Rajasthan News : रीट परीक्षा में हाईटेक टेक्नोलौजी वाले नकल माफिया

Rajasthan News : रीट यानी राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा के आयोजन को ले कर प्रशासन सतर्क था तो वहीं नकल माफियाओं ने भी अभ्यर्थियों से लाखों रुपए ले कर उन्हें नकल कराने के ऐसे हाईटेक पुख्ता इंतजाम कर लिए थे कि…

26 सितंबर, 2021 की सुबह करीब 8 बजे की बात है. राजस्थान पुलिस का हैडकांस्टेबल यदुवीर सिंह बेसब्री से बारबार अपने मोबाइल को देख रहा था. उसे अपने दोस्त कांस्टेबल देवेंद्र सिंह के फोन या वाट्सऐप मैसेज का इंतजार था. वह उस समय सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी में था. यदुवीर की पत्नी सीमा और देवेंद्र की पत्नी लक्ष्मी रीट (राजस्थान एलिजिबिलिटी एग्जामिनेशन फौर टीचर) की परीक्षा दे रही थीं. इन दोनों का परीक्षा केंद्र गंगापुर सिटी में था. यदुवीर की देवेंद्र से पेपर के लिए पहले ही बात हो गई थी. देवेंद्र ने पेपर के लिए पहले ही नकल माफिया के लोगों से बात कर ली थी. इसलिए दोनों निश्चिंत थे. पेपर सुबह 10 बजे शुरू होना था. इसलिए यदुवीर के लिए एकएक मिनट काटना मुश्किल हो रहा था.

दरअसल, उस दिन राजस्थान में रीट की परीक्षा थी. रीट यानी राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा. यह परीक्षा 2 अलगअलग स्तरों लेवल-1 और लेवल-2 प्राथमिक शिक्षक और उच्च प्राथमिक शिक्षक की भरती के लिए जाती है. रीट को पास करने वाले उम्मीदवार कक्षा 1-5 और कक्षा 6-8 में शिक्षकों के पद के लिए योग्य हो जाते हैं. राजस्थान में यह परीक्षा 4 साल बाद हो रही थी. इस बार लेवल-1 और लेवल-2 की 2 परीक्षाओं में 26 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी परीक्षा देने वाले थे. देश भर में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में इस से पहले इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कभी भी नहीं बैठे थे. इसलिए यह देश की सब से बड़ी परीक्षा बन गई थी.

अभ्यर्थियों की तादाद ज्यादा होने से मारामारी भी बहुत ज्यादा थी. राज्य सरकार ने इतनी बड़ी परीक्षा के आयोजन की सारी जरूरी तैयारियां कर ली थीं. परीक्षार्थियों को परीक्षा के लिए मुफ्त सफर की सुविधा भी दी गई थी. रोडवेज बसें कम पड़ने पर सरकार ने निजी बसों को अधिग्रहण कर लिया था. निजी बसों में परीक्षार्थी के साथ उस के परिवार के एक व्यक्ति को भी मुफ्त आनेजाने की सुविधा दी गई थी. परीक्षार्थियों के रहने और खानेपीने के लिए तमाम तरह के इंतजाम किए गए थे. अव्यवस्थाएं रोकने के लिए सभी जिलों में कलेक्टरों ने व्यापारियों से बात कर उन्हें बाजार बंद रखने के लिए रजामंद कर लिया था. यानी एक तरह से रीट परीक्षा का कर्फ्यू लग गया था.

इतना सब कुछ करने के बावजूद परीक्षा में नकल रोकना सब से बड़ी चुनौती बनी हुई थी. इस के लिए कई जिलों में कलेक्टरों ने इंटरनेट सेवाएं 26 सितंबर की सुबह 6 बजे से ही बंद करा दी थी. केवल ब्राडबैंड सेवाएं चालू थीं. इंटरनेट बंद होने से हैडकांस्टेबल यदुवीर सिंह ने अपना मोबाइल ब्राडबैंड से जोड़ लिया था. सुबह 8 बजकर 32 मिनट पर कांस्टेबल देवेंद्र ने उस के वाट्सऐप पर रीट का पेपर भेज दिया. पेपर के साथ ‘आंसर की’ भी थी. यदुवीर ने तुरंत अपनी पत्नी को वह पेपर और ‘आंसर की’ दिखाई और उसे सवालों के जवाब रटाने लगा. करीब एक घंटे तक जवाब रटाने के बाद यदुवीर ने अपनी पत्नी सीमा को रिश्तेदार के साथ परीक्षा केंद्र पर भेज दिया. सीमा सुबह साढ़े 9 बजे बाद परीक्षा केंद्र पर पहुंची, तो पुलिस वालों ने उसे अंदर प्रवेश देने से मना कर दिया, क्योंकि परीक्षार्थियों को 9 से साढ़े 9 बजे के बीच ही प्रवेश दिया जाना था.

सीमा ने अपने पति को फोन कर सारी बात बताई. परीक्षा केंद्र पर उस समय एसडीएम नरेंद्र मीणा और एक डिप्टी एसपी राजूलाल मौजूद थे. यदुवीर सिंह सवाई माधोपुर शहर के डिप्टी एसपी नारायण तिवारी का रीडर था, इसलिए उस ने एसपी साहब को फोन कर मदद मांगी. तिवारी ने गंगापुर सिटी के परीक्षा केंद्र पर मौजूद एसडीएम और दूसरे डीएसपी को फोन किया. इस के बाद यदुवीर की पत्नी सीमा को पीछे के गेट से परीक्षा केंद्र में प्रवेश दे दिया गया. इस बीच रीट परीक्षा में नकल रोकने के लिए पहले से ही सक्रिय एसओजी ने कई मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर ले रखा था. एसओजी को पेपर लीक होने का पता चल गया. इस के तुरंत बाद सवाई माधोपुर पुलिस को सूचना दी गई.

पुलिस ने हैडकांस्टेबल यदुवीर सिंह और उस की पत्नी सीमा, कांस्टेबल देवेंद्र सिंह और उस की पत्नी लक्ष्मी गुर्जर के अलावा आशीष मीणा, ऊषा मीणा, मनीषा मीणा और दिलखुश मीणा को गिरफ्तार कर लिया. इसी दिन बीकानेर में हाइटेक नकल का मामला सामने आया. इस में परीक्षार्थियों को ब्लूटूथ डिवाइस लगी चप्पलें दी गई थीं. ब्लूटूथ डिवाइस परीक्षार्थी के कान में लगे माइक्रो ईयरफोन से कनेक्ट थी. ब्लूटूथ डिवाइस चिप से मोबाइल की सिम कनेक्ट थी. परीक्षा केंद्र में जाने से पहले मोबाइल फोन से ब्लूटूथ को कनेक्ट कर दिया गया. इस मामले में बीकानेर पुलिस की सूचना पर बीकानेर, अजमेर व सीकर से एकएक और प्रतापगढ़ जिले से 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इन से नकल कराने वाली हाईटेक सामग्री बरामद की गई.

यह डिवाइस लगी चप्पलें बीकानेर के तुलसाराम ने करीब 25 परीक्षार्थियों को मोटी रकम ले कर दी थीं. तुलसाराम पहले भी नकल कराने के मामले में पकड़ा जा चुका है. वह एक कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाता है. पूरे राजस्थान में रीट परीक्षा वाले दिन नकल के मामलों में 42 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इन में सरकारी शिक्षक, कोचिंग संचालक भी शामिल रहे. कई पुलिस वालों की भी मिलीभगत सामने आई. राजसमंद में भाई और साले की जगह परीक्षा देने आए 2 तृतीय श्रेणी शिक्षकों को गिरफ्तार किया गया. जयपुर में 2 युवतियों सहित 3 लोगों को पकड़ा गया. इन में नागौर का एक सेकेंड ग्रेड शिक्षक सुरेश कुमार विश्नोई 15 लाख रुपए ले कर डमी परीक्षार्थी जालोर के मोहनलाल विश्नोई के स्थान पर परीक्षा देने आया था.

इसी तरह जालोर की रहने वाली 2 युवतियों प्रमिला विश्नोई और अनन्या उर्फ झुम्मी जाट को गिरफ्तार किया गया. इस में परीक्षार्थी प्रमिला ने अपने प्रवेश पत्र पर अनन्या का फोटो लगाया था. 10 लाख रुपए में अनन्या ही प्रमिला की जगह परीक्षा देने वाली थी. इस से पहले ही दोनों को पकड़ लिया गया. परीक्षा से एक दिन पहले यानी 25 सितंबर, 2021 को रीट में पास कराने का झांसा दे कर लाखों रुपए वसूलने वाले नकल माफिया के 16 लोगों को राजस्थान के 5 जिलों से गिरफ्तार किया गया. इन में अलवर में बिजली निगम के एक जेईएन और शराब ठेकेदार को पकड़ा गया. सीकर में हेयर कटिंग की दुकान करने वाले एक नाई और बीएसएफ जवान सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

डूंगरपुर में एक सरकारी शिक्षक और उस के भतीजे तथा जोधपुर कोचिंग संस्थान संचालक सरकारी शिक्षक सहित 4 लोग और नागौर में नर्सिंग कालेज संचालक सहित 4 लोग गिरफ्तार किए गए. इस से पहले 24 सितंबर को राजस्थान के 7 जिलों से 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इन में दौसा जिले में डमी परीक्षार्थी बैठाने वाले गिरोह से जुड़े अजमेर में नियुक्त सेल्स टैक्स विभाग के एलडीसी सहित 4 लोगों को पकड़ा गया. इन से 2 कारें जब्त कर 5.60 लाख रुपए बरामद किए गए. सवाई माधोपुर में 15 लाख रुपए में पेपर मुहैया कराने का भरोसा दिलाने वाले नकल माफिया के मास्टरमाइंड देशराज को गिरफ्तार किया गया. उस ने 25 से ज्यादा परीक्षार्थियों से 4 करोड़ रुपए का सौदा कर रखा था.

देशराज के मोबाइल से ही पुलिस को सवाई माधोपुर के हैडकांस्टेबल यदुवीर सिंह और कांस्टेबल देवेंद्र के नंबर मिले थे. सीकर में 3 लोगों को पकड़ा गया. इन से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर अलवर जिले के बहरोड़ इलाके से एक युवक को गिरफ्तार कर 11 लाख रुपए बरामद किए थे. रीट परीक्षा में नकल के मामले सामने आने पर राज्य सरकार ने 28 सितंबर को बड़ी काररवाई करते हुए 9 जिलों में तैनात एक एसडीएम, 2 डीएसपी, एक जिला शिक्षा अधिकारी, 12 अध्यापकों और 3 पुलिसकर्मियों सहित 20 लोगों को निलंबित कर दिया. इन सब के खिलाफ पुलिस में भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है.

इन में सवाई माधोपुर जिले के वजीरपुर का एसडीएम नरेंद्र कुमार मीणा, सवाई माधोपुर सिटी डीएसपी नारायण तिवारी, सवाई माधोपुर के जिला शिक्षा अधिकारी राधेश्याम मीणा, सवाई माधोपुर में ही तैनात डीएसपी राजूलाल मीणा, हैडकांस्टेबल यदुवीर सिंह और कांस्टेबल देवेंद्र भी शामिल थे. इस से पहले 12 सितंबर को देश भर में नीट परीक्षा हुई थी. मैडिकल की पढ़ाई के लिए होने वाली इस प्रवेश परीक्षा में भी राजस्थान में नकल का बड़ा मामला सामने आया था. जयपुर में भांकरोटा के एक परीक्षा केंद्र से नकल गिरोह ने परीक्षा के दौरान ही पेपर का मोबाइल से फोटो खींच लिया. फिर सीकर से पेपर सौल्व करवा कर वापस वाट्सऐप पर मंगवा लिया और उस का प्रिंट निकाल कर एक परीक्षार्थी को मुहैया करा दिया.

पुलिस ने इस मामले में नीट परीक्षार्थी छात्रा सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया. इन से 10 लाख रुपए बरामद किए गए. नकल गिरोह ने इस छात्रा को पास कराने के लिए 35 लाख रुपए में सौदा किया था. इस गिरोह में इंजीनियरिंग कालेज संचालक, वीक्षक, ईमित्र संचालक और शिक्षक भी शामिल थे. यह गिरोह हरियाणा से भी पेपर हल कराता था. नीट परीक्षा में ही नकल कराने के मामले में पुलिस ने 6 मैडिकल स्टूडेंट सहित एक मास्टरमाइंड राजन राजगुरु और 2 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया. इन में अजमेर में पकड़े गए 6 मैडिकल स्टूडेंट में 2 छात्राएं हैं. इन्होंने 25-25 लाख रुपए ले कर कमजोर अभ्यर्थियों की जगह डमी कैंडीडेट के रूप में परीक्षा दी थी.

इन में आगरा की प्राची परमार देहरादून मैडिकल कालेज में थर्ड ईयर की छात्रा है. अलवर की प्रिया चौधरी भरतपुर मैडिकल कालेज में थर्ड ईयर की छात्रा है. जोधपुर का प्रद्युम्न सिंह देहरादून मैडिकल कालेज का फाइनल ईयर का छात्र है. नागौर का रहने वाला प्रवीण मंडा बनारस मैडिकल कालेज में प्रथम वर्ष का छात्र है. अलवर के नीमराना का रहने वाला अंकित यादव बनारस मैडिकल कालेज का सेकेंड ईयर का छात्र है. इस गिरोह का मास्टरमाइंड राजन राजगुरु है. वह 2010 में हुए राजस्थान प्री मैडिकल टेस्ट में सेकेंड टौपर था. बाद में वह सरकारी मैडिकल औफिसर बन गया. इस के बावजूद वह कोचिंग में बायो पढ़ाता था और बायो सर के नाम से विख्यात था. वह कोचिंग में ऐसे स्टूडेंट तलाशता था, जो अमीर घर से हों, लेकिन पढ़ने में फिसड्डी हों.

ऐसे स्टूडेंट्स को तलाश कर वह यूपी के खुर्शीद के जरिए विभिन्न मैडिकल कालेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की तलाश कराता था, जो पैसा ले कर डमी कैंडीडेट के रूप में नीट की परीक्षा दे सकें. यह गिरोह मैडिकल स्टूडेंट के डमी परीक्षार्थी बनने के एवज में 20 से 30 लाख रुपए तक देता था. नकल के ये मामले नए नहीं हैं. मार्च 2018 में राजस्थान में पुलिस कांस्टेबल भरती की परीक्षा हुई थी. उस समय 5390 पदों के लिए करीब 16 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे. प्रदेश के 10 जिलों जयपुर, जोधपुर, अजमेर, अलवर, बीकानेर, झुंझुनूं, कोटा, सीकर, गंगानगर व उदयपुर में 34 विभिन्न इंस्टीट्यूट में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे. यह औनलाइन परीक्षा 45 दिन चलनी थी.

परीक्षा शुरू होने के 4-5 दिन बाद ही नकल के ऐसेऐसे मामले सामने आए कि पुलिस अफसर भी हैरान रह गए. जयपुर के एक परीक्षा केंद्र से नकल गिरोह ने कंप्यूटर सिस्टम को रिमोट एक्सेस के जरिए हैक कर जयपुर से 300 किलोमीटर दूर हरियाणा के भिवानी शहर में औपरेट करते हुए पेपर हल करा दिए थे. इस के अलावा अंगूठे के निशान की क्लोनिंग बनाने का चौंकाने वाला मामला भी सामने आया था. बदमाशों ने थंब प्रिंट का क्लोन बनाने का तरीका यूट्यूब से सीखा था. इस के लिए पहले गर्म मोम को किसी सतह पर डालते. फिर अभ्यर्थी के अंगूठे पर मछली का तेल लगा कर उस का मोम पर थंब इंप्रेशन लेते. इंप्रेशन आने पर मोम की परत पर फेविकोल की हल्की परत बिछाते.

इस से इंप्रेशन फिक्स हो कर थंबप्रिंट का क्लोन बन जाता था. इस मामले में डाक्टर व इंजीनियर के अलावा कालेज संचालक, कंप्यूटर सेंटर संचालकों सहित करीब 3 दरजन लोग गिरफ्तार किए गए थे. ये लोग राजस्थान, हरियाणा, बिहार, दिल्ली आदि राज्यों के रहने वाले थे. इतने सारे मुन्नाभाई पकड़े जाने और परीक्षा में भारी फरजीवाड़ा सामने आने के बाद यह औनलाइन परीक्षा बीच में ही रद कर दी गई. राजस्थान में कम से कम 25-30 नकल माफिया गिरोह सक्रिय हैं. इन गिरोह में अभ्यर्थी ढूंढने, पेपर हासिल करने, निरीक्षक और परीक्षा केंद्र संचालकों से सेटिंग करने और पेपर सौल्व करने वाले एक्सपर्ट तलाश करने के काम बंटे हुए हैं.

जालोर का रहने वाला जगदीश विश्नोई अब तक नकल कराने के मामलों में 5 बार गिरफ्तार हो चुका है. वह पेपर लीक कराने में माहिर है. इस के गिरोह के सदस्य सरकारी नौकरियों में बड़े पदों पर हैं. यह सैकड़ों लोगों को परीक्षा में फरजीवाड़ा करवा कर सरकारी नौकरी दिलवा चुका है. ये लोग भी इस की मदद करते हैं. नकल माफिया भूपेंद्र विश्नोई पहले लेक्चरर था. इस के बाद नकल कराने वाला गिरोह चलाने लगा. वह 2014 की राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा और लाइब्रेरियन परीक्षा का पेपर प्रिंटिंग प्रेस से ही लीक करवा चुका है. रामधारी उर्फ बाबा परीक्षा केंद्र संचालकों और निरीक्षकों से संपर्क में रहता है. वह वाट्सऐप पर पेपर मंगवा कर एक्सपर्ट से सौल्व कराता है. फिर वापस वाट्सऐप पर ही निरीक्षक के जरिए अभ्यर्थी तक पहुंचाता है.

नकल माफिया विकास कुमार का नाम 2018 की कांस्टेबल भरती में सामने आया था. वह विशेषज्ञों की मदद से अभ्यर्थी का कंप्यूटर रिमोट पर ले कर पेपर हल कराता है. भरतपुर के नरेश सिनसिनवार का गिरोह बायोमैट्रिक सिस्टम को धोखा देने के लिए थंबप्रिंट का क्लोन बनाता है. राजस्थान में पेपर लीक मामले में एक जिला जज अजय शारदा को भी गिरफ्तार किया गया था. इस के अलावा सरकारी भर्तियां करने वाले राजस्थान लोक सेवा आयोग के तत्कालीन चेयरमैन हबीब खां के खिलाफ केस दर्ज हुआ था. उन पर अपनी बेटी के लिए राजस्थान न्यायिक सेवा का पेपर लीक करने का आरोप था.

दरअसल, बढ़ती बेरोजगारी के कारण सरकारी नौकरियों में भरती की मारामारी बढ़ गई है. इसलिए यूपीएससी और एसएससी की परीक्षाओं को छोड़ कर दूसरी अधिकांश परीक्षाओं में नकल के मामले सामने आते रहते हैं. इस के लिए नकल माफिया पनप गया है. ये लोग मोटी रकम ले कर अभ्यर्थियों को पेपर मुहैया कराने, डमी कैंडीडेट बिठाने और पास कराने का वादा करते हैं. भ्रष्टाचार के इस जमाने में ये लोग अपने मंसूबों में कामयाब भी हो जाते हैं. नकल के लिए माफिया गिरोह रोजाना नएनए तरीके खोजते हैं. इसलिए नकल के बहुत से मामले पकड़ में भी नहीं आते. दिल्ली के युसूफ मार्केट और टैगोर नगर सहित कई दूसरी जगहों पर 7 हजार रुपए से ले कर 25 हजार रुपए तक में कई तरह की डिवाइस खुलेआम बिकती हैं.

इन में जैमर प्रूफ बनियान, कान में लगाए जाने वाले माइक्रो ईयरफोन, शर्ट की कालर में लगने वाली डिवाइस आदि शामिल हैं. बहरहाल, नई तकनीकों के जमाने में नकल रोकना सरकारों और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों के लिए एक चुनौती बन गया है. संजय दत्त अभिनीत फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस के बाद नकल के ऐसे हजारों मामले सामने आ चुके हैं. हरेक शिक्षित बेरोजगार की सरकारी नौकरी हासिल करने की इच्छा ने नकल माफिया पनपा दिया है. पूरे देश में अब यह अरबों रुपए का सालाना उद्योग बन गया है. इस में कई गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में है. यह गिरोह आल इंडिया लेवल की परीक्षाओं में नकल कराने की गारंटी लेते हैं. कभी कोई नकल माफिया पकड़ा जाता है तो सरकारी कानूनों के लचीलेपन के कारण वह जल्दी ही छूट कर आ जाता है और फिर से उसी धंधे में लग जाता है. Rajasthan News

 

 

 

MP News : सरकारी नौकरी की चाहत में पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर ले ली पति की जान

MP News : सोशल मीडिया कुछ नासमझ औरतों के लिए जहर की तरह है. मनीषा भी उन्हीं में थी. फेसबुक पर उस ने खेमचंद उर्फ राज से जो दोस्ती की, उस ने उस का घर तो उजाड़ ही दिया. साथ ही…

अरविंद राजपूत का घर मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर के घमापुर इलाके में सरकारी कुआं के पास था. 49 साल का अरविंद राजपूत जबलपुर नगर निगम के आधारताल जोन में बतौर डाक रनर काम करता था. उस के परिवार में 30 साल की पत्नी मनीषा, 7 साल की बेटी और 5 साल का एक बेटा था. करीब 10 साल पहले जब अरविंद के मातापिता जीवित थे तो घर की माली हालत अच्छी नहीं थी. घर अरविंद के बड़े भाई की कमाई से चलता था. जब बड़े भाई की शादी हो गई तो वह अपनी पत्नी के साथ अलग रहने लगा. हायर सेकेंडरी तक पढ़े अरविंद की उम्र बढ़ती जा रही थी, पर न ही उसे कहीं कामधंधा मिल रहा था और न ही उस की शादी हो पा रही थी.

आखिरकार 2012 में अरविंद को जबलपुर नगर निगम में दैनिक वेतन पर काम मिल गया. अरविंद जब  40 साल का था तो सन 2012 में उस की शादी मनीषा ठाकुर से हो गई, जिसे बबली भी कहते थे. उस की उम्र 21 साल थी. मनीषा की मां का बचपन में ही निधन हो गया था. उस के पिता ने उस की सगी मौसी से शादी कर ली थी, जिसे उस ने सगी बेटी की तरह पाला था. मैट्रिक तक पढ़ी मनीषा सुडौल काया और सुंदर आंखों की वजह से बहुत सुंदर लगती थी. मनीषा के 2 भाई थे. छोटा ग्वारीघाट में रेस्टोरेंट चलाता था, जबकि बड़े भाई ने दूसरी जाति की लड़की से लव मैरिज कर ली थी. वह परिवार से अलग रहता था.

अरविंद मनीषा का बहुत खयाल रखता. मनीषा चंचल और खुले विचारों वाली लड़की थी उसे सजनासंवरना और घूमनाफिरना पसंद था. लेकिन अपने से दोगुनी उम्र के पुराने खयालात के सादगी पसंद पति अरविंद के साथ वह मन मार कर दिन काट रही थी. सन 2016 में नगर निगम ने अरविंद की डाक रनर की नौकरी स्थाई कर दी. वक्त के साथ अरविंद के परिवार में एक बेटी और एक बेटा आ गया. जब तक घर में अरविंद के मातापिता जीवित रहे, मनीषा उन की देखरेख में लगी रही. अरविंद टिफिन ले कर सुबह औफिस निकल जाता तो शाम को ही लौटता. मनीषा का जब भी मन होता अपने बच्चों को ले कर अपने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां चली जाती.

जब वह लोगों को स्मार्टफोन पर फेसबुक, यूट्यूब चलाते देखती तो उस का मन भी करता कि उस के पास भी स्मार्टफोन होता तो कितना अच्छा होता. एक दिन उस ने अरविंद से स्मार्टफोन की डिमांड रख दी. अरविंद के पास कोई सेलफोन नहीं था, न ही ऐसी हैसियत थी कि महंगा स्मार्टफोन खरीद सके. इस के बावजूद उस ने पत्नी को खुश रखने के लिए स्मार्टफोन ला कर दे दिया. अरविंद ने मनीषा को औफिस के अपनेएकदो साथियों के नंबर भी दे दिए .जब भी मनीषा को अरविंद से बात करनी होती वह उस के दोस्तों के फोन पर काल कर के पति से बात कर लेती. मनीषा की अंगुलियां पूरे दिन स्मार्टफोन पर घूमती रहतीं.

उस ने फेसबुक पर अपना एकाउंट बनाया और प्रोफाइल में अपनी खूबसूरत अदाओं वाली तसवीरें अपलोड कर दीं. उसे बहुत सारे लाइक और कमेंट्स मिलने लगे. उस ने बहुत सारे लोगों की फ्रैंड रिक्वेस्ट भी स्वीकार कर ली थी. अरविंद थकाहारा जब काम से लौटता तो घर पर मनीषा को बच्चों के साथ मोबाइल में बिजी देख कर खुश हो जाता. अरविंद 49 साल की उम्र पार कर चुका था, जबकि मनीषा अभी 29 साल की जवान औरत थी. बढ़ती उम्र, शराब की लत और नौकरी के बोझ ने अरविंद को जिस्मानी तौर पर  कमजोर बना दिया था. उसे महसूस होने लगा था कि अब वह मनीषा को शारीरिक रूप से संतुष्ट नहीं कर पा रहा है.

औरत की शारीरिक जरूरतें पति पूरी करने में सक्षम न हो तो कई बार औरत के कदम बहक जाते हैं. ऐसा ही मनीषा के साथ हुआ. मनीषा फेसबुक की दुनिया में इस तरह खो गई थी कि वह बिना जांचपड़ताल के किसी भी लड़के को अपना फ्रैंड बना लेती थी. फेसबुक पर नएनए दोस्त बनाना और सोशल मीडिया पर चैटिंग करना उस का शगल बन गया था . 2019 के मार्च महीने में एक दिन मनीषा दोपहर में घर के कामकाज से निपट कर बिस्तर पर लेटी थी. तभी उस के मोबाइल की घंटी बजी. उस ने जैसे ही हैलो बोला दूसरी तरफ से किसी लड़के की आवाज आई, ‘‘हाय मनीषा, मैं राज बोल रहां हूं.’’

‘‘कौन राज?’’ मनीषा ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘मनीषा, मैं राज यादव हूं. फेसबुक पर तुम्हें फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजी थी, जिसे तुम ने स्वीकार कर लिया था.’’

‘‘पर तुम्हें मेरा मोबाइल नंबर किस ने दिया?’’ मनीषा ने हैरानी से पूछा .

‘‘हम जिसे दिल से चाहते हैं, उस का मोबाइल नंबर तो क्या उस की पूरी खोजखबर रखते हैं.’’ राज ने दीवानगी के साथ जवाब दिया. मनीषा को किसी अपरिचित लड़के का इस तरह बात करना अच्छा नहीं लगा. उस ने थोड़ी सी बात कर के फोन काट दिया. फिर उसे याद आया कि कुछ दिन पहले उस ने राज यादव नाम के लड़के की फ्रैंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की थी. उसे यह उम्मीद कतई नहीं थी कि कोई फेसबुक फ्रैंड उसे फोन मिला कर इस तरह बातचीत करेगा. मनीषा की फेसबुक की यह दोस्ती धीरेधीरे मनोरंजन का साधन बन गई. पति अरविंद दिन भर औफिस में रहता और मनीषा का समय सोशल मीडिया पर बीतता. उस ने उस दिन भले ही फोन डिसकनेक्ट कर के राज से तौबा कर ली थी, लेकिन वह हाथ धो कर उस के पीछे पड़ गया था.

वह रोज ही किसी न किसी बहाने उसे फोन करने लगा. वह मनीषा के फेसबुक मैसेंजर पर कभी प्यारभरी शेरोशायरी भेजता तो कभी उस की पोस्ट पर कमेंट कर के प्यार जताता. धीरेधीरे मनीषा को भी राज से फोन पर बातचीत करने में मजा आने लगा. फोन पर शुरू हुआ बातचीत का यह सिलसिला कब प्यार में बदल गया, मनीषा को पता ही नहीं चला. अब वह रोज राज के फोन का इंतजार करती. कभी राज फोन करना भूल जाता तो मनीषा उसे काल कर के उस से प्यार भरी बातें करती. कभीकभी दोनों वीडियो काल के जरिए भी एकदूजे का दीदार करके मस्तीभरी बातें कर लेते थे.

राज और मनीषा का प्यार परवान चढ़ा तो एक दिन वह मनीषा से मिलने जबलपुर आ गया. उस समय अरविंद काम पर गया हुआ था और उस के दोनों बच्चे अरविंद के बड़े भाई के घर गए हुए थे. मनीषा ने 25 साल के गोरेचिट्टे गबरू जवान राज को देखा तो पलभर के लिए तो वह सपनों की दुनिया में खो गई. राज ने बताया कि उस का नाम खेमचंद यादव है, लेकिन उसे घर वाले राज कहते हैं. राज ने मनीषा से फेसबुक मैसेंजर और वीडियो काल के जरिए तो कई बार बातें की थी, लेकिन खूबसूरत मनीषा को पहली बार नजरों के सामने देखा तो अपना आपा खो बैठा.

मनीषा कब से उस से मिलने के सपने संजोए थी, उसे मौका मिला तो उस ने भी राज का पूरे मन से साथ दिया. शाम को जब अरविंद काम से घर लौटा तो घर में नए मेहमान को देख मनीषा से पूछा, ‘‘अरे मनीषा, मेहमान कहां से आए हैं?’’

मनीषा ने खेमचंद का परिचय कराते हुए कहा, ‘‘ये मेरी बचपन की सहेली के जीजा हैं. नाम है राज यादव. यूपी के बांदा से किसी काम के सिलसिले में जबलपुर आए हैं.’’ अरविंद ने गर्मजोशी से राज का स्वागत किया और उस की खूब मेहमाननवाजी भी की. दूसरे दिन अरविंद उसे भेड़ाघाट घुमाने ले गया और वहां का धुआंधार जलप्रपात दिखाया. शाम को बैठ कर दोनों ने जाम छलकाए. राज यादव महीने दो महीने में काम का बहाना बना कर मनीषा से मिलने जबलपुर आने लगा. जब वह जबलपुर आता तो अरविंद के साथ  बैठ कर खूब शराब पीता और मनीषा के बच्चों पर पैसे खर्च करता.

लेकिन मनीषा और राज की प्रेम कहानी समाज की नजरों से ज्यादा दिनों तक न छिप सकी. जब अरविंद के बड़े भाई को इस बात का पता चला तो उस ने राज के इस तरह मनीषा से मिलनेजुलने पर आपत्ति उठाई. अरविंद के मन में भी शक का कीड़ा कुलबुलाता था, लेकिन वह यह सोच कर तसल्ली कर लेता कि मनीषा उसे और उस के बच्चों को कितना प्यार करती है. 22 जनवरी, 2021 सुबह के 9 बजे थे. कैंट पुलिस थाने में फोन द्वारा सूचना मिली कि सदर इलाके के मुर्गी मैदान पर कोई युवक नशे में बेसुध पड़ा है. कैंट थाने में इस तरह की सूचनाएं आए दिन मिलती रहती थीं, इसलिए ड्यूटी पर मौजूद एसआई कन्हैया चतुर्वेदी अपने एक साथी पुलिसकर्मी के साथ मुर्गी मैदान की ओर रवाना हो गए.

वह मुर्गी मैदान पहुंचे तो उन्होंने देखा कि 24-25 साल का एक युवक औंधे मुंह जमीन पर पड़ा है. पुलिस टीम ने पास जा कर जैसे ही उसे सीधा किया तो युवक का चेहरा और सिर खून से सना हुआ है. वह मर चुका था. स्थिति को समझ कर कन्हैया चतुर्वेदी ने तत्काल टीआई विजय तिवारी समेत पुलिस के आला अधिकारियों को सूचना दी और आसपास के लोगों से पूछताछ करने लगे. कुछ ही देर में फोरैंसिक टीम के साथ टीआई विजय तिवारी घटनास्थल पहुंच गए. घटनास्थल पर शराब की बोतल और पानी के पाउच के साथ चखना के खाली पैक पड़े थे. डैडबौडी के पास ही एक बड़ा सा पत्थर पड़ा मिला, जिस पर खून के निशान थे. शायद इसी पत्थर से सिर पर वार कर युवक की हत्या की गई थी.

घटनास्थल पर अब तक लोगों की काफी भीड़ जमा थी, लेकिन कोई भी मृतक को नहीं पहचान सका. एसआई कन्हैया चतुर्वेदी ने मृतक के कपड़ों की तलाशी ली तो उन्हें मृतक की पैंट की जेब में नगर निगम की डाकबुक मिली. डाकबुक को उलटपलट कर देखा गया तो परची पर एक मोबाइल नंबर लिखा था. परची में लिखे मोबाइल नंबर पर टीआई विजय तिवारी ने फोन लगाया तो फोन रिसीव करने वाले ने अपना नाम मलखान और पता ग्वारघाट बताया. टीआई तिवारी ने जब उसे बताया कि मुर्गी मैदान पर एक डैडबौडी मिली है. उसी के कपड़ों की जांच में नगर निगम की डाकबुक और यह मोबाइल नंबर मिला है.

तब मलखान ने पुलिस को बताया कि उस का जीजा अरविंद राजपूत नगर निगम में डाक लाने ले जाने का काम करता था. मलखान ने जब मनीषा को फोन लगा कर बातचीत की तो उस ने बताया कि वह कल अरविंद को बता कर बच्चों के साथ एक गमी के कार्यक्रम में वेहिकल फैक्ट्री इलाके में आई है. मलखान ने मनीषा से अरविंद के साथ किसी अनहोनी की आशंका व्यक्त की तो वह फोन पर रोने लगी. मलखान ने उसे समझाते हुए उस के साथ तत्काल मुर्गी मैदान चलने को कहा. मलखान कुछ ही देर में मनीषा और एक रिश्तेदार को आटो में बिठा कर सदर के मुर्गी मैदान पहुंच गया. वहां पहुंच कर मनीषा ने पति अरविंद को पहचान लिया.

लाश की पहचान होने पर पुलिस टीम ने शव पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भेज दिया और आगे की काररवाई में जुट गई. स्थिति के मद्देनजर पुलिस मनीषा के बयान नहीं ले सकी. घटना को बीते 3 दिन हो चुके थे. इसी दौरान मनीषा ने एक बार घर पर आत्महत्या करने का प्रयास किया, जिस की जानकारी कैंट पुलिस को मिल गई थी. पुलिस सहानुभूति की वजह से उस के बयान नहीं ले पा रही थी. एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा के निर्देश पर नगर की सीएसपी भावना मरावी ने हत्या का राज जानने के लिए कैंट थाना पुलिस की एक टीम तैयार की. कैंट पुलिस थाना के टीआई विजय तिवारी ने जब मनीषा के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो 2 मोबाइल नंबर संदिग्ध पाए गए.

इन मोबाइल नंबरों की लोकेशन सर्च करने पर पुलिस को एक नंबर आकाश विनोदिया, सिविल लाइंस, जबलपुर का और दूसरा नंबर खेमचंद यादव, बांदा, उत्तर प्रदेश का था. कैंट पुलिस ने सब से पहले राज यादव के मोबाइल को सर्विलांस पर लगाया तो घटना वाले दिन 21 जनवरी को उस की लोकेशन सुबह के 6 बजे से रात के 9 बजे तक जबलपुर की मिली. पुलिस की टीम जब खेमचंद की खोजबीन के लिए बांदा पहुंची, तब तक वह अपने गांव बेनीपुर पहुंच चुका था. पुलिस ने उस की लोकेशन ट्रेस कर उस के घर पर मुंहअंधेरे दबिश तो यह पिछले दरवाजे से भाग निकला. आसपास के इलाकों में दिन भर उस की तलाश की गई, मगर राज नहीं मिला. उस के पिता ने बताया कि वह अपने बड़े भाई के पास सूरत जा सकता है.

पिता को राज और मनीषा के प्रेम संबंधों की पूरी जानकारी थी. पता चला कि मनीषा जून, 2020 में आंखों का इलाज करवाने के बहाने चित्रकूट आई थी और दोनों 5 दिनों तक एक होटल में रुके थे. तब उस ने मनीषा को समझाया था कि अपना वैवाहिक जीवन बरबाद न करे. मगर वह राज के प्यार में पागल हो गई थी. राज अपना मोबाइल घर पर छोड़ गया था, ऐसे में राज को खोजना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था. पुलिस उस का मोबाइल जब्त कर खाली हाथ लौट आई.

कैंट पुलिस पर जब पुलिस अधिकारियों का दबाव पड़ा तो आकाश विनोदिया की मोबाइल लोकेशन पर पहुंच गई. जबलपुर के सिविल लाइंस जा कर पता चला वह नंबर एक रिटायर्ड मैडिकल नर्स का है जो काफी बूढ़ी हो गई थीं. उन्होंने खुद को इलाके की भजन मंडली का अध्यक्ष बताते हुए मनीषा और अरविंद से किसी तरह की जानपहचान होने से इनकार किया. उन्होंने यह भी बताया कि यह सिमकार्ड उस के भतीजे आकाश ने ला कर दिया था, लेकिन इस सिमकार्ड का उपयोग आकाश कभी नहीं करता. पुलिस की समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अरविंद के मर्डर से नर्स का क्या कनेक्शन हो सकता है. पुलिस ने जब उन से पूछा, ‘‘आप के मोबाइल से कोई और शख्स बात तो नहीं करता?’’

उन्होंने बताया, ‘‘हां उन की भजन मंडली में ढोलक बजाने वाला विक्की पंडा अकसर उन के फोन से बात करता है. कभीकभी तो वह घंटे भर के लिए मोबाइल मांग कर ले जाता है.’’

पुलिस ने जब विक्की पंडा के बारे में पता किया तो शाम के समय विक्की पंडा देवी मंदिर की आरती के कार्यक्रम में मिल गया. उस ने मनीषा को अपनी ममेरी बहन बताया. पुलिस को अब दोनों पर अरविंद की हत्या का पूरा यकीन हो गया. पुलिस टीम ने विक्की पंडा और मनीषा को थाने बुला कर पूछताछ की तो पहले तो वे अनजान बने रहे. जब पुलिस टीम ने उन से अलगअलग कमरे में ले जा कर सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने सारा सच उगल दिया. मनीषा और विक्की के बताए अनुसार अरविंद की हत्या छतरपुर जिले के खेमचंद यादव उर्फ राज ने की थी.

घटना वाले दिन शाम को अरविंद को औफिस में फोन कर के मनीषा ने बुलाया था और विक्की पंडा हत्या के समय राज के साथ था. दोनों से पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह मानवीय रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली थी. खेमचंद गुड़गांव की एक कंपनी में नौकरी करता था. मनीषा की बुआ का लड़का प्रदीप ठाकुर उर्फ विक्की पंडा सिविल लाइंस के उपहार अपार्टमेंट में रहता था. वह अपने आप को देवी का भक्त बताता था. धार्मिक कर्मकांड और तंत्रमंत्र का झांसा दे कर लोगों से पैसे ऐंठ कर वह घर का खर्च चलाता था. वह स्थानीय भजन मंडली में ढोलक बजाता था.

विक्की पंडा अपनी ममेरी बहन मनीषा से 20 हजार रुपए और जीजा अरविंद से 13 हजार रुपए उधार ले चुका था, मगर लौटाने का नाम ही नहीं ले रहा था. जब भी अरविंद और मनीषा उस से पैसे वापस मांगते, वह अपनी तंगहाली का बहाना बना देता था. मनीषा और खेमचंद के नाजायज संबंधों की भनक विक्की को थी. एक बार तो उस ने मनीषा को चेतावनी भी दी थी कि यदि उस से पैसे मांगे तो वह उस के और राज के संबंधों की पूरी सच्चाई जीजा को बता देगा. इस डर से मनीषा उस से पैसा मांगने में संकोच करने लगी थी. अब मनीषा राज के साथ विक्की पंडा से मिलनेजुलने लगी थी. मनीषा और राज विक्की से शादी करने की बात बताते रहते थे. एक दिन विक्की पंडा ने मंदिर में पूरे विधिविधान से राज से मनीषा की मांग में सिंदूर भरवा कर शादी करा दी .

मनीषा और राज प्रेम में इस कदर अंधे हो चुके थे कि देह सुख के लिए किसी भी हद तक जाने तैयार थे. कभीकभी उन के मन में विचार आता कि दोनों घर से भाग जाएं, लेकिन मनीषा सोचती कि राज बेरोजगार है. आखिर उसे कितने दिनों तक बैठा कर खिलाएगा. मनीषा को अरविंद से ज्यादा अपने बच्चों की भी चिंता थी. वह जानती थी कि यदि वह बच्चों को छोड़ कर राज के साथ भाग गई तो अरविंद बच्चों का खयाल नहीं रख पाएगा और उस के बच्चे अनाथ हो जाएंगे. मनीषा के मन में कई बार अरविंद की हत्या करने का विचार आता, मगर अगले ही पल वह डर जाती.

आखिरकार मनीषा इस निर्णय पर पहुंच गई कि वह राज की मदद से अरविंद को रास्ते से हटा देगी. उस का सोचना था कि पति की मौत के बाद उस की सरकारी नौकरी उसे अनुकंपा नियुक्ति के रूप में मिल जाएगी और वह राज के संग अपनी जिंदगी खुशी से बिता सकेगी. बातचीत के बाद पहले अरविंद की हत्या के लिए उन्होंने पूजा के प्रसाद में जहर मिलाने की योजना बनाई, पर विक्की पंडा ने यह कह कर इस योजना को निरस्त कर दिया कि प्रसाद और भी लोग मांग सकते हैं. बाद में अरविंद को शराब पिला कर हत्या करने की योजना बनाई गई.

प्रदीप उर्फ विक्की पंडा अरविंद की हत्या की योजना में इसलिए शामिल हो गया क्योंकि वह चाहता था कि मनीषा और अरविंद से लिए गए 33 हजार रुपए के कर्ज से उसे मुक्ति मिल जाएगी. योजना के मुताबिक मनीषा ने राज को पूरी योजना समझाई और उस का बांदा से जबलपुर आने जाने का रिजर्वेशन करवा दिया. 21 जनवरी, 2021 की सुबह राज जबलपुर आ गया. दोपहर में टैगोर गार्डन में मनीषा राज और विक्की पंडा ने काफी देर बैठ कर अरविंद की हत्या की योजना को अंतिम रूप दिया. तय हुआ कि पहले अरविंद को शराब पिलाई जाए और फिर उस की किसी तरह हत्या कर दी जाए.

योजना बनने के बाद विक्की अपने घर चला गया. जबकि मनीषा और राज आटो रिक्शा ले कर रेलवे स्टेशन आ गए. कुछ दिनों पहले अरविंद ने जबलपुर की एक मोबाइल शौप से किस्तों में राज को एक महंगा मोबाइल फोन दिलवाया था, जिस की किस्त वह हर महीने आ कर दे जाता था. रेलवे स्टेशन से ही मनीषा ने अरविंद के औफिस में फोन कर के कहा कि राज मोबाइल की किस्त देने जबलपुर आया है. वह रात की ट्रेन से निकल जाएगा, उस से जबलपुर स्टेशन जा कर मिल लो. जब अरविंद को राज के जबलपुर आने की खबर मिली, तब वह अधारताल जोनल औफिस में था. उस ने औफिस जा कर जल्दी से डाक वितरण का काम निपटाया और 5 बजे रेलवे स्टेशन पहुंच गया.

रेलवे स्टेशन पर उस की मुलाकात राज से हो गई. राज ने उसे बताया कि वह रात 9 बजे चित्रकूट एक्सप्रैस से वापस चला जाएगा. तब राज ने अरविंद के सामने प्रस्ताव रखा कि कहीं बैठ कर शराब पीते हैं फिर खाना खाने के बाद उसे स्टेशन छोड़ कर घर चले जाना. शराब पीने की बात पर अरविंद राजी हो गया. दोनों पैदल ही रेलवे स्टेशन से सदर की ओर आ गए. तब तक अंधेरा होने लगा था. एक वाइन शौप से राज ने शराब की बोतल खरीदी. पास की दुकान से पानी की बोतल, डिस्पोजल गिलास, चखना के पाऊच ले कर दोनों पैट्रोल पंप के पीछे मुर्गी मैदान में सुनसान जगह पर शराब पीने बैठ गए. तभी विक्की पंडा भी पहुंच गया.

सीधेसादे अरविंद को यह भान नहीं था कि जिस नौकरी को पाने के लिए उस ने जी तोड़ मेहनत की थी और कितने ही साल बेरोजगारी में काटे थे, वही नौकरी उस की जान की दुश्मन बन जाएगी. राज और विक्की चालाकी से इस तरह पैग बना रहे थे कि अरविंद ज्यादा से ज्यादा पी सके. शराब पीतेपीते लगभग साढ़े 7 का समय हो गया. इस बीच अरविंद का नशा पूरे शबाब पर पहुंच गया था, तभी राज ने पास में पड़े एक बड़े से पत्थर से अरविंद के सिर पर हमला कर दिया. उस के सिर से खून की धारा बहने लगी और थोड़ी देर तड़फड़ाने के बाद वह ढेर हो गया. जब दोनों को तसल्ली हो गई कि अरविंद मर चुका है तो राज और विक्की वहां से भाग निकले.

राज जल्दी से रेलवे स्टेशन आ गया. प्लेटफार्म पर चित्रकूट एक्सप्रैस लग चुकी थी. वह ट्रेन में सवार हो गया. रात 9 बजे ट्रेन जबलपुर स्टेशन से रवाना हो गई. 29 जनवरी, 2021 को जबलपुर के एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर अरविंद की हत्या का खुलासा कर दिया. प्रैस कौन्फ्रैंस में बताया गया कि अरविंद की हत्या मनीषा के इशारे पर विक्की की मदद से राज यादव ने की थी. एसपी ने अरविंद की हत्या के मुख्य आरोपी राज यादव को जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया. इस के बाद कैंट थाना पुलिस ने मनीषा और विक्की पंडा को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

मनीषा और विक्की को जेल भेजने के बाद जबलपुर पुलिस राज की तलाश में जुट गई. राज के घर से जब्त उस के मोबाइल की जांच की तो मोबाइल में मनीषा और उस के आपत्तिजनक हालत में फोटो मिले, जो उन के नाजायज संबंधों की कहानी बयां कर रहे थे. पुलिस टीम राज के पिता से सूरत में रहने वाले उस के बड़े बेटे का मोबाइल नंबर ले कर आई थी. पुलिस ने जब राज के भाई से बात की तो पहले तो उस ने राज के सूरत में न होने की जानकारी दी. जब पुलिस ने डर दिखाया तो उस ने पुलिस को भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही राज को ले कर जबलपुर आएगा.

राज और उस का बड़ा भाई 3-4 दिनों तक पुलिस टीम को गुमराह करते रहे. इस पर जबलपुर पुलिस की टीम ने सूरत जा कर छापामारी की तो राज यादव पुलिस की गिरफ्त में आ गया. पुलिस ने राज से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अरविंद की हत्या की पूरी कहानी पुलिस को बता दी. पुलिस ने अरविंद की हत्या के आरोपी खेमचंद यादव उर्फ राज पर आईपीसी की धारा 302,120 के तहत मामाला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया. अरविंद और मनीषा के दोनों बच्चों को जबलपुर के ग्वारीघाट में रहने वाली उस की नानी के सुपुर्द कर दिया गया. नौकरी की चाहत में अपने पति की हत्या करने वाली मनीषा का नौकरी पाने का सपना धरा का धरा रह गया.

क्षणिक शारीरिक सुख और सोशल मीडिया की चकाचौंध में अपने मासूम बच्चों को बेसहारा करने वाली मनीषा अपने प्रेमी खेमचंद और भाई प्रदीप उर्फ विक्की पंडा के साथ जेल में है. MP News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित