Honeymoon Murder : हनीमून पर हत्या की सुपारी

Honeymoon Murder. एनी देवानी हनीमून पर साउथ अफ्रीका जाना चाहती थी, जबकि श्रीन उसे पश्चिम के किसी देश ले जाना चाहता था. पत्नी की जिद पर श्रीन उसे साउथ अफ्रीका ले तो गया, लेकिन… 

सन 2009 के जुलाई महीने में एनी हिंडोचा अपनी कजिन स्नेहा से मिलने ल्यूटोन गई तो वहीं उस की मुलाकात श्रीन देवानी से हुई. श्रीन स्नेहा का पारिवारिक मित्र था. श्रीन देवानी हेल्थकेयर बिजनैस का एक जानामाना नाम था. मूलरूप से भारत का रहने वाला श्रीन देवानी का परिवार लंदन के ब्रिस्टल शहर में रहता था. सालों पहले उस के घर वाले यहां आ कर रहने लगे थे. उस के पिता पीएसपी हेल्थकेयर कंपनी चलाते थे. श्रीन देवानी का जन्म वहीं हुआ था.

यूनिवर्सिटी औफ मैनचेस्टर से इकोनौमिक्स में ग्रैजुएशन कर के श्रीन वहीं एक कंपनी में एकाउंटेंट की नौकरी करने लगा था. इसी नौकरी के दौरान स्नेहा से उस की दोस्ती हुई थी. नौकरी कर के श्रीन को जब अच्छाखासा अनुभव हो गया तो उस ने अपना पारिवारिक कारोबार संभाल लिया था. नौकरी उस ने भले छोड़ दी थी, लेकिन दोस्तों से वह पहले की ही तरह मिलताजुलता रहता था.

दोस्तों से ही मिलनेजुलने में श्रीन की मुलाकात स्नेहा की कजिन एनी हिंडोचा से हुई तो पहली ही मुलाकात में खूबसूरत एनी उसे कुछ इस तरह भायी कि एक बार उस के चेहरे पर उस की नजर पड़ी तो वह अपनी नजर को हटा नहीं सका.

एनी ने श्रीन देवानी के दिल में एक अजीब सी हलचल मचा दी थी. अब तक उस के संपर्क में तमाम लड़कियां आई थीं, लेकिन जो बात उस ने एनी में पाई थी, शायद वह उन में से किसी में नहीं दिखी थी. इसीलिए वह उस पर से नजर नहीं हटा सका था.

श्रीन एनी को एकटक देख रहा था. उसे इस बात की भी परवाह नहीं थी कि वह जो कर रहा है, वह अभद्रता है और उस की इस अभद्रता पर लोग उस के बारे में क्या सोचेंगे.

एनी को उस के मन की बात भांपते देर नहीं लगी थी. श्रीन भी कम आकर्षक नहीं था. सुखी और संपन्न तो था ही. एक लड़की को जिस तरह का मर्द चाहिए, वे सारे गुण उस में थे. इसलिए उस का एकटक ताकना एनी को बुरा लगने के बजाय अच्छा ही लगा था. कहा जाए तो उस का हाल भी श्रीन से कुछ अलग नहीं था.

जब दोनों के ही दिलों की हालत एक जैसी हो गई तो वे एकदूसरे की आंखों में डूब गए. तभी स्नेहा ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘‘यहां तुम दोनों के अलावा भी तमाम लोग मौजूद हैं. उन लोगों की ओर भी देख लो.’’

श्रीन और एनी को अपनीअपनी गलती का अहसास हुआ. दोनों शरमा गए, इसलिए कुछ कह नहीं सके, सिर्फ मुसकरा कर रह गए. दोनों बातें भले ही अन्य लोगों से करते रहे, पर नजरें एकदूसरे को ही ताकती रहीं. इतना सब होने के बाद अब उन्हें एकदूसरे से यह कहने की जरूरत नहीं रह गई थी कि वे एकदूसरे के दिलों में बस चुके हैं. इस तरह उन के प्यार का इजहार नजरों से ही हो गया था.

वहां से विदा होने से पहले एनी और श्रीन ने एकदूसरे के नंबर ले लिए थे. इस के बाद उन की मोबाइल पर बात ही नहीं होने लगी, बल्कि दोनों ऐसी जगहों पर मिलने भी लगे, जहां सिर्फ वही दोनों होते थे. एकांत में मिल कर दोनों अपनेअपने दिलों की बात कह कर बेहद सुकून महसूस करते थे. ज्यादातर वे ब्रिस्टल और स्टाकहोम के बीच मिलते थे.

एकांत में एक दिन जब श्रीन ने एनी की ठोढ़ी उठा कर उस की आंखों में झांकते हुए कहा कि वह उसे बहुत प्यार करता है तो एनी उस की हथेली अपने हाथों में दबा कर बोली, ‘‘प्यार! मैं तुम्हें तुम से भी ज्यादा प्यार करती हूं. मेरी हर धड़कन, हर सांस अब तुम्हारे लिए है. तुम भले ही मुझ से दूर रहते हो, पर यादों की वजह से हर पल मेरे साथ होते हो.’’

‘‘एनी, सागर की गहराई को तो नापा जा सकता है, लेकिन दिल की गहराई को किसी भी तरह नहीं नापा जा सकता. वरना मैं भी दिखा देता कि मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूं. तुम्हारे प्यार से इस जिंदगी को एक मकसद मिल गया है. अब इसे जीने में मजा आने लगा है. बाकी तो यह सूखी नदी जैसी थी.’’ श्रीन ने उसी तरह एनी की आंखों में झांकते हुए कहा.

‘‘तुम से प्यार करने के बाद ही मुझे भी पता चला है कि यह जिंदगी कितनी खूबसूरत होती है. तुम्हारे प्यार में बीतने वाला हर पल बहुत हसीन लगता है. मेरी जिंदगी में आ कर तुम ने इसे धन्य कर दिया. मैं तुम्हारा यह एहसान ताउम्र नहीं भूल सकती.’’ यह कहते हुए एनी भावुकता की गहराई में उतर गई.

‘‘एहसान तो तुम ने मुझ पर किया है, मेरी जिंदगी में आ कर. तुम्हारा यह प्यार मेरे लिए वह इबादत है, जो मैं मरते दम तक करता रहूंगा.’’ श्रीन ने कहा.

‘‘मुझे कभीकभी विश्वास ही नहीं होता कि मुझे तुम जैसा प्यार करने वाला मिला है. सचमुच तुम्हें पा कर मेरी जिंदगी बदल गई है.’’ एनी ने आंखें मूंद कर कहा.

प्यारमोहब्बत की बातों की कोई सीमा नहीं होती. इस के लिए तो कई जीवन भी कम पड़ जाएं. इसलिए श्रीन और एनी जब भी मिलते, इसी तरह की बातें करते रहते. मिलतेजुलते, ऐसी ही बातें करते डेढ़ साल कैसे गुजर गए, उन्हें पता ही नहीं चला.

गुजरे समय के साथ उन का प्यार गहरा होता गया. अब वे कईकई दिनों में कुछ घंटे के लिए मिलते तो उन का मन न भरता. वे चाहते थे कि उन का हर पल एकदूसरे की बांहों में गुजरे.

लेकिन इस के लिए एक बंधन की जरूरत थी. वह बंधन था शादी का और इस के लिए जरूरत थी दोनों के परिवारों की रजामंदी. दोनों भले ही पश्चिमी देशों में जन्मे और पलेबढ़े थे, लेकिन थे तो हिंदुस्तानी, जहां की संस्कृति आज भी उन के घर वालों पर हावी थी. शायद इसीलिए उन्होंने अपने प्यार को अभी तक घर वालों के सामने उजागर नहीं होने दिया था.

इसीलिए जब उन के मन में शादी का विचार आया तो एनी ने कहा, ‘‘श्रीन, शादी के लिए तुम अपने घर वालों से बात करो, क्योंकि मैं तो अपने घर वालों से कुछ कह नहीं सकती. लेकिन इतना जरूर जानती हूं कि तुम्हारे घर वाले मेरे घर रिश्ता ले कर आएंगे तो मेरे घर वाले मना नहीं करेंगे.’’

‘‘प्यार की पहल मैं ने की तो अब शादी की भी पहल मुझे ही करनी पड़ेगी.’’ श्रीन ने हंसते हुए कहा, ‘‘खैर, तुम्हारे लिए मैं यह भी करूंगा.’’

‘‘मुझ पर अधिकार पाना है तो तुम्हें यह भी करना होगा.’’

‘‘ठीक है, मैं जल्दी ही कुछ करता हूं, क्योंकि अब तुम से दूरी सहन नहीं हो रही है.’’ श्रीन ने कहा.

श्रीन ने एनी से वादा ही नहीं किया, बल्कि उस पर अमल भी किया. उस ने अपने घर वालों को अपने प्यार के बारे में बता कर एनी के घर जा कर रिश्ता मांगने के लिए कहा. उस के घर वालों को इस बात पर कोई ऐतराज नहीं था. वे बेटे की खुशी में खुश थे.

उन्हें सब से बड़ा संतोष इस बात का था कि एनी भारतीय मूल की थी. वह उन के परिवार में आराम से एडजस्ट हो जाएगी. लेकिन एनी के घर वालों से मिलने से पहले उन्होंने एनी और उस के घर वालों के बारे में पता करना जरूरी समझा.

एनी का जन्म स्वीडन के मेरिस्टाड शहर में हुआ था. इस के पहले उस का परिवार युगांडा में रहता था. लेकिन जब युगांडा में ईदी अमीन का शासन हुआ तो उस ने एशियाई लोगों को युगांडा छोड़ने पर मजबूर कर दिया था. सभी को स्वीडन के मेरिस्टाड शहर भेज दिया गया था. तभी एनी का परिवार भी वहां आ गया था. यहीं एनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर के नौकरी कर रही थी.

सारी जानकारी जुटा कर श्रीन के घर वाले एनी के घर रिश्ता मांगने पहुंचे तो उस के घर वालों को जैसे विश्वास ही नहीं हुआ. रिश्ता खुद उन के घर चल कर आया था. वे लोग भी उन्हीं की तरह भारतीय मूल के थे. आर्थिक स्थिति भी बेहतर थी.

लड़का सुंदर और सुशील होने के साथ व्यवसाय में लगा था. कोई ऐब भी नहीं था. इस सब के अलावा सब से बड़ी बात यह थी कि लड़का और लड़की एकदूसरे को प्यार करते थे. इसलिए न करने का सवाल ही नहीं था.

दोनों परिवारों की सहमति पर शादी तय हो गई. इस के बाद पेरिस के होटल रिट्ज में रिंग सेरेमनी हो गई. चूंकि दोनों परिवार भारतीय मूल के थे, उन के अधिकतर रिश्तेदार भारत में रहते थे, इसलिए तय हुआ कि शादी वे भारत में करेंगे. शादी का दिन और जगह भी तय कर ली गई.

29 अक्तूबर, 2010 को बाहरी मुंबई के लेक पोवई रिसौर्ट में हिंदू रीतिरिवाजों से श्रीन और एनी शादी के पवित्र बंधन में बंध गए. श्रीन के अरमानों की डोली में बैठ कर एनी लंदन आ गई. शादी की खुशी में यहां भी दोस्तों और परिचितों के लिए एक पार्टी आयोजित की गई.

एनी हिंडोचा अब एनी देवानी बन गई. एनी हनीमून मनाने साउथ अफ्रीका जाना चाहती थी, जबकि श्रीन पश्चिम के किसी देश जाना चाहता था. कई दिनों तक दोनों में इसी विषय पर चर्चा होती रही. लेकिन दोनों ही अपनी जिद पर अड़े थे.

एनी साउथ अफ्रीका घूमना चाहती थी, जबकि श्रीन इस के लिए तैयार नहीं था. वह यह जरूर कह रहा था कि फिर कभी वह उसे साउथ अफ्रीका घुमा लाएगा. लेकिन अचानक श्रीन का मन बदल गया. उस ने साउथ अफ्रीका जाने के लिए हां कर करते हुए कहा, ‘‘मैं तुम्हें इतना प्यार करता हूं कि इस छोटी सी बात के लिए तुम्हें निराश नहीं कर सकता. और फिर फर्क ही क्या पड़ता है, हनीमून पश्चिम के किसी देश में मनाया जाए या साउथ अफ्रीका में.’’

नवंबर के दूसरे सप्ताह में हनीमून पर जाने की तैयारी हो गई. 11 नवंबर को दोनों साउथ अफ्रीका के केपटाउन पहुंच गए. कमरे वगैरह पहले से ही बुक थे, इसलिए उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई. अगले दिन सुबह तैयार हो कर श्रीन कहीं जाने लगा तो एनी ने कहा, ‘‘अकेलेअकेले कहां जा रहे हो?’’

‘‘पता करने जा रहा हूं कि यहां कौनकौन सी जगह घूमने लायक है. फिर टैक्सी का भी तो इंतजाम करना होगा. मैं सब पता कर के कुछ देर में आता हूं.’’ कह कर श्रीन चला गया. श्रीन ने लौट कर बताया कि कल सुबह ही टैक्सी आ जाएगी. टैक्सी ड्राइवर अच्छा मिल गया है. वही गाइड का भी काम करेगा. उसे अंगरेजी अच्छी आती है.

13 नवंबर, 2010 को 10 बजे के आसपास श्रीन एनी को ले कर होटल से निकला. टैक्सी गेट पर खड़ी थी. टैक्सी ड्राइवर था जोला टोंगो. वह वहीं का रहने वाला था.

पूरा दिन टोंगो श्रीन और एनी को घुमाता रहा. रात का खाना भी उन लोगों ने बाहर ही खाया. वे काफी दूर निकल गए थे. लौटते समय रात 11 बजे के करीब उन की टैक्सी केपटाउन से 5-6 किलोमीटर दूर टाउनशिप गुगुलेथू से गुजर रही थी तो 2 लोगों ने अचानक सामने आ कर टैक्सी रोक ली.

एनी ने जोला टोंगो से कहा भी कि इतनी रात को गाड़ी रोकना ठीक नहीं है. पता नहीं ये लोग कौन हैं. लेकिन उस ने उस की बात नहीं मानी और गाड़ी रोक दी.

टोंगो ने शीशा खोल कर जानना चाहा कि उन्होंने गाड़ी क्यों रुकवाई है तो दोनों में से एक व्यक्ति ने ड्राइवर टोंगो की कनपटी से रिवाल्वर सटा कर टैक्सी से नीचे आने को कहा. टोंगो चुपचाप नीचे आ गया. पीछे की सीट पर बैठे एनी और श्रीन हैरानपरेशान थे.  डर के मारे एनी की तो आवाज ही नहीं निकल रही थी.

टोंगो के उतरने के बाद रिवाल्वर सटाने वाला आदमी ड्राइविंग सीट पर बैठ गया तो उस का साथी उस की बगल वाली सीट पर बैठ गया. दोनों ने अपनी भाषा में कुछ बात की और फिर ड्राइवर की बगल वाली सीट पर बैठे व्यक्ति ने एनी और श्रीन की ओर रिवाल्वर तान कर कहा, ‘‘चुपचाप बैठे रहना. अगर शोर मचाया तो गोली मार दूंगा.’’

एनी एवं श्रीन और ज्यादा डर गए. ड्राइवर जोला टोंगो को वहीं छोड़ कर टैक्सी चल पड़ी. टैक्सी हरारे पहुंची तो श्रीन को सड़क पर फेंक कर टैक्सी फिर आगे बढ़ गई. श्रीन किसी तरह नजदीकी पुलिस स्टेशन पर पहुंचा और एनी के अपहरण की सूचना दी.

पुलिस तुरंत हरकत में आ गई. 14 नवंबर, 2010 की सुबह टैक्सी वेस्ट लिंगेलिथ में लावारिस हालत में खड़ी मिली. टैक्सी की पिछली सीट पर एनी देवानी की लाश पड़ी थी. उस की गरदन में गोली मारी गई थी. सीने और जांघों पर खरोंच के निशान थे. ऊपर का कपड़ा कमर तक उठा हुआ था और अंडरवियर घुटनों के नीचे तक खिसकी हुई थी.

वेस्टर्न केप पुलिस ने अपहरण, डकैती और हत्या का मामला दर्ज कर लिया. मामला विदेशी पर्यटक से जुड़ा था, इसलिए वेस्टर्न के विनिस्टर एल्बर्ट फ्रिटज ने लोगों से अपील की कि अगर कोई इस हत्या के बारे में कोई जानकारी दे सकता है तो आगे आ कर पुलिस की मदद करे. पुलिस को भी त्वरित काररवाई के आदेश दिए गए थे.

मामला काफी संगीन था. पुलिस ने अपनी पूरी ताकत लगा दी. परिणामस्वरूप तीसरे दिन 16 नवंबर को पुलिस ने एक आदमी को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने खुद को निर्दोष बताते हुए 26 वर्षीय जोलाइल मंगेनी पर शक जाहिर किया. इस के बाद उस की निशानदेही पर 17 नवंबर को जोलाइल मंगेनी को गिरफ्तार कर लिया गया.

जोलाइल मंगेनी से पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उसी ने गोली चला कर एनी देवानी की हत्या की थी.

इस वारदात में टैक्सी ड्राइवर जोला टोंगो और मजिवामाडोडा क्वेब भी शामिल था. जोला टोंगो के कहने पर ही उस ने और मजिवामाडोडा क्वेब ने एनी की हत्या की थी. इस के लिए उन्हें मोटी रकम दी गई थी.

पुलिस ने 18 नवंबर, 2010 को जोलाइल मंगेनी को केपटाउन की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. इस के बाद पुलिस ने 20 नवंबर को मजिवामाडोडा क्वेब और जोला टोंगो को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में इन दोनों ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

21 नवंबर को एनी देवानी का शव लंदन पहुंचा, जहां उस का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

22 नवंबर को जोला टोंगो और मजिवामाडोडा को अदालत में पेश किया गया तो अदालत में टोंगो ने जो बयान दिया, वह चौंकाने वाला था. उस ने बताया कि एनी की हत्या की साजिश किसी और ने नहीं, उस के पति श्रीन देवानी ने रची थी. उसी ने पैसे दे कर एनी की हत्या कराई थी. इस हत्या के लिए उस ने 15 हजार रेंड दिए थे.

जोला टोंगो ने ही पैसे दे कर मजिवामाडोडा क्वेब और जोलाइल मंगेनी से एनी की हत्या कराई थी.

जोलाइल मंगेनी ने गोली मार कर एनी की हत्या की थी तो मजिवामाडोडा क्वेब ने एनी के शरीर से सारे गहने उतारे थे, जिन में व्हाइट गोल्ड की चेन, डायमंड ब्रेसलेट और एक जियार्जियो अरमानी की घड़ी थी.

एनी की हत्या उस के पति श्रीन देवानी ने कराई थी, यह खुलासा होने पर उस के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया. श्रीन लंदन में था, इसलिए इस बात की जानकारी वहां की पुलिस को देने के साथ जरूरी दस्तावेज भी भिजवा दिए गए थे.

लंदन पुलिस ने श्रीन देवानी को गिरफ्तार कर लिया. जबकि उस का कहना था कि उसी की नवविवाहिता पत्नी की हत्या हुई है और उसे ही दोषी ठहराया जा रहा है. वह उसे दिल से प्यार करता था. उसी के कहने पर वह उसे साउथ अफ्रीका ले गया था.

श्रीन के घर वाले साउथ अफ्रीकी पुलिस पर सवाल उठा रहे थे कि वहां सुरक्षा के ठीक इंतजाम नहीं हैं. वहां के लोगों का ध्यान हटाने के लिए पुलिस ने ऐसा किया है, ताकि कोई वहां के सुरक्षा इंतजामों पर सवाल न खड़ा कर सके.

एनी की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार होने के बाद श्रीन स्टे्रस और्डर की बीमारी से ग्रस्त हो गया. उस की मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी.

4 मई, 2011 को अदालत में श्रीन देवानी के मामले की एक्स्ट्रा एडीशन सुनवाई हुई. 5 मई, 2011 को बेलमार्श के मजिस्ट्रेटों ने उसे सिस्सी क्राइम कह कर पुकारा और 18 जुलाई, 2011 तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी.

18 जुलाई को श्रीन देवानी को जज रिडल की अदालत में पेश किया गया. साइकियाट्रिक एक्सपर्ट ने अदालत को बताया कि अगर श्रीन देवानी को लगता है कि उसे परेशान किया जा रहा है तो वह स्वयं को खत्म कर सकता है. इसलिए उसे जेल न भेजा जाए. बहरहाल अदालत ने जमानत की सुनवाई के लिए अगली तारीख दे दी.

अगली तारीख यानी 10 अगस्त, 2011 को प्राप्त दस्तावेजों से अदालत ने मान लिया कि श्रीन देवानी ने ही अपनी पत्नी एनी देवानी की सुपारी दे कर हत्या कराई थी.

21 सितंबर, 2011 को श्रीन देवानी की जमानत की अरजी पर सुनवाई थी. इस सुनवाई पर साउथ अफ्रीका पुलिस ने बताया कि पकड़े गए तीनों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि श्रीन देवानी ने ही जोला टोंगो के साथ साजिश रच कर एनी की हत्या की सुपारी दी थी. इसलिए उसे जमानत पर छोड़ना ठीक नहीं है.

दूसरी ओर 26 सितंबर 2011 को साउथ अफ्रीका के होम सेके्रटरी येरेसा ने श्रीन देवानी की अफ्रीका में एक्स्ट्राडिशन सुनवाई के और्डर पर हस्ताक्षर कर दिए थे, जिस से श्रीन देवानी के प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया था.

लेकिन 30 सितंबर को श्रीन देवानी के वकीलों ने उस के मानसिक रूप से बीमार होने का हवाला दे कर एक अपील दायर कर दी थी. 13 दिसंबर, 2011 को इस पर बहस के दौरान श्रीन देवानी के वकीलों ने कहा कि वह अपने बचाव के लिए मानसिक बीमारी का बहाना नहीं बना रहा है. वह वाकई में बीमार है. ऐसी स्थिति में उस के एक्स्ट्राडिशन और्डर रद्द कर दिए जाने चाहिए.

14 दिसंबर, 2011 को अदालत ने साउथ अफ्रीका पुलिस से पूछा कि श्रीन देवानी की सुनवाई साउथ अफ्रीका में ठीक से हो सकती है या नहीं? 16 दिसंबर को अदालत ने आगे की कार्यवाही के लिए 31 जुलाई, 2012 की तारीख तय कर दी. इस तारीख को अदालत ने प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर श्रीन देवानी के प्रत्यर्पण पर अस्थाई रोक लगा दी. दूसरी ओर साउथ अफ्रीका की अदालत ने 8 अगस्त, 2012 को अभियुक्त मजिवामाडोडा क्वेब को एनी देवानी की हत्या के मामले में दोषी मानते हुए 25 साल के कैद की सजा सुनाई.

श्रीन देवानी ने अदालत से प्रार्थना की थी कि उस के मानसिक रूप से बीमार रहने तक उस के साथ नरमी बरती जाए. डाक्टरों के अनुसार 32 वर्षीय श्रीन देवानी पोस्ट ट्रौमेटिक स्ट्रेस डिसौर्डर और डिप्रेशन का शिकार था. उस के साइकियाट्रिस्ट डा. पौल केट्रेल ने अदालत में कहा था कि उसे जमानत दे कर दिमागी तौर पर राहत दी जानी चाहिए. उसे जिस पुनर्वास वार्ड में रखा गया है, वहां उस का फ्लाइट रिस्न बढ़ सकता है.

जोलाइल मंगेनी ने कोर्ट में स्वीकार कर लिया था कि उसी ने एनी देवानी की गोली मार कर हत्या की थी, इसलिए उसे हत्या का दोषी करार देते हुए 5 दिसंबर, 2012 को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई. उसी के साथ टैक्सी ड्राइवर जोला टोंगो को साजिश रचने के आरोप में 18 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी.

जुलाई, 2013 को अदालत ने कहा था कि अगर श्रीन देवानी की दिमागी बीमारी ठीक हो गई है तो अदालत में पेश किया जाए. लेकिन श्रीन देवानी का मेंटल हेल्थ अस्पताल में इलाज चल रहा था, इसलिए उसे अदालत में पेशी से छूट मिल गई. फिर भी मुख्य मजिस्ट्रेट हावर्ड रिडल ने कहा कि उसे इसी महीने कोर्ट में पेश होना होगा.

तमाम सुनवाई के बाद आखिर 24 जुलाई, 2013 को अदालत ने आदेश दिया कि श्रीन देवानी को अपनी पत्नी एनी की हत्या के मामले में साउथ अफ्रीका की अदालत में सुनवाई के लिए पेश होना होगा. अदालत का कहना था कि श्रीन देवानी काफी समय से अपना इलाज करा रहा है. अब तक वह ठीक हो गया होगा, इसलिए अब इस मामले में देर करना ठीक नहीं होगा.

श्रीन देवानी बीमारी की वजह से भले ही  साउथ अफ्रीका की अदालत में पेश नहीं हुआ था, लेकिन अदालत ने प्राप्त सुबूतों के आधार पर उसे एनी देवानी की हत्या की सुपारी देने और साजिश रचने का दोषी करार दे दिया था. अदालत का मानना था कि अब वह स्वस्थ हो चुका है, इसलिए यहां ला कर सजा सुनाने की कार्यवाही की जानी चाहिए.

अदालत श्रीन देवानी को क्या सजा देती है, यह तो उस के अदालत में पेश होने के बाद ही पता चलेगा. मजे की बात यह है कि हत्या के इस मामले में दोषियों को तो सजा मिल गई, लेकिन अभी तक यह पता नहीं चला है कि जिस पत्नी को श्रीन जान से ज्यादा प्यार करता था, उसी की जान लेने के लिए इतनी बड़ी साजिश क्यों रची?

श्रीन देवानी के कुछ दोस्तों का कहना है कि शादी के कुछ दिनों बाद ही वह एनी को ले कर अपसेट रहने लगा था. उस ने एनी के मोबाइल पर उस के किसी पुरुष मित्र का मैसेज पढ़ लिया था. शायद इसी वजह से वह परेशान था. चरित्र पर संदेह होने की वजह से ही वहां ले जा कर उस ने उस की हत्या करा दी थी.

बात कुछ भी हो, अब तो यह साबित ही हो चुका है कि एनी की हत्या उसी ने कराई थी. इसलिए अब वह ज्यादा दिनों तक सजा से बच नहीं पाएगा. इसी साल अप्रैल महीने में श्रीन का प्रत्यर्पण हो चुका है. अब इस मामले की सुनवाई साउथ अफ्रीका की अदालत में होगी. Honeymoon Murder

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

— मनोहर कहानियां, 2014 में प्रकाशित

Rajasthan Crime Story: पति से प्यारा प्रेमी

Rajasthan Crime Story. कमला ने सोचा था कि पति की हत्या करवा कर वह प्रेमी के साथ ‘नाते’ चली जाएगी और आराम की जिंदगी गुजारेगी. पर पुलिस ने उन्हें पकड़ कर उन के सपनों पर पानी फेर दिया.

24 जून की सुबह राजस्थान के बाड़मेर जिले के थाना समदड़ी के रहने वाले बेलाराम पटेल ने जिला पाली के थाना दोहट जा कर थानाप्रभारी सबइंसपेक्टर भंवर सिंह पोकरणा को बताया कि उस के भाई छोगाराम की लाश जाल के पेड़ से उसी की धोती से लटक रही है. उसे शक है कि उस की ससुराल वालों ने उसे मार कर लटका दिया है.

इस की वजह उस ने यह बताई थी कि पिछले 6 महीने से छोगाराम का ससुराल वालों से विवाद चल रहा था. उसे उस की पत्नी कमला ने जालौर के भौंरड़ा के रहने वाले हीराराम के साथ मिल कर मारा होगा, क्योंकि उन दोनों के बीच मधुर संबंध थे.

बेलाराम के बताए अनुसार, भंवर सिंह ने छोगाराम की हत्या का मुकदमा दर्ज करा कर इस घटना की सूचना एसपी परिश देशमुख, डीएसपी राजेश कुमार माथुर तथा सीओ को दे दी और खुद पुलिस बल ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. लाश और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद उन्होंने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी थी.

चूंकि बेलाराम ने मृतक की पत्नी कमला और उस के प्रेमी हीराराम पर संदेह व्यक्त किया था, इसलिए भंवर सिंह ने दोनों को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ शुरू की. पहले तो दोनों उन्हें गुमराह करते रहे, पर भंवर सिंह के आगे उन की एक न चली और उन्हें सच बताना ही पड़ा.

कमला ने पुलिस को जो बताया था, उस के अनुसार, उस ने प्रेमी हीराराम के साथ मिल कर 30 हजार रुपए में सुपारी दे कर प्रेमी से मिलने में बाधा बन रहे पति को मरवा कर आत्महत्या साबित करने के लिए उसी की धोती में उस की लाश को पेड़ से लटकवा दिया था.

कमला ने पति की हत्या की जो कहानी बताई थी, वह इस प्रकार थी—

जिस समय कमला की शादी छोगाराम से हुई थी, वह 15-16 साल की थी, जबकि उस का पति छोगाराम 37-38 साल का था. वह जहां खिलती कली थी, वहीं उस का पति कुम्हलाया फूल था. वह जवानी की कगार पर था तो कमला जवानी के बोझ से लदी ऐसी औरत थी, जो अच्छोंअच्छों को जवानी के जोश में बहा ले जाए. छोगाराम में इतना बल नहीं था कि वह पत्नी को निचोड़ कर रख देता.

नईनवेली पत्नी पा कर छोगाराम उसे संतुष्ट करने की कोशिश तो करता रहा, मगर अकसर वह बीच सफर में ही हथियार डाल देता. लेकिन यह भी सच है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती. छोगाराम का जीवन सफर कोशिश की ही बदौलत किसी तरह कटता रहा.

कमला को ससुराल में कोई दुख नहीं था. पागलों की तरह प्यार करने वाला पति था, इसलिए उस ने उम्र के अंतर पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. इसे नियति का खेल मान कर उस ने गृहस्थी में मन लगा लिया. छोगाराम खेती करता था, उसी से परिवार का गुजरबसर होता था.

छोगाराम से कमला को 2 बेटे हुए, जिन में बड़ा बेटा इस समय 13 साल का है तो छोटा 11 साल का. बेटों के जन्म के बाद कमला के रूपसौंदर्य में और निखार आ गया. लेकिन वह जहां जवान हुई, वहीं अधेड़ छोगाराम बूढ़ा हो गया. अब वह पत्नी को शारीरिक सुख देने में अक्षम हो गया.

इस की एक वजह यह भी थी कि दिन भर खेतीबाड़ी के कामों में लगे रहने की वजह से वह इतना थक जाता था कि घर आ कर उसे आराम करने के अलावा उसे दूसरा कुछ नहीं सुहाता था. जबकि कमला रातों में पति का साथ चाहती थी.

पति का साथ न मिलने की वजह से कमला को अपनी इच्छा मारनी पड़ती. इस का नतीजा यह निकला कि वह चिड़चिड़ी हो गई. बातबात में सब से लड़ने लगी, हर काम में मीनमेख निकालने लगी. छोगाराम सब जानता था, लेकिन करता भी क्या? उस का शरीर अब साथ नहीं देता था.

कमला ने पति की मजबूरी को समझ कर कुछ दिनों तक तो इच्छा को दबाए रखा, लेकिन जब जवानी ने उफान मारा तो मन बेकाबू होने लगा. वह किसी गैरमर्द से देह की आग बुझाने के बारे में सोचने लगी. गैरमर्द का खयाल आते ही कमला पति से लड़झगड़ कर दोनों बेटों को ले कर मायके चली आई.

मायके में उस ने भाइयों को बताया कि छोगाराम उसे बातबात पर दुत्कारता था और जब मन होता था पीट भी देता था. कमला की बात पर विश्वास कर के उस के भाई छोगाराम से नाराज हो गए. यही वजह थी कि जब छोगाराम ने सालों से पत्नी और बेटों को भेजने को कहा तो उन्होंने कमला को भेजने के बजाय उसे ही ससुराल में रहने की सलाह दी.

ससुराल में रहना छोगाराम को अच्छा तो नहीं लगता था, लेकिन पत्नी और बेटों के मोह में वह ससुराल जा कर रहने लगा. ससुराल में रहने से छोगाराम की वहां कोई इज्जत नहीं रह गई थी. उस ने इस बारे में पत्नी से शिकायत की तो उस की शिकायत में नमकमिर्च लगा कर कमला ने यह बात भाइयों को बता दी.

कमला चाहती थी कि छोगाराम उस के साथ न रहे, क्योंकि उस के साथ रहने से उसे गैरमर्दों के साथ गुलछर्रे उड़ाने में परेशानी हो सकती थी. इसलिए वह भाइयों के कान भरने लगी. आखिर एक दिन उस के भाइयों ने छोगाराम को ठोंकपीट कर अपने यहां से भगा दिया. पिटपिटा कर छोगाराम अपने गांव वापस आ गया.

कमला की बहन की शादी भौंरड़ा में हुई थी. उस का बहन के यहां खूब आनाजाना था. इस की वजह यह थी कि उस के भाइयों ने वहां जमीन खरीद रखी थी, जिस की देखभाल के लिए वह वहां आतीजाती रहती थी. वहीं रहते हुए कमला के नयन बहन के जेठ हीराराम से लड़ गए. फिर तो जल्दी ही दोनों में शारीरिक संबंध भी बन गए.

हीराराम भी शादीशुदा ही नहीं, 2 बेटों का बाप था. लेकिन उस की पत्नी बीमार रहती थी, इसलिए उसे पत्नी से शारीरिक सुख नहीं मिल पाता था. दूसरी ओर कमला भी पति से अलग रह रही थी. एक तरह से दोनों ही जरूरतमंद थे. इसी का फायदा दोनों ने उठाया. दोनों ने मर्यादा ताक पर रख कर अवैध रिश्ता कायम कर लिया था.

दोनों को जब भी मौका मिलता, तन की प्यास बुझा लेते. कमला ने पति को भगा ही दिया था, इसलिए वह आजाद थी. वह प्रेमी की बांहों में मदमस्त हो कर झूलने लगी. हीराराम को बीमार बीवी से जो सुख नहीं मिल रहा था, वह कमला से मिलने लगा था. इसीलिए दोनों ने ताउम्र साथ रहने का फैसला कर लिया.

लेकिन इस में परेशानी यह थी कि दोनों ही शादीशुदा और बच्चों वाले थे. ऐसे में उन के साथ रहने में परेशानी हो सकती थी. अगर कमला विधवा हो जाती तो राजस्थान में ‘नाता प्रथा’ के अनुसार वह हीराराम की पत्नी बन सकती थी. जबकि कमला का पति छोगाराम बूढ़ा जरूर था, लेकिन जिंदा था और शरीर से ठीकठाक था. इसलिए उस के जल्दी मरने की उम्मीद भी नहीं थी.

यही सोच कर एक दिन कमला ने कहा, ‘‘यार हीरा, मेरा पति जल्दी मेरगा तो है नहीं, आखिर मैं कब तक तुम्हारी पत्नी बनने का इंतजार करती रहूंगी. लगता है, उस के मरने के इंतजार में ही मैं बूढ़ी हो जाऊंगी.’’

‘‘तो क्या किया जा सकता है कमला? अगर तुम्हारे पास कोई उपाय हो तो बताओ, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.’’ हीरा ने कहा.

‘‘छोगाराम ऐसे नहीं मरेगा, उसे योजना बना कर मारना पड़ेगा. उस के बाद ही हम एक हो पाएंगे.’’

‘‘लेकिन हत्या करने के बाद पुलिस हमें पकड़ लेगी, तब सारी उम्र हमें जेल में गुजारनी पड़ेगी, इसलिए यह उपाय ठीक नहीं है. हमें कोई दूसरा उपाय सोचना होगा.’’ हीराराम ने कहा.

इस के बाद कमला ने हीराराम के साथ मिल कर ऐसी योजना बनाई, जिस में छोगाराम को हर हाल में मरना ही था और उन दोनों का कुछ होना भी नहीं था.

कमला ने सोचा था कि योजना सफल होने पर वह हीराराम के नाते चली जाएगी और दोनों आराम से रहेंगे. प्रेम में अंधे हीराराम ने गटूनाथ से बात की. वह हीराराम की जमीन पर खेती करता था. हीराराम और कमला ने उसे 30 हजार रुपए का लालच दिया तो वह उन की योजना में शामिल हो गया. उस ने मदद के लिए अपने परिचित जबरनाथ को उस योजना में शामिल कर लिया.

इस के बाद योजना के मुताबिक गटूनाथ और जबरनाथ ने कमला द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर फोन कर के छोगाराम से कहा कि वे दोनों कमला को उस के साथ भिजवा सकते हैं.

छोगाराम बीवी और बच्चों को लाना चाहता था, क्योंकि पत्नी और बच्चों के आने से घर का ही नहीं, उस की जिंदगी का भी सूनापन दूर हो जाता. खानापानी भी समय से मिलने लगता. इसीलिए जब गटूनाथ और जबरनाथ ने कमला को उस के साथ भिजवाने का आश्वासन दिया तो किसी को कुछ बताए बगैर वह गटूनाथ और जबरनाथ के साथ कमला को लाने के लिए उन की मोटरसाइकिल पर बैठ कर चल पड़ा.

दोनों छोगाराम को मोटरसाइकिल पर लिए इधरउधर घुमाते रहे, ताकि अंधेरा हो जाए. क्योंकि अंधेरे में उन का काम आसान हो जाता. अंधेरा होने पर गांव समुजा की सीमा पर सुनसान जगह देख कर उन्होंने मोटरसाइकिल रोक दी. उस समय रात के 8 बज रहे थे. दूरदूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था.

अच्छा मौका देख कर दोनों ने छोगाराम को दबोच लिया और गला घोंट कर हत्या कर दी. इस के बाद छोगाराम की धोती उतार कर गले में फंदा लगा कर उसे जाल के पेड़ से लटका दिया, ताकि लोगों को लगे कि छोगाराम ने आत्महत्या की है.

काम हो जाने के बाद उन्होंने फोन कर के हीराराम को बता दिया. इस के बाद हीराराम ने यह बात कमला को बता दी. हीराराम और कमला के बयान के आधार पर पुलिस ने गटूनाथ और उस के साथी जबरनाथ को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने चारों अभियुक्तों कमला, हीराराम, गटूनाथ और जबरनाथ को 29 जून को कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया.

कमला और हीराराम ने प्रेम में रोड़ा बन रहे छोगाराम को रास्ते से हटाने का षड़यंत्र रच कर सोचा था कि ‘नाता प्रथा’ के तहत एकदूजे के हमसफर बन जाएंगे, लेकिन पुलिस ने उन के मंसूबों पर पानी फेर कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.

पति की हत्या करवा कर कमला जेल चली गई है, अब उस के दोनों बेटे लावारिस हो गए हैं. प्रेम में पड़ कर हीराराम ने भी अपना घर बरबाद कर लिया. वह जेल में है, उस की बीमार पत्नी मायके चली गई है, उस के बेटे भी लावारिस जैसे हो गए हैं. ऐसे कामों में ऐसा ही होता है.  Rajasthan Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Stories : 20 साल में एक-एक कर 5 कत्ल करने वाला कातिल

Crime Stories : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर से सटा गांव है बसंतपुर सैंथली. यहां भी तेजी से शहरीकरण के चलते जमीनों के दाम आसमान छूने लगे हैं. बिल्डर आते हैं, किसानों को लुभाते हैं और उस भाव में खेतीकिसानी की जमीनों के सौदे करते हैं, जिस की उम्मीद किसानों ने कभी सपने में भी नहीं की होती. एक बीघा के 50 लाख से ले कर एक करोड़ रुपए सुन कर किसानों का मुंह खुला का खुला रह जाता है कि इतना तो वे सौ साल खेती कर के भी नहीं कमा पाएंगे. और वैसे भी आजकल खेतीकिसानी खासतौर से छोटी जोत के किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित होने लगी है.

लिहाजा वे एकमुश्त मिलने वाले मुंहमांगे दाम का लालच छोड़ नहीं पाते और जमीन बेच कर पास के किसी कसबे में बस जाते हैं. इसी गांव का एक ऐसा ही किसान है 48 वर्षीय लीलू त्यागी, जिस के हिस्से में पुश्तैनी 15 बीघा जमीन में से 5 बीघा जमीन आई थी. बाकी 10 बीघा 2 बड़े भाइयों सुधीर त्यागी और ब्रजेश त्यागी के हिस्से में चली गई थी. जमीन बंटबारे के बाद तीनों भाई अपनीअपनी घरगृहस्थी देखने लगे और जैसे भी हो खींचतान कर अपने घर चलाते बच्चों की परवरिश करने लगे. बंटवारे के समय लीलू की शादी नहीं हुई थी, लिहाजा उस पर घरगृहस्थी के खर्चों का भार कम था.

गांव के संयुक्त परिवारों में जैसा कि आमतौर पर होता है, दुनियादारी और रिश्तेदारी निभाने की जिम्मेदारी बड़ों पर होती है, इसलिए भी लीलू बेफिक्र रहता था और मनमरजी से जिंदगी जीता था. साल 2001 का वह दिन त्यागी परिवार पर कहर बन कर टूटा, जब सुधीर अचानक लापता हो गए. उन्हें बहुत ढूंढा गया पर पता नहीं चला कि उन्हें जमीन निगल गई या आसमान खा गया. कुछ दिनों की खोजबीन के बाद त्यागी परिवार ने तय किया कि उन की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करा दी जाए. लेकिन इस पर लीलू बड़ेबूढ़ों के से अंदाज में बोला, ‘‘इस से क्या होगा. उलटे हम एक नई झंझट में और फंस जाएंगे.

पुलिस तरहतरह के सवाल कर हमें परेशान करेगी. हजार तरह की बातें समाज और रिश्तेदारी में होंगी. उस से तो अच्छा है कि उन का इंतजार किया जाए. हालांकि वह किसी बात को ले कर गुस्से में थे और मुझ से यह कह कर गए थे कि अब कभी नहीं आऊंगा.’’

परिवार वालों को लीलू की सलाह में दम लगा. वैसे भी अगर सुधीर के साथ कोई अनहोनी या हादसा हुआ होता तो उन की लाश या खबर मिल जानी चाहिए थी और वाकई पुलिस क्या कर लेती. वह कोई दूध पीते बच्चे तो थे नहीं, जो घर का रास्ता भूल जाएं.  यह सोच कर सभी ने मामला भगवान भरोसे छोड़ दिया.  उन्हें चिंता थी तो बस उन की पत्नी अनीता और 2 नन्हीं बेटियों पायल और पारुल की, जिन के सामने पहाड़ सी जिंदगी पड़ी थी. यह परेशानी भी वक्त रहते दूर हो गई, जब गांव में यह चर्चा शुरू हुई कि अब सुधीर के आने की तो कोई उम्मीद रही नहीं, अनीता कब तक उस की राह ताकती रहेगी. इसलिए अगर लीलू उस से शादी कर ले तो उन्हें सहारा और बेटियों को पिता मिल जाएगा. घर की खेती भी घर में रहेगी.

गांव और रिश्ते के बड़ेबूढ़ों का सोचना ऐसे मामले में बहुत व्यावहारिक यह रहता है कि जवान औरत कब तक बिना मर्द के रहेगी. आज नहीं तो कल उस का बहकना तय है इसलिए बेहतर है कि अगर देवरभाभी दोनों राजी हों तो उन की शादी कर दी जाए. बात निकली तो जल्द उस पर अमल भी हो गया. एक सादे समारोह में लीलू और अनीता की शादी हो गई जो कोई नई बात भी नहीं थी. क्योंकि गांवों में ऐसी शादियां होना आम बात है, जहां देवर ने विधवा भाभी से शादी की हो. इतिहास भी ऐसी शादियों से भरा पड़ा है. देखते ही देखते अपने देवर की पत्नी बन अनीता विधवा से फिर सुहागन हो गई और वाकई में पारुल और पायल को चाचा के रूप में पिता मिल गया.

इस के बाद तो बड़े भाई सुधीर की जमीन भी लीलू की हो गई. जल्द ही लीलू और अनीता के यहां बेटा पैदा हुआ, जिस का नाम विभोर रखा गया. घर में सब उसे प्यार से शैंकी कहते थे. कभीकभार जरूर गांव के कुछ लोगों में यह चर्चा हो जाती थी कि चलो जो हुआ सो अच्छा  हुआ, लेकिन कभी सुधीर अगर वापस आ गया तो क्या होगा. मुमकिन है जी उचट जाने से वह साधुसंन्यासियों की टोली में शामिल हो गया हो और वहां से भी जी उचटने के कारण कभी घर आ जाए. फिर अनीता किस की पत्नी कहलाएगी? सवाल दिलचस्प था, जिस का मुकम्मल जबाब किसी के पास नहीं था. पर एक शख्स था जो बेहतर जानता था कि सुधीर अब कभी वापस नहीं आएगा. वह शख्स था लीलू.

5 साल गुजर गए. अब सब कुछ सामान्य हो गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद ही साल 2006 में पारुल की मृत्यु हो गई. घर और गांव वाले कुछ सोचसमझ पाते, इस के पहले ही लीलू ने कहा कि उसे किसी जहरीले कीड़े ने काट लिया था और आननफानन में उस का अंतिम संस्कार भी कर दिया. गांवों में ऐसे यानी सांप वगैरह के काटे जाने के हादसे भी आम होते हैं, इसलिए कोई यह नहीं सोच पाया कि यह कोई सामान्य मौत नहीं, बल्कि सोचसमझ कर की गई हत्या है. और आगे भी त्यागी परिवार में ऐसी हत्याएं होती रहेंगी, जो सामान्य या हादसे में हुई मौत लगेंगी और हैरानी की बात यह भी रहेगी किसी भी मामले में न तो लाश मिलेगी और न ही किसी थाने में रिपोर्ट दर्ज होगी.

इस के 3 साल बाद ही पायल भी रहस्यमय ढंग से गायब हो गई तो मानने वाले इसे होनी मानते रहे. लेकिन अनीता अपनी दोनों बेटियों की मौत का सदमा झेल नहीं पाई और बीमार रहने लगी, जिस का इलाज भी लीलू ने कराया. अब सुधीर की जमीन का कोई वारिस नहीं बचा था, सिवाय अनीता के जो अब हर तरह से लीलू और बड़े होते शैंकी की मोहताज रहने लगी थी. लीलू की तो जान ही अपने बेटे में बसती थी और वह उसे चाहता भी बहुत था. लेकिन यह नहीं देख पा रहा था कि उस के लाड़प्यार के चलते शैंकी गलत राह पर निकल पड़ा है. और देख भी कैसे पाता क्योंकि वह खुद ही एक ऐसे रास्ते पर चल रहा था, जिसे कलयुग का महाभारत कहा जा सकता है और वह उस का धृतराष्ट्र है, जो पुत्र मोह में अंधा हो गया था.

इसी अंधेपन का नतीजा था कि बीती 9  जुलाई को लीलू गाजियाबाद के सिहानी गेट थाने में पुलिस वालों के सामने खड़ा गिड़गिड़ा रहा था कि शैंकी मेरा इकलौता बेटा है, आप जितने चाहो पैसे ले लो लेकिन उसे छोड़ दो. बेटा छूट जाए, इस के लिए वह 10 लाख रुपए देने को तैयार था. लेकिन जुर्म की दुनिया में दाखिल हो चुके बिगड़ैल शैंकी ने जुर्म भी मामूली नहीं किया था, लिहाजा उस का यू छूटना तो नामुमकिन बात थी. दरअसल, शैंकी ने केन्या की एक लड़की, जिस का नाम रोजमेरी वाजनीरू है, से 7 जुलाई को 12 हजार रुपए नकद और एक मोबाइल फोन लूटा था. रोजमेरी से उस का संपर्क सोशल मीडिया के जरिए हुआ था.

जब वह दिल्ली आई तो शैंकी बहाने से उसे अपनी कार में बैठा कर गाजियाबाद ले गया और हथियार दिखा कर लूट की इस वारदात को अंजाम दिया. दूसरे दिन सुबह रोजमेरी ने सिहानी गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई तो शैंकी पकड़ा गया. वारदात में उस का साथ देने वाला शुभम भी गिरफ्तार किया गया था. वह भी मुरादनगर का रहने वाला है. दोनों से वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार, 11 हजार रुपए नकद और वह कार भी बरामद की गई थी, जिस में बैठा कर रोजमेरी से लूट की गई थी. कुछ दिनों बाद दोनों को अदालत से जमानत मिल गई थी. लेकिन अब खुद जेल में बंद लीलू को जमानत मिल पाएगी, इस में शक है. क्योंकि उस के गुनाहों के आगे तो बेटे का गुनाह कुछ भी नहीं.

बीती 24 सितंबर को लीलू को गाजियाबाद पुलिस ने अपने भतीजे रेशू की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया तो सख्ती से पूछताछ में उस ने खुलासा किया कि उस ने कोई एकदो नहीं बल्कि 20 साल में एकएक कर 5 हत्याएं की हैं. और ये पांचों ही उस के खून के रिश्तेदार हैं. यह सुन कर पुलिस वालों के मुंह तो खुले के खुले रह गए, साथ ही जिस ने भी सुना उस के भी होश उड़ गए कि कैसा कलयुग आ गया है, जिस में जमीन के लालच में एक सगे भाई ने दूसरे सगे बड़े भाई और 2 भतीजियों जो अनीता से शादी के बाद उस की बेटियां हो गई थीं, सहित 2 सगे भतीजों को भी इतनी साजिशाना और शातिराना तरीके से मारा कि किसी को उस पर शक भी नहीं हुआ.

रेशू की हत्या के आरोप में वह कैसे पकड़ा गया, इस से पहले यह जान लेना जरूरी है कि इस के पहले की 4 हत्याएं उस ने कैसे की थीं. इन में से 2 का जिक्र ऊपर किया जा चुका है. अपने बड़े भाई सुधीर की हत्या लीलू ने एक लाख की सुपारी दे कर मेरठ में करवाई थी और लाश को नदी में बहा दिया था. इसलिए अनीता से शादी करने के बाद वह बेफिक्र था कि सुधीर आएगा कहां से, उसे तो मौत की नींद में वह सुला चुका है  यह कातिल कितना खुराफाती है, इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह 20 साल पहले ही अपने गुनाहों की स्क्रिप्ट लिख चुका था और हरेक कत्ल के बाद किसी को शक न होने पर उस के हौसले बढ़ते जा रहे थे.

जब शैंकी पैदा हुआ तो उसे लगा कि सुधीर की जमीन उस की बेटियों के नाम हो जाएगी, लिहाजा पहले उस ने पारुल को खाने में जहर दे कर मारा और फिर पायल की भी हत्या कर उस की लाश को नदी में बहा दिया. इस दौरान जमीनजायदाद का धंधा करने के लिए उस ने अपने हिस्से की जमीन बेच दी और मुरादनगर थाने के सामने एक आलीशान मकान भी बनवा लिया. जब इस निकम्मे और लालची से दलाली का धंधा नहीं चला तो उस की नजर दूसरे भाई ब्रजेश की जमीन पर जा टिकी. उसे लगा कि अगर ब्रजेश और उस के बेटों व पत्नी को भी इसी तरह ठिकाने लगा दिया जाए तो उस की ढाई करोड़ की जमीन भी उस की हो जाएगी.

नेकी तो नहीं बल्कि बदी और पूछपूछ की तर्ज पर उस ने साल 2013 में  ब्रजेश के छोटे बेटे 16 वर्षीय नीशू की भी हत्या कर लाश नदी में बहा दी और अपनी गोलमोल बातों से पुलिस में रिपोर्ट लिखाने से ब्रजेश को रोक लिया था. यह उस के द्वारा की गई चौथी हत्या थी. अब तक उसे समझ आ गया था कि और साल, 2 साल या 4 साल लगेंगे, लेकिन जमीन तो उस की हो ही जाएगी. असल में वह चाहता था कि पूरे कुटुंब की जमीन उस के बेटे शैंकी को मिल जाए, जिस से उसे जिंदगी में मेहनत ही न करनी पड़े जैसे कि उसे नहीं करनी पड़ी थी. जाहिर है रेशू की हत्या के बाद वह ब्रजेश और उन की पत्नी को भी ऊपर पहुंचा देने का मन बना चुका था.

ब्रजेश का बेटा 24 वर्षीय रेशू बीती 8 अगस्त को गायब हो गया था. यह उन के लिए एक और सदमे वाली बात थी. क्योंकि नीशू को गुजरे 8 साल बीत गए थे, अब रेशू ही उन का आखिरी सहारा बचा था जिस की सलामती के लिए वे दिनरात दुआएं मांगा करते थे. लेकिन यह अंदाजा दूसरों की तरह उन्हें भी नहीं था कि परिवार को डसने वाला सांप आस्तीन में ही है. लीलू ने इस बाबत और लोगों को भी अपनी साजिश में शामिल कर लिया था. उस ने योजना के मुताबिक रेशू को फोन कर गांव के बाहर मिलने बुलाया और घूमने चलने के बहाने कार में बैठा लिया. इस आई ट्वेंटी कार में इन दोनों के अलावा विक्रांत, सुरेंद्र त्यागी, राहुल और लीलू का भांजा मुकेश भी मौजूद थे.

चलती कार में ही इन लोगों ने रेशू की हत्या रस्सी और लोहे की जंजीर से गला घोंट कर दी और उसे सीट पर जिंदा लोगों की तरह बिठा कर बुलंदशहर की तरफ चल पड़े. कहीं किसी को शक न हो जाए, इसलिए कुछ दूर जंगल में इन्होंने रेशू की लाश को कार की डिक्की में डाल दिया. असल काम हो चुका था, बस लाश और ठिकाने लगाना बाकी था. इस के लिए मूड बनाने इन लोगों ने बुलंदशहर में विक्रांत के ट्यूबवैल पर जोरदार पार्टी की. जब रात गहराने लगी तो इन वहशियों ने रेशू की लाश को एक बोरे में ठूंसा और पहासू इलाके में ले जा कर गंगनहर में बहा दिया. इस के बाद सभी अपनेअपने रास्ते हो लिए. आरोपियों में से सुरेंद्र त्यागी हापुड़ का रहने वाला है और पुलिस में दरोगा पद से रिटायर हुआ है जबकि राहुल उस का नौकर था.

लीलू ने सुरेंद्र को रेशू की हत्या की सुपारी दी थी, जिस ने बुलंदशहर के आदतन अपराधी विक्रांत को भी इस वारदात में शामिल कर लिया था.  इन दोनों का याराना विक्रांत के एक जुर्म में जेल में बंद रहने के दौरान हुआ था. लीलू ने हत्या के एवज में 4 लाख रुपए नकद दिए थे और बाकी बाद में एक बीघा जमीन बेचने के बाद देने का वादा किया था. रेशू के लापता होने के बाद ब्रजेश ने बेटे को काफी खोजा और फिर थकहार कर 15 अगस्त को मुरादनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी. हालांकि लीलू ने इस बार भी उन्हें यह कह कर रोकने की कोशिश की थी कि पुलिस में रिपोर्ट लिखाने से क्या फायदा होगा. लेकिन फायदा हुआ. 24 सितंबर को वह पकड़ा गया और अपने साथियों सहित जेल में है. लीलू इत्तफाकन पकड़ा गया, नहीं तो पुलिस भी हार मान चुकी थी कि अब रेशू नहीं मिलने वाला.

पुलिस के पास रेशू को ढूंढने का कोई सूत्र नहीं था, सिवाय इस के कि उस के और लीलू के फोन की लोकेशन एक ही जगह की मिल रही थी, जो उसे हत्यारा मानने के लिए पर्याप्त नहीं था. लेकिन इनवैस्टीगेशन के दौरान एक औडियो रिकौर्डिंग पुलिस के हत्थे लग गई, जिस में लीलू रेशू की हत्या का प्लान बाकी चारों में से किसी को बता और समझा रहा था. फिर उस ने 5 हत्याओं की बात कुबूली. हत्याओं में 2-3 साल का गैप वह इसीलिए रखता था कि हल्ला न मचे और लोग पिछली हत्या का दुख भूल जाएं. पुलिस हिरासत में लीलू कभी यह कहता रहा कि उसे उन हत्याओं का कोई मलाल नहीं. तो कभी यह कहता रहा कि सजा भुगतने के बाद वह भाईभाभी की सेवा कर प्रायश्चित करना चाहता है.

हैरानी की बात सिर्फ यह है कि 5 हत्याओं का यह गुनहगार लीलू जेल से छूट जाने की उम्मीद पाले बैठा है. वह शायद इसलिए कि 5 में से एक भी लाश बरामद नहीं कर सकी. लेकिन अब लोगों की मांग है कि ऐसे आस्तीन के सांप का जिंदा रहना ठीक नहीं है, लिहाजा उसे फांसी की सजा मिलनी चहिए. यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह जरूर एक बड़ी कानूनी खामी साबित होगी. Crime Stories

 

देवरानी-जेठानी की शातिर चाल

देवरानी-जेठानी की शातिर चाल – भाग 3

हत्या के लिए दी 2 लाख की सुपारी…

इरफान को एक दिन संगीता घर ले आई. उस ने ससुर कमलेश्वर और पति को बताया कि इरफान पहुंचा हुआ तांत्रिक है. वह सुजीत और अजीत की शराब छुड़वा देगा. शुरू में कमलेश्वर ने इरफान पर विश्वास किया. जब बारबार इरफान तंत्र क्रियाएं करने के बहाने उन के घर आने लगा तो कमलेश्वर और अजीत को बुरा लगने लगा. लेकिन वह इरफान को घर आने से नहीं रोक पाए.

सुजीत की हत्या से 20 दिन पहले भी संगीता ने इरफान को अपने घर बुलाया था. इरफान ने सुजीत की फोटो रख कर तांत्रिक क्रियाएं कीं. अजीत घर में था, उसे संगीता ने बुलाया लेकिन वह तांत्रिक अनुष्ठान में नहीं आया. इरफान ने सुजीत की पैंट सामने रख कर उस पर कुछ फेंका तो वह जलने लगी. इरफान ने विमला को विश्वास दिलाया कि आज के बाद सुजीत शराब को हाथ नहीं लगाएगा.

लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सुजीत पहले की तरह शराब पी कर आता और बातबात पर विमला की पिटाई कर देता. इस से विमला पूरी तरह सुजीत की दुश्मन बन गई. उस ने जेठानी संगीता से कहा कि शराबी पति सुजीत की हत्या कराकर उसे छुटकारा दिलवा दे. वह इस के लिए लाख-2 लाख खर्च कर देगी.

संगीता ने इरफान को सुजीत की हत्या करने के लिए उकसाया तो उस ने 2 लाख रुपए की सुपारी मांगी. संगीता ने स्वीकार कर लिया. वह सुपारी देकर हत्या कराने को तैयार हो गई. विमला ने इरफान को पेशगी के 23 हजार रुपए दे दिए. तीनों ने एक दिन सिर जोड़ कर प्लान बनाया कि सुजीत को कैसे खत्म करना है.

सुजीत का एक दोस्त था नींबू. संगीता ने इरफान को नींबू से दोस्ती कर के सुजीत तक पहुंचने का रास्ता सुझाया. विमला ने अपने पति सुजीत का मोबाइल नंबर इरफान को दे दिया. इरफान ने नींबू से दोस्ती करने के लिए उस के पास आनाजाना शुरू कर दिया. वह नींबू के लिए शराब ले जाता था. धीरेधीरे नींबू ने इरफान की दोस्ती कुबूल कर ली.

22 जनवरी को इरफान ने नींबू से सुजीत को फोन करवाया कि उस का दोस्त आज शराब की दावत दे रहा है. उसे लेने वह घर आ रहा है. सुजीत शराब की दावत होने की बात से खुश हो गया. वह नींबू का इंतजार करने लगा. प्लान के अनुसार इरफान अपने एक साथी रामरतन के साथ उस के पास आ गया. उस ने बताया कि नींबू ने उसे लेने के लिए भेजा है.

“नींबू कहां पर है?’’ सुजीत ने पूछा.

“उसे बोतल खरीदने के लिए ठेके पर भेजा है. चलो, वह हमें ठेके पर मिल जाएगा.’’ रामरतन ने कहा. सुजीत फंस गया जाल में वह इको कार ले कर आए थे. सुजीत उस कार में बैठ गया. कार में पहले से ही पुष्पेंद्र, वतन सिंह और आरिफ बैठे हुए थे. इरफान के इशारे पर कार को वारहपत्थर के एक ढाबे पर ले गए. वहीं पर शराब का ठेका था. नींबू को देखने के बहाने से पुष्पेंद्र का साढ़ू रामरतन ठेके पर गया और 3 बोतल शराब खरीद लाया. उस ने एक बोतल में नशे की 15 गोलियां डाल दीं. ये गोलियां पुष्पेंद्र दातागंज के एक कैमिस्ट से पहले ही खरीद कर ले आया था और रामरतन को दे दी थी.

ढाबे पर आ कर बोतलें खोली गईं. ढाबे से चिकन खरीदा गया. उन्होंने पार्टी शुरू की. रामरतन ने सुजीत को उसी बोतल की शराब पिलाई, जिस में नशे की गोलियां मिलाई गई थीं. जब शराब पी कर सुजीत बेहोश हो गया तो वे लोग उसे कार में बिठा कर फरीदपुर की ओर ले गए. कार में ही बेसुध पड़े सुजीत की गला घोट कर हत्या कर दी गई.रात गहराने लगी थी. उन लोगों ने पचौली फाटक के पास रेलवे लाइन पर सुजीत की लाश को डाल दिया और अपनेअपने घर चले गए.

सुजीत की हाथ कटी लाश 23 जनवरी को थाना जलालाबाद की पुलिस ने बरामद की थी. थाना जलालाबाद में संगीता और विमला ने सुजीत की हत्या इरफान द्वारा करने की बात कुबूल कर ली थी. देवरानी जेठानी से पूछताछ करने के बाद थाने की पुलिस टीम ने हत्यारों की धरपकड़ के लिए उन के घरों पर दबिश दी तो इरफान, रामरतन, वतन सिंह उर्फ विनीत, पुष्पेंद्र उर्फ राहुल, संगीता, विमला को गिरफ्तार कर लिया. सभी पकड़ में आ गए. आरिफ इरफान का भाई है.

संगीता और विमला से मिलने वाले 2 लाख रुपए का लालच दे कर पुष्पेंद्र, वतन सिंह, आरिफ और रामरतन को इरफान ने सुजीत हत्याकांड में शामिल किया था. अब आरिफ को छोड़ कर सभी जेल में पहुंच गए थे. आरिफ की तलाश में पुलिस टीम छापेमारी कर रही थी. कथा लिखी जाने तक वह पकड़ में नहीं आया था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

देवरानी-जेठानी की शातिर चाल – भाग 2

एसएचओ सोलंकी ने उन के कंधे पर सहानुभूति से हाथ रख कर कहा, ‘‘हिम्मत रखिए, आप की दी गई जानकारी से ही हम हत्यारे तक पहुंच कर उसे फांसी के फंदे तक पहुंचा सकते हैं. आप इरफान पर शक जाहिर कर रहे हैं, मुझे उस का पता ठिकाना बताइए.’’

“मैं नहीं जानता साहब, जानता तो अभी तक उसे पकड़ कर सुजीत को लापता करने की वजह पूछ लेता. बड़ी बहू और छोटी बहू ने भी चुप्पी साध रखी है. वही इरफान तक आप को पहुंचा सकती हैं.’’

“ठीक है, मैं संगीता और विमला को थाने बुलवा लेता हूं. देखता हूं कितनी देर तक चुप्पी साध कर रह सकती हैं.’’ एसएचओ सोलंकी ने गंभीरता से कहा और कांस्टेबल सोनवीर, अंकित, अशोक और महिला कांस्टेबल ममता को एसआई चमन सिंह के साथ संगीता और विमला को थाने लाने के लिए भेज दिया. कमलेश्वर सिंह ने उन्हें अपने घर का पता बता दिया था. प्रवीण सोलंकी ने कमलेश्वर सिंह को अपने पास ही रोक लिया था. वह इरफान की उन के घर में घुसपैठ और बहुओं से उस की पहचान के पीछे की कहानी जान लेना चाहते थे.

एक घंटे में ही एसआई चमन सिंह के साथ गई पुलिस टीम कमलेश्वर सिंह की बहुओं संगीता और विमला को थाने ले कर आ गई. वे दोनों काफी डरी हुई लग रही थीं. अपने ससुर को थाने में बैठा देख कर वे दोनों समझ गईं कि ससुर ने उन के विषय में बहुत कुछ बता दिया है. एसएचओ सोलंकी ने दोनों को जलती आंखों से घूर कर देखते हुए कडक़ स्वर में पूछा, ‘‘मुझे मालूम हो गया है कि तुम ने इरफान के साथ साजिश रच कर सुजीत की हत्या करवा दी है.’’

संगीता ने थूक निगला, ‘‘यह झूठ है साहब, जरूर आप को हमारे ससुर ने हमारे खिलाफ उलटा सीधा भडक़ा दिया है.’’

“तुम्हारे ससुर ने अपना बेटा खोया है, तुम दोनों ने क्या खोया? सुजीत 3 दिन से घर नहीं लौटा, तुम दोनों को चिंता नहीं हुई?’’

“चिंता तो बहुत हुई है साहब, लेकिन मैं औरत जात हूं, अपने देवर को कहां जा कर ढूंढती.’’

“क्यों इरफान ने तुम्हें नहीं बताया कि उस ने तुम्हारे देवर सुजीत को पचोली गांव में ले जा कर मार डाला है. इरफान ने तो यह कुबूल कर लिया है कि तुम्हारे कहने पर ही उस ने हत्या की है.’’ थानाप्रभारी सोलंकी ने अंधेरे में तीर चलाया. संगीता के चेहरे का रंग उड़ गया. वह बौखला कर बोली, ‘‘मुझे तो विमला ने सुजीत को रास्ते से हटाने को कहा था साहब. इसी ने ऐसा करने के लिए इरफान को 2 लाख रुपए देना कुबूल किया था.’’

विमला को काटो तो खून नहीं. उस का चेहरा सफेद पड़ गया. वह जेठानी को फाड़ खाने वाली नजरों से देख कर चीख पड़ी, ‘‘तू खुद भी तो चाहती थी कि मेरा पति सुजीत मर जाए. तू अपने पति अजीत को भी इरफान के हाथों खत्म करवाने की फिराक में है, ताकि ससुर की जमीनजायदाद पर ऐश कर सके.’’

“मैं अकेली ऐश करूंगी, तू क्या नहीं करेगी?’’ संगीता भी चीख कर तैश में बोली, ‘‘सुजीत की जगह मैं तुझे मरवा देती तो क्लेश ही खत्म हो जाता.’’

जलालाबाद के सुजीत हत्याकांड का खुलासा अब हो चुका था. एसएचओ सोलंकी और अन्य पुलिस वाले दोनों देवरानीजेठानी द्वारा ही गुनाह कुबूल कर लेने पर मुसकरा रहे थे. उन दोनों को चुप करने के लिए लौकअप में अलगअलग बंद करवा दिया. कमलेश्वर लज्जित सिर झुकाए बैठे थे. दोनों बहुओं ने आज उन के घर की इज्जत को नीलाम कर दिया था. वह सिर उठा कर किसी से बात करने के काबिल नहीं रह गए थे.

लखनऊ जिले के गौसनगर गांव में निवास करता था ठाकुर कमलेश्वर सिंह. उस के पास पुश्तैनी जमीन तो थी ही, वह मैरिज लान का संचालन भी करता था. कमलेश्वर के परिवार में पत्नी के अलावा 3 बेटे अजीत, सुजीत और सुधीर थे. अजीत और सुजीत जवान हो कर पुश्तैनी काम में लग गए तो कमलेश्वर ने रूपापुर (जलालाबाद) के ठाकुर हरपाल सिंह की बेटी संगीता को अजीत के लिए और शाहजहांपुर के गांव लस्करपुर के ठाकुर चंद्रभाल की बेटी विमला को सुजीत के लिए पसंद कर लिया.

संगीता और तांत्रिक के अवैध संबंध ने बिगाड़ा खेल…

वह दोनों बेटों की शादी धूमधाम से कर के लाए तो उन की साख गांव गौसनगर में और ज्यादा बढ़ गई. वह सिर उठा कर गांव में शान से चलने लगे. उन्हें तब नहीं मालूम था कि एक दिन यही दोनों बहुएं उन के मुंह पर ऐसी कालिख पोतेंगी कि वह शरम से पानीपानी हो जाएंगे.

समय का पहिया घूमता रहा. संगीता 2 बेटों की मां बन गई और विमला ने भी 3 बच्चों को जन्म दे कर अपना परिवार पूरा कर लिया. 5-7 साल दोनों के परिवार खुशहाल रहे, लेकिन काम की थकान उतारने के नाम पर जब अजीत और सुजीत ने शराब पीनी शुरू की तो उन के घर में कलह शुरू हो गई. अजीत तो कम पीता था लेकिन सुजीत तो पियक्कड़ था. विमला उस से लड़ती तो ठाकुरों वाला रौब दिखाने के लिए सुजीत विमला को रुई की तरह धुन देता. संगीता पर भी अजीत हाथ छोडऩे लगा था, इस से वह भी दुखी रहने लगी थी.

एक दिन किसी पड़ोसन के कहने पर संगीता अपने पति अजीत और देवर सुजीत को सही राह पर लाने के लिए तथाकथित तांत्रिक इरफान से जा कर मिली. इरफान तंत्रमंत्र विद्या का जानकार था. उस ने दावा किया कि चुटकी बजाते ही उन की परेशानी दूर कर सकता है, ऐसा उस पड़ोसन ने बताया था. कभी उस पड़ोसन ने अपने पियक्कड़ पति को रास्ते पर लाने के लिए इरफान से तांत्रिक अनुष्ठान करवाया था. अनुष्ठान के बाद उस के पति ने पीना छोड़ दी थी.

संगीता अकेली ही जा कर इरफान से मिली और उसे अपनी समस्या बताई तो इरफान ने उसे पति और उस ने देवर का फोटो ले कर दूसरे दिन आने को कह दिया. संगीता दूसरे दिन पति अजीत और देवर सुजीत के फोटो ले कर तांत्रिक इरफान के पास गई तो उस ने अनुष्ठान के बहाने संगीता को हर वीरवार को अपने कार्यालय में बुलाना शुरू कर दिया.

इस बहाने वह संगीता से रुपएपैसे तो ऐंठता ही था, वह संगीता की सुंदरता पर मन ही मन मर मिटा था. 2 बच्चों की मां बन चुकी संगीता 35 वर्ष की हो गई थी, लेकिन अभी उस की जवानी उस पर कायम थी.  जब इरफान उसे अनुष्ठान के नाम पर बहाने से छू लेता था तो संगीता की वासना अंगड़ाई लेने लगती थी. इमरान को शह देने के लिए वह उस से और सट जाती. इस से इरफान की हिम्मत बढ़ गई. एक दिन इरफान ने संगीता को बांहों में भरा तो संगीता ने कोई ऐतराज नहीं किया. फिर क्या था, संगीता के तांत्रिक से अवैध संबंध स्थापित हो गए.

देवरानी-जेठानी की शातिर चाल – भाग 1

23 जनवरी, 2023 की सुबह थाना जलालाबाद के लिए एक बुरी खबर ले कर आई. बरेली राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) की ओर से थाने में किसी ने फोन किया कि दिल्लीलखनऊ रेलवे ट्रैक के फरीदपुर स्टेशन के करीब पडऩे वाले पचोली गांव के फाटक के पास एक व्यक्ति का हाथ कटा शव पड़ा है. शायद वह किसी ट्रेन की चपेट में आ गया है.

थाना जलालाबाद उत्तर प्रदेश के जिला शाहजहांपुर में पड़ता है, इसलिए सूचना मिलते ही वहां के एसएचओ प्रवीण सोलंकी अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. फाटक पचोली के करीब रेलवे लाइन की दाईं ओर एक व्यक्ति का शव पड़ा हुआ था. उस से कुछ दूरी पर उस का कटा हुआ हाथ भी पड़ा दिखाई दे रहा था. शव के पास फैला खून जम कर काला पड़ चुका था, इसी से एसएचओ ने अनुमान लगाया कि उस व्यक्ति की मौत करीब 7-8 घंटे पहले हुई है.

चूंकि रात को इधर कोई आया नहीं होगा, इस कारण यहां शव पड़े होने की जानकारी रात को नहीं मिल सकी. सुबह बरेली जीआरपी की गश्त करने वाली टीम इधर से गुजरी, तब यहां शव पड़े होने की जानकारी थाने में दी गई. एसएचओ सोलंकी ने शव का मुआयना किया. वह 34-35 वर्ष की उम्र का था, उस ने पैंट पहनी हुई थी. शव की जेबें टटोली गईं तो जेबों में से ऐसा कोई सामान नहीं मिला जिस से उस की पहचान हो सके. पैंटशर्ट पर किसी टेलर का लेबल भी नहीं था.

अब तक हलकी धूप निकल आई थी और पचोली गांव के लोग दिशामैदान के लिए रेलवे ट्रैक की तरफ आने लगे थे. जैसे ही उन्हें रेलवे लाइनों में किसी व्यक्ति की लाश मिलने की जानकारी हुई, वे वहां एकत्र होने लगे. खबर गांव में पहुंची तो पूरा गांव ही वहां उमड़ आया. इन में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी थे. सभी की नजरें उस व्यक्ति के शव पर थीं. पुलिस ने उन से रेलवे लाइनों में पड़ी लाश को पहचानने के लिए कहा, लेकिन किसी ने भी उस व्यक्ति को नहीं पहचाना.

किसी भी तरीके से उस व्यक्ति की शिनाख्त न होने से एसएचओ प्रवीण सोलंकी ने आवश्यक काररवाई निपटा कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. जलालाबाद थाने के एसएचओ प्रवीण सोलंकी के लिए सब से पहले उस व्यक्ति की शिनाख्त होनी जरूरी थी. उन्हें विश्वासथा कि कोई न कोई इस व्यक्ति की गुमशुदगी के लिए जरूर आएगा. अपनी ओर से सोलंकी ने आसपास के थानों में उस व्यक्ति के शव का फोटो वाट्सऐप से भेज कर उस की गुमशुदगी दर्ज होने के बारे में पूछा तो पता चला कि उन के यहां उस हुलिए के शख्स की गुमशुदगी दर्ज नहीं थी.

2 दिन बीत गए. प्रवीण सोलंकी उस वक्त ज्यादा परेशान हो गए, जब उन की मेज पर उस व्यक्ति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पहुंची. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया कि उस की हत्या गला दबा कर की गई थी. हत्या करने से पहले उसे शराब में नशे की गोलियां भी मिला कर दी गई थीं. एसएचओ अभी तक यही मान कर चल रहे थे कि वह व्यक्ति नशे में रेलवे ट्रैक पर आ गया था, किसी ट्रेन की चपेट में वह आया तो हाथ कट गया, वह बेहोश हो गया. अधिक खून बहा जिस से उस की मौत हो गई. लेकिन उस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से कहानी दूसरी ही सामने आई.

यह दुर्घटना नहीं, हत्या की सोचीसमझी साजिश थी. रात के अंधेरे में हत्यारा यह नहीं देख पाया कि उस ने उसे ट्रैक पर डाला है या साइड में. साइड में लाश होने की वजह से उस का एक हाथ ही कटा, पूरा शरीर नहीं. पुलिस ने अज्ञात हत्यारे के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 और 120बी के तहत मामला दर्ज कर लिया.

एसपी (ग्रामीण) एस. आनंद ने इस मामले के खुलासे के लिए अपर पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार वाजपेयी के निर्देशन में थाना जलालाबाद के एसएचओ प्रवीण सोलंकी को यह केस हल करने के लिए नियुक्त कर दिया. उन के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी गई, जिस में इंसपेक्टर चमन सिंह, खालिक खान, कांस्टेबल अंकित, सोनवीर, आशीष, विपिन कुमार, दीपेंद्र और सुमित कुमार को शामिल किया गया.

लाश की हो गई शिनाख्त…

2 दिन बीत गए, लेकिन उस अज्ञात लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी थी. जब तक उस की शिनाख्त नहीं होती, जांच आगे नहीं बढ़ सकती थी. एसएचओ ने उस व्यक्ति की लाश के फोटो आसपास के गांव के आनेजाने वाले रास्तों पर चिपकवा दिए थे. उन की यह युक्ति काम कर गई. तीसरे दिन ही सुबह मोहल्ला गोसनगर निवासी कमलेश्वर सिंह ठाकुर अपने बेटे की तलाश में थाना जलालाबाद आ गए. वह काफी घबराए हुए थे.

एसएचओ के सामने आते ही कमलेश्वर सिंह रो देने वाले स्वर में बोले, ‘‘साहब, मैं लाश का फोटो देख कर यहां दौड़ा चला आया हूं. साहब, मेरा बेटा सुजीत 22 जनवरी, 2023 से लापता है. जो पोस्टर में लाश की फोटो लगाई गई है, वह मेरे बेटे सुजीत से मिलती है.’’

“हम ने लाश को मोर्चरी में रखवा रखा है, आप पहले लाश देख लीजिए. कई बार फोटो देख कर आंखें धोखा भी खा जाती हैं.’’ एसएचओ सोलंकी ने कहा और कमलेश्वर सिंह को कांस्टेबल अंकित के साथ मोर्चरी भेज दिया.  मोर्चरी में जो लाश रखी गई थी, कमलेश्वर सिंह ने उस की पुष्टि अपने बेटे सुजीत के रूप में कर ली. लाश देख कर कमलेश्वर रोने लगे. सांत्वना देने के बाद कांस्टेबल अंकित उन्हें वापस थाने में ले आया. लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद एसएचओ ने चैन की सांस ली. कमलेश्वर उस समय भी रो रहे थे.

बहू पर जताया हत्या का शक…

एसएचओ सोलंकी ने उन्हें पानी पीने को दिया. जब वह पानी पी चुके तो एसएचओ ने गंभीर स्वर में कहा, ‘‘मुझे आप के बेटे सुजीत की मौत का गहरा दुख है. उस की लाश हमें फरीदपुर के गांव पचोली के फाटक के पास रेलवे लाइन पर मिली थी.

क्या आप बताएंगे, सुजीत वहां क्या करने गया था?’’

कमलेश्वर सुन कर रुआंसे स्वर में बोले, ‘‘मेरे बेटे का पचोली गांव से कोई संबंध नहीं था साहब. हत्यारों ने उसे मार कर वहां रेलवे लाइन पर फेंका होगा.’’

“मुझे भी ऐसा ही शक है.’’ सोलंकी सिर हिला कर बोले.

“क्या आप को किसी पर शक है?’’

“हां साहब, मुझे इरफान और अपनी दोनों बहुओं पर शक है. मेरी छोटी बहू विमला अपने पति सुजीत को पसंद नहीं करती थी. तांत्रिक इरफान मेरी बड़ी बहू संगीता से अच्छी तरह परिचित है. वह तंत्रमंत्र जानता है. बड़ी बहू संगीता ने उसे कई बार घर बुला कर अपने पति अजीत और देवर सुजीत को वश में करने के लिए इरफान से तांत्रिक क्रियाएं करवाई थीं. 22 जनवरी, 2023 को इरफान के बुलाने पर ही सुजीत घर से गया था, वह वापस नहीं लौटा. लौटा है तो लाश के रूप में.’’ कह कर कमलेश्वर सुबकने लगे.