
अच्छा इंसान वही होता है, जो अपनी गलती स्वीकार कर के उसे सुधार ले, लेकिन चंचल ने उल्टा दांव चला. वह हैरान हो कर बोली, “यह आप क्या कह रही हैं मांजी? आप को इतनी घटिया बातें सोचते हुए शरम नहीं आई?”
“सोचना क्या, मैं सब देख रही हूं.” कमला गुस्से से बोलीं.
“सच देखतीं तो आप ऐसा नहीं बोलतीं. ऐसा कुछ भी नहीं है, जैसा आप सोच रही हैं. अपने दिमाग से इस तरह की बातों को निकाल दीजिए.”
“सच्चाई तो कड़वी लगती है बहू, लेकिन मैं ने तुम्हें समझाना अपना फर्ज समझा. मैं तुम्हारी हरकतों से अपने परिवार को बदनाम नहीं होने दूंगी.” बहू के शातिराना रुख से हैरान कमला ने चेतवानी भरे लहजे में कहा.
उन्होंने अगले दिन संजय को भी समझाया कि वह उन के यहां ज्यादा न आया करे. पतन की राहें बहुत रपटीली होती हैं. कुछ दिनों तो दोनों दूर रहे, लेकिन बहुत जल्द दोनों पुराने ढर्रे पर उतर आए. संजय रात के वक्त भी छिपतेछिपाते आने लगा. जो गलतियां करता है, वह कहीं न कहीं लापरवाह भी हो जाता है. एक रात कमला ने उन दोनों को पकड़ा तो उन्हें जम कर फटकारा.
संजय चुपचाप वहां से खिसक गया. कमला ने चंचल को खरीखोटी सुनाई, “मैं ने सोचा था चंचल कि तू मेरी बातों से संभल जाएगी, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर चला गया है. अब मैं यह सब बरदाश्त नहीं कर सकती. मुझे इस बारे में दीपक से बात करनी पड़ेगी.”
चंचल रंगेहाथों पकड़ी गई थी. उस के पास कहनेसुनने को कुछ नहीं था. वह नहीं चाहती थी कि यह बात उस के पति तक पहुंचे. उस ने कमला से माफी मांग कर कभी कोई गलती न करने की कसम खाई. सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते. कमला ने भी वक्त के साथ बहू को माफ कर दिया. बेटे को दु:ख न पहुंचे, इसलिए वह इन बातों को दबा गईं. संजय का आनाजाना भी कम हो गया. अपने किए पर वह भी माफी मांग चुका था.
कुछ दिनों की सावधानी के बाद दोनों अब देहरादून जा कर एकदूसरे से मिलने लगे. चंचल फैशन डिजाइनिंग के कोर्स के लिए जाती थी. इसी बहाने वह संजय से मिल लेती थी. मोबाइल पर भी वह बातें और एसएमएस किया करते थे. अब दोनों को ही परिवार के लोग बाधा लगने लगे थे.
अपने अवैध रिश्ते मे संजय और चंचल एकदूसरे के साथ जीनेमरने की कसमें खा चुके थे. संजय दुष्ट और अपराध करने वाला युवक था. चंचल पूरी तरह उस के रंग में रंगी हुई थी. उन के प्रेमप्रसंग में कमला व राजेंद्र बड़ी बाधा थे, गनीमत यह थी कि ये बातें अभी दीपक को नहीं पता थी. संजय चाहता था कि अपने और चंचल के बीच की हर दीवार को गिरा कर न सिर्फ उस से विवाह कर ले, बल्कि करोड़ों की प्रौपर्टी भी उस की हो जाए. उस ने इस बारे में चंचल से बात की तो उस ने भी अपनी स्वीकृति दे दी.
इस के बाद संजय इसी बारे में सोचने लगा. उस ने रुपयों का इंतजाम कर के 30 हजार रुपए में सितारगंज के रहने वाले दुष्ट प्रवृत्ति के युवक अनिल कुमार से एक माउजर खरीद लिया. संजय व चंचल चाहते थे कि हत्याएं इतनी सफाई से की जाएं कि किसी को उन के ऊपर जरा भी शक न हो.
वे दोनों जानते थे कि कमला राजेंद्र के लिए लडक़ी देखने के लिए पिथौरागढ़ जाने वाली हैं. इसी बात को ध्यान में रख कर वह पहले ही अपने पति के पास उड़ीसा चली गई. उड़ीसा जाने के बावजूद वह संजय के संपर्क में बनी रही. संजय ने उस से वादा किया कि अगर कमला पिथौरागढ़ गईं तो वह सभी का काम तमाम कर देगा. संजय ने अपनी योजना को अंजाम देने के लिए कमला और राजेंद्र से मेलजोल और बढ़ा लिया. उसे पता चला कि 27 नवंबर को उन्हें पिथौरागढ़ जाना है.
राजेंद्र को ड्राइवर की जरूरत थी. उस ने इस बारे मं सजय से कहा तो वह खुद उन के साथ जाने को तैयार हो गया. संजय कार चलाना जानता था. कमला और राजेंद्र को इस बात की खुशी हुई कि संजय उन के लिए अपना समय निकाल रहा है.
27 नवंबर को वह उन्हें कार से ले कर पिथैरागढ़ के लिए निकला. संयोगवश उसे किसी ने भी उन के साथ जाते नहीं देखा. संजय ने अपने पास माउजर और एक चाकू रख लिया. ये लोग हरिद्वार पहुंचे तो दीपक का फोन आया और उस ने मां से बात की.
इस के बाद संजय ने बहाने से राजेंद्र का मोबाइल लिया और उस का सिम ढीला कर दिया, जिस से उस का नेटवर्क चला गया. राजेंद्र टैक्नोलौजी के मामले में कमजोर था, इसलिए उस ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया. संजय नहीं चाहता था कि किसी का फोन आए और वह लोग उस के साथ होने के बारे में कुछ बता दें. वे काशीपुर पहुंचे तो राजेंद्र ने एटीएम से कुछ पैसे निकाले.
इस बीच संजय ने 2 बार चंचल से 4-4 मिनट बात की. इस के बाद जंगल का रास्ता सुनसान था. कमला और भास्कर कार में सो रहे थे, जबकि राजेंद्र जाग रहा था. सिडकुल के पास पहुंच कर संजय ने कार रोक दी. राजेंद्र ने उस से कार रोकने की वजह पूछी तो उस ने कहा कि उसे थकान हो रही है. कुछ देर रुक कर चलेंगे. संजय कार से नीचे उतर गया. राजेंद्र भी नीचे उतर गया. बाहर से कार के अंदर कोई आवाज न जाए, इसलिए संजय ने कार के शीशे बंद कर दिए.
संजय बात करते हुए बहाने से राजेंद्र को कुछ दूर ले गया और माउजर से उस के सिर में गोली मार दी. राजेंद्र ने तुरंत ही दम तोड़ दिया. संजय उसे खींच कर झाडिय़ों में ले गया और लाश को छिपा दिया. इस बीच उस ने राजेंद्र की जेब से मोबाइल निकाल कर उसे स्विच्ड औफ कर दिया.
इस के बाद वह कमला जोशी के पास पहुंचा और उन्हें बताया कि राजेंद्र झाडिय़ों के पीछे बैठ कर शराब पी रहा है और आने से मना कर रहा है. यह सुन कर कमला जोशी उस के साथ चल दीं. मौका पाते ही संजय ने उन्हें भी गोली मार दी.
दोनों शव ठिकाने लगा कर वह कार ले कर थोड़ा दूर आगे गया और एक जगह पर कार रोक कर भास्कर को जगा कर अपने साथ झाडिय़ों की तरफ ले गया. संजय हैवान बन चुका था. उस ने चाकू निकाल कर मासूम भास्कर की पहले गरदन काटी और फिर उस के पेट पर वार किए. भास्कर ने तड़प कर दम तोड़ दिया. हत्या कर के तीनों की लाशें ठिकाने लगाने के बाद उस ने यह बात चंचल को एसएमएस कर के बता दी.
कमला ने बैग में जो आभूषण लडक़ी को देने के लिए रखे थे, वह उस ने खुद कब्जा लिए. उस ने एक थैले में आभूषण, चाकू व माउजर रखा और आगे जा कर कलमठ में जंगल में एक स्थान पर गड्डा खोद कर उसे छिपा दिया. इस के बाद वह रुद्रपुर होते हुए बिलासपुर पहुंचा और सडक़ किनारे कार छोड़ कर बस से देहरादून चला गया. हत्या का मामला ठंडा हो जाने के बाद चंचल और संजय की योजना दीपक को भी ठिकाने लगाने की थी. लेकिन उस से पहले ही वे पुलिस के शिकंजे में आ गए.
संजय की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथियार और आभूषण बरामद करने के साथ ही पुलिस ने माउजर बेचने वाले अनिल को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत भेज दिया गया.
चंचल के अविवेक ने जहां एक भरेपूरे परिवार को उजाड़ दिया, अंधे प्यार और लालच ने संजय को भी जुर्म की राह पर धकेल दिया. दोनों ने मर्यादाओं का खयाल किया होता तो ऐसी नौबत कभी नहीं आती. चंचल के पति दीपक का कहना था कि उसे नहीं लगता कि उस की पत्नी का हत्या में कोई हाथ है. वह पूरे कांड का मास्टरमाइंड संजय को मानता है. कथा लिखे जाने तक किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हो सकी थी.
पुलिस ने दीपक और उस की पत्नी चंचल से भी पूछताछ की, लेकिन उन्होंने किसी से भी कोई रंजिश होने से इंकार कर दिया. जोशी परिवार के पास करोड़ों की पारिवारिक जमीन थी. यह पूरी प्रौपर्टी कमला के नाम थी. इस नजरिए की गई जांच में सामने आया कि प्रौपर्टी को ले कर भी किसी से किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं था. ड्राइवर का पता लगाने के लिए पुलिस ने राजेंद्र के मोबाइल की काल डिटेल्स हासिल की, लेकिन उस में भी कोई नंबर ऐसा नहीं मिला, जो किसी ड्राइवर का रहा हो.
राजेंद्र के मोबाइल में आखिरी काल पिथौरागढ़ से आई थी. पुलिस वहां पहुंची तो वह उस लडक़ी के पिता का नंबर था, जिसे जोशी परिवार देखने जा रहा था. उन्होंने बताया कि राजेंद्र का फोन 27 नवंबर को सिर्फ यह बताने के लिए आया था कि वे लोग उन के यहां आ रहे हैं. इस के बाद राजेंद्र से चाहकर भी उन का कोई संपर्क नहीं हो सका था.
पुलिस के सामने अब 2 तरह की आशंकाएं थीं. एक तो यह कि इस परिवार की हत्याएं लूटपाट के लिए की गई थीं और दूसरी यह कि कार ड्राइवर ने ही उन लोगों के साथ कुछ गलत किया हो. इस बात को ध्यान में रख कर दोनों जिलों देहरादून और ऊधमसिंहनगर की पुलिस ने कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ की. लेकिन कोई सुराग नही मिल सका. मामला उलझ कर रह गया था.
वारदात का मोटिव समझ से परे था. जोशी परिवार की खुले तौर पर किसी से कोई रंजिश नहीं थी और न ही कोई दूसरा ऐसा विवाद जिस के लिए परिवार को ही लापता कर दिया जाता. नि:संदेह इस घटना को साजिश के तहत अंजाम दिया गया था. पुलिस ने राजेंद्र के पूर्व ससुराल वालों से भी पूछताछ की, लेकिन इस का भी कोई नतीजा नहीं निकला. पुलिस जांचपड़ताल में जुटी थी, परंतु कहीं से कोई सुराग हाथ नहीं लग रहा था.
पुलिस ने शक के आधार पर काम करती है. परिवार की समाप्ति पर कमला की करोड़ों की प्रौपर्टी का दीपक ही एकलौता वारिस था. यह भी संभव था कि उस के इशारे पर ही किसी रहस्यमय तरीके से इस मामले को अंजाम दिया गया हो. आज के दौर में प्रौपर्टी को ले कर हत्याएं हो जाना कोई नई बात नहीं है. अपने ही अपनों के खून के प्यासे बन जाते हैं. प्रौपर्टी के एंगल पर पुलिस ने दीपक को भी शक के दायरे में रख कर 5 दिसंबर को उस से गहन पूछताछ की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
पुलिस किसी नतीजे पर पहुंच पाती, इस से पहले गुत्थी और ज्यादा उलझ गई. एसएसपी केवल खुराना के निर्देश पर पुलिस ने 7 दिसंबर को उस स्थान के आसपास कांबिग कर के खोजबीन शुरू की, जहां भास्कर का शव मिला था. इस खोजबीन में उत्तर दिशा की झाडिय़ों से पुलिस को 2 शव और मिले. दोनों शव बुरी तरह सडग़ल चुके थे. कपड़ों के आधार पर उन की शिनाख्त कमला और राजेंद्र के रूप में की गई. पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा भर कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
इस सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड में पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल यह था कि हत्याओं को किस ने और क्यों अंजाम दिया? ऐसी क्या दुश्मनी हो सकती थी, जिस के लिए 3 हत्याएं कर दी गईं. ड्राइवर का अब तक कुछ पता नहीं चल सका था. जबकि वही मुख्य संदिग्ध भी था. वह सुपारी किलर भी हो सकता था और किसी लुटेरे गिरोह का सदस्य भी. दीपक व उस की पत्नी किसी रंजिश की बात से इनकार कर चुके थे.
इस मामले की जांच में स्पैशल औपरेशन गु्रप की टीम को भी लगा दिया गया. देहरादून व ऊधमसिंहनगर पुलिस की 10 टीमें केस के खुलासे में जुट गईं. पुलिस के शक की सुई ड्राइवर पर ही टिकी थी. क्योंकि कुछ ऐसे ड्राइवर भी होते हैं, जो दिखावे के लिए तो कार चलाने का काम करते हैं, लेकिन किसी गिरोह के साथ मिल कर अपराध को अंजाम देते हैं.
देहरादून से सितारगंज के बीच कई सुनसान इलाके थे, लेकिन हत्यारों ने उसी स्थान को क्यों चुना, यह भी एक बड़ा सवाल था. ऐसा प्रतीत होता था कि हत्या पूर्व नियोजित थी और शातिराना अंदाज में तीनों को ठिकाने लगा दिया गया था. पुलिस के पास हत्या की जांच के लिए 3 ङ्क्षबदु प्रमुख थे. एक ड्राइवर, दूसरा संपत्ति और तीसरा प्रेम प्रसंग.
संपत्ति के मामले में पुलिस दीपक से खूब घुमाफिरा कर गहन पूछताछ कर चुकी थी. वह खुद को बेकसूर बता रहा था. उस के खिलाफ पुलिस को कोई सबूत भी नहीं मिला था. ड्राइवर के गुनाहगार और राजदार होने के शक में भी कई लोगों से पूछताछ की जा चुकी थी.
जांच कर रही पुलिस ने इस बार नजरिया बदल कर प्रेम के एंगल पर भी काम करना शुरू किया. इस के लिए कुछ रिश्तों को खंगालना शुरू किया गया. इस कड़ी में घर की छोटी बहू यानी दीपक की पत्नी चंचल पर जांच केंद्रित की गई. पुलिस ने उस का मोबाइल नंबर हासिल कर के उस की काल डिटेल्स की जांचपड़ताल शुरू की तो पुलिस चौंकी. दरअसल घटना वाले दिन उस के मोबाइल पर एक नंबर से कुछ एसएमएस किए गए थे, जिस नंबर से एसएमएस किए गए थे, वह श्यामपुर के ही संजय पंत का था.
संजय पंत जोशी परिवार के पड़ोस में ही रहता था. इस पर पुलिस ने संजय के मोबाइल की लोकेशन की जांच की तो उसे यह देख कर झटका लगा कि घटना वाले दिन उस की लोकेशन राजेंद्र के मोबाइल के साथसाथ सितारगंज तक गई थी. इस से साफ था कि घटना वाले दिन वह उन के साथ था. चंचल और संजय मोबाइल पर अकसर बातें किया करते थे. काल डिटेल्स इस की गवाही दे रही थी. इस का मतलब संजय और चंचल का जरूर कोई गहरा कनेक्शन था.
गुत्थी सुलझती नजर आई तो पुलिस बिना देरी किए देहरादून पहुंची. संजय को पकड़ लिया गया. देहरादून के एसपी (सिटी) अजय कुमार के निर्देश पर चंचल को भी हिरासत में ले लिया गया. उन दोनों को हिरासत में ले कर पुलिस ऊधमसहनगर आ गई.
पुलिस ने दोनों के मोबाइल ले कर चेक किए तो उन में से घटना वाली तारीख के एसएमएस नदारद थे. जाहिर था कि उन्होंने एसएमएस डिलीट कर दिए थे. पुलिस ने दोनों से गहराई से पुछताछ की तो उन्होंने जो बताया, सुन कर पुलिस के भी रोंगटे खड़े हो गए.
जोशी परिवार का कातिल संजय पंत था और इस साजिश में चंचल भी शामिल थी. दोनों के अवैध रिश्ते और संपत्ति का लालच इतने बड़े कांड की वजह बन गया था. किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक बहू पूरे परिवार के लिए काल बन जाएगी.
करीब डेढ़ साल पहले संजय और चंचल की नजरें चार हुई थीं, धीरेधीरे दोनों का झुकाव एकदूसरे की तरफ हो गया था. चंचल का पति दूर रहता था, संजय ने इस बात का फायदा उठाया और अपनी मीठीमीठी बातों से चंचल को अपनी तरफ आकॢषत करने में कामयाब हो गया. चंचल को भी पति से दूरियां खलती थीं. भविष्य की परवाह किए बिना दोनों ने प्रेम की पींगे बढ़ानी शुरू कर दीं. संजय किसी न किसी बहाने से कमला के घर आनेजाने लगा. एक ही गांव और पड़ोसी होने से उस का इस तरह आना कोई अप्रत्याशित बात नहीं थी.
वक्त गुजरता रहा. संजय और चंचल मुलाकातों के अलावा मोबाइल पर भी बातें किया करते थे. दोनों एकदूसरे से प्यार का इजहार कर चुके थे. एक दौर ऐसा भी आया, जब उन के बीज मर्यादा की दीवार गिर गई. यूं तो हर नजरिए से उन का रिश्ता अवैध था, लेकिन उन दोनों को इस में खुशियां मिल रही थीं.
चंचल काफी पढ़ीलिखी थी. उस की समझदारी पर पूरे परिवार को गर्व था. कमला ने जमाना देखा था. बहू के रंगढंग उन से छिप नहीं सके. उन्होंने एक दिन चंचल को समझाया, “संजय का हमारे घर ज्यादा आनाजाना ठीक नहीं है बहू. मैं सबकुछ जान कर भी अंजान नहीं रह सकती. तुम खुद को सुधार लो, इसी में परिवार की भलाई है.”
चंचल जैसे इस के लिए पहले से तैयार थी. यह एक सच है कि ऐसी गलतियां कर ने वाला इंसान अपनी कारगुजारियों को छिपाने के लिए झूठ बोलने लगता है और इसी के चलते वह काफी शातिर भी हो जाता है. वह जानती थी कि एक न एक दिन यह नौबत आ कर रहेगी.
कमला जोशी उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से करीब 25 किलोमिटर दूर थाना प्रेमनगर के संपन्न गांव श्यामपुर में रहती थीं. उन के परिवार में 2 बेटे बड़ा राजेंद्र और छोटा दीपक था. दोनों बेटों का वह विवाह कर चुकी थीं. राजेंद्र खेतीबाड़ी संभालता था, जबकि दीपक भारतीय सेना में नौकरी कर रहा था. दीपक की पत्नी चंचल कमला के पास ही रहती थी. वह देहरादून में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रही थी. वह स्कूटी से आतीजाती थी.
कमला जोशी के पास करोड़ों की प्रौपर्टी थी. घर से लगी रही उन की 4 बीघा जमीन थी, देहरादून में भी उन्होंने प्लौट खरीद रखा था. उन का परिवार वैसे तो खुशहाल था, लेकिन उन्हें एक बात की हमेशा फिक्र लगी रहती थी. दरअसल राजेंद्र का विवाह उन्होंने 7-8 साल पहले कर दिया था, लेकिन अनबन के चलते एक साल बाद ही उस का पत्नी से तलाक हो गया था.
राजेंद्र का एक बेटा था भास्कर, जिसे उस ने अपने पास ही रख लिया था. 7 वर्षीय भास्कर परिवार में सभी का लाडला था. कमला उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुकी थीं. वह चाहती थीं कि किसी भी तरह बड़े बेटे की गृहस्थी दोबारा बस जाए तो उन की जिम्मेदारी पूरी हो जाए. इस से एक तो राजेंद्र को सहारा मिल जाता और भास्कर को मां का प्यार.
उन की छोटी बहू चंचल सुंदर होने के साथसाथ पढ़ीलिखी और समझदार थी. वह हर तरह से परिवार के सभी सदस्यों का खयाल रखती थी. थोड़ी परेशानी तब होती थी, जब चंचल दीपक के पास चली जाती थी. दीपक की तैनाती उड़ीसा में थी. नवंबर के दूसरे सप्ताह में भी चंचल दीपक के पास चली गई थी. बड़े बेटे का घर बसाने के लिए कमला ने अपने कई नातेरिश्तेदारों से कह रखा, लेकिन उस की उम्र और एक बेटा होने की वजह से कोई उस से रिश्ता करने को तैयार नहीं था.
इस के बावजूद कमला ने प्रयास नहीं छोड़ा. आखिरकार किसी ने उन्हें पिथौरागढ़ में एक रिश्ता बताया. कमला इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती थीं. अपने स्तर से उन्होंने जो जानकारियां जुटाईं, उस हिसाब से लडक़ी और उस का परिवार दोनों ही बहुत अच्छे थे. बातचीत हो जाने के बाद कमला ने वादा कर लिया कि वह जल्द ही लडक़ी देखने आएंगी. दीपक अपनी मां और भाई से बात करता रहता था.
27 नवंबर, 2015 की सुबह उस ने राजेंद्र के मोबाइल पर फोन किया तो उस की बात कमला से हुईं. उन्होंने उसे बताया कि वे लोग रास्ते में हैं और लडक़ी देखने के लिए पिथौरागढ़ जा रहे हैं. कमला ने बताया था कि उन के साथ राजेंद्र और भास्कर भी हैं.
मां के साथ हुई दीपक की यह आखिरी बातचीत थी. क्योंकि उस ने शाम के वक्त मां के मोबाइल पर फोन किया तो वह स्विच औफ मिला. इस के बाद रात से सुबह हो गई, लेकिन दीपक की मां से दोबारा बात नहीं हो सकी. इस से उस की चिंता बढ़ गई. उस ने किसी तरह पता कर के लडक़ी वालों के यहां पिथौरागढ़ फोन किया तो पता चला कि वे वहां पहुंचे ही नहीं थे, जबकि वे लोग उन का इंतजार कर रहे थे.
दीपक ने अपने नातेरिश्तेदारों को भी फोन किए, पर घर वालों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी. उस का मन तरहतरह की आशंकाओं से घिरने लगा. वे घर भी वापस नहीं पहुंचे थे. दीपक इस से परेशान था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वे लोग गए तो कहां गए. कुछ नहीं सूझा तो उस ने छुट्टी ली और पत्नी चंचल के साथ अगले दिन घर पहुंच गया. जब वह अपने स्तर से उन की खोजबीन में नाकाम रहा तो उस ने स्थानीय थाना प्रेमनगर में अपनी मां, भाई और भतीजे की गुमशुदगी दर्ज करा दी. दीपक ने एसएसपी डा. सदानंद दाते से भी मिल कर परिवार को खोजने की गुजारिश की.
पुलिस ने खोजबीन शुरू की तो पता चला कि 28 नवंबर को उन की कार नंबर – यूके 07 एपी 5359 उत्तर प्रदेश के रामपुर जनपद के बिलासपुर इलाके में लावारिस हालत में पाई गई थी. दीपक ने पुलिस को बताया कि राजेंद्र कार चलाना नहीं जानते थे. पिथौरागढ़ जाने के लिए वे कोई ड्राइवर कर के गए होंगे. लेकिन उन के साथ ड्राइवर कौन गया था, यह उसे पता नहीं था.
एसपी (सिटी) अजय कुमार के निर्देश पर पुलिस ने बिलासपुर पहुंच कर कार की जांचपड़ताल की. कार में सभी सामान सुरक्षित था. बारीकी से जांच की गई तो उस में एक्सिस बैंक के एटीएम की एक परची मिली. वह उपनगर काशीपुर की थी. इस से अनुमान लगाया गया कि काशीपुर में उन्होंने एटीएम का इस्तेमाल किया होगा. सदानंद दाते ने एक पुलिस टीम काशीपुर के लिए रवाना कर दी.
पुलिस ने एटीएम के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी. इस फुटेज से पता चला कि राजेंद्र और उस की मां कमला करीब 8 मिनट एटीमए केबिन में रहे थे. बाद में उन के पास एक लंबातगड़ा युवक भी आया था, जिस से उन्होंने कुछ बात की थी. संभावना थी कि वही ड्राइवर रहा होगा.
हालांकि उस का चेहरा बहुत ज्यादा स्पष्ट नहीं था, लेकिन पुलिस को उम्मीद थी कि उस के जरिए अब जोशी परिवार के लापता होने का सुराग मिल जाएगा. लेकिन यह उम्मीद ज्यादा नहीं टिक सकी, पता चला कि वह वहां का सिक्योरिटी गार्ड था. इस से केवल यह पता चला कि जोशी परिवार काशीपुर तक सुरक्षित था.
जोशी परिवार रहस्यमय हालात में कहां लापता हो गया, कोई नहीं जानता था. इसी बीच ऊधमसिंहनगर में सितारगंज के सिडकुल के पास एक बच्चे का शव पड़ा मिला. शव मुख्य सडक़ से करीब 30 मीटर अंदर झाडिय़ों में मिला था. शव मिलने की सूचना पर थानाप्रभारी सी.एस. बिष्ट मौके पर पहुंचे. बच्चे की हत्या गरदन काट कर की गई थी. इस की सूचना आला अधिकारियों को दी गई तो एएसपी टी.डी. वैला भी घटनास्थल पर पहुंचे.
मौके पर पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस ने उस के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस की सूचना मिलने पर दीपक भी सितारगंज पहुंचा. शव देख कर वह बिलख पड़ा. वह शव उस के भतीजे भास्कर का था. सितारगंज पुलिस ने बच्चे की हत्या, अपहरण और साक्ष्य छिपाने का मुकदमा दर्ज कर लिया.
जो जोशी परिवार लापता था. उस में से एक बच्चे भास्कर की हत्या की जा चुकी थी. उन की कार भी बरामद हो चुकी थी. जबकि कमला और राजेंद्र का कुछ पता नहीं था. ऊधमसिंहनगर के एसएसपी केवल खुराना ने इस मामले की तह तक जाने और गहनता से जांच कर ने के लिए एएसपी टी.डी. वैला, एएसपी काशीपुर कमलेश उपाध्याय और सीओ खटीमा लोकजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस की 3 टीमों का गठन किया.
लेकिन उन्हें घटना के तार देहरादून से जुड़े होने का अंदेशा था. सब से अहम बात यह थी कि राजेंद्र जिस ड्राइवर को अपने साथ ले कर गया होगा, वह कार ड्राइवर कौन था, यह पता लगाना जरूरी था. ड्राइवर का पता चलने पर ही अहम सुराग मिल सकते थे. पुलिस ने जोशी परिवार के आसपास रहने वालों से भी पूछताछ की, लेकिन ड्राइवर के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सका.
ड्राइवर को उन्होंने हायर किया था या कोई जानपहचान वाला चालक था, इस बारे में कुछ पता नहीं चल पा रहा था. हां, यह आशंका जरूर प्रबल हो गई थी कि जोशी परिवार किसी बड़ी साजिश का शिकार हुआ है. भास्कर का शव मिलने के बाद राजेंद्र और उस की मां के जीवित होने की उम्मीद कम ही रह गई थी.