सोनाली साव हत्याकांड : इश्किया गुरु का खूनी खेल – भाग 3

उस दिन के बाद से दीपक सोनाली को ट्यूशन पढ़ाने उस के घर कभी नहीं आया. अचानक उस के ट्यूशन पढ़ाना छोड़ देने से सोनाली के पापा सुनील थोड़ा परेशान हुए. उन्होंने इस विषय में ट्यूटर से बात भी की थी, लेकिन उस ने बहाना बनाते हुए समय का अभाव बताते हुए ट्यूशन छोडऩे का कारण बताया था.

सुनील को क्या पता था कि दीपक के नीयत में कितनी बड़ी खोट आ चुकी थी. जीवन संवारने के लिए जिस के हाथों में बेटी की डोर सौंपी थी, उसी के मन में पाप का काला परिंदा फडफ़ड़ाने लगा था. शुक्र तो सोनाली का कहिए, जो मर्यादा की डोर को चरित्र के मजबूत बंधन से बंधी थी कि खुद को पाकसाफ रहने दिया. ये सब घर वालों के अच्छे संस्कार की देन थी.

इतनी बड़ी बात हुई थी. सोनाली ने यह बात समझदारी के साथ खुद ही निबटा ली थी. यह बात न तो किसी और को शेयर की थी और न ही घर वालों से बताई थी. वह जानती थी कि अगर उस ने ये बात घर वालों से बता दी तो खामखा बड़ा हंगामा हो सकता है. इसलिए इसे यहीं पर विराम देने में समझदारी समझी. इस के बाद वह एक प्राइवेट स्कूट में पढ़ाने लगी.

सोनाली ने जिस सूझबूझ का परिचय दिया था, वह काबिलेतारीफ थी. ऐसा नहीं था कि दीपक ने सोनाली को भुला दिया हो, बल्कि उस के दिल में सोनाली के लिए और प्यार उमडऩे लगा था. उसे पाने की उस की हसरतें और जवां होती जा रही थीं. बस, उसे हासिल करने के लिए नित नईनई तरकीब सोचता रहता था, वक्तबेवक्त उसे फोन कर के अपने प्यार का इजहार करता था, लेकिन सोनाली का उस के लिए एक ही जवाब था- न.

जुनूनी आशिक बन गया दीपक साव

सनकी प्रेमी दीपक ने भी ठान लिया था कि सोनाली उस की नहीं हुई तो वह किसी और की भी दुनिया में नहीं हो सकती. वह उसी के लिए आई है और उसी की बन कर रहेगी. वह उस की नहीं हुई तो किसी और की भी नहीं हो सकती. तब उसे मरना होगा. इस के अलावा उस के पास जीने के लिए दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है.

पागलपन की हद से भी ज्यादा दीपक साव शिष्या रह चुकी सोनाली से एकतरफा प्यार करता था. जब सोनाली ने उस का प्यार ठुकरा दिया तो वह ईष्र्या की आग में जलने लगा था. ईष्र्या की इसी आग में जलते दीपक ने खतरनाक फैसला ले लिया.

घटना से 6 महीने पहले यानी सितंबर 2022 में सुपारी किलर भरत कुमार उर्फ कारू निवासी मझलीटांड़, थाना डोमचांच को डेढ़ लाख रुपए में उस की हत्या की सुपारी दे दी और पेशगी के तौर पर उसे 50 हजार रुपए भी दे दिए. इश्क में पागल हुए दीपक साव का साथ रोहित मेहता ने दिया. सुपारी लेने के बाद अपने 4 साथियों संतोष मेहता और संजय मेहता के साथ मिल कर सोनाली की रेकी करने लगा.

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कहते हैं कि ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’, ये कहावत उस के साथ चरितार्थ हुई थी. 6 महीने बीत गए थे, मगर कारू अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सका था. फिर दीपक ने ही एक दांव चला. वह जानता था इन दिनों सोनाली के घर वाले आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. पैसों की उन्हें सख्त जरूरत है.

इसी बात का लाभ उठाते हुए दीपक ने सोनाली से बात की कि उस के जानपहचान का एक बैंक है, जो बिना किसी शर्त के लोन दे सकता है. अगर तुम लोन लेना चाहो तो मैं तुम्हें वह दिलवा सकता हूं. जबकि दीपक का किसी भी बैंक वाले से कोई परिचय नहीं था. उस ने सोनाली को झांसे में लेने के लिए पांसा फेंका था, जो सही जगह जा कर लगा था. सोनाली ने लोन लेने के लिए हामी भर दी थी क्योंकि उसे पैसों की सख्त जरूरत थी.

ट्यूटर ने की हत्या

बात 21 मार्च, 2023 की है. दीपक ने सोनाली को सुबह फोन कर उसे मिलने के लिए बीरजामू के पास बुलाया. उस दिन सोनाली ने स्कूल से छुट्ïटी ले ली थी और घर पर ही थी. करीब साढ़े 10 बजे सोनाली मां को ‘दीपक सर से मिलने जाना है’ बता कर अपना पर्स और मोबाइल साथ ले कर निकली. उस ने यह भी कहा कि वह काम पूरा होते ही घंटे-2 घंटे में घर वापस लौट आएगी.

सोनाली पैदल ही डेढ़ घंटे में बीरजामू पहुंची तो सडक़ के बाईं पटरी पर एक चार पहिया वाहन के पास ओट लगा कर दीपक खड़ा उसे देख कर मंदमंद मुसकरा रहा था तो सोनाली भी हौले से मुसकरा दी. फिर दीपक ने कार का दरवाजा बाहर खोल कर उसे बैठने का इशारा किया तो वह कार की आगे वाली सीट पर बैठ गई.

कार की ड्राइवर सीट पर रोहित मेहता बैठा था, जबकि पीछे की सीट पर भरत उर्फ कारू, संजय मेहता, संतोष मेहता और दीपक बैठा था. दीपक का इशारा मिलते ही कार फर्राटा भरने लगी थी. हालांकि पहले से कार में बैठे लोगों को देख कर सोनाली चौंकी थी, लेकिन बाद में दीपक ने सोनाली से अपना पुराना दोस्त कह कर परिचय दिया तो वह सामान्य दशा में आई थी.

रोहित जब कार ले कर सुनसान इलाके की ओर बढ़ा तो सोनाली घबरा गई और उस ने दीपक से पूछा कि वह उसे कहां ले कर जा रहा है. ये रास्ता तो शहर की ओर नहीं जाता है. इस पर दीपक ने जवाब दिया, “तुम ठीक सोचती हो. ये रास्ता शहर की ओर नहीं, मौत की ओर जाता है. अब बता तू मुझ से शादी करेगी कि नहीं? मेरी बनेगी कि नहीं.”

इस पर सोनाली बिदक गई, “हजार बार कह चुकी हूं, मैं तुम से न तो प्यार करती हूं और न ही शादी कर सकती. तुम ने मेरे साथ धोखा किया है.”

“क्या करूं मेरी जान, प्यार और जंग में सब जायज होता है. मैं ने तुम से पागलपन की हद से ज्यादा प्यार किया और तुम ने मेरे प्यार को नहीं समझा. तो सुन ले अगर तू मेरी नहीं हो सकती तो मैं तुझे किसी और की भी नहीं होने दूंगा. अब मरने के लिए तैयार हो जा हरामजादी.” कहते हुए सनकी प्रेमी दीपक ने पास में रखे मोबाइल चार्जर की केबिल से गला कस कर उसे मौत के घाट उतार दिया और गाड़ी नीरू पहाड़ी खदान की ओर चलने का इशारा किया.

रोहित ने वैसा ही किया जैसा दीपक ने करने को कहा. उस ने कार नीरू पहाड़ी खदान की ओर मोड़ दी. वह इलाका बिलकुल सुनसान था. खदान के पास पहुंच कर पांचों कार से बाहर निकले, कार में पहले से रखे प्लास्टिक की बड़े आकार की बोरी निकाली. उस में एक बड़े आकार का भारी पत्थर डाला फिर सोनाली की लाश तोड़मरोड़ कर उस बोरी में भरी और उसे रस्सी से कस कर बांध दिया.

एकतरफा प्यार में हत्या करने के बाद उन्होंने सोनाली की लाश ऊपर से नीचे खदान में फेंक दी. इस से पहले दीपक ने सोनाली का फोन अपने कब्जे में ले लिया था. लाश ठिकाने लगाने के बाद पांचों कार में सवार हुए और अपनेअपने घरों को लौट गए. फिर क्या हुआ, कहानी में वर्णन किया जा चुका है.

कथा लिखे जाने तक पांचों आरोपी दीपक कुमार साव, रोहित कुमार मेहता, भरत कुमार उर्फ कारू, संजय मेहता और संतोष मेहता जेल की सलाखों के पीछे थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सोनाली साव हत्याकांड : इश्किया गुरु का खूनी खेल – भाग 2

टीचर सोनाली साव की हत्या से कोडरमा की जनता मर्माहत भी थी और आक्रोशित भी. 28 मार्च की शाम आक्रोशित लोगों ने बेहराडीह से शांति कैंडल मार्च निकाला और कोडरमा-जमुआ राष्ट्रीय राजमार्ग ले जा कर खत्म किया. सभी के मन में आक्रोश का लावा फूट रहा था. शांति मार्च के बीच वे हत्या में शामिल सभी आरोपियों को फांसी देने, पीडि़त परिवार को 25 लाख रुपए का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और पुलिस की नाकामी के विरुद्ध नारेबाजी करते रहे.

बीचबीच में वे ‘सोनाली हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं’ के भी नारे लगा रहे थे. शांति मार्च का नेतृत्व पूर्व मुखिया राजेंद्र मेहता कर रहे थे. आंदोलित नागरिकों के भारी आक्रोश के चलते पुलिसप्रशासन की बुरी तरह छिछालेदर हो रही थी. स्थानीय नेताओं का बाकी के बचे तीनों आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का दबाव बना हुआ था.

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आखिरकार, अगले दिन यानी 29 मार्च, 2023 को तीनों आरोपियों भरत कुमार उर्फ कारू, संतोष मेहता और संजय मेहता को पुलिस ने उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वे तीनों शहर छोड़ कर कहीं भागने के फिराक में थे. पुलिस पूछताछ में तीनों आरोपियों ने भी सोनाली के अपहरण करने और बाद में हत्या करने का अपना जुर्म कुबूल कर लिया. पुलिस उन्हें भी अदालत के सामने पेश कर जेल भेज दिया.

पुलिस पूछताछ में शिक्षिका सोनाली साव उर्फ सोनी कुमारी के पाचों हत्यारों दीपक साव, रोहित मेहता, भरत उर्फ कारू, संतोष मेहता और संजय मेहता ने जो बयान दिए थे, उस के आधार पर दिल को कंपा देने वाली एकतरफा प्यार में मर्डर की जो कहानी सामने आई, वह कुछ ऐसी थी—

सोनाली दीपक कुमार से पढ़ती थी होम ट्यूशन

24 वर्षीय सोनाली साव उर्फ सोनी कुमारी मूलरूप से झारखंड के कोडरमा जिले के थाना डोमचांच स्थित कस्बा दाब रोड की रहने वाली थी. पिता सुनील कुमार साव प्राइवेट नौकरी कर के अपने 5 सदस्यीय परिवार का पालनपोषण कर रहे थे. वह इतना कमा लेते थे, जिस से किसी तरह परिवार का भरणपोषण हो जाता था, लेकिन बचत नहीं हो पाती थी यानी सुनील की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी.

सोनाली बच्चों में सब से बड़ी थी. वह मेधावी, मेहनती थी और बेहद जिजीविषा वाली थी. घर की माली हालत को समझती थी. एक दिन सोनाली ने मम्मीपापा से अपने मन की बात बताते हुए कहा, “मैं पढ़लिख कर कोई बड़ा अधिकारी बनना चाहती हूं.”

उस के पापा सुनील कुमार ने भी उस का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, “बेटा, तुम जितना पढऩा चाहती हो, पढ़ो. पैसों की चिंता मत करना, वह सिरदर्द मेरा है. मैं किसी से भी कर्ज ले कर तुम्हें पढ़ाऊंगा, तुम्हारा सपना पूरा करूंगा, बेटा, तनिक भी तुम विचलित मत होना. तुम पढ़ो, सिर्फ पढ़ो.”

पिता ने सोनाली को जो हिम्मत और हौसला दिया था, उस से उस का उत्साह कई गुना बढ़ गया था और हिम्मत भी. उस दिन के बाद से सुनील ने घर पर बेटी के लिए एक ट्यूटर लगा दिया था ताकि बेटी के जीवन को वह संवार सकें और उस के सपनों को मुकम्मल राह दे सकें, जो उस ने देखा है. ये करीब 5 साल पहले की बात थी, वह ट्यूटर कोई और नहीं बल्कि दीपक कुमार साव ही था, जो डोमचांच के महयाडीह का रहने वाला था. तब दीपक का जलवा था. वह घरघर जा कर बच्चों को ट्यूशन देने का काम करता था. उस का पढ़ाया बच्चों के मस्तिष्क पर किसी बेहतरीन फिल्म की कहानी की तरह छप जाता था.

अपने कलात्मक व्यवहार से वह बच्चों को ऐसे मांजता था कि बच्चे तो बच्चे, उन के घर वाले भी उस के मुरीद हो जाते थे. तभी तो वह जिस घर में ट्यूशन शुरू करता था सालोंसाल उसी घर में ट्यूशन देता था. औसत कदकाठी, गोरा रंग, बड़ीबड़ी आंखें, गोलमटोल चेहरा और कसरती बदन वाला दीपक आकर्षक व्यक्तित्व का धनी युवक था तो सोनाली भी कुछ कम नहीं थी.

करीब 5 फुट 6 इंच लंबी सोनाली भी खूबसूरती की मिसाल थी. उस का गोरा रंग और अंडाकार चेहरे पर जब मुसकान तैरती तो सामने वाला एक तरह से घायल हो जाता था. वह उम्र के जिस पड़ाव में आ कर वह खड़ी थी, अकसर वहां से लडक़ेलड़कियों के पांव फिसल जाते थे, लेकिन सुंदर और जहीन होते हुए भी सोनाली ने अपने पैरों को डगमगाने नहीं दिया था.

खैर, 12वीं क्लास में पढ़ रही सोनाली के सौंदर्य की खुशबू से आसपास के वातावरण महक उठा था. उस के इर्दगिर्द आवारा भंवरे मंडराने लगे थे, लेकिन उस ने दिल के दरवाजे पर मर्यादा का ताला बंद कर दिया था ताकि चुपके से कोई भी मनचला दिल के भीतर घुस न सके. दिल के दरवाजे पर भले ही सोनाली ने ताला जड़ दिया हो, लेकिन एक ऐसा भी भौंरा था, जो उस के तीखे और कजरारे नयनों के रास्ते उस के दिल में मुकाम बनाने की जुगत में परेशान रहता था. वह कोई और नहीं था बल्कि उसे ज्ञान का पाठ पढ़ाने वाला आशिकमिजाज ट्यूटर दीपक साव ही था.

गुलाब की कली सी खिली शिष्या सोनाली को जब से आशिकमिजाज गुरु दीपक ने देखा था, उस की सलोनी सूरत अपने दिल में बसा ली थी. ट्यूशन उसे पढ़ाता कम अपलक उसे निरंतर निहारता ज्यादा था. सोनाली कम समझदार नहीं थी, जो अपने ट्यूटर के इश्क को न समझती. वह तो शिष्य और गुरु की मर्यादा का पालन करती रही. गुरु के लिए उस के दिल में सिर्फ और सिर्फ सम्मान और अदब था, जबकि वह उसे और रूप में देख रहा था. उस के सम्मान को प्यार समझ बैठा था तो इस में सोलानी का क्या कुसूर था.

सोनाली से करने लगा एकतरफा प्यार

ट्यूटर दीपक अपनी शिष्या सोनाली से प्यार करने लगा था. उस का यह प्यार एकतरफा था. उस के हंस कर बोलने या बातचीत करने की अदा को वह प्यार समझ बैठा था. एक दिन मौका देख कर दीपक अपने प्यार का इजहार सोनाली से कर बैठा, “मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं सोनाली, मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता.” कहते हुए उस ने शिष्या सोनाली के दोनों हाथ अपने हाथों में ले लिए, “जब से तुम को देखा है, उसी दिन से मुझे तुम से प्यार हो चुका है.”

“ये क्या कह रहे हैं, सर.” सोनाली अपना हाथ छुड़ाती हुई बोली, “आप का दिमाग ठिकाने तो है न?”

“हां, मेरा दिमाग ठिकाने पर है और मैं भी, लेकिन मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता सोनाली, मेरे प्यार को अपनी स्वीकृति की मोहर लगा हो, प्लीज.”

“आज कह दिया तो कह दिया, पर आइंदा मेरे से ऐसीवैसी बातें मत करना, मैं ऐसीवैसी लडक़ी नहीं हूं. हमारे बीच में सिर्फ गुरु और शिष्या का रिश्ता है, बस. इस के अलावा मैं और किसी रिश्ते को नहीं जानती और न ही मेरे से कोई रिश्ता जोडि़एगा. गुरु होने के नाते मैं सिर्फ आप का सम्मान करती हूं. इस सम्मान व पवित्र रिश्ते को आप ने प्यार समझ लिया.”

सोनाली गुस्सा भी हुई और उसे रिश्तों की मर्यादा की झलक भी दिखाई.

“चाहे जो कह लो तुम, मैं तुम्हारी किसी बात का बुरा नहीं मानता. बस, इतना जानता हूं कि मैं तुम्हें दिल की गहराइयों से भी ज्यादा प्यार करता हूं और भविष्य में तुम से शादी करना चाहता हूं, बस.”

“ओफ्फोऽऽ” झुंझलाती हुई सोनाली आगे बोली, “आप ने पागलपन की सारी हदें पार कर दी हैं. कितनी बार कहूं, मैं आप से कोई प्यारव्यार नहीं करती और न ही इस गलतफहमी में रहिएगा कि मैं आप से प्यार करूंगी. मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूं, जहां हमें मर्यादा में रहना सिखाया जाता है, अपने गुरुओं का सम्मान करना सिखाया जाता है.”

“ऐसा कह कर मेरा दिल मत तोड़ो सोनाली. एक बार फिर मैं तुम से कहता हूं, मैं बहुत प्यार करता हूं तुम से और शादी भी तुम्हीं से करना चाहता हूं.”

“फिर तो इस जनम में संभव नहीं है, सर.”

“तुम्हारे सामने अपने प्यार की भीख मांगता हूं.”

“तब भी मेरी ओर से न है, मैं आप से प्यार नहीं करती, नहीं करती, नहीं करती. आप यहां से चले जाइए, फिर दोबारा लौट कर कभी मत आइएगा. नहीं तो मेरे मम्मीपापा ये प्यार वाली बात सुन लेंगे तो हम दोनों को जिंदा गाड़ देंगे. प्लीज सर, आप यहां से चले जाओ, मुझे आप से कोई रिश्ता नहीं रखना है, प्लीज प्लीज.” सोनाली ट्यूटर दीपक के सामने अपने दोनों हाथ जोड़ कर खड़ी हो गई तो अपना सा मुंह ले कर दीपक को वहां से जाना ही पड़ा.

                                                                                                                                             क्रमशः

सोनाली साव हत्याकांड : इश्किया गुरु का खूनी खेल – भाग 1

सोनाली साव उर्फ सोनी कुमारी को घर से निकले करीब 7 घंटे हो चुके थे, पर अब तक वह वापस घर नहीं लौटी थी. दिन के साढ़े 11 बजे वह मां को थोड़ी देर में लौट कर आने की बात कह घर से निकली थी और जब शाम साढ़े 5 बजे तक वह घर नहीं लौटी तो मम्मीपापा को सयानी बेटी को ले कर चिंता सताने लगी थी. धीरेधीरे संध्या पहर भी ढल चुकी थी और रात की काली चादर ने आसमान में अपने पांव पसार दिए थे. ऐसे में उस के पापा सुनील कुमार साव की सोच शून्य में तबदील हो चुकी थी.

सुनील ने अपने रिश्तेदारों परिचितों, पड़ोसियों, बेटी की सहेलियों और जिस निजी स्कूल में वह पढ़ाती थी, उस स्कूल के प्रिंसिपल आदि से पूछताछ कर ली थी, लेकिन वह किसी के यहां नहीं गई. और तो और उस का मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था.

पहली बार ऐसा हुआ था, जब सोनाली का फोन बंद आ रहा था, नहीं तो यदि उसे घर पहुंचने में तनिक भी देर हो जाती तो वह तुरंत मम्मी या पापा को फोन कर के इन्फार्म कर देती थी, लेकिन यहां न तो उस का फोन लग रहा था और न ही उस ने फोन कर के ही बताया था कि वह कहां है?

सोनाली की तरफ से मम्मीपापा को जब कोई जानकारी नहीं मिली तो वे परेशान हो गए. भला मांबाप उसे ले कर परेशान होते क्यों नहीं होते, बेटी जवान थी. आजकल का समय कितना खराब चल रहा है, बहूबेटियां घर के बाहर कितनी सुरक्षित हैं, यह बात किसी से छिपी नहीं है. इसी बात की चिंता मांबाप को सता रही थी.

बहरहाल, किसी तरह घर वालों ने रात आंखों में काट दी थी. पूरी रात उन्होंने दरवाजे पर टकटकी लगाए बिता दी. पलक झपकते जरा भी दरवाजा खट से होता तो चौंक कर वे बैठ जाते थे. उन्हें ऐसा लगता था जैसे बेटी आ गई हो, लेकिन वह दरवाजा तो हवा के झोंके से खटका था. यह बात 21 मार्च, 2023 की झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच की थी.

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22 मार्च यानी अगली सुबह सोनाली के पापा सुनील कुमार डोमचांच थाने पहुंचे. एसएचओ अब्दुल्लाह खान थाने में ही मौजूद थे और जरूरी फाइलों को निबटाने में मशगूल थे. सुनील दूसरी पंक्ति की पहली वाली कुरसी पर चुपचाप बैठ गए थे. थोड़ी देर बाद जब एसएचओ फाइलों से फारिग हुए तो उन्होंने सुनील से पूछा, “जी, बताएं, कैसे आना हुआ सुबहसुबह?”

“नमस्ते सर.” दोनों हाथ जोड़े एसएचओ खान का अभिवादन करते हुए सुनील ने कहा, “मैं बहुत परेशान हूं सर बेटी को ले कर. कल दोपहर से उस का कहीं पता नहीं है.”

“आप का नाम क्या है? और कहां रहते हैं?” एसएचओ ने सवाल किया.

“मेरा नाम सुनील कुमार है सर. मैं दाबरोड में रहता हूं. बेटी का नाम सोनाली उर्फ सोनी है. वह एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी. कल साढ़े 11 बजे के करीब अपनी मां से थोड़ी देर में लौट कर आने को कह घर से निकली थी, तब से अब तक वह घर नहीं लौटी और न ही उस का मोबाइल ही लगता है. इसे ले कर मुझे बड़ी चिंता खाए जा रही है कि बेटी के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हो गई. बेटी का पता लगाने में मेरी मदद करें सर.”

“ठीक है, चिंता न करें. ऐसा करें अपनी तहरीर दीवानजी को लिखवा दें. मैं उस पर काररवाई करता हूं.

“ठीक है सर. मैं तहरीर दीवानजी को दे देता हूं, नमस्ते सर.”

ट्यूटर के खिलाफ लिखाई रिपोर्ट

सुनील कुमार एसएचओ के औफिस से उठ कर बाहर आ गए और बेटी की गुमशुदगी लिखा कर वापस घर लौट आए. अपनी तहरीर में इन्होंने दीपक कुमार साव और रोहित कुमार मेहता को नामजद किया था. उन्होंने यह आशंका जताई थी कि दीपक बेटी को बारबार फोन कर के परेशान किया करता था. दीपक को पकड़ कर कड़ाई से पूछताछ की जाए तो बेटी के बारे में जानकारी मिल सकती है.

दरअसल, कई साल पहले दीपक सोनाली को उस के घर ट्यूशन पढ़ाया करता था. तब वह 12वीं क्लास में पढ़ती थी. तभी से दोनों एकदूसरे को जानतेपहचानते थे. सोनाली के घर वाले भी दीपक को अच्छी तरह जानते थे. शिक्षक की हैसियत से वह अकसर सोनाली को फोन किया करता था. इस का घर वालों ने कभी ऐतराज नहीं किया. वे जानते थे इन के बीच एक पवित्रता और मर्यादा का रिश्ता है. इस रिश्ते का उन को खास खयाल है.

बहरहाल, बस इसी रिश्ते से आशंकित हो कर सुनील ने अपनी तहरीर में दीपक का नाम डाल दिया था. 3 दिन तहरीर दिए बीत चुके थे, पर पुलिस ने अब तक कोई काररवाई नहीं की थी. तहरीर को पुलिस ने ठंडे बस्ते के हवाले कर दी थी. उधर अखबार में रोजाना ही शिक्षिका सोनाली के रहस्यमय तरीके से गायब होने की खबरें सुर्खियों में छाई रहती थीं. पुलिस की लापरवाही की बड़ीबड़ी खबरें प्रकाशित हो रही थीं, जिस से कोडरमा के नागरिक काफी उग्र हो चुके थे.

सोनाली के लापता होने के छठें दिन भी उस का सुराग नहीं मिला मिला तो 26 मार्च को घर वालों का आक्रोश भडक़ उठा. घर वालों और स्थानीय लोगों ने पुलिस नाकामी के खिलाफ शहीद चौक के पास कोडरमा-जमुआ मुख्यमार्ग जाम कर दिया था. जाम की सूचना मिलने पर एएसपी प्रवीण पुष्कर मौके पर पहुंचे और जाम खत्म करने की आंदोलनकारियों से अपील की तो उन्होंने सोनाली के रहस्यमय तरीके से गायब होने के रहस्य से परदा उठाने की मांग रख दी.

एएसपी प्रवीण पुष्कर ने आंदोलनकारियों को विश्वास दिलाया कि 24 घंटे के भीतर सकारात्मक रिजल्ट आ जाएगा, विश्वास रखें और आंदोलन खत्म कर दें. एएसपी के आश्वासन पर तब कहीं जा कर आंदोलन खत्म हुआ. अपने वादे के पक्के एएसपी प्रवीण पुष्कर ने डोमचांच एसएचओ को बुला कर बड़ी मीटिंग की और 24 घंटे के अंदर मामले का पटाक्षेप करने की सख्त हिदायत दी. यहीं नहीं, उसी समय उन्होंने पुलिस की 2 टीमें गठित कर दीं.

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एक टीम का नेतृत्व एसएचओ अब्दुल्लाह खान के हाथों सौंप दिया और दूसरी टीम का नेतृत्व एसओजी कर रही थी. दोनों टीमों का काम उसी समय से शुरू हो चुका था. एसएचओ अब्दुल्लाह खान ने तहरीर में नामजद दीपक कुमार साव निवासी महथाडीह को सब से पहले हिरासत में लेने की तैयारी की.

27 मार्च, 2023 की सुबह डोमचांच पुलिस की टीम ने महथाडीह पहुंच कर दीपक साव के घर को चारों ओर से घेर लिया और सोते हुए दीपक को उठा कर हिरासत में ले कर पूछताछ के लिए डोमचांच थाने ले आई. बड़ी संख्या में पुलिस बल देख कर दीपक पसीनापसीना हो चुका था. एसएचओ अब्दुल्लाह खान ने उस से कड़ाई से पूछताछ की तो वह पुलिस के सामने टूट गया. ट्यूटर दीपक ने हत्या का अपराध स्वीकार करते हुए कुबूल कर लिए कि उसी ने डेढ़ लाख की सुपारी दे कर सोनाली की हत्या करवाई थी. इस घटना में उस के अलावा 4 और लोग शामिल थे.

दीपक की निशानदेही पर उसी दिन दोपहर में रोहित कुमार मेहता निवासी सिमरिया को भी गिरफ्तार कर लिया गया था. घटना वाले दिन रोहित उस कार को चला रहा था, जिस में पहले सोनाली का अपहरण किया गया और बाद में हत्या कर दी गई

7 दिनों से रहस्य बनी शिक्षिका सोनाली साव के रहस्य से पुलिस ने परदा उठा दिया था. बाकी के 3 आरोपी अभी भी फरार चल रहे थे. इधर जैसे ही पता चला कि आरोपियों ने सोनाली की निर्मम तरीके से हत्या कर दी है, घर में कोहराम मच गया था. घर वालों का रोरो कर बुरा हाल हो गया था.

प्रैस कौन्फ्रैंस में किया खुलासा

आननफानन में उसी दिन शाम एएसपी प्रवीण पुष्कर ने डोमचांच थाने में पत्रकार वात्र्ता का आयोजन किया. दोनों आरोपियों ने सोनाली की हत्या कैसे और क्यों की, यह सब रट्टू तोते की तरह सब बक दिया. उस के बाद शाम 5 बजे दोनों आरोपियों दीपक और रोहित मेहता को अदालत में पेश किया. अदालत ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए.

                                                                                                                                               क्रमशः

फुटबॉल खिलाड़ी शालिनी की अधूरी प्रेम कहानी – भाग 3

रवि पुलिस को बतातेबताते अतीत के झरोखे में चला गया…

उस ने बताया कि अभी हफ्ता भर पहले की ही बात है. उस ने मुझे फोन कर के कहा कि वह मुझ से वैलेंटाइंस डे पर मिलने प्रयागराज आ रही है.

मैं ने उस से चहकते हुए पूछा, ‘‘सच बताओ रोली (शालिनी को रवि प्यार से रोली कहता था), मजाक मत करो. क्या सच में तुम मुझ से मिलने वैलेंटाइंस डे पर प्रयागराज आओगी? इतने दिनों बाद तुम ने फोन किया है, मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है कि मेरी तुम से बात हो रही है.’’

‘‘अरे बुद्धू, मैं तुम्हारी रोली ही हूं और तुम्हीं से बात कर रही हूं. तुम किसी भूत या चुड़ैल से बात नहीं कर रहे हो. यकीन नहीं आ रहा तो अपने कान में कस कर चिकोटी काट कर देखो पता चल जाएगा.’’ इतना कह कर  शालिनी बात करतेकरते हंसने लगी.

‘‘हांहां, चलो, यकीन हो गया. अच्छा, अब यह बताओ कि गुड़गांव से तुम आ कब रही हो?’’ रवि ने उत्सुकता से पूछा.

‘‘सुनो, मैं 14 फरवरी को प्रयागराज पहुंच जाऊंगी. उस दिन हम दोनों खूब मौजमस्ती और सैरसपाटा करेंगे. उस के बाद मैं वापस दिल्ली चली जाऊंगी.’’ शालिनी ने कहा.

‘‘क्यों, क्या तुम अपने घर नहीं जाओगी?’’

‘‘अरे नहीं बाबा. और यह बात तुम मेरे घर पर पापा या दीदी किसी से भी नहीं बताना क्योंकि मैं ने पापा से पहले ही कह रखा है कि मैं होली पर घर आऊंगी. मुझे इधर छुट्टी नहीं मिल रही है. समझे?’’ शालिनी ने बताया.

‘‘हां, समझा. ठीक है, मुझे तुम्हारे आने का बेसब्री से इंतजार है.’’ रवि बोला.

इस के बाद हम दोनों के बीच काफी देर तक बातें होती रहीं. अंतत: वह घड़ी भी आ गई जब 14 फरवरी की शाम शालिनी प्रयागराज जंक्शन के प्लेटफार्म पर उतरी. उस के आने से पहले ही रवि ने 10 हजार रुपए का मोबाइल बतौर सरप्राइज गिफ्ट खरीद रखा था. वह शालिनी को वैलेंटाइंस डे पर मोबाइल उपहार में देना चाहता था ताकि उस की प्रेमिका का प्यार और ज्यादा बढ़े.

14 फरवरी को तय समय पर शालिनी का प्रेमी रवि ठाकुर स्टेशन पहुंचा. उसे बाइक पर बिठाया और सीधे रेलवे स्टाफ की लोको कालोनी स्थित अपने आवास पर ले आया.

यहां गौरतलब है कि शालिनी धुरिया को 13 फरवरी को ही प्रयागराज आना था लेकिन ट्रेन मिस हो जाने के कारण वह 14 फरवरी को वहां पहुंची थी.

क्या शालिनी के और भी बौयफ्रैंड थे?

बहरहाल, जब रवि उसे ले कर अपने कमरे पर पहुंचा तो उस समय उस के घर वाले टीवी देख रहे थे. शालिनी फ्रैश होने चली गई. जब वह फ्रैश हो रही थी तो रवि ने शक के आधार पर उस का मोबाइल चैक किया. उसे शक था कि उस की प्रेमिका दिल्ली जा कर बदल गई है. उस के कई लोगों के साथ संबंध बन गए होंगे. मोबाइल की गैलरी में फोटो में शालिनी कई लड़कों के साथ स्टाइल में दिखी. फिर क्या था रवि को उस पर गहरा शक हो गया.

शालिनी जब बाथरूम से निकली तो रवि ने उस से पूछा, ‘‘रोली, तू दिल्ली जा कर बहुत बदल गई है. बेवफा है तू. अब तू पहले वाली रोली नहीं रही.’’

‘‘जुबान संभाल कर बात करो रवि, अगर मैं तुम से सच्चा प्यार न करती तो इतनी दूर तुम से मिलने नहीं आती. अपनी औकात में रह कर बात करो. क्या सबूत है तुम्हारे पास जो मुझ पर इतना बड़ा इलजाम लगा रहे हो.’’

‘‘अरे छिनाल, शरम कर जरा. सबूत है तेरा ये मोबाइल. इस में तेरे यारों के साथ खिंचवाई गई फोटो.’’ रवि गुस्से में बोला.

‘‘क्या कहा, छिनाल? तेरी हिम्मत कैसे हुई, यह कहने की?’’

‘‘एक बार नहीं सौ बार कहूंगा मादर…कहीं कहीं.’’ रवि ने उसे गाली दी.

अब शालिनी से सहा नहीं गया. उस ने एक जोरदार थप्पड़ रवि के गाल पर जड़ दिया. रवि तिलमिला उठा. गुस्से में गाली देते हुए बोला, ‘‘तेरी मां की… साली, तेरी इतनी हिम्मत कि मुझे थप्पड़ मारा…’’

शालिनी भी आपे से बाहर थी, ‘‘और नहीं तो क्या तेरी पूजा करूं. तूने मुझे समझ क्या रखा है अपनी रखैल? साले, अपने भाई के टुकड़ों पर पलने वाला मुझ पर इलजाम लगाता है. मैं इतनी बड़ी कंपनी में काम कर रही हूं. मेरा सभी के साथ उठनाबैठना, खानापीना, घूमनाफिरना है तो सब क्या मेरे यार हो गए. मैं पागल हूं जो इतनी दूर तुझ से मिलने यहां आई.’’

‘‘पता नहीं किसकिस को बयाना दे रखा होगा तूने. कौन जाने क्या खेल खेल रही है मेरे साथ फुटबाल की तरह.’’

रवि का इतना कहना था कि शालिनी ने फिर उसे झन्नाटेदार तमाचा जड़ दिया. फिर क्या था दोनों के बीच ठेठ इलाहाबादी बोली में गालीगलौज और मारपीट होने लगी.

‘‘मादर…बहुत हाथ उठने लगे हैं तेरे. तू ऐसे नहीं मानेगी…’’ कह कर रवि ने जोर से शालिनी की गरदन पकड़ ली. शालिनी गरदन छुड़ाने के लिए तड़पने लगी लेकिन अब रवि के ऊपर शैतान सवार हो चुका था. थोड़ी देर में शालिनी के प्राणपखेरू उड़ चुके थे. गला घोटे जाने से उस की जीभ और आंखें दोनों बाहर आ गई थीं.

रवि ठाकुर को जब होश आया तब तक काफी देर हो चुकी थी. अब उसे लाश ठिकाने लगानी थी. उस ने अकेले ही शालिनी के शव को बोरे में भरा. सूजे और सुतली से बोरे का मुंह सिला और अकेले ही रात के 9 बजे उस की डेडबौडी बाइक पर रख कर पोलो ग्राउंड वाले पुराने कुएं में फेंक आया.

सब कुछ अकेले ही कर डाला उस ने और किसी को पता तक नहीं चला? सेना की गश्ती गाड़ी, क्यूआरटी और हाईकोर्ट पर हमेशा चैकिंग में लगे रहने वाले पुलिस के जवान सभी नदारद रहे उस समय? न शालिनी की लड़ाईझगड़े के दौरान किसी ने चीखें सुनीं? जबकि पीछे वाले कमरे में रवि के घर वाले मौजूद थे. उन्हें भी इस की जरा भी भनक नहीं लगी? सवाल बहुत हैं मगर कोई फायदा नहीं.

इंसपेक्टर वीरेंद्र कुमार यादव ने रवि की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त मोबाइल और आलाकत्ल बरामद कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

फुटबॉल खिलाड़ी शालिनी की अधूरी प्रेम कहानी – भाग 2

शालिनी ने एलडीसी कालेज से मार्केटिंग का कोर्स किया हुआ था. एक अच्छी फुटबाल खिलाड़ी होने के साथसाथ उसे मार्केटिंग का भी अच्छा अनुभव था. इसलिए उस की नौकरी लगने में कोई परेशानी नहीं हुई. दिल्ली में शालिनी किराए का कमरा ले कर रहती थी.

फरवरी में उस की मकान मालकिन ने हमारे घर फोन कर जब पूछा कि शालिनी प्रयागराज पहुंची कि नहीं तो हम सन्न रह गए. क्योंकि मकान मालकिन ने बताया कि शालिनी 13 फरवरी, 2022 को ही प्रयागराज के लिए रवाना हो गई थी.

पिता ने लिखाई बौयफ्रैंड के खिलाफ रिपोर्ट

जब हम लोगों ने यह सुना तो आश्चर्यचकित रह गए क्योंकि शालिनी ने कुछ ही दिनों पहले फोन कर के हमें बताया था कि वह अभी नहीं आ पाएगी. अभी उसे छुट्टी नहीं मिल रही है. होली के अवसर पर वह प्रयागराज आएगी. मकान मालकिन के अनुसार उसे अब तक दिल्ली वापस आ जाना चाहिए था. तभी से हम लोग परेशान थे.

इस के बाद उस के मोबाइल पर कई बार काल की, लेकिन हर बार उस का मोबाइल स्विच्ड औफ मिला. जब शालिनी की मकान मालकिन ने हमें बताया कि वह कह कर निकली थी कि प्रयागराज अपने घर जा रही है और 2-4 दिन में वापस आ जाएगी. तभी किसी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर बिना पुलिस को सूचना दिए उस की खोजबीन कर रहे थे.

उस की तलाश में शालिनी का प्रेमी रवि भी साथसाथ रातदिन उन के साथ एक किए हुए था. शालिनी का मोबाइल भी स्विच्ड औफ था, जिस से हमारी परेशानी और भी बढ़ गई थी. पूरा परिवार उस की चिंता कर रहा था और जब वह हमें मिली भी तो लाश के रूप में. इतना कह कर राजेंद्र प्रसाद रोने लगे. राजेंद्र प्रसाद से रवि के खिलाफ तहरीर ले कर पुलिस ने जांचपड़ताल शुरू कर दी.

आगे की काररवाई के लिए सिविल लाइंस थाना पुलिस को कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि शालिनी का प्रेमी जोकि रेलवे स्टाफ क्वार्टर की लोको कालोनी में अपने बड़े भाई के साथ रहता था. उस समय वह थाने में ही मौजूद था. शालिनी के परिवार के साथ उस की खोजबीन का नाटक वह शुरू से ही कर रहा था.

रवि ठाकुर को फौरन पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया और पूछताछ शुरू कर दी. शुरुआत में उस ने पुलिस को काफी बहकाने और भटकाने की कोशिश की लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की तो उस ने शालिनी धुरिया की हत्या कर के लाश को बोरे में भर कर कुएं में फेंकने से ले कर सभी जुर्म स्वीकार कर लिए.

वैलेंटाइंस डे पर मिलने इतनी दूर से आई शालिनी की हत्या की जो कहानी सामने उभर कर आई, वह इस प्रकार निकली—

शालिनी धुरिया उर्फ रोली और उस का प्रेमी रवि ठाकुर दोनों ही फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी थे. शालिनी के कोच अनिल सोनकर ने ‘मनोहर कहानियां’ को बताया कि शालिनी जब महज 6-7 साल की थी, तभी से उस का रुझान फुटबाल की तरफ था. सदर बाजार फुटबाल ग्राउंड में वह फुटबाल की प्रैक्टिस करती थी.

शालिनी एक अच्छी फुटबाल खिलाड़ी थी. गजब का स्टैमिना था उस के अंदर.  बहुत ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी थी वह. तपती दोपहर में भी वह बड़ी ही मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ इतने बड़े फुटबाल मैदान में अकेले दम पर बाउंड्री पर चूने का छिड़काव करती थी.

अपनी मेहनत और लगन से शालिनी धुरिया ने महिला फुटबाल खिलाड़ी के रूप में बेहतरीन खिलाड़ी की छवि बना ली थी. अपनी बेहतरीन परफार्मेंस के चलते स्टेट व नैशनल लेवल पर शालिनी ने सिर्फ उत्तर प्रदेश के जिलों में, बल्कि गोवा, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, समेत विभिन्न राज्यों व जिलों में प्रयागराज जिले का तो नाम रोशन किया ही, साथ ही सदर बाजार फुटबाल एकेडमी का भी परचम फहराया था.

शालिनी ने खेल के साथसाथ अपनी पढ़ाईलिखाई भी जारी रखी थी और गंगापार इलाके से बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद पर्ल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, गुरुग्राम में नवंबर 2021 से जौब करने लगी थी. खेल के दौरान ही शालिनी को रवि ठाकुर नाम के फुटबाल खिलाड़ी से प्यार हो गया था. रवि मूलरूप से बिहार के जिला जहानाबाद के गांव मकदूमपुर का रहने वाला था.

उस के पिता दिनेश सिंह रेलवे में नौकरी करते थे. उन की पोस्टिंग प्रयागराज में ही थी, इसलिए सिविल लाइंस की रेलवे कालोनी में उन्हें क्वार्टर मिला हुआ था. उन्होंने करीब 5-6 साल पहले वीआरएस ले लिया और अपनी जगह अपने बड़े बेटे दिनेश ठाकुर को नौकरी पर लगवा दिया था.

रवि इलाहाबाद स्पोर्टिंग फुटबाल एकेडमी का होनहार खिलाड़ी था. वह स्कूल नैशनल से अंडर 17  के तहत सीनियर स्टेट चैंपियनशिप खिलाड़ी भी रहा है. खेल के साथ वह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीए सेकेंड ईयर की पढ़ाई भी कर रहा था.

शालिनी और रवि की प्रेम कहानी की शुरुआत लगभग 7-8 साल पहले खेल के दौरान मैदान में हुई थी. दोनों ही फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी थे, इसलिए प्रेम परवान चढ़ने में समय नहीं लगा. दोनों के पास एकदूसरे से मिलने का भरपूर समय था. खेल के बहाने रोज मुलाकात स्वाभाविक थी.

इन की प्रेम कहानी के बारे में दोनों के ही परिजन भलीभांति परिचित थे. शालिनी तो रवि के प्यार में ऐसी दीवानी हो गई थी कि उस ने अपने हाथ पर प्रेमी रवि का नाम तक गुदवा लिया था. इस तरह इन का प्यार परवान चढ़ता गया.

लेकिन एक दिन रवि की थोड़ी सी गलतफहमी ने सब कुछ उजाड़ दिया. जब रवि को हिरासत में लिया तो पूछताछ करने पर रवि ने पुलिस को बताया, ‘‘हां सर, मैं ने उस चुड़ैल का गला दबा कर हत्या की है. वह थी ही इसी लायक. मेरी सच्ची मोहब्बत का उस ने गलत फायदा उठाया था बेवफा कहीं की. मोहब्बत तो बेपनाह मैं उस से करता था और उस के मर जाने के बाद भी करता हूं.

‘‘लेकिन क्या करूं उस के बिगड़ैल रवैए और हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल की चाह ने मुझे उस की हत्या करने पर मजबूर कर दिया. हालांकि मैं ऐसा नहीं करना चाहता था लेकिन उस के थप्पड़ से मैं इतना आहत हो गया था कि बरदाश्त नहीं कर पाया. रोक नहीं सका खुद को और…’’

कनाडा से बुला कर शादी, फिर हत्या – भाग 2

दूसरी तरफ सुनील मोनिका की खुबसूरती, स्वभाव, आचरण और व्यवहारिकता पर मर मिटा था. वह गांव की हो कर भी शहरी वातावरण में आसानी से फिट हो जाती थी. धाराप्रवाह अंगरेजी बोलना सीख गई थी. कंप्यूटर, इंटरनेट सर्फिंग, सोशल साइटों से संबंधित बारीकियां और दूसरी टेक्निकल जानकारियां भी हासिल कर चुकी थी. मोनिका अगर अपने करिअर के प्रति महत्त्वाकांक्षी बनी हुई थी तो सुनील उसे लाइफ पार्टनर बनाने का मन बना चुका था. दोनों का प्रेम प्रसंग बढ़ता जा रहा था.

पढ़ाई के लिए कनाडा पहुंची मोनिका

समय अपनी गति से चल रहा था तो वहीं मोनिका भी अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही थी. उस ने बीए की पढ़ाई पूरी करने के अलावा आइलेट्स की परीक्षा भी पास कर ली. उसे 2 सफलताएं एक साथ मिल गई थीं, जिस से उस के विदेश जाने की राह और आसान हो गई थी.

हालांकि इस के लिए उस के मौसेरे भाई विकास ने भी तैयारी की थी, लेकिन वह आइलेट्स की परीक्षा पास नहीं कर पाया था, जिस से उसे कनाडा का वीजा नहीं मिल पाया. फिर भी उसे खुशी इस बात की थी कि बहन मोनिका को स्टूडेंट वीजा मिल गया था. उसे वहां बिजनैस मैनेजमेंट यानी एमबीए की पढ़ाई करनी थी.

उन की इस खुशी में सुनील भी शामिल था, लेकिन उस के मन में एक टीस भी थी कि मोनिका कनाडा चली जाएगी और जब उसे उस की याद सताएगी तब क्या करेगा? वह एक तरह से उस की गैरमौजूदगी में अपनी तन्हाई को ले कर चिंतित हो गया था. उस ने भारी मन से 5 जनवरी, 2022 को दिल्ली के अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट से मोनिका को कनाडा के लिए विदा कर दिया था.

मोनिका के परिवार वालों के लिए संतोष और बेहद खुशी की बात थी कि कनाडा में उस की पढ़ाई का सारा इंतजाम हो गया था. उस के सुनहरे भविष्य को ले कर उस का भाई विकास समेत मौसामौसी और मम्मीपापा सभी खुश थे. इसे वे गर्व की बात समझते थे और परिचितों को बताने से नहीं चूकते थे. इस से उन की सामाजिक मानमर्यादा बढ़ गई थी. गांव के लोगों के बीच उन की प्रतिष्ठा भी बढ़ गई थी.

अगर कोई उदास था तो वह था सुनील. मोनिका के जाने के बाद वह उस के प्रेम की रूमानियत और रोमांस में खोया रहने लगा था. मोनिका की यादें उसे सताती रहती थीं. वैसे वह उस से फोन पर बातें कर लिया करता था, लेकिन वहां मोनिका पढ़ाई की व्यस्तता और रातदिन में समय के फर्क के कारण ज्यादा समय तक बात नहीं कर पाती थी. जबकि सुनील चाहता था कि वह उस से लंबी बातें करे. अपने दिल की बात उसे सुनाए. उस की यादों में खोए हुए अपने गम के हाल बताए.

कुछ ऐसा ही मोनिका के घर वालों के साथ भी था, लेकिन वे उस की पढ़ाई और व्यस्तता को समझते हुए कुछ सेकेंड के लिए ही सही, हर रोज हालसमाचार ले लिया करते थे. समय बीतता रहा और मोनिका से फोन पर संपर्क होने का समय भी बढ़ता चला गया. घर वालों की उस से 2-3 दिन में बातें होने लगीं. धीरेधीरे कर हफ्ते में और फिर 2 हफ्ते में बात होने लगी.

एक समय ऐसा भी आया, जब मोनिका की घर वालों से 2-2 हफ्ते तक बात नहीं हो पाई. यह सिलसिला हफ्ते से महीने में बदल गया. लेकिन जून, 2022 के बाद घर के किसी भी सदस्य से मोनिका की बात नहीं हो पाई. जबकि इस से पहले परिवार में किसी न किसी सदस्य से मोनिका की थोड़ी ही सही, मगर हालचाल, पढ़ाई या जरूरतें आदि की बात हो जाती थी. इस तरह से उस की कुशलता की खबर पूरे परिवार को मिल जाती थी.

अचानक बंद हो गया मोनिका से संपर्क

जून, 2022 के बाद जब मोनिका की कोई काल नहीं आई और उस के घर वालों द्वारा काल किए जाने पर भी उस से बात नहीं हो पाई, तब वे चिंतित हो गए. वे समझ नहीं पा रहे थे कि अचानक क्या हो गया, जो कनाडा गई मोनिका से भारत में किसी से बात नहीं हो पा रही है. न तो फोन काल और न ही वाट्सऐप मैसेज. उस से संपर्क एकदम से खत्म गया था.

इस तरह 5 महीने निकल गए थे और मोनिका का भारत में किसी से संपर्क नहीं हो पा रहा था. आखिरकार, उस के घर वालों ने गन्नौर थाने में 26 अक्तूबर, 2022 को मोनिका के अपहरण की शिकायत दर्ज करवा दी. पुलिस द्वारा अपहरण के लिए किसी पर संदेह की बात पूछे जाने पर घर वालों ने सुनील का नाम ले लिया था, जिस से कुछ महीने में अच्छी दोस्ती हो चुकी थी.

मोनिका के घर वाले 2 दिनों तक गन्नौर पुलिस की काररवाई से संतुष्ट नहीं हुए. वे 28 अक्तूबर, 2022 को एसपी से मिले. फिर भी उन्हें मोनिका के बारे में कोई सूचना नहीं मिल पाई. दूसरी तरफ मोनिका के अपहरण में सुनील का नाम आने से वह नाराज हो गया था. गुस्से में उस ने मोनिका के मौसामौसी के गुमड़ी गांव स्थित घर पर 2 नवंबर, 2022 को काफी हंगामा किया. यहां तक कि उस के आदमियों ने परिवार के सदस्यों पर हमले भी किए. यह सब सीसीटीवी कैमरे में रिकौर्ड हो चुका था.

काफी प्रयास के बाद 16 नवंबर, 2022 को सुनील के खिलाफ मोनिका के अपहरण का केस दर्ज हो पाया. फिर भी उस के खिलाफ पुलिस ने कोई सख्त काररवाई नहीं की, गिरफ्तारी तो दूर की बात थी. आखिरकार मोनिका के परिजनों ने हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज से मिल कर न्याय की गुहार लगाई.

इस का असर यह हुआ कि मोनिका के गायब होने की जांच रोहतक रेंज के आईजी को सौंप दी गई. उन्होंने तुरंत मामले की गंभीरता को देखते हुए मोनिका की तलाशी के लिए सीआईए-2 की टीम को इस मामले की जांच के निर्देश दिए.

घर वालों ने सुनील पर जताया शक

मोनिका की तलाशी के सिलसिले में पुलिस के लिए एकमात्र संदिग्ध सुनील ही था. उस के घर वालों के अलावा गांव के कुछ लोगों ने बताया की मोनिका को अकसर सुनील के साथ देखा गया था. वह उस की गाड़ी से ही कालेज या कोचिंग के लिए दिल्ली जाती थी. वापस भी उसी के साथ आती थी. गांव वालों की निगाह में सुनील उस के साथ बहन का रिश्ता बनाए हुए था. सुनील की लंबी चमकती गाड़ी वीआईपी नंबर की थी, जिसे हर कोई पहचानता था.

पूछताछ से पहले पुलिस ने उस के आपराधिक रिकौर्ड की छानबीन की. पता चला कि सुनील पहले भी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाया गया था. उस के खिलाफ थाना गन्नौर में मारपीट, अवैध हथियार, जान से मारने का प्रयास आदि के 7 मुकदमे दर्ज थे. उस के खिलाफ नया मामला मोनिका के अपहरण का दर्ज हो चुका था, जिस के लिए उसे भादंवि की धारा 365 का आरोपी बनाया गया था.

 

फुटबॉल खिलाड़ी शालिनी की अधूरी प्रेम कहानी – भाग 1

20 फरवरी, 2022 की शाम. समय यही कोई साढ़े 5-6 बजे के आसपास का रहा होगा. जाड़े की शाम थी. वैसे भी जाड़ों में दिन छोटे और रात बड़ी होती हैं. उस समय भी शाम हो चली थी और शाम के धुंधलके ने प्रयागराज हाईकोर्ट के पास स्थित पोलो ग्राउंड और सड़क को अंधेरे में घेर रखा था.

चूंकि यह सड़क वीआईपी है और लोगों का आवागमन लगा रहता है. खासकर सुबह और शाम को वाक करने वालों का. उसी पोलो ग्राउंड में एक बहुत ही पुराना और गहरा कुआं भी है. ठंड के बावजूद उस पुराने कुएं से बदबू आ रही थी, जिस की असहनीय दुर्गंध ने वाक करने वालों और राहगीरों को अपने नथुनों पर रुमाल रख कर चलने पर मजबूर कर दिया था. किसी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर कुछ लोगों ने पोलो ग्राउंड का चक्कर लगाया कि आखिर माजरा क्या है.

चूंकि आर्मी एरिया में स्थित पोलो ग्राउंड बहुत बड़े दायरे में फैला हुआ है, इसलिए बदबू कहां से आ रही है, यह जानने के लिए लोग सब से पहले कुएं के पास गए. कुआं मुख्य सड़क से सिर्फ 10 कदम की दूरी पर था. सब से पहले कुएं के पास ही लोगबाग गए. जैसेजैसे लोग कुएं के पास बढ़ते गए, बदबू उतनी ही तेजी से उन के नथुनों में घुस रही थी.

शक होने पर वहां मौजूद एक वकील साहब ने फौरन 112 नंबर व संबंधित थाना सिविल लाइंस को सूचना दी कि कुएं से लगातार असहनीय दुर्गंध उठ रही है. जरूर उस में किसी की लाश हो सकती है. हमेशा उस कुएं से लाश ही बरामद की गई है, इसलिए उसे मौत का कुआं ही कहते थे. इस बात में या यह कहनेसमझने में जरा भी समय नहीं लगा कि उस कुएं में किसी का काम तमाम कर के उस की लाश फेंक दी गई है.

बहरहाल, सूचना मिलते ही प्रयागराज के थाना सिविल लाइंस की पुलिस और गश्ती गाड़ी पोलो ग्राउंड के अंदर घुसे और जब कुएं के अंदर झांका तो पाया कि एक सफेद रंग का बोरा उस कुएं में (लगभग सूख चुका है कुआं फिर थोड़ाबहुत पानी उस में अब भी हमेशा रहता है) पड़ा था. कुछ ही देर में एसएसपी अजय कुमार और सीओ संतोष सिंह भी वहां पहुंच गए.

कुआं काफी गहरा था. बोरे को निकालने के लिए इंसपेक्टर वीरेंद्र यादव ने फायर ब्रिगेड को फोन कर दिया. फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने कुएं के अंदर एक लंबी सीढ़ी डाली और अपनेअपने मुंह ढक कर उस के अंदर उतरे. जैसेतैसे बोरे को कुएं से बाहर लाया गया. उसे उठाने में जवानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि बोरा काफी वजनी था.

बोरे में निकली लड़की की लाश

जब उस बोरे का मुंह खोला तो उस के अंदर एक युवती की लाश देख कर लोग दंग रह गए. अब जबकि बोरे को कुएं से निकाला जा चुका था तो उस में से और भी तेजी के साथ दुर्गंध चारों तरफ फैलने लगी थी.

युवती ने जींस टीशर्ट और पैरों में जूते पहन रखे थे. उस की लाश देख कर पुलिस ने अंदाजा लगाया कि उस की हत्या कोई एक हफ्ता पहले कर के उस की लाश को ठिकाने लगाने के लिए हाथपैर मोड़ कर उसे बोरे में ठूंसठूंस कर भरा गया था. उस के बाद सुतली और सूजे की मदद से बोरे को सिल कर कुएं में फेंका गया होगा.

पानी में पड़ेपड़े उस युवती की लाश लगभग फूल चुकी थी. चेहरा भी पहचानने में नहीं आ रहा था. सिविल लाइंस पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त करने को कहा, लेकिन वहां मौजूद कोई भी शख्स उसे पहचान पाने में असमर्थ था.

लड़की कौन थी? कहां की रहने वाली थी? यह सब जानने के लिए जब महिला पुलिस ने उस के कपड़ों की तलाशी ली तो उस में कुछ भी नहीं मिला. हां, मृतका की बाईं कलाई पर एक टैटू बना हुआ था और उस पर रवि नाम लिखा हुआ था.

बहरहाल, लाश का पंचनामा भरने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. एसएसपी अजय कुमार ने हत्या के इस मामले को सुलझाने के लिए सीओ संतोष सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में थाना वीरेंद्र सिंह यादव, एसएसआई इंद्रदत्त द्विवेदी, एसआई वजीउल्लाह खान, अरविंद कुमार कुशवाहा, कांस्टेबल राहुल कुमार गोला, राहुल कुमार, महिला कांस्टेबल इंदु आदि को शामिल किया.

अगले दिन कुएं में मिली जवान युवती की लाश की खबर शहर के सभी अखबारों में छपी और साथ ही उस की कलाई पर बने टैटू पर रवि नाम गुदे होने का जिक्र किया गया तो पुलिस को उस की शिनाख्त के लिए ज्यादा भागदौड़ की जरूरत नहीं पड़ी.

मृतका निकली राष्ट्रीय स्तर की फुटबाल खिलाड़ी

प्रयागराज के ही थाना शिवकुटी के मोहल्ला शिलाखाना में रहने वाले राजेंद्र प्रसाद ने अगले दिन यानी 21 अप्रैल को जब अखबार में यह पढ़ा कि एक जवान युवती की डेडबौडी पोलो ग्राउंड के अंदर पुराने कुएं से थाना सिविल लाइंस पुलिस ने बरामद की है, उस के हाथ पर बने टैटू पर ‘रवि’ नाम लिखा हुआ है तो वह थाने पहुंचे और इंसपेक्टर वीरेंद्र यादव से मिले.

वीरेंद्र यादव से उन्होंने डेडबौडी देखने की इच्छा जाहिर की तो बिना एक पल गंवाए इंसपेक्टर ने उन्हें अपने मातहतों के साथ पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया.

लाश के चेहरे से जब कफन हटाया गया तो उस के पिता और परिजन फफकफफक कर रोने लगे. शव की शिनाख्त हो चुकी थी. मृतका का नाम शालिनी धुरिया उर्फ रोली था. उस के पिता राजेंद्र प्रसाद, मां व भाईबहन ने उसे पहचान लिया. घर वाले यह जान कर हैरान थे कि शालिनी तो गुड़गांव में नौकरी कर रही थी तो प्रयागराज कब आ गई.

शालिनी पूरे परिवार की लाडली थी. उस की हत्या से घर वालों का रोरो कर बुरा हाल था. पेशे से ईरिक्शा ड्राइवर राजेंद्र प्रसाद के 4 बच्चों में सब से बड़ी बेटी श्रद्धा, उस से छोटी शालिनी उर्फ रोली व उस से छोटे भाई बहन अंकित और स्वाति थे.

बहरहाल, उस के अंतिम संस्कार के बाद घर वालों से, खासकर शालिनी के पिता से जब यह पूछा गया कि उस की कलाई पर जो रवि नाम लिखा हुआ है, वह कौन है? शालिनी का उस से क्या संबंध है? शालिनी यहां से पहले कहां रहती थी?

पुलिस को इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी था, तभी वह शालिनी के हत्यारों तक पहुंच सकती थी. पूछताछ के दौरान शालिनी के पिता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि रवि उन की बेटी का दोस्त है.

‘‘उस का आप के घर भी आनाजाना था?’’ इंसपेक्टर वीरेंद्र यादव ने पूछा.

उन्होंने बताया कि शालिनी बहुत होनहार थी. वह राष्ट्रीय स्तर की फुटबाल प्लेयर थी. परिवार की माली हालत को देखते हुए 2021 में दूसरे लौकडाउन के खत्म होने के बाद वह नवंबर महीने में गुड़गांव चली गई थी. और एक प्राइवेट कंपनी में जौब करने लगी थी.

कनाडा से बुला कर शादी, फिर हत्या – भाग 1

मूलरूप से हरियाणा के रोहतक की रहने वाली मोनिका बेहद खूबसूरत थी. लेकिन फिलहाल अपने मम्मीपापा के साथ सोनीपत के गांव गुमड़ी में रह रही थी. वह दिल्ली विश्वविद्यालय में बीए की छात्रा थी. क्लास के लिए वह गुमड़ी से बस से दिल्ली आतीजाती थी.

छुट्टी के दिनों को छोड़ कर करीब 40 किलोमीटर का सफर वह अकेली तय करती थी. उस पर पढ़ाई का भूत सवार था. वह फाइनल ईयर में थी. आगे वह सीधे विदेश में जा कर पढ़ाई करने का मन बना चुकी थी. वहां मैनेजमेंट का कोई अच्छा कोर्स करने की महत्त्वाकांक्षा थी. उस की तमन्ना पूरी करने के लिए 2 परिवारों का साथ भी मिला हुआ था.

उन में एक उस के अपने मम्मीपापा का परिवार था और दूसरा परिवार उस के मौसामौसी का भी था, जहां वह रहती थी. वह 2 मौसेरे भाइयों की दुलारी, प्यारी इकलौती बहन थी. उस की मौसी ने उस की मां से मांग कर अपनी बेटी का नाम दे दिया था.

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. मोनिका बीए की पढ़ाई के साथसाथ आइलेट्स अर्थात इंटरनैशनल इग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम कंप्यूटर के लिए कोचिंग भी कर रही थी. इस तरह से उस पर पढ़ाई का काफी बोझ था. ऊपर से बस से थका देने वाला सफर भी तय करना होता था.

एक बार कालेज जाते समय उसे अमीर नौजवान सुनील ने देख लिया था. वह बस में थी, जबकि सुनील अपनी महंगी गाड़ी में था. दोनों की मंजिल दिल्ली की तरफ ही थी. दरअसल, सुनील उस की मौसी का पड़ोसी था और वह अपनी भाभी की बदौलत उसे जानतापहचानता था. उसे अपने बिजनैस के सिलसिले में गुडग़ांव और दिल्ली नियमित जाना होता था.

उस के बारे में पड़ोसी भाभी सोनिया ने बताया था. साथ ही सुझाव दिया था कि वह चाहे तो बस के बजाय उस की गाड़ी से दिल्ली जा सकती है. उसे कोई आपत्ति नहीं होगी. हालांकि मोनिका ने इस तरह से किसी का एहसान लेना ठीक नहीं समझते हुए बस से ही आनाजाना रखा. एक दिन सुनील उर्फ शिल्ला अपनी गाड़ी से जाते हुए मोनिका से टकरा गया.

संयोग से उस दिन मोनिका जिस बस में सवार थी, उस में कुछ खराबी आ गई थी और सभी यत्रियों के साथ वह भी सडक़ के किनारे दूसरी बस के इंतजार में थी. बेचैन और चिंतित मोनिका से एक सहयात्री महिला कंधे पर हाथ रख कर बताया कि उधर पीछे की गाड़ी से कोई आवाज दे कर उसे बुलाने का इशारा कर रहा है.

मोनिका ने उस ओर देखा, तब तक एक कार उस के पास आ कर ही रुक गई थी. दूसरी तरफ ड्राइविंग सीट पर बैठे युवक ने अपना परिचय सुनील के रूप में दिया और उसे गाड़ी में बैठने को कहा. मोनिका हिचकिचाई. उस के कुछ बोलने से पहले ही सुनील ने मोबाइल फोन का स्पीकर औन कर उस के सामने कर दिया. दूसरी तरफ से आवाज आ रही थी. ‘‘हैलो, सुनील, बोलो क्या बात है?’’

“भाभीजी, मोनिका से बात कीजिए…’’

“मोनिका…तुम्हारे पास?’’ उधर से चिंतातुर आवाज आई.

“जी भाभी, उस की बस खराब हो गई है, दूसरी बस का इंतजार कर रही है. मैं उसे अपनी गाड़ी में लिफ्ट देने के लिए बोल रहा हूं, लेकिन वह हिचकिचा रही है. शायद मुझे नहीं पहचानती है.’’ सुनील बोला.

दूसरी तरफ से उस की भाभी सोनिया की आवाज आई, ‘‘अरे उसे फोन तो दो, मैं बात करती हूं. तुम्हारे बारे में बताती हूं.’’

“फोन का स्पीकर औन है, आप बोलिए वह सुन रही है.’’ सुनील बोला. तब तक मोनिका भी सोनिया की आवाज पहचान चुकी थी. वह बोली, ‘‘भाभीजी नमस्ते, आप ने इन के बारे में ही बताया था क्या?’’

“अरे हां मोनिका. यही तो मेरा प्यारा देवर है. बहुत अच्छा लडक़ा है. तुम्हें अपनी गाड़ी से कालेज तक छोड़ देगा. साथ चली जाओ. कोई चिंता की बात नहीं है. समझो, जैसा तुम्हारा भाई विकास वैसा ही सुनील.’’ सोनिया उसे समझाती हुई बोली. तब तक सुनील गाड़ी का गेट खोल चुका था. एक हाथ से साथ वाली सीट पर रखी फाइल और डायरी को आगे डैशबोर्ड पर रखते हुए बैठने के लिए इशारा कर दिया. मोनिका तब तक आश्वस्त हो चुकी थी और पीठ से अपना बैग उतार कर गाड़ी में बैठ गई.

पहली मुलाकात का हुआ दिल पर असर

इस तरह से मोनिका और सुनील की पहली मुलाकात हुई थी. कुछ समय तक दोनों शांत बैठे रहे. थोड़ी देर में बातचीत का सिलसिला सुनील ही शुरू करते हुए बोला, ‘‘मोनिकाजी, मैं आप को अच्छी तरह जानता हूं. शायद आप मुझे नहीं पहचानती हैं, इसलिए गाड़ी में बैठने से झिझक रही थीं. मैं आप के मौसामौसी के पड़ोस में रहता हूं. सुबहसुबह ही काम के सिलसिले में दिल्ली एनसीआर को निकल पड़ता हूं. आप को मैं ने कई बार पैदल जाते हुए और बस का इंतजार करते देखा था. सोचता था कि आप को साथ लेता चलूं, लेकिन मैं यही सोच कर नहीं बोल पाता था कि आप कुछ गलत न समझ लें…’’

मौन बनी मोनिका सुनील की बात सुन रही थी. गाड़ी अपनी गति से सडक़ पर अपनी लेन में चल रही थी. सुनील बोला, ‘‘आप चाहें तो लौटते वक्त मुझे फोन कर दीजिएगा. मैं उधर से भी आप को साथ ले लूंगा. मेरा फोन नंबर नोट कीजिए 97xxxxxxxx’’ सुनील फोन नंबर बोलने लगा.

मोनिका बगैर कुछ बोले, अपने मोबाइल पर उस का नंबर टाइप करने लगी. तुरंत उसी नंबर पर उस ने काल भी कर दी. सुनील के मोबाइल पर इनकमिंग काल आ चुकी थी.

“आप का नंबर है? लास्ट डिजिट 34 है न?’’ सुनील ने कहा.

“जी…मुझे हुडा सिटी सेंटर मेट्रो पर उतार दीजिएगा. वहां से यूनिवर्सिटी की मेट्रो ले लूंगी.’’ मोनिका बोली.

“ठीक है, वापसी भी वहीं से होगी न? मुझे काल कर देना मैं मेट्रो के पास आ जाऊंगा.’’

“देखती हूं…’’

इस तरह से मोनिका और सुनील की पहली जानपहचान से अच्छी दोस्ती में बदलने में ज्यादा देर नहीं लगी. उन की अकसर मुलाकातें होने लगीं. मोनिका और सुनील साथ गाड़ी में आनेजाने लगे. समय बचता तो वे गुडग़ांव के किसी काफी होम या रेस्टोरेंट में कुछ समय साथ भी गुजारने लगे थे.

यह कहना गलत नहीं होगा कि दोनों के दिल में प्रेम अगन सुलग चुकी थी. कुंवारे और अमीर सुनील को पा कर मोनिका अच्छे भविष्य के सपने देखने लगी थी. उसे एहसास होने लगा था कि उस ने विदेश में पढ़ाई करने के जो सपने देखे हैं, उसे पूरा करने में सुनील की मदद उसे अवश्य मिलेगी.

 

बदनामी का डर : प्रेमी बना ब्लैकमेलर – भाग 3

साहिल ने तुरंत इस घटना की सूचना अपने ससुर बृजभूषण और साले गौरव को दी. लगभग 2 घंटे बाद श्वेता के घर वाले रिश्तेदारों और परिचितों के साथ जगराओं आ पहुंचे. उन लोगों ने साहिल या उस के घर वालों की कोई बात सुने बिना ही हंगामा करना शुरू कर दिया.

थाना सिटी को भी घटना की सूचना दे दी गई थी. थाना सिटी के थानाप्रभारी दलजीत सिंह सिद्धू, एसआई मलकीत सिंह एएसआई बलदेव सिंह, हेडकांस्टेबल कुलदीप सिंह, गुरदियाल सिंह, बलजिंदर कुमार, कांस्टेबल जसविंदर सिंह के साथ अस्पताल पहुंच गए थे.

लाश कब्जे में ले कर उन्होंने आगे की काररवाई शुरू कर दी. दलजीत सिद्धू ने श्वेता की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवानी चाही तो उस के मायके वालों ने हंगामा खड़ा कर दिया.  उन का कहना था कि श्वेता कोठी की छत से खुद नहीं कूदी, बल्कि साहिल और उस के मांबाप ने दहेज के लिए उसे छत से धकेल कर मारा है. जब तक उन लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक वे लाश नहीं ले जाने देंगे.

श्वेता के घर वालों की मदद के लिए कुछ स्थानीय नेता और समाजसेवी भी आ गए थे. वे पुलिस वालों को धमकी दे रहे थे कि अगर दोषियों के खिलाफ काररवाई नहीं की जाती तो वे धरनाप्रदर्शन के साथ बाजार बंद करवा देंगे. हंगामा चल ही रहा था कि डीएसपी सिटी सुरेंद्र कुमार भी घटनास्थल पर आ गए.

थानाप्रभारी दलजीत सिद्धू ने मौके की नजाकत देखते हुए इस घटना को अपराध संख्या 62/2014 पर भादंवि की धारा 304बी/34 के अंतर्गत साहिल, उस के पिता अशोक कुमार सिंगला और मां कुसुम सिंगला के खिलाफ दर्ज करा दिया. यह 11 मार्च, 2014 की बात है. थानाप्रभारी दलजीत सिंह सिद्धू ने उसी दिन श्वेता की लाश का पोस्टमार्टम करा कर लाश मोर्चरी में रखवा दी. अगले दिन यानी 12 मार्च को श्वेता की लाश का एक्सरे करवाया गया.

13 मार्च को श्वेता की हत्या के आरोप में साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया. साहिल की गिरफ्तारी के बाद श्वेता के मायके वाले कुछ शांत हुए. 14 मार्च को उसे डयूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर के 18 मार्च तक के लिए रिमांड पर लिया गया.

थानाप्रभारी दलजीत सिंह सिद्धू ने साहिल को अदालत में पेश करने से पहले 13 मार्च को ही उस की निशानदेही पर श्वेता का मोबाइल फोन और लैपटौप उस के घर से बरामद कर लिया था.  पुलिस ने श्वेता का फोन चैक किया तो पता चला कि घटना वाले दिन यानी 10 मार्च को श्वेता के नएपुराने, दोनों नंबरों पर 2 नंबरों  से 163 बार फोन आए थे तो उन्हीं नंबरों से 193 मैसेज किए गए थे.

पुलिस ने उन दोनों नंबरों के बारे में पता किया तो वे नंबर लुधियाना के हितेश जिंदल के निकले. इस के बाद जब थानाप्रभारी दलजीत सिंह सिद्धू ने श्वेता के लैपटौप को खंगाला तो उस में उन्हें श्वेता और हितेष की अनगिनत अर्धनग्न अश्लील तसवीरें भरी पड़ी मिलीं. श्वेता के मोबाइल फोन और लैपटौप को चैक करने के बाद सारा मामला साफ हो गया.

एक एसएमएस में श्वेता ने हितेश को लिखा था, ‘तुम मुझे परेशान मत करो. मैं इस दुनिया से बहुत दूर जा रही हूं, मेरे जाने के बाद तुम्हारे मन में जो आए कर लेना, जितनी मरजी हो मेरी बदनामी करा देना.’

इस एसएमएस के जवाब में हितेश ने लिखा था, ‘हिम्मत है तो मर के दिखा.’

दरअसल, घटना वाले दिन यानी 10 मार्च को 163 बार फोन कर के और 193 बार एसएमएस कर के हितेश ने श्वेता को पूरी तरह से बदनाम करने की जो धमकियां दी थीं, उस से वह बुरी तरह डर गई थी. हितेश उसे तुरंत साहिल से रिश्ता खत्म करने के लिए कह रहा था. वह यह भी कह रहा था कि अगर वह बात नहीं कर सकती तो वह स्वयं फोन कर के साहिल से बात कर लेता है.

जबकि श्वेता ऐसा करने से उसे मना कर रही थी. श्वेता के बारबार मना करने के बावजूद भी हितेश ने रात 1 बजे के करीब साहिल को फोन कर के अपने संबंधों की बात बता दी थी. यही नहीं, उस ने साहिल से गालीगलौज भी की थी. इस पर साहिल ने उस की बातों का बुरा नहीं माना और सुबह बात करने को कह कर फोन काट दिया था.

साहिल ने सोचा था कि सुबह वह कुछ बड़ेबूढ़ों को ले जा कर हितेश को समझा देगा. क्योंकि उन के बीच रिश्तेदारी भी थी. एक तरह से साहिल हितेश के बहनोई का बहनोई था. रात में साहिल ने श्वेता से भी कोई बात नहीं की थी. लेकिन श्वेता ने साहिल और हितेश के बीच होने वाली बातें सुन ली थीं. तब बदनामी के डर से उस ने आत्महत्या कर ली थी.

23 मार्च को पुलिस ने फोन और लैपटौप में मिले सुबूतों को अदालत में पेश कर के स्थानीय जज गुरबीर सिंह की अदालत में साहिल को निर्दोष बताते हुए श्वेता को आत्महत्या के लिए विवश करने के लिए हितेश जिंदल को आरोपी बनाने की अपील की.

साहिल के वकील अशोक भंडारी ने भी श्वेता के घर वालों के अलावा अन्य लोगों के दर्ज बयान, लैपटौप से मिली श्वेता और हितेश की अश्लील तसवीरें तथा फोन में मिले तमाम रिकौर्ड अदालत में पेश किए थे. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और सुबूत देखने के बाद साहिल को इस केस से मुक्त कर हितेश को आरोपी बना कर जल्द से जल्द उसे गिरफ्तार करने के आदेश दिए. हितेश अपनी पत्नी हिना के साथ उसी दिन घर से फरार हो गया था, जिस दिन श्वेता ने आत्महत्या की थी.

5 मई, 2014 को हितेश ने लुधियाना की सैशन जज सुरेंद्रपाल कौर की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया, जिसे उन्होंने अगले दिन खारिज कर दिया था. हितेश की तलाश में पुलिस रातदिन छापे मार रही थी. लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लग रहा था. श्वेता ने अपनी एक गलती से अपना घर तो बरबाद किया ही, बेटे को भी बिना मां के कर दिया.

_हरमिंदर खोजी / संजीव मल्होत्रा

बदनामी का डर : प्रेमी बना ब्लैकमेलर – भाग 2

हितेश श्वेता के भाई गौरव की पत्नी चेतना के मामा जुगल किशोर जिंदल का बेटा था. वह अपने चाचा पवन कुमार जिंदल के साथ लुधियाना की न्यू फे्रंड्स कालोनी में जिंदल प्रौपर्टी के नाम से प्रौपर्टी का व्यवसाय करता था. श्वेता की तरह वह भी शादीशुदा था. श्वेता की ही तरह वह भी पत्नी से खुश नहीं था.

हितेश की पत्नी हिना लुधियाना की ही रहने वाली थी. श्वेता भी पति से खुश नहीं थी, शायद यही वजह रही कि शादीशुदा होने के बावजूद श्वेता और हितेश पहली ही मुलाकात में एकदूसरे से इस तरह प्रभावित हुए कि एकदूसरे को दिल दे बैठे. शादी के माहौल में साहिल जहां रिश्तेदारों और अन्य कामों में व्यस्त था, वहीं श्वेता हितेश से परिचय बढ़ाने में लगी थी. रिश्तेदारी हो ही गई थी, इसलिए दोनों ने अपनेअपने मोबाइल नंबर एकदूसरे को दे दिए थे.

साहिल तो अगले दिन जगराओं वापस आ गया, पर श्वेता कुछ दिनों के लिए मायके में रुक गई. मौका मिलते ही उस ने हितेश को फोन किया. दूसरी ओर हितेश उस से मिलने के लिए उतावला बैठा था. उस ने श्वेता को मिलने के लिए एक होटल में बुला लिया.

श्वेता ने हितेश के सामने अपने मन की बात रखी तो हितेश ने भी उस से अपने मन की बात बता दी. दोनों ही एकदूसरे की बातों से सहमत थे, इसलिए सारे रिश्तेनाते और अपनीअपनी मर्यादाएं भूल कर उन्होंने होटल के उस एकांत में सारी सीमाएं तोड़ दीं. उन्होंने वहां एक ऐसा रिश्ता कायम कर लिया, जो समाज की नजरों में अवैध था.  लेकिन इस की परवाह न श्वेता को थी और न ही हितेश को. दोनों बेझिझक एकदूसरे से मिलने लगे. कभी हितेश जगराओं चला जाता तो कभी श्वेता लुधियाना आ जाती.

उन का यह खेल बिना किसी रोकटोक के चल रहा था. जब श्वेता रोजरोज लुधियाना जाने लगी तो साहिल ने पूछ लिया कि वह रोजरोज लुधियाना क्यों जाती है? तब उस ने कहा कि उस के सिर में दर्द रहता है, उसी के चैकअप और इलाज के लिए वह लुधियाना जाती है. सीधेसादे साहिल ने उस की बात पर विश्वास कर लिया और संतुष्ट हो कर चुप बैठ गया. क्योंकि उसे पूरा विश्वास था कि एक संभ्रांत परिवार की बहू कोई ऐसा काम कतई नहीं करेगी, जिस से उस की बदनामी हो.

लेकिन यह भी सच है कि पाप कितना भी छिपा कर क्यों न किया जाए, एक न एक दिन उजागर हो ही जाता है. इस का मतलब यही हुआ कि पाप का घड़ा अवश्य फूटता है. वजह चाहे जो भी हो, ऐसा ही श्वेता और हितेश के साथ भी हुआ. दोनों के संबंधों को अब तक लगभग एक साल हो चुका था.

इधर कुछ दिनों से श्वेता को लगता था कि हितेश अपनी सीमाएं लांघने लगा था. वह जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ रहा था. वह उस पर इस तरह अधिकार जताने लगा था जैसे उस का पति हो. यही नहीं, हितेश श्वेता से कहने लगा था कि वह साहिल से उस के और अपने संबंधों के बारे में बता कर उस से तलाक ले ले और उस से शादी कर ले. लेकिन श्वेता इस के लिए कतई तैयार नहीं थी.

उस ने हितेश से संबंध अपनी इच्छापूर्ति के लिए बनाए थे. इस के लिए वह हितेश का पूरा खर्च भी उठा रही थी. लेकिन हितेश अब जो चाह रहा था, वह उसे कभी नहीं पूरा कर सकती थी. क्योंकि इस में 2 परिवारों की इज्जत तो जुड़ी ही थी, साहिल और उस की हैसियत में भी बहुत अंतर था. हितेश की हरकतों से तंग आ कर श्वेता ने उस से मिलना बंद कर दिया. तब वह उसे फोन कर के साहिल से तलाक लेने के लिए कहने लगा. अब श्वेता को लगा कि उस से बहुत बड़ी गलती हो गई है.

श्वेता को गलती का अहसास हुआ तो पछतावा भी होने लगा. अब वह उस से संबंध खत्म करना चाहती थी, लेकिन हितेश उसे मजबूर करने लगा था. वह उसे धमकी देने लगा था कि अगर उस ने उस की बात नहीं मानी तो वह साहिल से अपने और उस के संबंधों के बारे में सबकुछ बता देगा.

हितेश के डर से श्वेता अपना पुराना नंबर अकसर बंद रखने लगी. बातचीत के लिए नया नंबर ले लिया. लेकिन हितेश ने उस का नया नंबर भी पता कर लिया.

8 मार्च, 2014 को भी हितेश ने श्वेता के नए नंबर पर फोन कर के धमकी दी थी कि अगर उस ने जल्दी कोई फैसला नहीं लिया तो वह जगराओं आ कर साहिल को सब साफसाफ बता देगा. हितेश की इस धमकी से श्वेता बेचैन हो उठी थी. उस ने हितेश को न जाने कितना समझाया कि उन के बीच जो भी जिस तरह चल रहा है, उसे वैसा ही चलने दे. वह जो चाहता है, वह न ठीक है और न संभव. उस से कई घर बरबाद हो जाएंगे.

लेकिन हितेश उस की बातों को हंसी में उड़ा कर अपनी जिद पर अड़ा रहा. इस से श्वेता और अधिक परेशान रहने लगी थी. उस की परेशानी को साहिल ने ताड़ तो लिया था लेकिन वजह नहीं जान पाया था. उस ने सोचा कि वह श्वेता को समय नहीं दे पाता, शायद इसीलिए वह परेशान रहती है. तभी उस ने 10 मई को बाहर किसी होटल में चल कर डिनर लेने के लिए कहा था.

साहिल वादे के अनुसार शाम को समय से पहले घर आ गया था. श्वेता ने सासससुर के लिए खाना बना कर रख दिया था, इसलिए साहिल के आते ही वह उस के साथ निकल गई थी. साहिल उसे जगराओं के मशहूर होटल स्नेहमून में डिनर के लिए ले गया.

श्वेता साहिल के साथ होटल डिनर ले रही थी, तब भी हितेश बारबार श्वेता को फोन कर के धमकी दे रहा था. परेशान हो कर श्वेता ने अपना फोन बंद कर दिया था. रात के 12 बजे के करीब पतिपत्नी खाना खा कर लौटे. साहिल काफी थका हुआ था, इसलिए लेटते ही सो गया. जबकि चिंता और बेचैनी की वजह से श्वेता को नींद नहीं आ रही थी.

हितेश उतनी रात को भी श्वेता को फोन कर रहा था. श्वेता की समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह इस मुसीबत से कैसे छुटकारा पाए. बातचीत से श्वेता समझ गई थी कि हितेश काफी नशे में है. नशे में ही होने की वजह से ही शायद वह उसे और ज्यादा परेशान कर रहा था. उस स्थिति में उसे रोका भी नहीं जा सकता था.

कोई उपाय नहीं सूझा तो श्वेता ने फोन का स्विच औफ कर दिया और आंखें बंद कर के बेड पर साहिल के बगल लेट गई. इस के बाद रात 1 बजे के करीब साहिल के फोन पर किसी का फोन आया. साहिल ने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से जो भी कहा गया, उसे सुन कर साहिल ने सिर्फ यही कहा, ‘‘रात बहुत हो चुकी है. अभी सो जाओ. इस विषय पर कल सुबह बात करेंगे.’’

फोन रख कर साहिल ने करवट ली तो बगल में श्वेता नहीं थी. उसे लगा, सीढि़यों पर कोई जा रहा है. वह उठ कर सीढि़यों की ओर गया. वहां कोई नहीं था. उसे ऊपर का दरवाजा खुला दिखाई दिया तो वह तेजी से ऊपर की ओर बढ़ा.

छत पर पहुंच कर साहिल ने देखा श्वेता छत की मुंडेर पर चढ़ कर नीचे कूदने की तैयारी कर रही थी. वह ‘श्वेता… श्वेता’ चिल्लाते हुए उसे बचाने के लिए उस की ओर दौड़ा. वह श्वेता के पास पहुंच पाता, उस से पहले ही श्वेता ने छलांग लगा दी. एक जोरदार चीख वातावरण में गूंजी, उस के बाद सब खत्म हो गया.

साहिल जहां था, वहीं घबरा कर रुक गया. जल्दी ही उस ने स्वयं को संभाला और नीचे की ओर भागा. चीख सुन कर साहिल के मातापिता ही नहीं, पड़ोसी भी जाग गए थे. लोग निकल कर बाहर आ गए. श्वेता जमीन पर पड़ी थी. पड़ोसियों की मदद से साहिल ने उसे कल्याणी अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

आगे क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें कहानी का अगला भाग…