Azamgarh Hostage Crisis. अपने घर में हो रहे महामृत्युंजय जाप से नाराज आजमगढ़ के अरविंद सिंह ने पत्नी, बेटे और 2 पुजारियों को गोली मारी फिर 3 बच्चों को बंधक बना लिया. सनक, अंधविश्वास और खूनी जुनून का यह खौफनाक खेल घंटों चला. आखिर पुलिस और कमांडो के बीच 5 घंटे तक ऐसा क्या ड्रामा चला कि लोगों के साथसाथ पुलिस की भी सांसें थम गई थीं?
आजमगढ़ में अहरौला थाना क्षेत्र के शंभुपुर गांव के निवासी अरविंद सिंह के घर में थोड़ी चहलपहल थी. उन की पत्नी बबीता सिंह ने अपने घरपरिवार की सुखशांति के लिए 5 दिनों तक चलने वाले महामृत्युंजय जाप का आयोजन किया था.
उन दिनों अरविंद अपने कामधंधे के सिलसिले में दूसरे शहर गया हुआ था. अनुष्ठान और जाप उस की अनुपस्थिति में 2 पुरोहितों द्वारा करवाया जा रहा था, जिस में परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठ कर हिस्सा लेते थे.
अरविंद सिंह की मां शमला देवी और पत्नी बबीता घर में शांति के लिए पूजा करवा रही थीं. अरविंद इस का विरोध कर रहा था. इसे ले कर कई दिनों से घर में विवाद चल रहा था. इसी बीच जब अरविंद किसी काम से बाहर चला गया, तब 5 दिवसीय पूजा का आयोजन शुरू किया गया था.
22 सितंबर को पूजा का चौथा दिन था. शाम के 6 बजे थे. उस रोज के पूजा की पूर्णाहुति होने वाली थी. दोनों पुरोहित हवन के बाद आरती की तैयारी कर रहे थे. बबीता उन्हें मदद कर रही थी. आरती के लिए थाली को साफ करने के लिए कोई सूखा कपड़ा लाने के लिए कमरे में चली गई थी.
वह कमरे में ही थी कि तभी उसे पति की आवाज सुनाई दी. वह पूजापाठ के बारे में कुछ बोल रहा था. बबीता चौकन्नी हो गई. बाहर उस का पति गरजती हुई आवाज में पुरोहितों को डांट रहा था. उस ने साफसाफ गुस्से में बोलते पति की बात सुनी, ”तुम्हें मैं ने मना किया था, फिर यहां क्यों आए?’’
”जी, मालकिन ने बुलाया था.’’ एक पुरोहित बोला.
”मुझ से पूछे बगैर कैसे आ गए?’’ अरविंद बोला.
”पूजा होगी…घर में सुखशांति आएगी… खुशहाली होगी…’’ दूसरे पुरोहित ने शांति से जवाब दिया.
”कैसी शांति? कैसा सुख?…मुझे पूजापाठ के ढकोसले पर विश्वास नहीं है. तुम लोग साले ठग हो… भोलीभाली औरतों को झांसा देते हो. अपना उल्लू सीधा करते हो हरामखोर… हरामजादे कहीं के! …चल भाग जा यहां से…’’ अरविंद गुस्से में बोला.
वह बदतमीजी पर उतर आया था. उस की हरकत और बोलने का लहजा देख कर दोनों पुरोहित तिलमिला गए. वे बोले, ”देखो यजमान, तुम्हें पूजापाठ और देवीदेवता में विश्वास नहीं है, सनातन धर्म पर आस्था नहीं है… तुम नास्तिक विचार के हो, इस का मतलब यह नहीं है कि हम विद्वान ब्राह्मणों को गाली दोगे.’’
तब तक बबीता कमरे से पूजास्थल पर आ गई थी. पति का तमतमाया हुआ चेहरा देख कर वह डर गई थी. वह पति के गुस्से से वाकिफ थी. उस का यह रूप पहले भी देख चुकी थी. वह एकदम सनकी इंसान था.
उस ने चुप रहना ही बेहतर समझा. वह जानती थी कि उस के कुछ भी बोलने का मतलब उस के गुस्से को और भड़का देना था.
किंतु ऐसा सोचना उस की भूल थी. अरविंद पूजास्थल और वहां पड़ी सामग्री को तितरबितर करने लगा था. पास बैठे उस के बच्चे सहम गए. वे उठ कर वहां से दूर जा कर खड़े हो गए. उस की हरकतों को दोनों पुरोहितों ने रोकने की कोशिश की. एक ने हाथ पकड़ लिया.
उन के हाथ पकड़ते ही अरविंद और भी गुस्से में आ गया. उस ने हाथ झटक दिया और पूजा करा रहे 60 वर्षीय महेंद्र पाठक, 50 वर्षीय अखिलेश मिश्रा और उन के 20 वर्षीय पुत्र हिमांशु मिश्रा को गालियां देने लगा.
बात बिगड़ती देख कर मां शामली देवी ने बेटे को समझाया. बबीता बोल पड़ी, ”अरेअरे! यह क्या कर रहे हैं?’’
”बिलकुल सही कर रहा हूं…इन हरामखोरों को सबक सिखाना जरूरी है…कहां है तुम लोगों का आधार कार्ड लाओ, दिखाओ!’’ अरविंद बोला.
इस दौरान पुरोहितों ने मोबाइल से इस का वीडियो बनाना शुरू कर दिया. उस ने वीडियो बनाने से मना किया और तुरंत घर में रखी लाइसैंसी रिवौल्वर निकाल लाया.
”नहींनहीं! मत करो ऐसा, हमें पाप लगेगा…’’ बबीता के बोलते ही बीच में एक पुरोहित बोल पड़ा, ”हांहां, घोर पाप लगेगा… तुम्हारी पूजा भंग हो गई. हम ब्राह्मणों को घोर अपमान हुआ है…मैं श्राप देता हूं…’’
यह कहना था कि अरविंद ने तुरंत फायर कर दिया. एक वृद्ध पुरोहित वहीं गिर पड़ा. दूसरा बचता हुआ भागा. बबीता ने पति को पकडऩे की कोशिश की, लेकिन गुस्से से भरे अरविंद ने एक फायर उस पर भी कर दिया.
बबीता हो गई धराशाई
बच्चे भी छिपने के इधरउधर भागने लगे. उन्हें अरविंद ने झट से दबोच लिया और पास के ही एक कमरे में अपने साथ ले कर चला गया और कमरा अंदर से बंद कर लिया. इस गोलीबारी से आसपड़ोस में हंगामा हो गया.
बबीता, महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा को गोली लगने के बाद भी अरविंद किसी और पर गोली चलाता, इस से पहले हिमांशु शोर मचाते हुए घर से बाहर भाग निकला.
पूजा में बैठी उस की 22 वर्षीय भतीजी वर्षा सिंह, 17 वर्षीय रिया और मां शमला देवी भी मौका पा कर बाहर निकल गईं. फायरिंग की आवाज सुन कर आसपास के लोग मौके पर जुट गए. इस के बाद अरविंद अपने बच्चों को ले कर एक कमरे में चला गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया.
बाहर भागे लोगों ने इस की सूचना पुलिस को दी. कुछ देर में ही पहुंची पुलिस ने मकान की घेराबंदी कर दी. देर शाम तक आरोपी बच्चों के साथ कमरे के अंदर था और पुलिस उसे बाहर निकालने का प्रयास कर रही थी. बच्चों के कमरे में होने के कारण पुलिस अधिकारी ने बेहद सावधानी के साथ काररवाई करने लगी.
अरविंद ने बच्चों को बंधक बना लिया था. वह पुलिस की कोई बात सुनने को राजी नहीं था. पुलिस बंधक बनाए गए बच्चों को बचाने की कोशिश में जुटी हुई थी. इस औपरेशन के दौरान अरविंद द्वारा पुलिस पर भी गोली चलाई गई.
करीब 5 घंटे तक चले इस औपरेशन में पुलिस को सफलता तब मिली, जब उस ने एनकाउंटर में अरविंद को मार गिराया. इस दौरान उस के 10 साल के बेटे की भी चोटों के कारण मौत हो गई, जिसे उस ने घटना के दौरान गोली मारी थी.
इस तरह उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक ही परिवार से जुड़ी गोलीबारी की घटना में 5 लोगों की मौत हो गई.
इस घटना के बारे में पुलिस ने अरविंद सिंह की बुजुर्ग मां से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि यह घटना उस समय हुई, जब घर में पूजापाठ चल रहा था. इस पूजा में अरविंद सिंह की रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं थी. पत्नी को भी पूजा में बैठने नहीं देता था.
जांच में पाया गया कि अरविंद सिंह ने अपनी लाइसेंसी रिवौल्वर से पुजारियों पर हमला किया था.
इस के बाद वह अपने 3 बच्चों को ले कर घर के एक कमरे में बंद हो गया. इस दौरान हालात काबू करने के लिए पुलिस ने एसओजी के कमांडो भी बुला लिए थे.
कई घंटों तक अरविंद को सरेंडर करने के लिए कहा गया था. पुलिस के पहुंचने पर आरोपी बच्चों को घर के एक कमरे में बंद कर पुलिस और परिजनों को गोली मारने की धमकी दी थी. उस ने अपने बेटे को भी गोली मार दी और पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी काररवाई की.
अरविंद सिंह के बारे में ग्रामीणों का कहना था कि वह पिछले 2-3 महीने से परेशान चल रहा था. चिड़चिड़ा हो गया था. लड़ाईझगड़ा करता रहता था. मानसिक रूप से परेशान था और उस का इलाज भी चल रहा था. इन्हीं वजहों से उस की पत्नी घर पर 5 दिनों का एक पूजापाठ कर रही थी.
मृत पुजारी महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा थे. पुलिस ने सभी मृतकों का पोस्टमार्टम करवाया.
इस हत्याकांड में मारे गए पुजारी की पहचान महेंद्र पाठक के रूप में हुई है. इस घटना के दौरान भागने में सफल रहे पुजारी की जान बच गई.
इस पूरे मामले के बारे में आजमगढ़ एसएसपी डा. अनिल कुमार ने काफी सूझबूझ दिखाई. बंद कमरे से गोली चलने की आवाज आने के बाद पुलिस टीम ने तुरंत दरवाजा तोड़ा और दखल दिया.
इस के बाद आरोपी अरविंद ने पुलिस पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं. पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी काररवाई की, जिस में आरोपी को गोली लग गई. अस्पताल ले जाने पर डौक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इस के साथ ही घायल बेटे को भी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर चोट के कारण बच्चे की भी मौत हो गई. पुलिस को अरविंद की 2 बेटियों को बचाने में सफलता मिली. उन्हें अस्पताल में भरती करवा दिया गया.
इस पूरे मामले में 27 सितंबर, 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, आजमगढ़ के डीएम ने आरोपी की पुलिस मुठभेड़ की मजिस्ट्रेटी जांच के लिए बूढऩपुर के एसडीएम को जांच अधिकारी नियुक्त किया है.
2 बच्चियां एसएसपी ने लीं गोद
एक ही परिवार के सभी मर्दों की मौत हो जाने के बाद वहां सिर्फ औरतें बच गईं थीं. उन में एक बूढ़ी मां थी तो 2 अनाथ बच्चियां भी थीं— 5 साल की परी और 7 माह की शांभवी. बच्चियां भी गोलीबारी में जख्मी हो गई थीं, लेकिन उन्हें डौक्टर ने बचा लिया.
उस के बाद परिवार के सदस्यों के सामने विकट समस्या थी, उन के लालनपालन और भविष्य की. ऐसी परिस्थिति में आजमगढ़ के एसएसपी डा. अनिल कुमार मसीहा बन कर उन के सामने आए. उन्होंने आरोपी की दोनों अनाथ बच्चियों को गोद ले लिया. कहा, ‘अब मेरी 3 बेटियां हैं.’
उन्होंने दोनों बच्चियों के पालनपोषण की जिम्मेदारी लेने की घोषणा करते हुए कहा कि वह उन के मातापिता की भूमिका निभाएंगे. अब से उन की 3 बेटियां और एक बेटा है. यही नहीं, उन्होंने पीडि़त बच्चियों के लिए अपना एक माह का वेतन देने की भी घोषणा की. इस के बाद उन्होंने जिले के सभी पुलिसकर्मियों से भी अपनी एक दिन की तनख्वाह देने की गुजारिश की.
अंधविश्वास का असर
इस समूहिक हत्या कांड के पीछे की कहानियों में मुख्य तौर पर आरोपी की बिगड़ी हुई मानिसकता, पुराना खूनी विवाद और अंधविश्वास की बात सामने आई.
परिजनों का मानना है कि अरविंद के सगे भाई सुनील सिंह, जो मुंबई में बाला साहेब ठाकरे के पीआरओ रह चुके थे, की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड में अरविंद के चचेरे भाई मनीष का नाम सामने आया था और उसे इस मामले में जेल जाना पड़ा था.
सुनील सिंह की पत्नी के भाई सूरज सिंह का कहना है कि परिवार में पहले से ही विवाद की स्थिति थी. अरविंद की पत्नी और मनीष के बीच कथित प्रेम संबंध की चर्चा थी. इस की जानकारी मिलने के बाद सुनील ने मनीष के खिलाफ चोरी और छेडख़ानी समेत कई मुकदमे दर्ज करवा दिए थे. इन मामलों में मनीष और अवनीश को अदालत से सजा भी हुई थी.
बाद में वर्ष 2019 में दोनों जमानत पर बाहर आ गए थे. इसी दौरान सुनील सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. हत्या के मामले में दोनों को फिर जेल जाना पड़ा था. वे करीब डेढ़ माह पहले ही जेल से बाहर आए थे. पुराने विवाद और हत्या के मामले की वजह से परिवार में तनाव बन गया था. इस पूरे घटनाक्रम ने परिवार के सदस्यों को मानसिक रूप से परेशान कर रखा था.
इसी बीच अरविंद की पत्नी बबीता और उस की मां ने कुछ पंडितों से संपर्क किया. परिजनों के अनुसार, पंडितों ने कथित तौर पर कहा कि सुनील सिंह की आत्मा परिवार को परेशान कर रही है. उन्हें पूजापाठ करवाने की सलाह दी. इस के बाद पूजापाठ कराने का निर्णय लिया गया और पंडितों को घर बुलाया गया.
पूजापाठ की शुरुआत हो चुकी थी, जबकि अरविंद इस पूजापाठ का विरोध कर रहा था. उस ने पंडितों को घर नहीं आने की चेतावनी भी दी थी. इस के बावजूद घटना की शाम जब वह बाजार से घर लौटा तो वहां पूजापाठ होता देख वह नाराज हो गया. इस का उस की पत्नी ने विरोध किया.
विरोध के बाद पतिपत्नी के बीच विवाद बढ़ गया. विवाद के दौरान अरविंद ने अपनी पत्नी से कहा कि उस के चक्कर में ही उस के भाई सुनील की हत्या हुई थी और अब वह ड्रामा कर रही है. इसी विवाद के दौरान अरविंद ने कथित तौर पर पिस्टल निकाल ली थी.
देखते ही देखते घरेलू विवाद हिंसक हो गया और अरविंद ने अपनी पत्नी को गोली मार दी. घटना के बाद घर में अफरातफरी मच गई. घटना की सूचना पुलिस को दी गई और मामले की जांच शुरू की गई.
इस घटना के पीछे पारिवारिक विवाद, वर्ष 2019 के हत्याकांड और उस के बाद पैदा हुए तनाव की भूमिका की जांच महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है. उपजिलाधिकारी (बूढऩपुर) चंद्र प्रकाश सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है.
वैसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से दोनों मृतक पुरोहितों के परिवारों को 5-5 लाख रुपए और आरोपी अरविंद सिंह की दोनों बेटियों को ढाई-ढाई लाख रुपए देने की घोषणा की गई है.
महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा के परिजन जिलाधिकारी प्रत्येक परिवार के लिए 1 करोड़ रुपए मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग की है. Azamgarh Hostage Crisis






