29 अप्रैल, 2016 को जब लीना अपने साथ सोहागपुर से ही तारबंदी का सामान ले कर प्रताप कुशवाहा और दूसरे लोगों के साथ अपने खेत पर पहुंची तो तारबंदी करने को ले कर उस का मामा प्रदीप से विवाद इतना बढ़ा कि प्रदीप ने लीना के साथ आए लोगों को यह कह कर वहां से खदेड़ दिया कि ‘‘ये हमारा आपस का मामला है, हम दोनों निपटा लेंगे.’’
तड़पा कर की थी लीना की हत्या…
लीना के साथ आए लोगों के वहां से जाने के बाद प्रदीप शर्मा उसे अपने खेत पर बने घर पर ले गया. वहां पहुंच कर प्रदीप ने लीना के सिर पर डंडे से हमला कर दिया. तभी प्रदीप के नौकर गोरेलाल, राजेंद्र ने उस के सिर पर पत्थर से हमला कर दिया. सिर में गहरी चोट लगने से वह जमीन पर गिर गई और थोड़ी देर तक तड़पने के बाद उस की मौत हो गई. लीना की मौत के बाद प्रदीप ने दोनों नौकरों से कहा, ‘‘जाओ, जल्दी से ट्रैक्टर ट्रौली ले कर आओ. लाश को ठिकाने लगाना पड़ेगा.’’
“जी मालिक, अभी लाते हैं. मगर किसी ने देख लिया तो सीधे जेल ही जाएंगे.’’ गोरेलाल डर के मारे बोला.
“मेरे बीवीबच्चों का क्या होगा मालिक.’’ राजेंद्र ने भी आशंका व्यक्त करते हुए कहा.
“डरने की बात नहीं है, जो हुआ उसे भूल जाओ और लाश ठिकाने लगाने में मेरी मदद करो. आज के बाद किसी से इस बात की चर्चा भी नहीं करना.’’ प्रदीप शर्मा ने दोनों को भरोसा दिलाते हुए कहा. प्रदीप शर्मा के कहने पर गोरेलाल और राजेंद्र कुछ ही देर में ट्रैक्टर ट्रौली ले कर आ गए. तीनों ने मिल कर लीना की लाश को ट्रैक्टर ट्रौली में रखा और उस के ऊपर घासफूस रख कर नौकरों के साथ सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कामती के जंगल में पहुंच गए.
वहां बरसाती नाले में सब से पहले गोरेलाल और राजेंद्र ने गड्ढा खोदा और उस गड्ïढे में नमक और यूरिया खाद डाल दी. बाद में लीना के शरीर के कपड़े उतार कर उसे दफना दिया. 14 मई, 2016 को प्रदीप शर्मा की निशानदेही पर पुलिस टीम ने और तहसीलदार की मौजूदगी में नगरपालिका के कर्मचारियों के सहयोग से लीना की लाश निकाली.
शव पर मिले टैटू और ब्रेसलेट से लीना शर्मा की बहन हेमा शर्मा ने शिनाख्त की. बाद में लीना शर्मा के सैंपल से हेमा शर्मा का डीएनए भी मैच कराया गया. प्रदीप ने लीना के कपड़ों में मिले पर्स से वसीयतनामा निकाल कर उस की जींस पैंट और पर्स को अपने घर के पीछे खेत की मेड़ पर जला दिया था, जबकि वसीयतनामा को अपने पास रख लिया था.
3 डाक्टरों के पैनल ने किया था पोस्टमार्टम…
14 मई को जिस तरह की हालत में लीना का शव मिला था, उस से दुष्कर्म की आशंका भी जताई जा रही थी. इस वजह से 3 डाक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया. शव 15 दिन पुराना होने से बुरी तरह सड़ चुका था. पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो डाक्टरों ने सिर में गहरी चोट से फ्रैक्चर होना और उसी वजह से मौत होने की बात कही थी.
पोस्टमार्टम करते समय डाक्टरों ने दुष्कर्म जैसी घटना की आशंका को देखते हुए वैजाइनल स्लाइड भी बनाई. सभी नमूनों की जांच सागर फोरैंसिक लेबोरेटरीज में कराई गई थी. पोस्टमार्टम के बाद 15 मई, 2016 को लीना की बहन हेमा और बहनोई ने सोहागपुर आ कर लीना का अंतिम संस्कार किया था. पुलिस की दिन भर हुई पूछताछ में प्रदीप ने कई राज उगले थे. उस ने बताया कि लीना की मौत सिर में चोट लगने से नहीं, बल्कि पत्थरों से कुचलने और गला दबाने से हुई थी.
दृश्यम फिल्म की तरह रची गई कहानी…
2015 में आई अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम’ की कहानी से इस मामले की कहानी मिलतीजुलती है. लीना के हत्यारों ने भी उस के 2 सेलफोन में से एक को घटनास्थल से करीब 30 किलोमीटर दूर पिपरिया (होशंगाबाद) रेलवे स्टेशन पर फेंक दिया था, ताकि पुलिस उस की लोकेशन को ले कर भ्रमित होती रहे.
इत्तेफाक से यह मोबाइल जिस यात्री को मिला, उस ने सिम कार्ड फेंकने के बाद मोबाइल फोन अपने पास रख लिया. बाद में 5 मई को पिपरिया में एक व्यक्ति को यह सिम मिला तो उस ने इसे दूसरे फोन सेट में डाला. जब लीना के दोस्त का फोन काल आया तो उस ने लीना के साथ कुछ गलत होने के बारे में उसे सतर्क कर दिया गया.
इसी मोबाइल की काल डिटेल्स से पूरे मामले की कडिय़ां जुड़़ती गईं और लापता होने के 15वें दिन पुलिस ने एसडीएम, तहसीलदार की उपस्थिति में गड्ïढा खुदवा कर लीना की लाश को निकलवाया. प्रदीप ने पुलिस के सामने यह प्रदर्शित करने का प्रयास किया कि उस के आदमियों ने लीना पर रौड और पत्थरों से हमला किया था, क्योंकि लीना ने 29 अप्रैल, 2016 को भूमि विवाद को ले कर उस पर हमला किया था.
लेकिन होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) पुलिस की जांच से पता चला कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या थी. ‘‘लीना के प्रदीप पर हमला करने के कोई निशान नहीं मिले थे. जिस तरह से लीना के सामान को नष्ट कर दिया गया और उस के शरीर को कामती जंगल (डूडादेह गांव से 4 किलोमीटर दूर) में फेंक दिया गया और उस के सेलफोन को ट्रेन में फेंकने का प्रयास किया गया. उस से पता चलता है कि हत्या पूर्व नियोजित थी.
इस के अलावा, हत्या के सबूत नष्ट करने के लिए दफनाने से पहले उस के शरीर पर यूरिया और नमक छिडक़ने की हरकत भी इस ओर इशारा करती है कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या थी.
साल भर के भीतर मिली जमानत…
लीना शर्मा की लाश काफी सड़ चुकी थी. उस की पहचान कराने के लिए बहन हेमा शर्मा का भोपाल में डीएनए टेस्ट कराया था. डीएनए रिपोर्ट से लीना के शव की पहचान हुई थी. हत्या के खुलासे के बाद लीना के मामा प्रदीप शर्मा, नौकर गोरेलाल, राजेंद्र को हत्या के आरोप में सोहागपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया था.
प्रदीप शर्मा के परिवार के लोगों ने जमानत के लिए एड़ीचोटी का जोर लगा दिया था. जबकि लीना की तरफ से कोई पहल नहीं हुई थी. यही वजह रही कि प्रदीप शर्मा के घर वाले कोर्टकचहरी में पानी की तरह पैसा बहा रहे थे. और उन की कोशिश कामयाब भी रही. एक साल के अंदर ही तीनों आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई. लीना की हत्या के 9 महीने बाद 22 फरवरी, 2017 को प्रदीप शर्मा को कोर्ट ने जमानत दे दी. इसी तरह 11 महीने बाद पहली अप्रैल, 2017 को गोरेलाल और राजेंद्र भी जमानत पर बाहर आ गए.
21 मार्च, 2023 को कोर्ट का फैसला आते ही कोर्ट रूम में मौजूद सोहागपुर पुलिस ने प्रदीप शर्मा, गोरेलाल और राजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया और उप जेल पिपरिया भेज दिया गया. जिस जमीन पर कब्जे के लिए लीना ने जान गंवाई, उस पर मामा प्रदीप शर्मा का कब्जा आज भी कायम है. उस पर प्रदीप शर्मा के घरपरिवार के लोग फसल उगा रहे हैं. लीना शर्मा की बहन हेमा मिश्रा, जो अपने पति के साथ कर्नाटक के बेंगलुरु में ही रहती है. वारदात के बाद वो इतनी डर गई थी कि कभी जमीन को पाने वो गांव नहीं आई.
—कथा कोर्ट के फैसले, लोक अभियोजक शंकरलाल मालवीय से बातचीत और मीडिया रिपोर्ट पर आधारित
बंटू के इस तरह शालेहा के घर बेरोकटोक आनेजाने से मकान मालिक और आसपास के लोगों को ऐतराज था. लोगों ने इस की शिकायत शाहिद से की थी, इस से दोनों के नाजायज रिश्तों की भनक शाहिद को लग गई थी. इसी बात को ले कर शालेहा से उस का अकसर विवाद होता रहता था. शालेहा अकसर अपनी मां और पिता के साथ मिल कर शाहिद के साथ बदसलूकी भी करती थी.
शौहर को रास्ते से हटाने की रची साजिश
शाहिद खान की बीवी शालेहा परवीन का इश्क बंटू खान से परवान चढ़ चुका था. शाहिद को जब शक हुआ तो उस ने पत्नी पर दबाव बनाना शुरू किया, जिस से घर में आए दिन झगड़े होने लगे. शाहिद जब शालेहा के अब्बू और अम्मी से इस की शिकायत करता तो वे उल्टा शाहिद को ही भलाबुरा कहते.
8 मार्च, 2023 को शाहिद और शालेहा दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि उन्हें पुलिस स्टेशन जाना पड़ा. यहां से दोनों को परिवार परामर्श केंद्र भेज दिया गया. यहां पत्नी शालेहा ने पति पर मारपीट करने का आरोप लगाया तो वहीं शाहिद ने अपनी पत्नी पर किसी गैरमर्द के साथ संबंध होने का शक जताया था. इस के बाद दोनों को समझाबुझा कर अच्छे ढंग से रहने की समझाइश दे कर वापस घर भेज दिया गया था.

इधर एकदूसरे के प्रेम में पागल हो गए बंटू और शालेहा शाहिद से परेशान हो चुके थे. इसी बात से परेशान हो कर शालेहा ने प्रेमी बंटू को योजना बताते हुए कहा, “रोजरोज की किचकिच से मैं तंग आ गई हूं, क्यों न हमारे प्रेम की राह में रोड़ा बन रहे शाहिद को हमेशा के लिए रास्ते से हटा दिया जाए.”
“आखिर शाहिद को कैसे रास्ते से हटाएंगे, उस की हत्या करेंगे तो पकड़े जाने पर जेल की चक्की पीसनी पड़ेगी.” बंटू ने आशंका जताते हुए कहा.
“हम शाहिद को खाने की किसी चीज में जहर मिला देंगे और उस पर खुदकुशी करने का इल्जाम लगा देंगे.” शालेहा ने अपना प्लान समझाते हुए कहा.
“हां, ये आइडिया सही है. पर जहर देने के बाद सावधानी बरतनी है. जब तक उस का काम तमाम न हो जाए, उस पर निगरानी रखनी होगा.” बंटू ने सचेत करते हुए कहा.
जहर दे कर की हत्या
इस तरह योजना के मुताबिक, 18 मार्च, 2023 की शाम पडऱा स्थित किराए के मकान पर शाहिद की पत्नी शालेहा के अलावा उस का आशिक बंटू खान व शालेहा के मांबाप भी मौजूद थे. सभी ने मिल कर शाहिद खान को मारने का प्लान बनाया. शालेहा ने पहले से ही दीमक मारने वाला कीटनाशक खरीद कर रख लिया था.
18 मार्च, 2023 को ड्यूटी के बाद रात के साढ़े 9 बजे शाहिद जैसे ही घर पहुंचा तो शालेहा ने प्यार जताया. फिर उस की खातिरदारी की और पीने का लिए ठंडे पानी का गिलास ले कर आ गई. पानी पीते हुए शाहिद उस के बदले हुए रूप को देख कर हैरत में था, मगर यह सोच कर उस ने कुछ नहीं कहा कि शायद उस ने अपने आप को बदलने का निश्चय कर लिया हो.
कुछ देर बाद शाहिद जैसे ही बाथरूम से फ्रैश हो कर बाहर निकला, शालेहा गर्म चाय का प्याला ले कर हाजिर थी. शालेहा उस की चाय में जहर मिला कर लाई थी. दिन भर की थकान के बाद घर लौटे पति के लिए पत्नी के हाथ से बनी चाय बड़ा सुकून देती है. शाहिद चाय का प्याला हाथों में ले कर चाय की चुस्कियां लेने लगा. उस समय उसे चाय का स्वाद अजीब लग रहा था, मगर बीवी से इस की शिकायत कर वह मूड खराब नहीं करना चाहता था.
चाय पीने के कुछ देर बाद ही शाहिद को बेचैनी और घबराहट होने लगी. कीटनाशक का असर होने पर शाहिद तड़पते हुए इधरउधर न भागे, इसलिए शालेहा और उस के प्रेमी ने बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था. करीब एक घंटे बाद जब शाहिद को बेचैनी हुई तो अहसास हुआ कि उसे जहर दे दिया गया है. उस ने दरवाजा खोलने की कोशिश की, जब नहीं खुला तो उस ने अपने मोबाइल पर वीडियो बनानी शुरू कर दी. उस की आवाज लडख़ड़ाने लगी थी. अपने मोबाइल वीडियो में उस ने अपना बयान रिकौर्ड करते हुए कहा—
‘मैं अपने पूरे होशोहवास में बयान देता हूं कि मेरी मौत की जिम्मेदार मेरी बीवी शालेहा, उस का आशिक बंटू खान और बीवी के मांबाप हैं. मेरी बीवी ने अपने प्यार के चक्कर में मुझे धोखे से जहर पिला दिया है. ये लोग पिछले छह महीने से मुझे रास्ते से हटाने की कोशिश कर रहे थे. आज इन लोगों ने इस साजिश को अंजाम दे दिया है.’

इस के बाद उस ने मोबाइल एक तरफ रख दिया और उसे उल्टियां होने लगीं. शालेहा, बंटू और शाहिद के सासससुर बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर उस की मौत का इंतजार कर रहे थे. रात के करीब 11 बजे जब शाहिद के कमरे से आवाज आनी बंद हो गई तो चुपचाप शालेहा कमरे में दाखिल हुई. तब तक शाहिद निढाल हो कर गिर चुका था. शालेहा के पीछे बाकी के लोग भी आए.
इस के बाद किसी को हत्या का शक न हो, इसलिए करीब साढ़े 11 बजे शाहिद को कार से संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसी दौरान शालेहा ने ससुर सलामत खान को सूचित कर दिया. पुलिस ने पहली नजर में घटना को आत्महत्या मान लिया, लेकिन शाहिद के पिता सलामत खान इसे आत्महत्या मानने को कतई तैयार नहीं थे.
किसी तरह शाहिद की हत्या के सबूत जुटाने में उन की मेहनत रंग लाई और लव मैरिज के बाद जिस बेटे को पिता सलामत खान ने 7 साल पहले घर से निकाल दिया था, उस की मौत के बाद उसी पिता के प्रयास ने कातिलों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में पुलिस की मदद की.
मरने से पहले का वीडियो देखने और फिर पूछताछ के बाद पुलिस ने हत्या की धारा बढ़ा दी. वीडियो की पड़ताल व विवेचना करने के बाद 6 अप्रैल, 2023 को रीवा की सिविल लाइंस थाना पुलिस ने आईपीसी की धारा 328, 302,120-बी, 34 का मामला कायम किया.

पुलिस टीम ने शाहिद की हत्या के आरोप में उस की बीवी शालेहा और उस के आशिक बंटू खान के साथसाथ सास मोना परवीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. कथा लिखे जाने तक आरोपी ससुर शमशाद उल हक को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई थी.
—कथा पुलिस सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट पर आधारित
29 अप्रैल, 2016 की सुबह 9 बजे लीना शर्मा सोहागपुर से आटोरिक्शा ले कर अपने ननिहाल डूडादेह गांव में प्रताप कुशवाहा, उस के कर्मचारी गंगाराम और तुलाराम के साथ मौके पर पहुंच गई. मामा प्रदीप शर्मा ने उन्हें तारबंदी कराने से रोकते हुए कहा, ‘‘लीना, मैं भी अपनी जमीन की तारबंदी कराने वाला हूं, तुम परेशान मत हो, मैं दोनों की एक साथ ही करा दूंगा.’’
जब लीना ने मामा की बात नहीं मानी तो प्रदीप शर्मा लीना के साथ आए कर्मचारियों को भलाबुरा कहने लगा. प्रताप कुशवाहा, गंगाराम और तुलाराम प्रदीप शर्मा के तेवर देख कर तारबंदी का सामान वहीं खेत के पास रहने वाले डेनियल प्रकाश के घर पर छोड़ कर वहां से भाग खड़े हुए.
मामा ने कराई गुमशुदगी…
5 मई, 2016 को सोहागपुर पुलिस स्टेशन में प्रदीप शर्मा ने गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई. प्रदीप ने तत्कालीन टीआई राजेंद्र वर्मन को बताया, ‘‘38 वर्ष की मेरी भांजी लीना शर्मा दिल्ली में अमेरिकन एंबेसी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर काम करती है. लीना 28 अप्रैल, 2016 को गांव डूडादेह मुझ से मिलने आई थी. उसी दिन मुझ से मिल कर वह जबलपुर जाने को कह कर निकली थी. जब 29 अप्रैल को मैं ने उसे काल किया तो उस का मोबाइल बंद आता रहा. मैं लगातार लीना से संपर्क करता रहा, लेकिन अब तक उस की कोई खोजखबर नहीं मिली.’’
मामला चूंकि अमेरिकी दूतावास की कर्मचारी से जुड़ा था, लिहाजा टीआई राजेंद्र वर्मा ने लीना की गुमशुदगी के मामले को गंभीरता से लेते हुए गुमशुदगी दर्ज होने के बाद लीना के मोबाइल नंबर को ट्रेस कराने की कोशिश की तो उस की लोकेशन पिपरिया की मिली. सोहागपुर पुलिस टीम ने पिपरिया जा कर लोकेशन ट्रेस कर एक युवक अमन वर्मा (परिवर्तित नाम) के पास से लीना का मोबाइल जब्त कर लिया. अमन ने पूछताछ में पुलिस को बताया, ‘‘मुझे यह मोबाइल भोपाल इटारसी बीना विंध्याचल एक्सप्रेस ट्रेन में मिला था, मैं ने इसे चुराया नहीं है.’’
पुलिस ने पिपरिया से मिले लीना के मोबाइल की जब काल डिटेल्स निकाली तो पहली बार पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले. काल डिटेल्स में मिले आखिरी नंबर पर पुलिस ने फोन किया तो यह नंबर किसी आटोरिक्शा चालक का नंबर निकला. आटो वाले ने पुलिस को बताया कि उस ने खुद अपने आटो से 29 अप्रैल की सुबह लीना शर्मा को डूडादेह गांव में खेत के पास छोड़ा था.
सोहागपुर पुलिस ने इस विरोधाभास को नोट किया कि 5 मई, 2016 को उस के मामा प्रदीप शर्मा ने सोहागपुर थाने में लीना के गायब होने की जो गुमशुदगी दर्ज कराई, उस में 28 अप्रैल की सुबह 9 बजे से उस के लापता होने की बात कही थी. जबकि आटो चालक 29 अप्रैल को सुबह लीना को गांव छोड़ कर आने की बात कह रहा था. ऐसे में पुलिस को शक हुआ कि आखिर लीना के मामा ने उस के गांव में आने को ले कर झूठ क्यों बोला?
प्रदीप शर्मा की तरह ही उस के 2 नौकर गोरेलाल मसकोले और राजेंद्र कुमरे के बयान में भी विरोधाभास था. यहीं से पुलिस का शक मामा पर गहराने लगा, लेकिन पुलिस के पास कोई पुख्ता सबूत हाथ नहीं लगा था. प्रदीप शर्मा कांग्रेस का ताकतवर नेता था, इसलिए पुलिस उस पर बिना सबूत हाथ डालने से कतरा रही थी.
‘सेव लीना’ कैंपेन से पुलिस पर बढ़ा दबाव…
लीना शर्मा की हत्या एक राज ही बन कर रह जाती, अगर उस के दोस्त उसे नहीं ढूंढ़ते. जब लीना शर्मा तयशुदा वक्त पर नहीं लौटी और उस का मोबाइल फोन बंद रहने लगा तो भोपाल में रह रही उस की सहेली रितु शुक्ला ने उस की गुमशुदगी की खबर पुलिस कंट्रोल रूम में दी. लीना की गुमशुदगी की रिपोर्ट न तो उन की बहन हेमा मिश्रा ने दर्ज कराई और न ही अन्य परिजनों ने. उन की सहेली रितु शुक्ला, क्लासमेट शादबिल औसादी आदि ने पुलिस और मीडिया तक गुम होने की खबर वाट्सऐप और फेसबुक के माध्यम से पहुंचाई थी.
लीना के लापता होने से उस के दोस्तों ने सोशल साइट फेसबुक पर ‘सेव लीना’ नाम से एक कैंपेन भी चलाया, जिसे अच्छाखासा समर्थन मिल रहा था. लीना के दोस्त इस अभियान के जरिए पुलिस पर लीना की तलाश के लिए दबाव बना रहे थे. पुलिस पर इस मामले को सुलझाने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था.
स्टेट ही नहीं, नैशनल मीडिया में भी लीना के लापता होने या फिर उस की हत्या की खबर छाई हुई थी, लेकिन आरोपी प्रदीप शर्मा के राजनीतिक प्रभाव की वजह से कोई भी उस के खिलाफ बयान देने को तैयार नहीं था. एक तरफ पुलिस लीना की तलाश में जुटी थी, वहीं भोपाल और दिल्ली से लीना के दोस्त पुलिस को लगातार फोन कर रहे थे. लीना के कुछ दोस्तों ने ही पुलिस को बताया कि लीना का अपने मामा के साथ जमीन का विवाद चल रहा है. हो सकता है कि उस के गायब होने में उन का हाथ हो, लेकिन पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं थे, इसलिए गिरफ्तारी नहीं हो पा रही थी.
उस समय होशंगाबाद के तत्कालीन एसपी आशुतोष सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सोहागपुर पुलिस को लीना की खोज करने के निर्देश दिए थे. सोहागपुर पुलिस ने जब प्रदीप शर्मा से संपर्क किया तो वह घबरा गया और पुलिस को गुमराह करने के इरादे से उस ने भांजी के गुम होने की रिपोर्ट लिखाई थी. देर से रिपोर्ट लिखाए जाने से प्रदीप शर्मा शक के दायरे में आया और जमीन के झगड़े की बात सामने आई तो पुलिस का शक यकीन में बदल गया.
एक झूठ ने पुलिस को हत्यारों तक पहुंचाया
पुलिस को जब यह जानकारी मिली कि लीना शर्मा और उस के मामा प्रदीप के बीच तारबंदी को ले कर विवाद हुआ था और इस के बाद तारबंदी नहीं हुई तो पुलिस ने लीना के साथ गए तारबंदी करने वालों से सख्ती से पूछताछ की तब उस की हत्या का खुलासा हो गया. पुलिस ने प्रदीप शर्मा के 2 नौकरों गोरेलाल और राजेंद्र को 13 मई, 2016 की शाम को पूछताछ के लिए पुलिस ने उठाया तो उन से अलगअलग पूछताछ शुरू की. पहले तो वह भी पूरी घटना से अनजान होने का नाटक करते रहे, लेकिन पुलिस की सख्ती के सामने दोनों जल्दी ही टूट गए. उन्होंने 2 घंटे में राज उगल दिया.
पुलिस को दोनों ने बताया कि मामा प्रदीप शर्मा ने ही लीना की हत्या को अंजाम दिया है. हम दोनों तो बस उन का सहयोग कर रहे थे. जिस के बाद सोहागपुर ब्लौक कांग्रेस प्रमुख प्रदीप शर्मा भोपाल भाग गया. भोपाल पुलिस की मदद से प्रदीप को सोहागपुर लौटने के लिए मजबूर किया गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया. इस के बाद पुलिस ने प्रदीप शर्मा को हिरासत में लिया तो उस ने लीना के डूडादेह गांव पहुंचने से ले कर उस की हत्या करने और शव को ठिकाने लगाने की पूरी कहानी पुलिस को बता दी. इस कहानी को जिस ने भी सुना, उस ने कलियुगी कंस मामा प्रदीप को जी भर कर कोसा.
सलामत खान यह सबूत ले कर थाने पहुंचे और मोबाइल विवेचना अधिकारी को सौंप दिया. सलामत खान ने पुलिस को यह भी बताया कि कुछ दिन पहले उन के बेटे का बहू से झगड़ा भी हुआ था और दोनों परिवार परामर्श केंद्र भी गए थे, जहां उन की सुलह कराई गई थी. बहू का रवैया और उस की मां की बातचीत से सलामत खान को लग रहा था कि उस के बेटे के साथ कोई साजिश रची गई है.
उन्होंने अपनी आशंका सिविललाइंस थाना पुलिस को बताई भी, लेकिन किसी ने उन की बात नहीं सुनी, क्योंकि जब भी पुलिस पूछताछ के लिए उसे बुलाती तो शालेहा रोधो कर पुलिस को यही बताती थी कि शाहिद शराब पी कर उस के साथ मारपीट करता है. पुलिस उस की बात पर भरोसा कर शालेहा के प्रति कोई ऐक्शन लेने के बजाय सहानुभूति रखती.
थाने में लिखित शिकायत करने के बाद भी पुलिस को भरोसा नहीं हुआ. पुलिस वाले कहते रहे कि केवल शक के आधार पर कोई काररवाई नहीं की जा सकती. पुलिस मामले की जांच करेगी, बिना ठोस सबूत के किसी पर आरोप लगाना ठीक नहीं. वीडियो सामने आने के बाद 10 दिनों तक पुलिस अपने तरीके से इस वीडियो की सच्चाई जानने की कोशिश करती रही.

पुलिस की लचर कार्यप्रणाली को ले कर सलामत खान रीवा के एसपी विवेक कुमार से मिले और उन्हें पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया. एसपी ने इस केस की जांच के लिए एडीशनल एसपी अनिल सोनकर के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर जांच का जिम्मा एक तेजतर्रार एसआई बृजराज सिंह को सौंप दिया.

बृजराज सिंह थाने में नए आए थे, उन्होंने पूरे केस की पड़ताल नए सिरे से शुरू की. मोबाइल में मिले वीडियो को देख कर उन्हें यकीन हो गया था कि शाहिद को जहर दे कर मारा गया है. अपनी मौत से चंद समय पहले बनाए गए इस वीडियो में शाहिद ने अपनी मौत के लिए पत्नी, उस के प्रेमी और सासससुर को जिम्मेदार बताया.

घर पर मिले चाय के कप और पानी के गिलास में भी जहर होने का अंदेशा फोरैंसिक एक्सपर्ट ने व्यक्त किया था. एसआई बृजराज सिंह ने शाहिद के मकान मालिक और आसपास के लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि शाहिद के घर पर बंटू खान नाम का शख्स अकसर आया करता था.
मामला पति, पत्नी और वो का
विवेचना अधिकारी एसआई बृजराज सिंह ने जब बंटू खान के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि 35 साल के बंटू खान का नाम शकील है, जो रीवा की बाणसागर कालोनी में रहता है. शकील के पिता शहर के एक मशहूर टेलर हैं और उन की रीवा में ब्लू स्टार टेलर्स के नाम से दुकान है, जिस पर कभीकभार शकील भी बैठता है.
वीडियो में मिले शाहिद के बयान के आधार पर पुलिस ने उस की पत्नी शालेहा, सास मोना परवीन और शालेहा के प्रेमी शकील उर्फ बंटू खान को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ शुरू की तो उन की बोलती बंद हो गई और पुलिस के सामने उन्होंने पूरा सच उगल दिया. पुलिस पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह ‘पति, पत्नी और वो’ के नाजायज रिश्तों की कहानी निकली.
जियो कंपनी में 2 साल काम करने के बाद शाहिद को टेलीकाम कंपनी ने रीवा से इलाहाबाद चाक घाट में मैनेजर बना दिया था. शाहिद का रीवा से 100 किलोमीटर दूर रोज आनाजाना रहता था. वह सुबह 7 बजे घर से निकलता और रात 9-10 बजे घर पहुंचता था.
करीब 4 साल पहले इसी दौरान शालेहा की पहली मुलाकात शकील उर्फ बंटू खान से टेलरिंग दुकान पर हुई थी, जहां वह अपना सूट सिलवाने गई थी. शालेहा जैसे ही दुकान में दाखिल हुई तो दुकान का काउंटर संभाल रहे बंटू से बोली, “मुझे सूट सिलवाना है, मेरा नाप ले लीजिए.”
“हां मैडम बैठिए, अभी आप का नाप ले लेता हूं.” बंटू गले से नापने वाला टेप निकालते हुए बोला.
“ये सूट मुझ पर ठीक जमेगा कि नहीं?” सूट का कपड़ा पौलीथिन बैग से बाहर निकालते हुए शालेहा ने कहा.
“मैडम आप इतनी खूबसूरत हैं, आप पर तो कुछ भी खूब जमेगा.” तारीफ करते हुए बंटू बोला.
अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन कर शालेहा ने शरमा कर उसे घूरती नजरों से देखा और मुसकरा दी. बंटू देखने में तो साधारण कदकाठी का था, लेकिन उस का रहनसहन पहली मुलाकात में ही शालेहा को भा गया था. शालेहा खूबसूरत युवती थी, जो भी उसे नजर भर देख लेता, दीवाना हो जाता था. उस दिन बंटू के वालिद खाना खाने घर गए हुए थे. बंटू ने शालेहा का नामपता लिख कर उस का मोबाइल नंबर ले कर एक परची शालेहा के हाथ में थमा दी.
बंटू खान से हो गए अवैध संबंध
दिलफेंक बंटू खान अमीर बाप का बेटा था, उस के पास महंगा मोबाइल और कार थी, जिस में वह घूमा करता था. उस दिन की मुलाकात के बाद बंटू मोबाइल पर शालेहा से बात करने लगा. शाहिद की छोटी सी नौकरी शालेहा के अरमान पूरे नहीं कर पा रही थी, इसी का फायदा उठा कर शालेहा बंटू को अपना दिल दे बैठी. शालेहा को उस के साथ बात करना अच्छा लगता. एक दिन मौका पा कर बंटू दोपहर के वक्त शालेहा के घर पहुंच गया. बंटू ने जैसे ही दरवाजा खटखटाया तो अंदर से आवाज आई, “कौन?”
बंटू ने कोई जबाव नहीं दिया तो कुछ ही पल में जैसे ही शालेहा ने दरवाजा खोला तो सामने बंटू को देख कर मुसकराते हुए बोली, “वेलकम बंटू, अंदर आइए. आज मेरे गरीबखाने पर तुम्हें पा कर मुझे यकीन नहीं हो रहा.”
बंटू अंदर जा कर सोफे पर बैठ गया और शालेहा को खा जाने वाली नजरों से घूरने लगा. एक छोटे से कमरे में सोफे के सामने लगे बैड पर शालेहा बैठी थी. उस वक्त शालेहा गाउन में थी और उस के माथे पर बिखरी जुल्फें उस की खूबसूरती को और बढ़ा रही थीं. शालेहा के नाजुक अंगों के उभार बंटू को पागल बना रहे थे.
“आप को चाय बना कर लाती हूं.” शालेहा ने वहां से उठते हुए कहा.
“न.. न चायपानी की जरूरत नहीं है, हम तो कुछ और ही पीने आए हैं.” बंटू ने हाथ पकड़ कर उसे बैठाते हुए कहा.
“मैं समझी नहीं. और क्या पीने आए हो, वैसे मुझे नशा करने वालों से सख्त नफरत है.” शालेहा ने भी अपनी आंखों का जादू दिखाते हुए कहा.
बंटू अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा था, उस की आंखों में लाल डोरे तैर रहे थे. उस ने शालेहा के माथे को चूमते हुए कहा, “तुम्हारी आंखों में इतना नशा है कि दूसरे नशे की जरूरत ही नहीं है.”
शालेहा उस दिन बंटू को रोक न सकी. बंटू ने उसे पलंग पर लिटा दिया और उस के हाथ शालेहा के संगमरमरी बदन पर रेंगने लगे. दोनों वासना के इस तूफान में बह गए थे. दोनों के जिस्म की प्यास बुझने के बाद ही यह तूफान थमा था.

इस के बाद तो बंटू और शालेहा का मिलना और कार में साथ घूमना आम बात हो गई. जब कभी बंटू न आ पाता तो पति की गैरमौजूदगी में शालेहा उस से मिलने चली जाती थी. यह बात शालेहा की मां मोना परवीन भी जानती थी, मगर उस के मुंह पर बंटू ने ताला लगा दिया था.
दरअसल, जब भी बंटू शालेहा से मिलने आता था, उस की मां मोना को कुछ न कुछ जरूरी सामान ले कर आता था. कहीं आनेजाने के लिए बंटू कार भी भेज देता था. इन एहसानों के तले दबी मोना सब कुछ देख कर भी अंजान बनी रहती.
क्रमशः
21 मार्च, 2023 को मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम (पुराना नाम होशंगाबाद) जिले के सोहागपुर कोर्ट में सुबह से ही ज्यादा गहमागहमी थी. कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात था. मीडिया और वकीलों के अलावा लोगों की भीड़ भी ज्यादा दिखाई दे रही थी. दरअसल, इस दिन जिले के बहुचर्चित लीना शर्मा मर्डर केस का फैसला आने वाला था. फैसले के लिए अपराह्नï 3 बजे का वक्त मुकर्रर किया गया था.
सोहागपुर के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश संतोष सैनी की अदालत में दोनों पक्षों से जुड़े लोग बेसब्री से जज साहब के आने का इंतजार कर रहे थे. कोर्ट लीना शर्मा की हत्या के आरोपी प्रदीप शर्मा, गोरेलाल और राजेंद्र भी कोर्ट रूम में अपने वकील के साथ उपस्थित थे. लीना शर्मा की तरफ से पैरवी कर रहे अपर लोक अभियोजक शंकरलाल मालवीय भी कोर्ट में पूरी तैयारी के साथ मौजूद थे.
जज साहब पर जम गईं निगाहें…
कोर्ट की घड़ी में जैसे ही दोपहर 3 बजे का अलार्म बजा तो सभी चौकन्ने हो गए. कुछ ही क्षणों में मजिस्ट्रैट संतोष सैनी ने कोर्ट रूम में प्रवेश किया तो सभी अपनेअपने स्थान पर खड़े हो गए. मजिस्ट्रैट ने सभी को अपने स्थान पर बैठने का निर्देश दिया और अपनी नजरें डाइस पर रखे कागजों पर केंद्रित कर ली.
“आर्डर…आर्डर…’’
जैसे ही अपर सत्र न्यायाधीश संतोष सैनी ने लकड़ी के हथौड़े को मेज पर ठोका तो सभी की निगाहें उन की तरफ केंद्रित हो गईं. जज साहब ने अपना फैसला पढऩा शुरू कर दिया—
“तमाम गवाहों और सबूतों के मद्देनजर यह अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि मृतका लीना के मामा प्रदीप शर्मा ने अपनी भांजी की जमीन हड़पने के लिए अपने घरेलू नौकरों के साथ मिल कर उस की हत्या की थी. लीना शर्मा की हत्या का दोषी पाते हुए हत्या एवं षडयंत्र की धारा 302 में प्रदीप शर्मा पुत्र जुगल किशोर शर्मा (63 वर्ष) निवासी डूडादेह सोहागपुर को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास एवं 10 हजार रुपए जुरमाने की सजा सुनाती है. इस के साथ ही आईपीसी की धारा 201 (लाश छिपाने) में 7 वर्ष की सजा एवं 5 हजार रुपए जुर्माना, आईपीसी की धारा 404 (मृत व्यक्ति की संपत्ति काबेईमानी से गबन) में 3 वर्ष की सजा एवं 5 हजार रुपए के जुरमाने से दंडित करती है.
“वहीं इस केस में प्रदीप शर्मा का साथ देने वाले अन्य आरोपियों गोरेलाल मसकोले पुत्र मंगलू उम्र 32 वर्ष, निवासी सिटियागोहना और राजेंद्र कुमरे पुत्र अरविंद कुमरे उम्र 27 वर्ष निवासी डूडादेह को भी लीना की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं 10-10 हजार रुपए जुरमाना, धारा 120बी आईपीसी (अपराध की साजिश रचने) में आजीवन कारावास एवं 10-10 हजार रुपए जुरमाने सहित धारा 201 में 7-7 वर्ष की सजा एवं 5-5 हजार रुपए के जुरमाने की सजा सुनाती है.’’
64 गवाहों की गवाही और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट में सोहागपुर कांग्रेस के पूर्व ब्लौक अध्यक्ष प्रदीप शर्मा, उस के नौकर गोरेलाल (32 साल) और राजेंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए अपने 110 पेज के फैसले में दलील देते हुए कहा, ‘‘वारदात जरूर निर्मम है, लेकिन उक्त परिस्थिति मृत्युदंड दिए जाने के लिए पर्याप्त नहीं है. यह अपराध पारंपरिक पारिवारिक संबंधों पर आधारित सामाजिक तानेबाने पर विपरीत प्रभाव डालने वाला है.
प्रदीप शर्मा, गोरेलाल, राजेंद्र का कोई आपराधिक रिकौर्ड नहीं है. दोबारा ऐसे कोई अपराध करने की संभावना भी नहीं है. अभियुक्त समाज के लिए खतरा है, ऐसा भी प्रतीत नहीं होता, इस कारण ये केस ‘विरल से विरलतम’ रेयरेस्ट औफ द रेयर की श्रेणी में नहीं आता है, जहां मृत्युदंड (फांसी) अपेक्षित हो.’’ अपने फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा, ‘‘लीना शर्मा की भूमि को प्रदीप शर्मा ने अपने उपयोग के लिए रख लिया है, इसे लीना शर्मा के वैध उत्तराधिकारी को देने का आदेश भी यह अदालत देती है.’’
फैसला सुनते ही शासकीय अपर लोक अभियोजक शंकरलाल मालवीय के साथ लीना शर्मा के परिवार से जुड़े लोगों के चेहरों पर एक विजयी मुसकान आ गई. 7 साल के लंबे इंतजार के बाद आए कोर्ट के फैसले से उन्हें संतोष हो जाता है कि आखिरकार लीना के हत्यारों को सजा मिल ही गई.
क्या था पूरा मामला…
मध्य प्रदेश के सोहागपुर के राजेंद्र वार्ड के रहने वाले सतेंद्र शर्मा की 2 बेटियां लीना और हेमा थीं. 40 साल की हेमा और 38 साल की लीना शर्मा के पिता की मौत बहुत पहले हो चुकी थी. लीना की मां भी 2 बहनें थीं. लीना के नाना 2 भाई थे. एक भाई का बेटा प्रदीप शर्मा कांग्रेस का नेता था. लीना के नानानानी की मौत के बाद ननिहाल की संपत्ति की वारिस लीना की मां और मौसी ही बची थी.
लीना के मौसा की बहुत पहले मौत हो गई थी और उन की कोई संतान न होने से उन की देखभाल भी लीना ने की थी. इसी वजह से ननिहाल की 36 एकड़ जमीन की वारिस लीना और हेमा ही थीं. यह बात नाना के भाई के बेटे प्रदीप को बहुत अखरती थी. वक्त के साथ हेमा की शादी कर्नाटक के बेंगलुरु में रहने वाले साइंटिस्ट से हो गई और दिल्ली में पढ़ीलिखी लीना अमेरिकी दूतावास में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्य करने लगी. लीना दिल्ली के बसंत कुंज इलाके में रहती थी.
होशंगाबाद के सोहागपुर के पास डूडादेह गांव में उस की करोड़ों रुपए की पुश्तैनी जमीन थी, जिस पर खेती होती थी. गांव में देखरेख के अभाव में करीब 10.41 एकड़ जमीन पर उस के मामा प्रदीप शर्मा (तत्कालीन ब्लौक कांग्रेस अध्यक्ष) ने कब्जा कर रखा था. पुश्तैनी जमीन की देखरेख करने वाले बटाईदार फोन पर इस की जानकारी समयसमय पर लीना को देते रहते थे.
2016 के अप्रैल महीने की बात है. दोनों बहनें लीना और हेमा सोहागपुर आई हुई थीं. लीना शर्मा ने अपनी बहन हेमा से कहा, ‘‘दीदी, प्रदीप मामा हर साल अपनी जमीन पर कब्जा करते जा रहे हैं, यदि हम ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया तो पूरी जमीन हड़प लेंगे.’’
“हां लीना, मामा को तो लगता है कि अब हम गांव जा कर खेती करने से रहे तो इसी बात का फायदा उठा रहे हैं. तुम्हारे जीजाजी को तो छुट्ïटी मिल नहीं रही, तुम्हीं एक बार गांव घूम कर आ जाओ.’’ हेमा ने सलाह देते हुए कहा.
“हां दीदी, मैं जा कर मामा से बात करती हूं और जमीन की हदबंदी कराती हूं.’’ लीना बोली. 20 अप्रैल को लीना ने सोहागपुर तहसील में पटवारी और राजस्व निरीक्षक (आरआई) को जमीन की पैमाइश करने की दरख्वास्त दे दी. 24 अप्रैल को तहसील के पटवारी और रेवेन्यू इंसपेक्टर ने जब खेत की पैमाइश की तो करीब 10 एकड़ 41 डिसमिल जमीन प्रदीप शर्मा के कब्जे में थी.
मौके पर पंचनामा बना कर हदबंदी के लिए गड्ïढा खोद कर निशान बनाए गए. लीना ने सीमांकन करा कर मामा के कब्जे से जमीन को मुक्त करा लिया. वह चाहती थी कि अपने कब्जे की जमीन पर तारबंदी करा दे, ताकि दोबारा कोई कब्जा न कर सके. तारबंदी कराने के लिए उस ने प्रताप कुशवाहा से बात की.
18 मार्च, 2023 की रात करीब साढ़े 11 बजे का वक्त था. मध्य प्रदेश के रीवा शहर की पडऱा इलाके की दुर्गा कालोनी में रहने वाली 31 साल की शालेहा परवीन बदहवास हालत में अपने पति शाहिद को ले कर अपनी मां के साथ संजय गांधी मेमोरियल जिला अस्पताल पहुंची. शालेहा आंखों में आंसू लिए ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर से गुहार लगाते हुए बोली, “डाक्टर साहब, मेरे पति को बचा लीजिए.”
“आखिर क्या हुआ है इन को. इन की हालत तो काफी नाजुक है.” शाहिद की नब्ज पर हाथ रखते हुए डाक्टर ने पूछा.
“डाक्टर साहब, इन्होंने किसी जहरीले पदार्थ का सेवन किया है, जल्दी से इलाज कीजिए इन का.” कहते हुए शालेहा फफकफफक कर रोने लगी.
डाक्टर ने स्टेथेस्कोप को कान में लगा कर उस का चेकअप किया. कुछ ही सेकेंड बाद डाक्टर ने शालेहा की ओर मुखातिब होते हुए कहा, “आई एम सौरी, ही इज नो मोर.”
डाक्टर के इतना कहते ही शालेहा दहाड़ मार कर रोने लगी. शालेहा की मां ने उसे संभालते हुए कहा, “शालू रो मत बेटी, शायद खुदा को यही मंजूर था. अपने आप को संभाल और शाहिद के पापा को इत्तिला कर दे बेटी.”
कुछ देर बाद शालेहा ने अपने पर्स से शाहिद का मोबाइल फोन निकालते हुए अपने ससुर को यह दुखद खबर सुना दी. यूं तो
शालेहा के ससुर सलामत खान परिवार के खिलाफ जा कर शादी करने की वजह से शाहिद से नाराज थे. पिछले 7 सालों से दोनों के बीच बातचीत बंद थी. मगर बेटे की मौत की सूचना मिली तो जल्दी से अस्पताल पहुंच गए. हौस्पिटल पहुंचे तो देखा शाहिद का बदन सफेद चादर में लिपटा हुआ था. उस के पास ही बहू शालेहा और उस के अब्बूअम्मी खड़े थे.
तब तक अस्पताल प्रशासन की सूचना पर थाना सिविल लाइंस पुलिस अस्पताल आ चुकी थी. पुलिस ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. शालेहा ने अपने ससुर को रोतेबिलखते हुए बताया, “अब्बाजान, किसी बात से नाराज हो कर शाहिद ने जहर पी लिया था, मैं उन्हें ले कर अस्पताल आई, लेकिन उन्हें बचा नहीं सकी.”
सलामत खान को वहां पर शालेहा और उस की अम्मी का रवैया संदिग्ध लग रहा था. उन्होंने देखा कि बहू शालेहा अपने अब्बू और अम्मी से बारबार कानाफूसी कर रही थी, इसलिए बहू की बात सुन कर सलामत खान वहीं पर बुरी तरह बिफर पड़े. उन्होंने बहू पर आरोप लगाते हुए कहा, “तुम्हारी हरकतों की वजह से ही मेरे बेटे की जान गई है.”
सलामत खान ने पुलिस से कहा कि मेरे बेटे ने आत्महत्या नहीं की है. उसकी पत्नी ने ही उसे जहर दे कर मारा है. पुलिस ने सभी के बयान दर्ज कर लिए, मगर पुलिस के पास ऐसा कोई सबूत नहीं था, जिस से सलामत खान की बात को सही साबित कर सके.
लव मैरिज से नाराज थे पिता
पब्लिक वक्र्स डिपार्टमेंट (पीडब्ल्यूडी) में असिस्टेंट ड्राफ्ट्समैन के पद से रिटायर 65 साल के सलामत खान रीवा के घोघर मोहल्ले में रहते हैं. उन की 2 बेटियां और एक 37 साल का बेटा शाहिद था. शाहिद बचपन से ही होनहार था. उसे मोबाइल और नेटवर्क से जुड़े काम में काफी रुचि थी. साल 2015 में रीवा के न्यू बस स्टैंड के पास एक मोबाइल शोरूम खुला था. उस के लिए वैकेंसी निकली तो कई लडक़े व लड़कियों ने इस के लिए इंटरव्यू दिए.
इंटरव्यू में शाहिद के साथ शालेहा परवीन नाम की लडक़ी का भी चयन हुआ था. मोबाइल शोरूम में दोनों दिन भर साथ काम करते थे. इस वजह से शाहिद खान की दोस्ती शालेहा से हो गई. दोनों ड्यूटी पर साथ रहते, वहां से भी साथ में ही निकलते और खाली समय भी एकदूसरे के साथ बिताने लगे. धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. जब उन का प्यार परवान चढऩे लगा तो दोनों के रिश्ते के बारे में घर वालों को भी पता चला.
शाहिद के पिता ने जब लडक़ी के बारे में जानकारी जुटाई तो उन के नजदीकी रिश्तेदारों ने बताया कि लडक़ी का चालचलन ठीक नहीं है. शाहिद तो शालेहा के प्यार में इस कदर दीवाना हो चुका था कि परिवार के लाख समझाने के बाद भी नहीं माना और घर वालों की मरजी के खिलाफ जा कर 2016 में शालेहा से लव मैरिज कर ली.
शाहिद के घर वाले इस बात से बहुत खफा हो गए और उन्होंने शाहिद को घर से निकाल दिया. शाहिद रीवा शहर की पडऱा इलाके की दुर्गा कालोनी में किराए के मकान में बीवी शालेहा के साथ रहने लगा. शादी के बाद शाहिद के सासससुर का उस के घर में दखल बढ़ गया था.

शादी के 2 साल तक सब कुछ ठीक रहा, इस दौरान शालेहा ने एक बेटी को जन्म दिया. लेकिन उस के बाद दोनों के बीच छोटीछोटी बातों को ले कर विवाद होने लगा. इस बात की भनक शाहिद के वालिद सलामत खान को भी थी, मगर वह शाहिद से इतने खफा थे कि उस से कोई मतलब नहीं रखना चाहते थे. उन का मानना था कि जिस बेटे ने हमारी बात ही नहीं मानी तो हमें भी उस की फिक्र नहीं है. वह अकसर यही कहते थे कि शाहिद ने गलत कदम उठाया है तो खुद ही भुगते.
मृतक के मोबाइल में छिपा मौत का राज
शाहिद के पिता सलामत खान को यकीन नहीं हो रहा था कि शाहिद इस तरह खुदकुशी कर सकता है. मौत के तीसरे दिन 21 तारीख की बात है, उन्होंने देखा कि शाहिद की मौत का गम बहू के चेहरे पर कहीं नजर नहीं आ रहा था. शाहिद की मौत के बाद बहू दिन भर उस का मोबाइल यूज कर रही थी.
उन्होंने गुस्से में बहू को डांटते हुए उस से मोबाइल ले लिया था. सलामत खान को यह बात समझ नहीं आ रही थी कि उन के इकलौते बेटे की मौत से परिवार में मातम पसरा था, मगर बहू के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी. उस दिन शाम को वह शाहिद का मोबाइल साथ ले कर घर लौट आए.
21 मार्च को ही शाहिद की बहन मातमपुरसी के लिए अपने मायके आई हुई थी. उस समय वह अपने भाई को याद कर उस का मोबाइल देख रही थी, तभी अचानक मोबाइल में एक वीडियो देख कर उस की बहन चौंक गई. वह दौड़ती हुई अपने अब्बू के पास आ कर बोली, “अब्बा, इस मोबाइल में भाईजान का एक वीडियो है, जिस में वो बता रहे हैं कि उन्हें जान से मारने के लिए चाय में जहर मिला कर दिया गया है.”
“बेटी, जरा मुझे भी दिखाओ कैसा वीडियो है.” अपनी बेटी के हाथ से मोबाइल लेते हुए सलामत खान बोले. जैसे ही उन्होंने वीडियो देखा तो उन का शक पुख्ता हो गया. वे बिना देर किए मोबाइल ले कर सिविल लाइंस थाने पहुंच गए. वीडियो में शाहिद बारबार अपनी मौत के लिए ससुराल वालों को जिम्मेदार बता रहा था.
क्रमशः
24 अगस्त, 2015. शाजापुर शहर में डोल ग्यारस की धूम मची थी. गलीमहल्लों में ढोलढमक्का व अखाड़ों के साथ डोल निकाले जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर मुसलिम समुदाय ईद की तैयारी में मसरूफ था. 25 अगस्त, 2015 की ईद थी. सो, हंसीखुशी से यह त्योहार मनाए जाने की तैयारी में जुटा यह समुदाय खरीदफरोख्त में मशगूल था. कुरबानी के लिए बकरों को फूलमालाओं से सजा कर सड़कों पर घुमाया जा रहा था. बाजार में खुशनुमा माहौल था. कपड़े और मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी हुई थी.
शाजापुर के एक महल्ले पटेलवाड़ी के बाशिंदे इरशाद खां ने इस खुशनुमा माहौल में एक ऐसी दिल दहलाने वाली वारदात को अंजाम दे दिया कि सुनने वालों की रूह कांप गई. इरशाद खां ने अपने पड़ोसी आजाद की बकरी को गुस्से में आ कर छुरे से मार डाला. शायद वह बकरी इरशाद के घर में घुस गई थी और उस ने कुछ नुकसान कर दिया होगा, तभी इरशाद खां ने यह कांड कर दिया.
अपनी बकरी के मारे जाने की खबर लगते ही आजाद आपे से बाहर हो गया और उन दोनों के बीच तकरार शुरू हो गई. नौबत तूतूमैंमैं के बाद हाथापाई पर आ गई. इरशाद खां की 65 साला मां रईसा बी भी यह माजरा देख रही थीं. इरशाद खां द्वारा बकरी मार दिए जाने के बाद वे मन ही मन डर गई थीं. कोई अनहोनी घटना न घट जाए, इस के मद्देनजर वे अपने बेटे पर ही बरस पड़ीं. वे चिल्लाचिल्ला कर इरशाद खां को गालियां देने लगीं.
यह बात शाम की थी. हंगामा बढ़ता जा रहा था. इरशाद खां के सिर पर जुनून सवार होता जा रहा था. मां का चिल्लाना और गालियां बकना उसे नागवार लगा. पहले तो वह खामोश खड़ाखड़ा सुनता रहा, फिर अचानक उस का जुनून जब हद से ज्यादा बढ़ गया, तो वह दौड़ कर घर में गया और वही छुरा उठा लाया, जिस से उस ने बकरी को मार डाला था. लोग कुछ समझ पाते, इस के पहले इरशाद खां ने आव देखा न ताव और अपनी मां की गरदन पर ऐसा वार किया कि उन की सांस की नली कट गई. खून की फुहार छूटने लगी और वे कटे पेड़ की तरह जमीन पर गिर पड़ीं. उन का शरीर छटपटाने लगा.
इस खौफनाक मंजर को देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए. रईसा बी का शरीर कुछ देर छटपटाने के बाद शांत हो गया. मामले की नजाकत देखते हुए इरशाद खां वहां से भाग खड़ा हुआ. रईसा बी के बड़े बेटे रईस को जब इस दिल दहलाने वाली वारदात का पता चला, तो वह भागाभागा घर आया. तब तक उस की मां मर चुकी थीं.
बेटे रईस ने इस वारदात की रिपोर्ट कोतवाली शाजापुर पहुंच कर दर्ज कराई. पुलिस ने वारदात की जगह पर पहुंच कर कार्यवाही शुरू की. हत्या के मकसद से इस्तेमाल में लाए गए छुरे की जब्ती कर के पंचनामा बनाया गया. मौके पर मौजूद गवाहों के बयान लिए गए. इस के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए डा. भीमराव अंबेडकर जिला अस्पताल भेजा गया. इरशाद खां वहां से फरार तो हो गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद पुलिस ने उसे दबोच कर अपनी गिरफ्त में ले लिया.
शाजापुर जिला कोर्ट में यह मामला 2 साल तक चला. जज राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने मामले की हर पहलू से जांच करते हुए अभियोजन पक्ष की दलीलों से सहमत होते हुए इरशाद खां को मां की गरदन काट कर हत्या करने के जुर्म में कुसूरवार पाया. 8 सितंबर, 2017 को जज ने फैसला देते हुए उसे ताउम्र कैद की सजा सुनाई. यह सजा भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सुनाई गई. साथ ही, कुसूरवार पर 2 हजार रुपए का जुर्माना किया गया. जुर्माना अदा न करने पर 2 साल की अलग से कैद की सजा सुनाई गई.
ईद के मौके पर एक बेटे ने बकरे की जगह अपनी मां की कुरबानी दे कर रोंगटे खड़े कर देने वाले कांड को अंजाम दिया. वही मां, जिस ने उसे 9 महीने पेट में रखा. पालपोस कर उस की हर मांग पूरी करते हुए बड़ा किया. लेकिन शाजापुर में एक बेटे की इस दरिंदगी ने मां की मम?ता को तारतार कर दिया. गुस्से में उठाया गया यह कदम उस परिवार पर भारी पड़ गया. मां जान से हाथ धो बैठी, जबकि उस के कत्ल के इलजाम में बेटा जेल चला गया.
भोपाल सहित पूरे देश में रिटायर्ड एयरफोर्स अधिकारी की हत्या पर चर्चाएं होने लगी थीं. हर कोई पुलिस को कोस रहा था कि वह शहर में रह रहे अकेले बुजुर्गों की हिफाजत के लिए कोई इंतजाम नहीं करती. और तो और, पुलिस के पास अकेले रह रहे बूढ़ों का कोई डाटा या रिकौर्ड तक नहीं है. इन सब आलोचनाओं से परे पुलिस के हाथ हत्यारे के गिरेहबान तक पहुंच चुके थे. देर बस गिरफ्तारी की थी, जो 10 मार्च को हो भी गई और राजू ने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया.
दरअसल, पुलिस राजू और आरती के मोबाइल काल्स पर ध्यान रखे हुए थी. दोनों में बातचीत हो रही थी और नायर दंपति की हत्या की खबर सुन कर आरती इंदौर से भोपाल आ गई थी. पुलिस ने आरती को रडार पर लिया तो उस ने बताया कि राजू जरूर उस से मिलने आएगा. भोपाल आ कर आरती गोपालनगर झुग्गी इलाके में रुकी थी.
राजू को कतई अंदाजा या अहसास नहीं था कि भोपाल में पुलिस उस का स्वागत करने को तैयार है. वह तो अपने मालिक की हत्या पर शोक प्रकट करने इसलिए आ रहा था ताकि पुलिस उस पर शक न करे. जैसे ही वह भोपाल आया, सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे स्टेशन से धर दबोचा. पहले तो वह हत्या की वारदात से नानुकुर करता रहा, लेकिन जल्द ही टूट भी गया. उस ने हत्या का सच उगल दिया.
राजू ने मांबाप सरीखे दंपति को पैसे के लिए लगाया ठिकाने
32 वर्षीय राजू धाकड़ मूलत: ग्वालियर के हीरापुर गांव का रहने वाला था. उस ने वाकई जी.के. नायर से लगभग 2 लाख रुपए उधार ले रखे थे और उस की नीयत पैसे देने की नहीं थी. इस बात पर नायर उसे कभीकभी डांटा भी करते थे, जो उसे नागवार गुजरता था. इतना ही नहीं, राजू को यह शक भी था कि भेल के ठेका श्रमिक की नौकरी से उसे नायर ने ही निकलवाया है.
घटना की रात हत्या के इरादे से राजू कोई 9 बजे ग्वालियर से भोपाल आया. इस बाबत उस ने चाकू भी ग्वालियर से खरीद लिया था. भोपाल आ कर वह एसओएस बालग्राम स्टाप पर उतरा और वहां से पैदल ही नायर के घर तक गया. उस समय नायर दंपति टीवी देख रहे थे. राजू को देखते ही नायर की भौंहे तन गईं. उन्होंने उसे दरवाजे से ही वापस कर दिया. इस पर राजू ने गिड़गिड़ाते हुए उन्हें पुराने संबंधों का वास्ता दिया तो नरम दिल नायर पिघल उठे और उन्होंने उसे अंदर आने दिया.
उन की यह इजाजत भारी भूल साबित हुई. आदतन नायर ने फिर पैसों का तकादा किया तो राजू हमेशा की तरह बेशर्मी से नानुकुर करने लगा. बात करतेकरते दोनों पहली मंजिल पर आ गए, जहां नायर इत्मीनान से बैठ गए और राजू की खिंचाई करने लगे. इस बार राजू तय कर आया था, इसलिए जानबूझ कर विवाद को हवा दे रहा था.
पुराने पैसे लौटाने की बात तो दूर राजू ने नायर से और पैसे मांगे तो वे झल्ला उठे और तेज आवाज में उसे डांटने लगे. डांट सुन कर राजू को भी गुस्सा आ गया. वह हाथ धोने के बहाने बाथरूम में चला गया और मुड़ कर नायर के पीछे आ कर खड़ा हो गया. जेब से चाकू निकाल कर राजू ने नायर की गरदन पर 1-2 नहीं बल्कि गिन कर पूरे 10 प्रहार किए और 11वीं वार में उन का गला रेत डाला.
ताबड़तोड़ हमलों से घबराए और तड़पते जी.के. नायर पत्नी का नाम ले कर चिल्लाए. उन की चीख सुन कर गोमती पहली मंजिल की तरफ दौड़ीं. पैरों में तकलीफ होने के कारण गोमती कभी पहली मंजिल पर नहीं जाती थीं. मालिक का काम तमाम कर के राजू अभी उठा ही था कि मालकिन सामने आ गईं. गोमती को भी उस ने नहीं बख्शा और उसी चाकू से उन का गला रेत दिया.
चीखें भी रहीं बेअसर
यही वे चीखें थीं, जो रत्ना मिस्त्री ने सुनी थीं. लेकिन रोजमर्रा की आम बातचीत समझ कर उन्होंने उन्हें इसे नजरअंदाज कर दिया था. जी.के. नायर ने बचाव की कोशिश की थी, जिस में हाथापाई के दौरान चाकू उलट कर राजू की जांघ में भी लग गया था. लेकिन उसे ज्यादा चोट नहीं आई थी.
2 हत्याएं कर के राजू ने किचन में जा कर खून से सना चाकू साफ किया और पूरा किचन साफ कर दिया. खून के धब्बे लगी अपनी पैंट उतार कर उस ने घर से उठा कर नीले रंग का लोअर पहना और जाने से पहले सोने के जेवरों पर हाथ साफ कर दिया.
उस ने अलमारी में सोने की 8 चूडि़यां चुराईं और फिर मृत गोमती के गले में पड़ी चेन भी उतार ली. बाथरूम जा कर उस ने खून से सने कपड़े भी धोए और फिर एक नजर घर पर डाल कर बालकनी के रास्ते कूद कर चला गया. स्टेशन तक वह पैदल ही गया और ग्वालियर जाने वाली ट्रेन में बैठ गया. सुबह ही वह वापस भोपाल के लिए रवाना हो गया, जिस का अंदेशा आरती पुलिस वालों के सामने जता चुकी थी.
राजू के मन में लालच और हैवानियत दोनों आ गए थे. नायर दंपति की मेहरबानियों का बदला उस ने बजाय नमक हलाली के नमक हरामी से चुकाया. लगता यही है कि नौकरों पर जरूरत से ज्यादा मेहरबानियां और दयानतदारी जानलेवा भी हो सकती है. इन दोनों के कत्ल की उस की हिम्मत इसलिए भी पड़ी कि दोनों अकेले रहते थे और राजू के बारे में सब कुछ जानता था.
आरती के मन में अपने मालिकों के उपकारों के प्रति कृतज्ञता थी, जिस के चलते उस ने अपने हत्यारे पति को बचाने की कोशिश नहीं की. हालांकि इस दोहरे हत्याकांड में इस बात का कलंक भी लगा कि जी.के. नायर की हत्या की एक वजह उन के आरती से कथित अवैध संबंध भी थे.
भोपाल के डीआईजी धर्मेंद्र चतुर्वेदी के मुताबिक, राजू ने अपने बचाव में हत्या की वजह रुपयों के लेनदेन के अलावा व्यक्तिगत वजह भी बताई है. लेकिन स्पष्ट रूप से इन निजी कारणों का खुलासा पुलिस ने जाने क्यों नहीं किया. अपने बचाव की कोशिश में राजू ने 24 घंटों में ग्वालियर भोपाल अपडाउन किया, लेकिन वह खुद का गुनाह छिपा नहीं पाया.