वेब सीरीज – बंबई मेरी जान (रिव्यू)

वेब सीरीज – बंबई मेरी जान (रिव्यू) – भाग 5

नौवें एपिसोड में सादिक कादरी का जनाजा ले जाने के साथ वेब सीरीज शुरू होती है. जिस के बाद पठान गैंग डर के साए में जीने लगता है. उसे हाजी मकबूल समझाता है कि पिछली बार दोस्त और उस की पत्नी को मारने के बाद बंबई जल रही थी, इस बार तो सादिक कादरी जो दारा कादरी का भाई है, उसे मारा है.

पठान गिरोह ऐसा बोलने पर हाजी मकबूल को अश्लील गालियां देते हुए अपने रिश्ते खत्म कर लेता है. हाजी मकबूल यहां से निकल कर दारा कादरी से मिल जाता है. वह सादिक कादरी को मारने वाले गन्या सुर्वे के सारे राज को उजागर कर देता है.

दूसरी तरफ इंसपेक्टर रणवीर मलिक पर सीनियर अधिकारियों का दबाव बनता है. वह बंबई में हो रहे गैंगवार के चलते मर्डर को ले कर उन्हें फटकारता है. जिस के बाद इंसपेक्टर मलिक और दारा कादरी के बीच मुलाकात होती है. इस दौरान दारा कादरी और इंसपेक्टर के बीच गन्या सुर्वे के एनकाउंटर की पटकथा लिखी जाती है.

अन्ना को मारते हुए डायरेक्टर ने 2 से 3 मिनट में खात्मा होते हुए दिखा दिया. पठान और उस के करीबी को निपटा दिया जाता है. यहां से हारून नाम का एक गुर्गा जो पठान के लिए काम करता है, वह बच कर भाग जाता है. जिस की आड़ में कहानी को लंबा किया जाता है.

वह भाग कर पुलिस अधिकारियों से मदद मांगता है, जिस के बाद दारा और अब्दुल्ला तय करते हैं कि जेल के भीतर उस को मारा जाए. कहानी अगले सीन की तरफ शिफ्ट की जाती है. जहां अधेड़ उम्र का आदमी एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने जा रहा होता है, तभी वहां नए किरदार की एंट्री के रूप में उस का प्रेमी आ जाता है. उस का नाम छोटा बब्बन होता है.

रियल लाइफ में गैंगस्टर छोटा राजन के कैरेक्टर से प्रभावित है. यह भूमिका आदित्य रावल ने निभाई है. दोनों को रंगेहाथ पकड़ने के बाद वह आवेश में आ कर प्रेमिका को गोली मार देता है. यहां भी जबरिया सीन खींचा गया. गोली मारने वाला प्रेमी वापस आ कर संबंध बनाने जा रहे व्यक्ति की भी गोली मार कर हत्या कर देता है.

हत्या के बाद वह गणेश महोत्सव में नाचने लगता है. दारा कादरी के लिए छोटा बब्बन काम का मोहरा लगता है. वह हारून को जेल के भीतर निपटाने के लिए उसे बुलाता है. इस के साथ ही एपिसोड खत्म हो जाता है.

एपिसोड का आखिरी पड़ाव दसवें एपिसोड से शुरू तो होता है लेकिन डायरेक्टर की तरफ से पटकथा भटकती नजर आती है. यहां छोटा बब्बन के दोस्त के रूप में एंट्री होती है. दूसरी तरफ मलिक और पुलिस कमिश्नर के बीच कलह दिखाई गई है. कमिश्नर दारा कादरी को गिरफ्तार करने का दबाव बनाता है.

पुलिस कमिश्नर का रोल कन्नन अरुणाचलम ने निभाया है. यहां मलिक कंफ्यूज रहता है. डायरेक्टर ने कमिश्नर के रूप में जिस कलाकार को चुना, वह रोल में काफी अनफिट नजर आया. जबकि वह काफी सीनियर कलाकार है. डायरेक्टर ने उस से अनुभव का लाभ ही नहीं लिया. कमिश्नर और मलिक के बीच हौट टौक के लिए भी डायरेक्टर ने लोकेशन बहुत गलत चुनी.

हारून धक्का दे कर वहां से भाग निकलता है. इस के बाद अगले सीन में छोटा बब्बन ने हारून पर पिस्तौल तान रखी है. यहां डायरेक्टर फिर बैकग्राउंड एक्टिविटी को अपने नियंत्रण में नहीं कर सके. इस कारण कुछ देर के लिए वेब सीरीज हलकी होती नजर आई.

बब्बन गोली मार देता है और अदालत से बाहर निकलते हुए कार में बैठने के बाद पुलिस वालों ही उस की कार को धक्का लगाते हुए दिखाते हैं. इस के बाद दारा कादरी वेब सीरीज के आखिरी विलेन अजीम पठान को मार देता है.

फिर कहानी एपिसोड के पहले सीन की तरफ शिफ्ट हो जाती है. दारा कादरी पूरे परिवार के साथ दुबई जाने का फैसला करता है. लेकिन पिता के मना करने पर हबीबा इंडिया में रह जाती है. दारा कादरी दुबई चला जाता है. उस के जाने के बाद हबीबा काम संभालने लगती है.

एपिसोड के अंत में सस्पेंस वाला मर्डर दिखाया गया है, जो चाय की दुकान में काम करने वाला नाबालिग लड़का शौच के लिए बैठे व्यक्ति को गोली मार देता है. वह बच्चा ऐसा करने के बाद हबीबा से कहता है काम हो गया. यहां सीरीज ही खत्म हो जाती है.

सिगरेट के विज्ञापनों से अपना करिअर शुरू करने वाले केके मेनन ‘बंबई मेरी जान’ में अहम किरदार निभा रहे हैं. भारत के केरल शहर में जन्मे मेनन तेलुगु भाषा के अलावा गुजराती, तमिल और मराठी फिल्मों में काम कर चुके हैं.

बौलीवुड और टेलीविजन इंडस्ट्रीज में मेनन नाम नया नहीं है. नेगेटिव रोल वह कई फिल्मों में काम किया है. मेनन की उम्र 57 साल हो चुकी है. बंगाली निवेदिता भट्टाचार्य के साथ उस ने शादी की है. हालांकि निवेदिता का जन्म लखनऊ में हुआ है. दोनों की मुलाकात थिएटर ग्रुप से जुड़ने के दौरान हुई थी. निवेदिता भट्टाचार्य इंडियन टेलीविजन में और बौलीवुड में 2000 के दशक से ऐक्टिव है.

निवेदिता भट्टाचार्य ने अपने फिल्मी करिअर में तकरीबन 8 फिल्मों में काम किया है. जिन में ‘डर द माल’, ‘भय’ 2017 में ‘शुभ मंगल सावधान’ आई थी. निवेदिता की आखिरी फिल्म 2023 में ‘द वैक्सीन वार’ रही है. टीवी जगत की बात करें तो करीबन डेढ़ दरजन से ज्यादा टीवी सीरियलों में वह काम कर चुकी है. उस का चर्चित सीरियल 1997 में ‘क्या बात है’ काफी चर्चित रहा था.

टीवी शो में निगेटिव पौजिटिव दोनों तरह के चरित्र पर उन्होंने काम किया. फिल्मी दुनिया में भी इसे अच्छे कलाकारों की सूची में माना जाता है. ‘बंबई मेरी जान’ वेब सीरीज में निवेदिता का किरदार पहले 5 एपिसोड तक तो ठीक था, लेकिन इन के अभिनय में लगता है डायरेक्टर ने अपना दिमाग जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया है. जिस में सारे सीन इमोशन से भरे हैं.

यहां तक कि सामान्य दिखने वाली जगह पर भी निवेदिता के चेहरे पर एक्सप्रेशन के नाम पर सिर्फ मुसकान ही रही है. उस के लाइफ पार्टनर मेनन ने पहला प्ले नसीरूद्दीन शाह के साथ ‘महात्मा बनाम गांधी’ में किया था. केतन मेहता के चर्चित टीवी सीरियल में युवा प्रधानमंत्री की भूमिका निभाने के बाद वह बौलीवुड के डायरेक्टरों की निगाह में आया था. मेनन फिल्म जगत में तब चर्चित हो गया, जब उस ने ‘भोपाल एक्सप्रेस’ में लीड भूमिका निभाई. उसे अनुराग कश्यप का साथ मिला. लेकिन जिस फिल्म में काम किया वह सेंसर बंदिशों के चलते अटक गई.

मेनन को फिल्मफेयर और आईफा का पुरस्कार 2014 में मिल चुका है. उस की भूमिका की चर्चा भारतीय नौसेना के पीएनएस विक्रांत को ले कर बनी फिल्म में भी हुई थी. यह फिल्म 1971 के युद्ध के दौरान निगरानी के लिए रवाना किए गए पनडुब्बी विक्रांत की उपलब्धि पर बनी थी. इसी पनडुब्बी में सवार सैन्य अधिकारी बने केके मेनन ने महत्त्वपूर्ण रोल निभाया था.

विक्रांत ने पाकिस्तान की पनडुब्बी गाजी को चारों खाने चित किया था. ‘बंबई मेरी जान’ से पहले हौट स्टार की वेब शृंखला ‘स्पैशल आप्स’ में हिम्मत सिंह के किरदार को निभाने के बाद ओटीटी इंडस्ट्री में अपनी आवश्यकता बता दी थी. इस वेब सीरीज में उस ने रा के एक अधिकारी की भूमिका निभाई थी.

मेनन ने ‘सरकार’ फिल्म में अमिताभ बच्चन के बेटे की नेगेटिव भूमिका भी निभाई थी, जिस में वह दर्शकों को अपने समय में बांधे रखने में बहुत ज्यादा कामयाब हुआ था. ‘बंबई मेरी जान’ में केके मेनन ने इस्माइल कादरी की भूमिका निभाई. वेब सीरीज अंडरवर्ल्ड डौन दाऊद इब्राहिम पर केंद्रित है, लेकिन दाऊद इब्राहिम नाम की जगह डायरेक्टर ने उस को दारा कादरी बताया है. दारा कादरी का पिता इस्माइल कादरी है, जो पुलिस का अधिकारी है.

सौरभ सचदेवा

यूं तो सौरभ सचदेवा की शुरुआत बौलीवुड में 2016 से हुई थी, लेकिन ख्याति ओटीटी में रिलीज ‘सेक्रेड गेम्स’ से मिली. फिर वह ओटीटी के लिए जानामाना चेहरा बन गया है. यह नेटफ्लिक्स में 2018 में प्रदर्शित हुई थी, जिस में सुलेमान ईसा का महत्त्वपूर्ण किरदार उस ने निभाया था. ‘बंबई मेरी जान’ में वह हाजी मकबूल बना है.

सभी एपिसोड में हाजी मकबूल के रूप में सौरभ सचदेवा का अभिनय दर्शकों को देखने को मिलेगा. सचदेवा ऐक्टिंग के जानदार कोच भी है. उस ने वरुण धवन, जैकलीन फर्नांडीज समेत कई अन्य कलाकारों को अभिनय का हुनर सिखाया है. वह अपना थिएटर ग्रुप भी चलाता है.

विवान भटेना और शिव पंडित

कलाकार शिव पंडित भी चर्चा में है. उस ने रणवीर मलिक की भूमिका निभाई है. शिव पंडित रेडियो जौकी के अलावा मंच होस्टिंग करने और मौडलिंग भी करते हैं. वह कलाकार गायत्री पंडित का भाई है. उस ने ‘देसी बौयज’, ‘बौस’ समेत कई फिल्मों में सहायक निर्देशक का काम किया. फिल्म इंडस्ट्री में शिव पंडित को ज्यादा संघर्ष करने की आवश्यकता नहीं पड़ी.

उस ने 2011 से फिल्म इंडस्ट्री में काम करना शुरू किया था. इसी तरह टीवी कलाकार विवान भटेना ने दारा के दोस्त अब्दुल्ला का महत्त्वपूर्ण रोल निभाया है. भटेना एकता कपूर के होम प्रोडक्शन बालाजी प्रोडक्शन का चर्चित चेहरा हैं.

फिल्म इंडस्ट्री में उस ने शाहरुख खान अभिनीत फिल्म ‘चक दे इंडिया’ से करिअर की शुरुआत की थी. इस के अलावा विवान भटेना सलमान खान के होम प्रोडक्शन में बनी फिल्म ‘हीरो’ और आमिर खान की चर्चित ‘तलाश’ फिल्म में भी काम कर के लोकप्रियता हासिल कर चुका है.

वेब सीरीज – बंबई मेरी जान (रिव्यू) – भाग 4

छठवें एपिसोड की शुरुआत दारा कादरी के दोस्त को अस्पताल में दिखाने से शुरू होती है. वह कान में दारा को नाम बताने के बाद दम तोड़ देता है. इस के बाद इस्माइल कादरी आ कर दारा को अपराध छोड़ कर सामान्य जीवन जीने की सलाह देता है. जिस के जवाब में दारा कहता है कि आप अपने दोस्त के खूनी को स्टेशन छोड़ने जा सकते हैं पर मैं ऐसा नहीं कर सकता. यहां जबरिया डायरेक्टर ने पितापुत्र के बीच भावनात्मक इमोशनल वाला सीन क्रिएट करते हुए दर्शकों को बोझिल कर दिया.

दारा कादरी का गिरोह मौत के बाद ऐक्शन में आता है. वह पठान गिरोह के लोगों को चुनचुन कर मौत के घाट उतारने लग जाते हैं. पठान अपने भांजों को ले कर यहांवहां छिपाने लगता है. दोनों वेब सीरीज में शूटर दिखाए गए हैं. इस के बावजूद हाथ में गन ले कर दारा कादरी से बच कर भागते हुए फिल्माया गया. बाहर निगरानी कर रहे दारा के आदमी उन्हें दबोच लेते हैं.

यहां दोनों की क्रूरता के साथ हत्या करते हुए डायरेक्टर ने फिल्माया है. नासिर को नंगा कर के उस के कूल्हे पर धारदार हथियार से वार कर के मर्डर का सीन फिल्माया है. इस के बाद दारा के नाम का दबदबा बंबई में बढ़ जाता है. यहां दारा कादरी की तरक्की को दिखाया जाने लगता है. उसे दुबई में शेखों से मुलाकात के जरिए शक्तिशाली बनते हुए दिखाया गया है.

सातवें एपिसोड में कहानी फिर इस्माइल कादरी पर जबरिया पलटाई जाती है. वह अपनी पत्नी से कहता है कि इन सब हराम की दौलत के बीच में मेरे ईमान का दम घुटता है. जिस के बाद वह किराए के कमरे में रहने के लिए चला जाता है.

डायरेक्टर ने कादरी के बड़े बेटे सादिक कादरी की शादी के जरिए एक बार फिर वेब सीरीज के टाइम को बढ़ाने में बिना मतलब कोशिश की. भावनात्मक रूप से दारा कादरी को हीरो बनाने की कोशिश पितापुत्र के बीच डायलौग डाल कर ऐसा किया गया.

इसी दरमियान दारा के बड़े भाई सादिक, जिस की भूमिका जितिन गुलाटी ने निभाई है. दारा अपने साथ दुबई अकसर अब्दुल्ला को लाना और ले जाना पसंद करता था. उस का कहना था कि वह उस की पत्नी का खयाल रखे. इसलिए वह आवेश में पत्नी से अलग हो कर चकलाघर आनेजाने लगता है. कहानी एक बार फिर परी पटेल पर लौट कर आती है. वह दारा की माशूका दिखाई गई है.

वेब सीरीज में उन के शारीरिक संबंध बनाते हुए दिखाए गए हैं. उसी वक्त दारा का बड़ा भाई भी शारीरिक संबंध पत्नी के साथ बनाते हुए दिखाया गया है. सादिक की पत्नी का अभिनय करने वाली कलाकार की जानकारी गुप्त रखी गई है. क्योंकि उस ने वेब सीरीज में न्यूड सीन किया है. यहां कलाकार को पैसों के लिए नग्नता परोसे जाने के कारण दर्शक काफी मायूस होंगे.

सादिक पर फिल्माया गया यह सैक्स सीन देख कर दर्शकों को 2 मिनट पोर्न मूवी देखने जैसा अहसास बेहूदा डायरेक्टर ने प्रस्तुत किया है. यह देखने के लिए दर्शकों को भी काफी साहस की आवश्यकता होगी.

अधिकांश सीन चकलाघर और सादिक की बीवी के जरिए परोस कर यहां डायरेक्टर ने खुलेआम नंगई को परोसा है. एपिसोड के अंत में गन्या सुर्वे के रूप में नए कलाकार की एंट्री होती है. यह रोल सुमित व्यास ने निभाया है. उस की पर्सनैल्टी को देखते हुए किरदार के रूप में अनफिट नजर आ रहा है. जबकि वास्तविकता में गन्या सुर्वे का नाम यह शूटर था. वह अंडरवर्ल्ड में सुपारी ले कर मर्डर करने का काम करता था.

एपिसोड के आखिर में डाइनिंग टेबल पर खाना खाते हुए दिखाया गया है. उस के बाजू में गरदन रेतने के बाद अचेत लड़की इसी कुरसी पर बैठी है. वहां बच्चा भी टेबल पर सिर रख कर पड़ा हुआ दिखाया गया.

तीसरी लाश जमीन पर पड़ी हुई थी. इस के अलावा एक व्यक्ति सिसकियां लेते हुए दिखाया गया. उसे गन्या सुर्वे गोली मार देता है. डायरेक्टर ने यह सीन वेब सीरीज में क्यों और किन कारणों से लिया, सस्पेंस खुल ही नहीं पाता.

आठवें एपिसोड की शुरुआत गन्या सुर्वे के इंट्रो से शुरू होती है. उस के सामने पठान गैंग बैठा होता है. पठान गैंग की तरफ से दारा कादरी को मारने की सुपारी 10 लाख रुपए में उसे देता है. वह चुप हो कर अपनी डिमांड एक करोड़ रुपए बोलता है. उस का कहना होता है कि वह केवल दारा कादरी को नहीं, बल्कि उस के पूरे खानदान को खत्म कर देगा.

वेब सीरीज के आठवें भाग में इमोशनल ड्रामा जबरिया भरा गया है. दुबई से दारा कादरी तोहफे ले कर अपनी माशूका के घर पहुंचता है. वहां उस के पिता के साथ दारा कादरी से शादी को ले कर बहस चल रही होती है. तब वहां आ कर दारा कादरी उसे अपने साथ चलने के लिए कहता है.

विरोध करने पर माशूका के पिता का गला दबोच लेता है. यह बात उस की माशूका को नागवार गुजरती है. वह दारा कादरी से संबंध तोड़ लेती है. इस के बाद सादिक कादरी का सीन एपिसोड में आता है. वह शारीरिक संबंध बनाते हुए दिखाया जाता है, जिस के बाद दारा कादरी मायूस बैठा दिखाया गया.

वह अपने पिता के पास पहुंचता है. उस का कहना होता है कि घर वापस चले, क्योंकि सादिक कादरी अपनी पत्नी को छोड़ कर दूसरी महिलाओं के साथ संबंध बना रहा है. इस बात पर इस्माइल कादरी विरोध कर घर जाने से इंकार कर देता है.

इधर, गन्या सुर्वे सुपारी ले कर उन की हत्या करने की योजना बना रहा होता है. वह सादिक कादरी को पहले निशाना बनाने की तैयारी करता है, जिस के लिए वह सादिक कादरी की प्रेमिका की सहेली को अपना मोहरा बनाता है. उसे पैसों का लालच दे कर उस के आने पर खबर देने के लिए बोलता है.

तभी सादिक कादरी पत्नी से झगड़ कर प्रेमिका के पास पहुंचता है. यह खबर प्रेमिका की सहेली गन्या सुर्वे को पहुंचा देती है. वह दोनों का पीछा करने के बाद गोलियां बरसा कर दोनों को मार देता है. यहां डायरेक्टर फिल्मांकन के दौरान पात्रों को दिशा में खड़ा कराना भूल गया.

जब गोलियां बरसाई जाती हैं, तब ड्राइविंग सीट पर सादिक कादरी होता है. वहीं बाएं वाली सीट पर उस की प्रेमिका होती है. गोली चलती दाहिनी तरफ से है लेकिन बाएं तरफ बैठी सादिक की प्रेमिका को लगती है. फिर सादिक कार से उतर कर बाईं तरफ जाता है तो फिर गोलियां बरसाते हुए उस को मारा जाता है. यहां डायरेक्टर दिशा के अभाव में चूक गया है.

मुठभेड़ में दारा कादरी के कुछ लोग मारे जाते हैं. दारा कादरी, अब्दुला और दारा का छोटा भाई अज्जू कादरी को दिखाया जाता है. तीनों मिल कर गन्या सुर्वे के गुर्गों को भगाभगा कर मारते हैं. उधर, हबीबा भी पिता को ले कर दारा कादरी के घर पहुंच जाती है. यहां आठवां एपिसोड खत्म हो जाता है.

वेब सीरीज – बंबई मेरी जान (रिव्यू) – भाग 3

भाईबहन के रिश्ते का नहीं रखा लिहाज

डायरेक्टर और लेखक ने मिल कर धर्म की आड़ के सहारे दारा कादरी को हीरो बनाने की नाकाम कोशिश भी की. दारा अपने भाइयों और साथियों के सहारे नया गैंग बना लेता है. वह रंगदारी टैक्स मांगने वाला गिरोह बना कर काम करने लगता है. यह बात पठान गैंग को पता चलती है तो उस की तलाश में निकलते हैं. यह दिखाते हुए भी डायरेक्टर ने यहां फिर एक चूक की है.

दरअसल, पठान का इसी वेब सीरीज में ताकतवर नेटवर्क दिखाया गया लेकिन दारा को पकड़ने में गैंग को एक दिन से ज्यादा का वक्त लग जाता है. यहां डायरेक्टर कहानी के जुड़ाव को बनाए रखने में असफल साबित दिखे. एपिसोड के अंत में इस्माइल कादरी की तरफ फिल्म फिर मोड़ी जाती है.

यहां पठान गिरोह के लोग उस के बेटे को अपराध जगत में उन के खिलाफ खड़ा करने का आरोप लगा कर उसे कोसते हुए दिखाई दिए, जिस के बाद भनभनाया इस्माइल कादरी पत्नी पर गुस्सा उतारता है. वेब सीरीज में मुसलिम समाज के भाईबहन वाले रिश्ते को जाहिलियत दिखाते हुए डायरेक्टर ने काफी बुरी मानसिकता के साथ पेश किया है.

मुसलिम समाज में परदा प्रथा काफी पहले से है. वहां भाईबहन के बीच संवाद गालीगलौज भरा दिखाया गया है. घर पर इस्माइल कादरी और उस की पत्नी के बीच हुई कलह की बात हबीबा अपने भाई दारा कादरी को बता देती है. यह बात सुनने के बाद वह अपने पिता की बेइज्जती का बदला लेने के लिए पठान गैंग को मारने के निकल पड़ता है, जहां पठान गैंग के लोग भी उसे मारने की योजना बना कर बाहर निकल रहे होते हैं. तभी वहां दोनों गिरोहों का आमनासामना दिखाया गया है.

इस सीन में दारा कादरी गैंग के 6 सदस्य दिखाए गए हैं, जो सैंकड़ों शराब की बोतलें पठान गिरोह पर बरसा देते हैं. यह सब कुछ दृश्य पठान गिरोह के अखाड़े में फिल्माया गया है. पठान गिरोह के लोग अखाड़े से भाग जाते हैं. उन के जाने के बाद दारा कादरी अखाड़े को जला देता है. चौथे एपिसोड में रोमांच पैदा कर के दर्शकों को जबरिया पांचवें में जाने के लिए इस्माइल कादरी का सहारा डायरेक्टर ने लिया है.

पांचवें एपिसोड की शुरुआत हाजी मस्तान, पठान और अन्ना की रिहाई से शुरू होती है. यहां पठान का छोटा भाई दारा कादरी के आतंक को बयां कर रहा होता है. तब पठान का बड़ा भाई उसे अभद्र गालीगलौज करते हुए कोसता है. इस के बाद कहानी में इस्माइल कादरी की फिर एंट्री होती है. उस से हाजी मकबूल कहता है कि पठान गिरोह उस के बेटे दारा कादरी को मारना चाहता है.

यदि उसे बचाना है तो समझाए और माफी मांगने के लिए बोले, जिस के बाद पिता के कहने पर बेटा मांडवली के लिए राजी हो जाता है. वह और उस के गुरगे पठान गिरोह के लिए काम करने लग जाते हैं. कहानी को लंबा करने के लिए यहां उन्हें काम करते हुए काफी सीन जबरदस्ती घुसेड़े हैं. इसे देख कर लगता है कि डायरेक्टर के पास कंटेंट शूट की कमी हो गई थी.

अचानक दारा कादरी के भाइयों और पठान गैंग की बेइज्जती से तंग आ कर बदला लेने की योजना बनाते हैं. यह जब सोच रहे होते हैं तब दारा कादरी और अब्दुला बिल्डर से रंगदारी टैक्स मांगने गए होते हैं. इसी दरमियान दारा कादरी का भाई उस कस्टम अधिकारी जिस को गिरोह पैसा देता है उसे न दे कर दूसरे को वह रकम दे देता है. जिस कारण वहां विवाद की स्थिति बनती दिखाई गई है.

दारा अपने भाइयों की गलती छिपाने के लिए पठान गैंग को बताए बिना बिल्डर से वसूली रकम उस कस्टम अधिकारी को दे देता है, जिसे पहले दिया जाना था. इस बात की भनक हाजी मकबूल और पठान को लग जाती है और उसे गद्दार मान कर अब्दुल्ला के हाथों उसे पिटवाया जाता है. यहां डायरेक्टर ने फिर कहानी को जबरिया लंबा करने का प्रयास किया.

पठान गिरोह से अलग हो कर दारा कादरी अपना गैंग चलाने लगता है. इस बात से नाराज हो कर हाजी मकबूल सुपारी दे देता है. उस की हत्या की जिम्मेदारी अब्दुल्ला को दी जाती है. यहां डायरेक्टर एक बार फिर बड़ी चूक करते हैं. अब्दुला को काम सौंपने के बाद उस को मारने की भी सुपारी हाजी मकबूल पठान के भांजों को दे देता है, लेकिन उस का हत्या का इरादा बदल जाता है और उन में गहरी दोस्ती हो जाती है.

अब्दुल्ला और दारा कादरी का गठबंधन होते ही पठान गिरोह की शामत आ जाती है. दोनों के बीच आपसी मुठभेड़ में पठान गिरोह के बहुत सारे गुर्गों के मर्डर हो जाते हैं. हाजी मकबूल के लिए एक प्रैस उस के पक्ष में रिपोर्टिंग करता है, जिस के जरिए वह अपराधी होने के बावजूद उसे गरीबों का मसीहा के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

अभद्रता और फूहड़ता को जम कर दिखाया

यहां भी जबरिया कहानी को लंबा खींचने के लिए दारा कादरी के दोस्त की जिंदगी पर फोकस करता है. अभद्रता और फूहड़ शब्दों के साथ दारा कादरी के दोस्त की शादी के वक्त डायलौग डाले गए हैं. उस वक्त दारा कादरी की बहन और दोस्त की पत्नी मौजूद होती है. इस वक्त के फिल्माए गए सारे दृश्य परिवार के साथ आप कभी नहीं देख सकते. इसे देख कर लगता है कि यह डायरेक्शन किसी कम पढ़ेलिखे गंवार ने किया है.

दूसरी तरफ पठान के भांजे आरिफ और नासिर शराब के अहाते में बैठ कर शराब पी रहे होते हैं. उन्हें जिस अखबार के टुकड़े पर चखना दिया जाता है, उस में हाजी मकबूल और दारा कादरी के प्रतिद्वंदी बाजार में आने वाली बात छपी होती है. यह पढ़ने के बाद दोनों दारा कादरी के दोस्त को ठिकाने लगाने के लिए निकल पड़ते हैं.

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि डायरेक्टर ने अपने विचारों को दर्शकों को थोपा है. अमूमन इस पैटर्न को कई फिल्मों में पहले ही आजमाया जा चुका है. दोनों शूटर दारा कादरी के दोस्त के घर पहुंच कर उस के सामने ही उस की बीवी का बलात्कार करते हैं. इस दौरान भी अभद्र और कानों को चुभने वाली अश्लील गालियों की भरमार डायरेक्टर डाल दी हैं. इस से यह जाहिर होता है कि डायरेक्टर शायद इसी माहौल में पलाबढ़ा हे.

कहानी बढ़ाने के लिए अधमरे दोस्त को सागर में ले जा कर फेंकने का सीन दिखाया है. जबकि डायरेक्टर बलात्कार वाली जगह पर ही मर्डर का सीन रख सकते थे. कहानी यहां भी खत्म नहीं होती और फिल्मी स्टाइल में दारा कादरी का दोस्त समंदर से बाहर आता है. यहां डायरेक्टर एपिसोड को विराम दे देता है.

वेब सीरीज – बंबई मेरी जान (रिव्यू) – भाग 2

तारतम्य का दिखा अभाव

पुलिस टीम को देख कर ट्रक ड्राइवर और कादरी का साला भागते हैं. लेकिन कुछ दूर ड्राइवर पुलिस के हत्थे लग जाता है. वहीं कादरी का साला जीजा के घर पहुंच जाता है. वह पुलिस से बचने के लिए जीजा से मदद मांगता है. कादरी उसे फटकारते हुए डांटता है तो कादरी की पत्नी सकीना कादरी को रोकती है. उस के कहने पर इस्माइल कादरी उसे स्टेशन पर ट्रेन में बैठा कर लौट रहा होता है तो उसे 2 कांस्टेबल ऐसा करते हुए देख लेते हैं.

यहां इस पूरे वाकए का जिक्र इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि केके मेनन उन्हीं 2 साथियों में से एक साथी के सामने झूठ बोलने वाले अभिनय को सही तरीके से नहीं निभा सका. यहां भी मेनन से ज्यादा डायरेक्टर की कमजोरी उजागर होती है. क्योंकि मेनन तो परिपक्व कलाकार है और उसे पता भी होता है कि यहां डायरेक्टर की चूक है. लगता है उस की अक्ल खाली हो गई. यहां वेब सीरीज के डायरेक्टर सुजीत सौदागर ने फिर जबरिया सस्पेंस क्रिएट करने की कोशिश की है.

दरअसल, कादरी का साला स्पैशल टीम के एक अधिकारी का मर्डर कर चुका होता है, जिस के बाद वह अपने जीजा के पास मदद मांगने जाता है. यह बात डाइरेक्टर तब उजागर करता है, जब टीम का दूसरा साथी पूछताछ के लिए उसे थाने ले कर आता है. फ्लैशबैक में मर्डर करते वक्त साले की शर्ट खून में भीग जाती है.

लेकिन जब वह जीजा के सामने दिखाया गया तो उस की शर्ट से खून गायब होता है. उस के बाद जांच करने वाली टीम खून से सनी शर्ट कादरी के घर से बरामद करती है. कुल मिला कर कहानी यह है कि वेब सीरीज के डायरेक्टर इस पूरे घटनाक्रम में तारतम्य मिलाने में कामयाब नहीं हो सके.

तीसरे एपिसोड की शुरुआत अचानक इमोशनल सीन से डायरेक्टर सुजीत सौदागर करते हैं. दूसरे एपिसोड में शहीद हुए पुलिस अधिकारी की पत्नी की आड़ में जबरिया फिर इमोशनल सीन क्रिएट किया गया. वह विधवा महिला कादरी को तमाचा मारती है. इस के बाद इस्माइल कादरी को सदमे में जाता हुआ दिखाया गया. जबकि वेब सीरीज वास्तविकता के आधार पर होती है.

इसी एपिसोड में केंद्रीय गृहमंत्री बने कर्मवीर चौधरी अपने अफसर से पठान दस्ते को बंद करने के लिए बोलते हैं. केंद्रीय गृहमंत्री के पूरे वेब सीरीज में कुछ गिनेचुने सीन ही हैं. इस के अलावा हाजी मकबूल के जरिए फिर इस्माइल कादरी को लालच देने वाला सीन दिखाया गया. जबकि वह तो अपने ही विभाग की अंदरूनी जांच में बुरी तरह से फंस चुका था.

इस्माइल कादरी सस्पेंड होने के बाद कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम की तलाश में पहुंचता है. यहां उसे सिक्योरिटी गार्ड का काम मिल जाता है. अगले दिन जब वह कास्ट्यूम पहन कर पहुंचता है तो सुपरवाइजर नौकरी पर रखने से इंकार कर देता है. इस एपिसोड के एक हिस्से में भी डायरेक्टर की विफलता साफ दिखती है.

इस्माइल कादरी और उस का परिवार गरीबी से जूझ रहा होता है तभी ईद के मौके पर कुरबानी के लिए बकरा न खरीद पाने की वजह से कादरी का बेटा दोस्तों और भाइयों के साथ मिल कर बकरा चुरा लेते हैं, जिस के बाद बकरे का मालिक उन का पीछा करता है. लेकिन वह उसे पकड़ नहीं पाता है. बकरे के साइज और बच्चे के कद में अंतर देख कर दर्शक भी हंसेंगे. इस्माइल कादरी को कंफर्म हो जाता है कि बकरा चुराने में दारा कादरी की यह शरारत है तो वह बीच में खड़ा कर के उसे पुलिस बेल्ट से पीटने लगता है.

यहां हम यह बात इसलिए छेड़ रहे हैं क्योंकि इस्माइल कादरी वेब सीरीज में सस्पेंड हो चुका होता है. फिर पुलिस की बेल्ट कहां से आई. अपनी थोड़ी सी भी अक्ल लगा कर डायरेक्टर को यह छोटीछोटी जानकारियां जुटा लेनी चाहिए थीं. इतना ही नहीं, जब बच्चे को मार रहे होते हैं तो उस के चेहरे पर दर्द और पीड़ा का भाव डायरेक्टर पैदा ही नहीं कर सका. मार खाने के बावजूद बच्चे को पिता के साथ बहस करते हुए दिखाया गया.

हाजी मकबूल ईदी के जरिए इस्माइल कादरी के घर तोहफे भेजता है, जिसे वह तो नहीं स्वीकारता है, लेकिन पत्नी बच्चों की खुशी के लिए उसे राजी कर लेती है. फिर फिल्म में डायरेक्टर की तरफ से बेसिर पैर का नया रोमांच पैदा किया जाता है.

दूसरे एपिसोड में भगाया गया साला यहां सामने आ जाता है. उसे कब और कहां से पकड़ा गया, डायरेक्टर यह बताने में कामयाब नहीं हुआ. उस साले का मर्डर पठान के गुर्गे कर देते हैं. उस से पहले हाजी मकबूल शर्त रखता है कि उस के साथ मिल कर काम करना होगा.

चौथा एपिसोड भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद देश में बने हालात की तरफ मुड़ने लगता है. यहां इमरजेंसी की घोषणा को मुद्दा बना कर कहानी एक बार फिर गैंगस्टर पठान हाजी मकबूल और अन्ना पर घुमाई जाती है. उन्हें जेल में डालने वाला सीन दर्शकों के सामने परोसा जाता है.

यह दिखाते वक्त वेब सीरीज डायरेक्टर की मानसिक परिपक्वता की कमी उजागर होती है. तीनों गैंगस्टरों को जब जेल में डालने के लिए औफिसर अरेस्ट करने आता है तो उन के गुर्गों को छोड़ने का सीन दिखाया गया है. जबकि इमरजेंसी हालात को देखते हुए पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाने वाले शिव पंडित जो वेब सीरीज बनी, उस में वे मलिक बने हुए हैं. उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा सकते थे.

लेकिन वेब सीरीज में डायरेक्टर ने उसे अपने विवेक के अनुसार काल्पनिक बना दिया. फिर कुछ ही देर बाद इस्माइल कादरी के तीनों बेटों की एंट्री होती है. अब उन्हें नौजवान दिखाया गया है. उन्हें लोगों को बेवकूफ बना कर चोरी करना और टोपी घुमाने वाला दिखाया जाता है.

कहानी को एक नया ट्विस्ट देने के लिए बेहूदा और बदतमीज डायरेक्टर ने इस में कुछ गंदे और भद्दे डायलौग का भी इस्तेमाल किया जाता है. राडो घड़ी बेचने की वारदात को डायरेक्टर ने बेहद हलके तरीके से फिल्माया है. घड़ी के बदले में दारा के गुर्गें ग्राहकों को अपनी बातों में फंसा लेते हैं. इसी दरमियान उस में पत्थर रख देते हैं. इसी तरह के सीन 4 से 5 बार आप को दिखने को मिलेगी.

डायरेक्टर ने दूसरी बड़ी तकनीकी चूक यह भी की है कि सारे सीन एक ही जगह पर फिल्माए गए हैं. जबकि ऐसा बारबार होने पर वह गली पूरी तरह से बदनाम हो जानी चाहिए थी. इस के बाद दारा कादरी से एक मौलाना कहता है कि मसजिद को चंदा देने के लिए वह कोशिश करे. जिस के लिए वह तैयार हो जाता है और दारा कादरी मसजिद की मरम्मत के नाम पर चंदा वसूली करता हुआ दिखाया जाता है.

इस में गालीगलौज के साथ उस की ऐक्टिविटी आगे दिखाई जाती है. यहां से दारा कादरी के दहशत के सफर की शुरुआत दिखाई गई है.

वेब सीरीज – बंबई मेरी जान (रिव्यू) – भाग 1

कलाकार: केके मेनन, सौरभ सचदेवा, नवाब शाह, विवान भटेना, कर्मवीर चौधरी, शिव पंडित, जितिन गुलाटी, सुमित व्यास, आदित्य रावल, कन्नन अरुणाचलम, निवेदिता भट्टाचार्य, अमाया दस्तूर, अविनाश तिवारी, कृतिका कामरा, जयसिंह राजपूत, सुनील पलवल, चैतन्य चोपड़ा, दिनेश प्रभाकर, लक्ष्य कोचर, चेष्टा भगत, तान्या खान झा, समारा खान, प्रिंसी सुधाकरन, गरिमा जैन

डायलौग: अब्बास दलाल और हुसैन दलाल

निर्देशक: शुजात सौदागर

निर्माता: कासिम जगमिगया, रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर

अभिनय के लिए जिस तरह केके मेनन को जाना जाता है वैसा अभिनय इस सीरीज में नहीं है. वेब सीरीज में जगहजगह बिखराव देखने को मिला. तीनों के चेहरे पर किसी तरह का पुलिसिया रौब दिखाई ही नहीं दिया. इसी एपिसोड में 2 नए किरदारों की एंट्री बेहद हास्यास्पद नजर आई.

दर्शकों का मूड सीरीज से ही ऊब चुका होता है. घटिया डायरेक्शन की इसे हम निशानी कह सकते हैं. यहां भी मेनन से ज्यादा डायरेक्टर की कमजोरी उजागर होती है. यहां डायरेक्टर की चूक है. लगता है उस की अक्ल खाली हो गई. यहां वेब सीरीज के डायरेक्टर सुजात सौदागर ने फिर जबरिया सस्पेंस क्रिएट करने की कोशिश की है. कुल मिला कर कहानी यह है कि वेब सीरीज के डायरेक्टर इस पूरे घटनाक्रम में तारतम्य मिलाने में कामयाब नहीं हो सके. इस एपिसोड के एक हिस्से में भी डायरेक्टर की विफलता साफ दिखती है.

बंबई मेरी जान’ की कहानी फौजी पत्रकार एस. हुसैन जैदी की 2012 में प्रकाशित हुई किताब ‘डोंगरी टू दुबई’ के जरिए बनाई गई है. इसी किताब पर संजय गुप्ता ने भी फिल्म बनाई थी. जिस का नाम ‘शूटआउट ऐट वडाला’ था. यह किताब दाऊद इब्राहिम पर केंद्रित है, जो देश की आजादी से 2012 तक मुंबई के कुख्यात गैंगस्टरों पर लिखी गई है.

‘बंबई मेरी जान’ वेब सीरीज में डायलौग अब्बास दलाल और हुसैन दलाल ने दिए हैं. जैदी के बाद मुंबई के माफियाओं को हीरो बनाने के लिए कई किताबें बाजार में आ चुकी हैं. इन्हीं किताबों के अंश पर संजय लीला भंसाली ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ से ले कर कई अन्य डायरेक्टर फिल्म बना कर जबरिया माफियाओं को नेताओं और अफसरों के कारिंदे बता चुके हैं.

वेब सीरीज के पहले एपिसोड की शुरुआत दारा कादरी से होती है. उस की पूरी फैमिली भारत छोड़ कर दुबई भागने की तैयारी में होती है, जहांं उस का पिता इस्माइल कादरी जाने से साफ इंकार कर देता है तो दारा और उस की पूरी फैमिली उस पर दुबई चलने के लिए दबाव बनाने लगती है.

तब इस्माइल कादरी गन निकाल कर दारा पर तान देता है. फिर बाद में उन्हें डराने के लिए वह गन अपनी कनपटी पर लगा लेता है. वह दारा को सलाह देता है कि तुम यहां से चले जाओ वरना अपने पीछे एक और लाश छोड़ कर जाओगे.

इस के बाद वेब सीरीज की कहानी फ्लैशबैक में चली जाती है. जहां पर इस्माइल कादरी को एक शादी समारोह में अपने दोस्तों के साथ दिखाया जाता है. इस्माइल कादरी की बीवी प्रेग्नेंट है, जो अपनी सहेलियों से बात कर रही होती है. यहीं बताया जाता है कि इस्माइल कादरी पुलिस वाला है.

शादी फंक्शन के दौरान एक कौमेडीनुमा और भद्दा सीन दिखाया जाता है. जहां केके मेनन यानी इस्माइल कादरी के तीनों बच्चे वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान लोगों पर बाथरूम करते हैं. ऐसा करते हुए एक बच्ची देख लेती है जो वेब सीरीज में आगे जा कर दारा कादरी की माशूका दिखाई जाती है. उस का नाम परी पटेल है. वेब सीरीज में परी पटेल का किरदार अमायरा दस्तूर ने निभाया है.

वेब सीरीज आगे बढ़ती है. शादी के दौरान ही हाजी मकबूल और अजीम पठान दोनों की एंट्री होती है. हाजी मकबूल की भूमिका सौरभ सचदेवा ने निभाई है. वहीं अजीम पठान का किरदार नवाब शाह ने निभाया है.

फिर वौइस ओवर में दोनों के बारे में जानकारी दी जाती है. इस से साफ है कि डायरेक्टर सुजीत सौदागर को अहसास हो गया था कि फिल्म काफी लंबी होने वाली है. हाजी मकबूल और अजीम पठान मुंबई में कुली का काम करता था.

उसी दौरान वह बहुत सारी चीजों की स्मगलिंग करने लगा. स्मगलिंग के दौरान ही वह कुछ सामान चोरी करने लगता है. धीरेधीरे कर के चुराए हुए पैसों से वह हज पर भी जाता है. यह बात डायरेक्टर ने बाकायदा वौइस ओवर के जरिए बताई है.

वेब सीरीज पहले ही एपिसोड से दर्शकों को बोर करने न लगे, इसलिए डायरेक्टर ने जगहजगह वौइस ओवर की मदद ली है. यह आवाज केके मेनन की है. आवाज के बीच मेनन यानी इस्माइल कादरी जो पुलिस अधिकारी बना है. वह हाजी मकबूल के इशारों पर अजीम पठान के सुपारी किलिंग के बाद ऐक्शन में दिखाया है.

जिस तरह के अभिनय के लिए केके मेनन को जाना जाता है वैसा अभिनय इस सीरीज में नहीं है. अगर आप मेनन के लिए सीरीज देखने के इच्छुक हैं तो निराशा हाथ लग सकती है. यहां डायरेक्टर का प्रभाव उस के अभिनय पर हावी दिखाई दिया.

डायरेक्टर ने पात्रों के साथ नहीं किया न्याय

अच्छे कलाकार की प्रतिभा के अनुरूप वेब सीरीज में उस से काम नहीं लिया गया. पुलिस की दमदार पर्सनैल्टी में खरा भी नहीं दिखा. क्लब पर दबिश देते वक्त उस का गेटअप पुलिस के बजाय टपोरी जैसा दिखाया गया है. पुलिस वरदी के 2 बटन खोल कर कौन अधिकारी अपने ही ओहदे के सीनियर अफसर को पकड़ता है. इसे देख कर लगता है कि डायरेक्टर ने या तो कोई नशा कर रखा होगा या उस का दिमाग पगला गया.

पहले एपिसोड में वेब सीरीज के कलाकारों की एंट्री एकएक कर के दिखाई गई है. डायरेक्टर किसी भी पात्र के साथ पहले एपिसोड में न्याय करते हुए दिखाई नहीं दिया. इस कारण वेब सीरीज में जगहजगह बिखराव देखने को मिला.

यह बात साबित करने के लिए पहले एपिसोड का केंद्रीय गृहमंत्री और राज्य के एक अधिकारी के बीच हुई बातचीत से पता चल जाती है. इसी बातचीत के बाद एक स्पैशल दस्ता बनता है, जिसे बंबई क्राइम क्लीन करने का टारगेट मिलता है. इस का प्रभारी इस्माइल कादरी को बनाया जाता है और टीम को पठान स्क्वायड कोड वर्ड दिया जाता है. यहां डायरेक्टर कास्टिंग चूक में चूकते हुए दिखाई दे जाता है.

दरअसल, इस्माइल कादरी के साथ टीम में दिखाए गए 2 अन्य अफसर पुलिस की आभा से दूर दिखे. तीनों के चेहरे पर किसी तरह का पुलिसिया रौब दिखाई ही नहीं दिया. इसी एपिसोड में 2 नए किरदारों की एंट्री बेहद हास्यास्पद नजर आई. यहां एक मोटा सेठ गरीब दिखने वाले व्यक्ति को पीट रहा होता है. उस की जेब से सेठ का बटुआ निकलता है.

उसे पीटते वक्त ही इस्माइल कादरी के तीनों नाबालिग बच्चे वहां पहुंच जाते हैं. बीचबचाव करते हुए उसे पीटने से रोकने का काम बच्चे करते हैं. यह दृश्य हटने के बाद पता चलता है कि पिट रहा व्यक्ति इस्माइल कादरी का साला है.

वह भांजों की मदद से बच तो जाता है, लेकिन मोटा सेठ से छूटने के बाद पता चलता है कि पर्स से नकदी वह पहले ही निकाल चुका होता है. अगले सीन में इस्माइल कादरी उसे डपट कर घर से भगाते हुए दिखाया गया.

एपिसोड का महत्त्वपूर्ण किरदार अब्दुल्ला बताया गया है. यह भूमिका विवान भतेना ने निभाई है. इस सीरीज में यही एकमात्र कलाकार है, जिस का योगदान कुछ खास दिखा. यूपी का रहने वाला अब्दुला पठान के अखाड़े में कुश्ती करता था. उसे पछाड़ने वाला पठान के गैंग में कोई नहीं था. जिस कारण ईर्ष्या के चलते दोनों पठान भाई उसे अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे. लेकिन, हाजी मकबूल इस हुनर का काफी दीवाना दिखाया गया.

एपिसोड में एक जैसे दिखने वाले 3 सीन पुलिस रेड के दिखाए गए हैं, जिस में दर्शकों को कुछ भी नया नहीं मिलेगा. आखिरी रेड में जब सफलता हाथ लगती है, तब तक दर्शकों का मूड सीरीज से ही ऊब चुका होता है. घटिया डायरेक्शन की इसे हम निशानी कह सकते हैं.

दूसरे एपिसोड की शुरुआत हाजी मकबूल से होती है. रेड के बाद इस्माइल कादरी के घर आ कर उसे वह लालच दे कर साथ देने के लिए बोलता है, लेकिन हाजी मकबूल को शैतान बोल कर उसे अपमानित करने लगता है. अपनी कहानी सुना कर वह अपने साथ मिल कर काम करने के लिए उकसाता है, लेकिन हाजी मकबूल की बातों का असर उस पर नहीं होता. वह उसे घर से निकाल देता है.

जब वह बाहर जा रहा होता है, तब कादरी के तीनों बच्चे आ जाते हैं, जो हाजी मकबूल के ड्राइवर से बहस करते हैं. यह बेतुका सीन डायरेक्टर ने जबरदस्ती क्रिएट किया है. दूसरे एपिसोड में डायरेक्टर द्वारा इस्माइल कादरी के साले के जरिए उस के ईमानदार होने की फिर एक बार जबरिया पटकथा लिखी जाती है.