
महाराष्ट्र पुलिस 7 अगस्त को कटंगी थाना पुलिस के साथ अमित के मूल निवास झगरा गांव (जबलपुर) गई. वहां भी ताला लगा था. गांव वालों से पूछताछ करने पर पता चला कि 3 अगस्त को अमित साहू अपनी मां के पास आया था और यह कहते हुए उसे मौसी के घर जाने को कहा कि मौसी की तबीयत खराब है. इस के बाद अमित की मां ने अपने भांजे मनीष को झगरा गांव बुलवाया और फिर बहन के यहां बरगी डैम (जबलपुर) चली गई.
पुलिस अमित के मोबाइल लोकेशन के आधार पर तलाश में जुटी रही. मोबाइल लोकेशन के आधार पर ही 7 तारीख की रात को सागर से जितेंद्र नाम के युवक को पकड़ लिया गया. वह 3 अगस्त से ही लापता था. जितेंद्र ने पुलिस को बताया कि 2 अगस्त को अमित साहू कार से ढाबे पर आया था. उसे कार को साफ करने के लिए कहा था.
उस ने यह भी बताया कि जब वह कार साफ कर रहा था, उस दौरान कार की डिक्की में खून के निशान मिले थे. इस बारे में जब उस ने अमित से पूछा था, तब अमित ने उसे डांट कर शांत कर दिया था. उस के बाद वह डर गया और ढाबे से लापता हो गया था.
अमित पर पहले से चल रहा है हत्या का केस
पुलिस को इस मामले में अमित का हाथ होने की आशंका प्रबल हो गई थी. यह भी आशंका होने लगी थी कि शायद उस ने अपनी पत्नी सना खान की हत्या कर दी है. अमित के सागर, सिवनी या नरसिंहपुर के आसपास होने की उम्मीद थी. अमित साहू पर सना की हत्या का आरोप उस के परिजन भी लगा रहे थे. इसे देखते हुए उस का पुलिस रिकौर्ड पता किया गया. फिर जो जानकारी मिली, वह भी कुछ कम चौंकाने वाली नहीं थी.
दरअसल, जबलपुर में गोरा बाजार थाना अंतर्गत राजुल अपार्टमेंट में किराए का फ्लैट ले कर रहने वाले अमित साहू पर एक हत्या का आरोप था. वह उस केस में जमानत पर था. बताया गया कि अमित आदतन अपराधी है. कटंगी थाना इलाके के झगरा गांव में भी उस का ढाबा है. ढाबे की आड़ में वह अवैध शराब बेचने का काम करता है. जबलपुर के अलावा आसपास के शहरों में भी उस की शराब की सप्लाई है.
उस पर आरोप है कि उस ने अपने साथियों के साथ मिल कर 2011-12 में एक युवक की हत्या कर दी थी. इस दौरान वह पूरे 41 महीने तक फरार था. बाद में उसे जेल हो गई थी. फिलहाल वह जमानत पर था.
पुलिस के लिए सब से बड़ा टास्क अमित साहू को पकडऩे का था. उस के बाद ही सना के जिंदा होने या उस के मारे जाने के बारे में जानकारी मिल सकती थी. मोबाइल लोकेशन के आधार गोरा बाजार की पुलिस उसे ट्रेस करने में जुटी हुई थी. दूसरी तरफ कटंगी पुलिस अमित की कार को तलाश कर रही थी. अमित और सना की अंतिम लोकेशन बेलखाडू के पास मिली थी. उस के बाद से ही दोनों के मोबाइल बंद हो गए थे.
आखिरकार मोबाइल लोकेशन के आधार पर ही 11 अगस्त, 2023 को जबलपुर की गोरा बाजार पुलिस को सफलता मिली और अमित अपने एक सहयोगी राजेश के साथ उसी इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया. सख्ती से की गई पूछताछ में उस ने अपना जुर्म कुबूल करते हुए बताया कि उस ने सना की हत्या 2 अगस्त को ही कर के लाश को हिरण नदी में बहा दी थी. उस ने कहा कि अपनी बीवी सना खान की लाश उस ने अपने ढाबे के पीछे बहने वाली हिरण नदी में पुल के ऊपर से फेंक दी थी.
सना की मौत का राज सन्न करने वाला था. उस ने बताया कि सना उस की बीवी होने के साथसाथ बिजनैस पार्टनर भी थी. ढाबे के विस्तार के लिए सना ने उसे 50 लाख रुपए दिए थे. पैसे के हिसाबकिताब में गड़बड़ी को ले कर सना से उस की अकसर नोकझोंक हो जाती थी.
इस सिलसिले में 1 और 2 अगस्त की रात को भी उस की रुपएपैसों के हिसाबकिताब को ले कर लड़ाई हो गई थी. उन की लड़ाई फोन के वीडियो काल पर हो रही थी. इसी बीच सोने की चेन को ले कर बहस होने लगी, जो 27 ग्राम की थी.
अमित ने मार कर नदी में फेंकी लाश
सोने की चेन सना ने कोर्ट मैरिज के समय अमित को गिफ्ट की थी. पिछले कुछ दिनों से जब भी सना उसे वीडियो काल करती तो उस के गले में वह चेन नहीं दिखाई देती थी. इसे ले कर कई बार दोनों के बीच पहले भी बहस हो चुकी थी. सना के बारे में बताते हैं कि उसे सोना पहनने का काफी शौक था. हमेशा उस के गले और हाथों में 4-5 लाख के जेवरात रहते थे.
2 अगस्त को जब सना जबलपुर आई थी, तब भी वह गोल्ड पहने थी. सना ने जो सोने की चेन अमित को दी थी, वह जुलाई महीने से ही उस के गले में नहीं थी. इस बारे में सना जब कभी पूछती तो अमित बात टाल जाता था. इस पर सना को शक हो गया था कि अमित ने चेन बेच दी है.
उन के बीच विवाद काफी बढ़ गया और सना खान 2 अगस्त की सुबहसुबह राजुल टाउन में स्थित अमित के फ्लैट पर आ धमकी. वहां उन के बीच जम कर बहस होने लगी. इसी लड़ाई के दौरान अमित ने डंडे से वार कर दिया. सिर पर चोट लगने से काफी मात्रा में खून बह जाने के कारण उस की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. कत्ल के बाद उस ने सबूत मिटाने के लिए कथित तौर पर अपने एक दोस्त और अपने ढाबे के एक कर्मचारी की मदद ली.
योजना बना कर सना की लाश अपने ढाबे के पीछे से बहने वाली हिरण नदी में पुल के ऊपर से फेंक दी. अमित को नदी में पानी की तेज धारा का अंदाजा था. वह जानता था कि लाश बह कर इतनी आगे निकल जाएगी कि शायद ही वो दोबारा किसी को मिले. इत्तेफाक से जब लाश नदी में ठिकाने लगाई गई, तब नर्मदा की इस सहायक नदी में काफी पानी भरा था. कारण नर्मदा नदी पर बने बांध के गेट भी खुले थे.
हुआ भी ऐसा ही, लाश का पता ही नहीं चल पाया. पुलिस ने अमित साहू को भादंवि की धारा 302 (हत्या), 201 (साक्ष्य नष्ट करना) और 34 (सामान्य इरादा) के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.
पुलिस अमित साहू के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने की कोशिश में लगी थी, ताकि उसे सख्त सजा मिल सके. नागपुर और जबलपुर पुलिस सना खान के शव की तलाश में जुटी हुई थी.
16 अगस्त को पुलिस को घटनास्थल से करीब 300 किलोमीटर दूर सीहोर गांव के पास नर्मदा नदी के किनारे एक महिला का श्व मिला. देखने में वह सना खान का ही लग रहा था, लेकिन डीएनए जांच के बाद ही इस की पुष्टि हो सकेगी. शव मिलने की खबर सुन कर सना के घर वाले भी सीहोर के लिए अपने घर से निकल गए थे.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
2 अगस्त, 2023 की पूरी रात तक सना से न मेहरुनिशा की बात हुई और न ही घर वालों के पास उस की कोई काल आई. उस रोज सुबह की काल ही घर वालों के लिए सना की आखिरी काल थी. घर के लोगों ने किसी तरह से रात काटी. अगले रोज 3 अगस्त को मेहरुनिशा अपने बेटे को ले कर नागपुर जिले के मानकापुर थाने गईं.
उन्होंने थाने में अपनी बेटी सना खान के लापता होने की शिकायत दर्ज करवा दी. मामला एक बड़ी राजनीतिक पार्टी बीजेपी से जुड़ा था. गुमशुदगी की शिकायत भी विपक्षी पार्टी कांग्रेस की सक्रिय सदस्य की तरफ से की गई थी. लिहाजा पुलिस ने तत्काल ऐक्शन लिया. एसआई एच.सी. पगारे के साथ 4 सदस्यीय पुलिस टीम बनाई गई. टीम सीधे जबलपुर गई. उस के साथ सना के परिवार वाले भी गए.
नागपुर पुलिस सीधे गोरा बाजार पुलिस थाने पहुंची, जहां अमित साहू और सना के विषय में जानकारी मिल सकती थी. इस के बाद महाराष्ट्र पुलिस मध्य प्रदेश के कटनी जिले में स्थित बिलहरी पहुंची. यहीं के राजुल अपार्टमेंट में उस का पति अमित साहू रहता था. लेकिन पुलिस को उस के फ्लैट पर ताला लगा मिला. एमपी पुलिस के साथ मिल कर महाराष्ट्र पुलिस की टीम ने अपार्टमेंट में अमित के फ्लैट के आसपास के लोगों से करीब 4 घंटे तक पूछताछ की.
जांच टीम को वहां सना के बारे में कोई ठोस जानकारी भले ही नहीं मिल पाई हो, किंतु एक चौंकाने वाली जानकारी जरूर मिली. अपार्टमेंट के कुछ लोगों ने दबी जुबान में बताया कि 2 अगस्त को साहू ने सना के साथ यहीं पर मारपीट की थी. घर पर तलाशी के लिए महाराष्ट्र पुलिस ने कलेक्टर से अनुमति मांगी. कार्यपालक मजिस्ट्रैट की उपस्थिति में अमित साहू के घर का ताला तोड़ा गया. पुलिस ने तलाशी ली, इस दौरान सना की मां, उस के भाई सहित अन्य लोग भी मौजूद थे.
उन की मौजूदगी में पुलिस ने अमित के घर की एकएक चीज की तलाशी ली, लेकिन कहीं भी कुछ वैसा सबूत नहीं मिले, जिन से पता चल सके कि सना के साथ मारपीट की गई हो. इस बीच दोनों राज्यों की पुलिस ने तहकीकात को आगे बढ़ाने के लिए सना और अमित के संबंधों के बारे में कुछ अन्य जानकारियां भी जुटाईं. उन में एक उन का मैरिज सर्टिफिकेट था.
सना ने अमित को दिए थे 50 लाख रुपए उधार
पुलिस को मिले मैरिज सर्टिफिकेट के अनुसार सना और अमित साहू की शादी 24 अप्रैल, 2023 को जबलपुर के कलेक्ट्रैट कार्यालय में मैरिज अधिकारी शेर सिंह मीणा की उपस्थिति में हुई थी. उन का विवाह 3 लोगों की मौजूदगी में संपन्न हुआ था. उन के बारे में सना खान के भाई मोहसिन खान ने पुलिस को बताया कि दोनों की पहली मुलाकात करीब 2 साल पहले हुई थी.
अमित सना से नागपुर में तब मिला था, जब वह अपनी एक परिचित का इलाज करवाने के लिए नागपुर गया था. सना ने अपनी पहुंच और राजनीतिक जानपहचान से अमित की मदद की थी. उस के बाद दोनों की बातें फोन पर काल, मैसेजिंग और वीडियो काल से होने लगी थीं. उसी दौरान उन में प्यार हो गया.
अमित साहू सना की राजनीतिक पहुंच से प्रभावित था. उसे मालूम था कि सना के संपर्क बीजेपी के कई वरिष्ठ राजनेताओं से हैं. वह महाराष्ट्र के कई नेताओं से मोबाइल चैटिंग के जरिए संपर्क बनाए रहती थी. जबलपुर का रहने वाला अमित साहू एक ढाबा चलाता था. शादी के बाद सना जबलपुर और नागपुर दोनों जगहों पर रहने लगी थी. अमित ने अपने बिजनैस को आगे बढ़ाने के लिए योजना बनाई थी, जिस मेें सना से आर्थिक सहयोग मांगा था.
सना के पिता कारोबारी हैं. उन्होंने अमित को ढाबे में सना की पार्टनरशिप के लिए 50 लाख रुपए दिए थे. कुछ दिनों में ही पैसे और कारोबार को ले कर दोनों में विवाद होने लगा था. उस के बाद से सना अपने पिता का पैसा वापस मांगने लगी थी. उन के बीच विवाद इस कदर बढ़ गया था कि सना अपने बेटे के साथ लगातार नागपुर में ही रहने लगी थी.
शादी के दौरान सना ने अपने पति अमित साहू को गिफ्ट में एक सोने की चेन भेंट की थी. अमित उसे पहने रहता था. पहली अगस्त को रात में सना और अमित वीडियो काल के जरिए बात कर रहे थे. बातचीत के दौरान अमित के गले में सोने का चेन नहीं दिखी थी. इस पर सना ने सवाल किया तो चेन को ले कर उन के बीच बहस होने लगी. उस के तुरंत बाद ही सना नागपुर से जबलपुर के लिए चल दी थी.
पुलिस पर बढ़ रहा था राजनीतिक दबाव
सना की तलाश में दोनों राज्यों की पुलिस टीम जुटी हुई थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही थी. न तो सना खान का पता चल पाया था और न ही अमित साहू का. सना के घर वालों की उम्मीदें टूटती जा रही थीं. सना को लापता हुए 4 दिन बीत चुके थे.
इसे ले कर राजनीति भी तेज हो गई थी. पक्षविपक्ष की राजनीति गरमा गई थी. लोग इसे हिंदूमुसलिम और कांग्रेसबीजेपी के नजरिए से देखने लगे थे. अल्पसंख्यक मोर्चा महाराष्ट्र के प्रदेश महामंत्री जुनैद खान ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिख कर सीबीआई जांच की मांग कर दी थी. यहां तक कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के औफिस से भी लगातार इस केस की मौनिटरिंग की जा रही थी. पुलिस जांच टीम पर बड़े पुलिस अधिकारियों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था.
दूसरी तरफ सना का भाई भी अमित पर निशाना साधे हुए था. उस का आरोप था कि उस ने सना की हत्या कर लाश ठिकाने लगा दी है और खुद गायब हो चुका है. यहां तक कि सना के भाई ने अपनी बहन की लाश को हिरण नदी में फेंके जाने की आशंका भी जताई.
इस के बाद मामले को ले कर नागपुर के मानकापुर थाने की पुलिस ने जबलपुर में डेरा डाल दिया. सना की तलाश में महाराष्ट्र पुलिस ने 4 दिन जबलपुर में गुजारे, लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला. थकहार कर नागपुर पुलिस 7 अगस्त, 2023 को वापस लौट गई. एमपी पुलिस भी सना और अमित साहू के मोबाइल लोकेशन के आधार पर ही जांच कर रही थी.
इन्हीं जांच के सिलसिले में पुलिस ने अमित साहू के बिलहरी स्थित राजुल अपार्टमेंट में स्थित फ्लैट की तलाशी ली थी, लेकिन वहां कुछ नहीं मिला था. उस के बाद 6 अगस्त को पुलिस जबलपुर जिले के ही कटंगी थाना क्षेत्र के बेलखाडू में स्थित अमित साहू के आशीर्वाद ढाबे पर भी गई. पुलिस ने ढाबे में सघन चैकिंग की.
वहां पर मौजूद 10-12 लोगों से पूछताछ की गई. जिस जगह पर अमित ने ढाबा बना रखा था, उस जमीन के मालिक से भी पूछताछ की गई. उसे अमित उस जगह का 20 हजार रुपए प्रतिमाह किराया देता था. ढाबे पर काम करने वाला जितेंद्र नाम का नौकर वहां नहीं मिला. पुलिस को उम्मीद बंधी कि उस से अमित और सना के बारे में सुराग मिल सकता है. उसी दिन महाराष्ट्र पुलिस ने कटंगी थाना पुलिस के साथ मिल कर हिरण नदी और आसपास के जंगलों में भी सना और अमित को तलाश किया.
दोपहर का समय था. नागपुर की रहने वाली मेहरुनिशा मोबिन खान अपनी बेटी सना खान को लगातार फोन मिलाए जा रही थी. बारबार उस का मोबाइल कभी नौट रिचेबल, तो कभी नेटवर्क नहीं मिलने का संकेत दे रहा था. उन्होंने उस के दूसरे नंबर को लगाया. उस पर भी उसी तरह की आवाज आई. पहले नंबर को फिर से मिलाया. कुछ देर टोंटों की आवाज आने के बाद फिर से वही कनेक्टीविटी नहीं होने का रिकौर्डेड मैसेज मराठी भाषा में आने लगा…
खीझती हुई मेहरुनिशा बुदबुदाईं, “…तो यही है डिजिटल इंडिया… नेटवर्क ही नहीं. इतनी खराब कांग्रेस के जमाने में तो ऐसा नहीं था…”
कुछ पल ठहरने के बाद फिर खुद से बोलने लगीं, “…इसी नंबर पर तो सुबह बात हुई थी. कहीं उस ने सिम तो नहीं बदल लिया. अच्छा, नए नंबर को मिलाती हूं. वह बोली थी कि जबलपुर में वोडाफोन वाले नंबर पर मत काल करना…मैं ही भूल गई थी.”
मेहरुनिशा ने एक बार फिर नए नंबर को मिलाया. वहां से भी वही नेटवर्क नहीं होने की आवाज आई. यह सब करतेकरते करीब 15 मिनट बीत चुके थे. उन्हें चिंता होने लगी थी. माथे पर चिंता की लकीरें खिंच आई थीं.
हालांकि सना खान कोई किशोरी लडक़ी नहीं, बल्कि 34 साल की खूबसूरत युवती और एक बच्चे की मां थी. वह मां की तरह ही राजनीति में पैठ रखती थी. फर्क इतना था कि उसे बीजेपी की विचारधारा पसंद थी, जबकि मां मेहरुनिशा मोबिन खान शुरू से ही कांग्रेस की एक सामाजिक कार्यकर्ता की हैसियत से जुड़ी हैं और नागपुर के गोरले लेआउट क्षेत्र के अवस्थी नगर में रहती हैं.
अपनी राजनीतिक सूझबूझ और दमखम पर ही सना बहुत जल्द ही पूर्वी महाराष्ट्र शहर में भाजपा अल्पसंख्यक सेल की पदाधिकारी बना दी गई थी. उस की प्रदेश भाजपा के बड़े पदाधिकारियों से ले कर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तक से अच्छी जानपहचान थी. जनसभाओं में उन के साथ मंच साझा करती थी. मां के लिए चिंता की बात इसी को ले कर थी कि उसे जितने चाहने वाले थे, उतने ही उस से ईष्र्या करने वाले भी थे.
मां और भाई को होने लगी चिंता
34 वर्षीय सना ने 24 अप्रैल, 2023 को 37 वर्षीय अमित साहू उर्फ पप्पू से जबलपुर में शादी की थी. बिजनैसमैन साहू लगभग 4 साल पहले अपनी पहली पत्नी से अलग हो गए थे, जबकि सना भी अपने पहले पति से अलग हो कर अपनी मां के साथ रह रही थी. साथ में रहने वाला 13 साल का बेटा अल्तमश नागपुर के स्कूल में पढ़ाई कर रहा है. इस कारण सना का नागपुर और जबलपुर आनाजाना लगा रहता था. यह कहें कि उस का एक पैर नागपुर में होता था तो दूसरा पैर जबलपुर में रहता था. वह अपनी मां के घर नागपुर और पति के घर जबलपुर अकसर अकेली आतीजाती थी.
सना पहली अगस्त की आधी रात को एक प्राइवेट बस से जबलपुर के लिए रवाना हुई थी. उस का जबलपुर जाना अचानक हुआ था. अगली सुबह उस ने मां को फोन किया था. अच्छी तरह जबलपुर पहुंचने की सूचना दे दी थी. उस ने बताया था कि रास्ते में उसे कोई परेशानी नहीं हुई और उसे कोई थकावट भी महसूस नहीं हो रही है. इस पर मां ने समझाते हुए उसे एक बार फिर वही बात दोहराई थी, जो उस ने घर से निकलते वक्त बोली थी, “गुस्सा मत करना…शांति से बातचीत करना… बहस नहीं करना.”
जवाब में सना ने हामी भरी थी और विश्वास दिलाया था, “अम्मी, जैसा तुम चाहो.”
सना ने नागपुर में अपने बेटे से भी फोन पर बात की थी. उस के बाद बेटा बाय बोलता हुआ स्कूल चला गया था और मेहरुनिशा भी घरेलू कामकाज में व्यस्त हो गई थीं. जैसे ही उन्हें फुरसत हुई, उन्होंने सना को फोन मिलाना शुरू कर दिया था. किंतु यह क्या! फोन लग ही नहीं रहा था. वह कभी सना पर तो कभी टेलीकाम कंपनी पर खीझ निकाल रही थीं. खीझती हुई खुद से बोलने लगी, “3-3 फोन और 10 सिम किस काम के, जब किसी पर बात ही न हो पाए.”
कुछ पल ठहरने के बाद उन्होंने अपने बेटे को फोन मिलाया, “बेटा मोहसिन, तू कहां है?”
“क्या हुआ अम्मी, मैं किसी काम से बाजार की ओर निकला हूं. तुम्हारी आवाज घबराई हुई क्यों लग रही है? घर में सब खैरियत तो है न?” मोहसिन खान बोला.
“हां बेटा, सब खैरियत है.” मेहरुनिशा बोली.
“तो फिर तुम्हारी आवाज को क्या हुआ? हांफने जैसी आवाज निकल रही है.”
“अरे कुछ नहीं बेटा, मैं तेजी से सीढिय़ां चढ़ कर तुम्हें देखने के लिए सब से ऊपरी मंजिल पर चढ़ गई थी. तुम नहीं दिखे तो फोन किया सना को ले कर…” मेहरुनिशा बोलीं.
“सना को ले कर? क्या हुआ उसे, सुबह ही तो उस से तुम ने बात की थी. उस ने मेरी भी खैरियत पूछी थी…” मोहसिन बोला.
“उसे फोन मिलातेमिलाते काफी समय हो गया. कई नंबरों पर फोन मिला लिया, कोई नहीं लग रहा है. जरा तू अपने फोन से उसे फोन मिला ले.” मेहरुनिशा बोलीं.
“जी अम्मी,” मोहसिन ने कहा.
मेहरुनिशा को कुछ समय बाद मोहसिन का फोन आया. उस ने कहा, “अम्मी मेरे फोन से भी उस का फोन नहीं लग रहा.”
“ऐं… तुम्हारे फोन से भी नहीं लग रहा. बेटा, मुझे तो डर लग रहा है,” मेहरुनिशा रोआंसी होती हुई बोलीं.
“क्यों, इस में डरने की क्या बात है. सना अपने पति के पास गई है. वह समझदार है. जिम्मेदारी समझती है. बिजनैस वुमन है, नेता है…” मोहसिन सना की तारीफ में बोलता जा रहा था.
बीच में ही मेहरुनिशा ने टोक दिया, “बेटा, वह सब तो ठीक है, लेकिन कल रात वह फोन पर अमित से जिस लहजे में बात कर रही थी, वह मुझे अच्छा नहीं लगा. इस पर मैं ने समझाया था उसे.”
“क्यों क्या हुआ था? फिर उस का अमित के साथ झगड़ा हुआ था?” मोहसिन ने पूछा.
“हां बेटा, पैसे के हिसाबकिताब को ले कर तो हमेशा उन दोनों के बीच बहस होती ही रहती है, लेकिन कल सना कुछ ज्यादा ही झगड़ रही थी. वह अमित से फोन पर ही ऊंची आवाज में बात कर रही थी. अपनी सोने की चेन और पैसा मांग रही थी. साहू ने उसे जबलपुर आ कर बात करने को कहा था.” मेहरुनिशा बोली.
“अच्छा! इसलिए वह आननफानन में रात को ही जबलपुर निकल गई…कोई बात नहीं, थोड़ी देर में मैं उसे फिर काल करूंगा. तुम भी कर लेना. वैसे उस के फोन का नेटवर्क मिलते ही हमारी मिस काल का मैसेज देख ही लेगी. तुम चिंता मत करो, सब कुछ ठीक ही होगा.”
“ठीक ही रहे तो अच्छा है बेटा,” कहती हुई मेहरुनिशा ने काल डिसकनेक्ट कर दी.
मामला हाईफाई होने की वजह से उड़ी पुलिस की नींद
उस के बाद मेहरुनिशा ने अंत में अमित साहू को फोन किया. उस से बात हुई. अपनी बेटी के बारे में पूछा, लेकिन सना से बात नहीं हो पाई. साहू ने बताया कि सना आई थी. बहुत ही गुस्से में थी. उस के साथ काफी तीखी बहस हुई. उस के बाद वह चली गई. कहां गई, कुछ नहीं बताया. उल्टे साहू ही कहने लगा कि अगर वह नागपुर पहुंचे, तब सना से उस की भी बात करवा देना.