Crime Story : बीवी और मंगेतर को मारने वाला नाइट्रोजन गैस किलर

Crime Story : बठिंडा की रहने वाली सोनू के जीवन में खुशियों की सौगात आने वाली थी, क्योंकि एक लंबे इंतजार के बाद उस की शादी उस के प्रेमी और मंगेतर नवनिंदर से होने वाली थी. पटियाला में मंगेतर नवनिंदर के साथ दिल खोल शौपिंग के बाद वह एक दिन अचानक से गायब हो गई. बाद में इस का राज खुला तो…

11 अक्तूबर 2021 का दिन था. बठिंडा, पंजाब की रहने वाली छपिंदरपाल कौर उर्फ सोनू (28) पटियाला में अपने होने वाले पति से मिलने के लिए जा रही थी. वह बेहद खुश थी क्योंकि एक लंब े अरसे के इंतजार के बाद उस की शादी नवनिंदर प्रीतपाल सिंह उर्फ सिद्धू (39) से होने वाली थी. लंबा इंतजार इसलिए क्योंकि छपिंदरपाल और नवनिंदर दोनों की सगाई पिछले साल मार्च 2020 में ही हो गई थी. लेकिन उन की शादी उन दिनों देश में फैले कोविड की वजह से नहीं हो पाई. जब कोविड का असर धीरेधीरे कम होने लगा और देश में अनलौक की प्रक्रिया को चालू किया गया, उस के बाद नवनिंदर अपने निजी कारणों से शादी की डेट लगातार टाल दिया करता था.

इस शादी के लिए छपिंदर ने लंबा इंतजार किया था, जोकि आने वाले 20 अक्तूबर को खत्म होने वाला था. नवनिंदर पटियाला के अर्बन एस्टेट इलाके में रहता था जोकि पौश इलाकों में माना जाता है. वह अपने मातापिता का एकलौता बेटा था. उस के 80 साल के पिता इंडियन आर्मी के रिटायर्ड कर्नल थे, जिन की आखिरी इच्छा अपने बेटे की खुशहाल जिंदगी देना था. दरअसल, नवनिंदर और छपिंदरपाल उर्फ सोनू दोनों ने एक साथ पंजाबराजस्थान के बौर्डर पर स्थित श्रीगंगानगर में श्री गुरुनानक खालसा ला कालेज से एलएलबी यानी कानून में बैचलर की पढ़ाई की थी. उसी दौरान बठिंडा और पटियाला 2 अलगअलग इलाकों के रहने वाले इन दोनों में दोस्ती गहराई और प्यार हो गया. इस के अलावा नवनिंदर ने समाजशास्त्र में पोस्ट ग्रैजुएशन की पढ़ाई भी की थी और वह अमेरिका के एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में पढ़ाई करने वाले बच्चों को औनलाइन पढ़ाता था.

11 अक्तूबर को जब नवनिंदर ने छपिंदर को शादी की शौपिंग और तैयारियां करने के लिए बुलाया तो छपिंदर उर्फ सोनू की खुशी का ठिकाना नहीं था. छपिंदर के घर वालों ने भी इस के लिए टोकाटाकी नहीं की. उन्होंने खुशी से अपनी बेटी को पटियाला उस के होने वाले पति से मिलने की इजाजत दे दी. 11 अक्तूबर की दोपहर को सोनू पटियाला पहुंच कर नवनिंदर से मिली. सब से पहले नवनिंदर सोनू को अपने साथ एक होटल में ले गया. जहां वह फ्रैश हुई और कपड़े बदल कर वे दोनों पटियाला में लगने वाली बड़ी मार्किट में शौपिंग के लिए निकल गए.

11 अक्तूबर से 13 अक्तूबर तक नवनिंदर ने सोनू को अपने साथ खूब घुमायाफिराया. सोनू ने नवनिंदर से जिस किसी चीज की मांग की, नवनिंदर ने उन सभी मांगों की पूर्ति की. वे दोनों कभी महंगे 5 स्टार होटल में खाना खाने जाते, कभी बड़ेबड़े शौपिंग कौंप्लेक्स में घूमते और खरीदारी करते. इस बीच मौका मिलते ही सोनू अपने घर वालों से और अपने दोस्तों से फोन कर उन से बात किया करती. अपने घर वालों से उस की लगभग हर दिन ही बातचीत होती थी. सोनू से बातें कर उस के घर वालों के दिल को सुकून मिल जाता था. सोनू के पिता सुखचैन सिंह अपनी बेटी से बहुत प्यार करते थे. घर पर सोनू के नहीं होने से उन्हें घर बेहद सूना लग रहा था. लेकिन 14 अक्तूबर से सोनू ने फोन उठाना बंद कर दिया. उस के घर वाले उस के नंबर पर फोन करते रहे, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया.

पहले तो सोनू के घर वालों को लगा कि शायद वह कहीं व्यस्त होगी या फिर शौपिंग करने में मशगूल होगी. लेकिन जब सोनू की तरफ से अपने पिता को या घर में किसी को भी कालबैक नहीं की गई तो उन की चिंता बढ़ने लगी. जब उन को महसूस हुआ कि सोनू फोन नहीं उठा रही तो उन्होंने नवनिंदर के नंबर पर फोन किया. बेटी की खबर से सुखचैन की बढ़ी चिंता सोनू के पिता सुखचैन सिंह की काल देख नवनिंदर ने फोन उठाया और बात की. सुखचैन हड़बड़ाते हुए बोले, ‘‘बेटा, ये सोनू फोन क्यों नहीं उठा रही है? हम काफी देर से उसे फोन कर रहे हैं. न तो वह फोन उठा रही है और न ही कालबैक कर रही है. आखिर वह है कहां पर?’’

पिता की चिंता महसूस कर नवनिंदर हकपका गया. जवाब में उस ने कहा, ‘‘सतश्रीअकाल पापाजी. दरअसल, आज सुबह सोनू के साथ मार्किट शौपिंग के लिए जाना था लेकिन छोटी सी एक बात पर वह रूठ गई. गुस्सा हो कर वह घर से निकल गई, वह भी बिना अपना फोन लिए. मैं ने उस का फोन देखा भी नहीं था. मैं भी उसे तब से फोन मिला रहा हूं, लेकिन अभी देखा कि वह अपना फोन ले जाना भूल गई है. आप चिंता न करें. वह जल्द ही घर लौट आएगी. तब मैं आप की बात उस से करवा दूंगा.’’

अपनी बेटी और होने वाले दामाद के बीच झगड़े की इस बात को सुन कर सुखचैन सिंह के मन का सुख और चैन मानो कहीं गायब सा हो गया. उन के दिल में अपनी बेटी को ले कर बेचैनी पैदा हो गई. वह हर पल सोनू के बारे में ही सोचे जा रहे थे कि आखिर एक बड़े से शहर में उन की बेटी बिना फोन लिए कहां भटक रही होगी या उस के साथ कुछ अनहोनी न हो जाए. 14 अक्तूबर, 2021 को जब सोनू के घर वालों को यह बात पता चली, उस के बाद से नवनिंदर को हर घंटे फोन आता. लेकिन सोनू के वापस आने की उन्हें कोई खबर नहीं मिली.

सोनू के लापता होने को 24 घंटे हो गए तो घर वालों को अपनी बेटी की चिंता होने लगी कि सोनू का भाई दविंदर सिंह और पिता सुखचैन सिंह अगले दिन 15 अक्तूबर की सुबहसुबह करीब 5 बजे बठिंडा से पटियाला नवनिंदर से मिलने के लिए पहुंच गए. नवनिंदर ने उन्हें अपने और सोनू के बीच होने वाले झगड़े के बारे में बताया लेकिन नवनिंदर की बात सुन कर उन के मन को शांति नहीं हुई. मामले को गंभीर होता देख, दविंदर, सुखचैन सिंह और नवनिंदर, तीनों पटियाला के अर्बन एस्टेट पुलिस स्टेशन जा पहुंचे. अर्बन एस्टेट थाने के थानाप्रभारी रौनी सिंह ने सुखचैन सिंह की शिकायत पर सोनू की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर जल्द ही काररवाई शुरू कर दी. ऐसे में सोनू को ढूंढने के लिए सब से पहले जिस शख्स से पूछताछ होनी थी, वह नवनिंदर ही था.

पुलिस ने नवनिंदर से उन के बीच होने वाले झगड़े की वजह पूछी. जब नवनिंदर ने झगड़े का कारण बताया तो उसे सुन कर पुलिस के मन में पहली नजर में ही उस के ऊपर शक होने लगा. नवनिंदर ने बताया कि मार्किट में एक चीज को खरीदने के लिए उस ने सोनू को मना कर दिया था, जिस के बाद वह रूठ गई थी. होटल में उन के बीच इसी बात को ले कर हलकी नोकझोंक भी हुई थी. नवनिंदर की ये बातें सुन कर थानाप्रभारी के मन में सवाल उठने शुरू हो गए थे. वह सोचने लगे कि जिस जोड़ी की भला कुछ दिनों के बाद शादी होने वाली हो, उन के बीच इस बात पर झगड़ा होना और घर से निकल जाना, कैसे संभव हो सकता है.

ये वजह उन्हें कुछ हजम नहीं हुई. तो ऐसे में नवनिंदर से पुलिस की पूछताछ करने वाली टीम ने कुछ और जरूरी सवालजवाब किए. पुलिस वालों ने नोटिस किया कि नवनिंदर ने उन के जितने सवालों का जवाब दिया, उन से उन्हें नवनिंदर पर शक गहराता जा रहा था. ऐसी स्थिति में थानाप्रभारी ने सोनू के पिता और भाई को तसल्ली दी और जल्द ही सोनू के बारे में पता लगाने का आश्वासन भी दिया. और इस मामले को ले कर पुलिस ने तुरंत काररवाई करनी शुरू कर दी.

पुलिस टीमें जुटीं जांच में 

पुलिस की कई टीमें इस काम में जुट गईं. एक टीम पटियाला में सोनू को ढूंढने में लगी थी तो दूसरी टैक्निकल टीम उस की लास्ट लोकेशन और उस से पहले वह कहांकहां गई, उस के बारे में पता करने में व्यस्त थी. ऐसे में थानाप्रभारी के नेतृत्व में एक टीम ऐसी बनाई गई जोकि सोनू के मंगेतर नवनिंदर की हिस्ट्री का पता लगाने के लिए थी. इस टीम में खुद थानाप्रभारी शामिल थे. एक तरफ पुलिस की सभी टीमें सोनू का पता लगाने का काम कर रही थीं तो दूसरी तरफ समय बीतने के साथसाथ सोनू के घर वालों के सब्र का बांध टूटता जा रहा था. घर वालों के मन में सोनू को ले कर बेचैनी और चिंता ने इस कदर घर कर लिया था कि जिसे निकाल बाहर फंकना बेहद मुश्किल था.

अगले 4-5 दिनों तक पुलिस से सोनू के परिवार वालों को कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन अंदर ही अंदर पुलिस की टीमें अपना काम कर रही थीं. 20 अक्तूबर, 2021 के दिन थानाप्रभारी ने बठिंडा से सोनू के घर वालों को पटियाला अर्बन एस्टेट पुलिस थाने में बुलाया. पुलिस ने नवनिंदर के बारे में कुछ ऐसी चीजों का पता लगा लिया था, जिस का सोनू के घर वालों को पता होना जरूरी था. खबर मिलते ही सुखचैन सिंह, दविंदर और साथ में कुछ और लोग अर्बन एस्टेट पुलिस थाने जल्द से जल्द पहुंच गए. उन के पहुंचते ही थानाप्रभारी ने उन्हें अपने औफिस में बुलाया और उन के होने वाले दामाद नवनिंदर के बारे में कुछ ऐसे खुलासे किए, जिसे सुन कर सोनू के घर वालों के होश उड़ गए थे.

पता चला कि नवनिंदर की पहली शादी 12 फरवरी, 2018 को गांव बिशनपुरा, जिला संगरूर, पंजाब की रहने वाली सुखदीप कौर से हो चुकी थी. सुखदीप उच्चशिक्षित परिवार से ताल्लुक रखती थी और वह खुद भी ट्रिपल एमए थी. लेकिन 19 सितंबर 2021 को उस की रहस्यमयी हालत में मौत हो गई. रहस्यमयी इसलिए क्योंकि उस की मौत कैसे हुई, इस का किसी के पास कोई प्रूफ नहीं था. पुलिस की टीम ने जब संगरूर में सुखदीप के घर पर जा कर उस की मृत्यु का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि सुखदीप की मौत हार्ट अटैक से हुई थी. जब उन से पूछा गया कि उन्हें इस बात पर कैसे यकीन है कि सुखदीप की मौत हार्ट अटैक से हुई तो उन्होंने बताया कि उस के पूरे शरीर पर किसी चीज का निशान नहीं था, जिस से उन्हें किसी और बात पर शक हो.

मंगेतर ही निकला कातिल परिवार ने यह भी बताया कि सुखदीप 5 महीने की प्रेग्नेंट भी थी. सिर्फ यही नहीं, पुलिस टीम ने नवनिंदर के बारे में कुछ और भी पता लगाया जोकि हैरान करने वाला था. फरवरी 2018 में सुखदीप से पहली शादी के बाद उस ने पहली अक्तूबर, 2018 को भवानीगढ़ संगरूर की रहने वाली लखविंदर कौर से भी शादी की थी. इस की जानकारी सुखदीप के घर वालों को नहीं हुई. लखविंदर के साथ नवनिंदर अर्बन एस्टेट अपने पिता के घर से कुछ दूरी पर किराए के कमरे में रहता था. उन्होंने सुखदीप के घरवालों से नवनिंदर की लखविंदर से शादी के बारे में जब पूछा तो उन्हें इस बात का पता ही नहीं था कि नवनिंदर ने कहीं और भी शादी की थी.

इस का मतलब यह था कि नवनिंदर ने सुखदीप को धोखे में रख कर 6 महीने बाद एक और शादी की थी. इस बीच सब से ज्यादा हैरानी की बात यह थी कि इन सभी बातों के बारे में सोनू के घर वालों को पता ही नहीं था. उन्होंने थानाप्रभारी को बताया कि नवनिंदर और सोनू के बीच पिछले 2 सालों से संबंध था. इस बीच नवनिंदर उन के घर आता था, परिवार वालों से बातचीत करता था, बच्चों के लिए खिलौने लाया करता था लेकिन उस ने कभी भी अपने पुराने रिश्तों के बारे में किसी को नहीं बताया. उन्होंने इस बात को भी माना कि अगर नवनिंदर ने सोनू को भी इस बारे में कुछ भी बताया होता तो सोनू जरूर अपने घर वालों को इस के बारे में बताती.

इस का मतलब यह था कि नवनिंदर सोनू समेत सभी को धोखे में रख कर यह शादी करने वाला था. यह सब जानने और सुनने के बाद अब पुलिस के शक की सुई सिर्फ एक ही शख्स पर आ कर रुक गई, वह था नवनिंदर. सब जानने के बाद सोनू के पिता सुखचैन सिंह ने अगले दिन 21 अक्तूबर को नवनिंदर के खिलाफ अपनी बेटी की किडनैपिंग की रिपोर्ट दर्ज करा दी और पुलिस ने सुखचैन सिंह की तहरीर पर नवनिंदर को हिरासत में ले लिया. इस बार नवनिंदर को हिरासत में लेने के बाद पुलिस की पूछताछ करने वाली टीम ने शुरुआत से ही उसे सवालों के ऐसे घेरे में ले लिया कि वह कोई जवाब नहीं दे पाया.

उस ने पुलिस के सवालों पर ऐसी चुप्पी साध ली कि उस से कुबूलवाने के लिए पुलिस को सख्ती दिखानी पड़ी. सख्ती से पूछताछ करने के बाद नवनिंदर ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने पुलिस के सामने अपने रिश्ते छपिंदरपाल कौर उर्फ सोनू, सुखदीप कौर और लखविंदर कौर के साथ होने की बात को स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि वह इन तीनों के रिश्तों के बीच खुद को काफी उलझा हुआ महसूस करने लगा था, जिस से निकलने के लिए उसे सिर्फ एक ही रास्ता दिखाई देने लगा. वह तीनों में से किन्हीं 2 की मौत ही था.

उस ने अपनी पहली पत्नी सुखदीप को इसलिए जान से मार दिया क्योंकि एक तो वह लखविंदर से उस के रिश्ते के बारे में जान चुकी थी और दूसरी बात यह कि वह उस के बच्चे की मां बनने वाली थी. जबकि नवनिंदर पिता बनने के लिए तैयार नहीं था, वह भी उस स्थिति में जब वह पहले से ही 2 महिलाओं के साथ रिश्ते में बंधा हुआ था. उस ने इस उलझन को खत्म करने के लिए सब से पहले सुखदीप को ठिकाने लगाने के बारे में प्लान किया. चूंकि नवनिंदर ने कानून की पढ़ाई की थी और वह क्रिमिनल लौ के बारे में अच्छे से समझता था, इसलिए वह सुखदीप को मारने के बाद कोई भी सबूत पीछे नहीं छोड़ना चाहता था.

उसे पता था कि हत्या किसी भी तरीके से की जाए, आखिर में कोई न कोई सबूत पीछे छूट ही जाता है. ऐसे में हत्या करने के तरीकों के बारे में वह पिछले 6 महीनों से रिसर्च करने लगा. वह दिनरात इंटरनेट पर तरहतरह के आर्टिकल पढ़ता, क्राइम स्टोरीज पढ़ता और हत्या के तरीके ढूंढता. उस ने पिछले 6 महीनों में हत्या का तरीका ढूंढने के लिए 200 से ज्यादा बौलीवुड, साउथ बौलीवुड और हौलीवुड की फिल्में देख डालीं. वह हर दिन क्राइम पैट्रोल शो भी देखने लगा. अंत में इसी तरह की फिल्में देखने के बाद उसे एक तरकीब सूझी नाइट्रोजन गैस.

उस ने इस बारे में खूब पढ़ा और अंत में इस नतीजे पर पहुंचा कि नाइट्रोजन गैस के इस्तेमाल से शरीर पर किसी तरह के कोई निशान नहीं छूटते और बिना किसी शोरशराबे के पीडि़त पहले बेहोश हो जाता है और उस के बाद उस की मृत्यु तय है. नाइट्रोजन गैस को बनाया मौत का हथियार आखिर उस ने सुखदीप से अपना पीछा छुड़ाने के लिए नाइट्रोजन गैस को अपना हथियार बना लिया. 19 सितंबर, 2021 की रात को नवनिंदर सुखदीप के लिए औक्सीजन गैस के सिलिंडर में नाइट्रोजन भर कर लाया.

रात को सोते समय उस ने सुखदीप से कहा कि अगर वह औक्सीजन गैस इन्हेल (श्वास) करेगी तो यह उस के लिए और उन के बच्चे के लिए अच्छा साबित होगा. सुखदीप पढ़ीलिखी महिला थी और वह भी इस बात को अच्छे से जानती थी. इसलिए नवनिंदर पर किसी तरह का शक होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता. नवनिंदर ने इस हत्या को अंजाम देने के लिए खास तरह का मास्क भी बनवाया था, जिस में छेद नहीं थे. सुखदीप ने नवनिंदर की बात मानते हुए मास्क लगाया और नवनिंदर ने सिलिंडर से धीरेधीरे गैस छोड़नी शुरू कर दी. सुखदीप को क्या मालूम था कि उस का पति औक्सीजन सिलिंडर में नाइट्रोजन गैस भर कर लाया है. नाइट्रोजन गैस उस की नाक से होते हुए उस के फेफड़ों में फैल गई.

धीरेधीरे कुछ ही मिनटों में नाइट्रोजन खून से होते हुए पूरे शरीर में फैल गई, जिस से पहले तो सुखदीप बेहोश हुई और उस के चंद सैकंड बाद उस की मौत हो गई. सुखदीप की हत्या के बाद उस ने सुखदीप के घर वालों को उस की मौत हार्टअटैक से बताई, जिसे सुखदीप के घर वालों ने मान लिया. इसी तरह उस ने सोनू की मौत को भी अंजाम दिया. 11 अक्तूबर को जब सोनू उस से मिलने के लिए बठिंडा से पटियाला आई थी तो उस ने उसी दिन से ही अपने घर, अपने कमरे में सोनू को दफनाने के लिए गड्ढा खोदना शुरू कर दिया था.

गड्ढा खोदने के लिए उस ने बाकायदा टीवी पर तेज वौल्यूम में गाने चला दिए और हाथों में दस्ताने, आंखों पर चश्मा लगा कर फावड़े से गहरा गड्ढा खोद दिया. 11-13 अक्तूबर के बीच उस ने हर दिन थोड़ाथोड़ा कर सोनू की कब्र खोदी. 13 अक्तूबर की शाम को वह शौपिंग कर के घर लौटे तो उस ने अपने वही पुराने नाइट्रोजन गैस सिलिंडर को निकाल लिया. उस ने सोनू से कहा कि अगर वह शुद्ध औक्सीजन इन्हेल करेगी तो उस की मदद से चेहरे पर ग्लो आएगा. नादान सोनू भी सुखदीप की ही तरह नवनिंदर के जाल में फंस गई. उस ने उस की बात मान ली और जैसे ही नाइट्रोजन गैस उस ने कुछ मिनटों के लिए सूंघी, उस के कुछ देर बाद वह बेहोश हुई और ज्यादा गैस इन्हेल करने की वजह से उस की मौके पर ही मौत हो गई.

नवनिंदर ने सोनू की हत्या करने के बाद तुरंत उसे खोदे हुए गड्ढे में डाल दिया. ऊपर से मिट्टी डाल कर जमीन को बराबर किया. फिर टाइल्स का इस्तेमाल कर के उस जगह को एकदम चकाचक बना दिया. उस ने सबूत के कोई निशान नहीं छोड़े. अपना गुनाह कुबूल करने के बाद नवनिंदर की निशानदेही पर पुलिस ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रैट की मौजूदगी में 368 अर्बन एस्टेट पटियाला, पंजाब (नवनिंदर के घर) पर उस के कमरे में बैड के नीचे के फर्श को उखाड़ा और खुदाई कर के सोनू की लाश बरामद कर ली.

हत्या का परदाफाश करने के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर 6 दिनों का रिमांड माननीय न्यायाधीश से लिया. रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने उस से विस्तार से पूछताछ की. फिर उसे छपिंदरपाल कौर उर्फ सोनू और पहली पत्नी सुखदीप कौर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. भोलाभाला दिखने वाला शातिर अपराधी नवनिंदर प्रीतपाल सिंह उर्फ सिद्धू अब सलाखों के पीछे है.  Crime Story

 

Hindi Story : ड्रम में छिपाई गई लाश का असली हत्यारा कौन था

Hindi Story : अनैतिक रिश्ते को अधिक दिनों तक परदे में नहीं छिपाया जा सकता है. इस से परदा हटते ही भूचाल आ जाता है. कई बार इस कारण आक्रोश की भड़की ज्वाला में जीवनलीला ही भस्म हो जाती है. ऐसा ही कानपुर के एक बैंककर्मी के साथ हुआ. अवैध संबंध में न केवल उस की जान गई, बल्कि 3 जिंदगियां भी  गुमशुदा विशाल अग्रवाल की लाश बरामद होने पर उन्नाव के दही थाने की पुलिस ने पहली जांच में ही उस के हत्या किए जाने की पुष्टि कर दी थी. करीब 25 वर्षीय विशाल एक बैंककर्मी था, जिस की लाश जिले में शारदा नहर के किनारे झाडि़यों में लावारिस पड़ी ड्रम से मिली थी. लाश को एक प्लास्टिक के ड्रम में ठूंस कर पैक किया गया था. ड्रम पुरवा मार्ग पर स्थित बंद पड़ी एलए आयरन फैक्ट्री से एक किलोमीटर दूर सराय करियान गांव के पास गुजरने वाली नहर के किनारे पड़ा था.

ड्रम से दुर्गंध आने की सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी थी. सूचना के आधार पर ही खेड़ा चौकीप्रभारी अंशुमान सिंह हमराही ने ड्रम को खुलवाया, जिस में से 25 वर्षीय युवक की रक्तरंजित लाश बरामद हुई.  वहीं पास में ही एक स्कूटी की चाबी भी मिली. पुलिस ने मौके की काररवाई पूरी कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी और उस की शिनाख्त के लिए जिले के सभी थानों में सूचना प्रसारित करवा दी. उन्हीं दिनों नौबस्ता थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह विशाल अग्रवाल नामक युवक की तलाशी कर रहे थे. उस के लापता होने की सूचना अंशुल अग्रवाल ने दर्ज करवाई थी. वह अंशुल का छोटा भाई था. नौबस्ता थानाप्रभारी को दही थानाक्षेत्र में एक युवक की लाश बरामद होने की सूचना मिली तो वह अंशुल को साथ ले कर उन्नाव जा पहुंचे.

वहां पहुंच कर उन्होंने चौकीप्रभारी अंशुमान सिंह से मुलाकात की. तब उन्होंने मोर्चरी ले जा कर बरामद लाश थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह और उन के साथ आए युवक अंशुल को दिखाई. अंशुल ने उस लाश की शिनाख्त अपने छोटे भाई विशाल अग्रवाल के रूप में की. लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद थानाप्रभारी नौबस्ता लौट आए. उन्होंने सब से पहले गुमशुदगी के मामले को हत्या में तरमीम कराया फिर वह हत्यारे की तलाश में जुट गए. उन्होंने पहले मृतक के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उस का मोबाइल 7 सितंबर को रात 10 बजे के बाद स्विच्ड औफ हो गया था. उस मोबाइल से अंतिम बातचीत 8 बज कर 50 मिनट पर हुई थी, जबकि साढ़े 8 बजे उस पर एक मिस्ड काल भी आई थी. जांच का सिलसिला मोबाइल से मिली कुछ जानकारियों के साथ शुरू किया गया.

जिस नंबर से विशाल के मोबाइल पर काल की गई थी, वह नंबर सत्यम ओमर नाम के व्यक्ति का था. सत्यम कानपुर निवासी अनिल ओमर का बेटा था. पुलिस द्वारा उस मोबाइल नंबर पर काल की गई तो वह बंद मिला. फिर पुलिस ने नंबर से मिले पते पर दबिश दी, किंतु वहां सत्यम नहीं मिला. सिर्फ इतना मालूम हुआ कि वह इस पते पर ढाई साल पहले रहता था. हालांकि जल्द ही थानाप्रभारी को मुखबिरों से सत्यम के नए पते की जानकारी मिल गई. पता चला कि वह अब रामनारायण बाजार स्थित फ्लैट में रहता है. पुलिस को मुखबिर से उस के उस फ्लैट में उपस्थित रहने के समय का भी पता लग गया.

इस सूचना के आधार पर थानाप्रभारी ने क्राइम ब्रांच इंसपेक्टर छत्रपाल सिंह, उस्मानपुर चौकीइंचार्ज प्रमोद कुमार, बसंत विहार चौकीइंचार्ज मनीष कुमार, एसआई रवींद्र कुमार, हेडकांस्टेबल अरविंद सिंह, सुरेंद्र सिंह, दीपू भारतीय, राजीव यादव, कांस्टेबल सौरभ पाडेय, महिला सिपाही पल्लवी के साथ उक्त फ्लैट पर दबिश दी. उस समय फ्लैट से 2 युवक सीढि़यों से उतर रहे थे. पुलिसकर्मियों को देखते ही दोनों भागने लगे, लेकिन वे पकड़ लिए गए. पुलिस दोनों को ले कर उस फ्लैट में गई. उन से पूछताछ करने पर एक युवक ने अपना नाम सत्यम ओमर, जबकि दूसरे ने सरवन बताया. वहीं 16-17 साल की एक लड़की भी मौजूद थी. उस ने पुलिस को बताया कि वह सत्यम की मौसेरी बहन है और पास ही दूसरे मकान में रहती है. उस का नाम राधा (परिवर्तित) था.

उन से पूछताछ के बाद पुलिस ने फ्लैट के बारीकी से निरीक्षण में पाया कि कमरे की दीवारों को जगहजगह खुरचा गया है. इस का कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि डिस्टेंपर करवाना है. यह बात पुलिस को हजम नहीं हुई, कारण वहां डिस्टेंपर के लिए किसी तरह के इंतजाम कहीं नहीं दिखा. दीवारों पर खुरचने के निशान भी जहांतहां मिले. उस बारे में सभी ने हिचकिचाट के साथ बताया. थानाप्रभारी ने राधा के चेहरे पर भी गौर किया, जिस का रंग अचानक तब फीका पड़ गया था, जब उन्होंने कहा कि वे विशाल अग्रवाल की हत्या के सिलसिले में पूछताछ करने आए हैं. इस में उस ने साथ नहीं दिया तो वह भी मुश्किल में पड़ जाएगी.

इसी के साथ थानाप्रभारी दोनों युवकों को विशेष पूछताछ के लिए थाने ले आए. उन्होंने सत्यम से सीधा सवाल किया, ‘‘तुम ने 7 सितंबर की शाम साढ़े 8 बजे विशाल को मिस्ड काल क्यों किया था?’’

इस का जवाब देते हुए सत्यम हकबकाता हुआ बोला, ‘‘वह नंबर मैं नहीं, मेरी मौसेरी बहन इस्तेमाल करती है. उसी से पूछना होगा.’’

‘‘वह विशाल को कैसे जानती है?’’ सिंह ने सवाल किया.

‘‘मुझे नहीं मालूम,’’ सत्यम बोला.

उस के बाद थानाप्रभारी को राधा भी संदिग्ध लगी. उन्होंने उसे भी तुरंत थाने बुलाया और पूछताछ शुरू की. उस से फोन काल के बारे में नहीं पूछा, बल्कि सीधे लहजे में पूछ लिया कि विशाल से उस के क्या संबंध थे. यह सवाल सुन कर सामने बैठे अपने भाई और उस के दोस्त सरवन को देख कर घबरा गई. उस के कुछ बोलने से पहले ही थानाप्रभारी ने समझाया, ‘‘तुम्हारे विशाल से जो भी संबंध रहे, वे उस की मौत के साथ खत्म हो गए. तुम्हारे भाई ने भी मुझे कई बातें बताई हैं, जिस से तुम पर भी उस की हत्या में साथ देने का शक है. मुझे पता है कि विशाल ने तुम्हारे मिस्ड काल के थोड़ी देर बाद फोन किया था. तुम सिर्फ इतना बता दो उस से तुम्हारी क्या बात हुई थी.’’

यह सुन कर राधा कभी पुलिस को देखती, तो कभी इधरउधर देखने के बहाने से सत्यम को देखने लगती. वह यह सोच कर भीतर से डर गई कि लगता है सरवन ने पुलिस को सब कुछ बता दिया. कुछ सेकेंड बाद सिंह ने फिर सवाल किया, ‘‘बताया नहीं, तुम्हारे विशाल से क्या संबंध थे?’’

‘‘उसे प्यार करती थी,’’ राधा धीमी आवाज में बोली.

‘‘इस का सत्यम को पता था?’’ सिंह ने पूछा.

‘‘नहीं,’’ राधा बोली.

‘‘क्यों?’’

‘‘डर गई थी.’’

‘‘ भाई से डर कर कुछ नहीं बताया था या फिर कुछ और बात है?’’

‘‘भाई से डरती थी, इसलिए नहीं बताया.’’ राधा बोली.

‘‘अच्छा चलो, अब यह बता दो कि 7 सितंबर की शाम को तुम्हारी विशाल से क्या बात हुई थी?’’

अलगअलग तरह से बदले हुए सवालों को सुन कर राधा पसीनेपसीने हो गई थी, दुपट्टे से पसीना पोछती हुई बोली, ‘‘उस से मिलना चाहती थी.’’

‘‘वह भी रात में! मिलने के लिए कहां बुलाया था?’’ सिंह ने पूछा.

‘‘भाई के फ्लैट पर,’’ राधा ने बताया.

‘‘क्यों, क्या उसे भाई से मिलवाना था? लेकिन भाई तो बोला कि वह उस दिन कहीं गया हुआ था. घर पर था ही नहीं.’’ थानाप्रभारी के सवालों से राधा खुद को घिरा महसूस करने लगी. कुछ भी नहीं बोल पाई. बीच में सत्यम कुछ बोलने को हुआ, तब थानाप्रभारी ने उसे डपट दिया. उस के बाद राधा रोने लगी.

थानाप्रभारी ने तुरंत महिला सिपाही को एक गिलास पानी लाने के लिए कहा और खुद उठ कर अलमारी खोलने लगे. महिला सिपाही से पानी पीने के बाद सिंह एक बार फिर बोले, ‘‘सचसच बताओ, 7 सितंबर को तुम्हारे और विशाल के साथ क्याक्या हुआ? अभी मैं प्यार से पूछ रहा हूं, लेकिन मुझे सच्चाई बाहर निकलवाना भी आता है. देखो उसे, जिस ने तुम्हें पानी पिलाया है, वही तुम्हारे मुंह में अंगुली डालकर सारी बातें भी निकलवा लेगी.’’ यह कहते हुए थानाप्रभारी ने सत्यम और सरवन को दूसरे कमरे में भेज दिया.      अब तक पुलिस दबाव में आ कर राधा पूरी तरह से टूट गई थी. उस ने विशाल के साथ अपने अवैध संबंध को स्वीकार करते हुए 7 सितंबर की पूरी घटना बता दी.

फिर क्या था, जो बातें थानाप्रभारी ने सत्यम और सरवन से भी नहीं पूछी थीं और उन पर विशाल की हत्या का सिर्फ संदेह था, उस की पुष्टि राधा ने ही कर दी. थानाप्रभारी के लिए राधा द्वारा दी गई जानकारी बेहद महत्त्वपूर्ण थी. वह मुसकराए और राधा को महिला सिपाही के साथ बैठा कर सत्यम व सरवन के पास जा पहुंचे. उन से भी उन्होंने विशाल अग्रवाल की हत्या के संबंध में घुमाफिरा कर कई सवाल पूछे. कुछ सवाल उन्होंने हवा में तीर की तरह चलाए. जबकि कुछ सवालों के साथ सबूत होने के दावे और राधा द्वारा बताए जाने की बातें कह कर उन्हें उलझा दिया. नतीजा यह हुआ कि वे भी टूट गए और उन्होंने विशाल हत्याकांड से ले कर उस की लाश को ठिकाने लगाने तक की बात बता दी.

उन के द्वारा जुर्म स्वीकार किए जाने के बाद सरवन ने विशाल के शव को फेंकने का खुलासा कर दिया. इस तरह राधा द्वारा विशाल के साथ अनैतिक संबंध बनाते हुए रंगेहाथों पकड़े जाने से ले कर उस की हत्या संबंधी साक्ष्य मिटाने का जुर्म स्वीकार कर लिया. पुलिस द्वारा साक्ष्य को मजबूत बनाने के लिए राधा का वैजाइनल टेस्ट करवाया. साथ ही आरोपियों की निशानदेही पर विशाल अग्रवाल की स्कूटी, लैपटाप तथा हत्या में प्रयुक्त लोहे की रौड बरामद कर ली. अय्याशी के चक्कर में जान गंवाने वाले बैंककर्मी की विशाल प्रेम कहानी इस प्रकार सामने आई—

उत्तर प्रदेश जिला कानपुर के थाना नौबस्ता अंतर्गत संजय नगर कालोनी मछिरिया में विष्णु प्रसाद अग्रवाल के 2 बेटे अंशुल (26 वर्ष) औरविशाल (25 वर्ष) के अलावा बेटी दिव्या (23 वर्ष) थी. इन में से विशाल कुंवारा था. वह भी अपने भाई अंशुल की तरह ही  बैंक मैनेजर था और मातापिता के साथ ही रहता था. स्वभाव से वह आशिक मिजाज था. जल्द ही किसी लड़की के पीछे पड़ जाता था. आकर्षक और सैक्स अपील होने के कारण कोई भी लड़की पहली ही नजर में उस की ओर आकर्षित हो जाती थी. उस के दिलफेंक होने के कारण ही वह किसी के साथ भी यौन संबंध बनाने से परहेज नहीं करता था. उस ने मौका पा कर राधा को भी अपने प्रेमजाल में फंसा लिया था. उसे शादी के सपने दिखाते हुए ऐशोआराम की जिंदगी देने के वादे किए थे. राधा भी उस के प्रेम में फंस चुकी थी.

सत्यम ओमर अपने मातापिता के साथ पहले माहेश्वरी मोहाल में रहता था. बाद में उन के देहांत के बाद वह घंटाघर स्थित अपने मामा के यहां रहने लगा था. हालांकि 6 साल पहले उस के मामा की भी मृत्यु हो गई थी. उस की मामी अपने मायके में रहती थी, जिस कारण उस ने घंटाघर में ही एक फ्लैट किराए पर ले लिया था. वहीं विशाल अग्रवाल भी आताजाता था. बताते हैं कि वहां दोनों के एक बैंक में इंश्योरेंस का काम करने वाली युवती के साथ अवैध संबंध थे. विशाल और सत्यम के लिए वह युवती केवल यौन संतुष्टि का साधन भर थी. दोनों बदले में युवती को कुछ पैसे या गिफ्ट दे दिया करते थे. वह फ्लैट सत्यम और विशाल के लिए मौजमस्ती का अड्डा बन कर रह गया था. कई बार वहां सरवन के साथ भी बैठकें होती थीं और पार्टी का दौर चलता था.

उस फ्लैट पर एक और लड़की राधा का भी अकसर आनाजाना लगा रहता था. वह वहां बेधड़क आती थी और अधिकार के साथ कुछ समय वहां गुजार कर चली जाती थी. हालांकि वह दूसरे मोहल्ल्ले मनीराम बगिया में रहती थी. वास्तव में वह सत्यम की मौसेरी बहन थी. सत्यम ने एक चाबी राधा को भी दे रखी थी. वहीं करीब 2 साल पहले एक बार उस की विशाल से मुलाकात हो गई थी. पहली नजर में ही दोनों एकदूसरे की ओर आकर्षित हो गए थे. विशाल राधा की खिलती किशोरावस्था को देख कर हतप्रभ रह गया था, जबकि राधा उस की बातें और माचो बदन की दीवानी बन गई थी. उस के बाद से विशाल और राधा अकसर साथसाथ घूमनेफिरने लगे थे, लेकिन दोनों सत्यम की नजरों से बच कर भी रहते थे.

वे नहीं चाहते थे कि उन के प्रेम संबंध के बारे में सत्यम को कोई जानकारी हो. जल्द ही विशाल ने मौका पा कर राधा से शारीरिक संबंध भी बना लिए. राधा की भी उस में स्वीकृति मिल गई थी. सत्यम की गैरमौजूदगी में राधा विशाल को उसी फ्लैट पर बुला लेती थी.  7 सितंबर, 2021 को सत्यम ओमर ने राधा को फोन पर बताया था कि वह आज वहां नहीं आएगा. बाहर बालकनी में उस के कपड़े सूख गए होंगे, उसे अलमारी में रख दे. किचन और दूसरे कमरे के बिखरे सामान आ कर ठीक कर दे. अपने भाई के इस आदेश का पालन करते हुए राधा ने अपने प्रेमी विशाल के साथ मौज करने की भी योजना बना ली. उस ने तुरंत फोन कर इस की सूचना विशाल को दी और शाम को खानेपीने का सामान ले कर आने को कहा.

शाम होने से पहले वह फ्लैट पर चली गई, किचन और कमरे को दुरुस्त किया. तब तक शाम के साढ़े 8 बज चुके थे. अब तक विशाल को आ जाना चाहिए था, क्योंकि उस ने 8 बजे तक आने को कहा था. देर होने पर राधा ने विशाल को फोन किया, जिसे विशाल ने रिसीव नहीं किया. करीब 20 मिनट बाद विशाल ने काल कर राधा को बताया कि वह पहुंचने वाला है. और फिर वह ठीक 9 बजे फ्लैट पर पहुंच गया. वहीं अपार्टमेंट की पार्किंग में उस ने अपनी स्कूटी लगा दी. राधा उस का बेसब्री से इंतजार कर रही थी. उसे देखते ही वह उस के गले लग गई. दोनों अकेले में कई हफ्तों बाद मिले थे. इस मौके को किसी भी सूरत में गंवाना नहीं चाहते थे. राधा के लिए पूरी रात थी. विशाल भी खानेपीने के सामान के साथ आया था.

दोनों बेफिक्र थे. मौजमस्ती के लिए पूरी तरह से तैयार और तत्पर भी थे. इसी तत्परता में उन से एक भूल हो गई. मेन डोर की अंदर से कुंडी लगाना भूल गए. वे बैडरूम में थे. ड्राइंगरूम की ओर उन का जरा भी ध्यान नहीं था. दोनों एकदूसरे पर प्यार की बौछार करते हुए कब यौनाचार में लीन हो गए, पता ही नहीं चला. दूसरी ओर वाटर प्लांट में काम समाप्त हो जाने पर सत्यम फ्लैट पर अचानक आ गया. फ्लैट का दरवाजा खुला होने पर सीध ड्राइंगरूम में दाखिल हुआ. बैडरूम में रोशनी देख कर चौंक गया और वहां जा कर दरवाजे पर लगे परदे को हटाया. बैड पर राधा के साथ विशाल को लिपटा देख सन्न रह गया. वे आंखें मूंदे इतने बेफिक्र थे कि सत्यम के दरवाजे पर आने की जरा भी आहट नहीं हुई. गुस्से की ज्वाला को दबाए सत्यम चुपचाप फ्लैट के नीचे आया.

नीचे से लोहे की रौड निकाली और राधा के आलिंगन में बंधे विशाल के सिर पर दे मारी. एक ही वार में सिर से खून बहने लगा. राधा अपनी जान बचाते हुए दूसरे कमरे में भागी. गुस्से में सत्यम ने विशाल के सिर पर दनादन 3-4 और वार कर दिए. सिर पर ताबड़तोड़ वार से विशाल की वहीं मौत हो गई. राधा के सामने ही विशाल की मौत हो गई थी, लेकिन वह डर गई थी कि कहीं सत्यम उसे भी न मार डाले. सत्यम ने डपटते हुए इस बारे में किसी को बताने की उसे सख्त हिदायत दे दी. उसे जल्दी से दीवार पर लगे खून के दाग मिटाने को कहा. उस के बाद तुरंत अपने दोस्त सरवन को बुलाया. सरवन भागाभागा आया. लाश देख कर उस के होश उड़ गए, लेकिन जल्द ही सामान्य होने पर लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. तब तक रात के साढ़े 11 बज गए थे.

इसलिए सरवन योजना के अनुसार अगले रोज 8 सितंबर को प्लास्टिक का एक ड्रम खरीद लाया. उस में विशाल की लाश ठूंस कर पैक कर दी. ड्रम को स्टील की स्ट्रिप से पैक कर दिया.  उस के बाद ड्रम को विशाल की स्कूटी पर लादकर कैंट होते हुए जाजमऊ गंगापुल से दही चौकी उन्नाव जा पहुंचे. उन्होंने ड्रम को नहर के पास झाडि़यों में फेंक दिया. साथ ही विशाल का मोबाइल फोन भी नहर में फेंक दिया. उस की स्कूटी से वापस कानपुर आ गए. सत्यम ने विशाल की स्कूटी अपने यशोदा नगर स्थित प्लौट के पास पेड़ के नीचे खड़ी कर दी. जबकि उस के खून से सने कपड़ों को कूड़ाघर में फेंक आया.

आरोपियों द्वारा अपना जुर्म स्वीकार कर लेने और संजय नगर कालोनी निवासी विष्णु प्रसाद अग्रवाल के बेटे अंशुल अग्रवाल के वादी बनाए जाने के बाद थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह ने आईपीसी की धारा 302/201/120बी के तहत हत्यारोपी सत्यम ओमर, सरवन किशोरी राधा को न्यायालय में पेश कर दिया गया. वहां से सत्यम और सरवन को कानपुर के जिला कारागार भेज दिया गया, जबकि साक्ष्य छिपाने के आरोप में राधा को नारी निकेतन के सुरक्षा गृह में भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित है तथा किशोरी राधा का नाम कल्पनिक ह

 

साउथ के सुपर स्टार Allu Arjun हुए गिरफ्तार जिसे सुन फैंस हुए हैरान

आजकल हर तरफ साउथ के सुपर स्टार अल्लू अर्जुन के ही चर्चे है. एक तरफ उनकी फिल्म पुष्पा-2 बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धमाल मचा रही है. वही दूसरी तरफ अल्लू अर्जुन की अचानक गिरफ्तारी से उनके फैंस काफी हैरान-परेशान हो रहे है. आज सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें अल्लू अर्जुन पुलिस के साथ जाते दिख रहे हैं.

क्यों हुई गिरफ्तारी

आपको बता दे अल्लू अर्जुन की यह गिरफ्तारी 4 दिसंबर की घटना से जुड़ी है. 4 दिसंबर को हैदराबाद के संध्या थियेटर में पुष्पा-2 की स्क्रीनिंग हुई थी. फिल्म पुष्पा-2 की प्रीमियर के दौरान मची भगदड़ में एक महिला की मौत हो गई थी. महिला के मौत के कारण अल्लू अर्जुन पर केस दर्ज किया गया था. इस पर हैदराबाद भगदड़ मामले में ही पुलिस ने उन पर एक्शन लिया है. पुलिस का आरोप है कि वो पुलिस को बिना कोई सूचना दिए प्रीमियर में गए थे. पुलिस की एफआईआर में पुष्पा स्टार अल्लू अर्जुन का भी नाम है. एक्टर अल्लू अर्जुन को चिक्कड़पल्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया है.

कब हुआ मामला दर्ज-

पुलिस ने 5 दिसंबर को महिला के परिवार की ओर से दर्ज कराई गई एक शिकायत के आधार पर अल्लू अर्जुन, उनकी सुरक्षा टीम और थिएटर प्रबंधन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 105 और 118 (1) के तहत चिक्कड़पल्ली पुलिस थाने में मामला दर्ज किया था. अल्लू अर्जुन से पहले पुलिस ने थिएटर के मालिकों में से एक, उसके सीनियर मैनेजर और निचली बालकनी के प्रभारी को गिरफ्तार किया है. अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब उन्होंने एफआईआर रद्द करवाने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया है. अर्जुन ने महिला के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी. उन्होंने मौत पर दुख भी जताया था.

घर से हुए गिरफ्तार-

पुलिस ने अल्लू अर्जुन को पहले उनके घर से गिरफ्तार किया. इसके बाद बयान दर्ज किया. फिर उन्हें मेडिकल चेकअप के लिए उस्मानिया अस्पताल ले जाया जाएगा. इस दौरान उनके ससुर हैदराबाद के चिक्कड़पल्ली पुलिस स्टेशन पहुंचे. अल्लू अर्जुन के खिलाफ बीएनएस की धारा 105, 118 (1) के तहत मामला दर्ज किया गया है. यह गैर जमानती धारा है. अल्लू अर्जुन के निजी बॉडीगार्ड संतोष को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

करोडो की कमाई-

पुष्पा-2 कमाई के जबरदस्त रिकॉर्ड तोड़ रही है. अब तक यह फिल्म वर्ल्ड वाइड 1000 करोड़ रुपए कमा चुकी है.