UP Crime: सीमा के स्वप्न संसार में सेंध

UP Crime: महत्त्वाकांक्षी होना बुरी बात नहीं है, लेकिन अतिमहत्त्वाकांक्षा हमेशा कष्टदायी होती है. सीमा अगर खुद पर नियंत्रण रख कर अपने पति पर भरोसा रखती तो उस का और उस के परिवार का ऐसा भयानक अंजाम कभी न होता.

उत्तर प्रदेश के जिला इटावा के कस्बा बकेवर के रहने वाले रामलाल तोमर के परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा व 3 बेटियां थीं, जिन में सीमा सब से बड़ी थी. वह अपने भाई बहनों से हर मामले में तेज थी. पढ़नेलिखने में भी वह पीछे नहीं थी. उस ने हाईस्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की थी. सीमा जब जवान हुई तो उस के मातापिता को उस की शादी की चिंता होने लगी.  रामलाल तोमर ने सीमा के लिए रिश्ता देखना शुरू किया तो औरैया के मोहल्ला आर्यनगर का राकेश उर्फ राजू उन्हें पसंद आ गया. पेशे से ड्राइवर राजू का अपना मकान था. देखने में भी वह हृष्टपुष्ट था. उस का एक ही भाई था नरेश, जो प्राइवेट नौकरी करता था. लड़का भी ठीक था और उस का परिवार भी. रामलाल तोमर ने बेटी का रिश्ता उस के साथ तय कर दिया.

सीमा खूबसूरत लड़की थी. राकेश को भी वह पसंद आ गई. फलस्वरूप दोनों की शादी हो गई. यह सन 2006 की बात है. गोरा रंग, भरा हुआ चेहरा, कटीले नैननक्श, छरहरा बदन, ऊपर से भरपूर जवानी. राकेश को लगा जैसे सीमा के रूप में उसे हूर मिल गई है. वह उस की खूबसूरती में डूब कर रह गया. सीमा भी राकेश को पा कर खुश थी. दोनों का जीवन हंसीखुशी से कटने लगा. परिवार की स्थिति के अनुसार जीवन की लगभग हर आर्थिक जरूरत पूरी हो रही थी. विवाह के शुरुआती दिनों में तो पतिपत्नी दोनों खूब खुश थे, लेकिन जब जिम्मेदारियां बढ़ीं तो धीरेधीरे दोनों का एकदूसरे के प्रति आकर्षण कम होने लगा. वक्त के साथ राकेश को लगने लगा कि सीमा कुछ ज्यादा ही महत्त्वाकांक्षी औरत है.

वजह यह थी कि अब वह राकेश से तरहतरह की फरमाइशें करने लगी थी. जबकि ड्राइवरी कर के अपने परिवार का बोझ उठाने वाले राकेश के लिए उस की फरमाइशें पूरा करना आसान नहीं था. लेकिन यह बात सीमा की समझ में नहीं आती थी. वह पति की मजबूरी समझने के बजाय उस से लड़ाईझगड़ा करने लगती थी. सीमा के इसी स्वभाव की वजह से दोनों के दांपत्य जीवन में कटुता आने लगी. फिर भी विषम परिस्थितियों के बावजूद वक्त अपनी चाल चलता रहा. इस बीच सीमा एक बेटी हिना और एक बेटे रूपेश की मां बन गई थी.

सीमा अपने बच्चों का पालनपोषण अच्छी तरह से करना चाहती थी. वह उन्हें अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहती थी, लेकिन राकेश की सीमित आय में यह संभव नहीं था. सीमा बच्चों की परवरिश और उन की पढ़ाईलिखाई को ले कर अकसर पति से झगड़ती रहती थी. रोजरोज के झगड़े से राकेश तनाव में रहने लगा था. इस तनाव को दूर करने के लिए उस ने शराब का सहारा लेना शुरू कर दिया था. दिन भर के कामकाज से थका मादा राकेश अब ज्यादातर नशे में धुत हो कर देर रात घर लौटता था. घर आ कर वह थोड़ाबहुत खाना खाता और बिस्तर पर लुढक जाता. सीमा अभी जवान थी, उस की रातें बिस्तर पर करवटें बदलते गुजरतीं. उस का मन करता था कि उस का पति उसे प्यार करे, उस की शारीरिक जरूरतों को पूरा करे. लेकिन राकेश की उपेक्षा की वजह से वह मन मार कर रह जाती थी.

आर्यनगर मोहल्ले में ही सीमा के घर से कुछ दूरी पर सुरेश शर्मा का अपना मकान था, जहां वह सपरिवार रहता था. सुरेश शर्मा प्रौपर्टी डीलर था, साथ ही जरूरतमंदों को ब्याज पर पैसा भी देता था. उस ने अपने घर के भूतल पर प्रौपर्टी डीलिंग का औफिस बना रखा था. उस का काम अच्छा चल रहा था. एक दिन अचानक सीमा की बेटी हिना की तबियत खराब हो गई. उसे नर्सिंगहोम में भरती कराना पड़ा. सीमा को पैसों की जरूरत थी, इसलिए वह अपने पति राकेश के साथ प्रौपर्टी डीलर सुरेश शर्मा के औफिस जा पहुंची. खूबसूरत सीमा को देख कर सुरेश के दिल में हलचल मच गई. उस ने आने का कारण पूछा तो सीमा बोली, ‘‘शर्माजी, मेरी बेटी हिना अस्पताल में भरती है. मुझे 10 हजार रुपए चाहिए.’’

सुरेश शर्मा गोरी रंगत व तीखे नयननक्श वाली सीमा के चेहरे पर नजरें गड़ाते हुए बोला, ‘‘मैडम, आप जरूरतमंद हैं और मैं जरूरतमंदों को कभी निराश नहीं करता, लेकिन आप को मूल के साथसाथ ब्याज भी देना होगा.’’

‘‘यह मेरे पति राकेश हैं, ड्राइवर की नौकरी करते हैं. हम आप की पाईपाई चुका देंगे.’’ सीमा ने गारंटी सी दी.

सुरेश शर्मा सोचने लगा, ‘इतनी खूबसूरत औरत एक मामूली ड्राइवर की बीवी. इसे तो किसी उस जैसे दौलतवाले की होना चाहिए.’

सोचविचार कर शर्मा सीमा के पति से मुखातिब हुआ, ‘‘क्यों भाई राजू, तुम्हारी बीवी जो वादा कर रही है, उसे पूरा करोगे?’’

‘‘हां शर्माजी, मैं वादा करता हूं कि आप का पैसा ब्याज समेत चुका दूंगा.’’ राजू हाथ जोड़ कर बोला.

‘‘फिर ठीक है.’’ कह कर शर्मा ने 10 हजार रुपए सीमा को दे दिए. सीमा तो पैसे ले कर चली गई, लेकिन सुरेश शर्मा के दिल में खलबली मचा गई. दरअसल वह पहली ही नजर में उस के दिलोदिमाग पर छा गई थी. फलस्वरूप वह उसे हासिल करने के लिए तानेबाने बुनने लगा. उस ने थोड़ी छानबीन की तो उसे पता चला कि सीमा का पति राकेश शराब का लती है. सुरेश शर्मा खुद भी शराब का शौकीन था. उस ने कोशिश की तो पीनेपिलाने के नाम पर जल्द ही दोनों की दोस्ती हो गई. बस फिर क्या था, दोनों की राकेश के घर में महफिल जमने लगी. पीनेपिलाने के दौरान सुरेश शर्मा की नजरें सीमा पर ही टिकी रहती थीं.

30 वर्षीया सीमा 2 बच्चों की मां जरूर थी, लेकिन उस की खूबसूरती में कोई कमी नहीं आई थी. उस का गोरा रंग, मांसल शरीर तथा बड़ीबड़ी आंखें किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकती थीं. वह सजसंवर कर आंखों पर काला चश्मा पहन कर जब घर से निकलती तो किसी हीरोइन से कम नहीं लगती थी. अधेड़ उम्र का सुरेश शर्मा सीमा का दीवाना बन गया था. अपनी दीवानगी के चलते जबतब उस ने सीमा के घर आनाजाना शुरू कर दिया था. वह जब भी आता, बच्चों और सीमा के लिए कुछ न कुछ ले कर आता. वह सीमा से लच्छेदार बातें करता, जो उसे बहुत अच्छी लगतीं. रहीबची कमी उस के लाए उपहार पूरी कर देते. फलस्वरूप धीरेधीरे वह भी सुरेश शर्मा की ओर आकर्षित होने लगी.

सीमा महत्त्वाकांक्षी औरत थी. उसे लगा कि धनाढ्य सुरेश शर्मा के माध्यम से उस की महत्त्वाकांक्षा पूरी हो सकती है. एक रोज जब सुरेश शर्मा उस के घर आया तो वह उस के सामने खुलेपन से पेश आई. बातोंबातों में उस ने कहा, ‘‘शर्माजी, मेरी एक चाहत है. अगर आप चाहें तो पूरी कर सकते हैं.’’

सही मौका देख सुरेश शर्मा उस का हाथ पकड़ कर बोला, ‘‘बोलो, क्या चाहती हो?’’

‘‘मेरे पति राकेश दूसरे की वैन चलाते हैं. नौकरी से घर का खर्चा नहीं चल पाता. मैं चाहती हूं कि आप उन्हें एक वैन खरीदवा दें. कमाई का आधा रुपया वह आप को देंगे और बाकी रुपए से घर का खर्च चलता रहेगा.’’

सीमा की डिमांड बड़ी थी. सुरेश शर्मा खामोश हो गया. वह मन ही मन सोचने लगा, ‘सीमा वाकई चालाक औरत है. अभी पिछला कर्ज चुका नहीं पाई, दूसरी बड़ी डिमांड कर दी. लेकिन वह भी प्रौपर्टी डीलर है. घाटे का सौदा नहीं करेगा. सीमा कर्ज नहीं चुका पाएगी तो वह उस के शरीर से वसूल कर लेगा.’

सुरेश शर्मा को खामोश देख कर सीमा ने पूछा, ‘‘क्या बात है शर्माजी, आप को तो सांप सूंघ गया. कोई जोरजबरदस्ती नहीं है. मैं तो वैसे ही आप की एहसानमंद हूं. आप ने मदद न की होती तो पता नहीं मेरी बेटी का क्या हाल होता.’’

‘‘नहीं…नहीं सीमा, तुम निराश मत हो. तुम्हारी चाहत पूरी होगी.’’ इस के बाद महीना बीतते सुरेश शर्मा ने सीमा के पति राकेश को वैन खरीद कर दे दी. वैन पा कर राकेश शर्मा खुशी से झूम उठा. उस ने वैन को एक अंगे्रजी माध्यम स्कूल में अटैच करा लिया. दिन में वह बच्चों को ढोता और रात में शादी समारोह या बुकिंग पर चला जाता. इस तरह वह दोहरी कमाई करने लगा. कमाई बढ़ी तो घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक हो गई. सुरेश शर्मा वैन की कमाई के रुपए लेने अकसर सीमा के घर आता रहता था. पहले वह आता था तो गंभीर बना रहता था. लेकिन अब वह सीमा से हंसीमजाक के साथ उस के शरीर से हलकीफुलकी छेड़छाड़ भी कर लेता था. सीमा न उस के मजाक का बुरा मानती थी, न शारीरिक छेड़छाड़ का.

कहते हैं, औरत मर्द की निगाहों की बेहद पारखी होती है. सीमा भी समझ गई थी कि प्रौपर्टी डीलर सुरेश शर्मा उस से क्या चाहता है. सीमा का पति बिस्तर पर उस का साथ नहीं देता था. वह शराब पी कर देर रात घर आता और खापी कर चारपाई पर लुढ़क जाता. वह रात भर तड़पती रहती. यही वजह थी कि जब सुरेश शर्मा ने उस से शारीरिक छेड़छाड़ शुरू की तो उस ने उसे रोकने की कोई कोशिश नहीं की. एक दिन एकांत पा कर सुरेश शर्मा ने जब सीमा को छेड़ा तो वह स्वयं को रोक नहीं सकी और मुसकराते हुए पूछ लिया, ‘‘शर्माजी, आप चाहते क्या हैं?’’

‘‘मैं तो तुम्हें चाहता हूं.’’ सुरेश शर्मा ने आगे बढ़ कर सीमा के कंधों पर हाथ रखते हुए मादक स्वर में कहा. उस वक्त उस के स्वर में ही नहीं, आंखों में भी मादकता तैर रही थी. सीमा चाह कर भी सुरेश शर्मा के हाथ को अपने कंधों से नहीं हटा सकी. सुरेश शर्मा का हौसला बढ़ा तो वह उस के शरीर से छेड़छाड़ करने लगा. फिर उस ने सीमा को अपनी बांहों में भर लिया. सीमा भी उस से लिपट गई. इस के बाद दोनों तभी अलग हुए, जब उन के चेहरों पर पूर्ण संतुष्टि के भाव उभर आए.

सुरेश शर्मा और सीमा के बीच जब एक बार नाजायज रिश्ते बन गए तो फिर यह सिलसिला दिनोंदिन बढ़ता ही गया. जब भी मौका मिलता, दोनों एकदूसरे में समा जाते. शर्मा से शारीरिक सुख मिलने लगा तो सीमा ने पति को दिल से ही निकाल दिया. वह केवल प्रौपर्टी डीलर सुरेश शर्मा की हो कर रह गई. कहते हैं, पाप कितना भी छिपा कर किया जाए, एक न एक दिन उजागर हो ही जाता है. धीरेधीरे सुरेश शर्मा और सीमा के अवैध रिश्तों को ले कर पासपड़ोस में तरहतरह की चर्चाएं होने लगीं. जब इस बात की भनक राकेश तोमर को लगी तो उस का माथा ठनका. उसे अपनी बीवी पर शक तो पहले से ही था, लेकिन लोगों की चर्चाओं ने उस के शक को पक्का कर दिया.

राकेश दोनों को रंगेहाथ पकड़ना चाहता था. इसलिए उस ने गुप्तरूप से सुरेश शर्मा और सीमा पर नजर रखनी शुरू कर दी. एक शाम राकेश यह कह कर घर से निकला कि वह वैन ले कर बुकिंग पर जा रहा है. अब वह सुबह तक आ पाएगा. राकेश के जाते ही सीमा ने सुरेश शर्मा को मोबाइल से यह जानकारी दे कर उसे घर बुला लिया. कुछ देर तक दोनों हंसीठिठोली करते रहे, फिर बिस्तर पर पहुंच गए. दोनों रंगरेलियां मना ही रहे थे कि दरवाजे पर दस्तक हुई. सीमा ने दरवाजा खोला तो सामने राकेश खड़ा था. उसे देख कर सीमा ने घबरा कर पूछा, ‘‘तुम तो सुबह आने को कह कर गए थे?’’

सीमा के अस्तव्यस्त कपड़े, उलझे बाल और घबराहट देख कर राकेश समझ गया कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है. वह सीमा को परे धकेल कर घर के अंदर कमरे में पहुंचा तो सुरेश शर्मा वहां मौजूद था. वह कपड़े पहन चुका था. शर्मा राकेश को देखते ही बोला, ‘‘तुम आ गए, दरअसल मुझे पैसों की सख्त जरूरत थी, इसलिए तुम्हारा इंतजार कर रहा था.’’

राकेश गुस्से में बोला, ‘‘शर्माजी, आज के बाद तुम मेरे घर में कदम भी नहीं रखोगे. पैसे मैं खुद देने आऊंगा. तुम्हारे कारण हमारी कितनी बदनामी हो रही है, इस का अंदाजा है तुम्हें? मैं तुम्हारे एहसान के बोझ तले दबा हूं, ऊपर से तुम्हारी उम्र का खयाल. वरना अब तक मेरे हाथ तुम्हारी गर्दन तक पहुंच गए होते.’’

राकेश के तेवर देख कर सुरेश शर्मा ने नजरें झुका लीं और वहां से चला गया. उस के जाते ही राकेश का सारा गुस्सा सीमा पर फूट पड़ा. उस ने उस की जम कर पिटाई की. सीमा चीखनेचिल्लाने लगी. पत्नी के साथ मारपीट कर के राकेश चारपाई पर जा कर लेट गया. कुछ देर में उसे नींद आग गई. जबकि सीमा रात भर दर्द से तड़पती रही. इस के बाद तो मारपीट का सिलसिला सा चल पड़ा. राकेश शराब तो पीता ही था, लेकिन अब वह कुछ ज्यादा ही पीने लगा. देर रात वह नशे में धुत हो कर आता. बातबेबात सीमा से उलझता और फिर उसे जानवरों की तरह पीटता. कभीकभी दोनों का झगड़ा घर से शुरू होता और सड़क पर आ जाता. पासपड़ोस के लोग बड़े मजे से दोनों का झगड़ा देखते. लेकिन सीमा की मदद के लिए कोई नहीं आता.

मारपीट और बदनामी के बावजूद सीमा ने सुरेश शर्मा का साथ नहीं छोड़ा. उसे जब भी मौका मिलता मोबाइल से बात कर के वह उसे बुला लेती और दोनों हमबिस्तर हो जाते. यह अलग बात थी कि अब वे सतर्कता बरतने लगे थे. लेकिन उन की सतर्कता के बावजदू एक दिन राकेश ने दोनों को फिर रंगेहाथों पकड़ लिया. उस दिन राकेश ने पहले सुरेश शर्मा की पिटाई की, उस के बाद सीमा को मारमार कर अधमरा कर दिया. सीमा कहीं उस के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट न दर्ज करा दे, राकेश घर से गायब हो गया. इधर जब सुरेश शर्मा को इस बात का पता चला कि राकेश घर से गायब है तो वह सीमा का हालचाल जानने जा पहुंचा. सीमा उसे देख कर फफक कर रो पड़ी,

‘‘राकेश का जुल्म अब मुझ से बरदाश्त नहीं होता. उस ने पीटपीट कर मेरा पूरा शरीर काला कर दिया है. अब मैं उस से छुटकारा पाना चाहती हूं.’’

‘‘छुटकारा… मतलब… हत्या?’’ शर्मा चौंका.

‘‘हां, मेरे पति को मार डालो, वरना एक दिन वह हम दोनों को मार डालेगा.’’ सीमा ने मन की बात कह दी.

‘‘शायद, तुम ठीक कहती हो. लेकिन इस काम के लिए हम दोनों को प्रयास करना होगा. पैसा तो मैं खर्च कर सकता हूं, पर भरोसे का कोई आदमी चाहिए.’’ सुरेश शर्मा ने भी अपनी बात कह दी.

‘‘भरोसे का आदमी है, मैं उस की पत्नी से बात करती हूं.’’ सीमा ने कहा तो सुरेश शर्मा ने आश्चर्य से पूछा, ‘‘कौन है वह?’

‘‘मेरी सहेली छाया वर्मा का पति राजेश वर्मा.’’

‘‘सुपारी किलर राजेश वर्मा?’’ सुरेश ने चौंक कर पूछा.

‘‘हां, वही राजेश वर्मा, पर कितनी रकम लेगा, यह बात कर के बताऊंगी.’’

‘‘ठीक है, तुम बात करो. मैं पैसे का बंदोबस्त करता हूं.’’ शर्मा ने आश्वासन दिया.

इस के बाद सीमा शुक्ला टोला में रहने वाली अपनी सहेली छाया वर्मा से मिली और उस से पति से निजात दिलाने की बात कही. इस के लिए छाया वर्मा ने 2 लाख रुपए मांगे. लेकिन बातचीत के बाद एक लाख 60 हजार रुपए में सौदा तय हो गया. छाया वर्मा का पति राजेश वर्मा दिखावे के लिए तो कार ड्राइवर था, लेकिन असल में वह अपराधी था और पैसा ले कर हत्या जैसे जघन्य अपराध करता था. छाया वर्मा ने अपने पति राजेश वर्मा को राकेश उर्फ राजू तोमर की हत्या के लिए राजी कर लिया. सीमा ने सुरेश शर्मा की मुलाकात राजेश वर्मा व उस की पत्नी छाया वर्मा से करवाई और सुपारी किलर राजेश वर्मा को 20 हजार रुपए एडवांस दिलवा दिए. शेष रुपए काम हो जाने के बाद देने को कहा गया. सुपारी लेने के बाद राजेश वर्मा ने इस काम में अपने दोस्त कल्लू सक्सेना को भी शामिल कर लिया.

करीब एक सप्ताह तक इधरउधर घूमने के बाद राकेश घर लौट आया. अब वह पूरी तरह निश्चिंत था. क्योंकि सीमा ने पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी. उस ने बच्चों से प्यार भरी बातें कीं और सीमा के साथ भी सहज व्यवहार किया. यहां तक कि उस ने सीमा से मारपीट के लिए माफी भी मांग ली. सीमा के व्यवहार में भी बदलाव आ चुका था. दिखावे के लिए वह भी उस से प्यार करने लगी थी. राकेश को क्या मालूम था कि पत्नी का यह प्यार उस के लिए मौत की दस्तक है.

16 मार्च, 2015 की सुबह औरैया के कुछ लोगों ने शहर के पास वाली नहर के किनारे स्थित वीरेंद्र कुशवाहा के खेत में लगे ट्यूबवेल के कमरे के पास एक युवक की लाश पड़ी देख कर औरैया कोतवाली पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी अजय पाठक अपने सहयोगी उपनिरीक्षक मोहम्मद शाकिर व अनिल पांडेय के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. पाठक ने लाश पाए जाने की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दे दी और निरीक्षण में जुट गए. युवक की हत्या किसी तेज धार वाले हथियार से की गई थी. उस का गला आधे से ज्यादा कटा हुआ था. हाथ पर भी जख्म थे. मृतक की उम्र 35 साल के आसपास थी. जामातलाशी में उस के पास से ऐसा कुछ भी बरामद नहीं हुआ, जिस से उस का नामपता मालूम हो जाता. लाश को सैकड़ों लोगों ने देखा, लेकिन कोई भी मृतक को पहचान नहीं सका.

थानाप्रभारी अजय पाठक अभी लाश का निरीक्षण कर रहे थे कि सूचना पा कर एसपी मनोज तिवारी, एएसपी विपुल कुमार श्रीवास्तव और सीओ (सिटी) रमेशचंद्र भारतीय भी आ गए. उन्होंने डौग स्क्वायड को भी बुला लिया. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की. लेकिन मृतक की पहचान नहीं हो सकी. खोजी कुत्ता भी लाश को सूंघ कर भौंकता हुआ नहर तक गया और वापस लौट आया. शिनाख्त न होने पर पुलिस ने लाश की फोटो वगैरह करा कर उसे पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया. पुलिस अधीक्षक मनोज तिवारी ने मृतक और हत्यारों का पता लगाने के लिए एएसपी विपुल कुमार श्रीवास्तव के निर्देशन में एक सशक्त पुलिस टीम बनाई.

इस टीम में सीओ सिटी रमेशचंद्र भारतीय, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अजय पाठक, एसआई मोहम्मद शाकिर, अनिल पांडेय तथा सर्विलांस टीम को शामिल किया गया. यह पुलिस टीम 4 दिनों तक पसीना बहाती रही, लेकिन मृतक की हत्या का रहस्य खुलना तो दूर उस की शिनाख्त तक नहीं हो सकी. 21 मार्च, 2015 को आर्यनगर मोहल्ला निवासी नरेश तोमर ने थाना कोतवाली आ कर बताया कि उस का भाई राकेश उर्फ राजू तोमर करीब एक हफ्ते से गायब है. इस पर अजय पाठक ने उसे मृतक की फोटो दिखाई. फोटो देखते ही नरेश फफक पड़ा. उस ने बताया कि यह फोटो उस के भाई राकेश की है.

लाश की शिनाख्त होते ही पुलिस हरकत में आ गई. पुलिस टीम ने नरेश से पूछताछ की तो उस ने अपने भाई की हत्या का संदेह प्रौपर्टी डीलर सुरेश शर्मा और उस के बेटे शिवम शर्मा पर जाहिर किया. पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया. थाना कोतवाली ला कर जब पुलिस टीम ने सुरेश शर्मा से पूछताछ की तो वह टूट गया और उस ने हत्या का जुर्म कबूल लिया. पूछताछ में सुरेश शर्मा ने बताया कि राकेश की पत्नी सीमा से उस के नाजायज संबंध बन गए थे. राकेश इन संबंधों का विरोध करता था और सीमा को बुरी तरह पीटता था. आजिज आ कर सीमा और उस ने राकेश की हत्या की साजिश रची. इस के बाद उन दोनों ने सुपारी किलर राजेश वर्मा और उस की पत्नी छाया वर्मा से बात की.

बातचीत के बाद सीमा ने अपने सुहाग का सौदा एक लाख 60 हजार में कर डाला और एडवांस के तौर पर 20 हजार रुपए भी दे दिए. राजेश वर्मा ने ही राकेश की हत्या की है. सुरेश शर्मा के बयान के आधार पर पुलिस टीम ने ताबड़तोड़ छापे मार कर राजेश वर्मा, उस की पत्नी छाया वर्मा और मृतक की पत्नी सीमा तोमर को गिरफ्तार कर लिया. थाना कोतवाली में जब उन से पूछताछ की गई तो सभी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. राजेश वर्मा ने कत्ल में प्रयोग किया गया गंड़ासा भी बरामद करा दिया, जिसे उस ने नहर के किनारे झाडि़यों से छिपा दिया था. राजेश के पास से पुलिस टीम ने 7500 रुपए भी बरामद कर लिए. शेष रुपए वह खर्च कर चुका था.

राजेश वर्मा ने पूछताछ में बताया कि सुपारी लेने के बाद उस ने यह काम करने के लिए अपने दोस्त कल्लू सक्सेना को शामिल कर लिया था. पीनेपिलाने के दौरान उस ने राजू से दोस्ती गांठ ली थी. 15 मार्च को वह राजेश उर्फ राजू को शहर के बाहर नहर पर ले गया और फिर खेत पर वहां पहुंचा, जहां ट्यूबवेल था. ट्यूबवेल के पास कमरा था. राकेश वहीं पसर गया. सही मौका देख कर उस ने कल्लू की मदद से राजू की गर्दन गंड़ासे से काट दी और गंड़ासा छिपा दिया. उस के बाद राकेश की हत्या की सूचना सुरेश शर्मा को दे दी. राकेश की हत्या कर के राजेश और कल्लू सक्सेना घर लौट आए थे.

चूंकि अभियुक्तों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, इसलिए थानाप्रभारी अजय कुमार पाठक ने मृतक के भाई नरेश को वादी बना कर भादंवि की धारा 302/201/120बी, के तहत, सुरेश शर्मा, राजेश वर्मा, छाया वर्मा, सीमा तोमर और कल्लू सक्सेना के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली. 24 मार्च, 2015 को पुलिस ने अभियुक्त सुरेश शर्मा, राजेश वर्मा, छाया वर्मा तथा सीमा तोमर को औरैया की कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया. कल्लू सक्सेना फरार था. UP Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारि

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सुषमा की पूरी रात आंखोंआंखों में कट गई, पलभर को भी नहीं सोई वह. कभी घर के भीतर चहलकदमी करने लगतीं तो कभी सोचने लगतीं कि मुश्किल की इस घड़ी में क्या करें, किस की मदद लें. उन की आंखों के सामने बारबार पति का चेहरा घूमने लगता. क्योंकि जो मुसीबत उन के सामने आ खड़ी हुई थी, उस में जरा सी लापरवाही उस की मांग का सिंदूर लील सकती थी, मन में यह खयाल आते ही डर के कारण सुषमा का पूरा शरीर सिहर उठता था.

आखिरकार बहुत सोचने के बाद सुषमा ने कठोर फैसला लिया और अपने पति के बौस को फोन कर के पूरी बात बताई. 37 वर्षीय अजय प्रताप सिंह अपनी पत्नी सुषमा के साथ नोएडा के सेक्टर-77 की सुपरटेक केपटाउन सोसाइटी में रहते थे. वह डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) दिल्ली में बतौर रिसर्च साइंटिस्ट तैनात थे. मूलत: उन्नाव के रहने वाले अजय प्रताप 26 सितंबर, 2020 की शाम करीब साढ़े 5 बजे अपनी पत्नी से यह कह कर घर से निकले थे कि घर की जरूरतों का कुछ सामान लेने के लिए मार्किट जा रहे हैं और कुछ देर में वापस लौट आऐंगे.

अजय घर से अपनी होंडा सिटी कार यूपी 14 बीएस 5232 ले कर निकले थे. डेढ़दो घंटे बीत जाने पर सुषमा को चिंता होने लगी कि आखिर अजय ऐसी कौन सी शौपिंग करने के लिए गए हैं कि 2 घंटे से ज्यादा का वक्त बीतने पर भी नहीं लौटे. सुषमा ने अजय का फोन लगाया तो फोन स्विच्ड औफ मिला. इस के बाद उन की चिंता बढ़ गई. सुषमा बारबार पति का नंबर मिलाती रहीं, मगर फोन स्विच्ड औफ बताता रहा. इसी तरह करीब ढाई घंटे बीत गए. सुषमा सोच ही रही थी कि ऐसे में क्या करें. अचानक सुषमा के फोन पर एक अंजान नंबर से काल आई तो उस ने यह सोच कर फोन उठा लिया कि हो सकता है अजय का फोन खराब हो गया हो या उस की बैटरी चली गई हो. संभव है वह किसी का फोन ले कर काल कर रहे हों.

फोन उठाते ही उम्मीद के मुताबिक दूसरी तरफ से अजय की आवाज सुनाई दी, जैसे ही अजय ने ‘हैलो मैं अजय बोल रहा हूं’ कहा तो उस के बाद पूरी बात बिना सुने ही सुषमा ने गुस्से में एक ही सांस में कई सवाल कर डाले, ‘‘अजय, तुम कहां हो… तुम्हारा फोन क्यों बंद है… ऐसी कौन सी शौपिंग करने चले गए कि ढाई घंटे होने को हैं और अब फोन कर रहे हो?’’

‘‘अरे मेरी बात तो सुनो, मैं बड़ी मुसीबत में फंस गया हूं.’’ दूसरी तरफ से अजय ने सुषमा के सवालों का जवाब देने के बजाए बीच में उस की बात काट कर कहा तो सुषमा के होश उड़ गए. उस ने अटकती सांसों से पूछा, ‘‘मुसीबत…कैसी मुसीबत?’’

‘‘सुषमा मुझे कुछ लोगों ने पकड़ लिया है और एक कमरे में बंद कर रखा है. वे मुझ से बहुत बड़ी रकम की मांग कर रहे हैं.’’

‘‘कौन लोग हैं वे और उन्होंने तुम्हें क्यों पकड़ा…किस बात के पैसे मांग रहे हैं?’’

घबराहट के कारण सुषमा ने पूरी बात सुने बिना ही सवालजवाब शुरू कर दिए तो अजय ने फिर उस की बात काटी, ‘‘मुझे नहीं पता ये लोग कौन हैं, किसलिए पैसे मांग रहे हैं लेकिन इतना जानता हूं कि ये लोग बहुत खतरनाक हैं और अगर हम ने इन की बात नहीं मानी तो ये लोग मुझे मार देंगे… हो सकता है ये तुम से बात करें. इन की बात सुन लेना बेबी और अगर हो सके तो पूरा कर देना वरना शायद हम दोबारा ना मिल सकें.’’

दूसरी तरफ से फोन कट गया. इस फोन के बाद तो सुषमा को पूरा ब्रह्मांड घूमता नजर आने लगा. उसे सुझाई नहीं दे रहा था कि वह करे तो क्या करे. सुषमा ने उसी नंबर पर कई बार फोन किया, जिस से अजय ने फोन किया था, लेकिन फोन स्विच्ड औफ मिला. सुषमा समझ गई कि किसी मुसीबत में फंसने की वजह से ही अजय घर नहीं पहुंचे. अजय की रूआंसी और परेशानी भरी आवाज सुन कर उसे समझ आ गया था कि वह जिन लोगों के चंगुल में हैं, वे सचमुच खतरनाक लोग रहे होंगे. लेकिन मुश्किल यह थी कि अभी तक उसे पूरा मामला समझ नहीं आया था कि उन्होंने अजय को किसलिए बंधक बनाया हुआ है. पैसे क्यों मांग रहे हैं और उन्होंने कितनी रकम मांगी है.

पति के लिए परेशान पत्नी

सुषमा यह सब सोच ही रही थी कि कुछ देर बाद उस के फोन पर फिर से एक अंजान नंबर से काल आई. इस बार नंबर वह नहीं था, जिस से अजय ने बात की थी. सुषमा ने यह सोच कर फोन उठा लिया कि हो सकता है अजय को बंधक बनाने वाले लोग ही दूसरे नंबर से बात कर रहे हों. सुषमा की शंका सच निकली. फोन पर एक पुरुष ने कड़कती हुई आवाज में कहा कि अजय उन के कब्जे में है और अपने पति से बात करने के बाद वह ये तो समझ ही गई होंगी कि वह जिंदा और सहीसलामत हैं.

दूसरी तरफ से फोन करने वाले ने धमकी दी कि अगर अगले 24 घंटे में उस ने 10 लाख रुपए का इंतजाम कर के रकम नहीं दी तो शायद उसे उस का पति जिंदा नहीं मिलेगा. फोन करने वाले ने जल्द से जल्द 10 लाख रुपए का इंतजाम करने के लिए कहा, साथ ही धमकी भी दी कि अगर इस बारे में पुलिस को सूचना दी या कोई और चालाकी की तो उस तक अजय की लाश ही पहुंचेगी. फोन करने वाले ने जब यह कहा कि उन के आदमी हर जगह नजर रख रहे हैं कोई भी चालाकी की तो तुरंत यह खबर उस तक पहुंच जाएगी. यह सुन कर सुषमा का कलेजा मुंह को आ गया. फोन सुनते ही उस ने सुनसान घर में इधरउधर देखा कि कोई आदमी उन के घर में तो नहीं छिपा है.

‘‘देखो भैया, मैं आप की सारी मांग पूरी कर दूंगी लेकिन यह तो बता दो, आप पैसे किस बात के मांग रहे हो… आखिर मेरे हसबैंड ने कौन सी गलती की है? क्या आप का उन से कोई उधार का लेनदेन है?’’

सुषमा ने फोन करने वाले की बात को बीच में काटते हुए हिम्मत जुटा कर सहमते हुए सवाल किया तो दूसरी तरफ से कहा गया, ‘‘मैडम ये नोएडा में रहने का टैक्स है और तुम्हारे पति की ठरक का जुरमाना भी…

‘‘अब ज्यादा सवाल न कर के पैसे का इंतजाम करो… टाइम कम है हमारे पास… रकम कैसे और कहां लेनी है इस के लिए तुम्हें कल फोन करेंगे लेकिन याद रखना हमारे लोग तुम पर नजर रख रहे हैं.’’ कहते हुए दूसरी तरफ से फोन काट दिया गया.

रात को करीब 10 बजे अजय का अपहरण करने वालों से सुषमा की ये आखिरी बात थी. इसी के बाद से सुषमा की जान गले में अटकी थी और वह पूरी रात बेचैनी से घर के भीतर टहलती रही. उसे बारबार लग रहा था कि कहीं कोई वाकई उस की एकएक गतिविधि पर नजर तो नहीं रख रहा. सोचते-सोचते रात आंखोंआंखों में बीत गई. आखिरकार सुषमा ने सुबह अपने पति के बौस को फोन कर के सारी बात बताई. उन्होंने कहा कि वह घर में रहें, कुछ ही देर में पुलिस पहुंच जाएगी.

ठीक वैसा ही हुआ, जैसा अजय के बौस ने कहा था. सुषमा का घर जिस इलाके में है, वह सैंट्रल नोएडा पुलिस के अंडर में आता है. कुछ ही देर में उस के घर की डोरबैल बजी, उस ने दरवाजा खोला तो सादे लिबास में नोएडा पुलिस के एडीशनल कमिश्नर लव कुमार, सैंट्रल नोएडा पुलिस डीसीपी राजेश कुमार सिंह, एडीशनल कमिश्नर रणविजय सिंह, एसीपी विमल कुमार सिंह और सेक्टर 49 थाने के एसओ सुधीर कुमार सिंह सामने खड़े थे.

दरअसल, सुषमा ने जब अपने पति के बौस को अजय के किडनैप होने की जानकारी और इस की एवज में फिरौती मांगने की बात बताई तो डीआरडीओ की तरफ से नोएडा के कमिश्नर आलोक सिंह को फोन कर के इस मामले में गोपनीय ढंग से काम कर के जल्द से जल्द अजय प्रताप सिंह को अपहर्त्ताओं के कब्जे से मुक्त कराने को कहा गया.

डीआरडीओ का एक्शन

डीआरडीओ देश के सुरक्षा उपकरणों व प्रतिष्ठानों से जुड़ा ऐसा संगठन है जो रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है. अजय प्रताप सिंह इसी संस्था से जुड़े वैज्ञानिक थे. उन के पास संस्था से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां भी रहती थीं. इसलिए जैसे ही पुलिस कमिश्नर को यह जानकारी मिली, उन्होंने एडिशनल कमिश्नर लव कुमार को सारी जानकारी दे कर बेहद गोपनीय ढंग से अजय प्रताप को अपहर्त्ताओं के कब्जे से मुक्त कराने का औपरेशन शुरू करने का आदेश दिया. इस के बाद लव कुमार ने तड़के ही तमाम अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई और सभी अफसरों को सादे कपड़ों में अजय प्रताप के घर पहुंचने को कहा.

अधिकारियों ने अपना परिचय देने के बाद जब सुषमा से अजय प्रताप सिंह के अपहरण से जुड़ी सारी जानकारियां मांगी तो उन्होंने वह पूरा घटनाक्रम बयान कर दिया, जो अब तक हुआ था. पुलिस ने सुषमा से वे दोनों नंबर हासिल कर लिए, जिन पर पहले पति अजय प्रताप से बात हुई थी और दूसरी बार अपहर्त्ता ने फोन कर के रकम की मांग की थी. सुषमा वर्मा से पुलिस ने एक लिखित शिकायत भी ले ली. सादे लिबास में पुलिस के कुछ लोगों और महिला पुलिस की कुछ तेजतर्रार पुलिसकर्मियों को सुषमा के पास छोड़ कर पुलिस टीम वापस लौट गई.

सुषमा की शिकायत पर उसी दिन थाना 49 पर भादंसं की धारा 364ए के तहत फिरौती के लिए अपहरण का मामला दर्ज कर लिया गया. डीसीपी राजेश कुमार सिंह ने एडिशनल डीसीपी रणविजय सिंह की निगरानी में एक विशेष टीम का गठन कर दिया. एसीपी विमल कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित इस टीम में थाना सेक्टर 49 के थानाप्रभारी सुधीर कुमार सिंह के अलावा एसआई विकास कुमार, महिला एसआई प्रीति मलिक, हैड कांस्टेबल प्रभात कुमार, जय विजय, कांस्टेबल सुबोध कुमार, सुदीप कुमार,अंकित पंवार और महिला कांस्टेबल रेनू यादव को शामिल किया गया.

इस के अलावा दूसरी स्टार टू टीम के एसआई शावेज खान तथा जोन फर्स्ट की सर्विलांस टीम के एसआई नवशीष कुमार को शामिल किया गया. सभी टीमों को बता दिया गया था कि मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए बिना विलंब किए और बिना किसी को भनक लगे सावधानी से औपरेशन को अंजाम देना है. गठित की गई टीमों में काम का बंटवारा कर दिया गया कि किसे इस औपरेशन में क्या भूमिका निभानी है. एडिशनल डीसीपी रणविजय सिंह ने गठित की गई टीमों के साथ कोऔर्डिनेशन का जिम्मा खुद संभाला लिया. सर्विलांस टीम ने सुषमा वर्मा से मिले दोनों मोबाइल नंबरों के साथ अजय प्रताप सिंह के नंबर की काल डिटेल्स निकाली और तीनों नंबरों को सर्विलांस पर लगा कर निगरानी शुरू कर दी.

स्टार टू की टीम ने फिरौती के लिए अपहरण करने वाले बदमाशों की धरपकड़ और उन के ठिकानों पर छापेमारी का काम शुरू कर दिया. जबकि इस मामले के जांच अधिकारी थानाप्रभारी सुधीर कुमार सिंह ने अपने थाने की टीम के साथ सर्विलांस टीम से मिल रही जानकारी के आधार पर धरपकड़ शुरू कर दी. सर्विलांस टीम को पता चला कि शाम को 5 बजे के बाद जब अजय प्रताप सिंह का फोन बंद हुआ था, तो उस से पहले उन्होंने आखिरी बार 3 नंबरों पर बात की थी. उन सभी नंबरों की लोकेशन सेक्टर 41 में आगाहपुर के पास बने ओयो होटल की पाई गई. इतना ही नहीं, फोन बंद होते समय अजय प्रताप के फोन की लोकेशन भी पुलिस को इसी होटल की मिली.

पुलिस को मिली राह

जानकारी बेहद महत्त्वपूर्ण थी, लेकिन इस पर ठोस काररवाई करने से पहले अधिकारी यह पुष्टि कर लेना चाहते थे कि उक्त होटल से अपहरण करने वालों का कोई वास्ता है या नहीं. क्योंकि अगर सर्विलांस के आधार पर वहां छापा मारा जाता और अजय प्रताप नहीं मिलते तो उन की जान को खतरा हो सकता था. लिहाजा अधिकारियों ने एसओ सुधीर कुमार की टीम के एक तेजतर्रार हैड कांस्टेबल जय विजय सिंह को फरजी ग्राहक बना कर ओयो होटल भेजा. जय विजय सिंह ने सेक्टर 41 के ओयो होटल में पहुंच कर वहां एक कमरा बुक कराया और खुद को काम के सिलसिले में पूर्वी उत्तर प्रदेश से आया हुआ बताया.

कमरा बुक करने के बाद जब जय विजय ने होटल में चल रही गतिविधियों की निगरानी शुरू की तो दूसरी मंजिल पर बने 2 कमरों के आसपास कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखीं. जय विजय ने होटल की पार्किंग की छानबीन की तो वहां अजय प्रताप सिंह की वह होंडा सिटी कार भी खड़ी दिखाई दी, जिस का नंबर सुषमा वर्मा से मिला था. जय विजय को जब यकीन हो गया कि हो न हो अजय प्रताप को ओयो होटल के अंदर ही छिपाकर रखा गया है तो उस ने अधिकारियों को सूचना दे दी. इस पर पुलिस की तीनों टीमों ने 27 सितंबर की रात को सेक्टर 41 के आई ब्लौक में प्लौट नंबर 64 पर बने ओयो होटल को चारों तरफ से घेर कर छापा मारा. एकएक कमरे की तलाशी ली गई तो पुलिस कमरा नंबर 203 में बंधक बना कर रखे गए अजय प्रताप तक पहुंच गई.

उन के कमरे में 3 लोग मिले, जिन में से एक राकेश कुमार उर्फ रिंकू फौजी निवासी गांव चेहडका, जिला भिवाड़ी, राजस्थान था. दूसरा युवक दीपक पुत्र राजेश कुमार भी इसी गांव का रहने वाला था, जबकि इसी कमरे में एक महिला सुनीता गुर्जर उर्फ बबली मिली जो आगाहपुर गांव में सेक्टर 41 की ही रहने वाली थी. पुलिस ने अचानक उस कमरे में धड़ाधड़ प्रवेश किया और अजय प्रताप को अपने कब्जे में ले लिया. साथ ही कमरे में मौजूद तीनों लोगों को हिरासत में लिया तो सुनीता गुर्जर उर्फ बबली भड़क उठी. उस ने पुलिस को हड़काना शुरू कर दिया, ‘‘औफिसर, इस बदतमीजी की वजह जान सकती हूं?’’

‘‘मैडम, बदतमीजी की वजह आप को पता होगी, फिर भी हम थाने चल कर इस की असली वजह बताएंगे.’’ रणविजय सिंह ने जवाब दिया. जब पुलिस ने उन्हें बताया कि उन्हें अजय प्रताप का अपहरण कर फिरौती मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है तो सुनीता गुर्जर फिर भड़क उठी. उस ने अधिकारियों को धमकाते हुए बताया कि वह बीजेपी की नेता और सोशल वर्कर है. उन की इस गलती की सजा अभी दिलवाएगी. इस के बाद उस ने कुछ लोगों को फोन किया और फोन करने के बाद धमकी दी कि अभी देखो, थोड़ी देर में तुम को तुम्हारे बाप लोग फोन करेंगे तो देखना तुम कैसे छोड़ोगे.

एडिशनल डीसीपी रणविजय सिंह ने अपनी पुलिस की नौकरी में ऐसे बहुत से छुटभैए नेता देखे थे जो किसी अपराध में पकडे़ जाने पर पुलिस को ऐसी गीदड़भभकियां देते हैं. उन्हें इस बात का भी इल्म था कि कई बार पुलिस ऐसी धमकियों के प्रभाव में आ कर ऐसे लोगों को छोड़ देती है. लेकिन यह मामला जिस तरह का था, उसे देखने के बाद रणविजय सिंह किसी धमकी में नहीं आए और सभी को हिरासत में ले कर पुलिस थाना सेक्टर 49 लौट आए.

पुलिस टीम अपहृत अजय प्रताप सिंह की होंडा सिटी कार के साथ होटल के रजिस्टर तथा होटल के सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर भी साथ ले आए.

कैसे फंसे अजय

जब पुलिस ने थाने आ कर थोड़ी सी सख्ती बरती और आरोपियों को सुषमा वर्मा से की गई बातचीत की काल रिकार्डिंग तथा उन के फोन की काल डिटेल्स दिखा कर पुख्ता सबूत सामने रखे तो आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया और खुलासा किया कि उन्होंने अपने 2 फरार साथियों के साथ मिल कर अजय प्रताप को हनीट्रैप में फंसाया था और उन से मोटी फिरौती वसूलने की योजना थी. अजय प्रताप ने बताया कि उन्होंने गूगल पर मसाज कराने वाले किसी पार्लर का नंबर सर्च किया था, जिस के बाद उन्हें जस्ट डायल पर नोएडा में मसाज कराने वाला एक नंबर हासिल हुआ. उन्होंने उस नंबर पर फोन किया था.

26 सितंबर को शाम 4 बजे अजय ने जब मसाज सेवा देने वाले उस पार्लर के नंबर पर बात की तो दूसरी तरफ से बात करने वाले ने बताया कि उन के पास एक से एक खूबसूरत लड़कियां है जो सिर्फ मसाज ही नहीं करती बल्कि जिस्म की भूख भी मिटाती हैं. फोन करने वाले ने इतना प्रलोभन दिया कि अजय प्रताप का मन मचलने लगा. उन्होंने उसी वक्त मसाज कराने का इरादा कर लिया, जब फोन करने वाले ने उन्हें वाट्सऐप पर उन लड़कियों की फोटो भेजीं, जिन में से किसी से भी वे मसाज करा सकते थे.

बस उन्हीं लडकियों की खूबसूरत और मादक तसवीरें देख कर अजय प्रताप घर का सामान लाने के बहाने कार ले घर से निकल पडे़. लेकिन घर से निकल कर जब उन्होंने मसाज वाले नंबर पर फोन कर के पूछा कि कहां आना है तो उन्हें लौजिक्स सिटी सेंटर बुलाया गया. वहां उन्हें दीपक नाम का शख्स मिला जो उन्हें सेक्टर 41 के आई ब्लाक में ओयो होटल पर ले आया. शाम को 6 बजे जब वे होटल पहुंचे तो वहां उन की गाड़ी पार्किंग में खड़ी करवा कर इसी होटल के रूम नंबर 203 में ले जाया गया, जहां पहले से ही राकेश फौजी उर्फ रिंकू और बरौला नोएडा के 48बी में रहने वाला अनिल शर्मा और सेक्टर 27 के मकान नंबर 618 में रहने वाला आदित्य मौजूद थे.

वहां पहुंचने के कुछ देर तक तो अजय प्रताप उन चारों से बात करते रहे. जब काफी वक्त गुजर गया और मसाज करने वाली लड़कियां नहीं आईं तो उन्होंने उन लड़कियों को बुलाने को कहा, जिन के फोटो उन्हें भेजे गए थे. उस के बाद अचानक उन चारों का गिरगिट की तरह रंग बदल गया. उन लोगों ने अजय प्रताप को कुरसी से बांध दिया और धमकी देने लगे कि परिवार के होते हुए वह लड़कियों से मसाज के नाम पर अय्याशी करता है तो अजय प्रताप के होश उड़ गए. क्योंकि उन्हें सपने में गुमान नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है. होटल के कमरे में मौजूद चारों लोगों ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया कि वे थाने में फोन कर के पुलिस को बुलाएंगे और उसे पुलिस के हवाले कर देंगे.

उन्होंने अजय प्रताप की काल रिकौर्डिंग सुनवाई तो वे और ज्यादा डर गए. अपने ओहदे की संवेदनशीलता और पारिवारिक बदनामी के कारण वह उन के आगे हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाने लगे. उसी वक्त उन में से किसी एक के फोन करने पर एक महिला ने आई, जिसे देख कर वे सभी मैम… मैम कह कर बात करने लगे. उस महिला के बारे में चारों ने बताया कि वह नोएडा क्राइम ब्रांच की इंसपेक्टर हैं और उसे पकड़ने के लिए आई हैं. सुनीता ने खुद को इंसपेक्टर बता कर अजय प्रताप को धमकाना शुरू कर दिया और उन्हें आतंकित करने लगी कि जब वह गिरफ्तार हो कर अय्याशी के जुर्म में जेल जाएगा तो उस की ऐसी बदनामी होगी कि न उस का परिवार रहेगा, न ही नौकरी.

अजय प्रताप को तब तक पता नहीं था कि वह किस ट्रैप में फंस गए हैं, इसलिए उन्होंने किसी भी तरह इस मामले को निबटाने के लिए हाथपांव जोड़ने शुरू कर दिए. सुनीता ने कहा कि ठीक है वह इस मामले को अपने अधिकारियों के नोटिस में नहीं लाएगी, लेकिन उसे जल्द से जल्द 10 लाख रुपए का इंतजाम कर उन्हें देने होंगे. सुनीता ने उन्हें बताया कि वह अपनी पत्नी को यह कह कर फोन करें कि उन्हें बदमाशों ने पकड़ लिया है और 10 लाख रुपए मांग रहे हैं क्योंकि उसे लड़की से मसाज की बात पता चल गई तो वह पैसा नहीं देगी, उलटे पत्नी की नजर में उन की इज्जत चली जाएगी.

सुनीता के दबाव में आ कर अजय ने उसी के नंबर से अपनी पत्नी सुषमा को फोन किया था. इस के बाद रात में कई बार अजय प्रताप की पिटाई की गई. इस के साथ ही वे लोग छोड़ने के लिए उन से मोलभाव करते रहे. आरोपियों ने अजय प्रताप की पिटाई कर के उन का ऐसा वीडियो भी बना लिया था जिस में वह मसाज कराने के लिए लड़की की मांग कर रहे थे. बंधक बनाने वालों ने अजय को धमकी दी कि अगर उन्हें पैसे नहीं मिले तो वे यह वीडियो उस के परिवार वालों को भेज कर, फिर सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे.

लेकिन इस से पहले सुनीता और उस के साथी अजय प्रताप की पत्नी को अपने नंबर से फोन कर के एक बड़ी चूक कर गए थे. उन्हें शायद अजय की हैसियत तो पता चल गई थी लेकिन उन की पहुंच के बारे में पूरी तरह अंजान थे.

आइडिया सुनीता का था

दरअसल, सेक्टर-41 के जिस ओयो होटल में अजय प्रताप सिंह को अगवा कर रखा गया था, उस में 16 कमरे बने हुए हैं. होटल का संचालन सन 2017 से किया जा रहा था. राकेश उर्फ रिंकू फौजी ने यह होटल 1.60 लाख रुपए प्रतिमाह के किराए पर ले रखा था. रिंकू की सुनीता के साथ जानपहचान थी, इसलिए उस का होटल में आनाजाना था. रिंकू का होटल वैसे तो ज्यादा नहीं चलता था, लेकिन सुनीता ने ही रिंकू को आइडिया दिया कि नोएडा में अय्याशी करने वाले लोग सुरक्षित जगह की तलाश में होटलों और गेस्टहाउसों का आसरा लेते हैं. इसलिए उस ने कुछ लोगों को अय्याशी के लिए होटल में कमरे देने शुरू किए.

इसी दौरान उसे आइडिया आया कि क्यों न जिस्मफरोशी का धंधा करने वाली लड़कियों को होटल में रख कर उन से मसाज कराने का काम शुरू कराया जाए. इस काम के लिए रिंकू ने दीपक, आदित्य और अनिल को भी अपने साथ जोड़ लिया. अगाहपुर की रहने वाली सुनीता उर्फ बबली को इलाके में लोग भाजपा नेत्री के रूप में जानते थे. वह अकसर रिंकू के होटल में आतीजाती थी. उस का बड़ेबड़े लोगों में बैठनाउठना था. उस ने आइडिया दिया कि अगर मोटा पैसा कमाना है तो लड़कियों से मसाज कराने आने वाले लोगों को समाज में बदनाम करने की धमकी दे कर ब्लैकमेल किया जा सकता है. फिर वे आसानी से मोटी रकम दे देंगे.

रिंकू ने मसाज करने के लिए जस्ट डायल पर अपने कुछ मोबाइल नंबर रजिस्टर करवा रखे थे. लोग गूगल पर सर्च कर के जब बात करते तो वे उसे अपने ओयो होटल में बुला लेते थे. उन्होंने मसाज और जिस्मफरोशी का धंधा करने वाली कुछ लड़कियों की फोटो अपने पास रखी हुई थीं, ग्राहक के मांगने पर वे मसाज बाला की फोटो वाट्सऐप पर सेंड कर देते थे. खूबसूरत लड़कियों की फोटो देख कर ग्राहक उसी तरह उन के जाल में फंस जाते थे, जिस तरह अजय प्रताप सिंह उन के जाल में फंसे थे.

बिगबौस 10 कंटेस्टेंट मनवीर गुर्जर को बताया रिश्तेदार

सुनीता गुर्जर ने पुलिस की पकड़ में आने के बाद यह भी बताया कि वह बिग बौस के एक बहुचर्चित कंटेस्टेंट मनवीर गुर्जर की भाभी है. उस ने पुलिस को मनवीर गुर्जर के परिवार के साथ अपनी फोटो और बिग बौस के दसवें सीजन में सलमान खान के साथ ली गई फोटो दिखाई तो पुलिस भी चकरा गई. लेकिन पुलिस की एक टीम ने जब अगाहपुर में मनवीर गुर्जर के घर जा कर इस बात की छानबीन की तो पता चला कि गांव और एक ही बिरादरी होने के कारण मनवीर गुर्जर सुनीता को भाभी कहता था. उस का मनवीर के परिवार में आनाजाना भी था लेकिन मनवीर गुर्जर के परिवार से उस की कोई रिश्तेदारी या दूर का नाता तक नहीं था.

पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपित दीपक और राकेश चचेरे भाई हैं. जबकि अनिल शर्मा उर्फ सौरभ तथा आदित्य उन के दोस्त हैं. उन्होंने सुनीता के बहकावे में आ कर शार्टकट से पैसा कमाने के चक्कर में मसाज की आड़ में लोगों को हनीट्रैप में फंसा कर उन्हें ब्लैकमेल कराने का काम शुरू किया था. लोग बदनामी के डर से 2-4 लाख दे कर अपनी जान छुड़ा लेते थे. जब वे शिकार को फंसा कर लाते तो सुनीता क्राइम ब्रांच की इंसपेक्टर बन कर पहुंच जाती थी और जेल जाने तथा बदनामी का ऐसा भय दिखाती थी कि शिकार कुछ न कुछ दे कर अपनी जान छुड़ाता था.

पुलिस ने उन के होटल से जो रजिस्टर व दस्तावेज बरामद किए, उस में 800 से ज्यादा लोगों के नामपते दर्ज हैं. आंशका है कि उन में से कुछ ऐसे जरूर रहे होंगे, जिन्हें मसाज के नाम पर जाल में फंसा कर ब्लैकमेल किया गया होगा. पुलिस उन सभी लोगों की छानबीन कर रही है. पुलिस का दावा है कि यह गिरोह नोएडा व एनसीआर में हनीट्रैप की कई वारदात कर चुका है. आरोपियों के पास से अजय प्रताप की कार, घटना में प्रयुक्त मोबाइल समेत अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं. एक आरोपी बरौला निवासी अनिल कुमार शर्मा को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि कथा लिखे जाने तक सेक्टर-27 निवासी आदित्य कुमार फरार था.

उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने आरोपियों को पकड़ने वाली टीम को 5 लाख नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है.