Family Dispute : फौजी की सनक का कहर

Family Dispute : सुबहसुबह साढ़े 7 बजे के करीब गुड़गांव के राजेंद्र पार्क इलाके में जब सायरन बजाती पुलिस की गाडि़यां आईं, तब अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते हुए लोग चौंक पड़े. कोई बाथरूम में फ्रैश हो रहा था, तो कोई अपनी बालकनी में ब्रश कर रहा था या अपने फूलों के गमले की देखरेख में लगा हुआ था. कई घरों के किचन से कूकर की सीटियां बजने लगी थीं. कोई अपने पालतू कुत्ते के साथ सैर पर था, जबकि कुछ लोग वहीं छोटे से पार्क में जौगिंग और एक्सरसाइज कर रहे थे. हर दिन की तरह ही 24 अगस्त को साफ आसमान और सूरज की चमकदार किरणों वाले दिन की शुरुआत हो चुकी थी.

सायरन की आवाज सुन कर अचानक सभी लोगों का ध्यान उस ओर चला गया. उस वक्त गली में भी कुछ लोगों का आनाजाना शुरू हो चुका था. गाडि़यां उन के बीच से गुजरती हुई एक घर के आगे रुकीं. गाडि़यों से पुलिसकर्मियों को उतरते देख आसपास के लोग धीमी आवाज में बातें करने लगे थे. कुछ लोग अपनीअपनी छतों पर या बालकनी में भी आ गए थे. पुलिसकर्मी जब एक घर के आगे खड़े हो कर अपने हाथों में रबर के ग्लव्स पहनना शुरू किया, तब वहां मौजूद लोगों के मन में जानने की उत्सुकता बढ़ गई. जिस घर के आगे सभी पुलिसकर्मी इकट्ठे हुए थे,  वहां रिटायर्ड फौजी राव राय सिंह रहते थे.

उस वक्त सभी के मन में उन को ले कर कई सवाल थे, ‘राव साहब के घर पर क्या हुआ?  राव साहब ठीक तो हैं न? …. आखिर राव साहब के घर पर पुलिस क्या करने आई है?’ इन सवालों की फुसफुसाहट से पूरी गली में अलग किस्म का शोर भी होने लगा था. उसी शोरगुल के बीच गुरुग्राम थाने के थानाप्रभारी इंसपेक्टर सुरेंदर गाड़ी से उतरे. उन्होंने भी अपने हाथों में रबर का ग्लव्स पहन लिया और 10-12 पुलिसकर्मियों का नेतृत्व करते हुए सब से पहले मकान में प्रवेश किया. पुलिस की टीम मकान में जा कर 2 हिस्सों में बंट गई. एक ऊपर की मंजिलों पर चली गई, जबकि दूसरी इंसपेक्टर सुरेंदर के साथ ग्राउंड फ्लोर पर बनी रही. वहां कई कमरे थे, पुलिस ने सभी का एकएक कर दरवाजा खटखटाया.

अधिकतर कमरों के दरवाजे बाहर से ही बंद या भिड़े हुए थे. कहीं किसी कमरे में कुछ नहीं मिला. बस एक में बुजुर्ग महिला कुरसी पर बैठी दिखी. पास ही एक लड़की पलंग पर सोई हुई थी. पुलिस ने उस बुजुर्ग महिला को बाहर निकलने का इशारा किया. वह सो रही लड़की को जगा कर कुछ मिनट बाद कमरे से बाहर आई. लड़की उस की पोती थी और उस ने खुद को रावराय सिंह की पत्नी विमलेश यादव बताया. ग्राउंड फ्लोर के साथसाथ पहली मंजिल पर भी सूचना के मुताबिक गहन छानबीन जारी थी. कुछ सेकेंड बाद टीम के एक सदस्य ने आवाज लगा कर थानाप्रभारी को पुकारा. वे तुरंत भागते हुए सीढि़यों से पहली मंजिल पर जा पहुंचे. उस कमरे में घुसे जहां से उन्हें आवाज लगाई गई थी.

कमरे में घुसते ही थानाप्रभारी कमरे का दृश्य देख कर अवाक रह गए. कमरे के फर्श पर एक महिला का शव पड़ा था. पूरे कमरे के फर्श पर खून फैल चुका था. शव पर गहरे जख्म का निशान था, उस में से खून रिस रहा था. थानाप्रभारी अभी वहां का मुआयना कर ही रहे थे कि उन्हें दूसरी मंजिल से एक अन्य पुलिसकर्मी ने चीखने जैसी आवाज लगाई. थानाप्रभारी तुरंत भागेभागे दूसरी मंजिल के उसी कमरे में जा पहुंचे, जहां से उन्हें आवाज दी गई थी. कमरे में पहुंचते ही थानाप्रभारी हक्केबक्के रह गए. कमरे के फर्श पर एकदो नहीं, बल्कि 4 लाशें पड़ी हुई थीं. वहां का दृश्य देख कर पुलिसकर्मियों के माथे से पसीना छूटने लगा था. उन 4 लाशों में 2 छोटीछोटी बच्चियां थीं.

सभी लाशों के बारे में प्राथमिक जानकारी जुटाई गई. उस के मुताबिक पहली मंजिल के कमरे से बरामद लाश सुनीता यादव की थी. वह राव राय सिंह की बहू थी. इसी तरह दूसरी मंजिल के कमरे से मिली लाशों में एक लाश वहां रहने वाले किराएदार कृष्णकांत तिवारी (40), दूसरी तिवारी की पत्नी अनामिका तिवारी (32) और बाकी दोनों लाशें उन की बेटियों सुरभि तिवारी (9) और विधि तिवारी (6) की थी. सभी के शरीर पर एक जैसे गहरे जख्म के निशान थे. मकान में मौजूद पुलिस की टीम ने लाशों को निकालने का काम शुरू किया. इसी क्रम में पता चला कि 6 साल की विधि की सांसें चल रही हैं. पुलिस टीम तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल ले गई. राव राय सिंह के घर के बाहर लाशों को देख कर लोग हैरान थे. वे समझ नहीं पर रहे थे कि आखिर इतनी लाशें कैसे और क्यों? साथ ही सभी की आंखें राव राय सिंह को भी तलाश रही थीं. वे नजर नहीं आ रहे  थे.

इलाके के लोगों को पता था कि पहली मंजिल पर सुनीता यादव और दूसरी मंजिल में किराएदार कृष्णकांत तिवारी अपने परिवार के साथ रहते थे. सभी लाशों को देख कर यह तो स्पष्ट हो गया था कि उन की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. उन की हत्या कैसे और किस ने की होगी, इन सवालों के साथसाथ एक सवाल और था कि आखिर राव राय सिंह कहां हैं? इस जघन्य हत्याकांड की नींव में एक मकान मालिक और उस के किराएदार के बीच आपसी रिश्ते के मिठास और खटास के साथ उस में भर चुकी कड़वाहट की कहानी शामिल है, जो वीभत्स हत्या का मुख्य कारण बन गई. बिहार में सीवान के रहने वाले कृष्णकांत तिवारी ने करीब ढाई साल पहले राव राय सिंह के मकान में दूसरी मंजिल पर किराए का कमरा लिया था.

वह गुरुग्राम की एक कंपनी में काम करते थे. उस से पहले वह पास में ही लक्ष्मण विहार में किराए के कमरे में रहते थे. उन्होंने बिहार से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और दिल्ली आने पर शुरुआत से ही गुड़गांव में अपने परिवार के साथ रहते थे. कृष्णकांत जब राव राय सिंह के मकान में आए, तब वहां बहुत जल्द मकान मालिक के सभी सदस्यों के प्रिय बन गए. इस कारण उन्हें काफी अपनापन सा महसूस होता था. उन के बच्चे छोटे थे और पत्नी अनामिका की राय सिंह की बहू सुनीता यादव के साथ अच्छी  पटती थी. कृष्णकांत को वहां रहते हुए कभी भी किसी बात की चिंता नहीं करनी पड़ती थी. राय सिंह के परिवार के साथ वह काफी घुलमिल गए थे.

राय सिंह के एकलौते बेटे आनंद यादव की पत्नी सुनीता यादव अलग मिजाज की औरत थी. वह अपनी ही दुनिया में मस्त रहती थी. मुंहफट इतनी कि किसी को भी मुंह पर तड़ाक से जवाब देने में जरा भी नहीं हिचकती थी. बातबात पर अड़ जाना, घूमनाफिरना, शौपिंग करना और जहांतहां मटरगश्ती करना उस का स्वाभाव बन चुका था. अपनी मरजी से अकसर मायके चली जाती थी. उस की इन्हीं आदतों से न केवल पति, बल्कि ससुर राय सिंह और सास तक परेशान रहते थे. सभी उस की हरकतों से अच्छी तरह वाकिफ थे. कोई गलत कदम नहीं उठा ले, यही सोच कर वे उस पर ज्यादा अंकुश नहीं लगा पाते थे. आनंद यादव गुड़गांव की जिला अदालत में वकील था.

सुनीता और अनामिका हमउम्र होने के चलते आपस में अपनी बातें शेयर करती थीं. उन के बीच हंसीमजाक चलता रहता था. वह अनामिका के कमरे में बेधड़क आयाजाया करती थी. इसी क्रम में वह कृष्णकांत से भी बातचीत करने में काफी खुली हुई थी. दोनों के बच्चे गली में या मकान की छत पर साथसाथ खेलते थे. राय सिंह की पहचान इलाके में सब से शांत व्यवहार रखने वाले लोगों में थी. वह राजेंद्र पार्क के अपने मकान में नौकरी करने के समय से ही रहे थे. उन की इलाके में अच्छी जानपहचान और धाक थी. लोग उन्हें सम्मानित नजरिए से देखते थे. उन्होंने ही गली में जगहजगह पर पेड़पौधे लगवाए थे. रिटायर्ड फौजी होने के कारण वह अपने रुटीन के बेहद पक्के थे. सुबह साढ़े 4 बजे उठ जाते थे और रात की बची रोटियां ले कर सैर पर निकल पड़ते थे. बाहर घूमती गायों को रोटियां खिला देते थे.

समयसमय पर पार्क में पेड़पौधों की छंटाईकटाई का काम भी कर दिया करते थे. थोड़ीबहुत कसरत कर घर आ कर समय से नाश्ता कर लेते थे. फिर दिन भर दूसरे कामकाज में व्यस्त हो जाते थे. वैसे उन्होंने प्रौपर्टी का काम कर रखा था. उस के लिए अपने घर के नीचे ही औफिस बना लिया था. हालांकि वे संस्कार, संस्कृति, धर्म अध्यात्म इत्यादि में गहरा विश्वास रखते थे. इन विषयों पर लोगों से विचारविमर्श भी किया करते थे. जिस दिन राय सिंह के घर से 5 लाशें बरामद हुई थीं, उन में एक लाश उन की बहू की भी थी. एक ही घर से एक साथ इतनी लाशें इलाके में पहली बार निकली थीं, जिसे देख कर लोग हैरत में पड़ गए थे.

उन्हें इस बात को ले कर भी हैरानी हो रही थी कि जब एकएक कर लाशें उन के घर से निकल रही थीं, उस वक्त राय सिंह नहीं थे. वह अचानक कहां चले गए थे, जबकि उन्हें बीते दिन की शाम को लोगों ने देखा था. यहां तक कि कुछ लोगों ने उन्हें सुबह पार्क में भी मौर्निंग वाक करते देखा था. दूसरी तरफ गुरुग्राम थाने की पुलिस 24 अगस्त की सुबह अलसाई हुई बैठी थी. थानाप्रभारी इस बात से निश्चिंत थे कि बीती रात शांति से गुजरी. इलाके में किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. उन्होंने एक कांस्टेबल को चाय लाने के लिए कहा और खुद फ्रैश होने चले गए. कुछ समय बाद बाथरूम से आने पर उन्होंने थाने में हलचल पाई. मालूम हुआ कि कोई आदमी अपने हाथ में रक्तरंजित गंडासा ले कर आया है और बुदबुदा रहा है, ‘मैं ने सब को मार दिया, सब खत्म कर दिया. अच्छा किया, न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी.’

उसे 3 कांस्टेबल घेरे हुए थे. पूछ रहे थे कि उस ने क्या किया है, किसे मारा है, गंडासा कहां से लाया है, उस पर खून कैसे लगा है? इन सवालों के जवाब देने के बजाय एक ही रट लगाए हुए था, ‘मैं ने सब को मार दिया..’

थानाप्रभारी ने सभी कांस्टेबलों को हटा कर और उसे अपने सामने की कुरसी पर बिठाया. तब तक उन की चाय आ चुकी थी. उन्होंने अपनी चाय उसे पीने के लिए दे दी, लेकिन उस ने चाय लेने से इनकार कर दी. हाथ में कस कर पकड़ा हुआ गंडासा थानाप्रभारी के सामने टेबल पर रख दिया. उस पर काफी मात्रा में खून लगा हुआ था. थाना प्रभारी ने पूछा, ‘‘कौन हो तुम? यह गंडासा तुम्हें कहां से मिला?’’

‘‘साहबजी, मैं पूर्व फौजी राव राय सिंह हूं. मैं इसी थानाक्षेत्र के राजेंद्र पार्क में रहता हूं. वहां मेरा अपना मकान है.’’ व्यक्ति बोला.

‘‘और यह गंडासा… इस पर खून कैसा?’’ थानाप्रभारी ने जिज्ञासा जताई.

‘‘यह मेरा ही गंडासा है. मैं ने इस से 5 को मार डाला है.’’ वह बोला. उस के चेहरे पर निश्चिंतता के भाव थे.

‘‘मार डाला? तुम ने मारा 5 को? किसे मारा? क्यों मारा? पूरी बात बताओ.’’ थानाप्रभारी चौंकते हुए बोले.

‘‘साहबजी, बताता हूं, सब कुछ बताता हूं. मैं ने अपने घर में ही सब को मारा है. सभी की लाशें वहीं पड़ी हैं. जाइए, पहले उस का दाह संस्कार करवाइए. मुझे जो सजा देनी है, बाद में दे दीजिएगा.’’ यह कहतेकहते उस ने अपना सिर झुका लिया. संभवत: उस की आंखें नम हो गई थीं. वह भावुक हो गया था. सिर झुकाए बोला, ‘‘उन को मारता नहीं तो और क्या करता साहब? वे थे ही इसी लायक. मरने वालों में एक मेरी बहू भी है. मैं ने उसे बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन नहीं मानी तब ऐसा कर दिया.’’

राय सिंह की बातें ध्यान से सुनने के बाद थानाप्रभारी ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया. फिर अपने उच्चाधिकारियों को इस सनसनीखेज हत्याकांड की सूचना दे दी और टीम के साथ राजेंद्र पार्क की ओर निकल पड़े. गुरुग्राम थाने की पुलिस दलबल के साथ साढ़े 7 बजे राजेंद्र पार्क स्थित राय सिंह के मकान में ऐसे दाखिल हुई, जैसे उन्हें पहले से सब कुछ मालूम हो. जैसेजैसे राय सिंह ने बताया था, उसी के मुताबिक लाशों की बरामदगी हुई. संयोग से छोटी बच्ची की सांस चल रही थी, जिसे अस्पताल में भरती करवा दिया गया. पुलिस लाशों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम हाउस भिजवाने के बाद आगे की काररवाई के लिए कागजी काम निपटाने में जुट गई थी.

थानाप्रभारी जघन्य हत्याकांड में लिप्त हत्यारे की तलाश को ले कर चिंता में थे. उन्होंने राजेंद्र पार्क मोहल्ले में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मंगवाने के आदेश दे दिए थे. उन के मन में एक सवाल उमड़घुमड़ रहा था कि राय सिंह कोई प्रोफेशनल हत्यारा नहीं था, तो फिर उस ने बेरहमी से इतने लोगों को मौत के घाट कैसे उतारा होगा? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए राय सिंह से दोबारा पूछताछ की जाने लगी. उस ने दावे के साथ हत्याकांड के बारे में पूरी बातें बताई. उस के बाद जो कहानी सामने आई, उस के पीछे अवैध रिश्ते का होना सामने आया. राय सिंह ने बताया कि सुनीता उन की एकलौती बहू थी, लेकिन वह अकसर अपने मायके चली जाती थी. मायके में लंबे समय तक गुजारती थी.

बात जनवरी, 2021 की है. एक दिन जब सुनीता लंबे समय के बाद अपने मायके से ससुराल लौटी तो दिनभर घर का काम करने के बाद वह शाम को अपनी सहेली अनामिका से मिलने चली गई. वह दूसरी मंजिल पर रहती थी, जबकि सुनीता पहली मंजिल पर और राय सिंह अपनी पत्नी के साथ ग्राउंड फ्लोर पर रहते थे. सुनीता जिस समय अनामिका से मिलने उस के कमरे में गई थी, उस समय राय सिंह पानी की टंकी की सफाई करने के लिए अपनी छत पर गए हुए थे. अनामिका को कमरे में न पा कर सुनीता वापस लौटने लगी, तभी अंदर किचन से कृष्णकांत की आवाज आई, ‘‘आ गईं आप? कैसे हैं आप के मायके वाले?’’

‘‘अच्छा तो आप किचन में हैं. खाना पका रहे हो क्या? अनामिका कहां गई है?’’

‘‘जी, वह दिल्ली में अपने रिश्तेदार के घर पर गई है. एकदो दिनों में आ जाएगी. बच्चे भी जाने की जिद कर रहे थे. बच्चे भी उसी के साथ हैं.’’ कृष्णकांत बोलतेबोलते कमरे में आ गए.

‘‘तभी कहूं कि घर में इतना सन्नाटा क्यों है? मैं तो आज ही आई हूं. आप कैसे हैं?’’ सुनीता बोली.

‘‘अरे आप खड़ी क्यों हैं, बैठिए. गजब का संयोग है, चाय बनाते समय पानी अधिक पड़ गया और आप अचानक…’’ कृष्णकांत बोलने लगे. उन की अधूरी बात को सुनीता ने पूरा किया.

‘‘…मैं अचानक आ गई हूं तब तो आप की चाय पी कर ही जाऊंगी.’’ कहती हुई वह हंसने लगी. उस समय सीढि़यों से उतरते हुए राय सिंह ने सुनीता की हंसी की आवाज सुन ली.

उन्हें पता था कि कृष्णकांत की बीवीबच्चे दिल्ली गए हुए हैं. उन्हें तुरंत झटका लगा कि सुनीता जरूर कृष्णकांत के साथ हंसीठिठोली कर रही है. कुछ समय के लिए वह वहीं रुक गए. वहां से कृष्णकांत का कमरा दिखता था. दरवाजे पर परदा लगा हुआ था, लेकिन उस के किनारे से अंदर की थोड़ी झलक दिख रही थी. उन्होंने ध्यान से देखने की कोशिश की. कमरे में पलंग पर पैर लटकाए सुनीता बैठी दिखी. उस समय कमरे में और कोई नहीं था. जल्द ही कृष्णकांत हाथ में 2 कप चाय लिए हुए आ गए. एक कप उस ने सुनीता को पकड़ाई फिर उस के सामने किसी स्टूल पर बैठ गए.

परदे के किनारे से केवल सुनीता ही नजर आ रही थी. उस का खिला हुआ चेहरा साफ नजर आ रहा था. हाथ में चाय पकड़े हुए थी. पता नहीं क्या बात हुई सुनीता चाय का प्याला लिए हुए किचन में चली गई. पीछेपीछे कृष्णकांत भी चले गए. राय सिंह बाहर से समझ गए थे कि दोनों भीतर के दूसरे कमरे में चले गए होंगे. वे मन ही मन अपनी बहू की इस हरकत को देखते हुए खून का घूंट पी कर रह गए. उसी समय नीचे राय सिंह की पत्नी चिल्लाई, ‘‘पानी का मोटर चला दूं क्या?’’

इस आवाज से राय सिंह का ध्यान टूटा. वे कुछ सीढि़यां ऊपर चढ़ कर बोले, ‘‘हां, चला दो.’’

उधर कमरे में सुनीता किचन में चली गई थी, ‘‘क्या कृष्णकांतजी, आप एकदम फीकी चाय पीते हो. चाय मीठी हो तो बातें भी मीठी होती हैं.’’

पीछे से कृष्णकांत ने किचन में आ कर सुनीता को चीनी का डब्बा पकड़ाया. उसी समय नल से पानी तेजी से गिरने लगा. कृष्णकांत नल बंद करने के लिए आगे बढ़े, लेकिन पानी की धार  काफी तेज हो गई. उस का फव्वारा फैलने लगा. सुनीता भी वहां पहुंच कर बेसिन में से बरतन हटाती हुई बोली, ‘‘अरे बरतन उल्टी रखोगे तब ऐसा ही होगा.’’

ऐसा करते हुए दोनों के बदन टकरा गए और नल से निकलते फव्वारे से सुनीता का दुपट्टा समेत शरीर का ऊपरी भाग गीला हो गया. वह भाग कर बाहर के कमरे में आ गई. दुपट्टे को हटा कर उसी से चेहरा व बदन पोंछने लगी. तब तक कृष्णकांत उस के चाय की कप ले कर आ गए. उन्होंने सुनीता के उभरे बदन को देखा. उन्हें देखते हुए सुनीता ने कृष्णकांत को देखा. वह शरमा गई. झट से गीला दुपट्टा गले में डाला और कमरे से निकल गई. उसी समय राय सिंह दोबारा सीढि़यों से उतर रहे थे. उन्होंने सुनीता को कृष्णकांत के कमरे से निकलते हुए देखा. वह बदहवासी की हालत में भागती हुई निकली थी. राय सिंह से टकरातेटकराते बची और दनदनाती हुई पहली मंजिल के अपने कमरे में चली गई.

राय सिंह को उस के अनैतिक रिश्ते की गंध समझते देर नहीं लगी. उन का शक विश्वास में बदल गया कि सुनीता के कृष्णकांत के साथ मधुर संबंध हैं. उन्हें गुस्सा तो बहुत आया लेकिन शांत बने रहे. यह घटना तो घट गई थी, लेकिन राव राय सिंह के मन में उठने वाले सवाल उन्हें रात को सोने नहीं दे रहे थे. वह लगातार चिंतित रहने लगे. उन्हें यह भी चिंता सताने लगी कि कहीं सुनीता उन के बेटे को धोखा न दे दे. सुनीता और कृष्णकांत के बीच कोई अनैतिक रिश्ता तो नहीं? इस घटना के बाद वे अपनी बहू और कृष्णकांत को शक की नजरों से देखने लगे. हालांकि उन्होंने इस का जिक्र किसी से नहीं किया था. अपनी पत्नी तक को नहीं बताया था. जबकि राय सिंह मन ही मन यह सब सोच कर कुढ़ते रहते थे.

वे सुनीता के मिजाज को अच्छी तरह जानते थे, इसलिए उस पर दबाव नहीं बना पा रहे थे. उन्हें पता था कि उस के खिलाफ कुछ भी बोलने का मतलब बेइज्जत होना है. उसी बीच फरवरी, 2021 में सुनीता फिर अपने मायके चली गई. एक महीने बाद कोरोना की दूसरी लहर ऐसी आई कि लौकडाउन और कर्फ्यू के चलते लोगों का कहीं आनाजाना मुहाल हो गया. मई, 2021 में कृष्णकांत के गांव से उन के पिता के बीमार होने का फोन आया. उन्हें सपरिवार आननफानन अपने गांव जाना पड़ा. गांव से वह वापस गुरुग्राम आ तो गए लेकिन उन की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी थी. एक तरफ उन की नौकरी छूट गई थी, दूसरी तरफ मकान का किराया 7 महीने का बाकी हो गया था. किराए को ले कर राय सिंह से कृष्णकांत की कई बार बहस भी हो चुकी थी.

गांव में अपने पिता की देखभाल करने के 3 महीने बाद अगस्त में रक्षाबंधन के ठीक 5 दिन पहले लौटे थे. राय सिंह ने तब किराया न देने पर उन्हें खूब खरीखोटी सुनाई थी. वह पहले से ही अपनी बहू को ले कर परेशान थे. उन्होंने सोचा किराए के बहाने कमरा खाली करवा लेने पर कृष्णकांत से उस की बहू का संबंध खत्म हो जाएगा. कृष्णकांत ने कुछ समय की मोहलत मांगी. उसी बीच 19 अगस्त को सुनीता भी मायके से गुड़गांव लौट आई. राय सिंह के किराया मांगने पर उस ने कृष्णकांत और परिवार की तरफदारी की. उस ने कहा वह खराब हालत में कहां जाएंगे. सुनीता की बातों से राय सिंह दुखी हो गए. उस ने कृष्णकांत के सामने ही यह बात कही थी, जिस से उन्होंने बेइज्जती महसूस की थी. उस वक्त तो राय सिंह खून का घूंट पी कर रह गए, लेकिन मन ही मन में एक संकल्प भी ले लिया.

सुनीता द्वारा कृष्णकांत का पक्ष लिए जाने का कारण वह समझ रहे थे. उन के रिश्तों को ले कर पहले से ही शक का कीड़ा मन में कुलबुला रहा था. सुनीता की तरफदारी से कीड़ा रेंगने लगा था. राव सिंह सुनीता के संदिग्ध चरित्र और कृष्णकांत द्वारा किराया नहीं देने को ले कर काफी तनाव में आ गए थे. एक दिन रात को अचानक उन की नींद खुल गई और पेड़पौधों की कटाईछंटाई करने वाले गंडासे की धार तेज करने लगे. उन की पत्नी ने रात को ऐसा करते देख कर पूछा तब उन्होंने बहाना बनाते हुए कहा कि उन्हें कई पेड़ों की छंटाई करनी है. गंडासा की धार तेज करने का सिलसिला 19 अगस्त से 23 अगस्त तक चला.

23 तारीख की शाम को 7 बजे राव सिंह का बेटा आनंद यादव अपने कुछ दोस्तों के साथ खाटू श्याम मंदिर में दर्शन करने के लिए चला गया था. राय सिंह ने उसी रात अपनी योजना को अंजाम देने का मन बना लिया. रात के 12 बजे के बाद राय सिंह पहले की तरह उठे और गंडासा निकाल कर छत की सीढि़यां चढ़ने लगे. उन की पत्नी विमलेश की नींद खुल गई, लेकिन उन्होंने समझा वे गंडासे की धार तेज करने गए होंगे. किंतु मोबाइल की रोशनी से घड़ी देखी तो ढाई बजे का समय देख कर चौंक गई. उस के मन में कुछ आशंका हुई और दबेपांव छत पर जाने लगी. सीढि़यों पर अंधेरा था, जिस से वापस लौट कर अपने कमरे में आ कर लेट गई. उधर राय सिंह ने पहली मंजिल पर पहुंच कर अपनी बहू का कमरा खटखटाया.

2-3 बार दरवाजा खटखटाने के बाद अंदर से सुनीता ने गहरी नींद में दरवाजा खोला. इस से पहले कि सुनीता को कुछ पता चलता, राय सिंह ने उस के सिर पर गंडासे से जोरदार वार कर दिया. सुनीता वहीं चीख कर गिर पड़ी. उस के गिरते ही राय सिंह ने दनादन शरीर पर कई वार कर दिए. उस के सिर से ले कर शरीर के कई हिस्से से खून बहने लगा. नीचे राय सिंह की पत्नी विमलेश सुनीता की चीख सुन कर भागीभागी पहली मंजिल पर जा पहुंची. वहां पति के हाथ में खून से सने गंडासे को देख कर डर गई और उल्टे पांव अपने कमरे में आ कर लेट गई.

सुनीता को मौत के घाट उतारने के बाद वह सीधे दूसरी मंजिल पर जा पहुंचे. संयोग से कृष्णकांत ने अंदर से कुंडी बंद नहीं की थी. अंधेरे में हलकी फैली हुई रोशनी में राव सिंह ने कृष्णकांत और उस के पूरे परिवार को नीचे जमीन पर ही लेटे पाया. समय बरबाद नहीं करते हुए सब से पहले कृष्णकांत के सिर पर गंडासे से दे मारा. उस का पहला हमला ही इतना जोरदार था कि कृष्णकांत पहले ही वार से अपनी गहरी नींद से जाग ही नहीं पाए. वह बेसुध हो गए. राव सिंह ने कृष्णकांत पर अपना आपा खोते हुए करीब 7 वार लगातार किए. कृष्णकांत की मौके पर ही मौत हो गई. तब तक थोड़ी दूरी पर सोई अनामिका नींद से जाग गई थी. जख्मी पति को देख कर उस ओर जैसे ही आने की कोशिश की, राय सिंह ने उस के सिर पर भी गंडासे का एक जोरदार वार कर दिया.

तब तक बच्चे जाग गए थे. वे अपने मांबाप को बेसुध हालत में देख कर कहने लगे, ‘‘अंकल माफ कर दीजिए. इन्हें मत मारिए. इन्हें छोड़ दीजिए.’’ तब तक राय सिंह अपना आपा खो चुके थे. अनामिका पर एक के बाद एक कई वार करने के बाद बच्चों पर भी गंडासे से हमला बोल दिया और फिर अपने कमरे में आ कर बाथरूम में घुस गए. पूरे हत्याकांड के बाद राव सिंह बाथरूम में घुस कर नहाया. अपने कमरे में वह पंखे के नीचे बैठा. नए कपड़े पहने और करीब साढ़े 4 बजे उठ कर अपने डेली रूटीन में व्यस्त हो गया. मूकदर्शक बनी जड़वत पत्नी विमलेश को ठहर कर देखा और पार्क की ओर सैर पर निकल पड़ा.

उसी दिन सुबह करीब साढ़े 6 बजे जब वह पार्क से अपने घर लौटा और दोबारा लाशों को जा कर देख आया. फिर हाथ में गंडासा लहराते हुए थाने चला गया. इस बात की पुष्टि बाद में इलाके के 3 सीसीटीवी कैमरों में कैद रिकौर्डिंग से हुई.  उस के कपड़े और उस औजार पर खून के छींटों की जांच के बाद उस के द्वारा हत्या किए जाने की भी पुष्टि हो गई. इस हत्याकांड की सुनीता के भाई अशोक यादव ने भी राजेंद्र पार्क पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई. उन्होंने रिपोर्ट में राव राय सिंह के परिवार पर सुनीता से पैसों की मांग का आरोप लगाया. इस कारण वह अकसर सासससुर से झगड़ कर मायके आ जाती थी.

कथा लिखे जाने तक केस को सुलझाने के लिए गुड़गांव की राजेंद्र पार्क पुलिस ने हर पहलू को ध्यान में रखते हुए परिवार के सभी सदस्यों के बयान ले लिए हैं.  आरोपी राव राय सिंह को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है.  इस पूरे हत्याकांड में एकमात्र बची हुई पीडि़त 6 साल की विधि की हालत में लिखे जाने तक सुधार हो रहा था. उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भरती करवाया गया था. Family Dispute

 

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Real Crime Stories in Hindi : श्रीकांत रेड्डी और भुवनेश्वरी दोनों ही इंजीनियर थे. दोनों की अच्छी जौब थी, लेकिन पिछले साल देश में कोरोना की लहर आई तो श्रीकांत की नौकरी छूट गई. हालात से परेशान हो चुके श्रीकांत ने एक दिन अपने लाल सूटकेस में आग लगा दी. बाद में उस सूटकेस का जो रहस्य खुला वह…

तिरुपति भारत के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में एक है. आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित तिरुपति शहर में हर साल लाखों की तादाद में दर्शनार्थी आते हैं. समुद्र तल से करीब 3200 फीट की ऊंचाई पर तिरुमला की पहाडि़यों पर बना श्री वेंकटेश्वर मंदिर यहां का सब से बड़ा आकर्षण है. कई शताब्दी पहले बना यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला और शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है. तिरुपति आने वाले हरेक श्रद्धालु की सब से बड़ी इच्छा श्री वेंकटेश्वर के दर्शन करने की होती है. इस के अलावा भी यहां कई अन्य मंदिर हैं. इन मंदिरों में सामान्य दिनों में देशविदेश से रोजाना हजारोंलाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. इसलिए तिरुपति को दक्षिण भारत की सब से बड़ी धार्मिक नगरी भी कहा जाता है.

इसी धार्मिक नगरी में सब से बड़ा सरकारी अस्पताल है. इस का नाम श्री वेंकटा रमाना रुईया (एसवीआरआर) है. इस 23 जून, 2021 को अस्पताल के पिछवाड़े एक जला हुआ सूटकेस पड़ा होने की सूचना पुलिस को मिली. सूचना पर तिरुपति के अलिपिरी थाने की पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने उस बड़े से सूटकेस का मुआयना किया. सूटकेस जला हुआ था. उस में से किसी इंसान का जला हुआ शव नजर आ रहा था. पुलिस ने सूटकेस से शव को निकलवाया. शव पूरी तरह जला हुआ था. कई जगह से चमड़ी और मांस भी जल चुका था. केवल हड्डियां बची हुई थीं. मामला बेहद गंभीर था. अलिपिरी थाने की पुलिस ने अपने उच्चाधिकारियों को इस की सूचना दी. इस के बाद पुलिस के आला अफसर भी मौके पर पहुंच गए.

पुलिस अधिकारियों ने शव का मुआयना किया, लेकिन जला हुआ शव देख कर यह भी पता नहीं चल रहा था कि यह पुरुष का है या महिला का. ऐसी हालत में शव की शिनाख्त होना तो दूर की बात थी. मौके से पुलिस को ऐसी कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली, जिस से मृतक या शव फेंकने वाले के बारे में कोई सुराग मिलता. पुलिस अधिकारियों ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला से फोरैंसिक टीम बुलाई. फोरैंसिक वैज्ञानिकों ने कुछ साक्ष्य जुटाए. इस के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए इसी अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया गया. डाक्टरों ने पोस्टमार्टम के बाद केवल इतना बताया कि शव किसी महिला का है और उस की उम्र 25 से 30 साल के बीच है. इस के बाद तिरुपति के अलिपिरी पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

डाक्टरों की रिपोर्ट से पुलिस को बहुत ज्यादा मदद नहीं मिली. पुलिस अधिकारी हैरान थे कि धार्मिक नगरी में ऐसा जघन्य कांड किस ने और क्यों किया? महिला का शव होने से अधिकारी इस बात पर विचार करने लगे कि कहीं यह कोई प्रेम प्रसंग का मामला तो नहीं है? शव की शिनाख्त में जुटी पुलिस सब से पहले यह पता करना जरूरी था कि शव किस का था? इस के लिए पुलिस अधिकारियों ने तिरुपति सहित चित्तूर जिले के सभी थानों और आसपास की पुलिस को सूचना दे कर यह पता कराया कि किसी महिला के लापता या गुमशुदा होने की कोई रिपोर्ट तो हाल ही दर्ज नहीं हुई है. लगभग सभी थानों से पुलिस को न में ही जवाब मिला. 2-4 थानों से लापता महिलाओं की सूचना मिली, लेकिन वे उस उम्र के दायरे में नहीं आ रही थी.

पुलिस की कई टीमें मृतका की शिनाख्त करने और कातिल का पता लगाने की कोशिशों में जुटी हुई थीं, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल रहा था. 2-3 दिन बीत गए. पुलिस के लिए यह मर्डर मिस्ट्री बन गई थी. यह तय था कि महिला की हत्या कर सोचीसमझी साजिश के तहत सूटकेस में रख कर शव जलाया गया है ताकि कोई सबूत नहीं बचे. मतलब कातिल जो भी हो, वह शातिर दिमाग था. जांचपड़ताल में पुलिस अधिकारियों को खयाल आया कि सूटकेस में शव जलाया गया है तो यह भारीभरकम सूटकेस किसी वाहन में रख कर लाया गया होगा. यह खयाल आते ही अधिकारियों ने एसवीआरआर अस्पताल परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने का फैसला किया.

सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस को पता चला कि एक व्यक्ति टैक्सी से भारीभरकम सूटकेस ले कर अस्पताल आया था. उस व्यक्ति के साथ डेढ़दो साल की एक छोटी बच्ची थी. टैक्सी से लाल रंग के उस ट्रौली सूटकेस को उतारने के बाद वह व्यक्ति उसे पहियों के सहारे खींचता हुआ अस्पताल के पिछवाड़े ले गया था. कैमरे की ये फुटेज मिलने पर इस मर्डर मिस्ट्री में उम्मीद की कुछ किरण नजर आई. पुलिस के लिए उस व्यक्ति की तलाश करना ज्यादा मुश्किल काम था. इसलिए सब से पहले उस टैक्सी वाले का पता लगाया गया. 1-2 दिन की भागदौड़ के बाद पुलिस को वह टैक्सी वाला मिल गया. पुलिस ने उस से पूछताछ की, तो पता चला कि 22 जून की रात एक व्यक्ति उस की टैक्सी में लाल रंग का ट्रौली वाला सूटकेस रख कर लाया था.

सूटकेस भारीभरकम था. उसे खींचने में उसे जोर लगाना पड़ रहा था. उस व्यक्ति के साथ डेढ़दो साल की एक बच्ची भी थी. अस्पताल में उस व्यक्ति ने टैक्सी से सूटकेस उतारा. बच्ची उस समय सो गई थी. इसलिए उस व्यक्ति ने टैक्सी वाले से कहा कि मुझे यह सूटकेस किसी को देना है. मैं कुछ देर में आता हूं. यह बच्ची सो गई है. इसलिए इसे टैक्सी में छोड़ जाता हूं. टैक्सी ड्राइवर से मिला सुराग उस व्यक्ति ने टैक्सी वाले को रुकने के एवज में और बच्ची का ध्यान रखने के लिए कुछ पैसे देने का वादा किया. टैक्सी वाले ने पैसों के लालच में हामी भर दी. इस के बाद वह व्यक्ति पहियों के सहारे उस ट्रौली बैग को खींचते हुए ले गया.

करीब आधे घंटे बाद वह व्यक्ति वापस आया. तब तक बच्ची टैक्सी में सोती हुई ही मिली. यह देख कर उस ने टैक्सी वाले को धन्यवाद दिया और वापस चलने के लिए टैक्सी में सवार हो गया. टैक्सी वाला उस व्यक्ति को जहां से लाया था, उसी जगह वापस छोड़ आया. उस व्यक्ति ने बच्ची को गोद में उठाया और टैक्सी से उतर कर किराए का हिसाब किया. इस के बाद वह व्यक्ति लंबेलंबे डग भरता हुआ तेजी से एक तरफ चला गया. उस व्यक्ति को जाता देख कर टैक्सी वाला भी वहां से चल दिया. टैक्सी वाले से पुलिस को काफी कुछ सुराग मिल गया था. अब उस व्यक्ति का पताठिकाना तलाश करना बाकी था. टैक्सी वाले ने उस व्यक्ति को जिस जगह छोड़ा था, पुलिस ने उस के आसपास के इलाकों में लोगों को फोटो दिखा कर उस व्यक्ति की तलाश शुरू कर दी.

इस काम में पुलिस की कई टीमें लगाई गईं. इस से परिणाम भी जल्दी ही सामने आ गए. पता चला कि उस व्यक्ति का नाम श्रीकांत रेड्डी था. यह भी पता चल गया कि सूटकेस में जिस महिला का जला हुआ शव मिला था, वह करीब 26-27 साल की उस की पत्नी भुवनेश्वरी थी. पुलिस को अब श्रीकांत रेड्डी की तलाश थी. इस बीच भुवनेश्वरी की एक रिश्तेदार महिला पुलिस एसआई ममता ने अपने स्तर पर जुटाए कुछ सीसीटीवी फुटेज अलिपिरी थाना पुलिस को उपलब्ध करा दिए. इन फुटेज से श्रीकांत के अपराधी होने की पुष्टि हो गई. पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर पता कर 30 जून को श्रीकांत रेड्डी को गिरफ्तार कर लिया. श्रीकांत से पुलिस की पूछताछ और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर भुवनेश्वरी की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

श्रीकांत रेड्डी आंध्र प्रदेश के कडपा जिले के बडवेल का रहने वाला था और भुवनेश्वरी चित्तूर जिले के रामासमुद्रम गांव की रहने वाली थी. भुवनेश्वरी एक सौफ्टवेयर इंजीनियर थी. वह हैदराबाद शहर में टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज में नौकरी करती थी. श्रीकांत भी टेक्नो इंजीनियर था. वह भी हैदराबाद की एक कंपनी में काम करता था. एक ही प्रोफैशन में होने के कारण दोनों में पहले यारीदोस्ती हुई. यह दोस्ती बाद में प्यार में बदल गई. दोनों ने शादी करने का फैसला किया. वर्ष 2019 के शुरू में उन्होंने शादी कर ली. दोनों हैदराबाद में रहते थे. पतिपत्नी दोनों इंजीनियर थे. वेतन भी ठीकठाक था. इसलिए किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी. भुवनेश्वरी भी खुश थी और श्रीकांत भी.

आपसी झगड़े में उड़नछू हो गया लव दोनों की खुशियां तब और बढ़ गईं, जब 2019 के आखिर में उन के घर एक नन्ही परी ने जन्म लिया. हालांकि पतिपत्नी दोनों नौकरीपेशा थे, लेकिन फिर भी बेटी के जन्म से उन की खुशियों की दुनिया और ज्यादा रंगीन हो गई. बेटी 4 महीने की हुई थी कि देश में कोरोना की पहली लहर आ गई. इस पहली लहर में पिछले साल श्रीकांत की नौकरी छूट गई. कुछ दिन तो घर में ठीकठाक चलता रहा, लेकिन बाद में पतिपत्नी के बीच झगड़े होने लगे. झगड़े का कारण था कि श्रीकांत अपने तमाम तरह के खर्चे के पैसे भुवनेश्वरी से लेता था. भुवनेश्वरी उसे पैसे तो दे देती, लेकिन वह उस से कोई कामधंधा भी करने को कहती थी. स्थितियां ऐसी रहीं कि श्रीकांत को कोई अच्छी नौकरी नहीं मिली.

वह पत्नी पर ही आश्रित रहने लगा. भुवनेश्वरी भी आखिर कब तक उसे शौक पूरे करने के लिए पैसे देती? नतीजतन घर में रोजाना किसी न किसी बात पर झगड़े होने लगे. इस बीच, इस साल कोरोना की दूसरी लहर आ गई. छोटीबड़ी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों से वर्क फ्रौम होम शुरू करा दिया. भुवनेश्वरी भी घर से ही कंपनी का काम करने लगी. खर्चे कम करने के लिए इसी साल भुवनेश्वरी और श्रीकांत हैदराबाद से तिरुपति आ कर रहने लगे. तिरुपति में दोनों पतिपत्नी अपनी सवाडेढ़ साल की बेटी के साथ एक अपार्टमेंट में रहते थे. तिरुपति आने के बाद भी श्रीकांत निठल्ला बना रहा. उस के निठल्लेपन के कारण घर में झगड़े बढ़ते जा रहे थे. पत्नी उसे कई बार पैसे देने से मना कर देती थी. इस से श्रीकांत चिढ़ जाता था.

पत्नी की पाबंदियों और रोज की रोकटोक से श्रीकांत के मन में उस के प्रति घृणा बढ़ती गई. लिहाजा उस ने भुवनेश्वरी को ठिकाने लगाने का फैसला किया. गला दबा कर मारा था पत्नी को 22 जून, 2021 को भुवनेश्वरी जब अपने फ्लैट में सो रही थी तो श्रीकांत ने तकिए से गला दबा कर उसे मौत की नींद सुला दिया. पत्नी की सांसें थमने के बाद वह उस का शव ठिकाने लगाने के बारे में सोचने लगा. काफी सोचविचार के बाद उस ने घर में रखा एक लाल रंग का बड़ा ट्रौली सूटकेस निकाला और उस में भुवनेश्वरी की लाश बंद कर दी. वह अपनी डेढ़ साल की बेटी के बारे में सोचने लगा. वह उस मासूम को अकेला कहीं छोड़ कर भी नहीं जा सकता था और उस को मारना भी नहीं चाहता था.

शाम का धुंधलका होने पर श्रीकांत ने बेटी को गोद में उठाया और भुवनेश्वरी की लाश वाला ट्रौली सूटकेस बाहर निकाल कर फ्लैट में ताला लगाया. वह लिफ्ट के सहारे ट्रौली सूटकेस ले कर नीचे आया और गलियारे से हो कर अपार्टमेंट से बाहर निकल गया. बाहर सड़क पर आ कर उस ने टैक्सी ली. उस में वह सूटकेस रखा. बेटी को गोद में लिए हुए वह टैक्सी से एसवीआरआर अस्पताल पहुंचा और टैक्सी वाले को रुकने को कह कर सूटकेस ले कर चला गया. मासूम बेटी को वह टैक्सी में ही सोते हुए छोड़ गया. सूटकेस को धकेलता हुआ वह अस्पताल के पिछवाड़े ले गया. वहां अंधेरा और घासफूस थी. सूटकेस को एक कोने में ले जा कर उस ने उस पर अपने साथ लाया हुआ पैट्रोल छिड़क दिया और आग लगा दी. आग लगाने के बाद वह छिप कर खड़ा हो गया और सूटकेस को जलता हुआ देखता रहा.

करीब आधे घंटे बाद जब उसे यह इत्मीनान हो गया कि अब पत्नी की लाश जल गई होगी और उस की पहचान नहीं हो सकेगी, तब वह वहां से चल दिया. टैक्सी के पास पहुंच कर उस ने पीछे की सीट पर सोई मासूम बेटी को संभाला. फिर उसी टैक्सी में सवार हो कर वापस उसी जगह उतर गया, जहां से सूटकेस ले कर बैठा था. दूसरे दिन श्रीकांत ने अपने रिश्तेदारों को यह बता दिया कि भुवनेश्वरी कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट से संक्रमित थी. इस से उस की मौत हो गई ओर कोरोना संक्रमित होने के कारण अस्पताल वालों ने ही उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

भुवनेश्वरी के पीहरवालों को हालांकि इस बात पर भरोसा नहीं हो रहा था, लेकिन उन्होंने श्रीकांत की बात पर मजबूरी में विश्वास कर लिया. क्योंकि वे कोरोना के कहर को जानते थे. इस बीच श्रीकांत फ्लैट से फरार हो गया. भुवनेश्वरी की एक रिश्तेदार ममता प्रशिक्षु सबइंसपेक्टर है. उसे भुवनेश्वरी की मौत का पता चला तो उसे भरोसा नहीं हुआ. चूंकि वह पुलिस अधिकारी थी, इसलिए उस ने अपने तरीके से इस की खोजबीन की और जिस अपार्टमेंट में वह रहता था, वहां की सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो सारे सबूत मिल गए. तमाम सबूतों के आधार पर आरोपी श्रीकांत पकड़ा गया. कथा लिखे जाने तक वह जेल में था. इंजीनियर श्रीकांत ने अपने निठल्लेपन के कारण सौफ्टवेयर इंजीनियर पत्नी के खून से अपने हाथ तो रंग ही लिए. साथ ही डेढ़ साल की मासूम बेटी के सिर से ममता का आंचल भी छीन लिया.