बेंगलुरु पहुंचे अर्चना के मातापिता…
13 मार्च, 2023, बेंगलुरु के साउथ डिवीजन के डीसीपी सी.के. बाबा अपने औफिस में बैठे हुए एक फाइल देख रहे थे, तब उन के औफिस में एक पुरुष और महिला बदहवास हालत में पहुंचे. दोनों की बदहवास हालत देख कर सी.के. बाबा ने फाइल बंद कर दी और हैरानी से पूछा, ‘‘आप कौन हैं और इतने परेशान क्यों हैं?’’
“मेरा नाम देवनाथ धीमान है, यह मेरी पत्नी है. मैं बनखेड़ी जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश क्षेत्र का रहने वाला हूं.’’
“अरे, आप इतनी दूर से यहां मेरे औफिस में आए हैं.’’ चौंक कर सी.के. बाबा अपनी कुरसी पर सीधे हो गए. देवनाथ के चेहरेपर नजरें जमा कर उन्होंने पूछा, ‘‘इस की वजह बताएंगे.’’
“सर, मेरी बेटी का नाम अर्चना है. वह बेंगलुरु में श्री लक्ष्मी मंदिर रोड पर स्थित श्री रेणुका रेजीडेंसी में रहने वाले आदेश से मिलने के लिए 11 मार्च को दुबई से यहां आई थी. आदेश ने मुझे फोन कर के बताया है कि अर्चना ने उस के फ्लैट की चौथी मंजिल से कूद कर आत्महत्या कर ली है.
“सर, मेरी बेटी अर्चना एयर होस्टेस थी. वह दुबई एयरलाइंस में सर्विस कर रही थी. अर्चना बहादुर लडक़ी थी, शिक्षित थी. वह आत्महत्या जैसा कदम कदापि नहीं उठा सकती. मुझे पूरा यकीन है कि मेरी बेटी अर्चना को आदेश ने धक्का दे कर हत्या का षडयंत्र रचा है, आप उसे गिरफ्तार कीजिए.’’
“अर्चना यहां बेंगलुरु में आदेश से मिलने क्यों आई थी, उस का आदेश के साथ क्या संबंध था?’’ डीसीपी सी.के. बाबा ने पूछा.
“अर्चना बहुत संस्कारी और समझदार लडक़ी थी सर. पता नहीं कैसे वह आदेश के प्रेमजाल में फंस गई. आदेश ने न जाने क्या जादू कर दिया था कि वह उस के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगी थी. दुबई में एयरलाइंस में चयन होने पर वह वहां चली गई थी. अर्चना मुझे सब खुल कर बता देती थी. उस ने आदेश की भी विडियो काल के द्वारा मुझ से पहचान करवाई थी.’’
“हूं.’’ सी.के. बाबा ने गंभीरता से सिर हिलाया, ‘‘मामला गंभीर है, मैं खुद इस की जांच करूंगा.’’ कहने के बाद डीसीपी ने घटनास्थल से संबंधित पुलिस स्टेशन कोरमंगला से संपर्क कर के वहां के आईपी (इंसपेक्टर औफ पुलिस) से बात की तो आईपी ने बताया, ‘‘सर, आदेश नाम के युवक ने 11 मार्च की रात को ही थाने में आ कर रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी. उस ने बताया था कि अर्चना ने शराब पी रखी थी. बालकनी में उस ने बैलेंस खो दिया, इस से वह नीचे गिर गई और उस की मौत हो गई. वह अर्चना को लोगों की मदद से सेंट जोंस अस्पताल ले कर गया था, जहां डाक्टरों ने जांच के बाद अर्चना को मृत घोषित कर दिया था. हम ने लाश कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी है सर.’’
“क्या आप ने घटनास्थल पर जा कर जांच की है?’’ डीसीपी बाबा ने आईपी से पूछा.
“की है सर. आदेश के फ्लैट की बालकनी इतनी ऊंची है सर कि वहां से कोई व्यक्ति नीचे गिर ही नहीं सकता, यह एक्सीडेंटल डेथ का मामला नहीं लग रहा है सर. अर्चना नशे में थी, मेरा अनुमान है कि आदेश ने ही अर्चना को नीचे फेंका होगा. मैं पूरी घटना की बारीकी से जांच कर रहा हूं. मैं पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा हूं.’’
“आप इंतजार मत कीजिए, आदेश को पकड़ कर मेरे पास लाइए. उस ने गुनाह किया होगा तो यहां मैं कुबूल करवा लूंगा.’’
“ठीक है सर, दूसरी ओर से कोरमंगला थाने के आईपी ने कहा. डीसीपी सी.के. बाबा ने काल डिसकनेक्ट कर देवनाथ धीमान और उन की पत्नी को कक्ष में बैठा दिया. उन्हें अब आदेश को यहां लाने का इंतजार था. एक घंटे बाद ही आदेश को ले कर कोरमंगला थाने के आईपी अपनी पुलिस टीम के साथ वहां आ गए.
आदेश ने स्वीकार किया जुर्म…
आदेश को डीसीपी बाबा ने अपने सामने बिठाया और बहुत ही नरम लहजे में कहा, ‘‘तुम अच्छे घर के शिक्षित युवक हो, जवान हो, जवानी में प्यार भी हो जाता है, तुम ने सैकड़ों मील दूर की लडक़ी अर्चना को कैसे प्यार के जाल में फंसाया, फिर उस की हत्या कर दी, मुझे यही जानना है. यदि सचसच बताओगे तो तुम्हारे हित में होगा, वरना सच खुलवाने के लिए हमारे पास बहुत उपाय होते हैं.’’
आदेश ने गहरी सांस ली और भावुक स्वर में बोला, ‘‘मैं अर्चना को बहुत प्यार करता था सर. डेटिंग ऐप पर अर्चना ने मेरी फै्रंड रिक्वेस्ट स्वीकार की थी. पहले हम अच्छे दोस्त बने, फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गई. मेरे लिए अर्चना कांगड़ा से यहां रहने आ गई. हम लिवइन रिलेशन में रहने लगे. प्यार में हम ने जिस्मानी संबंध भी बना लिए. अर्चना मुझ से शादी करना चाहती थी. इस के लिए मैं भी राजी था कि एक दिन…’’
आदेश ने रुक कर सांसें दुरुस्त की फिर बताने लगा, ‘‘अर्चना दुबई में नौकरी कर रही थी. 2-3 दिन की छुट्टी मिलने पर वह अचानक बेंगलुरु आ गई. मुझे सरप्राइज देने के लिए अपना बैग बरामदे में रख कर वह दबे पांव कमरे में आ गई. उस समय मेरे कंप्यूटर पर एक कालगर्ल मुझे प्रपोज कर रही थी.
“उस वक्त उस लडक़ी के शरीर पर वस्त्र नहीं थे. गरमी के कारण मैं ने भी कमीज उतार रखी थी. सर, वह कंप्यूटर की अश्लील साइट थी. अर्चना ने समझा कि मैं किसी लडक़ी के साथ चैटिंग कर रहा हूं. उस ने मुझे बुराभला कहा और बैग उठा कर अपनी किसी सहेली के यहां चली गई. वहीं से वह दुबई चली गई.
“वह रूठी हुई थी, मेरा फोन भी नहीं उठा रही थी. 11 मार्च को वह अपने आप मेरे पास आ गई. उस दिन फोरम माल में शापिंग की, एक फिल्म देखी और व्हिस्की की बोतल खरीद कर फ्लैट पर आ गए. अर्चना ने और मैं ने बालकनी में बैठ कर शराब पी. अर्चना ने ज्यादा पी ली थी, वह मुझ से उसी लडक़ी की चैटिंग वाली बात पर लडऩे लगी तो मुझे गुस्सा आ गया.
“मैं ने उसे उठा कर बालकनी से फेंक दिया. मैं नशे में था, मुझे होश आया तो मैं नीचे भागा. नीचे अर्चना लहूलुहान पड़ी थी. मैं आसपास रहने वाले लोगों की मदद से उसे सेंट जोंस अस्पताल ले गया, जहां डाक्टर ने अर्चना को मृत घोषित कर दिया. अर्चना की हत्या कर के मैं पछता रहा हूं, वह मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी. मैं ने उसे खो दिया.’’
आदेश द्वारा जुर्म कबूल करने के बाद कोरमंगला थाने में अर्चना के पिता देवनाथ धीमान की ओर से आदेश के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत केस दर्ज कर लिया गया. फिर पूछताछ के बाद उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.
कथा लिखने तक पुलिस आदेश के खिलाफ ठोस सबूत जुटा रही थी ताकि उसे कोर्ट से कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जा सके.


