इस के पहले ही वह खुद बोल उठा, ‘‘साहब, मैं अभीअभी एक औरत का खून कर के आ रहा हूं, उस की हत्या मैं ने अपनी इसी बंदूक से की है…’’
अपनी बात कह कर उस व्यक्ति ने अपनी बंदूक मिश्र के सामने टेबल पर रख दी. उस व्यक्ति की सांसें धौंकनी की तरह चल रही थीं. मिश्र को लगा कि कहीं उसे हार्टअटैक न हो जाए, इसलिए वह बड़े प्रेम से बोले, ‘‘पहले तुम आराम से बैठ जाओ, फिर बताना कि तुम ने कहां और किस का खून किया है.’’ इस के साथ ही मिश्र ने एक सिपाही को पानी ले कर आने को कहा.
सिपाही ने एक गिलास पानी ला कर अधेड़ को पकड़ा दिया. पानी पी कर वह व्यक्ति कुछ पल शांत बैठा रहा, फिर संयत हो कर बोला, ‘‘मेरा नाम डा. दिनेश सिंह है, सहादतपुरा इलाके की अली बिल्डिंग में मेरा अपना क्लिनिक है. मैं ने अपने क्लिनिक के पड़ोस में ब्यूटीपार्लर चलाने वाली संगीता सिंह को गोली मार कर उस की हत्या कर दी है.’’
वरिष्ठ उपनिरीक्षक के.एम. मिश्र ने डा. दिनेश सिंह से कुछ जरूरी जानकारी ले कर तत्काल थानाप्रभारी सुरेश सिंह को फोन कर पूरी बात बता दी. डा. दिनेश सिंह की बंदूक को उन्होंने उठवा कर अलग रखवा दिया. एक डाक्टर द्वारा किसी महिला की गोली मार कर हत्या कर के बंदूक के साथ थाने जा कर आत्मसमर्पण करने की बात थोड़ी आश्चर्यजनक थी.
थानाप्रभारी सुरेश सिंह ने इस घटना के बारे में एसएसपी तेजस्वरूप सिंह और सीओ अशोक यादव को बता दिया. इसी के साथ ही उन्होंने एसएसआई मिश्र को भी कह दिया कि वह सीधे घटनास्थल पर पहुंच रहे हैं, वह भी पुलिस टीम के साथ अली बिल्डिंग आ जाएं. थानाप्रभारी से बात होते ही मिश्र ने डा. दिनेश सिंह को हवालात में डलवाया और पुलिस टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए.
थानाप्रभारी सुरेश सिंह और मिश्र सहादतपुरा स्थित व्यावसायिक कांप्लेक्स अली बिल्डिंग पहुंचे तो वहां अच्छीखासी भीड़ जमा थी. भीड़ में मौजूद ब्यूटीपार्लर संचालिका संगीता सिंह के कुछ शुभचिंतक उसे एक टैंपो में लाद कर जिला अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे. थानाप्रभारी ने टैंपो के साथ 2 सिपाही और एक महिला सिपाही को भेज दिया और खुद ने घटनास्थल की जांचपड़ताल शुरू कर दी. थोड़ी देर बाद एसएसपी तेजस्वरूप सिंह और सीओ अशोक यादव भी वहां आ गए.
डा. दिनेश सिंह का क्लिनिक खुला हुआ था, लेकिन वहां कोई कंपाउंडर वगैरह नहीं था. भीड़ में से कुछ लोगों ने बताया कि डा. दिनेश सिंह का क्लिनिक कोई खास नहीं चलता था, इसलिए वह सारा काम अकेले ही संभालते थे.
कोई मरीज आ जाता था तो वह उस का चेकअप करने के बाद दवा लिख देते थे. मृतका संगीता सिंह के बारे में लोगों से पता चला कि कई साल पहले जब डा. दिनेश सिंह का क्लिनिक बढि़या चल रहा था, तब वह बतौर नर्स उन के यहां काम किया करती थी.
बाद में उस ने डाक्टर के सुझाव व सहयोग से उन के क्लिनिक के बगल में ही ब्यूटी पार्लर खोल लिया था. भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने दबी जुबान में पुलिस को यह भी बता दिया कि डा. दिनेश सिंह और मृतका संगीता सिंह के बीच पिछले 8-10 सालों से प्रेमसंबंध था.
संगीता सिंह सहादतपुरा मोहल्ले में किराए का मकान ले कर रहती थी. डा. दिनेश सिंह का ज्यादातर समय संगीता के साथ ही गुजरता था. इन दोनों के संबंधों की जानकारी दोनों के ही परिजनों को थी. इस पूछताछ के बाद पुलिस अफसरों की समझ में आ गया था कि डा. दिनेश सिंह और संगीता के बीच लिवइन रिलेशन जैसा कुछ था. हत्या का कारण भी इन्हीं संबंधों में आई खटास या मनमुटाव का परिणाम हो सकता था.
एसएसपी तेजस्वरूप सिंह प्रभारी निरीक्षक को दिशानिर्देश दे कर वापस लौट गए. संगीता की हत्या का सही कारण डा. दिनेश सिंह ही बता सकते थे. जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से 2 खाली खोखे मिले, जिन्हें पुलिस ने कब्जे में ले लिया.
घटनास्थल की औपचारिकता पूरी कर के थानाप्रभारी सुरेश सिंह जिला अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि मृतका की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी. उस की बौडी को मोर्चरी में रखवा दिया गया है. यह 21 सितंबर, 2014 की बात थी.
अब तक की जांचपड़ताल से पुलिस को पता चल चुका था कि मृतका संगीता सिंह अपनी 12 वर्षीया बेटी मानसी सिंह के साथ अकेली रहती थी. संगीता का मायका और ससुराल दोनों आजमगढ़ जिले में थे. उस की मौत की खबर उस के मायके वालों को देनी जरूरी थी.
थानाप्रभारी सुरेश सिंह ने तत्काल एक सबइंस्पेक्टर के साथ महिला सिपाही को संगीता की बेटी मानसी के पास भेज कर उस के ननिहाल का पता व फोन नंबर मंगा लिया और संगीता की मौत की खबर दे कर उस के मायके वालों को मऊ बुलवा लिया. मानसी अपने पिता के घर के बारे में कुछ नहीं बता सकी थी.
संगीता के मायके खबर करने के बाद थानाप्रभारी सुरेश सिंह थाने पहुंचे तो वहां आत्मसमर्पण कर चुका डा. दिनेश सिंह बेंच पर एकदम शांत बैठा मिला. तब तक सीओ अशोक यादव भी वहां आ गए थे. सीओ की मौजूदगी में थानाप्रभारी सुरेश सिंह ने डा. दिनेश सिंह से पूछताछ की तो संगीता की हत्या करने का कारण सामने आ गया. वजह काफी चौंकाने वाली थी. ज्यादातर हत्याएं पतिपत्नी के बीच किसी तीसरे के आ जाने के कारण होती हैं, लेकिन यहां मामला कुछ और ही था.
3 बच्चों के पिता डा. दिनेश सिंह अपनी पत्नी और बच्चों की उपेक्षा के चलते पिछले 10 सालों से संगीता के साथ लिवइन रिलेशन में रह रहा था. संगीता सिंह भी एक बेटी की मां थी और अपने पति की हरकतों से आजिज आ कर डा. दिनेश के नजदीक आई थी.
इन दोनों के संबंध 8 सालों तक तो ठीकठाक रहे, लेकिन उस के बाद दोनों के संबंधों में खटास आनी शुरू हो गई, जो समय के साथ बढ़ती गई. इस बीच डा. दिनेश सिंह को न जाने कैसे यह शक हो गया था कि संगीता उस का साथ छोड़ कर किसी और के साथ शादी कर के अपनी अलग गृहस्थी बसाना चाहती है.
डा. दिनेश सिंह के लिए यह बात असहनीय थी, इसलिए उस ने संगीता का काम तमाम कर दिया. डा. सिंह के बताए अनुसार संगीता की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस तरह थी.
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की देवगांव कोतवाली के अंतर्गत आने वाले गांव लम्हुआ की रहने वाली संगीता स्नातक थी. 13 साल पहले उस की शादी आजमगढ़ के ही राणाप्रताप सिंह के साथ हुई थी. शादी के सालभर बाद ही पतिपत्नी में आए दिन झगड़े होने लगे थे.
झगड़े का कारण था राणाप्रताप का चालचलन. राणाप्रताप ढंग का कोई काम करने के बजाय गलत तरीके से पैसा बनाने का आदी था. पैसा कमाने के लिए वह नशे के कारोबार से जुड़ गया था. लेकिन संगीता को यह पसंद नहीं था. आए दिन पुलिस के लफड़े होने लगे, जिस की वजह से संगीता परेशान थी.
जल्दी ही उस ने महसूस किया कि आपराधिक चरित्र के पति के साथ उस का गुजारा नहीं हो पाएगा. इस बीच संगीता गर्भवती हो चुकी थी. बाद में उस ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस नाम उस ने मानसी रखा.
संगीता को उम्मीद थी कि बेटी हो जाने पर पति की आदतें सुधर जाएंगी. लेकिन उस में कोई बदलाव नहीं आया. मानसी के जन्म के 8-9 महीने तक जैसेतैसे पति के साथ रहती रही. लेकिन जब एक दिन पुलिस ने राणाप्रताप सिंह को एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया तो संगीता ने निर्णय ले लिया कि अब अपना बाकी का जीवन आपराधिक चरित्र वाले व्यक्ति के साथ नहीं गुजारेगी. पति के जेल जाने के बाद संगीता मानसी को ले कर मायके चली आई. इस के बाद वह फिर लौट कर पति की चौखट पर नहीं गई.
मायके आने के बाद संगीता ने अपने मांबाप को अपने फैसले से अवगत करा दिया था. साथ ही यह भी बता दिया था कि वह पढ़ीलिखी है और कोई न कोई जौब कर के अपना और अपनी बेटी का पेट पाल लेगी. वह परिवार पर बोझ कतई नहीं बनेगी.
मायके आने के बाद संगीता अपने लिए काम की तलाश में जुट गई. इस के लिए उस ने अपने कुछ खास रिश्तेदारों से भी कह दिया था कि अगर उस के लायक कहीं कोई काम मिलता हो तो उसे जरूर बताएं.
संयोग से उन्हीं दिनों संगीता के नजदीकी रिश्तेदार, जो पड़ोसी जिले मऊ में रहते थे, ने उसे डा. दिनेश सिंह के बारे में बता कर कहा कि अगर वह उन की क्लिनिक में काम करने की इच्छुक हो तो उसे रहने के साथसाथ अच्छी तनख्वाह मिल सकती है.
संगीता को इस काम में कोई खराबी नजर नहीं आई. वह मऊ आ कर डा. दिनेश सिंह से मिली और उन के क्लिनिक का काम देख कर हामी भर दी. इस के बाद संगीता डा. दिनेश सिंह की क्लिनिक में बतौर नर्स काम करने लगी. कुछ दिनों तक तो संगीता अपने उसी रिश्तेदार के घर पर रही, जिस की वजह से उसे नौकरी मिली थी, लेकिन बाद में डा. दिनेश सिंह के सहयोग से उसे सहादतपुरा इलाके में किराए का एक कमरा मिल गया.
कमरा मिल जाने के बाद संगीता अपनी बेटी के साथ वहीं रहने लगी, दिन भर वह क्लिनिक में गुजारती और रात अपने कमरे में. उस का अब एक ही मकसद था, जैसे भी संभव हो अपनी बेटी मानसी का भविष्य बनाना. इसलिए वह अपने काम में कभी कोताही नहीं बरतती थी.
काम के प्रति संगीता की लगन देख कर डा. दिनेश सिंह गाहेबगाहे संगीता की पैसे आदि से मदद करने लगा. यह मदद संगीता को मिलने वाली तनख्वाह के अलावा होती थी. दरअसल सच्चाई यह थी कि डा. दिनेश सिंह संगीता सिंह पर पूरी तरह आशक्त हो चुका था और उसे अपनी बनाना चाहता था. इस में काफी हद तक से कामयाबी भी मिल गई.
संगीता पिछले 2 सालों से पति से अलग एकाकी जीवन जी रही थी. दिन तो जैसेतैसे काम में गुजर जाता था. पर रात को बिस्तर पर लेटते ही पति के साथ बिताए मधुर क्षण उसे बेचैन करने लगते थे. यह स्वाभाविक इसलिए था, क्योंकि से 23-24 साल की उम्र में ही उसे पति से अलग होना पड़ा था. यही वजह थी कि जब डा. दिनेश ने संगीता की तरफ प्रेम का जाल फेंका तो वह उस में फंस गई.
डा. दिनेश और संगीता की उम्र में लगभग 18-19 साल का अंतर था. इस के बावजूद वह शरीर से ठीकठाक था. साल भर के भीतर ही डा. दिनेश और संगीता सिंह आपसी रजामंदी से एक साथ रहने लगे. डा. दिनेश सिंह मूलरूप से मऊ जनपद के ही सरायलखंसी थानाक्षेत्र के हरदासपुर गांव का रहने वाला था.
हरदासपुर गांव में उस का पैतृक आवास व जमीन थी, जहां उस की पत्नी ऊषा देवी अपने 3 बच्चों के साथ रहती थी. डाक्टर के 3 बच्चों में सब से बड़ी बेटी की उम्र 27 साल थी. डा. दिनेश रोजाना अपने घर से क्लिनिक आता और रात 8 बजे के बाद घर वापस लौट जाता था.
लेकिन डा. दिनेश सिंह संगीता के रूप सौंदर्य पर कुछ ऐसा मोहित हुआ कि धीरेधीरे घर जाना बंद कर के वह शहर में ही संगीता सिंह के किराए वाले मकान में रात बिताने लगा. संगीता भी डाक्टर का पूरा खयाल रखती. इस के बदले डा. दिनेश भी संगीता की सभी जरूरतों का पूरा खयाल करते. दोनों रजामंदी से लिवइन रिलेशन को स्वीकार चुके थे.
संगीता और डा. दिनेश का संबंध कुछ सालों तक तो ठीकठाक चलता रहा, लेकिन बाद में डा. दिनेश सिंह के क्लिनिक का धंधा मंदा पड़ गया तो उस के लिए संगीता का खर्च उठाना भारी पड़ने लगा.
इस का एक कारण यह भी था कि पहले संगीता का खर्च सीमित था, पर जब से संगीता ने बेटी मानसी सिंह का दाखिला मऊ शहर के प्रतिष्ठित चंद्रा पब्लिक स्कूल में कराया था, तब से खर्चा अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया था. संगीता सिंह शुरू से ही बेटी के भविष्य के प्रति गंभीर थी और इसीलिए उस ने अपने पति का साथ छोड़ा था.
मानसी का स्कूल में दाखिला हो जाने से उस की पढ़ाई पर हर महीने एक निश्चित रकम खर्च होने लगी थी. जब खर्चा बढ़ा तो डा. दिनेश ने संगीता से विचारविमर्श कर के उसे अपनी दुकान के एक हिस्से में अलग से चूडि़यों की दुकान खुलवा दी.
अब संगीता चूडि़यां बेचने का काम करने लगी. लेकिन यह काम ज्यादा दिनों तक नहीं चला. तब संगीता ने दिनेश के सहयोग से क्लिनिक के बगल में ही ब्यूटीपार्लर खोल ली. यह लगभग 7 साल पहले की बात है.
संयोग से संगीता का यह काम खूब चलने लगा. इस के पीछे संगीता की लगन और मधुर व्यवहार प्रमुख कारण था. संगीता का ब्यूटीपार्लर का धंधा समय के साथ जैसेजैसे फलताफूलता गया, वैसेवैसे डा. दिनेश के क्लिनिक का धंधा मंदा पड़ता गया. एक समय ऐसा भी आ गया, जब डा. दिनेश का काम ठप्प जैसा हो गया. पूरे दिन में उस के पास 8-10 मरीज ही आ पाते थे.
समय कब पलट जाए, कहा नहीं जा सकता. एक समय ऐसा था जब डा. दिनेश सिंह संगीता सिंह को उस की जरूरतों के लिए पैसे दिया करते थे. जबकि अब हालात कुछ ऐसे बने कि उन्हें खुद अपनी जरूरतों के लिए संगीता सिंह के सामने हाथ फैलाना पड़ता था. संगीता भी जरूरत के मुताबिक डा. दिनेश के मांगने पर पैसे दे देती थी.
आगे चल कर डा. दिनेश की पैसे की मांग बढ़ी गई तो संगीता सिंह और डाक्टर के बीच संबंधों में खटास आनी शुरू हो गई. फिर ऐसा भी वक्त आया, जब संगीता ने डा. दिनेश से दूरी बना ली और उन से बहुत जरूरी होने पर ही बात करती थी.
संगीता सिंह का ब्यूटीपार्लर डा. दिनेश सिंह के क्लिनिक के बगल में था, इसलिए न चाहते हुए भी उसे डा. दिनेश का सामना करना पड़ता था. घटना से 4-5 महीने पहले ऐसी स्थिति पैदा हो गई कि डा. दिनेश सिंह को अपनी छोटीछोटी जरूरतों के लिए संगीता के सामने हाथ फैलाने पड़ते थे. संगीता कभी तो पैसे दे देती थी और कभी मना कर देती थी.
कुल मिला कर दोनों के बीच की दूरियां काफी बढ़ गई थीं. डा. दिनेश सिंह संगीता के व्यवहार से काफी नाराज थे. उन्होंने फिर से गांव वाले घर आनाजाना शुरू कर दिया था. इस बीच न जाने कैसे दिनेश सिंह को यह भ्रम हो गया कि संगीता सिंह का किसी और से संबंध बन गया है और अब वह जल्द ही उस का साथ छोड़ कर नए प्रेमी के साथ शादी कर घर बसाएगी.
संगीता ने कुछ महीने पहले खरीदने की इच्छा से अपने लिए एक मकान देखना शुरू कर दिया था. इस संबंध में उस ने डा. सिंह को भी कह रखा था कि अगर 12-13 लाख का कोई मकान मिल जाए तो वह खरीद लेगी. इस बात से भी डाक्टर को और भी ज्यादा लगने लगा कि संगीता अब उस से दूर जाना चाहती है.
एक दिन डा. दिनेश सिंह को एक मोटी रकम की जरूरत पड़ गई. इस के लिए उस ने जब संगीता से पैसे मांगे तो वह बिफर उठी, ‘‘तुम ने मुझे क्या समझ रखा है? जब देखो मुंह उठाए पैसे मांगने चले आते हो. अच्छा होगा तुम अपनी जरूरतें खुद पूरी करो…’’ उस दिन संगीता ने डाक्टर को काफी खरीखोटी सुना दी थी. इसी के बाद डा. दिनेश ने फैसला कर लिया कि अगर वह उस की हो कर नहीं रही तो वह उसे किसी और की भी नहीं होने देगा.
21 सितंबर, 2014 को रविवार की छुट्टी होने की वजह से व्यावसायिक कांप्लेक्स अली बिल्डिंग की अधिकांश दुकानें बंद थीं. रोजाना की तरह उस दिन भी डा. दिनेश सिंह साढ़े 8 बजे क्लिनिक में आ कर बैठ गया. लगभग डेढ़ घंटे बाद जब संगीता सिंह अपना ब्यूटी पार्लर खोलने के लिए दुकान के सामने पहुंची तो डा. दिनेश सिंह ने उस से कहा, ‘‘तुम्हें समय का कुछ अंदाजा है, 11 बजे दुकान खोल रही हो. यह कोई दुकान खोलने का समय है?’’
‘‘आप होते कौन हैं मुझ से यह सवाल पूछने वाले? मेरी जब मरजी होगी, तब दुकान खोलूंगी. आप अपने काम से काम रखिए.’’ डा. दिनेश सिंह को संगीता सिंह से ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी. वह गुस्से में उफनते हुए अपनी लाइसेंसी बंदूक जिसे वह अकसर साथ रखता था, उठा कर संगीता पर फायर करते हुए बोला, ‘‘बताता हूं कि मैं पूछने वाला कौन होता हूं.’’
डा. दिनेश द्वारा चलाई गई गोली संगीता की बांह में लगी. डाक्टर को हिंसक होते देख संगीता जान बचाने के लिए बगल की एक दुकान में घुस गई, लेकिन डाक्टर ने उस का पीछा कर के उसे 2 गोली और मार दीं. 3 गोलियां लगने से घायल हो कर संगीता जमीन पर गिर कर तड़पने लगी.
उस के बदन से खून की धार बह निकली. जब तक अगलबगल वाले दुकानदार कुछ समझते डा. दिनेश सिंह अपनी बंदूक के साथ दुकान से बाहर निकला और मोटरसाइकिल स्टार्ट कर के सीधे शहर कोतवाली चला गया, जहां जा कर उस ने आत्मसमर्पण कर दिया. इस के बाद जो कुछ भी हुआ, पाठक ऊपर पढ़ चुके है.
मऊ से आजमगढ़ की दूरी ज्यादा नहीं है, इसलिए संगीता के मायके वाले खबर मिलते ही मऊ के लिए रवाना हो गए. 2 घंटे बाद संगीता का परिवार कोतवाली पहुंच गया. पूछताछ के दौरान संगीता के घर वालों ने पुलिस को बताया कि उन्हें डाक्टर और संगीता के संबंधों की जानकारी थी, पर उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि डाक्टर उन की बेटी के साथ ऐसा सुलूक करेगा.
संगीता की मां ने पुलिस को बताया कि उस ने कई बार बेटी से कहा था कि डाक्टर द्वारा परेशान किए जाने की शिकायत वह पुलिस से कर दे. लेकिन संगीता ने ऐसा नहीं किया.
संगीता सिंह की 12 वर्षीया बेटी मानसी सिंह जो कक्षा 6 की छात्रा थी ने भी पुलिस को बताया कि डा. दिनेश सिंह आए दिन उस की मां से पैसे मंगा करते थे और न देने पर मां को मारतेपीटते भी थे.
संगीता सिंह की छोटी बहन चंदन सिंह जो गाजीपुर में ब्याही है, ने शहर कोतवाली में अपनी बहन संगीता की हत्या की नामजद रिपोर्ट दर्ज कराते हुए डा. दिनेश सिंह पर आरोप लगाया कि पैसे के लेनदेन के कारण डाक्टर ने बहन की हत्या की है.
संगीता के परिवार वालों से यह भी पता चला कि संगीता के पहले पति राणाप्रताप सिंह की आदतों में कोई बदलाव नहीं आया है और वह आज भी एक मामले में जेल में बंद है. 10 सालों के बीच उस ने कभी भी संगीता को वापस लाने का न तो प्रयास किया और न ही उसे किसी प्रकार की हानि ही पहुंचाई.
उधर डा. दिनेश सिंह जिसे संगीता ने अपना सर्वस्व सौंपा उस ने ही उसे मौत की नींद सुला दिया. संगीता सिंह बेटी के भविष्य को ले कर चिंतित थी और उस के सुनहरे भविष्य के लिए अपने आपराधिक छवि वाले पति का साथ छोड़ कर मऊ आ कर संघर्ष कर रही थी.
मानसी के भविष्य की वजह से ही उस ने विपरीत परिस्थितियों में डा. दिनेश सिंह से समझौता कर के उन के साथ रहना स्वीकार किया और बेटी की परवरिश करती रही. लेकिन अब उस की मौत के बाद मानसी के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है. फिलहाल मानसी अपनी नानी के साथ आजमगढ़ से रह रही है. UP Love Crime Story
— 2014 में प्रकाशित






