बस एक बेटा चाहिए – भाग 3
संविधा के दिलोदिमाग में शंकरी और उसकी बेटियां ही छाई थीं. वह भी एक औरत थी, इसलिए उस ने प्रार्थना की कि काश! गमों का सिलसिला खत्म हो जाए और शंकरी की इच्छा पूरी हो जाए.
More posts
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें