बेटी बनी गवाह : मां को मिली सजा – भाग 2

प्रकाश से हो गया प्यार

इसी दौरान एक दिन मनीषा की पहचान छोटी हरदा में रहने वाले 26 साल के प्रकाश जाट से हुई तो वह रोज उस की दुकान पर आने लगा. 28 साल की गठीले बदन व तीखे नाकनक्श वाली मनीषा 2 बच्चों की मां होने के बाद भी कम उम्र की दिखती थी. तभी तो प्रकाश उसे चाहने लगा था.

एक दिन मौका देख कर प्रकाश ने अपने मन की बात मनीषा से कह दी, “भाभी, तुम कौन सी चक्की का आटा खाती हो, तुम्हारी खूबसूरती देख कर मन में लालच आ ही जाता है.”

“किस बात का लालच तुम्हारे मन में आ रहा है प्रकाश?” अपने हुस्न की तारीफ सुन कर इठलाते हुए मनीषा बोली.

“यही भाभी कि तुम्हारे जैसी लडक़ी मेरे सपनों की रानी होती और मैं उस के साथ…” प्रकाश दिल खोल कर बोला.

“उस के साथ क्या करते…” मनीषा भी शरमाते हुए बोली.

“भाभी, दिल करता है तुम्हें बाहों में भर कर चूम लूं.” बिना लागलपेट के प्रकाश ने मनीषा से कहा.

“कभी तुम्हारी ये हसरत भी पूरी कर दूंगी.” मनीषा ने अपनी तरफ से इजहार करते हुए कहा.

उस के बाद दुकान पर कोई ग्राहक आ गया तो प्रकाश वहां से चला गया, लेकिन इस के बाद तो प्रकाश रातदिन मनीषा के सपनों में ही खोया रहता. बातचीत से शुरू हुआ प्यार का सिलसिला धीरेधीरे अंतरंग मुलाकात में बदल गया. राजेश के घर पर नहीं रहने पर प्रकाश का मनीषा के घर पर भी आनाजाना शुरू हो गया और उन के बीच अवैध संबंध भी बन गए.

पत्नी के किसी गैरमर्द से चल रहे प्रेम प्रसंग की जानकारी राजेश राजपूत को भी हो गई. इस बात को ले कर दोनों के बीच विवाद होने लगा. प्रकाश के प्यार में अंधी हो कर मनीषा अपने पति राजेश और दोनों बच्चों तक को छोडऩे के लिए तैयार हो गई. राजेश अपने बच्चों के भविष्य को ले कर चिंतित रहने लगा. उस ने परिवार को टूटने से बचाने के लिए प्रकाश और मनीषा को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वे समझने को तैयार ही नहीं थे.

मनीषा राजेश से तलाक मांगने लगी, लेकिन राजेश बच्चों की खातिर उसे तलाक नहीं देना चाहता था. तलाक नहीं देने से नाराज प्रकाश और मनीषा ने राजेश की हत्या करने का प्लान बनाया. इस के लिए उन्होंने अपने 3 दोस्तों को इस में शामिल किया और 50 हजार रुपए में राजेश की हत्या की सुपारी दे दी.

अक्तूबर, 2018 में उन दिनों शारदीय नवरात्रि पर्व की धूम हरदा में मची हुई थी. 12 अक्तूबर, 2018 को हरदा में गरबा का कार्यक्रम था. उसी दिन शाम को मनीषा ने अपनी देवरानी आरती को फोन कर के कहा, “आरती, आज बच्चों को ले कर गरबा देखने चलना है, तुम यहीं आ जाना, हम लोगों को राजेश कार से छोड़ देंगे.”

“हां दीदी, मैं 7 बजे तक आप के घर बच्चों को ले कर पहुंच जाऊंगी.” आरती बोली.

उसी दिन शाम 7 बजे राजेश का भाई सुरेंद्र अपनी पत्नी और बच्चों को बाइक से राजेश के घर छोड़ कर खुद गरबा कार्यक्रम में चला गया. कुछ समय बाद राजेश मनीषा, आरती और बच्चों को गरबा कार्यक्रम में छोड़ कर घर लौट आया.

रात के लगभग 9 बजे मनीषा ने सुरेंद्र को बताया, “सुरेंद्र भैया मुझे घर छोड़ दीजिए, भैया का फोन आया है उन्हें घर पर अच्छा नहीं लग रहा.”

सुरेंद्र ने उसी समय अपने दोस्त सुरेंद्र चौहान के साथ भाभी मनीषा को उस के घर भेज दिया.

प्रेमी के साथ बनाई योजना

घर जा कर मनीषा प्रकाश को फोन कर के राजेश का काम तमाम करने की योजना में लग गई. इसी बीच रात के 11 बजे राजेश की बेटी प्रियांशी भी अपने चाचा के साथ गरबा कार्यक्रम से वापस घर आ गई तो मनीषा उसे ऊपर के कमरे में ले गई.

रात के करीब 12 बजे प्रकाश जाट अपने 3 दोस्तों के साथ राजेश के घर पहुंचा. यहां मनीषा ने प्लानिंग के अनुसार पहले से ही दरवाजा खुला रखा था. मनीषा अपने 6 साल के बेटे और 10 साल की बेटी को लेकर ऊपर के कमरे में चली गई थी. उस समय राजेश अपने डेली कलेक्शन का हिसाब बनाने में लगा हुआ था. प्रकाश जाट और उस के साथियों ने भीतर घुसते ही कमरे में बैठे राजेश पर हमला कर दिया. अपने साथ दरांती ले कर आए बदमाशों ने राजेश का गला रेत दिया. कुछ ही देर में तड़पतड़प कर राजेश ने दम तोड़ दिया.

राजेश का घर एकांत में होने और आधी रात होने से लोगों को मर्डर की भनक नहीं लग पाई. दोनों बच्चों ने मारपीट की आवाज सुन कर अपनी मां मनीषा को नीचे चलने को कहा. नीचे 10 साल की बेटी ने प्रकाश को घर से निकलते समय पहचान लिया.

रात करीब एक बजे मनीषा ने देवर नरेंद्र और सुरेंद्र को काल कर रोतेबिलखते हुए बताया, “भैया, जल्दी से घर आ जाओ. 4 नकाबपोश बदमाश राजेश की हत्या कर भाग गए हैं.”

राजेश के दोनों भाई नरेंद्र और सुरेंद्र यह खबर सुनते ही अपने परिवार सहित राजेश के घर पहुंचे. राजेश लहूलुहान औंधे मुंह पड़ा हुआ था. राजेश की हालत देख कर उस के पिता रामरज गश खा कर गिर पड़े. सुरेंद्र उन्हें ले कर अस्पताल चला गया. इस के बाद नरेंद्र ने घटना की सूचना पुलिस को दी.

हरदा पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंच कर जांचपड़ताल की. पुलिस ने जब मामले की पड़ताल की तो पता चला कि मनीषा और प्रकाश के अवैध संबंध की वजह से राजेश की हत्या की गई है. 9 साल की नाबालिग बेटी प्रियांशी ने प्रकाश अंकल द्वारा पिता को पीटने की बात बताई थी. इस के बाद पुलिस ने मोबाइल रिकौर्डिंग और काल डिटेल्स निकाली, जिस में पूरी कहानी समझ आ गई.

पुलिस को मिला एक खास औडियो

पुलिस की जांचपड़ताल में यह बात सामने आई कि पिछले कुछ सालों से मनीषा और प्रकाश के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था. पुलिस को 8 मिनट 57 सेकंड का एक औडियो राजेश के मोबाइल फोन में मिला, जिस में राजेश ने प्रकाश को फोन कर के समझाया था. राजेश ने एक दिन प्रकाश को फोन कर के कहा, “राजेश बोल रहा हूं भाई साहब.”

“हां बोलो…” बेरुखी से जबाब देते हुए प्रकाश बोला.

“संडे के रोज आप ने मेरी मिसेज को काल किया था?”

“हां तो… मेरी मनु ( मनीषा) से बात होती है.”

“बात होती रहती है तो आखिर क्या चाहते हो आप, मेरा घर बरबाद क्यों कर रहे हो?”

“हां तो आप को सब बता दिया होगा मनु ने, मेरे पास आप के और उस लडक़ी के वीडियो हैं.” प्रकाश बोला.

“अच्छा तो मेरे वीडियो हैं तो क्या वायरल करना है उन को.”

“मैं वायरल क्यों करूंगा, करना होता तो कब का कर देता. मेरा कोई ऐसा शौक नहीं है, मैं नहीं कर सकता, मेरे पास बहुत पहले से हैं.”

“करो वायरल, मुझे भी पता चले कि मेरा सही में वीडियो है या तुम ब्लैकमल कर रहे हो.” राजेश ने कुरेदते हुए कहा.

“जिस दिन मजबूर हो जाऊंगा, उस दिन वायरल भी कर दूंगा, अभी मैं मजबूर नहीं हूं. मेरी बात मान लो और मनु मुझे दे दो.” प्रकाश ने दोटूक राजेश से कहा.

“तुम को मनु दे दूं तो मेरे बच्चों का क्या होगा, उन्हें किस के भरोसे छोड़ दूं?”

“आप ने किसी दूसरी लडक़ी से रिलेशन बनाने के पहले नहीं सोचा कि 2 बच्चे हैं, पहले सोच लेते तो ये दिन नहीं आते.”

“किस बात का सोचता, किस ने कहा मेरे किसी से रिलेशन हैं. तुम मुझे बेमतलब बदनाम करने पर तुले हुए हो.”

“तुम 5 साल से रिलेशन में हो, मनु से दूरदूर रहना. सारी रिकौर्डिंग है मेरे पास, मनु के सामने आप ने एक्सेप्ट किया था.”

“मैं ने किसी के सामने कुछ एक्सेप्ट नहीं किया, हम सब राजी और मरजी से रह रहे हैं. मेरा किसी से कोई रिलेशन नहीं है, फालतू बात मत करो, मनु को क्यों दे दूं तुम को, अपनी मिसेज को क्यों दे दूं, तुम को मेरे परिवार से क्या लेनादेना है.” गुस्से में तमतमाते हुए राजेश बोला.

“मनु कह देगी तो मान लूंगा, मेरा कोई लेनादेना नहीं है. मेरे चक्कर में तुम उसे मारते हो, मुझे नहीं पता है क्या, कबकब मारा, सब पता है मुझे. इतना लिख कर ले लेना, वो मेरे बिना जी नहीं पाएगी.” प्रकाश बोला.

“अपने परिवार में मैं क्या कर रहा हूं, तुम को आखिर लेनादेना क्या है.”

“मनु नहीं जी पाएगी, यदि उसे कुछ हो गया तो आप भी इस दुनिया में नहीं रहोगे. तू जो मेरी सुपारी दे रहा है न भाई, मुझे सब पता है, तू मुझे मरवाएगा.” प्रकाश ने इल्जाम लगाते हुए कहा.

“तू जबरन मनगढ़ंत बातें बना रहा है, मैं किसे तेरी सुपारी दे रहा हूं, जबरदस्ती की बात कर रहा है. मुझे तो आज मनीषा ने कहा प्रकाश मेरे पीछे लगा हुआ है, मेरे चक्कर काट रहा है, मैं क्या करूं.”

“अच्छा बात करवाओ उस से, करो स्पीकर चालू. मनु ऐसा बोल दे तो मैं कभी मुंह नहीं दिखाऊंगा. उस से पूछ लो, मुझ से प्यार नहीं करती है तो मैं बिलकुल अब नहीं आऊंगा.” प्रकाश ने विश्वास भरे शब्दों में कहा.

“फालतू बात मत कर, ले तू मेरी मिसेज से बात कर.” फोन मनीषा को देते हुए राजेश ने कहा.

“ये क्या बोल रहा है, मैं तेरा पीछा करता हूं? क्या करना है मुझे बता दो, आ रही है मेरे साथ?” प्रकाश ने मनीषा से पूछा.

“उस लडक़ी ने तुम को खुद ही बताया था कि नहीं, तुम्हारे पास उस के वीडियो हैं.” मनीषा फोन पर प्रकाश से बोली.

“तू अपनी बात कर, तुझे उस के साथ रहना है क्या? जमाने भर के उल्टेसीधे सवाल करने की जरूरत क्या है, जबकि ऐसा कुछ है ही नहीं.” राजेश ने झल्ला कर कहा.

“मुझे तो रहना है न तुम्हारे साथ, वो खुद मना कर देगी कि उसे तुम्हारे साथ नहीं रहना है. क्या करना है बोलो, चुप रहने से कुछ होने वाला नहीं है. क्या करना है, मेरे साथ रहना है कि उस के साथ रहना है?” प्रकाश ने मनीषा से कहा.

“मुझे जो कहना था, सब कह दिया. सब कुछ उन्हें बता दिया है कि मुझे प्रकाश के साथ रहना है. मैं तुम्हारे घर गई, वह बात भी मैं ने उन्हें बता दी. एक बात नहीं छिपाई. हमारे बीच शुरू से ले कर अब तक की हर बात बताई है मैं ने.” मनीषा बोली.

“हां, मेरे घर पर 4 बार आई. उसे कह दो हम दोनों खड़े हो जाते हैं वह दोनों को गोली मार दे. साथ में नहीं जीने देगा न तो दोनों को मार दे, हम अपनी इच्छा से मरने के लिए तैयार हैं.” प्रकाश गुस्से में बोला.

“अच्छा है न, ये लो खुद ही बात कर लो,” इतना कह कर मनीषा ने मोबाइल राजेश को दे दिया.

“हां, मुझे कंफर्म हो गया. मैं अब अपनी मिसेज से बात कर लूं, उस के बाद ही आगे की बात करूंगा. तूने मेरी मिसेज को क्यों फंसाया. मेरे घर पर तुझे ताकझांक करने की क्या जरूरत थी? मैं तेरे घर ताकझांक करने गया था क्या?” यह बोल कर राजेश ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया.

बेटी बनी गवाह : मां को मिली सजा – भाग 1

19 मई, 2023 को मध्य प्रदेश के हरदा जिले के विशेष सत्र न्यायालय में गहमागहमी कुछ ज्यादा ही थी. न्यायाधीश अनूप कुमार त्रिपाठी की अदालत में 2018 में हुए बहुचर्चित राजेश राजपूत हत्याकांड का फैसला आने वाला था. पूरे अदालत परिसर में पुलिस और वकीलों की भीड़ दिखाई दे रही थी. मीडिया के लोग भी पलपल का अपडेट लेते नजर आ रहे थे.

न्यायाधीश ने जैसे ही कोर्टरूम में प्रवेश किया तो लोगों ने खड़े हो कर उन्हें सम्मान दिया. न्यायाधीश ने लोगों को बैठने का इशारा करते हुए कुरसी पर बैठते ही आदेश दिया, “अदालत की काररवाई शुरू की जाए.”

न्यायाधीश का आदेश पाते ही सरकारी वकील आशाराम रोहित ने खड़े हो कर अपनी दलील देते हुए कहा, “मी लार्ड, मैं अदालत में अब तक 20 गवाहों को पेश कर चुका हूं, जिन के बयानों से साफ जाहिर है कि कटघरे में जो प्रकाश जाट नाम का शख्स खड़ा है, उस ने ही राजेश राजपूत का मर्डर किया है. राजेश की पत्नी मनीषा द्वारा ही अपने साथियों गोलू, पवन, छोटू की मदद से राजेश की निर्मम तरीके से हत्या की गई है.”

“आब्जेक्शन मी लार्ड, मेरे मुवक्किल को झूठा फंसाया जा रहा है. राजेश की हत्या प्रकाश, मनीषा और उस के साथियों ने नहीं की है, बल्कि परिवार के लोगों को मनीषा को जमीनजायदाद में हिस्सा न देना पड़े, इसलिए यह झूठी कहानी गढ़ी गई है.” बचाव पक्ष के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाते हुए कहा.

“मी लार्ड, मेरे पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि राजेश राजपूत का मर्डर प्रकाश और उस के साथियों ने मनीषा के कहने पर किया,” सरकारी वकील आशाराम रोहित ने आत्मविश्वास के साथ कहा.

“अदालत का वक्त जाया न करें. आप के पास जो भी सबूत हैं, अदालत में पेश किए जाएं.” न्यायाधीश ने आदेश दिया.

“मी लार्ड, मैं इस केस के एक अहम गवाह को अदालत में पेश करने की अनुमति चाहता हूं.” फरियादी की ओर से पैरवी कर रहे एक और वकील अखिलेश भाटी ने दरख्वास्त करते हुए कहा.

“इजाजत है.” न्यायाधीश ने कहा.

“मी लार्ड, मैं राजेश और मनीषा की बेटी प्रियांशी को गवाही के लिए हाजिर करना चाहता हूं.”

“इजाजत है.”

कुछ ही देर में 15 साल की प्रियांशी गवाही देने अदालत में खड़ी हुई तो वकील अखिलेश भाटी ने उस से सवाल किया, “जिस दिन तुम्हारे पापा का मर्डर हुआ था,उस वक्त तुम क्या कर रही थी और तुम ने क्या देखा?”

“जी सर ,उस दिन मैं मम्मी के साथ ऊपर के कमरे में गई थी. उस समय मम्मी फोन पर किसी से बात कर रहीं थीं, तभी मैं ने नीचे उतर कर देखा तो 2 लोग मेरे पापा के कमरे से बाहर निकल रहे थे, उन में से एक प्रकाश अंकल भी थे. मैं ने पापा के कमरे में जा कर देखा तो पापा खून से लथपथ पड़े हुए थे, उन की गरदन पर किसी धारदार हथियार के निशान साफ दिख रहे थे. उसी समय मैं ने मम्मी को आवाज दे कर नीचे बुलाया था.”

“आब्जेक्शन मी लार्ड, प्रियांशी तब हमेशा 10 बजे तक सो जाया करती थी. घटना के समय 10 साल की बच्ची रात 11 बजे तक जाग रही थी, यह सरासर झूठ है.” बचाव पक्ष के वकील ने दलील पेश करते हुए कहा.

“सर, जिस दिन मेरे पापा का मर्डर हुआ,उस दिन मैं चाचा, चाची और मम्मी के साथ गरबा नृत्य देखने गई थी. मम्मी कुछ ही देर में मुझे ले कर घर आ गई थी. उस समय रात के करीब 11 बजे होंगे, मम्मी मुझे ऊपर के कमरे में ले गईं. वहां कपड़े बदल कर मैं सोने के लिए नीचे के कमरे में आई तो देखा पापा का किसी ने मर्डर कर दिया है.” प्रियांशी ने जबाव देते हुए कहा.

“क्या तुम यकीन के साथ कह रही हो कि 2 लोगों में से एक प्रकाश अंकल ही थे?” सरकारी वकील ने पूछा.

“हां, मैं ने उन्हें अच्छी तरह से देखा था, मैं उन्हें कैसे भूल सकती हूं, वो अकसर हमारे घर आया करते थे.” प्रकाश जाट की तरफ अंगुली दिखाते हुए प्रियांशी बोली.

“मी लार्ड, प्रियांशी को अदालत सिखापढ़ा कर लाया गया है. यह अभी नादान है और किसी ने डराधमका कर इस तरह के बयान देने को राजी किया है.” बचाव पक्ष के वकील ने आपत्ति जताते हुए न्यायालय को बताया.

“सर, मैं जो भी कह रही हूं, वह बिना डर के कह रही हूं. मेरी मम्मी पापा का मर्डर करवा सकती है तो मेरा भी करवा देगी. लेकिन हकीकत यही है कि मम्मी के कहने पर ही प्रकाश अंकल ने मेरे पापा का मर्डर किया है.” प्रियांशी ने निर्भीक हो कर बोली.

“मी लार्ड, मैं अदालत से दरख्वास्त करता हूं कि राजेश की हत्या के मुलजिमों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए.” सरकारी वकील आशाराम रोहित इतना कह कर अपने स्थान पर बैठ गए.

प्रेमीप्रेमिका को मिली सजा

दोनों पक्षों की जोरदार बहस को कोर्ट में मौजूद सभी लोग बड़े गौर देख रहे थे. दोनों ओर की दलीलों को गौर से सुनने के बाद अब फैसले की बारी थी. अदालत में मौजूद सभी की नजरें न्यायाधीश की ओर टिकी हुई थीं. कुछ समय बाद न्यायाधीश अनूप कुमार त्रिपाठी ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, “तमाम गवाहों और सबूतों को मद्देनजर रखते हुए यह अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि राजेश राजपूत की हत्या प्रकाश जाट ने राजेश की पत्नी मनीषा की सहमति से की है.

“अदालत मनीषा राजपूत और प्रकाश उर्फ पीपी को भादंवि की धारा 302 में दोष सिद्ध पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास और 2-2 हजार का जुरमाना और धारा 201 में दोषी पाते हुए दोनों आरोपियों को 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास और एकएक हजार रुपए के जुरमाने की सजा सुनाती है. साथ ही 3 अन्य आरोपियों गोलू उर्फ रामकृष्ण शर्मा, छोटू उर्फ ब्रजेश ठाकुर, पवन उर्फ पप्पू गिरी निवासी मातगौर बागली के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत न होने की वजह से उन्हें बाइज्जत बरी करती है.”

कोर्ट का फैसला आने के बाद वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने मुजरिम प्रकाश जाट और मनीषा राजपूत को हिरासत में ले लिया.  राजेश राजपूत कौन था और उस की हत्या किस वजह से हुई, इस की असली कहानी आज से साढ़े 4 साल पहले से शुरू होती है.

मध्य प्रदेश के जिला हरदा के प्रताप कालोनी में रहने वाले रामरज राजपूत अपने पुश्तैनी घर में अपनी पत्नी और 3 बेटों राजेश, सुरेंद्र और नरेंद्र के साथ रहते थे. अप्रैल 2008 में राजेश की अरेंज मैरिज हरदा के ही कस्बा टिमरनी के पास स्थित लछोरा गांव की रहने वाली मनीषा राजपूत से हुई थी.

राजेश पोस्ट औफिस में कलेक्शन एजेंट का काम किया करता था और पिता रामरज सिंह राजपूत अपनी जूतेचप्पल की दुकान पर बैठते थे. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. राजेश की शादी के एक साल बाद 10 अप्रैल, 2009 को मनीषा ने प्रियांशी को जन्म दिया. 3 साल बाद 8 अक्तूबर, 2012 को मनीषा ने एक बेटे को जन्म दिया. इसी बीच राजेश के दोनों भाइयों की भी शादी हो गई.

भाइयों की शादी के कुछ समय बाद भाभी मनीषा का व्यवहार बदलने लगा. वह अपने पति राजेश पर शक करती थी कि उस का किसी महिला से अफेयर चल रहा है. इस बात को ले कर घर में कलह होने लगी और इस कलह का शिकार पूरा परिवार हो रहा था. मनीषा गुस्से में आ कर अपने देवरों से तो विवाद करती ही थी, किसी न किसी बात पर सासससुर को भी भलाबुरा बोलने लगी.

जब विवाद बढऩे लगा तो राजेश के पिता ने 2016 में अपना पुश्तैनी घर बेच दिया और इस के बाद तीनों भाई अलगअलग रहने लगे. राजेश ने गायत्री मंदिर के पास अपना खुद का घर बना लिया, मातापिता भी उस के पास ही रहने लगे. राजेश ने पिता की बैठक व्यवस्था के लिए घर पर ही किराने की दुकान खोल दी. वक्त गुजरने के साथ धीरेधीरे मनीषा सासससुर को भी परेशान करने लगी. इस से परेशान हो कर रामरज पत्नी के साथ अपने छोटे बेटे नरेंद्र के पास जा कर रहने लगे और मनीषा खुद किराने की दुकान पर बैठने लगी.

बैंक मैनेजर ने ही कर दिए अकाउंट साफ

फोन नंबर अपडेट न कराने पर खाते से 24 लाख गायब

बैंक मैनेजर ने ही कर दिए अकाउंट साफ – भाग 3

एकटक से बैंककर्मी की गतिविधि को देखने लगा. वह कभी चैक को उलटपलट रहा था तो कभी कंप्यूटर पर आंखें गड़ा देता था. प्रकाश समझ नहीं पा रहा था कि बैंककर्मी आखिर कर क्या रहा है? कुछ समय बीतने के बाद प्रकाश पेमेंट के बारे में पूछने ही वाला था कि बैंककर्मी बोला, “प्रकाश राजपूत, पिता गंगा बिशन राजपूत, तुम हो?”

“जी सर, मेरा ही चैक है…कोई बात सर?” प्रकाश बोला.

“बात तो है. यहां तुम्हारे अकाउंट में तो बैलेंस ही नहीं है.” बैंककर्मी बोला.

“बैलेंस नहीं है, क्या मतलब हुआ?” प्रकाश ने आश्चर्य से पूछा.

“मतलब साफ है कि तुम तो पहले ही कई बार पैसा निकाल चुके हो. अब तुम्हारे खाते में उतना पैसा नहीं, जितने का तुम ने चैक दिया है.” बैंककर्मी बोला.

“पैसा नहीं है? मैं ने पैसा कब निकाला? मैं ने तो कभी इस खाते से पैसा निकाला ही नहीं है. ठीक से चैक कीजिए. कोई गलती तो नहीं हो रही है?” प्रकाश ने आग्रह किया.

“तो मैं गलत बता रहा हूं. यहां कंप्यूटर में जो तुम्हारा खाता दिखा रहा है, वही बता रहा हूं. तुम्हारे खाते से 15 से अधिक बार मोटी राशि निकाली गई है. इन की डिटेल्स जाननी है तो स्टेटमेंट निकलवा लो.” बैंककर्मी बोला और उस का चैक वापस कर दिया.

प्रकाश परेशान हो गया. सीधा मैनेजर के केबिन में चला गया. मैनेजर कुछ बोलता, इस से पहले प्रकाश ने तेज आवाज में बोलना शुरू कर दिया. मैनेजर अचानक प्रकाश के बोलने पर हक्काबक्का हो गया. संभलते हुए चपरासी को आवाज लगाई. चपरासी भागाभागा आया. आते ही प्रकाश पर बरस पड़ा, “मैं जरा सा उधर साहब को पानी क्या देने गया, तुम मौका देख कर यहां घुस आए.”

मैनेजर ने चपरासी से बोला कि वह इस की समस्या को निपटाने के लिए रिसैप्शन पर ले कर जाए. रिसैप्शन जहां ग्राहक सेवा केंद्र बना हुआ था. चपरासी प्रकाश को ग्राहक सेवा केंद्र के काउंटर पर ले कर गया. वहीं बैठे एक बुजुर्ग से व्यक्ति को बताया, वह प्रकाश की समस्या का समाधान करें.

तीनों अकाउंट से हुए 40 लाख साफ

प्रकाश ग्राहक सेवा केंद्र पर बैठे बुजुर्ग को अपना चैक देते हुए पूरी कहानी बताने लगा. बुजुर्ग बीच में ही बोला, “मुझे तुम्हारी इतनी लंबी रामकहानी से मतलब नहीं है, मैं तुम्हारा स्टेटमेंट निकाल दूंगा. अगर पासबुक लाए हो तो उसे अपडेट कर दूंगा, तुम्हारी पासबुक तो पहले से भरी हुई है और यहां अभी नई पासबुक नहीं है. इसलिए तुम्हें एक साल का स्टेटमेंट मिलेगा, उस का पैसा खाते से कट जाएगा. मंजूर है तो बोलो.”

“जी, स्टेटमेंट निकाल दीजिए.” प्रकाश बोला.

“कल आना, अभी प्रिंटर खराब है.” बुजुर्ग बोला.

“मेरे भाई और मां का भी खाता यहीं है उस का भी स्टेटमेंट निकलवाना है?”

“हां, लेकिन उन की लिखी एप्लीकेशन लानी होगी.”

“जी अच्छा.”

…और निराश मन से प्रकाश घर आ गया. उसे उदास देख कर अम्मा बोलीं, “क्या बात है, पैसा आज भी नहीं मिला क्या?”

“हां अम्मा, आज तो और भी गड़बड़ हो गई. मुझे समझ में नहीं आ रहा क्या हुआ? बैंक वाला कह रहा है कि मेरे खाते में पैसा ही नहीं है,” प्रकाश बोला.

“ये कैसे हो सकता है. खाते से पैसा कहां चला जाएगा? कल चलना मेरे साथ बैंक, मैं देखती हूं कैसे नहीं मिलेगा… मेरा ही पैसा है.”

किसी तरह से प्रकाश, कमलेश और राजकुंवर ने रात गुजारी और अगले रोज बैंक जा पहुंचे. उन्होंने अपने तीनों बैंक खातों के स्टेटमेंट निकलवाए. उस से जब पता चला कि उन के खातों से 40 लाख 46 हजार 230 रुपए की निकासी कई बार हुई थी. खाते से पैसे गायब होने की खबर पाते ही राजकुंवर एकदम से बेहोशी की हालत में आ कर वहीं जमीन पर धम्म से बैठ गईं.

मैनेजर और बैंककर्मियों के खिलाफ हुई एफआईआर

प्रकाश और कमलेश तैश में आ गए और बैंक के खिलाफ धोखाधड़ी का आरोप लगा दिया. अम्मा जब स्थिर हुईं, तब एक गिलास पानी मांगा. कमलेश उन्हें साथ लाए बोतल से पानी पिलाया. कुछ घूंट पानी पी कर वह कमलेश के हाथ का सहारा ले कर उठी. प्रकाश से बोली, “थाने चलो.”

उसी वक्त तीनों शिवपुर थाने पहुंचे. राजकुंवर, प्रकाश और कमलेश ने एसएचओ संजीव पवार को सहकारी बैंक के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दे दी. जिला सहकारी बैंक मर्यादित के खिलाफ शिकायत पा कर एसएचओ ने जांच शुरू करवा दी. सहकारी बैंक के खिलाफ शिकायतें पहले आती रही हैं. जब प्रकाश के मामले की जांच की गई, तब पता चला कि बैंक के मैनेजर ने अपने 4 कर्मचारियों के साथ जालसाजी कर उन के खाते से पैसे निकाल लिए थे.

पुलिस ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित के शाखा प्रबंधक सुरेंद्र रघुवंशी, लिपिक उमाशंकर रघुवंशी, पर्यवेक्षक प्रेमनारायण तिवारी, लिपिक बदामी लाल मालवीय और कंप्यूटर औपरेटर के खिलाफ आईपीसी की धारा 407, 409, 420, 467, 468, 471 के तहत मामला दर्ज कर लिया.

घटना के बाद से ही सभी आरोपी फरार हो गए थे. कथा लिखे जाने तक जालसाज बैंककर्मियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी.

बैंक मैनेजर ने ही कर दिए अकाउंट साफ – भाग 2

प्रकाश उन की बातों को ध्यान से सुनने लगा था. बैंक के बारे में निराशाजनक बातें सुन कर वह भीतर ही भीतर कुछ असहज महसूस करने लगा था. आखिर रहा नहीं गया, तब उस ने एक से पूछ लिया, “भाई साहब, यहां की सर्विस खराब क्यों हैï?”

“खराब! अजी बहुत खराब कहिए. स्टाफ ही नहीं है. 2-4 लोगों के सहारे बैंक चल रहा है. उन में एक तो चपरासी ही है.”

“हां, सही कह रहे हैं. क्लर्क ही मैनेजर और खजांची है. वे भी 11-11 बजे तक आते हैं और 3 बजते ही चले जाते हैं.”

यह सुनते ही प्रकाश तपाक से बोल पड़ा, “आज तो अभी तक मैनेजर आया ही नहीं है.”

“कौन कहता है नहीं आया है, वही तो बैठा है सब से किनारे वाली सीट पर.”

“वही, जिस के पास दूसरे कर्मचारी बारबार जा रहे हैं? लेकिन सामने वाले ने तो बताया कि आज मैनेजर हैड औफिस गया है. वहां कोई मीटिंग है.”

“अजी काहे की मीटिंग, यह तो उन की रोज की बात है.” प्रकाश के ठीक बगल में बैठा व्यक्ति खीझता हुआ बोला, “वैसे भी हमें उन की मीटिंग से क्या लेनादेना.”

“आप ठीक कह रहे हो. चलो, हम सभी उस से पूछते हैं. बैंक का काम कब शुरू होगा.” प्रकाश बोला.

“हां…हां, चलो.” यह कहते हुए तीनों उठ खड़े हो गए. वे सीधा सब से किनारे बैठे बैंककर्मी के पास जा पहुंचे. एक ने पूछा,

“मैनेजर साहब, बैंक का काम शुरू होने में और कितनी देर लगेगी?”

“देर लगेगी? काहे की देर! काम तो शुरू हो चुका है. उधर देखो. जाओ, पैसे जमा करवाओ.”

“लेकिन मुझे तो पैसे निकलवाने हैं,” प्रकाश बीच में ही बोल पड़ा.

“पैसे निकलवाने हैं? छोटी राशि होगी तो वह निकल जाएगी, अगर बड़ी हुई तो उस के लिए 2 दिन बाद आना होगा. किंतु निकासी का चैक आज ही जमा कर देना होगा.”

“आज क्यों नहीं निकलेगी?” प्रकाश ने सवाल किया.

“क्योंकि बड़ी रकम के लिए हमें पहले हैड औफिस को सूचित करनी होती है. वहां से परमिशन मिलने पर ही उस की निकासी होती है. यह कोई सरकारी बैंक तो है नहीं कि जब चाहो, जितना चाहो निकाल लो. हमारे पास पैसे रखने और लाने ले जाने का कोई इंतजाम भी नहीं है. हम तो आप के जमा पैसे का ही लेनदेन करते हैं.” मैनेजर की तरह बैंककर्मी ने प्रकाश को समझाया.

“लेकिन साहब, 2 दिन बाद रविवार है.”

“सोमवार को आ जाना,” बैंककर्मी बोला.

“मैनेजर साहब कब आएंगे?” प्रकाश ने पूछा.

“आज नहीं आएंगे.”

“आप मैनेजर नहीं हो?” प्रकाश के साथ खड़े व्यक्ति ने पूछा.

“नहीं. हमारे हेड एक और हैं. तुम्हारा क्या काम है?” बैंककर्मी बोला.

“ मुझे भी पैसे निकलवाने हैं.”

“5 हजार तक है तो चैक उस काउंटर पर जमा कर दो. 5 मिनट में पेमेंट हो जाएगा. उस से बड़ी है तो तुम भी सोमवार को आना.” बैंककर्मी बोला.

“लेकिन मुझे तो 25 हजार निकलवाने हैं.” ग्राहक बोला.

“कोई बात नहीं उस की चैक मुझे दे दो.”

“आप को दे दूं? इधरउधर हो गया तो?” ग्राहक ने अविश्वास जताया.

“इधरउधर कैसे हो जाएगा? बगैर तुम्हारे साइन के कोई और कैसे ले जाएगा?”

“मैं तो अंगूठा लगाता हूं.” ग्राहक बोला.

“कोई बात नहीं, उस पर गवाह का साइन चाहिए होगा. पेमेंट के दिन उसे भी लाना होगा.”

“मुझे भी अम्मा का अंगूठा ही लगवाना है.” प्रकाश बोला.

“कोई बात नहीं. तुम चैक लाए हो?”

“हां, यह लीजिए.” कहते हुए उस ने 2 चैक बैंककर्मी के सामने बढ़ा दिए.

“अरे, इस में तो बहुत बड़ी रकम है. एक बार में एक चैक का ही पेमेंट होगा. दूसरे चैक में पीछे अंगूठे का निशान मेरे सामने ही लगाना होगा. उस के साथ गवाह का साइन जरूरी है.”

“लेकिन अम्मा तो चली गईं,” प्रकाश बोला.

“कोई बात नहीं, साइन वाला रख लेता हूं और दूसरा कल जमा करवा देना.” बैंककर्मी के कहने पर प्रकाश ने वही किया जो उस ने बताया और फिर प्रकाश भी उस रोज वापस घर लौट आया.

भुगतान करने में बैंककर्मी करने लगे आनाकानी

अगले रोज अम्मा को ले कर दोबारा बैंक गया. बैंककर्मी के कहे मुताबिक उस के सामने ही अम्मा का अंगूठा लगवा कर चैक जमा कर दिया. बैंककर्मी ने उस चैक पेमेंट के बारे में पूरे 4 दिन बाद की तारीख बाताई. प्रकाश अम्मा के साथ घर लौट आया. वह 2 लाख रुपए निकासी के लिए जमा चैक का पेमेंट के लिए 2 दिन बाद समय पर बैंक पहुंच गया. सीधा उसी बैंककर्मी के पास जा पहुंचा, जिसे चैक दिया था.

उसे देखते ही वह बोला, “इतनी सुबह आ गए. तुम्हें दोपहर बाद तक ही पेमेंट की उम्मीद है.”

“दोपहर तक? इतनी देर क्यों?”

“अरे भाई, कल रविवार था. आज दिन में हैडऔफिस के खजाने से पैसा आएगा. उस में वक्त लगेगा. तब तक दोपहर तो हो ही जाएगी. इसलिए तुम्हें कोई और काम है तो निपटा लो.” बैंककर्मी ने समझाया.

“कोई बात नहीं, मैं यहीं बैठता हूं.” प्रकाश बोला.

“नहीं, बैंक में किसी को 10-15 मिनट से अधिक बैठने की परमिशन नहीं है.”

“ठीक है साहबजी, मैं डेढ़ बजे आ जाऊंगा.” प्रकाश बोला.

प्रकाश दोबारा ठीक डेढ़ बजे बैंक पहुंच गया. वह सीधा उसी बैंककर्मी के पास गया, जिसे उस ने चेक दिए थे. बैंककर्मी उसे देखते ही बोला, “लगता है तुम्हारा पेमेंट आज नहीं हो पाएगा. यहां सर्वर ही नहीं चल रहा है.”

“कब तक होगा?” प्रकाश ने जिज्ञासा से पूछा.

“कोई भरोसा नहीं, सर्वर चल पड़ा तो तुरंत, वरना नहीं. वैसे एक घंटा हो गया है सर्वर के ब्रेक हुए. कभी आ रहा है कभी जा रहा है. बहुत स्लो चल रहा है. किसी का अकाउंट ही नहीं खुल पर रहा है.” बैंककर्मी समझाने लगा.

“मैं क्या करूं?” प्रकाश ने पूछा.

“तुम क्या कर सकते हो, मेरी तरह सर्वर चलने का इंतजार करो.”

प्रकाश बेंच पर जा कर बैठ गया. बैंक में इक्कादुक्का ग्राहक ही नजर आ रहे थे. उस ने देखा बैंक का मैनेजर अपने केबिन में बैठा है. मोबाइल फोन पर बातें कर रहा है. उस ने सोचा क्यों न मैनेजर से मिल लिया जाए. वह उठा और मैनेजर के केबिन तक जाने लगा, लेकिन उसे चपरासी ने रोक दिया. बोला, “देखते नहीं हो, साहब फोन पर बात कर रहे हैं. क्या काम है?”

प्रकाश हकलाता हुआ बोला, “प..प… पेमेंट लेना है.”

“तो वहां जाओ, पेमेंट वहां मिलेगा.” चपरासी डपटता हुआ बोला.

प्रकाश जा कर बेंच पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद वह बैंककर्मी के पास गया. उस ने वही पहले वाली बात दुहराई और सीट से उठ कर मैनेजर के केबिन में चला गया. प्रकाश वहीं खड़ा रहा. कुछ समय में ही बेंच पर आ कर बैठ गया. करीब एक घंटे से अधिक समय हो गया था. तब तक बैंक के लंच का समय हो गया था. प्रकाश उस रोज बैंक में करीब 3 बजे तक रुका रहा. उस के सामने ही धीरेधीरे कर सभी बैंककर्मी जाने लगे. सिर्फ मैनेजर और चपरासी रुका था. प्रकाश भी अपने घर लौट आया.

अगले रोज प्रकाश अपने भाई कमलेश के साथ बैंक गया. उस वक्त दिन के 12 बज चुके थे. बैंक में पूरी गहमागहमी थी. उस काउंटर पर भीड़ भी थी, जहां उस ने चैक जमा करवाए थे, लेकिन वहां कोई और क्लर्क बैठा था. प्रकाश थोड़ा असहज हो गया. दुविधा में आ गया, क्या करे, क्या न करे! फिर सोचा जब बैंक आया है तो क्लर्क से पूछना तो पड़ेगा ही.

कैशियर की बात पर प्रकाश हुआ हैरान

कुल 8 ग्राहकों के बाद प्रकाश का नंबर आया. उस ने अपने जमा चैक के बारे में पूछा, जो बीते शुक्रवार को दिए थे. क्लर्क ने उस के बारे में हामी भरी और नीचे की दराज से उस का चैक निकाल लिया. अपना चैक देख कर प्रकाश की आंखों में चमक आ गई. उस ने महसूस किया कि उस का पेमेंट आज जरूर हो जाएगा.

                                                                                                                                              क्रमशः

बैंक मैनेजर ने ही कर दिए अकाउंट साफ – भाग 1

मार्च का महीना बीतने वाला था. होली का त्यौहार खत्म हो चुका था. हिंदू रीतिरिवाज और परंपरा के मुताबिक शुभ कार्य करने के दिन आ चुके थे. इसे देखते हुए मध्य प्रदेश के जिला नर्मदापुरम के पोलगांव की रहने वाली राजकुंवर बाई ने अपने बेटे प्रकाश राजपूत और कमलेश राजपूत को बुलाया.

प्रकाश पहले आया और पूछा, “जी अम्मा, आप ने बुलाया? कोई विशेष बात है तो बोलो, मैं शहर जा रहा हूं.”

“तू शहर जा रहा है, अच्छी बात है, लेकिन मैं ने दूसरे काम के लिए बुलाया है. कमलेश को भी आवाज लगा दे.” राजकुंवर बोली.

“जी अम्मा,” प्रकाश बोला और ‘कमलेश…कमलेश’ की 2-3 आवाज लगा दी.

कमलेश भी आ गया. आते ही पूछा, “जी अम्मा, आप ने बुलाया है?”

“हां बेटा, मैं ने आज तुम दोनों को एक खास काम के लिए बुलाया है. मैं ने शिवपुर वाले जमीन के लिए पंडितजी से मुहूर्त निकलवा दिया है. यूं ही बेकार में पड़ी है. वहां तुम दोनों मिल कर एक अच्छा मकान बनवाने की तैयारी कर लो, तुम दोनों का परिवार भी बड़ा बन चुका है. बच्चे बड़े हो रहे हैं, वहां उन की पढ़ाई भी अच्छे से होगी.” रामकुंवर बाई ने कहा.

“लेकिन अम्मा उस जमीन पर मकान बनवाने में बहुत पैसा लगेगा, सडक़ से भी नीचे है. गड्ढा भरवाने और ऊंचा बनाने में ही बहुत पैसा खर्च हो जाएगा,” कमलेश दुविधा भरे लहजे में बोला.

“अरे कमलेश, तू हमेशा हां-ना में रहता है. उस में कितना पैसा खर्च हो जाएगा. मकान बनाने लायक तो तुम दोनों ने अपनेअपने पैसे बैंक में जमा कर ही रखे हैं. मेरे खाते में भी पड़े हैं. उस में से भी कुछ निकाल लेना.” रामकुंवर समझाती हुई बोलीं, “प्रकाश, तू कमलेश को समझा और मकान बनाने का खर्च निकाल, नक्शा बनवाङ”

प्रकाश ‘जी अम्मा’ बोल कर कमलेश से जमीन की स्थिति, आसपास के माहौल, सुविधाएं और चौहद्ïदी के बारे में बातें करने लगा. काफी समय तक दोनों भाई बनाए जाने वाले नए घर के बारे में बातें करते रहे. उस पर आने वाले खर्च का भी हिसाब लगाया. मोटामोटी आने वाला खर्च 25 लाख से ऊपर का बैठा. इतने में एक 4 कमरे, रसोई, स्टोररूम, पूजा घर आदि के साथ एक बरामदा, 2 टायलेट आदि बन सकता था.

मकान बनाने की बनाई योजना

यदि वे 15 लाख और खर्च कर लेते तो एक मंजिल और बनाई जा सकती थी. इस पर प्रशांत ने निर्णय किया कि दोनों भाई कुल खर्च का आधाआधा लगाएंगे. इसी बीच अम्मा बोलीं कि जमीन के गड्ढे की भराई का खर्च उस के पैसे से हो जाएगा. अगर जरूरत पड़ी तो ऊपर की मंजिल के लिए भी उस का पैसा इस्तेमाल किया जा सकता है.

उन्होंने मकान के लिए एक रूपरेखा तैयार कर ली थी. उसे बनाए जाने की शुरुआत के लिए भूमिपूजन की तारीख की जिम्मेदारी अम्मा ने ले ली. अम्मा ने दोनों बेटों को किसी मकान बनाने वाले ठेकेदार से बात करने के लिए कहा और उन्हें उसी वक्त से इस काम में लग जाने के निर्देश दिए.

सब कुछ समय से हो रहा था. एक हफ्ते के भीतर नए मकान बनाने की योजना बन गई. अब कुछ पैसे बैंक से निकाल कर ठेकेदार को एडवांस देने और जमीन में मिट्टी भराई का काम शुरू करना था. अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में प्रकाश और कमलेश अपनी मां की बैंक पासबुक और चैकबुक ले कर बैंक गए. तीनों का खाता शिवपुर की जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित में था.

प्रकाश और कमलेश खेतीबाड़ी करते थे. उन्होंने खेती से हुई आमदनी का पैसा बैंक में जमा करवा रखा था. छोटेमोटे खर्च के लिए बीचबीच में पैसे की निकासी करते रहते थे, लेकिन राजकुंवर के खाते से पैसे कब निकाले गए, इस का पता शायद ही दोनों भाइयों को हो. तीनों समय रहते बैंक पहुंच गए चुके थे.

सहकारी बैंक होने के कारण वहां न तो काफी बैंककर्मी थे और न ही ग्राहक. दिन के पौने 11 होने को आए थे, लेकिन बैंक के मैनेजर नहीं आए थे, जबकि वहां स्टाफ के 3 लोग आ गए थे. उन में एक चपरासी ही था. पूछने पर मालूम हुआ कि मैनेजर साहब आज थोड़ा लेट आएंगे. हैड औफिस गए हैं. वहां कोई मीटिंग है. उन के आने के बाद ही पैसे निकासी का काम हो सकता है, लेकिन पैसे जमा का काम किया जा सकता है. यह जान कर राजकुंवर उदास हो गईं.

उन्हें महसूस हुआ कि आज उन का काम नहीं हो पाएगा. कमलेश ने चिंतित मां को देख कर उन्हें आश्वस्त किया और कहा कि अगर वह यहां अधिक देर नहीं बैठ सकती हैं तो उस के साथ घर चलें. यहां उस के बड़े भाई सब कुछ संभाल लेंगे. राजकुंवर ने एक बार फिर बैंक के एक कर्मचारी से पूछा कि मैनेजर साहब कब तक आंएगे?

इस पर उस ने बताया कि वह लंच के बाद आ सकते हैं. वैसे कुछ कहा नहीं जा सकता है. अगर उन की मीटिंग लंबी चली तो नहीं भी आ सकते हैं. यह सुन कर राजकुंवर अपने छोटे बेटे के साथ वापस घर लौट आईं. प्रकाश वहीं रुका रहा.

प्रकाश राजपूत पहुंचा बैंक

प्रकाश बैंक में ही स्टील की बेंच पर बैठ गया था. बैंक की गतिविधियों को देखने लगा था. उस ने देखा कि बैंक का एक कर्मचारी बाकी कर्मचारियों से ज्यादा एक्टिव था. सभी उस से ही हर बात पर संपर्क करते थे. इस बीच उस की तरह ही कुछ और ग्राहक आ गए. 2 लोग प्रकाश की बगल में बैठ गए. उन में एक कुनमुनाता हुआ बोलने लगा, “बहुत ही बेकार का बैंक है. मुझ से गलती हो गई जो इस में खाता खुलवाया…”

इस पर दूसरा बोल पड़ा, “हां…हां, तुम सही कह रहे हो. यहां आधा प्रतिशत अधिक ब्याज के लालच में खाता खुलवा लेते हैं और बाद में पछताते हैं. इन की सर्विस अच्छी नहीं है. अपना ही पैसा निकालने के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं. 5 हजार से अधिक की राशि तो बगैर 8-10 चक्करों के देता ही नहीं है.”

                                                                                                                                              क्रमशः

कामुक पति की पांचवीं पत्नी का खेल

मध्य प्रदेश के जिला सिंगरौली के गांव बदरघटा के रहने वाले वीरेंद्र गुर्जर की पांचवीं पत्नी कंचन गुर्जर किचन में थी. रात का खाना बना रही थी. सब्जी गैस के एक चूल्हे पर चढ़ी हुई थी. वह खड़े हो कर चूल्हे के पास में ही आटा गूंथ रही थी. थकी हुई महसूस कर रही थी. हलकाहलका पेट में दर्द भी हो रहा था. आटा गूंथते हुए बीचबीच में बाएं हाथ से पेट पकड़ लेती थी.

दूसरी तरफ घर के एक कमरे में उस का पति वीरेंद्र गुर्जर शराब के पैग बना चुका था. उस ने कंचन से उबले अंडे को फ्राई करने की फरमाइश की थी. बाजार से खरीद कर लाए आधा दरजन उबले अंडे पौलीथिन में रखे थे. रोटी पकाने से पहले उन्हें फ्राई भी करना था. हालांकि भूखे बच्चे सब्जी पकने का इंतजार कर रहे थे, कंचन की भी कोशिश थी कि सब्जी जल्द पक जाए और वह अंडे फ्राई करने से पहले कुछ रोटियां सेंक ले.

बच्चों में घुलमिल गई कंचन

वह नहीं चाहती थी बच्चे उसे सौतेली मां की नजर से देखें. वह कुछ माह पहले ही उस घर में ब्याह कर आई थी. बच्चे वीरेंद्र की पहली पत्नियों के थे, जो छोड़ कर अपने प्रेमियों के साथ भाग गई थीं. 4 पत्नियों से उस के 4 बच्चे हुए थे. यह बात उस के 45 वर्षीय पति वीरेंद्र ने ही शादी से पहले बताई थी. तब उस ने बताया था कि उस ने बच्चों की खातिर ही उस के साथ शादी की है. बच्चों की अच्छी देखभाल करना उस का खयाल रखने से अधिक जरूरी है.

आटा गूंथते हुए कई बातें दिमाग में उभर रही थीं. बच्चे, पति, ससुराल, परिवार, सुखी संसार. सच तो यह था वह सब कुछ भी उसे नहीं मिल पाया था. फिर भी एक आज्ञाकारी पत्नी की तरह उम्र में 15 साल बड़े पति की सेवा में वह कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती थी.

सर्दी का समय था. रात के 9 बजने वाले थे. वह अस्वस्थ महसूस कर रही थी, शरीर गर्म तो नहीं था, लेकिन बुखार जैसा लग रहा था. हालांकि इस स्थिति से वह पहले भी गुजर चुकी थी. जो उसे अमूमन हर माह 2-3 दिनों में अपनेआप ठीक हो जाती थी. कई विचारों में खोई कंचन का ध्यान अचानक चूल्हे पर चढ़े प्रेशर कुकर की सीटी से टूट गया.

इधर कुकर ने सब्जी पक जाने के लिए लंबी सीटी बजा दी, उधर कमरे से वीरेंद्र की आवाज आई थी, “अरे कंचन, अभी तक अंडे फ्राई नहीं हुए क्या, कब से इंतजार कर रहा हूं. और हां, उन्हें अच्छी तरह फ्राई करना. चटखदार तीखा बनाना… प्याज अलग से भून लेना.”

“हूं, लगता है मेरे 4 हाथ हैं,” कंचन भुनभुनाती हुई प्रेशर कुकर को चूल्हे से उतारते हुए बुदबुदाई और उस पर तवा रख दिया.

उस के कानों में फिर तीखी आवाज गूंजी, “जरा तेजी से हाथ चला ले, बच्चे भी भूखे होंगे. उन के लिए भी कुछ अंडे बगैर मिर्च के निकाल लेना.”

कंचन ने वीरेंद्र की बातें अनसुनी कर चकला और बेलन निकाल लिया. रोटी बनाने के लिए लोई बनाने लगी थी. उसी वक्त 10 साल की बेटी कंचन के पास आ गई. वह बोली, “मम्मी, थाली निकाल लूं?”

“हां निकाल ले. कुकर भी खोल ले, भाई के लिए भी सब्जी निकाल लेना. दोनों साथ में खा लेना.”

“जी, दीदीजी.” लडक़ी बोली.

“फिर दीदी! कितनी बार कहा है मम्मी बोलो.”

“अब क्या करूं, तुम दीदी की तरह लगती हो. जुबान से दीदी ही निकल आती है. वैसे भी पापा ने तुम्हारे आने से पहले कहा था कि कोई दीदी आने वाली है. तभी से…” लडक़ी सफाई देने लगी.

“चल…चल, ठीक है, यह ले एक रोटी.” तवे से सीधे थाली में रोटी पलटती हुई कंचन बोली.

“और कितनी देर लगेगी अंडे फ्राई होने में… अभी तक मसाले की गंध भी नहीं आई है?” वीरेंद्र फिर तेज आवाज में बोला. कंचन कुछ बोले बगैर सिर्फ लडक़ी को देखने लगी. लडक़ी ने भी कंचन को देखा. दोनों की नजरें मिल गईं. उन के चेहरे के भाव बता रहे थे कि वीरेंद्र की बातें उन्हें अच्छी नहीं लगीं.

“एक रोटी और ले लो…” कुछ पल ठहर कर कंचन बोली और लडक़ी भी “जी मम्मी,” बोल कर दोनों हाथों से थाली उठा कर किचन से बाहर चली गई. उस के जाते ही वीरेंद्र किचन में आ घुसा. पीछे से कंचन को पकड़ लिया. अचानक दोनों हाथों से पकड़ में आने पर वह लडख़ड़ा गई. बेली हुई रोटी तवे पर डालने वाली थी. वह चूल्हे पर जा गिरी. कुछ नहीं बोली. सिर्फ उस का हाथ हटाने की कोशिश करने लगी.

“आज का मूड बना हुआ है, जल्दी अंडे लाओ, साथ में 2 पैग तुम भी लगा लेना.” वीरेंद्र रोमांटिक अंदाज में बोला.

“क्या करते हो, बेटी अभीअभी यहीं से गई. रोटियां लेने के लिए आने वाली होगी.” कंचन बोली.

“आ जाने दो न, क्या फर्क पड़ता है. इसे मसलने का मन हो रहा है…” बोलने के साथ ही वीरेंद्र ने कंचन के ब्लाउज में हाथ डाल दिया था.

“अभी जाओ यहां से,” कंचन के बोलते ही बेटी की आवाज आई, “मम्मी, रोटी लेने आ जाऊं?”

“आ जाओ,” कंचन तुरंत बोली. वीरेंद्र भी अपने कमरे में चला गया.

कामुक दरिंदा था वीरेंद्र गुर्जर

रात के 11 बज चुके थे. रसोई का सारा काम निपटा कर कंचन बैडरूम में आई थी. कमरे में वीरेंद्र नशे में धुत पड़ा हुआ था. शराब की बोतल बैड के नीचे लुढक़ी हुई थी, उस ने आधी बोतल खत्म कर ली थी. फ्राई अंडे प्लेट में बचे हुए थे. रोटी और सब्जी तो जस की तस पड़ी थी. कमरे में खानेपीने के बिखरे सामान को समेटती हुई कंचन सिर्फ अपना मुंह ही बना रही थी. उस के चेहरे से परेशानी साफ झलक रही थी, जिसे देखनेसमझने वाला उस वक्त कोई नहीं था. बच्चे भी दूसरे कमरे में सो गए थे.

बरतन समेटते हुए स्टील का ग्लास फर्श पर गिर पड़ा. झन्नऽऽ की तेज आवाज हुई. आवाज सुन कर वीरेंद्र की अचानक आंखें खुल गईं. एक नजर से कंचन को देखा और दूसरी नजर से दरवाजे को. वह उठा और पाजामे के नाड़े को ढीला करता हुआ सीधा बाथरूम की ओर चला गया.

उस के बाथरूम से वापस आने तक कंचन बिछावन की चादर ठीक कर चुकी थी. कमरे से जूठे बरतन आदि किचन में रख आई थी. बैड का तकिया और कंबल सहेजने लगी थी. अपने लिए अलग कंबल निकाल लिया था. तब तक वीरेंद्र भी बाथरूम से आ चुका था. कंचन ने पीछे मुड़ कर देखा, वह बगैर पाजामे के अंडरवियर में खड़ा दरवाजे की कुंडी लगा रहा था.

“मत बंद करो, मुझे भी बाथरूम जाना है,” कंचन बोली और बाथरूम चली गई. वीरेंद्र दोनों टांगें फैला कर बैड पर पसर गया. कंचन आ कर मुसकराती हुई बोली, “सर्दी में भी गरमी लग रही है, दारू की गरमी है.”

“अरे नहीं मेरी जान, तुम्हारा सैक्सी शरीर देख कर ही तो गरमी आ जाती है. जब सैक्स करूंगा, तब न जाने क्या होगा?”

“नहीं, आज वह सब कुछ नहीं होगा. 3 दिन तक तो एकदम नहीं,” कंचन बोली.

“क्यों नहीं होगा, मैं तो करूंगा. मैं तो सैक्स के बगैर एक दिन भी नहीं रह सकता ” वीरेंद्र बोला.

“मैं ने कह दिया कि आज नहीं तो नहीं. वैसे भी मुझे भीतर से बुखार जैसा लग रहा है. थोड़ी देर पहले तक पेट में हलकाहलका दर्द भी महसूस हो रहा था,” कंचना बोली.

“अभी तो ठीक है न, मेरे मूड को खराब मत कर…” वीरेंद्र बोला और बैड से उठ कर कंचन को अपनी ओर खींचने लगा. कंचन खुद को नहीं संभाल पाई. वीरेंद्र ने उस के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी. चूमने लगा. कपड़े खोलने लगा. कंचन उस की बाहों की गिरफ्त से निकलने की कोशिश करती रही. बोलती रही, “आज नहीं, माहवारी का पहला दिन है…”

जबरदस्ती बनाए अप्राकृतिक संबंध

वीरेंद्र ने उस की एक नहीं सुनी और अपनी जिद पर अड़ा रहा. उस रात उस ने जबरन कंचन के साथ अप्राकृतिक सैक्स संबंध बनाए. कंचन को उल्टियां भी हो गईं. देह चूरचूर हो गई. शराब की गंध नथुने में भर गई. जीभ पर शराब का तीखापन भरा हुआ था.

अप्राकृतिक सैक्स संबंध  से काफी पीड़ा हो रही थी. उस की आंखें सूज गई थीं. गालों पर थप्पड़ों के निशान भी पड़ गए थे. शरीर पर नाखूनों से नोचे जाने की खरोंचें भी थीं. किसी तरह से उस ने कपड़े पहने. कंबल घिसटते हुए बच्चों के कमरे में आ गई. तब तक वीरेंद्र निढाल हो चुका था, कंबल में खर्राटे भरने लगा था.

कंचन वीरेंद्र गुर्जर की पांचवीं पत्नी थी. वीरेंद्र अव्वल दरजे का शराबी था. साथ ही अय्याश किस्म का व्यक्ति था. वह कहने को इंसान था, लेकिन उस के चरित्र में हैवानियत शामिल थी. कामुकता से भरा हुआ था. सैक्स की बातों से उबलता रहता था. बातबात में घूमफिर कर सैक्स की बातें ही उस के जुबान से निकल पड़ती थीं. मांबहन की भद्ïदी गालियों के साथसाथ यौनाचार संबंधी गालियां तो उस की जुबान पर रहती थीं.

पोर्न फिल्में देखना था पसंद

मोबाइल पर अश्लील तसवीरें, वीडियो और पोर्न फिल्में देखना, द्विअर्थी चुटकुले सुना कर मजे लेता था. राह चलती लड़कियों को निहारना, औरतों के साथ बातें करने की कोशिश करना, औरतों की भीड़ में घुस जाना आदि उस की आदतें थीं. उस की अश्लील बातों से उसे जानने वाले लोगों को कई शिकायतें थीं, उस की पत्नी को भी उस से काफी शिकायतें थीं. यही कारण था कि उसे 4 बीवियां छोड़ कर जा चुकी थीं. कंचन पांचवीं पत्नी थी. वह भी कुछ महीने में ही उस की हरकतों से ऊब गई थी.

उस रात तो वीरेंद्र ने हद ही कर दी थी, जिस से उस का दिल टूट गया था. मन दुखी हो गया था. उस ने मन ही मन उसे सबक सिखाने की ठान ली. वह उस से खौफ खाने लगी थी. अप्राकृतिक यौन संबंध कायम करना उस की आदत बन चुकी थी, जिस से छुटकारा पाने के लिए साजिश की एक व्यूह रचना कर डाली.

कंचन ने वीरेंद्र को छोड़ कर जाने वाली पत्नियों के कारण के बारे में पता किया था. उसे पता चला कि वीरेंद्र गुर्जर की पहली शादी कृष्णा नाम की युवती से हुई थी. उस से एक बेटी पैदा हुई. तब उस ने दूसरी शादी लीला से की. उस से 2 बेटे पैदा हुए.

तीसरी शादी उस ने संगीता से की. चौथी शादी उस ने भूलीबाई से की, जिस से एक बेटी पैदा हुई. चारों पत्नियां उस की अय्याशी से आजिज आ कर उसे छोड़ गई थीं. जैसे ही एक पत्नी छोड़ कर चली जाती तो वह फिर शादी कर लेता था.

पांचवीं शादी उस ने कंचन से की थी. उस की कंचन से मुलाकात अक्तूबर, 2022 में भांडा की गुफा घूमने के दौरान हुई थी. वीरेंद्र दबंग प्रवृत्ति का था. वह ब्याज पर पैसे देने का धंधा करता था. उन के साथ भी वीरेंद्र उसी तरह पेश आता था, जैसा उस रात कंचन के साथ आया था. वे चारों उस की प्रताडऩा से ऊब चुकी थीं.

ऊब चुकी थी अय्याश पति से

सुबह का समय था. तारीख थी 21 फरवरी, 2023. कंचन को एक ग्रामीण ने बताया कि उस के पति की लाश गौभा चौकी के पास जंगल में पड़ी है. कंचन यह खबर सुनते ही भागीभागी जंगल की ओर गई. वहां वीरेंद्र की अर्धनग्न अवस्था में लाश पड़ी थी. वह रोने लगी और उपस्थित लोगों को बताया कि उस का पति 2 दिन पहले लकड़ी काटने के लिए गया था.

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किसी व्यक्ति ने जंगल में लाश पाए जाने की सूचना सिंगरौली थाने को भी दे दी. वहां से टीआई अरुण कुमार पांडेय और सीएसपी देवेश पाठक पूरी टीम के साथ गांव बदरघटा से कुछ देर जंगल में घटनास्थल पर पहुंच गए. इस की सूचना उच्च अधिकारियों को भी दे दी गई. साथ ही एसपी सिंगरौली वीरेंद्र सिंह और एएसपी शिवकुमार वर्मा भी वहां पहुंच गए. मौकामुआयना करने के बाद एसपी ने देवेश पाठक के नेतृत्व में एक जांच टीम बनाई.

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घटनास्थल पर पहुंची टीम ने लाश का मुआयना करने पर पाया कि अर्धनग्न लाश का प्राइवेट पार्ट काटा गया था. इस आधार पर टीम ने अनुमान लगाया कि उस की हत्या किसी अवैध संबंध का अंजाम है. इस का पता लगाने के लिए सब से पहले पूछताछ उस की पत्नी कंचन से की जाने लगी. उस ने पुलिस को बताया कि उस के पति के कई औरतों से अवैध संबंध थे. और उस की पहले की 4 बीवियों का भी वह दुश्मन बना हुआ था.

पांचवीं पत्नी ने कुल्हाड़ी से की हत्या

जांच अधिकारी को कंचन की बात अधूरी और बनावटी लगी. उस की उम्र और पति की उम्र के बीच का अंतर भी कई संदेह पैदा कर रहा था. उस से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने जल्द ही भेद खोलते हुए बताया कि वीरेंद्र की हत्या उसी ने की है.

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ऐसा करने के पीछे उस ने एकमात्र कारण बताया कि वह उसे काफी प्रताडि़त करता था. उसे शराब के नशे में मारतापीटता था. इस कारण ही 4 पत्नियां उसे छोड़ कर जा चुकी थीं. उस की सहनशक्ति समाप्त हो चुकी थी और उस के चंगुल से निकलने के लिए खौफनाक साजिश रच डाली थी.

हत्या को अंजाम देने के बारे में उस ने बताया कि पहले पति के खाने में नींद की 20 गोलियां मिली दीं. जिसे खाने के बाद वह गहरी नींद में सो गया. इस के बाद उस ने उस की गला घोंट कर हत्या कर दी. हालांकि असली खेल उस ने बाद में किया, जिस से उम्मीद थी वह पुलिस से बच जाएगी. वह खेल अवैध संबंध साबित करने का था.

योजना बना कर कंचन पति की हत्या के बाद उस की लाश को साइकिल पर लाद कर एक सुनसान जगह पर ले गई. वहां उस ने कुल्हाड़ी से उस का गला काटा और फिर गुप्तांग को भी कुल्हाड़ी से काट कर सडक़ पर फेंक दिया. इस के बाद चुपचाप घर आ गई. उस ने बताया कि ऐसा इसलिए किया ताकि जब पुलिस को लाश मिले, तब उसे अवैध संबंध के शक में हत्या का मामला लगे.

कंचन द्वारा अपराध स्वीकारे जाने के बाद पुलिस ने उसे 3 मार्च, 2023 को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

शादी की जिद में पति मिला न प्रेमी

फोन नंबर अपडेट न कराने पर खाते से 24 लाख गायब – भाग 3

यहां आ कर मयंक ने औनलाइन बिजनैस करने वाली एक कंपनी में काम की शुरुआत की. कंपनी के दफ्तर में वह कंप्यूटर के जरिए प्रोडक्ट्स के औनलाइन पेमेंट का काम देखता था. कंपनी का आसपास के इलाकों के साथ उज्जैन, देवास, इंदौर जैसे शहरों में अपना अच्छाखासा कारोबार था. कंपनी की तरफ से उसे 25 हजार रुपए की सैलरी मिलती थी.

मयंक के शौक बड़े मंहगे थे, जिस के चलते उस का खर्च इस सैलरी से पूरा नहीं होता था. उज्जैन में रहते हुए वह जल्दी रुपए कमाने के चक्कर में सट्टेबाजी के खेल में शामिल हो गया. वह आईपीएल औनलाइन सट्टे में बड़ेबड़े दांव लगाने लगा था और नशे का भी आदी हो गया था. जब उस के अपने खर्चे पूरे नहीं हुए तो वह अपने दोस्तों से कर्ज लेने लगा.

जालसाजी से बनवाया एटीएम कार्ड

जुलाई, 2022 में मयंक ने एयरटेल कंपनी की एक नई सिम ली थी. सिम एक्टीवेट होने के करीब एक सप्ताह बाद उस के मोबाइल पर यूको बैंक से 5 लाख रुपए एकाउंट में जमा होने का मैसेज आया तो उसे आश्चर्य हुआ. क्योंकि उस का इस बैंक में कोई एकाउंट नहीं था.

उस ने उज्जैन में यूको बैंक जा कर पता किया तो उसे मालूम हुआ कि जिस बैंक एकाउंट में 5 लाख रुपए जमा हुए हैं, वह एकाउंट सालीचौका के पुरुषोत्तम मिश्रा का है. उस ने औनलाइन मैसेज भेज कर यह भी जानकारी कर ली कि इस बैंक एकाउंट में 24 लाख रुपए से अधिक रकम जमा है. इतनी बड़ी रकम एकाउंट में देख कर मयंक के मन में लालच की भावना आ गई और यहीं से उस के शातिर दिमाग में फ्रौड करने का आइडिया आया.

वह अगस्त, 2022 में उज्जैन से सालीचौका आया और 2-3 दिन यहीं रुक कर बैंक और पोस्ट औफिस की रैकी की. इस के बाद उस ने सालीचौका यूको बैंक जा कर एटीएम कार्ड जारी करने की एप्लीकेशन दे दी. बैंक में ड्यूटी करने वाले क्लर्क ने उस से कहा, “एटीएम कार्ड के लिए औनलाइन रिक्वेस्ट भेज दीजिए. सप्ताह भर के अंदर एटीएम आप के पते पर पहुंच जाएगा. पते में आप का मोबाइल नंबर रहेगा.”

मयंक ने मोबाइल फोन के जरिए औनलाइन रिक्वेस्ट भेज दी और उज्जैन चला गया. करीब एक सप्ताह के बाद मयंक के मोबाइल पर काल आई और काल करने वाले ने बताया, “मैं सालीचौका पोस्ट औफिस से पोस्टमैन बोल रहा हूं. आप के नाम का एक लिफाफा आया है, इसे पोस्ट औफिस आ कर ले लीजिए.”

मयंक समझ गया कि एटीएम कार्ड आ चुका है, इसलिए उस ने पोस्टमैन को फोन पर कहा, “मैं आज बाहर हूं, कल पोस्ट औफिस आ कर लिफाफा ले लूंगा.”

बैंककर्मी के शामिल होने की संभावना

इस के बाद वह बाइक से उज्जैन सालीचौका के लिए निकल पड़ा. करीब 400 किलोमीटर का सफर तय कर के वह दूसरे दिन सालीचौका पोस्ट औफिस पहुंच गया. उस ने पोस्ट औफिस से लिफाफा रिसीव कर लिया और चुपचाप यूको बैंक पहुंच गया. बैंक में उस समय भीड़भाड़ ज्यादा थी, इसी का फायदा उठाते हुए मयंक ने जब एटीएम कार्ड एक्टीवेट करने का निवेदन किया तो बैंक कर्मचारी नरेंद्र राजपूत ने खाताधारक की पहचान को नजरंदाज कर मयंक को एटीएम कार्ड एक्टीवेट करने और पासवर्ड जनरेट करने के लिए ग्रीन पिन दे दी और मयंक ने बैंक के बाहर लगे एटीएम मशीन से एटीएम कार्ड एक्टीवेट भी कर लिया.

यहां पर यह बात हजम नहीं हो रही कि बैंककर्मी ने बिना केवाईसी वेरिफाई किए एटीएम का फार्म क्यों जमा किया और पासवर्ड जनरेट के लिए उसे ग्रीन पिन भी दे दी. एटीएम कार्ड एक्टीवेट होने के बाद मयंक ने सालीचौका के यूको बैंक के एटीएम से 40 हजार रुपए निकाले और उज्जैन रवाना हो गया. इस के बाद उस ने उज्जैन और इंदौर के एटीएम से 40-40 हजार की रकम 8 बार निकाल कर लैपटौप और आईफोन खरीद लिए.

बाकी रकम उस ने मोबाइल बैंकिंग के जरिए अपने आईसीआईसीआई बैंक एकाउंट में ट्रांसफर कर ली. बाद में करीब 10 लाख रुपए उस ने चैक बुक के द्वारा अपने एकाउंट से निकाल लिए. इस के बाद मयंक इस एकाउंट से एटीएम कार्ड के जरिए लगातार पैसे निकालने लगा. जिन लोगों से उस ने कर्ज ले रखा था, उन के बैंक खातों में मयंक ने मोबाइल बैंकिंग के जरिए रुपए ट्रांसफर कर अपना कर्ज चुका दिया था.

इधर पुरुषोत्तम मिश्रा घर बैठे निश्चिंत थे कि उन के जमा रुपए बैंक में सुरक्षित हैं. उन के खाते से उन का नया मोबाइल नंबर लिंक न होने की वजह से किसी तरह के मैसेज भी उन्हें नहीं मिल रहे थे. पुरुषोत्तम मिश्रा की बेटी की शादी यदि न होती तो उन्हें कभी पता भी नहीं चलता कि उन के बैंक एकाउंट से रुपए निकाले गए हैं.

बैंक एकाउंट से लाखों रूपए पार करने वाले शातिर अपराधी मयंक को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया तो उस की निशानदेही के आधार पर मयंक सिंह के कब्जे से नकद 5 लाख रुपए, घटना में प्रयुक्त वीवो कंपनी के 2 मोबाइल, एक सीडी डीलक्स बाइक जिस का रजिस्ट्रेशन नंबर यूपी32 एलआर5770 है, एक आईफोन 13 प्रो, एटीएम कार्ड, पासबुक मौके पर जब्त किए गए.

आरोपी मयंक सिंह उर्फ प्रताप को यूको बैंक सालीचौका ले जा कर भी पूछताछ की गई. इस के बाद आरोपी को माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे नरसिंहपुर जेल भेज दिया गया.

इस बैंक धोखाधड़ी में इस बात पर भी शक होता है कि औनलाइन बैंकिंग रजिस्ट्रेशन के लिए मयंक के पास खाताधारक पुरुषोत्तम मिश्रा की पर्सनल जानकारी कहां से आई. बिना पर्सनल जानकारी के औनलाइन बैंकिंग रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता.

पुलिस यदि निष्पक्ष रूप से इस मामले की जांच करे तो वह मयंक का साथ देने वाले अन्य साजिशकर्ताओं तक भी पहुंच सकती है.

—कथा पुलिस सूत्रों और पीडि़त पुरुषोत्तम मिश्रा के परिवार से बातचीत पर पर आधारित

इस तरह बचें ऐसी ठगी से

डिजिटल युग में ठगों ने भी खुद को अपग्रेड कर लिया है. यह लोगों की थोड़ी सी भी लापरवाही का फायदा उठा लेते हैं. जैसे पुरुषोत्तम मिश्र ने अपना फोन नंबर अपने बैंक खाते से अपग्रेड करने में लापरवाही की, जिस का जालसाज मयंक ने फायदा उठाया.

मयंक को बैंक से एटीएम जारी होने और ग्रीन पिन के जरिए एटीएम कार्ड एक्टीवेट करने में किसी बैंक कर्मचारी की भूमिका भी हो सकती है, जिस की जांच पुलिस टीम कर रही है. इस फ्रौड में यदि कोई बैंक कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उस के खिलाफ भी अवश्य कानूनी काररवाई की जाएगी.

साइबर फ्रौड से बचने के लिए डिजिटल युग में बैंक कस्टमर का अलर्ट रहना बेहद जरूरी है. औनलाइन फ्रौड का शिकार होने से बचने के लिए बैंक में समयसमय उपस्थित हो कर ईकेवाईसी कराने के साथ अपने मोबाइल नंबर पर मैसेजिंग सर्विस भी एक्टीवेट करानी चाहिए. यदि किसी का मोबाइल नंबर गुम हो जाए या किसी वजह से बंद हो जाए तो पुलिस कंप्लेंट कर संबंधित फोन कंपनी से उसी नंबर की दूसरी सिम प्राप्त कर लेनी चाहिए. यदि पुराना नंबर लंबे समय तक बंद रहे तो बैंक जा कर अपना नया नंबर बैंक एकाउंट से लिंक जरूर कराना चाहिए.

ईकेवाईसी, पैन कार्ड का आधार कार्ड से लिंक कराने आदि के लिए आप के पास कोई लिंक आए तो उस लिंक पर कभी क्लिक न करें. औनलाइन ट्रांजैक्शन करते समय बहुत सावधानी बरतें. अपने एटीएम का नंबर, पासवर्ड, सीवीवी और बैंक एकाउंट डिटेल्स किसी व्यक्ति से शेयर न करने आदि से आप साइबर ठगी से बच सकते हैं. यदि इस के बावजूद आप साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं तो इस की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दें.

—सचि पाठक

एसडीपीओ, गाडरवारा