फोन नंबर अपडेट न कराने पर खाते से 24 लाख गायब – भाग 1

54 साल के पुरुषोत्तम मिश्रा नरसिंहपुर जिले के सालीचौका नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले खैरुआ गांव में रहते हैं. अपने गांव में उन का खेतीकिसानी का काम है, इस के साथ ही आसपास के इलाकों में पूजापाठ करने से उन्हें साल भर में अच्छीखासी आमदनी हो जाती है.

पुरुषोत्तम मिश्रा के परिवार में पत्नी सहित एक बेटा और 2 बेटियां हैं. गांवकस्बों में बेटियों की शादी में खूब दहेज देना पड़ता है, तब जा कर कहीं अच्छा रिश्ता मिलता है. इसी बात को ध्यान में रख कर पुरुषोत्तम ने भी अपनी बेटियों के विवाह के लिए धीरेधीरे करीब 24 लाख रुपए की रकम इकट्ठा कर ली थी.

इस जमापूंजी से वह अपनी बेटियों की शादी करना चाहते थे. वह जानते थे कि घर में बड़ी रकम रखना खतरे से खाली नहीं है, इस लिहाज से अपने रुपयों को उन्होंने सालीचौका जिस का पुराना नाम बाबई कला है, की यूको बैंक में जमा किए हुए थे. उन का सपना था कि इस रकम से वह अपनी दोनों बेटियों का विवाह धूमधाम से करेंगे.

वक्त के साथ उन की बेटियां जवान होने लगीं और उन की बड़ी बेटी पूजा का रिश्ता तय हो गया. 5 जून, 2023 को पूजा की शादी होने वाली थी और इस के लिए उन के परिवार ने शादी की तैयारियां शुरू कर दी थीं. शादी के लिए मैरिज गार्डन, कैटरिंग आदि की बुकिंग के साथ दहेज का सामान लाने के लिए जब पैसों की जरूरत पड़ी तो अप्रैल महीने के आखिरी हफ्ते में वह यूको बैंक की शाखा में अपने रुपए निकालने के लिए पहुंचे.

विदड्राल फार्म में उन्होंने 5 लाख रुपए की रकम भर कर वाउचर बैंक के क्लर्क को दिया तो बैंक क्लर्क बोला, “मिश्राजी, आज तो इतने कैश की व्यवस्था नहीं हो पाएगी, 1-2 दिन बाद रुपए ले जाना. अभी जरूरत हो तो 40-50 हजार रुपए का विदड्राल भर दीजिए.”

“ठीक है, अभी जरूरत नहीं है, मैं 1-2 दिन बाद आ कर रुपए निकाल लूंगा. लेकिन मुझे अपने खाते का बैलेंस तो बता दीजिए. बैंक की पासबुक प्रिटिंग मशीन तो कई दिनों से बंद पड़ी है.” मिश्राजी ने पासबुक क्लर्क की ओर बढ़ाते हुए कहा.

गांव कस्बों की बैंक शाखाओं में ज्यादा रकम खाते से निकालने में यह समस्या बनी रहती है, इसलिए मिश्राजी ने 1-2 दिन बाद रुपए निकालने की सोच कर संतोष कर लिया. बैंक क्लर्क ने कंप्यूटर में मिश्राजी के बैंक एकाउंट नंबर को डाल कर बैलेंस चैक करते हुए कहा, “आप के एकाउंट में तो केवल 314 रुपए जमा हैं.”

एकाउंट हो गया खाली

बैंक क्लर्क की बात पर उन्हें भरोसा ही नहीं हो रहा था. उन्होंने बैंक क्लर्क से हंसते हुए कहा, “मजाक मत कीजिए साहब, अच्छे से चैक कर के बैंलेंस बता दीजिए. ब्याज वगैरह मिला कर करीबन 24 लाख रुपए की रकम तो जमा होनी ही चाहिए.”

“मैं मजाक नहीं कर रहा मिश्राजी, आप के खाते में इतना ही बैलेंस है.” बैंक क्लर्क ने गंभीरतापूर्वक कहा. बैंक क्लर्क के इतना कहते ही मिश्राजी चौंक गए. जीवन भर कड़ी मेहनत से जुटाई रकम अचानक कहां चली गई, उन्हें समझ नहीं आ रहा था. उन्होंने अपने आप को संभालते हुए बैंक क्लर्क को बताया, “सर, मैं ने तो बैंक से कोई रकम निकाली ही नहीं, फिर मेरे खाते में जमा 24 लाख रुपए किस ने निकाल लिए.”

“अभी मेरे पास इतना समय नहीं है. मुझे दूसरे कस्टमर का काम करने दीजिए, आप के खाते के ट्रांजैक्शंस की जानकारी मैं बाद में बताऊंगा.” बैंक क्लर्क बोला.

पुरुषोत्तम मिश्रा पसीने से तरबतर हो गए. वे काउंटर छोड़ कर सामने पड़ी कुरसी पर बैठ गए. थोड़ी देर में जब वे सामान्य हुए तो तत्काल अपने भतीजे अंकित को काल कर के उसे तुरंत बैंक बुला लिया. अंकित मिश्रा उस समय एक मंदिर में पूजापाठ कर रहा था, जैसे ही चाचा ने उसे फोन कर तत्काल बैंक आने को कहा तो वे कुछ ही देर में यूको बैंक पहुंच गया.

पुरुषोत्तम मिश्रा ने अपने भतीजे को पूरी जानकारी दी तो अंकित भी सदमे में आ गया. बहन की शादी के ऐन वक्त पर पाईपाई जोड़ कर जुटाई गई रकम बैंक जैसी सुरक्षित जगह से गायब होने पर वह खुद परेशान था. उस ने बैंक मैनेजर के पास पहुंच कर चाचा के खाते से निकाले गए रुपयों की जानकारी मांगी.

बैंक मैनेजर ने एकाउंट चैक कर उन्हें बताया, “आप के खाते से पिछले 7-8 महीनों में एटीएम कार्ड और मोबाइल बैंकिंग के जरिए कई बार पैसे निकाले गए हैं.”

“लेकिन सर, मैं ने तो बैंक से कभी एटीएम कार्ड लिया ही नहीं.” आश्चर्य व्यक्त करते हुए पुरुषोत्तम मिश्रा बोले.

“लेकिन आप के नाम से तो अगस्त 2022 में एटीएम कार्ड जारी हुआ और आप का मोबाइल नंबर भी खाते में दर्ज है.” मोबाइल नंबर बोलते हुए बैंक मैनेजर ने कहा.

“ये मोबाइल नंबर तो कब से बंद है. और न ही कभी मैं ने एटीएम के लिए एप्लाई किया है सर,” पुरुषोत्तम मिश्रा ने कहा.

बैंक मैनेजर भी पसोपेश में पड़ गए कि आखिर माजरा क्या है. बैंक एकाउंट की डिटेल्स में ज्यादातर ट्रांजैक्शन एटीएम कार्ड के जरिए इंदौर, उज्जैन के एटीएम से किए गए थे और अलगअलग ट्रांजैक्शन में अगस्त, 2022 से मार्च, 2023 तक कुल 24 लाख 4 हजार 199 रुपए खाते से निकाले गए थे. पुरुषोत्तम मिश्रा और भतीजा अंकित हैरान थे कि आखिर ऐसा कौन शख्स है, जो इंदौर, उज्जैन में उन का एटीएम कार्ड यूज कर रहा है.

फोन नंबर अपडेट न कराने पर हुई धोखाधड़ी

जब पुरुषोत्तम मिश्रा भतीजे अंकित के साथ बैंक से घर पहुंचे तो घर में पत्नी व बच्चे उन का इंतजार ही कर रहे थे. आते ही पत्नी ने पूछा, “बैंक से रुपए ले आए?”

पुरुषोत्तम मिश्रा के मुंह से कोई शब्द नहीं निकल पाया. वह निढाल हो कर कमरे में पड़ी कुरसी पर बैठ गए. पत्नी ने उन की हालत देख कर फिर पूछा, “लगता है, बैंक से रुपए नहीं मिले, इस बैंक का यही हाल है. जरूरत के समय पैसे नहीं मिलते. अब 2-4 दिन चक्कर काटने पड़ेंगे, तब कहीं जा कर रुपए हाथ में आएंगे.”

तब तक उन का भतीजा अंकित भी बाइक को बाहर खड़ी कर घर के अंदर दाखिल हो चुका था. उस ने आ कर चाची को बताया, “चाचाजी के एकाउंट से किसी ने पूरे रुपए निकाल लिए हैं, हमारे खाते में किसी ने सेंधमारी की है.”

मृतक की वीडियो से खुला हत्या का राज़

शादी की जिद में पति मिला न प्रेमी – भाग 3

शादी नहीं, मौजमस्ती ही चाहता था गिरिजा शंकर

कहते हैं कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते, दोनों के प्रेम प्रसंग की स्टोरी की जानकारी घर वालों को हो गई. धनराज ने सोचा कि समाज में उस की बदनामी हो, इस के पहले बेटी के हाथ पीले कर देना चाहिए. यही सोच कर पूर्णिमा की शादी गांव सारद सिवनी में अशोक नाम के लडक़े से तय कर दी. 22 अप्रैल, 2023 को पूर्णिमा की शादी होने वाली थी, किंतु वह प्रेम संबंध के चलते अपनी भाभी के भाई गिरिजा शंकर पर शादी करने का दबाव बना रही थी.

उस ने गिरिजा शंकर से साफतौर पर कह दिया था कि वह शादी करेगी तो सिर्फ उसी से. और गिरिजा शंकर पूर्णिमा से शादी करने का इच्छुक नहीं था, क्योंकि उसे अपनी बहन का घर उजडऩे का डर था. गिरिजा शंकर जानता था कि समाज के कानूनकायदे पूर्णिमा से विवाह की इजाजत नहीं देंगे. गिरिजा शंकर की बहन शारदा को उस के पूर्णिमा के साथ संबंधों की जानकारी थी. उस ने भी भाई से कहा था, “भैया कोई ऐसा कदम न उठाना कि मेरा घर उजड़ जाए.”

इधर पूर्णिमा गिरिजा शंकर पर शादी का दबाव बना रही थी. उस का कहना था कि 22 तारीख के पहले हम लोग भाग कर शादी कर लेते हैं. गिरिजा शंकर के सामने एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई थी. वह कोई निर्णय नहीं ले पा रहा था. आखिर में उसे अपनी बहन के सुखी दांपत्य जीवन का खयाल आया और उस ने पूर्णिमा को अपने रास्ते से हटाने की योजना बनाई.

पूर्णिमा लगातार गिरिजा शंकर पर जल्द शादी करने का दबाव बना रही थी. ऐसे में योजना के मुताबिक 5 अप्रैल को गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा को फोन कर के कहा, “आज कहीं घूमने चलते हैं, वहां मिल कर शादी करने का प्लान बनाते हैं.”

“लग्न होने की वजह से घर वाले अब बाहर घूमने से मना करते हैं.” पूर्णिमा ने जवाब दिया.

“सिलाई क्लास का बहाना बना कर आ जाओ, मैं बाइक ले कर गांव के बाहर पीपल के पेड़ के पास मिलता हूं.” गिरिजा शंकर ने राह सुझाते हुए कहा.

“ओके, तुम गांव आ कर फोन करना, मैं मम्मी को मनाती हूं.” पूर्णिमा ने कह कर फोन काट दिया.

गिरिजा शंकर ने प्यार में किया विश्वासघात

दोपहर करीब एक बजे गिरिजा शंकर लिम्देवाड़ा गांव पहुंच गया और पूर्णिमा को फोन कर के बुला लिया. पूर्णिमा ने मां से सिलाई सीखने का बहाना किया और सिर और मुंह को दुपट्ïटे से ढंक कर गांव के बाहर पीपल के पेड़ के पास पहुंच गई. गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा को बाइक पर बिठाया और गांव से निकल पड़ा.

रास्ते में प्यारमोहब्बत की बातें करते हुए वे गांगुलपरा और बंजारी गांव के बीच पडऩे वाले जंगल की पहाड़ी पर पहुंच गए. वहां पहुंच कर जब पूर्णिमा ने गिरिजा शंकर से शादी करने की बात कही तो गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा को अपने आगोश में लेते हुए भरोसा दिलाया कि वह 22 अप्रैल के पहले उस से शादी कर लेगा. पूर्णिमा ने उस की बातों पर भरोसा कर लिया. उस के बाद उन्होंने 2 बार शारीरिक संबंध बनाए.

संबंध बनाने के बाद वे पेड़ की छांव में एक चट्ïटान पर बैठ कर आराम कर रहे थे, तभी गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा के गले में पड़े दुपट्ïटे से उस की गला घोंट कर हत्या कर दी. इस के पहले पूर्णिमा कुछ समझ पाती, पलभर में ही उस की जुबान बाहर निकल आई और उस की मौत हो गई.

प्रेमिका का मर्डर करने के बाद कातिल प्रेमी गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा का मोबाइल तोड़ कर दुपट्ïटे के साथ वहीं फेंक दिया. पूर्णिमा के शरीर के ऊपर सूखे पत्ते का ढेर लगा कर गिरिजा शंकर वहां से बाइक ले कर वापस किरनापुर आ गया. जब पूर्णिमा शाम तक घर नहीं लौटी तो गिरिजा शंकर की बहन शारदा ने मोबाइल पर उस से पूर्णिमा के संबंध में पूछताछ की तो उस ने साफ मना करते हुए कह दिया कि उसे पूर्णिमा के संबंध में कोई जानकारी नहीं है.

मगर पुलिस की पैनी नजर से वह ज्यादा दिनों तक नहीं बच सका और पूर्णिमा के कत्ल का जुर्म कुबूल कर लिया. आज भी समाज के ज्यादातर तबकों में यही परंपरा है कि जिस घर में लड़कियों को ब्याहा जाता है, उस घर की लडक़ी को अपने घर की बहू नहीं बनाते हैं. लेकिन कहते हैं कि इश्क और जंग में सब जायज है.

पूर्णिमा भी समाज के नियमों के विपरीत अपने भाई के साले को दिल दे बैठी और उस के साथ घर बसाने का सपना देख रही थी. गिरिजा शंकर तो केवल पूर्णिमा के शरीर का सुख भोग रहा था, उस के साथ शादी करने को वह कतई तैयार नहीं था.

पुलिस ने गिरिजा शंकर की निशानदेही पर पूर्णिमा की हत्या में प्रयुक्त बाइक और उस का मोबाइल भी घटनास्थल से बरामद किया और 17 अप्रैल को रिमांड की अवधि खत्म होने पर गिरिजा शंकर को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे बालाघाट जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

शादी की जिद में पति मिला न प्रेमी – भाग 2

जब पुलिस ने दोनों के मोबाइल लोकेशन बंजारी के जंगल में मिलने की बात कही और सख्ती से पूछताछ की तो पुलिस की सख्ती के आगे वह जल्दी ही टूट गया और सारी सच्चाई उस ने पुलिस के सामने बयां कर दी. गिरिजा ने बताया कि उस ने पूर्णिमा का मर्डर कर दिया है.

जंगल में मिली पूर्णिमा की लाश

14 अप्रैल, 2023 को गिरिजा शंकर ने पुलिस को बताया कि उस ने पूर्णिमा को गांगुलपरा और बंजारी के बीच जंगल की पहाड़ी में ले जा कर उस की गला घोट कर हत्या कर दी थी. टीआई अमित सिंह कुशवाह, एसआई जयदयाल पटले, रमेश इंगले, हैडकांस्टेबल रमेश उइके, गौरीशंकर को ले कर गांगुलपरा और बंजारी के बीच पहाड़ी जंगल ले कर पहुंची और गिरिजा शंकर की निशानदेही पर पूर्णिमा की लाश बरामद की.

इस दौरान पूर्णिमा बिसेन की हत्या की सूचना मिलते ही लांजी के एसडीपीओ दुर्गेश आर्मो, एसपी (सिटी) अंजुल अयंत मिश्रा, टीआई (भरवेली) रविंद्र कुमार बारिया के अलावा अन्य पुलिसकर्मी और अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और जांचपड़ताल शुरू की.

पूर्णिमा की लाश अधिक दिनों की होने से काफी खराब हो चुकी थी. मौके की काररवाई करने के बाद पूर्णिमा की लाश जिला अस्पताल लाई गई, जहां पर पूर्णिमा के मातापिता सहित परिवार के अन्य लोगों ने चप्पल और कपड़ों से लाश की पहचान की. उन्होंने बताया कि लाश पूर्णिमा की ही है. रात होने से लाश का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया.

पोस्टमार्टम न हो पाने की वजह से लाश को बालाघाट के जिला अस्पताल के फ्रीजर में रखवा दिया, दूसरे दिन 15 अप्रैल को लाश का पोस्टमार्टम कर लाश को पूर्णिमा के घर वालों के सुपुर्द किया गया गया. जैसे ही पूर्णिमा की लाश गांव पहुंची तो पूरे गांव में मातम छा गया. परिवार के लोगों ने नम आंखों से उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

पुलिस ने इस मामले में गिरिजा शंकर पटले के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत अपराध दर्ज किया और इस अपराध में उसे गिरफ्तार कर लिया. गिरिजा शंकर पटले से पूर्णिमा की हत्या में प्रयुक्त दुपट्ïटा, बाइक और मोबाइल भी बरामद कर लिया.

15 अप्रैल को पुलिस ने गिरिजा शंकर को बालाघाट कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 2 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया. रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह रिश्तों को तारतार करने वाली थी….

27 साल का गिरिजा शंकर बालाघाट जिले के किरनापुर ब्लौक के गांव मोहगांव खारा में रहने वाले खुमान सिंह पटले का बेटा था. खुमान सिंह की 2 बेटियों में से बड़ी बेटी शारदा की शादी 4 साल पहले लिम्देवाड़ा के पवन बिसेन से हुई थी.

बहन की शादी के बाद से ही गिरिजा शंकर का अपनी बहन की ननद पूर्णिमा के साथ प्रेम संबंध चल रहे थे. गिरिजा शंकर का किरनापुर में फोटो स्टूडियो है. वह शादी विवाह समारोह में फोटोग्राफी और वीडियो शूटिंग का काम करता है. ग्रैजुएट गिरिजा शंकर अपने इस हुनर से अच्छीखासी आमदनी कर लेता है. इसी आमदनी से उस के शौक भी पूरे होते हैं. गिरिजा शंकर पूर्णिमा की भी हर ख्वाहिश पूरी करता था, यही वजह थी कि पूर्णिमा उस के प्यार में दीवानी थी.

भाई के साले गिरिजा शंकर से हुआ प्यार

करीब 4 साल पहले गिरिजा शंकर की बहन शारदा का विवाह पूर्णिमा के भाई से हुआ था. शादी के बाद अपनी बहन को लिवाने जब गिरिजा शंकर अपने दोस्तों के साथ लिमदेवाड़ा गया था, तब परंपरा के अनुसार उन की खूब खातिरदारी हुई थी. पूर्णिमा भी गिरिजा शंकर के साथ बैठ कर खूब हंसीमजाक कर रही थी. पूर्णिमा उस समय 19 साल की नवयौवना थी, जिस का रूपयौवन देख कर गिरिजा शंकर मन ही मन फिदा हो गया था.

बहन शारदा की शादी के बाद उसे ससुराल से लिवाने अकसर गिरिजा शंकर बाइक से जाता था. बहन शारदा का एकलौता भाई होने की वजह से उसे सब पसंद करते थे. बहन की ससुराल में वह पूर्णिमा से हंसीमजाक करता तो रिश्ते के लिहाज से कोई कुछ नहीं कहता था. धीरेधीरे पूर्णिमा और गिरिजा शंकर के बीच हंसीमजाक से शुरू हुआ सिलसिला प्यार में तब्दील हो चुका था. पूर्णिमा का भाई और पिता खेतीबाड़ी में लगे रहते और पूर्णिमा कालेज की पढ़ाई कर रही थी, ऐसे में गिरिजा शंकर कभीकभार पूर्णिमा को कालेज भी छोड़ दिया करता था.

एक दिन कालेज ले जाते वक्त गिरिजा शंकर ने बाइक बंजारी के जंगल में रोक दी तो पूर्णिमा ने पूछा, “यहां घने जंगल में बाइक क्यों रोक दी?”

“कुछ नहीं, आज जंगल में मंगल करने का इरादा है.” गिरिजा शंकर पूर्णिमा के साथ शरारत करते हुए बोला.

“धत, यहां कोई देख लेगा तो घर तक खबर पहुंचने में देर नहीं लगेगी.” पूर्णिमा बोली.

गिरिजा शंकर ने पूर्णिमा के गले में हाथ डाला और उसे जंगल के घने पेड़ की आड़ में ले जा कर बोला, “मेरी जान, जब प्यार किया तो डरना क्या.”

पूर्णिमा के अंदर सुलग रही आग भी आज चिंगारी बन कर जल उठी थी. उस ने भी अपनी बाहों को गिरिजा शंकर के गले में डालते हुए कहा, “मैं तो तुम्हें जी जान से प्यार करती हूं, तुम्हारी बाहों में मुझे जमाने का डर नहीं.”

“तो फिर मुझे अपनी हसरत पूरी कर लेने दो.” पूर्णिमा के होंठो पर चुंबन देते हुए गिरिजा शंकर ने कहा.

“किस ने रोका है तुम्हें, मैं भी तुम्हारे प्यार में जी भर के डूब जाना चाहती हूं.” पूर्णिमा ने गिरिजा शंकर के माथे को चूमते हुए कहा. धीरेधीरे गिरिजा शंकर के हाथ पूर्णिमा के अंगों पर रेंगने लगे. जंगल के एकांत में पूर्णिमा और गिरिजा शंकर ने अपने देह की आग को शांत किया और कपड़ों को ठीक करते हुए उसे कालेज छोड़ दिया. तन की आग बुझाने का सिलसिला जो एक बार शुरू हुआ तो फिर आगे बढ़ता गया. अकसर दोनों को जब भी मौका मिलता, अपनी हसरतें पूरी करने लगे.

                                                                                                                                                 क्रमशः

शादी की जिद में पति मिला न प्रेमी – भाग 1

5 अप्रैल, 2023 को दोपहर करीब 12 बजे की बात है. पूर्णिमा बिसेन अपनी मां से बोली, “मम्मी मैं सिलाईकढ़ाई सीखने जा रही हूं.”

“बेटा, तेरी लग्न हो गई है. ये सिलाईकढ़ाई सीखना बंद कर दे,” पूर्णिमा की मां ने उसे रोकते हुए कहा.

“नहीं मम्मी, अभी शादी तो 22 तारीख को है, जब तक कुछ और सीख लेने दो. फिर तो घरगृहस्थी से फुरसत कहां मिलेगी,” पूर्णिमा ने जिद करते हुए कहा.

“ठीक है बेटा, जैसी तेरी मरजी, मगर शाम ढलने से पहले घर आ जाना.” मां ने समझाते हुए कहा.

प्रेमी से मिलने पहुंच गई पूर्णिमा बिसेन

“मां आज साइकिल में हवा कम है, इसलिए पैदल ही जा रही हूं.” पूर्णिमा ने दुपट्ïटा सिर पर बांधते हुए कहा.

“बापू के आने के पहले ही घर वापस आ जाना, वरना मुझे उलाहना देंगे.” मां ने सीख देते हुए कहा.

मां की हरी झंडी मिलते ही पूर्णिमा अपने घर से पास ही के गांव डूंडा सिवनी चली गई, किंतु शाम तक घर नहीं लौटी. पूर्णिमा के समय पर घर वापस न आने से मां के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं. पूर्णिमा के पिता धनराज और भाई बाइक ले कर अपने रिश्तेदारों को पूर्णिमा की शादी का आमंत्रण दे रहे थे. शाम को जब वे घर लौटे तो पूर्णिमा की मां बोली, “पूर्णिमा अभी तक सिलाई सीख कर घर वापस नहीं आई है.”

“आखिर अब सिलाई सीखने की क्या जरूरत है, विवाह तो होने वाला है.” दिन भर निमंत्रण कार्ड बांट कर थकेहारे लौटे धनराज बोले. धनराज मुंहहाथ धो कर खाना खाने की तैयारी में थे. पूर्णिमा के घर न लौटने की बात सुन कर वे अपने बेटे से बोले, “बेटा, जरा पूर्णिमा को फोन लगा कर पूछ, घर आने में देर क्यों हो गई?”

धनराज के बेटे ने पूर्णिमा को फोन लगाया तो उस का मोबाइल स्विच्ड औफ बता रहा था. जब उस ने पिता को यह जानकारी दी तो उन की चिंता बढ़ गई. अनमने ढंग से जल्द ही भोजन खत्म कर के उठे धनराज ने आसपास के गांव में रिश्तेदारी के अलावा पूर्णिमा के जानपहचान वालों के घर फोन लगा कर पूछताछ की, परंतु पूर्णिमा का कोई पता नहीं चला.

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के हट्ïटा थाना इलाके में एक छोटा सा गांव लिम्देवाड़ा है, जिस की आबादी बमुश्किल एक हजार होगी. खेतीकिसानी वाले इस गांव में 55 साल के धनराज बिसेन खेतीबाड़ी करते हैं. धनराज का एक बेटा और पूर्णिमा नाम की एक बेटी है.

धनराज बिसेन खुद तो ज्यादा पढ़ेलिखे नहीं हैं, परंतु अपनी बेटी को पढ़ा कर उसे काबिल बनाना चाहते थे. यही वजह थी कि गांव की 23 साल की लडक़ी पूर्णिमा एमएससी फाइनल की पढ़ाई बालाघाट कालेज से कर रही थी. हाल ही में उस ने परीक्षा दी थी. परीक्षा खत्म होते ही वह पास के गांव डूंडा सिवनी में सिलाईकढ़ाई सीख रही थी. पूर्णिमा की पढ़ाई के अलावा सिलाईकढ़ाई में भी रुचि को देखते हुए घर वालों ने उसे सिलाईकढ़ाई सीखने के लिए हंसीखुशी इजाजत दी थी.

शादी से पहले पूर्णिमा हो गई गायब

इस साल कालेज की पढ़ाई खत्म होने वाली थी, यही सोच कर धनराज बिसेन ने अपनी बेटी पूर्णिमा का विवाह ग्राम सारद में तय कर दिया था और 22 अप्रैल अक्षय तृतीया के दिन पूर्णिमा की शादी होने वाली थी. शादी को ले कर पूरे घरपरिवार में उत्साह और उमंग का माहौल था, मगर पूर्णिमा के घर से गायब होते ही शादी का जश्न मातम में बदल गया था.

धनराज के परिवार को बदनामी भी झेलनी पड़ रही थी. लोग दबी जुबान से यह भी कह रहे थे कि प्यारमोहब्बत के चक्कर में किसी के साथ भाग गई होगी. मामला जवान बेटी के शादी के ऐन वक्त घर से गायब होने का था, लिहाजा गांव के बड़ेबुजुर्गों की सलाह पर धनराज ने दूसरे दिन 6 अप्रैल को हट्ïटा थाने में जा कर पूर्णिमा की गुमशुदगी दर्ज करा दी. टीआई अमित कुमार कुशवाहा ने पूर्णिमा की फोटो और जानकारी ले कर धनराज को भरोसा दिया कि जल्द ही पूर्णिमा को खोज निकालेंगे.

पूर्णिमा के गुम होने की खबर उस के होने वाले पति के घर वालों तक पहुंच चुकी थी. वहां भी शादी की तैयारियां चल रही थीं. पूर्णिमा का मंगेतर रातदिन उस के ख्वाबों में डूबा उस दिन का इंतजार कर रहा था कि कब उस की डोली घर आए और वह पूर्णिमा के साथ सुहागरात मनाए. मगर पूर्णिमा के गायब होने की खबर से मंगेतर ने यह सोच कर राहत की सांस ली कि अच्छा हुआ कि वह शादी के पहले भाग गई, बाद में कुछ ऊंचनीच होती तो गांव में उस की बदनामी ही होती.

पूर्णिमा कर रही थी एमएससी की पढ़ाई

पूर्णिमा कालेज से अपनी एमएससी की पढ़ाई कर ही रही थी, वह साइकिल से गांव के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने भी जाती थी. अपने गांव से 3-4 किलोमीटर दूर डूंडा सिवनी सिलाई क्लास भी साइकिल से ही जाती थी, लेकिन 5 अप्रैल को वह साइकिल के बजाय पैदल ही घर से चेहरे पर दुपट्ïटा बांध कर निकली थी, जिसे गांव के कुछ नवयुवकों ने गांव से जाते हुए देखा था.

पुलिस पूछताछ में एक नवयुवक ने बताया कि उस दिन भी दोपहर के समय एक युवक बाइक से उस के पास पहुंचा, जिस के साथ बैठ कर वह चली गई. जैसेजैसे दिन गुजर रहे थे, पूर्णिमा के घर वालों की चिंता बढ़ती जा रही थी. पुलिस भी पूर्णिमा की खोज में जुटी हुई थी. पुलिस को शक था कि कहीं प्रेम प्रसंग के चक्कर में पूर्णिमा घर से भागी होगी.

जांच के दौरान पुलिस का यह संदेह सच साबित भी हुआ. जांच में पता चला कि पूर्णिमा का प्रेम संबंध पिछले कुछ सालों से उस की भाभी के भाई गिरिजा शंकर पटले के साथ चल रहा था. गिरिजा शंकर भरवेली थाना क्षेत्र के मोहगांव खारा का रहने वाला था. घर के आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ में पुलिस को यह भी पता चला कि घटना वाले दिन पूर्णिमा गिरिजा शंकर के साथ अंतिम बार देखी गई थी.

पुलिस टीम ने साइबर सेल की मदद से गिरिजा शंकर और पूर्णिमा के मोबाइल नंबर ले कर काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स में 5 अप्रैल को पूर्णिमा और गिरिजा शंकर के बीच बातचीत के अलावा उन की मोबाइल लोकेशन भरवेली थाना क्षेत्र में आने वाले गांगुलपरा और बंजारी के बीच पहाड़ी जंगल में मिल रही थी.

तब पुलिस ने शक के आधार पर गिरिजा शंकर को हिरासत में ले कर पूछताछ की तो पहले तो वह पुलिस को गुमराह करता रहा. पहले तो गिरिजा शंकर ने बताया कि वे बालाघाट घूमने गए थे और घूमने के बाद पूर्णिमा को गांव के बाहर छोड़ दिया था, परंतु पुलिस जांच में दोनों के मोबाइल फोन की लोकेशन बंजारी के जंगल की मिल रही थी.

                                                                                                                                                क्रमशः

बहुचर्चित लीना शर्मा हत्याकांड : मामा को मिली सजा

पैसा बेईमान नहीं, हत्यारा भी बनाता है

बालम की सेज पर नौकर का धमाल

बहुचर्चित लीना शर्मा हत्याकांड : कंस मामा को मिली सजा – भाग 3

29 अप्रैल, 2016 को जब लीना अपने साथ सोहागपुर से ही तारबंदी का सामान ले कर प्रताप कुशवाहा और दूसरे लोगों के साथ अपने खेत पर पहुंची तो तारबंदी करने को ले कर उस का मामा प्रदीप से विवाद इतना बढ़ा कि प्रदीप ने लीना के साथ आए लोगों को यह कह कर वहां से खदेड़ दिया कि ‘‘ये हमारा आपस का मामला है, हम दोनों निपटा लेंगे.’’

तड़पा कर की थी लीना की हत्या…

लीना के साथ आए लोगों के वहां से जाने के बाद प्रदीप शर्मा उसे अपने खेत पर बने घर पर ले गया. वहां पहुंच कर प्रदीप ने लीना के सिर पर डंडे से हमला कर दिया. तभी प्रदीप के नौकर गोरेलाल, राजेंद्र ने उस के सिर पर पत्थर से हमला कर दिया. सिर में गहरी चोट लगने से वह जमीन पर गिर गई और थोड़ी देर तक तड़पने के बाद उस की मौत हो गई. लीना की मौत के बाद प्रदीप ने दोनों नौकरों से कहा, ‘‘जाओ, जल्दी से ट्रैक्टर ट्रौली ले कर आओ. लाश को ठिकाने लगाना पड़ेगा.’’

“जी मालिक, अभी लाते हैं. मगर किसी ने देख लिया तो सीधे जेल ही जाएंगे.’’ गोरेलाल डर के मारे बोला.

“मेरे बीवीबच्चों का क्या होगा मालिक.’’ राजेंद्र ने भी आशंका व्यक्त करते हुए कहा.

“डरने की बात नहीं है, जो हुआ उसे भूल जाओ और लाश ठिकाने लगाने में मेरी मदद करो. आज के बाद किसी से इस बात की चर्चा भी नहीं करना.’’ प्रदीप शर्मा ने दोनों को भरोसा दिलाते हुए कहा. प्रदीप शर्मा के कहने पर गोरेलाल और राजेंद्र कुछ ही देर में ट्रैक्टर ट्रौली ले कर आ गए. तीनों ने मिल कर लीना की लाश को ट्रैक्टर ट्रौली में रखा और उस के ऊपर घासफूस रख कर नौकरों के साथ सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कामती के जंगल में पहुंच गए.

वहां बरसाती नाले में सब से पहले गोरेलाल और राजेंद्र ने गड्ढा खोदा और उस गड्ïढे में नमक और यूरिया खाद डाल दी. बाद में लीना के शरीर के कपड़े उतार कर उसे दफना दिया. 14 मई, 2016 को प्रदीप शर्मा की निशानदेही पर पुलिस टीम ने और तहसीलदार की मौजूदगी में नगरपालिका के कर्मचारियों के सहयोग से लीना की लाश निकाली.

शव पर मिले टैटू और ब्रेसलेट से लीना शर्मा की बहन हेमा शर्मा ने शिनाख्त की. बाद में लीना शर्मा के सैंपल से हेमा शर्मा का डीएनए भी मैच कराया गया. प्रदीप ने लीना के कपड़ों में मिले पर्स से वसीयतनामा निकाल कर उस की जींस पैंट और पर्स को अपने घर के पीछे खेत की मेड़ पर जला दिया था, जबकि वसीयतनामा को अपने पास रख लिया था.

3 डाक्टरों के पैनल ने किया था पोस्टमार्टम…

14 मई को जिस तरह की हालत में लीना का शव मिला था, उस से दुष्कर्म की आशंका भी जताई जा रही थी. इस वजह से 3 डाक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया. शव 15 दिन पुराना होने से बुरी तरह सड़ चुका था. पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो डाक्टरों ने सिर में गहरी चोट से फ्रैक्चर होना और उसी वजह से मौत होने की बात कही थी.

पोस्टमार्टम करते समय डाक्टरों ने दुष्कर्म जैसी घटना की आशंका को देखते हुए वैजाइनल स्लाइड भी बनाई. सभी नमूनों की जांच सागर फोरैंसिक लेबोरेटरीज में कराई गई थी. पोस्टमार्टम के बाद 15 मई, 2016 को लीना की बहन हेमा और बहनोई ने सोहागपुर आ कर लीना का अंतिम संस्कार किया था. पुलिस की दिन भर हुई पूछताछ में प्रदीप ने कई राज उगले थे. उस ने बताया कि लीना की मौत सिर में चोट लगने से नहीं, बल्कि पत्थरों से कुचलने और गला दबाने से हुई थी.

दृश्यम फिल्म की तरह रची गई कहानी…

2015 में आई अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम’ की कहानी से इस मामले की कहानी मिलतीजुलती है. लीना के हत्यारों ने भी उस के 2 सेलफोन में से एक को घटनास्थल से करीब 30 किलोमीटर दूर पिपरिया (होशंगाबाद) रेलवे स्टेशन पर फेंक दिया था, ताकि पुलिस उस की लोकेशन को ले कर भ्रमित होती रहे.

इत्तेफाक से यह मोबाइल जिस यात्री को मिला, उस ने सिम कार्ड फेंकने के बाद मोबाइल फोन अपने पास रख लिया. बाद में 5 मई को पिपरिया में एक व्यक्ति को यह सिम मिला तो उस ने इसे दूसरे फोन सेट में डाला. जब लीना के दोस्त का फोन काल आया तो उस ने लीना के साथ कुछ गलत होने के बारे में उसे सतर्क कर दिया गया.

इसी मोबाइल की काल डिटेल्स से पूरे मामले की कडिय़ां जुड़़ती गईं और लापता होने के 15वें दिन पुलिस ने एसडीएम, तहसीलदार की उपस्थिति में गड्ïढा खुदवा कर लीना की लाश को निकलवाया. प्रदीप ने पुलिस के सामने यह प्रदर्शित करने का प्रयास किया कि उस के आदमियों ने लीना पर रौड और पत्थरों से हमला किया था, क्योंकि लीना ने 29 अप्रैल, 2016 को भूमि विवाद को ले कर उस पर हमला किया था.

लेकिन होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) पुलिस की जांच से पता चला कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या थी. ‘‘लीना के प्रदीप पर हमला करने के कोई निशान नहीं मिले थे. जिस तरह से लीना के सामान को नष्ट कर दिया गया और उस के शरीर को कामती जंगल (डूडादेह गांव से 4 किलोमीटर दूर) में फेंक दिया गया और उस के सेलफोन को ट्रेन में फेंकने का प्रयास किया गया. उस से पता चलता है कि हत्या पूर्व नियोजित थी.

इस के अलावा, हत्या के सबूत नष्ट करने के लिए दफनाने से पहले उस के शरीर पर यूरिया और नमक छिडक़ने की हरकत भी इस ओर इशारा करती है कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या थी.

साल भर के भीतर मिली जमानत…

लीना शर्मा की लाश काफी सड़ चुकी थी. उस की पहचान कराने के लिए बहन हेमा शर्मा का भोपाल में डीएनए टेस्ट कराया था. डीएनए रिपोर्ट से लीना के शव की पहचान हुई थी. हत्या के खुलासे के बाद लीना के मामा प्रदीप शर्मा, नौकर गोरेलाल, राजेंद्र को हत्या के आरोप में सोहागपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया था.

प्रदीप शर्मा के परिवार के लोगों ने जमानत के लिए एड़ीचोटी का जोर लगा दिया था. जबकि लीना की तरफ से कोई पहल नहीं हुई थी. यही वजह रही कि प्रदीप शर्मा के घर वाले कोर्टकचहरी में पानी की तरह पैसा बहा रहे थे. और उन की कोशिश कामयाब भी रही. एक साल के अंदर ही तीनों आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई. लीना की हत्या के 9 महीने बाद 22 फरवरी, 2017 को प्रदीप शर्मा को कोर्ट ने जमानत दे दी. इसी तरह 11 महीने बाद पहली अप्रैल, 2017 को गोरेलाल और राजेंद्र भी जमानत पर बाहर आ गए.

21 मार्च, 2023 को कोर्ट का फैसला आते ही कोर्ट रूम में मौजूद सोहागपुर पुलिस ने प्रदीप शर्मा, गोरेलाल और राजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया और उप जेल पिपरिया भेज दिया गया. जिस जमीन पर कब्जे के लिए लीना ने जान गंवाई, उस पर मामा प्रदीप शर्मा का कब्जा आज भी कायम है. उस पर प्रदीप शर्मा के घरपरिवार के लोग फसल उगा रहे हैं. लीना शर्मा की बहन हेमा मिश्रा, जो अपने पति के साथ कर्नाटक के बेंगलुरु में ही रहती है. वारदात के बाद वो इतनी डर गई थी कि कभी जमीन को पाने वो गांव नहीं आई.

—कथा कोर्ट के फैसले, लोक अभियोजक शंकरलाल मालवीय से बातचीत और मीडिया रिपोर्ट पर आधारित

मृतक की वीडियो से खुला हत्या का राज़ – भाग 3

बंटू के इस तरह शालेहा के घर बेरोकटोक आनेजाने से मकान मालिक और आसपास के लोगों को ऐतराज था. लोगों ने इस की शिकायत शाहिद से की थी, इस से दोनों के नाजायज रिश्तों की भनक शाहिद को लग गई थी. इसी बात को ले कर शालेहा से उस का अकसर विवाद होता रहता था. शालेहा अकसर अपनी मां और पिता के साथ मिल कर शाहिद के साथ बदसलूकी भी करती थी.

शौहर को रास्ते से हटाने की रची साजिश

शाहिद खान की बीवी शालेहा परवीन का इश्क बंटू खान से परवान चढ़ चुका था. शाहिद को जब शक हुआ तो उस ने पत्नी पर दबाव बनाना शुरू किया, जिस से घर में आए दिन झगड़े होने लगे. शाहिद जब शालेहा के अब्बू और अम्मी से इस की शिकायत करता तो वे उल्टा शाहिद को ही भलाबुरा कहते.

8 मार्च, 2023 को शाहिद और शालेहा दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि उन्हें पुलिस स्टेशन जाना पड़ा. यहां से दोनों को परिवार परामर्श केंद्र भेज दिया गया. यहां पत्नी शालेहा ने पति पर मारपीट करने का आरोप लगाया तो वहीं शाहिद ने अपनी पत्नी पर किसी गैरमर्द के साथ संबंध होने का शक जताया था. इस के बाद दोनों को समझाबुझा कर अच्छे ढंग से रहने की समझाइश दे कर वापस घर भेज दिया गया था.

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इधर एकदूसरे के प्रेम में पागल हो गए बंटू और शालेहा शाहिद से परेशान हो चुके थे. इसी बात से परेशान हो कर शालेहा ने प्रेमी बंटू को योजना बताते हुए कहा, “रोजरोज की किचकिच से मैं तंग आ गई हूं, क्यों न हमारे प्रेम की राह में रोड़ा बन रहे शाहिद को हमेशा के लिए रास्ते से हटा दिया जाए.”

“आखिर शाहिद को कैसे रास्ते से हटाएंगे, उस की हत्या करेंगे तो पकड़े जाने पर जेल की चक्की पीसनी पड़ेगी.” बंटू ने आशंका जताते हुए कहा.

“हम शाहिद को खाने की किसी चीज में जहर मिला देंगे और उस पर खुदकुशी करने का इल्जाम लगा देंगे.” शालेहा ने अपना प्लान समझाते हुए कहा.

“हां, ये आइडिया सही है. पर जहर देने के बाद सावधानी बरतनी है. जब तक उस का काम तमाम न हो जाए, उस पर निगरानी रखनी होगा.” बंटू ने सचेत करते हुए कहा.

जहर दे कर की हत्या

इस तरह योजना के मुताबिक, 18 मार्च, 2023 की शाम पडऱा स्थित किराए के मकान पर शाहिद की पत्नी शालेहा के अलावा उस का आशिक बंटू खान व शालेहा के मांबाप भी मौजूद थे. सभी ने मिल कर शाहिद खान को मारने का प्लान बनाया. शालेहा ने पहले से ही दीमक मारने वाला कीटनाशक खरीद कर रख लिया था.

18 मार्च, 2023 को ड्यूटी के बाद रात के साढ़े 9 बजे शाहिद जैसे ही घर पहुंचा तो शालेहा ने प्यार जताया. फिर उस की खातिरदारी की और पीने का लिए ठंडे पानी का गिलास ले कर आ गई. पानी पीते हुए शाहिद उस के बदले हुए रूप को देख कर हैरत में था, मगर यह सोच कर उस ने कुछ नहीं कहा कि शायद उस ने अपने आप को बदलने का निश्चय कर लिया हो.

कुछ देर बाद शाहिद जैसे ही बाथरूम से फ्रैश हो कर बाहर निकला, शालेहा गर्म चाय का प्याला ले कर हाजिर थी. शालेहा उस की चाय में जहर मिला कर लाई थी. दिन भर की थकान के बाद घर लौटे पति के लिए पत्नी के हाथ से बनी चाय बड़ा सुकून देती है. शाहिद चाय का प्याला हाथों में ले कर चाय की चुस्कियां लेने लगा. उस समय उसे चाय का स्वाद अजीब लग रहा था, मगर बीवी से इस की शिकायत कर वह मूड खराब नहीं करना चाहता था.

चाय पीने के कुछ देर बाद ही शाहिद को बेचैनी और घबराहट होने लगी. कीटनाशक का असर होने पर शाहिद तड़पते हुए इधरउधर न भागे, इसलिए शालेहा और उस के प्रेमी ने बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था. करीब एक घंटे बाद जब शाहिद को बेचैनी हुई तो अहसास हुआ कि उसे जहर दे दिया गया है. उस ने दरवाजा खोलने की कोशिश की, जब नहीं खुला तो उस ने अपने मोबाइल पर वीडियो बनानी शुरू कर दी. उस की आवाज लडख़ड़ाने लगी थी.  अपने मोबाइल वीडियो में उस ने अपना बयान रिकौर्ड करते हुए कहा—

‘मैं अपने पूरे होशोहवास में बयान देता हूं कि मेरी मौत की जिम्मेदार मेरी बीवी शालेहा, उस का आशिक बंटू खान और बीवी के मांबाप हैं. मेरी बीवी ने अपने प्यार के चक्कर में मुझे धोखे से जहर पिला दिया है. ये लोग पिछले छह महीने से मुझे रास्ते से हटाने की कोशिश कर रहे थे. आज इन लोगों ने इस साजिश को अंजाम दे दिया है.’

इस के बाद उस ने मोबाइल एक तरफ रख दिया और उसे उल्टियां होने लगीं. शालेहा, बंटू और शाहिद के सासससुर बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर उस की मौत का इंतजार कर रहे थे. रात के करीब 11 बजे जब शाहिद के कमरे से आवाज आनी बंद हो गई तो चुपचाप शालेहा कमरे में दाखिल हुई. तब तक शाहिद निढाल हो कर गिर चुका था. शालेहा के पीछे बाकी के लोग भी आए.

इस के बाद किसी को हत्या का शक न हो, इसलिए करीब साढ़े 11 बजे शाहिद को कार से संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसी दौरान शालेहा ने ससुर सलामत खान को सूचित कर दिया. पुलिस ने पहली नजर में घटना को आत्महत्या मान लिया, लेकिन शाहिद के पिता सलामत खान इसे आत्महत्या मानने को कतई तैयार नहीं थे.

किसी तरह शाहिद की हत्या के सबूत जुटाने में उन की मेहनत रंग लाई और लव मैरिज के बाद जिस बेटे को पिता सलामत खान ने 7 साल पहले घर से निकाल दिया था, उस की मौत के बाद उसी पिता के प्रयास ने कातिलों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में पुलिस की मदद की.

मरने से पहले का वीडियो देखने और फिर पूछताछ के बाद पुलिस ने हत्या की धारा बढ़ा दी. वीडियो की पड़ताल व विवेचना करने के बाद 6 अप्रैल, 2023 को रीवा की सिविल लाइंस थाना पुलिस ने आईपीसी की धारा 328, 302,120-बी, 34 का मामला कायम किया.

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पुलिस टीम ने शाहिद की हत्या के आरोप में उस की बीवी शालेहा और उस के आशिक बंटू खान के साथसाथ सास मोना परवीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. कथा लिखे जाने तक आरोपी ससुर शमशाद उल हक को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई थी.

—कथा पुलिस सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट पर आधारित