शराफत का इनाम – भाग 3

करीमभाई को कुछ सालों पहले ऐनजाइमा की तकलीफ हुई थी. डाक्टर ने उन्हें जुबान के नीचे रखने वाली गोली दी थी. उन्होंने कांपते हाथों से गोली जुबान के नीचे रखी. आंखें बंद कर के गहरीगहरी सांसें लेने लगे. थोड़ी तबीयत संभली तो घर के लिए रवाना हो गए.

‘‘क्या बात है, आप कुछ परेशान से लग रहे हैं?’’ रूमाना ने उन के घर पहुंचते ही पूछा.

‘‘हां, कुछ परेशानी है. तुम बहुत खुश लग रही हो?’’

‘‘हां, खबर ही खुशी की है. लेकिन पहले आप बताइए कि क्यों परेशान हैं?’’

करीमभाई कुछ देर टहलते रहे, उस के बाद सोच कर बोले, ‘‘आज हारुन हमारे औफिस में आया था.’’

‘‘हारुन आया था?’’ रूमाना ने हैरानी से पूछा. इस के बाद बिफर कर बोली, ‘‘आप ने उसे औफिस से निकलवा क्यों नहीं दिया?’’

‘‘मैं यही करता, लेकिन रूमाना, तुम यह बताओ कि हारुन ने तुम्हें जबानी तलाक दिया था या लिख कर दिया था?’’

‘‘जबानी दिया था. मगर इस से क्या फर्क पड़ता है. तलाक तो तलाक है, जबानी दे या लिख कर दे. तलाक तो हो जाता है.’’ वह सादगी से बोली. करीमभाई ने सिर पर हाथ मार कर कहा, ‘‘तुम बड़ी मासूम हो. तुम्हें नहीं मालूम कि आजकल जमाना कितना खराब हो गया है. अगर तुम्हारे पास कोई सुबूत नहीं है तो अदालत में यही माना जाएगा कि उस ने तुम्हें तलाक नहीं दिया है.’’

रूमाना हैरान रह गई, ‘‘आप…आप का मतलब है कि वह कमीना आदमी 4 साल बाद यह दावा ले कर आया है कि तलाक नहीं हुआ है.’’

‘‘हां, उस के पास निकाहनामे की कौपी है. रजिस्ट्रार औफिस की रजिस्टर्ड कौपी है.’’ यह कह कर निकाह की कौपी रूमाना के हाथ में दे दी, जो हारुन छोड़ कर गया था.

‘‘बकवास करता है कमबख्त.’’ रूमाना ने गुस्से से निकाहनामा फाड़ कर फेंक दिया. इस के बाद गुस्से से कांपते हुए बोली, ‘‘कोई संबंध नहीं है हारुन से मेरा, मैं आप की बीवी हूं.’’ कह कर रूमाना रोने लगी.

‘‘मैं जानता हूं.’’ करीमभाई ने कहा और रोती हुई रूमाना को सीने से लगा कर चुप कराने लगे.

‘‘आज मैं आप को एक खुशखबरी सुनाने वाली थी कि यह मनहूस खबर आ गई.’’

‘‘कैसी खुशखबरी?’’ सेठ करीमभाई ने पूछा.

रूमाना ने शरमाते हुए कहा, ‘‘मैं मां बनने वाली हूं. आज ही मैं डाक्टर के पास गई थी.’’

करीमभाई खुश हो गए. उन्होंने बड़े विश्वास के साथ कहा, ‘‘अब तुम फिक्र मत करो, मैं सारा मामला निपटा लूंगा.’’

‘‘आप क्या करेंगे? पुलिस में जाएंगे?’’

‘‘नहीं, पुलिसअदालत में जाने से मामला बिगड़ जाएगा. मेरे पास एक तरीका है, मैं उस का मुंह बंद कर दूंगा.’’

बाद में हारुन ने रूमाना को फोन कर के कहा, ‘‘तुम ने अपनी भूमिका बहुत अच्छी तरह अदा की है. बच्चे के बारे में सुन कर बुड्ढा तो दीवाना हो गया होगा?’’

‘‘हां हारुन, लेकिन मुझे डर लग रहा है. उस ने कहा है कि उस के पास उस का मुंह बंद करने का एक तरीका है.’’

‘‘अरे वह रकम दे कर मुंह बंद कराने की बात कर रहा होगा.’’ हारुन ने कहा.

‘‘नहीं, सोचो वह अरबपति है. उस के पास दौलत की ताकत है. अगर उस ने इस ताकत को तुम्हारे खिलाफ इस्तेमाल किया तो..? मैं ने 2 बार पूछा कि कौन सा तरीका है तो उस ने कोई जवाब नहीं दिया. रकम की बात होती तो वह मुझ से जरूर बता देता.’’

रूमाना की इस बात से हारुन परेशान हो गया. इस से पहले उन्होंने जिन 5 लोगों को इसी तरह फांसा था, उन में से कोई भी इतना दौलतमंद नहीं था.

वैसे तो करीमभाई देखने में बहुत शरीफ था, दौलत का इस्तेमाल कर के पुलिस को मिलाने और किराए के किलर की व्यवस्था करने में उसे कोई परेशानी नहीं होगी. उस के पास कई औप्शन थे. हारुन बुनियादी तौर पर बुजदिल आदमी था. उस ने रूमाना से पूछा, ‘‘तुम क्या सोचती हो?’’

‘‘मेरी सलाह तो यही है कि अब तुम उस के सामने मत जाना. फोन पर बात करो और यह सिम बंद कर दो या जब बात करनी हो तभी चालू करो, क्योंकि यह सिम तुम्हारे नाम है. वह तुम्हें ब्लैकमेलिंग में फंसा सकता है. एक बात और याद रखना हारुन, तुम ने वादा किया था कि यह आखिरी बार है. इस के बाद हम बाहर चले जाएंगे.’’

हारुन ने एक बार फिर वही यकीन दिलाया, जो पहले भी कई बार दिला चुका था. वह चालबाज, शातिर आदमी था. उस का और रूमाना का 7 साल से ज्यादा का साथ था.

दोनों ने घर से भाग कर शादी की थी. रूमाना एक बहुत अच्छे खानदान की लड़की थी, लेकिन कमउम्र में मोहब्बत के जज्बात में आ कर उस के साथ भाग गई थी और शादी कर ली थी. रूमाना के घर वाले हारुन को बिलकुल नहीं पसंद करते थे. हारुन को घरगृहस्थी में कोई दिलचस्पी नहीं थी. उस का मकसद बस दौलत कमाना और अय्याशी करना था.

दोनों कई शहरों में रहे और हर जगह इसी तरह चक्कर चला कर कई लोगों को ब्लैकमेल किया. रूमाना मजबूर थी. वह घर भी वापस नहीं जा सकती थी. घर जाने पर उस के दोनों भाई उसे जिंदा जला देते.

हारुन ने रूमाना को जिस रास्ते पर चलाया था, वह उस पर चलने को मजबूर थी. इसी वजह से उन्होंने काफी दौलत जमा कर ली थी. इस के अलावा भी हारुन उल्टेसीधे तरीकों से पैसे कमाता रहता था. ऐसे कामों में रूमाना उस का साथ देतेदेते तंग आ चुकी थी. यह भी कह सकते हैं कि वह थक चुकी थी. उस का कहना था कि यह आखिरी बार है, इस के बाद वे बाहर चले जाएंगे.

करीमभाई लगातार कोशिश कर रहे थे, लेकिन हारुन का नंबर नहीं लग रहा था. वह लगातार बंद बता रहा था. उस ने 2 दिन का समय दिया था. एक ही दिन उन के पास था. वह सोच रहे थे कि हारुन न जाने कितनी रकम पर राजी होगा? काम में उन का मन बिलकुल नहीं लग रहा था. उन्होंने फाइलें बंद कर दीं. बारबार उन का ध्यान मोबाइल पर जा रहा था. इस के पहले वह कभी इतना परेशान नहीं हुए थे.

कहां खुशी मनाने का मौका था और वह परेशान थे. फोन की घंटी बजी तो उन्होंने लपक कर उठाया. लेकिन यह रूमाना का फोन था. उस ने पूछा, ‘‘हारुन का कोई फोन आया? मुझे डर लग रहा है.’’

‘‘तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है, मैं सब संभाल लूंगा. अगर घी सीधी अंगुली से नहीं निकला तो मुझे अंगुली टेढ़ी करना भी आता है. मुझे पता है कि मुझे क्या करना है.’’ करीमभाई ने दृढ़ता से कहा.

रूमाना ने धीरे से कहा, ‘‘शादी के बाद मैं बहुत खुश थी. खुद को बहुत महफूज समझ रही थी, लेकिन यह बखेड़ा खड़ा हो गया.’’

‘‘तुम बिलकुल फिक्र मत करो, सब ठीक हो जाएगा.’’

शराफत का इनाम – भाग 2

उस ने 3 साल बड़ी मुश्किल से गुजारे. इस के बाद एक दिन हारुन ने उसे नशे में तलाक दे दिया. उस के तलाक को चार साल हो चुके थे. अभी उस की उम्र 30 साल थी. एक ही रिश्तेदार डैडी थे, 4-5 साल पहले उन का भी इंतकाल हो गया. डैडी काफी कुछ छोड़ गए थे. जिंदगी आराम से गुजर रही थी. खाने के बाद उस ने ग्रीन टी बनाई, जो करीमभाई को बहुत पसंद आई. वैसे भी वह बस ग्रीन टी ही पीते थे.

खुशीखुशी घर पहुंच कर करीमभाई रूमाना के खयालों में डूबे रहे. औरत जब खुद बढ़ती है तो मर्द की हिचक खत्म हो जाती है. तीसरी मुलाकात में बात शादी तक पहुंच गई. रूमाना ने कहा कि पहले तजुर्बे के बाद उसे शादी से डर लगने लगा था. कई लोग उस की तरफ बढ़े, पर वही पीछे हट गई. उस ने स्वीकार किया कि उन्होंने उस के दिल पर दस्तक दी और उसे वह बहुत भले इंसान लगे.

रूमाना ने शादी के लिए हां कर दी. शादी बहुत साधारण तरीके से हुई. करीमभाई के बच्चे और कुछ दोस्त ही शामिल हुए. रूमाना सिर्फ हसीन ही नहीं, बल्कि बहुत समझदार और मोहब्बत करने वाली बीवी साबित हुई.

नौकरानी के साथ मिल कर खाना वगैरह खुद पकाती. करीमभाई का खयाल था कि रूमाना शादी के बाद कुछ शर्तें रखेगी या सिक्योरिटी के लिए कुछ खास रखने को कहेगी. लेकिन उस ने न कुछ मांगा, न कुछ कहा. करीमभाई ने मेहर 10 लाख रखा था, जो मुंह दिखाई से पहले दे दिया. उसे जो अंगूठी पहनाई थी, उस का हरा पत्थर ही करीब 50 लाख का था. बाकी जेवर अलग थे.

इस शादी से रूमाना बहुत खुश थी. करीम भाई की जिंदगी खुशियों से भर उठी. रूमाना घर की मलिका थी, जो चाहे कर सकती थी. शादी के बाद दोनों वर्ल्ड टुअर पर गए. एक महीने खूब घूमेफिरे, ऐश किया. उस के बाद रूटीन जिंदगी शुरू हो गई.

शुरूशुरू में करीमभाई के बच्चे जरा खिंचेखिंचे रहे, लेकिन जल्दी ही सब नौर्मल हो गए. पहले की तरह आनेजाने लगे. उन्होंने रूमाना को नई कार गिफ्ट की. करीमभाई को लगता था कि वह फिर से जवान हो गए हैं. जिंदगी बेपनाह खूबसूरत लगने लगी थी. रूमाना भी उन का खूब खयाल रखती और खूब प्यार लुटाती. दिन हंसीखुशी गुजरते रहे.

एक दिन काम के दौरान एक अजनबी नंबर से करीमभाई को फोन आया. फोन उठा कर उन्होंने कहा, ‘‘हैलो, कौन बोल रहा है?’’

‘‘हारुन.’’ दूसरी ओर से सपाट लहजे में कहा गया.

करीमभाई शौक्ड रह गए.

‘‘मुझे पहचाना करीमभाई?’’

‘‘हां, फोन क्यों किया?’’

‘‘यह बताने के लिए कि मैं तुम्हारे औफिस के बाहर खड़ा हूं. तुम से मिलने आ रहा हूं. कुछ जरूरी बातें करनी हैं.’’

करीमभाई सोच में डूब गए. उन के माथे पर पसीना चमकने लगा. उन्होंने सेक्रेटरी से कहा, ‘‘हारुन नाम का एक आदमी आ रहा है. गार्ड से चैक करवा कर उसे अंदर भेजो.’’

2 मिनट बाद एक 35-36 साल का स्मार्ट सा आदमी अंदर आया. उस की आंखों में चालाकी और कमीनापन साफ झलक रहा था. करीमभाई ने उसे बैठने को भी नहीं कहा, लेकिन वह बैठ गया.

करीमभाई ने बेरुखी से कहा, ‘‘मैं बहुत मसरूफ हूं, जो कहना है जल्दी कहो.’’

‘‘मैं अपनी बीवी के बारे में बात करने आया हूं.’’

‘‘यह क्या बकवास है? अब वह तुम्हारी बीवी कहां है?’’

‘‘जो औरत पहले से ही शादीशुदा हो, अगर वह दूसरी शादी कर लेती है, तब भी वह पहले शौहर की बीवी कहलाएगी.’’

‘‘पहले से शादीशुदा थी. लेकिन तुम तो उसे तलाक दे चुके हो.’’

‘‘अगर मैं ने रूमाना को तलाक दिया है तो इस का तुम्हारे पास कोई तो सुबूत होगा?’’

करीमभाई को खयाल आया कि ऐसी कोई चीज रूमाना ने उन्हें नहीं दिखाई थी और दूसरे निकाह के वक्त पहले निकाह का कोई जिक्र भी नहीं किया था. वैसे भी एक निकाह पर दूसरा निकाह हराम है, इसलिए दूसरे निकाह के वक्त तलाकनामा पेश करना जरूरी होता है. उन का लहजा कमजोर पड़ गया, ‘‘तुम ने रूमाना को मुंहजबानी तलाक दिया था.’’

‘‘अदालती मामलों में जबानी तलाक का कोई महत्त्व होता है क्या? यह तुम अच्छी तरह जानते हो. लगता है, रूमाना के हुस्न ने तुम्हारी अक्ल को घास चरने भेज दिया था. तुम ने उस से पूछा तक नहीं.’’ हारुन ने कहा.

‘‘रूमाना ने मुझे बताया था कि 4 साल पहले तुम ने उसे तलाक दे दिया था.’’ करीमभाई ने कहा.

‘‘…और तुम ने मान लिया. तुम इतना बड़ा बिजनैस चलाते हो, इतने जहीन आदमी हो, ऐसी गलती कैसे कर सकते हो?’’ वह बोला.

करीमभाई ने जल्दी से कहा, ‘‘तुम्हारे पास क्या सुबूत है कि रूमाना तुम्हारी बीवी है?’’

हारुन ने लिफाफे से निकाहनामे की फोटोकौपी सामने रखते हुए कहा, ‘‘यह है निकाहनामा. इस पर रूमाना के दस्तखत हैं. उस के आईडी कार्ड की कौपी भी मौजूद है. यह निकाह रजिस्ट्रार औफिस में बाकायदा रजिस्टर्ड है. काजी ने निकाह करवाया था. निकाह औफिस के रिकौर्ड के अनुसार रूमाना आज भी मेरी बीवी है. यह तो हुआ कानूनी सुबूत. अब कहो तो बता दूं कि रूमाना के बदन पर कहां और कितने तिल हैं?’’

करीमभाई ने मुश्किल से खुद को जब्त किया. उन्हें लगा कि हार्टअटैक आ जाएगा. उन की दराज में पिस्तौल रखा था. उन का दिल कह रहा था कि उठा कर हारुन को गोली मार दें. वह उन की बीवी के बारे में ऐसी गंदी बातें कर रहा था. उन्होंने पानी पिया और बेरुखी से कहा, ‘‘कहो, चाहते क्या हो तुम?’’

‘‘मैं क्या चाहता हूं. मैं अपनी बीवी वापस चाहता हूं.’’

‘‘वह 4 साल पहले तुम्हारी बीवी थी. अब उस से तुम्हारा कोई संबंध नहीं है.’’

‘‘4 साल की जुदाई को तलाक नहीं मान लिया जाता. वह आज भी मेरी बीवी है.’’

‘‘तुम उसे तलाक दे चुके हो. तुम ने उसे जबानी तलाक दिया है. अब मैं तुम्हारा मतलब समझ गया हूं. बोलो, कितना चाहिए 10 लाख, 20 लाख, बोलो?’’

‘‘मुझे अपनी बीवी वापस चाहिए. मैं तुम्हें 2 दिन की मोहलत देता हूं. इस के बाद मैं अदालत जाऊंगा. अगर तुम नहीं जानते तो वकील से पूछ लेना, तुम पर कौनकौन से केस बनेंगे.’’ हारुन ने सपाट लहजे में कहा और कमरे से बाहर निकल गया.

शराफत का इनाम – भाग 1

हारुन 36 साल का स्मार्ट, खूबसूरत और कसरती बदन का मालिक था. रूमाना बेहद हसीन नाजुक सी 25-26 साल की युवती थी. हारुन ने  उसे एक तसवीर दिखाते हुए कहा, ‘‘रूमाना, यह एक बड़ा आसामी है. इस से काफी माल मिल सकता है. इस के बाद हम मुल्क छोड़ कर बाहर चले जाएंगे. यह मेरा वादा है.’’

रूमाना ने निर्णायक स्वर में कहा, ‘‘याद रखना, यह आखिरी बार है. अब मैं थक चुकी हूं. इस का नाम क्या है?’’

‘‘करीमभाई. उम्र 55 साल. सीधासादा शरीफ बंदा है. बहुत बड़ा बिजनैसमैन है. सब से बड़ी बात यह है कि यह एकदम अकेला है. ग्रे बालों के साथ काफी स्मार्ट और सोबर लगता है. तंदुरुस्त और चाकचौबंद रहने वाला यह आदमी अपनी उम्र से 10 साल कम लगता है.’’

‘‘ठीक है,’’ रूमाना ने कहा.

करीम भाई काफी अमीर और मशहूर बिजनैसमैन थे. 15-16 साल की उम्र में मैट्रिक कर के उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया था. उन के पिता भी बड़े कारोबारी थे, पर उन्होंने बेटे की कोई मदद नहीं की थी. करीमभाई ने अपनी पहली डील मां से रुपए उधार ले कर की थी.

जब वह कमाने लगे थे तो उन्होंने मां के रुपए वापस कर कर दिए थे, लेकिन वह अपने वालिद के शुक्रगुजार थे कि उन्होंने अपने आप कारोबार जमाने का उन्हें आत्मविश्वास दिया. उन्होंने अपने आप अपना बिजनैस खड़ा किया था. बाद में यही सबक उन्होंने अपने बेटों को दिया. उन्होंने अपने बेटों को रकम तो दी, पर बिजनैस सेट हो जाने पर उन्हें उन का कारोबार, घर सब अलग कर दिया था. अब वे अपनाअपना कारोबार अलग चला रहे थे.

करीमभाई ने शुरू से ही उसूल बना रखा था कि औफिस में औरत को नौकरी पर नहीं रखेंगे. उन का खयाल था कि औरत घर की मलिका है, उसे औफिस के धक्के नहीं खाना चाहिए. शायद इसीलिए उन की बीवी हाजरा घर की रानी थीं. घर के सारे फैसले वही करती थीं.

उम्र में करीमभाई से 5 साल छोटी थीं, पर उम्र बढ़ने पर भी बहुत खूबूसरत थीं. 2 जवान बेटों और एक बेटी की मां थीं. सब की शादियां हो चुकी थीं. सब अपनेअपने घरों में खुश थे. हाजरा बेटों को अलग नहीं करना चाहती थीं, लेकिन करीमभाई ने समझाया था कि दूरी से मोहब्बत बढ़ेगी, आनाजाना मिलनाजुलना होता रहेगा. इस घर की मलिका सिर्फ हाजरा रहेगी, हंसीखुशी राज करेगी.

बात उन की समझ में आ गई थी. लेकिन वह ज्यादा दिनों तक राज नहीं कर सकीं. एक साल पहले कैंसर से उन की मौत हो गई. बहुत इलाज हुए, पर जान न बच सकी. तब से करीमभाई अकेले हो गए थे. अब लंच वह घर पर करते थे, जबकि रात का खाना बाहर खा कर आते थे.

उस रात भी वह होटल में डिनर करने गए थे. लौन उन की पसंदीदा जगह थी, जहां समुद्र से आने वाले नम हवा के झोंके अलग ही मजा देते थे. डिनर के बाद वह पार्किंग में आए और अपनी कार के करीब पहुंचे तो देखा एक औरत बोनट पर झुकी सिसकियां ले रही थी.

उस ने अपना बायां पैर थाम रखा था. उस ने खूबसूरत रेशमी अनारकली सूट पहन रखा था. लंबे बालों ने गोरा खूबसूरत चेहरा आधा ढंक रखा था. करीमभाई ने आगे बढ़ कर पूछा, ‘‘मैडम, कोई प्रौब्लम है क्या?’’

उस ने अपना चेहरा ऊपर उठाया. करीमभाई आंसुओं से भीगा हसीन चेहरा देखते रह गए. उस की उम्र करीब 26 साल रही होगी. उस ने बेहद सुरीली आवाज में धीरे से कहा, ‘‘मेरे पैर में मोच आ गई है, बहुत दर्द हो रहा है.’’

करीमभाई ने उस का पैर देखा. दूधिया टखने के पास सूजन नजर आ रही थी. वह बेहद नाजुक लग रही थी.

‘‘डाक्टर को दिखाना पड़ेगा. आप के साथ कोई है?’’ करीमभाई ने पूछा.

‘‘नहीं, मैं अकेली ही आई हूं. यह सामने मेरी कार है, लेकिन अब मैं ड्राइव कैसे करूं?’’ उस ने नए मौडल की कार की तरफ इशारा कर के कहा.

करीमभाई ने सकुचाते हुए कहा, ‘‘आप को ऐतराज न हो तो मैं आप को डाक्टर के पास ले चलूं? मेरा नाम करीमभाई है. मेरा छोटा सा बिजनैस है. यह रहा मेरा कार्ड?’’

‘‘मैं आप को जानती हूं. आप अकसर यहां आते हैं.’’

करीमभाई ने उसे सहारा दे कर आगे की सीट पर बिठाया. हाजरा के बाद वह पहली औरत थी, जो उन के साथ बैठी थी. उस की खुशबू और खूबसूरती से करीमभाई प्रभावित हो रहे थे. उन्होंने पूछा, ‘‘आप का नाम क्या है?’’

‘‘मैं रूमाना अनीस.’’

‘‘अनीस आप के हसबैंड हैं?’’

‘‘नहीं, अनीस मेरे वालिद का नाम है. अब वह इस दुनिया में नहीं हैं.’’

न जाने क्यों उन्हें यह जान कर खुशी हुई कि रूमाना शादीशुदा नहीं है. वह उसे एक बड़े अस्पताल की ओपीडी में ले गए, जहां पट्टी कर के दवाएं और क्रीम दे दी गईं. दवा देते हुए डाक्टर ने कहा, ‘‘आप की मिसेज बहुत नाजुक हैं, खयाल रखा करें.’’

दोनों बुरी तरह झेंप गए.

सहारा दे कर वापस आते समय करीमभाई के दिल की धड़कन बढ़ गई थी. रूमाना का फ्लैट पहली मंजिल पर था. एक बार फिर उन्हें खुशी  हुई. वह उसे सहारा दे कर ऊपर ले गए. उस ने करीमभाई का शुक्रिया अदा किया, लेकिन अंदर आने को नहीं कहा. इस हालत में वह वैसे भी उन्हें अंदर नहीं बुला सकती थी. जाते हुए करीमभाई ने कहा, ‘‘कार्ड पर मेरा मोबाइल नंबर है. जरूरत पड़ने पर बेहिचक फोन कर दीजिएगा.’’

रूमाना ने पर्स से चाबी निकाल कर देते हुए कहा, ‘‘मेरी कार अपने ड्राइवर से भिजवा दें तो मेहरबानी होगी.’’

इसी के साथ उस ने अपना मोबाइल नंबर भी दे दिया था.

उस रात करीमभाई बहुत खुश थे. उन की तनहाई खूबसूरत खयालों और ख्वाबों से सज गई थी. उन्हें हाजरा का खयाल नहीं आया. अगली सुबह दफ्तर जाते हुए उन्होंने रूमाना को फोन किया, ‘‘आप की तबीयत कैसी है?’’

‘‘अब काफी बेहतर है. गरम पानी से काफी आराम मिला है. मुझे लग रहा था कि आप का फोन आएगा.’’ उस ने धीमे से कहा.

‘‘आप को ऐसा क्यों लग रहा था?’’

‘‘मेरे दिल ने कहा था. यह मुझे अच्छा नहीं लगा कि आप को मैंने कल बाहर से ही जाने दिया. मैं चाहती हूं कि आप मेरे घर आएं, ताकि मैं आप का शुक्रिया अदा कर सकूं.’’

करीमभाई के दिल में घंटियां बजने लगीं. उन्होंने कहा, ‘‘वैसे शुक्रिया अदा करने की जरूरत नहीं है. मैं आप को देखने कल शाम को आऊंगा.’’

अगले दिन की शाम तक का समय करीमभाई ने बड़ी बेचैनी से गुजारा. औफिस से वह सीधे होटल गए. वहां पार्किंग में अपनी गाड़ी छोड़ी और रूमाना की गाड़ी ले कर उस के फ्लैट पर पहुंचे. रास्ते से फूल और केक भी ले लिया था. रूमाना उन्हें देख कर खिल उठी. उस ने गुलाबी अनारकली जोड़ा पहन रखा था, जिस में वह गजब ढा रही थी.

घर बेहद सलीके से सजा हुआ था. सारा सामान बहुत कीमती था. केक व फूल देख कर उस ने कहा, ‘‘इस की क्या जरूरत थी.’’

उस का पैर काफी ठीक था. उस ने उन्हें इसरार कर डिनर के लिए रोक लिया. अंधा क्या चाहे, दो आंखें. उस की बातें सीधीसादी थीं. उस ने बताया कि उस की एक बार शादी हो चुकी थी, पर चली नहीं. उस की शादी उस के डैडी ने हारुन से की थी. पता नहीं वह कैसे धोखा खा गए. वह अच्छा इंसान नहीं था.

वो कमजोर पल: सीमा ने क्या चुना प्यार या परिवार?

वही हुआ जिस का सीमा को डर था. उस के पति को पता चल ही गया कि उस का किसी और के साथ अफेयर चल रहा है. अब क्या होगा? वह सोच रही थी, क्या कहेगा पति? क्यों किया तुम ने मेरे साथ इतना बड़ा धोखा? क्या कमी थी मेरे प्यार में? क्या नहीं दिया मैं ने तुम्हें? घरपरिवार, सुखी संसार, पैसा, इज्जत, प्यार किस चीज की कमी रह गई थी जो तुम्हें बदचलन होना पड़ा? क्या कारण था कि तुम्हें चरित्रहीन होना पड़ा? मैं ने तुम से प्यार किया. शादी की. हमारे प्यार की निशानी हमारा एक प्यारा बेटा. अब क्या था बाकी? सिवा तुम्हारी शारीरिक भूख के. तुम पत्नी नहीं वेश्या हो, वेश्या.

हां, मैं ने धोखा दिया है अपने पति को, अपने शादीशुदा जीवन के साथ छल किया है मैं ने. मैं एक गिरी हुई औरत हूं. मुझे कोई अधिकार नहीं किसी के नाम का सिंदूर भर कर किसी और के साथ बिस्तर सजाने का. यह बेईमानी है, धोखा है. लेकिन जिस्म के इस इंद्रजाल में फंस ही गई आखिर.

मैं खुश थी अपनी दुनिया में, अपने पति, अपने घर व अपने बच्चे के साथ. फिर क्यों, कब, कैसे राज मेरे अस्तित्व पर छाता गया और मैं उस के प्रेमजाल में उलझती चली गई. हां, मैं एक साधारण नारी, मुझ पर भी किसी का जादू चल सकता है. मैं भी किसी के मोहपाश में बंध सकती हूं, ठीक वैसे ही जैसे कोई बच्चा नया खिलौना देख कर अपने पास के खिलौने को फेंक कर नए खिलौने की तरफ हाथ बढ़ाने लगता है.

नहीं…मैं कोई बच्ची नहीं. पति कोई खिलौना नहीं. घरपरिवार, शादीशुदा जीवन कोई मजाक नहीं कि कल दूसरा मिला तो पहला छोड़ दिया. यदि अहल्या को अपने भ्रष्ट होने पर पत्थर की शिला बनना पड़ा तो मैं क्या चीज हूं. मैं भी एक औरत हूं, मेरे भी कुछ अरमान हैं. इच्छाएं हैं. यदि कोई अच्छा लगने लगे तो इस में मैं क्या कर सकती हूं. मैं मजबूर थी अपने दिल के चलते. राज चमकते सूरज की तरह आया और मुझ पर छा गया.

उन दिनों मेरे पति अकाउंट की ट्रेनिंग पर 9 माह के लिए राजधानी गए हुए थे. फोन पर अकसर बातें होती रहती थीं. बीच में आना संभव नहीं था. हर रात पति के आलिंगन की आदी मैं अपने को रोकती, संभालती रही. अपने को जीवन के अन्य कामों में व्यस्त रखते हुए समझाती रही कि यह तन, यह मन पति के लिए है. किसी की छाया पड़ना, किसी के बारे में सोचना भी गुनाह है. लेकिन यह गुनाह कर गई मैं.

मैं अपनी सहेली रीता के घर बैठने जाती. पति घर पर थे नहीं. बेटा नानानानी के घर गया हुआ था गरमियों की छुट्टी में. रीता के घर कभी पार्टी होती, कभी शेरोशायरी, कभी गीतसंगीत की महफिल सजती, कभी पत्ते खेलते. ऐसी ही पार्टी में एक दिन राज आया. और्केस्ट्रा में गाता था. रीता का चचेरा भाई था. रात का खाना वह अपनी चचेरी बहन के यहां खाता और दिनभर स्ट्रगल करता. एक दिन रीता के कहने पर उस ने कुछ प्रेमभरे, कुछ दर्दभरे गीत सुनाए. खूबसूरत बांका जवान, गोरा रंग, 6 फुट के लगभग हाइट. उस की आंखें जबजब मुझ से टकरातीं, मेरे दिल में तूफान सा उठने लगता.

राज अकसर मुझ से हंसीमजाक करता. मुझे छेड़ता और यही हंसीमजाक, छेड़छाड़ एक दिन मुझे राज के बहुत करीब ले आई. मैं रीता के घर पहुंची. रीता कहीं गई हुई थी काम से. राज मिला. ढेर सारी बातें हुईं और बातों ही बातों में राज ने कह दिया, ‘मैं तुम से प्यार करता हूं.’

मुझे उसे डांटना चाहिए था, मना करना चाहिए था. लेकिन नहीं, मैं भी जैसे बिछने के लिए तैयार बैठी थी. मैं ने कहा, ‘राज, मैं शादीशुदा हूं.’

राज ने तुरंत कहा, ‘क्या शादीशुदा औरत किसी से प्यार नहीं कर सकती? ऐसा कहीं लिखा है? क्या तुम मुझ से प्यार करती हो?’

मैं ने कहा, ‘हां.’ और उस ने मुझे अपनी बांहों में समेट लिया. फिर मैं भूल गई कि मैं एक बच्चे की मां हूं. मैं किसी की ब्याहता हूं. जिस के साथ जीनेमरने की मैं ने अग्नि के समक्ष सौगंध खाई थी. लेकिन यह दिल का बहकना, राज की बांहों में खो जाना, इस ने मुझे सबकुछ भुला कर रख दिया.

मैं और राज अकसर मिलते. प्यारभरी बातें करते. राज ने एक कमरा किराए पर लिया हुआ था. जब रीता ने पूछताछ करनी शुरू की तो मैं राज के साथ बाहर मिलने लगी. कभी उस के घर पर, कभी किसी होटल में तो कभी कहीं हिल स्टेशन पर. और सच कहूं तो मैं उसे अपने घर पर भी ले कर आई थी. यह गुनाह इतना खूबसूरत लग रहा था कि मैं भूल गई कि जिस बिस्तर पर मेरे पति आनंद का हक था, उसी बिस्तर पर मैं ने बेशर्मी के साथ राज के साथ कई रातें गुजारीं. राज की बांहों की कशिश ही ऐसी थी कि आनंद के साथ बंधे विवाह के पवित्र बंधन मुझे बेडि़यों की तरह लगने लगे.

मैं ने एक दिन राज से कहा भी कि क्या वह मुझ से शादी करेगा? उस ने हंस कर कहा, ‘मतलब यह कि तुम मेरे लिए अपने पति को छोड़ सकती हो. इस का मतलब यह भी हुआ कि कल किसी और के लिए मुझे भी.’

मुझे अपने बेवफा होने का एहसास राज ने हंसीहंसी में करा दिया था. एक रात राज के आगोश में मैं ने शादी का जिक्र फिर छेड़ा. उस ने मुझे चूमते हुए कहा, ‘शादी तो तुम्हारी हो चुकी है. दोबारा शादी क्यों? बिना किसी बंधन में बंधे सिर्फ प्यार नहीं कर सकतीं.’

‘मैं एक स्त्री हूं. प्यार के साथ सुरक्षा भी चाहिए और शादी किसी भी स्त्री के लिए सब से सुरक्षित संस्था है.’

राज ने हंसते हुए कहा, ‘क्या तुम अपने पति का सामना कर सकोगी? उस से तलाक मांग सकोगी? कहीं ऐसा तो नहीं कि उस के वापस आते ही प्यार टूट जाए और शादी जीत जाए?’

मुझ पर तो राज का नशा हावी था. मैं ने कहा, ‘तुम हां तो कहो. मैं सबकुछ छोड़ने को तैयार हूं.’

‘अपना बच्चा भी,’ राज ने मुझे घूरते हुए कहा. उफ यह तो मैं ने सोचा ही नहीं था.

‘राज, क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम बच्चे को अपने साथ रख लें?’

राज ने हंसते हुए कहा, ‘क्या तुम्हारा बेटा, मुझे अपना पिता मानेगा? कभी नहीं. क्या मैं उसे उस के बाप जैसा प्यार दे सकूंगा? कभी नहीं. क्या तलाक लेने के बाद अदालत बच्चा तुम्हें सौंपेगी? कभी नहीं. क्या वह बच्चा मुझे हर घड़ी इस बात का एहसास नहीं दिलाएगा कि तुम पहले किसी और के साथ…किसी और की निशानी…क्या उस बच्चे में तुम्हें अपने पति की यादें…देखो सीमा, मैं तुम से प्यार करता हूं. लेकिन शादी करना तुम्हारे लिए तब तक संभव नहीं जब तक तुम अपना अतीत पूरी तरह नहीं भूल जातीं.

‘अपने मातापिता, भाईबहन, सासससुर, देवरननद अपनी शादी, अपनी सुहागरात, अपने पति के साथ बिताए पलपल. यहां तक कि अपना बच्चा भी क्योंकि यह बच्चा सिर्फ तुम्हारा नहीं है. इतना सब भूलना तुम्हारे लिए संभव नहीं है.

‘कल जब तुम्हें मुझ में कोई कमी दिखेगी तो तुम अपने पति के साथ मेरी तुलना करने लगोगी, इसलिए शादी करना संभव नहीं है. प्यार एक अलग बात है. किसी पल में कमजोर हो कर किसी और में खो जाना, उसे अपना सबकुछ मान लेना और बात है लेकिन शादी बहुत बड़ा फैसला है. तुम्हारे प्यार में मैं भी भूल गया कि तुम किसी की पत्नी हो. किसी की मां हो. किसी के साथ कई रातें पत्नी बन कर गुजारी हैं तुम ने. यह मेरा प्यार था जो मैं ने इन बातों की परवा नहीं की. यह भी मेरा प्यार है कि तुम सब छोड़ने को राजी हो जाओ तो मैं तुम से शादी करने को तैयार हूं. लेकिन क्या तुम सबकुछ छोड़ने को, भूलने को राजी हो? कर पाओगी इतना सबकुछ?’ राज कहता रहा और मैं अवाक खड़ी सुनती रही.

‘यह भी ध्यान रखना कि मुझ से शादी के बाद जब तुम कभी अपने पति के बारे में सोचोगी तो वह मुझ से बेवफाई होगी. क्या तुम तैयार हो?’

‘तुम ने मुझे पहले क्यों नहीं समझाया ये सब?’

‘मैं शादीशुदा नहीं हूं, कुंआरा हूं. तुम्हें देख कर दिल मचला. फिसला और सीधा तुम्हारी बांहों में पनाह मिल गई. मैं अब भी तैयार हूं. तुम शादीशुदा हो, तुम्हें सोचना है. तुम सोचो. मेरा प्यार सच्चा है. मुझे नहीं सोचना क्योंकि मैं अकेला हूं. मैं तुम्हारे साथ सारा जीवन गुजारने को तैयार हूं लेकिन वफा के वादे के साथ.’

मैं रो पड़ी. मैं ने राज से कहा, ‘तुम ने पहले ये सब क्यों नहीं कहा.’

‘तुम ने पूछा नहीं.’

‘लेकिन जो जिस्मानी संबंध बने थे?’

‘वह एक कमजोर पल था. वह वह समय था जब तुम कमजोर पड़ गई थीं. मैं कमजोर पड़ गया था. वह पल अब गुजर चुका है. उस कमजोर पल में हम प्यार कर बैठे. इस में न तुम्हारी खता है न मेरी. दिल पर किस का जोर चला है. लेकिन अब बात शादी की है.’

राज की बातों में सचाई थी. वह मुझ से प्यार करता था या मेरे जिस्म से बंध चुका था. जो भी हो, वह कुंआरा था. तनहा था. उसे हमसफर के रूप में कोई और न मिला, मैं मिल गई. मुझे भी उन कमजोर पलों को भूलना चाहिए था जिन में मैं ने अपने विवाह को अपवित्र कर दिया. मैं परपुरुष के साथ सैक्स करने के सुख में, देह की तृप्ति में ऐसी उलझी कि सबकुछ भूल गई. अब एक और सब से बड़ा कदम या सब से बड़ी बेवकूफी कि मैं अपने पति से तलाक ले कर राज से शादी कर लूं. क्या करूं मैं, मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था.  मैं ने राज से पूछा, ‘मेरी जगह तुम होते तो क्या करते?’

राज हंस कर बोला, ‘ये तो दिल की बातें हैं. तुम्हारी तुम जानो. यदि तुम्हारी जगह मैं होता तो शायद मैं तुम्हारे प्यार में ही न पड़ता या अपने कमजोर पड़ने वाले क्षणों के लिए अपनेआप से माफी मांगता. पता नहीं, मैं क्या करता?’

राज ये सब कहीं इसलिए तो नहीं कह रहा कि मैं अपनी गलती मान कर वापस चली जाऊं, सब भूल कर. फिर जो इतना समय इतनी रातें राज की बांहों में बिताईं. वह क्या था? प्यार नहीं मात्र वासना थी? दलदल था शरीर की भूख का? कहीं ऐसा तो नहीं कि राज का दिल भर गया हो मुझ से, अपनी हवस की प्यास बुझा ली और अब विवाह की रीतिनीति समझा रहा हो? यदि ऐसी बात थी तो जब मैं ने कहा था कि मैं ब्याहता हूं तो फिर क्यों कहा था कि किस किताब में लिखा है कि शादीशुदा प्यार नहीं कर सकते?

राज ने आगे कहा, ‘किसी स्त्री के आगोश में किसी कुंआरे पुरुष का पहला संपर्क उस के जीवन का सब से बड़ा रोमांच होता है. मैं न होता कोई और होता तब भी यही होता. हां, यदि लड़की कुंआरी होती, अकेली होती तो इतनी बातें ही न होतीं. तुम उन क्षणों में कमजोर पड़ीं या बहकीं, यह तो मैं नहीं जानता लेकिन जब तुम्हारे साथ का साया पड़ा मन पर, तो प्यार हो गया और जिसे प्यार कहते हैं उसे गलत रास्ता नहीं दिखा सकते.’

मैं रोने लगी, ‘मैं ने तो अपने हाथों अपना सबकुछ बरबाद कर लिया. तुम्हें सौंप दिया. अब तुम मुझे दिल की दुनिया से दूर हकीकत पर ला कर छोड़ रहे हो.’

‘तुम चाहो तो अब भी मैं शादी करने को तैयार हूं. क्या तुम मेरे साथ मेरी वफादार बन कर रह सकती हो, सबकुछ छोड़ कर, सबकुछ भूल कर?’ राज ने फिर दोहराया.

इधर, आनंद, मेरे पति वापस आ गए. मैं अजीब से चक्रव्यूह में फंसी हुई थी. मैं क्या करूं? क्या न करूं? आनंद के आते ही घर के काम की जिम्मेदारी. एक पत्नी बन कर रहना. मेरा बेटा भी वापस आ चुका था. मुझे मां और पत्नी दोनों का फर्ज निभाना था. मैं निभा भी रही थी. और ये निभाना किसी पर कोई एहसान नहीं था. ये तो वे काम थे जो सहज ही हो जाते थे. लेकिन आनंद के दफ्तर और बेटे के स्कूल जाते ही राज आ जाता या मैं उस से मिलने चल पड़ती, दिल के हाथों मजबूर हो कर.

मैं ने राज से कहा, ‘‘मैं तुम्हें भूल नहीं पा रही हूं.’’

‘‘तो छोड़ दो सबकुछ.’’

‘‘मैं ऐसा भी नहीं कर सकती.’’

‘‘यह तो दोतरफा बेवफाई होगी और तुम्हारी इस बेवफाई से होगा यह कि मेरा प्रेम किसी अपराधकथा की पत्रिका में अवैध संबंध की कहानी के रूप में छप जाएगा. तुम्हारा पति तुम्हारी या मेरी हत्या कर के जेल चला जाएगा. हमारा प्रेम पुलिस केस बन जाएगा,’’ राज ने गंभीर होते हुए कहा.

मैं भी डर गई और बात सच भी कही थी राज ने. फिर वह मुझ से क्यों मिलता है? यदि मैं पूछूंगी तो हंस कर कहेगा कि तुम आती हो, मैं इनकार कैसे कर दूं. मैं भंवर में फंस चुकी थी. एक तरफ मेरा हंसताखेलता परिवार, मेरी सुखी विवाहित जिंदगी, मेरा पति, मेरा बेटा और दूसरी तरफ उन कमजोर पलों का साथी राज जो आज भी मेरी कमजोरी है.

इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते. पति को भनक लगी. उन्होंने दोटूक कहा, ‘‘रहना है तो तरीके से रहो वरना तलाक लो और जहां मुंह काला करना हो करो. दो में से कोई एक चुन लो, प्रेमी या पति. दो नावों की सवारी तुम्हें डुबो देगी और हमें भी.’’

मैं शर्मिंदा थी. मैं गुनाहगार थी. मैं चुप रही. मैं सुनती रही. रोती रही.

मैं फिर राज के पास पहुंची. वह कलाकार था. गायक था. उसे मैं ने बताया कि मेरे पति ने मुझ से क्याक्या कहा है और अपने शर्मसार होने के विषय में भी. उस ने कहा, ‘‘यदि तुम्हें शर्मिंदगी है तो तुम अब तक गुनाह कर रही थीं. तुम्हारा पति सज्जन है. यदि हिंसक होता तो तुम नहीं आतीं, तुम्हारे मरने की खबर आती. अब मेरा निर्णय सुनो. मैं तुम से शादी नहीं कर सकता. मैं एक ऐसी औरत से शादी करने की सोच भी नहीं सकता जो दोहरा जीवन जीए. तुम मेरे लायक नहीं हो. आज के बाद मुझ से मिलने की कोशिश मत करना. वे कमजोर पल मेरी पूरी जिंदगी को कमजोर बना कर गिरा देंगे. आज के बाद आईं तो बेवफा कहलाओगी दोनों तरफ से. उन कमजोर पलों को भूलने में ही भलाई है.’’

मैं चली आई. उस के बाद कभी नहीं मिली राज से. रीता ने ही एक बार बताया कि वह शहर छोड़ कर चला गया है. हां, अपनी बेवफाई, चरित्रहीनता पर अकसर मैं शर्मिंदगी महसूस करती रहती हूं. खासकर तब जब कोई वफा का किस्सा निकले और मैं उस किस्से पर गर्व करने लगूं तो पति की नजरों में कुछ हिकारत सी दिखने लगती है. मानो कह रहे हों, तुम और वफा. पति सभ्य थे, सुशिक्षित थे और परिवार के प्रति समर्पित.

कभी कुलटा, चरित्रहीन, वेश्या नहीं कहा. लेकिन अब शायद उन की नजरों में मेरे लिए वह सम्मान, प्यार न रहा हो. लेकिन उन्होंने कभी एहसास नहीं दिलाया. न ही कभी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह छिपाया.

मैं सचमुच आज भी जब उन कमजोर पलों को सोचती हूं तो अपनेआप को कोसती हूं. काश, उस क्षण, जब मैं कमजोर पड़ गई थी, कमजोर न पड़ती तो आज पूरे गर्व से तन कर जीती. लेकिन क्या करूं, हर गुनाह सजा ले कर आता है. मैं यह सजा आत्मग्लानि के रूप में भोग रही थी. राज जैसे पुरुष बहका देते हैं लेकिन बरबाद होने से बचा भी लेते हैं.

स्त्री के लिए सब से महत्त्वपूर्ण होती है घर की दहलीज, अपनी शादी, अपना पति, अपना परिवार, अपने बच्चे. शादीशुदा औरत की जिंदगी में ऐसे मोड़ आते हैं कभीकभी. उन में फंस कर सबकुछ बरबाद करने से अच्छा है कि कमजोर न पड़े और जो भी सुख तलाशना हो, अपने घरपरिवार, पति, बच्चों में ही तलाशे. यही हकीकत है, यही रिवाज, यही उचित भी है.