एक हत्या ऐसी भी

कत्ल का मुकदमा चल रहा हो तो उस का फैसला जानने के लिए काफी लोग उत्सुक रहते हैं. 12 मार्च, 2018 को चंडीगढ़ के सेशन जज बलबीर सिंह की अदालत के भीतरबाहर तमाम लोग एकत्र थे. वजह यह थी कि उन की अदालत में चल रहा कत्ल का एक मुकदमा अपने आखिरी पड़ाव पर आ पहुंचा था. लोग इस केस का फैसला सुनने को बेकरार थे.

इस केस की शुरुआत कुछ यूं हुई थी.

उस दिन किसी केस की छानबीन के सिलसिले में चंडीगढ़ के थाना सेक्टर-31 की महिला एसएचओ जसविंदर कौर अपने औफिस में मौजूद थीं. रात में ही करीब 45 वर्षीय शख्स ने आ कर उन से कहा, ‘‘मैडम, मेरा नाम दुर्गपाल है और मैं रामदरबार इलाके के फेज-2 के मकान नंबर 2133 में रहता हूं.’’

‘‘जी बताइए, थाने में कैसे आना हुआ, वह भी इस वक्त?’’ इंसपेक्टर जसविंदर कौर ने उस व्यक्ति को गौर से देखते हुए पूछा.

‘‘ऐसा है मैडमजी,’’ खुद को दुर्गपाल कहने वाले शख्स ने बताना शुरू किया, ‘‘हम 4 भाई हैं और मैं सब से बड़ा हूं. मेरी मां शारदा देवी मेरे से छोटे भाई राजबीर के साथ ग्राउंड फ्लोर पर रहती हैं. फर्स्ट फ्लोर पर मेरा सब से छोटा भाई विजय रहता है. मैं और तीसरे नंबर का भाई उदयवीर अपनीअपनी फैमिली के साथ टौप फ्लोर पर रहते हैं.’’

‘‘ठीक है, आप समस्या बताइए.’’

‘‘मैडम, हमारे घर के टौप फ्लोर पर 4 कमरे हैं. वहां सीढि़यों की तरफ वाले 2 कमरे मेरे पास हैं और उस के आगे वाले 2 कमरे मेरे भाई उदयवीर के पास.’’

‘‘आप के मकान और कमरों की बात तो हो गई, वह बताइए जिस के लिए आप को थाने आना पड़ा?’’ थानाप्रभारी जसविंदर कौर ने अपना लहजा थोड़ा बदला. लेकिन उस शख्स ने जैसे कुछ सुना ही नहीं.

उस ने अपनी बात बेझिझक जारी रखी, ‘‘मेरा भाई उदयबीर अपनी पत्नी प्रतिभा के साथ रहता था. दोनों की शादी को अभी कुल डेढ़ साल हुआ है. 10 जून, 2017 को मेरे पिता जंडियाल सिंह की मौत हो गई थी. कल मैं और मेरे तीनों भाई कुछ रिश्तेदारों के साथ हरिद्वार में पिताजी की अस्थियों का विसर्जन कर के रात करीब साढ़े 8 बजे घर लौटे थे.’’

‘‘आगे बताइए,’’ अब इंसपेक्टर जसविंदर कौर ने दुर्गपाल की बात में रुचि लेते हुए कहा.

‘‘हम लोग थकेहारे थे. घर आ कर खाना खाने के बाद सो गए थे. मैं घर के टौप फ्लोर पर बने कमरों के आगे गैलरी में सो रहा था. रात के एक बजे जब मैं गहरी नींद में था, तभी शोरशराबा सुन कर अचानक मेरी आंखें खुल…’’

दुर्गपाल की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि इंसपेक्टर जसविंदर कौर ने हाथ के इशारे से उसे रोक दिया. दरअसल, थानाप्रभारी के लिए कंट्रोलरूम से फोन आया था. इंसपेक्टर जसविंदर ने काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से पीसीआर कांस्टेबल ओमप्रकाश था.

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उस ने कहना शुरू किया, ‘‘मैडम, रामदरबार इलाके से किसी के छत से गिराने की काल आई है. मौके पर पहुंच कर पता चला कि छत से गिरने वाले को अस्पताल ले जाया चुका था, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उसे गिराने वाला फरार है. शुरुआती छानबीन में ही मामला कत्ल का लग रहा है, जिस के पीछे की वजह इश्क हो सकती है. केस आप के ही इलाके का है.’’

‘‘मरने वाले और मारने वाले के नाम वगैरह के बारे में पता चला?’’ इंसपेक्टर जसविंदर ने पूछा.

‘‘जी मैडम, सब पता कर लिया है. मरने वाले का नाम उदयवीर है और उसे छत से गिरा कर मारा है उस की पत्नी के कथित प्रेमी सतनाम ने.’’

‘‘ओके, तुम लोग अभी वहीं रुको, मैं पहुंचती हूं वहां.’’ कहते हुए इंसपेक्टर जसविंदर ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया.

उन्होंने सामने बैठे दुर्गपाल की ओर देख कर पूछा, ‘‘आप के भाई उदयवीर को सतनाम नामक शख्स ने छत से नीचे गिरा कर मार दिया और आप…’’

‘‘जी मैडम.’’ इंसपेक्टर जसविंदर की बात पूरी होने से पहले ही दुर्गपाल ने कहा.

‘‘तुम वहां रुकने के बजाय थाने चले आए?’’

‘‘मैडम, मैं ने तुरंत 100 नंबर पर फोन कर के घटना के बारे में बता दिया था. साथ ही आटोरिक्शा से भाई को सेक्टर-32 के सरकारी अस्पताल में पहुंचा भी दिया था. फिर यह सोच कर कि इस तरीके से पुलिस पता नहीं कब पहुंचेगी, मैं अपने दूसरे भाइयों को वहीं रुके रहने को बोल कर थाने चला आया.’’

‘‘कोई बात नहीं, पुलिस ने वहां पहुंच कर अपनी काररवाई शुरू कर दी है. तुम भी चलो हमारे साथ.’’ इस के बाद इंसपेक्टर जसविंदर कौर सबइंसपेक्टर राजवीर सिंह और सिपाही प्रमोद व नवीन के अलावा दुर्गपाल सिंह को साथ ले कर सरकारी गाड़ी से रामदरबार की ओर रवाना हो गईं.

घटनास्थल पर काफी भीड़ एकत्र थी. पीसीआर वाले भी वहीं थे. उन से जरूरी जानकारी लेने के बाद उन्हें वहां से रुखसत कर दिया गया. साथ ही सिपाही नवीन को वहां तैनात कर के इंसपेक्टर जसविंदर कौर अन्य लोगों के साथ सेक्टर-32 के सिविल अस्पताल चली गईं.

वहां उदयवीर को पहले ही मृत घोषित किया जा चुका था. थाना पुलिस ने अपनी आगे की काररवाई शुरू कर दी. एसआई राजबीर सिंह शव का पंचनामा बनाने लगे और जसविंदर कौर ने दुर्गपाल से उस की तहरीर ले कर एफआईआर दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी. दुर्गपाल ने अपनी तहरीर के शुरुआती हिस्से में वही सब दोहराया, जो वह पहले ही थाने में थानाप्रभारी जसविंदर कौर को बता चुका था. आगे उस ने जो कुछ बताया, वह कुछ इस तरह था—

शोरशराबा सुन कर जब मेरी आंखें खुलीं तो मैं ने देखा कि बहलाना में रहने वाला एक लड़का सतनाम सिंह अपने हाथ में बेसबाल बैट पकड़े मेरे भाई उदयवीर से लड़ता हुआ छत पर जा पहुंचा था. वह उदयवीर से मारपीट करते हुए उसे घसीट कर छत पर ले गया था. बीचबीच में उदयवीर भी उस का मुकाबला करने का प्रयास करते हुए उस पर हाथपैर से वार कर रहा था.

यह सब देख मैं भी तेजी से उन के पीछे छत पर चला गया. तब तक वे दोनों लड़ते हुए कौर्नर के मकानों की छत पर जा पहुंचे थे. ऐसा इसलिए था कि हमारी लाइन के मकानों व बैकसाइड वाले मकानों की छतें आपस में मिली हुई हैं. जिस वक्त वे दोनों लड़ते हुए मकान नंबर 2088 की छत पर पहुंचे तो मैं भी उन्हें छुड़ाने के लिए वहां जा पहुंचा. अभी मैं उन से थोड़े फासले पर था, जब मेरे कानों में सतनाम की आवाज पड़ी.

वह मेरे भाई से कह रहा था कि प्रतिभा हमेशा से उस की प्रेमिका रही है, उसे मजबूरी में उस से शादी करनी पड़ी थी. अब वह उसे आजाद कर दे, वरना वह उस की (मेरे भाई उदयवीर की) जान ले लेगा.

इस से पहले कि मैं भाई की मदद के लिए उस के पास पहुंच पाता, वह दीवार के एक कोने की तरफ हुआ और तभी सतनाम ने मौका देख कर उसे धक्का दे कर नीचे गिरा दिया. सतनाम सिंह ने मेरे भाई की पत्नी प्रतिभा के साथ लव अफेयर के चलते मेरे भाई को रास्ते से हटाने के लिए जान से मार दिया. उस के खिलाफ मामला दर्ज कर के सख्त काररवाई की जाए.

उसी रोज यह प्रकरण थाना सेक्टर-31 में भादंवि की धाराओं 302 एवं 456 के तहत दर्ज हो गया. यह 14 जून, 2017 की बात है. मौके की अन्य काररवाइयां पूरी कर के थाने लौटने के बाद पुलिस ने सतनाम सिंह को काबू करने की योजनाएं बनानी शुरू कीं. वारदात को अंजाम देने के बाद वह मौके से फरार होने में सफल हो गया था. लेकिन अपराध कर के भागने के 8 घंटे के भीतर ही पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया.

अगले दिन अदालत से उस का कस्टडी रिमांड हासिल कर के उस से विस्तार से पूछताछ की गई. इस पूछताछ में उस ने बताया कि वह चंडीगढ़ के गांव बहलाना के मकान नंबर 74 का रहने वाला था. यहीं की रहने वाली लड़की प्रतिभा से उसे प्यार हो गया था. मगर यह एकतरफा प्यार था, जिस में प्रतिभा ने कभी कोई रुचि नहीं दिखाई थी.

सतनाम सिंह ने उसे अपनी प्रेमिका घोषित करते हुए उस का पीछा नहीं छोड़ा था. इस से प्रतिभा खुद तो परेशान थी ही, उस के घर वाले भी फिक्रमंद होने लगे थे. उन के मन में यह भय समा गया था कि कहीं सतनाम उन की बेटी को उठा न ले जाए. इस की वजह यह भी थी कि सतनाम अपराधी किस्म का लड़का था. आखिर प्रतिभा के घर वालों ने रामदरबार के रहने वाले उदयवीर से उस की शादी कर दी.

सतनाम के बताए अनुसार प्रतिभा के घर वालों का डर एकदम सही निकला. वह वाकई उन की लड़की को अपहृत करने के प्रयास में था. यह अलग बात है कि अभी तक उसे सफलता नहीं मिल पाई थी. प्रतिभा की शादी के बाद तो उस के लिए यह काम और भी मुश्किल हो गया था.

देखतेदेखते इस शादी को डेढ़ साल गुजर गया. लेकिन सतनाम इस बीच प्रतिभा को भूल नहीं पाया. इस बीच उस ने एक दुस्साहस भरा काम यह भी किया कि उदयवीर से मिल कर उस से सीधे ही कह दिया, ‘‘प्रतिभा मेरी प्रेमिका थी और हमेशा रहेगी. तुम ने उस की मजबूरी का फायदा उठा कर उस की इच्छा के विरुद्ध शादी की है. तुम्हारी भलाई इसी में है कि उस से तलाक ले कर उसे मेरे हवाले कर दो, वरना मुझे तुम्हारा खून करना पड़ेगा.’’

उदयवीर ने इस बारे में अपने भाइयों को भी बताया और प्रतिभा से भी बात की. प्रतिभा ने पति को समझाया कि उस का सतनाम से प्रेमप्यार जैसा कभी कोई रिश्ता नहीं था. वह उस के पीछे पड़ कर नाहक उसे परेशान करता था. इस पर उदयवीर ने सतनाम को फोन कर के उसे लताड़ दिया.

बकौल सतनाम उस ने भी तय कर लिया कि आगे उसे कुछ भी करना पड़े, वह प्रतिभा को उठा ले जाएगा. बस, मौका मिलने भर की देर थी. यह मौका भी उसे जल्दी ही मिल गया. उदयवीर के पिता का देहांत हो गया और उन की अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने उसे अपने भाइयों व परिजनों के साथ हरिद्वार जाना पड़ा.

सतनाम ने पुलिस को बताया कि उसे 13 जून, 2017 की रात में प्रतिभा के घर पर अकेली होने की जानकारी मिली. आधी रात के बाद वह घर के पिछवाड़े से उस के पास जा पहुंचा. वहां जा कर देखा तो उस का पति भी उस की बगल में लेटा था. लेकिन सतनाम ने परवाह नहीं की और प्रतिभा के मुंह पर हाथ रख कर उसे कंधे पर लाद लिया. जब वह प्रतिभा को ले जाने लगा तो उदयवीर की आंखें खुल गईं. वह सतनाम पर झपटा तो प्रतिभा उस की पकड़ से छूट गई.

इस के बाद सतनाम और उदयवीर गुत्थमगुत्था हो गए. संभव था कि उदयवीर सतनाम पर हावी हो जाता और इस बीच उस के परिजन भी उस की मदद को आ जाते. लेकिन पता नहीं कैसे वहां पड़ा बेसबाल बैट सतनाम के हाथ लग गया और वह उसी से उदयवीर को पीटते हुए छत पर ले गया. वहां से सतनाम ने उसे नीचे गिरा दिया. वह मुंह के बल आ कर गिरा था.

सेक्टर-32 के सिविल अस्पताल के डा. मंडर रामचंद सने व डा. गौरव कुमार ने उदयवीर के शव का पोस्टमार्टम किया. उन्होंने उस के जिस्म पर छोटीबड़ी 10 चोटों का उल्लेख करते हुए मौत का कारण मानसिक आघात और फेफड़ों का बायां हिस्सा नष्ट होना बताया.

खैर, कस्टडी रिमांड की अवधि समाप्त होने पर पुलिस ने सतनाम को फिर से अदालत में पेश कर के न्यायिक हिरासत में बुड़ैल जेल भेज दिया गया. इस के बाद समयावधि के भीतर उस के विरुद्ध आरोपपत्र तैयार कर 8 गवाहों की सूची के साथ प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी गीतांजलि गोयल की अदालत में पेश कर दिया. इस के बाद यह केस सेशन कमिट हो कर चंडीगढ़ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलवीर सिंह की अदालत में विधिवत रूप से चला.

विद्वान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को गौर से सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों की गहराई से जांच करने के बाद बचावपक्ष के वकील व पब्लिक प्रौसीक्यूटर के बीच हुई बहस के मुद्दों पर भी पूरा ध्यान दिया.

बहस के दौरान पब्लिक प्रौसीक्यूटर राजेंद्र सिंह ने दूसरे की औरत को अपना बनाने की एवज में उस के पति का कत्ल करने को ले कर जहां इसे अमानवीय एवं घिनौना अपराध बताया, वहीं बचावपक्ष के वकील यादविंदर सिंह संधू ने अपनी दलील से अभियोजन पक्ष का रुख पलटने का प्रयास किया. वकील संधू का कहना था कि मृतक के पिता की मौत के बाद संपत्ति विवाद को ले कर उस का अपने भाइयों से झगड़ा हो गया था. उन्होंने ही उसे छत से गिरा कर मौत के घाट उतारा है. सतनाम सिंह को इस केस में नाहक फंसा दिया है.

लेकिन एक अलग बात यह भी रही कि जहां अभियोजन पक्ष की ओर से 8 गवाह अदालत में पेश हुए, वहीं बचावपक्ष एक गवाह भी पेश नहीं कर पाया. बहरहाल, माननीय न्यायाधीश बलवीर सिंह ने 12 मार्च, 2018 को अभियुक्त सतनाम सिंह को भादंवि की धाराओं 302 एवं 456 का दोषी करार देते हुए अपना फैसला सुना दिया. इस केस में दी जाने वाली सजा की घोषणा 14 मार्च, 2018 को की गई.

14 मार्च को दोषी को सजा सुनाए जाने से पहले सजा के मुद्दे को सुना गया. दोषी ने बताया कि उस की मां की मौत हो चुकी है और अपने वृद्ध पिता हरबंस सिंह का वही अकेला सहारा है. वैसे भी वह अपनी बीए की पढ़ाई कर रहा था, जो पूरी कर के उसे नौकरी की तलाश करनी थी. इसलिए उसे कम से कम सजा सुनाई जाए.

जज साहब ने यह सब शांति से सुना, मगर उसी दिन दोपहर बाद अपना 27 पृष्ठ का फैसला सुनाते हुए दोषी सतनाम सिंह को धारा 302 के तहत उम्रकैद व 5 हजार रुपए जुरमाने और धारा 456 के अंतर्गत एक साल कैद की सजा सुनाई. दोषी ने जुरमाना भरने में अपने को असमर्थ बताया तो उस की कैद की सजा में 6 महीने की बढ़ोत्तरी कर दी गई.

जिस दिन सतनाम सिंह को न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेजा गया था, तब से वह चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में ही बंद था. उस की जमानत नहीं हो पाई थी. अब उसे अदालत के फैसले के बाद फिर से उसी जेल में भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों एवं अदालत के फैसले पर आधारित

धोखे में लिपटी मौत ए मोहब्बत – भाग 3

उस समय सचमुच ममता घर पर अकेली थी और कमरे का दरवाजा बंद कर अपने काम में लगी हुई थी. तभी दरवाजे पर थपथपाने की आवाज उभरी, ‘‘कौन है बाहर, आती हूं.’’

मीठी सी आवाज शारिक के कानों से टकराई. वह कुछ न बोला, चुपचाप खड़ा रहा. ममता काम बीच में छोड़ दरवाजा खोलने के लिए आगे बढ़ी. उस ने दरवाजा खोला तो सामने शारिक खड़ा था, उस के दिल का राजकुमार. देखते ही उस की आंखें शारिक के चेहरे पर ठहर गईं तो शारिक भी ममता के गोरेगोरे मुखड़े पर खो गया. दोनों खड़ेखड़े अपलक एकदूसरे को देखे जा रहे थे.

ममता ने ही सन्नाटे को तोड़ा, ‘‘जी आप?’’

“हां जी, मैं. दरवाजे पर ही खड़ा रखेंगी, अंदर आने के लिए नहीं कहेंगी?’’

“ओह, नहीं. मैं तो भूल ही गई. आइए, अंदर आइए.’’

“जी शुक्रिया, जो मुझ नाचीज पर रहम आ गई.’’

“ऐसी बात नहीं है, क्या मैं आप को निर्दयी दिखती हूं.’’

“नहीं तो कौन कमबख्त कहता है कि आप निर्दयी हैं. सिर से पांव तक आप मोम ही मोम हैं.’’ शारिक ने ममता की तारीफ के पुल बांध दिए तो वह खिलखिला कर कर हंस पड़ी. फिर शारिक भी अपनी हंसी रोक नहीं पाया. ममता शारिक को कमरे के अंदर ले आई और बैड पर बैठा दिया और खुद उस के लिए चाय बनाने चली गई. जब वह किचन से लौटी तो उस के हाथ की ट्रे में 2 प्याली गरमागरम चाय थी. दोनों ने साथ बैठ कर चाय पी.

इसी बीच मौका देख कर शारिक ने दिल की बात उस से कह दी तो ममता भी अपने प्यार का इजहार किए बिना नहीं सकी. उस ने भी अपने प्यार का इजहार कर दिया, ‘‘मैं भी आप से प्यार करती हूं. आई लव यू शारिक.’’

“आई लव यू सो मच ममता, तुम जानती नहीं हो आज मेरे लिए कितनी बड़ी खुशी का दिन है. मैं अपनी खुशी का शब्दों में बयान नहीं कर सकता. मैं बहुतबहुत खुश हूं.’’ शारिक अपने दिल की बात प्रेमिका से कह कर वह बहुत ज्यादा उत्साहित था.  उस के बाद दोनों घंटों बैठे इधरउधर की बातें करते रहे. फिर शारिक अपने घर वापस लौट गया तो वह खुशी से नाच उठी थी. वह पहली बार जान सकी थी कि प्यार क्या होता है.

दिनरात वह अपने प्यार के बारे में सोचती रहती थी. हर घड़ी वह शारिक को अपने इर्दगिर्द महसूस करती थी. जब वह अपनी आखें बंद करती तो उसे ऐसा लगता था जैसे उस का प्यार उसी के सामने खड़ा हो. ममता शारिक से बेइंतहा प्यार करती थी. उस के प्यार में अंधी और पागलों की तरह दीवानी हो चुकी थी. इतनी दीवानी हो चुकी थी कि एक दिन भी उसे न देखे तो जल बिन मछली की तरह तड़पने लगती थी. न ही उसे भूख लगती थी और न प्यास और न ही आंखों में नींद होती. इतना प्यार करती थी वह शारिक से. दोनों मिल कर सुनहरे भविष्य के सपने अपनी आंखों में सजोए थे.

ममता ने अपने जीवन के जिस राजकुमार के सपने देखे थे, वह राजकुमार शारिक के रूप में उसे मिल गया था. शारिक से प्यार कर के ममता बहुत खुश थी. एक दिन उस ने अपने दिल की बात मां से बता दी.  यह जान कर चंपा देवी भी फूली नहीं समाई थी. उन की ओर से बेटी की पसंद पर ‘हां’ ही थी. ममता और शारिक का प्यार 2 सालों तक फूलों की तरह महकता रहा, लेकिन घटना से ठीक 6 महीने पहले यानी मई 2022 में शारिक के अतीत के बारे में ममता को कुछ ऐसी बातें पता चलीं कि उस का एक झटके में दिल टूट गया. शारिक पर जान छिडक़ने वाली ममता के दिल में उस के लिए नफरत भर गई.

प्रेमी की सच्चाई ने तोड़ दिया दिल

दरअसल, हुआ यह था कि एक दिन ममता ने शारिक को उस के ही घर में नमाज पढ़ते देख लिया. यह देख कर वह हैरान रह गई कि इतना बड़ा फरेब. जिस पर उस ने अंधा विश्वास किया था, उस ने अपने मजहब को छिपाया. बड़ा धोखा दिया है उस ने.  ममता को तब और दोहरा शौक लगा, जब उसे पता चला था कि शारिक पहले से ही शादीशुदा है. उस की पत्नी अपनी ससुराल बिहार के मधुबनी में रहती है तो ममता का दिल कांच की तरह चूरचूर हो गया और उस ने सारी बातें मां से कह सुनाईं. इस के बाद वह फूटफूट कर रोने लगी.

उसी दिन से उस ने शारिक से बातचीत करनी बंद कर दी थी और उस का फोन भी वह रिसीव नहीं करती थी. अचानक ममता में आए बदलाव से शारिक परेशान हो गया था. उसे नहीं पता था कि वह उस के मुसलिम और शादीशुदा होने वाली बात को जान चुकी है, इसीलिए उस ने अपना मुंह फेर लिया है. यहां तक कि शारिक जब उसे फोन करता था तो वह उस का काल भी रिसीव नहीं करती थी.

इस से शारिक बहुत परेशान हो गया था. वह ममता से एक बार बात कर उस की परेशानी और उस से बात न करने की वजह जानना चाहता था. ममता थी कि उस की शक्ल तक देखना पसंद नहीं करना चाहती थी. अगर कहीं रास्ते में उसे देखती थी तो वह रास्ता बदल देती थी. किसी तरह शारिक को जब ममता के अचानक मुंह फेर लेने वाली बात का पता कराया तो उस का शक सच निकला. ममता उस की सच्चाई जान चुकी थी. उस के सामने उस की कलई खुल चुकी थी. फिर भी वह उस से मिलना चाहता था, लेकिन वह उस से मिलने से साफ मना कर चुकी थी.

बदले की भावना ने लिया जन्म

ममता के इस व्यवहार ने शारिक के दिल में उस के लिए बदले की भावना ने जन्म ले लिया. उस के मन में ममता के लिए नफरत का जहर भर गया था और उस ने ठान लिया कि अगर वह मेरी नहीं हो सकती है तो वह किसी और की भी नहीं हो सकती. उसे अब जीने का कोई हक नहीं है, उसे तो अब मरना ही होगा.

शारिक ने ममता को मारने की पूरी प्लानिंग बना ली थी. प्लानिंग की पहली कड़ी में उस ने सब से पहले अपना किराए का कमरा चेंज कर दिया और कहीं और जा कर रहने लगा. जहां उस के ठिकाने का पता किसी और को नहीं था. वहां से शारिक ममता पर नजर रखता था कि कब वह घर पर अकेली मिले और वो अपना इंतकाम पूरा कर सके.  आखिरकार उसे वह मौका 19 नवंबर, 2022 की दोपहर में मिल ही गया, जिसे वह महीनों से जोह रहा था.

19 नवंबर की दोपहर में ममता घर पर अकेली थी. उस का भाई छोटू स्कूल गया था और मां काम पर गई हुई थी. शारिक ने ममता के घर के दरवाजे पर पहुंच कर दरवाजा खटखटाया तो उस ने दरवाजा खोल कर देखा. सामने शारिक खड़ा था. दरवाजा खुलते ही वह जबरन घर में घुस गया. इस पर ममता नाराज हो गई और डांट कर उसे घर से बाहर निकल जाने के लिए कहने लगी.

इस पर शारिक का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया. उस ने आव देखा न ताव ममता की गला घोट कर हत्या करने के बाद वह फरार हो गया. जब छोटू करीब 3 बजे घर पहुंचा और बहन को अचेत अवस्था में देखा तो मां को फोन कर के बुलाया. आगे क्या हुआ, कहानी में ऊपर वर्णित किया जा चुका है.

इस तरह एक प्यार का दुखद अंत हो गया. अपने अपराध पर शारिक को कोई पछतावा नहीं है. पुलिस उस के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

धोखे में लिपटी मौत ए मोहब्बत – भाग 2

घटना के चौथे दिन दोपहर के करीब 2 बजे पुलिस को मुखबिर ने सूचना दी कि शारिक सेक्टर-45 के बस स्टैंड पर खड़ा बस के आने का इंतजार कर रहा है. वह कहीं भागने की फिराक में है. इस सूचना के बाद इंसपेक्टर नरेंद्र पटियाल बगैर एक पल गंवाए पुलिस टीम और प्राइवेट जीप से सादे कपड़ों में सेक्टर 45 बस स्टैंड पर पहुंच गए. पुलिस ने बस स्टैंड को चारों ओर से घेर लिया था.

मुखबिर के इशारे पर पुलिस ने शारिक को हिरासत में ले लिया. वह हाथ में अटैची लिए बेचैनी के साथ इधरउधर देख रहा था. पुलिस उसे हिरासत में ले कर सेक्टर-34 थाने लौट आई.  पुलिस ने उस से कड़ाई से पूछताछ की. पहले तो शारिक इधरउधर की बातें करता रहा, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की तो वह समझ गया कि अब बचना आसान नहीं होगा. बेहतरी इसी में है कि सच कुबूल ले, उस के बाद शारिक ने रट्ïटू तोते की तरह सब कुछ बता दिया. शारिक ने ममता की हत्या का जुर्म स्वीकार करने के बाद हत्या के पीछे की कहानी भी बता दी.

इंसपेक्टर नरेंद्र पटियाल ने इस की जानकारी एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल और डीएसपी राम गोपाल को भी दे दी.  अगले दिन यानी 24 नवंबर, 2022 को डीएसपी राम गोपाल ने अपने औफिस में पत्रकार वात्र्ता बुला कर ममता\ हत्याकांड का खुलासा कर दिया. उस के बाद पुलिस ने शारिक को बुड़ैल जेल भेज दिया. आरोपी शारिक से की गई पूछताछ के बाद धोखे में लिपटी फरेबी आशिक की कहानी कुछ ऐसे सामने आई—

25 वर्षीय शारिक चंडीगढ़ के सेक्टर-45 के बुड़ैल मोहल्ले में किराए का कमरा ले कर अकेला रहता था. मूलरूप से वह बिहार के मधुबनी जिले के बेला गांव का रहने वाला था. वह शादीशुदा था. उस की पत्नी सासससुर के पास गांव में रहती थी. यहां रह कर वह एक होटल में डिलीवरी बौय का काम करता था.

शारिक जिस मकान में किराए पर रहता था, उस के ठीक सामने वाले मकान में चंपा देवी अपनी बेटी ममता और बेटे छोटू के साथ रहती थी. बेहद सुशील और नम्र स्वभाव की चंपा मेड का काम करती थी. पड़ोसियों से ही पता चला था कि चंपा देवी का पति के साथ रिश्ता अच्छा नहीं है, इसीलिए वह अपने गांव हरदोई के मलाहपुर रहता है और यह यहां बच्चों के साथ रहती है.

दोनों ने कर दिया प्यार का इजहार

चंपा के काम पर निकल जाने के बाद ममता और छोटू घर पर अकेले रहते थे. कहने का आशय यह है कि गोरी और खूबसूरत ममता पर जब से शारिक की नजर पड़ी थी, वह उस पर पहली ही नजर में दिल हार बैठा था. उस के दिल में अपने प्यार का घर बनाना चाहता था, लेकिन अभी ये एकतरफा प्यार था. दूरदूर से उसे देख कर अपने दिल को तसल्ली दे देता था.

चंपा देवी जब घर में होती थी, शारिक उन से पड़ोसी का हवाला दे कर मिलने आता था और उस ने अपनी मीठी बोली से उस का दिल जीत लिया था. शारिक का नेक व्यवहार देख कर चंपा देवी ने उस से आते रहने को कह दिया तो शारिक का दिल खुशी के मारे फूला नहीं समाया. यही तो वह चाहता था कि उस के घर में किसी तरह एंट्री मिल जाए तो ममता के दिल में खुदबखुद एंट्री पा लेगा.

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शारिक ने धीरेधीरे चंपा के साथसाथ उस के बेटे छोटू के दिल पर राज कर लिया. अब छोटू का आलम यह था जब तक वह शारिक से एक बार मिल नहीं लेता था, उसे चैन नहीं पड़ता था.  एक दिन की बात है. उस दिन शारिक काम पर नहीं गया और चंपा काम से जल्दी घर लौट आई थी. शाम का वक्त हो रहा था. शारिक चंपा के घर उस से मिलने आया, ‘नमस्ते, आंटी.’ उस ने उन का अभिवादन किया.

“खुश रहो, बेटा,’’ चंपा ने भी उसी भाव में जवाब दिया, ‘‘आओ, बैठो.’’

“आज काम पर नहीं गया था. घर पर ही था और कई दिनों से आप से मुलाकात भी नहीं हुई. सोचा, आप सब से मिल कर खैरियत पूछ लूं. आप सब ठीक तो हैं न, आंटी.’’

“हां बेटा, सब ठीक है. तुम तब तक बच्चों से बातें करो, मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं.’’

“नहीं आंटी, इस की कोई जरूरत नहीं. मैं तो बस आप से मिलने और हालचाल पूछने आ गया था.’’

“इस में जरूरत की क्या बात है, बेटा. वैसे भी शाम का वक्त हो रहा था. यह वक्त चायनाश्ते का होता है, मुझे भी चाय की तलब लगी थी. सोचा इसी बहाने मुझे भी चाय मिल जाएगी..’’

“फिर तो आप चाय बना ही लो आंटी. वैसे भी आप के हाथों की बनी चाय का स्वाद लाजवाब होता है.’’ उस ने चंपा की तारीफ के पुल बांधे और ममता को निहारता रहा. ममता कमरे में ही बैठी रही, वह दूसरे कामों में उलझी रही थी.

शारिक ने आगे कहा, ‘‘आंटी, एक बात पूछूं?’’

“हूं. पूछो बेटा.’’

“आप की बिटिया बोलती नहीं है क्या?’’

“नहीं बेटा, बोलती है. जब चपड़चपड़ बोलना शुरू करती है तो इस के आगे तूफान की रफ्तार भी कम पड़ जाती है.’’ कह कर चंपा हंसने लगी तो ममता घूर कर शारिक को ताकने लगी. शारिक यही चाहता भी था कि वह उस क ी ओर देखे.  चंपा अपनी बात आगे बढ़ाती हुई बोली, ‘‘क्या है बेटा, बिटिया थोड़ी शरमीली मिजाज की है. परायों के सामने थोड़ा कम बोलती है.’’

“मैं पराया कहां रहा आंटी.’’ चंपा की बात बीच में काट कर शारिक बोला, ‘‘पराए तो वो होते हैं जिन से कोई जानपहचान नहीं होती. फिर मैं तो आप का अपना हूं, तब मुझ से बात करने में कैसी शरम, कैसी हया.’’

इस पर ममता फिर शारिक को देखने लगी. उस की भावनात्मक बातें ममता के दिल में गहराई से उतर गई थीं. ये बात 2020 की थी. उस दिन के बाद से शारिक ममता के घर जब भी आता था, ममता उस के पास बैठ कर हंसीमजाक कर लेती थी. अब पहले की तरह उस से शरमाती नहीं थी. अपनी मीठी और लच्छेदार बातों से शारिक ने ममता के दिल में जगह बना ली थी.

दिलोजान से चाहने लगी ममता

उसे शारिक की बातें और उस से मिलना अच्छा लगने लगा था. उसे भी शारिक से प्यार हो गया था तभी तो वह उसे हर घड़ी, हर पल अपने करीब देखना चाहती थी. जब कभी वह उसे नहीं देख पाती थी तो जल बिन मछली की तरह तड़पती थी. शारिक समझ गया था कि ममता भी उस से प्यार करने लगी है. तभी तो वह उस के करीब आने के लिए बेताब रहती है.

शारिक समझ गया था लोहा गरम है, चोट कर दे. यानी अपनी मोहब्बत का इजहार कर दे. वह जानता था कि दोपहर के वक्त पर घर में न तो आंटी होती थी और न ही छोटू होता था. ममता ही घर पर अकेली होती थी. एक दिन दोपहर के समय शारिक उस के घर पर जा पहुंचा.

धोखे में लिपटी मौत ए मोहब्बत – भाग 1

पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ के सेक्टर-45 स्थित बुड़ैल मोहल्ले में एक किराए का कमरा ले कर 45 वर्षीय चंपा देवी 2बच्चों (बड़ी बेटी ममता और बेटा छोटू) के साथ रहती थी. उस का पति किशन किसी कारणवश उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में स्थित अलाहपुर गांव में अकेला रहता था. वह गांव में खेतीकिसानी करता था. यहां रह कर चंपा दोनों बच्चों की परवरिश के लिए घरों में चौकाबरतन करती थी.

चंपा देवी का सपना था कि दोनों बच्चों पढ़ालिखा कर उन्हें इतना काबिल बना दे कि वो किसी दूसरे के सामने हाथ फैलाने के बजाय अपने पैरों पर मजबूती से खड़े हो सकें, चाहे इस के लिए उसे दिनरात हाड़तोड़ मेहनत ही क्यों न करनी पड़े. वह बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नहीं कर सकती थी.  मां के त्याग और तपस्या को देख कर ममता और छोटू के भी मन में ऐसी भावना जाग रही थी. लेकिन एक दिन चंपा देवी को बच्चों की वजह से अपने सपनों पर पानी फिरता नजर आया.

उस रोज 19 नवंबर, 2022 की तारीख थी और दोपहर के ठीक 3 बज रहे थे. छोटू रोज इसी टाइम स्कूल से घर लौटता था और उस दिन भी जब स्कूल से छुट्टी के बाद घर वापस लौटा तो घर का दरवाजा खुला देख कर उसे बड़ा अजीब लगा.  कुछ सोचता हुआ वह अपने कमरे में दाखिल हुआ तो बैड पर बड़ी बहन ममता को अस्तव्यस्त हालत में लेटे हुए देख कर वह परेशान हो गया था.

उस ने बहन को जोरजोर झकझोर कर उठाने की कोशिश की, लेकिन ममता जरा भी टस से मस नहीं हुई. छोटू हैरान हो गया. स्कूल का बैग एक ओर रखते हुए वह बैड पर बैठ गया और ‘दीदी, उठो ना. दीदी उठो. जोरों की भूख लगी है. मुझे कुछ खाने को दो न.’ कहते हुए ममता को फिर से झकझोर कर उठाने की कोशिश कर रहा था. लेकिन ममता थी कि उठने का नाम ही नहीं ले रही थी.

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ममता जब नींद से नहीं उठी और उस के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई तो वह डर गया कि पता नहीं दीदी को क्या हुआ है, जो इतना झकझोरने पर भी कुछ नहीं बोल रही है. 12 साल का छोटू था तो बहुत ही समझदार, लेकिन उस वक्त उस की समझ भी नासमझी में खो गई थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह करे तो क्या करे? उस की मां चंपा देवी भी घर पर नहीं थी.

घर में मरी पड़ी थी ममता

छोटू जब एकदम परेशान हो गया और उस की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे और मदद के लिए किसे पुकारे. उस ने मां को फोन लगाया और उसे पूरी बात बता दी. बेटे की बात सुन कर चंपा भी परेशान हो गई और काम बीच में ही छोड़ कर वापस घर लौट आई. उस ने बैड पर पड़ी बेटी को ध्यान से देखा तो उस के कपड़े अस्तव्यस्त थे. उस के बाल ऐसे बिखरे थे जैसे किसी ने उस बाल पकड़ कर उसे खींच दिया हो. शरीर भी नीला था.

चंपा ने चीखचीख कर पड़ोसियों को इकट्ïठा किया और बेटी को अस्पताल पहुंचाने में मदद मांगी. पड़ोसियों ने उस की मदद की और उसे एक निजी वाहन से मल्टी स्पैशियलिटी हौस्पिटल, सेक्टर-16 ले गए, जहां डाक्टरों ने ममता को देखते ही मृत घोषित कर दिया. बेटी की मौत की खबर सुनते ही चंपा देवी और छोटू दहाड़ मार कर रोने लगे थे. चूंकि यह पुलिस केस का था, इसलिए अस्पताल से सेक्टर-34 थाने में फोन कर के मौके पर पुलिस को बुला लिया गया था.

थाना सेक्टर-34 के एसएचओ नरेंद्र पटियाल मौके पर दलबल के साथ पहुंचे और शव का परीक्षण किया. मामला पहली नजर में दुष्कर्म के बाद हत्या का लग रहा था, लेकिन पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले किसी भी नतीजे पर नहीं जा सकती थी. अलबत्ता लाश को अपने कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई चंडीगढ़ भेज दी. पुलिस ने चंपा देवी की तरफ से अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट लिख कर आगे की काररवाई शुरू कर दी. इस से पहले एसएचओ ने घटना की सूचना एसएसपी सुखचैन सिंह गिल और डीएसपी रामगोपाल को दे दी थी.

अगले दिन यानी 20 नवंबर की सुबह पुलिस घटना की छानबीन करने चंपा देवी के कमरे पर पहुंची, जहां घटना का जन्म हुआ था. इंसपेक्टर पटियाल ने मृतका ममता की मां चंपा देवी और उस के बेटे से पूछताछ की. चंपा ने पुलिस को बताया कि लोगों के घरों में काम करती थी. रोजाना की तरह कल सुबह भी वह काम पर निकल गई थी और छोटा बेटा स्कूल पढऩे गया था. बेटी घर पर अकेली थी.

पुलिस ने चंपा देवी से पूछा कि क्या उन को किसी पर शक है, जो घटना को अंजाम दे सकता है? इस पर वह सोचती हुई आगे बोली, ‘‘साहब, हम को तो एक मुसलिम लडक़े पर शक है. जिस का मोहम्मद शारिक नाम है. पिछले कई महीनों से वह बेटी को परेशान कर रहा था. हो सकता है, उसी ने बेटी को मार डाला हो.’’

मां ने जताया प्रेमी शारिक पर शक

घटनास्थल भी चीखचीख कर कह रहा थी कि इस में कोई ऐसा शख्स शामिल हो सकता है, जिसे पहले से पता था कि ममता घर पर अकेली है. इस का फायदा उठा कर उस ने हत्या कर दी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुकी थी. मृतका के साथ जिस दुष्कर्म को ले कर पुलिस आशंकित हुई थी, रिपोर्ट में दुष्कर्म की बात सिरे से खारिज कर दी गई थी. रिपोर्ट में बताया कि दम घुटने से ममता की मौत हुई थी.

जिस शारिक का चंपा देवी ने पुलिस के सामने नाम लिया था, वर्षों पहले एक ही मोहल्ले में आमनेसामने किराए के कमरे में रहते थे. फिर बाद के दिनों में शारिक ने वह कमरा छोड़ दिया और कहीं और किराए का कमरा ले कर शिफ्ट हो गया था.  पास में रहने पर दोनों परिवार एकदूसरे को अच्छी तरह जानतेपहचानते थे. उन का एकदूसरे के घरों में जानाआना और बैठना तसल्ली से होता था. ममता और शारिक काफी घुलमिल चुके थे.

बहरहाल, शारिक अब कहां रहता है, किसी को कुछ नहीं पता था. पुलिस को चंपा इतना ही बता सकी थी कि वह किसी बड़े होटल में डिलीवरी बौय का काम करता है. अब वह कहां रहता है, चंपा देवी को पता नहीं था. पुलिस इस बात की तसदीक में जुटी हुई थी ममता के मर्डर में शारिक का क्या मकसद हो सकता है? इस का पता तो तभी लग सकता है जब वह पुलिस की गिरफ्त में आए. फिलहाल पुलिस ने ममता और शारिक के बीच में क्या रिश्ता हो सकता है अथवा उस की हत्या क्यों की? इस मकसद को खोलने के पीछे जुटी हुई थी.

जल्द ही पुलिस को इस पर बड़ी कामयाबी हासिल हो गई थी. पुलिस ने मृतका के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई और उस के गहन अध्ययन से पता चला कि घटना वाले दिन शारिक और ममता की कुछ देर तक आपस में बातचीत हुई थी. यही नहीं, दोपहर के करीब में शारिक की लोकेशन मृतका के घर के करीब थी. और तो और जांचपड़ताल में यह भी पता चला कि दोनों के बीच में वर्षों से प्रेम संबंध चल रहा था.

प्रेम संबंधों में खटास बनी हत्या की वजह

इस का पता मृतका की मां और भाई दोनों को भी था. कुछ दिनों से इन दोनों के बीच कुछ अनबन चल रही थी. अनबन क्यों थी? पुलिस को पता नहीं चल सका, लेकिन ये बात शीशे की तरह साफ हो गई थी ममता की मौत प्रेम संबंधों में खटास की वजह से हुई थी. दोनों के बीच में अनबन क्यों थी? इस का पता तभी लग सकता था, जब संदिग्ध शारिक पुलिस के हत्थे चढ़ता. उस की तलाश में पुलिस जुटी हुई थी. यही नहीं, उस का पता लगाने के लिए पुलिस ने अपने मुखबिरों का जाल भी बिछा दिया था.